राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत, तीनों सेनाओं ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार 4 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय भारत दौरे पर आ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा चार साल बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है। पुतिन के दो दिवसीय दौरे का आज दूसरा दिन है। यह यात्रा आज सुबह राष्ट्रपति भवन में पूरे राजकीय सम्मान के साथ आगे बढ़ी।

रूसी राष्ट्रपति आज राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां उनका औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर में उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई।

पुतिन को 21 तोपों की सलामी

राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में पुतिन का सेरेमोनियल वेलकम हुआ, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। मुख्य गेट पर राष्ट्रपति अंगरक्षक दल और घुड़सवारों की सलामी, उसके बाद 21 तोपों की गूंज, और फिर तीनों सेनाओं की औपचारिक सलामी से स्वागत हुआ। इस पूरे समारोह ने भारत-रूस संबंधों की ऐतिहासिक गहराई को एक बार फिर दिखाया है। पुतिन ने परेड का निरीक्षण किया और भारतीय सैन्य टुकड़ियों से मुलाकात कर सम्मान स्वीकार किया।

साझेदारी के 25 साल पूरे

पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रही है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी। दिसंबर 2010 में इसे बढ़ाते हुए ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया गया था

इंडिगो की देशभर में 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द, एयरलाइन ने सरकार से मांगी 10 फरवरी तक की मोहलत

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भारत की प्रीमियम एयरलाइन इंडिगो की ऑपरेशनल दिक्कतें जारी हैं। गुरुवार को एयरलाइन ने फ्लाइट्स कैंसिल करने का रिकॉर्ड कायम कर दिया। इंडिगो की 500 से ज्यादा उड़ानें अब तक रद्द हो चुकी हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी भी हुई है। लगातार तीसरे दिन एयरलाइन ने कई उड़ानें रद्द की हैं, जिसके चलते हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूरे देश के एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल है।

जानकारी के मुताबिक 4 नवंबर को पूरे देश में इंडिगो की 550 फ्लाइट्स कैंसिल हो गईं। इनमें से करीब 191 तो दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद रूट की थीं। इतने बड़े स्तर पर उड़ानें रद्द होने से एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी मच गई।

यात्रियों की बढ़ी मुश्किल

इंडिगो की फ्लाइट में देरी और रद होने के कारण यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है। लोग घंटों तक एयरपोर्ट पर फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। फ्लाइट्स रद्द होने के बाद यात्री टर्मिनल पर ही अपना सामान रखकर सही जानकारी मिलने का इंतजार करने लगे। इस दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। कुछ ऐसा ही हाल हैदराबाद एयरपोर्ट पर भी दिखा, जहां गुरुवार को हालात बेहद खराब रहे। इस वजह से 37 उड़ानें रद्द हुईं, कई यात्री रातभर फंसे रहे, कोई उचित सूचना या व्यवस्था नहीं की गई। इस दौरान कुछ यात्री गुस्से में एयरलाइन के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए, 'इंडिगो बंद करो… इंडिगो मुर्दाबाद' कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, 12 घंटे से अधिक इंतजार कराया गया, होटल या व्यवस्था नहीं दी गई, हर घंटे कहा गया- 'क्रू आने वाला है।'

अगले दो-तीन दिन और बनी रहेगी समस्या

एयरलाइन ने इस पर एक बयान जारी किया है। अपने बयान में इंडिगो ने कहा कि पिछले दो दिनों में इंडिगो के नेटवर्क और ऑपरेशन में बहुत ज्यादा दिक्कतें आई हैं। हम अपने सभी कस्टमर्स और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स से दिल से माफी मांगते हैं, जिन पर इन घटनाओं का असर पड़ा है। इंडिगो की टीमें MOCA, DGCA, BCAS, AAI और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के सपोर्ट से पूरी मेहनत से काम कर रही हैं। हम इन देरी के असर को कम करने और नॉर्मल हालात वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।एयरलाइन ने कहा है कि ठंड के मौसम में जब धुंध और भीड़ रहती है, तब क्रू की कमी की समस्या और गंभीर हो गई। इंडिगो ने कहा है शेड्यूल को स्थिर करने की कोशिशें अगले दो-तीन और जारी रह सकती हैं।

डीजीसीए ने मांगा जवाब

बता दें कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में से एक इंडिगो पिछले कुछ दिनों से ऑपरेशनल दिक्कतों से जूझ रही है। बता दें कि पिछले महीने नवंबर में एयरलाइन की 1,232 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं और कई फ्लाइट्स में बहुत ज्यादा देरी हुई। परफॉर्मेंस में गिरावट के बाद, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने जांच शुरू करने का फैसला किया। इसने एयरलाइन से ऑपरेशन में भारी गिरावट के पीछे के कारण बताने को कहा। सिविल एविएशन बॉडी ने एयरलाइन से नवंबर महीने में तेजी से फ्लाइट कैंसिल होने और देरी होने के पीछे सही कारण बताने को कहा।

भारत की रक्षा व्यवस्था भू-स्थानिक इंटेलिजेंस और एआई के एकीकरण से तकनीकी उत्कृष्टता की ओर अग्रसर

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* जियोस्मार्ट इंडिया 2025 ने भारत की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया

दिल्ली ब्यूरो

नई दिल्ली। जियोस्पेशल वर्ल्ड द्वारा आयोजित जियोस्मार्ट इंडिया कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2025 भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में “डिफेंस एंड इंटरनल सिक्योरिटी: जियोस्पेशल इंटेलिजेंस फॉर स्ट्रैटेजिक प्रिपेयर्डनेस” विषय पर वरिष्ठ रक्षा अधिकारी, नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञों ने चर्चा की। उन्होंने भू-स्थानिक इंटेलिजेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उन्नत डिजिटल तकनीकों के माध्यम से भारत की रक्षा संरचना में आ रहे परिवर्तन और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रधानमंत्री के रोडमैप पर बात की।

लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला, एसएम, इंजीनियर-इन-चीफ ने कहा कि भू-स्थानिक इंटेलिजेंस और एआई के एकीकरण से भारत की रक्षा व्यवस्था तकनीकी उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी स्टार्टअप उपग्रह निर्माण में सक्रिय हैं और सशस्त्र बल जीआईएस (GIS) आधारित सिस्टम, डिजिटल ट्विन्स तथा एआई (AI) संचालित युद्धक्षेत्र विश्लेषण अपना रहे हैं, जिससे भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी संचालन की अनिवार्य कड़ी बन चुकी है। यह परिवर्तन राष्ट्रीय लचीलापन, सीमांत प्रबंधन एवं आपदा प्रतिक्रिया को मजबूत कर रहा है।

ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अरुण सहगल, पीएचडी ने वैश्विक सामरिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया अब अमेरिका की एकध्रुवीय नीति, अमेरिका-चीन द्विध्रुवीय प्रतिद्वंद्विता और रूस की त्रिध्रुवीय भूमिका में विभाजित है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत एक स्वतंत्र रणनीतिक पहचान बना रहा है और उसे ‘इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र को सामरिक केंद्र बिंदु बनाना चाहिए, जहां समुद्री सुरक्षा और मुक्त नौवहन मार्ग सुनिश्चित करते हुए स्वायत्त विदेश नीति बनाए रखना जरूरी है।

ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. विजय कुमार सिंह, मिजोरम के राज्यपाल ने कहा कि “भू-स्थानिक इंटेलिजेंस वह अदृश्य शक्ति है जो भविष्य के युद्धों में सफलता तय करेगी”। उन्होंने जियोइंट (GeoINT), जो इमेजरी, भू-आकृति विश्लेषण, स्थानिक डेटा, एआई और बहु-स्रोत खुफिया जानकारी का संयोजन है, को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली कमांडरों को अच्छी और तेज निर्णय क्षमता प्रदान करती है। भू-स्थानिक जागरूकता भूमि, वायु, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्रों की सफलता के लिए अनिवार्य है।

सत्र में यह निष्कर्ष निकला कि भू-स्थानिक इंटेलिजेंस आधुनिक रक्षा प्रणाली की मुख्य रीढ़ बन चुकी है जो वास्तविक समय में स्थिति की समझ, सहयोग और निर्णय क्षमता को मजबूत करती है। जियोस्मार्ट इंडिया 2025 ने सरकार, रक्षा क्षेत्र, शिक्षा व उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और एक सुरक्षित, तकनीकी रूप से सशक्त रक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।

गले लगाकर दोस्त का वेलकम, पीएम मोदी ने पुतिन को गिफ्ट की रूसी भाषा में लिखी श्रीमद्भगवद्गीता

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंच गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर उनका गले लगाकर स्वागत किया और दोनों नेता एक ही कार में सवार हुए। इस मौके पर दोनों नेताओं की जोरदार केमिस्ट्री दिखी। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रशियन भाषा में भगवद गीता की एक कॉपी भी गिफ्ट की।

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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा ने गुरुवार रात से शुरू हो चुकी है। गुरूवार देर शाम जैसे ही उनका विमान दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं वहां मौजूद थे। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर एक-दूसरे का स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी और पुतिन एक ही कार में साथ 7 लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, जहां भारत और रूस के झंडों व खास लाइटिंग से सजे पीएम आवास में उनके सम्मान में विशेष डिनर का आयोजन किया गया।

पुतिन की भेंट की रूसी भाषा में लिखी भगवद्गीता

राष्ट्रपति पुतिन के स्वागत के दौरान पीएम मोदी ने रूसी भाषा में लिखी भगवद्गीता की प्रति भेंट की। पीएम मोदी ने उस पल की एक तस्वीर शेयर की और गीता को दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। पुतिन को गीता भेंट करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि गीता की शिक्षाएं दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरणा देती हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि अपने दोस्त, प्रेसिडेंट पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। हमारी बातचीत का इंतजार रहेगा। भारत-रूस की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है, जिससे हमारे लोगों को बहुत फायदा हुआ है।

पुतिन के गर्मजोशी के साथ स्वागत पर क्रेमलिन ने क्या कहा?

राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करने के लिए पीएम मोदी की अगवानी को लेकर क्रेमलिन की ओर से बयान जारी किया गया है। क्रेमलिन ने कहा कि पीएम मोदी का विमान के पास पर जाकर पुतिन से मिलने का निर्णय अप्रत्याशित था और रूसी अधिकारियों को इसकी पहले से सूचना नहीं दी गई थी। यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है।

चार साल में पहली बार भारत आए पुतिन

बता दें कि पुतिन चार साल में पहली बार भारत आए हैं। रूसी राष्ट्रपति 5 दिसंबर तक नई दिल्ली में रहेंगे। अपने दौरे के दौरान, रूसी राष्ट्रपति पीएम मोदी के साथ 23वीं भारत-रूस सालाना समिट भी करेंगे। जिससे डिफेंस, ट्रेड, साइंस और टेक्नोलॉजी, और कल्चर और मानवीय मामलों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।

मीटिंग में क्या होगा खास?

आज होने वाला 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण है। यह यात्रा उस समय हो रही है जब दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उम्मीद है कि आज की बैठकों में रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान–तकनीक, व्यापार और कनेक्टिविटी से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। रूसी मीडिया TASS के मुताबिक दोनों देश करीब 10 सरकारी समझौते और 15 से अधिक कारोबारी कॉन्ट्रैक्ट साइन करने जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने BLO की मौत पर जताई चिंता, कहा-काम का बोझ कम करें, दिए कई बड़े निर्देश

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विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान के बीएलओ की हुई मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। इन स्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य सरकारों के लिए निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि बीएलओ के काम के घंटे कम करने के लिए राज्य सरकारें अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करे। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने संबंधित मौतों और कथित आत्महत्याओं के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने से इनकार कर दिया है।

राज्य सरकारों को कर्मचारी बढ़ाने का निर्देश

सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव से संबंधित कार्यों के लिए पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना पूरी तरह राज्य सरकारों जिम्मेदारी है। न्यायालय ने बीएलओ की मौत और आत्महत्याओं को स्वीकार करे हुए कहा कि चुनावी रोल और संबंधित कार्यों के लिए तैनाती एक कानूनी प्रक्रिया है, और राज्यों को मौजूदा कर्मचारियों पर बोझ कम करने के लिए पर्याप्त जनशक्ति प्रदान करनी चाहिए।

बीमार या असमर्थ कर्मचारियों के बदले वैकल्पिक तैनाती का निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व वाली बेंच ने यह भी आदेश दिया कि जिन लोगों ने चुनाव आयोग की ओर से जारी एसआईआर प्रक्रिया में ड्यूटी से छूट के लिए सही और स्पष्ट वजहें दी हों, उनके अनुरोधों पर राज्य सरकार और सक्षम प्राधिकारी विचार करें और मामलों के आधार पर उन लोगों की जगह दूसरे कर्मियों की तैनाती की जाए। सीजेआई ने कहा, राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि अगर जरूरत है तो वह इस काम के लिए जरूरी कार्यबल मुहैया कराए।

टीवीके ने दायर की है याचिका

बता दें कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी- तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की ओर से चुनौती दी गई है। तमिलनाडु के राजनीतिक दल टीवीके की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष दलील दी गई कि अब तक देश के अलग अलग राज्यों में 35–40 बीएलओ की मृत्यु काम के अत्यधिक दबाव के कारण हुई है। इसलिए हमने मुआवज़ा देने की मांग की है।

पुतिन से मुलाकात शेड्यूल न होने पर भड़के राहुल गांधी, बोले- सरकार नहीं चाहती मैं मिलूं

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रूसी राष्ट्रपति पुतिन कुछ घंटे में भारत दौरे पर पहुंचने वाले हैं। 4 दिसंबर की शाम से कल तक पुतिन भारत के खास मेहमान होंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात पीएम मोदी और राष्ट्रपति से होगी। इस बीच राहुल गांधी ने सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि मैं बाहर से आने वाले लोगों से मिलूं। मोदी जी और विदेश मंत्रालय इस नियम का पालन नहीं करते हैं। यह उनकी इनसिक्योरिटी है।

परंपरा का पालन नहीं करने का आरोप

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, अब तक परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले नेता विपक्ष के नेता से भी मिलते थे। यह (पूर्व प्रधानमंत्री) अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के समय में भी होता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं कर रहे हैं।

सरकार क्या करती है हर बार ?

राहुल गांधी ने कहा, आजकल यह होता है कि जब बाहर से कोई आता है या मैं कहीं बाहर जाता हूं तो सरकार सुझाव देती है कि बाहर से आने वाले अतिथि या उनके (राहुल के) बाहर जाने पर वहां के लोग नेता प्रतिपक्ष से नहीं मिलें। उनका कहना था कि सरकार यह हर बार करती है।

राहुल बोले- हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व हम भी करते हैं

राहुल गांधी ने कहा, हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व हम भी करते हैं, सिर्फ सरकार नहीं करती है। विपक्ष का नेता भी भारत का प्रतिनिधित्व करता है और इन बैठकों से विदेशी नेताओं को एक अलग नजरिया मिलता है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष के लोग बाहर के लोगों से मिलें।

पांच वर्षों में देश के एक हजार शहरी केंद्रों का हाेगा डिजिटल मानचित्रण: मनोज जोशी

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दिल्ली ब्यूरो

नई दिल्ली। जियोस्मार्ट इंडिया 2025 के तीसरे दिन शहरी भूमि आधुनिकीकरण पर राष्ट्रीय नेतृत्व और तकनीकी विशेषज्ञों ने गहन चर्चा की। सत्रों में यह स्पष्ट हुआ कि भारत एकीकृत, सटीक और हाई-प्रिसीजन डिजिटल मैपिंग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां वास्तविक समय में उपलब्ध भू-स्थानिक परतें शासन, अवसंरचना निर्माण और देश की व्यापक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि भारत आने वाले महीनों में 157 शहरों में हाई-प्रिसीजन सर्वे पूरे करने की दिशा में है और अगले पांच वर्षों में 1,000 शहरी केंद्रों का व्यापक डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी राज्य इस अभियान में शामिल हैं। बड़े राज्यों में 10 पायलट शहर और छोटे राज्यों में 1–2 शहर तय किए गए हैं, लेकिन लक्ष्य एक है। पूरे देश के शहरी भू-अभिलेखों को सटीक और अद्यतन बनाना। श्री जोशी ने जमीन पर मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों की भी ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि कई शहरों में, जिनमें दरभंगा और दिल्ली के नजदीक अलवर शामिल हैं, निजी सर्वेयर अब भी टेप से माप करने जैसे पुराने तरीकों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि अब समय है कि संपत्ति लेन-देन के लिए पूरी तरह लैटीट्यूड–लॉन्गिट्यूड आधारित डिजिटल स्केच अपनाए जाएँ। राजस्व विभागों को हाथ से बने रफ खाके छोड़कर जीआईएस-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन सिस्टम अपनाने होंगे। नागरिक हमसे तेज़ चल रहे हैं, सरकार को भी उसकी गति पकड़नी होगी। उन्होंने उद्योग जगत से सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। “सरकारी अधिकारियों को जीआईएस की सीमित जानकारी है, हम सीख रहे हैं। निजी क्षेत्र को मार्गदर्शन में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। भारत में मजबूत जीआईएस बाज़ार तभी बनेगा जब दोनों क्षेत्र साथ मिलकर काम करेंगे।”

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक भूमि मैपिंग अर्थव्यवस्था के लिए कितनी अहम है। “भारत की आर्थिक भावना का बड़ा आधार भूमि और संपत्ति मूल्य हैं। कोई व्यक्ति 50 लाख की संपत्ति खरीदकर आज उसे 4 करोड़ मानता है और उसी भावना से खर्च करता है। लेकिन हमारा दस्तावेजी सिस्टम इसकी गति से नहीं चल पा रहा। राजस्व विभागों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को स्पष्ट, सटीक और पारदर्शी अभिलेख उपलब्ध कराएं। भूमि अभिलेख विभाग के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी ने तकनीकी प्रगति का विवरण देते हुए कहा कि भारत के जटिल शहरी स्वरूप को पारंपरिक सर्वे से आगे की तकनीक की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सरकार 57 शहरों में एक बड़े पायलट की शुरुआत कर रही है, जिसमें पंजीयन दस्तावेज, नगर निकाय टैक्स रिकॉर्ड और अन्य भू-अभिलेखों को एकीकृत कर “प्रोकार्ड” नामक एकमात्र प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जो अपार्टमेंट स्तर तक स्वामित्व दर्शाएगा।

उन्होंने बताया, “भारत पहली बार ड्रोन, एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के माध्यम से 5 सेंटीमीटर सटीकता वाली एरियल इमेज तैयार कर रहा है। पहले एक भूखंड का सर्वे पूरे दिन ले लेता था। 2014 में कॉर्स (CORS) प्रणाली लागू होने के बाद वही काम 10 मिनट में हो जाता है और सर्वेयर अब रोजाना 200 संपत्तियाँ माप सकते हैं।” सत्यार्थी ने केरल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में एरियल मैपिंग की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार उन्नत ऑब्लिक कैमरों, फाइव-लेंस इमेजिंग और घने वृक्षों के भीतर तक स्कैन करने में सक्षम LiDAR सेंसर का उपयोग कर रही है। “यह संयोजन 20–30 राज्यों में परीक्षण में है ताकि सबसे कठिन भू-भाग में भी सटीक नक्शे तैयार किए जा सकें।” जियोस्पेशल वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने कहा कि भारत उस मोड़ पर है जहाँ उच्च-गुणवत्ता, वास्तविक समय और एकीकृत डिजिटल मानचित्र राष्ट्रीय नियोजन के लिए अनिवार्य बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि हम एक डिजिटल युग में हैं जहाँ लोकेशन स्वयं एक आर्थिक संपत्ति है। खाना मंगाने से लेकर टैक्सी बुक करने तक, आपकी लाइव लोकेशन मूल्य पैदा करती है। भारत अलग-अलग विभागों के अलग-अलग नक्शों के युग में नहीं रह सकता। वन नेशन, वन मैप अब नारा नहीं, आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में शहरों, कृषि और अवसंरचना में भारी बदलाव आए हैं, इसलिए एक अद्यतन और एकीकृत डिजिटल आधार अब जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती मैपिंग नहीं बल्कि डाटा को सामंजस्यपूर्ण बनाना है। “हर विभाग को एक ही संदर्भ फ्रेम पर काम करना होगा। ड्रोन सर्वे से लेकर क्लाउड आधारित AI सिस्टम तक, सभी को साझा भू-स्थानिक परतों पर काम करना होगा तभी हम मजबूत राष्ट्रीय जियोस्पैशल इकोसिस्टम तैयार कर पाएंगे।” सत्र में भूमि संसाधन विभाग के निदेशक श्याम कुमार भी उपस्थित रहे, जो नक्ष कार्यक्रम के कई महत्वपूर्ण हिस्सों की निगरानी करते हैं और केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सत्र का समापन इस एकमत आह्वान के साथ हुआ कि नक्ष कार्यक्रम की रफ्तार बढ़ाई जाए, मल्टी-लेयर क्षमता वाले आधुनिक जीआईएस (GIS) सॉफ्टवेयर विकसित किए जाएं और देशभर में 30 सेंटीमीटर सटीकता वाले सैटेलाइट बेस मैप सुनिश्चित किए जाएं, जब तक कि पूर्ण रिसर्वे पूरे न हो जाएं। इन चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत के भू-सुधार सिर्फ तकनीकी उन्नयन नहीं हैं बल्कि नागरिक सुविधाओं, व्यापार अनुकूलता, विवादों में कमी, संपत्ति बाज़ार की मजबूती और आने वाले दशक में खरबों रुपये की आर्थिक क्षमता को खोलने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।

इंडिगो की 150 के करीब उड़ानें रद्द, देशभर के एयरपोर्ट पर हजारों यात्री परेशान, डीजीसीए ने मांग जवाब

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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। एयरलाइन कंपनी इंडिगो में क्रू की कमी के कारण देशभर में एयरलाइन के ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित कई बड़े एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स लगातार कैंसिल हो रही हैं। दो दिनों में 150 से अधिक फ्लाइटें रद्द करनी पड़ीं, जबकि सैकड़ों उड़ानें देर से उड़ीं।जिससे लाखों यात्रियों को भारी परेशानी हुई। हालात ये रहे कि डीजीसीए ने इंडिगो के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर जवाब मांग लिया है।

क्रू की कमी से जूझ रही देश की सबसे बड़ी एयरलाइन

बता दें कि इंडिगो में क्रू की कमी है। इस पर डीजीसीए के नए नियमों को लागू करना इंडिगो के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। 1 नवंबर से लागू हुए नियमों के तहत एयरलाइंस को पायलटों, फ्लाइट अटेंडेंट्स को थकान से बचाना होगा ताकि उड़ानों की सुरक्षा प्रभावित न हो। नियमों के तहत सभी एयरलाइंस के क्रू सदस्य एक दिन में आठ घंटे से ज्यादा, हफ्ते में 35 घंटे से ज्यादा और महीने में 125 घंटे से ज्यादा और साल में एक हजार घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकेंगे। साथ ही क्रू सदस्यों को आराम देना भी जरूरी कर दिया गया है। पायलट रात के समय दो से ज्यादा लैंडिंग नहीं करेंगे और क्रू सदस्य दो लगातार रात्रि ड्यूटी के बाद फिर से नाइट शिफ्ट नहीं करेंगे।

धड़ाधड़ कैंसल हो रही फ्लाइट्स

क्रू की कमी से जूझ रही इंडिगो का परिचालन व्यवस्था चरमरा गया है।कंपनी को पिछले दो दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। आज भी इंडिगो के ऑपरेशंस पर बड़ा असर दिख रहा है। दिल्ली से लेकर हैदराबाद और मुंबई एयरपोर्ट पर यात्री परेशान हैं। एयरलाइन की लगभग 8 फीसदी उड़ानें रद्द होने की संभावना जताई गई है। सुबह से कई फ्लाइट्स धड़ाधड़ कैंसल हो रही हैं।

बेंगलुरु में 100 से अधिक फ्लाइट्स कैंसल, यात्री परेशान

बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंडिगो एयरलाइंस में स्टाफ की कमी के कारण 100 से अधिक उड़ानें ग्राउंड कर दी गईं, जिससे कोलकाता, गोवा, दिल्ली, हैदराबाद और पुणे जाने वाले यात्रियों पर असर पड़ा है। कई यात्री बीती रात से घंटों इंतज़ार कर रहे हैं और लंबे विलंब से नाराज होकर हवाई अड्डे पर विरोध भी जताया। बढ़ती नाराज़गी के बावजूद स्थिति अब तक पूरी तरह नहीं संभली है, और यात्रियों का आरोप है कि अधिकारी उड़ानों की स्थिति पूछने पर टाल-मटोल भरे जवाब दे रहे हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट से कैंसिल हुईं इंडिगो की 30 फ्लाइट्स कैंसल्ड

इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन का व्‍यापक असर दिल्‍ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट पर भी दिख रहा है। सुबह दस बजे तक आईजीआई एयरपोर्ट से कैंसिल होने वाली फ्लाइट्स की संख्‍या करीब 30 हो गई है। कैंसिल हुई फ्लाइट्स में नागपुर, कोचीन कोलकाता, पुणे, मुंबई, वडोदरा, पटना और भोपाल एयरपोर्ट को जाने वाली फ्लाइट्स शामिल हैं।

डीजीसीए ने मांगा जवाब

इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन पर बड़ा अपडेट आया है. डीजीसीए यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने आज 4 दिसंबर को दोपहर में इंडिगो अधिकारियों को बैठक के लिए तलब किया है। डीजीसीए ने एयरलाइन से हाल में हुई अभूतपूर्व अव्यवस्थाओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।

इंडिगो ने कहा- 5 दिसंबर तक हालात सामान्य होंगे

वहीं, एयरलाइन ने बुधवार को अपने एक बयान में कहा कि छोटी-मोटी तकनीकी खराबी, सर्दियों के कारण शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में स्लो नेटवर्क और क्रू मेंबर्स के शिफ्ट चार्ट से जुड़े नए नियमों (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) के पालन के कारण हमारे ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ा है। इसका पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं था। कंपनी ने कहा कि अगले 48 घंटों में परिचालन स्थिर हो जाएगा।

आज भारत दौरे पर आ रहे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, शाम 4 बजे पहुंचेंगे दिल्ली, पीएम मोदी के साथ रात्रिभोज

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली आ रहे हैं। पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे। पुतिन की इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं और कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेंगे। दिल्ली पुलिस से लेकर केंद्रीय एजेंसियों तक सभी अलर्ट मोड पर हैं।

रूसी राष्ट्रपति 4 और 5 दिसंबर को भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत और रूस के बीच हर साल शिखर वार्ता होती है। अब तक दोनों देशों के बीच 22 वार्ताएं हो चुकी हैं। पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी मॉस्को गए थे, जबकि पुतिन आखिरी बार 2021 में भारत आए थे।

पीएम मोदी के साथ करेंगे रात्रिभोज

जानकारी के अनुसार, पुतिन का प्लेन आज शाम करीब 6 बजे पालम एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। इसके बाद वह सीधे चाणक्यपुरी स्थित सरदार पटेल मार्ग पर बने आईटीसी मौर्य होटल जाएंगे। फिर आज शाम ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सम्मान में निजी डिनर की मेजबानी करेंगे।

पुतिन का भारत दौरा क्यों है अहम

मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए प्रेसिडेंट पुतिन का भारत दौरा खास तौर पर अहम है। यह सामरिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देश रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, छात्र आदान-प्रदान और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे विषयों पर गहन बातचीत कर सकते हैं।

सुरक्षा चाकचौबंद

पुतिन की भारत यात्रा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी ट्रैफिक मैनेजमेंट से लेकर उन क्षेत्रों की साफ-सफाई समेत सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे, जहां रूसी राष्ट्रपति अपने प्रवास के दौरान जा सकते हैं। तैयार रूट प्लान के अनुसार, आवागमन के मार्ग के लिए व्यापक तैयारी है। यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए प्रतिबंधों के बारे में सलाह भी जारी की जाएगी।

एयरपोर्ट से होटल तक रहेगा ट्रैफिक पर असर

सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पुतिन गुरुवार शाम को पालम एयरपोर्ट उतरेंगे और वहां से सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे। इस दौरान एयरपोर्ट से होटल तक एनएच-8, धौला कुआं और दिल्ली कैंट इलाके में ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। शाम को प्रधानमंत्री आवास पर डिनर के लिए जाते समय सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग, शांति पथ और आस-पास के मार्गों पर भी ट्रैफिक पर असर पड़ेगा।

चार साल बाद भारत आ रहे पुतिन

बता दें कि रूसी राष्ट्रपति चार साल के अंतराल के बाद भारत पहुंचेंगे। वे आखिरी बार भारत 2021 में भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। हालांकि पुतिन का इस बार का भारत दौरा पिछली यात्रा के मुकाबले काफी अहम माना जा रहा है। दिसंबर 2021 में हुआ पुतिन का दौरा मात्र कुछ ही घंटों का था। लेकिन इस बार पुतिन भारत के दो दिन रहने वाले हैं।

2030 तक 1.06 लाख करोड़ होगा भारत का जियोस्पेशियल मार्केट: अमिताभ कांत

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अमरेश द्विवेदी

नई दिल्ली। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयाेजित तीन-दिवसीय (2-4 दिसंबर) जियोस्मार्ट वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2025 की शुरुआत हुई, जिसमें भारत के भू-स्थानिक एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए तीव्र और परिवर्तनकारी बदलावों को रेखांकित किया गया। उद्घाटन वक्तव्य में कहा गया कि भारत की यह यात्रा “तेज़ गति से विकसित हुई है और इसने देश के विकास, संसाधन प्रबंधन और नीति-निर्माण के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित किया है।

कार्यक्रम के पहले दिन (एलएंडटी, एचसीएल, इंडिगो, फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स), पूर्व जी20 शेरपा एवं नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि भारत का ₹50,000 करोड़ का भू-स्थानिक बाजार 2030 तक दोगुना होकर ₹1.06 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है, जबकि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2033 तक 44 बिलियन डाॅलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े भारत की महत्वाकांक्षाओं को और ऊंचा स्थापित करने का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि हमने 2021 में भारी विरोध के बावजूद भू-स्थानिक सेक्टर को खोला। आज संभावनाएँ अपार हैं, लेकिन नवाचार की गति भारत के 30-ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के अनुरूप होनी चाहिए। भू-स्थानिक तकनीकें आधारभूत हैं—बिना इनके ‘विकसित भारत’ संभव नहीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बंद या प्रतिबंधित डेटा नवाचार को धीमा करता है, और भारत को वैश्विक नेताओं—यूके, सिंगापुर और नॉर्डिक देशों—की तरह आगे बढ़ने के लिए ओपन, इंटरऑपरेबल और मशीन-रीडेबल डेटा अपनाना होगा।

उद्योग को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि अगले 12 महीनों में भारत का एक ऐसा वास्तविक शहर विकसित करें जो लाइव भू-स्थानिक और AI ऑपरेटिंग सिस्टम पर चले—कोई पायलट नहीं, कोई डेमो नहीं। एक वास्तविक शहर, वास्तविक सुधारों के साथ। ऐसा शहर वैश्विक मानक स्थापित कर सकता है। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने स्वामित्व कार्यक्रम की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे सरल भू-स्थानिक उपकरणों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक सशक्तिकरण को गति दी है।

उन्होंने बताया कि 3.5 लाख से अधिक गाँवों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, 3 करोड़ से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए गए हैं और सत्यापित भू-स्थानिक मैप्स ने करोड़ों नागरिकों को विवाद समाधान, ऋण सुविधा और संपत्ति अधिकार प्रदान किए हैं। उन्होंने बताया कि यह केवल मैपिंग नहीं है—यह ग्रामीण भारत की आर्थिक और सामाजिक कहानी को नए सिरे से लिख रहा है।” भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने भारत के लैंड स्टैक (Land Stack) की अवधारणा काे प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय बेस मैप, सत्यापित प्लॉट सीमाएँ और एकीकृत भू-खंड डेटा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सटीक भूमि मानचित्र पारदर्शी शासन, प्रभावी योजना और नागरिक विश्वास की रीढ़ हैं।

भू-स्थानिक डेटा प्रमोशन एवं डेवलपमेंट समिति के अध्यक्ष श्रीकांत सत्री ने हाल ही में विमानन क्षेत्र में जीपीएस व्यवधान की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता जोखिमपूर्ण है। भू-स्थानिक केवल तकनीक नहीं है यह भारत की आर्थिक शक्ति और तकनीकी संप्रभुता की नींव है। उन्होंने ऑपरेशन द्रोणगिरि की सफलता साझा की, जिसमें बहु-एजेंसी समन्वय और भू-स्थानिक-स्पेस इंटेलिजेंस ने किसानों को वास्तविक लाभ प्रदान किए। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने भू-स्थानिक डेटा के राष्ट्रीय सांख्यिकी ढाँचे से एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे योजना, निगरानी और सेवा वितरण में सटीकता और प्रभावशीलता बढ़ेगी। एसरी इंडिया (Esri India) के प्रबंध निदेशक अगेन्द्र कुमार ने बताया कि पूरे देश में जीआईएस का उपयोग तेजी से बढ़ा है और आज एसरी इंडिया के प्लेटफॉर्म पर 800 से अधिक प्रामाणिक डेटासेट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक अब राष्ट्रीय विकास का रणनीतिक साधन है—और भारत इसे नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है। डिजिटल एवं आईटी, जीएमआर ग्रुप के समूह अध्यक्ष डॉ. राहुल शांडिल्य ने वेक्सेल (Vexcel) के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्पैटियल डेटा बैंक बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उच्च-रिज़ॉल्यूशन एरियल डेटा से भू-खंड मैपिंग, अधोसंरचना निगरानी, शहरी लचीलापन, पर्यावरणीय अंतर्दृष्टियां सभी में क्रांतिकारी सुधार होंगे। सर्वे ऑफ इंडिया के अतिरिक्त सर्वेयर जनरल एसके सिन्हा ने वन नेशन-वन मैप की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि विकेंद्रीकृत डेटा स्वामित्व और केन्द्रीय एकीकरण मिलकर एक सशक्त भू-स्थानिक ढाँचा तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैप अब स्थिर दस्तावेज नहीं—वे गतिशील परिसंपत्तियाँ हैं जो सटीक शासन और राष्ट्रीय संप्रभुता को मजबूत करती हैं।

इस साल, जियोस्मार्ट इंडिया एक्सपो 2025 के लॉन्च के साथ अनुभव को और बेहतर बना रहे हैं, जो भारत के जियोस्पेशियल और स्पेस टेक्नोलॉजी के विकास को आगे बढ़ा रहा है, जो अब विजन, इनोवेशन और लीडरशिप के एक बड़े मेल में बदल रहा है। यह एडिशन एक आम इंडस्ट्री एक्सपो की सीमाओं को पार करके एक नेशनल मूवमेंट बन गया है। तीन बदलाव आने वाले दिनों में, यह इवेंट स्टेकहोल्डर्स के एक असाधारण क्रॉस-सेक्शन को इकट्ठा करेगा जिनमें केंद्रीय मंत्रालयों, रक्षा एजेंसियों और स्मार्ट सिटी अथॉरिटीज से लेकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्मों, घरेलू स्टार्टअप्स और एकेडमिक संस्थानों तक सभी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले युग की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक साथ आएंगे। बड़े एग्जिबिशन स्पेस, बेमिसाल नेटवर्किंग मौकों और नए भारत के लक्ष्यों को दिखाने वाले जबरदस्त शोकेस के साथ, जियोस्मार्ट इंडिया एक्सपो 2025 नए मापक, संप्रभुता और भविष्य की तैयारी का सबसे बड़ा सेलिब्रेशन है।