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Jan 31 2024, 18:27

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में दो की मौत

#manipurviolenceatleastto_die 

मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़कने की खबर है। ताजा हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई है।राज्य में एक ग्रामीण स्वयंसेवक की मौत के बाद हुई फायरिंग के दो और लोग मारे गए, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। घायलों में राज्य के एक शीर्ष भाजपा युवा नेता भी शामिल हैं।ताजा हिंसा की घटना जिसमें दो समूहों के बीच हुई।

मंगलवार को करीब 12.30 बजे बेथेल के सामान्य क्षेत्र और सपेरमीना के अंतर्गत लाम्बुंग पहाड़ी में संदिग्ध मौतेई आंतकवादी, स्वयंसेवकों, वीबीआईजी, अरामबाई तेंगगोल्स और सदिग्ध कुकी आतंकवादियों सशस्त्र स्वयंसेवकों, एचबीआईजी गुटों में भारी गोलीबारी हुई। बंदूकधारियों ने लीमाखोंग के पास कदंगबन गांव में प्रवेश किया और 2 लोगों की हत्या कर दी, जबकि पांच अन्य लोग गोली लगने से घायल हो गए।

अंग्रेजी अखबार दि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गोलीबारी मंगलवार (30 जनवरी) दोपहर में शुरू हुई और कई घंटों तक चलती रही। फायरिंग के दौरान मारे गए दोनों लोगों की पहचान 33 साल के नोंगथोम्बम माइकल और 25 साल के मीस्नाम खाबा के तौर पर हुई। दोनों के शव 30 जनवरी की शाम रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंज ले जाए गए। 

आदिवासियों के लिए अलग प्रशासन की मांग

मणिपुर में हिंसा की घटनाओं के बीच राज्य के दस आदिवासी विधायकों, जिनमें सत्तारूढ़ बीजेपी के सात विधायक भी शामिल हैं, ने पीएम नरेंद्र मोदी को भेजे एक ज्ञापन में आदिवासियों के लिए एक अलग प्रशासन (अलग राज्य के बराबर) गठित करने की अपनी मांग दोहराई। प्रधानमंत्री को दिए अपने ज्ञापन में आदिवासी विधायकों ने कहा कि मणिपुर में जारी संघर्ष की स्थिति बद से बदतर हो गई है। मणिपुर के तीन विधायक जिनमें राज्य कांग्रेस अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र सिंह और सत्तारूढ़ भाजपा के दो विधायक शामिल हैं। इन सभी को कथित तौर पर 24 जनवरी को इंफाल के कांगला किले में अरामबाई तेंगगोल के सदस्यों द्वारा पीटा गया और मजबूर किया गया।

हिंसा शुरू हुए क़रीब नौ महीने हो गए

मणिपुर में हिंसा शुरू हुए क़रीब नौ महीने हो चले हैं, लेकिन राज्य से लगातार लोगों की मौत की ख़बरें आ रही हैं। पिछले कुछ दिनों में गोलीबारी में सुरक्षाबलों और आम लोगों की जानें गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ हिंसा में अब तक 200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 3000 से अधिक घायल हो चुके हैं। हिंसा में हजारों लोग विस्थापित भी हुए, जबकि राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों के कम से कम 60,000 कर्मियों की तैनाती के बाद भी आठ महीने से अधिक समय से वहां रुक-रुक कर हिंसा की घटनाएं देखने को मिली हैं

నిజంనిప్పులాంటిది

Jan 14 2024, 20:50

Bharat Jodo Nyay Yatra: అన్యాయ కాలంలో ఉన్నందునే న్యాయ్ యాత్ర: రాహుల్

దేశంలో అన్యాయ కాలం నడుస్తున్నందునే న్యాయ్ యాత్ర చేపట్టినట్టు కాంగ్రెస్ మాజీ అధ్యక్షుడు, వయనాడ్ ఎంపీ రాహుల్ గాంధీ (Rahul Gandhi) అన్నారు..

మణిపూర్‌ (Manipur)లోని ధౌబల్‌లో 'భారత్ జోడో న్యాయ్ యాత్ర' (Bharat Jodo Nyay Yatra)ను రాహుల్ ఆదివారంనాడు ప్రారంభించారు. అనంతరం ఆయన మాట్లాడుతూ, దేశ ప్రజలను ఏకం చేయడానికే భారత్ న్యాయ్ యాత్ర చేపడుతున్నామని చెప్పారు.

''చాలా మంది న్యాయ్ యాత్ర ఎందుకని అడుగుతున్నారు. అన్యాయ కాలంలో ఉన్నాము కాబట్టే న్యాయ్ యాత్ర చేపడుతున్నాం. ప్రజలు సామాజికంగా, రాజకీయంగా, ఆర్థికంగా అన్నివిధాలా అన్యాయాలకు గురవుతున్నారు. న్యాయ్ యాత్రతో ప్రజలందరిని కలిసి నేరుగా కష్టాలను అడిగి తెలుసుకుంటున్నాం'' అని రాహుల్ తెలిపారు.

సిగ్గుచేటు...

మణిపూర్ కొద్దిరోజులుగా హింసతో రగులుతోందని, అయినప్పటికీ ప్రజల కన్నీళ్లు తుడవడానికి దేశ ప్రధాని రాకపోవడం సిగ్గుచేటని విమర్శించారు. ''2004 నుంచి నేను రాజకీయాల్లో ఉన్నాను. దేశంలో పాలన మొత్తం కుప్పకూలిన ఒక ప్రాంతానికి రావడం మాత్రం ఇదే మొదటిసారి. గత ఏడాది జూన్ 29 తర్వాత మణిపూర్ ఎంతమాత్రం మణిపూర్‌లా లేదు. ఎక్కడ చూసినా విద్వేష వ్యాప్తి కనిపించింది. లక్షలాది మంది కగడండ్ల పాలయ్యారు. అనేక మంది తమ కుటుంబ సభ్యులను కోల్పోయారు. అయినా ఇంతవరకూ దేశ ప్రధాని వచ్చి ప్రజల కన్నీళ్లను తుడవలేదు. ఇది సిగ్గుచేటు. ప్రధానికి, బీజేపీకి, ఆర్ఎస్ఎస్‌కు మణిపూర్ భారత్‌లో భాగం కాకపోయి ఉండవచ్చు'' అని రాహుల్ ఆక్షేపించారు..

కోల్పోయిన శాంతిని తిరిగి తెస్తాం..

బీజేపీ రాజకీయాల వల్ల మణిపూర్‌లో కోల్పోయిన శాంతి, సామరస్యాన్ని తిరిగి తీసుకువస్తామని ప్రజలకు రాహుల్ మాట ఇచ్చారు. ప్రజల సాధకబాధకాలు తెలుసుకునేందుకు, శాంతి-సామరస్యాలతో కూడిన న్యూ-విజన్ ఆఫ్ ఇండియాను తెచ్చేందుకు తాము యాత్ర చేపట్టినట్టు చెప్పారు..

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Jan 10 2024, 16:23

कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, मणिपुर में भारत जोड़ों न्याय यात्रा की नहीं मिली मंजूरी, अब मचेगा सियासी बवाल

#manipurgovtcongressbharatjodonyayyatrapermissiondeclined

कांग्रेस ने की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' 14 जनवरी से शुरू होने जा रही है। हालांकि, इससे पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के बाद कांग्रेस पार्टी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ करने का फैसला किया है, जो कि मणिपुर से शुरू होनी है और मुंबई में खत्म होगी। हालांकि, मणिपुर के जिस ग्राउंड से यात्रा शुरू होनी है, उसके लिए मणिपुर सरकार ने मंजूरी देने से मना कर दिया है।

मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक के मेघचंद्र ने यात्रा की मंजूरी के लिए पार्टी नेताओं की एक टीम के साथ, बुधवार सुबह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि मुलाकात के दौरान सीएम ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। के मेघचंद्र ने कहा, ‘सीएम एन बीरेन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार यात्रा की अनुमति नहीं दे सकती है।

यात्रा का राजनीतिकरण ना करें- वेणुगोपाल

वहीं मणिपुर सरकार के फैसले पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, यह राजनीतिक प्रयास नहीं है और यात्रा का राजनीतिकरण ना करें। वेणुगोपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मणिपुर पीसीसी प्रेसिडेंट ने न्याय यात्रा की अनुमति चीफ सेक्रेटरी से मांगी थी। उन्होंने कहा की 5 दिन में जवाब देंगे, लेकिन जब जवाब नहीं आया तो खुद पीसीसी प्रेसिडेंट सचिव के पास अनुमति मांगने गए तो उन्होंने फिर कल शाम का वादा किया है। इसके बाद आज हमारे लोग सीएम से मिले तो उन्होंने भी कहा यात्रा को अनुमति नहीं दे सकते। ये यात्रा राजनीतिक नहीं है, राहुल गांधी वहां राजनीति करने नहीं जा रहे, वो शांति का संदेश देने जा रहे हैं। हम कोई तमाशा नहीं करना चाहते लेकिन ये ठीक नहीं।

इन राज्यों सो होकर गुजरेगी बारत जोड़ो न्याय यात्रा

बता दें कि कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा मणिपुर से शुरू होकर नगालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र में समाप्त होगी। वेणुगोपाल ने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष खड़गे इस यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। भारत जोड़ो न्याय यात्रा का मकसद आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय है। इस यात्रा में राहुल युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करेंगे। बस यात्रा से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जाएगा। यात्रा में कुछ छोटे हिस्से को रुक-रुककर पैदल भी कवर किया जाएगा।

भारत जोड़ो यात्रा रही थी सफल

इससे पहले राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 से 30 जनवरी 2023 तक भारत जोड़ो यात्रा की थी। 145 दिनों की यात्रा तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू होकर जम्मू-कश्मीर में खत्म हुई थी। तब राहुल ने 3570 किलोमीटर की यात्रा में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया था।श्रीनगर में यात्रा के समापन के मौके पर शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में राहुल ने कहा था- मैंने यह यात्रा अपने लिए या कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि देश की जनता के लिए की है। हमारा उद्देश्य उस विचारधारा के खिलाफ खड़ा होना है जो इस देश की नींव को नष्ट करना चाहती है।यात्रा के दौरान राहुल ने 12 सभाओं को संबोधित किया था, 100 से ज्यादा बैठकें और 13 प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं।

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Jan 06 2024, 15:48

खड़गे का पीएम मोदी पर जोरदार हमला, बोले- लक्षद्वीप जा सकते हैं, ये महापुरुष मणिपुर क्यों नहीं जा रहे

#mallikarjunkhargetargetpmmodifornotgoingmanipur

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है। खड़गे ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने भारत जोड़ो न्याय यात्रा की भी बात की।कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर के भारत जोड़ो न्याय यात्रा का प्रतीक चिह्न और नारा लॉन्च किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल इस दौरान मौजूद रहे।

इस तरह फोटो खिंचवाते हैं, जैसे भगवान दर्शन दे रहे हों-खड़गे

खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा मणिपुर में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी वहां नहीं गए। वे राम मंदिर साइट या बीच पर जाते हैं और फोटो सेशन कराते हैं। वे मुंबई या केरल जाते हैं, हर जगह जाते हैं, आप उनकी फोटो हर जगह देख सकते हैं...वे इस तरह फोटो खिंचवाते हैं, जैसे भगवान दर्शन दे रहे हों। लेकिन ये महापुरुष मणिपुर क्यों नहीं जाता?

सरकार हमें संसद में नहीं बोलने देती-खड़गे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' का लोगो जारी किया। इस दौरान खरगे ने कहा कि भारत जोड़ों न्याय यात्रा, देशवासियों को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय दिलाने की ओर हमारा एक मजबूत कदम है। खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खरगे ने कहा कि हमको यात्रा निकालनी पड़ रही है क्योंकि हमारे पास कोई रास्ता नहीं था। जब हमने संसद में देश से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश की तो सरकार ने हमें बोलने नहीं दिया। 

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए लोगों के बीच जा रहे-खड़गे

सांसदों के निलंबन पर खड़गे ने कहा कि देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब 146 सांसदों को निलंबित कर दिया गया। यही वजह है कि हम भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए लोगों के बीच जा रहे हैं ताकि हम उनकी बात सुन सकें और हमारी बात कह सकें। खरगे ने कहा कि अमीर गरीब की खाई बढ़ रही है और जातिगत जनगणना नहीं हो रही है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन दोनों बातों को यात्रा के दौरान उठाएगी। कांग्रेस ने यात्रा में शामिल होने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं, सिविल सोसाइटी के अलावा समाज के हर वर्ग के लोगों को आमंत्रित किया है।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी से शुरू होगी

कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी से शुरू होगी। खास बात है कि राहुल गांधी द्वारा निकाली जा रही इस यात्रा की शुरुआत मणिपुर की राजधानी इंफाल से होगी। यह यात्रा मणिपुर से शुरू होकर 20 मार्च को मुंबई में खत्म होगी। लोकसभा चुनाव से करीब 4 महीने पहले होने वाली यह यात्रा 14 राज्य और 85 जिलों को कवर करेगी। इस दौरान राहुल पैदल और बस से 6 हजार 200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करेंगे।यह मणिपुर से शुरू होकर नगालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र में समाप्त होगी।

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Dec 27 2023, 12:09

*अब कांग्रेस निकालेगी 'भारत न्याय यात्रा', इस बार मणिपुर से मुंबई तक चलेंगे राहुल गांधी*

#congressrahulgandhimanipurtomumbaibharatnyayyatra 

भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब राहुल गांधी मणिपुर से मुंबई तक यात्रा करेंगे। यह यात्रा 6200 किलोमीटर की होगी, जो कुल 14 राज्यों से होकर गुजरेगी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि 14 जनवरी से शुरू होगी जो 20 मार्च तक चलेगी।रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस के इस आयोजन में पार्टी आलाकमान के अलावा प्रदेश कांग्रेस के तमाम नेता भी शिरकत करेंगे।पिछले साल सितंबर से लेकर इस साल 14 जनवरी तक भारत जोड़ो यात्रा करने के बाद अब राहुल गांधी 'भारत न्याय यात्रा' पर निकलेंगे।

इस बार पूर्व से पश्चिम की ओर सफर करेंगे राहुल

'भारत न्याय यात्रा' लोगों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के लिए की जा रही है। भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से हुई थी, जो कश्मीर में जाकर खत्म हुई थी। राहुल ने इस यात्रा में दक्षिण से उत्तर का सफर किया था। वहीं, भारत न्याय यात्रा की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर से होगी, जो पश्चिम में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में जाकर खत्म होगी। इस तरह राहुल भारत न्याय यात्रा में पूर्व से पश्चिम की ओर सफर करने वाले हैं।

यात्रा 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी

भारत न्याय यात्रा बस से की जाएगी। बता दें कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा पैदल कवर की थी। भारत न्याय यात्रा 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी। मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से भारत न्याय यात्रा गुजरने वाली है।

हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करेंगे राहुल गांधी

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत न्याय यात्रा को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा,21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने सर्वसम्मति से अपना मत रखा कि राहुल गांधी को पूर्व से पश्चिम की ओर एक यात्रा करनी चाहिए। राहुल गांधी भी सीडब्ल्यूसी की इस इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने कहा, इस यात्रा में राहुल गांधी युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करने वाले हैं। बस यात्रा के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जाएगा। यात्रा में कुछ छोटे हिस्से को रुक-रुक कर पैदल भी कवर किया जाएगा।

यात्रा को मणिपुर से शुरू करने का क्या है मकसद?

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि इस यात्रा को मणिपुर से शुरू करने का मकसद यह है कि मणिपुर देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम वहां के लोगों के घाव पर मरहम लगाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक यात्रा नहीं है। यह आम लोगों के लिए है जो पीड़ित हैं। हम आपको इस यात्रा के बारे में विस्तार से बताएंगे।

भारत जोड़ो यात्रा क्या थी?

राहुल गांधी ने सितंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की थी, जो जनवरी 2023 में जाकर खत्म हुई। राहुल गांधी की यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई। इस यात्रा के जरिए उन्होंने 4500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पैदल ही तय किया। इस यात्रा का मकसद भारत को एकजुट और देश को मजबूत करना था। कांग्रेस की इस यात्रा से उसका संगठन काफी मजबूत हुआ था। भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी, 2023 को कश्मीर में जाकर खत्म हुई। भारत जोड़ो यात्रा के जरिए 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के 75 जिलों को कवर किया गया था। ये यात्रा जिस-जिस राज्य से होकर गुजरी, उस-उस राज्य में कांग्रेस नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया। कई प्रमुख हस्तियों को भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होते हुए देखा गया था।

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Nov 29 2023, 19:01

मणिपुर में उग्रवादी समूह यूएनएलएफ ने शांति समझौते पर किया हस्ताक्षर, अमित शाह ने कहा-ऐतिहासिक उपलब्धि

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मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने केंद्र के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।केंद्र और राज्य के साथ लंबी चली वार्ता के बाद यूएनएलएफ ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये जानकारी दी है। इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट कर खुशी जाहिर की। 

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर बताया कि ‘पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने एक नया अध्याय जोड़ा है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने आज एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।मणिपुर का सबसे पुराना घाटी स्थित सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा को त्यागने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल हुआ। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

एक और पोस्ट में गृह मंत्री ने कहा, भारत सरकार और मणिपुर सरकार की ओर से यूएनएलएफ के साथ आज हस्ताक्षरित शांति समझौता छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सर्वसमावेशी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने और पूर्वोत्तर भारत में युवाओं को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक माना जा रहा समझौता यूएनएलएफ पाम्बेई समूह के सदस्यों की मौजूदगी में हुआ। समझौते के लिए सभी लोग राष्ट्रीय राजधानी में गृह मंत्रालय पहुंचे थे।

गृह मंत्रालय द्वारा कई अन्य चरमपंथी संगठनों के साथ यूएनएलएफ पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद शांति समझौता हुआ।दरअसल, मणिपुर में केंद्र सरकार ने इससे पहले पीपुल्स लिबरेशन आर्मी समेत 9 चरमपंथी मेइती संगठनों पर पाबंदी लगा दी थी। इनमें से ज्यादातर मणिपुर में सक्रिय हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन समूहों को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया गया, उनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, जिसे आम तौर पर पीएलए के नाम से जाना जाता है, और इसकी राजनीतिक शाखा, रिवॉल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र शाखा मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) शामिल हैं।

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Nov 13 2023, 18:49

मणिपुर में तनाव के बीच केंद्र का बड़ा एक्शन, 9 मैतेई चरमपंथी समूहों पर 5 साल के लिए लगाया प्रतिबंध

#9meiteimilitantgroupsofmanipurbannedforfive_years

मणिपुर में हिंसा की आग को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और सुरक्षाबलों पर घातक हमले करने को लेकर नौ मैतेई चरमपंथी संगठन और उनके सहयोगी संगठनों पर बैन लगा दिया है। नौ मैतेई उग्रवादी ग्रुप्स और उनके सहयोगी संगठनों पर पांच साल के लिए बैन लगा दिया। यह बैन इनकी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और सुरक्षा बलों पर घातक हमले करने के कारण लगाया गया है। ये ग्रुप्स मणिपुर में एक्टिव हैं। यह बैन आज से ही लागू होगा।

इन उग्रवादी ग्रुप्स पर लगाया बैन

गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में जिन ग्रुप्स को बैन गया है उनमें- उनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और इसकी राजनीतिक शाखा, रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र शाखा मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) शामिल हैं। इनमें पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) और इसकी सशस्त्र शाखा रेड आर्मी, कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी), इसकी सशस्त्र शाखा (जिसे रेड आर्मी भी कहा जाता है), कांगलेई याओल कनबा लुप (केवाईकेएल), कोआर्डिनेशन कमेटी (कोरकॉम) और एलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलेईपाक (एएसयूके) भी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने बताया बैन लगाना क्यों जरूरी?

अपनी अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार की राय है कि यदि मैतेई चरमपंथी संगठनों पर तत्काल अंकुश नहीं लगाया गया तो वे अपने अलगाववादी, विध्वंसक, आतंकवादी और हिंसक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए अपने कैडरों को संगठिन करने का अवसर तलाश सकते हैं।इसमें कहा गया कि वे भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक ताकतों के साथ मिलकर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का प्रचार करेंगे, लोगों की हत्याओं में शामिल होंगे और पुलिस तथा सुरक्षाबलों के जवानों को निशाना बनाएंगे। अधिसूचना के अनुसार, अंकुश न लगाए जाने की स्थिति में ये समूह और संगठन अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार से अवैध हथियार और गोला-बारूद हासिल करेंगे। अपनी गैरकानूनी गतिविधियों के लिए जनता से भारी धन की वसूली करेंगे।

इन ग्रुप्स पर बैन बढ़ा

इसके अलावा पीएलए,यूएनएलएफ, पीआरईपीएके,केसीपी,केवाईकेएल को कई साल पहले गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत गृह मंत्रालय ने बैन किया था। नए एक्शन में इन पर बैन को पांच साल तक बढ़ा दिया है। अन्य संगठनों के गैरकानूनी घोषित होने का ऐलान ताजा है।

3 मई को कुकी और मैतेई समुदायों के बीच भड़क उठी थी हिंसा

दरअसल, मणिपुर उस समय हिंसा की आग में जल उठा जब 3 मई को कुकी और मैतेई समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। तीन मई को राज्य के कुकी और दूसरे जनजातीय समुदाय ने एक रैली निकाली। ये रैली मैतेई समुदाय को जनजाति का दर्ज़ा दिए जाने की मांग के ख़िलाफ़ निकाली गई थी। रैली के बाद हिंसा भड़की और कुकी समुदाय की तरफ से मैतेई समुदाय पर हमले किए गए।इसके जवाब में मैतेई समुदाय ने भी प्रतिक्रिया दी और मैतेई बहुल इलाक़ों में रह रहे कुकी समुदाय के लोगों के घर जला दिए गए और उन पर हमले किए गए।इन हमलों के बाद मैतेई बहुल इलाकों में रहने वाले कुकी और कुकी बहुल इलाकों में रहने वाले मैतेई अपने-अपने घर छोड़कर जाने लगे। हिंसा में अब तक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए हैं।हिंसा की वजह से हजारों की संख्या में लोग पलायन कर दूसरे राज्यों में रहने के लिए मजबूर हैं। इसके साथ-साथ हजारों लोगों को राहत शिविर में रखा गया है।

क्यों भड़की हिंसा की आग?

बता दें कि मणिपुर में मुख्य तौर पर तीन समुदाय के लोग रहते हैं. मैतेई और जनजातीय समूह कुकी और नगा. पहाड़ी इलाक़ों में कुकी, नगा समेत दूसरी जनजाति के लोग रहते हैं।जबकि इंफ़ाल घाटी में बहुसंख्यक मैतेई लोग रहते हैं।मैतेई समुदाय के ज़्यादातर लोग हिंदू हैं तो नगा और कुकी समुदाय के लोग मुख्य तौर पर ईसाई धर्म के हैं। जनसंख्या में ज़्यादा होने के बावजूद मैतेई मणिपुर के 10 प्रतिशत भूभाग में रहते हैं जबकि बाक़ी के 90 प्रतिशत हिस्से पर नगा, कुकी और दूसरी जनजातियां रहती हैं।मणिपुर के मौजूदा जनजाति समूहों का कहना है कि मैतेई का जनसांख्यिकी और सियासी दबदबा है। इसके अलावा ये पढ़ने-लिखने के साथ अन्य मामलों में भी आगे हैं।उनका मानना है कि अगर मैतेई को भी जनजाति का दर्जा मिल गया तो उनक लिए नौकरियों के अवसर कम हो जाएंगे और वे पहाड़ों पर भी ज़मीन ख़रीदना शुरू कर देंगे। ऐसे में वे और हाशिए पर चले जाएंगे।

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Oct 28 2023, 19:36

SSC Delhi Police Constable Application Status OUT

Total Vacancy : 7547

Exam Name : Constable (Executive) Male and Female in Delhi Police Examination 2023

Exam Date : 14 November 2023 to 03 December 2023

Check Application Status :

Karnataka, Kerla : Karnataka, Kerla Region (KKR)

Uttar Pradesh & Bihar : Central Region (CR) Link Active Soon

Assam, Arunachal Pradesh, Manipur, Meghalaya, Tripura, Nagaland, Mizoram : North Eastern Region (NER) Link Active Soon

Maharashtra, Gujrat, Goa : Western Region (WR) Link Active Soon

Madhya Pradesh, Chhattisgarh : MP Sub-Region (MPR) Link Active Soon

Rajasthan, Delhi, Uttarakhand : North Region (NR) Link Active Soon

Hariyana, Punjab, J&K, Himachal Pradesh : North Western Sub-Region (NWR) Link Active Soon

West Bengal, Orrisa, Jharkhand, A&N Island, Sikkim : Eastern Region (ER) Link Active Soon

Andhra Pradesh, Punduchery, Tamilnadu : Southern Region (SR) Link Active Soon

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Oct 02 2023, 14:18

मणिपुर में किसने फैलाया था 'नफरत' का केरोसिन, कैसे रचा गया पूरा प्रोपेगेंडा ? महीनों बाद ख़ुफ़िया एजेंसियों के हाथ लगा बड़ा सबूत, डिटेल में जानिए

मणिपुर में लगभग 3 महीनों तक चले हिंसा और उस पर मची राजनीती को लेकर अब परत-दर-परत खुलासे हो रहे हैं। मणिपुर में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का भी जो नैरेटिव राजनेताओं द्वारा बनाया गया, उसके पीछे अंतर्राष्ट्रीय साजिशें सामने आ रहीं हैं।

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में फिर से भड़की हिंसा के पीछे खालिस्तानी आतंकवादियों का भी बड़ा हाथ है। खुफिया एजेंसियों को बाकायदा इसके प्रमाण भी मिले हैं, एजेंसियों का दावा है कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या के बाद 'अल्पसंख्यक' कुकी समुदाय के एक वरिष्ठ नेता ने आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू के साथ बैठक की थी। 3 घंटे चली इस मीटिंग के बाद खालिस्तानी नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपए मणिपुर में कुकियों के लिए भेजे गए। इन पैसों का इस्तेमाल कुकियों द्वारा मैतई समुदाय के खिलाफ हिंसा में ही किया जाना था या फिर किया भी जा रहा हो। 

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों के हाथ कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित सरे के एक गुरुद्वारे में खालिस्तानी समर्थकों की सभा का एक वीडियो भी लगा है। इसमें मणिपुर के अल्पसंख्यक कुकी अलगाववादी नेता लीन गंग्ते नज़र आ रहा है। गंग्ते नार्थ अमेरिकन मणिपुर ट्राइबल एसोसिएशन (NAMTA) यानी नामटा का प्रमुख है। 2 मिनट 20 सेकंड के इस वीडियो में गंग्ते वहां मौजूद लोगों के सामने भाषण दे रहा है।

कनाडा से पनाह मांग रहे कुकी नेता

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गंग्ते ने कनाडा के गुरुद्वारे में खालिस्तानियों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला, उसने कहा कि, ''जिस प्रकार आप लोग खालिस्तान की मांग कर रहे है, वैसे ही हम भी अलग मणिपुर के लिए लड़ रहे हैं। सरकार, मणिपुर में हमारे समुदाय के नेताओं को मिटा देना चाहती है, इसलिए उन्हें कनाडा में राजनीतिक शरण दी जाए।'' खालिस्तानियों के सामने भारत विरोधी भाषण में गंग्ते ने आगे कहा कि, ''हमारे समुदाय (कूकी) को भी कनाडा में राजनितिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिले।’ इसके बाद गुरुनानक गुरुद्वारा समिति सरे के कार्यक्रम में मौजूद कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने गंग्ते को आगे की रणनीति साथ मिलकर बनाने का आश्वासन दिया।

बता दें कि, कूकी (30 फीसद आबादी) मणिपुर में रहने वाली एक जनजाति है, जिसका राज्य के 90 फीसद पहाड़ी इलाकों पर कब्जा है, वहां मैतई समुदाय जमीन नहीं खरीद सकता और काम धंधा नहीं कर सकता। अधिकतर कूकी मिशनरियों के प्रभाव में आकर ईसाई बन चुके हैं, वहीं मैतई समुदाय (53 फीसद) बहुसंख्यक है, जो वैष्णव धर्म का पालन करता है और राज्य के 10 फीसद मैदान वाले हिस्से में सिमटा हुआ है, उसने मांग की थी कि, उसे भी जनजाति (ST) का दर्जा दिया जाए, ताकि वो भी पहाड़ी इलाकों में जाकर खेती बाड़ी कर सके, क्योंकि 10 फीसद जमीन काफी कम है। इसी बात से कूकी आक्रोशित हैं, हाई कोर्ट ने जब मैतई समुदाय को ST का दर्जा दे दिया, तो कुकियों ने विरोध किया और परिणामस्वरूप हिंसा शुरू हो गई, अब कुकियों को भारत विरोधी तमाम ताकतों से मदद मिल रही है।  

कूकी नेता ने कहा- भारत में अल्पसंख्यक असुरक्षित 

वीडियो में कूकी के अलगाववादी नेता ने मणिपुर (Truth of Manipur Violence) मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा बयान न देने पर भी हमला बोला है। उसने कहा कि, मोदी अमेरिका गए, फ्रांस गए, मिस्र गए, लेकिन उन्होंने मणिपुर मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। लीन गंग्ते ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों पर हमले किए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक भारत में सुरक्षित नहीं हैं। बता दें कि, ''अल्पसंख्यक भारत में सुरक्षित नहीं हैं'' या ''भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचर हो रहा है'', ये वही जुमले हैं, जो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अक्सर विदेश दौरों पर बोलते रहते हैं। यही आरोप पाकिस्तान पूरी दुनिया में घूम-घूमकर भारत पर लगाता रहता है कि, भारत मुस्लिमों (अल्पसंख्यक) पर अत्याचार कर रहा है। खालिस्तानी भी यही कहकर लोगों को भड़काते हैं कि ''भारत में सिखों के साथ भेदभाव हो रहा है।'' आतंकियों के इस नैरेटिव को अनजाने में ही या फिर जानबूझकर सियासी लाभ के लिए, राहुल गांधी आगे बढ़ाते हैं, जब वे ब्रिटेन में जाकर कहते हैं कि, 'भारत में सिखों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता है।' इसके कुछ ही दिनों बाद ब्रिटेन में भारतीय दूतावास पर हमला हो जाता है और खालिस्तानी तिरंगे को अपमानित करते हैं। क्या इससे यह समझ में नहीं आता कि, आतंकी, भारतीय नेताओं द्वारा दिए गए राजनितिक बयानों को हथियार बनाकर लोगों को भड़का रहे हैं ? अब ये पूरा रैकेट धीरे-धीरे उजागर हो रहा है कि, मणिपुर में किस तरह आग लगाई गई ? 

उधर, नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में मणिपुर में पहली गिरफ्तारी कर ली है। NIA ने चूराचांदपुर से से कूकी नेता इमीन्लुन गंग्ते को पकड़ा है। गंग्ते पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का इल्जाम है। आरोप है कि आतंकी संगठन चिन-कुकी-मिजो लोगों के लिए अलग राज्य बनाने के लिए भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की साजिश रच रहे हैं। भारत के खिलाफ इसी युद्ध को कुछ राजनेता यह कहकर अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं कि, 'भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार' हो रहा है। इससे उन अलगाववादियों को ताकत मिल रही है और वो भारत विरोधी अन्तर्राष्ट्रीय ताकतों से मदद लेकर भारत को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। 

विदेश मंत्री ने वाशिंगटन में बताया 'अल्पसंख्यकों पर अत्याचार' का सच :-

'भारत में अल्पसंख्यकों पर जुल्म होता है', बार-बार कही जा रही इस बात पर दुनिया के कुछ देश भरोसा करने लगे हैं और मौका मिलते ही विदेश यात्रा पर पहुंचे भारत सरकार के किसी प्रतिनिधि पर अल्पसंख्यकों से जुड़ा सवाल दाग देते हैं। यही सवाल अमेरिका दौरे पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर के सामने भी रखा गया। कई बार भारत इन सवालों का जवाब देने में रक्षात्मक हो जाया करता था, लेकिन अब वो आँख में आँख मिलाकर जवाब देता है। विदेश मंत्री ने इसका बेबाकी से उत्तर दिया और दो टूक जवाब देकर अमेरिकी प्रतिनिधि को चुप करा दिया। उन्होंने कहा कि, 'चूंकि आपने भारत में अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया है, किन्तु यह बताइए कि निष्पक्ष और सुशासन या समाज के संतुलन की कसौटी क्या है? इसकी कसौटी यही होगी कि आप सुविधाओं के मामले में, लाभ के मामले में, पहुंच के मामले में, अधिकारों के मामले में, किसी से भेदभाव करते हैं या नहीं।'

 

विदेश मंत्री ने कहा कि आज, जब आप अल्पसंख्यकों को मिलने वाले लाभों को देखते हैं, तो आप देखते हैं आवास के मामले में, आप स्वास्थ्य को देखते हैं, आप भोजन को देखते हैं, आप आर्थिक मदद को देखते हैं, आप शैक्षिक पहुंच को देखते हैं। उन्होंने कहा कि, "मैं आपको चुनौती देता हूं कि आप मुझे भारत में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव दिखाइए।'' इसके बाद जयशंकर ने वाशिंगटन डीसी से दुनिया को वो सच्चाई बताई, जिसके कारण 'अल्पसंख्यकों पर अत्याचार' का नैरेटिव फैलाया जाता है। उन्होंने कहा कि, "जैसा कि मैंने कहा यह एक वैश्वीकृत दुनिया है। ऐसे लोग होंगे, आपके मन में इसके बारे में फ़िक्र होगी और उनमें से अधिकांश शिकायत सियासी है। मैं आपसे बहुत स्पष्ट तौर पर कहना चाहता हूं, क्योंकि हमारे यहां भी वोट बैंक की संस्कृति रही है और ऐसे वर्ग भी हैं, जिनका उनकी नजर में एक निश्चित विशेषाधिकार था।" 

बता दें कि, वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए ही 'अल्पसंख्यकों पर अत्याचार' का नैरेटिव फैलाया जाता है, जो जितनी अधिक ताकत से यह मुद्दा उठता है, अल्पसंख्यकों को लगता है कि, वो उनका शुभचिंतक है और फिर अल्पसंख्यकों का वोट भी वहीं जाता है। भारत के बहुसंख्यक वर्ग के अधिकतर त्योहारों पर निकाली जाने वाली शोभायात्राओं और जुलुस पर अल्पसंख्यकों द्वारा हमला किए जाने की कई ख़बरें आए दिन आप देखते ही होंगे, उसके बाद भी दुनियाभर में यह नैरेटिव फैलाया जाता है कि, भारत में अल्पसंख्यक पीड़ित हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में सबसे कम आबादी जैन समुदाय की है, महज 0.4 फीसद, जो कारोबार में काफी आगे हैं, क्या उन्होंने कभी अपने ऊपर अत्याचार होने का दावा किया है या किसी नेता ने उनका मुद्दा उठाया है ? नहीं, क्योंकि वे अल्पसंख्यक तो हैं, लेकिन उनकी आबादी इतनी नहीं कि, वो वोट बैंक बन सकें। जैनियों से भी कम आबादी वाले पारसी और यहूदी, जो अपने देश को छोड़कर कई सालों पहले भारत में शरण लेने आए थे, उन्होंने भी आज तक उत्पीड़न की शिकायत नहीं की, उल्टा वे देश की उन्नति में योगदान दे रहे हैं। एक सिख अल्पसंख्यक हैं, सबसे अधिक भारतीय सेना में उनका योगदान माना जाता है, देशभर में सबसे अधिक लंगर यही अल्पसंख्यक समुदाय चलाता है। फिर 'अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का नैरेटिव' क्यों ?

ये शिकायतें 90 फीसद एक ही समुदाय की तरफ से आती है, जो अल्पसंख्यकों में सबसे बड़े बहुसंख्यक हैं, लगभग 25 करोड़ आबादी है, वो वोट बैंक भी हैं, एकमुश्त वोट देते हैं, और उनका समर्थन प्राप्त करने के लिए ही राजनेता 'अल्पसंख्यकों पर अत्याचार' का नैरेटिव चलाते हैं। पाकिस्तान भी आतंकियों को भारत पर हमला करने के लिए यही बोलकर भड़काता है कि, भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहा है और बड़ी संख्या में युवा उसके कहने पर भारत में खून की नदियाँ बहाने के लिए तैयार हो जाते हैं, आतंकी बन जाते हैं। लेकिन, ये नैरेटिव फैला रहे राजनेताओं को भी सोचना चाहिए कि, क्या वे ऐसा करके देशहित का काम कर रहे हैं ? उन्हें कम से कम यह सवाल तो खुद से पूछना चाहिए कि, क्या दुनिया में कोई ऐसा देश है, जहाँ एक धर्म के बहुसंख्यक होने के बावजूद दूसरा धर्म पनप सके ? भारत में हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद, जब भगवान महावीर आए, तो एक तबका उनके पीछे चल पड़ा और जैन हो गया, कुछ वर्षों बाद भगवान बुद्ध आए, उनके साथ भी यही हुआ, कई लोग बौद्ध हो गए। फिर गुरु नानक आए, जिन्होंने सिख संप्रदाय की नींव रखी, भारत से निकले ये चारों धर्म आज आपसी प्रेम और सद्भाव से रहते हैं। अगर भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की संस्कृति होती, तो क्या ऐसा हो पाता ? आज भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक (हिन्दू,सिख, ईसाई, बौद्ध) गिनती के रह गए हैं, वहीं, भारत में रह रहे अल्पसंख्यकों की तादाद बढ़ रही है और वे फल-फूल रहे हैं, यदि अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता, तो क्या स्थिति ये होती ?

WestBengalBangla

Sep 30 2023, 16:30

*Subroto Cup Sub-Junior (U 14) Boys to start tomorrow in Bengaluru*

Sports News

Bengaluru: The Sub-Junior (U 14) Boys category of the 62nd edition of the Subroto Cup International Football Tournament, will kick start tomorrow in Bengaluru. This is the first time in history that the national championships of the most prestigious inter-school football tournament of the country are being played outside the national capital. It has been the longstanding desire for the Subroto Mukherjee Sports Education Society (SMSES) to spread the reach of this iconic tournament to more corners of the country and the Sub-Junior boys tournament in Garden City is a start to the initiative.

The group stage matches will be played at the Air Force School, Jalahalli, Air Force School, Yelahanka and Air Force Training Command. All the knockout matches will be played at the Army Service Corps (ASC) Centre. The group stage matches will see 37 teams, including a team from Bangladesh competing for the coveted title. They are divided into eight groups, in which the winners of each group will qualify for the quarterfinals.

GROUP A

1. H.K Singh Memorial Secondary School, West Jaintia Hills, Jowai, Meghalaya

2. Sainik School, Tilaiya, Koderma, Jharkhand

3. Kendriya Vidyalaya IMA, Dehradun, Uttarakhand

4. Sudhanwa Debarma Memorial H.S.S, Sepahijala, Tripura

5. Jawahar Navodaya Vidyalaya, Maheshpur, Pakur, Jharkhand .

GROUP B

1. Chawngfianga Middle School, Saiden, Kulasib, Mizoram

2. Ramkrishna Mission Vivekanand Vidyapeeth, Narayanpur, Chattisgarh

3. Primary Marathi School, Kauncha, Chikhalipada, Silvassa, DD & D&NH

4. Army Public School, Bhuj, Gujarat

5. Manikpara High School, Jhargram, West Bengal.

GROUP C

1. Govt. N.N.M.H.S.S Chelembra, Malappuram, Kerala

2. Tashi Namgyal Academy, Gangtok, Sikkim

3. Major Dhyanchand Sports College, Sefai, Etawah, Uttar Pradesh

4. Minerva Public School, Kochi, Kerala

5. The Assam Valley School, Sonitpur, Assam.

GROUP D

1. S.S +2 Higher School, Simdega, Jharkhand

2. National Cadet Corps

3. Navarachana Higher Secondary School, Vadodara, Gujarat

4. The Air Force School, Subroto Park, New Delhi

5. Army Public School, Delhi Cantt, New Delhi

GROUP E

1. The Unique Model Academy, Imphal East, Manipur

2. Rajkeeyakrat Madhya Vidyalaya, Fazalgang, Sasaram, Bihar

3. Kamala Devi Public School, Karond, Bhopal, Madhya Pradesh

4. Amenity Public School, Rudrapur, Uttrakhand

5. Navy Children School, Kochi, Kerala

GROUP F

1. Greenwood School Khelo India Centre, Nagaland

2. Maharana Pratap Sports College, Dehradun, Uttarakhand

3. Loyola High School, Margao, Goa

4. Oberoi International School, Mumbai

GROUP G

1. Strawberry Fields High School, Sector 26, Chandigarh

2. Indira Modern High School, Bhuna, Fatehabad, Haryana

3. Imamia Public School, Watergram Wagoora, Baramulla, Jammu & Kashmir

4. Mother’s Pride Public School, Maloti, Himachal Pradesh

GROUP H

1. Bampatner Bengenabari H.S.S, Sibsagar, Assam

2. The Cathedral and John Connon School, Mumbai, Maharashtra

3. Don Bosco H.S.S, Perambur, Chennai, Tamil Nadu

4. Bangladesh Krida Shiksha Protishthan, Bangladesh.

India

Jan 31 2024, 18:27

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में दो की मौत

#manipurviolenceatleastto_die 

मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़कने की खबर है। ताजा हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई है।राज्य में एक ग्रामीण स्वयंसेवक की मौत के बाद हुई फायरिंग के दो और लोग मारे गए, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। घायलों में राज्य के एक शीर्ष भाजपा युवा नेता भी शामिल हैं।ताजा हिंसा की घटना जिसमें दो समूहों के बीच हुई।

मंगलवार को करीब 12.30 बजे बेथेल के सामान्य क्षेत्र और सपेरमीना के अंतर्गत लाम्बुंग पहाड़ी में संदिग्ध मौतेई आंतकवादी, स्वयंसेवकों, वीबीआईजी, अरामबाई तेंगगोल्स और सदिग्ध कुकी आतंकवादियों सशस्त्र स्वयंसेवकों, एचबीआईजी गुटों में भारी गोलीबारी हुई। बंदूकधारियों ने लीमाखोंग के पास कदंगबन गांव में प्रवेश किया और 2 लोगों की हत्या कर दी, जबकि पांच अन्य लोग गोली लगने से घायल हो गए।

अंग्रेजी अखबार दि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गोलीबारी मंगलवार (30 जनवरी) दोपहर में शुरू हुई और कई घंटों तक चलती रही। फायरिंग के दौरान मारे गए दोनों लोगों की पहचान 33 साल के नोंगथोम्बम माइकल और 25 साल के मीस्नाम खाबा के तौर पर हुई। दोनों के शव 30 जनवरी की शाम रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंज ले जाए गए। 

आदिवासियों के लिए अलग प्रशासन की मांग

मणिपुर में हिंसा की घटनाओं के बीच राज्य के दस आदिवासी विधायकों, जिनमें सत्तारूढ़ बीजेपी के सात विधायक भी शामिल हैं, ने पीएम नरेंद्र मोदी को भेजे एक ज्ञापन में आदिवासियों के लिए एक अलग प्रशासन (अलग राज्य के बराबर) गठित करने की अपनी मांग दोहराई। प्रधानमंत्री को दिए अपने ज्ञापन में आदिवासी विधायकों ने कहा कि मणिपुर में जारी संघर्ष की स्थिति बद से बदतर हो गई है। मणिपुर के तीन विधायक जिनमें राज्य कांग्रेस अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र सिंह और सत्तारूढ़ भाजपा के दो विधायक शामिल हैं। इन सभी को कथित तौर पर 24 जनवरी को इंफाल के कांगला किले में अरामबाई तेंगगोल के सदस्यों द्वारा पीटा गया और मजबूर किया गया।

हिंसा शुरू हुए क़रीब नौ महीने हो गए

मणिपुर में हिंसा शुरू हुए क़रीब नौ महीने हो चले हैं, लेकिन राज्य से लगातार लोगों की मौत की ख़बरें आ रही हैं। पिछले कुछ दिनों में गोलीबारी में सुरक्षाबलों और आम लोगों की जानें गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ हिंसा में अब तक 200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 3000 से अधिक घायल हो चुके हैं। हिंसा में हजारों लोग विस्थापित भी हुए, जबकि राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों के कम से कम 60,000 कर्मियों की तैनाती के बाद भी आठ महीने से अधिक समय से वहां रुक-रुक कर हिंसा की घटनाएं देखने को मिली हैं

నిజంనిప్పులాంటిది

Jan 14 2024, 20:50

Bharat Jodo Nyay Yatra: అన్యాయ కాలంలో ఉన్నందునే న్యాయ్ యాత్ర: రాహుల్

దేశంలో అన్యాయ కాలం నడుస్తున్నందునే న్యాయ్ యాత్ర చేపట్టినట్టు కాంగ్రెస్ మాజీ అధ్యక్షుడు, వయనాడ్ ఎంపీ రాహుల్ గాంధీ (Rahul Gandhi) అన్నారు..

మణిపూర్‌ (Manipur)లోని ధౌబల్‌లో 'భారత్ జోడో న్యాయ్ యాత్ర' (Bharat Jodo Nyay Yatra)ను రాహుల్ ఆదివారంనాడు ప్రారంభించారు. అనంతరం ఆయన మాట్లాడుతూ, దేశ ప్రజలను ఏకం చేయడానికే భారత్ న్యాయ్ యాత్ర చేపడుతున్నామని చెప్పారు.

''చాలా మంది న్యాయ్ యాత్ర ఎందుకని అడుగుతున్నారు. అన్యాయ కాలంలో ఉన్నాము కాబట్టే న్యాయ్ యాత్ర చేపడుతున్నాం. ప్రజలు సామాజికంగా, రాజకీయంగా, ఆర్థికంగా అన్నివిధాలా అన్యాయాలకు గురవుతున్నారు. న్యాయ్ యాత్రతో ప్రజలందరిని కలిసి నేరుగా కష్టాలను అడిగి తెలుసుకుంటున్నాం'' అని రాహుల్ తెలిపారు.

సిగ్గుచేటు...

మణిపూర్ కొద్దిరోజులుగా హింసతో రగులుతోందని, అయినప్పటికీ ప్రజల కన్నీళ్లు తుడవడానికి దేశ ప్రధాని రాకపోవడం సిగ్గుచేటని విమర్శించారు. ''2004 నుంచి నేను రాజకీయాల్లో ఉన్నాను. దేశంలో పాలన మొత్తం కుప్పకూలిన ఒక ప్రాంతానికి రావడం మాత్రం ఇదే మొదటిసారి. గత ఏడాది జూన్ 29 తర్వాత మణిపూర్ ఎంతమాత్రం మణిపూర్‌లా లేదు. ఎక్కడ చూసినా విద్వేష వ్యాప్తి కనిపించింది. లక్షలాది మంది కగడండ్ల పాలయ్యారు. అనేక మంది తమ కుటుంబ సభ్యులను కోల్పోయారు. అయినా ఇంతవరకూ దేశ ప్రధాని వచ్చి ప్రజల కన్నీళ్లను తుడవలేదు. ఇది సిగ్గుచేటు. ప్రధానికి, బీజేపీకి, ఆర్ఎస్ఎస్‌కు మణిపూర్ భారత్‌లో భాగం కాకపోయి ఉండవచ్చు'' అని రాహుల్ ఆక్షేపించారు..

కోల్పోయిన శాంతిని తిరిగి తెస్తాం..

బీజేపీ రాజకీయాల వల్ల మణిపూర్‌లో కోల్పోయిన శాంతి, సామరస్యాన్ని తిరిగి తీసుకువస్తామని ప్రజలకు రాహుల్ మాట ఇచ్చారు. ప్రజల సాధకబాధకాలు తెలుసుకునేందుకు, శాంతి-సామరస్యాలతో కూడిన న్యూ-విజన్ ఆఫ్ ఇండియాను తెచ్చేందుకు తాము యాత్ర చేపట్టినట్టు చెప్పారు..

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Jan 10 2024, 16:23

कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, मणिपुर में भारत जोड़ों न्याय यात्रा की नहीं मिली मंजूरी, अब मचेगा सियासी बवाल

#manipurgovtcongressbharatjodonyayyatrapermissiondeclined

कांग्रेस ने की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' 14 जनवरी से शुरू होने जा रही है। हालांकि, इससे पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के बाद कांग्रेस पार्टी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ करने का फैसला किया है, जो कि मणिपुर से शुरू होनी है और मुंबई में खत्म होगी। हालांकि, मणिपुर के जिस ग्राउंड से यात्रा शुरू होनी है, उसके लिए मणिपुर सरकार ने मंजूरी देने से मना कर दिया है।

मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक के मेघचंद्र ने यात्रा की मंजूरी के लिए पार्टी नेताओं की एक टीम के साथ, बुधवार सुबह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि मुलाकात के दौरान सीएम ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। के मेघचंद्र ने कहा, ‘सीएम एन बीरेन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार यात्रा की अनुमति नहीं दे सकती है।

यात्रा का राजनीतिकरण ना करें- वेणुगोपाल

वहीं मणिपुर सरकार के फैसले पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, यह राजनीतिक प्रयास नहीं है और यात्रा का राजनीतिकरण ना करें। वेणुगोपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मणिपुर पीसीसी प्रेसिडेंट ने न्याय यात्रा की अनुमति चीफ सेक्रेटरी से मांगी थी। उन्होंने कहा की 5 दिन में जवाब देंगे, लेकिन जब जवाब नहीं आया तो खुद पीसीसी प्रेसिडेंट सचिव के पास अनुमति मांगने गए तो उन्होंने फिर कल शाम का वादा किया है। इसके बाद आज हमारे लोग सीएम से मिले तो उन्होंने भी कहा यात्रा को अनुमति नहीं दे सकते। ये यात्रा राजनीतिक नहीं है, राहुल गांधी वहां राजनीति करने नहीं जा रहे, वो शांति का संदेश देने जा रहे हैं। हम कोई तमाशा नहीं करना चाहते लेकिन ये ठीक नहीं।

इन राज्यों सो होकर गुजरेगी बारत जोड़ो न्याय यात्रा

बता दें कि कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा मणिपुर से शुरू होकर नगालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र में समाप्त होगी। वेणुगोपाल ने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष खड़गे इस यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। भारत जोड़ो न्याय यात्रा का मकसद आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय है। इस यात्रा में राहुल युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करेंगे। बस यात्रा से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जाएगा। यात्रा में कुछ छोटे हिस्से को रुक-रुककर पैदल भी कवर किया जाएगा।

भारत जोड़ो यात्रा रही थी सफल

इससे पहले राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 से 30 जनवरी 2023 तक भारत जोड़ो यात्रा की थी। 145 दिनों की यात्रा तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू होकर जम्मू-कश्मीर में खत्म हुई थी। तब राहुल ने 3570 किलोमीटर की यात्रा में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया था।श्रीनगर में यात्रा के समापन के मौके पर शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में राहुल ने कहा था- मैंने यह यात्रा अपने लिए या कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि देश की जनता के लिए की है। हमारा उद्देश्य उस विचारधारा के खिलाफ खड़ा होना है जो इस देश की नींव को नष्ट करना चाहती है।यात्रा के दौरान राहुल ने 12 सभाओं को संबोधित किया था, 100 से ज्यादा बैठकें और 13 प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं।