प्रयागराज में युवक की नृशंस हत्या, रुपये के विवाद में हत्यारों ने बेरहमी से चाकू से वार कर वारदात को अंजाम दिया
प्रयागराज, यमुनापार में सोमवार आधी रात को बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया। चाकू से हमला करके एक युवक की हत्या कर दी गई। बरात में शामिल होने के बाद वह घर जा रहा था, रास्ते में वारदात को अंजाम दिया गया। परिवार के लोगों ने रुपये के लेनदेन के मामले में हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस जांच-पड़ताल कर रही है।
हत्यारोपित फरार
खीरी थाना क्षेत्र के खूंटा चौराहे पर क्षेत्र के चांद खमरिया गांव निवासी 40 वर्षीय राजू आदिवासी पुत्र पारसनाथ आदिवासी की अज्ञात लोगों द्वारा चाकू से मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद आरोपित मौके से फरार हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बरात में शामिल होकर जा रहा था राजू
राजू आदिवासी क्षेत्र के सीकी कला गांव में आई बरात में शामिल होने के बाद घर लौट रहा था। रास्ते में घात लगाए लोगों ने वारदात को अंजाम दिया। इस संबंध में खीरी थाना प्रभारी कृष्ण मोहन सिंह ने बताया कि स्वजन ने मामले में परिवार के लोगों पर रुपये के लेन-देन का आरोप लगाते हुए हत्या करने की नामजद शिकायत दर्ज कराई है। मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
राजू मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता था
राजू आदिवासी मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता था। इन दिनों वह घर आया था। पिता पारसनाथ ने तीन लोगों के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी है। इसमें उनके पड़ोसी कृष्णकांत आदिवासी, अनूप कोल उर्फ अन्नू पुत्र अज्ञात निवासी सुंदर पूर्वा खूंटा थाना खीरी। तहरीर के आधार पर आरोपितों के खिलाफ खीरी थाने में मुकदमा पंजीकृत किया जा रहा है।




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प्रयागराज। शंकरगढ़ नगर में संचालित इंग्लिश मीडियम स्कूलों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बोर्ड पर नाम तो इंग्लिश मीडियम का है, लेकिन कक्षाओं में शिक्षक हिंदी में ही पढ़ाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब पढ़ाई हिंदी में हो रही है तो इंग्लिश मीडियम का टैग लगाने का औचित्य क्या है?अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन हर शैक्षिक सत्र में किताबें बदल देता है। उनका सवाल है कि क्या हर साल इतिहास, गणित या विज्ञान का पाठ्यक्रम बदल जाता है? पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों पर हर वर्ष नई महंगी किताबों का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ज्यादातर स्कूलों में योग्य शिक्षक नहीं हैं। स्कूलों ने स्थानीय स्तर पर ऐसे शिक्षकों को रखा है जिनकी न तो अंग्रेजी पर पकड़ है और न ही हिंदी पर। इससे बच्चों की बुनियाद कमजोर हो रही है। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव भी है शंकरगढ़ के इन स्कूलों में बच्चों के लिए साफ और शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में बच्चे परेशान होते हैं, लेकिन प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। शिक्षक अपनी खामी मानी जब एक पत्रकार के सवाल पर स्कूल की एक शिक्षिका ने खुद स्वीकार किया कि "आपकी बात जायज है। नाम इंग्लिश मीडियम है, लेकिन बातचीत हिंदी में हो रही है, जो गंभीर विषय है। अभिभावकों का कहना है कि जब फीस इंग्लिश मीडियम और सीबीएसई बोर्ड यूपी इंग्लिश मीडियम बोर्ड के नाम पर ली जाती है तो कक्षाओं में हिंदी का उपयोग क्यों होता है? शिक्षक आपस में भी हिंदी में बात करते हैं, जबकि स्कूल कैंपस में संवाद अंग्रेजी में होना चाहिए। इससे बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उनमें अंग्रेजी बोलने की उमंग जगेगी। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इंग्लिश मीडियम के नाम पर चल रहे इन स्कूलों की जांच की जाए। मानकों का पालन न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में न जाए।
Apr 22 2026, 17:33
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