रामराज में क्षेत्रीय ब्राह्मण सभा की मासिक बैठक संपन्न, परशुराम जयंती की तैयारियां तेज
बहसूमा/रामराज, मेरठ।क्षेत्रीय ब्राह्मण सभा समिति रामराज द्वारा रविवार को मासिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का आयोजन सभा के अध्यक्ष पंडित विधी चन्द शर्मा के आवास पर हुआ, जिसमें आगामी 19 अप्रैल को भगवान श्री परशुराम जी के जन्मोत्सव के आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 19 अप्रैल, रविवार को प्रातः 8:00 बजे हवन-पूजन किया जाएगा। इसके पश्चात 11:00 बजे से भंडारे का आयोजन प्रारंभ होगा, जो प्रभु इच्छा तक चलता रहेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री परशुराम जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। सभा की अध्यक्षता श्री मनोज दास महाराज ने की, जबकि संचालन पंडित विपुल राम शर्मा ने किया। इस अवसर पर अध्यक्ष पंडित विधी चन्द शर्मा ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने और समाज को संगठित करने का आह्वान किया।
बैठक में सैकड़ों ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से पंडित विजय प्रकाश, वैष्णो दयाल शर्मा, रविंद्र गौतम, अजय कुमार शर्मा, पुनीत कुमार शर्मा, आदेश शर्मा, योगेश शर्मा, हैप्पी शर्मा, सुमित शर्मा, जितेंद्र शर्मा, सत्येंद्र शर्मा, मांधाता मिश्रा, सुभाष चंद्र शर्मा, अशोक शर्मा, मनोज शर्मा, राजू शर्मा, रवि शंकर कौशिक, श्याम लाल शर्मा, सचिन पंडित, बिट्टू शर्मा, अमित शर्मा, संदीप शर्मा, मोनू पंडित, सत्यप्रकाश शर्मा, आदर्श वीर शर्मा, हर्ष शर्मा, रितिक शर्मा, सनी शर्मा, ऋषभदेव शर्मा, कन्हैया शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

बहसूमा/रामराज, मेरठ।क्षेत्रीय ब्राह्मण सभा समिति रामराज द्वारा रविवार को मासिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का आयोजन सभा के अध्यक्ष पंडित विधी चन्द शर्मा के आवास पर हुआ, जिसमें आगामी 19 अप्रैल को भगवान श्री परशुराम जी के जन्मोत्सव के आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मेरठ। जनपद के मवाना क्षेत्र के ग्राम ढिकौली में रविवार को महर्षि कश्यप जी की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई।
जहानाबाद के कनौदी स्थित गुड न्यूज़ प्रार्थना सभा में Easter का पर्व श्रद्धा, उल्लास और गहरी आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और Jesus Christ को याद करते हुए विशेष प्रार्थना की। प्रार्थना सभा के दौरान पूरे परिसर में भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने परंपरानुसार अंगूर का जूस और ब्रेड ग्रहण कर प्रभु यीशु के बलिदान और उनके पुनर्जीवन (रिज़रेक्शन) को स्मरण किया। आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यीशु मसीह को मानवता के कल्याण और प्रेम का संदेश देने के कारण क्रूस पर चढ़ाया गया था। लेकिन उनकी मृत्यु के तीसरे दिन वे पुनर्जीवित हुए, जिसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई, निराशा पर आशा और मृत्यु पर जीवन की जीत का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि पुनर्जीवन के बाद यीशु 40 दिनों तक अपने अनुयायियों के बीच रहे और उन्हें प्रेम, क्षमा और सेवा का संदेश देकर स्वर्ग चले गए। इस अवसर पर पास्टर कमलेश कुमार ने कहा कि यह प्रार्थना स्थल सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए खुला है। उन्होंने कहा, “यहां कोई भेदभाव नहीं है, हर व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर से प्रार्थना कर सकता है। हमारा उद्देश्य समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा स्थापित करना है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रार्थना के दौरान कई लोग भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखों से आंसू निकल आते हैं। यह आंसू मन की शुद्धता, आत्मिक शांति और ईश्वर के प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक होते हैं। कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि ईस्टर का पर्व उन्हें जीवन में सकारात्मकता, क्षमा और एक-दूसरे के प्रति प्रेम का संदेश देता है। कुल मिलाकर, यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की एक सशक्त मिसाल भी प्रस्तुत करता नजर आया।
जहानाबाद के कनौदी स्थित गुड न्यूज़ प्रार्थना सभा में Easter का पर्व श्रद्धा, उल्लास और गहरी आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और Jesus Christ को याद करते हुए विशेष प्रार्थना की। प्रार्थना सभा के दौरान पूरे परिसर में भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने परंपरानुसार अंगूर का जूस और ब्रेड ग्रहण कर प्रभु यीशु के बलिदान और उनके पुनर्जीवन (रिज़रेक्शन) को स्मरण किया। आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यीशु मसीह को मानवता के कल्याण और प्रेम का संदेश देने के कारण क्रूस पर चढ़ाया गया था। लेकिन उनकी मृत्यु के तीसरे दिन वे पुनर्जीवित हुए, जिसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई, निराशा पर आशा और मृत्यु पर जीवन की जीत का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि पुनर्जीवन के बाद यीशु 40 दिनों तक अपने अनुयायियों के बीच रहे और उन्हें प्रेम, क्षमा और सेवा का संदेश देकर स्वर्ग चले गए। इस अवसर पर पास्टर कमलेश कुमार ने कहा कि यह प्रार्थना स्थल सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए खुला है। उन्होंने कहा, “यहां कोई भेदभाव नहीं है, हर व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर से प्रार्थना कर सकता है। हमारा उद्देश्य समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा स्थापित करना है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रार्थना के दौरान कई लोग भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखों से आंसू निकल आते हैं। यह आंसू मन की शुद्धता, आत्मिक शांति और ईश्वर के प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक होते हैं। कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि ईस्टर का पर्व उन्हें जीवन में सकारात्मकता, क्षमा और एक-दूसरे के प्रति प्रेम का संदेश देता है। कुल मिलाकर, यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की एक सशक्त मिसाल भी प्रस्तुत करता नजर आया।
* एनटीपीसी के सहयोग से अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना, स्थानीय स्तर पर मिलेगा बेहतर इलाज
ठाणे । अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार शाखा डोंबिवली के तत्वाधान में नव कुंडी गायत्री महायज्ञ और प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन मुरबाड़ डोंबिवली में किया गया।जिसका आयोजन जन गण मन स्कूल, वंदे मातरम कॉलेज डोंबिवली, जे एम एफ फाउंडेशन, प्रेसिडेंट डॉक्टर राजकुमार कोल्हे, प्रेसिडेंट डॉक्टर प्रेरणा राजकुमार कोल्हे तथा श्रीमती संध्या पाटिल डोंबिवलीकर ने किया।दिव्य समारोह में श्री गायत्री माता,शिवलिंग,श्री गणेश एवं श्री दत्तगुरु की प्राण प्रतिष्ठा की गई जहां माहौल जयकारे से भक्तिमय हो गया।मंत्रोच्चार,यज्ञ की पवित्र अग्नि और उत्सव की तेज रोशनी में सभी ने अपने दिलों में शांति और संतुष्टि की अद्भुत भावना महसूस की।दिलचस्प बात यह है कि उस पल उपस्थित कई लोगों की आँखों से आँसू बहने लगे - दुःख के आँसू नहीं, बल्कि परम आनंद,भक्ति और दिव्य स्पर्श के आँसू।हर देवता के चेहरे पर अलग-अलग भाव देखकर ऐसा लग रहा था कि भगवान हमारे बीच अवतरित हो गए हैं।यह समारोह केवल एक अनुष्ठान नहीं था बल्कि एक अविस्मरणीय अनुभव था। उक्त समारोह में मुख्य रूप से श्रीमती डिंपल सिंह,सोनू सिंह,कुमारी आराध्या सिंह,चिरंजीव अर्चित सिंह,श्रीमती शांताबाई झोपे, श्रीमती स्मिता दळवी (कोकण ), श्रीमती शैलजा महाजन (खारघर),कवि अनिल कुमार गुप्ता 'राही' एवं संपूर्ण गायत्री परिवार सभासद डोंबिवली उपस्थित रहे तथा गायत्री स्वरूप श्रीमती संध्या पाटिल डोंबिवलीकर एवं विद्वान पंडित श्री स्वरूप एवं अनेक हृदयस्पर्शी आत्माओं का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
मुंबई। आर्य समाज, बोरीवली की ओर से डॉ. भारती संजीव श्रीवास्तव को "वैदिक साहित्य श्री" सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता उद्योगपति लालचंद तिवारी ने किया तथा कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में ख्यातिलब्ध हास्य कवि महेश दुबे उपस्थित थे।कवयित्री श्रीमती गायत्री पाण्डेय बतौर सम्माननीय अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। डॉ.भारती संजीव श्रीवास्तव को यह सम्मान उनकी सुदीर्घ साहित्य सेवा के लिए प्रदान किया गया। भारती का हिंदी भाषा के प्रति अटूट प्रेम रहा है। उनकी लेखनी में भाषा का संयम,भावों की गहराई और काव्य का संतुलन झलकता है। उनकी भाषा शैली मर्यादित, परिष्कृत और प्रभावशाली है। उनके पहले ही काव्य संग्रह ‘उसका सूरज’ को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया जाना उनके साहित्यिक कौशल और संवेदनशील दृष्टि का प्रमाण है। हाल ही में उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से ‘निराला साहित्य में अभिव्यक्त जीवन दर्शन ‘ विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। इस अवसर पर उन्होंने ने अपने शोध-यात्रा एवं रचना प्रक्रिया पर अपनी बात रखी। हास्य कवि महेश दुबे ने अपनी कविता के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को जमकर हँसाया। उन्होंने कहा, "हंसने और हंसाने वाला कभी स्वर्ग नरक में नहीं जाता क्योंकि वह जहां जाता है वही स्वर्ग बन जाता है ।" श्रीमती गायत्री पाण्डेय ने नारी सम्मान में अपनी कविता पढ़ी। इस अवसर पर शालिनी जोशी,अनीता गोठवाल, मुन्ना यादव 'मयंक', संजीव श्रीवास्तव आदि गणमान्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन कवि एवं आलोचक डॉ. जितेंद्र पाण्डेय ने किया। डॉ.पाण्डेय ने अध्यात्म और साहित्य की अभिन्नता पर अपनी बात रखी।संस्था के संस्थापक आचार्य प्रभारंजन पाठक ने उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

आ
जमगढ़ के अधिवक्ता जितेन्द्र हरि पाण्डेय नेपाल में सम्मानित आजमगढ़।तहसील निजामाबाद क्षेत्र स्थित परसहा गांव निवासी पेशे से अधिवक्ता जितेंद्र हरि पाण्डेय को साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्य के लिए प्रगतिशील लेखक संघ नेपाल की केंद्रीय समिति ने शुक्रवार को नेपाल में किया सम्मानित। नेपाल देश के महेंद्र नगर स्थित दोधारा चांदनी,कंचनपुर के नगर पालिका हॉल में प्रगतिशील लेखक संघ नेपाल केंद्रीय इकाई द्वारा 3 अप्रैल 2026 को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।इसमें भारत से सात साहित्यिक और सांस्कृतिकर्मियों ने भाग लिया।जहां विभिन्न सत्रों में साहित्य,संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर सार्थक चर्चा हुई। आजमगढ़ जिले के निजामाबाद तहसील स्थित एक छोटे से गांव परसहा निवासी और पेशे से अधिवक्ता एवं भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ (इसकफ) के राष्ट्रीय सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय के लिए यह अवसर भावुक और गौरवपूर्ण रहा,क्योंकि यह उनके जीवन की पहली विदेश यात्रा थी।भारत के एक छोटे से गांव परसहा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना और साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना उनके लिए प्रेरणादायक उपलब्धि मानी जा रही है सम्मान प्राप्त करने के बाद पाण्डेय ने कहा कि नेपाल की धरती पर मिला यह सम्मान उनके लिए अविस्मरणीय है।उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मेरा सम्मान नहीं है,बल्कि सदियों से भारत और नेपाल के बीच चले आ रहे साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों तथा दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ मित्रता का सम्मान है।जितेंद्र हरि पाण्डेय की इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोगों ने इसे आजमगढ़ जिले के लिए गौरव का विषय बताया है।
5 hours ago
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