यूएनएससी में पाकिस्तान की खूब हुई किरकिरी, पहलगाम अटैक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पड़ा अलग-थलग

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद को पनाह देने को लेकर पाकिस्तान की दुनियाभर में किरकिरी हो रही है। अब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी अलग-थलग पड़ गया। भारत के संभावित सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान कभी संयुक्त राष्ट्र तो कभी दूसरे देशों के दरवाजे पर मत्था मार रहा है लेकिन कहीं से भी पाकिस्तान को मदद नहीं मिल रही। इसी कड़ी में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान की कोशिश नाकाम रही। क्लोज डोर मीटिंग में उसने भारत के खिलाफ किसी प्रस्ताव या बयान को पारित करवाने की कोशिश की, लेकिन कोई सदस्य देश उसके साथ नहीं खड़ा हुआ।

पहलगाम हमले में लश्कर ए तैयबा की भूमिका पर पूछे सवाल

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के आग्रह पर एक बंद कमरे में बैठक की. इस दौरान परिषद के सदस्यों ने इस्लामाबाद के ‘फर्जी’ दावों को मानने से इनकार करते हुए उससे कड़े सवाल पूछे। सूत्रों के मुताबिक, यूएनएससी सदस्यों ने बैठक के दौरान पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा उठाया और पाकिस्तान से पूछा कि क्या इसमें लश्कर-ए-तैयबा शामिल हो सकता है? परिषद ने 22 अप्रैल के हमले की व्यापक रूप से निंदा की और जवाबदेही तय करने की बात कही।

पर्यटकों से धर्म पूछकर निशाना बनाए जानें का मुद्दा उठा

सूत्रों ने आगे कहा कि कुछ सदस्यों ने पर्यटकों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाने का मुद्दा उठाया। कई सदस्यों ने चिंता जताई कि पाकिस्तान का मिसाइल परीक्षण और परमाणु बयानबाजी तनाव बढ़ाने वाले हैं। पाकिस्तान की कोशिश थी कि मामले को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए लेकिन वह इसमें भी नाकाम रहा। उसे भारत के साथ द्विपक्षीय तरीके से मुद्दों को सुलझाने की सलाह दी गई।

बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण को उकसावे वाली कार्रवाई बताई

पाकिस्तान द्वारा हाल ही में बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया गया है। सुरक्षा परिषद के कई सदस्यों ने इस पर भी नाराजगी जताई और इसे पाकिस्तान की उकसावे वाली कार्रवाई बताया। पाकिस्तान की कोशिश थी कि मामले को सुरक्षा परिषद में उठाकर इसका अंतरराष्ट्रीयकरण किया जाए और भारत पर दबाव बनाया जाए कि वह सैन्य कार्रवाई न करे, लेकिन उसकी यह कोशिश धरी की धरी रह गई और सुरक्षा परिषद ने ही पाकिस्तान को सलाह दी कि वे भारत के साथ मिलकर द्विपक्षीय तरीके से मुद्दे को सुलझाए।

भारत के साथ तनाव के बीच पाकिस्तान ने किया एक और मिसाइल का परीक्षण, 3 दिन में दूसरा टेस्ट

#pakistansecondmissile_test

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान डरा हुआ है कि भारत उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई ना कर दे। इस खौफ से पाकिस्तान में बौखलाहट देखी जा रही है। जिसे छिपाने के लिए पड़ोसी देश हाथ पैर मार रहा है।ऐसे में पाकिस्तान एक के बाद एक अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने एक बार फिर आज मिसाइल 'फतेह' का प्रक्षेपण किया है। पिछले तीन दिन में यह पाकिस्तान का दूसरा मिसाइल टेस्ट है।

पाकिस्तान के दावे के अनुसार, उन्होंने सतह से सतह पर मार करने वाली फतह सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। इस मिसाइल की रेंज 120 किलोमीटर है। पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया है कि यह मिसाइल परीक्षण एक्सरसाइज इंडस के तहत किया गया।

पाक सेना ने दी जानकारी

पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर के बयान के मुताबिक पाकिस्तान ने चल रहे अभ्यास इंडस के दौरान 120 किलोमीटर की रेंज वाली फतह सीरीज की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल का कामयाब परीक्षण किया है। इस प्रक्षेपण का मकसद सैनिकों की ऑपरेशनल तत्परता सुनिश्चित करना और मिसाइल की एडवांस नेविगेशन प्रणाली और बढ़ी हुई सटीकता समेत कई प्रमुख तकनीकी स्टैंडर्ड का टेस्ट करना था। इस टेस्ट के दौरान पाकिस्तानी सेना कई सीनियर अधिकारियों के साथ साथ कई पाकिस्तानी नेता, वैज्ञानिक और इंजीनियर मौजूद थे।

पहले किया अब्दाली मिसाइल का परीक्षण

इससे पहले पाकिस्तान ने अपनी अब्दाली मिसाइल का परीक्षण करने का दावा किया था, जिसकी रेंज 450 किलोमीटर है। आपको बता दें कि फतह मिसाइल, पाकिस्तान द्वारा विकसित की गई एक टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है, जिसे हाल के वर्षों में बनाया गया है। यह मिसाइल खासकर शॉर्ट-रेंज, हाई-प्रिसीजन अटैक के लिए डिजाइन की गई है। माना जा रहा है कि फतह-1 को एलओसी या इंटरनेशनल बॉर्डर के पास तैनात भारतीय टुकड़ियों को टारगेट करने के लिए विकसित किया गया है।

पाक के खौफ को दिखा रहा मिसाइल टेस्ट

पाकिस्तान के द्वारा एक के बाद एक मिसाइल का टेस्ट उसके डर को साफ दिखाता है। पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान बुरी तरह से बौखला गया है। बीती 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया। इतना ही नहीं भारत ने चिनाब नदी का पानी भी रोक दिया है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान बुरी तरह से बौखला गया है और उसने युद्ध की धमकी दी है। पाकिस्तान की सेना बीते 11 दिनों से लगातार सीमा पर गोलीबारी कर अपनी खीझ मिटाने की कोशिश कर रही है।

जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, जानें क्या कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर दायर एक जनहित याचिक को खारिज कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि यह पीआईएल सिर्फ प्रचार पाने के लिए की गई है। इसमें जनहित का कोई मामला नहीं है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई को पहलगाम आतंकी हमले की न्यायिक जांच के लिए जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा था कि जज आतंकी मामलों की जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट में 2 जजों की बेंच जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह ने याचिका पर सुनावई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील विशाल तिवारी से कहा, आपने इस तरह की पीआईएल क्यों दायर की है? आपका असली मकसद क्या है? क्या आप इस मुद्दे की संवेदनशीलता को नहीं समझते हैं? मुझे लगता है कि आप इस पीआईएल को दायर करने के लिए कुछ दृष्टांत योग्य उदाहरण को आमंत्रित कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता वकील ने कहा, यह पहली बार है कि जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों को निशाना बनाया गया। इसलिए वह उनकी सुरक्षा के लिए निर्देश मांग रहे हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता एक के बाद एक जनहित याचिका दायर करने में लगे हुए हैं। इसका प्राथमिक मकसद सार्वजनिक कारण में कोई वास्तविक रुचि नहीं रखते हुए प्रचार प्रतीत होता है।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकवादी हमले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। शीर्ष अदालत ने पीआईएल दाखिल करने वालों को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने कहा कि जज आतंकवाद के मामलों की जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं।

पाकिस्तान का साइबर अटैक लगातार जारी, एक बार फिर रक्षा संस्थानों को निशाना बनाने का किया दावा

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तानी हैकर्स भारतीय वेबसाइट्स को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला भारतीय रक्षा वेबसाइट को निशाना बनाने से जुड़ा है।'पाकिस्तान साइबर फोर्स' नाम के एक्स खाते ने भारतीय रक्षा संस्थानों का डाटा हैक करने का दावा किया है।सोमवार को 'पाकिस्तान साइबर फोर्स' नामक खाते ने दावा किया कि उसने भारतीय सैन्य इंजीनियरिंग सेवा और मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (एमपी-आईडीएसए) से जुड़ा संवेदनशील डाटा चुरा लिया है।

एवीएनएल की वेबसाइट पर दिखा पाकिस्तानी झंडा

सूत्रों के मुताबिक, यह दावा किया गया है कि हैकर्स ने रक्षा से जुड़े कर्मियों की निजी जानकारी और लॉगिन विवरण तक पहुंच बना ली है। इसके अलावा, इस समूह ने रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली सरकारी कंपनी आर्मर्ड व्हीकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एवीएनएल) की आधिकारिक वेबसाइट को हैक करने की कोशिश की। वेबसाइट पर पाकिस्तान झंडा और 'अल खालिद' टैंक की तस्वीर से दिखाई दी।

वेबसाइट को फिलहाल ऑफलाइन कर दिया गया

सूत्रों ने बताया कि हैकिंग के प्रयास से होने वाले किसी भी संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट को पूरी तरह से ऑडिट के लिए ऑफलाइन कर दिया गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ किसी भी अतिरिक्त हमले का पता लगाने के लिए साइबर स्पेस की एक्टिव होकर निगरानी कर रहे हैं, खासकर उन हमलों को जो पाकिस्तान से जुड़े खतरे पैदा करने वाले लोगों द्वारा प्रायोजित हो सकते हैं। आगे घुसपैठ की कोशिशों से बचने के लिए सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के उचित उपाय किए जा रहे हैं।

वक्फ मालमे में आज भी नहीं आया फैसला, अगली तारीख 15 मई तय, नए सीजेआई करेंगे सुनवाई

#waqflawhearing

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 15 मई तक के लिए स्थगित कर दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई नए न्यायमूर्ति बीआर गवई के समक्ष निर्धारित की है। बीआर गवई देश के अगले मुख्य न्यायधीश होंगे। ऐसे में याचिका अब उनके सामने ही रखी जाएगी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि इस मामले में विस्तार से सुनवाई की जरूरत है। अब अगले चीफ जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई के सामने मामला लगेगा।

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वक्फ संशोधन कानून पर देश के मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ इस मामले को सुन रही है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ जैसे ही सुनवाई के लिए बैठी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अगले हफ्ते तक सुनवाई टालने के लिए पीठ से आग्रह किया। पीठ उनकी मांग पर राजी हो गई।

केंद्र के हलफनामे पर क्या बोले सीजेआई?

आज की सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना ने कहा कि वह हलफनामे में बहुत गहराई में नहीं गए, लेकिन उसमें वक्फ बाय यूजर के रजिस्ट्रेशन को लेकर कुछ पॉइंट उठाए गए हैं और कुछ विवादित आंकड़े भी दिए गए हैं, जिन पर विचार करने की जरूरत है कि कुछ ऐसे पहलू हैं, जिनसे आप (केंद्र) निपट चुके हैं, लेकिन उस पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि रजिस्ट्रेशन और कुछ आंकड़ों के आधार पर मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है। अदालत ने कहा कि चूंकि सीजेआई खन्ना के रिटायरमेंट के दिन नजदीक हैं, वो अंतिम चरण में भी कोई निर्णय या आदेश सुरक्षित नहीं रखना चाहते। ऐसे में, अब इस मामले को अगले गुरूवार को देश के सीजेआई होने जा रहे जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ सुनेगी।

केस दूसरी पीठ के समक्ष रखा

बता दें कि सीजेआई संजीव खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और इसी को देखते हुए उन्होंने कहा कि वे कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित नहीं रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने ये केस दूसरी पीठ के समक्ष रखा है। पिछली सुनवाई 17 अप्रैल को हुई थी, जिसमें कोर्ट ने सरकार से कहा था कि पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ संपत्तियों, जिनमें वक्फ बाय यूजर भी शामिल है, को अगली सुनवाई की तारीख तक न तो छेड़ा जाएगा और न ही गैर अधिसूचित किया जाएगा, साथ ही वक्फ बोर्ड में कोई नई नियुक्ति न हो।

वक्फ कानून के बारे में

वक्फ संपत्तियों को रेगुलेट और मैनेज करने के लिए सरकार ने 1995 के वक्फ कानून में कुछ संशोधन किया था। जिसको धार्मिक और मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में विपक्षी पार्टियों और मुस्लिम संगठनों ने याचिका दायर किया है। इस कानून को लोकसभा से तीन अप्रैल को जबकि राज्यसभा से चार अप्रैल को पारित कराया गया। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की सहमति मिल जाने के बाद संशोधन लागू हो गया। इसके बाद कई राजनीतिक दल जैसे डीएमके, वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम, वामपंथी दल समेत कई एनजीओ, मुस्लिम निकाय और अन्य ने अधिनियम की वैधता को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ रूस, पुतिन ने पीएम मोदी से की फोन पर बात

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भारत के सबसे करीबी दोस्त रूस ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के समर्थन का ऐलान किया है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन किया। पुतिन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और हमले में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इससे पहले भी पुतिन ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी दी। रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को फोन किया। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने निर्दोष लोगों की जान जाने पर गहरा दुख जताया। पुतिन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को पूरा समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस घिनौने हमले के अपराधियों और उनके समर्थकों को न्याय के कटघरे में लाना ही होगा।

प्रधानमंत्री ने विजय दिवस की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति पुतिन को शुभकामनाएं दीं और उन्हें इस वर्ष के अंत में भारत में आयोजित होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। पुतिन का यह फोन ऐसे समय में आया है जब भारत में आतंकी हमले की वजह से तनाव है। रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया है। इस मुश्किल घड़ी में पुतिन का समर्थन भारत के लिए बहुत मायने रखता है।

इससे पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई थी। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी जारी है। इस बीच रूसी विदेश मंत्री ने दोनों देशों से संयम बरतने और किसी भी तरह की बढ़त को रोकने की अपील की थी।

कराची पहुंचा तुर्की का युद्धपोत, पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के लिए उमड़ रहा “प्यार”

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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जंग के से हालात पैदा हो गए हैं। पाक को दिन रात भारत की तरफ से जवाबी कार्रवाई का डर सता रहा है। इस बीच बीच तुर्की का प्रेम पाकिस्तान के लिए उमड़ रहा है। पाकिस्तान की एक अपील पर तुर्की का नौसैनिक जहाज टीसीजी बुयुकाडा कराची पहुंच गया है। हालांकि तुर्की इसे भारत के साथ तनाव के बीच उठाया गया कदम नहीं बता रहा है, लेकिन पाकिस्तान ऐसे ही संदेश दे रहा है।

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पाकिस्तानी ने बताया- तुर्की ने क्यों भेजा युद्धपोत?

पाकिस्तानी नौसेना के आधिकारिक बयान में टीसीजी बुयुकाडा की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना है। भले ही पाकिस्तान की तरफ से दोनों देशों की सहयोग की बात की जा रही है, लेकिन जाहिर तौर पर वो भारत को संदेश देना चाहता है कि तुर्की उसके साथ है। और तुर्की भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहा है।।

तुर्की कोई साजिश तो नहीं रच रहा?

तुर्की का युद्धपोत टीसीजी बुयुकडा ऐसे समय में कराची पहुंचा, जब पहलगाम हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी है। पिछले हफ्ते वायुसेना के उच्च अधिकारियों को भेजने के बाद अब तुर्की ने पाकिस्तान में अपने युद्धपोत को भेजा है। अंकारा से तुर्की वायुसेना के सी-130 विमान के कराची में उतरने के कुछ दिनों बाद, तुर्की नौसेना का एक युद्धपोत रविवार को कराची बंदरगाह पर पहुंचा। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक जहाज का आना तुर्की के राजदूत डॉ. इरफान नेजीरोग्लू द्वारा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर ‘पाकिस्तान के साथ अंकारा की एकजुटता’ व्यक्त करने के एक दिन बाद हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तुर्की कोई साजिश तो नहीं रच रहा है। इससे पहले तुर्की ने पाकिस्तान की अगोस्टा 90B कैटेगरी की पनडुब्बियों को अपडेट करने में भी सहायता किया और ड्रोन समेत सैन्य उपकरण दिए।

क्या है तुर्की के युद्धपोत की खासियत?

टीसीजी बुयुकाडा तुर्की नौसेना का पनडुब्बी रोधी युद्ध कोरवेट की एडा-क्लास सिरीज का दूसरा जहाज है। इसे 2013 में कमीशन किया गया था। इन जहाजों को सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियानों और गश्ती मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है। जहाज एडवांस रडार सिस्टम, 76 मिमी नौसैनिक बंदूक, जहाज एंटी मिसाइलों और टारपीडो लांचर से सुसज्जित है। इसमें समुद्री विमानन संचालन का समर्थन करने के लिए एक हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड और हैंगर भी है। यह कार्वेट खुले समुद्र में काम कर सकता है और इसकी रेंज विस्तारित क्षेत्रीय मिशनों के लिए काफी है।

पहलगाम अटैक के बाद भारत-पाक में बढ़ा तनाव

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के गुनहगारों को सजा देने की कसम खा रखी है और आशंका है कि भारत, पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। भारत सरकार ने सेना को फ्री हैंड दे दिया है और तय सेना को करना है कि पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए उसकी स्ट्रैटजी क्या होगी। तब तक के लिए भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता सस्पेंड करते हुए पाकिस्तानी जहाजों को भारतीय बंदरगाहों में प्रवेश करने से रोक दिया, पाकिस्तानी एयरलाइंस के भारतीय एयरस्पेस में दाखिल होने पर पाबंदी लगा दी गई है। पाकिस्तान ने भी ऐसा ही किया है।

कनाडा में अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे खालिस्तानी, निकाली हिंदू विरोधी परेड, भारतीयों को वापस भेजने की मांग

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कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के सत्ता से हटने के बाद मार्क कार्नी प्रधानमंत्री बने थे। तब उम्मीद जताई जा रही थी कि वह खालिस्तानियों पर लगाम लगाएंगे और भारत के साथ रिश्ते अच्छे होंगे। हालांकि, ऐसा होता तो नहीं दिख रहा है। रविवार को एक बार फिर कनाडा में खालिस्तानियों ने हिंदू-विरोधी रैली निकाली।कनाडा के टोरंटो में माल्टन गुरुद्वारे से यह रैली निकाली। इस रैली में कई खालिस्तान समर्थकों ने हिस्सा लिया। इस रैली के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं।

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कनाडा के एक पत्रकार डेनियल बोर्डमैन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में खालिस्तानी कट्टरपंथी टोरंटो के एक गुरुद्वारे में हिंदू विरोधी परेड निकालते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान खालिस्तानियों ने कनाडा से सभी हिंदुओं को निर्वासित करने की मांग भी की।

कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने रविवार को कहा कि जिहादी हमारे सड़कों पर उत्पात मचा रहे हैं, यहूदी समुदाय को धमका रहे हैं और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन खालिस्तानी समाज के लिए सबसे खतरनाक खतरा बन गए हैं। क्या कार्नी का कनाडा ट्रूडो से अलग होगा? उन्होंने शॉन बिंडा नामक एक एक्स यूजर के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि खालिस्तानी आतंकवादी समूह ने ‘हिंदू विरोधी नफरत’ के कारण यह विरोध प्रदर्शन किया।

नई सरकार के बाद भी हालात जस के तस

यह हिंदू विरोधी परेड टोरंटो के माल्टन गुरुद्वारे में निकाली गई। यह परेड ऐसे समय निकाली गई, जब हाल ही में कनाडा में चुनाव हुए हैं। कनाडा में चुनाव के बाद एक बार फिर लिबरल पार्टी को जीत हासिल हुई है और मार्क कार्नी ने सत्ता संभाली है। हालांकि, इस बार के चुनाव में देश में प्रमुख सिख नेता और खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह की करारी हार हुई और साथ ही उनकी पार्टी ने भी काफी खराब प्रदर्शन किया। चुनाव के नतीजों को देखने के बाद लगा कि अब देश में खालिस्तानी गतिविधियों को भी झटका लगेगा। लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।

कनाडा में रह रहे हिंदुओं के खिलाफ रैली

कनाडा में चुनाव के तुरंत बाद फिर खालिस्तान समर्थकों ने हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला। इस विरोध परेड का वीडियो सामने आया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के पिंजरे में बंद पुतले भी दिखाए गए। इस रैली में खालिस्तानियों ने कनाडा में रह रहे करीब 8 लाख हिंदुओं को देश से निकालने की मांग की। यह रैली भारत सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि कनाडा में रह रहे हिंदुओं के खिलाफ निकाली गई।

क्या कार्नी खालिस्तानियों के खिलाफ लेंगे एक्शन?

कनाडा में जब जस्टिन ट्रूडो की सरकार थी, तब खालिस्तानियों को काफी संरक्षण मिला। इससे पहले कनाडा में कई मदिरों को क्षतिग्रस्त करने और मंदिर की दीवारों पर खालिस्तानी नारे लिखने की कई घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि अभी तक इन घटनाओं के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। अब मार्क कार्नी देश के पीएम हैं। ऐसे में उनकी सरकार कनाडा में खालिस्तानियों के खिलाफ कोई एक्शन लेंगे या नहीं, यह देखना होगा।

कराची और लाहौर में बनाएंगे अगला गुरुकुल', योग गुरु बाबा रामदेव का बयान

#baba_ramdev_claims_next_gurukul_will_be_in_karachi_and_lahore

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के हालात बने हुए हैं। आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को भारत की तरफ से हमले का डर सता रहा है। इसके बीच योग गुरु बाबा रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में रामदेव ने पाकिस्तान को असफल राष्ट्र बताते हुए निशाना साधा है। योग गुरु बाबा रामदेव ने पाकिस्तान की ताकत को लेकर कहा कि पाकिस्तान में इतनी ताकत भी नहीं है कि वो भारत के सामने युद्ध में 4 दिन भी खड़ा हो जाए। यही नहीं, रामदेव ने कहा है कि वह अगला गुरुकुल लाहौर और कराची में बनाएंगे।

बाबा रामदेव से दोनों देशों के मौजूदा हालातों पर सवाल किया गया था, जिस पर उन्होंने कहा, पाकिस्तान तो नापाक देश वैसे ही है, वो खुद ही टूटने जा रहा है। उधर, पख्तून उसको तोड़ने में लगे हैं। बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। पीओके में हालात और खराब हैं तो वो भारत से लड़ने का सामर्थ्य कहां रखता है। रामदेव ने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ चान दिन भी खड़ा नहीं हो सकता है।

बाबा रामदेव ने आगे कहा, मुझे तो लगता है कि हमें अगला गुरुकुल, कराची और लाहौर में बनाना पड़ेगा और वहीं से हमारे गुरुकुल की संस्कृति प्रारंभ हुई थी। वहीं, से ये अभियान अब वापस चलेगा तो तीन गुरुकुल पूजीय आचार्य जी यहां बनाएंगे और हम अगला गुरुकुल कराची और लाहौर में बनाएंगे।

अब गैर-अमेरिकी फिल्मों पर चला ट्रंप का “चाबुक”, लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ

#donaldtrumpannounces100tariffformoviesproducedoutside

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी टैरिफ को लेकर दुनियाभर में हाहाकार मचा है। तमाम देश ट्रंप के इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका से बाहर बनने वाली फिल्मों पर 100% का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।उन्होंने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका में फिल्म इंडस्ट्री तेजी से खत्म हो रही है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि हम फिर से अमेरिका में बनी फिल्में चाहते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर दी। अपने पोस्ट में, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को इस तरह के टैरिफ को तुरंत शुरू करने के लिए अधिकृत किया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, यह अन्य देशों द्वारा एक ठोस प्रयास है और इसलिए, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। बाकी सब चीज़ों के अलावा, यह मैसेंजिंग और प्रोपेगेंडा भी है!

अमेरिका में फिल्म इंडस्ट्री बहुत तेजी से मर रही-ट्रंप

ट्रंप ने लिखा अमेरिका में फिल्म इंडस्ट्री बहुत तेजी से मर रही है। अन्य देश हमारे फिल्म प्रोड्यूसर्स और स्टूडियो को अमेरिका से दूर खींचने के लिए हर तरह का प्रोत्साहन दे रहे हैं। हॉलीवुड और यूएसए के कई अन्य क्षेत्र तबाह हो रहे हैं। यह अन्य राष्ट्रों का एक ठोस प्रयास है और इसलिए, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। यह, बाकी सब चीजों के अलावा, मैसेंजिंग और प्रोपेगैंडा है! इसलिए, मैं डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि को हमारे देश में आने वाली किसी भी और विदेशी भूमि में निर्मित सभी फिल्मों पर 100% टैरिफ लगाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के लिए अधिकृत कर रहा हूं। हम दोबारा अमेरिका में बनी फिल्में चाहते हैं!

हम फिर से अमेरिका में बनी फिल्में चाहते हैं-ट्रंप

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में आगे 100 प्रतिशत टैरिफ का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, मैं वाणिज्य विभाग और संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि को तुरंत हमारे देश में आने वाली सभी फिल्मों पर 100% टैरिफ लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिकृत कर रहा हूं, जो विदेशी भूमि में बनाई गई हैं। हम फिर से अमेरिका में बनी फिल्में चाहते हैं!

ट्रंप ने दो अप्रैल को लगाया था जवाबी टैरिफ

बता दें कि ट्रंप ने इससे पहले 2 अप्रैल को भारत और चीन सहित दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाया था, जिसके बाद से दुनिया भर की स्टॉक मार्केट पर भी इसका असर देखने को मिला था। हालांकि, इसके बाद नौ अप्रैल को ट्रंप चीन और हॉन्गकॉन्ग को छोड़कर नौ जुलाई तक टैरिफ को 90 दिनों के लिए निलंबित करने की घोषणा की थी। क्योंकि लगभग 75 देशों ने व्यापार सौदों के लिए अमेरिका से संपर्क किया था। हालांकि इन देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ अभी भी प्रभावी है। इसके अलावा स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो कलपुर्जों पर 25 प्रतिशत शुल्क भी लागू है। ट्रंप के टैरिफ से सबसे ज्यादा चीन प्रभावित हुआ है।