*पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम के सामने उठाया हिंदू मंदिरों पर हमले का मसला, अल्बनीज ने दिया सुरक्षा का आश्वासन*

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पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया में हिंदुओं की आस्था के केंद्र मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों के पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ बताया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज इस समय भारत दौरे पर हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज के सामने इस मुद्दे को उठाया है।

पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। मुलाकात के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्बनीज के साथ वार्ता के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले की खबरें नियमित रूप से आ रही हैं। स्वाभाविक है, ऐसे समाचार भारत में सभी लोगों को चिंतित करते हैं और हमारे मन को व्यथित करते हैं। इन भावनाओं और चिंताओं से प्रधानमंत्री अल्बनीज को अवगत कराया। उन्होंने मुझे आश्वस्त किया है कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा उनके लिए विशेष प्राथमिकता है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी में सुरक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। हमने आज हिंद और प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारी टीमें हमारे दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक समझौते पर काम कर रही हैं।

बता दें कि पिछले दो महीने में ऑस्ट्रेलिया में कम-से-कम 5 बार हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। 4 मार्च को ब्रिस्बेन के बरबैंक उपनगर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी तस्वीरें बना दी गई थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तोड़फोड़ को खालिस्तानी समर्थक समर्थकों ने अंजाम दिया थ। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास दीवारों पर हिंदू विरोधी, भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे थे। इससे पहले 17 फरवरी 2023 को ब्रिस्बेन को गायत्री माता मंदिर के पुजारी को महाशिवरात्रि ना मनाने की चेतावनी दी गई थी।

*कोरोना के बाद H3N2 वायरस का कहर, हरियाणा और कर्नाटक में एक-एक मौत की खबर*

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कोरोना के बाद अब H3N2 वायरस (इन्फ्लूएंजा वायरस) ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। यही नहीं ये वायरस जानलेवा भी होता जा रहा है। H3N2 इन्फ्लूएंजा की वजह से देश में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है।स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, H3N2 वायरस से देश में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस की चपेट में आने के बाद एक मौत हरियाणा, जबकि दूसरी मौत कर्नाटक में हुई है।

देश में अब तक H3N2 इन्फ्लुएंजा के कुल 90 मामले और H1N1 के आठ मामले सामने आए हैं।इन्फ्लूएंजा के तीन प्रकार होते हैं. H1N1, H3N2 और इन्फ्लूएंजा B जिसको यामा गाटा कहा जाता है. भारत में फिलहाल दो तरह के इन्फ्लूएंजा वायरस H1N1 और H3N2 की मौजूदगी दर्ज की गई है।

मार्च की शुरुआत में ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने कहा था कि भारत में पिछले दो-तीन महीने से लगातार खांसी और किसी-किसी मामले में बुखार के साथ खांसी होने का कारण ‘इन्फ्लुएंजा ए’ का उपस्वरूप ‘H3N2’ है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने कहा कि पिछले दो-तीन महीने से व्यापक रूप से व्याप्त H3N2 अन्य उपस्वरूपों की तुलना में रोगी के अस्पताल में भर्ती होने का बड़ा कारण है।

आईएमए ने जारी की एडवाइजरी

इसको लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने भी एडवाइजरी जारी की है। इस बीमारी में आपको तेज बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, गले में दर्द, तेज खांसी, सर्दी जुकाम फेफड़े जाम पड़ जाने सी परेशानियां होती हैं। अगर आपको भी ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं, तो डॉक्‍टर से संपर्क कीजिए। इसके अलावा अगर इसकी चपेट में आते हैं, तो जितना हो सके आराम करें। पानी पीते रहें शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है। बाहर का खाना बिल्कुल ना खाएं और फ्लूड डाइट लीजिए। इससे आपको आराम जल्दी मिलेगा। इससे बचने के लिए आप फ्लू वैक्सीन जरूर लगवा लीजिए, साथ में जो लोग इससे संक्रमित हैं उनसे दूरी बनाकर रखिए। हाथ को सेनेटाइज करके रखें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

आईएमए ने एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर किया आगाह

दूसरी ओर, आईएमए ने देश भर में खांसी, जुकाम और जी मिचलाने के बढ़ते मामलों के बीच एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग को लेकर आगाह किया है।आईएमए ने कहा कि मौसमी बुखार पांच से सात दिनों तक रहेगा। आईएमए की एक स्थायी समिति ने कहा कि बुखार तीन दिन में खत्म हो जाएगा, लेकिन खांसी तीन हफ्ते तक बरकरार रह सकती है।

कोरोना के बाद नई चिंता

H3N2 इन्फ्लूएंजा के प्रकोप ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। इन्फ्लूएंजा के मामले ऐसे वक्त पर सामने आ रहे हैं, जब तीन साल बाद देश कोरोना महामारी से उबरा था।

न्यूयॉर्क टाइम्स में कश्मीर पर विवादित लेख पर बरसे अनुराग ठाकुर, कहा-भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा

#anuragthakurhitsbackonnyteditorial 

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने न्यूयॉर्ट टाइम्स में छपे लेख को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।अनुराग ठाकुर ने कश्मीर में प्रेस की स्वतंत्रता पर छापे गए एक लेख को लेकर ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ को जमकर फटकार लगाई है।ठाकुर ने न्यूयॉर्क टाइम्स पर भारत के बारे में "झूठ फैलाने" का आरोप लगाते हुए लेख को "शरारती और काल्पनिक" बताया है।

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कुछ विदेशी मीडिया भारत को लेकर झूठ फैला रहे-ठाकुर

केंद्रीय मंत्री ने एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए कहा, न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत के बारे में कुछ भी प्रकाशित करते समय तटस्थता के सभी ढोंगों को बहुत पहले छोड़ दिया था। कश्मीर में प्रेस की स्वतंत्रता पर न्यूयॉर्क टाइम्स का तथाकथित ओपिनियन अंश शरारती और काल्पनिक है, जिसे भारत और उसके लोकतांत्रिक संस्थानों और मूल्यों के बारे में प्रोपेगेंडा फैलाने के एकमात्र उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। अनुराग ठाकुर ने कहा, न्यूयॉर्क टाइम्स और कुछ अन्य उसके जैसे विदेशी मीडिया भारत और हमारे लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में झूठ फैला रहे हैं। ऐसा झूठ लंबे समय तक नहीं चल सकता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की ओर से झूठ फैलाया गया-ठाकुर

ठाकुर ने कहा, भारत में लोकतंत्र है और हम लोग बहुत परिपक्व हैं और हमें ऐसे एजेंडे से चलने वाले मीडिया से लोकतंत्र के व्याकरण को सीखने की जरूरत नहीं है। कश्मीर में प्रेस की आजादी के खिलाफ न्यूयॉर्क टाइम्स की ओर से फैलाया गया यह झूठ निंदनीय है। भारत के लोग ऐसी मानसिकता को यहां की धरती पर इस तरह का अपना एजेंडा नहीं चलाने देंगे।

क्या कहता है न्यूयॉर्क टाइम्स का लेख

बता दें कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की कश्मीर में दमनकारी मीडिया पॉलिसी की आलोचना की है। संपादकीय में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में जानकारी का अभाव है, प्रेस को दबाया जा रहा है। अगर मोदी कश्मीर के मॉडल को देशभर में लागू करने में सफल होते हैं तो सिर्फ मीडिया की स्वतंत्रता पर खतरा नहीं पैदा होगा बल्कि भारत के लोकतंत्र पर भी खतरा खड़ा हो जाएगा।

*लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बने शी जिनपिंग, जानें कैसे तोड़ी परंपरा*

#xijinpingelectedpresidentofchinafor_third 

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शी जिनपिंग तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बन गए हैं। शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर जिनपिंग को चीन का अगला राष्ट्रपति चुन लिया गया। चीन की राजनीति में ऐसा कई दशकों बाद हो रहा है जब कोई नेता लगातार तीसरी बार देश के राष्ट्रपति के रुप में देश के शासन की बागडोर अपने हाथों से संचालित करेगा। 

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के लगभग 3,000 सदस्यों ने सर्वसम्मति से शी जिनपिंग को राष्ट्रपति बनाने के लिए मतदान किया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव में कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था। शी को चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए भी चुना गया है। बीते साल अक्टूबर में चीन की पीपल्स पार्टी की सालाना नेशनल पीपल्स कांग्रेस का आयोजन किया गया था। उसी नेशनल पीपल्स कांग्रेस में शी जिनपिंग को सर्वोच्च नेता चुना गया था। शुक्रवार को जिनपिंग ने आधिकारिक तौर पर अपना पद संभाल लिया। शुक्रवार को ही जिनपिंग को चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का अध्यक्ष भी चुन लिया गया। 

40 साल पुराना नियम टूट गया

शी जिनपिंग के सत्ता में आने से पहले चीन के राष्ट्रपति पांच साल के दो कार्यकाल या अधिकतम 68 साल की उम्र तक ही राष्ट्रपति रह सकते थे लेकिन साल 2013 में सत्ता में आए शी जिनपिंग ने इस नियम को खत्म कर दिया। यही वजह है कि शी जिनपिंग 69 साल के होने और दो कार्यकाल सफलतापूर्वक कर लेने के बाद भी तीसरी बार अभूतपूर्व तरीके से देश के राष्ट्रपति चुने गए। तीसरी बार शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का 40 साल पुराना नियम टूट गया। 

माओ त्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता

1976 में मॉर्डन चीन के जनक माओ त्से तुंग यानी माओ की मौत के बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना इकबाल शी जिनपिंग को सौंप दिया है। जिनपिंग से पहले माओ ही ऐसे नेता रहे जिन्होंने 1949 से लेकर 1976 तक देश की सत्ता संभाली थी। उनको मॉर्डन चीन का जनक माना जाता है, जिनके नेतृत्व में चीन की क्रांति सफल हुई थी। वह एक राजनीतिक विचारक थे और उन्होंने ही चीन की एकमात्र ताकतवर राजनीतिक पार्टी सीसीपी की स्थापना की थी।

तिहाड़ से सिसोदिया ने देश के नाम लिखी चिट्ठी, कहा- भले ही जेल की राजनीति सफल हो रही, लेकिन...

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दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया इस समय शराब घोटाले मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। गिरफ्तारी के बाद आज उनकी जमानत पर कोर्ट में सुनवाई होनी है। लेकिन उससे एक दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने दिल्ली एक्साइज घोटाला मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस बीच मनीष सिसोदिया का तिहाड़ जेल से देश के नाम लिखा पत्र सामने आया है। इस पत्र को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर शेयर किया है। केजरीवाल ने लिखा कि मनीष सिसोदिया ने जेल से देश के नाम पत्र लिखा। बीजेपी लोगों को जेल में डालने की राजनीति करती है, हम बच्चों को पढ़ाने की राजनीति कर रहे हैं। जेल भेजना आसान है, बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल। 

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मनीष सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी का शीर्षक 'शिक्षा, राजनीति और जेल' लिखा है। भाजपा की केंद्र सरकार पर षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए सिसोदिया ने अपने पत्र में लिखा कि भाजपा लोगों को जेल में डालने की राजनीति कर रही है। हम बच्चों को पढ़ाने की राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का गुनाह इतना है कि प्रधानमंत्री के समक्ष वैकल्पिक राजनीति खड़ी कर दी, इसलिए केजरीवाल सरकार के दो मंत्री फिलहाल जेल में हैं। जेल की राजनीति भले ही सफल होते दिख रही है, लेकिन भारत का भविष्य स्कूल की राजनीति में है। 

सिसोदिया का सवाल- क्यूं शिक्षा को सफल राजनीति ने हमेशा हाशिए पर रखा?

सिसोदिया ने पत्र में केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को जेल भेजने की धमकी देकर सत्ता चलाना, देश के हर बच्चे के लिए शानदार स्कूल-कॉलेज खोलने और चलाने से कहीं ज्यादा आसान है। जेल से अपने हाथों से लिखे पत्र में बीजेपी और केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि पूरे देश में पूरी राजनीति तन-मन और धन से जुट गई होती तो आज हमारे देश में हर बच्चे के लिए विकसित देशों की तरह अच्छे से अच्छे स्कूल होते। उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री के रूप में काम करते हुए बहुत बार ये सवाल मन में उठता है कि देश और राज्य की सत्ता तक पहुंचे नेताओं ने देश के हरेक बच्चे के लिए शानदार स्कूल और कॉलेज का इंतजाम क्यूं नहीं किया? क्यूं शिक्षा को सफल राजनीति ने हमेशा हाशिए पर रखा?

राजनीति में सफलता जेल चलाने से मिल रही है-सिसोदिया

पत्र में लिखा है कि जेल के अंदर से देख पा रहा हूं कि जब राजनीति में सफलता जेल चलाने से मिल जा रही है तो स्कूल चलाने की राजनीति की भला कोई जरूरत क्यों महसूस करेगा। सत्ता के खिलाफ उठने वाली आवाज को जेल भेजना बच्चों के लिए अच्छे स्कूल-कॉलेज खोलने से कहीं ज्यादा आसान है।  

लोकगायिका नेहा सिंह राठौर का भी जिक्र

सिसोदिया ने उत्तर प्रदेश को लोकगायिका नेहा सिंह राठौर का जिक्र करते हुए कहा कि असहमति व्यक्त करने वाले एक लोक गायक को सरकार की ओर से कारावास की धमकी दी गई थी। इसी तरह, जब एक कांग्रेस प्रवक्ता ने पीएम मोदी के संदर्भ में एक शब्द का इस्तेमाल किया, तो दो राज्यों की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

आने वाला कल शिक्षा की राजनीति का होगा-सिसोदिया

सिसोदिया ने तीन पन्नों की चिट्ठी लिखी है। उन्होंने कहा, आज जरूर जेल की राजनीति सफल होती दिख रही है लेकिन भारत का भविष्य स्कूल की राजनीति में है, शिक्षा की राजनीति में है। भारत विश्वगुरू बनेगा तो इसलिए नहीं कि यहां की जेलों में इतनी ताकत है, बल्कि इसके दम पर ही यहां की शिक्षा में कितनी ताकत है। भारत की आज की राजनीति में जेल की राजनीति का पलड़ा भारी जरूर है लेकिन आने वाला कल शिक्षा की राजनीति का होगा।

*'सभापति अंपायर, चीयरलीडर नहीं होते', राहुल गांधी के बयान पर जगदीप धनखड़ की टिप्पणी के बाद कांग्रेस का पलटवार*

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कांग्रेस ने राहुल गांधी की आलोचना किए जाने को लेकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर ततंज कसते हुए कहा है कि राज्यसभा के सभापति सभी के लिए अंपायर और रेफरी होते हैं, लेकिन वह सत्तापक्ष के चीयरलीडर नहीं हो सकते। बता दें कि धनखड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए कहा कि विदेशी धरती से यह कहना मिथ्या प्रचार और देश का अपमान है कि भारतीय संसद में माइक बंद कर दिया जाता है। जिसका कांग्रेस ने करारा जवाब दिया है।

जयराम रमेश ने आज शुक्रवार को ट्वीट कर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति की टिप्पणी पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “राज्यसभा के सभापति सभी के लिए अंपायर, रेफरी, मित्र और मार्गदर्शक होते हैं. वह किसी सत्तापक्ष के लिए चीयरलीडर नहीं हो सकते। इतिहास इस आधार पर परख नहीं करता कि नेताओं ने किस जोश के साथ अपनी पार्टी का बचाव किया, इस पर करता है कि उन्होंने लोगों की सेवा करते हुए किस गरिमा के साथ अपना कर्तव्य निभाया।

जयराम रमेश ने राहुल गांधी पर की गई उपराष्ट्रपति की टिप्पणी को हैरान करने वाला बताया है। जयराम ने कहा कि वो एक ऐसी सरकार के बचाव में उतर आए हैं, जिससे उन्हें संवैधानिक रूप से दूरी बनाई रखनी चाहिए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार रात जारी एक बयान में कहा कि कुछ ऐसे पद होते हैं जहां हमें अपने पूर्वाग्रह, पार्टी के प्रति झुकाव से मुक्त होना पड़ता है. उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का पद भी इसमें शामिल है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी का बयान तथ्यात्मक और जमीनी वास्तविकता को दर्शाता है। रमेश ने कहा कि पिछले दो सप्ताह में संसद के 12 सदस्यों को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया, क्योंकि उन्होंने संसद के भीतर अपनी आवाज दबाए जाने का विरोध किया था।रमेश ने दावा किया कि असहमति जताने वाले लोगों को दंडित किया जाता है। आपातकाल भले ही घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सरकार के कदम वैसे नहीं हैं जैसा कि संविधान का सम्मान करने वाली सरकार के होते हैं। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति की मौजूदा टिप्पणियों और अतीत की कुछ टिप्पणियों ने इस बात को साबित किया है।

दरअसल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद में माइक्रोफोन बंद करने के राहुल गांधी के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि, अगर वह इस मुद्दे पर चुप रहते हैं तो वह संविधान के 'गलत पक्ष' में होंगे। उन्होंने कहा कि, विदेशी धरती से यह कहना मिथ्या प्रचार और देश का अपमान है कि भारतीय संसद में माइक बंद कर दिया जाता है।

*बीजेपी के नए पोस्टर में सिसोदिया-जैन पर हमला, केजरीवाल को बताया घोटालों का सरगना*

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मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद से बीजेपी ने लगातार आम आदमी पार्टी को निशाने पर ले रखा है। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद भाजपा आम आदमी पार्टी की सरकार और सीएम केजरीवाल को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। बीजेपी ने शुक्रवार को एक पोस्टर जारी किया है। जिसमें दिल्ली सरकार के पूर्व सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया को घोटाले बाजों के रूप में दिखाया गया है। वहीं केजरीवाल को इनका सरगना बताया है।

फिल्मी पोस्टर के रूप में जारी इस पोस्टर का नाम जोड़ी नंबर वन दिया गया है। इसी प्रकार पोस्टर में बताया गया है कि यह फिल्म आम आदमी पार्टी द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। पोस्टर में सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया को शिकंजो के पीछे दिखाया गया है। भाजपा द्वारा जारी इस पोस्टर में मनीष सिसोदिया के हाथ में शराब की एक बोलत लिए हुए दिख रहे हैं, जबकि सत्येंद्र जैन अपने हाथों में कुछ नोट लिए हुए नजर आ रहे हैं। पोस्टर पर दिल्ली बीजेपी ने कैप्शन दिया है कि “सिसोदिया और सत्येंद्र तो झांकी है, इनका सरगना अरविंद केजरीवाल अभी बाकी है।”

बीजेपी के पहले कांग्रेस ने भी एक पोस्टर के जरिए आप पर हमला बोला था। कुछ दिनों पहले कांग्रेस कार्यलयों के बाहर भी पोस्टर लगे थे, जिसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री को सलाखों के बीच खड़ा हुआ दिखाया गया था। साथ ही इस पोस्टर पर एक नारा "जो भ्रष्टाचारी है, वही देशद्रोही है" लिखा हुआ भी नजर आ रहा था।

इससे पहले गुरुवार को ईडी ने सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया। ईडी से पहले सीबीआई ने उन्हें कथित शराब घोटाले के तहत गिरफ्तार किया था। ईडी ने सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई से एक दिन पहले यह कार्रवाई की।

बता दें कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को शराब घोटाले में सीबीआई ने 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था।वह पांच मार्च तक सीबीआई की पुलिस कस्टडी रिमांड में थे, वहीं छह मार्च को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। आज उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी है, लेकिन इससे ठीक पहले शराब घोटाले में ही मनी ट्रेल की जांच करते हुए ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

राम चंद्र पौडेल बने नेपाल के नए राष्ट्रपति, विपक्षी सुभाष चंद्र को 18 हजार वोटों से हराया

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नेपाली कांग्रेस के राम चंद्र पौडेल गुरुवार को नेपाल के तीसरे राष्ट्रपति चुने गए।राष्‍ट्रपति चुनाव में वह प्रधानमंत्री पुष्‍पकमल दहल 'प्रचंड' के नेतृत्व वाले आठ-दलीय गठबंधन के समर्थित उम्मीदवार थे। उन्‍होंने मुकाबले में प्रतिद्वंद्वी सुभाष चंद्र नेम्बवांग को बड़े अंतर से हराया।रामचंद्र पौडेल को 33,802 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी सुभाष चंद्र नेम्बवांग को महज 15,518 वोट हासिल हुए।नेपाल में 2008 में गणतंत्र बनने के बाद से यह तीसरा राष्ट्रपति चुनाव है।

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राम चंद्र पौडेल को नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (माओवादी सेंटर) सहित आठ दलों के गठबंधन के 214 सांसदों और 352 प्रांतीय विधानसभा सदस्यों के वोट मिले। इस चुनाव में शुरू से ही पौडेल का पलड़ा भारी माना जा रहा था, क्‍योंकि उन्‍हें सत्‍ता समर्थित 8 दलों का समर्थन हासिल था।जिनमें प्रधानमंत्री प्रचंड की पार्टी भी शामिल थी। वहीं, सीपीएन-यूएमएल के उम्मीदवार सुभाष चंद्र नेमबांग को अपनी पार्टी के अलावा सिर्फ निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन की ही उम्मीद थी।

राष्ट्रपति चुनाव में कुल 882 मतदाता हैं, जिनमें 332 सदस्य संसद के हैं जबकि 550 सदस्य सात प्रांतीय विधानसभाओं के हैं। निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता शालीग्राम ने बताया कि राष्ट्रपति चुनाव में प्रांतीय विधानसभाओं के 518 सदस्यों और संसद के 313 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

पौडेल ऐसे समय राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं जब राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व में कमजोर गठबंधन सरकार शासन कर रही है। पौडेल को राष्ट्रपति पद के चुनाव में समर्थन देने को लेकर पनपे राजनीतिक विवाद के बाद पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल ने मौजूदा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था।

नेपाल के संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि निर्वाचन की तारीख से पांच वर्ष होगी और एक व्यक्ति को इस पद पर केवल दो कार्यकाल के लिए ही चुना जा सकता है. नेपाल की मौजूदा राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी का कार्यकाल 12 मार्च को समाप्त होगा

देवेन्द्र फडणवीस ने पेश किया शिंदे सरकार का पहला बजट, किसानों को मिला बड़ा तोहफा

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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राज्य का बजट पेश किया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को 'पंचामृत' के सिद्धांत पर आधारित और किसानों, महिलाओं, युवाओं, रोजगार और पर्यावरण को समर्पित राज्य का बजट पेश किया। राज्य के किसानों को लेकर बजट में कई बड़े ऐलान किए गए। इनमें सबसे अहम ऐलान यह रहा कि सरकार हर साल किसानों को 12 हजार रुपए देगी।अब तक किसानों को छह हजार रुपए दिए जा रहे थे. अब छह हजार रुपए और मिलेंगे. इस तरह किसानों को साल में बारह हजार रुपए दिए जाएंगे।

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-वित्तमंत्री फडणवीस ने केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तर्ज पर नमो किसान सम्मान निधि की योजना का ऐलान किया। इसी योजना के तहत किसानों को साल में केंद्र के छह हजार रुपए की सहायता के साथ महाराष्ट्र सरकार की ओर से छह हजार रुपए दिए जाएंगे। इस तरह किसानों के खाते में साल में बारह हजार की रकम मिल पाएगी। फिलहाल किसानों के खाते में हर तीन महीने में दो हजार रुपए केंद्र सरकार की ओर से जमा होते हैं। इसी तर्ज पर अब महाराष्ट्र सरकार भी अब हर तीन महीने में किसानों के खाते में दो हजार रुपए जमा करेगी।इससे राज्यसरकार के खजाने में 6900 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा लेकिन 1.15 करोड़ किसान परिवार को लाभ होगा।

-इसके अलावा शिंदे सरकार की ओर से देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया किसानों को फसल बीमा योजना के लिए अब सिर्फ 1 रुपया देना होगा। बाकी की रकम राज्य सरकार भरेगी। इसके अलावी 14 आत्महत्या प्रभावित जिलों के किसानों को पीडीएस के माध्यम से वितरित अनाज के बदले प्रति वर्ष ₹1800 का नकद लाभ मिलेगा।

-बेमौसम बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए ड्रोन और उपग्रह की मदद से ई-पंचनामा आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने मछुआरों को 5 लाख रुपये के बीमा कवर की घोषणा की है।

-महात्मा फुले जन स्वास्थ्य योजना का दायरा डेढ़ लाख से बढ़ा कर 5 लाख रुपए तक किया गया। यानी अब पांच लाख रुपए तक के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। इसके अलावा राज्य भर में 700 बालासाहेब ठाकरे दवाखाने खोले जाएंगे। फडणवीस ने कहा कि राज्य के 29 हजार युवाओं को रोजगार दिया। जल्दी ही राज्य में 20 हजार आंगनवाड़ी सेविकाओं को भर्ती की जाएगी। डिप्टी सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की घोषणा की है।

-आठवीं से दसवीं के छात्रों के लिए 7 हजार 5 सौ रुपए की स्कॉलरशिप दी जाएगी। मुंबई के 200 स्कूलों में कौशल विकास का खास कार्यक्रम शुरू किया जाएगा

-मोदी आवास योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत अगले तीन वर्षों में 12,000 करोड़ रुपये खर्च करके 10 लाख किफायती घर बनाए जाएंगे। इनमें से तीन लाख 2023-24 में बनेंगे। महाराष्ट्र में ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए एक कल्याण बोर्ड शुरू किया जाएगा।

-महाराष्ट्र सरकार नागपुर में 1,000 एकड़ के भूखंड पर एक लॉजिस्टिक हब विकसित करेगी। मुंबई महानगर क्षेत्र में नियोजित 337 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क में से 46 किलोमीटर मेट्रो लाइन पहले ही चालू हो चुकी है। इस वर्ष 50किमी लाइनें चालू होने वाली हैं. इसके साथ साथ फडणवीस ने मराठी भाषा विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा, महाराष्ट्र में नए अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट और किसानों के खाते में ₹12000 सालाना और किसानों को एक रुपये में फसल बीमा का ऐलान किया है।

दिल्ली सरकार में 2 नए मंत्रियों सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने ली शपथ, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद से खाली थे पद

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 आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज और विधायक आतिशी ने मंत्री पद की शपथ ले ली है। दोनों ही नेताओं को दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मंत्री पद की शपथ दिलाई है। फिलहाल सौरभ भारद्वाज और आतिशी को पोर्टफोलियो नहीं दिया गया है, लेकिन जल्द ही आम आदमी पार्टी इसकी भी घोषणा कर देगी।

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को आतिशी और सौरभ भारद्वाज को दिल्ली की कैबिनेट में नियुक्त किए जाने की अनुमति दी जाती है। CM केजरीवाल ने दोनों नेताओं को कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के पास भेजा था।

मनीष सिसोदिया ने हाल ही में दिया था इस्तीफा

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से सीबीआई ने 8 घंटे तक लंबी पूछताछ करके गिरफ्तार किया था। इसके बाद सिसोदिया को सीबीआई कस्टडी में भेजा गया। इसी दौरान सिसोदिया ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। सिसोदिया के साथ-साथ सत्येंद्र जैन ने भी इस्तीफा दिया था। सीबीआई की कस्टडी खत्म होने के बाद सिसोदिया को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सिसोदिया और जैन के इस्तीफे के बाद ही सौरभ भारद्वाज और आतिशी को कैबिनेट में शामिल किया जा रहा हैं।