सचिवालय कर्मियों की जीत: CUG नंबर बदलने का फैसला वापस

अब पुराने नंबर ही BSNL में होंगे पोर्ट, अवकाश के दिन कार्यालय खोलने का आदेश भी रद्द


लखनऊ। सचिवालय कर्मचारियों के विरोध के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर बदलने का फैसला वापस ले लिया है। अब कर्मचारियों के पिछले करीब 15 वर्षों से उपयोग में रहे मोबाइल नंबरों को बदलने के बजाय नई सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल में ही पोर्ट कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया को लेकर सोमवार को मौजूदा सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन/आइडिया के अधिकारियों से सचिवालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी वार्ता करेंगे।
गौरतलब है कि सचिवालय प्रशासन विभाग ने सभी शाखा अधिष्ठानों को शनिवार, अवकाश के दिन भी कार्यालय खोलकर कर्मचारियों को नए सीयूजी नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि कर्मचारियों की आपत्तियों और विरोध के बीच विभाग ने शुक्रवार देर रात यह आदेश भी निरस्त कर दिया।
फैसला वापस होने के बाद सचिवालय कर्मियों में राहत की भावना देखी जा रही है। कर्मचारियों का कहना था कि वर्षों से उपयोग किए जा रहे नंबर बदलने से सरकारी कार्य, संपर्क व्यवस्था और व्यक्तिगत संचार प्रभावित हो सकता था।
लखनऊ कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 एसीपी, 3 इंस्पेक्टर और एक एसआई के तबादले

लखनऊ। राजधानी में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी आदेश में तीन एसीपी, तीन इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक के तबादले किए गए हैं। हालिया घटनाओं और कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तबादला सूची के अनुसार सौम्या पांडेय को एसीपी विभूतिखंड नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस कमिश्नरेट की सोशल मीडिया सेल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया

वहीं विनय द्विवेदी को एसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। इसी क्रम में सुशील यादव को एसीपी क्राइम के साथ-साथ साइबर क्राइम की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। थाना स्तर पर भी हुए बदलाव कमिश्नरेट प्रशासन ने थाना स्तर पर भी बदलाव किए हैं। विभूतिखंड के प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। उनकी जगह उपेंद्र सिंह को नया प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा सुधीर कुमार अवस्थी को भी पुलिस लाइन संबद्ध किया गया है, जबकि गौरव बाजपेयी को गोमतीनगर विस्तार थाने का नया प्रभारी बनाया गया है।

पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा

कानून-व्यवस्था को लेकर सक्रिय हुआ प्रशासन हाल के दिनों में राजधानी में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि बेहतर पुलिसिंग, जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नई तैनातियों से पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा तथा जनता की शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी।
रिटायर्ड IAS ने अस्पताल पर लगाया बंधक बनाने का आरोप, पुलिस जांच शुरू

पूर्व IAS किशोर कुमार सिन्हा का दावा— डिस्चार्ज में देरी, बाहर निकलने की कोशिश पर फिर भर्ती किया गया; 112 पर कॉल के बाद मामला खुला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश IAS एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और 1978 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी किशोर कुमार सिन्हा ने राजधानी के एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व अधिकारी का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें तय समय पर डिस्चार्ज नहीं किया गया और अस्पताल प्रशासन ने उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रोके रखा।

जानकारी के अनुसार, पूर्व IAS किशोर कुमार सिन्हा हाल ही में इलाज के लिए नोवा हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उनका आरोप है कि अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश करने पर डॉक्टरों और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें दोबारा पकड़कर अस्पताल में भर्ती कर दिया।बताया जा रहा है कि स्थिति से परेशान होकर उन्होंने पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर पर कॉल किया, जिसके बाद उन्हें राहत मिली।

किशोर कुमार सिन्हा प्रशासनिक सेवा में कई अहम पदों पर रह चुके हैं। वह स्टेट विजिलेंस कमीशन एवं ट्रिब्यूनल के अध्यक्षरेवेन्यू बोर्ड के सदस्य और प्रमुख सचिव राजस्व जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

 मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। पुलिस जांच के बाद ही तथ्य स्पष्ट होंगे।

कानून व्यवस्था पर CM योगी सख्त, सुस्त अफसरों की देर रात क्लास


* घटनाओं पर नाराज़ मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों के अफसरों को लगाई फटकार, VC के बाद लखनऊ में ACP-SHO समेत थानेदार हटाए गए

लखनऊ। प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में फील्ड अधिकारियों के पेंच कस दिए। घटनाओं पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने कड़ी फटकार लगाई। बैठक में गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों के अफसर मुख्यमंत्री के निशाने पर रहे।

सूत्रों के मुताबिक, कानून व्यवस्था को लेकर लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और समीक्षा बैठकों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखने पर मुख्यमंत्री ने नाराज़गी जताई। बड़े अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई न होने से निचले स्तर के अफसर निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, इस मुद्दे पर भी सवाल उठे।

बैठक के तुरंत बाद राजधानी लखनऊ में कार्रवाई देखने को मिली। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभूति खंड क्षेत्र के ACP, SHO और गोमती नगर विस्तार थाने के प्रभारी को हटा दिया गया। माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार अब जवाबदेही तय करने के मूड में है। संदेश साफ है कि कानून व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
पुलिस महानिदेशक पीएसी ने 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद का किया निरीक्षण, जवानों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
लखनऊ । पुलिस महानिदेशक पीएसी उत्तर प्रदेश आलोक सिंह द्वारा 41वीं वाहिनी पीएसी, गाजियाबाद का भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। इस दौरान सभी मोर्चों का निरीक्षण करते हुए जवानों से ‘आर्क ऑफ फायर’ के संबंध में जानकारी प्राप्त की। साथ ही क्वार्टर गार्ड की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान पुलिस महानिदेशक ने प्रशासनिक भवन के विभिन्न कार्यालयों, वाहिनी अस्पताल एवं परिसर में स्थापित सेनेटरी नैपकिन मेकिंग मशीन का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने पी.एम.एस. तथा निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का जायजा लेकर संबंधित अभियंताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्पोर्ट्स हॉस्टल का भी निरीक्षण किया गया।

तत्पश्चात मनोरंजन कक्ष में आयोजित सैनिक सम्मेलन में उन्होंने जवानों की समस्याओं को सुना तथा उनके त्वरित निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। अपने संबोधन में उन्होंने सभी कार्मिकों को सोशल मीडिया पॉलिसी का कड़ाई से पालन करने, शारीरिक दक्षता एवं एबीसी कोर्स पर विशेष ध्यान देने तथा वर्तमान समय में अर्बन नक्सलवाद की चुनौतियों के प्रति सतर्क एवं सजग रहने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर डीआईजी पीएसी मेरठ अनुभाग मेरठ श्रीमती कल्पना सक्सेना, सेनानायक 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद डॉ. दिनेश यादव, सेनानायक 5वीं वाहिनी यूपीएसएसएफ सहारनपुर डॉ. एम.पी. सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सर्वाधिक वृक्षारोपण कराने वाले बीडीओ होंगे सम्मानित, यूपी में 11.25 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
* डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले— वृक्षारोपण अभियान को बनाएं जनआंदोलन, पौधों की सुरक्षा और जीवितता पर दें विशेष ध्यान


लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के वृहद वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी तेज कर दी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग को इस वर्ष 11.25 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा, देखभाल और जीवितता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन सर्वश्रेष्ठ जनपदों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि सर्वाधिक क्षेत्रफल में वृक्षारोपण कराने वाले खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को विशेष सम्मान दिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में वृक्षारोपण के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया जाए और ग्रामीणों के बीच पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर जनसंवाद, गोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने “वृक्षमाला नदीतट संरक्षण अभियान” के तहत नदी किनारों पर बांस रोपण को प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य आवासीय योजनाओं के लाभार्थियों से दो-दो सहजन (मोरिंगा) के पौधे अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए। श्री मौर्य ने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण स्थलों का चयन, गड्ढों की खुदाई और पौधों की उपलब्धता की तैयारियां समय से पूरी की जाएं ताकि पौधों की उत्तरजीविता दर बेहतर बनी रहे। उन्होंने पौधों की खरीद निजी नर्सरियों से न करने तथा वन विभाग के माध्यम से ही पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कुल पौधरोपण में कम से कम 20 प्रतिशत फलदार पौधों को शामिल किया जाए तथा पर्याप्त संख्या में सहजन के पौधे लगाए जाएं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पोषण सुरक्षा, ग्रामीण आय और आजीविका को भी मजबूती मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत कराए जाने वाले वृक्षारोपण कार्यों में निर्धारित मानकों के अनुरूप रखरखाव सुनिश्चित करने तथा विगत वर्षों में लगाए गए पौधों की समीक्षा कर सूखे एवं नष्ट पौधों का तत्काल प्रतिस्थापन कराने के निर्देश भी दिए।
आयुक्त ग्राम्य विकास जी.एस. प्रियदर्शी ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण अभियान-2026-27 को मिशन मोड में संचालित करते हुए इसे प्रदेशव्यापी जनभागीदारी का सफल अभियान बनाया जाए।
लखनऊ में जमीन खरीदना होगा महंगा, 332 गांवों में सर्किल रेट 200% तक बढ़ाने का प्रस्ताव
* 4 जून से लागू होंगी नई दरें, 2 जून तक दर्ज कराई जा सकेंगी आपत्तियां


लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन खरीदना अब पहले से ज्यादा महंगा होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने 332 गांवों में कृषि योग्य भूमि के डीएम सर्किल रेट 100 से 200 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नई दरें 4 जून से लागू की जाएंगी, जबकि 2 जून तक आम लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
नई दरें लागू होने के बाद कई गांवों में कृषि भूमि की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। जिन क्षेत्रों में फिलहाल कृषि भूमि का सर्किल रेट 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, वहां यह बढ़कर 35 से 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित संशोधन के दायरे में मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद और सदर तहसील के कई गांव शामिल हैं।
जिलाधिकारी विशाख जी के अनुसार, एलडीए के विस्तारित क्षेत्र और नगर निगम सीमा में शामिल गांवों को छोड़कर अन्य ग्रामीण इलाकों में सर्किल रेट संशोधित किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि बाजार मूल्य और मौजूदा सर्किल रेट में भारी अंतर को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कृषि भूमि को चार श्रेणियों — जनपदीय मार्ग से सटी भूमि, संपर्क मार्ग की भूमि, आबादी से लगी जमीन और सामान्य कृषि भूमि — में विभाजित कर नई दरें निर्धारित की गई हैं।सर्किल रेट बढ़ने के बाद ग्रामीण इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क और खरीद-बिक्री की लागत में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
यूपी में आपदा के बीच राहत आयुक्त के विदेश दौरे पर विवाद, सीएम योगी ने मांगी रिपोर्ट
* 117 मौतों के बीच विदेश यात्रा पर उठे सवाल, मुख्य सचिव से जवाब तलब; प्रदेशभर में बारिश-आंधी का अलर्ट जारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों आए भीषण आंधी-तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में 117 लोगों की मौत के बीच राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के विदेश दौरे पर जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताते हुए पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही मुख्य सचिव से भी जवाब मांगा गया है।
इस बीच, नौतपा के दौरान प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पिछले दो दिनों से आंधी, बारिश और तेज हवाओं के चलते लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। शनिवार सुबह से प्रदेश के अधिकांश जिलों में बादल छाए रहे और कई स्थानों पर तापमान में करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई।
भीषण गर्मी के लिए चर्चित बांदा में 28 मई को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो घटकर करीब 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। विभाग के अनुसार 2 जून तक मौसम का यही रुख बने रहने की संभावना है।
गुरुवार देर रात और शुक्रवार को लखनऊ समेत पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश, आंधी और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि हुई। खराब मौसम के चलते कच्चे मकानों की दीवारें गिर गईं, टिनशेड उड़ गए और सैकड़ों पेड़ धराशायी हो गए। चित्रकूट में लगभग 500 तोतों की मौत की सूचना भी सामने आई है।
आंधी-तूफान, बिजली गिरने और अन्य मौसम संबंधी हादसों में प्रदेश में 31 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें सबसे अधिक 15 मौतें बुंदेलखंड क्षेत्र में हुईं।
हमीरपुर में 6, बांदा में 3, महोबा, उरई और जालौन में 2-2 मौतें दर्ज की गईं। इसके अलावा कौशांबी में 4, सहारनपुर और देवरिया में 2-2, जबकि प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, बलिया, महाराजगंज, मथुरा, उन्नाव, फतेहपुर और रामपुर में एक-एक व्यक्ति की जान गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौसम जनित घटनाओं से हुए नुकसान का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 7,339 वाहनों पर शिकंजा

33.71 करोड़ रुपये का अधिरोपण, 28.31 करोड़ की वसूली; प्रदेशभर में प्रवर्तन अभियान जारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उपखनिजों के अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक 7,339 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 33 करोड़ 71 लाख रुपये का अधिरोपण किया गया है।

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक श्रीमती माला श्रीवास्तव के निर्देश पर अप्रैल 2026 से जनपद और निदेशालय स्तर पर प्रदेशभर में लगातार सघन जांच अभियान संचालित किया जा रहा है।

विभागीय जांच में बड़ी संख्या में वाहन वैध प्रपत्रों के साथ खनिज परिवहन करते पाए गए, जबकि अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग में लिप्त वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की गई। विभाग के अनुसार अधिरोपित राशि में से अब तक 28 करोड़ 31 लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है।
अभियान की समीक्षा के दौरान श्रीमती माला श्रीवास्तव ने अंतर्राज्यीय सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों से आने वाले उपखनिजों का परिवहन केवल वैध आईएसटीपी (Inter-State Transit Pass) के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जाए और किसी भी परिस्थिति में ओवरलोडिंग न होने दी जाए।
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्रों के सोर्स प्वाइंट पर निर्धारित लोडिंग मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। यदि किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

श्रीमती माला श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार अवैध खनन और अवैध परिवहन के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और राजस्व हितों की सुरक्षा के लिए यह प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
हमीरपुर पुल हादसा: 6 मजदूरों की मौत मामले में निर्माण कंपनी, मालिक और सुपरवाइजर पर भी एफआईआर

* ठेकेदार की लापरवाही से आंधी में गिरा था सेगमेंटल स्पैन, कार्रवाई तेज; इंजीनियर सस्पेंड, विभागीय जांच भी शुरू

हमीरपुर/ लखनऊ। हमीरपुर जिले में निर्माणाधीन पुल गिरने से छह मजदूरों की मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के संबंध में पुल निर्माण करा रही कंपनी M/S The Sheltor, उसके मालिक विजय प्रताप सिंह और प्रोजेक्ट सुपरवाइजर नीतिश सचान के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।
कुरारा थाने में दर्ज एफआईआर उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार की ओर से कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि ठेकेदार की लापरवाही के चलते तेज आंधी के दौरान पुल का सेगमेंटल स्पैन गिर गया, जिससे छह मजदूरों की जान चली गई।
हमीरपुर पुल हादसे को लेकर लगातार कार्रवाई का दौर जारी है। घटना के बाद उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम के सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एफआईआर दर्ज कराने वाले उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर हादसे की वजहों की गहन जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों पर आगे भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।