सद्मार्ग के लिए बल नहीं बुद्धि बल का उपयोग करें: आचार्य विष्णुधर द्विवेदी
मीरजापुर। सीटी विकास खंड क्षेत्र के लोंहदी महावीर स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सातवें दिन बुधवार को
आचार्य विष्णुधर द्विवेदी ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं
जरासंध युद्ध का वर्णन करते हुए कहा कि ईश्वर से कुछ मांगने से पहले उसके सद्कर्मों के बारे में भी जानना चाहिए। उन्होंने कहा मांगना बड़ाई नहीं संभालना बड़ाई होती है इसलिए प्रत्येक प्राणी को नापतोल कर बोलना चाहिए ताकि आपके शब्दों से किसी का अंतरमन आहत न होने पाएं। लोंहदी महावीर मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रवण पान कराते हुए उपस्थित नर नारी को संबोधित करते हुए कहा महाभारत में 27 दिन तक जरासंध और भीम का युद्ध चला था।
जरासंध ने देवताओं से वरदान में युद्ध का वरदान मांग लिया था। वह दस हजार हाथियों के बल के बराबर बलसाली था, लेकिन उसका हर्ष क्या हुआ। ठीक इसी प्रकार प्रत्येक प्राणी को कुछ भी करने ठानने से पहले 100 बार सोचना चाहिए। इस दौरान उन्होंने उपस्थित भक्तों को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से हमें बहुत कुछ मिलता है। प्रभु श्री कृष्ण की लीला मात्र लीला ही नहीं है बल्कि यह जीवन दर्शन भी है। इस दौरान आचार्य महेंद्र देव पांडेय, विद्यापति त्रिपाठी, अंकुश मिश्रा, राजू, सर्वेश कुमार त्रिवेदी, आयोजक श्रीमती वीना देवी पत्नी वीरेंद्र कुमार उपाध्याय इत्यादि व्यवस्था को संचालित करने में जुटे हुए थे। मिर्ज़ापुर नगर के विख्यात लोहंदी महावीर हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का भागवत कथा समापन के बाद 13 फरवरी को विशाल हवन यज्ञ के पश्चात भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
जानकारी देते हुए महेंद्र देव पांडे ने बताया कि श्री कृष्ण लीला से जुड़ी हुई भव्य झांकी के साथ गुरुवार को समापन किया जाएगा। इस दौरान आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में नर-नारी कथा श्रवण पान के लिए उमड़े हुए थें।
Feb 14 2025, 16:37