कोरोना ने फिर बढ़ाई दहशत, भारत के 3 राज्यों में 10 एक्टिव केस, अकेले आंध्र प्रदेश में 8 मामले

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दुनिया में कोरोना वायरस का खतरा एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है।वायरस के एक नए वैरिएंट बीए 3.2 ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वैरिएंट में इतने अधिक आनुवंशिक बदलाव (म्यूटेशन) हैं कि यह पहले संक्रमण या वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) को आंशिक रूप से चकमा देने की क्षमता रखता है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह अन्य वैरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर है।

भारत में एक्टिव केसों की संख्या 10

हालांकि, इस बीच भारत में कोरोना वायरस ने फिर दस्तक दी है। फिलहाल देश के 3 राज्यों में ही कोरोना केस एक्टिव हैं और इनकी संख्या 10 है। आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोरोना वायरस से दो लोगों की मौत हो गई और 8 अन्य लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। आंध्र प्रदेश में हुई दो मौतों में से पहली मौत 28 जून को सीएमसी वेल्लोर में हुई थी। 60 वर्षीय मृतक (60) को डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य बीमारियां थीं। वहीं दूसरे मामले में, इलाज करा रहे 43 साल के एक मरीज की भी पॉजिटिव पाए जाने के बाद संक्रमण से मौत हो गई।

महाराष्ट्र और यूपी में एक-एक केस

आंध्र प्रदेश में 8 एक्टिव केस के अलावा एक केस महाराष्ट्र के मुंबई में मिला है, क्योंकि बॉलीवुड सिंगर कुमार सानू के बेटे जान कुमार सानू कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के एक छात्र की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।

दुनियाभर में नए वैरिएंट बीए 3.2 से दहशत

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के केस देखे जा रहे हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि ये मामले नए वैरिएंट बीए 3.2 के नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बीए 3.2 में मौजूदा कोविड वैक्सीन की आधारशिला माने जाने वाले जेएन.1 वैरिएंट की तुलना में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन और डिलीशन पाए गए हैं। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड में सीक्वेंस किए गए करीब 30 फीसदी मामलों में यही वैरिएंट मिला।

मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श का उद्घाटन किया


नई दिल्ली/रांची, 8 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श का उद्घाटन किया। इस परामर्श का उद्देश्य राज्य के 'विजन 2050' पर चर्चा करना है, जिसमें आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल गवर्नेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस है।

नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और माइक्रोसॉफ्ट, गूगल व आईबीएम जैसी प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,

"झारखंड की पहचान सिर्फ खदानों से नहीं, दिमागों से भी बननी चाहिए। हमारी पहचान संसाधनों से आगे बढ़कर शोध तक, खन से आगे बढ़कर नवाचार तक और केवल वृद्धि से आगे बढ़कर समावेशी और सतत विकास तक जानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ हमें शोध, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को भी समान महत्व देना होगा। झारखंड के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम झारखंड और पूरे देश के विकास का आधार बनेगा।"

इस परामर्श में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और आईबीएम सहित प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने झारखंड के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने, तकनीकी निवेश आकर्षित करने और राज्य को भविष्य के उद्योगों के लिए तैयार करने पर अपने सुझाव दिए।

सत्र के दौरान राज्य सरकार ने प्रस्तावित झारखंड एआई नीति, निवेश प्रोत्साहन नीति, पर्यटन नीति, वस्त्र नीति, जीआईएडीए विनियम और पीपी नीति पर अवधारणा पत्र प्रस्तुत किए। उद्योग जगत के हितधारकों से इन्हें निवेशकों के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु सुझाव मांगे गए।

आईटी, एआई, डिजिटल गवर्नेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश के अवसरों और साझेदारी पर चर्चा के लिए बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (बी2जी) संवाद भी आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो निवेश को बढ़ावा दें, रोजगार सृजित करें और समावेशी विकास को तेज करें। उन्होंने कहा कि हितधारकों के साथ परामर्श झारखंड के दीर्घकालिक विकास रोडमैप को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस कार्यक्रम में झारखंड मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, संजय कुमार यादव और सुदिव्या कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आईबीएम से टैलिन कुमार, माइक्रोसॉफ्ट से संदीप अरोड़ा और गूगल से राजेश रंजन ने झारखंड के लिए तकनीकी अवसरों पर प्रस्तुतियां दीं।

स्वागत भाषण और परिचय झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी सचिव पूजा सिंघल ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक माधवी मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम में उद्योग सचिव अरवा राजकमल, सूचना एवं जनसंपर्क विशेष सचिव राजीव लोचन बक्शी, उद्योग निदेशक विशाल सागर सहित झारखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग एवं शिक्षा जगत के प्रमुख हितधारक भी मौजूद थे।

कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

हेमन्त सोरेन ने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी, रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

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पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

झारखंड में डायन प्रथा पर सख्ती की जरूरत: न्यायिक अकादमी में NALSA कोलोकीयम, पीड़ित पुनर्वास पर जोर

रांची।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों, विशेषकर झारखंड में डायन प्रथा (विच हंटिंग) जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कोलोकीयम का आयोजन शनिवार को झारखंड न्यायिक अकादमी के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में अपराध पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं, लेकिन वास्तविकता में इन अधिकारों और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या का परिणाम हैं, जहां हिंसा को सामान्य मान लिया गया है।

उन्होंने विशेष रूप से झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को अमानवीय और लैंगिक हिंसा का गंभीर रूप बताते हुए कहा कि यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, सत्ता और पितृसत्ता से जुड़ा मुद्दा है। इस पर प्रभावी रोक के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशील

कानून-व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कोलोकीयम में यह भी रेखांकित किया गया कि न्याय केवल अपराधियों को सजा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास को उसका केंद्र बनाना होगा। विधिक सेवा संस्थाओं को गांव स्तर तक पहुंच बनाकर पीड़ितों को कानूनी सहायता, जागरूकता और मुआवजा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

*महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए चुनौती कानून की नहीं बल्कि क्रियान्वयन की है: न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि मॉब लींचिंग को लेकर कानून के मार्गदर्शन के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार गाइडलाइन दी हैं। अगर सही तरीके से गाइडलाइन और कानून का क्रियान्वयन हो जाए और जिला स्तर पर इसकी लीगल बॉडी प्रो-एक्टिव तरीके से काम करे तो इसमें कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की जिम्मेदारी होती है कि वह निष्पक्ष होकर काम करे।

वहीं ज्यूडिशियल किया भूमिका लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फायर फाइटिंग की धारणा को बदलना होगा। सही आदमी को सही जगह पर अगर बैठाया जाए तो ऐसे मामलों के निष्पादन में तेजी आ सकती है।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण के सचिव श्री उमाशंकर सिंह ने किया। वहीं द्वितीय सत्र में कानूनी एवं तकनीकी विषय पर विशेषज्ञों ने अपने परामर्श दिए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं सेवी संस्था की महिलाओं समेत दुर्घटना में पीड़ित परिवार एवं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला को राशि प्रदान की गई।

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कोरोना ने फिर बढ़ाई दहशत, भारत के 3 राज्यों में 10 एक्टिव केस, अकेले आंध्र प्रदेश में 8 मामले

#coronavirusalertcoronacasesfoundinandhrapradeshupmaharashtra

दुनिया में कोरोना वायरस का खतरा एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है।वायरस के एक नए वैरिएंट बीए 3.2 ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वैरिएंट में इतने अधिक आनुवंशिक बदलाव (म्यूटेशन) हैं कि यह पहले संक्रमण या वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) को आंशिक रूप से चकमा देने की क्षमता रखता है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह अन्य वैरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर है।

भारत में एक्टिव केसों की संख्या 10

हालांकि, इस बीच भारत में कोरोना वायरस ने फिर दस्तक दी है। फिलहाल देश के 3 राज्यों में ही कोरोना केस एक्टिव हैं और इनकी संख्या 10 है। आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोरोना वायरस से दो लोगों की मौत हो गई और 8 अन्य लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। आंध्र प्रदेश में हुई दो मौतों में से पहली मौत 28 जून को सीएमसी वेल्लोर में हुई थी। 60 वर्षीय मृतक (60) को डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य बीमारियां थीं। वहीं दूसरे मामले में, इलाज करा रहे 43 साल के एक मरीज की भी पॉजिटिव पाए जाने के बाद संक्रमण से मौत हो गई।

महाराष्ट्र और यूपी में एक-एक केस

आंध्र प्रदेश में 8 एक्टिव केस के अलावा एक केस महाराष्ट्र के मुंबई में मिला है, क्योंकि बॉलीवुड सिंगर कुमार सानू के बेटे जान कुमार सानू कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के एक छात्र की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।

दुनियाभर में नए वैरिएंट बीए 3.2 से दहशत

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के केस देखे जा रहे हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि ये मामले नए वैरिएंट बीए 3.2 के नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बीए 3.2 में मौजूदा कोविड वैक्सीन की आधारशिला माने जाने वाले जेएन.1 वैरिएंट की तुलना में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन और डिलीशन पाए गए हैं। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड में सीक्वेंस किए गए करीब 30 फीसदी मामलों में यही वैरिएंट मिला।

मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श का उद्घाटन किया


नई दिल्ली/रांची, 8 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श का उद्घाटन किया। इस परामर्श का उद्देश्य राज्य के 'विजन 2050' पर चर्चा करना है, जिसमें आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल गवर्नेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस है।

नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और माइक्रोसॉफ्ट, गूगल व आईबीएम जैसी प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,

"झारखंड की पहचान सिर्फ खदानों से नहीं, दिमागों से भी बननी चाहिए। हमारी पहचान संसाधनों से आगे बढ़कर शोध तक, खन से आगे बढ़कर नवाचार तक और केवल वृद्धि से आगे बढ़कर समावेशी और सतत विकास तक जानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ हमें शोध, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को भी समान महत्व देना होगा। झारखंड के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम झारखंड और पूरे देश के विकास का आधार बनेगा।"

इस परामर्श में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और आईबीएम सहित प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने झारखंड के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने, तकनीकी निवेश आकर्षित करने और राज्य को भविष्य के उद्योगों के लिए तैयार करने पर अपने सुझाव दिए।

सत्र के दौरान राज्य सरकार ने प्रस्तावित झारखंड एआई नीति, निवेश प्रोत्साहन नीति, पर्यटन नीति, वस्त्र नीति, जीआईएडीए विनियम और पीपी नीति पर अवधारणा पत्र प्रस्तुत किए। उद्योग जगत के हितधारकों से इन्हें निवेशकों के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु सुझाव मांगे गए।

आईटी, एआई, डिजिटल गवर्नेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश के अवसरों और साझेदारी पर चर्चा के लिए बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (बी2जी) संवाद भी आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो निवेश को बढ़ावा दें, रोजगार सृजित करें और समावेशी विकास को तेज करें। उन्होंने कहा कि हितधारकों के साथ परामर्श झारखंड के दीर्घकालिक विकास रोडमैप को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस कार्यक्रम में झारखंड मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, संजय कुमार यादव और सुदिव्या कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आईबीएम से टैलिन कुमार, माइक्रोसॉफ्ट से संदीप अरोड़ा और गूगल से राजेश रंजन ने झारखंड के लिए तकनीकी अवसरों पर प्रस्तुतियां दीं।

स्वागत भाषण और परिचय झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी सचिव पूजा सिंघल ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक माधवी मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम में उद्योग सचिव अरवा राजकमल, सूचना एवं जनसंपर्क विशेष सचिव राजीव लोचन बक्शी, उद्योग निदेशक विशाल सागर सहित झारखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग एवं शिक्षा जगत के प्रमुख हितधारक भी मौजूद थे।

कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

हेमन्त सोरेन ने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी, रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

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पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

झारखंड में डायन प्रथा पर सख्ती की जरूरत: न्यायिक अकादमी में NALSA कोलोकीयम, पीड़ित पुनर्वास पर जोर

रांची।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों, विशेषकर झारखंड में डायन प्रथा (विच हंटिंग) जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कोलोकीयम का आयोजन शनिवार को झारखंड न्यायिक अकादमी के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में अपराध पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं, लेकिन वास्तविकता में इन अधिकारों और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या का परिणाम हैं, जहां हिंसा को सामान्य मान लिया गया है।

उन्होंने विशेष रूप से झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को अमानवीय और लैंगिक हिंसा का गंभीर रूप बताते हुए कहा कि यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, सत्ता और पितृसत्ता से जुड़ा मुद्दा है। इस पर प्रभावी रोक के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशील

कानून-व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कोलोकीयम में यह भी रेखांकित किया गया कि न्याय केवल अपराधियों को सजा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास को उसका केंद्र बनाना होगा। विधिक सेवा संस्थाओं को गांव स्तर तक पहुंच बनाकर पीड़ितों को कानूनी सहायता, जागरूकता और मुआवजा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

*महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए चुनौती कानून की नहीं बल्कि क्रियान्वयन की है: न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि मॉब लींचिंग को लेकर कानून के मार्गदर्शन के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार गाइडलाइन दी हैं। अगर सही तरीके से गाइडलाइन और कानून का क्रियान्वयन हो जाए और जिला स्तर पर इसकी लीगल बॉडी प्रो-एक्टिव तरीके से काम करे तो इसमें कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की जिम्मेदारी होती है कि वह निष्पक्ष होकर काम करे।

वहीं ज्यूडिशियल किया भूमिका लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फायर फाइटिंग की धारणा को बदलना होगा। सही आदमी को सही जगह पर अगर बैठाया जाए तो ऐसे मामलों के निष्पादन में तेजी आ सकती है।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण के सचिव श्री उमाशंकर सिंह ने किया। वहीं द्वितीय सत्र में कानूनी एवं तकनीकी विषय पर विशेषज्ञों ने अपने परामर्श दिए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं सेवी संस्था की महिलाओं समेत दुर्घटना में पीड़ित परिवार एवं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला को राशि प्रदान की गई।

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