बजरंग पूनिया ने अमित शाह को लिखा लेटर, जानें क्या है पूरा मामला

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भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों की पुलिस के साथ कथित हाथापाई की खबर सामने आई है। इस बीच पहलवान बजरंगपूनिया ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।पत्र में देर रात हुई घटना का पूरा ब्योरा देते हुए खिलाड़ियों ने गृह मंत्री के सामने अपनी 4 मांगे रखी हैं। इनमें जरूरी सामान की लिस्ट भी है। खिलाड़ियों ने पत्र में दिल्ली पुलिस पर खिलाड़ियों पर हमला करने और उनके साथ बदसलूकी करने का भी आरोप लगाया है। इस चिठ्ठी पर बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के हस्ताक्षर हैं।

बजरंग पूनिया ने कहा- एसीपी ने 100 पुलिसकर्मियों के साथ हमला बोला

अमित शाह को लिखे पत्र में पूनिया ने मांग की है कि आंदोलन कर रहे खिलाड़ियों की मांग का समाधान किया जाए। पूनिया ने अपने पत्र में लिखा है कि 3 मई की रात को दिल्ली पुलिस ने हमारे साथ धक्कामुक्की की है। चिठ्ठी में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस के एसीपी धर्मेंद्र ने 100 पुलिसकर्मियों के साथ हमला बोल दिया। इसमें दो लोगों दुष्यंत फोगाट और राहुल यादव के सिर फट गए। दोषियों पर कार्रवाई के साथ ही रेसलर्स ने कुछ जरूरी सामानों की लिस्ट गृह मंत्री अमित शाह को दी है और इसे धरनास्थल पर लाने की इजाजत मांगी है। इनमें वाटरप्रूफ टेंट, मजबूत स्टेज, पलंग, साउंड सिस्टम, गद्दे और कुश्ती मैट और जिम का सामान शामिल है।

महिला पहलवानों के साथ बदसलूकी का आरोप

तीन खिलाड़ियों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा है कि 'हम ओलंपियन 11 दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। 3 मई की रात लगभग 11 बजे जब हम अपने रात्रि विश्राम की व्यवस्था कर रहे थे तो दिल्ली पुलिस के एसीपी धर्मेंद्र ने 100 पुलिस वालों के साथ हम हमला कर दिया, जिसमें दुष्यंत फोगाट और राहुल यादव के सिर फोड़े गए। चिठ्ठी में आगे कहा गया कि अधिकारी ने विनेश फोगाट को गंदी गालियां दीं। साक्षी मलिक और संगीता फोगाट को पुरुष अधिकारियों ने धक्के मारे।

जंतर-मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प, बेड को लेकर हुआ विवाद

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरने का आज 12वां दिन है। धरना दे रहे पहलवानों और पुलिस के बीच बुधवार देर रात झड़प हो गई। बताया जा रहा है कि बेड को लेकर पुलिस और पहलवानों के बीच झड़प हो गई। इसमें कुछ पहलवानों को चोटें भी आई हैं।झड़प में बबीता फोगाट और गीता फोगाट के छोटे भाई दुष्यंत फोगाट का सिर फूटने की खबर आ रही है। गीता फोगाट ने ट्वीट करके कहा कि उनके छोटे भाई का सिर फोड़ दिया गया है।

दरअसल जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट सहित कई स्टार पहलवान पिछले काफी दिनों से धरने पर बैठे हैं। मामला फोल्डिंग बेड को लेकर शुरू हुआ था। बारिश के कारण पहलवान जहां पर धरना दे रहे थे, वहां पर पानी भर गया। ऐसे में फोल्डिंग बेड लाया गया। पहलवान बेड लेने जा रहे थे तो पुलिस में उन्हें रोक दिया, जिस पर साक्षी, बजरंग सहित कई स्टार पुलिस से बहस करने लगे। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई।पुलिस ने सोमनाथ भारती समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया है। झड़प के दौरान महिला रेसलर विनेश फोगाट के भाई दुष्यंत का सिर फट गया। एक और रेसलर राहुल भी घायल हुआ है। 

दिल्ली पुलिस ने कहा

दिल्ली पुलिस के DCP प्रणव तयाल ने अपने बयान में कहा- आप नेता सोमनाथ भारती बिना इजाजत बेड लेकर धरना स्थल पर पहुंच गए। हमने बीच-बचाव किया तो पहलवानों के समर्थक आक्रामक हो गए और ट्रक से बेड निकालने की कोशिश करने लगे। इसके बाद एक मामूली विवाद हुआ। जिसमें दो लोगों के साथ सोमनाथ भारती को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है।

 

किसी भी खिलाड़ी को देश के लिए मेडल नहीं जीतना चाहिए-विनेश

हंगामे के कुछ देर बाद रेसलर्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। झड़प के बाद विनेश और साक्षी जैसी मेडल जीतने वाली रेसलर्स रोने लगीं। विनेश फोगाट दिल्ली पुलिस के साथ हुए विवाद के बाद रो पड़ीं। देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विनेश ने कहा, पुलिसकर्मियों ने उनके भाई पर हमला किया। एक अस्पताल में है, जबकि दूसरा घायल पहलवान जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। विनेश ने रोते हुए कहा, जब हमने देश के लिए मेडल जीते थे तब कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हमें भी यह दिन देखना पड़ेगा। मैं तो कहुंगी की देश के किसी भी खिलाड़ी को देश के लिए मेडल नहीं जीतना चाहिए।

हम अपने मेडल्स भारत सरकार को लौटा देंगे-बजरंग

बजरंग पूनिया ने कहा कि हम अपने मेडल्स भारत सरकार को लौटा देंगे। बजरंग पूनिया ने पुलिस वालों पर बदतमीजी करने का भी आरोप लगाया। बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने कहा कि अब यह लड़ाई लंबी चलेगी।

वाप्कोस लिमिटेड के पूर्व सीएमडी गिरफ्तार, छापेमारी में सीबीआई ने जब्‍त किये 38 करोड़

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सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मिलने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। वॉटर एंड पावर कंसल्टेंसी (वाप्कोस) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राजिंदर कुमार गुप्ता और उनके बेटे गौरव को उनके परिसर से 38 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने गुप्‍ता के 19 ठिकानों से अब तक 38 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है। साथ ही काफी मात्रा में ज्‍वेलरी और कई कागजात भी जब्‍त किए हैं।

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आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति 

सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा, "जल शक्ति मंत्रालय के तहत भारत सरकार के उपक्रम वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (वाप्कोस) के पूर्व सीएमडी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ इस आरोप में मामला दर्ज किया गया है कि उन्होने एक अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2019 तक अपने कार्यकाल के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।

19 जगहों पर छापेमारी में 38 करोड़ नकद बरामद

मंगलवार को सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली, चंडीगढ़, पंचकुला, गुरुग्राम, सोनीपत और गाजियाबाद समेत 19 जगहों पर छापेमारी की थी। उस दौरान सीबीआई ने जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (वैपकोस) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राजिंदर कुमार गुप्ता के ठिकानों से 38 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए।

बड़ी मात्रा में गहने, कीमती सामान और नगदी बरामद

छापेमारी के दौरान गुप्‍ता के ठिकानों से बड़ी मात्रा में गहने, कीमती सामान और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने उनके परिसरों की तलाशी ली।जहां संपत्ति और अन्य कीमती सामानों से संबंधित दस्तावेजों के अलावा बड़ी मात्रा में नगदी प्राप्‍त हुई है।

रूस ने यूक्रेन पर लगाया व्लादिमीर पुतिन की हत्या की कोशिश का आरोप, क्रेमलिन में ड्रोन को मार गिराने का दावा

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रूस ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जान लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन ने रूसी राष्ट्रपति को मारने के लिए क्रेमलिन पर ड्रोन से हमला किया है। उसने दावा किया कि उसने यूक्रेन द्वारा लॉन्च किए गए दो ड्रोन को मार गिराया। यह खबर रायटर्स ने रूसी न्यूज एजेंसी के हवाले से जारी की है।

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि यूक्रेन ने मंगलवार रात क्रेमलिन पर ड्रोन हमला किया। इसका मकसद राष्ट्रपति पुतिन की हत्या करना था। मॉस्को के निवासियों ने भी स्थानीय समयानुसार दोपहर दो बजे के बाद क्रेमलिन की दीवारों के पीछे विस्फोटों की आवाज सुनी थी। इसके बाद क्रेमलिन के ऊपर आसमान में धुआं उठता दिखाई दिया था। एक स्थानीय टेलीग्राम चैनल ने स्थानीय निवासियों के रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज को भी शेयर किया है। हालांकि, इस हमले में यूक्रेन के हाथ की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है।

रूस ने कहा- सुनियोजित आतंकवादी कृत्य

क्रेमलिन ने कहा कि यह कथित हमले को एक सुनियोजित आतंकवादी कृत्य और रूसी संघ के राष्ट्रपति को मारने की कोशिश मानता है। क्रेमलिन ने बयान में कहा, दो मानव रहित व्हीकल को क्रेमलिन की ओर लक्षित किया गया था, डिवाइसों को निष्क्रिय कर दिया गया।बयान जारी करके बताया गया है कि राष्ट्रपति पुतिन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और बिल्डिंग में भी किसी तरह का मटेरियल डैमेज ड्रोन अटैक में नहीं हुआ है। 

रूस ने दी बदला लेने की धमकी

रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, क्रेमलिन ने धमकी दी है कि रूस जहां और जब उचित समझे, जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।क्रेमलिन ने इस घटना को सुनियोजित आतंकवादी हमला और रूस के राष्ट्रपति की हत्या का प्रयास करार दिया है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन ने दो ड्रोन के जरिए क्रेमलिन को निशाना बनाने का प्रयास किया था। दोनों ड्रोन को मार गिराया गया है। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

बिहारियों पर विवादित बयान देने के मामले में जदयू नेता मनीष सिंह ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ पटना में कराया केस दर्ज, बिहार आकर

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बिहारियों पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के विवादित बयान देने के बाद बिहार में बवाल मचा हुआ है। ज्यादातर राजनैतिक दल गोवा के सीएम के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। जेडीयू, आरजेडी और जन अधिकार पार्टी बिहारियों पर की गयी टिप्पणी को गलत ठहरा रहे हैं। अब जेडीयू नेता मनीष सिंह ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ पटना में केस दर्ज कराया है। बिहारियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में यह केस दर्ज हुआ है। जेडीयू नेता मनीष सिंह ने गोवा के सीएम को बिहारियों से बिहार आकर माफी मांगने को कहा।

जेडीयू नेता मनीष सिंह ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ पटना मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पटना सदर के समक्ष मुकदमा दर्ज कराया है। जेडीयू नेता ने कहा कि गोवा के सीएम कह रहे हैं गोवा में 90 फीसदी अपराध के जिम्मेदार बिहारी और बिहार के मजदूर हैं। गोवा के सीएम को यह बात समझना होगा कि बिहार और बिहार के लोग अपनी मेधा के बल पर पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाए हैं। बिहार सबसे ज्यादा आईएएस, आईपीएस और आईआईटीयन पैदा करने वाला राज्य है। 

बिहारियों के प्रति ऐसी अपमान जनक भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। जेडीयू नेता ने कहा कि उन्होंने कोर्ट से गोवा के सीएम पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कहा कि लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गोवा के सीएम को माफी मांगने को कहा है नहीं तो बिहार आकर उन्हें कोर्ट में जवाब देना होगा।  

 गोवा में बढ़ रहे अपराधों को लेकर वहां के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि 90 फीसदी अपराध यूपी और बिहार के प्रवासी मजदूर करते हैं। इस टिप्पणी को बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने गलत बताया। कहा कि कम से कम मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं बोलना चाहिए। यह बिहार और बिहारियों का घोर अपमान हैं।

गोवा के सीएम के विवादित बयान पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने ट्विट कर जवाब देते हुए कहा कि 'केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जी के बाद अब गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शर्मनाक बयान देकर बिहार और बिहारियों का घोर अपमान किया है। भाजपा और भाजपाई नेताओं को बिहार और बिहारियों से नफरत क्यों है?

बलवंत सिंह राजोआना को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, मौत की सजा को उम्र कैद में बदलने से किया इनकार

#supreme_court_upholds_balwant_singh_rajoana_death_penalty

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। उसने अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सक्षम अथॉरिटी (गृह मंत्रालय) से बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए कहा है।है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजोआना की सजा पर गृह मंत्रालय की तरफ से जल्द फैसला लिया जाए।

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फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए गृह मंत्रालय के पास भेज दिया है। बलवंत सिंह राजोआना की याचिका पर जस्टिस बीआर गवई, जस्टिव विक्रम नाथ और जस्टिव संजय करोल की पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को फैसला लेने को कहा है। इसने ये भी कहा है कि सजा पर फैसला तब लिया जाए, जब उन्हें जरूरी लगे।

शीर्ष अदालत ने दोषी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज की दलीलें सुनने के बाद दो मार्च को राजोआना की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। केंद्र सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला दिया गया था। राजोआना की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि बम ब्लास्ट में मुख्यमंत्री की मौत हो गई थी। मामले में जुलाई 2007 में सज़ा सुनाई गई थी और हाई कोर्ट ने 2010 में सज़ा बरकरार रखा था। राजोआना 27 साल से जेल में है, 2012 से दया याचिका लंबित है। 

राजोआना की ओर से मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी कि मौत की सज़ा के मामले में लंबे समय तक देरी करना मौलिक अधिकार का हनन है। उन्होंने कहा कि 2012 से दया याचिका लंबित है, हम 2023 में आ गए, यह सीधे रूप से कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। रोहतगी ने कहा कि राजोआना की उम्र अब 56 साल हो गई, जब घटना हुई थी उस समय युवा था।

बता दें कि बलवंत सिंह पिछले 27 साल से जेल की काल कोठरी में बंद है। उसने जेल में लंबा समय बिताया है। इसी को आधार बनाकर राजोआना ने कहा कि उसे फांसी की जो सजा सुनाई है, उसे बदल दिया है। इसके बदले उसे उम्रकैद की सजा दी जाए। बलवंत सिंह राजोआना ने इस संबंध में राष्ट्रपति से भी गुजारिश लगाई। लेकिन उसकी दया याचिका मार्च 2013 से ही राष्ट्रपति के पास लंबित पड़ी हुई है।अदालत ने राजोआना को जुलाई 2007 में फांसी की सजा सुनवाई। उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, मगर हाईकोर्ट ने भी 2010 में फांसी की सजा को बरकरार रखा। फिर वह सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचा और उसने याचिका लगाकर अपनी सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की।

राजोआना, पंजाब पुलिस में कांस्टेबल था। उसके ऊपर आरोप है कि 31 अगस्त 1995 को जब पंजाब के सीएम बेअंत सिंह की हत्या की गई तो वो भी उसमें शामिल था।

*बलवंत सिंह राजोआना को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, मौत की सजा को उम्र कैद में बदलने से किया इनकार*

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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। उसने अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सक्षम अथॉरिटी (गृह मंत्रालय) से बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए कहा है।है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजोआना की सजा पर गृह मंत्रालय की तरफ से जल्द फैसला लिया जाए।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए गृह मंत्रालय के पास भेज दिया है। बलवंत सिंह राजोआना की याचिका पर जस्टिस बीआर गवई, जस्टिव विक्रम नाथ और जस्टिव संजय करोल की पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को फैसला लेने को कहा है। इसने ये भी कहा है कि सजा पर फैसला तब लिया जाए, जब उन्हें जरूरी लगे।

शीर्ष अदालत ने दोषी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज की दलीलें सुनने के बाद दो मार्च को राजोआना की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। केंद्र सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला दिया गया था। राजोआना की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि बम ब्लास्ट में मुख्यमंत्री की मौत हो गई थी। मामले में जुलाई 2007 में सज़ा सुनाई गई थी और हाई कोर्ट ने 2010 में सज़ा बरकरार रखा था। राजोआना 27 साल से जेल में है, 2012 से दया याचिका लंबित है। 

राजोआना की ओर से मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी कि मौत की सज़ा के मामले में लंबे समय तक देरी करना मौलिक अधिकार का हनन है। उन्होंने कहा कि 2012 से दया याचिका लंबित है, हम 2023 में आ गए, यह सीधे रूप से कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। रोहतगी ने कहा कि राजोआना की उम्र अब 56 साल हो गई, जब घटना हुई थी उस समय युवा था।

बता दें कि बलवंत सिंह पिछले 27 साल से जेल की काल कोठरी में बंद है। उसने जेल में लंबा समय बिताया है। इसी को आधार बनाकर राजोआना ने कहा कि उसे फांसी की जो सजा सुनाई है, उसे बदल दिया है। इसके बदले उसे उम्रकैद की सजा दी जाए। बलवंत सिंह राजोआना ने इस संबंध में राष्ट्रपति से भी गुजारिश लगाई। लेकिन उसकी दया याचिका मार्च 2013 से ही राष्ट्रपति के पास लंबित पड़ी हुई है।अदालत ने राजोआना को जुलाई 2007 में फांसी की सजा सुनवाई। उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, मगर हाईकोर्ट ने भी 2010 में फांसी की सजा को बरकरार रखा। फिर वह सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचा और उसने याचिका लगाकर अपनी सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की।

राजोआना, पंजाब पुलिस में कांस्टेबल था। उसके ऊपर आरोप है कि 31 अगस्त 1995 को जब पंजाब के सीएम बेअंत सिंह की हत्या की गई तो वो भी उसमें शामिल था।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का दावा, राज्य में लगभग 90 प्रतिशत अपराध के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों के प्रवासी मजदूर जिम्मेवा

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बिहार व उत्तर प्रदेश के मजदूरों पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की टिप्पणी पर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी शुरू से उत्तर भारतीयों की विरोधी रही है। जगजाहिर है कि भाजपाशाषित राज्यों में बिहारी मजदूरों को हीनभावना से देखा जाता है और उनका हर तरीके से शोषण किया जाता है। वहीं जेडीयू के बयान पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी है। बिहार बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा है कि गोवा के मुख्यमंत्री के बयान को आधार बनाकर कुछ राजनीतिक दल कुंठा अभिव्यक्ति करने में लगे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। गौरतलब है कि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने राज्य में बढ़ रहे अपराधों को लेकर विवादित बयान दिया है। प्रमोद सावंत ने दावा करते हुए कहा है कि राज्य में लगभग 90 प्रतिशत अपराध बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों के प्रवासी मजदूरों द्वारा किए जाते हैं। 

वहीं जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि एक तरफ भाजपा 'एक देश, एक कानून' की बात करती है, और उसी पार्टी से गोवा के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों को अपराधी कहते हैं। उन्‍हें गृह मंत्री अमित शाह के विभाग से संबंधित 'नेशनल क्राइम ब्यूरो' के आंकड़े का अवलोकन करना चाहिए। गुजरात में सबसे ज्यादा फर्जी मुकदमे में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग प्रताड़ित होते हैं। कहा कि आप लोग कैसा फर्जी हिंदू हैं ? वहां बहुसंख्यक हिंदू ही होंगे जो लोग गोवा गए हैं। गोवा के मुख्यमंत्री हिंदू हैं और हिंदू को ही अपराधी कह रहे हैं। उत्तर भारतीय लोगों को देश के विभिन्न राज्यों में भाषाई रूप से अपमानित करना और राजनीतिक अपमान करना यह नए भाजपा का नया संस्कार है

वहीं बिहार बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि बिहार में सभी स्तरों की शिक्षा चौपट है और रसातल के गर्त में चली गई है। बिहार में औद्योगीकरण की गुंजाइश जो एनडीए सरकार के दौरान बन रही थी वह पूरी तरह से खत्म हो गई है। 

राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। बिहार पलायन की भयंकर मार झेल रहा है। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे बिहार और बिहारियों को देशभर में कामगार- मजदूर के तौर पर जीवनयापन करना पड़ रहा है और उनके भेजे पैसे से ही उनका घर- परिवार चलता है। इक्का-दुक्का अगर आपराधिक घटनाओं में कोई संलिप्त हो संभव है लेकिन सामूहिक छवि नहीं बनाया जा सकता है। बिहार एक बार फिर देश- दुनिया में परसेप्शन के स्तर पर छवि निर्माण को लेकर चुनौती से जूझ रहा है। बिहार सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिवादी छवि बन रही है। यही नहीं बिहार सरकार जिस तरह से खनन माफिया, शराब माफिया और संगठित आपराधिक गिरोहों को संरक्षण दे रही है उससे भी सरकार कि भद् पीट रही है और बिहार बदनाम हो रहा है।

सूडान में जारी संघर्ष में 550 की मौत जबकि घायलों की संख्या 4,926 हुई, आरएसएफ ने एसएएफ पर मानवीय संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया


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सूडान में जारी संघर्ष में मरने वालों की संख्या 550 हुई

सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच जारी सशस्त्र संघर्ष में मरने वालों की संख्या बढ़कर 550 से ज्यादा हो गई है। सूडान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, सूडानी प्रांतों के सभी अस्पतालों में कुल 550 लोगों की मौत दर्ज की गई है जबकि घायलों की संख्या 4,926 है। उसने बताया कि खार्तूम और सेंट्रल दारफुर को छोड़कर सभी राज्यों में स्थिति शांत थी।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 72 घंटे के छठे युद्धविराम के बावजूद राजधानी खार्तूम और ओमदुरमन के विभिन्न क्षेत्रों में एसएएफ और आरएसएफ के बीच रुक-रुक कर संघर्ष जारी रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि एसएएफ ने ओमदुरमन के पश्चिम में बहरी (उत्तरी खार्तूम) में आरएसएफ के ठिकानों पर और केंद्रीय खार्तूम में सेना के जनरल कमांड के आसपास तेज हवाई हमले किए।

इस बीच आरएसएफ ने एसएएफ पर मानवीय संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया।

आरएसएफ ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि वह एसएएफ सैन्य विमान को मार गिराने में कामयाब रहा, लेकिन दावे पर प्रतिक्रिया के लिए एसएएफ प्रवक्ता के कार्यालय से संपर्क नहीं हो सका।

खार्तूम और अन्य क्षेत्रों में एसएएफ और आरएसएफ के बीच लड़ाई 15 अप्रैल को शुरू हुई। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगाया जिसने देश को मानवीय संकट में धकेल दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, हजारों सूडानी नागरिक विस्थापित हो गए हैं या मिस्र, इथियोपिया और चाड सहित सूडान और पड़ोसी देशों में सुरक्षित क्षेत्रों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए हैं।

बदरी-केदार धाम में डिजिटल दान का रहस्य गहराया, सामने आया मंदिर समिति के कर्मचारी का नाम


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उत्तराखंड के बदरी-केदार धाम में डिजिटल दान लेने का रहस्य गहराता जा रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष का दावा है कि पेटीएम ने उनकी अनुमति लिए बिना दोनों धामों के परिसर में क्यूआर कोड लगाए हैं।

जबकि, समिति के मुख्य कार्याधिकारी का कहना है कि इसको लेकर पांच साल पहले पेटीएम के साथ समिति का अनुबंध हुआ था, लेकिन पेटीएम ने क्यूआर कोड लगाने के लिए सक्षम स्तर पर अनुमति नहीं ली।

समिति के एक कर्मचारी का है बैंक खाता

यह बात भी सामने आ रही है कि क्यूआर कोड से जो बैंक खाता जुड़ा है, वह समिति के एक कर्मचारी का है। जो समिति के वरिष्ठ अधिकारी का स्टेनो है। हालांकि, इस बारे में समिति के पदाधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। समिति के अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी मामले की विस्तृत जांच कराने की बात कह रहे हैं।

बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के मुख्य परिसर में कपाट खोलने वाले दिन डिजिटल दान के लिए पेटीएम के क्यूआर कोड लगे पाए गए थे, जिन्हें मंदिर समिति ने उसी दिन हटवा दिया। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया।

इसके बाद रविवार को बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा था कि समिति ने कहीं पर भी ऐसे क्यूआर कोड नहीं लगवाए। साथ ही दोनों धाम में इस प्रकरण की जांच के लिए पुलिस को तहरीर दी गई। इस पर बदरीनाथ चौकी में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया, जबकि केदारनाथ चौकी में दी गई तहरीर की अभी जांच की जा रही है।

इस बीच सोमवार को प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया। रुद्रप्रयाग जिले की एसपी विशाखा अशोक भदाणे के अनुसार, पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 में बीकेटीसी और पेटीएम के बीच क्यूआर कोड लगाने को लेकर एमओयू हुआ था। उधर, चमोली जिले के एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पेटीएम के क्यूआर कोड से जो बैंक खाता जुड़ा है, वह मंदिर समिति के एक कर्मचारी का है। हालांकि, समिति इसकी पुष्टि नहीं कर रही।

इधर, मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह का कहना है कि क्यूआर कोड लगाने को लेकर पेटीएम ने समिति के पदाधिकारियों से अनुमति नहीं ली। इस बारे में समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि पेटीएम ने उनसे या मुख्य कार्याधिकारी से क्यूआर कोड लगाने के बारे में कोई बात नहीं की। उनका कहना है कि ऐसा किस स्तर से हुआ, इसकी जांच कराई जा रही है।

क्यूआर कोड से आया 70 लाख का दान

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पेटीएम के क्यूआर कोड के माध्यम से मंदिर समिति को अब तक 70 लाख रुपये से अधिक का दान प्राप्त हो चुका है। इस बारे में बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसके संबंध में पेटीएम से विस्तृत ब्योरा मांगा गया है।

बदरी-केदार धाम के परिसर में डिजिटल दान के लिए क्यूआर कोड पेटीएम की तरफ से लगाए गए थे। लेकिन, इसके लिए पेटीएम ने मुझसे कोई अनुमति नहीं ली। मालूम हुआ है कि निचले स्तर पर कर्मचारियों से बात कर पेटीएम ने क्यूआर कोड लगा दिए। इस प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जल्द ही सब साफ हो जाएगा।

पेटीएम और मंदिर समिति के बीच बदरी-केदार धाम में क्यूआर कोड लगाने के लिए वर्ष 2018 में एमओयू हुआ था। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। फिर भी क्यूआर कोड लगाने से पहले मंदिर समिति की सहमति ली जानी जरूरी है। लापरवाही की जांच की जा रही है। इसमें मंदिर समिति का कोई कर्मचारी शामिल है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। क्यूआर कोड के माध्यम से मंदिर समिति के खाते में कितना दान आया और उसका आहरण व वितरण किस ढंग से किया गया। इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।