औरंगाबाद में नीतीश ने समृद्धि यात्रा में महिलाओं पर की चर्चा, शराबबंदी पर नहीं कही एक भी बात
,औरंगाबाद 2016 में बिहार में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्षों से सक्रिय रहे हैं। पिछली प्रगति यात्रा तक हर सभा में उन्होंने शराबबंदी के फायदे बताते हुए इसे महिलाओं की मांग और राज्यहित में लागू होने वाला निर्णय बताया।
हालांकि, समृद्धि यात्रा के चौथे चरण के अंतिम दिन औरंगाबाद के बारूण स्थित मुंशीबिगहा में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री ने इस बार इस विषय पर कोई चर्चा नहीं की।
सभा में मुख्यमंत्री ने बालिकाओं के लिए पोशाक और साइकिल योजना, स्थानीय निकाय चुनावों में महिला आरक्षण, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण, महिला रोजगार योजनाओं सहित कई योजनाओं का उल्लेख किया।
लेकिन शराबबंदी पर कोई टिप्पणी न करना, राज्य में इस पूरी व्यवस्था के भविष्य को लेकर चर्चाओं को तेज कर गया है। उनके इस परहेज़ को विपक्ष और समाज के विभिन्न वर्गों ने भविष्य में दारूबंदी के संभावित खात्मे के संकेत के रूप में देखा। दरअसल, राज्य में जब से शराबबंदी लागू हुई है, इसके नफा-नुकसान पर लगातार बहस होती रही है। एनडीए गठबंधन के कुछ घटक दल और विपक्षी पार्टियां समय-समय पर इस बंदी को खत्म करने की मांग उठाते रहे हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज जैसे दल ने इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने साफ कहा था कि यदि उनका दल सत्ता में आता है तो राज्य में पूर्ण शराबबंदी समाप्त कर दी जाएगी। हालांकि, चुनाव में सत्ता पक्ष की वापसी के बाद भी शराबबंदी को लेकर विरोध खत्म नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस मांग को लगातार मुखरता से उठाया।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पूर्ण शराबबंदी खत्म हो सकती है। इसी माहौल में औरंगाबाद की सभा में मुख्यमंत्री की चुप्पी को दारूबंदी समाप्ति से जोड़ा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में पूर्ण शराबबंदी जारी है, लेकिन भविष्य में इसका क्या होगा, यह नए मुख्यमंत्री और उनके दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा। फिलहाल राज्य में दारूबंदी खत्म होने की चर्चा जोरों पर है और जनता की निगाहें आगामी घटनाओं पर टिकी हैं।
औरंगाबाद से धिरेन्द्र पाण्डेय








औरंगाबाद। जिले के दाउदनगर थाना क्षेत्र के मंझियावां गांव में रविवार को एक शादी समारोह उस समय मातम में बदल गया, जब जयमाल कार्यक्रम के दौरान अचानक मकान का छज्जा (पोर्टिको) भरभराकर गिर पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में मलबे के नीचे दबकर दो लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 25 लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालकर विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया। घायलों का इलाज दाउदनगर और ओबरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को हायर सेंटर रेफर किया गया है। मृतकों की पहचान सत्यनारायण सिंह और अखिलेश्वर यादव के रूप में हुई है। बताया जाता है कि अखिलेश्वर यादव झारखंड के धनबाद में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे, जबकि सत्यनारायण सिंह खेती-किसानी करते थे। दोनों मृतक रिश्ते में दुल्हन के भाई बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मंझियावां गांव निवासी रामव्यास सिंह की बेटी की शादी थी। बारात गोह थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव से आई थी। द्वारपूजा के बाद जयमाल का कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में गांव के लोग मौजूद थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के पास बना छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। छज्जा गिरने से नीचे बैठे कई लोग मलबे में दब गए।
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