पवन खेड़ा के समर्थन में उतरी कांग्रेस, जयराम रमेश बोले- न्याय की जीत होगी
नई दिल्ली। गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पूरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पवन खेड़ा के साथ मजबूती से खड़ी है और हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया जारी है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस को विश्वास है कि धमकी, डराने-धमकाने और उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की जीत होगी।
दरअसल, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक प्रकरण से जुड़ा है।
बताया गया कि पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिंकी भुइयां सरमा पर कई पासपोर्ट रखने और विदेश में संपत्तियां होने का आरोप लगाया था। इसके बाद उनके खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया।
इसके बाद 7 अप्रैल को असम पुलिस ने दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के घर पर छापेमारी की। 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगा दी। बाद में 21 अप्रैल को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था और 24 अप्रैल को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अमेरिका में नौकरी पाना होगा मुस्किल! ट्रंप के सांसदों ने संसद में पेश H-1B वीजा को रोकने का बिल

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अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बीते एक वर्षों में विदेशियों के प्रवास का मुद्दा गर्माया हुआ है। ट्रंप प्रशासन न सिर्फ अवैध प्रवासियों, बल्कि अब वैध तौर पर अमेरिका में काम के लिए जाने वाले लोगों को भी निशाना बना रहा है। इसी बीच ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों ने अमेरिकी संसद में एच-1बी वीजा पर रोक लगाने का प्रस्ताव पेश किया है।

बिल में आश्रितों को लाने की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव

एरिजोना से सांसद एली क्रेन ने ‘एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026’ पेश किया, जिसे सात अन्य रिपब्लिकन सांसदों ने भी समर्थन दिया है। विधेयक में एच-1बी कार्यक्रम में सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें वार्षिक सीमा को 65,000 से घटाकर 25,000 करना, न्यूनतम वेतन 2,00,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष निर्धारित करना और एच-1बी वीजा धारकों को आश्रितों को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं देना शामिल है।

अमेरिकी कर्मचारी का ना मिलना करना होगा साबित

बिल में एच-1बी कार्यक्रम में लॉटरी प्रणाली को वेतन-आधारित चयन प्रणाली से बदलने के साथ ही नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि उन्हें कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल पा रहा है और उन्होंने छंटनी नहीं की है। एच-1बी कर्मचारियों को एक से ज्यादा नौकरियां करने से रोकना और तृतीय-पक्ष भर्ती एजेंसियों की ओर से उन्हें रोजगार देने पर प्रतिबंध लगाना शामिल है।

विधेयक पारित हुआ तो भारत पर क्या होगा असर?

अगर अमेरिकी संसद में रखा गया एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट पारित हो जाता है, तो भारत पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। क्योंकि एच-1बी वीजा हासिल करने वालों में भारत का पहला स्थान है। भारतीय पेशेवर एच-1बी कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। वित्त वर्ष 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, कुल मंजूर 3,99,395 एच-1बी याचिकाओं में से 71% (करीब 2.83 लाख वीजा) सिर्फ भारतीयों को मिले थे। वर्ष 2015 से 70 प्रतिशत से ज्यादा एच-1बी वीजा से जुड़ी मंजूरी भारतीयों को ही मिल रही है। अगर यह विधेयक पारित होता है तो अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एफ-1 (स्टूडेंट वीजा) से ओपीटी (छात्रों को काम करने की मंजूरी देने वाला कार्यक्रम) संकट में पड़ जाएगा। इसके अलावा एच-1बी और अंत में ग्रीन कार्ड तक पहुंचने का दशकों पुराना स्थापित मार्ग पूरी तरह से टूट जाएगा। इस विधेयक के चलते भारतीय पेशेवरों के अमेरिका में नौकरी के लिए प्रवेश पर या तो पूरी तरह रोक लग जाएगी या इसमें भारी देरी होगी।

स्वाति मालीवाल बीजेपी में शामिल, पीएम मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा, केजरीवाल पर साधा निशाना

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'आम आदमी पार्टी' में बड़ी टूट हो गई है। राघव चड्ढा समेत सात सांसद आप का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं।इनमें राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल भी है। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने शनिवार को ऐलान करते हुए कहा कि वो भाजपा में शामिल हो गई हैं। आप के साथ करीब दो दशक पुराना रिश्ता तोड़ते हुए मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जताया और अरविंद केजरीवाल पर चुन-चुनकर हमले किए।

केजरीवाल को महिला-विरोधी बताया

मालीवाल ने बताया कि वह 2006 से अरविंद केजरीवाल के साथ काम कर रही थीं। उन्होंने हर आंदोलन में उनका साथ दिया। मालीवाल ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने उनके घर में एक गुंडे से पिटाई करवाई। आवाज उठाने पर उन्हें धमकाया गया। उन पर एफआईआर वापस लेने का बहुत दबाव डाला गया। पार्टी ने उन्हें दो साल तक संसद में बोलने का अवसर नहीं दिया। इसे उन्होंने बहुत शर्मनाक बताया। उन्होंने केजरीवाल को महिला-विरोधी भी कहा।

बीजेपी ज्वाइन करने की वजह बताया

स्वाति मालीवाल ने बीजेपी क्यों ज्वाइन की इसकी वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि मैं मानती हूं कि प्रधानमंत्री मोदी न सिर्फ देश में बल्कि विश्व में सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं चाहे वह ऑपरेशन सिंदूर हो, देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म करना हो, या महिला आरक्षण बिल संसद में लाना हो। मैं किसी मजबूरी में बीजेपी में शामिल नहीं हो रही, मैं इसलिए बीजेपी में शामिल हो रही हूं क्योंकि मैं दिल से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्वास करती हूं।

पार्टी अंदर से टूट रही है-मालीवाल

राज्यसभा सांसद मालीवाल ने कहा, 'प्रशांत भूषण हों, शांति भूषण हों, कुमार विश्वास हों, और अनगिनत लाखों-करोड़ों स्वयंसेवक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी छोड़ चुके हैं। मेरा मानना है कि कोई भी अच्छा व्यक्ति अरविंद केजरीवाल के साथ लंबे समय तक काम नहीं कर सकता। पार्टी अंदर से टूट रही है। मैं सभी के संपर्क में हूं। कोई भी अरविंद केजरीवाल से खुश नहीं है।'

केजरीवाल को सुनाई खरी-खरी

अरविंद केजरीवाल के बारे में राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा कि अगर कोई गद्दार है, तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। जब उन्होंने अपना आंदोलन शुरू किया था, तो वह फटी हुई पैंट पहनते थे, दो रुपये का पेन इस्तेमाल करते थे, और एक बिल्कुल खस्ताहाल कार में घूमते थे। हम सब उनसे प्रेरित थे, यह सोचकर कि यह आदमी देश में बदलाव लाएगा। आंदोलन के दौरान, उन्होंने पूरे देश को इतने बड़े-बड़े, मीठे सपने दिखाए, और देश उनसे प्रभावित हुआ। लेकिन उन्होंने किया क्या? सत्ता में आते ही, उन्होंने सौ करोड़ का घर बनवा लिया।

मालीवाल बोलीं- केजरीवाल से बड़ा कोई गद्दार नहीं

स्वाती मालीवाल ने उसमें एक बार बनवाया, करोड़ों के कालीन लगवाए, और लाखों-करोड़ों का फ्रिज खरीदा। उनका सोफा इतना आलीशान है। और अब, जब दिल्ली की जनता ने उन्हें हरा दिया, तो वह पंजाब चले गए हैं। वे पंजाब को एक एटीएम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। जिस आदमी से उन्होंने मुझे पिटवाया था, उसे जेड-प्लस सुरक्षा दी गई। आज, उसे भगवंत मान का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। वह आदमी जो वीआईपी प्रोटोकॉल के खिलाफ बोला करता था, जब उसका काफिला निकलता है, तो हम पचास गाड़ियां गिनते हैं, लेकिन गाड़ियां पचास से भी ज़्यादा होती हैं। तो, देशद्रोह किसे कहते हैं? मैं अपने मूल सिद्धांतों के खिलाफ काम करने को देशद्रोह मानती हूँ। और अरविंद केजरीवाल से बड़ा कोई गद्दार नहीं है।

7 राज्यसभा सांसदों ने छोड़ा केजरीवाल का साथ

इससे पहले शुक्रवार को ही सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल बीजेपी में शामिल हुए थे और दावा किया था कि आप के 4 और सांसद- स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी बीजेपी में शामिल होंगे। अब राघव चड्ढा के दावे पर मुहर लगाते हुए स्वाति मालीवाल ने बीजेपी जॉइन करने की पुष्टि कर दी है।

फिर संकट में सीईसी ज्ञानेश कुमार, हटाने की मांग हुई तेज, राज्यसभा में दिया गया नया नोटिस

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मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त की मुश्किले एक बार फिर बढ़ती दिख रही है। विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्‍यसभा में नोटिस दिया है। ससे पहले भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में नोटिस जारी किया गया था, जिसे स्‍पीकर और चेयरमैन ने खारिज कर दिया था। अब एक बार फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नोटिस दिया गया है।

73 सदस्यों का नोटिस पर हस्ताक्षर

कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने बताया कि संसद के उच्च सदन के 73 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला यह नोटिस राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी को दिया गया है। उन्होंने कहा कि सीईसी के खिलाफ अब नौ विशिष्ट आरोप हैं जिन्हें काफी विस्तार से दस्तावेजीकृत किया गया है और इन्हें आसानी से नकारा या खारिज नहीं किया जा सकता।

18 मार्च के पीएम मोदी के संबोधन का भी जिक्र

नए प्रस्ताव में सांसदों ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'आचार संहिता लागू करने में लगातार पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।' सांसदों ने 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 29 मिनट के भाषण का हवाला दिया, जिसे दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी पर लाइव प्रसारित किया गया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह भाषण उसी दिन तमिलनाडु के कोयंबटूर में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषण से 'लगभग समान' था।

बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान के बाद विपक्ष की मुहिम

विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी ताजा मुहिम तब शुरू की है, जब पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 92% मतदान और तमिलनाडु में भी रिकॉर्ड टूटने की वजह से भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआआर पर सुनवाई के दौरान खुशी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मजबूत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का संकेत बताया है। जबकि, टीएमसी ने शुरू से एसआईआर के लिए चुनाव आयोग और सीईसी ज्ञानेश कुमार का विरोध किया है।

पहले भी लाया जा चुका है प्रस्ताव

इससे पहले लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 विपक्षी सदस्यों ने बीते 12 मार्च को दोनों सदनों में कुमार के खिलाफ नोटिस सौंपा था। विपक्षी सांसदों ने अपने पहले के नोटिस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार पर कार्यपालिका के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के माध्यम से लोगों को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने का भी आरोप लगाया था। हालांकि राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने छह अप्रैल को इसे अस्वीकार कर लिया था।

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक की सांसदी रद्द करने की मांग, पार्टी छोड़ने वालो के लिए आप का दांव

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आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने बगावत कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। शुक्रवार 24 अप्रैल आप को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 7 राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की। इस बगावत की अगुवाई राघव चड्ढा ने किया।

इन सांसदों ने दिया आप को झटका

राघव चड्ढा के साथ जिन सांसदों ने आप छोड़ी, उनमें संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह शामिल हैं। इनमें से 6 सांसद पंजाब से और एक दिल्ली से है, जिससे पंजाब की राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग

अब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण उनकी राज्यसभा सदस्यता अयोग्य घोषित करने की मांग की है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि वह बीजेपी में शामिल होने के लिए राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे।

संजय सिंह ने क्या कहा?

संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, "मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूंगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता त्यागने के समान है।"

क्या है दल-बदल कानून?

भारतीय संविधान के 10वीं अनुसूची के तहत 'दल-बदल विरोधी कानून' को 1985 में लाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीति में पार्टी बदलने वाले चलन को रोकना और जनता के द्वारा चुनी गई सरकारों में स्थिरता लाना है। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई सांसद या विधायक अपनी मर्जी से उस पार्टी को छोड़ता है जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता है या सदन में अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाकर वोट करता है तो उसकी सदन की सदस्यता खत्म की जा सकती है। 10वीं अनुसूची का खंड 4 कहता है कि अगर किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ टूटकर किसी अन्य दल में मिलते हैं तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता और उनकी सदस्यता बरकरार रहती है।

बंगाल में बंपर वोटिंग, दोपहर 3 बजे तक 78.77 प्रतिशत मतदान, तमिलनाडु में अब तक 70% पड़े

#westbengalassemblyelection2026

देश के दो प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। दोपहर 3 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 78.77% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, जो भारी उत्साह को दर्शाता है। वहीं, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ हो रहे चुनाव में अब तक 70% मतदान दर्ज किया गया है। कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों राज्यों में मतदाता लंबी कतारों में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

आसनसोल में भाजपा उम्मीदवार की गाड़ी पर पथराव

हिंसा के बीच बंगाल में बंपर वोटिंग हुई है। कई जगहों से हिंसा की खबरें आ रही हैं। आसनसोल दक्षिण सीट से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की गाड़ी पर कथित तौर पर पथराव की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, यह घटना रहमत नगर इलाके में हुई, जिसमें गाड़ी के शीशे टूट गए। इसके बाद अग्निमित्रा पॉल ने हिरापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच की जा रही है।

दक्षिण दिनाजपुर और झारग्राम में सर्वाधिक वोटिंग

बीरभूम- 80.22

झारग्राम - 81.4

दक्षिण दिनाजपुर - 81.49

मालदा -76.22

पूर्वी मेदिनीपुर- 78.94

उत्तर दिनाजपुर - 77.3

पश्चिम बर्धमान -75.44

दार्जीलिंग - 76.5

अलीपुरद्वार- 77.5

पुरुलिया - 75.94

नेपाल की ‘नई नवेली’ बालेन सरकार मुश्किलों में घिरी, 26 दिन में दो मंत्रियों के इस्तीफे से बढ़ी परेशानी

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नेपाल में बालेन शाह की सरकार बने एक महीने भी नहीं हुए हैं। लेकिन, महीने भर के अंदर ही दो-दो मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है और वो भी भ्रष्टाचार या भाई-भतीजावाद जैसे आरोपों में। गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बिजनेसमैन दीपक भट्टा के साथ कथित कनेक्शन के मामले को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुंग ने गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। इससे पहले श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में हटा दिया गया था। ऐस में ‘नई नवेली’ सरकार सवालो के घेरे में आ गई है।

क्या नेपाल में सब ठीक चल रहा है?

नेपाल में पिछले साल GEN-Z क्रांति देखी गई। ऐसी क्रांति जिसमें नेपाल की राजनैतिक व्यवस्था बदलकर रख दी। ऐसी क्रांति जिसकी आग में झुलसने के बाद नेपाल की जनता ने इस आस में नई सरकार चुनी कि अब नेपाल में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन बीते एक महीनों में जो हुआ, उससे एक सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या नेपाल में सब ठीक चल रहा है?

सरकार में अस्थिरता जैसे हालात

रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने बीते महीने के आखिर में 35 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री का पद संभाला है। चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाले बालेन की सरकार से काफी ज्यादा उम्मीदें नेपाली जनता को है। हालांकि, 26 दिनों के भीतर ही बालेन शाह के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है, जिससे अस्थिरता जैसे हालात बनने लगे हैं।

सीमा से सटे इलाक़ों में नाराजगी

इसके अलावा भारत की सीमा से सटे इलाक़ों में लोगों से कस्टम लिए जाने को लेकर भी नेपाली जनता बालेन सरकार से नाराज़ दिखाई दे रही है। बालेन सरकार ने भारत से 100 नेपाली रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) चुकाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम को सख्ती से लागू करने के खिलाफ आम लोग सड़कों पर उतर गए हैं। दरअसर, नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों में काफी लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत से मिलने वाले सस्ते सामान पर निर्भर हैं। ऐसे में उनके लिए बालेन सरकार का यह कदम एक बड़ा झटका साबित हुआ है।

चौतरफा नाराजगी झेल रही सरकार

बालेन सरकार के युवा मंत्रियों को लेकर उठ रहे विवादों और सीमा पर जनता के रोष की वजह से नेपाल सरकार को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा छात्र संघों पर शिकंजे के खिलाफ भी युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। इन मुद्दों के अलावा देश के आर्थिक हालात भी चीजों को खराब कर रहे हैं। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से देश में मंहगाई बढ़ी है और लोग इससे परेशान नजर आ रहे हैं।

तमिलनाडु में 4023 उम्मीदवारों की किस्मत आज होगी लॉक, पीएम मोदी ने की रिकॉर्ड मतदान की अपील

#tamilnaduassemblyelection2026

तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर नई सरकार चुनने के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है। इस बार चुनाव में जहां द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए से मुकाबला करेगा। वहीं, पहली बार चुनाव में उतरे तमिल सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है।

एक चरण में सभी सीटों पर मतदान

तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया जा रहा है। चुनाव के नतीजे 4 मई को मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे।इस बार राज्य में कुल 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

हर एक केंद्र पर अधिकतम मतदाताओं की सीमा तय

मतदान के दिन भीड़ कम करने के लिए हर एक केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा तय की गई है। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता के लिए 100% मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर वेबकास्टिंग की जाएगी। इसे लगातार जारी रखने के इंतजाम भी किए गए हैं।

पीएम मोदी की खास अपील

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, "जैसे-जैसे तमिलनाडु के लोग विधानसभा चुनावों में मतदान करने की तैयारी कर रहे हैं, मैं सभी मतदाताओं से आग्रह करता हूं कि वे इस पवित्र लोकतांत्रिक कर्तव्य को पूरे उत्साह के साथ निभाएं। विशेष रूप से, मैं तमिलनाडु के युवाओं और महिलाओं से आह्वान करता हूं कि वे बड़ी संख्या में बाहर निकलें और मतदान के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करें।

तमिलनाडु चुनाव पर मल्लिकार्जुन की अपील

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, 'तमिलनाडु के प्यारे भाइयों और बहनों, आज की लड़ाई आपके अधिकारों को सुरक्षित करने की है। यह लड़ाई संघवाद, तर्कसंगतता, समानता, न्याय और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है। यह समावेशी कल्याण सुनिश्चित करने और आपके आदर्शों द्वारा अपनाए गए सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए भी है। अब समय आ गया है कि आप अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें और उन लोगों के खिलाफ़ खड़े हों जो आपके संघीय अधिकारों को छीनना चाहते हैं। मैं विशेष रूप से पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं से आग्रह करता हूं कि वे बड़ी संख्या में बाहर निकलें और तमिलनाडु के भविष्य के लिए मतदान करें। जय हिंद, जय तमिलनाडु।'

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए 152 सीटों पर वोटिंग जारी, बूथों पर लंबी कतार

#westbengalassemblyelection2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग हो रही है। पहले चरण में 16 जिलों की 152 विधानसभा में वोटिंग हो रही है। इस बार बंगाल में मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच है। इस बार चुनाव सिर्फ दो चरणों में कराए जा रहे हैं, जबकि 2021 में आठ और 2016 में छह चरणों में मतदान हुआ था।

शाम पांच बजे तक मतदान

मतदान सुबह सात बजे शुरू हुई और शाम पांच बजे तक चलेगी। सुबह 7 बजे से ही दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जैसे उत्तर के जिलों से लेकर मुर्शिदाबाद, नदिया, बीरभूम और हुगली तक मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।

कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में

पहले चरण में बंगाल के कुल 3,60,77,171 वोटर्स वोट करेंगे। पंजीकृत सभी 3,60,77,171 मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र जारी किए गए हैं। 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या 4,025 है, जबकि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या 2,04,618 है। कुल 43 अनिवासी भारतीय मतदाता हैं, और 69,468 सेवारत मतदाता हैं। पहले चरण में होने वाले इन 152 विधानसभा क्षेत्रों के लिए कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं। पुरुष उम्मीदवारों की संख्या 1,311 है, जबकि महिला उम्मीदवारों की संख्या 167 है।

पीएम मोदी की खास अपील

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मतदाताओं से लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि सभी नागरिक पूरे उत्साह और ताकत के साथ मतदान करें, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके। उन्होंने खास तौर पर राज्य के युवाओं और महिलाओं से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी भागीदारी न सिर्फ चुनाव को मजबूत बनाएगी, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी लाएगी। 

सुरक्षा को लेकर निर्वाचन आयोग सख्त

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे 23 अप्रैल को सुबह छह बजे से मतदान समाप्त होने तक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर नहीं जाएं। अधिकारी ने बताया कि एक दिशानिर्देश के अनुसार, उम्मीदवारों को मतदान के समय अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ही रहना चाहिए और किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से बचना चाहिए जिससे चुनावी प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

नेपाल की बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 26 दिन में ही दिया इस्तीफा

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नेपाल में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई बालेन शाह की सरकार पहले महीने में ही मुश्किल में फंस गई है। मार्च के आखिर में प्रधानमंत्री बनने वाले बालेन शाह की कैबिनेट के बेहद अहम सदस्य सुदन गुरुंग मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। जिसके बाद सुधन गुरुंग ने पद संभालने के बाद 26 दिन के अंदर ही इस्तीफा दे दिया है।

विरोध के बाद पद छोड़ने का फैसला

सुधन गुरुंग ने गृहमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था और अब उन्हें निजी निवेशों के चलते आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने व्यापक विरोध के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है। फेसबुक पोस्ट में सुधन गुरुंग ने लिखा, 'मुझसे जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पदों पर रहते हुए हितों के टकराव से बचने और जांच प्रक्रिया पर किसी भी तरह के प्रभाव से बचने के लिए मैंने गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।'

श्रम मंत्री के बाद गृह मंत्री का इस्तीफा

पहले महीने में ही कैबिनेट के दो बड़े स्तंभ ढह गए हैं। अनुशासनहीनता के मामले में श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह की विदाई के ठीक बाद अब गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने भी इस्तीफा दे दिया है। गुरुंग पर विवादित व्यवसायी दीपक भट्ट के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग और शेयरों में हेरफेर के गंभीर आरोप लगे हैं।

सरकार को शुरूआत में ही बड़ा झटका

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का वादा कर सत्ता में आई इस नई सरकार के लिए अपने ही मंत्रियों का विवादों में घिरना एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक चुनौती बन गया है। बालेन शाह सरकार अभी ठीक से काम शुरू भी नहीं कर पाई थी कि मंत्रियों के हटने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह को अनुशासनहीनता के चलते पद से हाथ धोना पड़ा। अब गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा सरकार के लिए दूसरा बड़ा झटका है।