तमिलनाडु में 4023 उम्मीदवारों की किस्मत आज होगी लॉक, पीएम मोदी ने की रिकॉर्ड मतदान की अपील

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तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर नई सरकार चुनने के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है। इस बार चुनाव में जहां द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए से मुकाबला करेगा। वहीं, पहली बार चुनाव में उतरे तमिल सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है।

एक चरण में सभी सीटों पर मतदान

तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया जा रहा है। चुनाव के नतीजे 4 मई को मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे।इस बार राज्य में कुल 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

हर एक केंद्र पर अधिकतम मतदाताओं की सीमा तय

मतदान के दिन भीड़ कम करने के लिए हर एक केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा तय की गई है। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता के लिए 100% मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर वेबकास्टिंग की जाएगी। इसे लगातार जारी रखने के इंतजाम भी किए गए हैं।

पीएम मोदी की खास अपील

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, "जैसे-जैसे तमिलनाडु के लोग विधानसभा चुनावों में मतदान करने की तैयारी कर रहे हैं, मैं सभी मतदाताओं से आग्रह करता हूं कि वे इस पवित्र लोकतांत्रिक कर्तव्य को पूरे उत्साह के साथ निभाएं। विशेष रूप से, मैं तमिलनाडु के युवाओं और महिलाओं से आह्वान करता हूं कि वे बड़ी संख्या में बाहर निकलें और मतदान के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करें।

तमिलनाडु चुनाव पर मल्लिकार्जुन की अपील

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, 'तमिलनाडु के प्यारे भाइयों और बहनों, आज की लड़ाई आपके अधिकारों को सुरक्षित करने की है। यह लड़ाई संघवाद, तर्कसंगतता, समानता, न्याय और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है। यह समावेशी कल्याण सुनिश्चित करने और आपके आदर्शों द्वारा अपनाए गए सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए भी है। अब समय आ गया है कि आप अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें और उन लोगों के खिलाफ़ खड़े हों जो आपके संघीय अधिकारों को छीनना चाहते हैं। मैं विशेष रूप से पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं से आग्रह करता हूं कि वे बड़ी संख्या में बाहर निकलें और तमिलनाडु के भविष्य के लिए मतदान करें। जय हिंद, जय तमिलनाडु।'

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए 152 सीटों पर वोटिंग जारी, बूथों पर लंबी कतार

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग हो रही है। पहले चरण में 16 जिलों की 152 विधानसभा में वोटिंग हो रही है। इस बार बंगाल में मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच है। इस बार चुनाव सिर्फ दो चरणों में कराए जा रहे हैं, जबकि 2021 में आठ और 2016 में छह चरणों में मतदान हुआ था।

शाम पांच बजे तक मतदान

मतदान सुबह सात बजे शुरू हुई और शाम पांच बजे तक चलेगी। सुबह 7 बजे से ही दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जैसे उत्तर के जिलों से लेकर मुर्शिदाबाद, नदिया, बीरभूम और हुगली तक मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।

कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में

पहले चरण में बंगाल के कुल 3,60,77,171 वोटर्स वोट करेंगे। पंजीकृत सभी 3,60,77,171 मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र जारी किए गए हैं। 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या 4,025 है, जबकि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या 2,04,618 है। कुल 43 अनिवासी भारतीय मतदाता हैं, और 69,468 सेवारत मतदाता हैं। पहले चरण में होने वाले इन 152 विधानसभा क्षेत्रों के लिए कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं। पुरुष उम्मीदवारों की संख्या 1,311 है, जबकि महिला उम्मीदवारों की संख्या 167 है।

पीएम मोदी की खास अपील

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मतदाताओं से लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि सभी नागरिक पूरे उत्साह और ताकत के साथ मतदान करें, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके। उन्होंने खास तौर पर राज्य के युवाओं और महिलाओं से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी भागीदारी न सिर्फ चुनाव को मजबूत बनाएगी, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी लाएगी। 

सुरक्षा को लेकर निर्वाचन आयोग सख्त

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे 23 अप्रैल को सुबह छह बजे से मतदान समाप्त होने तक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर नहीं जाएं। अधिकारी ने बताया कि एक दिशानिर्देश के अनुसार, उम्मीदवारों को मतदान के समय अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ही रहना चाहिए और किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से बचना चाहिए जिससे चुनावी प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

नेपाल की बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 26 दिन में ही दिया इस्तीफा

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नेपाल में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई बालेन शाह की सरकार पहले महीने में ही मुश्किल में फंस गई है। मार्च के आखिर में प्रधानमंत्री बनने वाले बालेन शाह की कैबिनेट के बेहद अहम सदस्य सुदन गुरुंग मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। जिसके बाद सुधन गुरुंग ने पद संभालने के बाद 26 दिन के अंदर ही इस्तीफा दे दिया है।

विरोध के बाद पद छोड़ने का फैसला

सुधन गुरुंग ने गृहमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था और अब उन्हें निजी निवेशों के चलते आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने व्यापक विरोध के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है। फेसबुक पोस्ट में सुधन गुरुंग ने लिखा, 'मुझसे जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पदों पर रहते हुए हितों के टकराव से बचने और जांच प्रक्रिया पर किसी भी तरह के प्रभाव से बचने के लिए मैंने गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।'

श्रम मंत्री के बाद गृह मंत्री का इस्तीफा

पहले महीने में ही कैबिनेट के दो बड़े स्तंभ ढह गए हैं। अनुशासनहीनता के मामले में श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह की विदाई के ठीक बाद अब गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने भी इस्तीफा दे दिया है। गुरुंग पर विवादित व्यवसायी दीपक भट्ट के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग और शेयरों में हेरफेर के गंभीर आरोप लगे हैं।

सरकार को शुरूआत में ही बड़ा झटका

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का वादा कर सत्ता में आई इस नई सरकार के लिए अपने ही मंत्रियों का विवादों में घिरना एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक चुनौती बन गया है। बालेन शाह सरकार अभी ठीक से काम शुरू भी नहीं कर पाई थी कि मंत्रियों के हटने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह को अनुशासनहीनता के चलते पद से हाथ धोना पड़ा। अब गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा सरकार के लिए दूसरा बड़ा झटका है।

भारत निभा सकता है अमेरिका-ईरान युद्धविराम में अहम भूमिका…”राजनाथ सिंह का चौंकाने वाला बयान

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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रुकवाने में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसको लेकर भारत में काफी सवाल उठ रहे हैं। इस बीच भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हमेशा संतुलित और समझदारी भरी विदेश नीति अपनाई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भारत वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिसमें पश्चिम एशिया का संकट भी शामिल है।

हम संभावना से इनकार नहीं कर सकते-राजनाथ सिंह

पहली बार जर्मनी के दौरे पर गए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूछा गया कि पश्चिम एशिया संकट में शांति कायम करने में भारत की कोई भूमिका है या नहीं? इसपर उन्होंने कहा, "भारत ने अपनी तरफ से कोशिश की, लेकिन हर चीज का सही समय होता है। हो सकता है कल ऐसा समय आए जब भारत इसमें अपनी भूमिका निभाए और सफल हो। हम संभावना से इनकार नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से शांति की अपील की है और कूटनीतिक मामलों में प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण संतुलित है।"

भारत का रुख किसी एक पक्ष के खिलाफ नहीं-राजनाथ सिंह

बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी कई देशों के नेताओं से सीधे बातचीत की है। उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की, तब भी शांति और समाधान पर चर्चा की गई। रक्षा मंत्री ने वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि भारत का रुख किसी एक पक्ष के खिलाफ नहीं है। यही कारण है कि न तो अमेरिका भारत को दुश्मन मानता है और न ही ईरान।

भारत सरकार की कूटनीति को सराहा

उन्होंने भारत की कूटनीति की सराहना करते हुए कहा कि इसी संतुलित नीति की वजह से भारत के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर पाए, जबकि उस समय कई देशों के जहाजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता से उठ रहे सवाल

राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच समझौता कराने के लिए दूसरे दौर की वार्ता आयोजित करने जा रहा है। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस सवाल उठा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अच्छे रिश्ते बताते हैं, लेकिन मध्यस्थता का मौका पाकिस्तान को मिल रहा है। यह मुद्दा तब और गरमा गया, जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को मध्यस्थता वाला 'दलाल' कहा था।

पीएम मोदी पर बयान देकर बुरे फंसे मल्लिकार्जुन खरगे, बीजेपी ने चुनाव आयोग में दर्ज कराई शिकायत

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रदानमंत्री पर विवादित बयान देकर मुश्किल में पड़ते दिख रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मल्लिकार्जुन खरगे के बयान के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई है।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में भाजपा का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज चुनाव आयोग से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कथित रूप से दिए गए बयान को लेकर आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।

आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन-किरण रिजिजू

इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 'एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, 'हमने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ उनके चौंकाने वाले और शर्मनाक बयान के लिए कड़ी शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'आतंकवादी' कहा था। यह सिर्फ अपमानजनक ही नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर एक खतरनाक और पहले कभी नहीं हुआ हमला है। यह आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। तुरंत कार्रवाई से कोई समझौता नहीं होगा।'

खरगे ने दी सफाई

वहीं, पीएम मोदी पर अपनी टिप्पणी के बारे में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'मैंने प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कहा। प्रधानमंत्री राजनेताओं और उम्मीदवारों को डरा रहे हैं और इस संबंध में मैंने कहा था कि कर आतंकवाद हो रहा है, ईडी छापेमारी कर रही है, आयकर विभाग छापेमारी कर रहा है, सीबीआई छापेमारी कर रही है। इस आतंकवाद को प्रधानमंत्री बढ़ावा दे रहे हैं। मैंने उन्हें आतंकवादी नहीं कहा; वे लोगों को डराने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। वे छापेमारी के जरिए लोगों को चुप कराने और चुनावों में उन्हें हराने की कोशिश कर रहे हैं। चेन्नई में मैंने यही कहा था।'

भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा', पहलगाम हमले की बरसी पर पीएम मोदी का सख्त संदेश

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आज पहलगाम हमले की पहली बरसी है। पिछले साल 2025 में इसी दिन पहलगाम में आतंकियों ने 26 निर्दोषों लोगों की जान ले ली थी। पीएम मोदी ने इस दिन को याद करते हुए मृतकों के प्रति अपनी संवेदना जताई है। साथ ही आतंकवाद को लेकर एक बार फिर बड़ा और सख्त संदेश दिया है।

आतंकियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को हम याद कर रहे हैं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। मेरी संवेदनाएं उन शोक-संतप्त परिवारों के साथ हैं, जो इस अपार क्षति का सामना कर रहे हैं। एक राष्ट्र के रूप में, हम इस दुख और संकल्प की घड़ी में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा। आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।'

देश की प्रतिक्रिया मजबूत, स्पष्ट और निर्णायक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पहलगाम में हुए आतंकी हमले की बरसी पर जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को हुए इस कायरतापूर्ण हमले में जिन निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई, उन्हें देश कभी नहीं भूल सकता। राजनाथ सिंह ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दर्द को पूरा देश साझा करता है। उन्होंने कहा कि यह घाव भारत की स्मृतियों में हमेशा ताजा रहेगा।रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत ने दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना किया है, लेकिन आज देश की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक मजबूत, स्पष्ट और निर्णायक है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत की एकता और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का जवाब पूरी शक्ति और दृढ़ता के साथ दिया जाएगा।

धर्म पूछ-पूछकर लोगों को मारी गई थी गोली

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल बड़ा आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाया था। यहां धर्म पूछ-पूछकर लोगों को गोली मार दी गई थी। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई और कई गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और पाकिस्तान स्थित आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया था।

यूएस-ईरान शांति वार्ताःडील के लिए ट्रंप खुद पहुंच सकते हैं पाकिस्तान

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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस बीच खबर आ रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में समझौता होने की स्थिति में खुद भी शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की युद्धविराम वार्ता होने की उम्मीद अब काफी बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चर्चा में शामिल एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाल से कहा है कि बातचीत के फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो या तो खुद डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान आ सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से इसमें शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने दी बम बरसाने की धमकी

ये खबर ऐसे वक्त में आई है, जब ईरान-अमेरिका वार्ता में लगातार गतिरोध चल रहा है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उन्होंने दावा किया है कि ईरान को समझौता करना ही होगा। उन्होंने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करेगा, तो बम बरसेंगे। हालांकि इसके बाद भी ईरान ने अड़ियल रवैया जारी रखा है।

पाकिस्तान के लिए अब तक नहीं रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में भाग लेने के लिए रवाना नहीं हुआ है। यह वार्ता अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी चर्चा बनी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से फिलहाल किसी भी डेलीगेशन के पाकिस्तान जाने की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे इस बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

इन मामलों पर विवाद बरकरार

-ईरान का परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे, जबकि तेहरान का कहना है कि किसी भी प्रतिबंध की समयसीमा सीमित होनी चाहिए।

-यूरेनियम भंडार: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के लगभग 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन ईरान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का कहना है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध तब तक जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपने प्रतिबंध नहीं हटाता, जबकि अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है।

-जमे हुए आर्थिक संपत्ति: ईरान करीब 20 अरब डॉलर की फ्रीज़्ड संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।

-युद्ध क्षतिपूर्ति: तेहरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों से हुए नुकसान के बदले लगभग 270 अरब डॉलर के मुआवजे की भी मांग उठाई है।

पीएम मोदी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, चुनाव आयोग को 700 नागरिकों ने लिखा पत्र

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महिला आरक्षण बिल को लेकर 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को संबोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पास नहीं होने के लिए कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों को ज़िम्मेदार ठहराया। अब 700 से अधिक नागरिकों ने चुनाव आयोग को लेटर लिखकर इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। लेटर लिखने वालों में पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, एक्टिविस्ट और पत्रकार शामिल हैं।

चुनाव आयोग से जांच की मांग

700 से ज्यादा लोगों ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि यह भाषण चुनावी आचार संहिता के दौरान दिया गया और इस भाषण से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। इस वजह से इसका असर निष्पक्ष चुनाव के नियमों पर पड़ सकता है। इनका मानना है कि इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग को तुरंत जांच करनी चाहिए।

शिकायतकर्ताओं ने कहा-पक्षपातपूर्ण प्रचार की श्रेणी

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर 33% महिला आरक्षण को लेकर हमला बोला, जो चुनावी माहौल में पक्षपातपूर्ण प्रचार की श्रेणी में आता है। उनका आरोप है कि सरकारी तंत्र और सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया गया, जिससे निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना प्रभावित होती है

कंटेंट और प्रसारण के तरीकों की जांच की मांग

शिकायत में कहा गया कि भाषण का कंटेंट और उसके प्रसारण के तरीके दोनों पर जांच होनी चाहिए। नागरिकों ने मांग की कि अगर प्रसारण के लिए अनुमति दी गई थी, तो विपक्षी दलों को भी उतना ही एयरटाइम दिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर भाषण में आचार संहिता का उल्लंघन किया गया हो तो उसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से हटाने की भी मांग की गई है।

शिकायत पत्र पर किन-किन लोगों ने किए हस्ताक्षर

शिकायत पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व आईएएस एम. जी. देवसहायम, शिक्षाविद जोया हसन, संगीतकार टी. एम. कृष्णा और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी माध्यमों पर लाइव प्रसारित किया गया जो पूरी तरह सार्वजनिक धन से संचालित होते हैं।

पीएम के संबोधन में किस बात पर विवाद?

दरअसल, राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने कहा, देश की करोड़ों महिलाओं की नज़र संसद पर थी। मुझे भी देखकर दुख हुआ कि नारी शक्ति का ये प्रस्ताव जब गिरा तो कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके जैसी परिवारवादी पार्टियां ख़ुशियां मना रही थीं। ऐसे लोगों को इस देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। करीब 30 मिनट के इस संबोधन में पीएम मोदी ने कई बार कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत तमाम विपक्षी दलों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।

कुछ सीमाएं कभी नहीं लांघी जानी चाहिए...',पहलगाम हमले की बरसी से एक दिन पहले भारतीय सेना का कड़ा संदेश

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22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद पहलगाम अब धीरे-धीरे अपने पुराने रंग में लौटता दिख रहा है। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद, भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान में मौजूद लश्कर और जैश के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अब एक साल बाद भारत उन जानों के नुकसान को एक बार फिर याद कर रहा है और शोक मना रहा है। इस बीच भारतीय सेना ने कड़ा संदेश दिया है।

एकजुट भारत का संदेश

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से पहले, भारतीय सेना ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ भारत के अडिग रुख को दोहराते हुए एक संदेश जारी किया। सोशल मीडिया साइट्स पर जारी किए गए पोस्ट में भारतीय सेना के संदेश में कहा गया है, 'जब मानवता की सीमाएं लांघी जाती हैं, तो जवाब निर्णायक होता है। न्याय मिलता है। भारत एकजुट है।'

भारतीय सेना की आतंकियों को चेतावनी

भारतीय सेना ने आतंकियों को चेतावनी देते हुए कहा, 'कुछ सीमाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें कभी पार नहीं करना चाहिए।' सेना ने अपनी इस पोस्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया है।

कश्मीर में पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई गई

इस बीच, पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले पूरे कश्मीर में पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हमले की बरसी को देखते हुए, सभी सुरक्षा एजेंसियों को संभावित गतिविधियों, विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्रों के आसपास सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। एक प्रभावी व बड़ी सुरक्षा योजना सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर बैठकें आयोजित की गई हैं, और वरिष्ठ अधिकारी इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।

पहलगाम आतंकी हमला और “ऑपरेशन सिंदूर”

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने छुट्टियां मना रहे 26 निर्दोष (25 भारतीय नागरिक और एक नेपाली नागरिक) लोगों पर निर्मम हत्या की थी। इस आतंकी हमले के 15 दिन बाद भारतीय सेना ने सात मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। जिसमें कई कुख्यात आतंकी भी मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात बिगड़े और दो दशक बाद चरम पर पहुंच गए। वहीं पाकिस्तान की तरफ से भारत के शहरों को निशाना बनाए जाने के बाद, भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी हमलों को नाकाम करते हुए उसका माकूल जवाब दिया। इसके बाद भारत की मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 14 सैन्य ठिकाने ध्वस्त किए गए। इससे घबराए पाकिस्तान ने 10 मई को भारत के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे दोनों देशों ने आपसी चर्चा के बाद लागू किया गया।

पश्चिम एशिया संकट का असर : हीलियम, एल्युमीनियम से लेकर मेडिकल उपकरण पर भी असर
अमरेश द्विवेदी

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को शांत करने के लिए किए जा रहे सीजफायर प्रयासों में अभी भी बड़ा गतिरोध बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ इसे “स्टैंडस्टिल” यानी ठहराव की स्थिति बता रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यस्थ देशों (जैसे पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र) की कोशिशों से अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी सीजफायर प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और रणनीतिक समुद्री रास्ते (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) खोलने की बात शामिल थी।
हालांकि, ईरान ने इससे पहले कई छोटे और अस्थायी सीजफायर प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है और कहा है कि वह केवल दीर्घकालिक और ठोस समझौते पर ही बात करेगा।
इस संघर्ष का असर केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर भी गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से जुड़े तनाव के कारण तेल और गैस बाजार पहले ही प्रभावित हैं, लेकिन अब इसका असर कई महत्वपूर्ण औद्योगिक संसाधनों पर भी पड़ने लगा है।
ईरान से जुड़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर हीलियम की आपूर्ति पर देखा जा रहा है।
कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े हीलियम उत्पादकों में से एक है, ने कुछ औद्योगिक घटनाओं और हमलों के बाद उत्पादन में अस्थायी रोक की घोषणा की है। इससे वैश्विक हीलियम सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
हीलियम प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक महत्वपूर्ण बाय-प्रोडक्ट है और इसका उपयोग कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में होता है, जैसे - सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, मेडिकल उपकरण (एमआरआई मशीन), स्पेस टेक्नोलॉजी और रॉकेट लॉन्चिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स कूलिंग सिस्टम आदि।
विशेषज्ञों का मानना है कि हीलियम की कमी से चिप निर्माण उद्योग प्रभावित हो सकता है, जिससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों की प्रगति धीमी पड़ सकती है।
इसके अलावा एल्युमीनियम सप्लाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी देशों का वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है और किसी भी प्रकार की रुकावट से इसकी कीमतों में वृद्धि हो सकती है। एल्युमीनियम का उपयोग बड़े पैमाने पर पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण उद्योग में होता है। सप्लाई बाधित होने से इन सभी क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है।
तेल और गैस आपूर्ति में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित है। गैसोलीन और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यह वैश्विक मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकता है।
सेमीकंडक्टर और एआई इंडस्ट्री पहले से ही सप्लाई चेन चुनौतियों का सामना कर रही है। हीलियम और अन्य दुर्लभ गैसों की कमी से चिप निर्माण की गति धीमी हो सकती है। इसका असर सीधे तौर पर स्मार्टफोन निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो कई कंपनियों को अपने उत्पादन लक्ष्य में देरी करनी पड़ सकती है।
हीलियम की कमी का असर मेडिकल सेक्टर पर भी पड़ सकता है, क्योंकि एमआरआई मशीनों और अन्य हाई-टेक मेडिकल उपकरणों में इसका उपयोग जरूरी होता है। इसके अलावा स्पेस इंडस्ट्री में रॉकेट फ्यूल टैंक की सफाई और लॉन्चिंग प्रक्रियाओं में भी हीलियम का उपयोग होता है।
स्पेस कंपनियों के बढ़ते लॉन्च कार्यक्रमों के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कमी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक सप्लाई चेन को गहराई से प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि कई कंपनियां पहले से ही संभावित कमी और कीमतों में वृद्धि को देखते हुए अपने प्रोडक्शन प्लान में बदलाव कर रही हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता फिलहाल ठहराव की स्थिति में है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद अब तक दूर नहीं हो पाए हैं। इस बीच वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, हीलियम, एल्युमीनियम और हाई-टेक उद्योगों पर असर बढ़ने की आशंका है।
स्थिति अगर जल्द नहीं सुधरी, तो इसका प्रभाव आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम उपभोक्ताओं तक महसूस किया जाएगा।