पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

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पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

झारखंड में डायन प्रथा पर सख्ती की जरूरत: न्यायिक अकादमी में NALSA कोलोकीयम, पीड़ित पुनर्वास पर जोर

रांची।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों, विशेषकर झारखंड में डायन प्रथा (विच हंटिंग) जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कोलोकीयम का आयोजन शनिवार को झारखंड न्यायिक अकादमी के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में अपराध पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं, लेकिन वास्तविकता में इन अधिकारों और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या का परिणाम हैं, जहां हिंसा को सामान्य मान लिया गया है।

उन्होंने विशेष रूप से झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को अमानवीय और लैंगिक हिंसा का गंभीर रूप बताते हुए कहा कि यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, सत्ता और पितृसत्ता से जुड़ा मुद्दा है। इस पर प्रभावी रोक के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशील

कानून-व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कोलोकीयम में यह भी रेखांकित किया गया कि न्याय केवल अपराधियों को सजा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास को उसका केंद्र बनाना होगा। विधिक सेवा संस्थाओं को गांव स्तर तक पहुंच बनाकर पीड़ितों को कानूनी सहायता, जागरूकता और मुआवजा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

*महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए चुनौती कानून की नहीं बल्कि क्रियान्वयन की है: न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि मॉब लींचिंग को लेकर कानून के मार्गदर्शन के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार गाइडलाइन दी हैं। अगर सही तरीके से गाइडलाइन और कानून का क्रियान्वयन हो जाए और जिला स्तर पर इसकी लीगल बॉडी प्रो-एक्टिव तरीके से काम करे तो इसमें कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की जिम्मेदारी होती है कि वह निष्पक्ष होकर काम करे।

वहीं ज्यूडिशियल किया भूमिका लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फायर फाइटिंग की धारणा को बदलना होगा। सही आदमी को सही जगह पर अगर बैठाया जाए तो ऐसे मामलों के निष्पादन में तेजी आ सकती है।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण के सचिव श्री उमाशंकर सिंह ने किया। वहीं द्वितीय सत्र में कानूनी एवं तकनीकी विषय पर विशेषज्ञों ने अपने परामर्श दिए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं सेवी संस्था की महिलाओं समेत दुर्घटना में पीड़ित परिवार एवं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला को राशि प्रदान की गई।

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होलागढ़ के ब्लॉक प्रमुख राम फकीर का निधन, नाजरेथ अस्पताल में ली अंतिम सांस

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज। गंगापार में होलागढ़ के ब्लॉक प्रमुख राम फकीर का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने प्रयागराज के नाजरेथ अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

25 जुलाई 2021 को ब्लॉक प्रमुख बने थे

बताया जाता है कि राम फकीर ने 25 जुलाई 2021 को ब्लॉक प्रमुख के रूप में शपथ ग्रहण कर कार्यभार संभाला था। वह पिछले काफी समय से शुगर, हृदय रोग और लकवा की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें एक सप्ताह पूर्व नाजरेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

शृंगवेरपुर गंगा घाट पर अंतिम संस्कार होगा

उनका अंतिम संस्कार रविवार पांच अप्रैल को ही शृंगवेरपुर धाम स्थित गंगा घाट पर किया जाएगा। राम फकीर के पांच पुत्र और दो पुत्रियां हैं। पत्नी का निधन करीब तीन वर्ष पूर्व ही हो चुका था। ब्लॉक प्रमुख के निधन पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों में शोक व्याप्त है।

डाक टिकट संग्रहण फिलेटली के दूसरे दिन विद्यार्थियों, युवा संग्रहकर्ताओं, बुद्धिजीवियों तथा आमजन ने प्रस्तुतियां दी, अध्यक्ष हुए शामिल

गया: डाक टिकट संग्रहण फिलेटली के माध्यम से समाज में रचनात्मकता, ज्ञानवर्धन एवं सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित द्वि-दिवसीय भव्य फिलेटली प्रदर्शनी “बोधिपेक्स – 2026” का शुभारंभ दिनांक 20.02.2026 को एम.यू. अब्दाली, मुख्य डाक महाध्यक्ष, बिहार परिमंडल, पटना द्वारा हरिहर सेमिनरी स्कूल के प्रेक्षागृह मे किया गया। इस आयोजन का सफल संचालन गया मंडल के वरिष्ठ डाक अधीक्षक अंशुमान के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ.

इस कार्यक्रम के दूसरे दिन भी विद्यार्थियों, युवा संग्रहकर्ताओं, बुद्धिजीवियों तथा आमजन की उल्लेखनीय सहभागिता रही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार तथा घोषी क्षेत्र के विधायक ऋतुराज कुमार, आई.आई.आई.एम, बोधगया के निदेशक श्रीमति विनीता सहाय, ओटी.ए के ब्रिगेडियर राजीव शर्मा एवं कर्नल दीपक कुमार भी उपस्थित रहे.

आईआईएम, बोधगया के ऊपर एक विशेष आवरण भी जारी किया गया ।सभी गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर डाक टिकट संग्रहण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक गतिविधि बताया। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि डाक टिकट केवल डाक संप्रेषण का साधन भर नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, गौरवशाली इतिहास, महान विभूतियों तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं के जीवंत दर्पण हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे फिलेटली को अपनाकर ज्ञानार्जन, सृजनात्मक सोच एवं राष्ट्र की विरासत से जुड़ने का माध्यम बनाएं।

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय कला एवं संस्कृति, वन्यजीवन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आध्यात्मिक धरोहर जैसे विविध विषयों पर आधारित दुर्लभ, आकर्षक एवं थीमैटिक डाक टिकट संग्रहों तथा विशेष आवरणों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

इस अवसर पर आईआईएम बोधगया पर आधारित एक विशेष आवरण का लोकार्पण भी किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सुमधुर संगीत, आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों एवं अन्य सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की जीवंत एवं प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष रूप से ऊर्जावान एवं यादगार बना दिया। इसके अतिरिक्त “सिट एंड ड्रॉ” प्रतियोगिता में भी बाल प्रतिभाओं ने अपनी सृजनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान फिलेटली पर आधारित कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं एवं नए डाक टिकट खातों के पंजीकरण की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे युवाओं में इस विधा के प्रति उत्साह एवं जागरूकता का संचार हुआ। समापनतः यह आयोजन गया तथा आस-पास के क्षेत्रों में फिलेटली के प्रति नई चेतना, उत्साह एवं रचनात्मक ऊर्जा का संचार करने में अत्यंत सफल सिद्ध हुआ। इस भव्य प्रदर्शनी ने न केवल युवाओं एवं विद्यार्थियों को डाक टिकट संग्रहण की ओर प्रेरित किया, बल्कि समाज में ज्ञान, संस्कृति एवं विरासत के प्रति सम्मान की भावना को भी सुदृढ़ किया। कार्यक्रम की सफल एवं गरिमामय अभिव्यक्ति में डाक विभाग के समर्पित अधिकारियों एवं कर्मचारियों, उत्साही प्रतिभागियों, शिक्षण संस्थानों तथा सहयोगी संगठनों का बहुमूल्य एवं सराहनीय योगदान रहा।

माघी पूर्णिमा पर अरैल सेक्टर-7 में ग्रामीण जागृति शिक्षा समिति का सेवा भाव से भंडारा

संजय द्विवेदी, प्रयागराज।माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को अरैल सेक्टर-7 में ग्रामीण जागृति शिक्षा समिति द्वारा भंडारे का आयोजन श्रद्धा और सेवा भाव के साथ किया गया।भण्डारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।भण्डारे के उपरांत पधारे संत-महात्माओं को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का आयोजन प्रकाश अरोड़ा के नेतृत्व में किया गया जिसमें सामाजिक सहभागिता एवं धार्मिक समरसता का संदेश देखने को मिला।

आयोजन के दौरान ग्रामीण जागृति शिक्षा समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र पाण्डेय दिलीप मालवीय पीके त्रिपाठी सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाएं सुचारु रही और लोगो ने समिति के इस सेवा कार्य की सराहना की।

छत्तीसगढ़: पहले पी शराब, फिर प्रेमिका को दे दी दर्दनाक मौत

आज बैंकों में हड़ताल, सरकारी बैंकों का कामकाज रहेगा ठप

रायपुर। अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दो दिन की छुट्टी के बाद आज यानी 27 जनवरी को देशभर में बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी।

पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

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पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

झारखंड में डायन प्रथा पर सख्ती की जरूरत: न्यायिक अकादमी में NALSA कोलोकीयम, पीड़ित पुनर्वास पर जोर

रांची।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों, विशेषकर झारखंड में डायन प्रथा (विच हंटिंग) जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कोलोकीयम का आयोजन शनिवार को झारखंड न्यायिक अकादमी के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में अपराध पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं, लेकिन वास्तविकता में इन अधिकारों और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या का परिणाम हैं, जहां हिंसा को सामान्य मान लिया गया है।

उन्होंने विशेष रूप से झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को अमानवीय और लैंगिक हिंसा का गंभीर रूप बताते हुए कहा कि यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, सत्ता और पितृसत्ता से जुड़ा मुद्दा है। इस पर प्रभावी रोक के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशील

कानून-व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कोलोकीयम में यह भी रेखांकित किया गया कि न्याय केवल अपराधियों को सजा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास को उसका केंद्र बनाना होगा। विधिक सेवा संस्थाओं को गांव स्तर तक पहुंच बनाकर पीड़ितों को कानूनी सहायता, जागरूकता और मुआवजा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

*महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए चुनौती कानून की नहीं बल्कि क्रियान्वयन की है: न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि मॉब लींचिंग को लेकर कानून के मार्गदर्शन के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार गाइडलाइन दी हैं। अगर सही तरीके से गाइडलाइन और कानून का क्रियान्वयन हो जाए और जिला स्तर पर इसकी लीगल बॉडी प्रो-एक्टिव तरीके से काम करे तो इसमें कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की जिम्मेदारी होती है कि वह निष्पक्ष होकर काम करे।

वहीं ज्यूडिशियल किया भूमिका लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फायर फाइटिंग की धारणा को बदलना होगा। सही आदमी को सही जगह पर अगर बैठाया जाए तो ऐसे मामलों के निष्पादन में तेजी आ सकती है।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण के सचिव श्री उमाशंकर सिंह ने किया। वहीं द्वितीय सत्र में कानूनी एवं तकनीकी विषय पर विशेषज्ञों ने अपने परामर्श दिए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं सेवी संस्था की महिलाओं समेत दुर्घटना में पीड़ित परिवार एवं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला को राशि प्रदान की गई।

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होलागढ़ के ब्लॉक प्रमुख राम फकीर का निधन, नाजरेथ अस्पताल में ली अंतिम सांस

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज। गंगापार में होलागढ़ के ब्लॉक प्रमुख राम फकीर का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने प्रयागराज के नाजरेथ अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

25 जुलाई 2021 को ब्लॉक प्रमुख बने थे

बताया जाता है कि राम फकीर ने 25 जुलाई 2021 को ब्लॉक प्रमुख के रूप में शपथ ग्रहण कर कार्यभार संभाला था। वह पिछले काफी समय से शुगर, हृदय रोग और लकवा की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें एक सप्ताह पूर्व नाजरेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

शृंगवेरपुर गंगा घाट पर अंतिम संस्कार होगा

उनका अंतिम संस्कार रविवार पांच अप्रैल को ही शृंगवेरपुर धाम स्थित गंगा घाट पर किया जाएगा। राम फकीर के पांच पुत्र और दो पुत्रियां हैं। पत्नी का निधन करीब तीन वर्ष पूर्व ही हो चुका था। ब्लॉक प्रमुख के निधन पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों में शोक व्याप्त है।

डाक टिकट संग्रहण फिलेटली के दूसरे दिन विद्यार्थियों, युवा संग्रहकर्ताओं, बुद्धिजीवियों तथा आमजन ने प्रस्तुतियां दी, अध्यक्ष हुए शामिल

गया: डाक टिकट संग्रहण फिलेटली के माध्यम से समाज में रचनात्मकता, ज्ञानवर्धन एवं सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित द्वि-दिवसीय भव्य फिलेटली प्रदर्शनी “बोधिपेक्स – 2026” का शुभारंभ दिनांक 20.02.2026 को एम.यू. अब्दाली, मुख्य डाक महाध्यक्ष, बिहार परिमंडल, पटना द्वारा हरिहर सेमिनरी स्कूल के प्रेक्षागृह मे किया गया। इस आयोजन का सफल संचालन गया मंडल के वरिष्ठ डाक अधीक्षक अंशुमान के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ.

इस कार्यक्रम के दूसरे दिन भी विद्यार्थियों, युवा संग्रहकर्ताओं, बुद्धिजीवियों तथा आमजन की उल्लेखनीय सहभागिता रही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार तथा घोषी क्षेत्र के विधायक ऋतुराज कुमार, आई.आई.आई.एम, बोधगया के निदेशक श्रीमति विनीता सहाय, ओटी.ए के ब्रिगेडियर राजीव शर्मा एवं कर्नल दीपक कुमार भी उपस्थित रहे.

आईआईएम, बोधगया के ऊपर एक विशेष आवरण भी जारी किया गया ।सभी गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर डाक टिकट संग्रहण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक गतिविधि बताया। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि डाक टिकट केवल डाक संप्रेषण का साधन भर नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, गौरवशाली इतिहास, महान विभूतियों तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं के जीवंत दर्पण हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे फिलेटली को अपनाकर ज्ञानार्जन, सृजनात्मक सोच एवं राष्ट्र की विरासत से जुड़ने का माध्यम बनाएं।

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय कला एवं संस्कृति, वन्यजीवन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आध्यात्मिक धरोहर जैसे विविध विषयों पर आधारित दुर्लभ, आकर्षक एवं थीमैटिक डाक टिकट संग्रहों तथा विशेष आवरणों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

इस अवसर पर आईआईएम बोधगया पर आधारित एक विशेष आवरण का लोकार्पण भी किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सुमधुर संगीत, आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों एवं अन्य सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की जीवंत एवं प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष रूप से ऊर्जावान एवं यादगार बना दिया। इसके अतिरिक्त “सिट एंड ड्रॉ” प्रतियोगिता में भी बाल प्रतिभाओं ने अपनी सृजनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान फिलेटली पर आधारित कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं एवं नए डाक टिकट खातों के पंजीकरण की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे युवाओं में इस विधा के प्रति उत्साह एवं जागरूकता का संचार हुआ। समापनतः यह आयोजन गया तथा आस-पास के क्षेत्रों में फिलेटली के प्रति नई चेतना, उत्साह एवं रचनात्मक ऊर्जा का संचार करने में अत्यंत सफल सिद्ध हुआ। इस भव्य प्रदर्शनी ने न केवल युवाओं एवं विद्यार्थियों को डाक टिकट संग्रहण की ओर प्रेरित किया, बल्कि समाज में ज्ञान, संस्कृति एवं विरासत के प्रति सम्मान की भावना को भी सुदृढ़ किया। कार्यक्रम की सफल एवं गरिमामय अभिव्यक्ति में डाक विभाग के समर्पित अधिकारियों एवं कर्मचारियों, उत्साही प्रतिभागियों, शिक्षण संस्थानों तथा सहयोगी संगठनों का बहुमूल्य एवं सराहनीय योगदान रहा।

माघी पूर्णिमा पर अरैल सेक्टर-7 में ग्रामीण जागृति शिक्षा समिति का सेवा भाव से भंडारा

संजय द्विवेदी, प्रयागराज।माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को अरैल सेक्टर-7 में ग्रामीण जागृति शिक्षा समिति द्वारा भंडारे का आयोजन श्रद्धा और सेवा भाव के साथ किया गया।भण्डारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।भण्डारे के उपरांत पधारे संत-महात्माओं को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का आयोजन प्रकाश अरोड़ा के नेतृत्व में किया गया जिसमें सामाजिक सहभागिता एवं धार्मिक समरसता का संदेश देखने को मिला।

आयोजन के दौरान ग्रामीण जागृति शिक्षा समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र पाण्डेय दिलीप मालवीय पीके त्रिपाठी सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाएं सुचारु रही और लोगो ने समिति के इस सेवा कार्य की सराहना की।

छत्तीसगढ़: पहले पी शराब, फिर प्रेमिका को दे दी दर्दनाक मौत

आज बैंकों में हड़ताल, सरकारी बैंकों का कामकाज रहेगा ठप

रायपुर। अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दो दिन की छुट्टी के बाद आज यानी 27 जनवरी को देशभर में बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी।