कानून व्यवस्था पर CM योगी सख्त, सुस्त अफसरों की देर रात क्लास


* घटनाओं पर नाराज़ मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों के अफसरों को लगाई फटकार, VC के बाद लखनऊ में ACP-SHO समेत थानेदार हटाए गए

लखनऊ। प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में फील्ड अधिकारियों के पेंच कस दिए। घटनाओं पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने कड़ी फटकार लगाई। बैठक में गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों के अफसर मुख्यमंत्री के निशाने पर रहे।

सूत्रों के मुताबिक, कानून व्यवस्था को लेकर लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और समीक्षा बैठकों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखने पर मुख्यमंत्री ने नाराज़गी जताई। बड़े अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई न होने से निचले स्तर के अफसर निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, इस मुद्दे पर भी सवाल उठे।

बैठक के तुरंत बाद राजधानी लखनऊ में कार्रवाई देखने को मिली। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभूति खंड क्षेत्र के ACP, SHO और गोमती नगर विस्तार थाने के प्रभारी को हटा दिया गया। माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार अब जवाबदेही तय करने के मूड में है। संदेश साफ है कि कानून व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
पुलिस महानिदेशक पीएसी ने 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद का किया निरीक्षण, जवानों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
लखनऊ । पुलिस महानिदेशक पीएसी उत्तर प्रदेश आलोक सिंह द्वारा 41वीं वाहिनी पीएसी, गाजियाबाद का भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। इस दौरान सभी मोर्चों का निरीक्षण करते हुए जवानों से ‘आर्क ऑफ फायर’ के संबंध में जानकारी प्राप्त की। साथ ही क्वार्टर गार्ड की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान पुलिस महानिदेशक ने प्रशासनिक भवन के विभिन्न कार्यालयों, वाहिनी अस्पताल एवं परिसर में स्थापित सेनेटरी नैपकिन मेकिंग मशीन का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने पी.एम.एस. तथा निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का जायजा लेकर संबंधित अभियंताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्पोर्ट्स हॉस्टल का भी निरीक्षण किया गया।

तत्पश्चात मनोरंजन कक्ष में आयोजित सैनिक सम्मेलन में उन्होंने जवानों की समस्याओं को सुना तथा उनके त्वरित निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। अपने संबोधन में उन्होंने सभी कार्मिकों को सोशल मीडिया पॉलिसी का कड़ाई से पालन करने, शारीरिक दक्षता एवं एबीसी कोर्स पर विशेष ध्यान देने तथा वर्तमान समय में अर्बन नक्सलवाद की चुनौतियों के प्रति सतर्क एवं सजग रहने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर डीआईजी पीएसी मेरठ अनुभाग मेरठ श्रीमती कल्पना सक्सेना, सेनानायक 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद डॉ. दिनेश यादव, सेनानायक 5वीं वाहिनी यूपीएसएसएफ सहारनपुर डॉ. एम.पी. सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सर्वाधिक वृक्षारोपण कराने वाले बीडीओ होंगे सम्मानित, यूपी में 11.25 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
* डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले— वृक्षारोपण अभियान को बनाएं जनआंदोलन, पौधों की सुरक्षा और जीवितता पर दें विशेष ध्यान


लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के वृहद वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी तेज कर दी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग को इस वर्ष 11.25 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा, देखभाल और जीवितता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन सर्वश्रेष्ठ जनपदों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि सर्वाधिक क्षेत्रफल में वृक्षारोपण कराने वाले खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को विशेष सम्मान दिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में वृक्षारोपण के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया जाए और ग्रामीणों के बीच पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर जनसंवाद, गोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने “वृक्षमाला नदीतट संरक्षण अभियान” के तहत नदी किनारों पर बांस रोपण को प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य आवासीय योजनाओं के लाभार्थियों से दो-दो सहजन (मोरिंगा) के पौधे अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए। श्री मौर्य ने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण स्थलों का चयन, गड्ढों की खुदाई और पौधों की उपलब्धता की तैयारियां समय से पूरी की जाएं ताकि पौधों की उत्तरजीविता दर बेहतर बनी रहे। उन्होंने पौधों की खरीद निजी नर्सरियों से न करने तथा वन विभाग के माध्यम से ही पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कुल पौधरोपण में कम से कम 20 प्रतिशत फलदार पौधों को शामिल किया जाए तथा पर्याप्त संख्या में सहजन के पौधे लगाए जाएं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पोषण सुरक्षा, ग्रामीण आय और आजीविका को भी मजबूती मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत कराए जाने वाले वृक्षारोपण कार्यों में निर्धारित मानकों के अनुरूप रखरखाव सुनिश्चित करने तथा विगत वर्षों में लगाए गए पौधों की समीक्षा कर सूखे एवं नष्ट पौधों का तत्काल प्रतिस्थापन कराने के निर्देश भी दिए।
आयुक्त ग्राम्य विकास जी.एस. प्रियदर्शी ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण अभियान-2026-27 को मिशन मोड में संचालित करते हुए इसे प्रदेशव्यापी जनभागीदारी का सफल अभियान बनाया जाए।
लखनऊ में जमीन खरीदना होगा महंगा, 332 गांवों में सर्किल रेट 200% तक बढ़ाने का प्रस्ताव
* 4 जून से लागू होंगी नई दरें, 2 जून तक दर्ज कराई जा सकेंगी आपत्तियां


लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन खरीदना अब पहले से ज्यादा महंगा होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने 332 गांवों में कृषि योग्य भूमि के डीएम सर्किल रेट 100 से 200 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नई दरें 4 जून से लागू की जाएंगी, जबकि 2 जून तक आम लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
नई दरें लागू होने के बाद कई गांवों में कृषि भूमि की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। जिन क्षेत्रों में फिलहाल कृषि भूमि का सर्किल रेट 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, वहां यह बढ़कर 35 से 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित संशोधन के दायरे में मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद और सदर तहसील के कई गांव शामिल हैं।
जिलाधिकारी विशाख जी के अनुसार, एलडीए के विस्तारित क्षेत्र और नगर निगम सीमा में शामिल गांवों को छोड़कर अन्य ग्रामीण इलाकों में सर्किल रेट संशोधित किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि बाजार मूल्य और मौजूदा सर्किल रेट में भारी अंतर को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कृषि भूमि को चार श्रेणियों — जनपदीय मार्ग से सटी भूमि, संपर्क मार्ग की भूमि, आबादी से लगी जमीन और सामान्य कृषि भूमि — में विभाजित कर नई दरें निर्धारित की गई हैं।सर्किल रेट बढ़ने के बाद ग्रामीण इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क और खरीद-बिक्री की लागत में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
यूपी में आपदा के बीच राहत आयुक्त के विदेश दौरे पर विवाद, सीएम योगी ने मांगी रिपोर्ट
* 117 मौतों के बीच विदेश यात्रा पर उठे सवाल, मुख्य सचिव से जवाब तलब; प्रदेशभर में बारिश-आंधी का अलर्ट जारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों आए भीषण आंधी-तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में 117 लोगों की मौत के बीच राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के विदेश दौरे पर जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताते हुए पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही मुख्य सचिव से भी जवाब मांगा गया है।
इस बीच, नौतपा के दौरान प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पिछले दो दिनों से आंधी, बारिश और तेज हवाओं के चलते लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। शनिवार सुबह से प्रदेश के अधिकांश जिलों में बादल छाए रहे और कई स्थानों पर तापमान में करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई।
भीषण गर्मी के लिए चर्चित बांदा में 28 मई को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो घटकर करीब 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। विभाग के अनुसार 2 जून तक मौसम का यही रुख बने रहने की संभावना है।
गुरुवार देर रात और शुक्रवार को लखनऊ समेत पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश, आंधी और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि हुई। खराब मौसम के चलते कच्चे मकानों की दीवारें गिर गईं, टिनशेड उड़ गए और सैकड़ों पेड़ धराशायी हो गए। चित्रकूट में लगभग 500 तोतों की मौत की सूचना भी सामने आई है।
आंधी-तूफान, बिजली गिरने और अन्य मौसम संबंधी हादसों में प्रदेश में 31 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें सबसे अधिक 15 मौतें बुंदेलखंड क्षेत्र में हुईं।
हमीरपुर में 6, बांदा में 3, महोबा, उरई और जालौन में 2-2 मौतें दर्ज की गईं। इसके अलावा कौशांबी में 4, सहारनपुर और देवरिया में 2-2, जबकि प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, बलिया, महाराजगंज, मथुरा, उन्नाव, फतेहपुर और रामपुर में एक-एक व्यक्ति की जान गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौसम जनित घटनाओं से हुए नुकसान का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 7,339 वाहनों पर शिकंजा

33.71 करोड़ रुपये का अधिरोपण, 28.31 करोड़ की वसूली; प्रदेशभर में प्रवर्तन अभियान जारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उपखनिजों के अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक 7,339 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 33 करोड़ 71 लाख रुपये का अधिरोपण किया गया है।

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक श्रीमती माला श्रीवास्तव के निर्देश पर अप्रैल 2026 से जनपद और निदेशालय स्तर पर प्रदेशभर में लगातार सघन जांच अभियान संचालित किया जा रहा है।

विभागीय जांच में बड़ी संख्या में वाहन वैध प्रपत्रों के साथ खनिज परिवहन करते पाए गए, जबकि अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग में लिप्त वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की गई। विभाग के अनुसार अधिरोपित राशि में से अब तक 28 करोड़ 31 लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है।
अभियान की समीक्षा के दौरान श्रीमती माला श्रीवास्तव ने अंतर्राज्यीय सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों से आने वाले उपखनिजों का परिवहन केवल वैध आईएसटीपी (Inter-State Transit Pass) के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जाए और किसी भी परिस्थिति में ओवरलोडिंग न होने दी जाए।
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्रों के सोर्स प्वाइंट पर निर्धारित लोडिंग मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। यदि किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

श्रीमती माला श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार अवैध खनन और अवैध परिवहन के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और राजस्व हितों की सुरक्षा के लिए यह प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
हमीरपुर पुल हादसा: 6 मजदूरों की मौत मामले में निर्माण कंपनी, मालिक और सुपरवाइजर पर भी एफआईआर

* ठेकेदार की लापरवाही से आंधी में गिरा था सेगमेंटल स्पैन, कार्रवाई तेज; इंजीनियर सस्पेंड, विभागीय जांच भी शुरू

हमीरपुर/ लखनऊ। हमीरपुर जिले में निर्माणाधीन पुल गिरने से छह मजदूरों की मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के संबंध में पुल निर्माण करा रही कंपनी M/S The Sheltor, उसके मालिक विजय प्रताप सिंह और प्रोजेक्ट सुपरवाइजर नीतिश सचान के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।
कुरारा थाने में दर्ज एफआईआर उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार की ओर से कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि ठेकेदार की लापरवाही के चलते तेज आंधी के दौरान पुल का सेगमेंटल स्पैन गिर गया, जिससे छह मजदूरों की जान चली गई।
हमीरपुर पुल हादसे को लेकर लगातार कार्रवाई का दौर जारी है। घटना के बाद उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम के सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एफआईआर दर्ज कराने वाले उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर हादसे की वजहों की गहन जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों पर आगे भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने साइकिल से अदालत पहुंचे न्यायिक अधिकारी


लखनऊ। ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शनिवार को जनपद लखनऊ के न्यायिक अधिकारियों ने साइकिल से न्यायालय पहुंचकर समाज को सकारात्मक संदेश दिया।  जनपद न्यायाधीश लखनऊ मलखान सिंह के नेतृत्व में सभी न्यायिक अधिकारी प्रातः डालीबाग स्थित सेशंस हाउस से साइकिल द्वारा न्यायालय के लिए रवाना हुए।

जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शनिवार को न्यायिक अधिकारी साइकिल से न्यायालय आएंगे तथा जो अधिकारी साइकिल नहीं चला सकते, वे बैटरी रिक्शा का उपयोग करेंगे। इस पहल का उद्देश्य न केवल ईंधन की बचत करना है, बल्कि आमजन को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित करना भी है।

यह अभियान  मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय अरूण भंसाली के मार्गदर्शन एवं शुभाशीष से प्रारम्भ किया गया है। अभियान का शुभारम्भ 22 मई 2026 को  प्रशासनिक न्यायमूर्ति लखनऊ राजेश सिंह चौहान द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया था। जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह के नेतृत्व में न्यायिक अधिकारियों ने संकल्प लिया है कि प्रत्येक शनिवार को सभी न्यायिक अधिकारी साइकिल से न्यायालय पहुंचेंगे। इसी क्रम में अभियान के दूसरे चरण में शनिवार को एक बार फिर न्यायिक अधिकारियों ने साइकिल यात्रा कर ईंधन संरक्षण, ऊर्जा बचत और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया।
केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर यूपी में 5 से 21 जून तक चलेगा व्यापक जनसंपर्क अभियान

* हर विधानसभा में निकलेगी ‘प्रगति पथ यात्रा’, जनकल्याण मेले, संवाद कार्यक्रम और विकसित भारत संकल्प सम्मेलन होंगे आयोजित

* सीएम योगी ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की तैयारियों की समीक्षा की


लखनऊ। केंद्र की एनडीए सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश में 5 जून से 21 जून तक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की तैयारियों की समीक्षा की और निर्देश दिए कि केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को जनभागीदारी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन, गरीब कल्याण, सामाजिक न्याय और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं, विकास कार्यों और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान कल्याण, महिला सुरक्षा, रोजगार, निवेश, आधारभूत संरचना, कानून-व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में हुए बदलावों और उपलब्धियों को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए। साथ ही सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाए।
बैठक में तय किया गया कि 5 से 21 जून के बीच प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में लगभग 10 किलोमीटर लंबी ‘प्रगति पथ यात्रा’ निकाली जाएगी। यात्रा के दौरान जनप्रतिनिधि गांवों में रात्रि विश्राम करेंगे, चौपाल लगाएंगे और स्थानीय लोगों के साथ संवाद करेंगे।
अभियान के तहत 8 से 14 जून तक जनसंपर्क अभियान, संवाद कार्यक्रम और पैदल मार्च आयोजित किए जाएंगे। 11 और 12 जून को मीडिया संवाद कार्यक्रम होंगे, जबकि 14 से 16 जून के बीच सभी विकास खंडों और नगरीय निकायों में जनकल्याण मेले लगाए जाएंगे। इन मेलों में प्रदर्शनियां, आरोग्य मेले, पशु स्वास्थ्य शिविर और लाभार्थी जोड़ो अभियान भी चलाए जाएंगे।16 और 17 जून को जिला स्तर पर ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ आयोजित होंगे, वहीं 18 और 19 जून को केंद्र सरकार की 12 वर्षों की विकास यात्रा पर आधारित विशेष प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभियान में युवाओं, महिलाओं, किसानों, व्यापारिक संगठनों, प्रबुद्ध वर्ग, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा होंगे।
उन्होंने कहा कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण किया जाएगा, जबकि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर प्रदेश के सभी 825 विकास खंडों और 700 से अधिक नगरीय निकायों में योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित न रहकर जनता से संवाद, लाभार्थियों तक पहुंच और विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को जनआंदोलन बनाने का प्रभावी माध्यम बनना चाहिए।
कम मानसून और जलवायु चुनौती से निपटने को यूपी की खास तैयारी, खरीफ 2026 के लिए बनी नई रणनीति

* धान में डीएसआर तकनीक को बढ़ावा, दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने को किसानों को मिलेंगे मुफ्त मिनीकिट और उन्नत बीज


नई दिल्ली/ लखनऊ। नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन ‘खरीफ अभियान-2026’ में उत्तर प्रदेश ने जलवायु परिवर्तन और संभावित कमजोर मानसून की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी विशेष कृषि रणनीति प्रस्तुत की। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों, विशेषज्ञों और अधिकारियों ने खरीफ सीजन को सफल बनाने के लिए रणनीतियों पर मंथन किया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ अभियान 2026 के तहत मौसम आधारित खेती, जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को प्राथमिकता दी है। सरकार का लक्ष्य किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी उत्पादन क्षमता बनाए रखना है। कम मानसून और एल-नीनो प्रभाव की आशंकाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार धान की खेती में ‘डीएसआर’ (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा दे रही है। इस तकनीक से पारंपरिक रोपाई की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक जल संरक्षण संभव है, वहीं फसल 15 से 20 दिन पहले तैयार होने से किसानों को रबी फसलों के लिए अतिरिक्त समय भी मिल सकेगा।
खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत कृषि विभाग किसानों को प्रमाणित बीज, उर्वरक और तकनीकी प्रशिक्षण समय से उपलब्ध करा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर किसान गोष्ठियों के माध्यम से सूखा प्रबंधन, मृदा संरक्षण और फसल विविधीकरण की जानकारी दी जा रही है। साथ ही ‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रदेश को दलहन, तिलहन और मिलेट्स उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को निःशुल्क मिनीकिट तथा अनुदानित उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बीज, उर्वरक और कृषि रक्षा रसायनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी फसल उत्पादकता बढ़ाएं तथा आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनें।