India

Jun 11 2024, 16:08

मणिपुर, मर्यादा, दूसरों के मत का सम्मान...बहुत कुछ बोल गए भागवत, इशारों-इशारों में किसे दिया संदेश?
#mohan_bhagwat_on_manipur_election_and_modi_govt

देश में लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद नई सरकार का गठन भी हो गया है। चुनावी नतीजों और सरकार के शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का बड़ा बयान आया है।सोमवार नागपुर के एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने चुनाव में संघ को घसीटे जाने, चुनाव में मर्यादा, मणिपुर में अशांति, दूसरों के मत का सम्मान जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में बोलते हुए श्री भागवत ने नई सरकार और विपक्ष को भी सलाह दी।

मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के ठीक एक दिन बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर, चुनाव,राजनीतिक दलों के रवैये पर बात की। भागवत ने सभी धर्मों को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान है।संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि चुनाव परिणाम आ चुके हैं। सरकार भी बन चुकी है। जो हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ? ये लोकतंत्र के नियम हैं, समाज ने अपना मत दे दिया है, संघ के लोग इसमें नहीं पड़ते हैं। हम चुनाव में परिश्रम करते हैं। जो सेवा करता है वो मर्यादा से चलता है। काम करते सब लोग हैं लेकिन कुशलता का ध्यान रखना चाहिए। ऐसी मर्यादा रखकर काम करते हैं। मर्यादा ही अपना धर्म और संस्कृति है।

नागपुर में आरएसएस प्रशिक्षुओं की सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने संसद इसलिए होती है क्योंकि सहमति हो. स्पर्धा की वजह से इसमें दिक्कत आती है. इसलिए बहुमत की बात होती है। चुनाव में संघ जैसे संगठन को भी घसीटा गया। कैसी-कैसी बातें की गईं। तकनीक का सहारा लेकर ऐसा किया गया। विद्या का उपयोग प्रबोधन करने के लिए होता है लेकिन आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल किया गया।

भागवत ने आगे कहा कि सरकार बन गई है। वही सरकार (एनडीए) फिर से आ गई है। पिछले 10 साल में बहुत कुछ अच्छा हुआ है। वैश्विक स्तर पर पहचान अच्छी हुई है। प्रतिष्ठा बढ़ी है। विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में हम आगे बढ़ रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम चुनौतियों से मुक्त हो गए हैं। हमें अभी अन्य समस्याओं से राहत लेनी है।

इसी दौरान मोहन बागवत ने हिंसाग्रस्त मणिपुर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले मणिपुर में शांति थी। ऐसा लगा था कि वहां बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है, लेकिन राज्य में अचानक हिंसा बढ़ गई है। आरएसएस प्रमुख ने कहा,मणिपुर की स्थिति पर प्राथमिकता के साथ विचार करना होगा। चुनावी बयानबाजी से ऊपर उठकर राष्ट्र के सामने मौजूद समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने चुनावी बयानबाजी से बाहर आकर देश के सामने मौजूद समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा,मणिपुर पिछले एक साल से शांति स्थापित होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

संघ प्रमुख के बयान को बीजेपी चीफ जेपी नड्डा के बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि नड्डा ने कुछ दिन पहले कहा था कि अब बीजेपी अब अपने पैरो पर खड़ी है। यही नहीं, इस बार के चुनाव में बीजेपी ने संघ से कोई मदद भी नहीं मांगी थी। पिछले दो चुनावों में संघ यूपी से लेकर बिहार तक काफी एक्टिव था। लेकिन इस बार आरएसएस यूपी से भी दूर रहा। सूत्रों के मुताबिक नड्डा के बयान के बाद तो स्वयंसेवक भी एक्टिव नहीं रहे। अब भागवत के बयान को चुनाव परिणाम के बाद नड्डा के बयान से ही जोड़ा जा रहा है।

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Jun 10 2024, 14:33

मणिपुर में सीएम एन बीरेन सिंह की एडवांस सुरक्षा टीम पर कुकी उग्रवादियों का हमला, दो जवान घायल

#manipur_cm_security_team_ambushed_by_kuki_militants

मणिपुर से बड़ी खबर सामने आई है। यहां मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के सुरक्षा काफिले पर उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया है। इस हमले में 2 जवान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एन बीरेन सिंह की एडवांस सुरक्षा टीम पर कुकी उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया है।अग्रिम सुरक्षा टीम पर उग्रवादियों ने तब हमला किया जब यह टीम सीएम के मंगलवार के दौरे से पहले जिरीबाम जा रही थी। मंगलवार को सीएम को जिरीबाम का दौरा करना था।

बता दें कि मंगलवार को सीएम एन.बीरेन सिंह हिंसाग्रस्त जिरीबाम का दौरे पर जाने का कार्यक्रम था। इसी सिलसिले में सीएम की अग्रिम सुरक्षा टीम हालात का जायजा लेने के लिए जिरीबाम जा रही थी। इसी दौरान सिनम के पास मणिपुर कमांडो ने घात लगाकर हमला किया।सुरक्षा बलों के वाहनों पर कई गोलियां चलाई गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। पुलिस ने बताया कि हमले के दौरान एक जवान घायल हो गया। 

उग्रवादियों ने शनिवार को जिरीबाम में दो पुलिस चौकियों, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस और करीब 70 मकानों में आग लगा दी थी।मुख्यमंत्री सिंह में हालिया स्थिति का जायजा लेने के लिए जिरीबाम जाने वाले थे।

WestBengalBangla

May 08 2024, 07:19

এক বছর পরেও মণিপুরে জাতিগত হিংসা অব্যাহত, কিন্ত কেন এখনও প্রধানমন্ত্রী মোদি এরাজ্যে যাননি?
#one_year_of_manipur_violence



এসবি নিউজ ব্যুরো: মণিপুর জাতিগত হিংসা সন্ত্রাসের এক বছর পূর্ণ হল। গত বছরের ৩ মে থেকে শুরু হওয়া এই জাতিগত সন্ত্রাসে এখন পর্যন্ত ২০০ জনের বেশি মানুষ নিহত হয়েছে। একইসঙ্গে ৫৮ হাজারের বেশি গৃহহীন মানুষ ত্রাণ শিবিরে দুর্দশার মধ্যে দিন কাটাচ্ছেন। সহিংসতার এক বছর পরেও, রাজ্যে মেইতি এবং কুকি-জোমি উপজাতিদের মধ্যে উত্তেজনা অব্যাহত রয়েছে। কুকি আধিপত্যজেলা হোক বা মেইতেই অধ্যুষিত জেলা, রাস্তায় দেখা যাবে সশস্ত্র মানুষ। পুরো রাজ্য দুটি ভাগে বিভক্ত বলে মনে হচ্ছে। গত বছর, মণিপুর সরকার সুপ্রিম কোর্টকে বলেছিল যে এই সহিংসতার সাথে সম্পর্কিত 5,995টি মামলা নথিভুক্ত করা হয়েছে এবং 6,745 জনকে আটক করা হয়েছে। মণিপুর সহিংসতা সম্পর্কিত 11টি গুরুতর মামলার তদন্ত করছে সিবিআই। এই সবের মধ্যেই মণিপুর পরিস্থিতি নিয়ে প্রধানমন্ত্রী মোদীকে বারবার প্রশ্ন তুলছে বিরোধীরা। বিরোধী দলতিনি প্রধানমন্ত্রী মোদিকে প্রশ্নও করেছেন কেন তিনি মণিপুর যাচ্ছেন না? গত এক বছর ধরে মণিপুরে বিক্ষিপ্ত সহিংসতার ঘটনা ঘটছে। রাজ্যের ইতিহাসে এটি বিরল যে একটি রাজ্যে এক বছর ধরে গৃহযুদ্ধ চলতে থাকে এবং কেন্দ্রের দ্বারা আগুন নেভানোর জন্য কোনও দৃঢ় পদক্ষেপ নেওয়া হয় না, তবে স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী অমিত শাহ কয়েক দফা বৈঠক করেছেন। সম্প্রতি আসাম ট্রিবিউনকে জানিয়েছেন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদিসাক্ষাৎকারে বলেন, রাজ্যে পরিস্থিতির উল্লেখযোগ্য উন্নতি হয়েছে। তিনি হাইলাইট করেছেন যে কীভাবে স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী অমিত শাহ সংঘর্ষের সময় রাজ্যে ছিলেন এবং এটি সমাধানের জন্য একাধিক পক্ষের সাথে 15 টিরও বেশি বৈঠক করেছেন। তবে এত বৈঠকের পরও এই উত্তেজনা অবসানের কোনো ফর্মুলা বের করতে পারেনি সরকার। শুধু তাই নয়, সহিংসতা শুরু হওয়ার পরও রাজ্যে সফরে যান স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী অমিত শাহপ্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি একবারও রাজ্যে যাননি। কিংবা এ বিষয়ে খোলাখুলি মত প্রকাশ করেননি। যাইহোক, সহিংসতার মধ্যে, 19 জুলাই, 2023-এ, মণিপুরের দুই মহিলাকে নগ্ন করে প্যারেড করার একটি ভয়ঙ্কর ভিডিও প্রকাশিত হয়েছিল। এই ঘটনার অনেক পরে, প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি সংসদের বর্ষা অধিবেশনের আগে মিডিয়ার সাথে কথা বলার সময়, মণিপুরের ঘটনার কথা উল্লেখ করে বলেছিলেন যে তাঁর "হৃদয় বেদনায় ভরা।"প্রধানমন্ত্রী মোদি বলেছিলেন যে দেশকে অপমান করা হচ্ছে এবং দোষীদের রেহাই দেওয়া হবে না এই প্রথম প্রধানমন্ত্রী মোদী মণিপুরে চলমান সহিংসতার বিষয়ে কিছু বললেন। *অনাস্থা প্রস্তাবের পর তিন মাসের নীরবতা ভাঙলেন প্রধানমন্ত্রী* গত বছরের আগস্টে সংসদীয় বিতর্কের সময় প্রধানমন্ত্রী মোদি রাজ্যে শান্তির আবেদন করেছিলেন। বিরোধী নেতারা যখন তার বিরুদ্ধে নীরবতা পালনের অভিযোগ করছেন তখন এই আবেদন এল। আগস্টবিরোধীদের দ্বারা অনাস্থা প্রস্তাবের মাধ্যমে বাধ্য হওয়ার পরে, প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি রাজ্যের সমস্যার জন্য শুধুমাত্র পূর্ববর্তী কংগ্রেস সরকারকে দায়ী করে এই বিষয়ে তিন মাসের নীরবতা ভেঙেছেন। এবং বলেছেন যে তার সরকার শীঘ্রই শান্তি ফিরিয়ে আনবে। *দেশ জুড়ে আটকে থাকা প্রধানমন্ত্রী মণিপুরের দিকে মনোযোগ দেননি* আমরা আপনাকে বলি যে সহিংসতা শুরু হওয়ার পরে প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী একবারও রাজ্যে যাননি।করেছিল. একই সময়ে, সরকারী রেকর্ড দেখায় যে প্রধানমন্ত্রী মোদি মণিপুরে প্রাথমিক অশান্তির সপ্তাহে দুটি ঘরোয়া সফর করেছিলেন। প্রথম সফর ছিল কর্ণাটক, দ্বিতীয়টি রাজস্থানে। 6 মে তিনি বেঙ্গালুরুতে একটি রোড শো করেন। মে 2023 থেকে এপ্রিল 2024 এর মধ্যে, তিনি বিভিন্ন রাজ্যে প্রায় 160টি সফর করেছিলেন, যার মধ্যে তিনি সর্বাধিক 24 বার রাজস্থান সফর করেছিলেন। সরকারি ও বেসরকারি সফরসামগ্রিকভাবে, প্রধানমন্ত্রী 22 বার মধ্যপ্রদেশ এবং 17 বার উত্তরপ্রদেশ সফর করেছেন। চলতি বছরের ফেব্রুয়ারি-মার্চে প্রধানমন্ত্রী মোদি উত্তর-পূর্বের আসাম, ত্রিপুরা এবং অরুণাচল প্রদেশে গেলেও মণিপুর যাননি। তিনি আসামে তিনটি এবং ত্রিপুরা ও অরুণাচল প্রদেশে একটি করে সফর করেছেন। গত বছরের নভেম্বরে পাঁচ রাজ্যে বিধানসভা নির্বাচন হয়েছিল। সেই রাজ্যগুলি হল মিজোরাম, ছত্তিশগড়, মধ্যপ্রদেশ, রাজস্থান এবংতেলেঙ্গানা। প্রধানমন্ত্রী মোদি অন্য সব রাজ্যে গিয়েছিলেন কিন্তু মিজোরামে যাননি যা মণিপুর সংলগ্ন একটি রাজ্য এবং মণিপুরে সহিংসতার কারণে বিপুল সংখ্যক মানুষ বাস্তুচ্যুত হয়েছে। ডেভেলপ ইন্ডিয়া, ডেভেলপ নর্থ-ইস্ট কর্মসূচির জন্য প্রধানমন্ত্রী মোদি গত ৯ মার্চ উত্তর-পূর্বাঞ্চলীয় রাজ্য অরুণাচল প্রদেশে গিয়েছিলেন। *মণিপুর সহ উত্তর-পূর্ব রাজ্যগুলিকে উপেক্ষা করার অভিযোগ* এমন পরিস্থিতিতে মণিপুরের বিরোধীরা কেন্দ্রের মোদী সরকারকে আক্রমণ করবে।উত্তর-পূর্ব রাজ্যগুলি সহ তাদের উপেক্ষা করার অভিযোগ উঠেছে। এখন 3 মে, মণিপুর সহিংসতার এক বছর পূর্ণ হলে, কংগ্রেস সভাপতি মল্লিকার্জুন খাড়গে অভিযোগ করেছেন যে প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির ঔদ্ধত্য মণিপুরের মতো একটি সুন্দর রাজ্যের সামাজিক কাঠামোকে ক্ষতিগ্রস্ত করেছে। "মণিপুর ঠিক এক বছর আগে 3 মে, 2023-এ জ্বলতে শুরু করেছিল," খার্গ সোশ্যাল মিডিয়া প্ল্যাটফর্ম X-এ একটি পোস্টে বলেছিলেন। মুডিমোদি সরকার এবং অযোগ্য বিজেপি রাজ্য সরকারের নিষ্ঠুর সমন্বয় রাজ্যটিকে আক্ষরিক অর্থে দুটি ভাগে বিভক্ত করেছে। কংগ্রেস সভাপতি অভিযোগ করেছেন যে "অনুতপ্ত" প্রধানমন্ত্রী মণিপুরে পা রাখেননি কারণ এটি "তাঁর পদের অযোগ্যতা এবং সম্পূর্ণ উদাসীনতা" প্রকাশ করবে। “মণিপুরের সমস্ত সম্প্রদায়ের লোকেরা এখন জানে বিজেপি কীভাবে তাদের জীবন দুর্বিষহ করে তুলেছে। খড়গে টুইট করেছেন, উত্তর-পূর্বমানুষ এখন জানে যে তথাকথিত উন্নয়ন নিয়ে মোদি সরকারের নির্লজ্জ ঢোলের বাজনা এই অঞ্চলের মানবতার কণ্ঠকে নিমজ্জিত করেছে। ভারতের জনগণ এখন জানে যে মণিপুরে ধ্বংস হওয়া অগণিত মানুষের জন্য প্রধানমন্ত্রী মোদি এবং তার সরকারের এক বিন্দু সহানুভূতিও নেই।

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May 07 2024, 12:05

एक साल बाद भी “सुलग” रहा मणिपुर, देशभर की यात्रा कर रहे पीएम मोदी ने क्यों इस हिंसाग्रस्त राज्य से बनाई दूरी?

#oneyearofmanipurviolence 

मणिपुर हिंसा के एक साल पूरे हो गए। पिछले साल 3 मई को शुरू हुई इस जातीय हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके है। वहीं, 58 हजार से अधिक बेघर लोग राहत शिविरों में तकलीफों में रह रहें है। हिंसा के एक साल बाद भी राज्य में मैतेई और कुकी-ज़ोमी जनजाति के बीच तनाव जारी है। कुकी बहुल जिलों हों या मैतेई बहुल, सड़कों पर हथियारबंद लोग नजर आ जाएंगे। पूरा राज्य दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में मणिपुर सरकार ने कहा था कि इस हिंसा से जुड़े 5,995 मामले दर्ज हुए और 6,745 लोगों को हिरासत में लिया है। मणिपुर हिंसा से जुड़े 11 गंभीर मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। इन सबके बीच विपक्ष बार-बार मणिपुर के हालात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाता रहा है। विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी से ये भी पूछता रहा है कि आख़िर वो मणिपुर क्यों नहीं जा रहे हैं?

मणिपुर में पिछले एक साल से छिटपुट हिंसा की घटनाए जारी है। के इतिहास में यह दुर्लभ है कि किसी राज्य में एक साल तक नागरिक संघर्ष जारी रहे और आग बुझाने के लिए केंद्र द्वारा कोई ठोस कदम ना उठाया जाए।हालांकि गृहमंत्री अमित शाह ने कई दौरे की बैठकें की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी हाल ही में असम ट्रिब्यून को दिए गए इंटरव्यू में कहा, राज्य की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे गृह मंत्री अमित शाह, संघर्ष के दौरान राज्य में रहे और इसे सुलझाने के लिए कई पक्षों के साथ 15 से अधिक बैठकें की। 

हालांकि, इतने बैठकों के बाद भी सरकार इस तनाव को ख़त्म करने का फॉर्मूला नहीं निकाल सकी हैं। यही नहीं, गृह मंत्री अमित शाह तो राज्य के दौरे पर पहुंते रहे, लेकिन हिंसा भड़कने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी राज्य का दौरा नहीं किया। ना ही इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। हालांकि, हिंसा के बीच 19 जुलाई, 2023 को जब मणिपुर की दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का एक भयावह वीडियो सामने आया था। इस घटना के लंबे समय बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मॉनसून सत्र से पहले मीडिया से बातचीत में मणिपुर की घटना का ज़िक्र करते हुए कहा था कि उनका "हृदय पीड़ा से भरा हुआ है।" पीएम मोदी ने कहा था कि देश की बेइज़्ज़ती हो रही है और दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा।यह पहली बार था कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर में जारी हिंसा पर कुछ कहा।

अविश्वास प्रस्ताव के बाद पीएम ने तीन महीने की चुप्पी तोड़ी

पिछले साल अगस्त में एक संसदीय बहस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में शांति की अपील की थी। ये अपील तब आई जब विपक्षी नेता उन पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रहे थे। अगस्त में विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से मजबूर किए जाने के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर तीन महीने की चुप्पी तोड़ी, और केवल राज्य की समस्याओं के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराया। और कहा कि उनकी सरकार जल्द ही शांति बहाल करेगी।

देशभर में भूमे पीएम पर नहीं ली मणिपुर की सुध

बता दें कि हिंसा भड़कने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी राज्य का दौरा नहीं किया। वहीं, सरकारी रिकॉर्ड से पता चलता है कि मणिपुर में शुरुआती उथल-पुथल के सप्ताह में प्रधानमंत्री मोदी ने दो घरेलू यात्राएं की थीं। पहली यात्रा कर्नाटक की, और दूसरी राजस्थान की। छह मई को उन्होंने बेंगलुरु में रोड शो किया। मई, 2023 से अप्रैल, 2024 के बीच उन्होंने अलग-अलग राज्यों की लगभग 160 यात्राएँ की, जिनमें सबसे ज़्यादा 24 बार वो राजस्थान के दौरे पर रहे। औपचारिक और गैर-आधिकारिक दौरों को मिलाकर पीएम ने 22 बार मध्य प्रदेश का और 17 बार उत्तर प्रदेश का दौरा किया। इस साल फरवरी-मार्च में प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर के असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया लेकिन मणिपुर नहीं गए। उन्होंने असम के तीन दौरे, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश का एक-एक दौरा किया है। पिछले साल नवंबर में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए थे। वो राज्य थे मिज़ोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना। प्रधानमंत्री मोदी बाकी सभी राज्यों में गए लेकिन मिज़ोरम नहीं गए जो कि मणिपुर से सटा हुआ राज्य है और वहाँ मणिपुर की हिंसा से विस्थापित लोग बड़ी तादाद में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत, विकसित उत्तर-पूर्व कार्यक्रम के लिए नौ मार्च को पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था।

मणिपुर समेत पूर्वोतर के राज्यों की अनदेखी का आरोप

ऐसे में विपक्ष केन्द्र की मोदी सरकार पर मणिपुर समेत पूर्वोतर के राज्यों को अनदेखा करने का आरोप लगाती आ रही है। अभी 3 मई को मणिपुर हिंसा के एक साल पूरे होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार ने मणिपुर जैसे खूबसूरत राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया है।

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मणिपुर ठीक एक साल पहले 3 मई, 2023 को जलना शुरू हुआ था। उदासीन मोदी सरकार और अयोग्य भाजपा राज्य सरकार के क्रूर संयोजन ने राज्य को वस्तुतः दो हिस्सों में विभाजित कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि "पश्चातापहीन" प्रधानमंत्री ने मणिपुर में कदम नहीं रखा है क्योंकि यह "उनकी रैंक की अक्षमता और पूर्ण उदासीनता" को उजागर करेगा। “मणिपुर के सभी समुदायों के लोग अब जानते हैं कि भाजपा ने उनके जीवन को कैसे दयनीय बना दिया है। खड़गे ने ट्वीट किया, पूर्वोत्तर के लोग अब जानते हैं कि तथाकथित विकास के बारे में मोदी सरकार के बेशर्म ढोल ने क्षेत्र में मानवता की आवाज को दबा दिया। भारत के लोग अब जानते हैं कि पीएम मोदी और उनकी सरकार को मणिपुर में नष्ट हुई अनगिनत जिंदगियों के प्रति रत्ती भर भी सहानुभूति नहीं है।

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Apr 27 2024, 10:52

मणिपुर में फिर भड़की हिंसाः नारानसेना में कुकी उग्रवादियों का हमला, सीआरपीएफ के 2 जवान शहीद*
#manipur_two_crpf_personnel_lost_their_lives_in_an_attack_by_kuki_militants
मणिपुर में हिंसा थमती नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव के एक दिन बाद ही यहां कुकी उग्रवादियों ने नारानसेना इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर हमला किया है। इस हमले में दो जवानों की मौत की भी खबर है। पुलिस ने बताया कि हमला आधी रात को शुरू हुआ और इलाके में 2:15 बजे तक जारी रहा।हमले में मारे गए जवान राज्य के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना इलाके में तैनात सीआरपीएफ की 128वीं बटालियन के हैं। मणिपुर पुलिस के मुताबिक, इस घटना में दो और लोग घायल भी हुए हैं। बताया गया है कि उग्रवादियों ने मोइरांग पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नरनसेना में इंडियन रिजर्व बटालियन के कैंप को निशाना बनाया। इस दौरान उग्रवादियों ने पहाड़ की चोटियों से अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस दौरान हमलावरों ने कैंप पर कई बम भी फेंके, जिनमें से एक सीआरपीएफ के आउटपोस्ट के बाहर ही फट गया। इंफाल में भड़की थी हिंसा बता दें कि मणिपुर करीब एक साल से छिटपुट हिंसा की आग में झुलस रहा है। इससे पहले कुकी उग्रवादियों ने तीन जिलों कांगपोकपी, उखरूल और इंफाल पूर्व के ट्राइजंक्शन जिले में एक दूसरे पर फायरिंग की। इस गोलीबारी में कुकी समुदाय के 2 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद थौबल जिले के हेइरोक और तेंगनौपाल के बीच 2 दिनों तक क्रॉस फायरिंग हुई थी। इसके बाद इंफाल के पूर्वी जिले के मोइरंगपुरेल में फिर से हिंसा की आग भड़क उठी थी। मणिपुर में लगातार जारी है हिंसा का दौर पिछले साल तीन मई को मणिपुर में हिंसा का दौर शुरू हुआ था। अभी तक वहां पर 200 से ज्यादा लोगों की जान गई है। सुरक्षाबलों से जुड़े लोगों को भी वहां की हिंसा का शिकार होना पड़ा है। भारी संख्या में लूटे गए हथियारों की पूर्ण वापसी अभी तक नहीं हो सकी है। ज्यादातर लोगों को मणिपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वहीं असम राइफल को लेकर भी समुदाय विशेष के लोगों में रोष देखा गया है। उपद्रवियों द्वारा आईईडी का डर दिखाकर सुरक्षा बलों के वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता था। स्थानीय पुलिस पर पक्षपात करने जैसे आरोप लग चुके हैं।

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Apr 27 2024, 10:52

मणिपुर में फिर भड़की हिंसाः नारानसेना में कुकी उग्रवादियों का हमला, सीआरपीएफ के 2 जवान शहीद*
#manipur_two_crpf_personnel_lost_their_lives_in_an_attack_by_kuki_militants
मणिपुर में हिंसा थमती नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव के एक दिन बाद ही यहां कुकी उग्रवादियों ने नारानसेना इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर हमला किया है। इस हमले में दो जवानों की मौत की भी खबर है। पुलिस ने बताया कि हमला आधी रात को शुरू हुआ और इलाके में 2:15 बजे तक जारी रहा।हमले में मारे गए जवान राज्य के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना इलाके में तैनात सीआरपीएफ की 128वीं बटालियन के हैं। मणिपुर पुलिस के मुताबिक, इस घटना में दो और लोग घायल भी हुए हैं। बताया गया है कि उग्रवादियों ने मोइरांग पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नरनसेना में इंडियन रिजर्व बटालियन के कैंप को निशाना बनाया। इस दौरान उग्रवादियों ने पहाड़ की चोटियों से अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस दौरान हमलावरों ने कैंप पर कई बम भी फेंके, जिनमें से एक सीआरपीएफ के आउटपोस्ट के बाहर ही फट गया। इंफाल में भड़की थी हिंसा बता दें कि मणिपुर करीब एक साल से छिटपुट हिंसा की आग में झुलस रहा है। इससे पहले कुकी उग्रवादियों ने तीन जिलों कांगपोकपी, उखरूल और इंफाल पूर्व के ट्राइजंक्शन जिले में एक दूसरे पर फायरिंग की। इस गोलीबारी में कुकी समुदाय के 2 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद थौबल जिले के हेइरोक और तेंगनौपाल के बीच 2 दिनों तक क्रॉस फायरिंग हुई थी। इसके बाद इंफाल के पूर्वी जिले के मोइरंगपुरेल में फिर से हिंसा की आग भड़क उठी थी। मणिपुर में लगातार जारी है हिंसा का दौर पिछले साल तीन मई को मणिपुर में हिंसा का दौर शुरू हुआ था। अभी तक वहां पर 200 से ज्यादा लोगों की जान गई है। सुरक्षाबलों से जुड़े लोगों को भी वहां की हिंसा का शिकार होना पड़ा है। भारी संख्या में लूटे गए हथियारों की पूर्ण वापसी अभी तक नहीं हो सकी है। ज्यादातर लोगों को मणिपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वहीं असम राइफल को लेकर भी समुदाय विशेष के लोगों में रोष देखा गया है। उपद्रवियों द्वारा आईईडी का डर दिखाकर सुरक्षा बलों के वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता था। स्थानीय पुलिस पर पक्षपात करने जैसे आरोप लग चुके हैं।

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Apr 27 2024, 10:37

मणिपुर में फिर भड़की हिंसाः नारानसेना में कुकी उग्रवादियों का हमला, सीआरपीएफ के 2 जवान शहीद*
#manipur_two_crpf_personnel_lost_their_lives_in_an_attack_by_kuki_militants
मणिपुर में हिंसा थमती नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव के एक दिन बाद ही यहां कुकी उग्रवादियों ने नारानसेना इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर हमला किया है। इस हमले में दो जवानों की मौत की भी खबर है। पुलिस ने बताया कि हमला आधी रात को शुरू हुआ और इलाके में 2:15 बजे तक जारी रहा।हमले में मारे गए जवान राज्य के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना इलाके में तैनात सीआरपीएफ की 128वीं बटालियन के हैं। मणिपुर पुलिस के मुताबिक, इस घटना में दो और लोग घायल भी हुए हैं। बताया गया है कि उग्रवादियों ने मोइरांग पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नरनसेना में इंडियन रिजर्व बटालियन के कैंप को निशाना बनाया। इस दौरान उग्रवादियों ने पहाड़ की चोटियों से अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस दौरान हमलावरों ने कैंप पर कई बम भी फेंके, जिनमें से एक सीआरपीएफ के आउटपोस्ट के बाहर ही फट गया। इंफाल में भड़की थी हिंसा बता दें कि मणिपुर करीब एक साल से छिटपुट हिंसा की आग में झुलस रहा है। इससे पहले कुकी उग्रवादियों ने तीन जिलों कांगपोकपी, उखरूल और इंफाल पूर्व के ट्राइजंक्शन जिले में एक दूसरे पर फायरिंग की। इस गोलीबारी में कुकी समुदाय के 2 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद थौबल जिले के हेइरोक और तेंगनौपाल के बीच 2 दिनों तक क्रॉस फायरिंग हुई थी। इसके बाद इंफाल के पूर्वी जिले के मोइरंगपुरेल में फिर से हिंसा की आग भड़क उठी थी। मणिपुर में लगातार जारी है हिंसा का दौर पिछले साल तीन मई को मणिपुर में हिंसा का दौर शुरू हुआ था। अभी तक वहां पर 200 से ज्यादा लोगों की जान गई है। सुरक्षाबलों से जुड़े लोगों को भी वहां की हिंसा का शिकार होना पड़ा है। भारी संख्या में लूटे गए हथियारों की पूर्ण वापसी अभी तक नहीं हो सकी है। ज्यादातर लोगों को मणिपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वहीं असम राइफल को लेकर भी समुदाय विशेष के लोगों में रोष देखा गया है। उपद्रवियों द्वारा आईईडी का डर दिखाकर सुरक्षा बलों के वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता था। स्थानीय पुलिस पर पक्षपात करने जैसे आरोप लग चुके हैं।

India

Apr 27 2024, 10:20

मणिपुर में फिर भड़की हिंसाः नारानसेना में कुकी उग्रवादियों का हमला, सीआरपीएफ के 2 जवान शहीद*
#manipur_two_crpf_personnel_lost_their_lives_in_an_attack_by_kuki_militants
मणिपुर में हिंसा थमती नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव के एक दिन बाद ही यहां कुकी उग्रवादियों ने नारानसेना इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर हमला किया है। इस हमले में दो जवानों की मौत की भी खबर है। पुलिस ने बताया कि हमला आधी रात को शुरू हुआ और इलाके में 2:15 बजे तक जारी रहा।हमले में मारे गए जवान राज्य के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना इलाके में तैनात सीआरपीएफ की 128वीं बटालियन के हैं। मणिपुर पुलिस के मुताबिक, इस घटना में दो और लोग घायल भी हुए हैं। बताया गया है कि उग्रवादियों ने मोइरांग पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नरनसेना में इंडियन रिजर्व बटालियन के कैंप को निशाना बनाया। इस दौरान उग्रवादियों ने पहाड़ की चोटियों से अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस दौरान हमलावरों ने कैंप पर कई बम भी फेंके, जिनमें से एक सीआरपीएफ के आउटपोस्ट के बाहर ही फट गया। इंफाल में भड़की थी हिंसा बता दें कि मणिपुर करीब एक साल से छिटपुट हिंसा की आग में झुलस रहा है। इससे पहले कुकी उग्रवादियों ने तीन जिलों कांगपोकपी, उखरूल और इंफाल पूर्व के ट्राइजंक्शन जिले में एक दूसरे पर फायरिंग की। इस गोलीबारी में कुकी समुदाय के 2 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद थौबल जिले के हेइरोक और तेंगनौपाल के बीच 2 दिनों तक क्रॉस फायरिंग हुई थी। इसके बाद इंफाल के पूर्वी जिले के मोइरंगपुरेल में फिर से हिंसा की आग भड़क उठी थी। मणिपुर में लगातार जारी है हिंसा का दौर पिछले साल तीन मई को मणिपुर में हिंसा का दौर शुरू हुआ था। अभी तक वहां पर 200 से ज्यादा लोगों की जान गई है। सुरक्षाबलों से जुड़े लोगों को भी वहां की हिंसा का शिकार होना पड़ा है। भारी संख्या में लूटे गए हथियारों की पूर्ण वापसी अभी तक नहीं हो सकी है। ज्यादातर लोगों को मणिपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वहीं असम राइफल को लेकर भी समुदाय विशेष के लोगों में रोष देखा गया है। उपद्रवियों द्वारा आईईडी का डर दिखाकर सुरक्षा बलों के वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता था। स्थानीय पुलिस पर पक्षपात करने जैसे आरोप लग चुके हैं।

నిజంనిప్పులాంటిది

Feb 28 2024, 17:31

Manipur: మణిపుర్‌లో అదనపు ఎస్పీ కిడ్నాప్‌.. ఆయుధాలు వదిలి పోలీసుల నిరసన

ఇంఫాల్‌: మణిపుర్‌ (Manipur) పోలీసు కమాండోలు వినూత్న నిరసనకు దిగారు. ñబుధవారం ఉదయం కొద్దిసేపు ఆయుధాలను విడిచిపెట్టి విధులకు హాజరయ్యారు. మంగళవారం పశ్చిమ ఇంఫాల్‌లోని అదనపు ఎస్పీ అమిత్‌సింగ్‌ ఇంటిపై సుమారు 200 మంది సాయుధులు దాడి చేసి ఆయనతోపాటు మరొకరిని అపహరించుకుపోయారు..

ఈ ఘటనతో ఆ ప్రాంతంలో ఉద్రిక్త వాతావరణం చోటుచేసుకుంది. ఏఎస్పీ అపహరణకు గురయ్యారనే సమాచారంతో అప్రమత్తమైన భద్రతా బలగాలు చుట్టుపక్కల ప్రాంతాల్లో గాలింపు చర్యలు చేపట్టి గంటల వ్యవధిలోనే ఆయన్ను విడిపించినట్లు మణిపుర్‌ పోలీసులు ఓ ప్రకటనలో పేర్కొన్నారు. దీనికి నిరసనగా బుధవారం పోలీసు కమాండోలు ఆయుధాలను విడిచిపెట్టి నిరసన తెలిపారు..

అంతకుముందు వాహనం దొంగిలించారనే ఆరోపణలతో అరంబై టెంగోల్‌ గ్రూప్‌నకు చెందిన ఆరుగురు వ్యక్తులను ఏఎస్పీ అమిత్‌ అదుపులోకి తీసుకున్నారు. దీనిపై ఆగ్రహించిన ఆ వర్గం వారిని విడిచిపెట్టాలని డిమాండ్‌ చేస్తూ దాడికి పాల్పడినట్లు పోలీసులు వెల్లడించారు. ప్రస్తుతం ఈ ప్రాంతంలో పరిస్థితులు అదుపులో ఉన్నట్లు తెలిపారు.

మరోవైపు ఎస్పీ స్థాయి అధికారి అపహరణకు గురికావడంపై రాష్ట్ర హోంశాఖ అప్రమత్తమైంది. గతవారం రాష్ట్రంలో కుకీలు-మైతేయ్‌ల మధ్య వైరానికి కారణమైన పేరాను తొలగిస్తున్నట్లు మణిపుర్‌ హైకోర్టు ప్రకటించింది. మైతేయ్‌లకు రిజర్వేషన్లు ఇవ్వాలన్న అంశాన్ని పరిశీలించాలని గతేడాది మార్చి 27న కేంద్ర గిరిజన శాఖకు హైకోర్టు ప్రతిపాదన చేసింది. అయితే, వారికి రిజర్వేషన్లు ఇవ్వొద్దని నాగా, కుకీ-జొమీ తెగలు డిమాండ్ చేశాయి. దీనిపై ఇరువర్గాల మధ్య ఘర్షణలు చోటుచేసుకున్నాయి..

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Feb 22 2024, 18:46

मैतेई समुदाय को ST सूची में डालने का आदेश रद्द, मणिपुर हाईकोर्ट ने अपने ही पुराने आदेश को पलटा

#manipur_high_court_withdraws_contentious_part_of_its_order_on_meiteis_in_st 

मणिपुर उच्च न्यायालय ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के अपने ही आदेश को पलट दिया है। मणिपुर हाई कोर्ट ने मार्च 2023 में दिए गए फैसले के उस पैरा को हटाने का आदेश दिया है जिसमें राज्य सरकार से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने पर विचार करने को कहा गया था। अदालत ने कहा कि यह पैरा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा इस मामले में रखे गए रुख के विपरीत है। बता दें कि मणिपुर हाईकोर्ट की ओर 27 मार्च 2023 को मैतैई समुदाय के बारे में दिए गए फैसले का राज्य में काफी विरोध हुआ था। बाद में याचिकाकर्ताओं की ओर से समीक्षा याचिका दायर की गई थी। इसी पर न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है।

जस्टिस गोलमेई गैफुलशिलु की एकल एक पीठ ने बुधवार (21 फरवरी) को एक समीक्षा याचिका की सुनवाई के दौरान उक्त अंश को हटा दिया। मणिपुर हाई के न्यायमूर्ति गाइफुलशिलु ने अनुसूचित जनजाति सूची मे संशोधन के लिए भारत सरकार की निर्धारित प्रक्रिया का हवाला देते हुए पुराने फैसले से इस निर्णय को हटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मणिपुर हाईकोर्ट के न्यायाधीश गाइफुलशिलु ने कहा पिछले साल जो फैसला हुआ उसकी समीक्षा की आवश्यकता है, क्योंकि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में की गई टिप्पणी के खिलाफ है। न्यायमूर्ति ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2000 में अपनी टिप्पणी में अदालतें इस प्रश्न से निपटने के लिए अधिकार क्षेत्र का विस्तार नहीं कर सकतीं और न ही उन्हें करना चाहिए। एक विशेष जाति, उप-जाति; एक समूह या जनजाति या उप-जनजाति का हिस्सा अनुच्छेद के तहत जारी राष्ट्रपति आदेशों में उल्लिखित प्रविष्टियों में से किसी एक में शामिल है। 341 और 342 विशेष रूप से तब जब उक्त अनुच्छेद के खंड (2) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उक्त आदेशों को संसद द्वारा बनाए गए कानून के अलावा संशोधित या बदला नहीं जा सकता है। 

कि मार्च, 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन की पीठ ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का निर्देश दिया था। अप्रैल में आदेश की प्रति सार्वजनिक होने के बाद मणिपुर के कई हिस्सों में जमकर हिंसा भड़की थी। अलग-अलग इलाकों में हिंसा के कारण 200 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आई थी। इसके बाद, उच्च न्यायालय के निर्देश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। 17 मई, 2023 को पारित आदेश में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था, 'मणिपुर उच्च न्यायालय का आदेश गलत था।' हालांकि, उन्होंने साफ किया था कि सुप्रीम कोर्ट बहुसंख्यक मैतेई लोगों को आरक्षण देने के मणिपुर उच्च न्यायालय के फैसले से उत्पन्न होने वाले कानूनी मुद्दों से नहीं निपटेगी। इस संबंध में याचिकाएं मणिपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ में लंबित हैं।

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Jun 11 2024, 16:08

मणिपुर, मर्यादा, दूसरों के मत का सम्मान...बहुत कुछ बोल गए भागवत, इशारों-इशारों में किसे दिया संदेश?
#mohan_bhagwat_on_manipur_election_and_modi_govt

देश में लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद नई सरकार का गठन भी हो गया है। चुनावी नतीजों और सरकार के शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का बड़ा बयान आया है।सोमवार नागपुर के एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने चुनाव में संघ को घसीटे जाने, चुनाव में मर्यादा, मणिपुर में अशांति, दूसरों के मत का सम्मान जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में बोलते हुए श्री भागवत ने नई सरकार और विपक्ष को भी सलाह दी।

मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के ठीक एक दिन बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर, चुनाव,राजनीतिक दलों के रवैये पर बात की। भागवत ने सभी धर्मों को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान है।संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि चुनाव परिणाम आ चुके हैं। सरकार भी बन चुकी है। जो हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ? ये लोकतंत्र के नियम हैं, समाज ने अपना मत दे दिया है, संघ के लोग इसमें नहीं पड़ते हैं। हम चुनाव में परिश्रम करते हैं। जो सेवा करता है वो मर्यादा से चलता है। काम करते सब लोग हैं लेकिन कुशलता का ध्यान रखना चाहिए। ऐसी मर्यादा रखकर काम करते हैं। मर्यादा ही अपना धर्म और संस्कृति है।

नागपुर में आरएसएस प्रशिक्षुओं की सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने संसद इसलिए होती है क्योंकि सहमति हो. स्पर्धा की वजह से इसमें दिक्कत आती है. इसलिए बहुमत की बात होती है। चुनाव में संघ जैसे संगठन को भी घसीटा गया। कैसी-कैसी बातें की गईं। तकनीक का सहारा लेकर ऐसा किया गया। विद्या का उपयोग प्रबोधन करने के लिए होता है लेकिन आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल किया गया।

भागवत ने आगे कहा कि सरकार बन गई है। वही सरकार (एनडीए) फिर से आ गई है। पिछले 10 साल में बहुत कुछ अच्छा हुआ है। वैश्विक स्तर पर पहचान अच्छी हुई है। प्रतिष्ठा बढ़ी है। विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में हम आगे बढ़ रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम चुनौतियों से मुक्त हो गए हैं। हमें अभी अन्य समस्याओं से राहत लेनी है।

इसी दौरान मोहन बागवत ने हिंसाग्रस्त मणिपुर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले मणिपुर में शांति थी। ऐसा लगा था कि वहां बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है, लेकिन राज्य में अचानक हिंसा बढ़ गई है। आरएसएस प्रमुख ने कहा,मणिपुर की स्थिति पर प्राथमिकता के साथ विचार करना होगा। चुनावी बयानबाजी से ऊपर उठकर राष्ट्र के सामने मौजूद समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने चुनावी बयानबाजी से बाहर आकर देश के सामने मौजूद समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा,मणिपुर पिछले एक साल से शांति स्थापित होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

संघ प्रमुख के बयान को बीजेपी चीफ जेपी नड्डा के बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि नड्डा ने कुछ दिन पहले कहा था कि अब बीजेपी अब अपने पैरो पर खड़ी है। यही नहीं, इस बार के चुनाव में बीजेपी ने संघ से कोई मदद भी नहीं मांगी थी। पिछले दो चुनावों में संघ यूपी से लेकर बिहार तक काफी एक्टिव था। लेकिन इस बार आरएसएस यूपी से भी दूर रहा। सूत्रों के मुताबिक नड्डा के बयान के बाद तो स्वयंसेवक भी एक्टिव नहीं रहे। अब भागवत के बयान को चुनाव परिणाम के बाद नड्डा के बयान से ही जोड़ा जा रहा है।