बंगाल सरकार ने आरजी कर बलात्कार-हत्या के दोषी के लिए मौत की सजा की मांग की
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पश्चिम बंगाल सरकार ने संजय रॉय के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है, जिसे आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक पोस्ट-ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सरकार का तर्क था कि यह अपराध बहुत जघन्य और दुर्लभतम श्रेणी का था, और इसलिए मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।

रॉय को सियालदह अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 66 (बलात्कार), 64 (हत्या) और 103 (1) (हत्या) के तहत सजा सुनाई गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें फैसले से निराशा हुई क्योंकि राज्य सरकार ने शुरुआत से ही मृत्युदंड की मांग की थी। वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए तैयार थीं। ममता बनर्जी ने अपराध को दुर्लभतम अपराध बताया और यह भी कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में सख्त कदम उठाने के लिए एक विधेयक पारित किया है, जिसमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि रॉय अकेले अपराधी नहीं थे और उनकी 31 वर्षीय बेटी की हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें प्रभावशाली लोग शामिल थे। इस दौरान विपक्षी दलों ने भी इस मामले में सीबीआई की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। सीबीआई ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल और ताला पुलिस स्टेशन के पूर्व प्रभारी के खिलाफ आरोप तय नहीं किए थे, जिनका नाम इस मामले में आया था।

भाजपा ने इसे एक संस्थागत अपराध करार दिया और कहा कि ममता बनर्जी इसे राजनीतिक रूप से भुना रही हैं। इस पूरे मामले पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है, और उच्च न्यायालय में होने वाली अपील के परिणाम का सभी को इंतजार है।
शपथ लेने के बाद चीन पर नरम क्यों हुए ट्रंप, ड्रैगन के साथ नहीं टकराना चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?
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डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर वापसी हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति पद की शपथ ली। ट्रंप ने शपथ लेने के बाद भाषण दिया और उसमें उन्होंने बताया कि उनकी दिशा क्या रहेगी। उद्घाटन भाषण के दौरान वैसे तो डोनाल्ड ट्रंप काफी आक्रामक थे, लेकिन चीन को लेकर उनकी स्थिति काफी नरम थी। उन्होंने अपने पूरे भाषण में सिर्फ एक बार ही चीन का नाम लिया, वो भी सिर्फ पनामा नहर को लेकर, और उनका भाषण 'अमेरिका फर्स्ट' पर टिका था। उन्होंने टैरिफ का जिक्र किया और विदेशी देशों पर टैरिफ लगाने के लिए 'एक्सटर्नल रेवेन्यू सर्विस' के गठन की घोषणा की, लेकिन उसमें भी चीन का कहीं जिक्र नहीं था।

चीन और अमेरिका एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं। ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान चीन पर कड़े हमले भी किए थे, हालांकि अब उनका रूख नरम दिख रहा है। जाहिर तौर पर ये जताता है, कि ट्रंप चीन को लेकर स्थिति का आकलन करना चाहते हैं और कम से कम अपने दूसरे कार्यकाल की शुरूआत चीन से टकराव करते हुए शुरू नहीं करना चाहते।

ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति की शपथ लेने के बाद चीन दौरे पर जाने की योजना बना रहे हैं। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा है कि वह शपथ लेने के बाद चीन जाना चाहते हैं। अखबार के मुताबिक ट्रंप ने कहा है कि वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संबंध गहरा करना चाहते हैं। इससे पहले ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद चीन के ख़िलाफ टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।
डब्ल्यूएसजे ने लिखा है कि ट्रंप कमान संभालने के बाद 100 दिनों के भीतर ही चीन जाना चाहते हैं। नवंबर में चुनाव जीतने के बाद ट्रंप ने शु्क्रवार को पहली बार शी जिनपिंग से बात की थी। ट्रंप ने शी जिनपिंग से बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश साथ मिलकर कई समस्याओं का समाधान खोज सकते हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूद अविश्वास के माहौल को बदलना है।

समारिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि चीन के तानाशाह के प्रति ट्रंप की बढ़ती उदारता का असर अमेरिका से भारत और जापान के संबंधों पर पड़ेगा। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में चीन के प्रति नरमी दिखाई है। ट्रंप ने टिक टॉक पर प्रतिबंध को भी टाल दिया है।
महाकुंभ में आएंगे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, जानें कौन कब लगाएगा आस्था की डुबकी
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भारच में लगने वाला महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजत महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। महाकुंभ में लगभग 45 करोड़ भक्तों के शामिल लेने की उम्मीद है। देश और दुनिया से लोग महाकुंभ में स्नान करने आ रहे हैं। महाकुंभ में तमाम बड़े नेता और हस्तियां पहुंच रही हैं। इस बीच खबर आ रही है कि महाकुंभ में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी जाएंगे। महाकुंभ में संगम स्नान के लिए PM मोदी 5 फरवरी को आएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 10 फरवरी तो उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 1 फरवरी को आएंगे। इससे पहले 27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह संगम में स्नान करेंगे।

प्रयागराज महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी 5 फरवरी को पहुंचेंगे। उसी दिन दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए वोट भी डाले जाएंगे। इसलिए, प्रयाग से 'इंद्रप्रस्थ' साधने पर भी नजर होगी। पीएम पिछले महीने 13 दिसंबर को भी प्रयाग आए थे और महाकुंभ की तैयारियों और प्रयागराज के विकास से जुड़ी 5000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण किया था। इसके बाद भी मोदी महाकुंभ के प्रमुख आयोजनों और स्नान के दिन सक्रिय रहे हैं।

पीएम मोदी के अलावा देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी महाकुंभ की साक्षी बनेंगी। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति 10 फरवरी को प्रयागराज पहुंचेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी महाकुंभ पहुंचकर संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। धनखड़ एक फरवरी को पवित्र स्नान करेंगे।

इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह 27 जनवरी को महाकुंभ का दौरा करेंगे। शाह के कार्यक्रम का शेड्यूल जारी हो चुका है। वह संगम स्नान, गंगा पूजा के बाद अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे।

इन संभावित दौरों को देखते हुए प्रशासनिक अफसरों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी नए तरीके से रिव्यू में जुट गई हैं। गंगा जल की रोज जांच कराई जा रही है। अब जांच टीम में एटीएस भी शामिल हो गए हैं।
ट्रंप के आते ही अमेरिका में अवैध प्रवासियों की एंट्री बंद, 7.25 लाख भारतीयों की बढ़ी टेंशन
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अमेरिका आने वाले दिनों में अवैध प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। ट्रंप ने अमेरिका की सत्ता संभालते ही अवैध रूप से अमेरिका में रहने वालों के खिलाफ एक्शन का ऐलान कर दिया है। उनकी घोषणा का असर अमेरिका में रहने वाले भारतीयों पर पड़ेगा। अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे 7.25 लाख भारतीयों के भविष्य पर भी तलवार लटक गई है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में अवैध अप्रवासियों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी भारतीयों की है। जानते हैं कि अब अमेरिका में अवैध प्रवासियों का भविष्य क्या होगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतने के बाद से ही अमेरिका में अवैध प्रवासियों को घुसपैठिया बताते रहे हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद ही अमेरिकी सीनेट ने अवैध अप्रवास को लेकर बिल पास किया। इस विधेयक को 64-35 से पारित किया गया। इस विधेयक को लैकेन रिले एक्ट नाम दिया गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में अवैध प्रवासियों की एंट्री बैन करने और अवैध प्रवासियों को पकड़ कर बॉर्डर पर छोड़ने की पॉलिसी खत्म करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, बाइडेन प्रशासन ने हमारे देश में अवैध रूप से एंट्री करने वाले खतरनाक अपराधियों को शरण दी है और उनकी हिफाजत की है।

*मेक्सिको बॉर्डर पर इमरजेंसी का ऐलान*
ट्रंप ने अमेरिका-मेक्सिको के बॉर्डर (दक्षिणी बॉर्डर) पर इमरजेंसी लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यहां से होने वाली सभी अवैध एंट्री पर रोक लगाई जाएगी। सरकार अपराध करने वाले विदेशियों को उनके देश वापस भेज देगी।
यूएस-मेक्सिको बॉर्डर से आने वाले अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा मुद्दा है। ट्रंप का कहना है कि यहां से अवैध प्रवासी और अपराधी अमेरिका में एंट्री करते हैं। ट्रंप इस बॉर्डर पर दीवार बनाने की बात भी कह चुके हैं।

*अमेरिका में दुनिया के सबसे ज्यादा अप्रवासी*
प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक अमेरिका में दुनिया के सबसे ज्यादा अप्रवासी हैं। दुनिया के कुल 20% अप्रवासी अमेरिका में ही रहते हैं। 2023 तक यहां रहने वाले अप्रवासियों की कुल संख्या 4.78 करोड़ थी। ट्रम्प का मानना है कि दूसरे देशों से लोग अवैध तरीके से अमेरिका में घुसकर अपराध करते हैं।

*अवैध ढंग से रहने वालों में तीसरे सबसे अधिक संख्या में भारतीय*
एक रिसर्च के अनुसार, अमेरिका में अवैध ढंग से सबसे अधिक मैक्सिको के लोग रह रहे हैं। इसके बाद दूसरा नंबर अल सल्वाडोर के नागरिकों का है। तीसरे नंबर पर भारतीय हैं जो अमेरिका में अवैध ढंग से रह रहे हैं।

*तीन साल में 90 हजार से अधिक भारतीय पकड़े गए*
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले तीन सालों में 90 हजार से अधिक भारतीयों को बॉर्डर एरिया पर अवैध ढंग से पार करते हुए पकड़ा है। आए दिन अमेरिकी बॉर्डर्स पर भारतीय अवैध ढंग से एंट्री के प्रयास में पकड़े जाते हैं। हालांकि, काफी संख्या में इन अवैध प्रवासियों को अमेरिका चार्टर्ड विमानों से वापस भी भेज चुका है।
आरजी कर मामले में हाईकोर्ट पहुंची ममता सरकार, संजय रॉय के लिए मांगी मौत की सजा
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पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले में सियालदह कोर्ट की विशेष अदालत की सजा के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। ट्रायल कोर्ट ने मामले के दोषी संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने जस्टिस देबांगशु बसाक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का रुख कर संजय रॉय के लिए मौत की सजा की मांग की है। मामले को दायर करने की अनुमति दे दी गई है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को सियालदह कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति दे दी, जिसमें आरजी कर अस्पताल के डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या मामले में संजय रॉय को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने मामले में एकमात्र दोषी रॉय को मृत्युदंड देने की मांग करने के लिए न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में अपील दायर करने का अनुरोध किया। राज्य सरकार ने सियालदह में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास के आदेश को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट से अपील दायर करने की अनुमति मांगी थी।

*सियालदेह कोर्ट ने क्यों नहीं दी मौत की सजा?*
सजा के ऐलान से पहले हुई सुनवाई में अतिरिक्त जिला एव सत्र जज अनिर्बान दास ने इस पूरे मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' नहीं माना। यानी यह एक दूर्लभतम अपराध नहीं था। 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर अपराध' में उन मामलों को रखा जाता है जहां बेहद क्रुरता और जघन्यता के साथ अपराध को अंजाम दिया जाता है। आरजी कर मामले में जज को दोषी में इस तरह की प्रवृत्ति नहीं दिखाई दी।
जज अनिर्बान दास ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ ही उसे 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया। इसके साथ ही जज ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के परिवार को 17 लाख रुपए का हर्जाना दे।

*संजय रॉय ने खुद को बताया था निर्दोष*
संजय रॉय को बीते शनिवार ही दोषी मान लिया गया था। सोमवार को केवल सजा का ऐलान बाकी था। इस दौरान सुनवाई के वक्त संजय ने एक बार फिर से खुद को बेगुनाह बताया। सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने जज अनिर्बान दास से संजय को इस अपराध के लिए अधिकतम सजा देने की गुहार लगाई। उन्होंने इसके पीछे यह दलील दी कि सजा ऐसी होनी चाहिए कि लोगों का भरोसा हमारे समाज में बना रहे। उधर, संजय के वकील ने मृत्युदंड के खिलाफ तर्क दिया। उन्होंने कहा कि अभियोजक को यह साबित करना चाहिए कि संजय सुधार के लायक नहीं है और उसे समाज से पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने रामायण को लेकर ऐसा क्या कह दिया, मच गया बवाल, जानें बीजेपी ने क्या कहा
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#delhi_bjp_attack_arvind_kejriwal_statement_over_ravana
दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान जारी है। इस बीच रामायण का मुद्दा गर्म हो गया है। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने रामायण के एक प्रसंग का जिक्र किया। जिसके बाद बीजेपी और आप आमने सामने हैं। सोमवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राम और रावण को लेकर एक टिप्पणी की, जिस पर बीजेपी ने सवाल उठाया है। बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल सिर्फ चुनावी हिंदू हैं, इसलिए उन्हें राम और रावण की कहानी के बारे में भी जानकारी नहीं है।

दिल्ली के पूर्व सीएम ने एक चुनावी सभा में कहा कि एक दिन रामचंद्र खाने का इंतजाम करने जंगल में गए। माता सीता को अपनी झोपड़ी में छोड़ गए। उन्होंने लक्ष्मण को कहा कि तू सीता मईया की रक्षा करेगा। इतने में रावण आया सोने का हिरन बन कर आया। सीता मईया ने लक्ष्मण को कहा कि मुझे यह हिरण चाहिए। लक्ष्मण ने श्रीराम की बात का हवाला देकर जाने से मना किया। भगवान राम कह कर गए हैं कि मुझे आपकी रक्षा करनी है। सीता ने कहा नहीं मैं तेरे को आदेश देती हूं कि तू जा और हिरण को पकड़ कर ला। लक्ष्मण के पास चारा नहीं था। लक्ष्मण चला गया और रावण अपना वेष बदल कर सीता मईया का हरण कर चला गया।

आम आदमी पार्टी की बागी सांसद स्वाति मालीवाल ने इसका वीडियो शेयर किया है। मालीवाल ने वीडियो शेयर कर अरविंद केजरीवाल को चुनावी हिंदू करार दिया। मालीवाल का कहना है कि अरविंद ने जो तथ्य बताए, वो गलत है।

अरविंद केजरीवाल के वायरल वीडियो पर भारतीय जनता पार्टी ने निशाना साधा है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि ये चुनावी हिंदू हैं। इन्हें ये भी पता नहीं है कि सोने का हिरन बनकर रावण नहीं मारीच गया था। इन्होंने दिल्ली के स्कूलों का हाल बुरा कर दिया है। न इनकी खुद की शिक्षा है न ही ये दिल्ली वालों को शिक्षा दे पाए।
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कहना है कि जिस प्रकार से रामायण की गलत व्याख्या और हमारे धर्म का अपमान करने की कोशिश अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई ये पहली बार नहीं है। इन्होंने कहा है कि राक्षस सोने का हिरण बन कर आया था। ये अभी तक शीशमहल के गोल्ड प्लेटेड सोने से बाहर नहीं आए हैं। आज हम यहां क्षमा मांगने आए हैं कि रामायण की गलत व्याख्या हुई है और हम आज उपवास करेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने रामायण को लेकर ऐसा क्या कह दिया, मच गया बवाल, जानें बीजेपी ने क्या कहा
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दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान जारी है। इस बीच रामायण का मुद्दा गर्म हो गया है। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने रामायण के एक प्रसंग का जिक्र किया। जिसके बाद बीजेपी और आप आमने सामने हैं। सोमवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राम और रावण को लेकर एक टिप्पणी की, जिस पर बीजेपी ने सवाल उठाया है। बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल सिर्फ चुनावी हिंदू हैं, इसलिए उन्हें राम और रावण की कहानी के बारे में भी जानकारी नहीं है।

दिल्ली के पूर्व सीएम ने एक चुनावी सभा में कहा कि एक दिन रामचंद्र खाने का इंतजाम करने जंगल में गए। माता सीता को अपनी झोपड़ी में छोड़ गए। उन्होंने लक्ष्मण को कहा कि तू सीता मईया की रक्षा करेगा। इतने में रावण आया सोने का हिरन बन कर आया। सीता मईया ने लक्ष्मण को कहा कि मुझे यह हिरण चाहिए। लक्ष्मण ने श्रीराम की बात का हवाला देकर जाने से मना किया। भगवान राम कह कर गए हैं कि मुझे आपकी रक्षा करनी है। सीता ने कहा नहीं मैं तेरे को आदेश देती हूं कि तू जा और हिरण को पकड़ कर ला। लक्ष्मण के पास चारा नहीं था। लक्ष्मण चला गया और रावण अपना वेष बदल कर सीता मईया का हरण कर चला गया।

आम आदमी पार्टी की बागी सांसद स्वाति मालीवाल ने इसका वीडियो शेयर किया है। मालीवाल ने वीडियो शेयर कर अरविंद केजरीवाल को चुनावी हिंदू करार दिया। मालीवाल का कहना है कि अरविंद ने जो तथ्य बताए, वो गलत है।

अरविंद केजरीवाल के वायरल वीडियो पर भारतीय जनता पार्टी ने निशाना साधा है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि ये चुनावी हिंदू हैं। इन्हें ये भी पता नहीं है कि सोने का हिरन बनकर रावण नहीं मारीच गया था। इन्होंने दिल्ली के स्कूलों का हाल बुरा कर दिया है। न इनकी खुद की शिक्षा है न ही ये दिल्ली वालों को शिक्षा दे पाए।
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कहना है कि जिस प्रकार से रामायण की गलत व्याख्या और हमारे धर्म का अपमान करने की कोशिश अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई ये पहली बार नहीं है। इन्होंने कहा है कि राक्षस सोने का हिरण बन कर आया था। ये अभी तक शीशमहल के गोल्ड प्लेटेड सोने से बाहर नहीं आए हैं। आज हम यहां क्षमा मांगने आए हैं कि रामायण की गलत व्याख्या हुई है और हम आज उपवास करेंगे।
दुनिया में भारत का बढ़ता कदः ट्रंप के शपथ ग्रहण में दिखी झलक, पहली पंक्ति में दिखे जयशंकर
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* भारत एक प्राचीन और समृद्ध संस्कृति वाला देश है। यह एक विशाल जनसंख्या वाला देश भी है, जो इसे विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक बनाता है। हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति और वैश्विक प्रभाव में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी है। नतीजतन, भारत विश्व पटल पर एक बढ़ती शक्ति के रूप में उभर रहा है। दुनियाभर के देशों में भारत के बढ़ते धमक की एक झलक अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में भी दिखी।इस दौरान एक बात ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा और वो ये था कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को पहली पंक्ति में ट्रंप के मंच के ठीक सामने बिठाया गया था। यह वैश्विक परिदृश्य में भारत के ऊंचे होते कद का उदाहरण है। अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ ले ली है। शपथ ग्रहण के समारोह के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधि पहुंचे। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे मेहमानों में जयशंकर की चर्चा इसलिए हो रही है क्यों कि उनको मेहमानों की पहली पक्ति में जगह दी गई थी। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जयशंकर इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ के साथ आगे की पंक्ति में बैठे नजर आए, जो आधिकारिक प्रोटोकॉल है। इस दौरान जापानी विदेश मंत्री ताकेशी इवाया पीछे बैठे नजर आए। इस तस्वीर को बदलते भारत और अमेरिका और भारत के प्रगाढ़ होते रिश्तों के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के रूप में ट्रंप के शपथ ग्रहण में शामिल होने अमेरिका पहुंचे थे। जब डोनाल्ड ट्रंप पोडियम पर अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले रहे थे, तब एस जयशंकर उनके बिल्कुल सामने बैठे हुए थे। यह तस्वीर अपने आप में काफी कुछ कह रही है।एस जयशंकर की इस तस्वीर को अमेरिका में भारत की धाक के तौर पर देखा जा सकता है। उनको ट्रंप के बिल्कुल सामने यानी कि पहली पंक्ति में जगह मिलना यह दिखाता है कि भारत की धाक दुनियाभर में है। पूरी दुनिया का नजरिया भारत के प्रति बदल रहा है। विदेश मंत्री ने ट्रंप के शपथ ग्रहण की कुछ तस्वीरें अपने एक्स हैंडल पर शेयर की हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि ट्रंप और जेडी वेंस के शपथ ग्रहण में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बहुत ही सम्मान की बात है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में 36 घंटे से चल रही मुठभेड़, अब तक 14 नक्सली ढेर
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#encounter_going_on_for_36_hours_in_gariaband_14_naxalites_killed

* छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में पिछले 36 घंटे से नक्सलियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ जारी है। अब तक कुल 14 नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। मुठभेड़ में कई इनामी नक्सली मारे गए हैं। सभी मारे गए नक्सलियों के शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं। साथ ही भारी मात्रा में हथियार भी बरामद हुए हैं। गरियाबंद जिले के कुल्हाड़ी घाट स्थित भालू डिग्गी जंगल में कुल एक हजार से अधिक जवानों ने 60 से अधिक नक्सलियों को चारों तरफ से घेर रखा है। यह मामला मैनपुर थाने इलाके का बताया जा रहा है।रविवार सुबह से मंगलवार की की सुबह तक रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। यह मुठभेड़ नक्सलियों के खिलाफ छेड़े गए ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें सुरक्षा बलों का उद्देश्य नक्सली संगठन को कमजोर करना है। मुठभेड़ में सीआरपीएफ के कोबरा यूनिट का एक जवान भी घायल हुआ है, जिसे एयर लिफ्ट करके रायपुर लाया जा रहा है। इससे पहले रविवार को हुई मुठभेड़ में दो नक्सली ढेर किए गए थे वहीं एक जवान भी घायल हुआ था। गरियाबंद में सुरक्षा बल नक्सली मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी नक्सली जयराम उर्फ चलपती मारा गया है। वह नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी मेंबर बताया जा रहा है। अब तक 14 से अधिक महिला / पुरुष नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मारे गए नक्सलियों में माओवादियों के सीनियर कैडर शामिल हैं, जिनकी शिनाख्त की जा रही है l बता दें कि छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर ऑपरेशन चल रहा है। यह छत्तीसगढ़ पुलिस, ओडिशा पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा का जॉइंट ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों की कुल 10 टीमें शामिल हैं, जिसमें 3 टीमें ओडिशा से, 2 टीमें छत्तीसगढ़ पुलिस की और 5 टीमें सीआरपीएफ की हैं। जवान इलाके के सर्चिंग ऑपरेशन पर निकले हुए थे, तभी नक्सलियों ने जवानों पर हमला किया। एनकाउंटर की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी भी मैनपुर पहुंच गए हैं। इलाके में भारी सुरक्षाबल तैनात किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से भाटीगढ़ स्टेडियम को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आते ही विवेक रामास्वामी ने DOGE का पद छोड़ा, जानें क्या है वजह?
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद भारतीय-अमेरिकी बिजनेसमैन से राजनेता बने विवेक रामास्वामी ने एक बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है वो अब डोनाल्ड ट्रम्प के डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) का हिस्सा नहीं हैं। इसकी जानकारी ट्रंप के शपथ ग्रहण के कुछ घंटों के बाद व्हाइट हाउस ने दी। बता दें कि अपने मंत्रीमंडल के चयन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को एलन मस्क के साथ मिलकर सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) का नेतृत्व करने के लिए चुना था। उद्यमी विवेक रामास्वामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा, “डीओजीई के निर्माण में सहायक बनना मेरे लिए सम्मान की बात थी। मुझे पूरा विश्वास है कि एलन मस्क और उनकी टीम सरकार को सुव्यवस्थित करने में पूरी तरह से सफल होगी। मैं जल्द ही ओहायो में अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में और अधिक बताऊंगा। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका को फिर से महान बनाने में मदद करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।” सरकारी दक्षता सलाहकार समूह की प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “विवेक रामास्वामी जल्द दी एक निर्वाचित पद के लिए चुनाव लड़ने का इरादा रखते हैं, जिसके लिए उन्हें डीओजीई से बाहर रहना होगा। हम पिछले दो महीने के उनके योगदान के लिए उनका धन्यवाद करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह अमेरिका को फिर से महान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।” बता दें कि रामास्वामी ने संकेत दिया है कि वह 2026 में ओहायो से गवर्नर का चुनाव लड़ने की प्लानिंग कर रहे हैं। अगर वह जीत जाते हैं तो ओहायो के पहले भारतीय-अमेरिकी गवर्नर होंगे। इससे पहले उन्होंने भी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी भी पेश की थी। हालांकि उन्होंने अब ओहियो के गवर्नर के लिए चुनाव लड़ने का इरादा जताया है। इसलिए ट्रंप के राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण करने के कुछ ही घंटों बाद ही विवेक रामास्वामी को सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) से इस्तीफा देना पड़ा।