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रिफाइंड ऑयल सेहत के लिए खतरा!आयुर्वेद ने सरसों के तेल को बताया बेहतर


आजकल अधिकतर घरों में खाना पकाने के लिए रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या यह सच में सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक? दूसरी ओर, सरसों का तेल जिसे आयुर्वेद में अत्यधिक लाभकारी माना गया है, क्या वाकई बेहतर विकल्प है? आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

रिफाइंड ऑयल: कितना सेहतमंद, कितना नुकसानदायक?

रिफाइंड ऑयल को आकर्षक बनाने और उसका स्वाद एवं रंग सुधारने के लिए इसे विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। लेकिन इन प्रक्रियाओं के कारण यह कई तरह के पोषक तत्व खो देता है और कुछ हानिकारक तत्व इसमें आ सकते हैं।

रिफाइंड ऑयल के संभावित नुकसान

ट्रांस फैट और हानिकारक केमिकल्स – रिफाइंड तेल को हाई टेम्परेचर पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसमें ट्रांस फैट बन सकता है, जो हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है।

ओमेगा-6 फैटी एसिड की अधिकता – यह सूजन (inflammation) को बढ़ा सकता है और कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।

एंटीऑक्सीडेंट की कमी – रिफाइंड करने की प्रक्रिया में ऑयल के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट जैसे विटामिन E और अन्य पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

लीवर और पाचन तंत्र पर असर – अत्यधिक प्रोसेस्ड तेल हमारे लीवर और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है।

आयुर्वेद में सरसों के तेल का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार, सरसों का तेल गुणकारी और औषधीय होता है। यह न केवल खाने में उपयोगी है बल्कि त्वचा, बालों और शरीर की मालिश के लिए भी बेहतरीन है।

सरसों के तेल के फायदे

हृदय के लिए लाभकारी – इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण – सरसों का तेल संक्रमण से बचाव करता है और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होता है।

पाचन में सहायक – यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है।

जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत – सरसों के तेल से मालिश करने से अस्थियों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल – यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

रिफाइंड तेल की जगह क्या अपनाएं?

अगर आप सेहतमंद जीवन चाहते हैं, तो रिफाइंड तेल की जगह ठंडे दबाव (Cold-Pressed) तेलों का इस्तेमाल करें। इनमें सरसों का तेल, नारियल तेल, तिल का तेल और देसी घी शामिल हैं।

रिफाइंड ऑयल भले ही आज के समय में अधिक प्रचलित हो, लेकिन यह सेहत के लिए उतना फायदेमंद नहीं है। सरसों का तेल एक पारंपरिक, प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्प है, जिसे आयुर्वेद भी समर्थन करता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य की परवाह करते हैं, तो अपने आहार में रिफाइंड तेल की बजाय शुद्ध और पारंपरिक तेलों को अपनाएं।

कॉफी में मिलाएं ये 1 चीज, मिनटों में हटेंगे ब्लैकहेड्स!दाग-धब्बे होंगे साफ, चेहरे पर आएगा नेचुरल ग्लो


अगर आप नाक और चेहरे से ब्लैकहेड्स हटाने और दाग-धब्बे कम करने का प्राकृतिक तरीका ढूंढ रहे हैं, तो कॉफी पाउडर आपके लिए एक बेहतरीन उपाय हो सकता है। कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा को डीप क्लीन करने और उसे निखारने में मदद करते हैं। अगर इसमें एक खास चीज मिला दी जाए, तो इसका असर और भी बढ़ जाता है।

क्या मिलाएं? – शहद

कॉफी पाउडर में शहद मिलाने से यह एक प्रभावी स्क्रब बन जाता है, जो नाक और चेहरे से ब्लैकहेड्स हटाने में मदद करता है।

कॉफी और शहद स्क्रब बनाने और लगाने का तरीका

सामग्री:

1 चम्मच कॉफी पाउडर

1 चम्मच शहद

बनाने की विधि:

एक कटोरी में कॉफी पाउडर और शहद को अच्छी तरह मिला लें।

इसे हल्के हाथों से चेहरे पर खासकर नाक और ब्लैकहेड्स वाली जगह पर लगाएं।

5 मिनट तक हल्के हाथों से स्क्रब करें।

10-15 मिनट तक इसे सूखने दें।

गुनगुने पानी से धो लें और मॉइश्चराइज़र लगा लें।

फायदे:

✅ ब्लैकहेड्स हटाए – कॉफी के दाने त्वचा को एक्सफोलिएट कर ब्लैकहेड्स और डेड स्किन हटाने में मदद करते हैं।

✅ दाग-धब्बे कम करे – शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दाग-धब्बों को हल्का करने में सहायक होते हैं।

✅ चेहरे को ग्लोइंग बनाए – यह स्क्रब त्वचा की गहराई से सफाई कर उसे चमकदार बनाता है।

कब और कितनी बार लगाएं?

इस स्क्रब को हफ्ते में 2-3 बार लगाने से अच्छे नतीजे मिलते हैं।

अगर आप नेचुरल तरीके से ब्लैकहेड्स हटाना चाहते हैं, तो यह स्क्रब जरूर आजमाएं।

महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा, जानें कारण और बचाव


सर्वाइकल कैंसर क्या है?

सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में होने वाला कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। यह कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, खासकर 35 से 65 वर्ष की उम्र में इसका खतरा अधिक होता है।

क्यों बढ़ जाता है उम्र के साथ खतरा?

कुछ खास कारणों से उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है:

1. HPV संक्रमण का देर से असर

HPV संक्रमण कई सालों तक शरीर में निष्क्रिय रह सकता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर यह कैंसर का रूप ले सकता है।

2. कमजोर इम्यून सिस्टम

40-50 की उम्र के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कम होने लगती है, जिससे शरीर संक्रमण से लड़ने में सक्षम नहीं रहता।

3. नियमित जांच न कराना

35-40 की उम्र के बाद बहुत सी महिलाएं अपनी सेहत पर ध्यान देना कम कर देती हैं और नियमित पैप स्मीयर टेस्ट या HPV टेस्ट नहीं करातीं, जिससे समय रहते बीमारी का पता नहीं चलता।

4. हार्मोनल बदलाव और अनहेल्दी लाइफस्टाइल

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। धूम्रपान, असंतुलित आहार और व्यायाम की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकता है।

5. जन्म नियंत्रण गोलियों का लंबे समय तक इस्तेमाल

कुछ शोधों के अनुसार, जो महिलाएं कई वर्षों तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं, उनमें सर्वाइकल कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है।

कैसे करें बचाव?

1. HPV वैक्सीन लें

HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। इसे 9 से 26 वर्ष की उम्र तक लिया जा सकता है, लेकिन 45 साल तक की महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह से यह वैक्सीन लग सकती है।

2. नियमित जांच कराएं

पैप स्मीयर टेस्ट: 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर 3-5 साल में एक बार यह टेस्ट कराना चाहिए।

HPV टेस्ट: 30 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में एक बार यह टेस्ट कराना चाहिए।

3. सुरक्षित यौन संबंध बनाएं

असुरक्षित यौन संबंध सर्वाइकल कैंसर का एक बड़ा कारण हो सकता है। इसलिए कंडोम का इस्तेमाल करें और एक से अधिक पार्टनर से संबंध बनाने से बचें।

4. धूम्रपान और शराब से बचें

स्मोकिंग और शराब पीने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जिससे HPV संक्रमण और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

5. हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज करें

हरी सब्जियां, फल, और फाइबर युक्त भोजन का सेवन करें।

विटामिन C और E से भरपूर भोजन लें।

रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।

सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर लेकिन बचाव योग्य बीमारी है। सही समय पर जांच, वैक्सीन और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर महिलाएं इस बीमारी से बच सकती हैं। 40 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए और नियमित रूप से डॉक्टरी जांच करानी चाहिए।

रोज एक कीवी खाने से दूर होंगी 10 बड़ी परेशानियां, सेहत में दिखेगा जबरदस्त सुधार


कीवी एक स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर फल है, जिसे सुपरफूड भी कहा जाता है। यह विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर होता है, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है। अगर आप रोज एक कीवी खाते हैं, तो आपकी सेहत में जबरदस्त सुधार हो सकता है। आइए जानते हैं कि रोजाना कीवी खाने से कौन-कौन सी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

1. इम्यून सिस्टम मजबूत बनाता है

कीवी में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करता है और आपको बीमारियों से बचाता है।

2. पाचन तंत्र को सुधारता है

इसमें प्राकृतिक फाइबर मौजूद होता है, जो कब्ज और अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है। कीवी पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है और पाचन को सुचारू बनाता है।

3. स्किन ग्लोइंग बनती है

कीवी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C त्वचा को नमी प्रदान करते हैं, जिससे स्किन ग्लोइंग और हेल्दी दिखती है। यह मुंहासों और झुर्रियों को भी कम करता है।

4. दिल की बीमारियों से बचाव

कीवी खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है और हार्ट हेल्दी रहता है। इसमें पोटैशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखता है।

5. वजन घटाने में मददगार

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो कीवी को अपनी डाइट में शामिल करें। इसमें कम कैलोरी होती है और यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है।

6. आंखों की रोशनी बढ़ाता है

कीवी में विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो आंखों की रोशनी को बेहतर बनाते हैं और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्याओं से बचाते हैं।

7. तनाव और डिप्रेशन कम करता है

इसमें सेरोटोनिन नामक कंपाउंड पाया जाता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और तनाव को कम करने में मदद करता है। यह नींद की गुणवत्ता भी सुधारता है।

8. डायबिटीज के लिए फायदेमंद

कीवी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित फल माना जाता है।

9. हड्डियों को मजबूत बनाता है

इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बचाता है।

10. डिटॉक्सिफिकेशन में मददगार

कीवी शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे बॉडी डिटॉक्स होती है और एनर्जी लेवल बना रहता है।

निष्कर्ष

अगर आप अपनी सेहत को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो रोजाना कीवी का सेवन जरूर करें। यह एक छोटा फल होते हुए भी कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है और आपको हेल्दी और फिट बनाए रखता है।

दांतों ही नहीं, हड्डियों के दर्द में भी कारगर लौंग! जानिए इसके 9 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका


लौंग भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक खास मसाला है, जो न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि कई बीमारियों को दूर करने में भी मदद करता है। अक्सर लौंग को दांतों के दर्द से राहत के लिए जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हड्डियों के दर्द से लेकर पाचन तंत्र और इम्यूनिटी तक को मजबूत करने में कारगर है? आइए जानते हैं लौंग के 9 जबरदस्त फायदे।

1. हड्डियों और जोड़ों के दर्द में राहत

लौंग में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण हड्डियों और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं। इसमें यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है और गठिया जैसी समस्याओं में राहत दिलाता है।

2. दांतों के दर्द में असरदार

लौंग का तेल या कच्ची लौंग चबाने से दांतों के दर्द में तुरंत आराम मिलता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एनाल्जेसिक गुण होते हैं, जो मसूड़ों की सूजन को कम करते हैं और ओरल हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।

3. पाचन तंत्र को बनाए दुरुस्त

लौंग के सेवन से पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। खाने के बाद लौंग का सेवन करने से पेट हल्का महसूस होता है।

4. इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार

लौंग में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाते हैं। इससे संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।

5. सर्दी-जुकाम और गले की खराश में फायदेमंद

लौंग का सेवन करने से गले की खराश, खांसी और सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है। गर्म पानी में लौंग डालकर पीने से गले की सूजन कम होती है और सांस लेने में आसानी होती है।

6. ब्लड शुगर को नियंत्रित करे

लौंग डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होती है। यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है और इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाती है।

7. दिल को रखे स्वस्थ

लौंग में मौजूद यूजेनॉल तत्व कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। यह रक्त संचार में सुधार करता है और हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।

8. तनाव और चिंता को कम करे

लौंग का सेवन मानसिक तनाव को कम करने में भी मदद करता है। इसकी सुगंध और पोषक तत्व मूड को बेहतर बनाते हैं और नींद की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।

9. स्किन और बालों के लिए लाभदायक

लौंग में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा पर मुंहासे और संक्रमण को रोकते हैं। साथ ही, यह बालों के झड़ने की समस्या को कम करता है और उन्हें मजबूत बनाता है।

कैसे करें लौंग का सेवन?

आप रोज़ सुबह गुनगुने पानी के साथ 1-2 लौंग खा सकते हैं।

लौंग को चाय में डालकर उबालकर पी सकते हैं।

दांतों के दर्द में लौंग का तेल लगाना फायदेमंद होता है।

हड्डियों के दर्द में लौंग का तेल हल्के गुनगुने तेल में मिलाकर मालिश कर सकते हैं।

सावधानी बरतें

ज्यादा मात्रा में लौंग खाने से पेट में जलन हो सकती है।

ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें।

लौंग सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। अगर आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल करेंगे, तो यह आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाएगी।

गद्दे को कहें अलविदा! दो हफ्ते फर्श पर सोने से शरीर में होंगे ये चौंकाने वाले बदलाव

गद्दे पर सोना आजकल एक आम आदत बन चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना गद्दे के फर्श पर सोने से आपके शरीर पर क्या असर पड़ेगा? कई संस्कृतियों में लोग सदियों से फर्श पर सोते आ रहे हैं, और अब वैज्ञानिक भी इसके कुछ फायदों को मानने लगे हैं। अगर आप दो हफ्ते तक फर्श पर सोते हैं, तो आपके शरीर में कुछ हैरान करने वाले बदलाव हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन बदलावों के बारे में।

1. रीढ़ की हड्डी होगी सीधी और मजबूत

गद्दे अक्सर शरीर को जरूरत से ज्यादा सहारा देते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी की प्राकृतिक स्थिति बिगड़ सकती है। लेकिन जब आप फर्श पर सोते हैं, तो आपकी रीढ़ अपनी प्राकृतिक अवस्था में आ जाती है, जिससे बैक पेन कम होने और शरीर को सही पोस्चर मिलने में मदद मिलती है।

2. कमर और पीठ दर्द में राहत

अगर आपको अक्सर कमर या पीठ में दर्द रहता है, तो फर्श पर सोना एक असरदार उपाय हो सकता है। एक नरम गद्दे पर सोने से शरीर झुक सकता है, जिससे पीठ में तनाव बढ़ता है। लेकिन फर्श की सपाट सतह पर सोने से शरीर को सही सपोर्ट मिलता है और दर्द कम हो सकता है।

3. नींद की गुणवत्ता में सुधार

गद्दे पर ज्यादा मुलायम या असमान सतह होने के कारण कई बार नींद में रुकावट आ सकती है। लेकिन फर्श पर सोने से शरीर जल्दी आरामदायक स्थिति में आ जाता है, जिससे गहरी और बेहतर नींद मिलती है।

4. मांसपेशियों और जोड़ों में लचीलापन

फर्श पर सोने से शरीर की मांसपेशियां और जोड़ों को स्ट्रेच होने का मौका मिलता है। इससे शरीर ज्यादा लचीला बनता है और सुबह उठने पर जकड़न या अकड़न महसूस नहीं होती।

5. रक्त संचार में सुधार

जब आप फर्श पर सोते हैं, तो आपका शरीर सीधा और संतुलित रहता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है। इससे शरीर के सभी अंगों को सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषण मिलता है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

6. बेहतर बॉडी पोस्चर

गलत तरीके से सोने की आदत आपकी बॉडी पोस्चर को खराब कर सकती है। लेकिन फर्श पर सोने से रीढ़ और गर्दन को सही स्थिति में रहने में मदद मिलती है, जिससे आपकी मुद्रा सुधरती है और शरीर अधिक संतुलित महसूस करता है।

7. मानसिक शांति और रिलैक्सेशन

फर्श पर सोने से शरीर और दिमाग को आराम मिलता है। यह योग और ध्यान करने वालों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह शरीर को प्राकृतिक रूप से रिलैक्स करने में मदद करता है।

क्या फर्श पर सोना सभी के लिए फायदेमंद है?

हालांकि फर्श पर सोने के कई फायदे हैं, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। अगर आपको गठिया, हड्डियों की कोई समस्या या अत्यधिक ठंडे फर्श पर सोने की परेशानी है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।

कैसे करें शुरुआत?

अगर आप गद्दे को अलविदा कहकर फर्श पर सोना शुरू करना चाहते हैं, तो शुरुआत में एक योगा मैट या पतली चादर बिछाकर सोने की आदत डालें। धीरे-धीरे जब शरीर इसके अनुकूल हो जाए, तो आप बिना किसी सपोर्ट के भी सो सकते हैं।

निष्कर्ष

फर्श पर सोना एक प्राकृतिक तरीका है जो आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने, दर्द से राहत देने, और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है। हालांकि, हर किसी के लिए यह सही नहीं हो सकता, इसलिए अपनी जरूरत के अनुसार इसे अपनाएं।

इन 10 चीजों को कच्चा खाना सेहत पर पड़ेगा भारी,जानें कौन-से फूड्स से बचना है जरूरी!

हम में से कई लोग हेल्दी रहने के लिए कच्ची सब्जियां और फलों का सेवन करते हैं, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जिन्हें कच्चा खाने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें मौजूद बैक्टीरिया, टॉक्सिन्स या हार्ड टू डाइजेस्ट कंपाउंड्स पाचन और सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। आइए जानते हैं 10 ऐसे फूड्स जिन्हें कच्चा खाने से बचना चाहिए।

1. आलू

कच्चे आलू में सोलानिन नामक जहरीला तत्व पाया जाता है, जो पेट दर्द, अपच और सिरदर्द का कारण बन सकता है। इसके अलावा, कच्चे आलू का स्टार्च पचाने में मुश्किल होता है, जिससे पेट खराब हो सकता है।

2. राजमा

राजमा को कच्चा या अधपका खाने से इसमें मौजूद फाइटोहैग्लूटिनिन नामक टॉक्सिन शरीर में जहरीला असर डाल सकता है। यह उल्टी, डायरिया और पेट दर्द का कारण बन सकता है। इसलिए राजमा को सही तरीके से पकाकर ही खाना चाहिए।

3. सोया बीन्स

कच्चे सोया बीन्स में ट्रिप्सिन इन्हिबिटर और फाइटिक एसिड होता है, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को रोक सकता है और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे हमेशा पकाकर ही खाना चाहिए।

4. ब्रोकोली और फूलगोभी

हालांकि ये सब्जियां स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं, लेकिन इन्हें कच्चा खाने से पेट फूलना, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनमें मौजूद गॉइट्रोजेन्स थायरॉइड ग्रंथि को प्रभावित कर सकते हैं।

5. मशरूम

कुछ किस्मों के मशरूम कच्चे खाने पर टॉक्सिक हो सकते हैं। इनमें हाइड्राजिन नामक जहरीला तत्व हो सकता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। हमेशा मशरूम को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

6. बैंगन

कच्चे बैंगन में भी आलू की तरह सोलानिन पाया जाता है, जो बड़ी मात्रा में खाने पर टॉक्सिक हो सकता है। यह पेट दर्द और मतली जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

7. चिकन और अन्य कच्चा मांस

कच्चे चिकन और मांस में साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया होते हैं, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। इन्हें हमेशा अच्छे से पकाकर ही खाना चाहिए।

8. अंडे

कच्चे अंडों में साल्मोनेला बैक्टीरिया हो सकता है, जो गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए कच्चे अंडे या उनसे बनी चीजों (जैसे कि मेयोनेज़) को ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए।

9. भिंडी

कच्ची भिंडी में लेक्टिन नामक तत्व पाया जाता है, जो पेट में सूजन और अपच की समस्या पैदा कर सकता है। इसे हल्का भूनकर या पकाकर खाना ज्यादा सुरक्षित होता है।

10. कच्चा दूध

बिना उबाला हुआ दूध (रॉ मिल्क) कई बार ई-कोलाई, साल्मोनेला और लिस्टेरिया जैसे खतरनाक बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकता है, जिससे पेट में संक्रमण और अन्य बीमारियां हो सकती हैं।

निष्कर्ष

कुछ खाद्य पदार्थ पोषण से भरपूर होते हैं, लेकिन उन्हें कच्चा खाना आपके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आप सही तरीके से पका हुआ और सुरक्षित भोजन करें ताकि आप किसी भी तरह की बीमारी से बच सकें।

अगर ब्लड शुगर 300 के पार पहुंचा, तो आजमाएं ये 5 घरेलू नुस्खे, तेजी से नियंत्रण होगा संभव

अगर आपका ब्लड शुगर 300 mg/dL से ज्यादा हो गया है, तो यह खतरनाक स्थिति हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, लेकिन कुछ घरेलू उपाय भी हैं जो ब्लड शुगर को तेजी से नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

1. मेथी के दाने (Fenugreek Seeds)

मेथी के बीज ब्लड शुगर लेवल को कम करने में बहुत फायदेमंद होते हैं।

कैसे करें इस्तेमाल?

1 गिलास पानी में 1 चम्मच मेथी दाने रातभर भिगोकर सुबह खाली पेट पिएं।

रोजाना ऐसा करने से ब्लड शुगर तेजी से नियंत्रित होगा।

2. दालचीनी (Cinnamon)

दालचीनी में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं।

कैसे करें इस्तेमाल?

1 गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रोज पिएं।

इसे रोजाना पीने से ब्लड शुगर तेजी से कम हो सकता है।

3. गिलोय और नीम (Giloy & Neem)

गिलोय और नीम प्राकृतिक रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।

कैसे करें इस्तेमाल?

गिलोय का जूस या काढ़ा सुबह खाली पेट पिएं।

नीम के पत्तों का रस या 4-5 पत्ते चबाने से भी फायदा होता है।

4. एलोवेरा और करेला (Aloe Vera & Bitter Gourd)

एलोवेरा और करेला ब्लड शुगर को तेजी से कम करने में मदद करते हैं।

कैसे करें इस्तेमाल?

1 गिलास करेला जूस में 1 चम्मच एलोवेरा जूस मिलाकर रोज पिएं।

इससे शुगर लेवल तेजी से नियंत्रित होता है।

5. ज्यादा पानी पिएं और व्यायाम करें

ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ने पर ज्यादा पानी पीना और हल्की फिजिकल एक्टिविटी करना मदद कर सकता है।

क्या करें?

रोज 3-4 लीटर पानी पिएं, ताकि शरीर से अतिरिक्त शुगर बाहर निकले।

योग, प्राणायाम और वॉक करने से ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और शुगर कंट्रोल में रहती है।

सावधानी:

यदि ब्लड शुगर 300 mg/dL से ज्यादा हो और बार-बार बढ़ रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ये नुस्खे मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं हैं, लेकिन ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।

रूखे और बेजान बालों के लिए वरदान है एलोवेरा, जानें फायदे और लगाने का तरीका


एलोवेरा के बालों में लगाने के फायदे

एलोवेरा एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है जिसे स्किन और बालों की देखभाल के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट बालों को स्वस्थ, मजबूत और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। आइए जानें एलोवेरा के बालों में लगाने के मुख्य फायदे।

1. बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है

एलोवेरा में मौजूद प्रोटीयोलिटिक एंजाइम (Proteolytic Enzymes) स्कैल्प के डेड स्किन सेल्स को हटाने में मदद करते हैं, जिससे बालों की ग्रोथ तेज होती है। यह हेयर फॉलिकल्स को पोषण देकर बालों को तेजी से बढ़ाने में सहायक होता है।

2. डैंड्रफ (रूसी) से छुटकारा दिलाता है

एलोवेरा की एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज डैंड्रफ को खत्म करने में मदद करती हैं। यह स्कैल्प को हाइड्रेट करता है और सूखापन दूर करके रूसी की समस्या को कम करता है।

3. बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है

एलोवेरा जेल बालों को डीप मॉइश्चराइज करता है, जिससे बाल नर्म, मुलायम और सिल्की हो जाते हैं। यह बालों को एक नैचुरल ग्लो देता है और फ्रिज़ को कम करने में मदद करता है।

4. बालों का झड़ना रोकता है

एलोवेरा में विटामिन A, C, और E पाए जाते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने और हेयर फॉल को कम करने में मदद करते हैं। यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं।

5. स्कैल्प को ठंडक और पोषण देता है

अगर आपकी स्कैल्प में खुजली, जलन या इरिटेशन की समस्या है, तो एलोवेरा जेल लगाने से राहत मिलती है। इसके ठंडक देने वाले गुण स्किन को शांत करते हैं और स्कैल्प को स्वस्थ बनाए रखते हैं।

6. नैचुरल कंडीशनर का काम करता है

एलोवेरा एक बेहतरीन नैचुरल कंडीशनर है जो बालों को सॉफ्ट और स्मूथ बनाता है। यह ड्राय और डैमेज्ड हेयर को रिपेयर करने में मदद करता है और उन्हें हेल्दी बनाए रखता है।

एलोवेरा बालों में लगाने का सही तरीका

एलोवेरा जेल और नारियल तेल: एक चम्मच एलोवेरा जेल में नारियल तेल मिलाकर बालों में लगाएं और 30 मिनट बाद धो लें।

एलोवेरा और मेथी मास्क: एलोवेरा जेल में मेथी पाउडर मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं और एक घंटे बाद शैम्पू कर लें।

एलोवेरा और दही: एलोवेरा जेल में दही मिलाकर बालों में लगाने से बालों को गहराई से पोषण मिलता है और रूसी की समस्या कम होती है।

एलोवेरा बालों के लिए एक नेचुरल और असरदार उपाय है, जिसे नियमित रूप से लगाने से बालों की सेहत में सुधार होता है।

रोजाना पीएं टमाटर का जूस, पाएँ जबरदस्त फायदे,सेहत में दिखेगा कमाल, हर कोई पूछेगा राज


टमाटर न केवल सब्जियों में इस्तेमाल होता है बल्कि इसका जूस भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। अगर आप रोजाना टमाटर का जूस पीते हैं, तो इससे कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। यह न केवल आपकी त्वचा को चमकदार बनाता है, बल्कि हृदय, पाचन और वजन घटाने में भी मदद करता है।

टमाटर के जूस के फायदे

1. त्वचा में निखार लाए

टमाटर का जूस एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C से भरपूर होता है, जिससे त्वचा पर चमक आती है और दाग-धब्बे कम होते हैं।

2. वजन घटाने में सहायक

टमाटर का जूस कैलोरी में कम और फाइबर में ज्यादा होता है, जिससे पेट भरा हुआ महसूस होता है और भूख कम लगती है।

3. हृदय को बनाए स्वस्थ

टमाटर में लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है और हृदय संबंधी बीमारियों से बचाता है।

4. पाचन तंत्र को करे मजबूत

टमाटर का जूस फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पाचन सही रहता है और कब्ज की समस्या दूर होती है।

5. इम्यूनिटी बढ़ाए

विटामिन C और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर यह जूस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

6. शरीर को करे डिटॉक्स

टमाटर का जूस शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है और शरीर को अंदर से साफ करता है।

टमाटर का जूस बनाने की विधि

सामग्री:

2 बड़े टमाटर

आधा कप पानी

चुटकी भर काला नमक

स्वादानुसार नींबू रस

बनाने की विधि:

टमाटर को छोटे टुकड़ों में काटें।

ब्लेंडर में डालकर थोड़ा पानी मिलाएं और पीस लें।

इसे छानकर गिलास में निकालें।

काला नमक और नींबू रस मिलाकर पीएं।

निष्कर्ष

अगर आप रोजाना टमाटर का जूस पीना शुरू कर दें, तो इससे आपकी सेहत में चमत्कारी सुधार देखने को मिलेगा। इसे अपनी डाइट में शामिल करें और स्वस्थ जीवन का आनंद लें।