SanatanDharm

Mar 29 2020, 12:48

जय श्री महाकाल 
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन
29मार्च 2020 ( रविवार )

SanatanDharm

Mar 29 2020, 06:23

यह ऋग्वेद का मनु शास्त्र है(हनुमान जी का सिद्ध मन्त्र) ।  शास्त्र में कहना है कि अगर आप इसे दिन में एक बार सुनते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य में किसी भी तरह की कमी को दूर करेगा।  इसलिए आप इसे सुनें और अपने दोस्तों को भी भेजें scorll down and watch video*

SanatanDharm

Mar 28 2020, 07:01

सूरदास जी ने इसी समय की भविष्यवाणी की थी ??

संत सूरदासजी के यह पद 

रे मन धीरज क्यों न धरे,
सम्वत दो हजार के ऊपर ऐसा जोग परे।
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण,
चहु दिशा काल फ़िरे।
अकाल मृत्यु जग माही व्यापै,
प्रजा बहुत मरे।

सवर्ण फूल वन पृथ्वी फुले,
धर्म की बैल बढ़े।
सहस्र वर्ष लग सतयुग व्यापै,
सुख की दया फिरे।

काल जाल से वही बचे,
जो गुरु ध्यान धरे,
सूरदास यह हरि की लीला,
टारे नाहि टरै।।
रे मन धीरज क्यों न धरे
एक सहस्र, नौ सौ के ऊपर
ऐसो योग परे।
शुक्ल पक्ष जय नाम संवत्सर
छट सोमवार परे।

संवत 2 हजार के उपर छप्पन वर्ष चढ़े।
पूरब पश्चिम उत्तर दक्खिन, चहु दिशि काल फिरे।
अकाल मृत्यु जग माहीं ब्यापै, परजा बहुत मरे।
दुष्ट दुष्ट को ऐसा काटे, जैसे कीट जरे।
माघ मास संवत्सर व्यापे, सावन ग्रहण परे।
उड़ि विमान अंबर में जावे, गृह गृह युद्ध करे
मारुत विष में फैंके जग, माहि परजा बहुत मरे।
द्वादश कोस शिखा को जाकी, कंठ सू तेज धरे।

सौ पे शुन्न शुन्न भीतर, आगे योग परे।
सहस्र वर्ष लों सतयुग बीते, धर्म की बेल चढ़े।
स्वर्ण फूल पृथ्वी पर फूले पुनि जग दशा फिरे।
सूरदास होनी सो होई, काहे को सोच करे।

भविष्यवाणी का सार : 
 
सूरदासजी कह रहे हैं कि हे मन तू धैर्य क्यों नहीं रख रहा, संवत 2000 में ऐसा भयंकर समय आएगा जिसमें चारों दिशाओं में काल का तांडव होगा, हर जगह अकाल मृत्यु यानी बेमौत मारे जाएंगे। इस भयंकर समय में प्रजा बहुत मरेगी। पृथ्वी पर युद्ध जैसी तबाही होगी जिसमें बड़ी संख्या में लोग मरेंगे। एक किसान के घर एक महात्मा पैदा होगा जो शांति और भाई चारा स्थापित करेगा। एक धर्मात्मा इस विनाशकारी समय को वश में करेगा और लोगों को धर्मज्ञान की शिक्षा देगा।

इस भविष्यवाणी में जिस महान आध्यात्मिक नेता की बात की जा रही है कुछ लोग उसे अपने अपने गुरु से जोड़कर देखते हैं। 

उल्लेखनीय है कि उपरोक्त छंदों में कहा गया है कि संवत 2 हजार के ऊपर छप्पन वर्ष चढ़े अर्थात अंग्रेजी सन्न 1998 |

इस बीच कौन है वो मसीहा जो भारत को21वीं सदी में विश्व गुरु बनाएगा?

हालांकि इस भविष्यवाणी की सत्यता की पुष्टि करना व यह कहना मुश्किल है कि उपरोक्त छंद सुरदासजी ने कब और किस संदर्भ में लिखे थे।

SanatanDharm

Mar 27 2020, 06:18

भजन.... देखिये वीडियो

SanatanDharm

Mar 26 2020, 11:05

श्री गर्भगृह विराजित माँ पार्वती जी दर्शन

SanatanDharm

Mar 26 2020, 10:58

दुर्गाद्बात्रिंशन्नाममाला

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्बिनिवारिणी ।
दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी ।।

दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा ।
दुर्गमज्ञानदा     दुर्गदैत्यलोकदवानला ।।

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी ।
दुर्गमार्गप्रदा   दुर्गमविद्या   दुर्गमाश्रिता ।।

दुर्गमज्ञानसंस्थाना   दुर्गमध्यानभासिनी ।
दुर्गमोहा  दुर्गमगा   दुर्गमार्थस्वरूपिणी ।।

दुर्गमासुरसंहन्त्री      दुर्गमायुधधारिणी ।
दुर्गमांगी  दुर्गमता  दुर्गम्या   दुर्गमेश्वरी ।।

दुर्गभीमा  दुर्गभामा  दुर्गभा दुर्गदारिणी ।

SanatanDharm

Mar 25 2020, 19:42

आज दिनांक 25/3/2020 (चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन )बुधवार को करिये माँ के मंगला आरती का दिव्य दर्शन
देवी पूँजी पद कमल तुम्हारे 
सुर नर मुनि सब होई सुखारे
जय माँ विंध्यवासिनी

SanatanDharm

Mar 20 2020, 09:27

जय श्री महाकाल 
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती

SanatanDharm

Mar 13 2020, 16:41

7 KM लंबी पंगत, 10 हजार लोगों ने दोपहिया वाहनों से परोसा प्रसाद, 10 लाख ने खाया जानिए कहाँ  

देखिये वीडियो

्भुत हिन्दू धर्म, परम्पराएं, रीति-रिवाज, उत्सव-त्योंहार सब कुछ।*



7 KM लंबी पंगत, 10 हजार लोगों ने दोपहिया वाहनों से परोसा प्रसाद, 10 लाख ने खाया भोजनऐसा भोज विरले ही देखने को मिलता है, जैसा मंगलवार को इंदौर में हुआ। 7 किमी लंबी सड़क पर आमने-सामने दो पांतों में बैठ करीब 10 लाख लोगों ने भोजन किया। परोसने का जिम्मा 10 हजार लोगों ने संभाला। भोजन परोसने के लिए वाहनों का उपयोग किया गया। आम हो या खास, महिला हों या पुरुष, व्यापारी हों या अधिकारी, बजरंग बली का प्रसाद ग्रहण करने को हर कोई उमड़ पड़ा। बड़ी बात यह भी कि दोपहर से लेकर देर रात तक महाभोज चला और सुबह होते तक सड़क पहले की तरह साफ-सुथरी ही नजर आई।इंदौर में हुआ यह महाभोज अपने आप में अनूठा आयोजन था। इससे पहले इंदौर में ऐसा महाभोज नहीं हुआ। हालफिलहाल देश में भी कहीं इस तरह का आयोजन होते नहीं देखा गया, जहां सात किलोमीटर लंबी पंगत बैठी। आयोजकों का दावा है कि 10 लाख से अधिक लोगों ने भोजन किया। लोग हजारों-हजार के जत्थों में पहुंच रहे थे और अपनी बारी के इंतजार में सड़क के किनारे खड़े थे। व्यवस्था में जुटे हजारों लोग भी दौड़-दौड़कर लोगों को भोजन करवाने में जुटे थे। सात किमी सड़क पर एक साथ पांत बैठती। ई-रिक्शा, बाइक, लोडिंग रिक्शा जैसे वाहनों से खाना परोसा जा रहा था। 2 हजार डिब्बे शुद्ध घी, एक हजार क्विंटल आटा, 1 हजार क्विंटल चीनी, 500 क्विंटल सब्जी, 500 क्विंटल बेसन, 500 किलो मसालों से भोजन तैयार किया गया था।72 फीट ऊंची अष्टधातु की भगवान हनुमान की प्रतिमा का निर्माण कार्य 14 वर्ष तक चलता रहा, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा के लिए 9 दिवसीय अनुष्ठान महाप्रसाद के साथ मंगलवार को संपन्न हुआ। प्रसाद ग्रहण करने के लिए इंदौर के अलावा उज्जैन, देवास, राऊ सहित आसपास के शहरों से भी लोग आए थे। पानी पिलाने का जिम्मा स्थानीय निवासियों ने संभाल रखा था। अपने घरों और दुकानों के बाहर पानी की केन रखी हुई थी। नगर भोज के चलते हजारों घरों में रसोई नहीं बनाई गई।

  • SanatanDharm
     @SanatanDharm लोग परिवार के साथ आयोजन में शामिल हुए। सात किलोमीटर मार्ग में लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी स्थान पर भोजन किया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव इंदौर निवासी कैलाश विजयवर्गीय भी इस आयोजन से जुड़े हुए थे, जिन्होंने 16 साल पहले पितरेश्वर हनुमान के रूप में इस मूर्ति की स्थापना का संकल्प लिया था। उन्होंने बताया कि मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो जाने तक अन्न ग्रहण न करने का संकल्प भी था, जो पूरा हुआ।स्वच्छता में नंबर वन इस शहर के 150 निगमकर्मियों ने नगर भोज के बाद कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सुबह तक पूरा क्षेत्र पहले जैसा साफ-सुथरा कर दिया। यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल था कि कुछ घंटो पहले ही यहां लाखों लोगों ने भोजन किया है। शहरवासियों ने भी पत्तल यहां-वहां फेंकने के बजाए कूड़ापात्रों में ही डाले। दो रोड स्वीपिंग मशीनों ने भी सड़क की सफाई की।
    Suresh Chiplunkar जी की वाल से साभार 
    मेरी टिप्पणी ---
    ( जब हनुमान जी रसोई सिद्ध करे ,हनुमान जी ही परोसे और हनुमान जी भोग लगावे तो ठाठ ही ठाठ होने ही हैं ।इस महाप्रसादी  में प्रसाद पाने वाले किसी की व्यक्ति से उस की जाति नहीं पूछी गई ,जाति पाँति का तड़का केवल जातिगत राजनीति की रोटियाँ सेंकने वाले ही किया करते हैं, भगवान के घर में एक ही पंगत है और एक सा प्रसाद ) 
SanatanDharm

Mar 13 2020, 11:00

आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती ने समाज सुधार के कई कार्य किये

शारीरिक दर्द तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है और मानसिक पीड़ा मन को मजबूत करती है। शारीरिक कठिनाइयां शरीर को मजबूत बनाती हैं। यह सिद्धांत है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसे स्वीकार करने में कठिनाई होती है क्योंकि कोई भी दर्द, मानसिक पीड़ा, शारीरिक कष्ट या असुविधा से ग्रस्त नहीं होना चाहता है। जब भी हम जीवन की सुखदताओं के बीच होते हैं, मन एक तामसिक स्थिति में आ जाता है क्योंकि इसमें कोई संघर्ष नहीं होता है। कम या ज्यादा, संघर्ष हल हो गए हैं या कम से कम मातहत हैं क्योंकि सब कुछ सुखद है। जब हम अपनी दोस्ती से खुशी और सांत्वना हासिल करते हैं और खुद को आरामदायक स्थितियों में स्थापित करते हैं, तो यह हमारे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास का अंत करता है। विकास की कुंजी संघर्ष, समान और विपरीत है।

संघर्ष की भूमिका
मन तामसिक से राजसिक अवस्था तक और राजसिक से सात्त्विक अवस्था में विकसित होता है। इसकी वृद्धि को पांच चरणों में विभाजित किया गया है: सुस्त, छिन्न-भिन्न, दोलनशील, एक-नुकीला और नियंत्रित। मन की ये पाँच अवस्थाएँ तीन स्तरों पर होती हैं। तमस का स्तर या तो मुख्य रूप से या पूरी तरह से सुस्त है। यह सुस्त है क्योंकि इसमें कोई संघर्ष नहीं है, कोई इच्छा नहीं है, कोई निराशा नहीं है, कोई पीड़ा नहीं है, कुछ भी नहीं है। अगर यह सब कुछ ठीक है और अगर यह भी नहीं है सब ठीक हो जाता है। यह लगातार समझौता करता है। इस तरह यह कार्रवाई करने से बच सकता है, या तो कुछ हासिल कर सकता है या निराशा से सामना कर सकता है। यही कारण है कि योग निराशा, मानसिक अवसाद और कुंठाओं से शुरू होता है।

सबकी उम्मीदें हैं। चाहे आप शादीशुदा हों या अविवाहित, व्यवसायी हों या स्वामी, स्थिर नौकरी वाले परिवार के व्यक्ति हों या बेघर हो चुके आवारा, आप जीवन से कुछ उम्मीद कर रहे हैं। और जब आप जीवन से कुछ उम्मीद कर रहे होते हैं, तो आप एक विशेष दिशा में विकसित हो रहे होते हैं। यदि आपकी अपेक्षा पूरी हो जाती है, तो आपकी दिशा एक चुनौती से नहीं मिलती है। जब आपको वह मिलता है, जो आप चाहते हैं, चाहे वह पैसा, प्यार, दोस्ती, शक्ति, शांति, सहयोग या जो भी हो, आप बस इसका आनंद लेते हैं, लेकिन यह आपको जागरूकता का एक और क्षेत्र विकसित करने में मदद नहीं करता है।

  • SanatanDharm
     @SanatanDharm मान लीजिए कि आप कई वर्षों से किसी लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं और अंत में आप पाते हैं कि आप इसे प्राप्त नहीं कर सकते। क्या होता है? आपके मन के भीतर एक अतिरिक्त जागरूकता विकसित होती है और निराशा, मानसिक पीड़ा, चिंता, चिंता या संघर्ष का रूप लेती है। इसका मतलब है कि आपने लड़ाई शुरू कर दी है।
    
    यदि आपके मन में निराशा या अवसाद है, लेकिन कोई संघर्ष नहीं है, तो आप लड़ाई हार जाते हैं। हालांकि, अगर हताशा और संघर्ष है, तो आप चुनौती स्वीकार कर रहे हैं। एक बार जब आप चुनौती स्वीकार करते हैं, तो संघर्ष के बाद संघर्ष होता है।
    
    बेशक, संघर्ष संघर्ष के बिना कभी नहीं होता है, लेकिन संघर्ष संघर्ष के बिना हो सकता है। वह संघर्ष आपको आगे और पीछे और बिंदु से बिंदु तक लाता है। समय-समय पर आपके विचारों और जीवन के मूल्यांकन में बदलाव आते हैं क्योंकि आप इस बारे में निर्णायक नहीं होते हैं कि आप क्या करने जा रहे हैं। एक क्षण तुम ऐसा करने जा रहे हो और अगले तुम वही करने जा रहे हो। इसका मतलब है कि आप दो विचारों के बीच टकराव के लिए अपना दिमाग लगा रहे हैं, और यह सीधा टकराव आपकी जागरूकता और दिमाग के विकास को गति देता है।
    
    कष्ट का उद्देश्य
    जब मन दो विचारों के बीच फटा होता है, तो निश्चित रूप से शारीरिक और मानसिक पीड़ा होती है। लेकिन यह एक सकारात्मक अनुभव है क्योंकि, न केवल आप दुख को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि आप दुख के पीछे के अर्थ को समझने या दुख के अनुभव को पार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए, अगर वे लोग जो मानसिक रूप से पीड़ित हैं, वे इसे स्वीकार कर सकते हैं, उनके पास आध्यात्मिक, अनुभव अधिक गहरा, बड़ा और स्थायी होगा।
    
    हालांकि, अधिकांश लोगों के दिमाग कमजोर हैं और वे इच्छाशक्ति की दुर्बलता से पीड़ित हैं। वे चाहते हैं कि उनका जीवन सुखद और सुगमता से गुजरे। वे मिलनसार दोस्तों, आज्ञाकारी बच्चों, प्यार करने वाले माता-पिता, एक दोस्ताना समाज, एक शानदार केंद्रीय रूप से गर्म घर और बहुत सारा पैसा चाहते हैं। क्यों? क्योंकि वे अपने मन को चिंताओं के अधीन नहीं करना चाहते हैं। इसे तमोगुण या मन की सुस्त अवस्था कहा जाता है।
    
    जब मन सात्विक हो जाता है - लगभग एक ओर इशारा किया जाता है या पूरी तरह से नियंत्रित होता है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीवन में आपकी परिस्थितियां सुखद हैं या अप्रिय। यह नहीं बनाता है