*देखिए ‘दे दे प्यार दे 2’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर, इस रविवार 24 मई दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर*

*मुंबई, मई, 2026* : हँसी, प्यार और फैमिली एंटरटेनमेंट से भरे एक मजेदार सफर के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि ‘दे दे प्यार दे 2’ अब अपने वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर के साथ, इस रविवार, 24 मई को दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर आने वाली है। कॉमेडी और ड्रामा का स्तर और बढ़ाते हुए, यह सीक्वल एक हल्की-फुल्की और मनोरंजक प्यार की कहानी पेश करता है, जिसमें माता-पिता को मनाने और उनकी मंज़ूरी पाने की कोशिश के दौरान कई मजेदार और अप्रत्याशित परिस्थितियाँ सामने आती हैं। जब प्यार परिवार की उम्मीदों से टकराता है, तो कहानी में ढेर सारी उलझनें, हँसी और जज़्बाती पल देखने को मिलते हैं। कॉमेडी, रोमांस और फैमिली ड्रामे का यह शानदार मेल दर्शकों को घर बैठे एक मजेदार सिनेमाई अनुभव देने वाला है।
अंशुल शर्मा के निर्देशन में बनी ‘दे दे प्यार दे 2’ को टी-सीरीज़ के भूषण कुमार और कृष्ण कुमार, साथ ही लव फिल्म्स के लव रंजन और अंकुर गर्ग ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह, आर माधवन, मीज़ान जाफरी, जावेद जाफरी, इशिता दत्ता और गौतमी कपूर जैसे कलाकार नजर आएँगे। यह सीक्वल मूल फिल्म की खूबसूरती को बरकरार रखते हुए नए पहलू, नए टकराव और ढेर सारे मजेदार पलों को जोड़ता है, जो इसे एक बेहद दिलचस्प अनुभव बनाते हैं।
अजय देवगन ने कॉमेडी में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अपने सहज अंदाज़, शानदार कॉमिक टाइमिंग और सधी हुई एक्टिंग से उन्होंने हमेशा दर्शकों को खूब एंटरटेन किया है। सालों से वे इस जॉनर में अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करते आए हैं और ‘दे दे प्यार दे 2’ उनके इसी मजेदार सफर में एक और शानदार फिल्म जोड़ती है।
*फिल्म के बारे में बात करते हुए, अजय देवगन कहते हैं,* “दे दे प्यार दे 2 भावनाओं, रिश्तों, उलझनों और अप्रत्याशित परिस्थितियों से भरी हुई फिल्म है, जो बेहद मनोरंजक तरीके से सामने आती है। यह ऐसी फिल्म है, जिसका आप अपने परिवार के साथ बैठकर पूरा आनंद ले सकते हैं और मैं उत्साहित हूँ कि अब दर्शक ज़ी सिनेमा पर इसके वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ इसे एक साथ एंजॉय करेंगे।”
फिल्म के बारे में बात करते हुए, आर माधवन कहते हैं, “फिल्म में एक पिता के तौर पर मेरा किरदार अपनी बेटी को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव है, खासकर तब जब उसकी लव लाइफ उसे कई तरह से चौंका देती है। मुझे सबसे ज्यादा मजा ऐसे किरदार को निभाने में आया, जो एक साथ जज़्बाती भी है, ड्रामेटिक भी और अनजाने में मजेदार भी। किरदारों के बीच की केमिस्ट्री और टकराव ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं और मैं चाहता हूं कि दर्शक इसे ज़ी सिनेमा पर जरूर देखें।”
*रकुल प्रीत सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा* , “मेरा किरदार दो ऐसे  लोगों के बीच फंस जाता है, जिन्हें लगता है कि वही उसके लिए सबसे सही फैसला ले सकते हैं और यहीं से पूरी मस्ती शुरू होती है। एक तरफ वह इंसान है जिससे वह प्यार करती है और दूसरी तरफ उसके पिता, लेकिन दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। मुझे इस फिल्म की सबसे खास बात यह लगी कि कॉमेडी के पीछे रिश्तों, जजमेंट और फैमिली एक्सेप्टेंस का एक बहुत रिलेटेबल जज़्बाती पहलू भी है। यह फिल्म मजेदार भी है, उलझनों से भरी भी और ऐसे पलों से भरी हुई है, जिनसे परिवार के लोग ज़ी सिनेमा पर देखते ही जुड़ाव महसूस करेंगे।“
मीज़ान जाफरी कहते हैं, “दे दे प्यार दे 2 को इतना मजेदार बनाने वाली चीज है इसका पूरा ड्रामा और वही फिल्म को अपनी अलग एनर्जी देता है। अजय देवगन सर और आर माधवन सर जैसे कलाकारों के साथ कॉन्फ्रंटेशन और कॉमेडी से भरे सीन्स करना मेरे लिए एक शानदार सीखने वाला अनुभव रहा। लेकिन, अपने पिता के साथ स्क्रीन शेयर करना इस अनुभव को और भी खास बना गया। परिवार के साथ काम करते वक्त एक अलग ही सहजता और मस्ती अपने आप आ जाती है और दर्शकों को हमारा साथ में डांस करना भी काफी पसंद आएगा। ज़ी सिनेमा पर दर्शकों के लिए यह पूरी तरह हँसी से भरा सफर होने वाला है।”
*जावेद जाफरी ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा,* “अजय के साथ दोबारा काम करना बहुत अच्छा लगा। पहली फिल्म से जो सफर शुरू हुआ था, ‘दे दे प्यार दे 2’ उसे ह्यूमर, एंटरटेनमेंट और जज़्बातों के मामले में एक नए स्तर पर ले जाती है। सेट पर माहौल बेहद शानदार था और अजय के साथ काम करने में हमेशा एक अलग सहजता और आकर्षण महसूस होता है, जो स्क्रीन पर भी नजर आता है। यह फिल्म पहले से बड़ी, ज्यादा मजेदार और ज्यादा एंटरटेनिंग है। मीजान के साथ काम करना भी बहुत खास रहा। सिर्फ पिता और बेटे के तौर पर नहीं, बल्कि हम सच में साथ परफॉर्म करना एंजॉय करते हैं। उसके साथ डांस करना मेरे लिए खास पल था, जहां मेरा ओल्ड स्कूल अंदाज़ और उसका नया स्टाइल एक साथ देखने को मिलेगा।”
डायरेक्टर अंशुल शर्मा कहते हैं, “दे दे प्यार दे 2 के साथ हम यह दिखाना चाहते थे कि जब रिश्तों में परिवार, उनकी राय और पीढ़ियों के अंतर शामिल होते हैं, तो प्यार किस तरह बदलता है। फिल्म सिर्फ एज गैप वाले रिश्ते की कहानी नहीं है, बल्कि उन असुरक्षाओं, प्रोटेक्टिव नेचर और जज़्बाती बोझ की भी कहानी है, जो हर किरदार अपने साथ लेकर चलता है। अजय सर और माधवन सर के किरदार लगातार एक-दूसरे को चुनौती देते हैं और यही टकराव फिल्म में कॉमेडी और जज़्बाती गहराई दोनों लेकर आता है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि टकराव के बीच भी इसके किरदार बहुत असली और रिलेटेबल लगते हैं। हमें खुशी है कि दर्शक 24 मई को  दोपहर 12 बजे ज़ी सिनेमा पर इसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर देखकर इस पूरी मस्ती, ड्रामे और जज़्बातों से जुड़ पाएँगे।”
‘दे दे प्यार दे 2’ में अजय देवगन द्वारा निभाया गया 50 वर्षीय एनआरआई आशीष मेहरा, अपनी उम्र से काफी छोटी  गर्लफ्रेंड आयशा, यानी रकुल प्रीत सिंह के माता-पिता का दिल जीतने भारत आते हैं। लेकिन, हालात तब बिगड़ने लगते हैं, जब होने वाले ससुराल वाले दोनों की उम्र के बड़े अंतर से हैरान हो जाते हैं और इस रिश्ते को तोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। जज़्बाती टकराव और उलझनें बढ़ने के बीच आशीष को यह साबित करना पड़ता है कि उनका प्यार सच्चा है। लेकिन तभी कहानी में एक ऐसा बड़ा ट्विस्ट आता है, जो आयशा के साथ उसके रिश्ते को खतरे में डाल देता है। अब आगे क्या होता है, यह जानने के लिए फिल्म जरूर देखें।

हँसी, मस्ती और हलचल से भरपूर इस फैमिली एंटरटेनर ‘दे दे प्यार दे 2’ के वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर के लिए देखना न भूलें इस रविवार, 24 मई को दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस: सोनी सब के यादें

कलाकारों ने साझा किया कि एक साधारण कप चाय उनके जीवन में क्यों रखता है खास जगह
मुंबई, मई 2026: भारत में चाय सिर्फ़ एक पेय नहीं है, बल्कि यह एक एहसास है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है। सुबह की दिनचर्या से लेकर दोपहर के ब्रेक तक, दिल से जुड़ी बातचीतों से लेकर सुकून के पलों तक – चाय का अपना अलग ही जादू है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ देता है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर सोनी सब के शो यादें के कलाकार इक़बाल ख़ान, अर्जुन पुंज और सृष्टि सिंह ने साझा किया कि चाय से उनका निजी रिश्ता क्यों इतना ख़ास है और क्यों एक साधारण कप चाय उनकी ज़िंदगी में आज भी अहम जगह रखता है।
चाय के प्रति अपने प्यार को साझा करते हुए, यादें के कलाकारों ने सुनाई अपनी कहानियाँ:
इक़बाल ख़ान, जो शो में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “भले ही मैं रोज़ाना चाय न पीता हूं, लेकिन चाय मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इससे जुड़ी यादें बेहद ख़ास हैं। जब भी मैं अपने माता-पिता से मिलने कश्मीर जाता हूं, तो ‘नून चाय’ मेरी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाती है। परिवार के साथ बैठकर, ताज़ा कश्मीरी बेकरी के पकवानों के साथ दोपहर में इसे पीना बेहद सुकून और पुरानी यादों से भरा होता है। यह उन छोटे-छोटे पलों में से है जो मुझे तुरंत घर और परिवार की याद दिला देते हैं।” अर्जुन पुंज, जो शो में डिग्गी का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “मैं हमेशा से ही चाय का दीवाना रहा हूं। मेरी चाय से मोहब्बत बचपन में शुरू हुई, जब मैं अपनी मां को दिनभर कई कप चाय का मज़ा लेते हुए देखता था। मुझे आज भी याद है कि मैं उनके पास बैठकर बिस्किट चाय में डुबोकर खाता था और उन छोटे-छोटे पलों का इंतज़ार करता था। सालों के साथ चाय मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का खूबसूरत हिस्सा बन गई है। यहां तक कि मेरी पत्नी गुर्दीप, जो पहले कॉफी की शौकीन थीं, अब मेरी वजह से चाय की दीवानी हो गई हैं। यही तो चाय का जादू है – यह लोगों को जोड़ देती है।” सृष्टि सिंह, जो शो में डॉ. वाणी का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं भले ही हमेशा चाय न पीती हूं, लेकिन जब भी मुझे एक अच्छी चाय की तलब लगती है – खासकर तब जब मैं थकी होती हूं या घर की याद आती है – तो वह चाय बेहद सुकूनभरी और ख़ास होनी चाहिए। और मेरे लिए ‘मां के हाथ की चाय’ से बेहतर कुछ नहीं। मां के हाथ की चाय में कुछ ऐसा होता है जो तुरंत अपनापन और सुकून का एहसास दिलाता है। यह सिर्फ़ स्वाद की बात नहीं है, बल्कि उस एहसास की है – जिसमें गर्माहट, देखभाल और घर का पूरा प्यार एक कप में समा जाता है।”
देखिए यादें, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ़ सोनी सब पर।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस: सोनी सब के यादें

कलाकारों ने साझा किया कि एक साधारण कप चाय उनके जीवन में क्यों रखता है खास जगह
मुंबई, मई 2026: भारत में चाय सिर्फ़ एक पेय नहीं है, बल्कि यह एक एहसास है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है। सुबह की दिनचर्या से लेकर दोपहर के ब्रेक तक, दिल से जुड़ी बातचीतों से लेकर सुकून के पलों तक – चाय का अपना अलग ही जादू है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ देता है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर सोनी सब के शो यादें के कलाकार इक़बाल ख़ान, अर्जुन पुंज और सृष्टि सिंह ने साझा किया कि चाय से उनका निजी रिश्ता क्यों इतना ख़ास है और क्यों एक साधारण कप चाय उनकी ज़िंदगी में आज भी अहम जगह रखता है।
चाय के प्रति अपने प्यार को साझा करते हुए, यादें के कलाकारों ने सुनाई अपनी कहानियाँ:
इक़बाल ख़ान, जो शो में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “भले ही मैं रोज़ाना चाय न पीता हूं, लेकिन चाय मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इससे जुड़ी यादें बेहद ख़ास हैं। जब भी मैं अपने माता-पिता से मिलने कश्मीर जाता हूं, तो ‘नून चाय’ मेरी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाती है। परिवार के साथ बैठकर, ताज़ा कश्मीरी बेकरी के पकवानों के साथ दोपहर में इसे पीना बेहद सुकून और पुरानी यादों से भरा होता है। यह उन छोटे-छोटे पलों में से है जो मुझे तुरंत घर और परिवार की याद दिला देते हैं।” अर्जुन पुंज, जो शो में डिग्गी का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “मैं हमेशा से ही चाय का दीवाना रहा हूं। मेरी चाय से मोहब्बत बचपन में शुरू हुई, जब मैं अपनी मां को दिनभर कई कप चाय का मज़ा लेते हुए देखता था। मुझे आज भी याद है कि मैं उनके पास बैठकर बिस्किट चाय में डुबोकर खाता था और उन छोटे-छोटे पलों का इंतज़ार करता था। सालों के साथ चाय मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का खूबसूरत हिस्सा बन गई है। यहां तक कि मेरी पत्नी गुर्दीप, जो पहले कॉफी की शौकीन थीं, अब मेरी वजह से चाय की दीवानी हो गई हैं। यही तो चाय का जादू है – यह लोगों को जोड़ देती है।” सृष्टि सिंह, जो शो में डॉ. वाणी का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं भले ही हमेशा चाय न पीती हूं, लेकिन जब भी मुझे एक अच्छी चाय की तलब लगती है – खासकर तब जब मैं थकी होती हूं या घर की याद आती है – तो वह चाय बेहद सुकूनभरी और ख़ास होनी चाहिए। और मेरे लिए ‘मां के हाथ की चाय’ से बेहतर कुछ नहीं। मां के हाथ की चाय में कुछ ऐसा होता है जो तुरंत अपनापन और सुकून का एहसास दिलाता है। यह सिर्फ़ स्वाद की बात नहीं है, बल्कि उस एहसास की है – जिसमें गर्माहट, देखभाल और घर का पूरा प्यार एक कप में समा जाता है।”
देखिए यादें, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ़ सोनी सब पर।
राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीखों का एलान, खरगे सहित ये दिग्गज हो रहे रिटायर

#rajyasabhaelectiondatesannouncedfor24rajyasabha_seats

चुनाव आयोग ने जून-जुलाई में राज्यसभा में खाली होने वाली 24 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी है। 10 राज्यों में राज्यसभा के 24 सदस्यों का कार्यकाल जून-जुलाई में खत्म होने वाला है। इन सभी सीटों के लिए आयोग ने चुनाव की तारीखें घोषित की हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव की तारीख का भी ऐलान किया है।

18 जून को होगा मतदान

भारतीय चुनाव आयोग ने शुक्रवार को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की घोषणा की। इसके लिए मतदान 18 जून को होगा। अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून है। उम्मीदवारों को 11 जून तक अपना नामांकन वापस लेने की अनुमति होगी। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच होगा, और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती निर्धारित है।

किन राज्यों में खाली हो रही सीटें

जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम शामिल हैं। जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें मल्लिकार्जन खरगे, दिग्जिवजय सिंह और पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा का नाम भी शामिल है। राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, नीरज डांगी और रवनीत सिंह की सीटें भी खाली हो रही हैं।

किस राज्य की कितनी सीटों पर होना है चुनाव?

• आंध्र प्रदेश से चार

• गुजरात से चार

• झारखंड से दो

• मध्य प्रदेश से तीन

• मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश से एक-एक

• कर्नाटक से चार

• राजस्थान से तीन

चुनाव आयोग ने जारी किए विशेष निर्देश

चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंगनी रंग का विशेष स्केच पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।

नरेंद्र कुमार शुक्ला बने जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के नए कुलपति
संजीव सिंह बलिया — जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) के नए कुलपति के रूप में प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला की नियुक्ति की घोषणा की गई है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो. शुक्ला को वर्तमान कार्यभार ग्रहण की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। प्रो. शुक्ला वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें JNCU की कमान सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रो. शुक्ला के नेतृत्व में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षावृत्त और कर्मचारी संगठनों ने प्रो. शुक्ला के स्वागत में संतोष व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उनका अनुभव विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में सहायक रहेगा। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय द्वारा एक औपचारिक स्वागत एवं परिचयात्मक कार्यक्रम आयोजित किये जाने की संभावना है, जिसमें प्रो. शुक्ला अपने दायित्व ग्रहण-पत्र पर हस्ताक्षर कर वार्षिक योजनाओं और प्राथमिकताओं का उल्लेख करेंगे
नरेंद्र कुमार शुक्ला बने जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के नए कुलपति
संजीव सिंह बलिया — जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) के नए कुलपति के रूप में प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला की नियुक्ति की घोषणा की गई है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो. शुक्ला को वर्तमान कार्यभार ग्रहण की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। प्रो. शुक्ला वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें JNCU की कमान सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रो. शुक्ला के नेतृत्व में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षावृत्त और कर्मचारी संगठनों ने प्रो. शुक्ला के स्वागत में संतोष व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उनका अनुभव विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में सहायक रहेगा। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय द्वारा एक औपचारिक स्वागत एवं परिचयात्मक कार्यक्रम आयोजित किये जाने की संभावना है, जिसमें प्रो. शुक्ला अपने दायित्व ग्रहण-पत्र पर हस्ताक्षर कर वार्षिक योजनाओं और प्राथमिकताओं का उल्लेख करेंगे
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्व० दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, कहा - उनके संघर्ष से मिला अलग झारखंड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जी की पुण्यतिथि पर लोवाडीह, नामकुम स्थित दुर्गा सोरेन स्मारक स्थल पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए स्व० दुर्गा सोरेन जी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्व० दुर्गा सोरेन ने अलग झारखंड राज्य की लड़ाई और वंचितों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर वर्ष की भांति आज हम सभी लोग यहां एकत्रित होकर स्व० दुर्गा सोरेन जी को याद करते है। स्व० दुर्गा सोरेन एक दूरदर्शी, संघर्षील एवं जनभावनाओं से जुड़े हुए नेता थे, उनका जीवन जन कल्याण के प्रति समर्पित रहा।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि स्व० दुर्गा सोरेन के विचार एवं आदर्श सदैव हम सभी को प्रेरित करते रहेंगे। स्व० दुर्गा सोरेन जैसे मार्गदर्शक और संघर्षील लोगों के शहादत एवं संघर्ष के बदौलत बहुत बड़ी मंजिल मिली, अलग राज्य मिला। बड़े भाई स्व० दुर्गा सोरेन जैसे कर्मठ एवं युवा नेताओं पर हम सभी को गर्व है। स्व० दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन!

दुर्गा सोरेन स्मारक स्थित उनकी प्रतिमा पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया।

पुलिस अधीक्षक गोण्डा के निर्देशन में नवीन आपराधिक कानूनों के अन्तर्गत डिजिटल साक्ष्य संकलन को सुदृढ़ बनाने हेतु गोष्ठी आयोजित
गोण्डा। पुलिस अधीक्षक  गोण्डा  विनीत जायसवाल के निर्देशन में आज दिनांक 21.05.2026 को जनपद गोण्डा में E-Sakshya प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन एवं नवीन आपराधिक कानूनों के अन्तर्गत डिजिटल साक्ष्य संकलन को सुदृढ़ बनाने हेतु पुलिस लाइन बहुद्देशिय हाल में एक गोष्ठी आयोजित की गयी। गोष्ठी में समस्त थानों के विवेचकों एवं सम्बन्धित पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को E-Sakshya मोबाइल ऐप एवं वेब पोर्टल के उपयोग के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी गयी।
सी0सी0टी0एन0एस प्रभारी श्री राजदीप यादव द्वारा गोष्ठी के दौरान बताया गया कि E-Sakshya एक उन्नत डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें मोबाइल एप्लीकेशन एवं वेब पोर्टल दोनों सम्मिलित हैं। यह प्रणाली नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप विकसित की गयी है, जिसका उद्देश्य साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, सटीक, पारदर्शी एवं विधिसम्मत बनाना है। विवेचको को E-Sakshya प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके माध्यम से घटनास्थल, साक्ष्य एवं गवाहों के बयान का वीडियो एवं फोटो रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जा सकता है। साथ ही रिकॉर्ड किए गए साक्ष्य सुरक्षित रूप से संरक्षित रहते हैं, जिससे उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना समाप्त होती है तथा न्यायालय में उनकी विश्वसनीयता बनी रहती है। प्रणाली में डिजिटल ऑथेन्टिकेशन एवं टाइम स्टैम्प की सुविधा उपलब्ध है, जिससे साक्ष्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है। यह प्रणाली केंद्रीकृत वेब पोर्टल से जुड़ी होने के कारण अधिकृत अधिकारी कहीं से भी साक्ष्यों की समीक्षा कर सकते हैं। गोष्ठी में नवीन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत E-Sakshya प्रणाली के उपयोग के सम्बन्ध में भी जानकारी दी गयी।
इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी विवेचनाओं में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए डिजिटल साक्ष्यों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध संकलन सुनिश्चित किया जाए तथा शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया जाए। गोष्ठी में उपस्थित अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए E-Sakshya प्रणाली के सफल संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
*
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
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लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
*देखिए ‘दे दे प्यार दे 2’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर, इस रविवार 24 मई दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर*

*मुंबई, मई, 2026* : हँसी, प्यार और फैमिली एंटरटेनमेंट से भरे एक मजेदार सफर के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि ‘दे दे प्यार दे 2’ अब अपने वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर के साथ, इस रविवार, 24 मई को दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर आने वाली है। कॉमेडी और ड्रामा का स्तर और बढ़ाते हुए, यह सीक्वल एक हल्की-फुल्की और मनोरंजक प्यार की कहानी पेश करता है, जिसमें माता-पिता को मनाने और उनकी मंज़ूरी पाने की कोशिश के दौरान कई मजेदार और अप्रत्याशित परिस्थितियाँ सामने आती हैं। जब प्यार परिवार की उम्मीदों से टकराता है, तो कहानी में ढेर सारी उलझनें, हँसी और जज़्बाती पल देखने को मिलते हैं। कॉमेडी, रोमांस और फैमिली ड्रामे का यह शानदार मेल दर्शकों को घर बैठे एक मजेदार सिनेमाई अनुभव देने वाला है।
अंशुल शर्मा के निर्देशन में बनी ‘दे दे प्यार दे 2’ को टी-सीरीज़ के भूषण कुमार और कृष्ण कुमार, साथ ही लव फिल्म्स के लव रंजन और अंकुर गर्ग ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह, आर माधवन, मीज़ान जाफरी, जावेद जाफरी, इशिता दत्ता और गौतमी कपूर जैसे कलाकार नजर आएँगे। यह सीक्वल मूल फिल्म की खूबसूरती को बरकरार रखते हुए नए पहलू, नए टकराव और ढेर सारे मजेदार पलों को जोड़ता है, जो इसे एक बेहद दिलचस्प अनुभव बनाते हैं।
अजय देवगन ने कॉमेडी में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अपने सहज अंदाज़, शानदार कॉमिक टाइमिंग और सधी हुई एक्टिंग से उन्होंने हमेशा दर्शकों को खूब एंटरटेन किया है। सालों से वे इस जॉनर में अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करते आए हैं और ‘दे दे प्यार दे 2’ उनके इसी मजेदार सफर में एक और शानदार फिल्म जोड़ती है।
*फिल्म के बारे में बात करते हुए, अजय देवगन कहते हैं,* “दे दे प्यार दे 2 भावनाओं, रिश्तों, उलझनों और अप्रत्याशित परिस्थितियों से भरी हुई फिल्म है, जो बेहद मनोरंजक तरीके से सामने आती है। यह ऐसी फिल्म है, जिसका आप अपने परिवार के साथ बैठकर पूरा आनंद ले सकते हैं और मैं उत्साहित हूँ कि अब दर्शक ज़ी सिनेमा पर इसके वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ इसे एक साथ एंजॉय करेंगे।”
फिल्म के बारे में बात करते हुए, आर माधवन कहते हैं, “फिल्म में एक पिता के तौर पर मेरा किरदार अपनी बेटी को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव है, खासकर तब जब उसकी लव लाइफ उसे कई तरह से चौंका देती है। मुझे सबसे ज्यादा मजा ऐसे किरदार को निभाने में आया, जो एक साथ जज़्बाती भी है, ड्रामेटिक भी और अनजाने में मजेदार भी। किरदारों के बीच की केमिस्ट्री और टकराव ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं और मैं चाहता हूं कि दर्शक इसे ज़ी सिनेमा पर जरूर देखें।”
*रकुल प्रीत सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा* , “मेरा किरदार दो ऐसे  लोगों के बीच फंस जाता है, जिन्हें लगता है कि वही उसके लिए सबसे सही फैसला ले सकते हैं और यहीं से पूरी मस्ती शुरू होती है। एक तरफ वह इंसान है जिससे वह प्यार करती है और दूसरी तरफ उसके पिता, लेकिन दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। मुझे इस फिल्म की सबसे खास बात यह लगी कि कॉमेडी के पीछे रिश्तों, जजमेंट और फैमिली एक्सेप्टेंस का एक बहुत रिलेटेबल जज़्बाती पहलू भी है। यह फिल्म मजेदार भी है, उलझनों से भरी भी और ऐसे पलों से भरी हुई है, जिनसे परिवार के लोग ज़ी सिनेमा पर देखते ही जुड़ाव महसूस करेंगे।“
मीज़ान जाफरी कहते हैं, “दे दे प्यार दे 2 को इतना मजेदार बनाने वाली चीज है इसका पूरा ड्रामा और वही फिल्म को अपनी अलग एनर्जी देता है। अजय देवगन सर और आर माधवन सर जैसे कलाकारों के साथ कॉन्फ्रंटेशन और कॉमेडी से भरे सीन्स करना मेरे लिए एक शानदार सीखने वाला अनुभव रहा। लेकिन, अपने पिता के साथ स्क्रीन शेयर करना इस अनुभव को और भी खास बना गया। परिवार के साथ काम करते वक्त एक अलग ही सहजता और मस्ती अपने आप आ जाती है और दर्शकों को हमारा साथ में डांस करना भी काफी पसंद आएगा। ज़ी सिनेमा पर दर्शकों के लिए यह पूरी तरह हँसी से भरा सफर होने वाला है।”
*जावेद जाफरी ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा,* “अजय के साथ दोबारा काम करना बहुत अच्छा लगा। पहली फिल्म से जो सफर शुरू हुआ था, ‘दे दे प्यार दे 2’ उसे ह्यूमर, एंटरटेनमेंट और जज़्बातों के मामले में एक नए स्तर पर ले जाती है। सेट पर माहौल बेहद शानदार था और अजय के साथ काम करने में हमेशा एक अलग सहजता और आकर्षण महसूस होता है, जो स्क्रीन पर भी नजर आता है। यह फिल्म पहले से बड़ी, ज्यादा मजेदार और ज्यादा एंटरटेनिंग है। मीजान के साथ काम करना भी बहुत खास रहा। सिर्फ पिता और बेटे के तौर पर नहीं, बल्कि हम सच में साथ परफॉर्म करना एंजॉय करते हैं। उसके साथ डांस करना मेरे लिए खास पल था, जहां मेरा ओल्ड स्कूल अंदाज़ और उसका नया स्टाइल एक साथ देखने को मिलेगा।”
डायरेक्टर अंशुल शर्मा कहते हैं, “दे दे प्यार दे 2 के साथ हम यह दिखाना चाहते थे कि जब रिश्तों में परिवार, उनकी राय और पीढ़ियों के अंतर शामिल होते हैं, तो प्यार किस तरह बदलता है। फिल्म सिर्फ एज गैप वाले रिश्ते की कहानी नहीं है, बल्कि उन असुरक्षाओं, प्रोटेक्टिव नेचर और जज़्बाती बोझ की भी कहानी है, जो हर किरदार अपने साथ लेकर चलता है। अजय सर और माधवन सर के किरदार लगातार एक-दूसरे को चुनौती देते हैं और यही टकराव फिल्म में कॉमेडी और जज़्बाती गहराई दोनों लेकर आता है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि टकराव के बीच भी इसके किरदार बहुत असली और रिलेटेबल लगते हैं। हमें खुशी है कि दर्शक 24 मई को  दोपहर 12 बजे ज़ी सिनेमा पर इसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर देखकर इस पूरी मस्ती, ड्रामे और जज़्बातों से जुड़ पाएँगे।”
‘दे दे प्यार दे 2’ में अजय देवगन द्वारा निभाया गया 50 वर्षीय एनआरआई आशीष मेहरा, अपनी उम्र से काफी छोटी  गर्लफ्रेंड आयशा, यानी रकुल प्रीत सिंह के माता-पिता का दिल जीतने भारत आते हैं। लेकिन, हालात तब बिगड़ने लगते हैं, जब होने वाले ससुराल वाले दोनों की उम्र के बड़े अंतर से हैरान हो जाते हैं और इस रिश्ते को तोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। जज़्बाती टकराव और उलझनें बढ़ने के बीच आशीष को यह साबित करना पड़ता है कि उनका प्यार सच्चा है। लेकिन तभी कहानी में एक ऐसा बड़ा ट्विस्ट आता है, जो आयशा के साथ उसके रिश्ते को खतरे में डाल देता है। अब आगे क्या होता है, यह जानने के लिए फिल्म जरूर देखें।

हँसी, मस्ती और हलचल से भरपूर इस फैमिली एंटरटेनर ‘दे दे प्यार दे 2’ के वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर के लिए देखना न भूलें इस रविवार, 24 मई को दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस: सोनी सब के यादें

कलाकारों ने साझा किया कि एक साधारण कप चाय उनके जीवन में क्यों रखता है खास जगह
मुंबई, मई 2026: भारत में चाय सिर्फ़ एक पेय नहीं है, बल्कि यह एक एहसास है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है। सुबह की दिनचर्या से लेकर दोपहर के ब्रेक तक, दिल से जुड़ी बातचीतों से लेकर सुकून के पलों तक – चाय का अपना अलग ही जादू है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ देता है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर सोनी सब के शो यादें के कलाकार इक़बाल ख़ान, अर्जुन पुंज और सृष्टि सिंह ने साझा किया कि चाय से उनका निजी रिश्ता क्यों इतना ख़ास है और क्यों एक साधारण कप चाय उनकी ज़िंदगी में आज भी अहम जगह रखता है।
चाय के प्रति अपने प्यार को साझा करते हुए, यादें के कलाकारों ने सुनाई अपनी कहानियाँ:
इक़बाल ख़ान, जो शो में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “भले ही मैं रोज़ाना चाय न पीता हूं, लेकिन चाय मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इससे जुड़ी यादें बेहद ख़ास हैं। जब भी मैं अपने माता-पिता से मिलने कश्मीर जाता हूं, तो ‘नून चाय’ मेरी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाती है। परिवार के साथ बैठकर, ताज़ा कश्मीरी बेकरी के पकवानों के साथ दोपहर में इसे पीना बेहद सुकून और पुरानी यादों से भरा होता है। यह उन छोटे-छोटे पलों में से है जो मुझे तुरंत घर और परिवार की याद दिला देते हैं।” अर्जुन पुंज, जो शो में डिग्गी का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “मैं हमेशा से ही चाय का दीवाना रहा हूं। मेरी चाय से मोहब्बत बचपन में शुरू हुई, जब मैं अपनी मां को दिनभर कई कप चाय का मज़ा लेते हुए देखता था। मुझे आज भी याद है कि मैं उनके पास बैठकर बिस्किट चाय में डुबोकर खाता था और उन छोटे-छोटे पलों का इंतज़ार करता था। सालों के साथ चाय मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का खूबसूरत हिस्सा बन गई है। यहां तक कि मेरी पत्नी गुर्दीप, जो पहले कॉफी की शौकीन थीं, अब मेरी वजह से चाय की दीवानी हो गई हैं। यही तो चाय का जादू है – यह लोगों को जोड़ देती है।” सृष्टि सिंह, जो शो में डॉ. वाणी का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं भले ही हमेशा चाय न पीती हूं, लेकिन जब भी मुझे एक अच्छी चाय की तलब लगती है – खासकर तब जब मैं थकी होती हूं या घर की याद आती है – तो वह चाय बेहद सुकूनभरी और ख़ास होनी चाहिए। और मेरे लिए ‘मां के हाथ की चाय’ से बेहतर कुछ नहीं। मां के हाथ की चाय में कुछ ऐसा होता है जो तुरंत अपनापन और सुकून का एहसास दिलाता है। यह सिर्फ़ स्वाद की बात नहीं है, बल्कि उस एहसास की है – जिसमें गर्माहट, देखभाल और घर का पूरा प्यार एक कप में समा जाता है।”
देखिए यादें, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ़ सोनी सब पर।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस: सोनी सब के यादें

कलाकारों ने साझा किया कि एक साधारण कप चाय उनके जीवन में क्यों रखता है खास जगह
मुंबई, मई 2026: भारत में चाय सिर्फ़ एक पेय नहीं है, बल्कि यह एक एहसास है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है। सुबह की दिनचर्या से लेकर दोपहर के ब्रेक तक, दिल से जुड़ी बातचीतों से लेकर सुकून के पलों तक – चाय का अपना अलग ही जादू है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ देता है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर सोनी सब के शो यादें के कलाकार इक़बाल ख़ान, अर्जुन पुंज और सृष्टि सिंह ने साझा किया कि चाय से उनका निजी रिश्ता क्यों इतना ख़ास है और क्यों एक साधारण कप चाय उनकी ज़िंदगी में आज भी अहम जगह रखता है।
चाय के प्रति अपने प्यार को साझा करते हुए, यादें के कलाकारों ने सुनाई अपनी कहानियाँ:
इक़बाल ख़ान, जो शो में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “भले ही मैं रोज़ाना चाय न पीता हूं, लेकिन चाय मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इससे जुड़ी यादें बेहद ख़ास हैं। जब भी मैं अपने माता-पिता से मिलने कश्मीर जाता हूं, तो ‘नून चाय’ मेरी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाती है। परिवार के साथ बैठकर, ताज़ा कश्मीरी बेकरी के पकवानों के साथ दोपहर में इसे पीना बेहद सुकून और पुरानी यादों से भरा होता है। यह उन छोटे-छोटे पलों में से है जो मुझे तुरंत घर और परिवार की याद दिला देते हैं।” अर्जुन पुंज, जो शो में डिग्गी का किरदार निभा रहे हैं, बताते हैं, “मैं हमेशा से ही चाय का दीवाना रहा हूं। मेरी चाय से मोहब्बत बचपन में शुरू हुई, जब मैं अपनी मां को दिनभर कई कप चाय का मज़ा लेते हुए देखता था। मुझे आज भी याद है कि मैं उनके पास बैठकर बिस्किट चाय में डुबोकर खाता था और उन छोटे-छोटे पलों का इंतज़ार करता था। सालों के साथ चाय मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का खूबसूरत हिस्सा बन गई है। यहां तक कि मेरी पत्नी गुर्दीप, जो पहले कॉफी की शौकीन थीं, अब मेरी वजह से चाय की दीवानी हो गई हैं। यही तो चाय का जादू है – यह लोगों को जोड़ देती है।” सृष्टि सिंह, जो शो में डॉ. वाणी का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “मैं भले ही हमेशा चाय न पीती हूं, लेकिन जब भी मुझे एक अच्छी चाय की तलब लगती है – खासकर तब जब मैं थकी होती हूं या घर की याद आती है – तो वह चाय बेहद सुकूनभरी और ख़ास होनी चाहिए। और मेरे लिए ‘मां के हाथ की चाय’ से बेहतर कुछ नहीं। मां के हाथ की चाय में कुछ ऐसा होता है जो तुरंत अपनापन और सुकून का एहसास दिलाता है। यह सिर्फ़ स्वाद की बात नहीं है, बल्कि उस एहसास की है – जिसमें गर्माहट, देखभाल और घर का पूरा प्यार एक कप में समा जाता है।”
देखिए यादें, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ़ सोनी सब पर।
राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीखों का एलान, खरगे सहित ये दिग्गज हो रहे रिटायर

#rajyasabhaelectiondatesannouncedfor24rajyasabha_seats

चुनाव आयोग ने जून-जुलाई में राज्यसभा में खाली होने वाली 24 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी है। 10 राज्यों में राज्यसभा के 24 सदस्यों का कार्यकाल जून-जुलाई में खत्म होने वाला है। इन सभी सीटों के लिए आयोग ने चुनाव की तारीखें घोषित की हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव की तारीख का भी ऐलान किया है।

18 जून को होगा मतदान

भारतीय चुनाव आयोग ने शुक्रवार को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की घोषणा की। इसके लिए मतदान 18 जून को होगा। अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून है। उम्मीदवारों को 11 जून तक अपना नामांकन वापस लेने की अनुमति होगी। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच होगा, और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती निर्धारित है।

किन राज्यों में खाली हो रही सीटें

जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम शामिल हैं। जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें मल्लिकार्जन खरगे, दिग्जिवजय सिंह और पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा का नाम भी शामिल है। राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, नीरज डांगी और रवनीत सिंह की सीटें भी खाली हो रही हैं।

किस राज्य की कितनी सीटों पर होना है चुनाव?

• आंध्र प्रदेश से चार

• गुजरात से चार

• झारखंड से दो

• मध्य प्रदेश से तीन

• मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश से एक-एक

• कर्नाटक से चार

• राजस्थान से तीन

चुनाव आयोग ने जारी किए विशेष निर्देश

चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंगनी रंग का विशेष स्केच पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।

नरेंद्र कुमार शुक्ला बने जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के नए कुलपति
संजीव सिंह बलिया — जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) के नए कुलपति के रूप में प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला की नियुक्ति की घोषणा की गई है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो. शुक्ला को वर्तमान कार्यभार ग्रहण की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। प्रो. शुक्ला वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें JNCU की कमान सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रो. शुक्ला के नेतृत्व में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षावृत्त और कर्मचारी संगठनों ने प्रो. शुक्ला के स्वागत में संतोष व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उनका अनुभव विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में सहायक रहेगा। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय द्वारा एक औपचारिक स्वागत एवं परिचयात्मक कार्यक्रम आयोजित किये जाने की संभावना है, जिसमें प्रो. शुक्ला अपने दायित्व ग्रहण-पत्र पर हस्ताक्षर कर वार्षिक योजनाओं और प्राथमिकताओं का उल्लेख करेंगे
नरेंद्र कुमार शुक्ला बने जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के नए कुलपति
संजीव सिंह बलिया — जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) के नए कुलपति के रूप में प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला की नियुक्ति की घोषणा की गई है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो. शुक्ला को वर्तमान कार्यभार ग्रहण की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। प्रो. शुक्ला वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें JNCU की कमान सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रो. शुक्ला के नेतृत्व में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षावृत्त और कर्मचारी संगठनों ने प्रो. शुक्ला के स्वागत में संतोष व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उनका अनुभव विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में सहायक रहेगा। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय द्वारा एक औपचारिक स्वागत एवं परिचयात्मक कार्यक्रम आयोजित किये जाने की संभावना है, जिसमें प्रो. शुक्ला अपने दायित्व ग्रहण-पत्र पर हस्ताक्षर कर वार्षिक योजनाओं और प्राथमिकताओं का उल्लेख करेंगे
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्व० दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, कहा - उनके संघर्ष से मिला अलग झारखंड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जी की पुण्यतिथि पर लोवाडीह, नामकुम स्थित दुर्गा सोरेन स्मारक स्थल पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए स्व० दुर्गा सोरेन जी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्व० दुर्गा सोरेन ने अलग झारखंड राज्य की लड़ाई और वंचितों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर वर्ष की भांति आज हम सभी लोग यहां एकत्रित होकर स्व० दुर्गा सोरेन जी को याद करते है। स्व० दुर्गा सोरेन एक दूरदर्शी, संघर्षील एवं जनभावनाओं से जुड़े हुए नेता थे, उनका जीवन जन कल्याण के प्रति समर्पित रहा।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि स्व० दुर्गा सोरेन के विचार एवं आदर्श सदैव हम सभी को प्रेरित करते रहेंगे। स्व० दुर्गा सोरेन जैसे मार्गदर्शक और संघर्षील लोगों के शहादत एवं संघर्ष के बदौलत बहुत बड़ी मंजिल मिली, अलग राज्य मिला। बड़े भाई स्व० दुर्गा सोरेन जैसे कर्मठ एवं युवा नेताओं पर हम सभी को गर्व है। स्व० दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन!

दुर्गा सोरेन स्मारक स्थित उनकी प्रतिमा पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया।

पुलिस अधीक्षक गोण्डा के निर्देशन में नवीन आपराधिक कानूनों के अन्तर्गत डिजिटल साक्ष्य संकलन को सुदृढ़ बनाने हेतु गोष्ठी आयोजित
गोण्डा। पुलिस अधीक्षक  गोण्डा  विनीत जायसवाल के निर्देशन में आज दिनांक 21.05.2026 को जनपद गोण्डा में E-Sakshya प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन एवं नवीन आपराधिक कानूनों के अन्तर्गत डिजिटल साक्ष्य संकलन को सुदृढ़ बनाने हेतु पुलिस लाइन बहुद्देशिय हाल में एक गोष्ठी आयोजित की गयी। गोष्ठी में समस्त थानों के विवेचकों एवं सम्बन्धित पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को E-Sakshya मोबाइल ऐप एवं वेब पोर्टल के उपयोग के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी गयी।
सी0सी0टी0एन0एस प्रभारी श्री राजदीप यादव द्वारा गोष्ठी के दौरान बताया गया कि E-Sakshya एक उन्नत डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें मोबाइल एप्लीकेशन एवं वेब पोर्टल दोनों सम्मिलित हैं। यह प्रणाली नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप विकसित की गयी है, जिसका उद्देश्य साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, सटीक, पारदर्शी एवं विधिसम्मत बनाना है। विवेचको को E-Sakshya प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके माध्यम से घटनास्थल, साक्ष्य एवं गवाहों के बयान का वीडियो एवं फोटो रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जा सकता है। साथ ही रिकॉर्ड किए गए साक्ष्य सुरक्षित रूप से संरक्षित रहते हैं, जिससे उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना समाप्त होती है तथा न्यायालय में उनकी विश्वसनीयता बनी रहती है। प्रणाली में डिजिटल ऑथेन्टिकेशन एवं टाइम स्टैम्प की सुविधा उपलब्ध है, जिससे साक्ष्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है। यह प्रणाली केंद्रीकृत वेब पोर्टल से जुड़ी होने के कारण अधिकृत अधिकारी कहीं से भी साक्ष्यों की समीक्षा कर सकते हैं। गोष्ठी में नवीन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत E-Sakshya प्रणाली के उपयोग के सम्बन्ध में भी जानकारी दी गयी।
इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी विवेचनाओं में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए डिजिटल साक्ष्यों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध संकलन सुनिश्चित किया जाए तथा शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया जाए। गोष्ठी में उपस्थित अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए E-Sakshya प्रणाली के सफल संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
*
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
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लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।