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Jun 25 2020, 13:32

अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, कहा -45 साल पहले आज के दिन सत्ता के लिए एक परिवार के लालच ने आपातकाल लागू किया, राहुल पर भी किया वार

नई दिल्ली - भारतीय इतिहास का वो काला दिन जब देश में आपातकाल घोषित किया गया था। आज उसकी बरसी है। आपातकाल की बरसी पर गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। अमित शाह ने इसको लेकर एक ट्वीट कर कहा कि 45 साल पहले आज के दिन सत्ता के लिए एक परिवार के लालच ने आपातकाल लागू कर दिया। रातों रात राष्ट्र को जेल में बदल दिया गया। प्रेस, अदालतें, मुफ्त भाषण सब खत्म हो गए। गरीबों और दलितों पर अत्याचार किए गए।

बता दें कि आज से 45 साल पहले 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई, जो 21 मार्च 1977 तक लगी रही। उस दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन देश में आपातकाल की घोषणा की थी।
इस समय आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे। इसे आजाद भारत का सबसे विवादास्पद दौर भी माना जाता है। आपातकाल के पीछे कई वजहें बताई जाती है, जिसमें सबसे अहम है 12 जून 1975 को इलाहबाद हाईकोर्ट की ओर से इंदिरा गांधी के खिलाफ दिया गया फैसला।

वहीं मंगलवार को हुए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक को लेकर भी अमित शाह ने शाह ने राहुल पर हमला बोला। शाह ने ट्विटर पर लिखा, ‘सीडब्ल्यूसी की हालिया बैठक के दौरान वरिष्ठ और युवा सदस्यों ने कुछ मुद्दों को उठाया। लेकिन उन्हें चुप करा दिया गया। पार्टी के एक प्रवक्ता को बिना सोचे समझे बर्खास्त कर दिया गया। दुखद सच्चाई यह है कि कांग्रेस में नेता घुटन महसूस कर रहे हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारत के विपक्षी दलों में से एक के रूप में कांग्रेस को खुद से पूछने की आवश्यकता है: आपातकाल की मानसिकता अब तक क्यों बनी हुई है? ऐसे नेता जो एक वंश के नहीं हैं, उन्हें बोलने की इजाजत क्यों नहीं है? कांग्रेस में नेता क्यों निराश हो रहे हैं? अन्यथा लोगों के साथ उनका संबंध और कम होता जाएगा
दरअसल, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीडब्ल्यूसी की बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरते नहीं हैं और उनपर हमला करना जारी रखेंगे। उन्होंने पार्टी के अधिकांश नेताओं पर मोदी की सीधी आलोचना न करने का आरोप लगाया।

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Jun 25 2020, 10:28

जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जारी, अब तक दो आतंकी ढेर

सोपोर - जम्मू-कश्मीर के सोपोर में आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को सफलता हाथ लगी है। जवानों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया है। सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस से इनपुट प्राप्त करने के बाद सर्ट अभियान शुरू किया। इसके बाद जल्द ही गोलाबारी शुरू हो गई।

बता दें कि पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में दो से तीन आतंकी मौजूद हैं। इस आधार पर सेना की 22-आरआर, पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने घेराबंदी शुरू कर दी। इस दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग करनी शुरू कर दी।  मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों ने सफलता पाई। फिलहाल मुठभेड़ जारी है।
बता दें कि इस साल अब तक सुरक्षाबलों ने 36 ऑपरेशनों में 92 आतंकी मार गिराए हैं। जबकि इनके 126 से ज्यादा मददगार गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इस बात की बौखलाहट आतंकी संगठनों में देखी जा रही है। जिसके बाद सुरक्षाबलों को निशाना बनाए जाने की साजिश रची जा रही है। 
घाटी में खात्मे की कगार पर पहुंच चुके आतंकी संगठन आईईडी हमले करने की फिराक में हैं। इस बात की जानकारी दो ही दिन पहले बडगाम में जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि इनपुट मिला है कि आतंकी संगठन सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए आईईडी विस्फोट कर सकते हैं।

सिंह ने कहा कि पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को घुसपैठ कराने की फिराक में है। वह इन आतंकियों को नौशेरा, राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा और केरन सेक्टर से घुसपैठ कराना चाहता है। लेकिन हमारे जवान सतर्क हैं।

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Jun 25 2020, 09:57

नागरिकता कानून को लेकर नेपाल की जनता ने शुरू कर दिया सरकार का विरोध,कहा भारत से संबंध खत्म करने की हो रही है साजिश

नेपाल  सरकार द्वारा किसी भी विदेशी मूल की लड़कीं से शादी करने पर नागरिकता के लिए सात साल का इंतज़ार करने संबंधी कानून पर वहां की जनता ने विद्रोह शुरू कर दिया है ।इसे भारत के साथ बेटी रोटी की रिश्ता को खत्म करने का साजिश बताते हुए लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नागरिकता अधिनियम में संशोधन के प्रस्‍ताव का वहां के तराई इलाके के  22 जिलों में विरोध शुरू हो गया है। भारतीय सीमा से लगे भैरहवा सहित कई स्‍थानों पर लगातार दूसरे दिन जमकर प्रदर्शन हुए। 

नेपाल सरकार के प्रस्‍तावित इस  संशोधन के बाद नेपाल में शादी करने वाली किसी भी विदेशी महिला को नागरिकता के लिए सात साल इंतजार करना होगा। हालांकि यह नया नियम सभी देशों की महिलाओं पर लागू  होगा लेकिन हाल में बिगड़े रिश्तों के मद्देनजर बहुत से लोगों का मानना है कि यह भारत को निशाना बनाने के लिए किया गया है। भारत-नेपाल के बीच सदियों से रोटी-बेटी का रिश्ता है। 

नेपाल के मौजूदा सरकार के इस कदम के विरुद्ध नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने  मंगलवार को संयुक्‍त रूप से भैरहवा की सड़कों पर प्रदर्शन किया। मिली जानकारी के अनुसार काठमांडू और पोखरा में भी प्रदर्शन हुए। भैरहवा में सड़क पर विरोध जुलूस निकाला गया। इस प्रस्तावित संशोधन  वापस लेने की मांग की गई। नेपाली कांग्रेस नेता प्रमोद यादव ने कहा कि इस कानून के लागू होने से भारत से सदियों पुराना रोटी-बेटी का सम्‍बन्‍ध खत्म हो जाएगा। 

उन्होंने बताया कि इस कानून के बाद नेपाल में शादी करने वाली भारतीय लड़कीं पीछे हट जाएगी क्योंकी पढ़ी लिखी लड़कीं का इस सड़ भविष्य चौपट हो जायेगा। 

 जनता समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता विद्या यादव ने कहा कि इस नियम से भारत की पढ़ी-लिखी लड़कियों को नेपाल में विवाह करने से नुकसान होगा क्योंकि शादी के सात साल बाद नागरिकता मिलेगी और तब तक सरकारी नौकरी की उम्र करीब-करीब खत्म हो जाएगी।

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    भैरहवा के विधायक संतोष पांडेय ने कहा कि प्रस्तावित नियम के जरिए जहां भारत से सम्‍बन्‍धों को खत्म करने की साजिश हो रही है, वहीं मधेशी जनता के अधिकारों को भी सीमित किया जा रहा है। कहा कि राजा-रजवाड़े और बड़े नेताओं के विवाह भारत में हुए हैं। कभी किसी भारतीय महिला ने आज तक के इतिहास में राष्ट्रद्रोह नहीं किया है। कहा कि नेकपा जनता में अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए 'बांट करो और राज करो' की राजनीति कर रही है। अंगीकृत नागरिकता कानून को किसी भी हाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए मधेशी जनता हर कुर्बानी के लिए तैयार हैं।
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Jun 25 2020, 09:55

क्या चाहता है चीन ?
गलवां घाटी का सामरिक महत्व, जिसको लेकर आमने सामने हैं भारत-चीन
PART 5

चीन की सामरिक गणना

वर्तमान गतिरोध में चीन का रुख आश्चर्य की बात थी। विशेषज्ञों की दृष्टि में, चीन ऐसे समय में भारत के प्रति बहुत कठोरता से आगे बढ़ा रहा है, जबकि चीन को भारत की मित्रता को बनाए रखने की आवश्यकता है। जिससे बीजिंग के वाशिंगटन के साथ बिगड़ते संबंध और वैश्विक महामारी में चीन को उसकी क्षति के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। यह तर्क कुछ सच्चाई रखता है, लेकिन चीन की इस चिंता की सराहना करने में विफल रहता है कि भारत अपनी भेद्यता का फायदा उठा रहा है, खासकर उस समय जब बीजिंग COVID-19 के साथ जूझ रहा है। जब चीनी अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि भारत विवादित क्षेत्र में क्षेत्रीय लाभ कमाने के लिए चीन की कमजोरियों का लाभ उठा रहा है, तो बीजिंग ने महसूस किया कि वह नई दिल्ली को शामिल नहीं कर सकता है, भले ही वह नई पीढ़ी के अधिकारियों और विदेश नीति के रणनीतिकारों के बीच भारतीय में बैकलैश को बढ़ावा दे।

चीनी विश्लेषकों का मानना है कि भारत सीमा के साथ सामरिक लाभ लेने की कोशिश करके बीजिंग का फायदा उठा रहा है। जबकि COVID-19 संकट के कारण चीन संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों में गिरावट को कम करने की कोशिश कर रहा है, भारत की सड़क-निर्माण को "चीन को घेरने की कोशिश" के रूप में देखा जा रहा है जबकि चीन इससे निपटने की कोशिश कर रहा था। " संयुक्त राज्य। चीन के नजरिए से, न केवल भारत अपनी विदेश नीति में चीन के व्याकुलता, भेद्यता और अति-प्रवृत्ति के क्षण को भुनाने की कोशिश कर रहा है, बल्कि यह चीन को भारत के सड़क निर्माण का जवाब देने और "आक्रामक और उत्तेजक" लेबल के बीच दुविधा में डालता है - या इससे परिचित होना और कमजोरी के समय में क्षेत्र खोना।

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    भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संरेखण द्वारा विकसित किया जा रहा है - वाशिंगटन द्वारा इंडो-पैसिफिक रणनीति में व्यक्त किया गया। ऐसा माना जाता है कि 2019 में भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने का सीधा कारण है, जिसने लद्दाख की सीमित स्वायत्तता को हटा दिया और इसे केंद्र सरकार के नियंत्रण में सीधे केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में अक्साई चिन (वर्तमान में चीनी प्राधिकरण के तहत) शामिल है, और तिब्बत और शिनजियांग में इसके "जातीय सीमाओं" के चीनी नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके निर्माण के समय चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था। गतिरोध में अमेरिका की स्थिति ने बीजिंग के संदेह को बढ़ा दिया। तत्कालीन सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने 21 मई को चीन के "आक्रामकता" को "भड़काऊ और परेशान करने वाला" बताया और कई दिनों बाद चीन और भारत के बीच मध्यस्थता की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पेशकश के समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। चीन और भारत दोनों ने ट्रम्प के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। हालाँकि, चीनियों के लिए, मोदी ने तीन दिन बाद ट्रम्प के साथ सीधे फोन पर बातचीत करके और जी -7 शिखर सम्मेलन में ट्रम्प के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए, रणनीतिक अस्पष्टता और अश्लीलता को स्वीकार करते हुए अस्वीकृति को जल्दी से समाप्त कर दिया। 
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    भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संरेखण द्वारा विकसित किया जा रहा है - वाशिंगटन द्वारा इंडो-पैसिफिक रणनीति में व्यक्त किया गया। ऐसा माना जाता है कि 2019 में भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने का सीधा कारण है, जिसने लद्दाख की सीमित स्वायत्तता को हटा दिया और इसे केंद्र सरकार के नियंत्रण में सीधे केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में अक्साई चिन (वर्तमान में चीनी प्राधिकरण के तहत) शामिल है, और तिब्बत और शिनजियांग में इसके "जातीय सीमाओं" के चीनी नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके निर्माण के समय चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था। गतिरोध में अमेरिका की स्थिति ने बीजिंग के संदेह को बढ़ा दिया। तत्कालीन सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने 21 मई को चीन के "आक्रामकता" को "भड़काऊ और परेशान करने वाला" बताया और कई दिनों बाद चीन और भारत के बीच मध्यस्थता की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पेशकश के समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। चीन और भारत दोनों ने ट्रम्प के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। हालाँकि, चीनियों के लिए, मोदी ने तीन दिन बाद ट्रम्प के साथ सीधे फोन पर बातचीत करके और जी -7 शिखर सम्मेलन में ट्रम्प के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए, रणनीतिक अस्पष्टता और अश्लीलता को स्वीकार करते हुए अस्वीकृति को जल्दी से समाप्त कर दिया। 
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Jun 24 2020, 20:20

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का नाम लेकर सीएए विरोधियों ने फैलायी थी अफवाह, जिसके बाद दिल्ली में भड़की थी हिंसा
नई दिल्ली - फरवरी में हुए दिल्ली दंगों को लेकर पुलिस ने बुधवार को बताया कि चांद बाग में अफवाह की वजह से हिंसा फैली थी। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ये अफवाह फैलाई गई थी कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के समर्थकों ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए पंडाल में आग लगा दी है। जिसके बाद चांद बाग इलाके में हिंसा शुरू हो गई थी।
   
हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में जांच के दौरान ये बातें सामने आई हैं। पुलिस ने कहा है कि आग को लेकर चांदबाग में अफवाह जानबूझकर फैलाई गई ताकि लोगों को हिंसा के लिए भड़काया जा सके। 
गवाहों ने बयान, के मुताबिक बनाए गए चार्टशीट में बताया गया है कि कुछ दंगाई अफवाह फैला रहे थे कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के समर्थकों ने सीएए विरोधी पंडाल में आग लगा दी है। हालांकि, पुलिस ने कहा कि किसी भी गवाह ने कहीं कोई आग नहीं देखी। अधिकारियों ने कहा कि हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर कई अफवाहें फैलाई गईं।  
बता दें कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में फरवरी में कई जगहों पर हिंसा फैल गई थी। सीएए के विरोधियों और सीएए समर्थकों के बीच हुई हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी।

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Jun 24 2020, 18:51

में कां2008ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच हुए एमओयू मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, समझौते की जांच एनआईए से कराने का निर्देश देने की मांग


नई दिल्ली - 2008 में यूपीए 2008 में कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के बीच हुए एक समझौते की जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका दायर करके कांग्रेस और सीपीसी के बीच हुए उस समझौते की असलियत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने के निर्देश देने की मांग की गई है। जिसमें उच्च-स्तरीय सूचना और सहयोग के आदान-प्रदान को लेकर सहमति बनी थी।
याचिकाकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया है।याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से इस मामले में गैर-कानूनी गतिविधि (निरोधक) कानून, 1967 के तहत एनआईए जांच के निर्देश देने की मांग की है।
याचिकाकर्ता शशांक शेखर झा और सेवियो रॉड्रिग्स ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह जनहित याचिका दायर करके कांग्रेस और सीपीसी के बीच समझौते के विस्तृत ब्योरे को उजागर करने की मांग की है। शशांक शेखर झा पेशे से वकील हैं, जबकि रॉड्रिग्स गोवा क्रॉनिकल के एडिटर-इन-चीफ हैं।
बता दें कि कांग्रेस की तरफ़ से राहुल गांधी ने समझौते पर दस्तख़त किया। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की तरफ़ से वांग चियारुई ने दस्तख़त किए। यह समझौता पार्टी के स्तर पर हुआ था।

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Jun 24 2020, 16:15

दिल्ली दंगे में कांस्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में दायर चार्जशीट में आया डीएस बिंद्रा का नाम, सामुदायिक रसोई के बहाने रची थी हिंसा की साजिश

नई दिल्ली - फरवरी में दिल्ली में हुए दंगा मामले में दिल्ली पुलिस की विशेष जाँच टीम ने हाल ही में रतन लाल की हत्या, IPS अमित शर्मा और IPS अनुज कुमार पर दंगाइयों द्वारा किए गए घातक हमलों में 1,100 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में कम से कम 17 आरोपितों को नामजद किया गया है। इस पूरे मामले में लगभग 4 से 5 मुख्य साजिशकर्ता हैं, जिनमें सलीम खान, सलीम मुन्ना और शादाब शामिल हैं। पुलिस ने कहा कि देश की छवि खराब करने के लिए एक साजिश के तहत दंगे को अंजाम दिया गया।
कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के लिए भीड़ को उकसाया
चार्जशीट में पुलिस ने डीएस बिंद्रा को भी उन प्रमुख लोगों में नामित किया गया है जिन्होंने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान कांस्टेबल रतन लाल की हत्या करने वाली भीड़ को उकसाया था।
सीएए के प्रदर्शनकारियों को लंगर खिला कर लूटी थी वाहवाही
आपको बता दें कि ये वही डीएस बिंद्रा है। जिसके बारे में फरवरी में सोशल मीडिया पर खबरें वायरल हुई कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लंगर खिलाने के लिए अपना फ्लैट तक बेच दिया। मानवता की सेवा की दुहाई देकर डीएस बिद्रा का महिमामंडन किया जा रहा था। जबकि लोग इस बात को भूल गए थे बिंद्रा दिल्ली के मुस्तफाबाद और खूँरेजी में सीएए विरोध प्रदर्शनों में भी मुख्य रूप से शामिल रहा।
एआईएमआईएम के नेता हैं बिंद्रा
बता दें कि बिंद्रा एआईएमआईएम के नेता हैं, जिसने मुस्तफाबाद में सीएए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। अब, इसी डीएस बिंद्रा को दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट में उन प्रमुख लोगों में नामित किया गया है जिन्होंने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान कांस्टेबल रतन लाल की हत्या करने वाली भीड़ को उकसाया था। 
चाँदबाग दंगो के पीछे की साजिश में शामिल डीएस बिंद्रा
आरोप पत्र में कहा गया था कि बीट अधिकारियों को नियमित रूप से विरोध के क्षेत्र में तैनात किया गया था, ताकि कानून व्यवस्था सुनिश्चित किया जा सके। रतन लाल की हत्या के बाद, दो बीट अधिकारियों से भी पूछताछ की गई और उनके बयानों से तथ्यों का पता लगाया गया। उन्होंने खुलासा किया कि सलीम खान, सलीम मुन्ना, डीएस बिंद्रा, सुलेमान सिद्दीकी, अयूब, अतहर, शाहदाब, उपासना, रविशंद अन्य लोग विरोध स्थल के आयोजक थे।
चार्जशीट में बताया गया है कि, “आरोपित व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से खुलासा किया कि चाँदबाग दंगो के पीछे की साजिश में उनके साथ डीएस बिंद्रा, डॉ रिज़वान, अतहर, शाहदाब, उपासना, तबस्सुम, रवीश और अन्य लोग शामिल थे।”
इसके अलावा, गिरफ्तार अभियुक्त शाहनवाज़ और इब्राहिम ने यह खुलासा किया कि इस दंगे के आयोजक डीएस बिंद्रा, डॉ रिज़वान, सुलेमान (सलमान), सलीम खान और

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     @India   सलीम खान और सलीम मुन्ना थे। यह दंगा इन्हीं लोगों द्वारा अन्य लोगों के साथ मिलकर रची गई साजिश का हिस्सा था।
    विरोध के लिए मुसलमानों को उकसाने का आरोप
    एक अन्य आरोपित मोहम्मद सलीम खान (चाँद बाग के प्रोटेस्ट का आयोजक) ने खुलासा किया था कि लगभग दो महीने पहले, डीएस बिंद्रा ने सर्विस रोड, वज़ीराबाद रोड, चाँदबाग में सामुदायिक रसोई की शुरुआत की थी। सामुदायिक रसोई की वजह से बड़ी संख्या में वहाँ पर भीड़ इकट्ठा होती थी। सलीम खान, सलमान सिद्दीकी, डॉ रिज़वान, सलीम मुन्ना और अन्य लोगों के साथ सामुदायिक रसोई में जाता था। डीएस बिंद्रा ने CAA/ NRC का जोरदार विरोध करने के लिए उसे और अन्य मुसलमानों को उकसाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को अपना असंतोष दिखाने के लिए सड़क पर आना चाहिए।
    दिल्ली पुलिस की मानें तो चाँदबाग में जिस तरह से सीएए विरोधी प्रदर्शन में लोगों को भड़काया गया और धरने पर बिठाया गया, उसका दंगे फैलाने में अहम रोल था। रतन लाल की हत्या भी इसी साज़िश का हिस्सा थी। 
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Jun 24 2020, 16:02

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रिंसिपल मसरूर अहमद बेग पर हेराफेरी का आरोप

यूजीसी के चेयरमैन और कुलपति के पास दिल्ली विश्वविद्यालय (ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज) के प्रिंसिपल मसरूर अहमद बेग के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक कांग्रेस और दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद के सदस्यों ने यूजीसी को एक शिकायत सौंपी है जिसमें आरोप लगाया गया है कि मसरूर अहमद बेग ने कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में नियुक्त होने के लिए पत्र-पत्रिकाओं को लूटा और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व जीजीसी अध्यक्ष सुखदेव थोराट के काम से नकल की। कई वर्तमान और पूर्व शैक्षणिक परिषद और कार्यकारी परिषद के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित शिकायत 20 जून को दर्ज की गई थी।

यूजीसी के निर्देशों के अनुसार, प्रिंसिपल के पद पर चयन के लिए, किसी को न्यूनतम एपीआई स्कोर 400 सुरक्षित करना होगा। हालांकि, साथी प्रोफेसरों का आरोप है कि बेग ने अपने काम में हेरफेर किया, अन्य लेखकों के पूर्ण कागजात का उल्लेख किए बिना कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में एक नियुक्ति हो गये। 

पत्र में आरोप लगाया गया कि थोराट के 2015 के पेपर में AMU के प्रोफेसर मशकूर अहमद के साथ सह-लेखन किया गया था जिसका शीर्षक था "अल्पसंख्यक और गरीबी: कुछ अल्पसंख्यक दूसरों की तुलना में अधिक गरीब क्यों हैं?" 2018 में जर्नल ऑफ सोशल इंक्लूजन स्टडीज में प्रकाशित किया गया था, जिसका काम "मेजरिटी के संबंध में भारतीय अल्पसंख्यकों की गरीबी का तुलनात्मक विश्लेषण" शीर्षक से किया गया था। डीयू कॉलेजों के डीन बलराम पाणि ने पुष्टि की कि विश्वविद्यालय को शिकायत मिली थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले को देख रहा है और आवश्यक कार्रवाई करेगा।

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Jun 24 2020, 15:38

मास्को में विक्ट्री डे परेड में शामिल हुई भारतीय सेना की तीनों टुकड़ियां, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- गर्व की बात
शानदार प्रदर्शन आर्मी का - देखिए वीडियो
Part 2 

द्विपक्षीय मामलों पर साकारात्म बात-राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ के रूस पहुंचने के बाद कोरोना महामारी के बावजूद होटल में मिलने रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव पहुंचे थे। इस दौरान द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा भी हुई। इस बाबत राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुई चर्चा सकारात्मक रही है। 

बता दें कि, दिल्ली से मॉस्को के लिए रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा था कि तीन दिनों के दौरे पर मॉस्को जा रहा हूं। रूस की यात्रा से मुझे भारत-रूस रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर बातचीत करने का अवसर मिलेगा। मैं मॉस्को में 75वें विजय दिवस परेड में भी शामिल होउंगा।

चीन से तनाव के बीच अहम मानी जा रही रक्षा मंत्री की रूस यात्रा
गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के दौरे पर हैं। ऐसे में रक्षा मंत्री की रूस यात्रा को और अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान रक्षा मंत्री रूस से जल्द हथियारों की डिलिवरी की बात करेंगे। जिसमें फाइटर एयरक्राफ्ट, टैंक और सबमरीन शामिल हैं। रूस के साथ बड़े हथियारों के साथ करार में सबसे अहम है एस-400 डिफेंस सिस्टम। एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम भारत को दिसंबर 2021 तक मिलना था, लेकिन कोविड-19 की वजह से उसकी डिलेवरी में देरी हो रही है।

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Jun 24 2020, 15:30

UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत मजबूत दावेदार, रूस ने समर्थन देने की कही बात

भारत और रूस की मित्रता पुरानी है। वहीं रूस और चीन के बीच भी दोस्ती है। हालांकि इन दिनों रूस के दोनों दोस्त भारत और चीन  बीच तनाव के हालात हैं। इसी बीच रूस ने भारत के समर्थन में एक बड़ा बयान दिया है। रूस का कहना है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का मजबूत दावेदार है और रूस के लिए भारत का समर्थन करेगा। बता दें कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस में विक्ट्री डे परेड के लिए पहुंचे हुए हैं। 
रूस का भारत पर भरोसा
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवारोव ने मंगलवार को कहा, 'आज हमने सुयंक्त राष्ट्र में संभव बदलावों के बारे में बात की और भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने का मजबूत दावेदार है और हम भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं। हमें विश्वास है कि भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बन सकता है। रूस के विदेश मंत्री ने इस बारे में बयान देकर भारत-रूस मैत्री को दुनिया में एक बार फिर उजागर किया है। 
भारत ने आठवीं बार UNSC की अस्थायी सदस्यता हासिल की
बता दें कि 17 जून को भारत ने आठवीं बार UNSC की अस्थायी सदस्यता हासिल की थी। भारत को 192 बैलट वोट्स में से 184 वोट मिले थे। निर्विरोध चुने जाने के बाद अब भारत 2021-22 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च संस्था का अस्थाई सदस्य बन गया।
चीन से तनाव के बीच भारत को रूस का समर्थन
भारत के समर्थन में रूस का यह बयान तब आया है जब एक तरफ भारत का चीन के साथ गंभीर सैन्य गतिरोध चल रहा है। हालांकि रूस ने भारत के प्रति अपना समर्थन जताया है, लेकिन समानांतर रूप से एक और वक्तव्य दे कर चीन को ये भरोसा भी दे दिया है कि भारत-चीन विवाद में वह तटस्थ रहेगा। इस बयान में रूस ने अमेरिका को लेकर भी भारत को एक बड़ा संदेश दिया और कहा कि भारत और चीन दोनों देश आपस में अपना विवाद सुलझा लेंगे और इन दोनों को ही किसी अन्य देश की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है।