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नेपाल की बाढ़ में अब तक 626 लोगों की मौत, 2400 से ज्यादा लोग लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने अब तक 600 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। हिमालयी इलाकों में रेस्क्यू टीमें मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं, लेकिन उनके सामने एक और खतरा खड़ा है। पहाड़ों के बीच मलबे से बनी अस्थिर झीलों में पानी बढ़ रहा है, जिससे किसी भी वक्त दोबारा सैलाब आने का डर बना हुआ है।

626 लोगों की मौत की पुष्टि

नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों की संख्या 2426 है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की । रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 540 विदेशी अब भी लापता हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री हैं।

करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं

भारत के लिए भी यह आपदा बड़ी चिंता बन गई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग और त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारी शामिल हैं। 149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उनकी वापसी में मदद कर रहा है। इसके बावजूद करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

चीन ने दी चेतावनी

इधर, चीन ने एक बार फिर नेपाल को चेतावनी दी है कि ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी इलाकों में बनी झील कभी भी अपने किनारों को तोड़ सकती है। हालांकि, बीजिंग ने कहा है कि अगर झील टूटती भी है, तो नदी में पानी का बहाव ज़्यादा से ज़्यादा 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड ही होगा। नेपाल को भेजे गए संदेश में चीन ने कहा कि उस झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है, जो इस हफ़्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत के कुछ हिस्सों में आए भयानक अचानक बाढ़ के बाद बनी थी, इससे संकेत मिलता है कि झील कभी भी फट सकती है।

राहत कार्य के लिए नेपाल पहुंचा 11 सदस्यीय भारतीय बचाव दल

अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के बाद बचाव अभियान में स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा कर्मियों और सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित इस टीम को नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। टीम को हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ ने 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।

पश्चिम बंगाल में तारापीठ के होटल में लगी भीषण आग, 6 की झुलसकर मौत

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सावन के सोमवार के दिन बिहार के लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति के बाद बंगाल से भी हादसे की दर्दनाक खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक बड़ा हादसा हुआ है। सोमवार सुबह तारापीठ के एक होटल में लगी भीषण आग में छह लोगों की जलकर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस समय होटल में आग लगी, वहां पर रुके गेस्ट सो रहे थे। कई का दम घुटने लगा।

पहली मंजिल पर लगी आग तेजी से फैली

आग सुबह करीब 5 बजे तारापीठ के मंदिर वाले इलाके में स्थित चार मंजिला होटल की पहली मंजिल पर लगी। घटना ‘बिदिशिनी’ होटल में हुई, जो एक तालाब के पास और तारापीठ पुलिस स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्थित है। घटना की सूचना मिलते ही फायरफाइटर्स मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। हालांकि, उससे पहले तक आग तेजी से पूरे होटल में फैल गई, जिससे परिसर में घना धुआं भर गया और मेहमान अंदर ही फंस गए। दमकलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। घायलों को बचाया गया और इलाज के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया।

दर्शन से पहले ही जलकर मौत

कहा जा रहा है कि बिंदिशिनी होटल तारापीठ मंदिर के पास है। यहां पर दर्शन करने वाले श्रद्धालु ही ज्यादातर इस होटल में रुकते हैं। जिन लोगों की आग में जलकर मौत हुई है, वे भी मंदिर में दर्शन करने आए थे। वे रात को यहां पहुंचे थे और आराम के लिए होटल में रुके थे। उन्हें सोमवार को मंदिर में दर्शन करने जाना था, लेकिन उससे पहले ही उनकी जलकर मौत हो गई।

शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग

होटल के अधिकारियों का दावा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। कोलकाता की रहने वाली एक महिला आग से बचकर बाहर निकलने में सफल रही। उसने होटल के अंदर मची अफरा-तफरी को याद करते हुए बताया कि अचानक पूरे होटल में धुआं भर गया। सांस लेना मुश्किल हो गया और बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना भी काफी कठिन था। अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों में कुछ श्रद्धालु भी थे, जो प्रसिद्ध काली मंदिर में पूजा करने के लिए तारापीठ आए थे।

स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण, खुदीराम का बलिदान युवाओं के लिए बड़ा संदेश

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आज जब हम 18 साल की उम्र के युवाओं की गलतियों को बचपना कहकर दरकिनार करने की कोशिश करते हैं। ऐसी ही छोटी उम्र में एक युवक ने कुछ ऐसा कर दिया था, जिसने पूरे अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी। अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ क्रांति को एक नई आग दी। देश के इतिहास के पन्नों में दर्ज वो युवक जो 18 साल की उम्र में हंसते-हंसते भारत माता की रक्षा के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया था। हम बात कर रहे हैं अमर शहीद खुदीराम बोस की।

आजादी का एक मतवाला अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए 15 साल की उम्र में अनुशीलन समिति से जुड़ गए। अनुशीलन समिति 20वीं सदी के शुरुआती दौर में बंगाल में बनी एक गुप्त, क्रांतिकारी और सशस्त्र संगठन था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त कर भारत को स्वतंत्र कराना था। देश को स्वतंत्र कराने और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ खड़ा हुआ ये युवक आज ही के दिन यानी 11 अगस्त को केवल 18 साल की उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया।

इस तरह नाम पड़ा खुदीराम बोस

खुदीराम बोस का जन्म पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में 3 दिसंबर 1889 को त्रिलोक्यपुरी बोस और लक्ष्मीप्रिया के घर हुआ। खुदीराम के जन्म से पहले उनके माता-पिता ने दो बेटों को बीमारी के चलते खोया था। इस बार खुदीराम के रूप में तीसरी संतान हुई तो डर स्वाभाविक था। तब मां-बाप ने एक देसी टोटका आजमाया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी को तीन मुट्ठी 'खुदी' (बंगाल में टूटे हुए चावल को खुदी कहते हैं) देकर इस बच्चे को प्रतीकात्मक रूप से बेच दिया, ताकि मौत की नजर इस पर न पड़े। तीन मुट्ठी खुदी के बदले बचे इस बच्चे का नाम पड़ गया- खुदीराम।

15 साल की उम्र में पहली गिरफ्तारी

जिस उम्र में लड़के किताबों की दुनिया स्कूली जीवन में मस्त रहते हैं उस उम्र में खुदीराम बोस अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने उतर गए। उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ पर्चे बांटने में लगा दिया गया। यह बात थी साल 1906 की। एक और क्रांतिकारी सत्येंद्रनाथ बोस ने वंदे मातरम लिखकर अंग्रेजी शासन के विरोध में पर्चे बंटवाने की जिम्मेदारी दी। मिदनापुर में आयोजित एक मेले में इस पर्चे को बंटवाने का प्लान था। अंग्रेजों को इस बात का पता चल गया। अंग्रेजों के पिट्ठुओं ने इसकी खबर दे दी। खुदीराम बोस को देखते ही उन्हें पकड़ने का प्रयास हुआ। लेकिन, खुदीराम ने अंग्रेज अफसर के मुंह पर घूंसा जड़ दिया। हालांकि कई अंग्रेज सिपाही होने के चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। और पहली बार देश के लिए खुदीराम गिरफ्तार हुए। उन दिनों जिला जज हुआ करते थे डगलस किंग्सफोर्ड। इस जज को भारतीयों को सख्त नफरत थी। सजा के नाम पर भारतीयों पर कोडे़ बरसाने की सजा दी जाती थी। 15 साल के खुदीराम को जज ने 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। इस जज ने भारतीयों पर अत्याचार मचा रखा था। आखिर में इस जज को मारने का प्लान बनाया गया।

किंग्सफोर्ड को मारने का प्लान

क्रांतिकारियों ने तय किया कि इस किंग्सफोर्ड का काम तमाम करना होगा। खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल कुमार चाकी को यह जिम्मेदारी दी गई। किंग्सफोर्ड का ट्रांसफर बिहार के मुजफ्फरपुर हो गया था। ये दोनों लड़के अप्रैल 1908 में मुजफ्फरपुर पहुंचे। कई दिनों तक किंग्सफोर्ड की रेकी की गई। शाम का वक्त था। खुदीराम और प्रफुल्ल किंग्सफोर्ड के घर के बाहर एक पेड़ के अंधेरे में घात लगाए बैठे थे। तभी एक बग्गी बाहर निकली। खुदीराम को लगा शिकार सामने हैय़ उन्होंने दौड़कर उस बग्गी पर बम मार दिया। जोरदार धमाका हुआ। दोनों को लगा कि उन्होंने अपना मिशन पूरा कर लिया है। लेकिन उस बग्गी में किंग्सफोर्ड नहीं था। उसमें लोकल बैरिस्टर प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और बेटी सवार थीं, जिनकी इस हमले में जान चली गई।

18 साल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

दोनों करीब 25 मील भागने के बाद एक रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। बोस पर पुलिस को शक हो गया और पूसा रोड रेलवे स्टेशन (अब यह स्टेशन खुदीराम बोस के नाम पर है) पर उन्हें घेर लिया गया। खुद को घिरा देख प्रफुल्ल चंद ने स्वयं को गोली मार ली पर खुदीराम पकड़े गए। खुदीराम बोस पर हत्या का मुकदमा चला और सिर्फ पांच दिन में मुकदमे का फैसला हो गया। 8 जून, 1908 को उन्हें अदालत में पेश किया गया और 13 जून को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। खुदीराम बोस ने मात्र 18 साल, 8 महीने और 8 दिन की उम्र में 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगा लिया था। उन्हें किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंकने के आरोप में यह सजा दी गई थी। उनका यह बलिदान देश के युवाओं में आज भी देशभक्ति की एक अनोखी मिसाल है।

खुदीराम का बलिदान आज की युवा पीढ़ी के लिए संदेश

खुदीराम बोस का बलिदान आज की युवा पीढ़ी को देशप्रेम, निस्वार्थ त्याग और अन्याय के खिलाफ अदम्य साहस का पाठ पढ़ाता है। मात्र 18 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़कर उन्होंने यह सिखाया कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। बिना किसी स्वार्थ के देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देना। व्यक्तिगत सुखों से ऊपर राष्ट्रहित को रखना। देश की संस्कृति और स्वतंत्रता के प्रति हमेशा जागरूक रहना। आज की आज़ादी को हल्के में न लेकर इसके पीछे के संघर्षों को याद रखना।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, अब तक 22 बच्चों की गई जान, जानें कैसे फैलता है, क्या हैं लक्षण

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों को प्रभावित करने वाले इस घातक वायरस के संदिग्ध मामलों के बीच अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। अब तक सामने आए 184 संदिग्ध मामलों में से 35 की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हाई अलर्ट पर रखते हुए रोकथाम और इलाज के विशेष इंतजाम किए हैं।

वायरस ने ली 22 बच्चों की जान

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि राज्य में सामने आए सभी संदिग्ध मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। अब तक कुल 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है। 11 सैंपल के नतीजों का अभी भी इंतजार है। मंत्री ने बताया कि अब तक सामने आए संदिग्ध मामलों में से 22 बच्चों की इस वायरस के कारण मौत हो चुकी है।

सात सक्रिय मरीजों का इलाज जारी

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, गांधीनगर, साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का खास इलाज किया जा रहा है और डॉक्टर लगातार उनकी हालत पर नजर रखे हुए हैं। वायरस की पुष्टि वाले सात मरीजों का अभी राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 6 मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस (CHPV) कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे बेहद डरावना बनाती है। इस वायरस की पहली बार पहचान साल 1965 में महाराष्ट्र के 'चांदीपुरा' नाम के गांव में हुई थी, जिसकी वजह से इसका नाम चांदीपुरा पड़ा। यह एक प्रकार का आरएनए वायरस है, जो मुख्य रूप से दिमाग में गंभीर सूजन और संक्रमण पैदा करता है। यह वायरस 9 महीने के शिशु से लेकर 14 साल तक के बच्चों को सबसे जल्दी अपना शिकार बनाता है। वयस्कों के मुकाबले बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण यह उनके शरीर पर बहुत तेजी से हमला करता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस छुआछूत की बीमारी नहीं है यानी यह एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलता। इसके फैलने का असली कारण कीट-पतंगे हैं।

• सैंडफ्लाई (बालू मक्खी)- यह इस वायरस को फैलाने वाला सबसे प्रमुख कीट है। बालू मक्खियां अक्सर कच्चे घरों, मिट्टी की दीवारों की दरारों और सीलन वाली जगहों पर पाई जाती हैं।

• मच्छर और किल्लनी- सैंडफ्लाई के अलावा कुछ खास तरह के मच्छर और किल्लनी भी इस वायरस के वाहक बनते हैं।

बारिश के मौसम में जब नमी और सीलन बढ़ती है, तब इन बालू मक्खियों का प्रजनन तेजी से होता है। इसी वजह से मानसून के समय इस वायरस के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।

क्या हैं वायरस के लक्षण?

संक्रमण के शुरुआत में इसके लक्षण किसी सामान्य फ्लू या दिमागी बुखार जैसे ही लगते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति काफी बिगड़ सकती है। प्रमुख लक्षणों इस प्रकार हैं-

• अचानक तेज बुखार आना

• उल्टी और दस्त होना

• सिर में तेज दर्द और सुस्ती महसूस होना

• दौरे पड़ना या शरीर का ऐंठना

• बेहोशी छाना या बच्चे का भ्रमित स्थिति में जाना

डॉक्टरों के अनुसार, जब यह वायरस दिमाग पर असर डालता है, जिसे मेडिकल भाषा में एन्सेफलाइटिस कहते हैं, तो बेहोशी छा जाती है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को एक साथ नाकाम कर सकता है।

प्रसूता मृत्यु प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग का सख्त एक्शन, अभिलेख न मिलने पर मदर केयर हॉस्पिटल सील
फर्रुखाबाद l
प्रसूता की मृत्यु के मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को आवास विकास स्थित मदर केयर हॉस्पिटल के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए चिकित्सालय को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देश पर उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी (पंजीकरण) डॉ. आर. सी. माथुर ने टीम के साथ अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल का कोई भी संचालक, चिकित्सक अथवा अधिकृत प्रतिनिधि मौके पर उपस्थित नहीं मिला। टीम ने अस्पताल के पंजीकरण, मरीज के उपचार, भर्ती, प्रसव, रेफरल एवं प्रसूता की मृत्यु से संबंधित समस्त अभिलेखों की मांग की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन कोई भी आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। अस्पताल में उपचार संबंधी अभिलेखों का संधारण भी संतोषजनक नहीं पाया गया।
जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रसूता के उपचार से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटोग्राफ एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखने तथा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच की जा सके। साथ ही प्रकरण का मातृ मृत्यु ऑडिट (Death Audit) कराते हुए मृत्यु के वास्तविक कारणों एवं उपचार प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी गई है।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न कराने एवं जांच में सहयोग न करने की स्थिति को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नियमानुसार चिकित्सालय को तत्काल सील कर दिया। साथ ही प्रकरण में संबंधित अभिलेखों की गहन जांच करते हुए आवश्यक विभागीय एवं विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि जनपद में किसी भी मरीज के जीवन के साथ लापरवाही या स्वास्थ्य विभाग के नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी निजी चिकित्सालयों को पंजीकरण की शर्तों का पालन करते हुए उपचार से संबंधित अभिलेखों का विधिवत संधारण करना अनिवार्य है। जांच में सहयोग न करने अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि जनपदवासियों को सुरक्षित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस मामले की जांच निष्पक्ष रूप से पूरी कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार आगे की कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
Every Vaccine Builds a Stronger Future: Prasad Hospitals Hyderabad Promotes Complete Childhood Immunization

Hyderabad: India's successful Pulse Polio Programme is one of the world's greatest public health achievements, proving that awareness, timely vaccination, and collective responsibility can eliminate life-threatening diseases. As the nation observed Pulse Polio Day on June 28, Prasad Hospitals Hyderabad called upon parents to recognize that protecting children extends far beyond a single vaccination campaign. Complete childhood immunization remains one of the most powerful tools for ensuring a healthier future for every child.

Healthcare experts at Prasad Hospitals emphasize that while Pulse Polio campaigns have played a crucial role in keeping India polio-free, every child must receive the full schedule of recommended vaccinations from birth through adolescence. Childhood immunization protects against several potentially serious diseases, including tuberculosis, hepatitis B, diphtheria, pertussis (whooping cough), tetanus, measles, rubella, rotavirus infection, pneumococcal disease, mumps, chickenpox, and many other preventable illnesses.

Vaccination: A Lifelong Investment in Your Child's Health

Medical science has consistently shown that vaccines are among the safest, most effective, and most successful preventive healthcare measures ever developed. Rather than treating diseases after they occur, vaccines prepare the body's immune system to recognize and fight infections before they become serious.

The first few years of a child's life are especially critical because their immune system is still developing. Timely vaccination provides protection during this vulnerable stage, significantly reducing the risk of severe illness, long-term complications, hospitalization, and even death.

Healthcare professionals also point out that vaccination benefits not only individual children but entire communities. High vaccination coverage creates stronger community protection, reducing the spread of infectious diseases and safeguarding children who may be medically unable to receive certain vaccines.

Pulse Polio Day Is a Reminder—Not the Finish Line

While Pulse Polio Day serves as an important national health initiative, Prasad Hospitals believes it should also encourage families to review their children's complete immunization records.

Many parents understandably associate vaccination primarily with Pulse Polio campaigns. However, pediatric specialists explain that children require multiple vaccines at different stages of development to achieve complete protection.

Missing booster doses or delaying scheduled vaccinations can increase the risk of preventable diseases. Parents are encouraged to maintain vaccination records, attend regular pediatric check-ups, and consult healthcare professionals whenever there are questions regarding immunization schedules or missed doses.

According to the management of Prasad Hospitals, "Pulse Polio Day is a celebration of India's public health success, but it is also an opportunity to remind parents that complete childhood vaccination remains a year-round responsibility."

Preventive Healthcare: A Core Commitment at Prasad Hospitals Hyderabad

At Prasad Hospitals Hyderabad, preventive healthcare is considered the foundation of lifelong wellness. Along with advanced medical treatment, the hospital actively promotes disease prevention through education, awareness, and early intervention.

Throughout the year, the hospital organizes community awareness programs across Hyderabad focusing on:

● Childhood Vaccination & Immunization

● Pulse Polio Awareness

● Newborn Care

● Pregnancy Care

● Breastfeeding Education

● Maternal Wellness

● Child Nutrition

● Growth & Development Monitoring

● Women's Preventive Healthcare

● Early Disease Prevention

These educational initiatives aim to help parents make informed healthcare decisions and ensure children receive timely medical care from birth onward.

Advanced Pediatric Care for Every Child

Prasad Hospitals has established itself as a trusted destination for comprehensive pediatric healthcare by combining experienced specialists with modern medical infrastructure.

The hospital offers a wide range of pediatric services, including:

● Routine Childhood Vaccination

● Complete Immunization Programs

● Newborn & Neonatal Care

● Pediatric Consultations

● Growth & Development Assessment

● Nutrition Counseling

● Child Health Screening

● Preventive Pediatric Healthcare

● Management of Childhood Illnesses

Families searching for the best pediatric hospital in Hyderabad often choose Prasad Hospitals for its personalized approach, experienced pediatricians, and commitment to preventive medicine.

Comprehensive Women's Healthcare Under One Roof

Prasad Hospitals is equally recognized for excellence in women's healthcare. Under the leadership of Dr. K. Suma Prasad, one of India's most experienced gynecologists, the hospital provides advanced gynecology, high-risk pregnancy care, maternity services, women's wellness programs, fertility evaluation, and preventive healthcare.

With a multidisciplinary team of experienced pediatricians, gynecologists, neonatologists, nurses, and healthcare professionals, Prasad Hospitals offers complete care for mothers and children under one roof.

Trusted Healthcare Across Hyderabad

With conveniently located branches in Nacharam, Pragathi Nagar (Kukatpally), and Manikonda, Prasad Hospitals continues to serve thousands of families across Hyderabad with compassionate, evidence-based healthcare.

Parents searching online for the best hospital in Hyderabad, best pediatric hospital in Hyderabad, child vaccination centre near me, best gynecology hospital in Hyderabad, pregnancy care in Hyderabad, newborn care, maternity hospital, and preventive healthcare continue to trust Prasad Hospitals for experienced specialists, advanced medical technology, and patient-centered care.

A Message from the Management of Prasad Hospitals

"Every vaccine administered today strengthens the future of tomorrow. India's success against polio proves what is possible when healthcare professionals, governments, and parents work together. We encourage every family to view Pulse Polio Day as the beginning of a larger commitment to complete childhood immunization. At Prasad Hospitals, we remain dedicated to spreading awareness, supporting preventive healthcare, and ensuring every child receives the protection they deserve."

Healthy Children Build a Stronger India

The future of every nation begins with the health of its children. Vaccination protects lives, reduces disease burden, strengthens families, and creates healthier communities.

Prasad Hospitals Hyderabad remains committed to delivering world-class pediatric care, advanced gynecology, maternity services, childhood immunization, and preventive healthcare through its branches at Nacharam, Pragathi Nagar (Kukatpally), and Manikonda.

If you are looking for the best hospital in Hyderabad for childhood vaccination, pediatric care, pregnancy care, newborn care, or women's healthcare, visit Prasad Hospitals and take the first step toward a healthier future for your family.

Prasad Hospitals – Caring for Every Mother. Protecting Every Child. Building a Healthier India.

नेपाल की बाढ़ में अब तक 626 लोगों की मौत, 2400 से ज्यादा लोग लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट

#deathtollfromnepalfloodsrisesmorethan626

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने अब तक 600 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। हिमालयी इलाकों में रेस्क्यू टीमें मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं, लेकिन उनके सामने एक और खतरा खड़ा है। पहाड़ों के बीच मलबे से बनी अस्थिर झीलों में पानी बढ़ रहा है, जिससे किसी भी वक्त दोबारा सैलाब आने का डर बना हुआ है।

626 लोगों की मौत की पुष्टि

नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों की संख्या 2426 है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की । रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 540 विदेशी अब भी लापता हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री हैं।

करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं

भारत के लिए भी यह आपदा बड़ी चिंता बन गई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग और त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारी शामिल हैं। 149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उनकी वापसी में मदद कर रहा है। इसके बावजूद करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

चीन ने दी चेतावनी

इधर, चीन ने एक बार फिर नेपाल को चेतावनी दी है कि ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी इलाकों में बनी झील कभी भी अपने किनारों को तोड़ सकती है। हालांकि, बीजिंग ने कहा है कि अगर झील टूटती भी है, तो नदी में पानी का बहाव ज़्यादा से ज़्यादा 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड ही होगा। नेपाल को भेजे गए संदेश में चीन ने कहा कि उस झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है, जो इस हफ़्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत के कुछ हिस्सों में आए भयानक अचानक बाढ़ के बाद बनी थी, इससे संकेत मिलता है कि झील कभी भी फट सकती है।

राहत कार्य के लिए नेपाल पहुंचा 11 सदस्यीय भारतीय बचाव दल

अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के बाद बचाव अभियान में स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा कर्मियों और सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित इस टीम को नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। टीम को हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ ने 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।

पश्चिम बंगाल में तारापीठ के होटल में लगी भीषण आग, 6 की झुलसकर मौत

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सावन के सोमवार के दिन बिहार के लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति के बाद बंगाल से भी हादसे की दर्दनाक खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक बड़ा हादसा हुआ है। सोमवार सुबह तारापीठ के एक होटल में लगी भीषण आग में छह लोगों की जलकर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस समय होटल में आग लगी, वहां पर रुके गेस्ट सो रहे थे। कई का दम घुटने लगा।

पहली मंजिल पर लगी आग तेजी से फैली

आग सुबह करीब 5 बजे तारापीठ के मंदिर वाले इलाके में स्थित चार मंजिला होटल की पहली मंजिल पर लगी। घटना ‘बिदिशिनी’ होटल में हुई, जो एक तालाब के पास और तारापीठ पुलिस स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्थित है। घटना की सूचना मिलते ही फायरफाइटर्स मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। हालांकि, उससे पहले तक आग तेजी से पूरे होटल में फैल गई, जिससे परिसर में घना धुआं भर गया और मेहमान अंदर ही फंस गए। दमकलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। घायलों को बचाया गया और इलाज के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया।

दर्शन से पहले ही जलकर मौत

कहा जा रहा है कि बिंदिशिनी होटल तारापीठ मंदिर के पास है। यहां पर दर्शन करने वाले श्रद्धालु ही ज्यादातर इस होटल में रुकते हैं। जिन लोगों की आग में जलकर मौत हुई है, वे भी मंदिर में दर्शन करने आए थे। वे रात को यहां पहुंचे थे और आराम के लिए होटल में रुके थे। उन्हें सोमवार को मंदिर में दर्शन करने जाना था, लेकिन उससे पहले ही उनकी जलकर मौत हो गई।

शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग

होटल के अधिकारियों का दावा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। कोलकाता की रहने वाली एक महिला आग से बचकर बाहर निकलने में सफल रही। उसने होटल के अंदर मची अफरा-तफरी को याद करते हुए बताया कि अचानक पूरे होटल में धुआं भर गया। सांस लेना मुश्किल हो गया और बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना भी काफी कठिन था। अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों में कुछ श्रद्धालु भी थे, जो प्रसिद्ध काली मंदिर में पूजा करने के लिए तारापीठ आए थे।

स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण, खुदीराम का बलिदान युवाओं के लिए बड़ा संदेश

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आज जब हम 18 साल की उम्र के युवाओं की गलतियों को बचपना कहकर दरकिनार करने की कोशिश करते हैं। ऐसी ही छोटी उम्र में एक युवक ने कुछ ऐसा कर दिया था, जिसने पूरे अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी। अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ क्रांति को एक नई आग दी। देश के इतिहास के पन्नों में दर्ज वो युवक जो 18 साल की उम्र में हंसते-हंसते भारत माता की रक्षा के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया था। हम बात कर रहे हैं अमर शहीद खुदीराम बोस की।

आजादी का एक मतवाला अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए 15 साल की उम्र में अनुशीलन समिति से जुड़ गए। अनुशीलन समिति 20वीं सदी के शुरुआती दौर में बंगाल में बनी एक गुप्त, क्रांतिकारी और सशस्त्र संगठन था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त कर भारत को स्वतंत्र कराना था। देश को स्वतंत्र कराने और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ खड़ा हुआ ये युवक आज ही के दिन यानी 11 अगस्त को केवल 18 साल की उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया।

इस तरह नाम पड़ा खुदीराम बोस

खुदीराम बोस का जन्म पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में 3 दिसंबर 1889 को त्रिलोक्यपुरी बोस और लक्ष्मीप्रिया के घर हुआ। खुदीराम के जन्म से पहले उनके माता-पिता ने दो बेटों को बीमारी के चलते खोया था। इस बार खुदीराम के रूप में तीसरी संतान हुई तो डर स्वाभाविक था। तब मां-बाप ने एक देसी टोटका आजमाया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी को तीन मुट्ठी 'खुदी' (बंगाल में टूटे हुए चावल को खुदी कहते हैं) देकर इस बच्चे को प्रतीकात्मक रूप से बेच दिया, ताकि मौत की नजर इस पर न पड़े। तीन मुट्ठी खुदी के बदले बचे इस बच्चे का नाम पड़ गया- खुदीराम।

15 साल की उम्र में पहली गिरफ्तारी

जिस उम्र में लड़के किताबों की दुनिया स्कूली जीवन में मस्त रहते हैं उस उम्र में खुदीराम बोस अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने उतर गए। उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ पर्चे बांटने में लगा दिया गया। यह बात थी साल 1906 की। एक और क्रांतिकारी सत्येंद्रनाथ बोस ने वंदे मातरम लिखकर अंग्रेजी शासन के विरोध में पर्चे बंटवाने की जिम्मेदारी दी। मिदनापुर में आयोजित एक मेले में इस पर्चे को बंटवाने का प्लान था। अंग्रेजों को इस बात का पता चल गया। अंग्रेजों के पिट्ठुओं ने इसकी खबर दे दी। खुदीराम बोस को देखते ही उन्हें पकड़ने का प्रयास हुआ। लेकिन, खुदीराम ने अंग्रेज अफसर के मुंह पर घूंसा जड़ दिया। हालांकि कई अंग्रेज सिपाही होने के चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। और पहली बार देश के लिए खुदीराम गिरफ्तार हुए। उन दिनों जिला जज हुआ करते थे डगलस किंग्सफोर्ड। इस जज को भारतीयों को सख्त नफरत थी। सजा के नाम पर भारतीयों पर कोडे़ बरसाने की सजा दी जाती थी। 15 साल के खुदीराम को जज ने 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। इस जज ने भारतीयों पर अत्याचार मचा रखा था। आखिर में इस जज को मारने का प्लान बनाया गया।

किंग्सफोर्ड को मारने का प्लान

क्रांतिकारियों ने तय किया कि इस किंग्सफोर्ड का काम तमाम करना होगा। खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल कुमार चाकी को यह जिम्मेदारी दी गई। किंग्सफोर्ड का ट्रांसफर बिहार के मुजफ्फरपुर हो गया था। ये दोनों लड़के अप्रैल 1908 में मुजफ्फरपुर पहुंचे। कई दिनों तक किंग्सफोर्ड की रेकी की गई। शाम का वक्त था। खुदीराम और प्रफुल्ल किंग्सफोर्ड के घर के बाहर एक पेड़ के अंधेरे में घात लगाए बैठे थे। तभी एक बग्गी बाहर निकली। खुदीराम को लगा शिकार सामने हैय़ उन्होंने दौड़कर उस बग्गी पर बम मार दिया। जोरदार धमाका हुआ। दोनों को लगा कि उन्होंने अपना मिशन पूरा कर लिया है। लेकिन उस बग्गी में किंग्सफोर्ड नहीं था। उसमें लोकल बैरिस्टर प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और बेटी सवार थीं, जिनकी इस हमले में जान चली गई।

18 साल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

दोनों करीब 25 मील भागने के बाद एक रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। बोस पर पुलिस को शक हो गया और पूसा रोड रेलवे स्टेशन (अब यह स्टेशन खुदीराम बोस के नाम पर है) पर उन्हें घेर लिया गया। खुद को घिरा देख प्रफुल्ल चंद ने स्वयं को गोली मार ली पर खुदीराम पकड़े गए। खुदीराम बोस पर हत्या का मुकदमा चला और सिर्फ पांच दिन में मुकदमे का फैसला हो गया। 8 जून, 1908 को उन्हें अदालत में पेश किया गया और 13 जून को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। खुदीराम बोस ने मात्र 18 साल, 8 महीने और 8 दिन की उम्र में 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगा लिया था। उन्हें किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंकने के आरोप में यह सजा दी गई थी। उनका यह बलिदान देश के युवाओं में आज भी देशभक्ति की एक अनोखी मिसाल है।

खुदीराम का बलिदान आज की युवा पीढ़ी के लिए संदेश

खुदीराम बोस का बलिदान आज की युवा पीढ़ी को देशप्रेम, निस्वार्थ त्याग और अन्याय के खिलाफ अदम्य साहस का पाठ पढ़ाता है। मात्र 18 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़कर उन्होंने यह सिखाया कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। बिना किसी स्वार्थ के देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देना। व्यक्तिगत सुखों से ऊपर राष्ट्रहित को रखना। देश की संस्कृति और स्वतंत्रता के प्रति हमेशा जागरूक रहना। आज की आज़ादी को हल्के में न लेकर इसके पीछे के संघर्षों को याद रखना।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, अब तक 22 बच्चों की गई जान, जानें कैसे फैलता है, क्या हैं लक्षण

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों को प्रभावित करने वाले इस घातक वायरस के संदिग्ध मामलों के बीच अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। अब तक सामने आए 184 संदिग्ध मामलों में से 35 की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हाई अलर्ट पर रखते हुए रोकथाम और इलाज के विशेष इंतजाम किए हैं।

वायरस ने ली 22 बच्चों की जान

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि राज्य में सामने आए सभी संदिग्ध मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। अब तक कुल 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है। 11 सैंपल के नतीजों का अभी भी इंतजार है। मंत्री ने बताया कि अब तक सामने आए संदिग्ध मामलों में से 22 बच्चों की इस वायरस के कारण मौत हो चुकी है।

सात सक्रिय मरीजों का इलाज जारी

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, गांधीनगर, साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का खास इलाज किया जा रहा है और डॉक्टर लगातार उनकी हालत पर नजर रखे हुए हैं। वायरस की पुष्टि वाले सात मरीजों का अभी राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 6 मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस (CHPV) कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे बेहद डरावना बनाती है। इस वायरस की पहली बार पहचान साल 1965 में महाराष्ट्र के 'चांदीपुरा' नाम के गांव में हुई थी, जिसकी वजह से इसका नाम चांदीपुरा पड़ा। यह एक प्रकार का आरएनए वायरस है, जो मुख्य रूप से दिमाग में गंभीर सूजन और संक्रमण पैदा करता है। यह वायरस 9 महीने के शिशु से लेकर 14 साल तक के बच्चों को सबसे जल्दी अपना शिकार बनाता है। वयस्कों के मुकाबले बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण यह उनके शरीर पर बहुत तेजी से हमला करता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस छुआछूत की बीमारी नहीं है यानी यह एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलता। इसके फैलने का असली कारण कीट-पतंगे हैं।

• सैंडफ्लाई (बालू मक्खी)- यह इस वायरस को फैलाने वाला सबसे प्रमुख कीट है। बालू मक्खियां अक्सर कच्चे घरों, मिट्टी की दीवारों की दरारों और सीलन वाली जगहों पर पाई जाती हैं।

• मच्छर और किल्लनी- सैंडफ्लाई के अलावा कुछ खास तरह के मच्छर और किल्लनी भी इस वायरस के वाहक बनते हैं।

बारिश के मौसम में जब नमी और सीलन बढ़ती है, तब इन बालू मक्खियों का प्रजनन तेजी से होता है। इसी वजह से मानसून के समय इस वायरस के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।

क्या हैं वायरस के लक्षण?

संक्रमण के शुरुआत में इसके लक्षण किसी सामान्य फ्लू या दिमागी बुखार जैसे ही लगते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति काफी बिगड़ सकती है। प्रमुख लक्षणों इस प्रकार हैं-

• अचानक तेज बुखार आना

• उल्टी और दस्त होना

• सिर में तेज दर्द और सुस्ती महसूस होना

• दौरे पड़ना या शरीर का ऐंठना

• बेहोशी छाना या बच्चे का भ्रमित स्थिति में जाना

डॉक्टरों के अनुसार, जब यह वायरस दिमाग पर असर डालता है, जिसे मेडिकल भाषा में एन्सेफलाइटिस कहते हैं, तो बेहोशी छा जाती है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को एक साथ नाकाम कर सकता है।

प्रसूता मृत्यु प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग का सख्त एक्शन, अभिलेख न मिलने पर मदर केयर हॉस्पिटल सील
फर्रुखाबाद l
प्रसूता की मृत्यु के मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को आवास विकास स्थित मदर केयर हॉस्पिटल के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए चिकित्सालय को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देश पर उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी (पंजीकरण) डॉ. आर. सी. माथुर ने टीम के साथ अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल का कोई भी संचालक, चिकित्सक अथवा अधिकृत प्रतिनिधि मौके पर उपस्थित नहीं मिला। टीम ने अस्पताल के पंजीकरण, मरीज के उपचार, भर्ती, प्रसव, रेफरल एवं प्रसूता की मृत्यु से संबंधित समस्त अभिलेखों की मांग की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन कोई भी आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। अस्पताल में उपचार संबंधी अभिलेखों का संधारण भी संतोषजनक नहीं पाया गया।
जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रसूता के उपचार से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटोग्राफ एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखने तथा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच की जा सके। साथ ही प्रकरण का मातृ मृत्यु ऑडिट (Death Audit) कराते हुए मृत्यु के वास्तविक कारणों एवं उपचार प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी गई है।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न कराने एवं जांच में सहयोग न करने की स्थिति को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नियमानुसार चिकित्सालय को तत्काल सील कर दिया। साथ ही प्रकरण में संबंधित अभिलेखों की गहन जांच करते हुए आवश्यक विभागीय एवं विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि जनपद में किसी भी मरीज के जीवन के साथ लापरवाही या स्वास्थ्य विभाग के नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी निजी चिकित्सालयों को पंजीकरण की शर्तों का पालन करते हुए उपचार से संबंधित अभिलेखों का विधिवत संधारण करना अनिवार्य है। जांच में सहयोग न करने अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि जनपदवासियों को सुरक्षित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस मामले की जांच निष्पक्ष रूप से पूरी कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार आगे की कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
Every Vaccine Builds a Stronger Future: Prasad Hospitals Hyderabad Promotes Complete Childhood Immunization

Hyderabad: India's successful Pulse Polio Programme is one of the world's greatest public health achievements, proving that awareness, timely vaccination, and collective responsibility can eliminate life-threatening diseases. As the nation observed Pulse Polio Day on June 28, Prasad Hospitals Hyderabad called upon parents to recognize that protecting children extends far beyond a single vaccination campaign. Complete childhood immunization remains one of the most powerful tools for ensuring a healthier future for every child.

Healthcare experts at Prasad Hospitals emphasize that while Pulse Polio campaigns have played a crucial role in keeping India polio-free, every child must receive the full schedule of recommended vaccinations from birth through adolescence. Childhood immunization protects against several potentially serious diseases, including tuberculosis, hepatitis B, diphtheria, pertussis (whooping cough), tetanus, measles, rubella, rotavirus infection, pneumococcal disease, mumps, chickenpox, and many other preventable illnesses.

Vaccination: A Lifelong Investment in Your Child's Health

Medical science has consistently shown that vaccines are among the safest, most effective, and most successful preventive healthcare measures ever developed. Rather than treating diseases after they occur, vaccines prepare the body's immune system to recognize and fight infections before they become serious.

The first few years of a child's life are especially critical because their immune system is still developing. Timely vaccination provides protection during this vulnerable stage, significantly reducing the risk of severe illness, long-term complications, hospitalization, and even death.

Healthcare professionals also point out that vaccination benefits not only individual children but entire communities. High vaccination coverage creates stronger community protection, reducing the spread of infectious diseases and safeguarding children who may be medically unable to receive certain vaccines.

Pulse Polio Day Is a Reminder—Not the Finish Line

While Pulse Polio Day serves as an important national health initiative, Prasad Hospitals believes it should also encourage families to review their children's complete immunization records.

Many parents understandably associate vaccination primarily with Pulse Polio campaigns. However, pediatric specialists explain that children require multiple vaccines at different stages of development to achieve complete protection.

Missing booster doses or delaying scheduled vaccinations can increase the risk of preventable diseases. Parents are encouraged to maintain vaccination records, attend regular pediatric check-ups, and consult healthcare professionals whenever there are questions regarding immunization schedules or missed doses.

According to the management of Prasad Hospitals, "Pulse Polio Day is a celebration of India's public health success, but it is also an opportunity to remind parents that complete childhood vaccination remains a year-round responsibility."

Preventive Healthcare: A Core Commitment at Prasad Hospitals Hyderabad

At Prasad Hospitals Hyderabad, preventive healthcare is considered the foundation of lifelong wellness. Along with advanced medical treatment, the hospital actively promotes disease prevention through education, awareness, and early intervention.

Throughout the year, the hospital organizes community awareness programs across Hyderabad focusing on:

● Childhood Vaccination & Immunization

● Pulse Polio Awareness

● Newborn Care

● Pregnancy Care

● Breastfeeding Education

● Maternal Wellness

● Child Nutrition

● Growth & Development Monitoring

● Women's Preventive Healthcare

● Early Disease Prevention

These educational initiatives aim to help parents make informed healthcare decisions and ensure children receive timely medical care from birth onward.

Advanced Pediatric Care for Every Child

Prasad Hospitals has established itself as a trusted destination for comprehensive pediatric healthcare by combining experienced specialists with modern medical infrastructure.

The hospital offers a wide range of pediatric services, including:

● Routine Childhood Vaccination

● Complete Immunization Programs

● Newborn & Neonatal Care

● Pediatric Consultations

● Growth & Development Assessment

● Nutrition Counseling

● Child Health Screening

● Preventive Pediatric Healthcare

● Management of Childhood Illnesses

Families searching for the best pediatric hospital in Hyderabad often choose Prasad Hospitals for its personalized approach, experienced pediatricians, and commitment to preventive medicine.

Comprehensive Women's Healthcare Under One Roof

Prasad Hospitals is equally recognized for excellence in women's healthcare. Under the leadership of Dr. K. Suma Prasad, one of India's most experienced gynecologists, the hospital provides advanced gynecology, high-risk pregnancy care, maternity services, women's wellness programs, fertility evaluation, and preventive healthcare.

With a multidisciplinary team of experienced pediatricians, gynecologists, neonatologists, nurses, and healthcare professionals, Prasad Hospitals offers complete care for mothers and children under one roof.

Trusted Healthcare Across Hyderabad

With conveniently located branches in Nacharam, Pragathi Nagar (Kukatpally), and Manikonda, Prasad Hospitals continues to serve thousands of families across Hyderabad with compassionate, evidence-based healthcare.

Parents searching online for the best hospital in Hyderabad, best pediatric hospital in Hyderabad, child vaccination centre near me, best gynecology hospital in Hyderabad, pregnancy care in Hyderabad, newborn care, maternity hospital, and preventive healthcare continue to trust Prasad Hospitals for experienced specialists, advanced medical technology, and patient-centered care.

A Message from the Management of Prasad Hospitals

"Every vaccine administered today strengthens the future of tomorrow. India's success against polio proves what is possible when healthcare professionals, governments, and parents work together. We encourage every family to view Pulse Polio Day as the beginning of a larger commitment to complete childhood immunization. At Prasad Hospitals, we remain dedicated to spreading awareness, supporting preventive healthcare, and ensuring every child receives the protection they deserve."

Healthy Children Build a Stronger India

The future of every nation begins with the health of its children. Vaccination protects lives, reduces disease burden, strengthens families, and creates healthier communities.

Prasad Hospitals Hyderabad remains committed to delivering world-class pediatric care, advanced gynecology, maternity services, childhood immunization, and preventive healthcare through its branches at Nacharam, Pragathi Nagar (Kukatpally), and Manikonda.

If you are looking for the best hospital in Hyderabad for childhood vaccination, pediatric care, pregnancy care, newborn care, or women's healthcare, visit Prasad Hospitals and take the first step toward a healthier future for your family.

Prasad Hospitals – Caring for Every Mother. Protecting Every Child. Building a Healthier India.