ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक: मस्क की सरकारी भूमिका, बजट कटौती और विदेश नीति पर अहम फैसले
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AP
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नए कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की, जिसमें कई महत्वपूर्ण और असामान्य फैसले सामने आए। इस बैठक में सबसे खास बात यह थी कि टेस्ला के CEO और "सरकारी दक्षता विभाग" (DOGE) के सह-अध्यक्ष एलन मस्क का शामिल होना। मस्क की उपस्थिति ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली को दर्शाती है, जिसमें वह सरकारी सुधारों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। बैठक में मस्क ने कई अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए, जिनमें सरकारी खर्चों में कटौती, बड़े पैमाने पर छंटनी और विदेश नीति से जुड़े फैसले शामिल थे।
1. एलन मस्क की सरकारी दक्षता में भूमिका
एलन मस्क ने अपनी भूमिका को "विनम्र तकनीकी सहायता" के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्चों में कटौती करना और दक्षता बढ़ाना है। मस्क ने चेतावनी दी कि अगर यह प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका दिवालिया हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे यूएसएआईडी द्वारा इबोला रोकथाम अनुदान गलती से रद्द कर दिया गया था, लेकिन बाद में इसे बहाल कर दिया गया।
2. बड़े पैमाने पर छंटनी और बजट में कटौती
ट्रंप प्रशासन ने संघीय सरकार के आकार को छोटा करने के लिए बड़ी छंटनी की योजना बनाई है। ट्रंप ने कहा कि संघीय एजेंसियों को कर्मचारियों की संख्या में "काफी कमी" करने के लिए 13 मार्च तक योजनाएं प्रस्तुत करनी होंगी। मस्क ने बताया कि इस साल के $6.7 ट्रिलियन के बजट में $1 ट्रिलियन की कटौती की जा सकती है। यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय ऋण को कम करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास हो सकता है।
3. मस्क की कार्य रिपोर्ट की मांग और विवाद
एलन मस्क ने संघीय कर्मचारियों से साप्ताहिक कार्य रिपोर्ट भेजने को कहा, जिसमें कर्मचारियों से यह बताया गया था कि उन्होंने सप्ताह में क्या हासिल किया। मस्क ने समय सीमा के भीतर रिपोर्ट न भेजने पर बर्खास्तगी की धमकी दी, जिससे कई संघीय एजेंसियों में असहमति हुई। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने बाद में इस आदेश को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया। मस्क ने अपनी इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए था कि सरकारी भुगतान सही कर्मचारियों तक पहुंच रहा है।
4. "गोल्ड कार्ड" वीजा कार्यक्रम का प्रस्ताव
ट्रंप ने एक नया "गोल्ड कार्ड" वीजा कार्यक्रम पेश किया, जो पुराने EB-5 वीजा कार्यक्रम की जगह लेगा। ट्रंप का मानना है कि इस योजना से $5 ट्रिलियन तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है यदि एक मिलियन गोल्ड कार्ड बेचे जाते हैं। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि यह कार्यक्रम अमीर निवेशकों को आकर्षित करेगा, जो अमेरिका में पूंजी निवेश करेंगे और नौकरी सृजन में मदद करेंगे। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम को कांग्रस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
5. कनाडा और मेक्सिको पर 25% टैरिफ
ट्रंप ने घोषणा की कि 2 अप्रैल से कनाडा और मेक्सिको पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा। हालांकि यह निर्णय पहले ही टैरिफ के लिए निर्धारित था, लेकिन सीमा सुरक्षा उपायों पर समझौते के बाद इसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया। ट्रंप ने इसे फेंटेनाइल के प्रवाह को रोकने के लिए एक आवश्यक कदम बताया।
6. यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की का वाशिंगटन दौरा
ट्रंप ने पुष्टि की कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की 4 मार्च को वाशिंगटन में आएंगे और एक महत्वपूर्ण खनिज सौदे पर हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि, ज़ेलेंस्की ने इस दौरे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह सौदा एक बड़ी सफलता हो सकती है या चुपचाप पारित हो सकता है। ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने की बात पर वे सहमत नहीं हैं, और यूक्रेन की नाटो सदस्यता को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यूरोप को यह जिम्मेदारी उठानी होगी, न कि अमेरिका को।
7. नाटो और यूक्रेन के बारे में ट्रंप की स्थिति
ट्रंप ने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने के विचार को एक बार फिर खारिज किया और यह भी कहा कि यूक्रेन के युद्ध की शुरुआत के लिए जिम्मेदारी यूक्रेन पर ही है। ट्रंप ने यह तर्क दिया कि नाटो का विस्तार युद्ध के प्रारंभ का एक कारण हो सकता है। उन्होंने यूक्रेन को एक "अच्छा सौदा" देने की बात की, जिससे वे अपनी अधिकतम भूमि को वापस प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति वार्ता के लिए "रियायतें" देनी होंगी।
राष्ट्रपति ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, जो उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति के अनुरूप हैं। एलन मस्क की सरकारी दक्षता में सक्रिय भूमिका, संघीय कर्मचारियों से कार्य रिपोर्ट की मांग, और "गोल्ड कार्ड" वीजा कार्यक्रम का प्रस्ताव उनके प्रशासन की कार्यशैली को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इसके अलावा, विदेश नीति में यूक्रेन और नाटो के मुद्दे पर ट्रंप की स्थिति उनके कठोर दृष्टिकोण को दर्शाती है। इन फैसलों के प्रभाव को आने वाले महीनों में देखा जा सकेगा।
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