ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।

रूस के बाद अब ईरानी तेल से हटा प्रतिबंध, क्या है जंग के बीच ट्रंप के यू-टर्न की वजह

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते तेल संकट और आसमान छूती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिका ने रूस के बाद ईरान के तेल पर लगे दीर्घकालिक प्रतिबंधों को अगले एक महीने के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया है।

140 मिलियन बैरल तेल होगा उपलब्ध

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्येश्य मौजूदा आपूर्ति को जारी करके बाजारों को तेजी से स्थिर करना है। बेसेंट ने लिखा, दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से जारी करके अमेरका वैश्विक बाजारों में लगभग 140 मिलियन बैरल तेल तेजी से उपलब्ध कराएगा। यह छूट उस ईरानी तेल पर लागू होगी जो पहले से ही जहाज पर लदकर समुद्र में फंसा हुआ है।

दुनियाभर में गहरा रहा ऊर्जा संकट

अमेरिका और इजराइल के हमलों से उसके परमाणु, सैन्य या ऊर्जा ठिकानों को कितना नुकसान हुआ है। ये हमले 28 फरवरी से जारी हैं। ईरान के हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा दिया था। मुद्रास्फीति और शेयर बाजार में भारी गिरावट को रोकने की उम्मीद में ट्रंप प्रशासन ने यह सामान्य लाइसेंस जारी किया है।

रूस को मिली थी ऐसी ही छूट

इसके पहले ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर भी इसी तरह की छूट दी थी, जिसमें समुद्र में मौजूद रूसी तेल शिपमेंट की खरीद पर 30 दिनों की छूट दी गई थी।। बेसेंट ने बताया कि प्रशासन ने पहले ही बाजार में 44 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल लाने के लिए काम कर रहा है। इसके होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डालकर फायदा उठाने की ईरान की क्षमता कमजोर हुई है। बेसेंट ने ईरान को ग्लोबल आतंकवाद का सरगना बताया और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई को उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से जीत रहा है।

खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

इजराइली हमले में मारे गए अली लारिजानी, कमांडर सुलेमानी की भी मौत

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ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब 19वें दिन में पहुंच गया है और संकट और भी ज्यादा गहरा गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के 18वें दिन इजरायल ने तेहरान में जो कार्रवाई की, उसमें ईरान के दो सबसे वरिष्ठ लीडर भी मारे गए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के करीबी अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंगलवार को अली लारीजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। लारीजानी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और कहा जाता था कि पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के बाद पर्दे के पीछे से वही ईरान को चला रहे थे। इसके पहले इजरायल ने कहा था कि उसने अली लारीजानी को एक हमले में मार दिया है।

खामेनेई की मौत के बाद थी अहम भूमिका

लारीजानी को ईरान के सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है, खासकर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी। लारीजानी पूर्व में संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार भी रह चुके थे। परमाणु वार्ता में भी उनकी भूमिका रही थी। जनरल सुलेमानी पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए गए थे, क्योंकि उन पर वर्षों से विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाने का आरोप था।

अली लारीजानी के साथ उनके बेटे की भी मौत

ईरान के सरकारी टीवी और सुरक्षा परिषद के अनुसार अली लारीजानी की उनके बेटे मोर्तेजा और एक सहयोगी के साथ हत्या कर दी गई। ईरान के कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इससे सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह संस्थाओं पर आधारित है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लारिजानी की जगह कौन लेगा, क्या सईद जलीली या फिर नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कोई नई नियुक्ति करेंगे।

इजरायल ने किया मारे जाने का दावा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सबसे पहले लारीजानी के मारे जाने का ऐलान किया था। इजरायली सेना ने बताया कि सोमवार देर रात हुए हवाई हमले में अली लारीजानी और ईरान की एलीट बासिज फोर्स के कमांडर को मार दिया गया। मंगलवार शाम के इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी लारीजानी के मारे जाने घोषणा करते हुए कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान के नेतृत्व कमजोर करना था, ताकि ईरानी लोगों को उसे हटाने का मौका मिल सके।

गुलाम रज़ा सुलेमानी की भी मौत

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पुष्टि की है कि बसिज संगठन के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी भी इजराइली हमले में मारे गए। गोलम रजा सुलेमानी आईआरजीसी के एक उच्च पदस्थ कमांडर थे। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के पहले दिन कमांडर-इन-चीफ समेत कई सैन्य कमांडरों की मौत के बाद, सुलेमानी की मौत युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में से एक है। बसिज, जो कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक संगठनात्मक सहायक संस्था है, ईरानी सरकार की सुरक्षा शाखाओं में से एक है और आंतरिक संकटों के प्रबंधन और विरोध प्रदर्शनों को दबाने और नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका', रूसी तेल खरीद को लेकर ईरान के मंत्री का बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य मोर्चे पर तो लड़ाई जारी है, जुबानी जंग भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन, भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा हैष वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान युद्ध रूस की ऑयल इंडस्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना

अरगची ने अपनी पोस्ट में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान पर 'अवैध युद्ध' का साथ देकर सोचा था कि अमेरिका उसके बदले रूस के खिलाफ उनका साथ देगा, लेकिन अब वे निराश हैं। मंत्री ने लिखा, 'यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से अमेरिका रूस के खिलाफ उसकी मदद करेगा। यह बहुत दयनीय है।'

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने दी छूट

अराघची की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगा प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वित्त विभाग ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की मंजूरी देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यह मंजूरी केवल उस रूसी तेल के लिए होगी जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है। अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी।

भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

*दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, एक भारतीय समेत 4 लोग घायल

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुबई से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (डीएक्सबी) के पास दो ड्रोन गिराए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना में एक भारतीय नागरिक सहित कुल चार लोग घायल हो गए।

दुबई मीडिया ऑफिस ने एक्स पर एक बयान में कहा, "दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अधिकारियों ने दो ड्रोन रोके, जिसमें एक भारतीय नागरिक समेत चार लोग घायल हो गए। इसमें आगे कहा गया, “एयर ट्रैफिक नॉर्मल तरीके से चल रहा है।"

दुबई एयरपोर्ट के नजदीक पहले भी हुआ हमला

अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि ड्रोन ईरान से आए थे या किसी और वजह से गिरे, लेकिन जंग के चलते इलाके में ईरानी ड्रोन और मिसाइल अटैक्स की वजह से सिक्योरिटी अलर्ट बहुत हाई है। यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने पिछले कुछ घंटों में कई ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। दरअसल, ईरान ने पहले भी दुबई एयरपोर्ट के नजदीक हमले किए थे। इसके अलावा शहर के रिहायशी इलाकों में हमले हुए थे।

ईरान ने गल्फ देशों में काउंटर अटैक्स

ये घटना ऐसे समय पर हुई है जब ईरान ने गल्फ देशों यानी यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और कुवैत पर काउंटर अटैक्स तेज कर दिए हैं। अबू धाबी के रुवैस रिफाइनरी में भी ड्रोन हमले से आग लगी थी और उसे बंद करना पड़ा था। ईरान ने अपने इलाके में यूएस और इजरायल के हमलों का जवाब यूनाइटेड अरब अमीरात, बहरीन, कतर और दूसरे खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार करके दिया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ है और तेल प्रोडक्शन में रुकावट आई है।

यूएई में भारतीयों के लिए एडवाइजरी

भारत सरकार ने यूएई में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। दुबई और अबू धाबी में रहने वाले भारतीयों को अलर्ट रहने और लोकल अथॉरिटीज के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। अगर कोई भारतीय नागरिक प्रभावित हुआ है, तो भारतीय दूतावास दुबई (+971-4-3971222) या अबू धाबी (+971-2-4492700) से संपर्क करें।

ईरान के नेताओं से संपर्क करना काफी मुश्किल', भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर, मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले जयशंकर

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ईरान पर इजरायल और अमेरिका का हमला होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर बने हुए हैं। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में भारतीय भी हैं। ऐसे में संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन पश्चिम एशिया का मुद्दा उठा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को उठाया। इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब दिया।

प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर

विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है।

अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट

सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाने के लिए उड़ानों को मंजूरी दे दी है और उन्हें संचालित भी किया है, जिसके तहत लगभग 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं।आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा। इस क्षेत्र में भारतीय एंबेसी लगातार लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही है।

संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता*

जयशंकर ने कहा, हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

कन्नौज में पेट्रोल खत्म होने की अफवाह पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस
पंकज कुमार श्रीवास्तव

कन्नौज में पेट्रोल खत्म होने की फैल रही अफवाहों को लेकर यूपीटी पर्यटन आवास गृह में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय द्विवेदी ने साफ कहा कि पेट्रोल और डीजल की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।
उन्होंने कहा कि देश में Iran और United States के बीच चल रहे तनाव को लेकर कुछ जगहों पर पेट्रोल खत्म होने की गलत खबरें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोग घबराकर पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा रहे हैं।

विजय द्विवेदी ने बताया कि कन्नौज समेत पूरे प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य है। सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई लगातार जारी है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल खरीदें, ताकि अनावश्यक भीड़ और परेशानी से बचा जा सके।
यूएस हमले में डूबा 'आइरिस डेना', ईरान ने चेताया, कहा-भारतीय नौसेना का मेहमान था, पछताएगा अमेरिका

#iranisraelwaririsdenafrigateshrunk

अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई अब एक बेहद खतरनाक और खूनी मोड़ पर पहुंच गई है। हवा में छिड़ी जंग अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच गई है। युद्ध का दायरा मिडिल ईस्ट की हदों से बाहर पहुंचता जा रहा है। इस बीच हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है।

श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास हमला

अमेरिका की एक पनडुब्बी ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के ईरानी युद्धपोत 'आइरिस डेना' पर अचानक टॉरपीडो से हमला कर दिया और उसे समंदर में डुबो दिया। इस विनाशकारी हमले में जहाज पर सवार कम से कम 87 ईरानी नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई है। ये हमला उस वक्त हुआ जब, ईरानी युद्धपोत 'आइरिस डेना' श्रीलंका के दक्षिणी तट से गुजर रहा था।

श्रीलंकाई नौसेना ने बताया-जहाज से मदद के लिए संदेश आया

श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह हमला पनडुब्बी से छोड़े गए टॉरपीडो से किया गया। गुरुवार सुबह लगभग 5 बजकर 08 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट के बीच जहाज से मदद के लिए संदेश भेजा गया। संदेश में बताया गया कि समुद्र के अंदर एक बड़ा विस्फोट हुआ, जिससे जहाज को भारी नुकसान हुआ और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही मिनटों में जहाज रडार से गायब हो गया और डूब गया।

अमेरिकी सेना ने जारी किया हमले का वीडियो

यह अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के दौरान गहरे समुद्र में हुई पहली बड़ी नौसैनिक घटना मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध अब भारत के समुद्री क्षेत्र के आसपास भी फैल सकता है। अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आइरिस डेना पर हुए हमले का वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में विध्वसंक जहाज आइरिस डेना को अमेरिकी सेना ने पलक झपकते नेस्तनाबूद कर दिया।

ईरान हुआ आगबबूला

इस हमले के बाद ईरान आगबबूला हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा, "अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारतीय नौसेना के अतिथि रहे फ्रिगेट 'देना' पर बिना किसी चेतावनी के हमला हुआ।" उन्होंने बताया कि यह जहाज हाल ही में भारत की नौसेना के कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहा था और इसमें करीब 130 नाविक सवार थे। अराघची ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई का अमेरिका को "कड़ा परिणाम भुगतना पड़ेगा।"

ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।

रूस के बाद अब ईरानी तेल से हटा प्रतिबंध, क्या है जंग के बीच ट्रंप के यू-टर्न की वजह

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते तेल संकट और आसमान छूती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिका ने रूस के बाद ईरान के तेल पर लगे दीर्घकालिक प्रतिबंधों को अगले एक महीने के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया है।

140 मिलियन बैरल तेल होगा उपलब्ध

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्येश्य मौजूदा आपूर्ति को जारी करके बाजारों को तेजी से स्थिर करना है। बेसेंट ने लिखा, दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से जारी करके अमेरका वैश्विक बाजारों में लगभग 140 मिलियन बैरल तेल तेजी से उपलब्ध कराएगा। यह छूट उस ईरानी तेल पर लागू होगी जो पहले से ही जहाज पर लदकर समुद्र में फंसा हुआ है।

दुनियाभर में गहरा रहा ऊर्जा संकट

अमेरिका और इजराइल के हमलों से उसके परमाणु, सैन्य या ऊर्जा ठिकानों को कितना नुकसान हुआ है। ये हमले 28 फरवरी से जारी हैं। ईरान के हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा दिया था। मुद्रास्फीति और शेयर बाजार में भारी गिरावट को रोकने की उम्मीद में ट्रंप प्रशासन ने यह सामान्य लाइसेंस जारी किया है।

रूस को मिली थी ऐसी ही छूट

इसके पहले ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर भी इसी तरह की छूट दी थी, जिसमें समुद्र में मौजूद रूसी तेल शिपमेंट की खरीद पर 30 दिनों की छूट दी गई थी।। बेसेंट ने बताया कि प्रशासन ने पहले ही बाजार में 44 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल लाने के लिए काम कर रहा है। इसके होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डालकर फायदा उठाने की ईरान की क्षमता कमजोर हुई है। बेसेंट ने ईरान को ग्लोबल आतंकवाद का सरगना बताया और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई को उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से जीत रहा है।

खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

इजराइली हमले में मारे गए अली लारिजानी, कमांडर सुलेमानी की भी मौत

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ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब 19वें दिन में पहुंच गया है और संकट और भी ज्यादा गहरा गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के 18वें दिन इजरायल ने तेहरान में जो कार्रवाई की, उसमें ईरान के दो सबसे वरिष्ठ लीडर भी मारे गए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के करीबी अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंगलवार को अली लारीजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। लारीजानी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और कहा जाता था कि पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के बाद पर्दे के पीछे से वही ईरान को चला रहे थे। इसके पहले इजरायल ने कहा था कि उसने अली लारीजानी को एक हमले में मार दिया है।

खामेनेई की मौत के बाद थी अहम भूमिका

लारीजानी को ईरान के सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है, खासकर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी। लारीजानी पूर्व में संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार भी रह चुके थे। परमाणु वार्ता में भी उनकी भूमिका रही थी। जनरल सुलेमानी पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए गए थे, क्योंकि उन पर वर्षों से विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाने का आरोप था।

अली लारीजानी के साथ उनके बेटे की भी मौत

ईरान के सरकारी टीवी और सुरक्षा परिषद के अनुसार अली लारीजानी की उनके बेटे मोर्तेजा और एक सहयोगी के साथ हत्या कर दी गई। ईरान के कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इससे सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह संस्थाओं पर आधारित है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लारिजानी की जगह कौन लेगा, क्या सईद जलीली या फिर नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कोई नई नियुक्ति करेंगे।

इजरायल ने किया मारे जाने का दावा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सबसे पहले लारीजानी के मारे जाने का ऐलान किया था। इजरायली सेना ने बताया कि सोमवार देर रात हुए हवाई हमले में अली लारीजानी और ईरान की एलीट बासिज फोर्स के कमांडर को मार दिया गया। मंगलवार शाम के इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी लारीजानी के मारे जाने घोषणा करते हुए कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान के नेतृत्व कमजोर करना था, ताकि ईरानी लोगों को उसे हटाने का मौका मिल सके।

गुलाम रज़ा सुलेमानी की भी मौत

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पुष्टि की है कि बसिज संगठन के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी भी इजराइली हमले में मारे गए। गोलम रजा सुलेमानी आईआरजीसी के एक उच्च पदस्थ कमांडर थे। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के पहले दिन कमांडर-इन-चीफ समेत कई सैन्य कमांडरों की मौत के बाद, सुलेमानी की मौत युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में से एक है। बसिज, जो कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक संगठनात्मक सहायक संस्था है, ईरानी सरकार की सुरक्षा शाखाओं में से एक है और आंतरिक संकटों के प्रबंधन और विरोध प्रदर्शनों को दबाने और नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका', रूसी तेल खरीद को लेकर ईरान के मंत्री का बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य मोर्चे पर तो लड़ाई जारी है, जुबानी जंग भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन, भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा हैष वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान युद्ध रूस की ऑयल इंडस्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना

अरगची ने अपनी पोस्ट में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान पर 'अवैध युद्ध' का साथ देकर सोचा था कि अमेरिका उसके बदले रूस के खिलाफ उनका साथ देगा, लेकिन अब वे निराश हैं। मंत्री ने लिखा, 'यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से अमेरिका रूस के खिलाफ उसकी मदद करेगा। यह बहुत दयनीय है।'

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने दी छूट

अराघची की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगा प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वित्त विभाग ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की मंजूरी देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यह मंजूरी केवल उस रूसी तेल के लिए होगी जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है। अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी।

भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

*दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, एक भारतीय समेत 4 लोग घायल

#middleeastiranattackeddubaiinternationalairport

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुबई से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (डीएक्सबी) के पास दो ड्रोन गिराए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना में एक भारतीय नागरिक सहित कुल चार लोग घायल हो गए।

दुबई मीडिया ऑफिस ने एक्स पर एक बयान में कहा, "दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अधिकारियों ने दो ड्रोन रोके, जिसमें एक भारतीय नागरिक समेत चार लोग घायल हो गए। इसमें आगे कहा गया, “एयर ट्रैफिक नॉर्मल तरीके से चल रहा है।"

दुबई एयरपोर्ट के नजदीक पहले भी हुआ हमला

अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि ड्रोन ईरान से आए थे या किसी और वजह से गिरे, लेकिन जंग के चलते इलाके में ईरानी ड्रोन और मिसाइल अटैक्स की वजह से सिक्योरिटी अलर्ट बहुत हाई है। यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने पिछले कुछ घंटों में कई ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। दरअसल, ईरान ने पहले भी दुबई एयरपोर्ट के नजदीक हमले किए थे। इसके अलावा शहर के रिहायशी इलाकों में हमले हुए थे।

ईरान ने गल्फ देशों में काउंटर अटैक्स

ये घटना ऐसे समय पर हुई है जब ईरान ने गल्फ देशों यानी यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और कुवैत पर काउंटर अटैक्स तेज कर दिए हैं। अबू धाबी के रुवैस रिफाइनरी में भी ड्रोन हमले से आग लगी थी और उसे बंद करना पड़ा था। ईरान ने अपने इलाके में यूएस और इजरायल के हमलों का जवाब यूनाइटेड अरब अमीरात, बहरीन, कतर और दूसरे खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार करके दिया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ है और तेल प्रोडक्शन में रुकावट आई है।

यूएई में भारतीयों के लिए एडवाइजरी

भारत सरकार ने यूएई में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। दुबई और अबू धाबी में रहने वाले भारतीयों को अलर्ट रहने और लोकल अथॉरिटीज के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। अगर कोई भारतीय नागरिक प्रभावित हुआ है, तो भारतीय दूतावास दुबई (+971-4-3971222) या अबू धाबी (+971-2-4492700) से संपर्क करें।

ईरान के नेताओं से संपर्क करना काफी मुश्किल', भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर, मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले जयशंकर

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ईरान पर इजरायल और अमेरिका का हमला होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर बने हुए हैं। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में भारतीय भी हैं। ऐसे में संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन पश्चिम एशिया का मुद्दा उठा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को उठाया। इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब दिया।

प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर

विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है।

अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट

सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाने के लिए उड़ानों को मंजूरी दे दी है और उन्हें संचालित भी किया है, जिसके तहत लगभग 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं।आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा। इस क्षेत्र में भारतीय एंबेसी लगातार लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही है।

संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता*

जयशंकर ने कहा, हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

कन्नौज में पेट्रोल खत्म होने की अफवाह पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस
पंकज कुमार श्रीवास्तव

कन्नौज में पेट्रोल खत्म होने की फैल रही अफवाहों को लेकर यूपीटी पर्यटन आवास गृह में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय द्विवेदी ने साफ कहा कि पेट्रोल और डीजल की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।
उन्होंने कहा कि देश में Iran और United States के बीच चल रहे तनाव को लेकर कुछ जगहों पर पेट्रोल खत्म होने की गलत खबरें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोग घबराकर पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा रहे हैं।

विजय द्विवेदी ने बताया कि कन्नौज समेत पूरे प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य है। सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई लगातार जारी है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल खरीदें, ताकि अनावश्यक भीड़ और परेशानी से बचा जा सके।
यूएस हमले में डूबा 'आइरिस डेना', ईरान ने चेताया, कहा-भारतीय नौसेना का मेहमान था, पछताएगा अमेरिका

#iranisraelwaririsdenafrigateshrunk

अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई अब एक बेहद खतरनाक और खूनी मोड़ पर पहुंच गई है। हवा में छिड़ी जंग अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच गई है। युद्ध का दायरा मिडिल ईस्ट की हदों से बाहर पहुंचता जा रहा है। इस बीच हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है।

श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास हमला

अमेरिका की एक पनडुब्बी ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के ईरानी युद्धपोत 'आइरिस डेना' पर अचानक टॉरपीडो से हमला कर दिया और उसे समंदर में डुबो दिया। इस विनाशकारी हमले में जहाज पर सवार कम से कम 87 ईरानी नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई है। ये हमला उस वक्त हुआ जब, ईरानी युद्धपोत 'आइरिस डेना' श्रीलंका के दक्षिणी तट से गुजर रहा था।

श्रीलंकाई नौसेना ने बताया-जहाज से मदद के लिए संदेश आया

श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह हमला पनडुब्बी से छोड़े गए टॉरपीडो से किया गया। गुरुवार सुबह लगभग 5 बजकर 08 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट के बीच जहाज से मदद के लिए संदेश भेजा गया। संदेश में बताया गया कि समुद्र के अंदर एक बड़ा विस्फोट हुआ, जिससे जहाज को भारी नुकसान हुआ और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही मिनटों में जहाज रडार से गायब हो गया और डूब गया।

अमेरिकी सेना ने जारी किया हमले का वीडियो

यह अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के दौरान गहरे समुद्र में हुई पहली बड़ी नौसैनिक घटना मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध अब भारत के समुद्री क्षेत्र के आसपास भी फैल सकता है। अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आइरिस डेना पर हुए हमले का वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में विध्वसंक जहाज आइरिस डेना को अमेरिकी सेना ने पलक झपकते नेस्तनाबूद कर दिया।

ईरान हुआ आगबबूला

इस हमले के बाद ईरान आगबबूला हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा, "अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारतीय नौसेना के अतिथि रहे फ्रिगेट 'देना' पर बिना किसी चेतावनी के हमला हुआ।" उन्होंने बताया कि यह जहाज हाल ही में भारत की नौसेना के कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहा था और इसमें करीब 130 नाविक सवार थे। अराघची ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई का अमेरिका को "कड़ा परिणाम भुगतना पड़ेगा।"