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Oct 24 2021, 10:10

यूपी में दस डीएम और 14 आइपीएस अफसरों के तबादले, पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी

  


लखनऊ- विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल होगा। हालांकि पहले डीजी व एडीजी समेत अन्य कई वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों को जल्द नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। चार रेंज की कमान बदले जाने के बाद अब कुछ जोन में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी ओर जिलों में लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। वहीं शन‍िवार को योगी सरकार ने दस डीएम और 14 आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है। 

शासन ने नीतीश कुमार को अयोध्या, संजय सिंह को फर्रुखाबाद, मानवेंद्र को बरेली, रविंद्र कुमार को झांसी, सीपी सिंह को बुलंदशहर, हर्षिता माथुर को कासगंज, सत्येंद्र कुमार को महाराजगंज, मनोज कुमार को महोबा, नेहा प्रकाश को श्रावस्ती और टीके शिबू को सोनभद्र का डीएम बनाया है। जबकि अयोध्‍या के डीएम अनुज कुमार झा और महाराजगंज के डीएम उज्ज्वल कुमार को प्रतीक्षा सूची में डाला गया है। वहीं सुधीर कुमार सिंह को SSP आगरा, अनुराग आर्य को आजमगढ़, आकाश तोमर को सहारनपुर, अनुराग वत्स को बाराबंकी, अंकुर अग्रवाल को चंदौली, जय प्रकाश सिंह को इटावा, दिनेश त्रिपाठी को उन्नाव, सुधीर कुमार सिंह को आगरा भेजा गया है।

  

दीपावली के बाद जिलों में तैनात कुछ अधिकारियों को भी इधर से उधर किया जा सकता है। बीते दिनों आइपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, बीके मौर्य, संदीप सालुंके व एसएन साबत एडीजी से डीजी के पद पर पदोन्नति पा चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में डीजी स्तर के 14 व एडीजी स्तर के 48 अधिकारी तैनात हैं। डीजी पावर कारपोरेशन व डीजी मानवाधिकार के पद खाली हैं। जबकि डीजी फायर सर्विस आनन्द कुमार के पास डीजी कारागार, डीजी इंटेलीजेंस डीएस चौहान के पास डीजी विजिलेंस व डीजी पुलिस भर्ती बोर्ड आरके विश्वकर्मा के पास डीजी ईओडब्ल्यू का अतिरिक्त प्रभार है। लोक शिकायत से एडीजी तनुजा श्रीवास्तव के हटने के बाद यहां एडीजी स्तर के दूसरे अधिकारी की तैनाती नहीं की गई है। एंटी करप्शन से एडीजी जकी अहमद को हटाए जाने के बाद एडीजी आवास निगम हरिराम शर्मा को एडीजी एंटी करप्शन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इसके अनुरूप कई पदों डीजी व एडीजी स्तर के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले जोन व जिला स्तर पर भी कई फेरबदल संभावित हैं। इसे लेकर शासन स्तर पर मंथन चल रहा है। वहीं डीजीपी मुख्यालय स्तर पर जिलों में लंबे समय से तैनात सिपाही, मुख्य आरक्षी, उपनिरीक्षक, निरीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक व अपर पुलिस उपाधीक्षकों को भी सूचीबद्ध किया जा रहा है। 

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Oct 23 2021, 15:01

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर उत्पीड़न मामले पर मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर से मांगा जवाब

  


लखनऊ- पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के उत्पीड़न मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अमिताभ ठाकुर की पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर की शिकायत का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर से जवाब तलब किया है।

डॉ. नूतन ठाकुर ने अपने पति की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना बताते हुए आयोग से शिकायत की थी। नूतन ठाकुर ने आरोप लगाया था कि अमिताभ ठाकुर को घर से जबरन ले जाया गया और पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया। उन्होंने जिला कारागार लखनऊ में अमिताभ ठाकुर पर हो रहे अत्याचारों व मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी जिक्र किया है। 

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Oct 23 2021, 15:00

माफिया अतीक अहमद के बेटे उमर की संपत्ति कुर्क करने का आदेश

  


उत्तर प्रदेश में माफियाओं पर शिकंजा कसता ही जा रही है। सीबीआई की विशेष अदालत ने लखनऊ के एक प्रॉपर्टी डीलर से जबरन वसूली के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे उमर की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है। 

बता दें कि रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि देवरिया जेल में बंद माफिया डॉन अतीक ने गोमतीनगर कार्यालय से उसका अपहरण किया था और उसे जेल ले जाया गया था। जहां उसकी पिटाई थी और उससे फिरौती ली गई थी। उस वक्त ये मामला काफी चर्चित हुआ था, क्योंकि मोहित को जेल ले जाया गया था। लिहाजा इस मामले में पुलिस की मिली भगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मोहित ने बताया कि अतीक ने उसे सादे स्टांप पेपर पर साइन करने को कहा और अपने बेटों उमर के साथ मिलकर फारूक, गुलाम और इरफान ने उसे पिस्टल और लोहे की रॉड से पीटा। अतीक और उसके बेटे ने उसकी 45 करोड़ की संपत्ति को अपने नाम कराई थी।

  

इस मामले में पहले लखनऊ पुलिस जांच कर रही थी और पुलिस ने अतीक अहमद समेत आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन इस मामले उस वक्त बड़ा मोड़ आया जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। वहीं सीबीआई ने इस मामले में अतीक अहमद, फारूक, जकी अहमद, मोहम्मद को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। फिलहाल अतीक अहमद गुजरात की जेल में बंद है। 

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Oct 23 2021, 14:58

दिवाली पर यूपी में होगी नौकरियों की बहार, 30 अक्टूबर से लग रहा रोजगार मेला

  


लखनऊ- दिवाली पर यूपी सरकार प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को सौगात देने जा रही है। 30 अक्टूबर से राजधानी में रोजगार मेले का आयोजन हो रहा है।  30 अक्टूबर को बख्शी का तालाब में लगने वाले वृहद रोजगार मेले में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या नियुक्ति पत्र देंगे।

मेले में 50 से अधिक कंपनियां दो हजार से अधिक युवाओं को नौकरी का तोहफा देंगी। रोजगार मेला सुबह 10:00 बजे से होगा शुरू। मेले में हाईस्कूल से लेकर स्नातक और आइटीआइ पास को भी शामिल किया जाएगा।इसके लिए सेवायोजन की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।

  

बेरोजगार युवा सेवायोजन की वेबसाइट sewayojan.up.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन के साथ ही अपना पंजीयन भी करा सकते हैं। योग्यता के अनुरूप वेतन दिया जाएगा। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से 30 अक्टूबर को बख्शी का तालाब स्थित एसआर ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन परिसर में सुबह 10 बजे से मेला लगेगा। कोरोना संक्रमण की गाइडलाइन के अनुरूप मेला लगेगा। सभी शैक्षिक दस्तावेजों और आधार कार्ड व फोटो के साथ युवाओं के मेले में आना होगा। 

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Oct 23 2021, 14:10

लखीमपुर खीरी हिंसा में तीन और गिरफ्तार, अब तक 13 लोग दबोचे गए

  


लखनऊ- लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को उपद्रव के बाद हिंसा में चार किसान सहित आठ लोगों की मृत्यु के मामले में पुलिस ने शनिवार को तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हिंसा मामले में एसआइटी ने बेहद सक्रिय हो गई है। इस केस में मुख्य आरोपित मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा मोनू सहित अब तक 13 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें से आठ लोग पुलिस की रिमाड पर भी रहे थे।

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया के हिंसा के मामले में इस केस की जांच कर रही एसआइटी ने शनिवार को तीन अन्य लोगों मोहित त्रिवेदी, धर्मेन्द्र सिंह तथा रिंकू राणा को गिरफ्तार किया है। इसके ऊपर आरोप है कि यह तीनों घटना के समय स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार थे। इस तरह से तिकुनिया हिंसा के मामले में अब तक कुल 13 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

  

एसआइटी इससे पहले किसानों की हत्या से संबंधित दर्ज मुकदमे में दस आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। इनमें से गंभीर रूप से घायल लवकुश व आशीष पाण्डेय का पुलिस लाइंस अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि अन्य आठ लखीमपुर खीरी जिला जेल में बंद हैं। अरोपितोंं में से एक साथ गिरफ्तारी न हो पाने के कारण चार आरोपितों से अब तक पूछताछ हो चुकी हैं, जिनके बयानों में विरोधाभाष है। एसआइटी ने इसी विरोधाभाष को दूर करने के लिए अब शनिवार को आठ आरोपितों से एक साथ पूछताछ की रणनीति बनाई है। अब सभी प्रमुख आरोपितों का आमना-सामना होने से कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। 

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Oct 23 2021, 14:09

शिक्षकों की मांग के बाद यूपी बोर्ड को दूसरी बार बढ़ानी पड़ी 10वीं, 12वीं परीक्षा के आवेदन की तारीख

  

 

लखनऊ- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् 2022 की 10वीं-12वीं परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि दूसरी बार बढ़ाई गई है। इससे पहले एक महीने पहले 23 सितंबर को अंतिम तिथी बढ़ाकर 19 अक्टूबर की गई थी. वहीं, यूपी बोर्ड ने सत्र 2021-22 में दसवीं और बारहवी के परीक्षा फॉर्म भरने की तारीख 8 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।

  

शिक्षकों ने की थी मांग 
स्कूलों के प्रबंधको और शिक्षकों की मांग पर बोर्ड ने फिर से परीक्षा फॉर्म भरने की तारीख बढ़ाई है. 9 से 14 नवंबर तक छात्र-छात्राओं के विवरण जांचकर उसे अपडेट करने का अवसर प्रधानाचार्यों को मिलेगा. इस दौरान किसी नवीन छात्र का विवरण अपलोड नहीं किया जाएगा. उसके बाद प्रधानाचार्य पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली व कोषपत्र संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 18 नवंबर तक भेजेंगे।

इतने लाख छात्रों का हुआ पंजीकरण
तमाम स्कूलों के प्रधानाचार्य अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग कर रहे थे. शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने भी यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल को पत्र लिखकर कक्षा 9 व 11 के अग्रिम पंजीकरण की तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था।19 अक्टूबर तक हाईस्कूल के लिए 27.70 लाख छात्र-छात्राओं का पंजीकरण हुआ था जिनमें लगभग 14 हजार प्राइवेट छात्र थे। वहीं, इंटर में 23.42 लाख विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था जिनमें 1.14 लाख प्राइवेट छात्र थे. कक्षा 9 में 31.14 लाख और 11 में 26.04 लाख बच्चों का अग्रिम पंजीकरण हुआ था. पिछले साल 12वीं के 29 लाख 94 हजार 312 और 10वीं के 26 लाख 9 हजार 501 कुल 56 लाख 3 हजार 813 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था।

पिछले वर्ष यानि कि 2021 की बात करें तो बोर्ड परीक्षाएं फरवरी-मार्च में संभावित थीं. लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के चलते परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था. इस वजह से 10वीं के छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन, जबकि 12वीं के छात्रों को 30:30:40 के फॉर्मूले पर पास किया गया था। 

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Oct 23 2021, 14:08

भगवान बुद्ध के धातु अवशेष लेकर फर्रुखाबाद रवाना हुए श्रीलंका के बौद्ध धर्मगुरू

  


लखनऊ - श्रीलंका से आए भगवान बुद्ध के धातु अवशेष (अस्थि अवशेष) को बौद्व धर्मगुरु कड़ी सुरक्षा में कुशीनगर से गोरखपुर एयरपोर्ट लेकर पहुंचे। एसपी सिटी की अगुवाई में 20 सदस्यीय शिष्टमंडल का स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर 30 मिनट रुकने के बाद बौद्ध धर्मगुरु एयर इंडिया की फ्लाइट से धातु अवशेष को लेकर लखनऊ रवाना हुए, जहां से फर्रुखाबाद के संकसा ले जाया जाएगा।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में बौद्ध धर्मगुरु धातु अवशेष (अस्थि अवशेष) को श्रीलंका से लेकर कुशीनगर आए थे। जिसे पहले एयरपोर्ट पर रखा गया, फिर वहां से महापरिनिर्वाण बुद्ध विहार ले जाया गया। वहां धातु अवशेष की विशेष पूजा की गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद श्रीलंका से आया शिष्टमंडल धातु अवशेष को लेकर गोरखपुर चला आया।

  

तीन द‍िन गोरखपुर में रहा श‍िष्‍टमंडल
यहां तीन दिन तक होटल रेडीसन ब्लू में रहा। इसके बाद एसपी सिटी सोनम कुमार कड़ी सुरक्षा में बौद्ध धर्मगुरु के साथ धातु अवशेष को लेकर गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचे। जहां एयरपोर्ट निदेशक प्रभाकर बाजपेई ने स्वागत किया।एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि भगवान बुद्ध के धातु अवशेष को राष्ट्राध्यक्ष प्रोटोकाल मिला है। जिसको लेकर एयरपोर्ट के अंदर और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

विमान में धातु अवशेष के लिए अलग सीट
धातु अवशेष का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है। मूर्ति पूजा से पहले इसी की पूजा की जाती थी। जहां पर इसे रखा जाता है, उसे धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। भारत सरकार में धातु अवशेष को राष्ट्राध्यक्ष का प्रोटोकाल मिला है। एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद प्रोटोकाल का पालन करते हुए धातु अवशेष को पहले कुर्सी पर रखा गया। उसके बाद बौद्ध धर्मगुरु और शिष्टमंडल के सदस्य बैठे। विमान में भी धातु अवशेष को पहले सबसे आगे की सीट पर रखा गया, उसके बाद शिष्टमंडल के लोग बैठे।

होटल में रहा सख्त पहरा
धातु अवशेष की सुरक्षा को लेकर होटल रेडिसन ब्लू में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।कमरे के बाहर और परिसर में सिपाही के साथ ही एलआइयू की टीम मुस्तैद रही।इस दौरान हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी गई। 

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Oct 23 2021, 13:26

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माफियाओं से मुक्त कराई जमीन पर योगी सरकार बनाएगी अपने कर्मचारियों का आशीयाना


लखनऊ – चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपनी जनता पर सौगातों की बौछार कर रही है। अब राज्य सरकान ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। सरकार माफियाओं से मुक्त कराई गई पर अपने कर्मचारियों के लिए आवास बनाने का प्लान कर रही है। सीएम ने इस संबंध में आवास विभाग से योजना का प्रस्ताव मांगा है।

  


शुक्रवार को सरकारी अधिकारियों के साथ एक बैठक कर योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह माफियाओं की खाली कराई गई जमीन पर जल्द आशियाओं का निर्माण करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास मूलभूत आवश्यकता है। हर परिवार को आवास मिलना ही चाहिए।दरअसल योगी सरकार ने बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद बदन सिंह जैसे कई माफियाओं से अवैध भूमि का कब्जा मुक्त करवाया था और इन्ही जमीनों पर अब सरकारी आवास बनाने की तैयारी हो रही है।

बता दें कि यूपी में अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य सरकार की कोशिश है कि इससे पहले ही इस योजना को अमलीजामा पहनाया जा सके।  सरकार ने साफ कर दिया है कि वह समूह ‘सी’ और ‘डी’ कर्मचारियों के लिए भी सस्ती और किफायती आवास का निर्माण करेगी।  मुक्त हुई भूमि पर पत्रकारों और वकीलों के लिए भी सस्ते आवास तैयार किए जाने की योजना है। सीएम ने आवास विभाग को जल्द प्रस्ताव बना कर भेजने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद भूमाफिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद प्रदेश में चार स्तरीय एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन कर कार्यवाही शुरू की गई थी। राजस्व विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 15 अगस्त तक करीब 62423.89 हेक्टेयर यानि 1,54,249 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया है। साथ ही राजस्व विभाग ने 2464 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित करते हुए 187 भूमाफियाओं को जेल भेजा है और 22,992 राजस्व वाद, 857 सिविल वाद दर्ज करते हुए 4407 एफआईआर कराई गई है। माफियाओं से मुक्‍त कराई गई इन्‍हीं जमीनों पर अब सरकार गरीबों और कर्मचारियों के लिए आवास बनाने जा रही है। 

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Oct 23 2021, 13:19

परिषदीय स्कूलों के बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे भेजेगी सरकार 1100 रुपए

  


लखनऊ- उत्तर प्रदेश के परिषदीय और अशासकीय सहायताप्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के 1.6 करोड़ से अधिक बच्चों को यूनिफार्म, स्वेटर, जूता-मोजा और स्कूल बैग देने की बजाय सरकार अब इन वस्तुओं को खरीदने के लिए बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में धनराशि भेजेगी। हर बच्चे के लिए अभिभावक के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत 1100 रुपये भेजे जाएंगे। इस तरह अभिभावकों के खातों में लगभग 1800 करोड़ रुपये की रकम भेजी जाएगी। शुक्रवार को योगी कैबिनेट ने बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म मुहैया कराने के लिए प्रति जोड़ी 300 रुपये की दर से 600 रुपये, एक स्वेटर के लिए 200 रुपये, एक जोड़ी जूता व दो जोड़ी मोजे के लिए 125 रुपये और एक स्कूल बैग के लिए 175 रुपये दिए जाएंगे। अभी तक बच्चों को प्रत्येक सत्र में यह चीजें विभाग की ओर से मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती थीं। इनके लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसमें भ्रष्टाचार के अलावा इन सामानों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिलती थीं। इन चीजों को समय से उपलब्ध कराने की भी चुनौती रहती थी।

  

अब धनराशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने पर भ्रष्टाचार पर अंकुश तो लगेगा ही, अभिभावक अपनी संतुष्टि के अनुसार यह चीजें खरीद सकेंगे। बच्चों को समय से यह सुविधाएं मिलने से उनकी उपस्थिति व सीखने-सिखाने के वातावरण में सुधार होगा। कक्षा के अनुसार दक्षता प्राप्त करने के लिए अधिक अवसर मिल सकेगा। इस व्यवस्था से राज्य, जिला व ब्लाक स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी वस्तुओं की आपूर्ति प्रक्रिया से मुक्त होकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर अधिक ध्यान देने की स्थिति में होंगे। डीबीटी के माध्यम से धनराशि ट्रांसफर होने से पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हो सकेगी तथा भेजी गई रकम का ऑडिट ट्रेल रहेगा। 

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Oct 23 2021, 13:18

दिव्यांगता:सशक्तिकरण का समावेशी आयाम

  


लखनऊ - भारत के दिव्यांग जनों ने जापान 2021 में पैरा ओलंपिक में जिस तरह खेलों में अपना प्रदर्शन दोहरा कर स्वर्ण, रजत और अन्य पदक प्राप्त किए है, उसे देखकर उनकी क्षमता, ऊर्जा, शक्ति और जिजीविषा को दृष्टिगत रखे तो वे राष्ट्र की सलामी और अभिनंदन के हकदार हैं। पूरे विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की गणना के अनुसार दिव्यांगजन की जनसंख्या लगभग एक अरब है। भारत में ही 2011 की जनसंख्या के अनुसार 2.68 करोड़ दिव्यांगजन निवास करते हैं। दिव्यांगजन प्राकृतिक रूप से शारीरिक क्षमता में कमी के कारण आम आम नागरिकों की तरह जीवन यापन करने में कठिनाई महसूस करते हैं। 

दिव्यांग जनों को कई श्रेणी में माना गया है जिनमें दृष्टि हीनता ,बधिरता,मुकता, चलने में असमर्थ, मानसिक कमजोरी , मानसिक रुग्णता, बहु दिव्यांगता आदि होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है की सभी देशों में विकलांगों की समस्याएं अलग-अलग होने के बावजूद उनकी मूल समस्या एक जैसी है, जिसमें आमूलचूल बदलाव लाकर ऐसे व्यक्तियों को सशक्त किया जा सकता है। शरीर के किसी अंग अथवा मस्तिष्क के बाधित अथवा अपूर्ण विकास को दिव्यांगता के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो मानव समाज की एक संवेदनशील समस्या है। जिसका सामना विश्व के सभी देशों के दिव्यांग जनों को करना पड़ता है। दिव्यांग जनों को मूलतः शिक्षा,रोजगार, स्वास्थ्य, यातायात आदि तक पहुंच बनाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे वे सामाजिक आर्थिक व शैक्षिक क्षेत्र में पिछड़ जाते हैं। 

  

इस संदर्भ में दृष्टि हिनता तथा बधिरता से ग्रस्त हेलेन केलर ने कहा कि "दृष्टि हिनों की प्रगति मुख्य बाधा दृष्टि हीनता नहीं, बल्कि दृष्टिहीन लोगों के प्रति समाज की नकारात्मक सोच भी है" भारत सरकार ने इस संदर्भ में काफी विचार-विमर्श कर 1995 में विकलांगों के प्रति समाज के दायित्वों के निर्वहन हेतु विकलांग व्यक्ति अधिनियम पारित किया था, जिसे 1996 में लागू किया गया। अधिनियम के अंतर्गत दिव्यांगों के लिए शिक्षा रोजगार सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही शासकीय नौकरी में विकलांगों का पद आरक्षित भी किया गया। इतना ही नहीं 1999 में एक अलग विकलांग राष्ट्रीय कल्याण तथा राष्ट्रीय न्यास का गठन किया गया, जिससे इनकी समस्याओं को समाधान हेतु सुना जा सके। इसके अतिरिक्त दिव्यांग जनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग बनाया, जिससे इनके लिए अलग से कुछ पैमाने को निर्धारित कर विकास में सहभागी बनाया जा सके ऐसे प्रावधान रखे गए है। 

इसके अतिरिक्त 2015 में दिव्यांगों की शिक्षा नीति बनाई गई जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा के सुरक्षित तथा सम्मानजनक समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया। इनको शिक्षा से जोड़ने हेतु सुगम में पुस्तकालय नामक ऑनलाइन कोर्स प्रारंभ किया गया ताकि वह बटन क्लिक करने के माध्यम से पुस्तकों को पढ़ सकें, जिसके बाद इनकी नौकरियां व स्वरोजगार क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने हेतु 2016 में विकलांग अधिकारिता विभाग के परामर्श से एक जॉब पोर्टल की भी शुरुआत की गई। जॉब पोर्टल एकल मंच पर निशुल्क नौकरी के अवसर स्वरोजगार ऋण, शिक्षा ऋण व कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। 2017 में दिव्यांग जनों की मदद के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने दिव्यांग साथी मोबाइल ऐप की शुरुआत की जिसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग से संबंधित विभिन्न उपयोगी जानकारी जैसे विभिन्न नियमों दिशानिर्देशों योजनाओं छात्र वित्तीय एवं रोजगार संबंधी अवसरों के बारे में दिव्यांग जनों को सरल प्रारूप में जानकारियां उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है। इससे दिव्यांगजन सशक्तिकरण के प्रयासों को वास्तविक रूप से अमलीजामा पहनाया जा सके। 

केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही है कि दिव्यांग जनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़कर उन्हें खेलकूद, विज्ञान टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और प्रशासनिक सेवाओं में पूरा पूरा स्थान प्राप्त हो सके, ऐसे प्रयास निरंतर जारी हो रहे हैं। और इन्हीं सब का परिणाम है कि आज दिव्यांगों को पहचान कर समाज में उनकी नई पहचान दिलाई जा रही है स्वरोजगार में इनकी संख्या बढ़ रही है शिक्षा के स्तर में वृद्धि हुई है यहां तक कि नौकरियों मेल की भागीदारी काफी बढ़ी है। दिव्यांग व्यक्तियों ने खेल में अपना नाम बहुत ऊंचा किया है 20 18 में भारतीय दिव्यांग क्रिकेटरों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान की टीम को हराकर ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने नाम किया था और इस तरह देश का नाम ऊंचा किया। माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला अरुणिमा सिन्हा का नाम प्रमुख है। 2016 2020-21 पैरा ओलंपिक खेलों में दीपा मलिक ने अनेक पदक जीते उन्हें अर्जुन पुरस्कार भी दिया गया है। इसी प्रकार प्रसिद्ध एथलेटिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया का नाम प्रमुख है, जिन्होंने पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। 2020-21 में पैरालंपिक जापान में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस कदर ओलंपिक पदकों की भारत के लिए श्रृंखला जीती वह अभूतपूर्व है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले भारतीय क्लासिकल डांसर सुधा चंद्रन,संगीतकार रविंद्र जैन, बैडमिंटन प्लेयर गिरीश शर्मा, ब्लाइंड क्रिकेट में 32 शतक लगाने वाले शेखर नायक, प्रसिद्ध डॉक्टर सत्येंद्र सिंह, कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुरेश आडवाणी आदि का नाम अत्यंत गौरवशाली सूची में शामिल है। जिन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि राष्ट्र का गौरव भी बढ़ाया है। 

यह सब दिव्यांग जनों के लिए अपनी पहचान बनाने के अलावा प्रेरणा स्रोत के रूप में भी तेजी से उभरे हैं। इनकी उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि दिव्यांगों में अपार क्षमताएं होती हैं तथा वे प्रेरणा दाई भी होते हैं। यदि इनके लिए अवसर और सशक्तिकरण के सफल प्रयास किए जाएं ,आधुनिक तकनीकी से इनकी क्षमताओं में वृद्धि की जाए तो इनमें क्षमताओं की वृद्धि की अपार संभावनाएं निहित हैं। भारत देश में जितने दिव्यांग निवास कर रहे हैं, अभी भी बेहतर परिणाम आना शेष है इसीलिए देश के विकास एवं प्रगति में दिव्यांगों की भूमिका तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरे समाज तथा शासन प्रशासन को आगे आकर इनकी हौसला अफजाई कर सामान्य जीवन की सुविधाओं में इजाफा किया जाना चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्य पेशेवरों, शिक्षकों, स्थानीय समुदाय, छोटी-छोटी संस्थाओं,स्वयंसेवी संस्थाओं तथा आम नागरिकों को आगे आना होगा तभी दिव्यांग जनों को समावेशी विकास में शामिल किया जा सकेगा। यह शुभ संकेत भी है कि न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता मैं काफी वृद्धि हुई है, और यही कारण है कि विकलांगों को दिव्यांग जैसे सम्मान पूर्वक शब्दों से पुकारा जाता है, यदि समाज की भूमिका मानवीय तथा सामंजस्य पूर्ण होती है, तो दिव्यांग जनों को विकास की ओर अग्रसर होने तथा सामाजिक समरसता की मुख्यधारा में जुड़ने से कोई रोक नहीं सकता है।न