इंसाफ मांगने थाने गए बुजुर्ग को मिलीं गालियां और धक्का,वीडियो वायरल होने पर दरोगा सस्पेंड
रितेश मिश्रा
हरदोई के कछौना थाने में दरोगा शिवबाबू ने वर्दी की धौंस में मर्यादा और नैतिकता की धज्जियां उड़ा दीं।जमीनी विवाद में हुई कहासुनी के बाद इंसाफ की आस लेकर थाना पहुंचे मडिया निवासी बुजुर्ग फरियादी राजेश के साथ दरोगा का व्यवहार किसी लोकसेवक जैसा नहीं,बल्कि एक निरंकुश तानाशाह जैसा रहा।बुजुर्ग को न्याय देने के बजाय उन्हें अपमानित करना,धक्के देना और चप्पल उतारकर जमीन पर बैठने को मजबूर करना सीधे तौर पर 'खाकी' के संरक्षण में की गई मानसिक क्रूरता है। एक बुजुर्ग की लाचारी का उपहास उड़ाकर दरोगा ने न केवल अपनी संवेदनहीनता दिखाई, बल्कि पुलिस के 'मित्र' होने के दावों को भी सरेआम नीलाम कर दिया।
वायरल वीडियो ने दरोगा शिवबाबू की उस सामंती सोच को बेनकाब किया है, जहाँ फरियादी को इंसान नहीं बल्कि कीड़ा-मकोड़ा समझा जाता है। अपनी वर्दी का रौब एक असहाय बुजुर्ग पर झाड़ना और अंत में अपनी दबंगई छिपाने के लिए पीड़ित का ही 'शांति भंग' में चालान काट देना, न्याय का गला घोंटने जैसा कृत्य है। यह कृत्य दर्शाता है कि दरोगा के लिए कानून कोई सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी सनक पूरी करने का हथियार है। इस शर्मनाक आचरण ने पूरे पुलिस महकमे को जनता की अदालत में कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशासनिक स्तर पर एसपी अशोक कुमार मीणा ने बेलगाम दरोगा को सस्पेंड कर त्वरित संदेश तो दिया है, लेकिन क्या महज निलंबन इस अहंकारी मानसिकता का इलाज है? जनता के मन में पुलिस के प्रति गिरते विश्वास को बहाल करने के लिए ऐसे अफसरों के खिलाफ कठोरतम नजीर पेश करना अनिवार्य है।अब देखना यह है कि जांच की आंच इस घमंडी दरोगा को कानून का असली पाठ पढ़ा पाती है या नहीं।
1 hour and 46 min ago
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