वि,हि,म,जिला अध्यक्ष ने वृद्ध आश्रम में मनाया अपना मनाया अपना विवाह दिवस

बलरामपुर 27 अप्रैल विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह व श्रीमती आरती देवी ने  वृद्ध आश्रम आबर मे वृद्ध जनों के बीच सेवा कर अपना 28 वा विवाह दिवस बड़े ही धूमधाम से सभी वृद्ध जनों एवं माताओ को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया इस अवसर पर वृद्ध जन माताएं व पुरुष सभी बहुत खुश दिखे जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने कहा कि हमें इनके बीच आने के बाद अपनापन महसूस होता है, उक्त कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीवन गुप्ता जिला उपाध्यक्ष मिथिलेश गिरी जिला मीडिया प्रभारी जय सिंह प्रभु नाथ ने भी सेवा में योगदान किया।
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धनबाद के 20 पुलिसकर्मियों का तबादला रद्द!


झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद जिले के 20 पुलिसकर्मियों के तबादला आदेश को रद्द कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना होगा कि तबादला एक नियमित प्रक्रिया और प्रशासनिक जरूरत हो सकता है, लेकिन इसका उपयोग किसी कर्मचारी को दंड देने के लिए ‘शॉर्टकट’ के रूप में नहीं किया जा सकता. अदालत ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि इन सभी कर्मियों का योगदान उनके मूल स्थान (धनबाद) में तुरंत स्वीकार किया जाए.

सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ मामले का दिया हवाला

अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ’ मामले के कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख किया. जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ लापरवाही के आरोप हैं, तो विभाग को उचित विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और अनुशासनिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए. जांच के बिना सीधे ट्रांसफर का आदेश देना और उसे ‘प्रशासनिक आवश्यकता’ का नाम देना कानूनी रूप से गलत और दुर्भावनापूर्ण है.

RTI ने खोली विभाग की पोल

सुनवाई के दौरान सूरज कुमार, अनुज कुमार सिंह, बलजीत कुमार और कौशल कुमार दुबे समेत 20 याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि उन्हें 24 फरवरी को तबादला किया गया था और 11 मार्च को वर्तमान पद से मुक्त (Relieve) करने का आदेश दिया गया. विभाग ने इसे ‘प्रशासनिक जरूरत’ बताया था, लेकिन जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो सच्चाई कुछ और निकली. आरटीआई के दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि धनबाद एसएसपी ने इन पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के आरोपों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी. बिना किसी औपचारिक जांच या स्पष्टीकरण के किया गया यह तबादला पूरी तरह से दंडात्मक (Punitive) का था.

अधिकारियों को कड़ा संदेश

हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग दंड देने के लिए न करें. अदालत ने तबादला और पद से मुक्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी है. इस फैसले के बाद अब पुलिस महकमे के भीतर हलचल तेज है, क्योंकि यह आदेश भविष्य में उन अधिकारियों के लिए नजीर बनेगा जो बिना प्रक्रिया पूरी किए कर्मियों को इधर-उधर भेज देते हैं.

डीएम ने जनपद के बाढ़ क्षेत्र के अनुश्रवण, फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक कर की समीक्षा
मीरजापुर। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में जिलाधिकारी कार्यालय में जनपद के बाढ़ क्षेत्र के अनुश्रवण हेतु फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक आहूत की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने बाढ़ से सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जनपद में बाढ़ के समय बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करके आवश्यक प्रबन्ध एवं कार्यवाही, बाढ़ निरोधक कार्यों पर बाढ़ के समय आवश्यक सामग्री कार्यस्थल पर पहुंचाने के लिए साधन उपलब्ध कराना, बाढ़ निरोधक कार्यों के क्षतिग्रस्त स्थल पर मरम्मत के लिए मजदूर एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था, बाढ़ निरोधक कार्यों की सुरक्षार्थ आवश्यकता पड़ने पर पीएसी, पुलिस या होमगार्डस द्वारा पेट्रोलिंग का प्रबन्ध, शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ निरोधक कार्यों के क्षतिग्रस्त स्थलों पर जहां रात्रि में भी कार्य करने की आवश्यकता हो, वहां बिजली का उचित प्रबन्ध, जलमग्न क्षेत्रों में वर्षा के पानी को निकालने के लिये पम्पों, डीजल और बिजली इत्यादि की समुचित व्यवस्था, राहत कार्यों से सम्बन्धित विभागों, संस्थानों के समन्वय कर व्यवस्थाएं कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बाढ़ क्षेत्रों में पर्याप्त नाव की व्यवस्था करने हेतु सम्बन्धित को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा वर्षा से पूर्व सभी के टीकाकरण शत प्रतिशत पशुओं को लगवाना सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि जीवन रक्षक दवाएं, एम्बुलेंस सहित सभी व्यवस्थाए कराना सुनिश्चित करेंगे। लोक निर्माण विभाग खण्ड-2 को निर्देशित करते हुए कहा कि जिन रास्तो पर जलभराव हो जाता है उन रास्तों पर आवागमन के लिए पुलिया, सड़क की मरम्मतीकरण कराना सुनिश्चित करें। टेण्डर आदि के बारे में जिलाधिकारी ने कहा कि समय रहते करा लिया जाए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक, मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजय कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व देवेन्द्र प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक नगर नितेश सिंह, उप जिलाधिकारी सदर गुलाब चन्द्र,  सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहें।
कर्नलगंज तहसील में अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना स्थगित, बार-बेंच विवाद समाप्त

कर्नलगंज, गोंडा। तहसील परिसर में बीते 27 फरवरी से चल रहा अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को प्रशासनिक आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया। आंदोलन समाप्त होने से क्षेत्रीय जनता, वादकारियों और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से जारी धरने के कारण तहसील स्तर पर न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

बार एसोसिएशन कर्नलगंज के अध्यक्ष श्यामधर शुक्ल, मंत्री पवन कुमार शुक्ल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकीनाथ तिवारी ने बताया कि तहसील अधिकारियों की कार्यशैली और समस्याओं के समाधान में लापरवाही से अधिवक्ता, वादकारी तथा आम जनता प्रभावित हो रही थी। इसी के विरोध में 27 फरवरी से बार एसोसिएशन के बैनर तले धरना शुरू किया गया था।

मंगलवार को उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा की मौजूदगी में अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। बैठक में अधिवक्ताओं द्वारा उठाई गई समस्याओं पर सकारात्मक चर्चा हुई और प्रशासन की ओर से शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया। इसके बाद बार एसोसिएशन ने धरना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।

धरना समाप्त होने के साथ ही बार और बेंच के बीच चला आ रहा गतिरोध भी खत्म हो गया है। तहसील परिसर में अब सामान्य कार्य व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद है, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

स्थानीय नागरिकों और वादकारियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि अब उनके जरूरी कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे। वहीं अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि प्रशासन भविष्य में समस्याओं का समयबद्ध समाधान करेगा, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

संदिग्ध परिस्थितियों में युवती ने फांसी लगाकर दी जान
मीरजापुर। ड्रमंडगंज थाना 
क्षेत्र के नौगवां ग्राम पंचायत के अमहा गांव में मंगलवार सुबह कच्चे मकान के बंडेर में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर युवती ने जान दे दी। अमहा गांव निवासी स्वर्गीय सुखराज कोल की 20 वर्षीया पुत्री सुमन अपने कच्चे मकान के बंडेर में प्लास्टिक की रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।घटना की जानकारी होने पर परिजनों में चीख पुकार मच गई। सूचना पर पहुंचे एसआई विनोद कुमार सिंह ने घटना की जांच पड़ताल करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।एसआई विनोद कुमार सिंह ने बताया कि युवती ने प्लास्टिक की रस्सी से गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया है। युवती के मात पिता की मौत हो चुकी है। युवती के चाचा देवनारायण देखभाल करते थे।मृतका तीन बहनों में दूसरे नंबर पर थी। परिजनों ने बताया कि आगामी 13 मई को प्रयागराज के बरमपुर दिघिया गांव में शादी तय हुई थी। युवती ने किन कारणों से जान दी पता नही चल सका।थानाध्यक्ष भारत सुमन ने बताया कि मृतका के चाचा की तहरीर पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है घटना की जांच की जा रही है।
*औचक निरीक्षण में सख्त दिखीं आयुक्त: खराब वेंटिलेटर और ICU तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश*
*बाबू ईश्वर शरण अस्पताल में व्यवस्थाओं पर कड़ा रुख, मरीजों की सुविधाओं को प्राथमिकता*

*साफ-सफाई, पेयजल और उपचार व्यवस्था सुधारने के निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी*

*गोंडा, 28 अप्रैल 2026* – मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालय बाबू ईश्वर शरण अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में संचालित विभिन्न व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

आयुक्त ने सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी तथा वार्डों की साफ-सफाई व्यवस्था की जांच की। इस दौरान उन्होंने मरीजों के बेड पर बिछी चादरों की स्थिति देखी और निर्देश दिया कि सभी मरीजों को स्वच्छ एवं नियमित रूप से बदली जाने वाली चादरें उपलब्ध कराई जाएं। अस्पताल में सभी वार्डों में लगे कूलरों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई को और बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने वेंटिलेटर मशीनों की स्थिति भी देखी। कुछ वेंटिलेटर खराब पाए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को निर्देश दिया कि खराब पड़े सभी वेंटिलेटर मशीनों व अन्य चिकित्सा उपकरणों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा ICU को युद्धस्तर पर पूर्ण रूप से क्रियाशील किया जाए, ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इसके अलावा उन्होंने मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज और उनके तीमारदारों को मूलभूत सुविधाएं आसानी से मिलनी चाहिए।

आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्पष्ट कहा कि मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि व्यवस्थाओं में सुधार लाते हुए मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
मेधावी छात्रों की होती है विशिष्ट पहचान : राम गनेश तिवारी -

–आजाद नगर में मेधावी छात्रों का हुआ सम्मान समारोह
बेलसर -( गोंडा)।
बेलसर ब्लाक स्थित राजनरायन रामगनेश इंटर कॉलेज आजाद नगर   में मंगलवार को कालेज में परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदर्शन करने  वाले मेधावी छात्र/ छात्राओं को संस्था के संस्थापक पं. राम गनेश तिवारी ने माला पहना कर  सम्मानित किया। इस मौके पर श्रुत तिवारी उपस्थित छात्र-छात्राओं को  परीक्षा में प्रश्न पत्र हल करने के लिए  टिप्स  देते कहा कि समाज में मेधावी बच्चों का सम्मान होने के साथ मेहनत करने वाले बच्चों की अलग पहचान होती है। इस अवसर पर कालेज के इंटरमीडिएट में प्रथम स्थान कु. प्रियांशी, द्वितीय कु. सीमा, तृतीय स्थान आदर्श सिंह एवं  हाई स्कूल में प्रथम स्थान पर रहे अखिलेश वर्मा, द्वितीय गौरव तिवारी, तृतीय  आकाश कुमार को माल्यार्पण के साथ प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज की प्रधानाचार्य विमलेश शुक्ला, श्रीमतीअनीता शुक्ला, कु. कंचन उपाध्याय, पवन कुमार तिवारी अयोध्या प्रसाद प्रजापति, अवनीश तिवारी, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, छात्र - छात्राएं व अभिभावक  उपस्थित रहे।
हरदोई में महिला अभिभावक से अभद्रता पर मुक़दमा दर्ज
रितेश मिश्रा
हरदोई में शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में एक महिला अभिभावक के साथ हुई अभद्रता ने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया।इस चर्चित मामले में पुलिस ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।पीड़िता नीलम वर्मा की तहरीर पर थाना कोतवाली शहर में दर्ज इस FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 के साथ-साथ SC/ST एक्ट की गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। 26 अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने जैसे ही इस पूरे कांड को उजागर किया, प्रशासन की नींद टूटी और कार्रवाई का पहिया तेजी से घूमने लगा।

दरअसल, पूरा मामला 24 अप्रैल का है, जब नीलम वर्मा अपनी बेटी अलीशा के भविष्य की चिंता लेकर स्कूल पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि शिक्षा के इस मंदिर में उसे सम्मान नहीं,बल्कि अपमान मिलेगा।आरोप है कि कॉपियों की खरीद के नाम पर उस पर आर्थिक दबाव बनाया गया। जब उसने मजबूरी में कुछ दिन की मोहलत मांगी, तो स्कूल प्रबंधन का असली चेहरा सामने आ गया। पीड़िता के मुताबिक, उसके साथ न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया गया, बल्कि उसे अपमानजनक शब्दों और कथित जातिसूचक टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई—और 26 अप्रैल को जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, पूरे जिले में गुस्से की लहर दौड़ गई।

वीडियो सामने आते ही माहौल गरमा गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और स्कूल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की और खुद टीम के साथ स्कूल पहुंचकर पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई।जांच के दौरान न सिर्फ घटना की सच्चाई खंगाली गई,बल्कि विद्यालय के संचालन और भवन के मानकों को भी परखा गया।

प्रारंभिक जांच में प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद BSA ने खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) को स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय की प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। यहीं नहीं, उन्होंने सख्ती दिखाते हुए स्कूल की प्रबंधक ममता मिश्रा के विद्यालय परिसर में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी, ताकि जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके। आदेश में साफ चेतावनी भी दी गई कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोनभद्र: रेणुका नदी के तट पर वृक्षारोपण के नाम पर लाखों का 'खेला', मानकों की उड़ी धज्जियां
ओबरा/सोनभद्र।उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर करोड़ों पौधे रोपकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। रेणुका नदी के तट पर पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर भ्रष्टाचार की ऐसी 'इबारत' लिखी गई है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए।
तकनीक नहीं, ये तो पौधों की 'बलि' है
मौके पर मौजूद हकीकत विभागीय आंकड़ों से कोसों दूर है। बोर्ड पर चिल्ला-चिल्ला कर 6112 'बोना नाली' बनाने का दावा किया गया है, लेकिन धरातल पर अधिकांश गड्ढे खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि जहाँ पेड़ लगाए भी गए हैं, वहां वैज्ञानिक मानकों को ताक पर रख दिया गया है। विभागीय नियमानुसार जिन पौधों के बीच 5 मीटर (लगभग 16 फीट) की दूरी होनी चाहिए थी, वहां 1 मीटर के दायरे में ही 25 से 30 पौधों को ठूंस दिया गया है।
भ्रष्टाचार का 'सघन' मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही स्थान पर इतने पौधे लगाना उनकी 'हत्या' करने जैसा है। बिना खाद, बिना सिंचाई और बिना पर्याप्त जगह के ये पौधे कुछ ही दिनों में दम तोड़ देंगे। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे 15.28 हेक्टेयर क्षेत्र में गड्ढे खोदने और नाली बनाने की मजदूरी बचाने के लिए विभाग ने एक ही जगह पौधों की 'खानापूर्ति' कर लक्ष्य पूरा दिखा दिया है।
गायब है 'सुरक्षा खाई', दांव पर पर्यावरण
नदी के किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बोर्ड पर 1600 मीटर सुरक्षा खाई (CPT) बनाने का विवरण अंकित है, लेकिन मौके पर इसकी स्थिति नगण्य है। सुरक्षा के अभाव में आवारा पशु इन पौधों को अपना निवाला बना रहे हैं। करोड़ों के बजट वाले इस प्रोजेक्ट में न तो सिंचाई की व्यवस्था दिख रही है और न ही पौधों के संवर्धन के लिए कोई खाद या कीटनाशक का प्रयोग किया गया है।
हरदोई में महिला अभिभावक से अभद्रता पर मुक़दमा दर्ज
रितेश मिश्रा
हरदोई में शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में एक महिला अभिभावक के साथ हुई अभद्रता ने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया।इस चर्चित मामले में पुलिस ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।पीड़िता नीलम वर्मा की तहरीर पर थाना कोतवाली शहर में दर्ज इस FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 के साथ-साथ SC/ST एक्ट की गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। 26 अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने जैसे ही इस पूरे कांड को उजागर किया, प्रशासन की नींद टूटी और कार्रवाई का पहिया तेजी से घूमने लगा।

दरअसल, पूरा मामला 24 अप्रैल का है, जब नीलम वर्मा अपनी बेटी अलीशा के भविष्य की चिंता लेकर स्कूल पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि शिक्षा के इस मंदिर में उसे सम्मान नहीं,बल्कि अपमान मिलेगा।आरोप है कि कॉपियों की खरीद के नाम पर उस पर आर्थिक दबाव बनाया गया। जब उसने मजबूरी में कुछ दिन की मोहलत मांगी, तो स्कूल प्रबंधन का असली चेहरा सामने आ गया। पीड़िता के मुताबिक, उसके साथ न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया गया, बल्कि उसे अपमानजनक शब्दों और कथित जातिसूचक टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई—और 26 अप्रैल को जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, पूरे जिले में गुस्से की लहर दौड़ गई।

वीडियो सामने आते ही माहौल गरमा गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और स्कूल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की और खुद टीम के साथ स्कूल पहुंचकर पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई।जांच के दौरान न सिर्फ घटना की सच्चाई खंगाली गई,बल्कि विद्यालय के संचालन और भवन के मानकों को भी परखा गया।

प्रारंभिक जांच में प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद BSA ने खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) को स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय की प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। यहीं नहीं, उन्होंने सख्ती दिखाते हुए स्कूल की प्रबंधक ममता मिश्रा के विद्यालय परिसर में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी, ताकि जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके। आदेश में साफ चेतावनी भी दी गई कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वि,हि,म,जिला अध्यक्ष ने वृद्ध आश्रम में मनाया अपना मनाया अपना विवाह दिवस

बलरामपुर 27 अप्रैल विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह व श्रीमती आरती देवी ने  वृद्ध आश्रम आबर मे वृद्ध जनों के बीच सेवा कर अपना 28 वा विवाह दिवस बड़े ही धूमधाम से सभी वृद्ध जनों एवं माताओ को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया इस अवसर पर वृद्ध जन माताएं व पुरुष सभी बहुत खुश दिखे जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने कहा कि हमें इनके बीच आने के बाद अपनापन महसूस होता है, उक्त कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीवन गुप्ता जिला उपाध्यक्ष मिथिलेश गिरी जिला मीडिया प्रभारी जय सिंह प्रभु नाथ ने भी सेवा में योगदान किया।
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धनबाद के 20 पुलिसकर्मियों का तबादला रद्द!


झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद जिले के 20 पुलिसकर्मियों के तबादला आदेश को रद्द कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना होगा कि तबादला एक नियमित प्रक्रिया और प्रशासनिक जरूरत हो सकता है, लेकिन इसका उपयोग किसी कर्मचारी को दंड देने के लिए ‘शॉर्टकट’ के रूप में नहीं किया जा सकता. अदालत ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि इन सभी कर्मियों का योगदान उनके मूल स्थान (धनबाद) में तुरंत स्वीकार किया जाए.

सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ मामले का दिया हवाला

अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ’ मामले के कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख किया. जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ लापरवाही के आरोप हैं, तो विभाग को उचित विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और अनुशासनिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए. जांच के बिना सीधे ट्रांसफर का आदेश देना और उसे ‘प्रशासनिक आवश्यकता’ का नाम देना कानूनी रूप से गलत और दुर्भावनापूर्ण है.

RTI ने खोली विभाग की पोल

सुनवाई के दौरान सूरज कुमार, अनुज कुमार सिंह, बलजीत कुमार और कौशल कुमार दुबे समेत 20 याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि उन्हें 24 फरवरी को तबादला किया गया था और 11 मार्च को वर्तमान पद से मुक्त (Relieve) करने का आदेश दिया गया. विभाग ने इसे ‘प्रशासनिक जरूरत’ बताया था, लेकिन जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो सच्चाई कुछ और निकली. आरटीआई के दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि धनबाद एसएसपी ने इन पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के आरोपों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी. बिना किसी औपचारिक जांच या स्पष्टीकरण के किया गया यह तबादला पूरी तरह से दंडात्मक (Punitive) का था.

अधिकारियों को कड़ा संदेश

हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग दंड देने के लिए न करें. अदालत ने तबादला और पद से मुक्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी है. इस फैसले के बाद अब पुलिस महकमे के भीतर हलचल तेज है, क्योंकि यह आदेश भविष्य में उन अधिकारियों के लिए नजीर बनेगा जो बिना प्रक्रिया पूरी किए कर्मियों को इधर-उधर भेज देते हैं.

डीएम ने जनपद के बाढ़ क्षेत्र के अनुश्रवण, फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक कर की समीक्षा
मीरजापुर। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में जिलाधिकारी कार्यालय में जनपद के बाढ़ क्षेत्र के अनुश्रवण हेतु फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक आहूत की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने बाढ़ से सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जनपद में बाढ़ के समय बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करके आवश्यक प्रबन्ध एवं कार्यवाही, बाढ़ निरोधक कार्यों पर बाढ़ के समय आवश्यक सामग्री कार्यस्थल पर पहुंचाने के लिए साधन उपलब्ध कराना, बाढ़ निरोधक कार्यों के क्षतिग्रस्त स्थल पर मरम्मत के लिए मजदूर एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था, बाढ़ निरोधक कार्यों की सुरक्षार्थ आवश्यकता पड़ने पर पीएसी, पुलिस या होमगार्डस द्वारा पेट्रोलिंग का प्रबन्ध, शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ निरोधक कार्यों के क्षतिग्रस्त स्थलों पर जहां रात्रि में भी कार्य करने की आवश्यकता हो, वहां बिजली का उचित प्रबन्ध, जलमग्न क्षेत्रों में वर्षा के पानी को निकालने के लिये पम्पों, डीजल और बिजली इत्यादि की समुचित व्यवस्था, राहत कार्यों से सम्बन्धित विभागों, संस्थानों के समन्वय कर व्यवस्थाएं कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बाढ़ क्षेत्रों में पर्याप्त नाव की व्यवस्था करने हेतु सम्बन्धित को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा वर्षा से पूर्व सभी के टीकाकरण शत प्रतिशत पशुओं को लगवाना सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि जीवन रक्षक दवाएं, एम्बुलेंस सहित सभी व्यवस्थाए कराना सुनिश्चित करेंगे। लोक निर्माण विभाग खण्ड-2 को निर्देशित करते हुए कहा कि जिन रास्तो पर जलभराव हो जाता है उन रास्तों पर आवागमन के लिए पुलिया, सड़क की मरम्मतीकरण कराना सुनिश्चित करें। टेण्डर आदि के बारे में जिलाधिकारी ने कहा कि समय रहते करा लिया जाए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक, मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजय कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व देवेन्द्र प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक नगर नितेश सिंह, उप जिलाधिकारी सदर गुलाब चन्द्र,  सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहें।
कर्नलगंज तहसील में अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना स्थगित, बार-बेंच विवाद समाप्त

कर्नलगंज, गोंडा। तहसील परिसर में बीते 27 फरवरी से चल रहा अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को प्रशासनिक आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया। आंदोलन समाप्त होने से क्षेत्रीय जनता, वादकारियों और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से जारी धरने के कारण तहसील स्तर पर न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

बार एसोसिएशन कर्नलगंज के अध्यक्ष श्यामधर शुक्ल, मंत्री पवन कुमार शुक्ल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकीनाथ तिवारी ने बताया कि तहसील अधिकारियों की कार्यशैली और समस्याओं के समाधान में लापरवाही से अधिवक्ता, वादकारी तथा आम जनता प्रभावित हो रही थी। इसी के विरोध में 27 फरवरी से बार एसोसिएशन के बैनर तले धरना शुरू किया गया था।

मंगलवार को उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा की मौजूदगी में अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। बैठक में अधिवक्ताओं द्वारा उठाई गई समस्याओं पर सकारात्मक चर्चा हुई और प्रशासन की ओर से शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया। इसके बाद बार एसोसिएशन ने धरना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।

धरना समाप्त होने के साथ ही बार और बेंच के बीच चला आ रहा गतिरोध भी खत्म हो गया है। तहसील परिसर में अब सामान्य कार्य व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद है, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

स्थानीय नागरिकों और वादकारियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि अब उनके जरूरी कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे। वहीं अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि प्रशासन भविष्य में समस्याओं का समयबद्ध समाधान करेगा, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

संदिग्ध परिस्थितियों में युवती ने फांसी लगाकर दी जान
मीरजापुर। ड्रमंडगंज थाना 
क्षेत्र के नौगवां ग्राम पंचायत के अमहा गांव में मंगलवार सुबह कच्चे मकान के बंडेर में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर युवती ने जान दे दी। अमहा गांव निवासी स्वर्गीय सुखराज कोल की 20 वर्षीया पुत्री सुमन अपने कच्चे मकान के बंडेर में प्लास्टिक की रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।घटना की जानकारी होने पर परिजनों में चीख पुकार मच गई। सूचना पर पहुंचे एसआई विनोद कुमार सिंह ने घटना की जांच पड़ताल करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।एसआई विनोद कुमार सिंह ने बताया कि युवती ने प्लास्टिक की रस्सी से गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया है। युवती के मात पिता की मौत हो चुकी है। युवती के चाचा देवनारायण देखभाल करते थे।मृतका तीन बहनों में दूसरे नंबर पर थी। परिजनों ने बताया कि आगामी 13 मई को प्रयागराज के बरमपुर दिघिया गांव में शादी तय हुई थी। युवती ने किन कारणों से जान दी पता नही चल सका।थानाध्यक्ष भारत सुमन ने बताया कि मृतका के चाचा की तहरीर पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है घटना की जांच की जा रही है।
*औचक निरीक्षण में सख्त दिखीं आयुक्त: खराब वेंटिलेटर और ICU तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश*
*बाबू ईश्वर शरण अस्पताल में व्यवस्थाओं पर कड़ा रुख, मरीजों की सुविधाओं को प्राथमिकता*

*साफ-सफाई, पेयजल और उपचार व्यवस्था सुधारने के निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी*

*गोंडा, 28 अप्रैल 2026* – मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालय बाबू ईश्वर शरण अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में संचालित विभिन्न व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

आयुक्त ने सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी तथा वार्डों की साफ-सफाई व्यवस्था की जांच की। इस दौरान उन्होंने मरीजों के बेड पर बिछी चादरों की स्थिति देखी और निर्देश दिया कि सभी मरीजों को स्वच्छ एवं नियमित रूप से बदली जाने वाली चादरें उपलब्ध कराई जाएं। अस्पताल में सभी वार्डों में लगे कूलरों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई को और बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने वेंटिलेटर मशीनों की स्थिति भी देखी। कुछ वेंटिलेटर खराब पाए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को निर्देश दिया कि खराब पड़े सभी वेंटिलेटर मशीनों व अन्य चिकित्सा उपकरणों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा ICU को युद्धस्तर पर पूर्ण रूप से क्रियाशील किया जाए, ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इसके अलावा उन्होंने मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज और उनके तीमारदारों को मूलभूत सुविधाएं आसानी से मिलनी चाहिए।

आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्पष्ट कहा कि मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि व्यवस्थाओं में सुधार लाते हुए मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
मेधावी छात्रों की होती है विशिष्ट पहचान : राम गनेश तिवारी -

–आजाद नगर में मेधावी छात्रों का हुआ सम्मान समारोह
बेलसर -( गोंडा)।
बेलसर ब्लाक स्थित राजनरायन रामगनेश इंटर कॉलेज आजाद नगर   में मंगलवार को कालेज में परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदर्शन करने  वाले मेधावी छात्र/ छात्राओं को संस्था के संस्थापक पं. राम गनेश तिवारी ने माला पहना कर  सम्मानित किया। इस मौके पर श्रुत तिवारी उपस्थित छात्र-छात्राओं को  परीक्षा में प्रश्न पत्र हल करने के लिए  टिप्स  देते कहा कि समाज में मेधावी बच्चों का सम्मान होने के साथ मेहनत करने वाले बच्चों की अलग पहचान होती है। इस अवसर पर कालेज के इंटरमीडिएट में प्रथम स्थान कु. प्रियांशी, द्वितीय कु. सीमा, तृतीय स्थान आदर्श सिंह एवं  हाई स्कूल में प्रथम स्थान पर रहे अखिलेश वर्मा, द्वितीय गौरव तिवारी, तृतीय  आकाश कुमार को माल्यार्पण के साथ प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज की प्रधानाचार्य विमलेश शुक्ला, श्रीमतीअनीता शुक्ला, कु. कंचन उपाध्याय, पवन कुमार तिवारी अयोध्या प्रसाद प्रजापति, अवनीश तिवारी, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, छात्र - छात्राएं व अभिभावक  उपस्थित रहे।
हरदोई में महिला अभिभावक से अभद्रता पर मुक़दमा दर्ज
रितेश मिश्रा
हरदोई में शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में एक महिला अभिभावक के साथ हुई अभद्रता ने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया।इस चर्चित मामले में पुलिस ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।पीड़िता नीलम वर्मा की तहरीर पर थाना कोतवाली शहर में दर्ज इस FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 के साथ-साथ SC/ST एक्ट की गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। 26 अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने जैसे ही इस पूरे कांड को उजागर किया, प्रशासन की नींद टूटी और कार्रवाई का पहिया तेजी से घूमने लगा।

दरअसल, पूरा मामला 24 अप्रैल का है, जब नीलम वर्मा अपनी बेटी अलीशा के भविष्य की चिंता लेकर स्कूल पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि शिक्षा के इस मंदिर में उसे सम्मान नहीं,बल्कि अपमान मिलेगा।आरोप है कि कॉपियों की खरीद के नाम पर उस पर आर्थिक दबाव बनाया गया। जब उसने मजबूरी में कुछ दिन की मोहलत मांगी, तो स्कूल प्रबंधन का असली चेहरा सामने आ गया। पीड़िता के मुताबिक, उसके साथ न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया गया, बल्कि उसे अपमानजनक शब्दों और कथित जातिसूचक टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई—और 26 अप्रैल को जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, पूरे जिले में गुस्से की लहर दौड़ गई।

वीडियो सामने आते ही माहौल गरमा गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और स्कूल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की और खुद टीम के साथ स्कूल पहुंचकर पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई।जांच के दौरान न सिर्फ घटना की सच्चाई खंगाली गई,बल्कि विद्यालय के संचालन और भवन के मानकों को भी परखा गया।

प्रारंभिक जांच में प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद BSA ने खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) को स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय की प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। यहीं नहीं, उन्होंने सख्ती दिखाते हुए स्कूल की प्रबंधक ममता मिश्रा के विद्यालय परिसर में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी, ताकि जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके। आदेश में साफ चेतावनी भी दी गई कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोनभद्र: रेणुका नदी के तट पर वृक्षारोपण के नाम पर लाखों का 'खेला', मानकों की उड़ी धज्जियां
ओबरा/सोनभद्र।उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर करोड़ों पौधे रोपकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। रेणुका नदी के तट पर पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर भ्रष्टाचार की ऐसी 'इबारत' लिखी गई है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए।
तकनीक नहीं, ये तो पौधों की 'बलि' है
मौके पर मौजूद हकीकत विभागीय आंकड़ों से कोसों दूर है। बोर्ड पर चिल्ला-चिल्ला कर 6112 'बोना नाली' बनाने का दावा किया गया है, लेकिन धरातल पर अधिकांश गड्ढे खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि जहाँ पेड़ लगाए भी गए हैं, वहां वैज्ञानिक मानकों को ताक पर रख दिया गया है। विभागीय नियमानुसार जिन पौधों के बीच 5 मीटर (लगभग 16 फीट) की दूरी होनी चाहिए थी, वहां 1 मीटर के दायरे में ही 25 से 30 पौधों को ठूंस दिया गया है।
भ्रष्टाचार का 'सघन' मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही स्थान पर इतने पौधे लगाना उनकी 'हत्या' करने जैसा है। बिना खाद, बिना सिंचाई और बिना पर्याप्त जगह के ये पौधे कुछ ही दिनों में दम तोड़ देंगे। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे 15.28 हेक्टेयर क्षेत्र में गड्ढे खोदने और नाली बनाने की मजदूरी बचाने के लिए विभाग ने एक ही जगह पौधों की 'खानापूर्ति' कर लक्ष्य पूरा दिखा दिया है।
गायब है 'सुरक्षा खाई', दांव पर पर्यावरण
नदी के किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बोर्ड पर 1600 मीटर सुरक्षा खाई (CPT) बनाने का विवरण अंकित है, लेकिन मौके पर इसकी स्थिति नगण्य है। सुरक्षा के अभाव में आवारा पशु इन पौधों को अपना निवाला बना रहे हैं। करोड़ों के बजट वाले इस प्रोजेक्ट में न तो सिंचाई की व्यवस्था दिख रही है और न ही पौधों के संवर्धन के लिए कोई खाद या कीटनाशक का प्रयोग किया गया है।
हरदोई में महिला अभिभावक से अभद्रता पर मुक़दमा दर्ज
रितेश मिश्रा
हरदोई में शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में एक महिला अभिभावक के साथ हुई अभद्रता ने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया।इस चर्चित मामले में पुलिस ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।पीड़िता नीलम वर्मा की तहरीर पर थाना कोतवाली शहर में दर्ज इस FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 के साथ-साथ SC/ST एक्ट की गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। 26 अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने जैसे ही इस पूरे कांड को उजागर किया, प्रशासन की नींद टूटी और कार्रवाई का पहिया तेजी से घूमने लगा।

दरअसल, पूरा मामला 24 अप्रैल का है, जब नीलम वर्मा अपनी बेटी अलीशा के भविष्य की चिंता लेकर स्कूल पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि शिक्षा के इस मंदिर में उसे सम्मान नहीं,बल्कि अपमान मिलेगा।आरोप है कि कॉपियों की खरीद के नाम पर उस पर आर्थिक दबाव बनाया गया। जब उसने मजबूरी में कुछ दिन की मोहलत मांगी, तो स्कूल प्रबंधन का असली चेहरा सामने आ गया। पीड़िता के मुताबिक, उसके साथ न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया गया, बल्कि उसे अपमानजनक शब्दों और कथित जातिसूचक टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई—और 26 अप्रैल को जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, पूरे जिले में गुस्से की लहर दौड़ गई।

वीडियो सामने आते ही माहौल गरमा गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और स्कूल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की और खुद टीम के साथ स्कूल पहुंचकर पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई।जांच के दौरान न सिर्फ घटना की सच्चाई खंगाली गई,बल्कि विद्यालय के संचालन और भवन के मानकों को भी परखा गया।

प्रारंभिक जांच में प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद BSA ने खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) को स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय की प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। यहीं नहीं, उन्होंने सख्ती दिखाते हुए स्कूल की प्रबंधक ममता मिश्रा के विद्यालय परिसर में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी, ताकि जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके। आदेश में साफ चेतावनी भी दी गई कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।