ग्रामसभा की जमीन खुर्द-बुर्द करने की कोशिश पर होगी एफआईआर

-  चकबंदी आयुक्त ने आदेशों की समीक्षा के बाद कड़ा रुख अपनाया, ग्रामसभा भूमि से जुड़े मामलों में डीएम की लिखित अनुमति अनिवार्य


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामसभा की बेशकीमती भूमि को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर खुर्द-बुर्द करने के प्रयासों पर अब सख्ती होगी। चकबंदी आयुक्त डा. हृषिकेश भास्कर यशोद ने चकबंदी प्राधिकारियों द्वारा निस्तारित किए जा रहे वादों में पारित आदेशों की समीक्षा कराई। समीक्षा में सामने आया कि कुछ मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ग्रामसभा की भूमि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया और कथित रूप से कूटरचित आदेशों के आधार पर वादों का निस्तारण किया गया।
स्थिति को रोकने के लिए प्रदेश के जिलाधिकारियों, जिला उप संचालक चकबंदी और अन्य चकबंदी प्राधिकारियों को नए निर्देश जारी किए गए हैं। अब ऐसे स्थानांतरण प्रार्थना पत्र अथवा पत्रावलियां, जिनमें ग्रामसभा का हित जुड़ा हो, और जिनमें वाद को किसी अन्य जनपद में स्थानांतरित करना जरूरी हो, तो इसके लिए संबंधित जिलाधिकारी अथवा जिला उप संचालक चकबंदी की पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

-  अमलदरामद से पहले भी लेनी होगी अनुमति
ग्रामसभा की भूमि से संबंधित किसी आदेश की अमलदरामद करने से पहले भी जिलाधिकारी अथवा जिला उप संचालक चकबंदी की लिखित पूर्व अनुमति जरूरी कर दी गई है। इसका उद्देश्य ग्रामसभा की भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है।
चकबंदी आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी मामले में ग्रामसभा की भूमि को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास दिखाई देता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही दोषी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई का प्रस्ताव चकबंदी निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

-  महराजगंज के 18 वनटांगिया गांव चकबंदी से बाहर
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में महराजगंज के 18 वनटांगिया ग्रामों को चकबंदी प्रक्रिया से पृथक कर दिया गया है। जिलाधिकारी महराजगंज ने इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया संभव नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत इन्हें चकबंदी से अलग करने का प्रस्ताव भेजा था।
जनहित को ध्यान में रखते हुए इन सभी 18 वनटांगिया ग्रामों को 12 अगस्त 2026 को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से चकबंदी प्रक्रिया से पृथक कर दिया गया। इससे इन गांवों के निवासियों को चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित लंबित समस्याओं के समाधान में राहत मिलने की उम्मीद है।
फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल से ठगी करने वाला नाइजीरियाई गिरफ्तार

-  यूपी STF ने दिल्ली से पकड़ा अंतरराष्ट्रीय फेक प्रोफाइलिंग गैंग का सदस्य, लखनऊ के युवक से 68 लाख की ठगी का मामला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सोशल मीडिया पर विदेशी नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय युवक-युवतियों को दोस्ती के जाल में फंसाने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के एक सदस्य को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान नाइजीरियाई नागरिक NWOGU OBED OSINACHI के रूप में हुई है। एसटीएफ ने उसे दिल्ली के कमल विहार, बुराड़ी क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह के सदस्य विदेशी नागरिकों के नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। इसके बाद भारतीय युवक-युवतियों से सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर उन्हें भरोसे में लिया जाता था। जाल में फंसने के बाद पीड़ितों को महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भेजने का झांसा दिया जाता था।
गिरोह की ओर से पीड़ितों को बताया जाता था कि विदेश से भेजे गए गिफ्ट या विदेशी मुद्रा कस्टम में फंस गई है। इसके बाद आरोपी कस्टम या इनकम टैक्स अधिकारी बनकर पीड़ितों से विभिन्न शुल्क और टैक्स के नाम पर रकम वसूलते थे।

-  लखनऊ के युवक से 68 लाख की ठगी
जांच में लखनऊ के एक युवक से करीब 68 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ लखनऊ के मड़ियांव थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से 11 मोबाइल फोन, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और लैपटॉप समेत अन्य सामान बरामद किया गया है। एसटीएफ अब बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए गिरोह के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

-  कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
एसटीएफ के अनुसार, प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में इसी तरीके से ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया और ठगी की कुल रकम कितनी है।
30 अगस्त तक प्रदेश की सभी गौशालाओं की समीक्षा करें
-  गोवंश के लिए हरा चारा, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश; 70 फीसदी टीकाकरण पूरा कराने का लक्ष्य
लखनऊ। प्रदेश में गोसंरक्षण, पशु स्वास्थ्य और दुग्ध विकास योजनाओं को गति देने के लिए पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 30 अगस्त तक प्रदेश की सभी गौशालाओं की मंडलवार समीक्षा कर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए। गौशालाओं में गोवंश के लिए हरा चारा, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में सुनिश्चित की जाएं।

विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में गोसंरक्षण, हरा चारा, संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान और दुग्ध समितियों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

-  30 अगस्त तक 70 फीसदी टीकाकरण
धर्मपाल सिंह ने संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे पशु टीकाकरण अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि 30 अगस्त तक कम से कम 70 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जाए। उन्होंने अभियान की नियमित निगरानी करते हुए लक्षित पशुओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण की दिशा में तेजी से काम करने को कहा।

-  किसानों से अनुबंध कर गौशालाओं में पहुंचाया जाएगा हरा चारा
मंत्री ने गौशालाओं में हरे चारे की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसानों के साथ अनुबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे गौशालाओं को लगातार हरा चारा मिल सकेगा और किसानों को भी इसका आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने जुलाई 2026 में विभागीय अधिकारियों के स्थलीय निरीक्षण में सामने आई कमियों का प्राथमिकता से समाधान करने को कहा। निरीक्षण में कई गो-आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़, खड़ंजा-पंडना, हरे चारे व पशु आहार, शेड एवं बाउंड्रीवाल तथा अभिलेखीकरण और टैगिंग से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं। गोंडा, बहराइच, मुरादाबाद, अमरोहा, वाराणसी, जालौन, संत कबीर नगर, उन्नाव, अयोध्या, गोरखपुर, रामपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर समेत कई जिलों में इन कमियों के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।

-  बाढ़ प्रभावित जिलों में पहले से हो पुख्ता इंतजाम
मंत्री ने बाढ़ प्रभावित जिलों में पशुओं के लिए चारा, भूसा, दवाएं और पेयजल समेत सभी आवश्यक संसाधनों की पहले से व्यवस्था करने को कहा। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने तथा परिस्थितियों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान पशुपालकों और गोवंश को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित विभाग स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

-  हर गांव में दुग्ध समिति बनाने पर जोर
दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा में धर्मपाल सिंह ने हर गांव में दुग्ध समिति गठित करने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को समितियों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें उनके दूध का बेहतर मूल्य और लाभ मिल सके। मंत्री ने पराग उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि दुग्ध विकास से जुड़ी योजनाओं में तेजी लाई जाए और उत्पादों की बाजार में बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जाए।
अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को मंत्री के निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित जिलों में पशु चिकित्साधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा हरे चारे-भूसे की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने को कहा। साथ ही एफएमडी टीकाकरण, गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, कृत्रिम गर्भाधान और दुग्ध समितियों के गठन की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर दिया।
30 अगस्त तक प्रदेश की सभी गौशालाओं की समीक्षा करें
-  गोवंश के लिए हरा चारा, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश; 70 फीसदी टीकाकरण पूरा कराने का लक्ष्य
लखनऊ। प्रदेश में गोसंरक्षण, पशु स्वास्थ्य और दुग्ध विकास योजनाओं को गति देने के लिए पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 30 अगस्त तक प्रदेश की सभी गौशालाओं की मंडलवार समीक्षा कर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए। गौशालाओं में गोवंश के लिए हरा चारा, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में सुनिश्चित की जाएं।

विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में गोसंरक्षण, हरा चारा, संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान और दुग्ध समितियों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

-  30 अगस्त तक 70 फीसदी टीकाकरण
धर्मपाल सिंह ने संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे पशु टीकाकरण अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि 30 अगस्त तक कम से कम 70 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जाए। उन्होंने अभियान की नियमित निगरानी करते हुए लक्षित पशुओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण की दिशा में तेजी से काम करने को कहा।

-  किसानों से अनुबंध कर गौशालाओं में पहुंचाया जाएगा हरा चारा
मंत्री ने गौशालाओं में हरे चारे की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसानों के साथ अनुबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे गौशालाओं को लगातार हरा चारा मिल सकेगा और किसानों को भी इसका आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने जुलाई 2026 में विभागीय अधिकारियों के स्थलीय निरीक्षण में सामने आई कमियों का प्राथमिकता से समाधान करने को कहा। निरीक्षण में कई गो-आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़, खड़ंजा-पंडना, हरे चारे व पशु आहार, शेड एवं बाउंड्रीवाल तथा अभिलेखीकरण और टैगिंग से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं। गोंडा, बहराइच, मुरादाबाद, अमरोहा, वाराणसी, जालौन, संत कबीर नगर, उन्नाव, अयोध्या, गोरखपुर, रामपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर समेत कई जिलों में इन कमियों के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।

-  बाढ़ प्रभावित जिलों में पहले से हो पुख्ता इंतजाम
मंत्री ने बाढ़ प्रभावित जिलों में पशुओं के लिए चारा, भूसा, दवाएं और पेयजल समेत सभी आवश्यक संसाधनों की पहले से व्यवस्था करने को कहा। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने तथा परिस्थितियों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान पशुपालकों और गोवंश को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित विभाग स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

-  हर गांव में दुग्ध समिति बनाने पर जोर
दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा में धर्मपाल सिंह ने हर गांव में दुग्ध समिति गठित करने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को समितियों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें उनके दूध का बेहतर मूल्य और लाभ मिल सके। मंत्री ने पराग उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि दुग्ध विकास से जुड़ी योजनाओं में तेजी लाई जाए और उत्पादों की बाजार में बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जाए।
अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को मंत्री के निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित जिलों में पशु चिकित्साधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा हरे चारे-भूसे की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने को कहा। साथ ही एफएमडी टीकाकरण, गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, कृत्रिम गर्भाधान और दुग्ध समितियों के गठन की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर दिया।
‘दुग्ध शक्ति’ से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर
-  यूपी की 3.25 लाख महिला दुग्ध उत्पादक बनीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत, 31 जिलों में महिला नेतृत्व वाला दुग्ध मॉडल
-  98 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’, रोजाना 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महिला नेतृत्व वाली मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां नई मिसाल कायम कर रही हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल और मार्गदर्शन में संचालित इस मॉडल से प्रदेश के 31 जिलों की करीब 3.25 लाख महिला दुग्ध उत्पादक संगठित रूप से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। खास बात यह है कि अब तक 1.12 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर उन्हें बेहतर बाजार, पारदर्शी मूल्य और नियमित आय का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाएं महज दुग्ध उत्पादक नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार और उद्यमी के रूप में आगे बढ़ रही हैं।

-  पांच कंपनियां, 3.25 लाख महिला किसान
प्रदेश में महिला नेतृत्व वाली पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां इस बदलाव की प्रमुख आधार बनी हैं।

बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी बुंदेलखंड के सात जिलों के 1,217 गांवों में कार्यरत है। इससे 98,010 महिला किसान जुड़ी हैं और प्रतिदिन करीब 3.20 लाख लीटर दूध खरीदा जा रहा है। कंपनी का अब तक करीब 2,447 करोड़ रुपये का कारोबार और 53.43 करोड़ रुपये का लाभ रहा है। इससे जुड़ी 49,571 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी पूर्वांचल के सात जिलों के 1,014 गांवों में संचालित है। इससे 49,317 महिला किसान जुड़ी हैं और प्रतिदिन करीब 2 लाख लीटर दूध खरीदा जा रहा है। कंपनी का अब तक करीब 749.80 करोड़ रुपये का कारोबार और 21.77 करोड़ रुपये का लाभ रहा है। इसके साथ 11,715 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी मध्य क्षेत्र के सात जिलों के 1,555 गांवों में कार्यरत है। इससे 1,12,508 महिला किसान जुड़ी हैं और प्रतिदिन करीब 3.75 लाख लीटर दूध खरीदा जाता है। कंपनी ने अब तक करीब 1,783.80 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और 43.60 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इससे जुड़ी 32,848 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी गोरखपुर क्षेत्र के चार जिलों के 1,087 गांवों में संचालित है। इससे 66,057 महिला किसान जुड़ी हैं और प्रतिदिन करीब 1.55 लाख लीटर दूध खरीदा जा रहा है। कंपनी का अब तक करीब 320.24 करोड़ रुपये का कारोबार और 5.18 करोड़ रुपये का लाभ रहा है। यहां 10,546 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी तराई क्षेत्र के छह जिलों के 1,685 गांवों में काम कर रही है। इससे 60,122 महिला किसान जुड़ी हैं और करीब 2 लाख लीटर दूध प्रतिदिन खरीदा जाता है। कंपनी ने अब तक करीब 415.42 करोड़ रुपये का कारोबार और 8.97 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इससे जुड़ी 7,932 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

-  सीधे बैंक खाते में भुगतान, हर 10 दिन में पैसा
महिला दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का पारदर्शी मूल्य दिलाने के लिए फैट और एसएनएफ आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू है। दूध का भुगतान सीधे महिलाओं के बैंक खातों में किया जाता है। कंपनियों की ओर से प्रत्येक माह की 3, 13 और 23 तारीख को भुगतान की व्यवस्था की गई है। इससे महिलाओं को अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलने के साथ नियमित और सुनिश्चित आय का आधार मिला है।

-  दूध से घी-पनीर तक महिलाओं की भागीदारी
बलिनी और सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां दूध खरीदने के साथ घी और पनीर जैसे उत्पादों का प्रसंस्करण भी कर रही हैं। वहीं काशी, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां दूध का संग्रहण कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मदर डेयरी को उपलब्ध करा रही हैं।

इससे दूध उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और गांवों में स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला यह दुग्ध मूल्य श्रृंखला मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन तक संगठित आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि नियमित बैंक भुगतान, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और संगठित दुग्ध बाजार ने इस मॉडल को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाया है। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
यूपी में अब 8 कमरों तक का होम-स्टे, ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

-  बीएंडबी एवं होम-स्टे नीति-2025 की एसओपी में संशोधन, भवन स्वामी 16 शैय्या तक कर सकेंगे किराए पर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के लिए आय एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से ब्रेड एण्ड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होम-स्टे नीति-2025 की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब भवन स्वामी अपने आवासीय भवन के अधिकतम 8 कमरे यानी 16 शैय्या तक पर्यटकों को किराए पर दे सकेंगे। पहले यह सीमा अधिकतम 6 कमरे और 12 शैय्या थी।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में ठहरने, स्थानीय भोजन और ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही अधिक से अधिक भवन स्वामियों को होम-स्टे योजना से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
संशोधित एसओपी के अनुसार, योजना के तहत भवन स्वामी अपने आवासीय भवन के कम से कम एक और अधिकतम आठ कमरों को किराए पर दे सकेंगे। इन कमरों में अधिकतम 16 शैय्या की व्यवस्था की जा सकेगी। रूरल होम-स्टे में स्नानागार, शौचालय, पानी, बिजली और सामान्य फर्नीचर जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
मंत्री ने बताया कि यह व्यवस्था नगर निगम की सीमा से बाहर आने वाली इकाइयों के लिए लागू होगी। यानी प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पात्र आवासीय इकाइयां इस श्रेणी में आवेदन कर सकेंगी। आवेदन प्रक्रिया में पुलिस विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुसार चरित्र संबंधी स्व-प्रमाणन की व्यवस्था भी की गई है।

-  6 से बढ़ाकर 8 हुई कमरों की सीमा
सरकार ने पहले भवन स्वामियों को अधिकतम 6 कमरे (12 शैय्या) तक किराए पर देने की अनुमति दी थी। संशोधन के बाद अब यह सीमा बढ़ाकर 8 कमरे (16 शैय्या) कर दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक संख्या में आवासीय इकाइयों के होम-स्टे के रूप में विकसित होने का रास्ता साफ होगा।
जयवीर सिंह ने कहा कि एसओपी में किए गए संशोधन से अधिक से अधिक भवन स्वामी बीएंडबी एवं होम-स्टे योजना का लाभ उठा सकेंगे। इससे एक ओर भवन स्वामियों को अतिरिक्त आमदनी का स्रोत मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर दो डंपरों की भिड़ंत के बाद लगी आग, चालक घायल
टक्कर इतनी जोरदार थी कि डंपर में तत्काल आग लग गई

कुछ समय के लिए एक्सप्रेस-वे पर यातायात भी बाधित रहा

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के दो डंपरों की भिड़ंत के बाद एक डंपर में भीषण आग लग गई। हादसे में डंपर चालक घायल हो गया। आग की लपटें उठने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ समय के लिए एक्सप्रेस-वे पर यातायात भी बाधित रहा।

हादसा अछल्दा थाना क्षेत्र के नगला धुंधे गांव के सामने इटैली चौकी क्षेत्र में मंगलवार सुबह करीब चार बजे किमी संख्या 277 पर हुआ। बताया गया कि झांसी से इटावा की ओर जा रहा डंपर अनियंत्रित होकर आगे खड़े दूसरे डंपर में पीछे से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि डंपर में तत्काल आग लग गई।डंपर में आग लगते ही चालक ने किसी तरह वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। कुछ ही देर में डंपर धू-धूकर जलने लगा। आग और धुएं का गुबार देखकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड को घटना की सूचना दी।

सूचना मिलते ही अछल्दा थाना प्रभारी सुरेशचंद्र सिंह, इटैली चौकी प्रभारी विपिन पाल और यूपीडा सीएसओ विजय सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद डंपर में लगी आग पर काबू पाया। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात व्यवस्था को सुचारु कराया।हादसे में घायल चालक की पहचान अमेठी निवासी मोहम्मद जमीर पुत्र समीर अहमद के रूप में हुई है। उसके सिर में चोट आई है। पुलिस ने 108 एंबुलेंस की मदद से घायल चालक को भरथना सीएचसी में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।
हर हर महादेव के नारों से गूंजाय मान हुआ नोएडा, ढाई हजार पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात, ड्रोन से रखी जा रही है नजर
लखनऊ /नोएडा। सावन की शिवरात्रि पर मंगलवार को सुबह से ही जनपद के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। पूरा शहर हर -हर महादेव के जयकारे से गुंजायमान हो गया है। हर तरफ शिव भक्त कांवड़िये बम- बम बोल के जयकारे करते हुए डीजे पर भजन के साथ-साथ नृत्य करते हुए जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों पर पहुंच रहे हैं। उनके साथ उनके परिवार के लोग, गांव -समाज के लोग और रिश्तेदार भी मंदिरों पर पहुंच रहे हैं। शिव भक्त कांवड़ियों की आवाजाही को देखते हुए नोएडा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये हैं।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था के लिए करीब 2500 पुलिसकर्मी तैनात है। मंदिरों के अलावा कांवड़ मार्गों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। यातायात विभाग को विशेष रूप से अलर्ट किया गया है।

अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ को व्यवस्थित रखने और किसी तरह की अव्यवस्था रोकना प्राथमिकता है। पुलिसकर्मियों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ श्रद्धालुओं की मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को मंदिरों और कांवड़ मार्ग पर 3000 सीसीटीवी कैमरों और 30 ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। एआई आधारित कैमरों से भीड़ का आकलन और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की जा रही है। पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर रख रही है। भीड़ के बीच सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी तैनात है।

वही डीएम मेधा रूपम और पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कांवड़ यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। यहां के सभी मंदिरों में सुबह से ही जल चढ़ाना शुरू हो गया है। शिव भक्त मंदिरों पर काफी संख्या में पहुंच कर जलाभिषेक कर रहे हैं। शिव भक्तों और कावड़ियो के आगमन से पूरा शहर शिवमय हो गया है।
परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में 15 लाख ने किया जलाभिषेक
लखनऊ /बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत में श्रावण मास के पावन अवसर पर जनपद के बालैनी पुरा गांव स्थित परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में मंगलवार तड़के 3 बजे के बाद पूजा-अर्चना और झंडारोहण के साथ जलाभिषेक का शुभारंभ हुआ। शिव चतुर्दशी के अवसर पर जैसे ही जलाभिषेक शुरू हुआ, वैसे ही लाखों शिवभक्तों की आस्था मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते नजर आए।

मंदिर के मुख्य पुजारी जय भगवान शर्मा ने बताया कि अब तक करीब 15 लाख कांवड़िये जलाभिषेक कर चुके हैं और शाम तक यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। तीन दिवसीय कांवड़ मेले का समापन मंगलवार शाम को होगा।

मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। सोमवार रात एडीजी भानु भास्कर और एसपी बागपत ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मेले में लगभग तीन हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से संभाल रहे हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस की मुस्तैदी से व्यवस्था चाक-चौबंद रही।

वहीं, प्रशासन द्वारा स्वच्छता अभियान भी चलाया गया, जिससे मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र साफ-सुथरा बना रहा। इस बार बागपत के युवा अमन कुमार द्वारा तैयार किया गया कांवड़ ऐप भी श्रद्धालुओं के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ। अब तक 25 हजार से अधिक कांवड़ियों ने इस ऐप का इस्तेमाल किया है, जिससे उन्हें मार्गदर्शन और सुविधाएं प्राप्त हुईं। लाखों कांवड़ियों को इस ऐप से लाभ मिला।

जिलाधिकारी बागपत अस्मिता लाल सुबह झंडा पूजन के बाद से मंदिर परिसर में ही रुकी हुई है। एसपी बागपत सूरज कुमार राय उनके साथ है जलाभिषेक के समय वह खुद व्यवस्थाओं को संभाले हुए हैं।
श्रावण मास की शिवरात्रि पर गंगा किनारे गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेश, श्रद्धालुओं ने सेवा-स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
लखनऊ /वाराणसी। श्रावण मास के शिवरात्रि पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में दशाश्वमेधघाट पर नमामि गंगे ने उपस्थित श्रद्धालुओं को राष्ट्रभक्ति, सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया।

कार्यक्रम संयोजक गंगा सेवक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में राष्ट्रध्वज लेकर 'हर-घर तिरंगा अभियान' के अंतर्गत मां गंगा की आरती उतारी गई। लोगों से आह्वान किया गया कि श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का संकल्प लें। प्रत्येक बूंद का सम्मान तथा प्रत्येक पौधे का संरक्षण करें। प्रकृति से जितना लें, उतना उसे लौटाने का भी संकल्प लें। यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित भारत की आधारशिला भी है।

श्रवण की शिवरात्रि पर गंगा स्नान और गंगाजल कावड़ में भरने के लिए उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने संदेश दिया कि देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति बोध के देवता हैं। उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी जी और उनके गण, हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है। आयोजन में कांवड़ियों ने भी पूरे उत्साह से भागीदारी की।