गिरिडीह के आसमान में मंडराता हेलीकॉप्टर: सस्पेंस खत्म, लिथियम की खोज और सुरक्षा सर्वे का बड़ा खुलासा

गिरिडीह। पिछले दो दिनों से गिरिडीह जिले के आसमान में लगातार उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टर ने आम जनता के बीच भारी कौतूहल और उहापोह की स्थिति पैदा कर दी थी। शनिवार से शुरू हुआ यह सिलसिला रविवार की सुबह भी जारी रहा, जिससे शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग यह जानने को बेताब दिखे कि आखिर माजरा क्या है। अब प्रशासन और भू-वैज्ञानिकों की ओर से इस मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। यह उड़ान किसी सुरक्षा मिशन का हिस्सा नहीं, बल्कि जिले के विकास और खनिज संपदा की खोज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सर्वे है।

GPS-GNSS और LiDAR तकनीक से चप्पे-चप्पे की मैपिंग

जानकारी के अनुसार, गिरिडीह के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न प्रखंडों में हेलीकॉप्टर के माध्यम से GPS-GNSS (Global Positioning System - Global Navigation Satellite System) सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन सभी स्थानों का सटीक डेटा जुटाना है, जहाँ पिछले पाँच वर्षों में आपातकालीन स्थितियों, वीआईपी आगमन या बड़े आयोजनों के लिए हेलीपैड का निर्माण किया गया है।

हेलीकॉप्टर में लगे अत्याधुनिक LiDAR (Light Detection and Ranging) सेंसर और हाई-रेजोल्यूशन कैमरों की मदद से सेंटीमीटर स्तर की सटीकता वाला डेटा प्राप्त किया जा रहा है। इस डेटा को बाद में GIS (Geographic Information System) सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल मैप्स में बदला जाएगा। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन दुर्गम क्षेत्रों का भी सटीक निरीक्षण कर लेती है जहाँ इंसानी पहुँच संभव नहीं है।

तिसरी-गावां में 'सफेद सोने' की तलाश

आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टर के साथ-साथ जिले के तिसरी और गावां प्रखंडों के जमीन पर भी एक बड़ा अभियान चल रहा है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के विशेषज्ञों की टीम तिसरी पहुँची है। यहाँ की प्रसिद्ध अभ्रक पट्टी (Mica Belt) में लिथियम (Lithium) के विशाल भंडार होने की संभावना जताई गई है।

लिथियम, जिसे आज की दुनिया में 'सफेद सोना' कहा जाता है, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी बनाने के लिए अनिवार्य खनिज है। जीएसआई की टीम इस क्षेत्र की मिट्टी और पत्थरों के नमूने लेकर जाँच कर रही है। यदि यहाँ लिथियम की पुष्टि होती है, तो गिरिडीह न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा।

जनता में उहापोह और प्रशासन का स्पष्टीकरण

हेलीकॉप्टर के बार-बार चक्कर काटने से सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी तैर रही थीं। कुछ लोग इसे बोड़ो हवाई अड्डे के विस्तारीकरण से जोड़ रहे थे, तो कुछ सुरक्षा बलों का कोई बड़ा ऑपरेशन मान रहे थे। बढ़ते भ्रम को देखते हुए गिरिडीह के डीसी रामनिवास यादव ने स्थिति साफ की।

डीसी रामनिवास यादव ने कहा, "पिछले पांच सालों में जिले में जहाँ कहीं भी हेलीपैड बनाए गए हैं, उनका एरियल सर्वे (Air Survey) किया जा रहा है ताकि भविष्य के लिए सटीक डेटा तैयार रहे। इसके अलावा, तिसरी में लिथियम की उपलब्धता की जाँच के लिए भू-वैज्ञानिकों की एक अलग टीम अपना काम कर रही है। जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है।"

भविष्य की राह

यह दोहरी प्रक्रिया गिरिडीह के लिए दूरगामी परिणाम लेकर आएगी। एक तरफ जहाँ सटीक मैपिंग से आपातकालीन लैंडिंग और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ लिथियम की खोज सफल होने पर जिले में रोजगार और निवेश के नए द्वार खुलेंगे। फिलहाल, गिरिडीह की जनता इस हाई-टेक सर्वे को अपनी नज़रों से देखने के लिए छतों पर जुटी हुई है।

लातेहार में नक्सलियों का 'काउंटडाउन' शुरू: 31 मार्च तक जिला होगा नक्सल मुक्त, सुरक्षा बलों ने घेरा जंगल।

जिले में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू हो गया है. पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें नक्सलियों के पूर्ण उन्मूलन के लिए छत्तीसगढ़ की सीमा तक जंगलों में अभियान चला रही हैं. नक्सलियों की सप्लाई चेन को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है. सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश सिंह ने कहा है कि नक्सलियों के पास अब कुछ ही दिन बचे हैं. उनके पास अब केवल एक ही रास्ता बचा है आत्मसमर्पण कर अपने जीवन की रक्षा करना.

दरअसल, केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक पूरे देश को नक्सली मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी लक्ष्य के अनुरूप लातेहार जिले को भी 31 मार्च तक पूरी तरह नक्सली मुक्त बनाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार सक्रिय हैं. पिछले कुछ दिनों से जिले में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया गया है, जिसमें सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन की पांच कंपनियों के साथ-साथ जिला पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की टीमें जुटी हुई हैं. इन टीमों ने लातेहार के सभी संभावित जंगलों के साथ छत्तीसगढ़ की सीमा तक नक्सलियों को घेरने के लिए पूर्णप्रूफ योजना तैयार की है.

तीन माओवादी और दो जेजेएमपी नक्सली सक्रिय

जानकारी के अनुसार, लातेहार जिले में वर्तमान में माओवादी के तीन और जेजेएमपी के दो नक्सली सक्रिय हैं. माओवादी नक्सलियों में 5 लाख का इनामी सबजोनल कमांडर सुखलाल बृजिया, 5 लाख का इनामी सबजोनल कमांडर राजू भुइयां और 5 लाख का इनामी सबजोनल कमांडर अनिल तुरी शामिल हैं. हालांकि, रिजनल कमांडर 15 लाख का इनामी रविंद्र गंझू और जोनल कमांडर मनोहर गंझू का नाम भी सूची में शामिल है. वहीं, जेजेएमपी नक्सली संगठन में 5 लाख का इनामी रामदेव लोहरा और 5 लाख का इनामी शिवा शामिल हैं. ये सभी नक्सली पुलिस और सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं.

नक्सलियों की सप्लाई चेन ध्वस्त

इस संबंध में जानकारी देते हुए सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश सिंह ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सलियों की सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने कहा कि नक्सलियों को सहयोग करने वाले लोग भी अब पुलिस और सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं. सप्लाई चेन ध्वस्त होने के कारण ही कुछ दिन पहले दो बड़े नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई थी.

आत्मसमर्पण ही जीवन रक्षा का एकमात्र रास्ता

सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट राजेश सिंह ने कहा कि नक्सलियों के पास अब मात्र चंद दिन बचे हैं. इन शेष दिनों में पुलिस और सुरक्षा बलों का अभियान और तेज होगा तथा लगातार जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि नक्सलियों के पास अपनी जान बचाने के लिए अब केवल एक ही रास्ता बचा है, हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना और समाज की मुख्यधारा में शामिल होना. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकारी प्रावधानों के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उनका जीवन सुरक्षित रहेगा. उन्होंने नक्सलियों के परिजनों से भी अपील की है कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करें और अपने परिवार को खुशहाल बनाएं.

"प्रकृति सुरक्षित, तो ही मानव सुरक्षित": सरहुल पूजा में शामिल हुए सीएम हेमंत सोरेन, राज्य की खुशहाली की मांगी दुआ।

रांची: झारखंड के महापर्व 'सरहुल' के पावन अवसर पर आज राजधानी रांची स्थित आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली में भक्ति, परंपरा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अपनी धर्मपत्नी सह विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ इस भव्य सरहुल पूजा महोत्सव में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि-विधान से प्रकृति की पूजा-अर्चना की और समस्त राज्यवासियों की सुख, समृद्धि एवं उन्नति की मंगलकामना की।

मांदर की थाप पर झूमे मुख्यमंत्री

महोत्सव का सबसे खास पल वह रहा जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं अपने हाथों में मांदर थाम लिया। मांदर की गूँज और पारंपरिक धुनों के बीच मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय की खुशियों को साझा किया। उनके साथ कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक कल्पना सोरेन ने भी मांदर की थाप पर कदम मिलाए, जिससे वहां मौजूद हजारों छात्र-छात्राओं और श्रद्धालुओं का उत्साह सातवें आसमान पर पहुँच गया।

"प्रकृति ही आदि और अंत है": मुख्यमंत्री का संबोधन

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "प्रकृति से ही सभी चीजों का सृजन होता है और अंत में प्रकृति में ही विलय होता है। अगर प्रकृति नहीं होती, तो मानव जीवन और इस संसार के किसी भी जीव-जंतु की कल्पना करना असंभव था।"

मुख्यमंत्री ने आधुनिक युग की आपा-धापी का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से हमें ऐसी परंपराएं सौंपी हैं, जहाँ हम एक छत या एक पेड़ के नीचे एकत्रित होकर अपनी जड़ों से जुड़ते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इन समृद्ध परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

मुख्यमंत्री ने भौतिकवादी युग में प्रकृति की रक्षा को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब आदिवासी समाज की प्रकृति-पूजा की यह व्यवस्था पूरी दुनिया को रास्ता दिखाती है। "प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा अस्तित्व बचेगा," मुख्यमंत्री के इस संदेश ने वहां मौजूद युवाओं को प्रेरित किया।

शुभकामनाओं का दौर

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक कल्पना सोरेन ने भी समस्त झारखंड वासियों को सरहुल की बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान और गौरव का प्रतीक है।

आदिवासी कॉलेज छात्रावास का ऐतिहासिक महत्व

मुख्यमंत्री ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वे हर वर्ष इस प्रांगण में आते रहे हैं और भविष्य में भी यहाँ के छात्र-छात्राओं से मिलने आते रहेंगे। करमटोली का यह छात्रावास परिसर वर्षों से सरहुल महोत्सव का मुख्य केंद्र रहा है, जहाँ राज्य के कोने-कोने से आए आदिवासी छात्र अपनी संस्कृति को जीवंत रखते हैं।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सरहुल महोत्सव के अवसर पर सिरम टोली स्थित सरना स्थल पर की पूजा-अर्चना ,

रांची, 21 मार्च 2026: झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज सिरम टोली स्थित सरना स्थल पर प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने राज्यवासियों की सुख, समृद्धि और उन्नति की कामना की।

सरहुल महोत्सव झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और आपसी सौहार्द का संदेश देता है। राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में कहा, "सरहुल महोत्सव हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और इसके संरक्षण का संदेश देता है।"

सरहुल की पारम्परिक रीति-रिवाज के तहत पूजन कार्य पाहन ने संपन्न कराया। मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) का फूल खोंसकर उन्हें आशीर्वाद दिया गया। यह परंपरा प्रकृति एवं मानव के गहरे संबंध का प्रतीक मानी जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रकृति से ही मनुष्य की यात्रा शुरू होती और उसी में समाहित होती है। आज प्रकृति के उपासक के रूप में इसे सजाना-संवारना और इसको अपने साथ जोड़े रखने के लिए संकल्प लेने का दिन है।"

सरहुल महोत्सव के अवसर पर राज्य सरकार ने कई कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

रांची में ईद और सरहुल का अनूठा संगम: चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात, ड्रोन और CCTV से होगी हर हलचल पर नजर।

रांची: आज राजधानी रांची में गंगा-जमुनी तहजीब और प्रकृति पूजा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर जहाँ ईद-उल-फितर की खुशियां मनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर झारखंड का पारंपरिक सरहुल पर्व भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन दोनों बड़े आयोजनों को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

सुरक्षा का अभेद्य किला:

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की गई है। असामाजिक तत्वों और जेबकतरों पर लगाम लगाने के लिए भारी संख्या में सादे लिबास में पुलिस बल को भी उतारा गया है।

ड्रोन और CCTV से निगरानी:

प्रशासन इस बार आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। प्रमुख मस्जिदों, पूजा स्थलों और जुलूस मार्गों पर ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से नजर रखी जा रही है। कंट्रोल रूम से सीसीटीवी के माध्यम से हर गतिविधि की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

अफवाहों पर सख्त संदेश:

उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सरना समिति और सर्व धर्म सद्भावना समिति के सदस्यों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध सूचना की जानकारी तत्काल प्रशासन को दें।

झारखंड का अपना 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी': रांची के धुर्वा डैम में बनेगी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की भव्य प्रतिमा।

रांची: झारखंड आंदोलन के महानायक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृतियों को संजोने के लिए राजधानी रांची में एक भव्य 'स्टेट ऑफ आर्ट पार्क' विकसित किया जाएगा। यह अत्याधुनिक पार्क धुर्वा डैम के समीप करीब 4 एकड़ भूमि पर तैयार होगा, जो गुजरात के 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की भव्यता की याद दिलाएगा।

पार्क की खासियतें:

  • भव्य प्रतिमा: पार्क के केंद्र में दिशोम गुरु की एक विशाल और भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

  • इतिहास की झलक: यहाँ एक विशाल स्मृति हॉल बनेगा, जहाँ महाजनी प्रथा के खिलाफ गुरुजी के आंदोलन, उनके संघर्ष की तस्वीरें और महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे।

  • पर्यटन को बढ़ावा रिंग रोड से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

प्रशासनिक तैयारी: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार स्वयं इस स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंप दी है, ताकि इसे समय सीमा के भीतर विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।


रांची: "AI शिक्षकों का विकल्प नहीं, सहयोगी है"; JSFDA के प्रथम वार्षिक कॉन्क्लेव में जुटे देशभर के दिग्गज शिक्षाविद्।

रांची: उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी (JSFDA) ने आज अपनी स्थापना की पहली वर्षगांठ के अवसर पर रांची में प्रथम वार्षिक कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, कुलपतियों और नीति-निर्माताओं ने शिरकत की।

युवा शक्ति और शिक्षकों की भूमिका: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान सचिव, श्री राहुल कुमार पुरवार ने कहा कि झारखंड की असली ताकत यहाँ की युवा शक्ति है। उन्होंने शिक्षकों पर जोर देते हुए कहा कि वे केवल ज्ञान देने वाले न बनें, बल्कि राष्ट्रनिर्माता और मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।

AI और आधुनिक शिक्षा पर मंथन: कॉन्क्लेव के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि AI कभी भी शिक्षकों की जगह नहीं ले सकता, बल्कि यह उनके लिए एक सहायक उपकरण (Tool) के रूप में काम करेगा। साथ ही शिक्षकों को नेतृत्वकर्ता (Leader) के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया गया।

प्रतिभाओं का सम्मान: समापन सत्र में JSFDA लोगो डिजाइन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। राजकीय महिला पॉलिटेक्निक की छात्रा श्रुति सोनी को प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹25,000 और मारवाड़ी कॉलेज की अंशिका चौधरी को द्वितीय पुरस्कार के रूप में ₹20,000 प्रदान किए गए।

रांची में अब निजी स्कूल नहीं बढ़ा पाएंगे मनमानी फीस, DC मंजूनाथ भजन्त्री ने गठित की जिला स्तरीय कमेटी।

रांची: राजधानी के निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए राहत की खबर है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क (Fees) निर्धारण हेतु एक उच्चस्तरीय 'जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमेटी' का गठन कर दिया गया है।

मनमानी फीस पर लगेगा ब्रेक:

झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत बनी यह कमेटी सुनिश्चित करेगी कि कोई भी निजी विद्यालय मनमाने ढंग से फीस में वृद्धि न करे। अब स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले इस कमेटी के नियमों का पालन करना होगा।

नियम तोड़ा तो खैर नहीं:

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर ₹50,000 से लेकर ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रमुख निर्देश जो आपको जानने चाहिए:

सामग्री की बिक्री पर रोक: स्कूल परिसर के भीतर या किसी विशेष दुकान से पुस्तकें, यूनिफॉर्म या जूते खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं किया जा सकता।

PTA का गठन अनिवार्य: हर स्कूल को 'अभिभावक-शिक्षक संघ' (PTA) बनाना होगा और इसकी जानकारी नोटिस बोर्ड पर देनी होगी।

कमेटी की शक्ति: जिला स्तरीय कमेटी को गवाहों को सम्मन जारी करने और स्कूल के दस्तावेजों की जांच करने का पूरा अधिकार होगा।

कमेटी में कौन-कौन शामिल?

इस कमेटी में उपायुक्त के अलावा जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO), एक चार्टर्ड एकाउंटेंट, गुरुनानक स्कूल और DAV कपिलदेव के प्राचार्य, DPS और JVM श्यामली के अभिभावक सदस्य और जिले के सभी सांसद व विधायक शामिल हैं।

रांची: हातमा डहूटोली सरना पूजा समिति ने सीएम हेमंत सोरेन को दिया आमंत्रण, प्रकृति पर्व सरहुल की बढ़ी रौनक।

रांची: झारखंड के महामहोत्सव 'सरहुल' की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से मिलने और उन्हें आमंत्रित करने का सिलसिला जारी है। आज, 20 मार्च 2026 को सरना पूजा समिति, डहूटोली (हातमा), रांची के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सीएम से मुलाकात की।

भव्य महोत्सव के लिए आमंत्रण: समिति के अध्यक्ष श्री विश्वास उरांव के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को कल, 21 मार्च 2026 को आयोजित होने वाले सरहुल पूजा महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रण पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने समिति के सदस्यों का अभिवादन स्वीकार करते हुए इस पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं।

प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सदस्य: मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में अध्यक्ष विश्वास उरांव के साथ कमल मुंडा, रोहन कच्छप, आशुतोष गोस्वामी, सुधीर मिंज और बसंत टोप्पो सहित कई गणमान्य सदस्य शामिल थे।

सरहुल की तैयारी: केंद्रीय सरना समिति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दिया आमंत्रण, कल सिरमटोली में होगा मुख्य आयोजन।

रांची: झारखंड के लोक आस्था और प्रकृति के पावन पर्व 'सरहुल' को लेकर राजधानी में उत्साह चरम पर है। इसी कड़ी में आज 20 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में केंद्रीय सरना समिति, रांची के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री को दिया सादर आमंत्रण: अध्यक्ष श्री अजय तिर्की के नेतृत्व में आए इस शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को कल, 21 मार्च 2026 को सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना स्थल पर आयोजित होने वाले पारंपरिक सरहुल पूजन कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए सादर आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया और राज्यवासियों को प्रकृति पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल: इस मुलाकात के दौरान समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की के साथ राहुल उरांव, नीमा तिर्की, सुषमा रानी भगत, मुन्ना उरांव, सचिन कच्छप, बबलू उरांव, लक्ष्मी नारायण मुंडा, अमित मुंडा, सुनील टोप्पो, बाबूलाल महली, कमिश्नर मुंडा और विजय कच्छप सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।