IGLAM Building India’s Future Icons Through Confidence and Opportunity


India has always been a land of talent, diversity, and dreams. From metropolitan cities to small towns and villages, countless individuals possess extraordinary abilities waiting to be recognized. In this evolving landscape of talent and self-expression, IGLAM has emerged as a groundbreaking platform that is transforming lives and redefining the meaning of beauty and talent in India. Founded by visionary entrepreneur and mentor Devjanni Mitraa, IGLAM is more than just a beauty pageant or talent competition—it is a movement dedicated to empowering people across all age groups and backgrounds.

What makes IGLAM truly unique is its belief that talent has no age limit, no geographical boundary, and no social restriction. The organization has successfully created opportunities for children, youth, and women between the ages of 3 to 70 years, allowing them to showcase their abilities, confidence, and individuality on a professional platform. In a society where many people often hesitate to pursue their dreams due to societal pressure or lack of exposure, IGLAM stands as a symbol of hope, confidence, and transformation.

Over the years, IGLAM has steadily expanded its presence across several Indian states, including West Bengal, Bihar, Manipur, Assam, Nagaland, Uttar Pradesh, and Jharkhand. Through this expansion, the organization is actively discovering hidden talent from diverse communities and providing individuals with opportunities they may never have imagined. By reaching both urban and rural areas, IGLAM is ensuring that talent from every corner of the country receives equal recognition and professional guidance.

Unlike conventional pageants that focus only on appearance, IGLAM emphasizes personality development, confidence building, communication skills, and self-expression. Participants are trained to become strong, confident personalities capable of representing themselves at national and international platforms. The organization believes that true beauty lies in confidence, authenticity, and the courage to pursue one’s dreams.

One of the most inspiring aspects of IGLAM is its commitment to inclusivity and women empowerment. Many women, especially after marriage or motherhood, often feel disconnected from their ambitions and personal identity. IGLAM provides them with a platform to rediscover themselves, regain confidence, and prove that dreams can be pursued at any stage of life. Similarly, young aspirants and children receive guidance, exposure, and mentorship that help shape their future in a positive and inspiring way.

The vision of Devjanni Mitraa has played a crucial role in making IGLAM a trusted and respected platform. Her dedication toward nurturing talent and creating equal opportunities has inspired thousands of participants to believe in themselves. Under her leadership, IGLAM has evolved into a platform that not only celebrates glamour but also promotes resilience, strength, and individuality.

The impact created by IGLAM goes far beyond competitions and titles. The organization has transformed ordinary individuals into confident personalities who now inspire others through their journeys. Many participants who once lacked confidence have discovered their true potential through IGLAM’s mentorship and professional grooming programs. By focusing on self-growth and empowerment, the platform is helping build a generation that values confidence, talent, and authenticity over superficial standards.

As India continues to evolve socially and culturally, platforms like IGLAM are becoming increasingly important. They provide safe and supportive spaces where individuals can express themselves freely, break stereotypes, and challenge traditional limitations. In an era where representation and inclusivity matter more than ever, IGLAM is leading by example and setting new standards for talent development in the country.

With its growing reach and impactful vision, IGLAM is steadily establishing itself as one of India’s most inspiring talent and empowerment platforms. Its mission to discover and nurture real talent continues to touch lives across different regions and communities. By celebrating stories of courage, determination, and transformation, IGLAM is not only shaping careers but also building confidence and inspiring society as a whole.

As the organization moves forward with bigger ambitions and broader horizons, one thing remains certain—IGLAM is not just creating stars; it is creating empowered individuals who are ready to shine in every aspect of life.

Page Details & Contact

Organization: IGLAM

Founder: Devjanni Mitraa

Website: IGLAM Official Website

Contact Number: +91 7209641555

मणिपुर में पीएम मोदी ने दिया शांति का संदेश, बोले- मैं आपके साथ हूं

#pmnarendramodimanipurvisit

जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर को प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी सौगात दी है। 2023 मणिपुर हिंसा के बाद पहली बार वहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। मणिपुर के चूड़ाचांदपुर में पीएम मोदी ने विस्थापितों से मुलाकात की। मणिपुर में हुई हिंसा के दौरान चूड़ाचांदपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। यहां पहुंचकर पीएम मोदी ने कहा कि मैं आपके साथ हूं, भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ है।

7 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मणिपुर का दौरा किया। दो साल पहले भड़की हिंसा के बाद पीएम मोदी का यह इस पूर्वोत्तर राज्य का पहला दौरा है। उन्होंने मणिपुर के चुराचांदपुर में विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी। पीएम मोदी ने 7 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास हुआ है। पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि ये प्रोजेक्ट्स मणिपुर के लोगों की, यहां हिल्स पर रहने वाले ट्राइबल समाज की जिंदगी को और बेहतर बनाएंगे। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाया। वह सड़क मार्ग से आए। इस दौरान हाथ में तिरंगा लिए मणिपुर के लोगों ने जिस प्रकार मेरा स्वागत किया। मैं उसे कभी नहीं भूल सकता है।

मणिपुर के तेज विकास का प्रयास

पीएम मोदी ने कहा कि मणिपुर के नाम में ही मणि है, ये वो मणि है जो आने वाले समय में पूरे नॉर्थ-ईस्ट की चमक को बढ़ाने वाली है। भारत सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि मणिपुर को विकास के रास्ते पर तेजी से आगे ले जाएं। इसी कड़ी में मैं आज यहां आप सभी के बीच आया हूं। पीएम मोदी ने कहा कि हैं, और साथ ही ये हिल्स आप सभी लोगों की निरंतर मेहनत का भी प्रतीक हैं।

मणिपुर के सतत विकास का जिक्र

पीएम मोदी ने कहा, पहले यहां गांवों में पहुंचना कितना मुश्किल था, आप सभी जानते हैं। अब सैकड़ों गांवों में यहां रोड कनेक्टिविटी पहुंचाई गई है। इसका बहुत अधिक लाभ पहाड़ी लोगों को, ट्राइबल गांवों को हुआ है। हमारी सरकार के दौरान ही मणिपुर में रेल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। जीरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन बहुत जल्द राजधानी इंफाल को नेशनल रेल नेटवर्क से जोड़ देगी।

भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने दौरे से पहले हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें संतोष है कि हाल ही में hills और valley में अलग-अलग ग्रुप्स के साथ समझौतों के लिए बातचीत हुई है। ये भारत सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है। जिसमें संवाद, सम्मान और आपसी समझ को महत्व देते हुए शांति की स्थापना के लिए काम किया जा रहा है। मैं सभी संगठनों से अपील करूंगा कि शांति के रास्ते पर आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करें। मैं आपके साथ हूं। भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ है।

कल से प्रधानमंत्री का पूर्वोत्तर दौरा, मणिपुर भी जाएंगे पीएम मोदी, देंगे करोड़ों की सौगात

#pmmodivisitsmanipuralongwithfourotherstatesfromsept13to_15

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 सितंबर के बीच पूर्वोत्तर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मणिपुर भी जाएंगे। वह अपने तीन दिन के दौरे में 71,850 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उन्हें मणिपुर में नहीं जाने पर विपक्ष की लगातार आलोचना हो रही है। दरअसल, कुकी और मैतेई समुदाय के बीच दो साल पहले मणिपुर में हिंसा भड़की थी। इस हिंसक झगड़े में 260 से ज्यादा से लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को पीएम मिजोरम की राजधानी आइजोल में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसमें बैराबी-सैरंग नई रेल लाइन का उद्घाटन शामिल है, जो मिजोरम को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। यह परियोजना राज्य में परिवहन और व्यापार को बढ़ावा देगी। इसके बाद पीएम मणिपुर जाएंगे, जहां वे 8,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी हैं।

मणिपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मणिपुर सरकार ने चुराचंदपुर पीस ग्राउंड और कांगला फोर्ट इम्फाल में बड़े बिलबोर्ड लगवाए हैं। जनता के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि वे चाबियां, पेन, पानी की बोतलें, बैग, रुमाल, छाता, लाइटर, माचिस जैसी चीजें ना लाएं। इसके अलावा, बच्चों (12 साल से कम उम्र के) और बीमार व्यक्तियों को कार्यक्रम स्थल पर नहीं लाने की भी सलाह दी गई है। चुराचंदपुर जिले में एयर गन पर पहले ही रोक लगाई गई थी। इम्फाल और चुराचंदपुर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कड़ी कर दी गई है।

भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती समारोह में शामिल होंगे

मणिपुर के बाद 14 सितंबर को पीएम असम की राजधानी गुवाहाटी में भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती समारोह में शामिल होंगे। इस मौके पर वे 18,350 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। ये असम के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को गति देंगे। इसके बाद पीएम कोलकाता में 16वीं संयुक्त कमांडरों की कॉन्फ्रेंस-2025 का उद्घाटन करेंगे, जहां सशस्त्र बलों की रणनीतिक तैयारियों पर चर्चा होगी।

मणिपुर में फिर क्यों भड़की हिंसा? पांच जिलों में निषेधाज्ञा और इंटरनेट बंद

#tension_again_in_manipur 

मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हैं। मैतेई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद फिर से हिंसा भड़क उठी है। जिसके बाद इंफाल में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। जिसके बाद पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं और एक जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है। बता दे कि मई 2023 से हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर में बीते कुछ दिनों से शांति थी, लेकिन अब फिर से हालात बिगड़ गए हैं।

इंफाल क्षेत्र में शनिवार को मैतेई समूह के पांच अरमबाई टेंगोल स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी की अफवाह के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया। पीटीआई के मुताबिक मैतेई संगठन अरामबाई तेंगगोल के नेता कनन सिंह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने क्वाकेथेल और उरीपोक में सड़कों पर टायर और पुराने फर्नीचर जलाए। उन्होंने मैतेई नेता की रिहाई की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई।

क्वाकेथेल में कई राउंड फायरिंग हुई। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने तुलिहाल में इंफाल हवाई अड्डे के गेट का घेराव भी किया। वे हवाई अड्डे के साथ सड़कों पर उतर आए और गिरफ़्तार नेता को राज्य से बाहर ले जाने की कोशिश का विरोध करने के लिए मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। इसके अलावा संगठन के सदस्यों ने प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया।

राज्य में अशांति के बाद प्रशासन की तरफ से आदेश जारी किया गया। इस आदेश के मुताबिक राज्य के 5 जिलों में इंटरनेट बंद और एक जिले कर्फ्यू लगाया गया। इसके साथ ही वीपीएन भी बंद किया गया है। इन जिलों में इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, विष्णुपुर और काकचिंग शामिल हैं। प्रशासन की तरफ जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि जानमाल की संभावित हानि, संपत्ति को नुकसान और सार्वजनिक शांति बनाने के लिए इंटरनेट सेवा बंद की गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक पोस्ट होने के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने आदेश में कहा कि यह फैसला अफवाहों को रोकने के लिए लिया है। ऐसा न करने से राज्य में झूठी अफवाहों के कारण हिंसा का डर है, जिसमें सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान हो सकता है।

मणिपुर से हटेगा राष्ट्रपति शासन? बीजेपी ने राज्यपाल से मिल 44 विधायकों के समर्थन का किया दावा

#manipurbjpstakeclaimtoformgovernment

मणिपुर में एक बार फिर राजनीति हलचल देखी जा रही है। मणिपुर में 10 विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। इनमें 8 भाजपा, एनपीपी और निर्दलीय के एक-एक विधायक हैं। इन्होंने दावा किया है इनके पास 44 विधायकों का समर्थन है।

विधायक राधेश्याम ने इस मुलाकात के बाद घोषणा की कि 44 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो एक लोकप्रिय और स्थिर सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।विधायक राधेश्याम ने मीडिया से बातचीत में कहा, हमारे पास 44 विधायकों का समर्थन है, और सभी भाजपा विधायक एकजुट होकर जनता की इच्छा के अनुरूप सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम राज्यपाल से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे बहुमत को मान्यता दें और शीघ्र कार्रवाई करें।

विधानसभा अध्यक्ष ने 44 विधायकों से मुलाकात की

बीजेपी नेता राधेश्याम सिंह ने कहा, यह बताना कि हम तैयार हैं, सरकार बनाने का दावा पेश करने जैसा है। विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत ने 44 विधायकों से व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से मुलाकात की है। किसी ने भी नई सरकार के गठन का विरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा, लोगों को बहुत अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कार्यकाल में कोविड के कारण दो साल बर्बाद हो गए थे और इस कार्यकाल में संघर्ष के कारण दो और साल बर्बाद हो गए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष केंद्रीय नेतृत्व के बुलावे पर दिल्ली रवाना

दूसरी तरफ, विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत केंद्रीय नेतृत्व के बुलावे पर दिल्ली रवाना हो गए हैं। जल्द ही सरकार बनाने पर आलाकमान का फैसला आ सकता है। मणिपुर में 60 विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 31 है।

13 फरवरी से मणिपुर में लागू है राष्ट्रपति शासन

बता दें कि मणिपुर में एन. बीरेन सिंह की सरकार 9 फरवरी 2025 को उनके इस्तीफे के साथ गिर गई थी।मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच राज्‍य में जातीय हिंसा जारी है, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस मुद्दे पर उनकी सरकार पर दबाव बढ़ा। विपक्ष और भाजपा के 19 विधायकों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की, जिसके डर से बीरेन ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। ऐसा इस‍लिए हुआ क्‍योंकि भाजपा नया मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई थी।

*Asia’s oldest football tournament now in five states as Imphal makes a comeback*

Sports

134th IndianOil Durand Cup

Sports Desk: Asia’s oldest football tournament, the IndianOil Durand Cup, will be back with its 134th Edition and for the first time in its storied history, be hosted in as many as five states with Manipur’s capital Imphal, making a comeback after a two-year gap. The Durand Cup Organising Committee also announced the dates for this year’s tournament to be between July 22- August 23, 2025.

Kokrajhar in Assam will extend their status as Durand Cup hosts for the third consecutive year while Jamshedpur in Jharkhand and Shillong in Meghalaya were added as hosts last year. The century-old tournament shifted its home base to Kolkata – the Mecca of Indian Football, and the capital of West Bengal, from Delhi back in 2019, and, will also continue to hold that status for a sixth consecutive edition.

Since its transition to the East, the Durand Cup has reinstated itself as the country’s premiere competition, growing from 16 teams to 24 teams, including participation from all the Indian Super League (ISL) teams.

Organised by the Eastern Command of the Indian Army on behalf of the three Services, the tournament is unique in the sense that it pits Services teams against India’s best football clubs and over the past couple of editions, has also seen foreign participation with Army teams from neighbouring nations.

The Indian Army’s stated vision of expanding the reach of the historic tournament throughout the East and North-East is also now fully reflected with the choice of host cities this year.

A total of six venues, two in Kolkata (Vivekananda Yuba Bharati Krirangan and Kishore Bharti Krirangan) and one each in Imphal (Khuman Lampak stadium), Ranchi (Morhabadi Stadium) or Jamshedpur (JRD Tata Sports Complex), Shillong (Jawahar Lal Nehru Stadium) and Kokrajhar (SAI Stadium) have been earmarked for the 134th IndianOil Durand Cup edition.

North East United FC are the defending champions having overcome maximum title-holders Mohun Bagan, in a thrilling final last year to get their historic maiden title.

Pic Courtesy by: Durand football society

मणिपुर में सेना का बड़ा एक्शन, 10 उग्रवादी ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद*


#assam_rifles_killed_10_militants_in_manipur

मणिपुर के चांदेल में भारतीय सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। चंदेल जिले में बुधवार को असम राइफल्स की एक यूनिट ने मुठभेड़ में कम से कम 10 उग्रवादियों को मार गिराया।भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किया गया ऑपरेशन अभी भी जारी है।

इंडियन आर्मी ने एक्स पर इस एक्शन की जानकारी दी है। सेना के मुताबिक, मणिपुर के चांदेल जिले के खेंगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास उग्रवादियों की गतिविधियों का पता चला था। भारत-म्यांमार सीमा के पास सशस्त्र कैडरों यानी उग्रवादियों की गतिविधियों की खुफिया जानकारी पर एक्शन लिया गया। स्पीयर कॉर्प्स के तहत असम राइफल्स यूनिट ने 14 मई को एक अभियान शुरू किया।जैसे ही सेना के जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया, उग्रवादियों ने उन पर गोलियां चलाई। जिसका सेना ने करारा जवाब दिया।

सेना ने बताया कि सुरक्षाबलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और जवाबी कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी में 10 कैडरों को मार गिराया गया। मौके से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं।इस ऑपरेशन को कैलिब्रेटेड यानी योजनाबद्ध और सटीक बताया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इलाके में और भी उग्रवादी छिपे होने की आशंका के मद्देनजर सर्च ऑपरेशन अभी भी चलाया जा रहा है। ऑपरेशन के दौरान किसी भी जवान के हताहत होने की खबर नहीं है। यह कार्रवाई मणिपुर में जारी अशांति के बीच सुरक्षाबलों की ओर से एक अहम सफलता मानी जा रही है।

मणिपुर हिंसा के दो साल, हाई अलर्ट के बीच मैतेई-कुकी ने बंद का किया ऐलान

#manipurconflictanniversary

मणिपुर में जातीय हिंसा के आज दो साल पूरे हो गए। इसको लेकर मैतेई और कुकि समुदायों ने राज्यभर में शटडाउन का आह्वान किया। इस दौरान जहां मैतेई समुदाय की एक संगठन ने इंफाल में 'मणिपुर पीपल्स कन्वेंशन' आयोजित किया, वहीं कुकी समुदाय ने 'डे ऑफ सेपरेशन' मनाया। मणिपुर में लगभग सभी जगह आज बाजार, दुकानें और स्कूल-कॉलेज बंद हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। इधर, राज्य में तनाव को देखते हुए सुरक्षाबलों ने इम्फाल, चुराचांदपुर और कंगपोकपी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।

सुरक्षाबलों ने 20 किमी किया फ्लैग मार्च

मणिपुर हिंसा की दूसरी बरसी से एक दिन पहले (2 मई) सुरक्षाबलों ने फ्लैग मार्च किया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 34 बटालियन के डीआईजी सुशांकर उपाध्याय ने बताया कि इस फ्लैग मार्च से लोगों में एक भरोसा पैदा होगा। लोगों को लगेगा कि हालात पर काबू पाने के लिए यहां एक न्यूट्रल (किसी के पक्ष में नहीं) फोर्स है।

डीआईजी उपाध्याय ने ये भी बताया कि फ्लैग मार्च में 1000 जवान शामिल हुए। हमने इसे इम्फाल पुलिस के साथ कोऑर्डिनेशन में आयोजित किया था। हमने करीब 20 किमी का मार्च निकाला। हम लोगों में एक तरह का विश्वास और उपद्रवियों को चेतावनी देना चाहते थे।

13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन, नई सरकार की मांग तेज

मणिपुर में 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन है, लेकिन मौजूदा विधानसभा भंग नहीं हुई है। सिर्फ निलंबित है। इसलिए कई नागरिक संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं। सियासी ताकत पूर्व सीएम एन. वीरेन सिंह के हाथ में है, क्योंकि यहां भाजपा बिखरी हुई है। चार-पांच दिन पहले ही 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर राज्य में तत्काल लोकप्रिय सरकार बनाने की मांग की थी। पत्र पर भाजपा के 14 विधायकों ने साइन किए हैं।

हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए

मणिपुर में दो साल पहले मैतेई और कुकि समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी, जिसमें 260 से अधिक लोग मारे गए थे और 70,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे। इस मामले में 6 हजार एफआईआर दर्ज हुईं, उनमें करीब 2500 में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।

मणिपुर समेत तीन राज्यों में 6 महीने के लिए बढ़ाया गया अफस्पा, हिंसा और अशांति के बीच केन्द्र का बड़ा फैसला

#manipurafspaextended

केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, मणिपुर में जारी हिंसा के कारण कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पांच जिलों के 13 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर पूरे मणिपुर में 1 अप्रैल 2025 से अगले छह माह तक, यदि इस घोषणा को इससे पहले वापस न लिया जाए, 'अशांत क्षेत्र' के रूप में घोषित किया जाता था।

अधिसूचना के मुताबिक, नगालैंड के दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक और पेरेन जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुनहेबोटो जिलों के कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यहां भी 1 अप्रैल 2025 से अगले छह महीने तक अफस्पा लागू रहेगा।

वहीं अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ 3 पुलिस थानों के क्षेत्रों में भी छह महीने के लिए अफस्पा बढ़ा दिया गया है।

फरवरी 2025 से, मणिपुर राष्ट्रपति शासन के अधीन है और विधानसभा निलंबित स्थिति में है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई। जिसने राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता को जन्म दिया। बीरेन सिंह ने 2017 से मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की अगुवाई की थी, ने राज्य में लगभग 21 महीनों से चल रही जातीय हिंसा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मई 2023 से अब तक इस हिंसा में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

क्या है अफस्पा?

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा), 1958 में अधिनियमित, एक ऐसा कानून है जो सरकार द्वारा “अशांत” घोषित क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। ये क्षेत्र आमतौर पर उग्रवाद या उग्रवाद का सामना करने वाले क्षेत्र होते हैं, जहां राज्य सरकारों को कानून और व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण लगता है। इन जगहों पर सुरक्षाबल बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं। कई मामलों में बल प्रयोग भी हो सकता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने पर यहां भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।

मणिपुर के राहत कैंप में मिला 9 साल की बच्ची का शव, दुष्कर्म की आशंका

#nine_year_old_girl_found_dead_in_manipur_relief_camp

मणिपुर में एक नौ वर्षीय बच्ची का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। ये घटना चुराचांदपुर जिले की है। शुक्रवार तड़के 9 साल की एक बच्ची का संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, बच्ची गुरुवार की शाम करीब छह बजे लापता थी। जिसके बाद उसके परिजन उसे ढूंढने लगे। काफी खोजबीन के बाद बच्ची का शव राहत शिविर परिसर में मिला। शव पर चोट के कई निशान पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में दुष्कर्म की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि बच्ची गुरुवार शाम करीब छह बजे लापता हो गई थी, जिसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। काफी देर बाद लड़की का शव शहर के लान्वा टीडी ब्लॉक में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए बने राहत शिविर के पास मिला। पुलिस के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चोट के कई निशान थे, खासकर गले पर, इसके अलावा खून के धब्बे भी थे। पुलिस ने बताया कि संदेह है कि बच्ची के साथ बलात्कार किया गया। फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजवाया गया है।

पुलिस ने शक के आधार पर पंद्रह लोगों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और दोषियों को जल्द ही पकड़ा जाएगा। जिस बच्ची का शव मिला वह चुराचांदपुर के वे मार्क अकादमी स्कूल में पढ़ती थी।

पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने घटना की निंदा करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैं अज्ञात अपराधियों द्वारा लड़की की जघन्य हत्या की कड़ी निंदा करता हूं। यह मानवता के खिलाफ अपराध है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। प्रशासन को जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

इसके अलावा जोमी मदर्स एसोसिएशन और यंग वैफेई एसोसिएशन, हौपी ब्लॉक सहित कई संगठनों ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। जोमी मदर्स एसोसिएशन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से गहन जांच करने और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने का आग्रह किया है।

IGLAM Building India’s Future Icons Through Confidence and Opportunity


India has always been a land of talent, diversity, and dreams. From metropolitan cities to small towns and villages, countless individuals possess extraordinary abilities waiting to be recognized. In this evolving landscape of talent and self-expression, IGLAM has emerged as a groundbreaking platform that is transforming lives and redefining the meaning of beauty and talent in India. Founded by visionary entrepreneur and mentor Devjanni Mitraa, IGLAM is more than just a beauty pageant or talent competition—it is a movement dedicated to empowering people across all age groups and backgrounds.

What makes IGLAM truly unique is its belief that talent has no age limit, no geographical boundary, and no social restriction. The organization has successfully created opportunities for children, youth, and women between the ages of 3 to 70 years, allowing them to showcase their abilities, confidence, and individuality on a professional platform. In a society where many people often hesitate to pursue their dreams due to societal pressure or lack of exposure, IGLAM stands as a symbol of hope, confidence, and transformation.

Over the years, IGLAM has steadily expanded its presence across several Indian states, including West Bengal, Bihar, Manipur, Assam, Nagaland, Uttar Pradesh, and Jharkhand. Through this expansion, the organization is actively discovering hidden talent from diverse communities and providing individuals with opportunities they may never have imagined. By reaching both urban and rural areas, IGLAM is ensuring that talent from every corner of the country receives equal recognition and professional guidance.

Unlike conventional pageants that focus only on appearance, IGLAM emphasizes personality development, confidence building, communication skills, and self-expression. Participants are trained to become strong, confident personalities capable of representing themselves at national and international platforms. The organization believes that true beauty lies in confidence, authenticity, and the courage to pursue one’s dreams.

One of the most inspiring aspects of IGLAM is its commitment to inclusivity and women empowerment. Many women, especially after marriage or motherhood, often feel disconnected from their ambitions and personal identity. IGLAM provides them with a platform to rediscover themselves, regain confidence, and prove that dreams can be pursued at any stage of life. Similarly, young aspirants and children receive guidance, exposure, and mentorship that help shape their future in a positive and inspiring way.

The vision of Devjanni Mitraa has played a crucial role in making IGLAM a trusted and respected platform. Her dedication toward nurturing talent and creating equal opportunities has inspired thousands of participants to believe in themselves. Under her leadership, IGLAM has evolved into a platform that not only celebrates glamour but also promotes resilience, strength, and individuality.

The impact created by IGLAM goes far beyond competitions and titles. The organization has transformed ordinary individuals into confident personalities who now inspire others through their journeys. Many participants who once lacked confidence have discovered their true potential through IGLAM’s mentorship and professional grooming programs. By focusing on self-growth and empowerment, the platform is helping build a generation that values confidence, talent, and authenticity over superficial standards.

As India continues to evolve socially and culturally, platforms like IGLAM are becoming increasingly important. They provide safe and supportive spaces where individuals can express themselves freely, break stereotypes, and challenge traditional limitations. In an era where representation and inclusivity matter more than ever, IGLAM is leading by example and setting new standards for talent development in the country.

With its growing reach and impactful vision, IGLAM is steadily establishing itself as one of India’s most inspiring talent and empowerment platforms. Its mission to discover and nurture real talent continues to touch lives across different regions and communities. By celebrating stories of courage, determination, and transformation, IGLAM is not only shaping careers but also building confidence and inspiring society as a whole.

As the organization moves forward with bigger ambitions and broader horizons, one thing remains certain—IGLAM is not just creating stars; it is creating empowered individuals who are ready to shine in every aspect of life.

Page Details & Contact

Organization: IGLAM

Founder: Devjanni Mitraa

Website: IGLAM Official Website

Contact Number: +91 7209641555

मणिपुर में पीएम मोदी ने दिया शांति का संदेश, बोले- मैं आपके साथ हूं

#pmnarendramodimanipurvisit

जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर को प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी सौगात दी है। 2023 मणिपुर हिंसा के बाद पहली बार वहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। मणिपुर के चूड़ाचांदपुर में पीएम मोदी ने विस्थापितों से मुलाकात की। मणिपुर में हुई हिंसा के दौरान चूड़ाचांदपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। यहां पहुंचकर पीएम मोदी ने कहा कि मैं आपके साथ हूं, भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ है।

7 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मणिपुर का दौरा किया। दो साल पहले भड़की हिंसा के बाद पीएम मोदी का यह इस पूर्वोत्तर राज्य का पहला दौरा है। उन्होंने मणिपुर के चुराचांदपुर में विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी। पीएम मोदी ने 7 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास हुआ है। पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि ये प्रोजेक्ट्स मणिपुर के लोगों की, यहां हिल्स पर रहने वाले ट्राइबल समाज की जिंदगी को और बेहतर बनाएंगे। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाया। वह सड़क मार्ग से आए। इस दौरान हाथ में तिरंगा लिए मणिपुर के लोगों ने जिस प्रकार मेरा स्वागत किया। मैं उसे कभी नहीं भूल सकता है।

मणिपुर के तेज विकास का प्रयास

पीएम मोदी ने कहा कि मणिपुर के नाम में ही मणि है, ये वो मणि है जो आने वाले समय में पूरे नॉर्थ-ईस्ट की चमक को बढ़ाने वाली है। भारत सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि मणिपुर को विकास के रास्ते पर तेजी से आगे ले जाएं। इसी कड़ी में मैं आज यहां आप सभी के बीच आया हूं। पीएम मोदी ने कहा कि हैं, और साथ ही ये हिल्स आप सभी लोगों की निरंतर मेहनत का भी प्रतीक हैं।

मणिपुर के सतत विकास का जिक्र

पीएम मोदी ने कहा, पहले यहां गांवों में पहुंचना कितना मुश्किल था, आप सभी जानते हैं। अब सैकड़ों गांवों में यहां रोड कनेक्टिविटी पहुंचाई गई है। इसका बहुत अधिक लाभ पहाड़ी लोगों को, ट्राइबल गांवों को हुआ है। हमारी सरकार के दौरान ही मणिपुर में रेल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। जीरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन बहुत जल्द राजधानी इंफाल को नेशनल रेल नेटवर्क से जोड़ देगी।

भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने दौरे से पहले हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें संतोष है कि हाल ही में hills और valley में अलग-अलग ग्रुप्स के साथ समझौतों के लिए बातचीत हुई है। ये भारत सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है। जिसमें संवाद, सम्मान और आपसी समझ को महत्व देते हुए शांति की स्थापना के लिए काम किया जा रहा है। मैं सभी संगठनों से अपील करूंगा कि शांति के रास्ते पर आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करें। मैं आपके साथ हूं। भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ है।

कल से प्रधानमंत्री का पूर्वोत्तर दौरा, मणिपुर भी जाएंगे पीएम मोदी, देंगे करोड़ों की सौगात

#pmmodivisitsmanipuralongwithfourotherstatesfromsept13to_15

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 सितंबर के बीच पूर्वोत्तर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मणिपुर भी जाएंगे। वह अपने तीन दिन के दौरे में 71,850 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उन्हें मणिपुर में नहीं जाने पर विपक्ष की लगातार आलोचना हो रही है। दरअसल, कुकी और मैतेई समुदाय के बीच दो साल पहले मणिपुर में हिंसा भड़की थी। इस हिंसक झगड़े में 260 से ज्यादा से लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को पीएम मिजोरम की राजधानी आइजोल में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसमें बैराबी-सैरंग नई रेल लाइन का उद्घाटन शामिल है, जो मिजोरम को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। यह परियोजना राज्य में परिवहन और व्यापार को बढ़ावा देगी। इसके बाद पीएम मणिपुर जाएंगे, जहां वे 8,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी हैं।

मणिपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मणिपुर सरकार ने चुराचंदपुर पीस ग्राउंड और कांगला फोर्ट इम्फाल में बड़े बिलबोर्ड लगवाए हैं। जनता के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि वे चाबियां, पेन, पानी की बोतलें, बैग, रुमाल, छाता, लाइटर, माचिस जैसी चीजें ना लाएं। इसके अलावा, बच्चों (12 साल से कम उम्र के) और बीमार व्यक्तियों को कार्यक्रम स्थल पर नहीं लाने की भी सलाह दी गई है। चुराचंदपुर जिले में एयर गन पर पहले ही रोक लगाई गई थी। इम्फाल और चुराचंदपुर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कड़ी कर दी गई है।

भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती समारोह में शामिल होंगे

मणिपुर के बाद 14 सितंबर को पीएम असम की राजधानी गुवाहाटी में भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती समारोह में शामिल होंगे। इस मौके पर वे 18,350 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। ये असम के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को गति देंगे। इसके बाद पीएम कोलकाता में 16वीं संयुक्त कमांडरों की कॉन्फ्रेंस-2025 का उद्घाटन करेंगे, जहां सशस्त्र बलों की रणनीतिक तैयारियों पर चर्चा होगी।

मणिपुर में फिर क्यों भड़की हिंसा? पांच जिलों में निषेधाज्ञा और इंटरनेट बंद

#tension_again_in_manipur 

मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हैं। मैतेई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद फिर से हिंसा भड़क उठी है। जिसके बाद इंफाल में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। जिसके बाद पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं और एक जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है। बता दे कि मई 2023 से हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर में बीते कुछ दिनों से शांति थी, लेकिन अब फिर से हालात बिगड़ गए हैं।

इंफाल क्षेत्र में शनिवार को मैतेई समूह के पांच अरमबाई टेंगोल स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी की अफवाह के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया। पीटीआई के मुताबिक मैतेई संगठन अरामबाई तेंगगोल के नेता कनन सिंह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने क्वाकेथेल और उरीपोक में सड़कों पर टायर और पुराने फर्नीचर जलाए। उन्होंने मैतेई नेता की रिहाई की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई।

क्वाकेथेल में कई राउंड फायरिंग हुई। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने तुलिहाल में इंफाल हवाई अड्डे के गेट का घेराव भी किया। वे हवाई अड्डे के साथ सड़कों पर उतर आए और गिरफ़्तार नेता को राज्य से बाहर ले जाने की कोशिश का विरोध करने के लिए मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। इसके अलावा संगठन के सदस्यों ने प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया।

राज्य में अशांति के बाद प्रशासन की तरफ से आदेश जारी किया गया। इस आदेश के मुताबिक राज्य के 5 जिलों में इंटरनेट बंद और एक जिले कर्फ्यू लगाया गया। इसके साथ ही वीपीएन भी बंद किया गया है। इन जिलों में इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, विष्णुपुर और काकचिंग शामिल हैं। प्रशासन की तरफ जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि जानमाल की संभावित हानि, संपत्ति को नुकसान और सार्वजनिक शांति बनाने के लिए इंटरनेट सेवा बंद की गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक पोस्ट होने के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने आदेश में कहा कि यह फैसला अफवाहों को रोकने के लिए लिया है। ऐसा न करने से राज्य में झूठी अफवाहों के कारण हिंसा का डर है, जिसमें सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान हो सकता है।

मणिपुर से हटेगा राष्ट्रपति शासन? बीजेपी ने राज्यपाल से मिल 44 विधायकों के समर्थन का किया दावा

#manipurbjpstakeclaimtoformgovernment

मणिपुर में एक बार फिर राजनीति हलचल देखी जा रही है। मणिपुर में 10 विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। इनमें 8 भाजपा, एनपीपी और निर्दलीय के एक-एक विधायक हैं। इन्होंने दावा किया है इनके पास 44 विधायकों का समर्थन है।

विधायक राधेश्याम ने इस मुलाकात के बाद घोषणा की कि 44 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो एक लोकप्रिय और स्थिर सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।विधायक राधेश्याम ने मीडिया से बातचीत में कहा, हमारे पास 44 विधायकों का समर्थन है, और सभी भाजपा विधायक एकजुट होकर जनता की इच्छा के अनुरूप सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम राज्यपाल से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे बहुमत को मान्यता दें और शीघ्र कार्रवाई करें।

विधानसभा अध्यक्ष ने 44 विधायकों से मुलाकात की

बीजेपी नेता राधेश्याम सिंह ने कहा, यह बताना कि हम तैयार हैं, सरकार बनाने का दावा पेश करने जैसा है। विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत ने 44 विधायकों से व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से मुलाकात की है। किसी ने भी नई सरकार के गठन का विरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा, लोगों को बहुत अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कार्यकाल में कोविड के कारण दो साल बर्बाद हो गए थे और इस कार्यकाल में संघर्ष के कारण दो और साल बर्बाद हो गए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष केंद्रीय नेतृत्व के बुलावे पर दिल्ली रवाना

दूसरी तरफ, विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत केंद्रीय नेतृत्व के बुलावे पर दिल्ली रवाना हो गए हैं। जल्द ही सरकार बनाने पर आलाकमान का फैसला आ सकता है। मणिपुर में 60 विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 31 है।

13 फरवरी से मणिपुर में लागू है राष्ट्रपति शासन

बता दें कि मणिपुर में एन. बीरेन सिंह की सरकार 9 फरवरी 2025 को उनके इस्तीफे के साथ गिर गई थी।मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच राज्‍य में जातीय हिंसा जारी है, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस मुद्दे पर उनकी सरकार पर दबाव बढ़ा। विपक्ष और भाजपा के 19 विधायकों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की, जिसके डर से बीरेन ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। ऐसा इस‍लिए हुआ क्‍योंकि भाजपा नया मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई थी।

*Asia’s oldest football tournament now in five states as Imphal makes a comeback*

Sports

134th IndianOil Durand Cup

Sports Desk: Asia’s oldest football tournament, the IndianOil Durand Cup, will be back with its 134th Edition and for the first time in its storied history, be hosted in as many as five states with Manipur’s capital Imphal, making a comeback after a two-year gap. The Durand Cup Organising Committee also announced the dates for this year’s tournament to be between July 22- August 23, 2025.

Kokrajhar in Assam will extend their status as Durand Cup hosts for the third consecutive year while Jamshedpur in Jharkhand and Shillong in Meghalaya were added as hosts last year. The century-old tournament shifted its home base to Kolkata – the Mecca of Indian Football, and the capital of West Bengal, from Delhi back in 2019, and, will also continue to hold that status for a sixth consecutive edition.

Since its transition to the East, the Durand Cup has reinstated itself as the country’s premiere competition, growing from 16 teams to 24 teams, including participation from all the Indian Super League (ISL) teams.

Organised by the Eastern Command of the Indian Army on behalf of the three Services, the tournament is unique in the sense that it pits Services teams against India’s best football clubs and over the past couple of editions, has also seen foreign participation with Army teams from neighbouring nations.

The Indian Army’s stated vision of expanding the reach of the historic tournament throughout the East and North-East is also now fully reflected with the choice of host cities this year.

A total of six venues, two in Kolkata (Vivekananda Yuba Bharati Krirangan and Kishore Bharti Krirangan) and one each in Imphal (Khuman Lampak stadium), Ranchi (Morhabadi Stadium) or Jamshedpur (JRD Tata Sports Complex), Shillong (Jawahar Lal Nehru Stadium) and Kokrajhar (SAI Stadium) have been earmarked for the 134th IndianOil Durand Cup edition.

North East United FC are the defending champions having overcome maximum title-holders Mohun Bagan, in a thrilling final last year to get their historic maiden title.

Pic Courtesy by: Durand football society

मणिपुर में सेना का बड़ा एक्शन, 10 उग्रवादी ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद*


#assam_rifles_killed_10_militants_in_manipur

मणिपुर के चांदेल में भारतीय सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। चंदेल जिले में बुधवार को असम राइफल्स की एक यूनिट ने मुठभेड़ में कम से कम 10 उग्रवादियों को मार गिराया।भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किया गया ऑपरेशन अभी भी जारी है।

इंडियन आर्मी ने एक्स पर इस एक्शन की जानकारी दी है। सेना के मुताबिक, मणिपुर के चांदेल जिले के खेंगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास उग्रवादियों की गतिविधियों का पता चला था। भारत-म्यांमार सीमा के पास सशस्त्र कैडरों यानी उग्रवादियों की गतिविधियों की खुफिया जानकारी पर एक्शन लिया गया। स्पीयर कॉर्प्स के तहत असम राइफल्स यूनिट ने 14 मई को एक अभियान शुरू किया।जैसे ही सेना के जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया, उग्रवादियों ने उन पर गोलियां चलाई। जिसका सेना ने करारा जवाब दिया।

सेना ने बताया कि सुरक्षाबलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और जवाबी कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी में 10 कैडरों को मार गिराया गया। मौके से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं।इस ऑपरेशन को कैलिब्रेटेड यानी योजनाबद्ध और सटीक बताया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इलाके में और भी उग्रवादी छिपे होने की आशंका के मद्देनजर सर्च ऑपरेशन अभी भी चलाया जा रहा है। ऑपरेशन के दौरान किसी भी जवान के हताहत होने की खबर नहीं है। यह कार्रवाई मणिपुर में जारी अशांति के बीच सुरक्षाबलों की ओर से एक अहम सफलता मानी जा रही है।

मणिपुर हिंसा के दो साल, हाई अलर्ट के बीच मैतेई-कुकी ने बंद का किया ऐलान

#manipurconflictanniversary

मणिपुर में जातीय हिंसा के आज दो साल पूरे हो गए। इसको लेकर मैतेई और कुकि समुदायों ने राज्यभर में शटडाउन का आह्वान किया। इस दौरान जहां मैतेई समुदाय की एक संगठन ने इंफाल में 'मणिपुर पीपल्स कन्वेंशन' आयोजित किया, वहीं कुकी समुदाय ने 'डे ऑफ सेपरेशन' मनाया। मणिपुर में लगभग सभी जगह आज बाजार, दुकानें और स्कूल-कॉलेज बंद हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। इधर, राज्य में तनाव को देखते हुए सुरक्षाबलों ने इम्फाल, चुराचांदपुर और कंगपोकपी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।

सुरक्षाबलों ने 20 किमी किया फ्लैग मार्च

मणिपुर हिंसा की दूसरी बरसी से एक दिन पहले (2 मई) सुरक्षाबलों ने फ्लैग मार्च किया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 34 बटालियन के डीआईजी सुशांकर उपाध्याय ने बताया कि इस फ्लैग मार्च से लोगों में एक भरोसा पैदा होगा। लोगों को लगेगा कि हालात पर काबू पाने के लिए यहां एक न्यूट्रल (किसी के पक्ष में नहीं) फोर्स है।

डीआईजी उपाध्याय ने ये भी बताया कि फ्लैग मार्च में 1000 जवान शामिल हुए। हमने इसे इम्फाल पुलिस के साथ कोऑर्डिनेशन में आयोजित किया था। हमने करीब 20 किमी का मार्च निकाला। हम लोगों में एक तरह का विश्वास और उपद्रवियों को चेतावनी देना चाहते थे।

13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन, नई सरकार की मांग तेज

मणिपुर में 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन है, लेकिन मौजूदा विधानसभा भंग नहीं हुई है। सिर्फ निलंबित है। इसलिए कई नागरिक संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं। सियासी ताकत पूर्व सीएम एन. वीरेन सिंह के हाथ में है, क्योंकि यहां भाजपा बिखरी हुई है। चार-पांच दिन पहले ही 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर राज्य में तत्काल लोकप्रिय सरकार बनाने की मांग की थी। पत्र पर भाजपा के 14 विधायकों ने साइन किए हैं।

हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए

मणिपुर में दो साल पहले मैतेई और कुकि समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी, जिसमें 260 से अधिक लोग मारे गए थे और 70,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे। इस मामले में 6 हजार एफआईआर दर्ज हुईं, उनमें करीब 2500 में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।

मणिपुर समेत तीन राज्यों में 6 महीने के लिए बढ़ाया गया अफस्पा, हिंसा और अशांति के बीच केन्द्र का बड़ा फैसला

#manipurafspaextended

केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, मणिपुर में जारी हिंसा के कारण कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पांच जिलों के 13 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर पूरे मणिपुर में 1 अप्रैल 2025 से अगले छह माह तक, यदि इस घोषणा को इससे पहले वापस न लिया जाए, 'अशांत क्षेत्र' के रूप में घोषित किया जाता था।

अधिसूचना के मुताबिक, नगालैंड के दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक और पेरेन जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुनहेबोटो जिलों के कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यहां भी 1 अप्रैल 2025 से अगले छह महीने तक अफस्पा लागू रहेगा।

वहीं अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ 3 पुलिस थानों के क्षेत्रों में भी छह महीने के लिए अफस्पा बढ़ा दिया गया है।

फरवरी 2025 से, मणिपुर राष्ट्रपति शासन के अधीन है और विधानसभा निलंबित स्थिति में है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई। जिसने राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता को जन्म दिया। बीरेन सिंह ने 2017 से मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की अगुवाई की थी, ने राज्य में लगभग 21 महीनों से चल रही जातीय हिंसा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मई 2023 से अब तक इस हिंसा में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

क्या है अफस्पा?

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा), 1958 में अधिनियमित, एक ऐसा कानून है जो सरकार द्वारा “अशांत” घोषित क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। ये क्षेत्र आमतौर पर उग्रवाद या उग्रवाद का सामना करने वाले क्षेत्र होते हैं, जहां राज्य सरकारों को कानून और व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण लगता है। इन जगहों पर सुरक्षाबल बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं। कई मामलों में बल प्रयोग भी हो सकता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने पर यहां भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।

मणिपुर के राहत कैंप में मिला 9 साल की बच्ची का शव, दुष्कर्म की आशंका

#nine_year_old_girl_found_dead_in_manipur_relief_camp

मणिपुर में एक नौ वर्षीय बच्ची का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। ये घटना चुराचांदपुर जिले की है। शुक्रवार तड़के 9 साल की एक बच्ची का संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, बच्ची गुरुवार की शाम करीब छह बजे लापता थी। जिसके बाद उसके परिजन उसे ढूंढने लगे। काफी खोजबीन के बाद बच्ची का शव राहत शिविर परिसर में मिला। शव पर चोट के कई निशान पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में दुष्कर्म की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि बच्ची गुरुवार शाम करीब छह बजे लापता हो गई थी, जिसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। काफी देर बाद लड़की का शव शहर के लान्वा टीडी ब्लॉक में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए बने राहत शिविर के पास मिला। पुलिस के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चोट के कई निशान थे, खासकर गले पर, इसके अलावा खून के धब्बे भी थे। पुलिस ने बताया कि संदेह है कि बच्ची के साथ बलात्कार किया गया। फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजवाया गया है।

पुलिस ने शक के आधार पर पंद्रह लोगों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और दोषियों को जल्द ही पकड़ा जाएगा। जिस बच्ची का शव मिला वह चुराचांदपुर के वे मार्क अकादमी स्कूल में पढ़ती थी।

पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने घटना की निंदा करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैं अज्ञात अपराधियों द्वारा लड़की की जघन्य हत्या की कड़ी निंदा करता हूं। यह मानवता के खिलाफ अपराध है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। प्रशासन को जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

इसके अलावा जोमी मदर्स एसोसिएशन और यंग वैफेई एसोसिएशन, हौपी ब्लॉक सहित कई संगठनों ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। जोमी मदर्स एसोसिएशन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से गहन जांच करने और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने का आग्रह किया है।