झारखंड बंद का असर, आदिवासी संगठन कोई लीपापोती नहीं, सोमा मुंडा के हत्यारों का गर्दन चाहिए़ - निशा भगत

रांची : झारखंड में बेखौफ है अपराधि आए दिन किसी को उठा लेते हर तो किसी को मार देते है। ऐसी ही एक घटना खूंटी जिला में हुई थी जहां अपराधियों ने आदिवासी नेता सह पड़हा राजा सोमा मुंडा की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी। जिसके बाद अगले ही दिन खूंटी बंद रहा, आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया। लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। इधर आदिवासी संगठन विरोध जताते हुए आज झारखंड बंद का आवाहन किया है। आज सुबह ही कुछ जगह पर इसका विरोध प्रदर्शन देखने को मिला वही कुछ जगहों पर सामान्य गाड़िया चलती रही। दोपहर 1 बजे अल्बर्ट एक्का चौक पर लोग बंद कराने सड़क पर उतरे। इस बीच निशा भगत भी अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतरी। इस बीच आम लोगों से भी उलझी..

इस बीच निशा भगत ने सोमा मुंडा हत्याकांड में कहा कि लीपापोती नहीं हमें इंसाफ चाहिए आदिवासी संगठन की यही मांग है। हेमंत सरकार को भी खरीखौटी सुनाई और आदिवासी विरोधी बताया।

अन्य जिला की बात करे तो खूंटी और चाईबासा में सुबह होते ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर गये और ट्रैफिक सिस्टम को ठप कर दिया। रांची में बस टर्मिनल सुनसान रहा। खूंटी सिमडेगा तोड़पा के लिए बसे बंद रही वहां जाने वाले यात्री परेशान रहे। वही लंबी दूरी जो राज्य से बाहर जाती है उसमें में यात्रियों की संख्या कम रही। आदिवासी संगठनों के द्वारा झारखंड बंद बुलाने का मिलाजुला असर देखने को मिला है।

एनएच-33 पर 'महाजाम': बुंडू टोल प्लाजा पर 5 घंटे तक फंसी रहीं हजारों गाड़ियां, पानी-भोजन को तरसे यात्री।

रांची: आदिवासी नेता सोमा मुंडा की हत्या के खिलाफ आदिवासी संगठनों के झारखंड बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला है. खूंटी और चाईबासा में सुबह होते ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर गये और ट्रैफिक सिस्टम को ठप कर दिया. वहीं दिन चढ़ते ही कई अन्य जिलों में भी बंद समर्थक सड़कों पर आ गये. इसकी वजह से आम यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. सबसे ज्यादा खराब स्थिति जमशेदपुर-रांची एनएच पर दिखी. इसकी वजह से टोल प्लाजा के दोनों ओर एनएच पर हजारों गाड़ियां जाम में फंस गई. एनएच पर जाम का सिलसिला करीब 5 घंटे तक चला. सुबह करीब 11 बजे प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा पहुंचे और प्रदर्शन कर लगे. इसकी वजह से जाम लग गया.

बुंडू टोल प्लाजा की घेराबंदी से यात्री रहे परेशान

इस दौरान बुंडू के एसडीएम, डीएसपी, सीओ और थाना प्रभारी लोगों को समझाते रहे. अंत में करीब 5 घंटे बाद 3 बजकर 20 मिनट के करीब प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा से हट गये. अब एनएच पर गाड़ियों का आवाजाही शुरु हो गई है. लेकिन पांच घंटे तक जाम की वजह से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. आम यात्री पानी और भोजन के लिए तरसते रहे. क्योंकि बुंडू नगर पंचायत की दुकानें बंद थीं. हालांकि इस दौरान सिर्फ एंबुलेंस और सेना की गाड़ी को जाने दिया जा रहा था.

एक महिला यह कहकर जाने देने की दरख्वास्त करती रहीं कि उनके ससुर की मृत्यु हो गई है. उनको घर पहुंचना बेहद जरूरी है. लेकिन प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं थे. इस दौरान एक महिला सड़क पर ही रोने लगीं. उनको रांची में फ्लाइट पकड़ना था. काफी मनुहार के बाद उन्हें जाने दिया गया. प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि उनके पड़हा राजा की दिनदहाड़े हत्या हुई है. आदिवासी अस्मिता खतरे में है. अभी तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला है. इसलिए यात्रियों की परेशानी से वाकिफ होने के बावजूद ऐसा करना पड़ रहा है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना रोड जाम किए हमारी आवाज सरकार तक नहीं पहुंचेगी.

प्रशासन जाम हटाने के लिए करता रहा आग्रह

बुंडू टोल प्लाजा पर जाम लगते ही बुंडू के एसडीएम क्रिस्टोफर कुमार बेसरा, बुंडू के डीएसपी ओमप्रकाश, थाना प्रभारी रामकुमार वर्मा, अंचल अधिकारी हंस हेंब्रम पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंच गये थे. इस दौरान बंद समर्थकों को लगातार समझाने की कोशिश की जाती रही. लोगों को समझाने में करीब 5 घंटे लग गये. तबतक यात्री जाम में फंसे रहे. एसडीएन ने बताया कि ग्रामीणों ने एक ज्ञापन दिया है. सोमा मुंडा के परिवार को सरकारी नौकरी देने, फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने, पांच करोड़ रु. बतौर मुआवजा देने की मांग की गई है. उन्होंने बताया कि मांगों से सरकार को अवगत कराया जाएगा.

दरअसल, 7 जनवरी को खूंटी में जमुवादाग के पास आदिवासी नेता सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों ने 8 जनवरी को खूंटी बंद किया था, जिसका व्यापक असर दिखा था. खूंटी पुलिस इस मामले सात लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. पुलिस ने हत्या के पीछे जमीन विवाद को कारण बताया था. लेकिन आदिवासी संगठनों का कहना है कि अबतक शूटर और मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है.

आक्रोश की गूँज: मशाल जुलूस से दी गई आंदोलन की चेतावनी; सोमा मुंडा हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी पर अड़े आदिवासी संगठन।

खूंटी: आदिवासी नेता सह पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों द्वारा आहूत 'एक दिवसीय झारखंड बंद' को लेकर खूंटी जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बंद के मद्देनजर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों तक सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।

मशाल जुलूस से बंद की शुरुआत

बंद से पूर्व शुक्रवार देर शाम खूंटी की सड़कों पर मशाल जुलूस निकाला गया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय की मांग की। संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

42 दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति

खूंटी एसडीओ ने कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कुल 42 दंडाधिकारियों की तैनाती की है। ये अधिकारी शनिवार सुबह 8 बजे से ही अपने-अपने मोर्चा संभाल चुके हैं।

मुख्य फोकस क्षेत्र: हुटार, बिरहू, तमाड़ मोड़, कर्रा रोड, और चुकरु मोड़ जैसे संवेदनशील इलाकों में विशेष चौकसी बरती जा रही है।

प्रखंडों में निगरानी: मुरहू, कर्रा, तोरपा, रनिया और अड़की के प्रमुख चौराहों पर भी प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है।

प्रशासनिक सतर्कता और निर्देश

जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अग्निशमन विभाग (Fire Brigade) को किसी भी अप्रिय घटना (जैसे सड़क पर टायर जलाना या आगजनी) के लिए अलर्ट रहने को कहा है। साथ ही, सिविल सर्जन को आपातकालीन चिकित्सा दल तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सोमा मुंडा हत्याकांड: झारखंड बंद का खूंटी और रांची में व्यापक असर, सड़कों पर उतरी भारी भीड़, टायर जलाकर किया प्रदर्शन।

रांची: आदिवासी नेता सह पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों के आज झारखंड बंद का मिला जुला असर दिख रहा है. हालांकि खूंटी में इसका असर ज्यादा दिख रहा है. सुबह से ही बंद समर्थक सड़कों पर उतरे हुए हैं. कई जगह सड़कों पर टायर जलाकर बंद की नारेबाजी कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सोमा मुंडा के हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिले.

खूंटी में बंद का असर

खूंटी जिला से गुजरने वाले मुख्य मार्गों पर आवागन प्रभावित हुआ है. कई जगह लंबी दूरी की गाड़ियों की लंबी कतार लग गई है. खूंटी शहर में बंद का असर दिख रहा है. शहर के सभी प्रतिष्ठान और दुकानें बंद हैं. एनएच पर हुटार चौक के पास लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. जिला के सभी चौक चौराहों पर प्रदर्शनकारी घूम घूमकर बंद करा रहे हैं. इस क्षेत्र के पेट्रोल पंप भी बंद हैं.

प्रदर्शनकारियों ने अल्बर्ट एक्का चौक को किया जाम

रांची-जमशेदपुर एनएच 33 पर बुंडू में भी बंद का असर दिख रहा है. रांची से कर्रा, रांची से खूंटी, रांची से चुकरु मोड़, खूंटी से चाईबासा और सिमडेगा की तरह जाने वाले रास्तों पर परिचालन प्रभावित हुआ है. रांची के ग्रामीण इलाके में बंद को लेकर सुबह से ही संगठन के लोग सड़कों पर उतर आए. रांची के चिरौंदी, चान्हो, रातू, खलारी, तुपुदाना, कांके और पिठोरिया में सड़क जाम और आगजनी कर कई जगह बंद को सफल बनाने की कोशिश की गई. कई जगहों पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया.

रांची के सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रदर्शनकारियों को समझा बुझाकर सड़क से हटाने का प्रयास जारी है. कई इलाकों में आवागमन आंशिक रूप से ठप है. वहीं, बंद समर्थकों ने शहर में घुसकर अल्बर्ट एक्का चौक को पूरी तरह से जाम कर दिया. इधर, बंद को देखते हुए रांची, खूंटी समेत कई जिलों में शुक्रवार को एहतियातन स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई.

क्या है संगठनों की मांगें

बंद समर्थक आदिवासी संगठनों ने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि सोमा मुंडा की हत्या व्यक्तिगत दुश्मनी का मामला नहीं, बल्कि जमीन, जंगल और जल की रक्षा के लिए उठने वाली संघर्षपूर्ण आवाज को कुचलने की सुनियोजित साजिश है. संगठनों ने इसे आदिवासी अधिकारों पर हमला करार दिया है.

चाईबासा में बंद का असर

पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में पश्चिमी सिंहभूम जिले में बंद का असर दिख रहा है. चाईबासा, जगन्नाथपुर, नोवामुण्डी अदीनू क्षेत्रों में जगह-जगह चौक चौराहों पर टायर जलाकर मानकी मुण्डाओं नें विरोध प्रदर्शन किया. यहां लंबी दूरी और लोकल बसें नहीं चल रही हैं. राहगीरों को परेशानी हो रही है.

अन्य जिलों में बंद का हाल

रामगढ़ के कुज्जू थानाक्षेत्र के नया मोड़ में आदिवासी समाज के लोगों ने एनएच 33 को कुछ देर के लिए जाम किया. पाकुड़ में बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है. चतरा में जनजीवन सामान्य है. साहिबगंज में भी बंद का कोई असर फिलहाल नहीं है. गुमला में भी स्थिति सामान्य है. गिरिडीह में भी कोई असर नहीं दिख रहा है. दुमका में आम दिनों की तरह दुकानें और प्रतिष्ठान खुले हुए हैं. सिमडेगा में एनएच 143 को जाम करने की कोशिश की गई लेकिन प्रशासन ने थोड़ी देर में ही जाम हटवा दिया. सरायकेला में भी बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है. गोड्डा में भी आवागमन सामान्य है. इसके अलावा पलामू, गढ़वा, लोहरदगा और लातेहार में भी स्थिति सामान्य है.

बता दें कि 7 जनवरी को खूंटी में जमुआदाहा के पास आदिवासी नेता सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है. इस हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों ने 8 जनवरी को खूंटी बंद बुलाया था, जिसका व्यापक असर दिखा था. हालांकि खूंटी पुलिस ने हत्या के पीछे जमीन विवाद को कारण बताते हुए पिछले दिनों सात आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था. लेकिन लोगों का कहना है कि शूटर और मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही हैं.

अबुआ दिशोम बजट 2026-27: 'आम आदमी' के सुझावों से सजेगा झारखंड का बजट, मिलेट्स और महुआ की ब्रांडिंग पर जोर।

रांची: झारखंड सरकार के आगामी 'अबुआ दिशोम बजट 2026-27' को लेकर आयोजित दो दिवसीय बजट पूर्व गोष्ठी शुक्रवार को संपन्न हो गई। वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि इस बार का बजट पूरी तरह लोकतांत्रिक होगा और जनता की उम्मीदों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा।

वित्त एवं राजस्व: टैक्स और सुधार

वित्त मंत्री ने राजस्व संग्रह बढ़ाने और टैक्स प्रणाली में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि असंगठित ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टरों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए और टैक्स विसंगतियों को दूर करने के लिए 'माफी योजना' लाई जाए।

स्वास्थ्य क्षेत्र: कैंसर और आधुनिक तकनीक

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हेल्थ सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लाने का संकल्प दोहराया। गोष्ठी में महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों में मैमोग्राफी मशीन की स्थापना और विशेषज्ञों की नियुक्ति का सुझाव प्रमुख रहा। रिम्स-2 और सभी जिलों में 10 आईसीयू बेड की सुविधा पर भी चर्चा हुई।

कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: मिलेट्स और पीडीएस

खाद्य आपूर्ति विभाग को सुझाव दिया गया कि राशन कार्ड (PDS) के जरिए केवल अनाज ही नहीं, बल्कि मिलेट्स (मोटा अनाज), दाल, सरसों तेल और अंडा भी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, अनाज की मात्रा 5 किलो से बढ़ाकर 7 किलो करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

शिक्षा और आदिवासी कल्याण

मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि राज्य में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य हो गई है। उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बिरसा मुंडा विश्वविद्यालय की स्थापना और मैट्रिक पास युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से आसान ऋण दिलाने की योजना पर कार्य होगा।

नवाचार: महुआ और जीआई टैगिंग

विशेषज्ञों ने झारखंड के महुआ की क्षमता को पहचानते हुए इसे गोवा की 'फैनी' की तरह ब्रांड करने का सुझाव दिया। साथ ही, राज्य की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और मक्का-मशरूम की जीआई टैगिंग (GI Tagging) के लिए एक समर्पित पोर्टल बनाने पर सहमति बनी।

बजट गोष्ठी के 5 क्रांतिकारी सुझाव

क्षेत्र मुख्य प्रस्ताव

खाद्य सुरक्षा PDS में मिलेट्स और दाल शामिल करना, ग्रीन कार्ड का दायरा बढ़ाना।

ऊर्जा अगले 10 वर्षों के लिए 'ग्रीन एनर्जी' रोडमैप तैयार करना।

रोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से सुलभ ऋण (Sovereign Guarantee)।

संस्कृति आदिवासी भाषाओं में साइंस की पढ़ाई और महुआ की ब्रांडिंग।

सुरक्षा महिलाओं और बच्चों की 'चाइल्ड ट्रैफिकिंग' रोकने के लिए सख्त प्रावधान।

ज्यूरिख में सीएम हेमंत सोरेन से मिले राजदूत मृदुल कुमार: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में झारखंड की ऐतिहासिक भागीदारी पर हुई विस्तृत चर्चा।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में भारत के राजदूत मृदुल कुमार से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में राजदूत ने मुख्यमंत्री को दावोस में आयोजित होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 की तैयारियों और आगामी सत्रों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

25 वर्षों में पहली बार ऐतिहासिक भागीदारी:

झारखंड राज्य के निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह पहला अवसर है, जब राज्य का एक उच्चस्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल दावोस में आयोजित विश्व के इस सबसे बड़े आर्थिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इसे राज्य की आर्थिक स्वायत्तता और वैश्विक पहचान की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है।

मूल मंत्र: 'प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास'

दावोस में झारखंड की भागीदारी का मुख्य विषय "प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास" रखा गया है। यह विषय वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के उस वैश्विक उद्देश्य से पूरी तरह मेल खाता है, जो सतत विकास, आपसी विश्वास और दीर्घकालिक आर्थिक परिवर्तन (Long-term Economic Transformation) पर केंद्रित है।

वैश्विक निवेशकों का आकर्षण:

राजदूत मृदुल कुमार के साथ हुई इस चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कैसे झारखंड अपनी खनिज संपदा और पर्यावरण के संतुलन को वैश्विक निवेशकों के सामने एक 'प्रीमियम निवेश डेस्टिनेशन' के रूप में पेश कर सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड का विकास समावेशी होगा, जिसमें राज्य की प्रकृति और यहाँ के मूलवासियों के हितों की सुरक्षा सर्वोपरि होगी।

ऑक्सफोर्ड में गूँजेगी झारखंड की आवाज़: 23 जनवरी को 'ब्लावटनिक स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट' में अपनी विजन रखेंगे सीएम हेमंत सोरेन।

रांची/यूके: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी आगामी यूनाइटेड किंगडम (UK) की आधिकारिक यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच को संबोधित करेंगे। आगामी 23 जनवरी 2026 को शाम पांच बजे, वे विश्व के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के 'ब्लावटनिक स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट' में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।

चर्चा का मुख्य विषय:

मुख्यमंत्री का संबोधन इस जटिल प्रश्न पर केंद्रित होगा कि— "एक आदिवासी बहुल और संसाधन-समृद्ध राज्य (जैसे झारखंड), टिकाऊ और हरित औद्योगीकरण, जिम्मेदार खनिज विनिर्माण और समावेशी विकास को कैसे आगे बढ़ा सकता है?"

वैश्विक विशेषज्ञों के साथ संवाद:

इस सत्र में मुख्यमंत्री के साथ दो प्रख्यात शिक्षाविद भी चर्चा में शामिल होंगी:

प्रोफेसर अल्पा शाह: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में सामाजिक मानवशास्त्र की प्रोफेसर और ऑल सोल्स कॉलेज की फेलो।

प्रोफेसर माया ट्यूडर: ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में राजनीति और लोक नीति की विशेषज्ञ।

झारखंड के लिए महत्व:

यह चर्चा मुख्यमंत्री की "प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास" की दूरगामी सोच के अनुरूप है। इस मंच के माध्यम से झारखंड यह संदेश देगा कि खनिज संपदा का उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना और आदिवासी समुदायों के हितों को सुरक्षित रखते हुए कैसे किया जा सकता है। यह दौरा राज्य में निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव की जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति बढ़ते विश्वास की जीत है....आदित्य साहू

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आज महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में भाजपा एनडीए की ऐतिहासिक जीत हुई। आज महाराष्ट्र की जनता ने राष्ट्रविरोधी , तुष्टीकरण की मानसिकता को पराजित किया है, और राष्ट्रवादी विकासोन्मुख सोच वाले लोगों को प्रचंड जीत दिलाई है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आज जीत की खुशी में ढोल बाजों की थाप पर पटाखे छोड़ कर और मिठाइयां बांट कर खुशियां मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश और रांची महानगर के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।

मीडिया से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने महाराष्ट्र की जनता को और पार्टी के कार्यकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

श्री साहू ने कहा कि यह जीत ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में विकसित भारत का रथ लगातार दौड़ रहा। विकसित भारत केलिए गांव और शहर दोनों को सजाने संवारने की जरूरत है।आज देश प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कहा कि यह एतिहासिक जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास की जीत है।

श्री साहू ने कहा कि विकास केलिए झारखंड की जनता तरस रही है। आनेवाले दिनों में भाजपा बंगाल और असम विधानसभा चुनाव को भी जीतेगी साथ ही झारखंड के निकाय चुनाव में भी भाजपा कार्यकर्ता ही परचम लहराएंगे।

कहा कि झारखंड नगर निकाय की जनता हेमंत सरकार से ऊब चुकी है।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि आज देश में जनता विकास चाहती है। विकास से ही विकसित भारत बनेगा।

कहा कि यह विकास का सपना भाजपा और एनडीए ही कर सकती है यह जनता समझ चुकी है।सबका साथ सबका विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है।

प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि पूरे देश में भगवा लहर है। जनता अब कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों को मौका नहीं देना चाहती है। जनता का भरोसा भाजपा पर लगातार बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल,विधायक सीपी सिंह,प्रदेश मंत्री गणेश मिश्र, सरोज सिंह ,हेमंत दास, शिवपूजन पाठक,वरुण साहू,अशोक बड़ाइक ,सीमा सिंह,सत्यनारायण सिंह, मनोज मिश्रा, बलराम सिंह, जितेंद्र वर्मा, सुबोध सिंह गुड्डू, संदीप वर्मा, रमेश सिंह, मुकेश मुक्ता, कृपाशंकर सिंह, हरबिंदर सिंह बेदी, दिन दयाल वर्णवाल, राजेंद्र केशरी, ऊषा पांडेय, संजय जयसवाल, मदन सिंह, रोशनी खलखो, लक्ष्मी चंद्र दीक्षित, राजू सिंह, अनीता वर्मा, संजीव चौधरी, सुरेश प्रसाद, वीणा मिश्रा, पूनम जयसवाल, विकास रवि, देवेंद्र शर्मा, सोनू सिंह, विश्वजीत सिंह, तरुण जयसवाल, अश्विनी सीखुजा, नयन परमार, रोमित सिंह, पायल सोनी, प्रकाश साहू, राकेश शर्मा, रवि मुंडा ओम प्रकाश पांडे, अशोक मिश्रा, उमेश यादव, कुंदन सिंह, सुजीत शर्मा, विशाल अग्रवाल, अमित यादव, विशाल साहू, उमेश तिवारी, सुप्रिया दुबे, अशोक मुंडा, पवन पासवान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे।

ED को बड़ी राहत: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर लगाई रोक, एयरपोर्ट थाने में दर्ज FIR पर अगली सुनवाई तक स्टे।

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए रांची पुलिस द्वारा केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ की जा रही जांच पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और निजी प्रतिवादी संतोष कुमार से जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट के कड़े निर्देश:

जांच पर रोक: एयरपोर्ट थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर रांची पुलिस अब कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगी।

सुरक्षा का नया घेरा: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ईडी के रांची कार्यालय की सुरक्षा अब CISF या CRPF संभालेगी। साथ ही रांची एसएसपी को सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा दिया गया है।

पक्षकार: अदालत ने केंद्रीय गृह सचिव और शिकायतकर्ता संतोष कुमार को इस मामले में प्रतिवादी (पार्टी) बनाया है।

जवाब दाखिल करने का समय: राज्य सरकार को 7 दिन और संतोष कुमार को 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि:

विवाद पेयजल विभाग में कथित गड़बड़ी की जांच से शुरू हुआ। मामले का आरोपी संतोष कुमार बिना किसी समन के स्वयं ईडी कार्यालय पहुंचा और बाद में ईडी अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी।

ईडी का तर्क: गुरुवार को जब रांची पुलिस जांच के लिए ईडी दफ्तर पहुंची, तो एजेंसी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ईडी का तर्क है कि यह प्राथमिकी उनकी स्वायत्त जांच को बाधित करने और अधिकारियों को डराने की एक साजिश है। ईडी ने इस पूरे प्रकरण की जांच CBI से कराने की मांग की है, जिस पर अदालत ने विचार करने के संकेत दिए हैं।

NIA की बड़ी कार्रवाई: मगध जोन का कुख्यात नक्सली 'चंदन' मुंबई से गिरफ्तार, मज़दूर बनकर काट रहा था


राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक विशेष अभियान के तहत बिहार-झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय और लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात नक्सली चंदन कुमार को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए ने आधिकारिक तौर पर इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी 2021 से ही जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था।

कौन है चंदन कुमार?

मूल रूप से बिहार के जहानाबाद का रहने वाला चंदन कुमार प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओइस्ट) का सक्रिय सदस्य है। वह विशेष रूप से मगध जोन में संगठन को दोबारा जीवित करने के लिए रचे गए 'मगध षड्यंत्र' (RC-05/2021/NIA/RNC) मामले में नामजद था। संगठन में उसकी पहचान एक 'फाइनेंशियल एक्सपर्ट' के तौर पर थी, जो लेवी वसूली और फंड मैनेजमेंट के जरिए माओवादियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता था।

मज़दूर बनकर छिपा था मुंबई में

गिरफ्तारी से बचने के लिए चंदन ने अपनी पहचान छुपा ली थी और मुंबई में एक मज़दूर के रूप में काम कर रहा था। हालांकि, मज़दूर के भेष में रहकर भी वह ग्रामीण इलाकों में सक्रिय अपने ग्राउंड वर्कर्स (GWS) के संपर्क में था और उन्हें लेवी वसूली, हथियारों के निर्माण और नए कैडरों की भर्ती के लिए निर्देशित कर रहा था।

NIA की जांच में हुए खुलासे:

हथियारों का जखीरा: जांच में पता चला कि चंदन मगध जोनल कमेटी के माध्यम से हथियारों के संग्रह और वितरण का प्रमुख केंद्र था।

संगठन का विस्तार: आरोपी प्रद्युम्न शर्मा और सुनील भगत जैसे बड़े नक्सली नेताओं के साथ मिलकर मगध क्षेत्र में संगठन के विस्तार की योजना पर काम कर रहा था।

भगोड़ा घोषित: एनआईए की विशेष अदालत ने पहले ही उसे आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत 'भगोड़ा' घोषित कर दिया था।