यूपी SIR: 75 जिलों में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटे, लखनऊ में सबसे अधिक 30.04% वोट डिलीट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश के 75 जिलों में बड़ी संख्या में वोट कटे हैं। राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
एनसीआर और बड़े शहरी जिलों में कटौती का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा। गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत, कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत, बलरामपुर में 25.98 प्रतिशत, मेरठ में 24.65 प्रतिशत, प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत और आगरा में 23.25 प्रतिशत वोट कटे हैं।
पश्चिमी यूपी की बात करें तो सहारनपुर में 16.37 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, बुलंदशहर में 15.14 प्रतिशत, बागपत में 18.15 प्रतिशत, हापुड़ में 22.30 प्रतिशत, शामली में 16.75 प्रतिशत और संभल में 20.29 प्रतिशत वोट काटे गए हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम कटौती दर्ज की गई। ललितपुर में सबसे कम 9.95 प्रतिशत, हमीरपुर में 10.78 प्रतिशत, महोबा में 12.42 प्रतिशत, बांदा में 13 प्रतिशत और झांसी में 13.92 प्रतिशत वोट कटे।
पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में भी कई जिलों में 15 से 20 प्रतिशत तक नाम हटाए गए हैं। वाराणसी में 18.18 प्रतिशत, गोरखपुर में 17.61 प्रतिशत, बलिया में 18.16 प्रतिशत, आजमगढ़ में 15.25 प्रतिशत, जौनपुर में 16.51 प्रतिशत, बस्ती में 15.70 प्रतिशत, सिद्धार्थनगर में 20.33 प्रतिशत, संत कबीर नगर में 19.96 प्रतिशत, सीतापुर में 19.55 प्रतिशत, बहराइच में 20.44 प्रतिशत और गोंडा में 18.40 प्रतिशत वोट कटे हैं।
मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया फर्जी, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए की गई है।
कुल मिलाकर, यूपी SIR के आंकड़े आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश के 75 जिलों में बड़ी संख्या में वोट कटे हैं। राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

लखनऊ। केजीएमयू की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस प्रकरण में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक के परिवार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क की ओर बढ़ती दिख रही है।
लखनऊ /बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से न्याय व्यवस्था का एक बेहद कठोर और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने छह वर्षीय बच्ची के साथ अमानवीय दुष्कर्म के मामले में दोषी 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को समाज की आत्मा पर हमला करार देते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।
Jan 07 2026, 11:57
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