राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

कलाकार भी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद गंभीर : शिवराज

मंच कलाकार अदनान खान ने पूर्व मुख्यमंत्री के अभियान में दिया योगदान

भोपाल। पर्यावरण संरक्षण और इसके विकास एवं विस्तार के लिए लगातार काम जारी रहना चाहिए। हर इंसान की इसके लिए ज़िम्मेदारी है। रंगमंच से लेकर सुनहरी पर्दे तक से बेहतर समाज और उज्ज्वल भविष्य के लिए संदेश देने वाले कलाकार भी इस दिशा में अपनी कोशिशें जारी रखे हुए हैं। उम्मीद की जाना चाहिए कि हर मामले में इनको फालो करने वाले इनके लाखों फॉलोअर्स इस भलाई की दिशा को भी चुनेंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पर्यावरण को लेकर किए जाने वाले हरदिन पौधारोपण में रविवार को रंगमंच के वरिष्ठ कलाकार अदनान खान ने हिस्सा लिया। उन्होंने राजधानी भोपाल में शिवराज के साथ पौधा लगाया और इसको फलने फूलने में और सतत देखभाल का भी संकल्प लिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज ने अदनान का स्वागत किया। उन्होंने अदनान के इस सहयोग का धन्यवाद भी किया।

5 साल का अभियान 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पौधारोपण की शुरुआत 19 फरवरी 2021 को अमरकंटक से हुई थी। इसके तहत वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं और आम जनता से भी अपने जन्मदिन या वर्षगांठ जैसे विशेष अवसरों पर पेड़ लगाने की अपील करते हैं।

शिवराज का प्रयास 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अभियान को अधिक विकसित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे अधिक से अधिक नागरिक इस पहल से जुड़ सकें। उन्होंने संतों, मनीषियों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरणविदों से भी अपने प्रवचनों और अभियानों के माध्यम से पौधारोपण के लिए जन-जन को प्रेरित करने का आह्वान किया।

रतलाम के पास राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग, दो एसी कोच जलकर खाक; सभी 68 यात्री सुरक्षित

रतलाम (मध्य प्रदेश)। रविवार सुबह मध्य प्रदेश के रतलाम के पास त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) में बड़ा हादसा होते-होते टल गया। ट्रेन के एसी कोच बी-1 में अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते दूसरे कोच को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयावह थी कि दोनों एसी कोच पूरी तरह जलकर खाक हो गए।

घटना के समय ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। रेलवे स्टाफ और आरपीएफ की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सभी 68 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोच से धुआं उठते ही ट्रेन को तुरंत रोका गया और यात्रियों को तेजी से बाहर निकाला गया। इसके बाद दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

हादसे के चलते रेल मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट को लेकर जताई जा रही है, हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

नीट यूजी पेपर लीक के विरोध में आम आदमी पार्टी ने किया विरोध प्रदर्शन

आप के जिलाध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

भोपाल। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक [NEET UG] 2026 में बड़े पैमाने पर पेपर लीक, अनियमितताओं और जांच एजेंसियों द्वारा साझा किए गए ठोस इनपुट के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, यह बात आम आदमी पार्टी के भोपाल जिला अध्यक्ष हरीश पाठक ने विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया से कही।

आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा कि 

आम आदमी पार्टी इस घोटाले की कड़े शब्दों में निंदा करती है। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार पेपर लीक होना शिक्षा व्यवस्था की नाकामी और केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। छात्रों के सपनों, उनके परिवारों की उम्मीदों और वर्षों की मेहनत को इस तरह कुचला जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बुधवार शाम शहर के ज्योति सिनेमा चौराहे पर आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने NEET परीक्षा पेपर लीक मामले के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाने, दोषी अधिकारियों, कोचिंग माफिया और संलिप्त व्यक्तियों पर तत्काल कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करने, प्रभावित छात्रों के हित में नई परीक्षा की तारीख शीघ्र घोषित की जाए और परीक्षा प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाया जाने तथा शिक्षा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ठोस नीतिगत सुधार लागू किए जाने की मांग की।  

वहीं प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मिन्हाज़ आलम ने कहा कि शिक्षा किसी के भी सपनों से खिलवाड़ करने का साधन नहीं बन सकती। हम छात्रों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के 22 लाख छात्रों ने नीट की तैयारी की थी पेपर लीक होने के कारण इन लाखों बच्चों का भविष्य तबाह हो गया है। जिसके चलते आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश के तमाम कार्यकर्ताओ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में प्रदर्शन किया ।

पुलिस के सामने बजरंगियों की गुंडागर्दी, लगाए आपत्तिजनक नारे

लव जिहाद मिटाने ठेकेदार बन निकले सड़कों पर, कर रहे खुली गुंडागर्दी

भोपाल। राजधानी भोपाल में हिंदूवादी संगठन बजरंग दल की खुली गुंडागर्दी सामने आई है। स्वेच्छा से लिव इन में रहने वाले एक युवक और युवती को लेकर यह खुद ही पुलिस बनकर छापेमारी भी कर रहे हैं, उनके कुसूर को साबित करने वाले जज भी बन गए और जल्लाद बनकर सजा देने के लिए भी खुद ही खड़े हो गए। इनकी गुंडागर्दी की चश्मदीद पुलिस खुद ही बनी है, लेकिन गूंगे बहरों की तरह किसी गुंडागर्दी को इनसे रोका नहीं गया। लड़की द्वारा लड़के के साथ को अपनी मर्जी से आने का कहने पर भी इस गुंडा सेना ने युवक की बुरी तरह सार्वजनिक पिटाई की और उसके मुंह पर कालिख पोती। इस दौरान इन आतंकियों ने अल्लाह को लेकर भी अनर्गल बातें कहीं और भड़काऊ नारे लगाए। 

मामला राजधानी के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के गौतम नगर स्थित एक होटल में घटा। जहां कुछ कथित बजरंग दल के गुंडों ने यह आतंक मचाया। उन्होंने होटल के कमरे में घुसकर 27 वर्षीय आरिफ खान को बुरी तरह पीटा, उसे अर्ध-नग्न अवस्था में सड़क पर घसीटा, चेहरे पर स्याही और गाय का गोबर पोता तथा अपमानित करने के लिए पूरे इलाके में जुलूस निकाला।। इस दौरान युवक को भद्दी गालियां दी गईं और उसके धर्म व अल्लाह को लेकर भी अनर्गल बातें कहीं।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन उसने न सिर्फ हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया बल्कि भीड़ से टकराने वाले एक सिपाही को भी दबाया गया।

युवती ने कहा वह लिव इन में 

युवती ने स्पष्ट रूप से पुलिस के सामने कहा कि वह आरिफ खान के साथ पिछले पांच वर्षों से अपनी पूरी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है और किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण या दबाव से इनकार किया। 

हर तरफ नाराजगी

बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा की गई इस खुली गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज उठने लगी हैं।

भाकपा (माले) रेड स्टार, मध्यप्रदेश के राज्य सचिव विजय कुमार ने इस फासीवादी हमले की घोर निंदा की है। उसने कहा कि सरकार की शरण में किए जा रहे इस तरह के कृत्यों से यह साबित होता है कि “लव जिहाद” नाम का अभियान मुस्लिम युवकों को प्रताड़ित करने, अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बनाने और सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने का हिंदुत्ववादी फासीवादी हथियार है। शहर के कई पार्षदों ने इस मामले को लेकर पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि पुलिस ने आरोपियों पर जमानती धारा लगा कर अप्रत्यक्ष रूप से मदद की है। उन्होंनेआरोपियों पर आजमानती धारा लगा कर गिरफ़्तारी की जाने की मांग की है।

शहर काजी ने जताया रोष

मामले को लेकर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की। उलेमाओं ने इस मुलाकात में स्पष्ट किया कि इस तरह की जुबान और जहरीले लफ़्ज़ कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। प्रशासन ने इसके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में कोताही बरती तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मामले के सभी गुनहगारों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है।

यह मांग भी उठी :

- बजरंग दल के सभी शामिल गुंडों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

- घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारियों व थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच कर उन्हें बर्खास्त किया जाए।

- पीड़ित आरिफ खान को उचित मुआवजा, सुरक्षा और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।

- पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

- “लव जिहाद” जैसे झूठे प्रचार के आधार पर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाले संगठनों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।

बातों और वादों से नहीं, इरादों से जीती जाती है जंग : नूरजहां खान

* रेसलर से अधिवक्ता बनीं नूरजहां अब स्टेट बार काउंसिल चुनाव मैदान में, अधिवक्ताओं के हितों को बताया प्राथमिकता

भोपाल। भोपाल की गलियों से निकलकर खेल, सामाजिक सेवा और वकालत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली अधिवक्ता नूरजहां खान अब स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्यप्रदेश के चुनाव मैदान में हैं। उनका कहना है कि “बातों और झूठे वादों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से जंग जीती जाती है।”

कभी महिला रेसलर के रूप में प्रदेश का नाम रोशन करने वाली नूरजहां खान ने अपनी बेहतरीन ड्राइविंग और सामाजिक सक्रियता से भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इंसाफ की लड़ाई को अपना उद्देश्य बनाकर उन्होंने वर्ष 2017 में वकालत के पेशे में कदम रखा और इंदौर को अपनी कर्मस्थली बनाया।

नूरजहां खान वर्तमान में इंदौर अभिभाषक संघ और इंदौर हाईकोर्ट की सदस्य हैं। उन्होंने स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्यप्रदेश के चुनाव में सीरियल नंबर 62 से अपनी उम्मीदवारी घोषित की है। 12 मई को होने वाले चुनाव के लिए वे अधिवक्ताओं से समर्थन मांग रही हैं।

उन्होंने कहा कि वकालत के पेशे में जूनियर अधिवक्ताओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण कई युवा अधिवक्ता पेशा छोड़कर नौकरी की ओर रुख करने लगते हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ताओं के सामने भी अनेक व्यावसायिक और प्रशासनिक समस्याएं मौजूद हैं।

नूरजहां खान का कहना है कि यदि वे स्टेट बार काउंसिल की सदस्य चुनी जाती हैं तो अधिवक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के अधिकार, सम्मान और सुविधाओं के लिए ठोस कार्य करना है।

इंदौर जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

इंदौर। मध्यप्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित राज्य कैडेट फेंसिंग ट्रायल्स 2026 का आयोजन 09 मई 2026 को भोपाल स्थित टाट्या टोपे स्टेडियम में किया गया। इस प्रतियोगिता में इंदौर जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए वॉरियर जर्नी डोजो के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम गौरवान्वित किया। प्रतियोगिता में डोजो के चार खिलाड़ियों — वैष्णवी बोरकर (फॉइल गर्ल्स), नुर्वी जोशी (सेबर गर्ल्स), हृदिमा जगताप (सेबर गर्ल्स) एवं अश्विन राठौर (फॉइल बॉयज़) ने भाग लिया और अपने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। 

प्रतियोगिता में वैष्णवी बोरकर एवं नुर्वी जोशी ने अपने-अपने वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप-4 में स्थान प्राप्त किया तथा 21वीं कैडेट नेशनल फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 के लिए चयनित हुईं। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता 23 से 28 मई 2026 तक रुद्रपुर, उत्तराखंड में आयोजित होगी। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से इंदौर जिले एवं वॉरियर जर्नी डोजो में हर्ष का माहौल है। 

वहीं हृदिमा जगताप एवं अश्विन राठौर ने भी ट्रायल्स में शानदार खेल भावना, अनुशासन एवं संघर्षपूर्ण प्रदर्शन दिखाया। हालांकि वे चयन से थोड़ा पीछे रह गए, लेकिन उनके प्रदर्शन की उपस्थित अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों द्वारा सराहना की गई।

प्रतियोगिता के दौरान मध्यप्रदेश फेंसिंग संघ के सचिव श्री डी.के. विद्यार्थी एवं अकादमी कोच विक्रम अवॉर्डी श्री भूपेंद्र सिंह राठौर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रशिक्षक करण साहू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण का परिणाम आज पूरे इंदौर जिले को गौरवान्वित कर रहा है। वहीं कोच हरिओम परमार के मार्गदर्शन में खिलाड़ी लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं।

वॉरियर जर्नी डोजो निरंतर खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में भी जिले एवं प्रदेश का नाम रोशन करने हेतु कार्य करता रहेगा।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री को दी बधाई

भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज कोलकाता में पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी से आत्मीय भेंट कर उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक जनादेश प्रदेश में विकास, सुशासन, सुरक्षा एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति जनता के अटूट विश्वास को नई मजबूती प्रदान करता है।

   उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री श्री अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा और राज्य प्रगति एवं समृद्धि के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।

नगर पालिका के हाल : सप्लाई लेकर भूल गए, पेमेंट की बारी आई तो मांग रहे ऑर्डर...!

बदल गए 4 सीएमओ, लेखाधिकारी अपनाए हैं हठधर्मिता 

भोपाल। प्रदेश के जिलों में फैले स्थानीय निकायों में लापरवाही, भ्रष्टाचार और हठधर्मिता का माहौल पसरा हुआ है। अपनी जरूरत का सामान सप्लाई लेने के बाद भुगतान के नाम पर नियम गिनाए जा रहे हैं। लेखा अधिकारी अनुपम तिवारी की हठधर्मिता का आलम यह है कि सीएम हेल्पलाइन पर इस संबंध में की गई शिकायत को भी वे बिना जांच किए सीधे फोर्स क्लास में डाल देते हैं। अब सप्लायर अपने हक का पैसा मांगने के लिए यहां वहां भटकने पर मजबूर है। उसने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री से भी शिकायत की है।

मामला धार जिला मुख्यालय का है। यहां अरशद पठान नामक एक सप्लायर बरसों से आवश्यक सामग्री सप्लाई कर रहे हैं। करीब पांच छह साल पहले भी उन्होंने नगर पालिका की विभिन्न शाखाओं में सामग्री की आपूर्ति की थी। सप्लाई के लिए विभाग से विधिवत ऑर्डर भी जारी किया गया था और इसके सप्लाई किए जाने पर किसी तरह की मीनमेख या आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।

- फिर हुआ आपत्तियों का दौर

अरशद पठान ने जब इस सप्लाई के भुगतान के लिए ₹16 लाख का बिल नगर पालिका में सबमिट किया तो आपत्तियों का दौर शुरू हो गया। लेखा अधिकारीअनुपम तिवारी इस मामले को सप्लाई ऑर्डर की कमी और अन्य आपत्तियों के नाम पर लटकाते रहे। इस दौरान करीब 4 सीएमओ बदल गए और मामला टलता गया। इस मामले को करीब 5=6 साल गुजर गए लेकिन लेखा अधिकारी तिवारी ने इस पेमेंट को क्लियर नहीं किया।

- सीएम हेल्पलाइन से भी मदद नहीं 

अपना पैसा न मिलने पर अरशद पठान ने सीएम हेल्पलाइन प्लेटफार्म पर इसकी शिकायत की। जिसको लेकर गुमराह करने वाले जवाबों के जरिए लेखा अधिकारी ने बंद करवा दिया। उन्होंने स्पष्ट कारण न बताते हुए ही सीएम हेल्पलाइन शिकायत को फोर्स क्लास कर दिया है।

- अब शिकायत सीएम तक

पांच साल में भी अपना पेमेंट नहीं मिलने पर अरशद पठान ने इसकी गुहार सीएम डॉ मोहन यादव को की है। उन्होंने लिखा है कि लेखा अधिकारी अनुपम तिवारी के इस व्यवहार से जहां शासकीय प्रक्रियाओं पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है, वहीं छोटे सप्लायर को बाजार में बने रहना भी मुश्किल हो गया है। इस पेमेंट के रुकने से उनका व्यवसायिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने इस शिकायत को नगरीय प्रशासन मंत्री और नगरीय प्रशासन मुख्यालय को भी भेजा है।

- उठ रहे सवाल 

सरकारी प्रक्रिया में लेनदेन एक सामान्य प्रक्रिया माना जाने लगा है। लेखा अधिकारी अनुपम तिवारी द्वारा इस पेमेंट के बदले कुछ दक्षिणा सप्लायर से चाही जा रही है। इसकी पूर्ति न होने के चलते ही संभवतः यह भुगतान रोका गया है। इस मामले में यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि लेखा अधिकारी तिवारी अपने किसी सप्लायर को नगर पालिका में एडजस्ट करने के लिए अरशद को आउट करना चाहते हैं, इसी वजह से उन्होंने उनका यह पेमेंट अटका रखा है।

वॉरियर जर्नी डोजो के 4 खिलाड़ियों चयन

इंदौर। इंदौर की वॉरियर जर्नी डोजो के खिलाड़ियों ने जिला स्तरीय फेंसिंग कैडेट ट्रायल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय फेंसिंग कैडेट ट्रायल 2026 के लिए सुनिश्चित किया। यह ट्रायल 07 मई 2026 को इंदौर के चिमन बाग में इंदौर फेंसिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें ट्रायल्स के प्रभारी कौशल शिवारे रहे।

चयनित खिलाड़ियों में अश्विन राठौर का चयन बालक फॉइल वर्ग में, वैष्णवी बोरकर का चयन बालिका फॉइल वर्ग में तथा हृदिमा जगताप एवं नुर्वी जोशी का चयन बालिका सेबर वर्ग में हुआ।

सभी चयनित खिलाड़ी 09 मई 2026 को भोपाल स्थित तात्या टोपे स्टेडियम में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय फेंसिंग कैडेट ट्रायल 2026 में इंदौर जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे।

इस अवसर पर कोच हरिओम परमार एवं प्रशिक्षक करण साहू ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। साथ ही ओलंपिक संघ के अध्यक्ष श्री रमेश मेंदोला जी एवं विधायक गोलू शुक्ला जी ने खिलाड़ियों को आशीर्वाद एवं बधाई प्रदान की।