भाई की शादी के तीसरे दिन युवक का शव पेड़ से लटका मिला, घर में हुआ था विवाद
*खरगूपुर में राजगीर मिस्त्री विकास उर्फ लाला की मौत, डॉग स्क्वायड-फोरेंसिक टीम ने की जांच


गोंडा।जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र में 26 वर्षीय युवक का शव आम के पेड़ से लटका मिला। बड़े भाई की शादी के तीसरे दिन हुई इस घटना से खुशियां मातम में बदल गईं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।घटना खरगूपुर थाना क्षेत्र की है। 26 वर्षीय विकास उर्फ लाला का शव बुधवार सुबह 10 बजे घर से 500 मीटर दूर तालाब के पास आम के पेड़ से लटका मिला। विकास राजगीर मिस्त्री का काम करता था।परिजनों ने बताया कि 21 जून को विकास के बड़े भाई राजेंद्र की शादी थी। मंगलवार रात बहूभोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसी दौरान किसी बात को लेकर परिवार में विवाद हुआ था। विवाद के बाद विकास मंगलवार रात करीब 12 बजे घर से निकल गया था। परिजनों ने सोचा कि वह थोड़ी देर में लौट आएगा। बुधवार सुबह खोजबीन करने पर उसका शव पेड़ से लटका मिला।
सूचना मिलने पर खरगूपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। थाना अध्यक्ष गोविंद कुमार ने पुलिस टीम के साथ डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम से जांच कराई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कराया और पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया।थाना अध्यक्ष गोविंद कुमार ने बताया कि फोरेंसिक टीम द्वारा जांच की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल परिजनों से पूछताछ जारी है। बड़े भाई की शादी की खुशियां अब मातम में बदल गई हैं।
बिल्ली बचाने में खाई में पलटी तेज रफ्तार कार, 3 बिजली के खंभे टूटे, तीन गंभीर घायल

*नवाबगंज-मनकापुर रोड पर माधवपुर के पास हादसा, कई गांवों की बिजली गुल, रातभर अंधेरे में डूबा इलाका


गोंडा। जिले के नवाबगंज से मनकापुर जाने वाली रोड पर एक तेज रफ्तार कार बिल्ली से टकराने के बाद अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा पलटी। हादसे में कार सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।दुर्घटना मनकापुर-नवाबगंज रोड पर स्थित माधवपुर के पास हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार की रफ्तार काफी तेज थी। अचानक सामने आई बिल्ली को बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और कार सड़क से उतरकर खाई में जा गिरी।हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे लगे बिजली के तीन खंभों को बुरी तरह तोड़ दिया। खंभे टूटने से आस-पास के कई गांवों की बिजली रात से ही गुल है और पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है।इस हादसे में कार सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। प्रभावित गांवों में विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बिजली बहाल कर दी जाएगी। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
ढाई साल बाद घर लौटे युवक की संदिग्ध मौत, जमीन पर बैठे शव के गले में मिला फंदा
*परिजनों ने बताया हत्या, पुलिस ने कहा आत्महत्या; धानेपुर के पूरे छोटकाई डीह गांव का मामला

गोंडा।जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र के त्रिभुवन नगर ग्रंट के पूरे छोटकाई डीह गांव में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से सनसनी फैल गई। बेंगलुरु से ढाई साल बाद घर लौटे राजदीप का शव जमीन पर बैठी हुई अवस्था में मिला, जिसके गले में फांसी का फंदा लगा था। शव की स्थिति को लेकर परिजनों और पुलिस के दावों में विरोधाभास है। राजदीप का शव गांव में जमीन पर बैठी हुई अवस्था में मिला। उसके गले में फांसी का फंदा लगा हुआ था। शव की इस अजीब स्थिति को देखकर मामला हत्या और आत्महत्या के बीच उलझ गया है।मृतक राजदीप के घरवालों का सीधा आरोप है कि उसकी हत्या की गई है। परिजनों का कहना है कि ढाई साल बाद घर लौटे युवक की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह आत्मघाती कदम उठा ले। जमीन पर बैठे हुए शव के गले में फंदा मिलना किसी सोची-समझी साजिश की तरफ इशारा करता है। घरवालों ने पूरे मामले में गहन जांच और न्याय की मांग की है।दूसरी तरफ, धानेपुर पुलिस इस मामले को आत्महत्या मान रही है। पुलिस का दावा है कि राजदीप मानसिक रूप से बीमार था। उसने गांव के पास ही स्थित बांस की कोठी से लटककर अपनी जान दी है। हालांकि जमीन पर बैठे शव के गले में फंदा होने की बात पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शुरुआती तफ्तीश के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सौंपा ज्ञापन

गोंडा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री अजय राय जी के निर्देश पर राम मंदिर चढ़ावा लूट के आरोपितों के साथ ही लखनऊ अग्निकांड के जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज करने और जिले की पंचायत मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर की गई धांधली के जिम्मेदारों पर कार्यवाही की मांग को लेकर महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन देकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया  गया ।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद मिश्र, नि प्रदेश सचिव त्रिलोकी नाथ तिवारी,सेवादल प्रमुख प्रदुमन शुक्ला, उपाध्यक्ष शुक्ला प्रसाद शुक्ला , संतोष ओझा एडवोकेट, सत्येंद्र तिवारी एडवोकेट, महासचिव अरविंद शुक्ला, ओम प्रकाश सोनकर, दशरथ, ननके तिवारी, मोल्हे यादव  सहित तमाम कांग्रेस जन उपस्थित रहे।
5 कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी सील,मानक न पूरा होने पर हुई कार्रवाई
*रजिस्ट्रेशन व अग्निशमन यंत्र नहीं मिलने पर कार्रवाई

गोंडा। लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड के बाद जिले में भी कार्रवाई की गई है।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने मंगलवार को अभियान चलाकर पांच लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया है।यह कार्रवाई सुरक्षा मानकों और पंजीकरण नियमों का पालन न करने पर की गई है।सील किए गए संस्थानों में कटरा बाजार विकास खंड की लाइब्रेरी सुपर इंस्टीट्यूट सेंटर शामिल है।इसका पंजीकरण वर्ष 2019 में हुआ था,परन्तु इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था।सेंटर पर अग्निशमन यंत्र भी नहीं था और न ही किसी प्रकार के मानक पूरे किए जा रहे थे।इसी तरह एनसीएम लाइब्रेरी व कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट का भी पंजीकरण नहीं था,जिसे सील कर दिया गया।पीसीएस कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी बंद पाई गई और उसे भी सील कर दिया गया।ज्ञान धारा लाइब्रेरी में दो कमरे व आठ बच्चे मिले परन्तु कोई अभिलेख नहीं दिखाया जा सका,जिसके बाद इसे भी सील कर दिया गया।इसी क्रम में डिजिटल लाइब्रेरी और दैनिक लाइब्रेरी का भी निरीक्षण करने पर पूरे मानक नहीं पाए गए,जिसके कारण इन्हें भी सील कर दिया गया है।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने सोमवार को ही सभी कोचिंग व लाइब्रेरी संचालकों को नोटिस जारी कर सुविधाओं के संबंध में जानकारी मांगा था और निर्धारित समय सीमा पूर्ण होते ही जिला विद्यालय निरीक्षक ने एक्शन लेना प्रारंभ कर दिया।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने बताया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा।उन्होंने कहा कि जो भी कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं,उन्हें तत्काल प्रभाव से सील किया जाएगा और उनके खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि बच्चों की जिंदगी के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी को कोचिंग संचालन के नियमों का पालन करना होगा।उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी के पंजीकरण की अभी कोई गाइड लाइन नहीं है परन्तु जो भी सुरक्षा मानक हैं उसको देखा जा रहा है तथा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वन‌ दरोगा रिश्वत लेते गिरफ्तार,थाने में पूछताछ शुरू
*फर्नीचर व्यवसाई से दुकान चलाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत

गोंडा।जिले में देवीपाटन मंडल की एंटीकरप्शन टीम ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वन दरोगा बालक राम को 6000 रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।यह कार्रवाई तरबगंज तहसील क्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय परसदा के सामने की गई है।वन दरोगा बालक राम को फर्नीचर व्यवसाई राधेश्याम से रिश्वत लेते पकड़ा गया।गिरफ्तारी के बाद एंटीकरप्शन टीम उन्हें तरबगंज थाने ले गई।जहाँ उनसे और राधेश्याम से पूछताछ की जा रही है।वन दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा भी दर्ज किया जा रहा है।फर्नीचर व्यवसाई राधेश्याम नवाबगंज थाना क्षेत्र के गोपसराय गांव का निवासी है और अपने घर से ही फर्नीचर का व्यवसाय चलाता है।आरोप है कि वन दरोगा बालक राम लगातार राधेश्याम को धमकी देकर रिश्वत की मांग कर रहे थे।दरोगा ने राधेश्याम से दुकान चलाने के लिए 10,000 रुपये के रिश्वत की मांग किया था और ऐसा न करने पर दुकान बंद करवाने की धमकी दे रहा था।राधेश्याम ने जब अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला दिया तो रिश्वत की रकम 6000 रुपये तय हुई।इस उत्पीड़न से परेशान हो कर राधेश्याम ने गोंडा एंटीकरप्शन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराया था।शिकायत के आधार पर एंटीकरप्शन टीम मंगलवार को दोपहर वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय परसदा पहुंची और बालक राम को 6000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।गोंडा एंटीकरप्शन टीम प्रभारी धनंजय कुमार सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि वन दरोगा बालक राम को 6000 रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है।वह एक फर्नीचर व्यवसाई को दुकान चलाने के नाम पर लगातार धमकी देकर रिश्वत मांग रहा था।तरबगंज थाने में वन दरोगा बालक राम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
4.90 करोड़ के घोटाले में सचिव नहीं दे रहे दस्तावेज,विवेचक ने कई बार भेजा पत्र
*घोटाले को लेकर 69 लोगों पर दर्ज है मुकदमा

गोंडा।जिले में इंडियन बैंक एम्पलाइज कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड शाखा में हुए 4 करोड़ 90 लाख रुपए के घोटाले की जांच नगर कोतवाली पुलिस द्वारा तेजी से की जा रही है।जांच अधिकारी को सोसाइटी के सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव से दस्तावेज नहीं मिल रहे पा हैं,जिससे जांच में बाधा आ रही है।मामले के विवेचक सोनू कुमार ने सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव को पत्र लिखकर चार बार दस्तावेज मांगा हैं,परन्तु बार बार अनुरोध के बावजूद उन्हें अभी तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।जिसके कारण जांच अधिकारी को पूरे मामले के तह तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।जांच अधिकारी ने इंडियन बैंक से भी इस घोटाले से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है।मामले में यह भी पता लगाया जा रहा है कि जिन लोगों ने घोटाला किया है उन लोगों ने रकम वापस किया है या नहीं और यदि रकम वापस की गई है तो किन परिस्थितियों में कैसे,कितनी और किसे वापस किया गया है।इन सभी बिंदुओं की भी विस्तृत जांच हो रही है।बताते चलें कि कोर्ट के आदेश पर बीते 12 जून को समिति के सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव ने वर्ष 1997 से 2020 के मध्य हुए इस घोटाले को लेकर मुकदमा दर्ज करवाया था।इसमें बैंक के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों सहित 69 लोगों को आरोपी बनाया गया है।नगर कोतवाली अंतर्गत रोडवेज पुलिस चौकी पर तैनात चौकी प्रभारी सोनू कुमार इस मामले की जांच कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव को एक बार फिर पत्र भेज कर दस्तावेज मांगा गया है,ताकि जांच में तेजी लाई जा सके।उन्होंने बताया कि कुछ लोगों द्वारा पैसे वापस किए जाने की जानकारी मिली है,उसकी भी जांच की जा रही है।सभी बिंदुओं पर जांच पूरी होने के बाद निष्कर्ष के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भरत तिवारी एनकाउंटर के विरोध में युवाओं ने निकाला कैंडल मार्च
*निष्पक्ष जांच व दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

गोंडा।बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के विरोध में जिले के करनैलगंज तहसील क्षेत्र में युवाओं ने कैंडल मार्च निकाल कर आक्रोश व्यक्त किया।छतईपुरवा सकरौरा ग्रामीण के युवाओं के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और मामले की निष्पक्ष जांच,दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग किया।कैंडल मार्च ब्रह्मचारी बाबा स्थान छतईपुरवा से शुरू होकर स्टेशन रोड, सर्वामाई थान होते हुए चौक घंटाघर तक पहुंचा।मार्च में शामिल लोग हाथों में मोमबत्तियां,बैनर और न्याय की मांग वाले पोस्टर लिए हुए थे।इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भरत तिवारी के समर्थन में नारे लगाए और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी किया।प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई घटना को पुलिस मुठभेड़ बता रही है,जबकि परिजन और स्थानीय लोग इसे फर्जी एनकाउंटर मान रहे हैं।वक्ताओं ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।उन्होंने यह भी मांग किया कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व न्याय सुनिश्चित किया जाए।मार्च में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों ने भागीदारी कर भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित किया।मार्च में प्रमुख रूप से ज्वाला प्रसाद तिवारी,त्रिलोकी नाथ तिवारी एडवोकेट,अरविंद शुक्ला एडवोकेट,दिलीप ओझा,दिनेश मिश्रा, पुष्पेंद्र तिवारी,नानबाबू तिवारी,सुनील ओझा, भोला मिश्रा,शिवजी दूबे,महेश पांडेय,दशरथ लाल शुक्ला, सूरज अवस्थी,राघवेंद्र,कुलदीप पांडेय,महेश तिवारी,दीपक तिवारी और दिवाकर पांडेय सहित अनेक लोग मौजूद रहे।कैंडल मार्च के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपनिरीक्षक शशांक मौर्य,मुख्य आरक्षी दीपक मिश्रा,वकील सिंह, सर्वेश सिंह सहित दर्जनों पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद जिले में अलर्ट,जिला विद्यालय निरीक्षक ने लाइब्रेरी संचालकों को भेजा नोटिस
* सुविधाएं न देने पर होगी कार्रवाई

गोंडा। लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग अग्निकांड में 14 छात्रों की मौत के बाद गोंडा जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) डॉ. रामचंद्र ने जिले की सभी लाइब्रेरियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी लाइब्रेरी संचालकों को नोटिस जारी कर तत्काल पेयजल, विद्युत, शौचालय, वेंटिलेशन और अग्निशमन उपकरण जैसी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी मांगी है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि सूचना न देने या मानक विहीन संचालन पाए जाने पर भारतीय दंड संहिता के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रामचंद्र ने कहा कि संज्ञान में आया है कि कई लाइब्रेरी बिना पर्याप्त सुविधाओं के चल रही हैं, जिससे अप्रिय घटना का खतरा बना रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया, "बच्चों की जिंदगी सबसे अहम है, इसके साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी संचालकों को तत्काल DIOS कार्यालय से संपर्क कर सुविधाओं का विवरण उपलब्ध कराने,आकस्मिक निरीक्षण में कमियां मिलने पर संचालक व संस्थापक स्वयं जिम्मेदार होंगे तथा DIOS ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह को पत्र लिखकर खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से विकासखंडों में संचालित सभी लाइब्रेरियों का नाम सहित विवरण मांगा है।जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर मानक विहीन लाइब्रेरियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
18 साल से अधर में चकबंदी
500 मुकदमों और जमीन घोटाले के आरोपों में उलझा ऐली परसौली,
किसानों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

शैलेन्द्र सिंह

गोंडा।जिले के तहसील तरबगंज के बाढ़ प्रभावित ग्राम ऐली परसौली में वर्ष 2008 में शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया 18 वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। ग्राम समाज की भूमि से जुड़े सैकड़ों विवादित मामलों और अभिलेखीय गड़बड़ियों के चलते चक निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है। लंबे इंतजार से परेशान किसानों ने अब जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चकबंदी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने की मांग की है।
सरयू नदी के तटीय क्षेत्र में बसे ऐली परसौली गांव की भौगोलिक स्थिति चकबंदी की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार नदी का प्रवाह समय-समय पर दिशा बदलता रहता है, जिससे कटान और भू-क्षेत्र में बदलाव होता रहता है। यही कारण है कि ग्राम सभा की बड़ी मात्रा में भूमि प्रभावित होती रही है। वर्ष 1998 में सरकार ने इस बाढ़ प्रभावित गांव में चकबंदी लागू करने का गजट जारी किया था, इसके पश्चात दिसंबर 2008 में विधिवत चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
चकबंदी विभाग ने धारा 4(2) का प्रकाशन, मालियत निर्धारण, पर्चा-5 का वितरण तथा धारा-11 की कार्रवाई पूरी कर ली थी। इसके बाद चक निर्माण का कार्य शुरू हुआ, लेकिन आज तक अंतिम रूप नहीं ले सका। गांव में लगभग 3200 से अधिक खातेदार हैं और इसकी सीमाएं अयोध्या जनपद से  जुड़ती हैं।मामले को लेकर किसान विश्वनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारी जनता को लगातार गुमराह कर रहे हैं और वर्षों से लंबित प्रक्रिया को पूरा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। सेवानिवृत्ति प्रधानाचार्य अयोध्या सिंह ने कहा कि चकबंदी पूरी न होने से किसानों को भूमि संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में इसी वजह से किसने की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है। जिससे आने वाले समय में खाद का संकट ग्रामीणों के लिए खड़ा हो सकता है।

इनसेट

500 मुकदमों में फंसी ग्राम समाज की जमीन

सहायक चकबंदी अधिकारी श्रीकांत गौड़ ने बताया कि वर्तमान गाटा संख्याओं का मिलान फसली वर्ष 1359 की खतौनी से किया जा रहा है जो लगभग पूरा हो चुका है वही जोत चक आकार पत्र  23 कंप्लीट किया जा चुका है। गैर विवादित चक की पैमाइश की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा ग्राम समाज की भूमि से जुड़े लगभग 500 मुकदमे चकबंदी अधिकारी न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन मामलों के निस्तारण और अभिलेखों के शुद्धीकरण के बाद ही इन चकों के निर्माण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी।

पट्टों में भारी अनियमितताओं के आरोप
पूर्व प्रधान प्रतिनिधि सुरजीत सिंह ने  चकबंदी में देरी के पीछे पूर्व में हुए भूमि आवंटन घोटालों को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि कुछ पूर्व लेखपालों ने वर्ग-6 की भूमि, नदी, तालाब और खलिहान जैसी सार्वजनिक संपत्तियों तक का मनमाने तरीके से पट्टा आवंटित कर दिया। आरोप है कि कई मामलों में उपलब्ध रकबे से दोगुनी भूमि तक का आवंटन कर दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर विवाद खड़े हो गए।
स्थानीय निवासी देशराज सिंह ने बताया कि एक लेखपाल ओम प्रकाश गुप्ता ने 2016 में बंदोबस्त के कुछ पर्चो को फाड़ कर 23 व्यक्तियों के पक्ष में 365 बीघा भूमि कंप्यूटराइज्ड तरीके से नामांकित कर दी। इस बात का खुलासा होते ही विभाग में हड़कंप मच गया और आनन फानन लेखपाल सहित 23 लोगों के विरुद्ध विभागीय जांच के उपरांत धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लेखपाल सहित कई लाभांवित व्यक्तियों को जेल भेज दिया गया। मुकदमा अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।

इनसेट

चकबंदी नहीं, किसानों के लिए बनी अनिश्चितता की कहानी

करीब दो दशक से लंबित चकबंदी प्रक्रिया अब ग्रामीणों के लिए प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब चकबंदी का उद्देश्य भूमि विवादों का समाधान और कृषि व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना था, तो आखिर 18 वर्षों बाद भी यह प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव तक क्यों नहीं पहुंच सकी। अब निगाहें शासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस लंबे समय से लंबित मामले में क्या कदम उठाते हैं।