अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से क्यों 'इंडो' शब्द हटाया? भारत की रणनीतिक भूमिका पर उठे सवाल
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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है। अब इस कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है। 'इंडो' शब्द को वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जोड़ा गया था। इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
पेंटागन ने क्या कहा?
पेंटागन के अनुसार यह बदलाव केवल ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। विभाग का कहना है कि इसे पुनः अपनाने से सैनिकों के बीच गौरव और परंपरा की भावना मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन से कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार या सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियां नहीं
पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता।
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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा
अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यानी इसके नाम से 'Indo' शब्द हटा दिया है। 2018 में इस क्षेत्र पर हिंदुस्तान के प्रभाव का सम्मान करते हुए अमेरिका ने अपने कमांड का नाम यूएस पैसिफिक कमांड रखा था। उस वक्त मोदी सरकार ने इसे अपनी जीत बताया था और मोदी के विश्वगुरु बनने का ढोल पीटा था। अब जब अमेरिका ने इस क्षेत्र का नाम बदल दिया है, तो सुई टपक सन्नाटा है। मोदी सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड हैं, जो ट्रंप के सामने एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।'
शशि थरूर ने क्या कहा?
अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।
यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है?
अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।






चेन्नई । देश की अग्रणी पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण निर्माता कंपनी LABOLIT, जो UMA SCIENTIFIC द्वारा संचालित है, को MEDIN EXPO Chennai 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नवाचारपूर्ण प्रयोगशाला समाधानों के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक एवं पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के लिए भी गर्व का विषय है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), देवघर और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) देवघर का साझा प्रयास देवघर, 15 जून 2026 यात्री सुविधा दिवस के विशेष अवसर पर आज देवघर हवाई अड्डे (भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण - AAI), देवघर और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS), देवघर के संयुक्त तत्वावधान में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया।
हवाई अड्डा परिसर के टर्मिनल भवन में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य मानव जीवन को बचाने और समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस पुनीत कार्य में हवाई अड्डे के अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय सहयोगियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे शिविर के दौरान कुल 9 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया, जिसका उपयोग स्थानीय स्तर पर जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए किया जाएगा। शिविर का मुख्य आकर्षण 18 वर्षीय वंशिका जायसवाल बनीं पहली रक्तदाता इस रक्तदान शिविर का सबसे प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब मिस वंशिका जायसवाल शिविर की पहली रक्तदाता (1st Donor) बनीं।
वंशिका ने कुछ ही दिन पहले अपने जीवन के 18 वर्ष पूरे किए हैं और आज उन्होंने अपने जीवन का पहला रक्तदान (Her First Blood Donation) किया। इतनी कम उम्र में ही वे इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, देवघर की लाइफ मेंबर (आजीवन सदस्य) भी हैं। वे रेड क्रॉस सोसाइटी, देवघर के वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल की सुपुत्री हैं। पहली बार रक्तदान करने के बाद अपना अनुभव साझा करते हुए वंशिका ने कहा अपने 18वें जन्मदिन के ठीक बाद अपने जीवन का पहला रक्तदान करना मेरे लिए एक बेहद भावुक और गर्व का क्षण है।
मेरे पिता हमेशा मुझे समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। रेड क्रॉस का हिस्सा होने के नाते मैं सभी युवाओं से अपील करना चाहती हूँ कि वे रक्तदान से डरें नहीं, बल्कि आगे आकर दूसरों की जान बचाएं। सजग रक्तदाताओं ने किया महादान रक्तदाताओं के नाम क्रमानुसार: 1. वंशिका जायसवाल (प्रथम रक्तदाता - जीवन का पहला रक्तदान), 2. दिलीप कुमार, 3. शिवम कुमार यादव, 4. रविकान्त कुमार, 5. रोहित दत्ता, 6. प्रीतम भारती, 7. राकेश कुमार, 8. रंजीत कुमार और 9. महेश कुमार। *वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति कार्यक्रम को सफल बनाने में देवघर हवाई अड्डे के विमानपत्तन निदेशक (Airport Director - APD) जॉय बनर्जी का विशेष मार्गदर्शन रहा। उनके साथ हवाई अड्डे के प्रबंधन दल से टर्मिनल मैनेजर सूर्य, ड्यूटी टर्मिनल मैनेजर सोनाली प्रिया और सहायक प्रबंधक (Ops) नूतन प्रकाश ने सक्रिय भूमिका निभाई। सुरक्षा व्यवस्था और सुचारू संचालन में सहयोग के लिए झारखंड पुलिस के सब-इस्न्पेक्टर (SI) प्रभात कुमार सिंह भी मुस्तैद रहे। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, देवघर की ओर से चेयरमैन जितेश राजपाल, वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल, और कार्यकारिणी समिति के सम्मानित सदस्य नागेंद्र झा एवं अर्चना भगत ने शिविर की व्यवस्था और संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अधिकारियों एवं पदाधिकारियों के मुख्य वक्तव्य जॉय बनर्जी, विमानपत्तन निदेशक (APD) यात्री सुविधा दिवस केवल यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी दिन है। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से आयोजित यह शिविर हमारे इसी संकल्प का हिस्सा है। मैं हवाई अड्डे के उन सभी कर्मियों और सुरक्षाबलों का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने आगे बढ़कर रक्तदान किया। सूर्य, टर्मिनल मैनेजर एक टर्मिनल मैनेजर के रूप में हमारा प्रयास हमेशा परिसर में सुरक्षित और सुगम माहौल तैयार करना होता है। आज के इस शिविर में हवाई अड्डा प्रबंधन और सुरक्षा टीम का जो समन्वय दिखा, वह सराहनीय है। इतने व्यस्त शेड्यूल के बीच भी टीम ने जिस तरह सामाजिक सरोकार के इस काम में हिस्सा लिया, वह हमारे सामूहिक सेवा भाव को दर्शाता है। जितेश राजपाल, चेयरमैन (IRCS, देवघर) देवघर हवाई अड्डा प्रशासन (AAI) के साथ मिलकर इस जीवनरक्षक शिविर का आयोजन करना हमारे लिए बेहद गौरवपूर्ण रहा। इन 9 रक्तदाताओं ने जिस उत्साह के साथ रक्तदान किया है, वह समाज के लिए एक बेहतरीन संदेश है। एकत्रित किया गया रक्त सीधे तौर पर गंभीर मरीजों की मदद में काम आएगी। पीयूष जायसवाल, वाइस चेयरमैन (IRCS, देवघर) देवघर हवाई अड्डे की पूरी टीम का सहयोग अद्वितीय रहा। एक पिता के रूप में मेरे लिए आज का दिन दोहरी खुशी और गर्व का है, क्योंकि मेरी बेटी वंशिका ने 18 वर्ष पूरे होते ही अपने जीवन का पहला रक्तदान किया और इस नेक काम की शुरुआत की। रेड क्रॉस परिवार और देवघर हवाई अड्डे के सभी कर्मियों ने मिलकर जिस सेवा भाव का परिचय दिया है, वह मील का पत्थर साबित होगा।

Ancient Indian knowledge systems never viewed human life as isolated from nature, space, or cosmic energies. Astrology and Vastu Shastra were developed as interconnected sciences based upon Karma, Prarabdh (destined karmic results), planetary influences, and environmental energies. While modern science may use different terminology, the underlying principle remains similar — every action creates an energetic impact, and every environment influences human life.
This planetary arrangement becomes the individual’s birth chart or Kundali, which acts like an energetic blueprint of life tendencies, strengths, challenges, health patterns, relationships, and psychological behavior.
Jun 22 2026, 13:05
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