09 मई को RTE बैठक: राँची के सभी निजी स्कूल प्राचार्यों की उपस्थिति अनिवार्य

आर्यभट्ट सभागार, राँची विश्वविद्यालय, राँची में दिनांक 09 मई 2026 (शनिवार) को पूर्वाह्न 11:30 बजे RTE Right to Education 'शिक्षा का अधिकार' सम्बंधित बैठक

RTE Right to Education 'शिक्षा का अधिकार' सम्बंधित बैठक आहूत की गई है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में दिनांक 09 मई 2026 (शनिवार) को पूर्वाह्न 11:30 बजे यह बैठक आयोजित की जाएगी।

बैठक का स्थान:

आर्यभट्ट सभागार, राँची विश्वविद्यालय, राँची

महत्वपूर्ण निर्देश:

- राँची जिले के सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य/अधिकृत प्रतिनिधि को बैठक में उपस्थित होना अनिवार्य है।

- पंजीकरण का कार्य पूर्वाह्न 11:00 बजे* से शुरू होगा।

उक्त बैठक में RTE Right to Education 'शिक्षा का अधिकार' संबंधी महत्वपूर्ण चर्चा की जाएगी। इसलिए सभी संबंधित निजी विद्यालयों के प्राचार्यों से अपील की जाती है कि वे समय पर पंजीकरण कर बैठक में

अनिवार्य रूप से भाग लें।

भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!

450 मेगावाट क्षमता के साथ दुमका-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन चालू, 7 जिलों को फायदा

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झारखंड की विद्युत व्यवस्था के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब 220 केवी दुमका–गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन के एक सर्किट के LILO (Line In Line Out) का सफलतापूर्वक चार्जिंग कार्य पूर्ण कर लिया गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ Jharkhand Urja Sancharan Nigam Limited अब North Karanpura Transmission Limited से लगभग 450 मेगावाट तक विद्युत प्राप्त करने में सक्षम हो गया है।

वर्तमान में इस लाइन के माध्यम से डुमका क्षेत्र को करीब 103 मेगावाट तथा गोविंदपुर ग्रिड सबस्टेशन (GSS) को लगभग 80 मेगावाट बिजली मिल रही है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही यह लाइन अपनी पूर्ण क्षमता से संचालित होगी, राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।

इस परियोजना के चालू होने से डुमका, साहिबगंज, पाकुड़, देवघर, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही गोविंदपुर, चंदनकियारी, जैनामोड़, डुमका, महारो, पाकुड़, साहिबगंज, लालमटिया, अमड़ापाड़ा, जसीडीह, गिरिडीह, देवघर, बरहेट और सरिया सहित कई महत्वपूर्ण ग्रिड सबस्टेशनों को अब अधिक स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

विशेष रूप से डुमका, धनबाद और बोकारो में बीते कुछ समय से जारी बिजली संकट और लोड शेडिंग की समस्या से उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। भीषण गर्मी और पीक लोड के दौरान यह ट्रांसमिशन लाइन राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित होगी।

इस उपलब्धि का श्रेय JUSNL के अधिकारियों, अभियंताओं, साइट टीमों और संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयासों को दिया जा रहा है। उनके सतत परिश्रम और प्रतिबद्धता ने झारखंड की विद्युत संरचना को नई मजबूती प्रदान की है।

चुनाव 2026: ECINET बना चुनावी प्रक्रिया की रीढ़, 10 करोड़ से अधिक लोगों ने किया भरोसा।

1. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सुदृढ़ आईटी प्लेटफॉर्म ECINET ने विधानसभाओं के सामान्य चुनाव और उपचुनाव 2026 के दौरान वास्तविक समय (रियल-टाइम) की निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग और पारदर्शिता बढ़ाने सहित चुनावी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

2. जनवरी 2026 में इसके आधिकारिक लॉन्च के बाद से, ECINET ऐप के उपयोग में भारी वृद्धि देखी गई है और अब तक इसके 10 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। ECINET के बीटा संस्करण का उपयोग नवंबर 2025 में बिहार चुनावों में किया गया था।

3. मतदान के दिनों, यानी 9, 23 और 29 अप्रैल को, ECINET पर 98.3 करोड़ से अधिक हिट्स दर्ज किए गए और मतगणना के दिन, यानी 4 मई 2026 को, ECINET पर प्रति मिनट औसतन 3 करोड़ हिट्स दर्ज किए गए।

4. ECINET के साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल के परिणामस्वरूप मतगणना के दिन भारत और विदेशों दोनों से होने वाले 68 लाख से अधिक दुर्भावनापूर्ण (malicious) हिट्स को प्रभावी ढंग से विफल कर दिया गया, जो परिणाम पोर्टल सहित प्रमुख चुनावी प्लेटफार्मों को लक्षित कर रहे थे।

5. मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, इन चुनावों में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतगणना के दिन पहली बार ECINET के माध्यम से एक नई QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली का उपयोग किया गया।

6. मतगणना के दिन, 3.2 लाख से अधिक QR कोड जेनरेट किए गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल अधिकृत कर्मी ही मतगणना स्थलों तक पहुँच सकें, जिससे मतगणना केंद्रों में किसी भी अनधिकृत प्रवेश को रोका जा सके।

डेफ क्रिकेट खिताब जीतने वाली भारतीय टीम में झारखंड के खिलाड़ी चमके, मुख्यमंत्री ने किया सम्मान

कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आज मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से झारखंड डेफ(बधिर) क्रिकेट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल एवं भारतीय डेफ क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने मुलाकात की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने टाटा डिगवाडीह स्टेडियम, धनबाद में आयोजित डेफ क्रिकेट टूर्नामेंट/सीरीज़ के फाइनल में नेपाल को पराजित कर खिताब जीतने पर भारतीय टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल देश, बल्कि झारखंड के लिए भी गर्व का विषय है।

भारतीय डेफ(बधिर )क्रिकेट टीम में झारखंड के कई खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करना राज्य की खेल प्रतिभा, समर्पण और क्षमता का प्रमाण है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने तथा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में झारखंड डेफ क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव श्री रंजीत कुमार, डेफ क्रिकेट टीम के कप्तान श्री सोनू सिंह, खिलाड़ी श्री रुस्तम हुसैन, श्री शोएब अख्तर, श्री दीपक कुमार एवं अनुवादक श्रीमती रीमा साहु उपस्थित थीं।

सीएम हेमन्त सोरेन ने 7 वर्षीय तैराक इशांक सिंह को किया सम्मानित, पाल्क स्ट्रेट पार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में रांची के सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तैराक इशांक सिंह को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें अपनी ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा उज्जवल भविष्य की कामना की। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह को उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए उन्हें 5 लाख रुपए का चेक, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि रांची के इशांक सिंह ने विगत 30 अप्रैल 2026 के दिन लगातार 9 घंटे 50 मिनट तैरकर भारत और श्रीलंका के बीच स्थित चुनौतीपूर्ण पाल्क स्ट्रेट (palk Strait, 29 किलोमीटर) को पार करते हुए अपने नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए इशांक सिंह को कई विभिन्न खिताबों से सम्मानित किया गया है।

इशांक सिंह ने अपने प्रदर्शन से राज्य का नाम रोशन किया

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल तैराक ईशान सिंह ने पाक स्ट्रेट पार कर देश और दुनिया में झारखंड प्रदेश का नाम रोशन कर दिखाया है। मौके पर मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि तैराकी के क्षेत्र में इनकी सफलता पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। झारखंड में हमारी सरकार ने एक बेहतर खेल नीति बनाई है, जिसका लाभ यहां के खिलाड़ियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा झारखंड के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने विश्वास व्यक्त किया कि सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर झारखंड का मान बढ़ाएंगे।

प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिले इस निमित्त राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करेगी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल तैराक इशांक सिंह कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। इनकी सफलता राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भीतर इशांक सिंह जैसे प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिले इस निमित्त राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा खेल के क्षेत्र में झारखंड प्रदेश निरंतर विकास कर रहा है। यहां के खेल प्रतिभाओं ने कई मौकों पर पूरे विश्व अपना लोहा मनवाया है। झारखंड के खिलाड़ी अपने कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं। राज्य के युवा खिलाड़ियों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी को और ऊर्जावान बनाएगी।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने उपस्थित पदाधिकारियों से कहा कि आने वाले दिनों में तैराकी प्रशिक्षण सहित सभी सुविधाओं के विस्तार हेतु कार्य योजना बनाते हुए राज्य सरकार आगे बढ़ेगी तथा राज्य में तैराकी प्रतिभावों को आधुनिक सुविधा प्रदान करेगी। मौके पर मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में तैराकी से संबंधित सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी उपस्थित खेल विभाग के अधिकारियों से ली। मौके पर मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह की माता, पिता तथा कोच को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री श्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, खेल विभाग के सचिव मुकेश कुमार, निदेशक खेल श्री आसिफ इकराम, उप निदेशक श्री राजेश कुमार, तैराकी संघ से श्री शैलेंद्र तिवारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

राँची से सटे बुंडू में शादी समारोह से लौट रही गाड़ी तालाब में गिरी

रांची : राजधानी रांची में बुधवार देर रात तमाड़ थाना क्षेत्र में दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। हादसा इतना भयावह था, कि कार में सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि बुधवार की देर रात जब सिल्ली के बरलंगा निवासी दो युवक शादी समारोह में शामिल होकर देर रात कार से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान चालाडी गांव के पास चालक का नियंत्रण कार से हट गया और तेज रफ्तार कार सीधे तालाब में जा घुसी। रात के अंधेरे में हुए इस हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। जिससे स्थानीय ग्रामीण पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद तमाड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे दोनों युवकों को बाहर निकाला गया और आनन-फानन में तमाड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों युवकों को मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। शुरुआती आशंका तेज रफ्तार और चालक का संतुलन बिगड़ने की बताई जा रही है। हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

बोकारो: गवाई पुल पर गैस टैंकर में लगी आग, NH-32 बंद, इलाके में दहशत*

झारखंड के बोकारो में पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के गवाई पुल के बीचों-बीच गुरुवार सुबह करीब 10 बजे एक गैस टैंकर में अचानक आग लग जाने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. बताया जा रहा है कि 16 चक्का गैस टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई. कुछ ही देर में आग की लपटें काफी तेज हो गईं और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया.

पुलिस और दमकल विभाग पहुंची

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंच गए. सुरक्षा को देखते हुए एनएच-32 पर दोनों ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई, जिससे सड़क पर लंबी कतार लग गई . पुलिस ने एहतियातन गवाई पुल से करीब आधा किलोमीटर पहले ही लोगों और वाहनों को रोक दिया है जिससे कि कोई बड़ी दुर्घटना न हो. स्थानीय लोगों में सबसे ज्यादा डर इस बात को लेकर बना हुआ है कि अगर गैस टैंकर में ब्लास्ट हो जाता, तो गवाई पुल सहित आसपास के कई घर भी इसकी चपेट में आ सकते थे. हालांकि, प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने के बाद टैंकर से गैस लीक होकर काफी हद तक निकल गई, जिससे बड़े विस्फोट की आशंका कुछ कम हुई है.

आग पर काबू पाने की कोशिश जारी

फिलहाल दमकल कर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है. घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. खबर लिखे जाने तक घटना की गैस टैंकर में आग लगी की घटना बनी हुई है.

ग्लोबल स्कूल ऑफ गोविंदपुर में स्वास्थ्य जाँच शिविर और ‘समावेशी शिक्षा’ पर अभिभावक उन्मुखीकरण कार्यक्रम संपन्न

ग्लोबल स्कूल ऑफ गोविंदपुर में बुधवार को अभिभावक उन्मुखीकरण एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ "जीवन" एनजीओ के संस्थापक श्री अनिल सिंह ने समावेशी शिक्षा विषय पर संबोधन किया। आसर्फी अस्पताल, धनबाद के सहयोग से विद्यालय परिसर में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया।

ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया के संचालक डॉ. एस. खालिद ने कार्यक्रम का उदेश्य बताया। उन्होंने अपने संबोधन में नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व तथा अभिभावक-विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

विद्यालय की प्राचार्या चाँदनी त्रिगुनायत ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विद्यालय की अध्यक्ष डॉ. निकहत परवीन भी उपस्थित थीं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों व विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का संचालन विद्यार्थियों द्वारा किया गया।

दुमका के अंकित ने बढ़ाया मान: संघर्षों को मात देकर बने झारखंड इंटर आर्ट्स के 'स्टेट सेकेंड टॉपर'

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की 12वीं कला संकाय परीक्षा में दुमका के अंकित कुमार ने पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है. 474 अंक के साथ स्टेट सेकेंड टॉपर बने अंकित की सफलता से पूरे इलाके में खुशी की लहर है.

गांव से शहर तक का संघर्ष, तब मिली कामयाबी

अंकित मसलिया प्रखंड के गोलबंधा गांव का निवासी है और पीएम श्री प्लस टू नेशनल उच्च विद्यालय दुमका का छात्र है. विद्यालय दूर होने के कारण वह पिछले पांच वर्षों से शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा था. उसकी मां संध्या दे सहायक शिक्षिका हैं, जबकि पिता सुशील कुमार दे स्टेशनरी दुकान चलाते हैं. सीमित संसाधनों के बीच अंकित ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया.

10-12 घंटे पढ़ाई, टेक्नोलॉजी का भी लिया सहारा

अंकित ने बताया कि उसने रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई की. स्व-अध्ययन के साथ यूट्यूब और चैटजीपीटी जैसे प्लेटफॉर्म की मदद ली. उसका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाकर देश की सेवा करना है. इसी को ध्यान में रखते हुए उसने आर्ट्स संकाय चुना, ताकि आगे यूपीएससी की तैयारी में मदद मिल सके.

जापान तक पहुंचा हुनर, पहले भी रह चुका है टॉपर

अंकित वर्ष 2024 में 10वीं परीक्षा में जिले का टॉपर रह चुका है. इसी उपलब्धि के आधार पर उसे भारत सरकार की ओर से ‘सकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम 2024’ के तहत जापान जाने का अवसर मिला. वहां उसने विज्ञान-तकनीक के साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को करीब से समझा. यह अनुभव उसकी सोच और लक्ष्य को और मजबूत करने वाला साबित हुआ.

स्कूल को गर्व, छात्रों के लिए बना प्रेरणा

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक डॉ बसंत कुमार ने कहा कि अंकित शुरू से ही मेधावी छात्र रहा है. उसकी इस उपलब्धि से पूरा विद्यालय परिवार गौरवान्वित है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अंकित की सफलता से अन्य छात्र भी प्रेरित होंगे और बेहतर प्रदर्शन करेंगे.