लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज निंदनीय: सुशील पाण्डेय कान्हजी
संजीव सिंह बलिया, 18 मई, 2026 — समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष व प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्हजी ने कहा है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने पार्टी की ओर से इसकी कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत मुआवजा व जवाबदेही की मांग की है। कान्हजी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। सरकार को संवाद और संवेदनशीलता से समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि बल प्रयोग कर। किसी भी व्यवस्थित प्रक्रिया के बिना हिंसा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह नागरिकों के विश्वास को कमज़ोर करता है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता समाज लोकतंत्र और न्यायपालिका का अहम स्तम्भ है। वकील न केवल न्याय दिलाते हैं, बल्कि संविधान और कानून की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के चैम्बरों पर बुलडोजर चलाना केवल भवन नष्ट करना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता समाज के सम्मान पर सीधा आघात है। सपा नेता ने कहा कि लखनऊ में जिस प्रकार कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अधिवक्ताओं के अधिकारों और सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कान्हजी ने मांग की कि सरकार घटना की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे। समाजवादी पार्टी की ओर से यह भी आग्रह किया गया कि भविष्य में इस तरह की कार्यवाही से पहले संबंधित संगठनों से बातचीत की जाए और संवेदनशीलता के साथ विवादों का हल निकाला जाए ताकि लोकतंत्र की मर्यादा व कानून व्यवस्था बनी रहे।
लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज निंदनीय: सुशील पाण्डेय कान्हजी
संजीव सिंह बलिया, 18 मई, 2026 — समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष व प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्हजी ने कहा है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने पार्टी की ओर से इसकी कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत मुआवजा व जवाबदेही की मांग की है। कान्हजी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। सरकार को संवाद और संवेदनशीलता से समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि बल प्रयोग कर। किसी भी व्यवस्थित प्रक्रिया के बिना हिंसा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह नागरिकों के विश्वास को कमज़ोर करता है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता समाज लोकतंत्र और न्यायपालिका का अहम स्तम्भ है। वकील न केवल न्याय दिलाते हैं, बल्कि संविधान और कानून की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के चैम्बरों पर बुलडोजर चलाना केवल भवन नष्ट करना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता समाज के सम्मान पर सीधा आघात है। सपा नेता ने कहा कि लखनऊ में जिस प्रकार कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अधिवक्ताओं के अधिकारों और सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कान्हजी ने मांग की कि सरकार घटना की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे। समाजवादी पार्टी की ओर से यह भी आग्रह किया गया कि भविष्य में इस तरह की कार्यवाही से पहले संबंधित संगठनों से बातचीत की जाए और संवेदनशीलता के साथ विवादों का हल निकाला जाए ताकि लोकतंत्र की मर्यादा व कानून व्यवस्था बनी रहे।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन

मुंबई। ग़ज़ल गायक पद्मभूषण पंकज उधास की 75वीं जयंती के अवसर पर रविवार को पेडर रोड स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट के सामने वाले चौक का आधिकारिक रूप से “पद्मभूषण पंकज उधास चौक” नामकरण किया गया। साथ ही कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथो  इस चौक पर स्थापित पंकज उधास के भित्तिचित्र स्मारक (म्युरल) का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर उधास परिवार, वरिष्ठ गायक-संगीतकार तथा बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक हरिहरन,सोनू निगम, पापोन  तथा संगीतकार-गायक सलीम मर्चंट  के साथ समाजसेविका श्रीमती मंजू जी  लोढ़ा भी उपस्थित थीं।बइस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा, “पेडर रोड क्षेत्र में पंकज उधास का लंबे समय तक निवास रहा। उनके परिवार की इच्छा थी कि इस परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्थायी स्मारक बनाया जाए। इसके लिए मैंने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रयास शुरू किए थे। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन और मुंबई महानगरपालिका के सहयोग से यह भित्तिचित्र स्मारक तैयार किया गया है। यह चौक अब संगीत और ग़ज़ल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। स्मारक में पंकज उधास के अमर गीतों के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक उनकी ग़ज़लों का आनंद ले सकेंगे।”
कार्यक्रम में पढ़कर सुनाए गए संदेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पंकज उधास की मधुर और संवेदनशील आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और ग़ज़ल गायकी को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘चिट्ठी आई है’ जैसे उनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में जीवित हैं।”
गायक हरिहरन ने भी पंकज उधास को याद करते हुए कहा, “पंकजजी ने ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी कई ग़ज़लें आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।”
गायक पापोन ने पंकज उधास के सरल स्वभाव को याद करते हुए कहा, “मैं उनसे उम्र में बहुत छोटा था, फिर भी वे मुझे हमेशा आदरपूर्वक ‘आप’ कहकर संबोधित करते थे।” संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पुत्र आदिनाथ मंगेशकर ने उधास और मंगेशकर परिवार के दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरा पहला फोटो लता मंगेशकर जी  की गोद में है और उसमें पंकजजी भी मौजूद हैं। हमारे घर का गणेशोत्सव उनकी उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता था।”
गायक सोनू निगम ने भी अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा, “मेरी माँ हमेशा पंकज उधास के गीत सुना करती थीं। बाल कलाकार रहते हुए मैंने उनकी ग़ज़लों के शब्द और धुन दोनों याद कर लिए थे।”
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में पंकज उधास ने 50 से अधिक एल्बम और 1,000 से ज्यादा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और वर्ष 2025 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
पंकज उधास की यादों से पेडर रोड क्षेत्र भावुक माहौल में डूबा हुआ था। उन्होंने भारतीय ग़ज़ल को सात समंदर पार तक पहुँचाया और उनके प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं। समाजसेविका मंजू लोढ़ा ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे महान गायक का स्मारक और चौक होना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज़ की कोमलता और विरह की भावना आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।
गर्म हवा व लू से बचाव के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी की एडवाइजरी

लू से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को अपनाएं जनसामान्य

रितेश मिश्रा
हरदोई जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा लगातार बढ़ रही गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव के उपाय बताए गए हैं। जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देशन में एडवाइजरी जारी की गई है।
   अपर जिलाधिकारी(वि ०/रा०)/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान दिनांक 18.05.2026 के अनुसार दिनांक 20,21 और 22.05.2026 को उष्ण लहर लू चलने की अधिक संभावना और आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने और  तापमान में वृद्धि रहने की भी संभावना है। ऐसे में लोगों को हीटवेब से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां कर ली जाएं। उन्होंने हीटवेब से बचाव को लेकर जनसामान्य के बीच जागरूता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जब वातावरण का तापमाप 37 डिग्री सेल्सियस से 3-4 डिग्री अधिक पहुंच जाता है तो उसे हीटवेब या लू कहते हैं।
आपदा विशेषज्ञ ज्ञान दीप शर्मा ने बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर, जिनसे दोपहर के समय गर्म हवाएं आतीं हैं, काले परदे लगाकर रखना चाहिए। स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।
उन्होंने बचाव के बारे में बताते हुए कहा कि धूप में खड़े वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़ें। खाना बनाते समय घर के खिड़की दरवाजे आदि खुले रखें जिससे हवा का आना जाना बना रहे। नशीले पदार्थों, शराब अथवा अल्कोहल से बचें। उच्च प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें तथा बासी भोजन कतई न इस्तेमाल करें इसके साथ ही संतुलित व हल्का आहार लें। दोपहर के समय यदि बहुत आवश्यक हो तभी घर से धूप में बाहर निकलें अन्यथा धूप में जाने से बचें और यदि जाना ही पड़े तो सिर को जरूर ढकें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि अभी आगे गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा इसलिए गर्मी से बचाव के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना चाहिए।

कब लगती है लू

गर्मी में शरीर के द्रव्य बाॅडी फ्ल्यूड सूखने लगते हैं। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुानरी बीमारी, मोटापा, पार्किंसस रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डाॅययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सवाधान रहें।
लू के लक्षण
गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में  तेजी,व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना  अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त यमुनानगर द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्तता पाये जाने के दृष्टिगत थाना प्रभारी घूरपुर

विश्वनाथ प्रताप सिंह



प्रयागराज,आवेदक शिकायतकर्ता कमलेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम सेन्धूवार थाना घूरपुर के शिकायती प्रार्थना पत्र अंतर्गत थाना घूरपुर पर नियुक्त प्रभारी निरीक्षक  दिनेश सिंह द्वारा गलत तरीके से एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए एक पक्ष का अनुचित पक्ष लेते हुए तीन लोगों को थाने में लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पूर्व में भी समय-समय पर थाना प्रभारियों को अकारण बिना अपराध के किसी को थाने पर नहीं लाने हेतु स्पष्ट आदेश दिए गए हैंl उक्त सम्बन्ध में जांच सहायक पुलिस आयुक्त बारा वेद व्यास मिश्र द्वारा की गई। जांचोपरांत थाना प्रभारी घूरपुर को निलम्बित करते हुए विभागीय जांच कार्यवाही आसन्न की गई है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने 333 शिक्षकों व पर्यवेक्षिकाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, कहा- अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं योजनाएं


यह अवसर न केवल नव नियुक्त अभ्यर्थियों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि राज्य के समग्र और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। राज्य सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुँचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है, जो कई कारणों से विकास की गति में पीछे छूट गया था। नवनियुक्त कर्मी गाँव-गाँव और घर-घर जाकर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करें। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं है, बल्कि आपके माध्यम से सरकार गाँव-गाँव, घर-घर और हर व्यक्ति तक पहुँचना चाहती है।

खासकर महिलाओं और बच्चों तक, जिन्हें हमें आने वाले भविष्य के लिए तैयार करना है। सीमित दायरे में जीवन जीने वाले इन लोगों को बदलते परिवेश के अनुरूप आगे बढ़ाना, उनका सशक्तिकरण करना, यह बड़ी चुनौती आपके कंधों पर होगी। उक्त बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कही। वे आज झारखंड मंत्रालय में आयोजित नव नियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों का नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

नियुक्ति पत्र वितरण समारोह सभागार उत्साह, उमंग एवं गौरवपूर्ण माहौल से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज और राज्य के विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं, वहीं महिला पर्यवेक्षकाएं समाज में महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा महिला एवं बाल विकास योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लगातार नियुक्तियां की जा रही है।

पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया एवं शिक्षा व्यवस्था का हो रहा सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक जैसी घटनाओं से नियुक्तियाँ बाधित हो रही हैं, वहीं झारखंड सरकार ने पिछले चार महीनों में शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक और विगत दो वर्षों में 16 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है, जबकि पूर्व के कार्यकाल में सरकारी, अनुबंध एवं निजी संस्थानों में करीब दो लाख से अधिक नियुक्तियां की गईं है। वर्ष 2024 में वर्तमान सरकार के गठन के बाद से मानव संसाधन को सशक्त करने के लिए विभिन्न विभागों में लगातार नियुक्तियाँ की गई हैं, और यह प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी- कभी ऐसा भी होता है कि कुछ शिक्षक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं। ऐसी सोच के साथ समग्र विकास संभव नहीं है। यदि हम अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से कंधों पर लें, तभी बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहल इसीलिए की गई है, ताकि वर्षों से हमारी शिक्षा व्यवस्था पर लगे कलंक को मिटाया जा सके और बच्चों को बेहतर भविष्य दिया जा सके।

मंईयाँ सम्मान योजना का मिल रहा लाभ, बेटियां बन रही कलेक्टर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधी आबादी को मुख्यधारा में शामिल किए बिना राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। वर्तमान में राज्य की लगभग 60 लाख महिलाओं को झारखण्ड मुख्यमंत्री मंईयाँ सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति माह वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि इस योजना का पाँच से दस प्रतिशत लोग गलत तरीक़े से लाभ ले रहें हों, लेकिन ऐसे लोगों को रोकने के लिए 90 प्रतिशत लोगों को प्रभावित नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि इस योजना का लाभ लेने वाली बेटियाँ आज कलेक्टर जैसे पदों तक पहुँच रही हैं। महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का कार्य भी निरंतर हो रहा है। अब वह समय बीत चुका है जब महिलाओं को चारदीवारी के भीतर सीमित रखा जाता था। आज उन्हें आगे आना है और समाज को भी उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है।

दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को तराशना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों से कहा कि आपको दुर्गम क्षेत्रों में जाना होगा और ऐसे बच्चों के साथ काम करना होगा, जिनकी परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण होंगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे आपके हाथों में कच्ची मिट्टी की तरह होंगे। उन्हें तराशने, आकार देने और उनके भविष्य को संवारने की पूरी जिम्मेदारी आपके पास होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भीतर कुपोषण जैसी समस्या और उसके निराकरण संबंधी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं से राज्य को मुक्त कराना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। आप सभी युवा हैं, ऊर्जा से भरपूर हैं, और आपके पास समय तथा अवसर भी हैं।

पूरी निष्ठा, समर्पण और संकल्प के साथ यदि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, तो न केवल आपका भविष्य उज्ज्वल होगा, बल्कि आपका परिवार, समाज और पूरा झारखंड मजबूत होगा। जिस प्रकार की खुशी आपको और आपके परिवार को इस नियुक्ति से मिली है, वैसी ही खुशी पूरे झारखंड को मिले—यही मेरी कामना है। आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।

इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री उमा शंकर सिंह, निदेशक प्राथमिक शिक्षा श्री मनोज कुमार रंजन सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में नवनियुक्त अभ्यर्थी एवं उनके परिजन उपस्थित थे।

जैन देरासर में उमड़ा श्रद्धा और वैराग्य का सैलाब, मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह का भावपूर्ण बहुमान

मुंबई। श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन देरासर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य आचार्य श्री लब्धीचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद तथा मुनिराज श्री सर्वेशचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनिराज श्री मंत्रेश सागरजी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब उपस्थित हुआ, जब 81 वर्ष की आयु में दीक्षा अंगीकार करने जा रहे भावी दीक्षार्थी महेंद्रभाई मोहनलाल शाह का श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं संघ के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण बहुमान किया गया। इस अवसर पर पूरे सभागार में श्रद्धा, सम्मान और वैराग्य की भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके त्यागमय एवं धर्मनिष्ठ जीवन को नमन किया। अपने संबोधन में संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि महेंद्रभाई शाह का त्याग, धर्म के प्रति अटूट आस्था और संयममय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में 81 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना अत्यंत दुर्लभ, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। मुंबई में अपनी दीक्षा की पवित्र तैयारी कर रहे मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह अपनी सरलता, विनम्रता और गहन धार्मिक निष्ठा से सभी के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची साधना, वैराग्य और आत्मजागृति के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहर मोतीलाल शाह, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह सहित जयेशभाई, लब्धीशिल्पाबेन, विलास शाह एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गुरु भगवंतों के आशीर्वचन, धर्ममय वातावरण और भावी दीक्षार्थी के बहुमान ने पूरे आयोजन को अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बना दिया।
जैन देरासर में उमड़ा श्रद्धा और वैराग्य का सैलाब, मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह का भावपूर्ण बहुमान

मुंबई। श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन देरासर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य आचार्य श्री लब्धीचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद तथा मुनिराज श्री सर्वेशचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनिराज श्री मंत्रेश सागरजी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब उपस्थित हुआ, जब 81 वर्ष की आयु में दीक्षा अंगीकार करने जा रहे भावी दीक्षार्थी महेंद्रभाई मोहनलाल शाह का श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं संघ के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण बहुमान किया गया। इस अवसर पर पूरे सभागार में श्रद्धा, सम्मान और वैराग्य की भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके त्यागमय एवं धर्मनिष्ठ जीवन को नमन किया। अपने संबोधन में संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि महेंद्रभाई शाह का त्याग, धर्म के प्रति अटूट आस्था और संयममय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में 81 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना अत्यंत दुर्लभ, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। मुंबई में अपनी दीक्षा की पवित्र तैयारी कर रहे मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह अपनी सरलता, विनम्रता और गहन धार्मिक निष्ठा से सभी के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची साधना, वैराग्य और आत्मजागृति के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहर मोतीलाल शाह, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह सहित जयेशभाई, लब्धीशिल्पाबेन, विलास शाह एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गुरु भगवंतों के आशीर्वचन, धर्ममय वातावरण और भावी दीक्षार्थी के बहुमान ने पूरे आयोजन को अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बना दिया।
संगम नगरी में अगले पांच दिनों तक लू का अलर्ट, 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है पारा


विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज, इन दिनों संगम नगरी भीषण गर्मी, उमस और सूर्य की तल्ख किरणों से तप रही है। रविवार की सुबह से ही गर्मी तेज थी, दोपहर में तो सूर्य की आग उगलती किरणों ने शहरवासियों को बेहाल कर दिया। आलम यह था कि लोग घरों में ही दुबके रहे। जो बाहर निकले भी वे शरीर को पूरी तरह से कपड़ों से ढंके रहे। बाजार और सड़कों पर आवाजाही नाममात्र की रही।

लू व भीषण गर्मी से अभी राहत नहीं
शनिवार को भी दिनभर उमस रही। अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम को आर्द्रता घटकर 29 प्रतिशत रह गई। वहीं आज 17 मई को न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस व अधिकतम तापमान 44-45 डिग्री सेल्सिसय के आसपास है। मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक भीषण गर्मी और लू का वर्चस्व रहेगा। पारा लगातार 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने की आशंका है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने का सुझाव दिया है।

18 मई से तापमान और बढ़ने की संभावना
रविवार को अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सोमवार यानी 18 मई से पारा और बढ़ने की संभावना है। यह 47 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर भी जा सकता है। 22 मई तक लगातार गर्म हवा चलने की चेतावनी जारी की गई है। रात में भी पारा 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

दोपहर 12 से शाम चार बजे तक बाहर न निकलें
Prayagraj Heatwave Alert चिकित्सकों ने लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने, ओआरएस और तरल पदार्थ लेने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक बिना जरूरत घर से बाहर न जाएं। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।

क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी?
Prayagraj Heatwave Alert इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वायुमंडलीय एवं समुद्र अध्ययन केंद्र के प्रमुख प्रो. शैलेंद्र राय का कहना है कि पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी गर्म हवा के प्रभाव के कारण पूरे उत्तर प्रदेश में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। प्रयागराज व आसपास का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है।
लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज निंदनीय: सुशील पाण्डेय कान्हजी
संजीव सिंह बलिया, 18 मई, 2026 — समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष व प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्हजी ने कहा है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने पार्टी की ओर से इसकी कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत मुआवजा व जवाबदेही की मांग की है। कान्हजी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। सरकार को संवाद और संवेदनशीलता से समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि बल प्रयोग कर। किसी भी व्यवस्थित प्रक्रिया के बिना हिंसा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह नागरिकों के विश्वास को कमज़ोर करता है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता समाज लोकतंत्र और न्यायपालिका का अहम स्तम्भ है। वकील न केवल न्याय दिलाते हैं, बल्कि संविधान और कानून की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के चैम्बरों पर बुलडोजर चलाना केवल भवन नष्ट करना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता समाज के सम्मान पर सीधा आघात है। सपा नेता ने कहा कि लखनऊ में जिस प्रकार कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अधिवक्ताओं के अधिकारों और सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कान्हजी ने मांग की कि सरकार घटना की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे। समाजवादी पार्टी की ओर से यह भी आग्रह किया गया कि भविष्य में इस तरह की कार्यवाही से पहले संबंधित संगठनों से बातचीत की जाए और संवेदनशीलता के साथ विवादों का हल निकाला जाए ताकि लोकतंत्र की मर्यादा व कानून व्यवस्था बनी रहे।
लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज निंदनीय: सुशील पाण्डेय कान्हजी
संजीव सिंह बलिया, 18 मई, 2026 — समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष व प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्हजी ने कहा है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने पार्टी की ओर से इसकी कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत मुआवजा व जवाबदेही की मांग की है। कान्हजी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। सरकार को संवाद और संवेदनशीलता से समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि बल प्रयोग कर। किसी भी व्यवस्थित प्रक्रिया के बिना हिंसा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह नागरिकों के विश्वास को कमज़ोर करता है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता समाज लोकतंत्र और न्यायपालिका का अहम स्तम्भ है। वकील न केवल न्याय दिलाते हैं, बल्कि संविधान और कानून की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के चैम्बरों पर बुलडोजर चलाना केवल भवन नष्ट करना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता समाज के सम्मान पर सीधा आघात है। सपा नेता ने कहा कि लखनऊ में जिस प्रकार कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अधिवक्ताओं के अधिकारों और सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कान्हजी ने मांग की कि सरकार घटना की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे। समाजवादी पार्टी की ओर से यह भी आग्रह किया गया कि भविष्य में इस तरह की कार्यवाही से पहले संबंधित संगठनों से बातचीत की जाए और संवेदनशीलता के साथ विवादों का हल निकाला जाए ताकि लोकतंत्र की मर्यादा व कानून व्यवस्था बनी रहे।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन

मुंबई। ग़ज़ल गायक पद्मभूषण पंकज उधास की 75वीं जयंती के अवसर पर रविवार को पेडर रोड स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट के सामने वाले चौक का आधिकारिक रूप से “पद्मभूषण पंकज उधास चौक” नामकरण किया गया। साथ ही कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथो  इस चौक पर स्थापित पंकज उधास के भित्तिचित्र स्मारक (म्युरल) का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर उधास परिवार, वरिष्ठ गायक-संगीतकार तथा बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक हरिहरन,सोनू निगम, पापोन  तथा संगीतकार-गायक सलीम मर्चंट  के साथ समाजसेविका श्रीमती मंजू जी  लोढ़ा भी उपस्थित थीं।बइस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा, “पेडर रोड क्षेत्र में पंकज उधास का लंबे समय तक निवास रहा। उनके परिवार की इच्छा थी कि इस परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्थायी स्मारक बनाया जाए। इसके लिए मैंने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रयास शुरू किए थे। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन और मुंबई महानगरपालिका के सहयोग से यह भित्तिचित्र स्मारक तैयार किया गया है। यह चौक अब संगीत और ग़ज़ल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। स्मारक में पंकज उधास के अमर गीतों के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक उनकी ग़ज़लों का आनंद ले सकेंगे।”
कार्यक्रम में पढ़कर सुनाए गए संदेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पंकज उधास की मधुर और संवेदनशील आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और ग़ज़ल गायकी को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘चिट्ठी आई है’ जैसे उनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में जीवित हैं।”
गायक हरिहरन ने भी पंकज उधास को याद करते हुए कहा, “पंकजजी ने ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी कई ग़ज़लें आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।”
गायक पापोन ने पंकज उधास के सरल स्वभाव को याद करते हुए कहा, “मैं उनसे उम्र में बहुत छोटा था, फिर भी वे मुझे हमेशा आदरपूर्वक ‘आप’ कहकर संबोधित करते थे।” संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पुत्र आदिनाथ मंगेशकर ने उधास और मंगेशकर परिवार के दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरा पहला फोटो लता मंगेशकर जी  की गोद में है और उसमें पंकजजी भी मौजूद हैं। हमारे घर का गणेशोत्सव उनकी उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता था।”
गायक सोनू निगम ने भी अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा, “मेरी माँ हमेशा पंकज उधास के गीत सुना करती थीं। बाल कलाकार रहते हुए मैंने उनकी ग़ज़लों के शब्द और धुन दोनों याद कर लिए थे।”
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में पंकज उधास ने 50 से अधिक एल्बम और 1,000 से ज्यादा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और वर्ष 2025 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
पंकज उधास की यादों से पेडर रोड क्षेत्र भावुक माहौल में डूबा हुआ था। उन्होंने भारतीय ग़ज़ल को सात समंदर पार तक पहुँचाया और उनके प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं। समाजसेविका मंजू लोढ़ा ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे महान गायक का स्मारक और चौक होना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज़ की कोमलता और विरह की भावना आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।
गर्म हवा व लू से बचाव के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी की एडवाइजरी

लू से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को अपनाएं जनसामान्य

रितेश मिश्रा
हरदोई जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा लगातार बढ़ रही गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव के उपाय बताए गए हैं। जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देशन में एडवाइजरी जारी की गई है।
   अपर जिलाधिकारी(वि ०/रा०)/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान दिनांक 18.05.2026 के अनुसार दिनांक 20,21 और 22.05.2026 को उष्ण लहर लू चलने की अधिक संभावना और आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने और  तापमान में वृद्धि रहने की भी संभावना है। ऐसे में लोगों को हीटवेब से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां कर ली जाएं। उन्होंने हीटवेब से बचाव को लेकर जनसामान्य के बीच जागरूता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जब वातावरण का तापमाप 37 डिग्री सेल्सियस से 3-4 डिग्री अधिक पहुंच जाता है तो उसे हीटवेब या लू कहते हैं।
आपदा विशेषज्ञ ज्ञान दीप शर्मा ने बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर, जिनसे दोपहर के समय गर्म हवाएं आतीं हैं, काले परदे लगाकर रखना चाहिए। स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।
उन्होंने बचाव के बारे में बताते हुए कहा कि धूप में खड़े वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़ें। खाना बनाते समय घर के खिड़की दरवाजे आदि खुले रखें जिससे हवा का आना जाना बना रहे। नशीले पदार्थों, शराब अथवा अल्कोहल से बचें। उच्च प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें तथा बासी भोजन कतई न इस्तेमाल करें इसके साथ ही संतुलित व हल्का आहार लें। दोपहर के समय यदि बहुत आवश्यक हो तभी घर से धूप में बाहर निकलें अन्यथा धूप में जाने से बचें और यदि जाना ही पड़े तो सिर को जरूर ढकें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि अभी आगे गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा इसलिए गर्मी से बचाव के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना चाहिए।

कब लगती है लू

गर्मी में शरीर के द्रव्य बाॅडी फ्ल्यूड सूखने लगते हैं। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुानरी बीमारी, मोटापा, पार्किंसस रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डाॅययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सवाधान रहें।
लू के लक्षण
गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में  तेजी,व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना  अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त यमुनानगर द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्तता पाये जाने के दृष्टिगत थाना प्रभारी घूरपुर

विश्वनाथ प्रताप सिंह



प्रयागराज,आवेदक शिकायतकर्ता कमलेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम सेन्धूवार थाना घूरपुर के शिकायती प्रार्थना पत्र अंतर्गत थाना घूरपुर पर नियुक्त प्रभारी निरीक्षक  दिनेश सिंह द्वारा गलत तरीके से एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए एक पक्ष का अनुचित पक्ष लेते हुए तीन लोगों को थाने में लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पूर्व में भी समय-समय पर थाना प्रभारियों को अकारण बिना अपराध के किसी को थाने पर नहीं लाने हेतु स्पष्ट आदेश दिए गए हैंl उक्त सम्बन्ध में जांच सहायक पुलिस आयुक्त बारा वेद व्यास मिश्र द्वारा की गई। जांचोपरांत थाना प्रभारी घूरपुर को निलम्बित करते हुए विभागीय जांच कार्यवाही आसन्न की गई है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने 333 शिक्षकों व पर्यवेक्षिकाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, कहा- अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं योजनाएं


यह अवसर न केवल नव नियुक्त अभ्यर्थियों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि राज्य के समग्र और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। राज्य सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुँचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है, जो कई कारणों से विकास की गति में पीछे छूट गया था। नवनियुक्त कर्मी गाँव-गाँव और घर-घर जाकर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करें। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं है, बल्कि आपके माध्यम से सरकार गाँव-गाँव, घर-घर और हर व्यक्ति तक पहुँचना चाहती है।

खासकर महिलाओं और बच्चों तक, जिन्हें हमें आने वाले भविष्य के लिए तैयार करना है। सीमित दायरे में जीवन जीने वाले इन लोगों को बदलते परिवेश के अनुरूप आगे बढ़ाना, उनका सशक्तिकरण करना, यह बड़ी चुनौती आपके कंधों पर होगी। उक्त बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कही। वे आज झारखंड मंत्रालय में आयोजित नव नियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों का नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

नियुक्ति पत्र वितरण समारोह सभागार उत्साह, उमंग एवं गौरवपूर्ण माहौल से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज और राज्य के विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं, वहीं महिला पर्यवेक्षकाएं समाज में महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा महिला एवं बाल विकास योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लगातार नियुक्तियां की जा रही है।

पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया एवं शिक्षा व्यवस्था का हो रहा सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक जैसी घटनाओं से नियुक्तियाँ बाधित हो रही हैं, वहीं झारखंड सरकार ने पिछले चार महीनों में शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक और विगत दो वर्षों में 16 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है, जबकि पूर्व के कार्यकाल में सरकारी, अनुबंध एवं निजी संस्थानों में करीब दो लाख से अधिक नियुक्तियां की गईं है। वर्ष 2024 में वर्तमान सरकार के गठन के बाद से मानव संसाधन को सशक्त करने के लिए विभिन्न विभागों में लगातार नियुक्तियाँ की गई हैं, और यह प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी- कभी ऐसा भी होता है कि कुछ शिक्षक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं। ऐसी सोच के साथ समग्र विकास संभव नहीं है। यदि हम अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से कंधों पर लें, तभी बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहल इसीलिए की गई है, ताकि वर्षों से हमारी शिक्षा व्यवस्था पर लगे कलंक को मिटाया जा सके और बच्चों को बेहतर भविष्य दिया जा सके।

मंईयाँ सम्मान योजना का मिल रहा लाभ, बेटियां बन रही कलेक्टर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधी आबादी को मुख्यधारा में शामिल किए बिना राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। वर्तमान में राज्य की लगभग 60 लाख महिलाओं को झारखण्ड मुख्यमंत्री मंईयाँ सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति माह वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि इस योजना का पाँच से दस प्रतिशत लोग गलत तरीक़े से लाभ ले रहें हों, लेकिन ऐसे लोगों को रोकने के लिए 90 प्रतिशत लोगों को प्रभावित नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि इस योजना का लाभ लेने वाली बेटियाँ आज कलेक्टर जैसे पदों तक पहुँच रही हैं। महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का कार्य भी निरंतर हो रहा है। अब वह समय बीत चुका है जब महिलाओं को चारदीवारी के भीतर सीमित रखा जाता था। आज उन्हें आगे आना है और समाज को भी उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है।

दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को तराशना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों से कहा कि आपको दुर्गम क्षेत्रों में जाना होगा और ऐसे बच्चों के साथ काम करना होगा, जिनकी परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण होंगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे आपके हाथों में कच्ची मिट्टी की तरह होंगे। उन्हें तराशने, आकार देने और उनके भविष्य को संवारने की पूरी जिम्मेदारी आपके पास होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भीतर कुपोषण जैसी समस्या और उसके निराकरण संबंधी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं से राज्य को मुक्त कराना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। आप सभी युवा हैं, ऊर्जा से भरपूर हैं, और आपके पास समय तथा अवसर भी हैं।

पूरी निष्ठा, समर्पण और संकल्प के साथ यदि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, तो न केवल आपका भविष्य उज्ज्वल होगा, बल्कि आपका परिवार, समाज और पूरा झारखंड मजबूत होगा। जिस प्रकार की खुशी आपको और आपके परिवार को इस नियुक्ति से मिली है, वैसी ही खुशी पूरे झारखंड को मिले—यही मेरी कामना है। आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।

इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री उमा शंकर सिंह, निदेशक प्राथमिक शिक्षा श्री मनोज कुमार रंजन सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में नवनियुक्त अभ्यर्थी एवं उनके परिजन उपस्थित थे।

जैन देरासर में उमड़ा श्रद्धा और वैराग्य का सैलाब, मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह का भावपूर्ण बहुमान

मुंबई। श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन देरासर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य आचार्य श्री लब्धीचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद तथा मुनिराज श्री सर्वेशचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनिराज श्री मंत्रेश सागरजी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब उपस्थित हुआ, जब 81 वर्ष की आयु में दीक्षा अंगीकार करने जा रहे भावी दीक्षार्थी महेंद्रभाई मोहनलाल शाह का श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं संघ के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण बहुमान किया गया। इस अवसर पर पूरे सभागार में श्रद्धा, सम्मान और वैराग्य की भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके त्यागमय एवं धर्मनिष्ठ जीवन को नमन किया। अपने संबोधन में संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि महेंद्रभाई शाह का त्याग, धर्म के प्रति अटूट आस्था और संयममय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में 81 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना अत्यंत दुर्लभ, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। मुंबई में अपनी दीक्षा की पवित्र तैयारी कर रहे मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह अपनी सरलता, विनम्रता और गहन धार्मिक निष्ठा से सभी के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची साधना, वैराग्य और आत्मजागृति के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहर मोतीलाल शाह, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह सहित जयेशभाई, लब्धीशिल्पाबेन, विलास शाह एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गुरु भगवंतों के आशीर्वचन, धर्ममय वातावरण और भावी दीक्षार्थी के बहुमान ने पूरे आयोजन को अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बना दिया।
जैन देरासर में उमड़ा श्रद्धा और वैराग्य का सैलाब, मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह का भावपूर्ण बहुमान

मुंबई। श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन देरासर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य आचार्य श्री लब्धीचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद तथा मुनिराज श्री सर्वेशचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनिराज श्री मंत्रेश सागरजी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब उपस्थित हुआ, जब 81 वर्ष की आयु में दीक्षा अंगीकार करने जा रहे भावी दीक्षार्थी महेंद्रभाई मोहनलाल शाह का श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं संघ के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण बहुमान किया गया। इस अवसर पर पूरे सभागार में श्रद्धा, सम्मान और वैराग्य की भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके त्यागमय एवं धर्मनिष्ठ जीवन को नमन किया। अपने संबोधन में संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि महेंद्रभाई शाह का त्याग, धर्म के प्रति अटूट आस्था और संयममय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में 81 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना अत्यंत दुर्लभ, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। मुंबई में अपनी दीक्षा की पवित्र तैयारी कर रहे मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह अपनी सरलता, विनम्रता और गहन धार्मिक निष्ठा से सभी के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची साधना, वैराग्य और आत्मजागृति के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहर मोतीलाल शाह, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह सहित जयेशभाई, लब्धीशिल्पाबेन, विलास शाह एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गुरु भगवंतों के आशीर्वचन, धर्ममय वातावरण और भावी दीक्षार्थी के बहुमान ने पूरे आयोजन को अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बना दिया।
संगम नगरी में अगले पांच दिनों तक लू का अलर्ट, 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है पारा


विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज, इन दिनों संगम नगरी भीषण गर्मी, उमस और सूर्य की तल्ख किरणों से तप रही है। रविवार की सुबह से ही गर्मी तेज थी, दोपहर में तो सूर्य की आग उगलती किरणों ने शहरवासियों को बेहाल कर दिया। आलम यह था कि लोग घरों में ही दुबके रहे। जो बाहर निकले भी वे शरीर को पूरी तरह से कपड़ों से ढंके रहे। बाजार और सड़कों पर आवाजाही नाममात्र की रही।

लू व भीषण गर्मी से अभी राहत नहीं
शनिवार को भी दिनभर उमस रही। अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम को आर्द्रता घटकर 29 प्रतिशत रह गई। वहीं आज 17 मई को न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस व अधिकतम तापमान 44-45 डिग्री सेल्सिसय के आसपास है। मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक भीषण गर्मी और लू का वर्चस्व रहेगा। पारा लगातार 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने की आशंका है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने का सुझाव दिया है।

18 मई से तापमान और बढ़ने की संभावना
रविवार को अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सोमवार यानी 18 मई से पारा और बढ़ने की संभावना है। यह 47 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर भी जा सकता है। 22 मई तक लगातार गर्म हवा चलने की चेतावनी जारी की गई है। रात में भी पारा 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

दोपहर 12 से शाम चार बजे तक बाहर न निकलें
Prayagraj Heatwave Alert चिकित्सकों ने लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने, ओआरएस और तरल पदार्थ लेने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक बिना जरूरत घर से बाहर न जाएं। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।

क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी?
Prayagraj Heatwave Alert इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वायुमंडलीय एवं समुद्र अध्ययन केंद्र के प्रमुख प्रो. शैलेंद्र राय का कहना है कि पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी गर्म हवा के प्रभाव के कारण पूरे उत्तर प्रदेश में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। प्रयागराज व आसपास का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है।