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Jun 21 2022, 15:44

एसआईटी छात्र नेता की मौत के मामले की जांच जारी रखेगी : कलकत्ता उच्च न्यायालय

कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि छात्र नेता अनीस खान की मौत के मामले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपना कार्य जारी रखेगा. इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने अनीस के पिता सलीम खान का वह अनुरोध अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की मौत के मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराने का आग्रह किया था. सलीम खान ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि वह अपने बेटे की मौत के मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराना चाहते हैं, इसलिए इस मामले को राज्य पुलिस के बजाय अन्य एजेंसी को स्थानांतरित किया जाए.

गौरतलब है कि अनीस हावड़ा के आमटा स्थित अपने आवास में तीसरी मंजिल से गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. घटना के समय वहां पुलिस मौजूद थी। न्यायमूर्ति राजशेखर मन्था ने कहा कि इस मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपने की जरूरत नहीं है और विशेष जांच दल इसकी जांच जारी रखेगा. विशेष जांच दल ने उस होमगार्ड और एक नागरिक स्वयंसेवक को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304ए (लापरवाही के कारण मौत) के तहत मामला दर्ज किया है, जो अनीस को खोजते हुए कथित तौर पर आमटा स्थित उसके आवास की दूसरी मंजिल पर गए थे.


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Jun 20 2022, 21:05

स्कूल भर्ती: प्राथमिक शिक्षा बोर्ड से शीर्ष अधिकारी को हटाने का निर्देश

कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को आदेश दिया कि माणिक भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया जाए. अदालत ने साथ ही भट्टाचार्य को सरकार प्रायोजित एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों की कथित अवैध नियुक्ति के संबंध में मंगलवार को उसके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया. आदेश पारित करने वाले न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने कम से कम 269 प्राथमिक शिक्षकों की कथित अवैध नियुक्ति की अदालत की निगरानी में सीबीआई के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच का पहले ही आदेश दिया था.

उन्होंने राज्य सरकार को कोई प्रतिस्थापन मिलने तक बोर्ड सचिव रत्ना चक्रवर्ती बागची के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का निर्देश भी दिया. न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रूप में कम से कम 269 उम्मीदवारों की कथित अवैध नियुक्ति के संबंध में 13 जून को सीबीआई को बोर्ड के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच शुरू करने का निर्देश दिया था. इसने भट्टाचार्य और बागची को उसी दिन सीबीआई के सामने पेश होने का आदेश दिया था. 15 जून को अदालत ने नियुक्तियों की जांच के लिए सीबीआई की एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था.


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Jun 20 2022, 19:15

विधानसभा में नुपुर शर्मा की टिप्पणी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई कथित विवादास्पद टिप्पणी की निंदा की गई है. राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव को पेश किए जाने का कार्यक्रम पहले से तय नहीं था और इसमें किसी का नाम नहीं लिया गया है, क्योंकि मामला विचाराधीन है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा, ‘‘मैं कुछ नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा करती हूं. ये टिप्पणियां लोकसभा चुनाव से पहले समुदायों के बीच नफरत फैलाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं.'' मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा कि भाजपा उकसाने, भड़काने और घृणा की राजनीति का रास्ता अपना रही है.

उन्होंने कहा कि जब हमारे राज्य में इस मामले को लेकर हिंसा हुई तो हमने कार्रवाई की. लेकिन ऐसा कैसे हुआ कि इस महिला (नूपुर शर्मा) की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. मुझे पता है कि उसकी गिरफ्तारी नहीं होगी. ममता ने कहा कि नुपुर शर्मा ने कोलकाता पुलिस से चार हफ्ते का समय मांगा है. गौरतलब है कि सोमवार को नुपुर शर्मा को कोलकाता पुलिस के सामने पेश होना था. वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा से बहिर्गमन किया.


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Jun 20 2022, 19:13

गर्मियों की छुट्टियां बढ़ाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

पश्चिम बंगाल में गर्मी की छुट्टियों को 16 से बढ़ाकर 26 जून तक किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ लगाई गई जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ में दाखिल की गई इस याचिका में आवेदक ने कहा था कि फिलहाल मौसम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बारिश की शुरुआत हो गई है और तापमान नहीं बढ़ेगा. ऐसे में गर्मी की छुट्टियों का कोई औचित्य नहीं है. इसके साथ ही बच्चे मिड-डे मील के अपने अधिकार से भी वंचित हो रहे हैं.

दूसरी ओर अधिवक्ता सम्राट सेन ने कहा कि जब छुट्टी की विज्ञप्ति जारी की गई थी तब राज्य के कई जिलों में तापमान 41 से 43 डिग्री सेल्सियस था. इसीलिए बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए छुट्टियां बढ़ाई गईं. इसके अलावा मिड डे मील बंद नहीं किया गया है बल्कि बच्चों के अभिभावकों को दिया जा रहा है जो बच्चों को मिल रहा है.

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या आप लोग अभी भी गर्मी की छुट्टियों को और बढ़ाना चाहते हैं. इस पर सम्राट सेन ने कहा कि सबकुछ निर्भर करता है मौसम विभाग की अधिसूचना पर. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई की मुल्तवी कर दी और फैसला सुरक्षित कर लिया है.


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Jun 20 2022, 19:11

केके की अस्वाभाविक मौत मामले में हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा हलफनामा

कोलकाता : मशहूर सिंगर केके की कोलकाता के राजकीय नज़रुल मंच में परफॉर्मेंस के दौरान हुई अस्वाभाविक मौत मामले में सीबीआई जांच संबंधी याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई है. न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद तीन सप्ताह के अंदर राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट तलब की है.

केके की मौत में भारी लापरवाही का आरोप लगा कर दो याचिकाएं हाई कोर्ट में दाखिल हुई थीं. इनमें से एक याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई है. अधिवक्ता सौम्य शुभ्र रॉय, सायन बनर्जी और इम्तियाज अहमद ने याचिकाएं लगाई थीं. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता सोमेंद्र नाथ मुखर्जी ने पक्ष रखते हुए कहा कि मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ड अटैक को मुख्य वजह बताई गई है.

अभी तक घटना की जांच कर रही कोलकाता पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कुछ भी अस्वाभाविक नहीं पाया है. परिवार ने भी जांच पर सवाल नहीं उठाया है. परिवार ने राज्य सरकार अथवा जांच के खिलाफ याचिका नहीं लगाई है.


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Jun 18 2022, 20:34

बांग्ला आवास योजना में शामिल करना होगा प्रधानमंत्री का नाम, नहीं तो बंद होगा फंड का आवंटन

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर केंद्रीय योजनाओं के नाम बदलने के आरोप लगते रहे हैं. बंगाल भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य की टीएमसी की सरकार केंद्रीय परियोजना का नाम बदलकर आम आदमी को गुमराह कर रही है. अब केंद्र सरकार ने राज्य को सूचित किया है कि अगर आवास योजना में प्रधानमंत्री का नाम शामिल नहीं होता है तो केंद्र इस परियोजना के लिए कोई और पैसा नहीं देगी. केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से राज्य सचिवालय नबन्ना को एक पत्र भेजा गया है.

बता दें कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से राज्य में बांग्ला आवास योजना परियोजना शुरू की गई थी, उपभोक्ताओं को परियोजना का लाभ तभी मिलता है, जब उनके पास घर न हो या मिट्टी का घर हो. आरोप है कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का नाम बदलकर बांग्ला आवास योजना कर दी है.

जानकारी के अनुसार नाम परिवर्तन को लेकर 31 अगस्त 2016 को राज्य को पत्र भेजा गया था. उसके बाद 12 मई 2022 को एक और पत्र दिया गया है. उसके बाद भी केंद्र ने कहा है कि राज्य से अच्छा रिस्पांस मिले बिना इस बार पैसा नहीं दिया जाएगा. वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र के नए प्रोजेक्ट ‘अबास प्लस’ के लिए बंगाल को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा. हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि केंद्र की ओर से अभी तक इस साल की आवास योजना के लक्ष्य की घोषणा नहीं की गई है. केंद्र द्वारा नबन्ना को भेजे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नए लक्ष्य तब तक नहीं दिए जाएंगे जब तक कि राज्य बंगाल के बजाय प्रधानमंत्री का नाम योजना में नहीं जोड़ा जाता है.

संयोग से तृणमूल सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह से दिल्ली में मुलाकात की थी. ऐसे सवाल हैं कि आवास योजनाओं के लिए राज्य का पैसा क्यों रोका गया है? उसके बाद गिरिराज सिंह के मंत्रालय ने नबन्ना को एक पत्र भेजा. केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक पत्र में यह भी कहा गया है कि नाम परिवर्तन राज्य में केंद्रीय परियोजना के नियमों के विपरीत है. पत्र में यह भी उल्लेख है कि राज्य में आवास योजना के नाम पर ‘प्रधानमंत्री’ की जगह ‘बांग्ला’ रखकर उल्लंघन किया गया है. यह आरोप प्रदेश भाजपा लंबे समय से लगा रही है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार बार-बार विभिन्न केंद्रीय परियोजनाओं के नाम बदलने की बात कह चुके हैं. विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. आरोप यह था कि तीन केंद्रीय परियोजनाओं – प्रधानमंत्री आवास योजना, निर्मल भारत और प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना को क्रमशः बांग्ला आबास योजना, मिशन निर्मल बांग्ला और बांग्ला ग्रामीण सड़क योजना के नाम से लागू किया जा रहा था. शुभेंदु अधिकारी ने यह भी दावा किया कि यह ‘जानबूझकर और राजनीति से प्रेरित’ है.


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Jun 17 2022, 17:25

तृणमूल विधायक ने शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस जारी किया, लगाया अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा में वापसी होने के साथ-साथ विधानसभा में छींटाकशी का दौर शुरू हो चुका है. टीएमसी के नैहाटी विधायक पार्थ भौमिक ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर विधानसभा में उनके अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. विशेषाधिकार प्रस्ताव पारित कर पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय ने जांच समिति को संबोधित किया.

विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी के विरुद्ध अधिकारों के हनन का आरोप लगाया गया है. तृणमूल विधायक पार्थ भौमिक ने आरोप लगाया है कि उनके अधिकारों का हनन किया गया है. बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय ने बताया कि शुभेंदु का बयान प्रिविलेज कमेटी को भेज दिया गया है. विशेषाधिकार समिति रिपोर्ट देगी.

शुभेंदु अधिकारी ने 15 जून को विधानसभा में कहा, 'स्पीकर कहते हैं कि मुकुल रॉय बीजेपी में हैं और मुकुल रॉय खुद जमीनी स्तर पर हैं. स्पीकर निगल या उल्टी नहीं कर सकते. बता दें कि मुकुल रॉय के दलबदल मामले के बारे में शुभेंदु अधिकारी ने 15 जून के विधानसभा हॉल में कहा कि स्पीकर का कहना है कि मुकुल रॉय बीजेपी में हैं और मुकुल रॉय खुद टीएमसी में हैं. स्पीकर निर्णय लेने में असमर्थ है.

विशेषाधिकार नोटिस जारी किया

दरअसल, वह नहीं जानते कि उन्हें क्या चाहिए. टीएमसी विधायक पार्था भौमिक ने शुभेंदु अधिकारी की टिप्पणी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस जारी किया. अध्यक्ष ने कहा कि शुवेंदु अधिकारी का बयान विशेषाधिकार समिति को भेजा गया था. वह अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे. पिछले हफ्ते, पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कहा कि मुकुल रॉय भाजपा विधायक हैं. अध्यक्ष का यह निष्कर्ष सुवेंदु अधिकारी  द्वारा उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका के बीच आया है, जिसमें मुकुल रॉय के टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी.

हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से मामले की समीक्षा करने को कहा था. बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा कि मुकुल रॉय भाजपा विधायक बने रहेंगे.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने दिया था एक महीने की समय सीमा

बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष विमान बंदोपाध्याय ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुझे इस मामले को निपटाने के लिए एक महीने की समय सीमा दी थी. मेरा स्पष्ट रूप से यह विचार है कि याचिकाकर्ता याचिका में दिए गए अपने तर्क के समर्थन में उसके द्वारा पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की सामग्री को साबित करने में विफल रहा है. ऐसे में मेरे पास 11.2.2022 को पूर्व में घोषित उसी निर्णय को बरकरार रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है.

मुकुल रॉय ने जून 2021 में टीएमसी में फिर से शामिल होने के लिए भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीत हासिल की थी. इससे पहले, सुवेंदु अधिकारी ने उच्च न्यायालय में एक मामला दायर कर रॉय को पहले पीएसी के अध्यक्ष के पद से हटाने और दूसरी बार विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की थी. कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले को समाप्त करने के लिए कहा था कि मुकुल रॉय भाजपा विधायक थे या नहीं.


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Jun 17 2022, 17:22

*सोमवार को विधानसभा परिसर में मंत्रिमंडल की बैठक करेंगी सीएम

कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगामी सोमवार को विधानसभा की कार्रवाई में शामिल होने के लिए पहुंचेंगी और इसी दिन विधानसभा परिसर में ही मंत्रिमंडल की बैठक भी करेंगी. जानकारी के अनुसार, उक्त बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये जा सकते हैं. इसलिए सोमवार को सभी मंत्रियों व विधायकों को विधानसभा में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है. जानकारी के अनुसार, विधानसभा में मानसून सत्र चल रहा है, जिसमें राज्यपाल के स्थान पर मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने के लिए कई विधेयक भी पारित हुए हैं.

लेेकिन अन्य कार्यक्रमों की व्यवस्तता के कारण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब तक मानसून सत्र के दौरान सदन में नहीं पहुंची हैं. राज्य सचिवालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सारा दिन विधानसभा में सदन की कार्रवाई में शामिल होंगी और इस दिन मुख्यमंत्री राज्य के विभिन्न मुद्दों पर सदन में अपना बयान भी पेश करेंगी.


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Jun 17 2022, 17:20

स्वास्थ्य साथी कार्ड के क्रियान्वयन की जांच के लिए होगा औचक निरीक्षण

कोलकाता : स्वास्थ्य साथी योजना को लेकर शिकायतों का दौर कम होने का नाम नहीं ले रहा है. लोगों को स्वास्थ्य साथी कार्ड का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसे लेकर राज्य के अधिकारी निजी अस्पताल व नर्सिंग होम का दौरा करेंगे. राज्य सरकार ने राज्य व जिला स्तर पर विशेष निगरानी टीम का गठन किया है. बताया गया है कि राज्य के हेल्थ सर्विसेस विभाग के निदेशक के नेतृत्व में राज्य स्तरीय व प्रत्येक जिले में चीफ मेडिकल ऑफिसर को चेयरमैन बनाते हुए जिला स्तर पर निगरानी टीम का गठन किया जायेगा.

बताया गया है कि प्रत्येक निगरानी टीम उनके क्षेत्र में स्थित सभी निजी अस्पताल व नर्सिंग होम का औचक निरीक्षण करेंगे. उक्त निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में स्वास्थ्य साथी कार्ड के तहत रोगियों को परिसेवा दी जा रही है या नहीं, इसकी जांच करेंगे. सिर्फ यही नहीं, किन-किन अस्पताल या नर्सिंग होम का निरीक्षण हो चुकी है, इसे पोर्टल पर अपलोड करना होगा.

वहीं, जिस भी अस्पताल या नर्सिंग होम के खिलाफ स्वास्थ्स साथी कार्ड स्वीकार नहीं करने का मामला सामने आता है तो यह टीम उक्त अस्पताल के खिलाफ कानून के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करेगी. गौरतलब है कि इसे लेकर राज्य के मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, सचिव, सभी जिलों में जिलाधिकारियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की और बैठक में मुख्य सचिव ने प्रत्येक माह में कम से कम छह अस्पताल का औचक निरीक्षण करने का आदेश दिया है.


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Jun 16 2022, 17:39

पैगंबर टिप्पणी: अदालत ने विरोध प्रदर्शन नियंत्रण से बाहर होने पर केंद्रीय बलों को बुलाने को कहा

कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने का निर्देश दिया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई विवादास्पद टिप्पणी पर किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा न हो.

अदालत ने सरकार से यह भी कहा कि वह जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों को बुलाये. शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक और निजी संपत्तियों में तोड़फोड़ की जिसके बाद हावड़ा जिले और राज्य में कुछ अन्य स्थानों पर नौ और 10 जून को कई घंटे के लिए रास्ते और ट्रेन की पटरियों को अवरुद्ध कर दिया गया था. कई जनहित याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं द्वारा सेना या केंद्रीय बलों की तैनाती के अनुरोध के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किया. उक्त याचिकाओं में आशंका व्यक्त की गई थी कि हिंसक विरोध की घटनाएं फिर से हो सकती हैं.

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति आर भारद्वाज ने निर्देश दिया, ‘‘हम राज्य के अधिकारियों को अग्रिम रूप से जमीनी स्थिति का आकलन करने और केंद्रीय बलों को बुलाने के लिए कदम उठाने का निर्देश देते हैं....'' पीठ ने राज्य के अधिकारियों को हिंसा और संपत्ति की तोड़फोड़ की घटनाओं के वीडियो फुटेज एकत्रित करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए त्वरित कदम उठाने का निर्देश भी दिया.

याचिकाकर्ताओं ने बुधवार को जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आरोप लगाया था कि शांतिपूर्ण सभा की आड़ में बड़ी सभा हो रही है जिसमें भड़काऊ नारे लगाए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि तोड़फोड़ के संबंध में दर्ज प्राथमिकी में निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है. अदालत ने 13 जून को भी उम्मीद जतायी थी कि राज्य के अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे कि कोई अप्रिय घटना न हो और शांति बनी रहे. उसने कहा था कि अगर राज्य पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहती है तो केंद्रीय बलों को बुलाने के लिए कदम उठाए जाएंगे.