दफ्तर से 61 फाइलें गायब, BSA पर घूसखोरी का मुकदमा दर्ज, BSA ने डीएम पर लगाए साजिश रचने के गंभीर आरोप, जांच बढ़ी तो खुले कई राज
रितेश मिश्रा
हरदोई। का बेसिक शिक्षा विभाग इस वक्त शायद अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है।जिस विभाग पर बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी है, उसी विभाग में अब भर्ती प्रक्रिया, सरकारी अभिलेखों के गायब होने, रिश्वतखोरी के आरोप और प्रशासनिक टकराव की परतें खुलती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है, कई अलमारियां और दो कमरे सील कर दिए गए हैं, जबकि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़ी 61 मूल पत्रावलियां रहस्यमय ढंग से गायब मिली हैं। एक तरफ पुलिस जांच कर रही है, दूसरी तरफ प्रशासनिक टीम रिकॉर्ड खंगाल रही है और तीसरी तरफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
पूरे विवाद की शुरुआत ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया से मानी जा रही है। शासन स्तर पर बाल वाटिका और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए एजुकेटरों की भर्ती निकाली गई थी। हरदोई जिले में 210 पदों पर भर्ती प्रस्तावित थी, जिसके लिए सेवायोजन पोर्टल पर कुल 4590 आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद जिला चयन समिति ने रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के जरिए लगभग 630 अभ्यर्थियों का चयन अगले चरण के लिए किया। भर्ती प्रक्रिया को संचालित करने की जिम्मेदारी गोण्डा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान को दी गई थी। संस्था का दावा है कि उसने शासन के निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया का डाटा तैयार कर लिया था, लेकिन आगे की कार्रवाई बीएसए कार्यालय स्तर पर अटक गई।
संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी का आरोप है कि कार्यादेश मिलने के बावजूद करीब छह महीने तक भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। शिकायत के अनुसार जब उन्होंने बीएसए डॉ. अजित सिंह से संपर्क किया तो कथित रूप से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई और फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी गई। एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि दबाव के चलते दो लाख रुपये दिए गए, लेकिन इसके बाद भी कथित प्रताड़ना और दबाव जारी रहा। इसी के बाद संस्था ने कोतवाली शहर में बीएसए के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमा दर्ज होते ही पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हलचल मच गई और मामला प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंच गया।
रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच जब प्रशासन ने रिकॉर्ड की जांच शुरू कराई तो एक और बड़ा खुलासा सामने आया। 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख रिकॉर्ड से गायब पाए गए। ये वे दस्तावेज थे जिन्हें सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा जाना चाहिए था। मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। खास बात यह भी है कि एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य भी इसी पटल के अधीन बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि जांच टीम अब दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुनय झा ने सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की।टीम ने बीएसए कार्यालय पहुंचकर घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच की। जांच के दौरान कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए जाने की आशंका पर भर्ती संबंधी दस्तावेज रखने वाली कई अलमारियों को सील कर दिया गया, जबकि दो कमरों पर भी प्रशासन ने ताला लगाकर सील लगा दी। अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों से छेड़छाड़ की संभावना को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
जांच के दौरान भर्ती और गायब फाइलों के अलावा विभागीय कामकाज में भी कई गंभीर खामियां सामने आने की बात कही जा रही है।कहा जा रहा है कि जांच टीम को ऐसे कई प्रकरण मिले जो लंबे समय से लंबित पड़े थे। इनमें करीब एक वर्ष से लंबित पेंशन संबंधी फाइलें भी शामिल बताई जा रही हैं। इसके अलावा न्यायालय के आदेश के बावजूद कुछ भर्ती मामलों में निर्धारित काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी नहीं कराई गई थी,जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और असंतोष देखने को मिला।जांच के दौरान कई अभ्यर्थी अधिकारियों के सामने पहुंचे और अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को नोटिस और सूचना जारी करने के निर्देश दिए गए।साथ ही लंबित काउंसलिंग प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराने के आदेश भी दिए गए हैं। इन तथ्यों के सामने आने के बाद सवाल सिर्फ रिश्वतखोरी,भर्ती विवाद और गायब फाइलों तक सीमित नहीं रह गए हैं,बल्कि विभाग में लंबित पेंशन, न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उधर पूरे मामले में घिरे बीएसए डॉ. अजित सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।उनका कहना है कि उन्हें सुनियोजित तरीके से फंसाया जा रहा है। बीएसए का आरोप है कि जिलाधिकारी और एडीएम स्तर के अधिकारियों ने उन्हें लगातार प्रताड़ित किया,बैठकों में अपमानित किया और जिले से चले जाने तक की बात कही।उनका दावा है कि एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी हर कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देशों पर हुई है।उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने किसी अभ्यर्थी से भ्रष्टाचार किया है तो भर्ती प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों से पूछताछ कराई जाए। बीएसए का आरोप है कि उनके ऑफिस के दो बाबुओं को कलेक्ट्रेट में अटैच किया गया है जबकि वहां के दो बाबूओ को उनके ऑफिस में भेजा गया है नजर रखने के लिए, फर्म संचालक को बुलाकर उनके खिलाफ साजिशन मुकदमा दर्ज कराया गया है।
अब जांच के केंद्र में कई बड़े सवाल खड़े हैं—
• 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख आखिर कहां गए?
• क्या सरकारी रिकॉर्ड जानबूझकर गायब किए गए या यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है?
• 210 पदों की एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया आखिर छह महीने तक क्यों अटकी रही?
• उज्ज्वला सेवा संस्थान द्वारा लगाए गए पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोपों में कितनी सच्चाई है?
• क्या फाइलों के गायब होने और एजुकेटर भर्ती विवाद के बीच कोई संबंध है?
• बीएसए द्वारा लगाए गए साजिश और प्रताड़ना के आरोपों में कितना दम है?
आखिर एक वर्ष से लंबित पेंशन प्रकरणों का निस्तारण क्यों नहीं किया गया?
• क्या विभागीय स्तर पर फाइलों के निस्तारण में लापरवाही बरती गई या जानबूझकर मामलों को रोके रखा गया?
• न्यायालय के आदेश के बावजूद भर्ती प्रक्रिया की काउंसलिंग समय पर क्यों नहीं कराई गई?
• और सबसे बड़ा सवाल, जांच की आंच आखिर बाबुओं तक सीमित रहेगी या विभाग के बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचेगी?
फिलहाल हरदोई का शिक्षा विभाग अभूतपूर्व जांच के दौर से गुजर रहा है। मुकदमा दर्ज हो चुका है, रिकॉर्ड सील हैं, पुलिस और प्रशासन दोनों अपनी-अपनी जांच कर रहे हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं, दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड गायब होने का मामला और तीसरी तरफ अफसरों के बीच खुला टकराव। ऐसे में पूरे जिले की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि जांच का अगला कदम क्या होगा और आखिर इस पूरे मामले का सच किस रूप में सामने आएगा.
10 hours ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
3.9k