भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की टीम ने किया जल जीवन मिशन का प्रभाव मूल्यांकन
* 175 केएल क्षमता की सोलर संचालित पानी की टंकी से 24 घंटे जलापूर्ति, स्वास्थ्य-शिक्षा में दिखा सकारात्मक बदलाव
लखनऊ।भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की तीन सदस्यीय टीम ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत जनपद लखनऊ के विकास खंड माल स्थित ग्राम पंचायत अटारी में संचालित ग्रामीण पाइप पेयजल योजना का स्थलीय प्रभाव मूल्यांकन किया। यह अध्ययन समुदाय की प्रतिक्रिया जानने, क्रियान्वयन में आई चुनौतियों की पहचान करने तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं जीवन स्तर में आए परिवर्तनों का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया।
परियोजना निदेशक प्रो. प्रियंका शर्मा के नेतृत्व में डॉ. आर.के. जायसवाल, रज्जन बाबू मिश्रा एवं आयुष मिश्रा ने ग्राम का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्राम जल संस्था समिति एवं स्वच्छता समिति की अध्यक्ष/ग्राम प्रधान श्रीमती संयोगता सिंह चौहान, समिति के सदस्य तथा ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया गया। मौके पर डॉ. हरपाल सिंह, कोऑर्डिनेटर, जल जीवन मिशन लखनऊ एवं डीपीएमयू टीम भी उपस्थित रही।
* 175 केएल क्षमता की सोलर संचालित टंकी
ग्राम जल संस्था समिति की अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ग्राम की कुल आबादी 2308 है। आगामी 30 वर्षों में अनुमानित 18 प्रतिशत जनसंख्या वृद्धि एवं प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर जल खपत के मानक को ध्यान में रखते हुए 175 केएल क्षमता की सोलर ऊर्जा संचालित पानी की टंकी का निर्माण कराया गया है।
लगभग 600 फीट गहराई तक बोरिंग कर शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। सोलर ऊर्जा के उपयोग से ऊर्जा की बचत हो रही है, ग्राम को आर्थिक लाभ मिल रहा है तथा 24 घंटे निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
* स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक जीवन में सुधार
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में इंडिया मार्क हैंडपंपों पर पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती थीं, जिससे समय की बर्बादी होती थी। अब घर-घर नल से जल उपलब्ध होने से यह समस्या समाप्त हो गई है। स्कूली बच्चों में स्वच्छता की आदत बढ़ी है और वे समय से विद्यालय पहुंच रहे हैं। जलजनित रोगों में कमी आई है, जिससे ग्राम के स्वास्थ्य एवं सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है।
* नियमित क्लोरीनेटेड जलापूर्ति
अधिशासी अभियंता श्री अरविंद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम पंचायत में विगत एक वर्ष से अधिक समय से नियमित एवं सुचारू रूप से स्वच्छ तथा क्लोरीनेटेड पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
यह सोशल ऑडिट एवं प्रभाव मूल्यांकन प्रक्रिया ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और जनसहभागिता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भविष्य में योजनाओं के और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा।
3 hours ago
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