बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें अधिकारी, किसी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं: प्रमुख सचिव
*18 सर्वाधिक संवेदनशील जनपदों की बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा, राहत एवं बचाव व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के दिए निर्देश*
*देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त के द्वारा प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया*
*गोण्डा, 10 जुलाई 2026* - देवीपाटन मंडल मुख्यालय, गोण्डा में शुक्रवार को *प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, उत्तर प्रदेश अपर्णा यू.* की अध्यक्षता तथा *राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद* की उपस्थिति में प्रदेश के बाढ़ से सर्वाधिक संवेदनशील 18 जनपदों की बाढ़ पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में देवीपाटन, लखनऊ, अयोध्या, बस्ती, गोरखपुर एवं आजमगढ़ मंडलों के अंतर्गत आने वाले बाढ़ संभावित जनपदों की तैयारियों का विभागवार गहन समीक्षा की गई
समीक्षा के दौरान बाढ़ संबंधी कार्यों के लिए जारी टेंडरों एवं कार्यादेशों की प्रगति, बाढ़ शरणालयों की स्थापना तथा उनमें पेयजल, विद्युत, शौचालय और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का परीक्षण किया गया। साथ ही नाव, नाविक, गोताखोर एवं स्वयंसेवकों की उपलब्धता, संवेदनशील तटबंधों एवं कटान स्थलों पर कराए गए सुरक्षात्मक कार्य, बाढ़ चौकियों एवं नियंत्रण कक्षों की स्थापना, चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा टीमों की उपलब्धता, आवश्यक दवाओं, एम्बुलेंस, पशु चारे, पेयजल, स्वच्छता एवं विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था तथा पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) और जनजागरूकता अभियान की भी समीक्षा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समयबद्ध तैयारी, विभागीय समन्वय और त्वरित निर्णय अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी विभाग संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां समय से पूर्ण करें तथा जन-धन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि राहत शिविरों, नियंत्रण कक्षों एवं अन्य nनाए रखने, स्थानीय प्रशासन को सतर्क रखने तथा आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बाढ़ संबंधी चेतावनियां समय से आमजन तक पहुंचाने के लिए सभी उपलब्ध संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए तथा जनजागरूकता अभियान को और व्यापक बनाया जाए।
सचिव, राजस्व एवं राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी तथा अन्य बचाव एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर बल देते हुए कहा कि सभी संसाधनों को आवश्यकता के अनुरूप तैयार रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों से बाढ़ प्रबंधन को जनसेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मानते हुए प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने की अपेक्षा की।
प्रमुख सचिव एवं राहत आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए की बाढ़ आने पर सभी ग्राम वासियों को समय से सूचना दे दी जाए। बाढ़ कार्य के दौरान वालंटियर से मदद ली जाये। बाढ़ शरणालय की व्यवस्था पहले से कर ली जाये। बाढ़ शरणालय में सारी व्यवस्था हो। बाढ़ शरणालय के पास पशु शरणालय भी बनाया जाए। इन्होंने नगर विकास के अधिकारियों के को निर्देश दिए कि वह शहरों के मेन होल खुले न रहे, उन्हें बंद कराया दिया जाये।
*मंडलायुक्त द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव*
प्रमुख सचिव (राजस्व), उत्तर प्रदेश शासन एवं राहत आयुक्त की उपस्थिति में देवीपाटन मंडल में आयोजित छह मंडलों—देवीपाटन, अयोध्या, लखनऊ, बस्ती, गोरखपुर एवं आज़मगढ़—के 18 बाढ़ संवेदनशील जनपदों की बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त देवीपाटन मंडल, श्रीमती दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा देवीपाटन मंडल की बाढ़ पूर्व तैयारियों एवं नवाचारों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण में निम्न प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया गया—
* बाढ़ संभावित क्षेत्रों में लगभग 30,000 गर्भवती महिलाओं का पूर्व चिन्हांकन किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समयबद्ध चिकित्सीय सहायता एवं सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण सुनिश्चित किया जा सके।
* बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण एवं कृमिनाशक दवापान पूर्ण कराते हुए चारा एवं भूसे की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
Jul 10 2026, 19:13
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