Digital Marketing Training Institute | Digital Care

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Looking for a career in Digital Marketing? Join Digital Care and learn from industry experts with

100% Practical Training and Live Projects.

Whether you're a Student, Job Seeker, Business Owner, Freelancer, or Working Professional, our job-oriented training program will help you master the skills that companies are hiring for.


What You'll Learn:

Search Engine Optimization (SEO)

Google Ads (PPC)

Social Media Marketing (SMM)

Meta Ads (Facebook & Instagram)

Content Marketing

Email Marketing

Google Analytics

Website Planning & Strategy

Live Projects & Case Studies

Freelancing & Client Handling


Why Choose Digital Care?

100% Practical Training

Live Projects & Real Client Experience

Industry Expert Trainers

Certification

Interview Preparation

Placement Assistance

Affordable Fees

Admission Open – Limited Seats Available!

Call Now: 87896 69772

Website: www.digitalcare.co.in

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#DigitalCare

भरत तिवारी के परिजनों से मिलने पंहुचे आरा के एसपी

Bihar/आरा; बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस घटना के एक सप्ताह बाद, भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) सदर एसडीपीओ रंजीत कुमार सिंह और शाहपुर थाने की पुलिस टीम के साथ देर रात अचानक मृतक भरत तिवारी के घर पहुंचे।

पुलिस अधीक्षक ने भरत के माता-पिता, भाई और भाभी से मिलकर करीब आधे घंटे तक बातचीत की। इस मुलाकात के दौरान परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।

मुलाकात के दौरान भरत तिवारी के परिजनों का गुस्सा और दुख साफ देखने को मिला। मृतक की मां और अन्य सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह कोई वास्तविक एनकाउंटर नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है। उन्होंने कहा कि भरत द्वारा आत्मसमर्पण करने के बावजूद निहत्थे हालत में पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी। परिजनों ने एसपी से साफ शब्दों में कहा कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है और वे इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हैं।

भरत की मां अपने बेटे के लिए न्याय की मांग को लेकर लगातार अड़ी हुई हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को बताया कि जब तक उनके बेटे की जान लेने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी से कड़ी सजा यानी फांसी नहीं मिल जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि कानून के रखवालों ने खुद कानून हाथ में लिया है, इसलिए उन पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।

एसपी ने मां की बातों को बेहद गंभीरतापूर्वक सुना और उन्हें उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। परिजनों को ढांढस बंधाते हुए भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने पहले ही उच्च स्तरीय न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है। उन्होंने परिवार से अपील की कि वे इस जांच प्रक्रिया में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करें ताकि सच सामने आ सके। राहत की बात यह रही कि एसपी ने परिजनों को सूचित किया कि उनके ऊपर थाने में जो मुकदमा दर्ज किया गया था, उसे प्रशासन ने वापस ले लिया है।

भरत तिवारी के परिवार की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एसपी ने उनके घर पर विशेष सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने की बात कही।

देर रात हुए इस औचक दौरे में एसपी राज करीब आधे तक पीड़ित परिवार के घर रुके और उनके हर एक सवाल का जवाब दिया।

परिजनों से मुलाकात खत्म करने और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा देने के बाद पुलिस अधीक्षक बिना किसी से बातचीत किए वहां से चुपचाप निकल गए।

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भरत तिवारी के परिजनों से मिलने पंहुचे आरा के एसपी

Bihar/आरा; बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस घटना के एक सप्ताह बाद, भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) सदर एसडीपीओ रंजीत कुमार सिंह और शाहपुर थाने की पुलिस टीम के साथ देर रात अचानक मृतक भरत तिवारी के घर पहुंचे।

पुलिस अधीक्षक ने भरत के माता-पिता, भाई और भाभी से मिलकर करीब आधे घंटे तक बातचीत की। इस मुलाकात के दौरान परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।

मुलाकात के दौरान भरत तिवारी के परिजनों का गुस्सा और दुख साफ देखने को मिला। मृतक की मां और अन्य सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह कोई वास्तविक एनकाउंटर नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है। उन्होंने कहा कि भरत द्वारा आत्मसमर्पण करने के बावजूद निहत्थे हालत में पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी। परिजनों ने एसपी से साफ शब्दों में कहा कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है और वे इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हैं।

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एसपी ने मां की बातों को बेहद गंभीरतापूर्वक सुना और उन्हें उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। परिजनों को ढांढस बंधाते हुए भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने पहले ही उच्च स्तरीय न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है। उन्होंने परिवार से अपील की कि वे इस जांच प्रक्रिया में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करें ताकि सच सामने आ सके। राहत की बात यह रही कि एसपी ने परिजनों को सूचित किया कि उनके ऊपर थाने में जो मुकदमा दर्ज किया गया था, उसे प्रशासन ने वापस ले लिया है।

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देर रात हुए इस औचक दौरे में एसपी राज करीब आधे तक पीड़ित परिवार के घर रुके और उनके हर एक सवाल का जवाब दिया।

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