चातुर्मास, आत्मिक एवं आध्यात्मिक उत्थान का स्वर्णिम अवसर
– डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार
चातुर्मास केवल चार महीनों की अवधि नहीं, बल्कि आत्म-जागरण, आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अनुपम अवसर है। यह स्वयं भी एक महापर्व है और अनेक पावन पर्वों का समवाय भी। भारतीय संस्कृति और जैन दर्शन में इन चार महीनों का अत्यंत विशेष महत्व है, क्योंकि यही वह समय है जब मनुष्य बाहरी संसार से कुछ विराम लेकर अपने अंतर्मन की यात्रा करता है।
चातुर्मास का प्रारंभ आषाढ़ पूर्णिमा से माना जाता है। यह महर्षि वेदव्यास सहित अनेक महान ऋषियों की जन्मतिथि है तथा इसी दिन गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व भी मनाया जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान एकादशी) पर जागृत होते हैं। इसी कारण इन चार महीनों में विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। इसका गूढ़ संदेश यह है कि यह समय बाहरी उत्सवों का नहीं, बल्कि आत्मोत्सव का है।
जैन परंपरा में भी चातुर्मास का महत्व अत्यंत विशिष्ट है। पर्युषण महापर्व, संवत्सरी तथा क्षमायाचना जैसे महान पर्व इन्हीं चार महीनों में आते हैं। यदि जीवन में ये चार महीने ही न हों, तो आत्मा अपने दोषों का परिमार्जन कैसे करेगी? आत्मा को ऊँचाइयों के शिखर तक पहुँचाने के लिए चातुर्मास एक आध्यात्मिक प्रशिक्षण काल है।
वर्ष भर हम भौतिक सुख-सुविधाओं, व्यवसाय, परिवार और सांसारिक व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं, किंतु चातुर्मास हमें स्वयं के भीतर झाँकने का अवसर देता है। यह आत्मा को माँजने, तपाने और सोने से कुंदन बनाने का समय है।
यदि बारह महीनों में से ये चार महीने निकाल दिए जाएँ, तो जीवन का आध्यात्मिक पक्ष लगभग शून्य हो जाएगा। जैसे किसान वर्षा ऋतु में खेत में बीज बोता है और वही बीज आगे चलकर पूरे वर्ष के जीवन का आधार बनता है, उसी प्रकार चातुर्मास में किए गए तप, स्वाध्याय, संयम, ध्यान और सदाचार के संस्कार पूरे जीवन को प्रकाशित करते हैं। यह आत्मा की भूमि में धर्म के बीज बोने का श्रेष्ठ समय है। इन्हीं संस्कारों से जीवन में शांति, संतोष, समता, करुणा और आत्मिक आनंद का अमूल्य फल प्राप्त होता है।
वर्षा ऋतु में असंख्य सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति होती है। ऐसे समय में विहार करने से अनजाने में भी जीव हिंसा हो सकती है। इसलिए अहिंसा के परम उपासक जैन साधु-साध्वियाँ अपने शिष्यों सहित एक ही स्थान पर वर्षायोग की स्थापना कर चातुर्मास व्यतीत करते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाला यह वर्षावास केवल उनकी साधना का समय नहीं, बल्कि समाज को धर्म, संयम और सदाचार की प्रेरणा देने का भी अवसर है।
केवल जैन धर्म ही नहीं, भारत की अनेक आध्यात्मिक परंपराओं में भी वर्षावास का विशेष महत्व है। संत-महात्मा इन महीनों में एक स्थान पर रहकर साधना, उपासना, जीवदया, सेवा, करुणा, व्रत, उपवास और लोककल्याण के कार्य करते हैं तथा समाज को धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
साधु का स्वभाव तो सदैव प्रवाहित नदी की निर्मल धारा के समान होता है—चलते रहना, बहते रहना। किंतु जन-जन में धर्मभाव जागृत हो, आत्मा का कल्याण हो और समाज सद्मार्ग पर अग्रसर हो, इसलिए वे चार महीने एक स्थान पर विराजते हैं। उनका सान्निध्य, प्रवचन और मार्गदर्शन ही समाज की आध्यात्मिक शक्ति है।
चातुर्मास गृहस्थों के लिए भी एक संदेश है कि जहाँ तक संभव हो अनावश्यक यात्राओं से बचें, एक स्थान पर रहकर अधिकाधिक स्वाध्याय, साधना, धर्माराधना, ध्यान और आत्मचिंतन में समय लगाएँ तथा जीवदया का विशेष ध्यान रखें। यह समय बाहरी व्यस्तताओं से विराम लेकर अंतर्मन की यात्रा करने और जीवन में संयम को उतारने का श्रेष्ठ अवसर है।
जैन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा भगवान नेमिनाथ के समक्ष यह संकल्प लेने का उल्लेख मिलता है कि वे चातुर्मास के चार महीने द्वारका में रहकर धर्मध्यान करेंगे। इसी प्रकार गुजरात के महान धर्मनिष्ठ राजा कुमारपाल ने अपने गुरु आचार्य श्री हेमचंद्राचार्य के समक्ष प्रतिज्ञा की थी कि चाहे युद्ध जैसी विकट परिस्थिति ही क्यों न आ जाए, वे चातुर्मास में पाटण नहीं छोड़ेंगे। उनके राज्य में जीवदया की ऐसी भावना थी कि पशुओं तक को छाना हुआ जल पिलाया जाता था। यह केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि प्रत्येक प्राणी के प्रति करुणा, अहिंसा और संवेदनशील जीवन-दृष्टि का जीवंत उदाहरण था।
जैन आगमों में चातुर्मास के दौरान श्रावक-श्राविकाओं के लिए नौ प्रकार के शुद्ध आचरण बताए गए हैं—
• सामायिक एवं प्रतिक्रमण
• आवश्यक क्रियाएँ
• पौषध
• देवपूजन
• स्नात्र पूजा
• ब्रह्मचर्य पालन
• धर्मक्रिया
• दान
• तप
ये नौ शुद्ध आचरण चातुर्मास के वास्तविक आभूषण हैं। इनका पालन आत्मा को निर्मल बनाता है और जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाइयों की ओर ले जाता है।
चातुर्मास हमें यह भी स्मरण कराता है कि धर्म केवल मंदिर, उपाश्रय या पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक व्यवहार में उतरना चाहिए। जब संयम, करुणा, क्षमा, अहिंसा और सदाचार हमारे आचरण का अंग बन जाते हैं, तभी चातुर्मास की वास्तविक साधना सार्थक होती है।
चातुर्मास क्यों?
• आत्मा से परमात्मा की ओर बढ़ने के लिए।
• अहं से अर्ह की ओर अग्रसर होने के लिए।
• आसक्ति से अनासक्ति की यात्रा के लिए।
• हिंसा से अहिंसा की ओर बढ़ने के लिए।
• उपासना, स्वाध्याय, आराधना, तप, जप और ध्यान के लिए।
• सम्यग्दर्शन एवं धर्म-जागरण के लिए।
• संतों के सान्निध्य से जीवन को दिशा देने के लिए।
• आत्मशुद्धि एवं आत्मोत्थान के लिए।
• प्रत्येक क्षण का सदुपयोग कर प्रमादरहित जीवन जीने के लिए।
• संयम, करुणा, क्षमा और जीवदया को जीवन में उतारने के लिए।
वास्तव में चातुर्मास केवल चार महीने नहीं, बल्कि आत्मा का वसंत है। यही वह काल है जिसमें मनुष्य अपने भीतर छिपे दिव्य स्वरूप को पहचान सकता है। आइए, इस चातुर्मास में पूज्य आचार्य भगवंतों एवं साधु-साध्वियों के सान्निध्य का अधिकाधिक लाभ लें, संयम, सेवा, स्वाध्याय, तप, ध्यान और धर्ममय जीवन का संकल्प लें तथा आत्मा को परमात्मा बनने की दिशा में एक सार्थक कदम बढ़ाएँ।

– डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

मुंबई। जयपुर प्रवासी संघ (जेपीएस) मुंबई द्वारा सावन माह के उपलक्ष्य में आयोजित 18वीं सामूहिक गोठ आयोजन आत्मीय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में जयपुर के प्रवासी परिवारों ने सपरिवार भाग लेकर वर्षों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्तों को नई ऊष्मा प्रदान की। जेपीएस के संस्थापक अध्यक्ष और मुख्य संरक्षक कृष्ण कुमार राठी एवं अध्यक्ष सुनील सिंघवी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे से आत्मीय मुलाकात कर पुराने संबंधों को ताज़ा किया तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया। सावन की हरियाली और धार्मिक वातावरण के बीच बोरिवली स्थित त्रिमूर्ति जैन मंदिर, पोदनपुर परिसर में आयोजित इस गोठ में पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति की सजीव झलक दिखाई दी। जेपीएस की सचिव अनिता सुशील माहेश्वरी के अनुसार मुंबई में रह रहे जयपुर के परिवारों के बीच सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक आत्मीयता का यह सिलसिला लगातार मजबूत होता रहे। संस्था के कोषाध्यक्ष अनिल हीरावत सहित संयुक्त सचिव मधु राठी, अनिल अग्रवाल, राजकुमार बैद, गिरिश अग्रवाल, दीपेंद्र बैराठी, मनीष शाह, धरमचंद कोठारी, विजय सेठ, अनिल कर्णावत, मनीष लेखी, नरेंद्र हीरावत, विनोद दुग्गड़, सीए सुशील माहेश्वरी, सीए महेशचंद गुप्ता, ज्ञानचंद सोमानी, कुसुम काबरा आदि सभी प्रमुख सदस्यों के सहयोग से पूरे आयोजन में अपनत्व, सौहार्द और पारिवारिक एकजुटता का वातावरण बना रहा। जेपीएस की इस सामूहिक गोठ का उद्देश्य केवल सामाजिक मिलन नहीं, बल्कि मुंबई में बसे जयपुर वासियों के बीच आत्मीय संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा अपनी परंपराओं को जीवंत बनाए रखना है। उन्होंने आयोजन की सफलता पर अपने संदेश में सभी सदस्यों और पदाधिकारियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध उद्योगपति सीए सुशील माहेश्वरी, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार, प्रवासी संदेश के संपादक राजेश उपाध्याय समेत तमाम जानी-मानी हस्तियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में संघ के सभी संरक्षकों, पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी सुव्यवस्थित तैयारियों के कारण पूरा आयोजन गरिमापूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। गोठ का सबसे आकर्षक केंद्र पारंपरिक राजस्थानी भोजन रहा। जयपुर से विशेष रूप से आए अनुभवी कारीगरों ने प्रसिद्ध उड़द की दाल, बाटी और चूरमा सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए, जिनका उपस्थित परिवारों ने भरपूर आनंद लिया। भोजन के असली जयपुरी स्वाद ने सभी को अपने शहर और बचपन की यादों से जोड़ दिया तथा प्रवासी परिवारों के लिए यह अनुभव विशेष रूप से भावुक और यादगार बन गया।
मुंबई। पवई निवासी युवा समाजसेवी विजय नारायण तिवारी की मां शांति जगपति तिवारी का आज 74 वर्ष की उम्र में आकस्मिक निधन होने से यहां शोक की लहर दौड़ गई। वे अत्यंत विनम्र और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी। 27 जुलाई को सुबह 10 बजे टैगोर नगर श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस अवसर पर उनके पांच बेटे विजय नारायण तिवारी, शिवनारायण तिवारी अजय तिवारी,अमित तिवारी, अजीत तिवारी के अलावा भारी संख्या में लोग उपस्थित रहेंगे। विजय नारायण तिवारी ने बताया कि उनकी मृत्यु से जुड़े सारे कार्यक्रम उनके पैतृक गांव सम्मनपुर , बदलापुर, जौनपुर में किए जाएंगे। कल पूरा परिवार गांव रवाना हो जाएगा। श्रीमती शांति तिवारी के पति जगपत तिवारी पवई इलाके के नामचीन आदमी थे। कोरोना के समय गांव में उनका निधन हो गया था। श्रीमती शांति जगपत तिवारी के निधन पर महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार ब्रजमोहन पांडे, डॉ त्रिलोकी नाथ मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, नरहरि तिवारी, पत्रकार कृष्णकांत मिश्रा,उनके परिवार के बद्री नारायण तिवारी, दयाशंकर तिवारी(डी एस)समेत अनेक लोगों ने गहरा दुख प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की है।
मुंबई। चुनाव लड़ने के लोकतांत्रिक अधिकार को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटानेवाले तथा विजय प्राप्त करने वाले दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश तिवारी ने मुंबई प्रेस क्लब का चुनाव सेव प्रेस क्लब पैनल से कोषाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा। उन्होंने 487 मत प्राप्त कर पीटीआई के शशांक पराडे को पराजित किया। उन्हें 56.5% मत प्राप्त हुए। अयोध्या की मिट्टी से मुंबई की तेज तर्रार पत्रकारिता तक का सफर करने वाले ओमप्रकाश तिवारी बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। मुंबई प्रेस क्लब से करीब 28 वर्षों से उनका जुड़ाव है और करीब 16 साल तक इसकी मैनेजिंग कमेटी का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने उस मैनेजिंग कमेटी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिसमें प्रतीक्षा नगर में 230 पत्रकारों को वन BHK और टू BHK के घर सस्ती दरों पर दिलवाना शामिल है।
भायंदर। महाराष्ट्र आयुष इंटरनेशनल मेडिकल एसोसिएशन द्वारा औरंगाबाद में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मीरा रोड की सुप्रसिद्ध एक्यूपंचर विशेषज्ञ डॉ गीता सल्होत्रा को महाएक्यूपंक्चररत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें यह पुरस्कार उनकी बेहतरीन लंबी और प्रभावशाली चिकित्सा सेवाओं को देखते हुए प्रदान किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार डॉ. नितिन राज पाटिल के हाथों मिला। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में डॉ नजर काजी, अभिनेता सुयोग गोन्हे, डॉ सतीश कराले, डॉ दिशा चव्हाण,अभिजीत कवटकर समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। डॉ.गीता सल्होत्रा एक्युपंचर चिकित्सा में MD हैं। वे पिछले 29 वर्षों से मीरा रोड के शांति पार्क स्थित अपने क्लीनिक पर विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों का सफल उपचार कर रही हैं। उनकी कामयाबी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, ओमान, मस्कट, अफ्रीका, श्रीलंका इंडोनेशिया जैसे अनेक देशों के मरीजों का इलाज किया। उनको पुरस्कार मिलने पर अनेक लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए बधाई दी है।
मुंबई। ग्लोबल पीस काउंसिल, लंदन हेराल्ड इंटरनेशनल मैगजीन, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एम्बेसडर्स ऑर्गनाइजेशन (IHRAO) तथा क्राइम प्रिवेंशन एंटी करप्शन कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई के मेयर हॉल, अंधेरी (पश्चिम) में “नेल्सन मंडेला नोबेल शांति पुरस्कार 2026” का भव्य, गरिमामय एवं प्रेरणादायी आयोजन संपन्न हुआ। समारोह में देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित उद्योगपति, शिक्षाविद, समाजसेवी, मानवाधिकार कार्यकर्ता, युवा उद्यमी एवं विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों ने सहभागिता कर कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। यह प्रतिष्ठित सम्मान समारोह उन व्यक्तित्वों को समर्पित रहा, जिन्होंने समाजसेवा, मानवाधिकार, शिक्षा, संस्कृति, आध्यात्मिकता, उद्यमिता एवं सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देकर समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। इसी क्रम में संजय जीवनलाल शाह एवं अल्पा संजय शाह (उपाध्यक्ष, महिला विभाग) को समाज, शिक्षा, धर्म एवं मानव सेवा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन, समर्पित एवं अनुकरणीय योगदान के लिए “नेल्सन मंडेला नोबेल शांति पुरस्कार 2026” से सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उनके सेवा-भाव, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक प्रतिबद्धता का सम्मान किया गया।
बदलापुर । क्षेत्र में स्थित सेन्ट जेवीयर्स स्कूल के निदेशक थामस जोसेफ ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि शाहगंज-प्रयागराज मार्ग पर श्रीकृष्णा नगर रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे 2-लेन रेल ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण कार्य में राज्य सेतु निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा भारी शिथिलता बरती जा रही है। कुल 38 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन ओवरब्रिज में बरती जा रही शिथिलता को संजीदगी से लेते हुए कार्य में तेजी कराए जाने की मांग को लेकर निदेशक थामस जोसेफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करनें का मन बना रहे हैं। इस सम्बन्ध में निदेशक थामस जोसेफ ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , राष्ट्रपति तथा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को भी रजिस्टर्ड पत्र भेजकर ओवरब्रिज का अविलंब निर्माण कराये जाने की मांग किया है। इस परियोजना पर लगभग ₹38 करोड़ खर्च किए जा रहे है । यह एक 2-लेन (Two-Lane) चौड़ा रेलवे ओवरब्रिज है। यह रेलवे क्रॉसिंग (फाटक संख्या 23 ) के दोनों तरफ एप्रोच रोड को जोड़ती है। श्रीकृष्णा नगर रेलवे फाटक पर लगने वाले भारी जाम से जनता, स्कूली बच्चों और मरीजों को मुक्ति दिलाना ईश्वर ब्रिज का मुख्य उद्देश्य है। गौरतलाप है कि 17 सितंबर 2024 से बदलापुर प्रयागराज में वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद करके रोड डायवर्ट किया गया है। इस ओवर ब्रिज का वर्चुअल शिलान्यास जनवरी 2024 में किया गया था। सेंट जेवियर स्कूल के निदेशक थॉमस जोसेफ ने प्रेस वार्ता में बताया कि ओवर ब्रिज के निर्माण में भारी शीतलता बढ़ती जा रही है। परिणाम स्वरूप प्रतिदिन वाहन संचालकों छात्राओं व्यापारियों सहित अन्य तपके के लोगों के सामने आवागमन को लेकर भारी समस्या बनी हुई है। सुबह शाम विद्यालय की बसों को लगभग 2022 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी प्रतिदिन तय करनी पड़ रही है । लगभग दो दर्जन से अधिक विद्यालय के सैकड़ो वाहनों तथा शाहगंज से प्रयागराज आने जाने वाली बसों को अतिरिक्त दूरी तय की करनी पड़ रही है। जिससे अतिरिक्त व्यय और समय दोनों का भारी नुकसान हो रहा है।
भायंदर। वरिष्ठ पत्रकार एवं समाज सेवक महेंद्र पाण्डेय को ब्राह्मण सेवा फाउंडेशन संस्था ने अपना राष्ट्रीय संरक्षण बनाया है। ब्राह्मण सेवा फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि महेंद्र पाण्डेय के जुड़ने से ब्राह्मण सेवा फाउंडेशन को एक नई ऊर्जा मिली है और हम सब उनके संरक्षण में समाज से लिए अच्छे कार्य करेंगे। ब्राह्मण सेवा फाउंडेशन की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष निशा तिवारी ने कहा कि नेतृत्व वही श्रेष्ठ है जो समाज को दिशा और संगठन को नई ऊर्जा दे उसी की आगे बढ़ाने के लिए हम सब बचनबद्ध है जिसे महेंद्र पाण्डेय के संरक्षण में पूर्ण होगा क्योंकि महेंद्र पाण्डेय विगत कई वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यों के साथ श्रीमद भागवत कथा का बड़ा आयोजन मीरा रोड में कराते है। ब्राह्मण सेवा फाउंडेशन हमेशा दीन दुखियों एवं जरूरत मंदो के लिए अग्रसर होकर कार्य करती है। संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने इस अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए सामाजिक, एवं सांस्कृतिक कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त किए।
नाशिक। हर व्यक्ति को अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम रखना चाहिए क्योंकि यह देश की एकता, शांति और विकास की नींव है। राष्ट्र प्रेम का अर्थ सिर्फ नारे लगाना नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना है। 90 वर्ष पुराना भोसला मिलिटरी कॉलेज से संलग्न सेंट्रल हिंदू मिलिट्री स्कूल में आयोजित रामदांडी प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रेरणादायक स्पीच देते हुए भारत का पहला और दुनिया का सबसे बड़ा निजी रत्न और खनिज संग्रहालय गारगोटी म्यूजियम के संस्थापक चीफ तथा शिरडी साई संस्थान के पूर्व ट्रस्टी केसी पांडे ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि हमें नेशन फर्स्ट की भावना से काम करना चाहिए और देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। मां और मातृभूमि स्वर्ग से बढ़कर होते हैं। इसलिए हमें मातृभूमि की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। सनातन धर्म पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत और अनादि मार्ग,जो सदा से है और जिसका कोई आदि या अंत नहीं है। इसकी मुख्य विशेषताएं सार्वभौमिक सत्य, कर्म सिद्धांत और मोक्ष हैं। यह संपूर्ण मानवता और प्रकृति के कल्याण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जहाँ देश और दुनिया के युवा अपनी प्राचीन संस्कृति, मूल्यों और जड़ों की ओर तेजी से लौट रहे हैं। यह जुड़ाव केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति, जीवन प्रबंधन और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर कॉलेज प्रबंधन समिति से जुड़े अनेक मान्यवर, वक्ता,अभिभावक तथा बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।
Jul 27 2026, 15:54
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