थलपति विजय बने तमिलनाडु के नए सीएम, छह दशक बाद गैर-द्रविड़ दल का सीएम
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तमिलनाडु की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तमिलगा वेत्री कन्नगम (टीवीके) प्रमुख विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित रंगारंग समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही विजय तमिलनाडु के 18वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। विजय के साथ 9 अन्य नेता भी मंत्रीपद की शपथ ली।
राहुल गांधी भी शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल
इस शपथ ग्रहण समारोह में देश के कई बड़े नेता भी शामिल हुए हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और बीजेपी नेता तमिलिसाई सुंदरराजन, बीजेपी नेता के अन्नामलाई और तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन भी कार्यक्रम में पहुंचे हैं। इसके अलावा फिल्म और राजनीति जगत की कई हस्तियां भी समारोह का हिस्सा बनी हैं।
पीएम मोदी ने विजय को बधाई दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर लोगों के जीवन में सुधार के लिए काम करती रहेगी।
विजय के पिता समारोह में भावुक दिखे
विजय का पूरा परिवार शपथ ग्रहण समारोह में नजर आया। इसे मौके पर उनके पिता और मां काफी भावुक दिखे। साथ ही टीवीके पार्टी के सदस्य भी रोते हुए नजर आए। अपने नेता को मुख्यमंत्री बनते हुए देखकर वे लोग भी इमोशनल हो गए।
विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भावुक दिखीं तृषा
तृषा कृष्णनन और विजय थलापति करीबी दोस्त हैं। काफी फिल्में साथ कर चुके हैं। ऐसे में उनका विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना लाजमी था। इस मौके पर उनकी आंखों में नमी दिखीं। साथ ही चेहरे पर विजय के मुख्यमंत्री बनने की खुशी भी साफ झलक रही थी।
पहले ही चुनाव मे जीतीं 108 सीटें
पहली बार चुनावी मैदान में उतरे विजय ने सिर्फ 2 साल पहले राजनीतिक पार्टी टीवीके बनाई थी। इस चुनाव में उन्हें जनता का भरपूर प्यार मिला। विजय की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया था। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी, लेकिन कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने सरकार बना ली।
द्रविड़ राजनीति का दबदबा खत्म
विजय के शपथ ग्रहण के साथ ही पिछले 49 साल से राज्य सियासत में चल रहा द्रविड़ राजनीति का दबदबा खत्म हो गया। तमिलनाडु में 1967 से ही सी. अन्नादुरई के नेतृत्व में द्रविड़ विचारधारा वाली पार्टी- द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) सत्ता में आई। बाद में द्रमुक से अलग हुई अन्नाद्रमुक ने उसे चुनौती दी। दोनों द्रविड़ दल ही पिछले 49 साल से यहां की सत्ता में काबिज हैं। दो राष्ट्रीय दल- कांग्रेस और भाजपा हमेशा ही इन दोनों दलों की गठबंधन की साथी के तौर पर जुड़ी रहीं, लेकिन अपने दम पर सत्ता हासिल करने में नाकाम रहीं। अब विजय जोसेफ और उनकी टीवीके ने द्रविड़ पार्टियों के इस वर्चस्व को तोड़ने का काम किया है और तमिल राजनीति में अलग पहचान बनाई है।
3 hours ago
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