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संसद में वक्फ बिल पेश करने की प्रक्रिया शुरू, रिजिजू बोले-कल तारीख बता देंगे

#union_minister_kiren_rijiju_on_waqf_amendment_bill

वक्फ संशोधन विधेयक कब आएगा इसे लेकर चर्चा का दौर जारी है। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि संसद में वक्फ बिल पेश करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। बिल पर संसद के बाहर खूब विचार-विमर्श हुए हैं। हमें सदन में बहस और चर्चा में भी जरूर भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विधेयक के प्रावधानों से जुड़े हर सवाल का जवाब देने को तैयार है।

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मेरी सभी से अपील है कि जब हम संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहे हैं, तो हमें सदन में बहस और चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए। संसद के बाहर, रिकॉर्ड संख्या में परामर्श और विचार-विमर्श हुए हैं।

किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि जेपीसी ने लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में अब तक की सबसे व्यापक परामर्श प्रक्रिया और सर्वोच्च प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड बनाया है। अब जबकि विधेयक तैयार है, मैं सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे इसमें भाग लें और संसद के पटल पर अपने विचार रखें।

किरेन रिजिजू ने कहा कृपया इस मामले को लेकर लोगों को गुमराह न करें। उन्होंने कहा कि भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि सरकार मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है। उन्होंने कहा कि हम कल तारीख बता देंगे की वक्फ बिल कब ला रहे। सरकार की तैयारी पूरी है।

गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मार्च को एक निजी चैनल से बातचीत में इसी सत्र (बजट सत्र) में वक्फ बिल संसद में पेश करने की बात कही थी। शाह ने कहा था कि इस बिल से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।

माना जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल को 2 अप्रैल को संसद में पेश किया जा सकता है। सरकार पहले लोकसभा में बिल पेश करेगी। सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा।

इससे पहले आज ही केरल के कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य के सांसदों से केंद्र सरकार के इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की। इस पत्र को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा करते हुए रिजिजू ने कहा, खुद अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य होने के नाते वे इस अपील का स्वागत करते हैं। बता दें कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्यमंत्री रिजिजू बौद्ध धर्म के मानने वाले हैं। खुद राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने भी उनकी इस पहचान को रेखांकित कर इसे भारत के लिए गौरवशाली तथ्य बताया था।

तीसरी बार भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे ट्रंप, बोले-संविधान बदलने की सोच रहा हूं

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी दिया। ट्रंप ने कहा है कि वे तीसरे कार्यकाल के लिए विचार कर रहे हैं और इसके लिए संविधान को बदलने के बारे में सोच रहे हैं। अमेरिका का संविधान किसी भी व्यक्ति को केवल दो बार चुने जाने की अनुमति देता है। हालांकि, रविवार को एनबीसी को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह तीसरी बार भी इस पद पर सेवाएं देना चाहते हैं।

एनबीसी न्यूज चैनल को रविवार को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि वे तीसरे कार्यकाल के लिए विचार कर रहे हैं और इसके लिए संविधान को बदलने के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि मजाक नहीं कर रहे हैं। ऐसे तरीके हैं जिनसे आप ऐसा कर सकते हैं। हालांकि इसके बारे में विचार करना अभी काफी जल्दबाजी होगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की जनता उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें तीसरा कार्यकाल देने के लिए तैयार हो जाएगी।

ट्रंप नवंबर में दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं। इससे पहले वह 2017 से 2021 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं। अगर ट्रम्प तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की कोशिश करते हैं तो इसके लिए उन्हें संविधान में संशोधन करना होगा। इसके लिए अमेरिकी संसद और राज्यों से समर्थन की जरूरत होगी।

किस रणनीति पर काम कर रहे ट्रंप?

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनके पास कोई रणनीति है जिससे वे तीसरी बार चुनाव लड़ सकें, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, हां, कुछ तरीके हैं। जब उनसे एक संभावित योजना के बारे में पूछा गया कि क्या उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस 2028 में चुनाव लड़ सकते हैं और फिर ट्रम्प को सत्ता सौंप सकते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, हां, यह एक तरीका हो सकता है, लेकिन और भी तरीके हैं। हालांकि, ट्रंप ने इन तरीकों का खुलासा करने से इनकार कर दिया।

क्या कहता है अमेरिकी संविधान?

संविधान का 22वां संशोधन 1951 में राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के लगातार चार बार निर्वाचित होने के बाद जोड़ा गया था। इसमें कहा गया है कि 'कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर दो बार से अधिक नहीं चुना जाएगा।

क्या ट्रंप संविधान बदल सकते हैं?

ट्रंप को तीसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उतरना है तो उन्हें अमेरिकी संविधान में बदलाव करना होगा, जो इतना आसान नहीं है। ट्रंप को इसके लिए अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव दोनों में दो-तिहाई बहुमत से एक बिल पास कराना होगा। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में इतने सदस्य नहीं हैं।

सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से 52 सीनेटर है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। ये संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई यानी 67% बहुमत से काफी कम है।

अगर ट्रंप ये बहुमत हासिल कर लेते हैं तब भी उनके लिए संविधान में संशोधन करना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इस संशोधन के लिए राज्यों से मंजूरी लेनी होती है।

इसके लिए तीन चौथाई राज्यों का बहुमत मिलन के बाद ही संविधान में संशोधन हो सकता है। यानी 50 अमेरिकी राज्यों में से अगर 38 संविधान में बदलाव के लिए राजी हो जाए तो ही नियम बदल सकते हैं।

क्या अमेरिका भी रूस-चीन की राह पर?

रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन में शी जिनपिंग पहले ही संवैधानिक बदलाव कराकर अपनी सत्ता को लंबा खींच चुके हैं। पुतिन ने रूसी संविधान में संशोधन कर 2036 तक सत्ता में बने रहने का मार्ग प्रशस्त कर लिया, जबकि जिनपिंग ने चीन में राष्ट्रपति पद की समय सीमा को ही खत्म कर दिया। सवाल यह है कि क्या ट्रंप भी इसी राह पर चल रहे हैं?

ट्रंप के करीबी सहयोगी और पूर्व व्हाइट हाउस रणनीतिकार स्टीव बैनन ने हाल ही में दावा किया कि ट्रंप 2028 में फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। बैनन के अनुसार, हम इस पर काम कर रहे हैं, और कुछ विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, लेकिन संविधान की भाषा और व्याख्या को लेकर कानूनी विकल्प खोजे जा रहे हैं।

ट्रंप ने रेयर अर्थ डील पर जेलेंस्की को चेताया, बोले-अगर पीछे हटे तो करना होगा बड़ी परेशानी का सामना

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से यूक्रेन पर खनिजों की डील के लिए दबाव बना रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की जब अमेरिका दौरे पर आए थे, तब दोनों देशों के बीच यूक्रेनी खनिजों की डील होने वाली थी, लेकिन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद यह डील नहीं हो पाई। हालांकि बाद में जेलेंस्की इस डील के लिए तैयार हो गए। फिलहाल यह डील हुई नहीं है और इसके जल्द होने के आसार जताए जा रहे हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को मिनरल डील को लेकर चेतावनी दी है।

ट्रंप ने कहा है कि, जेलेंस्की को देखकर मुझे लग रहा हैं कि वह दुर्लभ खनिज के समझौते से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं और अगर वो ऐसा कुछ करते हैं तो इसका परिणाम ठीक नहीं होगा, उनके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। ट्रंप ने कहा, इन्हीं हरकतों की वजह से यूक्रेन नाटो समूह का हिस्सा नहीं बनने वाला है। अगर जेलेंस्की को लग रहा है कि वह खनिज समझौते पर दोबारा बातचीत शुरू करके इससे बच जाएंगे तो ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।

रेयर अर्थ डील वॉशिंगटन और कीव के बीच एक खास समझौता है, जिसके तहत अमेरिका रूस के खिलाफ युद्ध में कीव को 35 अरब डॉलर, सैन्य उपकरण की मदद के बदले में यूक्रेन के दुर्लभ खनिज संसाधनों का दोहन करेगा।

जेलेंस्की से पहले ट्रंप ने पुतिन की खड़ी की खाट

वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को धमकाने से पहले रूस की राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पर यूक्रेन के साथ युद्धशांति समझौते में दिक्कत उत्पन्न करने के आरोप लगाए और कहा कि वह राष्ट्रपति पुतिन से काफी नाराज हैं।

रूस पर टैरिफ की धमकी

डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते में बाधा डालने के कोशिश को लेकर कहा कि अगर रूस सीजफायर की कोशिश में बाधा डालेगा तो अमेरिका रूसी तेल पर 25 से 50 प्रतिशत तक सेकेंडरी टैरिफ लगा देंगे।

आरएसएस नेता जोशी ने औरंगजेब विवाद को बताया अनावश्यक, बोले- जिसकी जहां आस्था, वहीं जाएगा

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मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को हटाने की कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की मांग के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता सुरेश 'भैयाजी' जोशी ने सोमवार को कहा कि इस विषय को अनावश्यक रूप से उठाया गया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति आस्था रखता है, वह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित इस ढांचे के दर्शन करेगा। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में औरंगजेब को लेकर काफी विवाद देखने को मिला है। नागपुर में मुगल शासक औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर हिंसा भी देखने को मिली।

महाराष्ट्र के औरंगजेब की कब्र को लेकर छिड़े विवाद को आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने अनावश्यक बताया है।भैयाजी जोशी ने कहा कि औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक रूप से उठाया गया है। उनकी मृत्यु भारत में हुई थी, इसलिए उनकी कब्र यहीं बनाई गई है। हमारे पास छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श (रोल मॉडल) है, उन्होंने अफजल खान की कब्र बनवाई थी। यह भारत की उदारता और समावेशिता का प्रतीक है। कब्र बनी रहेगी, जो भी जाना चाहेगा, जाएगा।

इससे पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को औरंगजेब की कब्र को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने लोगों से ऐतिहासिक जानकारी के लिए व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर निर्भर न रहने को भी कहा। ठाकरे ने यह भी कहा कि मुगल शासक शिवाजी नामक विचार को मारना चाहते थे लेकिन असफल रहे और महाराष्ट्र में उनकी मृत्यु हो गई। मनसे प्रमुख ने कहा कि बीजापुर के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता था।

ईद पर कराची में हाफिज सईद का करीबी ढेर, अब्दुल रहमान की गोली मारकर हत्या

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पाकिस्तान में एक के बाद एक आतंकियों को निशाना बनाया जा रहा है। अब कराची में लश्कर-ए-तैयबा नेता हाफिज सईद का करीबी टारगेट किलिंग का शिकार हुआ है। हाफिज सईद के एक करीबी सहयोगी को सोमवार को ईद के दिन पाकिस्तान के कराची में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मरने वाले की पहचान अब्दुल रहमान के रूप में हुई है।

बताया जाता है कि अब्दुल रहमान आतंकवादी संगठन लश्कर के लिए फंड कलेक्शन का काम करता था। जितने भी फंड कलेक्टर कराची में फंड उगाने का काम करते थे वह सभी अब्दुल रहमान के पास आकर फंड जमा करते थे जहां से यह आगे जाता था।

अब्दुल रहमान अहल-ए-सुन्नत वल जमात का प्रमुख था। इस संगठन को पहले सिपाह-ए-शहाब के नाम से जाना जाता था। इसका जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध रहा है। इस संगठन का तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ गहरे संबंध हैं। टीटीपी को पाकिस्तान में अफगानिस्तान तालिबान का प्रमुख सहयोगी माना जाता है।

हाफिज सईद के करीबी पर ये हमला उस समय हुआ, जब वो अपने पिता और अन्य लोगों के साथ था। इस हमले में उसके पिता समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिसमें अब्दुल रहमान की मौके पर ही मौत हो गई।गोली मारने की यह घटना कैमरे में कैद हो गई। इस वीडियो में हमलावरों को रहमान को गोली मारते और भागते हुए दिखाया गया है। इस घटना के दृश्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गए हैं।

पाकिस्तान में हाल के दिनों में आतंकी घटनाओं में शामिल दहशतगर्दों को अज्ञात लोग एक-एक कर ठिकाने लगा रहे हैं। हाल ही में क्वेटा में अज्ञात हमलावरों ने जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के मुफ्ती अब्दुल बाकी नूरजई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नूरजई को क्वेटा एयरपोर्ट के पास गोली मारी गई थी, जिसमें वो बुरी तरह घायल हो गए और अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

अब्दुल रहमान से पहले लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर जिया-उर-रहमान उर्फ नदीम उर्फ कतल सिंधी की पंजाब प्रांत के झेलम इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नदीम को लश्कर संस्थापक हाफिज सईद का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वह जम्मू-कश्मीर के पूंछ-राजौरी क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। उसने 2000 की शुरुआत में जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ की थी और 2005 में वो वापस पाकिस्तान चला गया था।

महाराष्ट्र से होगा पीएम मोदी का उत्तराधिकारी? शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का दावा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे। पीएम नरेंद्र मोदी के आरएसएस हेडक्‍वार्टर जाने के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने मोदी की रिटायरमेंट को लेकर बड़ा दावा किया है। संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी इस साल 75 साल के होने जा रहे हैं लिहाजा अपने रिटायरमेंट प्‍लान के बारे में चर्चा करने के लिए संघ के मुख्‍यालय गए थे। राउत ने दावा करते हुए कहा कि संघ तय करेगा कि पीएम नरेंद्र मोदी का उत्‍तराधिकारी कौन होगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि मोदी का उत्‍तराधिकारी महाराष्‍ट्र से होगा।

संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय अब पूरा हो गया है। अब आरएसएस भी बदलाव चाहते है और बीजेपी के अगले अध्यक्ष को भी चुनना चाहता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पिछले 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए थे, अब वहां मोहन भागवत को टाटा, बाय-बाय कहने गए थे। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस भी देश के नेतृत्व में बदलाव चाहता है, इसलिए पीएम मोदी को बुलाया गया था।

संजय राउत ने कहा कि 10 साल बाद मोदी का नागपुर जाकर सरसंघचालक से मिलना कोई साधारण बात नहीं है। सितंबर में रिटायरमेंट का आवेदन लिखने के लिए शायद वे आरएसएस मुख्यालय गए थे। मेरी जो जानकारी है कि पिछले 10-11 सालों में मोदी जी कभी वहां नहीं गए। इस बार मोदी जी बताने के लिए गए थे कि वे मोहन भागवत जी से कहने जा रहे हैं कि वे टाटा-बाय-बाय कर रहे हैं।

नए नेता संभवतया महाराष्‍ट्र से होगा

संजय राउत ने कहा कि बंद दरवाजे के भीतर क्‍या चर्चाएं हुईं ये तो संभवतया बाहर नहीं आएंगी लेकिन कई संकेतों से इस बात का इशारा मिलता है। उन्‍होंने कहा कि नए नेता का चुनाव संघ करेगा और संभवतया वो महाराष्‍ट्र से होगा।

राउत के दावे पर सीएम फडणवीस का बयान

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संजय राउत के दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कई सालों तक देश का नेतृत्व करते रहेंगे। फडणवीस ने कहा कि 2029 में हम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे। उनके उत्तराधिकारी को खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह (मोदी) हमारे नेता हैं और बने रहेंगे। हमारी संस्कृति में, जब पिता जीवित है, तो उत्तराधिकार के बारे में बात करना अनुचित है। वह मुगल संस्कृति है। इस पर चर्चा करने का समय नहीं आया है।

पीएम मोदी ने आरएसएस की जमकर की तारीफ

बता दें कि इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान नागपुर पहुंचे थे। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जो विचारधारा का बीज 100 साल पहले बोया गया था, वह एक विशाल पेड़ बन गया है। आरएसएस के सिद्धांतों और मूल्यों ने इसे महान ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जिसमें लाखों कार्यकर्ता इसकी शाखाएं हैं।

चैटजीपीटी ने घिबली स्टाइल फोटो जेनरेट करने पर लिया बड़ा फैसला, यूजर्स के लिए बुरी खबर

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ओपनएआई के चैटजीपीटी ने एक नया टूल लॉन्‍च कर इंटरनेट पर तूफान खड़ा कर दिया। हालांकि, अब इसने कंपनी की ही नींद उड़ा दी है। इन दिनों सोशल मीडिया पर घिबली स्टाइल की तस्वीरें की भरमार देखी जा रही हैं। सोशल मीडिया यूजर्स को अब इन तस्वीरों के माध्यम से अपने आप को देखना पसंद करने लगे लगे हैं। पिछले 2-3 दिन से सोशल मीडिया पर घिबली-स्टाइल फोटो की बाढ़ आई हुई है। इसी बीच ओपनएआई के चैटजीपीटी ने अपनी स्टूडियो घिबली-स्टाइल की तस्वीरों को लेकर अपनी नीति में अहम बदलाव किया है।

नए नियम के मुताबिक अब यूजर्स घिबली-स्टाइल की तस्वीरें बनाने के लिए रियल वर्ल्ड की तस्वीरों का उपयोग नहीं कर सकते। इसका साफ-साफ मतलब है कि अब आप ओपनएआई के चैटजीपीटी के माध्यम से कोई भी असल व्यक्ति या तस्वीर को देखकर घिबली-स्टाइल में तस्वीर नहीं बना सकता। जब भी आप अब चैटजीपीटी के माध्यम से तस्वीर बनाने की कोशिश करेंगे तो इसके लिए चैटजीपीटी इमेज जनरेटर ने एक नया संदेश दिखाना शुरू किया है, जिसमें कहा गया है कि अब वह किसी असल व्यक्ति की तस्वीर से घिबली स्टाइल की तस्वीर नहीं बना सकता।

फ्री और पेड यूजर्स पर लगाई लिमिट

यही नहीं, चैटजीपीटी की टीम इसके अलावा भी कुछ बदलाव कर रही है। ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने बताया कि चैटजीपीटी के फ्री यूजर्स को अब हर दिन 3 इमेज बनाने का मौका मिलेगा। हालांकि, ये एक टेंपरेरी सॉल्यूशन है और टीम इस पर काम कर रही है। अब एक दिन में चैटजीपीटी के फ्री यूजर्स लिमिटेड फोटोज ही बना सकेंगे। इसमें पेड यूजर्स को भी लिमिट का सामना करना पड़ेगा।

फ्री यूजर्स को करना होगा इंतजार

इसके अलावा, ओपनएआई ने अपनी इमेज जनरेटर सेवा को मुफ्त यूजर्स के लिए रोलआउट करने में देरी की घोषणा की है, क्योंकि इसे लेकर अधिक मांग आ रही है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने ट्विटर पर कहा कि इस सेवा की लोकप्रियता उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई है, जिससे मुफ्त यूजर्स के लिए इसमें कुछ समय की देरी हो रही है।

सोनिया गांधी ने नई शिक्षा नीति पर केन्द्र को घेरा, बोलीं- शिक्षा व्यवस्था की हत्या बंद होनी चाहिए

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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारत की शिक्षा नीति को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि बीते एक दशक में सरकार ने केवल अपने एजेंडे को लागू करने की कोशिश की है। शिक्षा संस्थानों का निजीकरण और सांप्रदायीकरण किया गया है।

अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में लिखे लेख में सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ‘3 सी’ एजेंडे को आगे बढ़ा रही है और इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा का केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकीकरण करती है। सोनिया ने केंद्र पर संघीय शिक्षा ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राज्य सरकारों को महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों से बाहर रखकर शिक्षा के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है।

राज्य सरकारों पर दबाव बनाया जाना शर्मनाक

सोनिया गांधी ने कहा कि 2019 से शिक्षा पर केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक नहीं बुलाई गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े बड़े बदलावों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों से एक बार भी बात नहीं की, जबकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के लिए राज्य सरकारों पर दबाव बनाया जाना और फंड रोकना शर्मनाक बात है।

शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किया गया

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने इस लेख में 89000 स्कूल के बंद होने, बीजेपी-आरएसएस से जुड़े लोगों की भर्ती जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के बच्चों और युवाओं की शिक्षा के प्रति बेहद उदासीन है। इसमें शिक्षा प्रणाली को जनसेवा की भावना से वंचित रखा गया और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी नियमों के नए मसौदे में राज्य सरकारों के विश्वविद्यालय में भी कुलपति की नियुक्ति से राज्यों को बाहर कर राज्यपाल के ज़रिए केंद्र सरकार को अधिकार दिया गया है जो संघवाद पर बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था की हत्या बंद होनी चाहिए।

फिर मोदी सरकार के मुरीद हुए शशि थरूर, जानें अब कौन सी बात आई पसंद

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पूर्व राजनयिक, केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसे उनकी पार्टी की लाइन के खिलाफ माना जा सकता है।शशि थरूर ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की तारीफ की है। इस बार उन्होंने वैक्सीन मैत्री पहल की जमकर प्रशंसा की है।उन्होंने कहा कि इस पहल ने भारत की ग्लोबल सॉफ्ट पावर को मजबूत किया है। साथ ही देश को एक उत्तरदायी वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया।

वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को भी सशक्त किया-थरूर

अपने एक लेख में शशि थरूर ने कहा कि भारत ने अपनी वैक्सीन उत्पादन क्षमता को प्रभावी ढंग से उपयोग किया, जिससे वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति और मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत भारत ने ना केवल जरूरतमंद देशों को मदद दी, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को भी सशक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत ने आगे बढ़कर अन्य देशों को प्राथमिकता दी और कई देशों की मदद की।

चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया-थरूर

कांग्रेस सांसद ने ये भी कहा कि वैक्सीन मैत्री प्रोग्राम ने दक्षिण एशिया और अफ्रीका में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का काम किया। उन्होंने माना कि भारत की वैक्सीन कूटनीति ने देश की सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान भारत को अपने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देनी पड़ी, लेकिन फिर भी उसकी वैक्सीन कूटनीति वैश्विक मंच पर असरदार साबित हुई।

वैश्विक मंच पर मजबूत छवि-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि यह सच है कि कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत के वैक्सीन एक्सपोर्ट को अस्थायी रूप से बाधित किया है, जिससे घरेलू जरूरतों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ संतुलित करने की चुनौतियों पर ध्यान गया। इसके बावजूद, भारत की वैक्सीन कूटनीति उसकी विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनी, जो रणनीतिक हितों के साथ मानवतावाद को जोड़ने की उसकी क्षमता को दर्शाती है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर को काफी हद तक बढ़ाया है, जिससे विकासशील दुनिया में यह दर्शाया गया है कि भारत मानवीय सहायता को प्राथमिकता दे सकता है, जिससे वैश्विक मंच पर एक उदार और विश्वसनीय भागीदार के रूप में इसकी छवि मजबूत हुई है।

क्या है 'वैक्सीन मैत्री' पहल?

बता दें कि 'वैक्सीन मैत्री'के तहत भारत ने कोरोना महामारी के समय में अन्य जरूरतमंद देशों को भारी मात्रा में घरेलू वैक्सीन मुहैया करवाई थी। सरकार ने 10 जनवरी 2021 को इस पहल की शुरुआत की थी। वहीं भारत ने कोवैक्स पहल के जरिए भी ग्लोबल वैश्विक डिस्ट्रीब्यूशन में अहम भूमिका निभाई थी।

मानव तस्करी के खिलाफ एनआईए का बड़ा एक्शन, डंकी रूट से अमेरिका भेजने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। साथ ही एनआईए ने इस रैकेट के सरगना को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी गगनदीप सिंह उर्फ गोल्डी पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर का रहने वाला है। आरोपी लोगों को गैरकानूनी तरीके यानी डंकी रूट के जरिए लोगों को अमेरिका भेजने के काम में शामिल था।

एनआईए के बयान के अनुसार, आरोपी ने पंजाब के एक व्यक्ति को अवैध रूप से अमेरिका भेजा था, जिसे इस महीने की शुरुआत में भारत वापस भेज दिया गया। पीड़ित पंजाब के तरनतारन जिले का रहने वाला है। गोल्डी ने उसे दिसंबर 2024 में डंकी रूट के जरिये अमेरिका भेजा था। इसके लिए आरोपी एजेंट ने उससे 45 लाख रुपये लिए थे। अमेरिकी अधिकारियों ने 15 फरवरी 2025 को उसे भारत निर्वासित कर दिया। निर्वासन के बाद पीड़ित ने आरोपी एजेंट के खिलाफ शिकायत की।

अमेरिकी अधिकारियों ने पीड़ित को 15 फरवरी को वापस भारत भेज दिया था। उसके बाद उसने आरोपी एजेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पहले यह केस पंजाब पुलिस ने दर्ज किया था, लेकिन 13 मार्च को एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया था।

एनआईए की जांच में पता चला कि गोल्डी के पास लोगों को विदेश भेजने के लिए कोई लाइसेंस,कानूनी परमिट या पंजीकरण नहीं था, उसने डंकी रूट के जरिए पीड़ित को स्पेन, साल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मैक्सिको के रास्ते अमेरिका भेजा था।