मिजोरम में 6 यूक्रेनियों की गिरफ्तारी, कीव ने दर्ज कराया विरोध, जानें क्या है पूरा मामला?
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भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने यहां छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इन पर अवैध रूप से मिजोरम में प्रवेश करने और फिर पड़ोसी देश म्यांमार जाकर उग्रवादियों को लड़ाई की ट्रेनिंग देने का आरोप है।यूक्रेन की सरकार ने विदेश मंत्रालय के समक्ष अपने इन नागरिकों की गिरफ्तारी का विरोध दर्ज कराते हुए उनकी तत्काल रिहाई और आसान कॉन्सुलर पहुंच दिए जाने की मांग की है।
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क्रेनी नागरिकों को मिजोरम में अवैध रूप से प्रवेश करने और वहां से म्यांमार की सीमा में दाखिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में यूक्रेनियों के अलावा एक अमेरिकी नागरिक को भी पकड़ा गया है। इन सभी को 16 मार्च को कोर्ट में पेश किया गया, जहां इन्हें 27 मार्च तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है।
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मिजोरम सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य
जांच एजेंसियों का दावा है कि ये सभी विदेशी नागरिक मिजोरम पहुंचे थे, जो कि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य माना जाता है। यह राज्य म्यांमार के साथ लगभग 510 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इस क्षेत्र में विदेशी नागरिकों के प्रवेश के लिए ‘रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट’ (RAP) अनिवार्य होता है, लेकिन आरोप है कि इन लोगों ने बिना अनुमति के इस क्षेत्र में प्रवेश किया।
मिजोरम में बिना विशेष परमिट के घुसने का आरोप
यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "13 मार्च 2026 को, भारत गणराज्य में यूक्रेन के छह नागरिकों को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उन पर मिजोरम राज्य में बिना अनुमति के मौजूद होने का आरोप है—जिस राज्य में प्रवेश के लिए एक विशेष परमिट की आवश्यकता होती है—साथ ही उन पर भारत और म्यांमार के बीच की राज्य सीमा को कथित तौर पर अवैध रूप से पार करने का भी आरोप है। फिलहाल, भारत के संबंधित अधिकारी इस मामले में आवश्यक जांच-पड़ताल कर रहे हैं।"
गैर-कानूनी गतिविधियों पुख्ता सबूत नहीं
यूक्रेन ने दावा किया, "अभी तक, ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं जो यह साबित करते हों कि इन यूक्रेनी नागरिकों का भारत या म्यांमार की धरती पर किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में कोई हाथ है। इसके साथ ही, कुछ मीडिया रिपोर्टों में—जिनमें कुछ भारतीय और रूसी मीडिया आउटलेट भी शामिल हैं—उपलब्ध तथ्यों की गलत व्याख्या की गई है; ये रिपोर्टें भ्रामक प्रकृति की हैं और इनमें बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं।"








3 hours ago
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