इंदौर में स्टूडेंट्स के सपनों को हकीकत से जोड़ने वाला मंच बना 'माफिया इंक चैंपियनशिप और आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026'

- स्टूडेंट्स को मिला स्टार्टअप इकोसिस्टम, बिज़नेस सोच और लीडरशिप को करीब से समझने का मौका
- 5 कॉलेजों के 700 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने मैनेजमेंट गेम के जरिए खुद को आजमाया
- 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, पेड इंटर्नशिप और रियल इंडस्ट्री एक्सपोज़र
- इन्वेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स और एजुकेशनिस्ट्स एक ही छत के नीचे

इंदौर, फरवरी, 2026: इंदौर में आयोजित आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026 उन स्टूडेंट्स के लिए एक ऐसा मंच बनकर सामने आया, जो पढ़ाई के साथ-साथ कुछ नया करने का सपना देखते हैं। यह सिर्फ एक कॉन्फ्रेंस नहीं थी, बल्कि स्टूडेंट्स को यह समझाने की एक कोशिश थी कि आज के दौर में करियर के रास्ते सिर्फ नौकरी से होकर ही नहीं जाते हैं। इसी सोच के साथ माफिया इंक चैंपियनशिप और इंदौर स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप कॉन्फ्रेंस-2026 (आईएसईसी-2026) का आयोजन किया गया। यह आयोजन इंदौर स्थित आईपीएस एकेडमी में आयोजित किया गया, जहाँ सुबह से ही स्टूडेंट्स की भारी उपस्थिति और उत्साह देखने को मिला। 'भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का विकास और छात्र आंत्रप्रेन्योरशिप पर उसका असर; थीम पर आधारित उक्त समिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का छात्र सिर्फ नौकरी की तलाश में नहीं है, बल्कि वह खुद कुछ नया शुरू करना चाहता है। सबसे विशेष बात, यह इंदौर में इस तरह का पहला आयोजन है।

माफिया इंक के संस्थापक मधुकर केशवमूर्ति सौरभ राठौर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत कार्यक्रम के दौरान कई दिग्गज उपस्थित रहे, जिन्होंने स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन किया तथा मध्यप्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप पर बात रखी, जिनमें हेमंत राजोरिया, क्लाइंट सक्सेस पार्टनर, स्टार्टअप बैंकिंग, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक; संजय कुमार शर्मा, डिविज़नल मैनेजर, एलआईसी; रोहित प्रसाद, प्रोडक्ट मैनेजर, एलआईसी; नेहा गौर, सीईओ, पीआर 24x7; तथा स्टार्ट अप इकोसिस्टम से किंजल्क पंचोली के नाम शामिल हैं। इस आयोजन में डॉ. मोहित दुबे, प्रो वाइस चांसलर, एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी, सुंदर रामकृष्णन समेत कई जाने-माने स्टार्टअप लीडर्स और इकोसिस्टम बिल्डर्स मौजूद रहे। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि आज छोटे शहरों से भी बड़े स्टार्टअप्स निकल रहे हैं। जरुरत है, तो सिर्फ सही समय पर सही एक्सपोज़र और सही गाइडेंस की। साथ ही, स्टूडेंट्स को स्टार्टअप स्किल्स के तहत प्रॉब्लम को समझने और उसका सर्वश्रेष्ठ हल निकालने पर प्रकाश डाला।

पूरे आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा माफिया इंक चैंपियनशिप, जो एक स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट गेम है। जनवरी 2026 से लेकर 6 फरवरी, 2026 तक यह टूर्नामेंट चला। इस संस्करण में माफिया इंक चैंपियनशिप के जरिए इंदौर के 5 कॉलेजों के करीब 700 स्टूडेंट्स जुड़े। कैंपस राउंड में 100 स्टूडेंट्स का चयन किया गया, जिनमें से आगे बढ़ते हुए इन कॉलेजों ने सिटी क्वालिफायर में हिस्सा लिया और अंततः 30 छात्र फाइनल्स में पहुँचे। फिनाले के दौरान स्टेज पर लाइव गेम खेला गया, जिसमें स्टूडेंट्स को कम समय में फैसले लेने, टीम को साथ लेकर चलने और दबाव में सही डिसीजन लेने की चुनौती दी गई। लब्धि नाहर, पहल जैन, माधवी धुदानी, लक्ष्मी चौधरी, रवि ठाकुर, भावेश निकुम्बे और शीतल सोमानी विनर्स रहे, जिन्हें कुल 1 लाख रुपए के नकद पुरस्कार समेत पेड इंटर्नशिप का मौका भी मिलेगा, जिससे वे रियल वर्क कल्चर को करीब से समझ सकें।

अगला चरण मई से अगस्त के बीच आयोजित किए जाने की योजना है। इस दौरान, 27 कॉलेजों के करीब 5,000 से 6,000 स्टूडेंट्स को इस स्टूडेंट आंत्रप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजक तथा माफिया इंक के संस्थापक मधुकर केशवमूर्ति के सम्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आज का छात्र सिर्फ डिग्री नहीं चाहता, वह रियल लाइफ स्किल्स सीखना चाहता है। इसी सोच के साथ इस पूरे प्लेटफॉर्म को तैयार किया गया है, ताकि छात्र क्लासरूम से बाहर निकलकर असली दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें।

कार्यक्रम के दौरान हुए थिंक टैंक सेशन में इन्वेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स और एजुकेशनिस्ट्स ने स्टूडेंट्स से खुलकर बातचीत की। यहाँ कोई फॉर्मल लेक्चर नहीं था, बल्कि असली ज़िंदगी के एक्सपीरियंस, गलत फैसले, असफलताएँ और उनसे मिली सीख पर खुली चर्चा हुई। स्टूडेंट्स के लिए यही सेशंस सबसे ज्यादा कनेक्टिंग साबित हुए।

समस्त वक्ताओं ने कहा कि यदि स्टूडेंट्स को सही प्लेटफॉर्म और सही माहौल मिले, तो इंदौर जैसे शहर भी बड़े स्टार्टअप हब बन सकते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर सौरभ राठौर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी- माफिया इंक ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक दिन का इवेंट नहीं है। आने वाले महीनों में इस चैंपियनशिप से जुड़े गेम्स और मोमेंट्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जाएगा, ताकि और भी ज्यादा स्टूडेंट्स इससे प्रेरणा ले सकें।

यह आयोजन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा सह-प्रस्तुत किया गया। इसके साथ इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन, लक्ष्य एनजीओ, पीआर 24x7, नेक्सस इंदौर और आईपीएस एकेडमी सहयोगी संस्थाओं के रूप में जुड़े रहे।

आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन समिट-2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि इंदौर का स्टूडेंट अब सिर्फ सुनने वाला नहीं, बल्कि आगे बढ़कर करने वाला बनना चाहता है। ऐसे में, यह मंच उन युवाओं के लिए एक मजबूत शुरुआत साबित हुआ, जो पढ़ाई के साथ-साथ अपने आइडियाज़ को उड़ान देना चाहते हैं।
युवाओं के लिए नए ऑप्शन लाया मेडुसा; अब झारखंड में भी मिलेगा प्रीमियम टेस्ट

झारखंड, अप्रैल 2026: आज के समय में युवा सिर्फ ड्रिंक नहीं, बल्कि बेहतर टेस्ट और नया अनुभव चाहते हैं। ऐसे में, अच्छे ब्रांड्स की पहुँच हर शहर तक होना जरूरी हो जाता है। इसी जरूरत को समझते हुए मेडुसा बेवरेजेस अब झारखंड में कदम रख रहा है, जिससे यहाँ के ग्राहकों को भी प्रीमियम क्वालिटी का फायदा मिल सकेगा।

झारखंड में कंपनी का विस्तार देशभर में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अब मेडुसा अपने प्रोडक्ट्स, यानि मेडुसा प्रीमियम बियर, मेडुसा एयर और मेडुसा एक्स हाउस ऑफ द ड्रैगन को रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे शहरों में उपलब्ध कराएगा। रिटेल दुकानों के जरिए ग्राहकों तक इसकी पहुँच बनाई जाएगी।

झारखंड को कंपनी एक तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में देख रही है, जहाँ युवाओं की संख्या ज्यादा है और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की माँग भी बढ़ रही है। बढ़ती आय और शहरी लाइफस्टाइल इसे और मजबूत बनाते हैं।

कंपनी के एमडी और सीईओ अवनीत सिंह ने कहा, "झारखंड में हमारी एंट्री पूर्वी भारत में एक अहम् शुरुआत है। हम लगातार अपने नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर अनुभव पहुँचा सकें। यहाँ युवाओं के बीच प्रीमियम सेगमेंट में काफी सम्भावनाएँ हैं।"

मेडुसा प्रीमियम बियर जहाँ स्मूद और बैलेंस्ड स्वाद के लिए जानी जाती है, वहीं मेडुसा एयर हल्की और ज्यादा रिफ्रेशिंग है, जो लंबे समय तक आराम से एंजॉय की जा सकती है। इस तरह कंपनी अलग-अलग पसंद के हिसाब से विकल्प दे रही है।

फिलहाल दिल्ली में करीब 10% मार्केट शेयर के साथ मेडुसा तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में कंपनी अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को और मजबूत करेगी और देश के दूसरे राज्यों में भी विस्तार करेगी। झारखंड में एंट्री के साथ मेडुसा ने अपनी ग्रोथ की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा दिया है
देखिए, ‘ज़ॉम्बी’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर एक्शन सिनेमा पर 10 अप्रैल को शाम 7:30 बजे

*मुंबई, अप्रैल 2026:* हँसी, हंगामा और खूब मस्ती के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि ‘ज़ॉम्बी’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर शुक्रवार, 10 अप्रैल को शाम 7:30 बजे एक्शन सिनेमा पर होने जा रहा है। भुवन नुल्लन के निर्देशन में बनी यह फिल्म हॉरर और कॉमेडी का एक अलग ही मेल लेकर आती है। फिल्म में योगी बाबू और यशिका आनंद लीड रोल में नजर आते हैं।


एक अचानक हुए अजीब से ज़ॉम्बी हमले के बीच सेट यह कहानी अपने अलग-अलग किरदारों और उनके रिएक्शन के साथ आगे बढ़ती है। योगी बाबू अपनी खास कॉमिक टाइमिंग के साथ एक ऐसे इंसान का किरदार निभाते हैं, जो अजीब हालात में फंस जाता है, वहीं यशिका आनंद का ऐश्वर्या का किरदार इस ग्रुप में एक नई ऊर्जा जोड़ती है। फिल्म में बिजली रमेश, टीएम कार्तिक श्रीनिवासन और गोपी जैसे कलाकार भी अहम् भूमिकाओं में नज़र आते हैं। हर किरदार अपनी अलग पहचान  है, कोई खुद को बहुत होशियार समझता है, तो कोई हर चीज से घबरा जाता है और इसी वजह से इन सबका यह सफर और भी मजेदार बन जाता है। फिल्म डर के पलों को भी हँसी में बदल देती है, जिससे इसकी रफ्तार लगातार बनी रहती है और दर्शक जुड़े रहते हैं।


कहानी कुछ दोस्तों के ग्रुप की है, जो अपनी रोजमर्रा की एक जैसी जिंदगी से ब्रेक लेने के लिए एक ट्रिप प्लान करते हैं , जहाँ उनकी मुलाकात ऐश्वर्या से होती है। लेकिन, उनकी यह सपनों की छुट्टी उस समय अचानक बदल जाती है, जब वे ज़ॉम्बी के प्रकोप का सामना करते हैं। इस अजीब और डरावनी स्थिति को समझने और उससे बच निकलने की जद्दोजहद में, जो कहानी सामने आती है, वह एक बेहद मज़ेदार और रोमांचक सफर बन जाती है, जिसमें भ्रम, डर और ज़ोरदार हँसी के पल शामिल हैं।

*देखना न भूलें ‘ज़ॉम्बी’, टीवी पर पहली बार, 10 अप्रैल को शाम 7:30 बजे, सिर्फ एक्शन सिनेमा पर।*
ऑल इंडिया एससी/एसटी/ओबीसी एंड माइनॉरिटी फेडरेशन ने डॉ. अतुल मलिकराम को सौंपी मध्य प्रदेश की कमान

इंदौर, अप्रैल 2026: ऑल इंडिया एससी/एसटी/ओबीसी एंड माइनॉरिटी फेडरेशन ने संगठन की मजबूती और विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम को मध्य प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री आर.ए. वासनिक (बंटी वासनिक) की अनुशंसा पर जारी इस नियुक्ति आदेश में डॉ. मलिकराम के सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण और उनकी सक्रियता को मुख्य आधार बताया गया है। केंद्र सरकार के एससी आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त इस संगठन का उद्देश्य वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना है। डॉ. अतुल मलिकराम की इस नियुक्ति से उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश में सामाजिक सशक्तिकरण के अभियानों को नई ऊर्जा और रणनीतिक दिशा मिलेगी।

इस अवसर पर *डॉ. अतुल मलिकराम* ने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि, "नेतृत्व का असली अर्थ केवल पद प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उन आवाजों को ताकत देना है जो हाशिए पर खड़ी हैं; मेरा प्रयास रहेगा कि हम मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर प्राप्त हो।"

डॉ. अतुल मलिकराम एक प्रतिष्ठित राजनीतिक रणनीतिकार, प्रखर लेखक और अनुभवी पीआर सलाहकार के रूप में देश भर में अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं। पिछले दो दशकों से अधिक समय से वे मध्य प्रदेश सहित हिंदी भाषी राज्यों की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को गहराई से समझ रहे हैं। वर्ष 1999 में अपने पेशेवर सफर की शुरुआत करने वाले डॉ. मलिकराम ने 2006 में पीआर 24x7 की स्थापना की और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों की सटीक भविष्यवाणी कर अपनी दूरदर्शिता का लोहा मनवाया। उन्हें राजनीति के साथ-साथ कम्युनिकेशन और क्राइसिस मैनेजमेंट विशेषज्ञ के रूप में भी जाना जाता है, जिसका लाभ अब संगठन के माध्यम से सीधे समाज के पिछड़े और जरूरतमंद वर्गों को प्राप्त होगा।

डॉ. मलिकराम का व्यक्तित्व केवल रणनीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक संवेदनशील लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक 10 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें दिल से, दिल-ए-उम्मीद और कसक दिल की जैसी रचनाएं मानवीय भावनाओं और सामाजिक मुद्दों पर उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं। इसके अलावा वे *उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जिन्हे जीएचजी/कार्बन फुटप्रिंट सर्टिफिकेट* प्राप्त है। उनके सामाजिक योगदानों में इंदौर में स्थापित देश का पहला एंगर मैनेजमेंट 'कैफे भड़ास' और बुजुर्गों की सेवा के लिए समर्पित एनजीओ 'बीइंग रिस्पॉन्सिबल' प्रमुख हैं। राजनीति रणनीतियों की गहरी समझ के साथ उन्हें कैलिफोर्निया पब्लिक यूनिवर्सिटी, यूएसए द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि तथा समाज के प्रति अपनी निस्वार्थ सेवाओं के लिए गॉडफ्रे फिलिप्स रेड एंड व्हाइट गोल्ड अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वैश्विक ऊर्जा सकट के बीच भी एलपीजी की सतत आपूर्ति को सुनिश्चित कियाः 18 करोड़ से अधिक सिलेंडर डिलीवर किए
पटना-दुनिया भर में ऊर्जा के संकट के बीच ईंधन की उपलब्धता बाधित हुई है, और कई क्षेत्रों में ईंधन की ज़बरदस्त कमी आ गई है। इस बीच भारत ने अपने घरों के लिए एलपीजी की सुलभता को जारी रखा है और बाहरी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बड़े पैमाने पर स्थिरता को सुनिश्चित किया है।
भारत अपनी एलपीजी की 60 फीसदी ज़रूरत के लिए आयात पर निर्भर है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के ज़रिए वैश्विक आपूर्ति के केंद्रीकरण को देखते हुए, सरकार ने आपूर्ति सुरक्षित करने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए तेज़ी से कदम उठाए।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने और कई भौगोलिक क्षेत्रों से सोर्सिंग में विविधता लाने जैसे उपायों ने सुनिश्चित किया कि आपूर्ति स्थिरता से होती रही। यही कारण है पूरे देश में एलपीजी का वितरण बड़े पैमाने पर जारी है; 1 मार्च 2026 से अब तक 18 करोड़ से ज़्यादा सिलेंडर डिलीवर किए जा चुके हैं और रोज़ाना 60 लाख से ज़्यादा सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। डिलीवरी का औसत समय लगभग तीन दिन बना हुआ है।
हालांकि कुछ स्थानों पर उपभोक्ताओं को सिलेंडर की डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ा है। ये मामले ज़्यादातर स्थानीय और अस्थायी रहे हैं, जो मांग में अचानक बढ़ोतरी और लास्ट-माईल ऑपरेशनल परेशानियों की वजह से आए। इन समस्याओं को तुरंत हल करने के लिए वितरण को सुव्यवस्थित करने, डिलीवरी के समय को बेहतर बनाने और बुनियादी स्तर पर निगरानी को मज़बूत बनाने के लिए खास कदम उठाए जा रहे हैं।
खास बात यह है कि आपूर्ति में कोई बड़ी रुकावट नहीं आई है, और सभी डिस्ट्रीब्यूटरशिप में एलपीजी की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के साथ लगातार निगरानी और तालमेल की वजह से कामकाज सुचारू रूप से चल रहा है।
इसके साथ ही, सरकार ने उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सोच-समझकर कदम उठाए हैं। परिवारों पर, विशेष रूप से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर, इसका असर सीमित रखा गया है, जो किफ़ायती दाम पर एलपीजी उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
ऐसे समय में जब कई अर्थव्यवस्थाएँ बड़ी मुश्किलों का सामना कर रही हैं, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए एलपीजी आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना- भारत के एनर्जी इकोसिस्टम की मजबूती और प्रत्यास्थता को दर्शाता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय बिना किसी रुकावट के हर घर तक सुरक्षित और किफायती एलपीजी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, और साथ ही वितरण नेटवर्क की कार्यक्षमता और पारदर्शिता को भी लगातार मजबूत बना रहा है।
Verse Vibes 2026: साहित्य, संगीत और भावनाओं का संगम बना ‘The World of Hidden Thoughts’ का वार्षिक उत्सव
Verse Vibes 2026: 'The World of Hidden Thoughts’ के वार्षिक उत्सव में कई मशहूर लेखकों और कलाकारों ने बांधा समां, शब्दों और सुरों से सजी यादगार शाम।

The World of Hidden Thoughts (TWOHT) द्वारा आयोजित वार्षिक साहित्यिक उत्सव “Verse Vibes 2026” का भव्य आयोजन नई दिल्ली के Niv Art Center में दो दिवसीय कार्यक्रम के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि शब्दों, सुरों और भावनाओं का ऐसा संगम रहा, जिसने उपस्थित दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जो ज्ञान, सकारात्मकता और रचनात्मक ऊर्जा का प्रतीक बना। पहले दिन प्रसिद्ध लेखक अरुण मलिक, डॉ. नाज़िया शेख और रश्मि गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की। वहीं दूसरे दिन पियूष गोयल, कस्तूरीका मिश्रा और मुस्कान यादव जैसे प्रतिष्ठित लेखकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी समृद्ध बनाया।

इस दो दिवसीय आयोजन में कई चर्चित और नवोदित लेखकों की पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें आकांक्षा दीक्षित की प्रेरणादायक कृति “मैं टूटी नहीं, गढ़ी गई हूँ”, बाल लेखक मनीत सिंह की “The Enchanted 9”, मुस्कान यादव की “दिल की खामोश चीखें”, प्रिया चौधरी की “मनन”, पराश्री गुप्ता की “Verdict Pending”, स्वर्णरश्मि की “सूफी इश्क” और साहिल की “The Ending That Refuse to End” विशेष रूप से सराही गईं। साथ ही, अरुण मलिक की चर्चित पुस्तकों में से एक “Happiness As We Seek It” और “Odds Don’t Define Me” को भी मंच पर प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण TWOHT की वार्षिक एंथोलॉजी “Letters to Some-one Vol-2” का विमोचन रहा, जिसे श्रिया खरबंदा और आयुषी अग्रवाल द्वारा संकलित किया गया है। इस संकलन में 50 से अधिक लेखकों की उत्कृष्ट रचनाएँ शामिल हैं।

साहित्य के साथ-साथ संगीत, ग़ज़ल, शायरी और स्टैंडअप प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से शाम को यादगार बना दिया।

इस आयोजन को सफल बनाने में फूड पार्टनर Belly Bouncer, बेवरेज पार्टनर Piyo Soda, वॉटर पार्टनर Jalashaya, गिफ्टिंग पार्टनर Croch Attire और ज्वेलरी ब्रांड Safara का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया।

अंत में सभी लेखकों, कलाकारों और टीम सदस्यों को मंच पर सम्मानित किया गया। “Verse Vibes 2026” ने एक बार फिर यह साबित किया कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है, जो हर प्रतिभागी के दिल में लंबे समय तक जीवित रहता है।
*दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शो में मेघा रे का दमदार एक्शन अवतार: “स्टंट्स मेरे लिए मुश्किल नहीं, जुनून हैं”*

*मध्य प्रदेश, अप्रैल 2026* : एक्शन, रोमांच और जादू का स्पर्श लेकर स्क्रीन पर एक सुपरहीरो जैसा किरदार निभाना कभी आसान नहीं होता, लेकिन मेघा रे के लिए यह उनकी जर्नी का सबसे रोमांचक हिस्सा बन गया है। सन नियो के शो 'दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी' में दिव्या का किरदार निभाते हुए मेघा लगातार हाई-एनर्जी स्टंट और एक्शन से भरपूर सीन के जरिए अपनी सीमाओं को आगे बढ़ा रही हैं। अपने डर का सामना करने से लेकर मशहूर सुपरहीरोज़ से प्रेरणा लेने तक, अभिनेत्री बताती हैं कि इस अनुभव ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से कैसे बदल दिया है।

अपने अनुभव को साझा करते हुए मेघा रे ने कहा, “जब से मैं शो में ‘सुपर आंटी’ बनी हूँ, तब से मैं हर हफ्ते एक नया स्टंट कर रही हूँ और सच कहूँ तो यह एक बेहद रोमांचक सफर रहा है। बचपन में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली सुपरहीरो फिल्मों में से एक ‘द डार्क नाइट ट्रिलॉजी’ थी, जिसे क्रिस्टोफर नोलन ने बनाया था। उनकी बैटमैन फिल्मों ने मुझ पर गहरा प्रभाव डाला। किशोरावस्था में बैटमैन ही वह सुपरहीरो थे, जिन्होंने मुझे सबसे ज्यादा प्रेरित किया। और अब मुझे लगता है कि मैं अपने तरीके से उसी सपने को जी रही हूँ, यह एक अद्भुत एहसास है।”

उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, एक्शन सीन मेरे लिए बहुत स्वाभाविक हैं। मुझे ये ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं लगते क्योंकि बचपन से मेरा डांस का बैकग्राउंड रहा है। इससे मुझे बॉडी पोश्चर, बॉडी लैंग्वेज, ताकत और तेज़ मूवमेंट्स में काफी मदद मिलती है, जो एक्शन सीन के लिए जरूरी होते हैं। इस शो में जो भी एक्शन आप देखते हैं, वह मैं खुद करती हूँ। मुझे लगता है कि मैंने जिन सुपरहीरोज़ को देखा है, उनसे थोड़ी-थोड़ी प्रेरणा अपने अंदर समेट ली है। चाहे वह मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के एवेंजर्स हों या फिर बैटमैन। मेरा मास्क भी मुझे उनकी याद दिलाता है। साथ ही, मुझे वांडा मैक्सिमॉफ से भी प्रेरणा मिलती है, खासकर उस जादुई तत्व के लिए, जिसका मैं इस्तेमाल करती हूँ। तो हाँ, ये सभी प्रेरणाएँ मेरे काम में झलकती हैं।”

फिटनेस और अनुशासन पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखती हूँ, क्योंकि इस तरह के काम के लिए शारीरिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। मैं अपने रूटीन और डाइट में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश करती हूँ। इन स्टंट्स ने न सिर्फ मेरे किरदार को और दिलचस्प बनाया है, बल्कि मुझे एक अभिनेता के रूप में और अधिक आत्मविश्वासी भी बनाया है। हर दिन एक नई चुनौती जैसा लगता है और मुझे अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाकर खुद का एक मजबूत रूप खोजने में बहुत मज़ा आता है।”

देखिए 'दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी', हर सोमवार से रविवार, शाम 7:30 बजे, सिर्फ सन नियो पर।
*गिफ्ट निफ्टी ने मार्च 2026 में 129.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अब तक का सबसे ज्यादा*

*गिफ्ट निफ्टी के नाम मार्च 2026 में 129.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अब तक का सबसे  ज्यादा मासिक टर्नओवर और 2.82 मिलियन कॉन्ट्रैक्ट्स बनाने का रिकॉर्ड*
•  मार्च 2026 में 129.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 12,28,621 करोड़ रुपए) का अब तक का सबसे ज्यादा मासिक टर्नओवर और 2.82 मिलियन कॉन्ट्रैक्ट्स का सबसे ज्यादा मासिक वॉल्यूम दर्ज
*नई दिल्ली, 2 अप्रैल, 2026:*  भारतीय इक्विटी मार्केट की ग्रोथ स्टोरी के नए बेंचमार्क, गिफ्ट निफ्टी ने मार्च 2026 में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस दौरान, 129.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अब तक का सबसे ज्यादा मासिक टर्नओवर और 2.82 मिलियन कॉन्ट्रैक्ट्स का सबसे ज्यादा मासिक वॉल्यूम दर्ज किया गया। यह उपलब्धि अक्टूबर 2025 के 106.22 बिलियन अमेरिकी डॉलर और अप्रैल 2025 के 2.17 मिलियन कॉन्ट्रैक्ट्स के पिछले रिकॉर्ड से भी आगे पहुँच गई है।
यह उपलब्धि गिफ्ट निफ्टी पर बढ़ते वैश्विक भरोसे और दिलचस्पी को उजागर करती है, जो भारत की ग्रोथ स्टोरी के एक मजबूत बेंचमार्क के रूप में उभर रहा है। गिफ्ट निफ्टी की यह सफलता वास्तव में सराहनीय है, जिसके लिए इसने सभी भागीदारों का आभार व्यक्त किया है। गिफ्ट निफ्टी मानता है कि भागीदारों के सहयोग से यह कॉन्ट्रैक्ट इतना सफल बन पाया है।
एनएसई आईएक्स पर ट्रेडिंग टर्नओवर 3 जुलाई, 2023 से गिफ्ट निफ्टी के फुल-स्केल ऑपरेशन शुरू होने के बाद से लगातार तेजी से बढ़ रहा है। पहले दिन से लेकर मार्च 2026 तक गिफ्ट निफ्टी में कुल 63.37 मिलियन से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट्स का वॉल्यूम दर्ज हुआ है और कुल टर्नओवर 2.92 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है।
हर दिन की हेल्दी स्नैकिंग का पूरक बनेगा न्यूट्रिका का पीनट बटर
नई दिल्ली, 26 मार्च, 2026: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग सेहत का ध्यान तो रखना चाहते हैं, लेकिन सही और आसान विकल्प की तलाश करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में, रोजमर्रा के खानपान में छोटा-सा बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है।

इसी सोच के साथ, बीएन एग्रीटेक के लाइफस्टाइल और वेलनेस ब्रांड न्यूट्रिका ने अपनी नई पीनट बटर रेंज लॉन्च की है। यह सिर्फ एक नया प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक ऐसा विकल्प है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में हेल्दी खाने को थोड़ा आसान और थोड़ा स्वादिष्ट बना देता है।

न्यूट्रिका के डायरेक्टर और बिज़नेस हेड- एफएमसीजी, स्पर्श सचर ने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे आसानी से हेल्दी विकल्प चुन सकें और सेहत को अपनी रोज की आदत बना लें।"

न्यूट्रिका पीनट बटर दो वैरिएंट्स- क्रंची और क्रीमी में आता है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है, 100 प्रतिशत शाकाहारी सामग्री से बना है और इसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है। यानि स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

यह रेंज दिल्ली, मुंबई, पुणे और चंडीगढ़ समेत 14 शहरों में जनरल ट्रेड स्टोर्स पर उपलब्ध है और 300 ग्राम, 750 ग्राम व 900 ग्राम के पैक में मिलती है। अच्छी बात यह है कि इसे बच्चे से लेकर बड़े तक, पूरा परिवार अपनी रोज की डाइट में आसानी से शामिल कर सकता है।

इससे पहले न्यूट्रिका बी हनी और विटामिन युक्त कुकिंग ऑइल्स के जरिए ब्रांड लोगों के बीच अपनी जगह बना चुका है। अब यह नया पीनट बटर उसी सफर को आगे बढ़ाते हुए, हेल्दी लाइफस्टाइल को और भी आसान बनाने की कोशिश है।
*लखनऊ में एजुकेट गर्ल्स ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस, बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने में जमीनी साझेदारियों के प्रभाव को किया प्रदर्शित*

लखनऊ, 25 मार्च, 2026: एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य संबोधन दिया और राज्य में प्रत्येक बालिका के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “देशव्यापी पहलों जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर उत्तर प्रदेश में एजुकेट गर्ल्स जैसे साझेदारों के माध्यम से निरंतर प्रयासों तक, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वर्ष 2017 के बाद से राज्य में बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें बेहतर बुनियादी ढाँचा, संसाधनों में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए केंद्रित प्रयास शामिल हैं। कायाकल्प योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार जैसी सरकारी योजनाओं ने बालिकाओं को स्कूल में वापस लाने और उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अधिकांश बालिकाएँ कक्षाओं में हैं और ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बालिकाओं को गरिमा, अवसर और समानता के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एजुकेट गर्ल्स के साथ मिलकर बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के हर प्रयास में दृढ़ता से साथ खड़े हैं।”

माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने राज्यभर में सामुदायिक भागीदारी और पुनःसमावेशन प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “लगातार प्रयासों के माध्यम से हम लगभग 23 जिलों में बालिकाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सफल हुए हैं, साथ ही जोखिमग्रस्त छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने में भी सहयोग किया है। विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत टीम बालिका स्वयंसेवक गाँव-गाँव जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से निरंतरता सुनिश्चित कर रहे हैं। किशोर बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा में लाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स ने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और साझेदारियों के माध्यम से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके जमीनी अनुभवों ने हमारी योजना और क्रियान्वयन को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि कोई भी बालिका पीछे न रह जाए। हम इस सहयोग और एजुकेट गर्ल्स, टीम बालिका तथा सभी साझेदारों की बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को अत्यंत महत्व देते हैं।”




एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था की जमीनी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला और 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार का श्रेय अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वयंसेवकों और फील्ड टीमों के सामूहिक साहस को दिया।

उन्होंने कहा, “एजुकेट गर्ल्स यह दर्शाता है कि मजबूत साझेदारियाँ किस प्रकार बड़े स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं। ज्ञान का पिटारा जैसे हमारे रेमेडियल लर्निंग कार्यक्रमों के माध्यम से हम सबसे वंचित बालिकाओं तक पहुँचते हैं, उन्हें स्कूल में वापस लाने और सीखने की राह पर बनाए रखने में सहयोग करते हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है हमारी टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड टीमों और साझेदारों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता देता है और सेवा, ईमानदारी तथा जमीनी नेतृत्व की उस भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्य को आगे बढ़ाती है। घर-घर जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करना और गहरी जड़ें जमाए सामाजिक दृष्टिकोणों को बदलना, यह सम्मान अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों के असाधारण साहस और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम अपने कार्य में निरंतर सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।”

इस आयोजन में शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों की प्रेरणादायक कहानियाँ और प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जिन्होंने शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर किया। बिहार की प्रगति टीम से जुड़ी शिक्षार्थी हलीमा सादिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संचालित टीम बालिका पैनल चर्चा में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के प्रभाव को दर्शाया गया, जो घर-घर जाकर समुदायों में परिवर्तन ला रहे हैं और बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों तथा सामाजिक मान्यताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का कारण बनती हैं।

इन्हीं में से बदायूं की सोनम ने साझा किया कि पिछले दो वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के साथ उनकी यात्रा ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी बनाया है और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने में मदद की है। सोनभद्र की प्रांचल गुप्ता ने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उन्हें अपार खुशी और उद्देश्य देता है। अंकित मौर्य ने अपने गाँव में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को साझा किया, जहाँ वे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवारों को, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं। निर्मला यादव की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। कम उम्र में विवाह और विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी किताबें नष्ट कर दी गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बीए तथा एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूर्ण की, जिससे वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।