भारत बना ईरान-यूएई के बीच 'मध्यस्थ', दिल्ली में ब्रिक्स समिट की अहम कामयाबी

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नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत ने उस वक्त बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की, जब पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर आमने-सामने खड़े ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक साझा ब्रिक्स घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच गंभीर मतभेद देख जा रहे हैं। युद्ध और लगातार बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सहमति बनना सिर्फ ब्रिक्स के लिए नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ईरान-यूएई को एक साथ लाना था चुनौती

ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की मई में हुई बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि संयुक्त बयान तक जारी नहीं हो पाया था। पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं और संघर्ष की व्याख्या अलग-अलग थी। ऐसे में दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि ऐसी भाषा तैयार की जाए, जिस पर ईरान और यूएई समेत ब्रिक्स के सभी सदस्य देश एक साथ खड़े हो सकें। अंतिम घोषणा में किसी एक देश को सीधे तौर पर युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर सामूहिक चिंता जताई गई। सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

ईरानी राष्ट्रपति और यूएई के क्राउन प्रिंस की मुलाकात

इसी बीच दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान एक अप्रत्याशित राजनयिक क्षण सामने आया। यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ब्रिक्स सिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, तनाव कम करने, स्थिरता और क्षेत्रीय शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण संपर्कों में से एक माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब क्षेत्रीय संघर्ष ने ईरान और खाड़ी देशों के रिश्तों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

भारत की भूमिका क्यों अहम?

नई दिल्ली के संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों के साथ गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, साथ ही ईरान के साथ भी उसके दीर्घकालिक संबंध बने हुए हैं। इसके अलावा, भारत के अमेरिका, रूस और इज़राइल के साथ भी घनिष्ठ साझेदारी है। इससे भारत को राजनयिक स्तर पर ऐसी पहुँच प्राप्त है जो कई अन्य देशों के पास नहीं है। चुनौती यह है कि उस पहुंच का उपयोग इस तरह से किया जाए कि ऐसा न लगे कि आप किसी का पक्ष ले रहे हैं। नई दिल्ली ने ईरान और अमेरिका या ईरान और अरब देशों के बीच औपचारिक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका नहीं निभाई है। इसके बजाय, उसने लगातार संवाद, कूटनीति, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार एवं नौवहन की वकालत की है। दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत का प्रस्ताव किसी बड़े शांति समझौते की मध्यस्थता करने से कम और राजनयिक चैनलों को खुला रखने से अधिक संबंधित है।

ईरान के नक्शे पर डोनाल्ड ट्रंप ने लगाई अपनी तस्वीर, अमेरिकी राष्ट्रपति के पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

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अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और पिकैक्स माउंटेन पर हमलों की धमकी के बाद डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के बारे में किए नए पोस्ट ने हलचल मची दी है। ट्रंप ने पश्चिम एशिया का नक्शा शेयर करते हुए ईरान के मैप को अपने सिर के आकार में दिखाया है। यानी एक तरह से उन्होंने ईरान पर कब्जे की धमकी दी है।

ईरान के नक्शे पर ट्रंप की फोटो

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक घंटे के अंदर 7 पोस्ट किए हैं, जो ईरान से जुड़े हुए हैं। ट्रंप के पहले पोस्ट में ईरान के नक्शे पर उनकी खुद की फोटो लगी है। इससे कुछ ही दिन पहले उन्होंने सामरिक रूप से बेहद अहम 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' का नाम बदलकर "ट्रंप स्ट्रेट" रखने की बात भी कही थी।

होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई को लेकर दावा

ट्रंप ने होर्मुज ऑयल वॉल्यूम्स आर बैक शीर्षक वाला एक ग्राफिक पोस्ट किया है। इसमें ईरान और ओमान के बीच के संकरे जलमार्ग का नक्शा दिखाया गया। साथ ही ऐसे आंकड़े थे, जिनमें दावा किया गया था कि तेल की मात्रा बढ़कर 18 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गई है, जबकि टकराव से पहले यह 20 मिलियन बैरल प्रति दिन थी।

ईरानी अर्थव्यवस्था और मुद्रा में टूट का दावा

ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था और मुद्रा की बदहाली पर दो ग्राफिक्स शेयर किए हैं। एक में दिखाया है अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल 9 लाख (2025 की शुरुआत) से गिरकर 22.7 लाख से भी नीचे चला गया है। दूसरे ग्राफिक में संदेश दिया गया कि ईरान की करेंसी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।

खार्ग द्वीप को लेकर भी पोस्ट

ट्रंप ने इसके बाद खार्ग द्वीप को लेकर एक बेहद आक्रामक तस्वीर शेयर की। इसे बाय-बाय खर्ग शब्दों के साथ शेयर किया गया। AI-जनरेटेड ग्राफिक में एक लड़ाकू विमान को विस्फोटों और आग की लपटों से घिरे तेल संयंत्र की ओर तेजी से बढ़ते हुए दिखाया गया है। यह तस्वीर खार्ग द्वीप पर हमले की संभावना को दर्शाती है, जो ईरान का मुख्य कच्चा तेल निर्यात केंद्र है।

ईरान एक नाकाम देश बताया

अपनी आखिरी पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के नक्शे के साथ लिखा कि ईरान एक नाकाम देश बनता जा रहा है। अमेरिका-इजरायल ने इस साल 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद से ही दोनों पक्षों में लड़ाई चल रही है।

ट्रंप के बेटे के सिर पर ईरान ने रखा 95 करोड़ का इनाम, नेतन्याहू ने भी अपने बेटे को लेकर किया बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिकी संघर्ष के बीच यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को धमकी मिली है। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया के बेटे बैरन को मारने पर इनाम का ऐलान किया है। ईरान के सरकारी टेलिविजन पर प्रसारित एक वीडियो में बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीकों के बारे में बताया गया है। यही नहीं ट्रंप के बेटे के सिर पर 10 मिलियन डॉलर (95 करोड़ रुपए से ज्यादा) का इनाम भी रखा गया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की।

बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीके बताए

ईरानी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े मीडिया की ओर से जारी और ईरानी सरकारी टीवी के चैनल 3 पर दिखाए गए वीडियो में बताया गया है कि बैरन ट्रंप को कहां और कैसे मारें। इसमें 20 साल के बैरन की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई है। क्लिप में दावा किया गया है कि बैरन पर नजर रखी जा रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक लड़की सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा को चकमा देकर बैरन के बगल में बैठ गई थी। ऐसे में उस तक पहुंचा जा सकता है।

बैरन के ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े दावे भी किए गए

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सरकारी चैनल 3 पर टेलिकास्ट वीडियो का टाइटल Where to Kill Barron Trump है। इसमें बैरन ट्रंप की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी दिखाने का दावा किया गया। इसमें उनकी ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े कुछ दावे भी किए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया कि बैरोन ट्रंप अपने सुरक्षा घेरे से दूर Xbox पर वॉयस और टेक्स्ट के जरिए बातचीत करते हैं और Xbox, FIFA वीडियो गेम्स एवं डिस्कॉर्ड पर उनके अकाउंट का पता लगा लिया गया है।

ट्रंप की पत्नी मेलानिया को लेकर भी आया था वीडियो

यह पहली बार नहीं है, जब ईरानी स्टेट मीडिया से जुड़े किसी वीडियो में ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की बात सामने आई हो। पिछले महीने ईरान के सरकारी टेलीविजन ने एक ऐसा वीडियो जारी किया था, जिसमें खुले तौर पर अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को निशाना बनाया गया था। उस वीडियो में मेलानिया के सार्वजनिक कार्यक्रमों, यात्रा और न्यूयॉर्क में उनकी गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें दिखाई गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो के अंत में बैरन ट्रंप का भी जिक्र किया गया था।

नेतन्याहू का भी विस्फोटक दावा

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके एक बेटे की भी हत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ाई गई है। नेतन्याहू ने यह बात इजरायली टीवी चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में कही। पत्रकार नोआम अमीर से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान ने उनके एक बेटे को मारने की साजिश रची थी। हालांकि उन्होंने इसे लेकर ये साफ नहीं किया कि निशाना छोटे बेटे थे या बड़े बेटे। इसके बाद बैरन ट्रंप को दी गई पब्लिक थ्रेट ये साफ कर रही है कि ईरान एक मानसिक खेल खेल रहा है, ताकि दुश्मनों का हौसला तोड़ा जा सके.

ईरान-यूएस जंग में झुलसा चाबहार पोर्ट, जानें अमेरिकी हमले से क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

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अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर खत्म करने का ऐलान कर चुके हैं। ट्रंप के ईरान से सीजफायर खत्म होने का ऐलान करने के बाद लड़ाई तेज हो गई है। अमेरिका ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ईरान में हवाई हमले किए हैं। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी बमबारी की है। जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, ईरान के इस पोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के सहयोग से विकसित हुआ है।

90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले

अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।

चाबहार में विस्फोटों के बाद बिजली आपूर्ति बाधित

ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है।

हमले को लेकर अमेरिकी सेना ने क्या कहा?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।

भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय

यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। चाबहार में हमले से भारत के इस पोर्ट पर अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावना को जबरदस्त झटका लगा है। चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर है। यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के पश्चिम में सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है। ऐसे में चाबहार भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता देता है। ईरान-अमेरिका में शांति समझौते से भारत की चाबहार पोर्ट पर फिर से कामकाज की उम्मीद बंधी थी लेकिन नए हमलों ने चीजों को पटरी से उतार दिया है। हालांकि फिलहाल भारत चाबहार में सीधेतौर पर सक्रिय नहीं है।

अमेरिका का ईरान पर नया हमला, होर्मुज में 3 जहाजों पर हमले से गुस्से में यूएस

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पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है।

युद्धविराम के बाद नए सैन्य हमलों की शुरुआत

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुए युद्धविराम के बाद अमेरिकी सेना ने बुधवार तड़के ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की शुरुआत कर दी, साथ ही ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बिक्री के लिए दी गई अहम छूट भी रद्द कर दी।

होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमले से भड़का यूएस

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका ने ईरान के इस आक्रामक रवैये को अनुचित, खतरनाक और युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।

ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सैन्य कमान एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबकि, उनकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन लॉन्च साइट्स पर हमले किए हैं। अधिकारी ने कहा कि ईरान की बंदरगाह सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है।

तेल बेचने की छूट वापस ली

इन सैन्य हमलों से कुछ ही समय पहले अमेरिका ने ईरान को दी गई एक अस्थायी प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली। इस छूट के तहत ईरान को जून में हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर कच्चे तेल का उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति करने की अनुमति मिली हुई थी। यह छूट 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी, लेकिन अमेरिका ने इसे समय से पहले ही समाप्त कर दिया।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

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आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

यूएस-ईरान समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत, बोले-शांति और स्थिरता बहाली में मिलेगी मदद

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान हो गया है, जिससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिका-ईरान के बीच समझौते पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आई हैं। ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के नेताओं ने भी प्रतिक्रियाएं दीं है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए घोषित शांति समझौते का स्वागत किया है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर क्या बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कदम की प्रशंसा की है। पीएम मोदी ने सोमवार को एक्स पर लिखा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनियाभर में गंभीर आर्थिक अड़चन पैदा हुई और कई देशों में लोगों की जान गई। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी सुनिश्चित होगी।" इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि 'बाक़ी बचे मुद्दों पर भी' होने वाली बातचीत 'एक टिकाऊ और अंतिम समझौते' तक पहुंचेगी।

ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ पर पोस्ट कर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन चुकी है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे। इसमें अमेरिका से जेडी वेंस और ईरान से अराघची और गालिबफ शामिल होंगे। 60 दिनों के सीजफायर के दौरान समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी। इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फ्रीज फंड को रिलीज करने से लेकर परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। जब तक फाइनल समझौता लागू नहीं हो जाता, अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का एलान, जानें पीस डील की अहम बातें

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फारस की खाड़ी में जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा।

ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार की ओर से समझौते की पुष्टि कर दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "सभी को समझौते की बधाई देते हुए मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं।"

ईरान ने क्या कहा है

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि की है। गरीबाबादी ने कहा है कि डील हो गई है लेकिन शुक्रवार को हस्ताक्षर होने तक तेहरान इसे लागू करना शुरू नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता तेहरान में कतर के प्रतिनिधि के साथ 14 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के बाद हुआ है। पाकिस्तान के अलावा कतर एक और अहम मध्यस्थ है।

समझौते के बाद शहबाज शरीफ का पोस्ट

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।"

US-ईरान शांति डील में क्या-क्या शामिल है?

1- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना

2- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा

3- दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा

4- अमेरिका ने यह वादा किया है कि वह ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना हटा लेगा

5- ईरान की 'व्यवस्थाओं' के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा

6- तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और उनसे होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी

7- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के वास्ते कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करना जरूरी होगा।

8- परमाणु मुद्दों और अमेरिका के प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों, साथ ही UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को पूरी तरह से हटाने के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत।

9- NPT के तहत परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे को ईरान का फिर से दोहराना।

10- बातचीत के दौरान अमेरिका ने वादा किया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

11- अंतिम बातचीत की 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस राशि का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाएगा।

12- समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।

13- अंतिम समझौते को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।

14- अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी नहीं हो जाता ईरान पर तेल प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।अंतिम समझौता केवल संवर्धित यूरेनियम और संवर्धन, प्रतिबंधों से राहत और ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहोंको समर्थन देने के बारे में चर्चा को एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।

मिडिल ईस्ट में फिर बिगड़े हालात, ईरान ने इजराइल पर दागीं मिसाइलें

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पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इजरायल पर देर रात से ईरान और यमन की तरफ से हमले किए गए। यमन के बाद ईरान ने एक बार फिर इजरायल की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने इसकी जानकारी दी है।

यमन की ओर से इस्राइल पर दागी गई मिसाइल

इजराइल की सेना ने दावा किया है कि यमन की दिशा से उसकी सीमा की ओर एक मिसाइल दागी गई है। सेना के अनुसार मिसाइल का पता लगते ही रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और खतरे को रोकने के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम काम में लगाए गए। इजराइली सेना ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

बेरूत में इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार

ये ताजा संघर्ष तब शुरू हुआ जब लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए थे और उसके बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल में बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर दिए। ईरान के हमले के बाद इजरायल ने भी ईरान में कम से कम तीन जगहों पर हमले किए हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी हमला कर दिया है।

इस्फहान-तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज

जवाबी हमले के बाद इस्फहान, तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी है। इजराइल के मुताबिक ईरान ने सोमवार को उसके कई इलाकों की तरफ मिसाइलें दागीं। हाइफा और नाजरेथ को निशाना बनाए जाने की खबर है। इजराइली सेना ने कहा कि उसके रक्षा तंत्र ने खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई की और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इजराइली रक्षा बल (IDF) ने बताया कि देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाने के निर्देश दिए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।

फिर गूंजी सायरनों की आवाज

इजराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजाए गए। चैनल 12 की रिपोर्ट में कहा गया कि गुश दान, यरूशलम और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित हमले के खतरे को देखते हुए इस्राइल ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा प्रणाली पूरी तरह अलर्ट पर हैं। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ट्रंप तनाव रोकने में रहे नाकाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे। नेतन्याहू को उन्होंने फोन किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी। ट्रंप ने एक्सियोस से कहा, ‘मैं अभी बीबी को फोन कर रहा हूं और कह रहा हूं कि जवाबी हमला मत करो। दोनों अपना हमला कर चुके हैं। हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘ईरानी हमलों में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। उम्मीद है कि इजराइल पलटवार नहीं करेगा। अगर बीबी फिर हमला करते हैं तो यह सिलसिला अगले 47 साल या 3000 साल तक चलता रहेगा।’

भारत बना ईरान-यूएई के बीच 'मध्यस्थ', दिल्ली में ब्रिक्स समिट की अहम कामयाबी

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नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत ने उस वक्त बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की, जब पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर आमने-सामने खड़े ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक साझा ब्रिक्स घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच गंभीर मतभेद देख जा रहे हैं। युद्ध और लगातार बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सहमति बनना सिर्फ ब्रिक्स के लिए नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ईरान-यूएई को एक साथ लाना था चुनौती

ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की मई में हुई बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि संयुक्त बयान तक जारी नहीं हो पाया था। पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं और संघर्ष की व्याख्या अलग-अलग थी। ऐसे में दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि ऐसी भाषा तैयार की जाए, जिस पर ईरान और यूएई समेत ब्रिक्स के सभी सदस्य देश एक साथ खड़े हो सकें। अंतिम घोषणा में किसी एक देश को सीधे तौर पर युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर सामूहिक चिंता जताई गई। सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

ईरानी राष्ट्रपति और यूएई के क्राउन प्रिंस की मुलाकात

इसी बीच दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान एक अप्रत्याशित राजनयिक क्षण सामने आया। यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ब्रिक्स सिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, तनाव कम करने, स्थिरता और क्षेत्रीय शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण संपर्कों में से एक माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब क्षेत्रीय संघर्ष ने ईरान और खाड़ी देशों के रिश्तों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

भारत की भूमिका क्यों अहम?

नई दिल्ली के संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों के साथ गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, साथ ही ईरान के साथ भी उसके दीर्घकालिक संबंध बने हुए हैं। इसके अलावा, भारत के अमेरिका, रूस और इज़राइल के साथ भी घनिष्ठ साझेदारी है। इससे भारत को राजनयिक स्तर पर ऐसी पहुँच प्राप्त है जो कई अन्य देशों के पास नहीं है। चुनौती यह है कि उस पहुंच का उपयोग इस तरह से किया जाए कि ऐसा न लगे कि आप किसी का पक्ष ले रहे हैं। नई दिल्ली ने ईरान और अमेरिका या ईरान और अरब देशों के बीच औपचारिक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका नहीं निभाई है। इसके बजाय, उसने लगातार संवाद, कूटनीति, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार एवं नौवहन की वकालत की है। दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत का प्रस्ताव किसी बड़े शांति समझौते की मध्यस्थता करने से कम और राजनयिक चैनलों को खुला रखने से अधिक संबंधित है।

ईरान के नक्शे पर डोनाल्ड ट्रंप ने लगाई अपनी तस्वीर, अमेरिकी राष्ट्रपति के पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

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अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और पिकैक्स माउंटेन पर हमलों की धमकी के बाद डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के बारे में किए नए पोस्ट ने हलचल मची दी है। ट्रंप ने पश्चिम एशिया का नक्शा शेयर करते हुए ईरान के मैप को अपने सिर के आकार में दिखाया है। यानी एक तरह से उन्होंने ईरान पर कब्जे की धमकी दी है।

ईरान के नक्शे पर ट्रंप की फोटो

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक घंटे के अंदर 7 पोस्ट किए हैं, जो ईरान से जुड़े हुए हैं। ट्रंप के पहले पोस्ट में ईरान के नक्शे पर उनकी खुद की फोटो लगी है। इससे कुछ ही दिन पहले उन्होंने सामरिक रूप से बेहद अहम 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' का नाम बदलकर "ट्रंप स्ट्रेट" रखने की बात भी कही थी।

होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई को लेकर दावा

ट्रंप ने होर्मुज ऑयल वॉल्यूम्स आर बैक शीर्षक वाला एक ग्राफिक पोस्ट किया है। इसमें ईरान और ओमान के बीच के संकरे जलमार्ग का नक्शा दिखाया गया। साथ ही ऐसे आंकड़े थे, जिनमें दावा किया गया था कि तेल की मात्रा बढ़कर 18 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गई है, जबकि टकराव से पहले यह 20 मिलियन बैरल प्रति दिन थी।

ईरानी अर्थव्यवस्था और मुद्रा में टूट का दावा

ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था और मुद्रा की बदहाली पर दो ग्राफिक्स शेयर किए हैं। एक में दिखाया है अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल 9 लाख (2025 की शुरुआत) से गिरकर 22.7 लाख से भी नीचे चला गया है। दूसरे ग्राफिक में संदेश दिया गया कि ईरान की करेंसी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।

खार्ग द्वीप को लेकर भी पोस्ट

ट्रंप ने इसके बाद खार्ग द्वीप को लेकर एक बेहद आक्रामक तस्वीर शेयर की। इसे बाय-बाय खर्ग शब्दों के साथ शेयर किया गया। AI-जनरेटेड ग्राफिक में एक लड़ाकू विमान को विस्फोटों और आग की लपटों से घिरे तेल संयंत्र की ओर तेजी से बढ़ते हुए दिखाया गया है। यह तस्वीर खार्ग द्वीप पर हमले की संभावना को दर्शाती है, जो ईरान का मुख्य कच्चा तेल निर्यात केंद्र है।

ईरान एक नाकाम देश बताया

अपनी आखिरी पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के नक्शे के साथ लिखा कि ईरान एक नाकाम देश बनता जा रहा है। अमेरिका-इजरायल ने इस साल 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद से ही दोनों पक्षों में लड़ाई चल रही है।

ट्रंप के बेटे के सिर पर ईरान ने रखा 95 करोड़ का इनाम, नेतन्याहू ने भी अपने बेटे को लेकर किया बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिकी संघर्ष के बीच यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को धमकी मिली है। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया के बेटे बैरन को मारने पर इनाम का ऐलान किया है। ईरान के सरकारी टेलिविजन पर प्रसारित एक वीडियो में बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीकों के बारे में बताया गया है। यही नहीं ट्रंप के बेटे के सिर पर 10 मिलियन डॉलर (95 करोड़ रुपए से ज्यादा) का इनाम भी रखा गया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की।

बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीके बताए

ईरानी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े मीडिया की ओर से जारी और ईरानी सरकारी टीवी के चैनल 3 पर दिखाए गए वीडियो में बताया गया है कि बैरन ट्रंप को कहां और कैसे मारें। इसमें 20 साल के बैरन की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई है। क्लिप में दावा किया गया है कि बैरन पर नजर रखी जा रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक लड़की सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा को चकमा देकर बैरन के बगल में बैठ गई थी। ऐसे में उस तक पहुंचा जा सकता है।

बैरन के ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े दावे भी किए गए

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सरकारी चैनल 3 पर टेलिकास्ट वीडियो का टाइटल Where to Kill Barron Trump है। इसमें बैरन ट्रंप की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी दिखाने का दावा किया गया। इसमें उनकी ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े कुछ दावे भी किए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया कि बैरोन ट्रंप अपने सुरक्षा घेरे से दूर Xbox पर वॉयस और टेक्स्ट के जरिए बातचीत करते हैं और Xbox, FIFA वीडियो गेम्स एवं डिस्कॉर्ड पर उनके अकाउंट का पता लगा लिया गया है।

ट्रंप की पत्नी मेलानिया को लेकर भी आया था वीडियो

यह पहली बार नहीं है, जब ईरानी स्टेट मीडिया से जुड़े किसी वीडियो में ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की बात सामने आई हो। पिछले महीने ईरान के सरकारी टेलीविजन ने एक ऐसा वीडियो जारी किया था, जिसमें खुले तौर पर अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को निशाना बनाया गया था। उस वीडियो में मेलानिया के सार्वजनिक कार्यक्रमों, यात्रा और न्यूयॉर्क में उनकी गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें दिखाई गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो के अंत में बैरन ट्रंप का भी जिक्र किया गया था।

नेतन्याहू का भी विस्फोटक दावा

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके एक बेटे की भी हत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ाई गई है। नेतन्याहू ने यह बात इजरायली टीवी चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में कही। पत्रकार नोआम अमीर से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान ने उनके एक बेटे को मारने की साजिश रची थी। हालांकि उन्होंने इसे लेकर ये साफ नहीं किया कि निशाना छोटे बेटे थे या बड़े बेटे। इसके बाद बैरन ट्रंप को दी गई पब्लिक थ्रेट ये साफ कर रही है कि ईरान एक मानसिक खेल खेल रहा है, ताकि दुश्मनों का हौसला तोड़ा जा सके.

ईरान-यूएस जंग में झुलसा चाबहार पोर्ट, जानें अमेरिकी हमले से क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

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अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर खत्म करने का ऐलान कर चुके हैं। ट्रंप के ईरान से सीजफायर खत्म होने का ऐलान करने के बाद लड़ाई तेज हो गई है। अमेरिका ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ईरान में हवाई हमले किए हैं। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी बमबारी की है। जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, ईरान के इस पोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के सहयोग से विकसित हुआ है।

90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले

अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।

चाबहार में विस्फोटों के बाद बिजली आपूर्ति बाधित

ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है।

हमले को लेकर अमेरिकी सेना ने क्या कहा?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।

भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय

यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। चाबहार में हमले से भारत के इस पोर्ट पर अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावना को जबरदस्त झटका लगा है। चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर है। यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के पश्चिम में सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है। ऐसे में चाबहार भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता देता है। ईरान-अमेरिका में शांति समझौते से भारत की चाबहार पोर्ट पर फिर से कामकाज की उम्मीद बंधी थी लेकिन नए हमलों ने चीजों को पटरी से उतार दिया है। हालांकि फिलहाल भारत चाबहार में सीधेतौर पर सक्रिय नहीं है।

अमेरिका का ईरान पर नया हमला, होर्मुज में 3 जहाजों पर हमले से गुस्से में यूएस

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पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है।

युद्धविराम के बाद नए सैन्य हमलों की शुरुआत

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुए युद्धविराम के बाद अमेरिकी सेना ने बुधवार तड़के ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की शुरुआत कर दी, साथ ही ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बिक्री के लिए दी गई अहम छूट भी रद्द कर दी।

होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमले से भड़का यूएस

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका ने ईरान के इस आक्रामक रवैये को अनुचित, खतरनाक और युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।

ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सैन्य कमान एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबकि, उनकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन लॉन्च साइट्स पर हमले किए हैं। अधिकारी ने कहा कि ईरान की बंदरगाह सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है।

तेल बेचने की छूट वापस ली

इन सैन्य हमलों से कुछ ही समय पहले अमेरिका ने ईरान को दी गई एक अस्थायी प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली। इस छूट के तहत ईरान को जून में हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर कच्चे तेल का उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति करने की अनुमति मिली हुई थी। यह छूट 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी, लेकिन अमेरिका ने इसे समय से पहले ही समाप्त कर दिया।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

#middleeastamericairandeal14points_mou

आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

यूएस-ईरान समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत, बोले-शांति और स्थिरता बहाली में मिलेगी मदद

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान हो गया है, जिससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिका-ईरान के बीच समझौते पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आई हैं। ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के नेताओं ने भी प्रतिक्रियाएं दीं है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए घोषित शांति समझौते का स्वागत किया है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर क्या बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कदम की प्रशंसा की है। पीएम मोदी ने सोमवार को एक्स पर लिखा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनियाभर में गंभीर आर्थिक अड़चन पैदा हुई और कई देशों में लोगों की जान गई। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी सुनिश्चित होगी।" इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि 'बाक़ी बचे मुद्दों पर भी' होने वाली बातचीत 'एक टिकाऊ और अंतिम समझौते' तक पहुंचेगी।

ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ पर पोस्ट कर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन चुकी है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे। इसमें अमेरिका से जेडी वेंस और ईरान से अराघची और गालिबफ शामिल होंगे। 60 दिनों के सीजफायर के दौरान समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी। इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फ्रीज फंड को रिलीज करने से लेकर परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। जब तक फाइनल समझौता लागू नहीं हो जाता, अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का एलान, जानें पीस डील की अहम बातें

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फारस की खाड़ी में जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा।

ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार की ओर से समझौते की पुष्टि कर दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "सभी को समझौते की बधाई देते हुए मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं।"

ईरान ने क्या कहा है

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि की है। गरीबाबादी ने कहा है कि डील हो गई है लेकिन शुक्रवार को हस्ताक्षर होने तक तेहरान इसे लागू करना शुरू नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता तेहरान में कतर के प्रतिनिधि के साथ 14 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के बाद हुआ है। पाकिस्तान के अलावा कतर एक और अहम मध्यस्थ है।

समझौते के बाद शहबाज शरीफ का पोस्ट

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।"

US-ईरान शांति डील में क्या-क्या शामिल है?

1- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना

2- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा

3- दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा

4- अमेरिका ने यह वादा किया है कि वह ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना हटा लेगा

5- ईरान की 'व्यवस्थाओं' के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा

6- तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और उनसे होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी

7- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के वास्ते कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करना जरूरी होगा।

8- परमाणु मुद्दों और अमेरिका के प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों, साथ ही UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को पूरी तरह से हटाने के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत।

9- NPT के तहत परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे को ईरान का फिर से दोहराना।

10- बातचीत के दौरान अमेरिका ने वादा किया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

11- अंतिम बातचीत की 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस राशि का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाएगा।

12- समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।

13- अंतिम समझौते को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।

14- अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी नहीं हो जाता ईरान पर तेल प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।अंतिम समझौता केवल संवर्धित यूरेनियम और संवर्धन, प्रतिबंधों से राहत और ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहोंको समर्थन देने के बारे में चर्चा को एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।

मिडिल ईस्ट में फिर बिगड़े हालात, ईरान ने इजराइल पर दागीं मिसाइलें

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पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इजरायल पर देर रात से ईरान और यमन की तरफ से हमले किए गए। यमन के बाद ईरान ने एक बार फिर इजरायल की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने इसकी जानकारी दी है।

यमन की ओर से इस्राइल पर दागी गई मिसाइल

इजराइल की सेना ने दावा किया है कि यमन की दिशा से उसकी सीमा की ओर एक मिसाइल दागी गई है। सेना के अनुसार मिसाइल का पता लगते ही रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और खतरे को रोकने के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम काम में लगाए गए। इजराइली सेना ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

बेरूत में इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार

ये ताजा संघर्ष तब शुरू हुआ जब लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए थे और उसके बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल में बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर दिए। ईरान के हमले के बाद इजरायल ने भी ईरान में कम से कम तीन जगहों पर हमले किए हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी हमला कर दिया है।

इस्फहान-तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज

जवाबी हमले के बाद इस्फहान, तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी है। इजराइल के मुताबिक ईरान ने सोमवार को उसके कई इलाकों की तरफ मिसाइलें दागीं। हाइफा और नाजरेथ को निशाना बनाए जाने की खबर है। इजराइली सेना ने कहा कि उसके रक्षा तंत्र ने खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई की और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इजराइली रक्षा बल (IDF) ने बताया कि देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाने के निर्देश दिए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।

फिर गूंजी सायरनों की आवाज

इजराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजाए गए। चैनल 12 की रिपोर्ट में कहा गया कि गुश दान, यरूशलम और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित हमले के खतरे को देखते हुए इस्राइल ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा प्रणाली पूरी तरह अलर्ट पर हैं। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ट्रंप तनाव रोकने में रहे नाकाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे। नेतन्याहू को उन्होंने फोन किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी। ट्रंप ने एक्सियोस से कहा, ‘मैं अभी बीबी को फोन कर रहा हूं और कह रहा हूं कि जवाबी हमला मत करो। दोनों अपना हमला कर चुके हैं। हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘ईरानी हमलों में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। उम्मीद है कि इजराइल पलटवार नहीं करेगा। अगर बीबी फिर हमला करते हैं तो यह सिलसिला अगले 47 साल या 3000 साल तक चलता रहेगा।’