शबे कद्र पर शिया समुदाय ने रात-भर की इबादत,मांगी अमन-चैन की दुआ,मौलाना ने दिया माफी का संदेश*
सुल्तानपुर में गुरुवार रात शिया समुदाय ने शबे कद्र के अवसर पर रात भर इबादत की। इस दौरान जिले भर की मस्जिदें गुलजार रहीं, जहां लोगों ने देश में अमन-चैन और शांति के लिए दुआएं मांगीं। बच्चों को भी घरों में नमाज अदा करते देखा गया।
शहर के खैराबाद स्थित मस्जिद मीर बंदे हसन और घरहां स्थित मस्जिद इमाम रजा सहित सुरौली,कादीपुर,मूंगर,हयातनगर, लुसहा,सैदखानपुर,धौराहरा,वलीपुर, चक्कारी भीट,इसौली,चुनहा,अमहट, तुराबखानी,हसनपुर,मनियारपुर,जुड़ूपुर, भांईं और मनियारी में भी मस्जिदों में विशेष नमाजें अदा की गईं। सुरौली में आजमगढ़ से आए मौलाना मोहम्मद रजा ने शबे कद्र के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि यह रात 'नुज़ूल-ए-कुरान' की रात है,जब कुरान नाजिल हुआ था। शिया समुदाय के लिए इस रात का विशेष धार्मिक महत्व है,क्योंकि वे अहले बैत के साथ-साथ कुरान को भी दृढ़ता से मानते हैं। मौलाना रजा ने आगे बताया कि शिया अकीदे के अनुसार,इस रात पूरे साल के कर्मों का लेखा-जोखा 'इमाम-ए-ज़माना' (अ.स.) के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। इमाम इन कर्मों पर अपनी मुहर लगाते हैं।
शिया समुदाय को यह अधिकार है कि वे वर्ष भर के अपने कार्यों को फरिश्तों के माध्यम से लिखवाकर इमाम की सेवा में पेश करें। मौलाना मोहम्मद रजा आजमी ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया।
उन्होंने कहा,'यह रात पश्चाताप और क्षमा याचना की है।
जिस प्रकार ईश्वर हमारी गलतियों को माफ करता है और हमारी तौबा कुबूल करता है,
उसी तरह हमें भी इंसान होने के नाते एक-दूसरे की गलतियों को माफ करना चाहिए।' उन्होंने समाज में भाईचारे की भावना पैदा करने और प्रेम से रहने का आह्वान किया, यह कहते हुए कि एक-दूसरे की गलतियों को नजरअंदाज करना ही सुखी जीवन का आधार है।
1 hour and 54 min ago
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