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गढ़वा जिला मे अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की रोकथाम हेतु जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न, दिए गये आवश्यक निर्देश।

गढ़वा :- गढ़वा जिला मुख्यालय मे गढ़वा जिला दण्डाधिकारी -सह- उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की रोकथाम हेतु गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में अवैध खनन, उसके परिवहन तथा भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण हेतु अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई एवं आगे की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

वही उपायुक्त मिश्रा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले में अवैध खनन पर कड़ाई से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि एनजीटी द्वारा 15 अक्टूबर 2026 तक खनन कार्यों पर रोक है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध बीएनएसएस की संबंधित धाराओं, भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 तथा एनजीटी के निर्देशों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन में प्रयुक्त वाहनों की जब्ती, प्राथमिकी दर्ज करने तथा दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

वही इसके लिए नियमित रूप से संयुक्त छापामारी दल सक्रिय रहेंगे। साथ ही अवैध खनन से संबंधित शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सख्त कदम उठाने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जिले में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा एवं दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वही जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय समुदायों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें। किसी भी प्रकार की अवैध बालू खनन अथवा परिवहन की सूचना तत्काल प्रशासन अथवा निकटतम थाना को उपलब्ध कराएं, ताकि समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

वही उक्त बैठक में मौके पर पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर, दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम, अपर समाहर्ता विकास कुमार राय, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) यशोधरा जिला, परिवहन पदाधिकारी गोपी उरांव, अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा कुमार मयंक भूषण, जिला खनन पदाधिकारी राजेंद्र उरांव सहित अन्य संबंधित उपस्थित थें, जबकि अन्य सभी अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी गढ़वा जिला, जिले के विभिन्न थानों के थाना प्रभारी आदि वर्चुअल रूप से ऑनलाइन उपस्थित थें।

झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को दी राहत, सरकार के फ़ैसले लगाई रोक

झारखंड सरकार के विशेष मंत्रिमंडल द्वारा जारी जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। हेमंत सरकार ने अपने एक फैसले में 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। सरकार के इस फैसले से सफल अभ्यर्थियों के बीच हड़कंप मच गया था। सरकार की ओर से परीक्षाओं को रद करने के फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की गई थी।

हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी, फूड सेफ्टी ऑफिसर के साथ-साथ सीडीपीओ की नियुक्ति को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद रोक लगा दी है। जेपीएससी से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इससे पहले सरकार को काउंटर एफिडेविट फाइल करना है।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुमार हर्ष और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पूरी जानकारी देते हुए बताया कि जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा रद की गई थी, उन्हें अब एक शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करना होगा। इसमें सफल अभ्यर्थियों को यह बताना होगा कि यदि भविष्य में जांच होती है और किसी भी प्रकार की संलिप्तता सामने आती है, तो वे उससे संबंधित आदेश को स्वीकार करने के लिए बाध्य होंगे।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का पाकुड़ एवं लिट्टीपाड़ा के सीमावर्ती मतदान केंद्रों का निरीक्षण

पाकुड़। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने बुधवार को पाकुड़ जिले के पाकुड़ एवं लिट्टीपाड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के सीमावर्ती इलाकों में स्थित विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मतदान केंद्रों पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली तथा स्थानीय ग्रामीणों से संवाद कर मतदाता सूची में दर्ज विवरणों एवं बीएलओ द्वारा किए जा रहे घर-घर सत्यापन के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों एवं बीएलओ को निर्देश दिया कि घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी गंभीरता एवं सावधानी से की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि यथासंभव एक परिवार के सभी मतदाता एक ही मतदान केंद्र पर सूचीबद्ध हों तथा कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर सत्यापन अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्धारित प्रक्रिया एवं भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

श्री के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों से विशेष गहन पुनरीक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के माध्यम से तैयार मतदाता सूची को परमानेंट डॉक्यूमेंट के रूप में संरक्षित किया जाएगा। मतदाता सूची में दर्ज प्रमाणित एवं सही विवरण भविष्य में मतदाता तथा उसके परिवार के लिए महत्वपूर्ण अभिलेख के रूप में उपयोगी होगा। इसलिए प्रत्येक मतदाता अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों के विवरण की जांच अवश्य करें और किसी प्रकार के सुधार, नाम जोड़ने अथवा अन्य आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रपत्र एवं आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के प्रावधानों के अनुरूप केवल भारतीय नागरिक ही निर्वाचक के रूप में पंजीकृत होने के पात्र हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए-2 तथा आम नागरिकों से अपील की कि यदि उनके संज्ञान में किसी विदेशी नागरिक द्वारा मतदाता सूची में शामिल होने का प्रयास करने अथवा ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी विदेशी नागरिक का नाम दर्ज होने का मामला आता है, तो निर्धारित फॉर्म-7 के माध्यम से अपनी आपत्ति अवश्य दर्ज कराएं। प्राप्त आपत्ति पर संबंधित ईआरओ/एईआरओ द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों एवं तथ्यों की जांच करते हुए नियमानुसार आदेश पारित किया जाएगा।

श्री के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में पंजीकरण कराने में किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी परिवार में विवाह अथवा किसी अन्य कारण से कोई विदेशी नागरिक निवास कर रहा है, तो मतदाता के रूप में पंजीकरण की पात्रता के लिए उसे पहले विधि के अनुसार भारतीय नागरिकता प्राप्त करनी होगी। भारतीय नागरिकता प्राप्त किए बिना मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए गलत घोषणा अथवा मिथ्या विवरण के आधार पर आवेदन करना कानून के तहत दंडनीय हो सकता है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का मूल उद्देश्य शुद्ध, त्रुटिरहित एवं समावेशी मतदाता सूची तैयार करना है। इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों, बीएलओ, राजनीतिक दलों एवं नागरिकों से इस प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती मेघा भारद्वाज सहित लिट्टीपाड़ा एवं पाकुड़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के ईआरओ एईआरओ अतिरिक्त एईआरओ उप निर्वाचन पदाधिकारी सहित जिला निर्वाचन कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

भाजपा के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अमित शाह से की मुलाक़ात, मिला मार्गदर्शन

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में झारखंड भाजपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान झारखंड के कई सम-सामयिक विषयों पर गृह मंत्री से सार्थक चर्चा हुई। गृह मंत्री द्वारा भाजपा नेताओं को कई आवश्यक निर्देश और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय, दीपक प्रकाश और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल थे।

UPSC सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 2026: रांची के परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में 5 दिन धारा 163 लागू

संघ लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली द्वारा आयोजित सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा, 2026 कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची, श्री राकेश रंजन के संयुक्तादेश

द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा में संलग्न छात्र, उनके अभिभावक अथवा असामाजिक तत्व परीक्षा केन्द्रों पर भीड लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया :-

(1) पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

(2) किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

(3) किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर) ।

(4) किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)

(5) किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक-21.08.2026, 22.08.2026, 23.08.2026, 29.08.2026 एवं 30.08.2026 के प्रातः 06.00 बजे से अपराह्न 08.30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

झारखंड में छात्रों का आंदोलन खत्म, सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम, जांच नहीं होने पर फिर होगा जुटान

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झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। सरकार की ओर से छात्रों की लगभग सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 25 जुलाई से जारी आंदोलन खत्म हो गया।

सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। इससे एक दिन पहले सोमवार देर शाम देवेंद्रनाथ गुट ने भी अपना आंदोलन खत्म कर दिया था। अब छात्रों ने राज्य सरकार को मामले की उच्चस्तरीय जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। मंच ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हुई, तो छात्र फिर बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और इस बार सीबीआई जांच उनकी मुख्य मांग होगी।

जांच पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल खत्म करने का फैसला लिया गया। छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं, इसलिए उसे मामले की जांच पूरी करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि सरकार को दो महीने के भीतर जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो मंच दोबारा बड़ी संख्या में छात्रों को एकजुट करेगा और राजधानी रांची में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उस समय सीबीआई जांच की मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा होगी।

25 जुलाई से धरने पर बैठे थे छात्र

बता दें कि छात्र पिछले 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा था। लगातार कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला और सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।

कश्मीर पहुंच रहे भारत में अमेरिकी राजदूत, सीएम उमर अब्दुल्ला से होगी मुलाकात, जानें क्यों अहम है यह दौरा?

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भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर आज (बुधवार, 19 अगस्त) को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पहुंचेंगे। वह इस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुला से मिलेंगे। गुरुवार को वह लद्दाख का भी दौरा करेंगे। पदभार संभालने के बाद उनका यह पहला कश्मीर का पहला दौरा है।

उपराज्यपाल और सीएम से होगी मुलाकात

जनवरी में भारत में 27वें अमेरिकी राजदूत के तौर पर औपचारिक रूप से पद संभालने के बाद कश्मीर घाटी का यह सर्जियो गोर का पहला दौरा होगा। वे दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत के तौर पर भी काम करते हैं। गोर के 19 अगस्त की दोपहर को पहुंचने का कार्यक्रम है, जिसके बाद वे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलेंगे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात करेंगे। जिस होटल में वे रात भर रुकेंगे, वहां भी उनकी कुछ बैठकें तय हैं। उन्होंने कहा कि उनके 20 अगस्त को लद्दाख के लिए रवाना होने की संभावना है।

अहम है सर्जियो गोर का दौरा

सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का दौरा कूटनीतिक और रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण और इस क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के बाद यह किसी अमेरिकी राजदूत का पहला सीधा दौरा है। जनवरी 2026 में अमेरिका के 27वें राजदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सर्जियो गोर की यह पहली कश्मीर और लद्दाख यात्रा है। इसके जरिए अमेरिका यह संकेत दे रहा है कि वह दक्षिण एशिया के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक दिलचस्पी और निरंतरता बनाए हुए है।

पहले भी कई अमेरिकी राजदूतों ने किया है कश्मीर का दौरा

यह पहली बार नहीं है जब कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर का दौरा कर रहा हो। सर्जियो गोर से पहले कई अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा किया है। कश्मीर में अमेरिकी राजदूत का पिछला दौरा जनवरी 2020 में हुआ था, जब तत्कालीन राजदूत विदेशी दूतों के 15 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इस प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने के बाद जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए श्रीनगर लाई थी। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों, नागरिक समाज के सदस्यों और सेना के अधिकारियों से बातचीत की थी।

कश्मीर के मसले पर रही है अमेरिका की नजर

1990 के दशक में कश्मीर पर पूरी दुनिया की नजर थी। उस वक्त अमेरिका की नीति कश्मीर के मसले को सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की थी। लेकिन, भारत कभी भी इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसी क्रम में अमेरिकी राजदूत फ्रैंक विजनर ने 1995 में कश्मीर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां के राजनेताओं के साथ-साथ अलगाववादियों और छात्रों-पत्रकारों तक से मुलाकात की। इसका संकेत था कि अमेरिका कश्मीर मसले को सुलझाने को उत्सुक है। इसके बाद कई मौकों पर अमेरिका कश्मीर से जुड़े हर मौके पर भारत-पाकिस्तान के बीच परोक्ष तौर पर एक मध्यस्थ के रूप में खड़ा होते रहा।

जाति जनगणना में OBC का कॉलम नहीं होने पर भड़के राहुल गांधी, पूछा-Gen-Z की राह पर OBC निकल पड़े तो?

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जनगणना 2027 को लेकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार कांग्रेस के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने एक गहरी साजिश के तहत जाति जनगणना से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी को जान-बूझकर हटा दिया है। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं रखे जाने को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। जेन जी आंदोलन का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तरह ओबीसी समाज उठ गया तो?

ओबीसी कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार पहले जाति जनगणना नहीं कराना चाहती थी और जब हम उसकी मांग कर रहे थे, मांग करने वाले लोगों को पीएम मोदी ने अर्बन नक्सल बताया था। बाद में ओबीसी की संख्या और प्रेशर में सरकार मानी तो सही, लेकिन जाति जनगणना को वो सही तरीके से नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसे एससी (SC) और एसटी (ST) का कॉलम रखा है, वैसे ओबीसी (OBC) का नहीं रखा है।

ओबीसी कॉलम को लेकर आंदोलन की चेतावनी

राहुल ने ओबीसी विभाग के नेताओं को निर्देश दिए कि अपने इलाकों में लोगों को जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं होने को लेकर जागरूक करें। राहुल बोले कुछ दिनों पहले छात्रों के आंदोलन में लोग सड़कों पर आए और सरकार को झुकना पड़ा। ओबीसी समाज की आबादी पचास फीसदी से ज्यादा है। अगर वो सड़क पर आ गए तो मोदी सरकार को झुकना ही पड़ेगा। 

पहली बार जाति जनगणना

पिछले साल मोदी सरकार ने आजाद भारत में पहली बार जाति जनगणना करवाने का फैसला किया था। जनगणना के पहले चरण में मकानों की गिनती का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के लिए चालीस सवालों की सूची पी पिछले हफ्ते जारी की गई थी। इस सूची में एससी, एसटी की तरह ओबीसी के लिए अलग से कोई श्रेणी नहीं है बल्कि जाति बताने का विकल्प दिया गया है। देश के पहाड़ी राज्यों में जनगणना का दूसरा चरण एक सितंबर से शुरू होगा। महीने भर चलने वाली यह प्रक्रिया देश के बाकी हिस्सों में एक फरवरी से शुरू होगी।

झारखंड की 44 परीक्षाएं रद्द, गड़बड़ी की शिकायतों के बाद हेमंत सोरेन सरकार का बड़ी फैसला

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झारखंड सरकार ने प्रतियोगिता परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बड़ा फैसला किया है। हेमंत सोरेन की सरकार ने मंगलवार को अनियमितताओं के आरोप में 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। उन 44 भर्ती परीक्षाओं की लिस्ट जारी कर ही है, जिन्हें अनियमितताओं की वजह से रद्द किया गया है। झारखंड सरकार ने देर रात आठ अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए। इन नोटिफिकेशन में रद्द की गई परीक्षाओं की जानकारी है, जो 2014 से झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएसस) और आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) ने आयोजित की थीं।

इन परीक्षाओं को किया गया रद्द

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच इन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया गया है। मंगलवार रात जारी आठ अधिसूचनाओं में 2014 से जेपीएससी और आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित परीक्षाएं शामिल हैं। झारखंड सरकार द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, अतिरिक्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। वहीं अन्य प्रभावित परीक्षाओं में सरकारी पॉलीटेक्निक के लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और कई प्रशासनिक व तकनीकी पदों की परीक्षाएं भी शामिल हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करेगी सरकार

सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं में कहा गया है कि जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से त्वरित न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

सुधार समिति का गठन

वहीं, सरकार ने जेपीएससी-जेएसएससी की व्यवस्था में सुधार के लिए एक समिति का भी गठन किया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति आयोग और भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों को लेकर अपनी रिपोर्ट दो महीने के भीतर सरकार को सौंपेगी। इसके अलावा जेपीएससी-जेएसएससी में एक आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ गठित करने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों पर नजर रखी जा सके।

हेमंत सरकार ने कैबिनेट में बैठकर छात्रों को ठगने की बनाई पूरी प्लानिंग, सीबीआई जांच बिना न्याय अधूरा : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्र आंदोलन के संदर्भ में झारखंड सरकार के द्वारा लिए गए फैसले की मंशा एवं सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों को ठगने के लिए हेमंत सोरेन ने सोची-समझी साजिश के तहत कल कैबिनेट में परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार ने कैबिनेट में बैठकर मंत्रियों के साथ मिलकर छात्रों को ठगने की पूरी प्लानिंग बनाई है। बच्चों की एक ही मांग सीबीआई जांच की रही है। आखिर सरकार इससे क्यों भाग रही है ? इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि इस गड़बड़ी में, जेपीएससी, जेएसएससी की नौकरियों को बेचने में सरकार में बैठे लोग भी शामिल हैं। सीबीआई जांच के बिना छात्रों को पूरा न्याय नहीं मिल सकता है। श्री मरांडी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। इस दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मौजूद थे।

श्री मरांडी ने कहा कि राहुल गांधी सरकार में पार्टनर हैं, इसलिए वे चुप हैं। ईमानदारी से छात्रों के हित का मुद्दा इसलिए वे नहीं उठा पा रहे हैं। छात्र हित के नाम पर वे केवल दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा है कि अध्यक्ष बनने के लिए 70 करोड़ रूपया देना पड़ता है। अब हेमंत सोरेन खुद तो इतना पैसा डकारेंगे नहीं, निश्चित रूप से कुछ हिस्सा राहुल गांधी तक भी पहुंचता ही होगा।

श्री मरांडी ने कहा कि टीडीपीएल कंपनी द्वारा ली गई सारी परीक्षा एवं जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला कर हेमंत सरकार अपनी पीठ खुद थपथपा रही है। सरकार चाहती है कि उसके दोनों हाथ में लड्डू हो। एक तरफ सरकार कहेगी कि उन्होंने तो परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी। अब गलत ढंग से चयनित छात्र न्यायालय जाएंगे। न्यायालय सरकार और CID से सबूत मांगेगा।

कोर्ट में वही सीआईडी तथ्यों को प्रस्तुत करेगी, जो पिछली बार अपनी झूठी जांच रिपोर्ट से कोर्ट को दिग्भ्रमित कर चुकी है। सरकार की एजेंसी सरकार को बचाने में ही लगी है। नेपाल में, बंगाल में, झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में प्रश्न पत्रों को रटवाया गया है, आखिर बच्चे इसे कैसे साबित करेंगे। नतीजा यह होगा कि सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर न्यायालय से स्टे लग सकता है। अब जिन लोगों ने पैसा देकर नौकरियां खरीदी है, वे भी खुश हो जाएंगे और सरकार को भी कोर्ट का फैसला होने का बहाना मिल जाएगा। इस प्रकार कुल मिलाकर जो बच्चे पिछले 24 दिनों से आंदोलनरत थे, उनके हिस्से केवल धोखा के सिवाय कुछ नहीं आने वाला है।

श्री मरांडी ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस सरकार की मंशा यहां के छात्र, युवा समझ चुके हैं। यह सरकार केवल जनता को गुमराह कर रही है। यह सरकार झारखंड की जनता को, बच्चों को दिगभ्रमित कर रही है। हम प्रारंभ से ही कह रहे हैं कि एग्जाम रद्द करना समस्या का समाधान नहीं है। समस्या का समाधान है केवल और केवल सीबीआई जांच। हेमंत सरकार में जेपीएससी, जेएसएससी के सारे एग्जाम में गड़बड़ियां हुई हैं, नौकरियों को बेचा गया है। प्रतिदिन इस संदर्भ में सनसनीखेज खुलासे भी हो रहे हैं। हमारी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से हो, तभी न्याय पूरा होगा।

श्री मरांडी ने कहा कि आज तक जेएसएससी के चेयरपर्सन के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ये 2024 से ही पद पर हैं, इसी बीच में सारी गड़बड़ियां हुई है। इसी प्रकार सीआईडी के जिन अफसरों ने जांच की पूरी दिशा ही बदल दी, उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे बिल्कुल साफ है कि हेमंत सरकार खुद की सरकार को बचाना चाहती है, इस दौरान जॉब में जो खरीद फरोख्त हुआ है उन दलालों को, भ्रष्ट्र अफसर को भी सरकार बचाना और बच्चों को ठगना चाहती है। इसलिए इधर-उधर की बातें छोड़ राज्य सरकार को तत्काल सारे मामलों की जांच सीबीआई को सुपुर्द कर देनी चाहिए। बच्चों को इससे कम पर न्याय नहीं मिलेगा। सीबीआई जांच होने से ही इसमें गड़बड़ी करने वाले, जिन लोगों ने पैसे के बल पर नौकरियां हासिल की है, इसमें संलिप्त सभी सफेदपोश का चेहरा बेनकाब हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि छात्र सजग रहें और अपनी CBI जांच की मांग पर अडिग रहें। पूरा देश देख रहा है कि झारखंड के छात्रों के साथ सरकार द्वारा किस तरह की साजिश की जा रही है। भाजपा छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। जब तक CBI जांच का आदेश नहीं होता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।