बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री की प्रशासनिक सख्ती

- सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए वल्लभ भवन में समय पर उपस्थिति के निर्देश, होगी छापामार कार्रवाई

भोपाल। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव आज भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को गुरुवार सुबह दस बजे से शाम के 6 बजे तक उपस्थित के लिए कहा गया है। इस दौरान वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा 

तीनों कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय, और अनाधिकृत उपस्थिति की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने टीम बनाकर सभी जगह तैनात कर दी गई है और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।

“जिस बेटे के लिए जिए… उसी ने ले ली जान”
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड में आरोपी उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह (21) है, जिसकी बेरुखी और वारदात के बाद का व्यवहार हर किसी को हैरान कर रहा है।

हत्या के बाद सामान्य बनने की कोशिश

पुलिस के अनुसार पिता की गोली मारकर हत्या करने के बाद भी अक्षत के चेहरे पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने घर का माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश की। बाजार से पनीर और मिठाई खरीदकर लाया। चाची को पनीर दिया, खाना बनवाया और परिवार के साथ बैठकर सामान्य ढंग से भोजन किया। यहां तक कि मिठाई भी बांटी, ताकि किसी को शक न हो कि घर के भीतर इतनी खौफनाक वारदात हो चुकी है।

बहन को दी जान से मारने की धमकी

घटना के समय कक्षा 11 की छात्रा कृति भी कमरे में मौजूद थी। पिता की हत्या के बाद अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे भी मार देगा। डर के साये में जी रही कृति 20 फरवरी को परीक्षा देने स्कूल भी गई, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अपनी बेटी से बेहद प्रेम करते थे और बच्चों की खातिर उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी।

शव के टुकड़े कर फेंके अंग

मामले के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। पहले कार से गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने से असफल रहा। फिर आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया। इससे पहले कि वह धड़ को भी ठिकाने लगा पाता, पुलिस को सुराग मिल गया।

गुमशुदगी से खुला राज

21 फरवरी को आशियाना थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने अक्षत से सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अंतिम संस्कार में नहीं मिला अधिकार

मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे कृत सिंह ने दी। परिवार में कोहराम मचा रहा। मां बार-बार बेसुध हो रही थीं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

जेल में अजीब व्यवहार

जिला कारागार भेजे जाने के बाद अक्षत बार-बार कहता रहा, “पापा ने मुझे मारा तो मैंने उन्हें मार दिया… मैं गिर जाऊंगा।” उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज और काउंसिलिंग जारी है।

पुलिस का बयान

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता द्वारा पढ़ाई का दबाव बनाए जाने से आरोपी नाराज था।
आशियाना पुलिस ने बहन कृति से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी किसी भी प्रकार की भूमिका सामने नहीं आई है।

यह हत्याकांड न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है—एक पिता, जिसने बच्चों की खातिर अपना जीवन समर्पित किया, उसी बेटे के हाथों मौत का शिकार हो गया।
नरसिंह खेलावन दुबे की स्मृति में विशाल कुश्ती प्रतियोगिता संपन्न
देवरिया। विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी ग्राम- जगनचक, थाना- बनकटा, तहसील- भाटपार रानी स्थित दुबे स्टेटमेंट में स्वर्गीय नरसिंह खेलावन दुबे की पुण्यस्मृति में काली माई सेवा संस्था द्वारा कुश्ती प्रतियोगिता एवं दंगल का भव्य आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन जिला अध्यक्ष गिरीश चंद्र तिवारी तथा अन्तर्राष्ट्रीय पहलवान केशव सिंह के कर कमलों द्वारा हुआ। कार्यक्रम में विशेष अतिथी सभाकुँवर कुशवाहा विधायक भाटपार रानी, सम्मानित अतिथि अश्वनी कुमार सिंह भाजपा नेता, सम्मानित अतिथि श्रीमती बिंदा कुशवाहा ब्लॉक प्रमुख बनकटा, सम्मानित अतिथि अमित सिंह (बब्लू) ब्लॉक प्रमुख लार और साथ ही अन्य गणमान्य व क्षेत्र के सम्मानित अतिथि और जनता ने उपस्थित रहकर दंगल का आनंद लिया। कार्यक्रम के मार्गदर्शक जयप्रकाश दुबे, डॉ ओमप्रकाश दुबे ने अतिथियों को अंगवस्त्र पहनाकर और सम्मान चिन्ह भेट कर सम्मानित किया और संस्था के पदाधिकारियों द्वारा सभी सम्मानित अतिथियों को माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया गया।  यह पूरा कार्यक्रम संयोजक अमित दुबे के देख रेख में संपन्न हुआ। इस विशाल दंगल कुश्ती आयोजन में वाराणसी से रामनारायण पहलवान, छोटेलाल पहलवान, अंकित पहलवान, पप्पू पहलवान व गाजीपुर के राष्ट्रीय पहलवान बाबा महंगू दास पहलवान, हिमांशू पहलवान, जे पी पहलवान, राजवीर पहलवान, उपेंद्र पहलवान और गोरखपुर के अंकित पहलवान, बहादुर यादव पहलवान, कृष्णा पहलवान, लाला पहलवान, हेमंत पहलवान एवं क्षेत्रीय पहलवान उपस्थित रहे।
महा मुकाबले में बाबा निर्दोष दास पहलवान अयोध्या हनुमान गढ़ी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर वसंत थापा पहलवान, नेपाल और तीसरे स्थान पर पारस थापा पहलवान, नेपाल ने अपना स्थान बनाया। उन्हें ट्रॉफी व नगद पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।
जानकीपुरम विस्तार में आवासीय भू-उपयोग पर तीन मंजिला व्यावसायिक निर्माण का आरोप, जोन–5 के अधिकारियों पर मिलीभगत के दावे
लखनऊ। राजधानी के जानकीपुरम विस्तार स्थित सेक्टर–6 में कथित रूप से आवासीय भू-उपयोग की भूमि पर तीन मंजिला व्यावसायिक भवन का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यह निर्माण कार्य ज़ोन–5 के अधिकारियों की मिलीभगत से खुलेआम किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 60 फीट रोड पर भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप से पहले, बाला जी स्वीट्स के सामने वाली गली में यह निर्माण कार्य जारी है। आरोप है कि निर्माणकर्ता विशाल सिंह द्वारा नियमों को दरकिनार कर व्यावसायिक भवन खड़ा किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूखंड का भू-उपयोग आवासीय श्रेणी में दर्ज है।
स्थानीय सूत्रों का यह भी दावा है कि प्रति फ्लोर के हिसाब से कथित रूप से ‘सेटिंग’ तय की गई है। आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले में ज़ोन–5 के अवर अभियंता की भूमिका संदिग्ध है तथा कथित तौर पर हिस्सा ऊपर तक पहुंचने की बात कही जा रही है। ज़ोनल प्रभारी के स्तर तक मामले में जानकारी और हिस्सेदारी पहुंचने के भी दावे किए जा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी।
स्थानीय निवासियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण को इसी तरह संरक्षण मिलता रहा तो क्षेत्र की मूल संरचना और नागरिक सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की वैधता की जांच कराई जाती है या नहीं।
भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के सम्मान समारोह में पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र अउर पंचांग प्रदान भइल
संजीव सिंह बलिया। भोजपुरी पुनर्जागरण मंच द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह के आयोजन भइल, जवन में जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही द्वारा पदाधिकारी लोगन के प्रमाण पत्र अउर भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के पंचांग (कैलेंडर) प्रदान कइल गइल।जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही ने कहल कि भोजपुरी भाषा हमनी के आत्मा से निकलल बिचार ह, जवन हमनी के माई के गोदी में से बोलेलागेनינה जा। ई बहुत समृद्ध भाषा ह, एकराके फूहड़पन से बचाईजा अउर अश्लील गीत-गाना के बहिष्कार करिजा।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के जिला मंत्री धर्मात्मा यादव ने अपील कइल कि आप सभ लोग जनगणना के समय मातृभाषा के कालम में भोजपुरी जरूर लिखवाई। जिला उपाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव कहनी कि भोजपुरी हमनी के आन-बॉन शान ह। इ आठवीं अनुसूची में जब तक शामिल न हो जाई, तब तक संघर्ष जारी रही।समारोह में विनोद सिंह, गोपाल जी खरवार, भानु प्रताप, पवनकुमार, बैजनाथ प्रसाद सोनी, भीष्म सिंह आदि लोगन आपन विचार रखलन। ए कार्यक्रम भोजपुरी भाषा के संरक्षण अउर उत्थान लेल महत्वपूर्ण साबित भइल।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के सम्मान समारोह में पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र अउर पंचांग प्रदान भइलबलिया। भोजपुरी पुनर्जागरण मंच द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह के आयोजन भइल, जवन में जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही द्वारा पदाधिकारी लोगन के प्रमाण पत्र अउर भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के पंचांग (कैलेंडर) प्रदान कइल गइल।जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही ने कहल कि भोजपुरी भाषा हमनी के आत्मा से निकलल बिचार ह, जवन हमनी के माई के गोदी में से बोलेलागेनינה जा। ई बहुत समृद्ध भाषा ह, एकराके फूहड़पन से बचाईजा अउर अश्लील गीत-गाना के बहिष्कार करिजा।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के जिला मंत्री धर्मात्मा यादव ने अपील कइल कि आप सभ लोग जनगणना के समय मातृभाषा के कालम में भोजपुरी जरूर लिखवाई। जिला उपाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव कहनी कि भोजपुरी हमनी के आन-बॉन शान ह। इ आठवीं अनुसूची में जब तक शामिल न हो जाई, तब तक संघर्ष जारी रही।समारोह में विनोद सिंह, गोपाल जी खरवार, भानु प्रताप, पवनकुमार, बैजनाथ प्रसाद सोनी, भीष्म सिंह आदि लोगन आपन विचार रखलन। ए कार्यक्रम भोजपुरी भाषा के संरक्षण अउर उत्थान लेल महत्वपूर्ण साबित भइल।
संजय सेतु के विकल्प में डबल लेन पीपा पुल का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा
* 72 लाख की कटौती के बाद 8.24 करोड़ का नया एस्टीमेट, जल्द बजट मिलने की उम्मीद

रामनगर, बाराबंकी। घाघरा नदी पर स्थित संजय सेतु की जर्जर हालत को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में प्रस्तावित डबल लेन पीपा पुल का संशोधित प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग ने पुनः शासन को प्रेषित कर दिया है।
पूर्व में लगभग 8.96 करोड़ रुपये की लागत से तैयार प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद विभाग ने 72 लाख रुपये की कटौती करते हुए नया प्रस्ताव करीब 8.24 करोड़ रुपये का भेजा है।
एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत मौर्य के अनुसार, संशोधित एस्टीमेट में लागत घटाए जाने से स्वीकृति की संभावना बढ़ गई है। शासन से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। विभागीय आकलन के मुताबिक पीपा पुल का निर्माण लगभग एक माह में पूरा किया जा सकता है।
गौरतलब है कि संजय सेतु लगभग 1200 मीटर लंबा और करीब 42 वर्ष पुराना है। सेतु के कई जोड़ों में क्षति होने के कारण मरम्मत कार्य आवश्यक हो गया है। मरम्मत के दौरान यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए डबल लेन पीपा पुल बनाने की योजना तैयार की गई है। निर्माण के लिए आवश्यक पीपे प्रयागराज से मंगाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है, ताकि आवागमन सुचारु बना रहे और किसी भी आकस्मिक स्थिति से बचा जा सके।

मुख्य बिंदु -
* डबल लेन पीपा पुल का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया
* कुल लागत 8.96 करोड़ से घटाकर लगभग 8.24 करोड़ रुपये की गई
* 72 लाख रुपये की लागत में कटौती
* निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराया जाएगा
* स्वीकृति के बाद लगभग एक माह में निर्माण संभव
* संजय सेतु 1200 मीटर लंबा और 42 वर्ष पुराना
* मरम्मत के दौरान यातायात सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
* स्थानीय लोगों ने शीघ्र निर्णय की मांग की
बलरामपुर में नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ,नगर को स्वच्छ व सुव्यवस्थित बनाने की पहल
               
                                                        
बलरामपुर। आदर्श नगर पालिका परिषद क्षेत्र को  स्वच्छ,सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बलरामपुर ब्लॉक के सामने नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू ने फीता काटकर मंडी का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष ने कहा कि नगर क्षेत्र में मांस-मछली विक्रेताओं को अब तक अलग-अलग स्थानों पर दुकानें लगानी पड़ती थीं,जिससे गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती थी। नगर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मछली विक्रेताओं के लिए एक ही स्थान पर व्यवस्थित रूप से जगह निर्धारित की गई है,ताकि व्यापार सुचारु रूप से संचालित हो और आम जनता को भी स्वच्छ वातावरण मिल सके।
उन्होंने सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया कि वे निर्धारित स्थल पर ही अपने प्रतिष्ठान लगाएं और स्वच्छता के नियमों का पालन करें। नगर पालिका द्वारा मंडी परिसर में साफ-सफाई,जल निकासी और कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था की गई है,जिससे गंदगी न फैले और लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने बताया कि नगर को सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर पालिका निरंतर प्रयासरत है। भविष्य में भी बाजारों को सुव्यवस्थित करने और नागरिक सुविधाओं में वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार श्रीवास्तव,नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र मौर्या,कर निरीक्षक राजेश कुमार,सफाई निरीक्षक दिवाकर पांडेय,अधिवक्ता अनिल सिंह मामा,अध्यक्ष राम प्यारे कश्यप,सहायक निदेशक मत्स्य दीपांशु,वरिष्ठ निरीक्षक मत्स्य रमन चौधरी,सभासद सुभाष पाठक,राघवेंद्र कान्त सिंह मंटू,विनोद गिरी,अक्षय शुक्ल,सुशील साहू,आनंद किशोर,मनोज यादव,मनीष तिवारी,राजेश कुमार कश्यप,संदीप मिश्रा,मनोज साहू,शुभम चौधरी,सिद्धार्थ साहू,राजू कश्यप,राधे श्याम,बेकारू,संतोष कश्यप,पूरन कश्यप, फरीद,आफताब अहमद,चन्दन,धर्मेंद्र सहित अधिकारी,कर्मचारी,स्थानीय जनप्रतिनिधि,व्यापारी एवं नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मंडी के शुभारंभ से मछली व्यापारियों में उत्साह देखा गया और उन्होंने नगर पालिका की इस पहल की सराहना की।
नगर निकाय चुनाव 2026: 27 फरवरी को होगा भाग्य का फैसला, राँची प्रशासन ने मतगणना हेतु कसी कमर

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राँची: राँची नगर निगम एवं बुंडू नगर पंचायत चुनाव-2026 की मतगणना को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर बुधवार को ट्रांसपोर्ट नगर, रिंग रोड स्थित बज्रगृह स्थल पर संयुक्त ब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई।

ब्रीफिंग और दिशा-निर्देश:

उप विकास आयुक्त (DDC) श्री सौरभ कुमार भुवनिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मतगणना में तैनात पुलिस पदाधिकारियों और दंडाधिकारियों को राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों का पाठ पढ़ाया गया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि:

मतगणना हॉल में कड़ा अनुशासन बनाए रखा जाए।

सुरक्षा घेरे को अभेद्य रखा जाए और अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित हो।

बैलट बॉक्स की हैंडलिंग और टेबल निगरानी में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं:

प्रशासन ने बताया कि मतगणना स्थल पर प्रकाश, पेयजल और बैठने की मुकम्मल व्यवस्था कर ली गई है। ब्रीफिंग में सदर एसडीओ कुमार रजत और बुंडू एसडीओ किस्टो कुमार बेसरा सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 'क्विक रिस्पांस' के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

जनता से अपील:

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मतगणना से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में दिखेगा अवध की संस्कृति का संगम *

एलडीए ने हुसैनाबाद में 4973 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित किया है म्यूजियम
- 01 मार्च को लोकार्पण के बाद आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा म्यूजियम
लखनऊ । हुसैनाबाद में बनकर तैयार हुए लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में अवध की संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने लगभग 4973 वर्गमीटर क्षेत्रफल में इस म्यूजियम का निर्माण किया है। 01 मार्च, 2026 को लोकार्पण के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस नवनिर्मित म्यूजियम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संग्रहालय की संरचना, प्रदर्शनी दीर्घाओं और पर्यटक सुविधाओं का जायजा लेने के साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। म्यूजियम का निर्माण 41.43 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। यह प्रदेश की पहली ऐसी आईकॉनिक बिल्डिंग होने वाली है, जहां बिना किसी कॉलम या पिलर के सहारे के 45 मीटर लंबा कैंटीलीवर निर्मित किया गया है। म्यूजियम भवन की आकर्षक डिजाइन इस इमारत को एक अलग पहचान देती है।
म्यूजियम में अवध की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। म्यूजियम में विभिन्न तरह की गैलरी विकसित की गयी हैं। जिनके नाम ‘मूल धारा, हुनर का सफर, हस्तशिल्प, सांझी आस्था, गंगा-जमुनी तहजीब, कारीगरी, महफिल-ए-अवध, नृत्यकला, नाट्यशाला, सोच एवं संवाद और जायका-ए-अवध’ हैं। इन गैलरी के माध्यम से अवध की संस्कृति को जीवंत रूप में दर्शाया जाएगा। म्यूजियम में वीआर गेमिंग एरीना भी बनाया गया है, जो दर्शकों को इतिहास से जोड़ने का नया अनुभव देगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस म्यूजियम का निर्माण कराया गया है। यह म्यूजियम लखनऊ की समृद्ध विरासत, कला, शिल्प परंपरा को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देकर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस मौके पर एलडीए के सचिव विवेक श्रीवास्तव, नजूल अधिकारी प्रभाकर सिंह, मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, अधीक्षण अभियंता नवनीत शर्मा, अधिशासी अभियंता मनोज सागर एवं नीरज कुमार समेत अन्य अधिकारी व अभियंता उपस्थित रहे।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री की प्रशासनिक सख्ती

- सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए वल्लभ भवन में समय पर उपस्थिति के निर्देश, होगी छापामार कार्रवाई

भोपाल। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव आज भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को गुरुवार सुबह दस बजे से शाम के 6 बजे तक उपस्थित के लिए कहा गया है। इस दौरान वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा 

तीनों कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय, और अनाधिकृत उपस्थिति की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने टीम बनाकर सभी जगह तैनात कर दी गई है और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।

“जिस बेटे के लिए जिए… उसी ने ले ली जान”
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड में आरोपी उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह (21) है, जिसकी बेरुखी और वारदात के बाद का व्यवहार हर किसी को हैरान कर रहा है।

हत्या के बाद सामान्य बनने की कोशिश

पुलिस के अनुसार पिता की गोली मारकर हत्या करने के बाद भी अक्षत के चेहरे पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने घर का माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश की। बाजार से पनीर और मिठाई खरीदकर लाया। चाची को पनीर दिया, खाना बनवाया और परिवार के साथ बैठकर सामान्य ढंग से भोजन किया। यहां तक कि मिठाई भी बांटी, ताकि किसी को शक न हो कि घर के भीतर इतनी खौफनाक वारदात हो चुकी है।

बहन को दी जान से मारने की धमकी

घटना के समय कक्षा 11 की छात्रा कृति भी कमरे में मौजूद थी। पिता की हत्या के बाद अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे भी मार देगा। डर के साये में जी रही कृति 20 फरवरी को परीक्षा देने स्कूल भी गई, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अपनी बेटी से बेहद प्रेम करते थे और बच्चों की खातिर उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी।

शव के टुकड़े कर फेंके अंग

मामले के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। पहले कार से गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने से असफल रहा। फिर आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया। इससे पहले कि वह धड़ को भी ठिकाने लगा पाता, पुलिस को सुराग मिल गया।

गुमशुदगी से खुला राज

21 फरवरी को आशियाना थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने अक्षत से सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अंतिम संस्कार में नहीं मिला अधिकार

मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे कृत सिंह ने दी। परिवार में कोहराम मचा रहा। मां बार-बार बेसुध हो रही थीं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

जेल में अजीब व्यवहार

जिला कारागार भेजे जाने के बाद अक्षत बार-बार कहता रहा, “पापा ने मुझे मारा तो मैंने उन्हें मार दिया… मैं गिर जाऊंगा।” उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज और काउंसिलिंग जारी है।

पुलिस का बयान

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता द्वारा पढ़ाई का दबाव बनाए जाने से आरोपी नाराज था।
आशियाना पुलिस ने बहन कृति से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी किसी भी प्रकार की भूमिका सामने नहीं आई है।

यह हत्याकांड न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है—एक पिता, जिसने बच्चों की खातिर अपना जीवन समर्पित किया, उसी बेटे के हाथों मौत का शिकार हो गया।
नरसिंह खेलावन दुबे की स्मृति में विशाल कुश्ती प्रतियोगिता संपन्न
देवरिया। विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी ग्राम- जगनचक, थाना- बनकटा, तहसील- भाटपार रानी स्थित दुबे स्टेटमेंट में स्वर्गीय नरसिंह खेलावन दुबे की पुण्यस्मृति में काली माई सेवा संस्था द्वारा कुश्ती प्रतियोगिता एवं दंगल का भव्य आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन जिला अध्यक्ष गिरीश चंद्र तिवारी तथा अन्तर्राष्ट्रीय पहलवान केशव सिंह के कर कमलों द्वारा हुआ। कार्यक्रम में विशेष अतिथी सभाकुँवर कुशवाहा विधायक भाटपार रानी, सम्मानित अतिथि अश्वनी कुमार सिंह भाजपा नेता, सम्मानित अतिथि श्रीमती बिंदा कुशवाहा ब्लॉक प्रमुख बनकटा, सम्मानित अतिथि अमित सिंह (बब्लू) ब्लॉक प्रमुख लार और साथ ही अन्य गणमान्य व क्षेत्र के सम्मानित अतिथि और जनता ने उपस्थित रहकर दंगल का आनंद लिया। कार्यक्रम के मार्गदर्शक जयप्रकाश दुबे, डॉ ओमप्रकाश दुबे ने अतिथियों को अंगवस्त्र पहनाकर और सम्मान चिन्ह भेट कर सम्मानित किया और संस्था के पदाधिकारियों द्वारा सभी सम्मानित अतिथियों को माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया गया।  यह पूरा कार्यक्रम संयोजक अमित दुबे के देख रेख में संपन्न हुआ। इस विशाल दंगल कुश्ती आयोजन में वाराणसी से रामनारायण पहलवान, छोटेलाल पहलवान, अंकित पहलवान, पप्पू पहलवान व गाजीपुर के राष्ट्रीय पहलवान बाबा महंगू दास पहलवान, हिमांशू पहलवान, जे पी पहलवान, राजवीर पहलवान, उपेंद्र पहलवान और गोरखपुर के अंकित पहलवान, बहादुर यादव पहलवान, कृष्णा पहलवान, लाला पहलवान, हेमंत पहलवान एवं क्षेत्रीय पहलवान उपस्थित रहे।
महा मुकाबले में बाबा निर्दोष दास पहलवान अयोध्या हनुमान गढ़ी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर वसंत थापा पहलवान, नेपाल और तीसरे स्थान पर पारस थापा पहलवान, नेपाल ने अपना स्थान बनाया। उन्हें ट्रॉफी व नगद पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।
जानकीपुरम विस्तार में आवासीय भू-उपयोग पर तीन मंजिला व्यावसायिक निर्माण का आरोप, जोन–5 के अधिकारियों पर मिलीभगत के दावे
लखनऊ। राजधानी के जानकीपुरम विस्तार स्थित सेक्टर–6 में कथित रूप से आवासीय भू-उपयोग की भूमि पर तीन मंजिला व्यावसायिक भवन का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यह निर्माण कार्य ज़ोन–5 के अधिकारियों की मिलीभगत से खुलेआम किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 60 फीट रोड पर भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप से पहले, बाला जी स्वीट्स के सामने वाली गली में यह निर्माण कार्य जारी है। आरोप है कि निर्माणकर्ता विशाल सिंह द्वारा नियमों को दरकिनार कर व्यावसायिक भवन खड़ा किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूखंड का भू-उपयोग आवासीय श्रेणी में दर्ज है।
स्थानीय सूत्रों का यह भी दावा है कि प्रति फ्लोर के हिसाब से कथित रूप से ‘सेटिंग’ तय की गई है। आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले में ज़ोन–5 के अवर अभियंता की भूमिका संदिग्ध है तथा कथित तौर पर हिस्सा ऊपर तक पहुंचने की बात कही जा रही है। ज़ोनल प्रभारी के स्तर तक मामले में जानकारी और हिस्सेदारी पहुंचने के भी दावे किए जा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी।
स्थानीय निवासियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण को इसी तरह संरक्षण मिलता रहा तो क्षेत्र की मूल संरचना और नागरिक सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की वैधता की जांच कराई जाती है या नहीं।
भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के सम्मान समारोह में पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र अउर पंचांग प्रदान भइल
संजीव सिंह बलिया। भोजपुरी पुनर्जागरण मंच द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह के आयोजन भइल, जवन में जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही द्वारा पदाधिकारी लोगन के प्रमाण पत्र अउर भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के पंचांग (कैलेंडर) प्रदान कइल गइल।जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही ने कहल कि भोजपुरी भाषा हमनी के आत्मा से निकलल बिचार ह, जवन हमनी के माई के गोदी में से बोलेलागेनינה जा। ई बहुत समृद्ध भाषा ह, एकराके फूहड़पन से बचाईजा अउर अश्लील गीत-गाना के बहिष्कार करिजा।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के जिला मंत्री धर्मात्मा यादव ने अपील कइल कि आप सभ लोग जनगणना के समय मातृभाषा के कालम में भोजपुरी जरूर लिखवाई। जिला उपाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव कहनी कि भोजपुरी हमनी के आन-बॉन शान ह। इ आठवीं अनुसूची में जब तक शामिल न हो जाई, तब तक संघर्ष जारी रही।समारोह में विनोद सिंह, गोपाल जी खरवार, भानु प्रताप, पवनकुमार, बैजनाथ प्रसाद सोनी, भीष्म सिंह आदि लोगन आपन विचार रखलन। ए कार्यक्रम भोजपुरी भाषा के संरक्षण अउर उत्थान लेल महत्वपूर्ण साबित भइल।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के सम्मान समारोह में पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र अउर पंचांग प्रदान भइलबलिया। भोजपुरी पुनर्जागरण मंच द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह के आयोजन भइल, जवन में जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही द्वारा पदाधिकारी लोगन के प्रमाण पत्र अउर भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के पंचांग (कैलेंडर) प्रदान कइल गइल।जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप राही ने कहल कि भोजपुरी भाषा हमनी के आत्मा से निकलल बिचार ह, जवन हमनी के माई के गोदी में से बोलेलागेनינה जा। ई बहुत समृद्ध भाषा ह, एकराके फूहड़पन से बचाईजा अउर अश्लील गीत-गाना के बहिष्कार करिजा।भोजपुरी पुनर्जागरण मंच के जिला मंत्री धर्मात्मा यादव ने अपील कइल कि आप सभ लोग जनगणना के समय मातृभाषा के कालम में भोजपुरी जरूर लिखवाई। जिला उपाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव कहनी कि भोजपुरी हमनी के आन-बॉन शान ह। इ आठवीं अनुसूची में जब तक शामिल न हो जाई, तब तक संघर्ष जारी रही।समारोह में विनोद सिंह, गोपाल जी खरवार, भानु प्रताप, पवनकुमार, बैजनाथ प्रसाद सोनी, भीष्म सिंह आदि लोगन आपन विचार रखलन। ए कार्यक्रम भोजपुरी भाषा के संरक्षण अउर उत्थान लेल महत्वपूर्ण साबित भइल।
संजय सेतु के विकल्प में डबल लेन पीपा पुल का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा
* 72 लाख की कटौती के बाद 8.24 करोड़ का नया एस्टीमेट, जल्द बजट मिलने की उम्मीद

रामनगर, बाराबंकी। घाघरा नदी पर स्थित संजय सेतु की जर्जर हालत को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में प्रस्तावित डबल लेन पीपा पुल का संशोधित प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग ने पुनः शासन को प्रेषित कर दिया है।
पूर्व में लगभग 8.96 करोड़ रुपये की लागत से तैयार प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद विभाग ने 72 लाख रुपये की कटौती करते हुए नया प्रस्ताव करीब 8.24 करोड़ रुपये का भेजा है।
एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत मौर्य के अनुसार, संशोधित एस्टीमेट में लागत घटाए जाने से स्वीकृति की संभावना बढ़ गई है। शासन से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। विभागीय आकलन के मुताबिक पीपा पुल का निर्माण लगभग एक माह में पूरा किया जा सकता है।
गौरतलब है कि संजय सेतु लगभग 1200 मीटर लंबा और करीब 42 वर्ष पुराना है। सेतु के कई जोड़ों में क्षति होने के कारण मरम्मत कार्य आवश्यक हो गया है। मरम्मत के दौरान यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए डबल लेन पीपा पुल बनाने की योजना तैयार की गई है। निर्माण के लिए आवश्यक पीपे प्रयागराज से मंगाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है, ताकि आवागमन सुचारु बना रहे और किसी भी आकस्मिक स्थिति से बचा जा सके।

मुख्य बिंदु -
* डबल लेन पीपा पुल का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया
* कुल लागत 8.96 करोड़ से घटाकर लगभग 8.24 करोड़ रुपये की गई
* 72 लाख रुपये की लागत में कटौती
* निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराया जाएगा
* स्वीकृति के बाद लगभग एक माह में निर्माण संभव
* संजय सेतु 1200 मीटर लंबा और 42 वर्ष पुराना
* मरम्मत के दौरान यातायात सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
* स्थानीय लोगों ने शीघ्र निर्णय की मांग की
बलरामपुर में नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ,नगर को स्वच्छ व सुव्यवस्थित बनाने की पहल
               
                                                        
बलरामपुर। आदर्श नगर पालिका परिषद क्षेत्र को  स्वच्छ,सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बलरामपुर ब्लॉक के सामने नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू ने फीता काटकर मंडी का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष ने कहा कि नगर क्षेत्र में मांस-मछली विक्रेताओं को अब तक अलग-अलग स्थानों पर दुकानें लगानी पड़ती थीं,जिससे गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती थी। नगर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मछली विक्रेताओं के लिए एक ही स्थान पर व्यवस्थित रूप से जगह निर्धारित की गई है,ताकि व्यापार सुचारु रूप से संचालित हो और आम जनता को भी स्वच्छ वातावरण मिल सके।
उन्होंने सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया कि वे निर्धारित स्थल पर ही अपने प्रतिष्ठान लगाएं और स्वच्छता के नियमों का पालन करें। नगर पालिका द्वारा मंडी परिसर में साफ-सफाई,जल निकासी और कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था की गई है,जिससे गंदगी न फैले और लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने बताया कि नगर को सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर पालिका निरंतर प्रयासरत है। भविष्य में भी बाजारों को सुव्यवस्थित करने और नागरिक सुविधाओं में वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार श्रीवास्तव,नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र मौर्या,कर निरीक्षक राजेश कुमार,सफाई निरीक्षक दिवाकर पांडेय,अधिवक्ता अनिल सिंह मामा,अध्यक्ष राम प्यारे कश्यप,सहायक निदेशक मत्स्य दीपांशु,वरिष्ठ निरीक्षक मत्स्य रमन चौधरी,सभासद सुभाष पाठक,राघवेंद्र कान्त सिंह मंटू,विनोद गिरी,अक्षय शुक्ल,सुशील साहू,आनंद किशोर,मनोज यादव,मनीष तिवारी,राजेश कुमार कश्यप,संदीप मिश्रा,मनोज साहू,शुभम चौधरी,सिद्धार्थ साहू,राजू कश्यप,राधे श्याम,बेकारू,संतोष कश्यप,पूरन कश्यप, फरीद,आफताब अहमद,चन्दन,धर्मेंद्र सहित अधिकारी,कर्मचारी,स्थानीय जनप्रतिनिधि,व्यापारी एवं नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मंडी के शुभारंभ से मछली व्यापारियों में उत्साह देखा गया और उन्होंने नगर पालिका की इस पहल की सराहना की।
नगर निकाय चुनाव 2026: 27 फरवरी को होगा भाग्य का फैसला, राँची प्रशासन ने मतगणना हेतु कसी कमर

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राँची: राँची नगर निगम एवं बुंडू नगर पंचायत चुनाव-2026 की मतगणना को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर बुधवार को ट्रांसपोर्ट नगर, रिंग रोड स्थित बज्रगृह स्थल पर संयुक्त ब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई।

ब्रीफिंग और दिशा-निर्देश:

उप विकास आयुक्त (DDC) श्री सौरभ कुमार भुवनिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मतगणना में तैनात पुलिस पदाधिकारियों और दंडाधिकारियों को राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों का पाठ पढ़ाया गया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि:

मतगणना हॉल में कड़ा अनुशासन बनाए रखा जाए।

सुरक्षा घेरे को अभेद्य रखा जाए और अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित हो।

बैलट बॉक्स की हैंडलिंग और टेबल निगरानी में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं:

प्रशासन ने बताया कि मतगणना स्थल पर प्रकाश, पेयजल और बैठने की मुकम्मल व्यवस्था कर ली गई है। ब्रीफिंग में सदर एसडीओ कुमार रजत और बुंडू एसडीओ किस्टो कुमार बेसरा सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 'क्विक रिस्पांस' के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

जनता से अपील:

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मतगणना से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में दिखेगा अवध की संस्कृति का संगम *

एलडीए ने हुसैनाबाद में 4973 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित किया है म्यूजियम
- 01 मार्च को लोकार्पण के बाद आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा म्यूजियम
लखनऊ । हुसैनाबाद में बनकर तैयार हुए लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में अवध की संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने लगभग 4973 वर्गमीटर क्षेत्रफल में इस म्यूजियम का निर्माण किया है। 01 मार्च, 2026 को लोकार्पण के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस नवनिर्मित म्यूजियम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संग्रहालय की संरचना, प्रदर्शनी दीर्घाओं और पर्यटक सुविधाओं का जायजा लेने के साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। म्यूजियम का निर्माण 41.43 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। यह प्रदेश की पहली ऐसी आईकॉनिक बिल्डिंग होने वाली है, जहां बिना किसी कॉलम या पिलर के सहारे के 45 मीटर लंबा कैंटीलीवर निर्मित किया गया है। म्यूजियम भवन की आकर्षक डिजाइन इस इमारत को एक अलग पहचान देती है।
म्यूजियम में अवध की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। म्यूजियम में विभिन्न तरह की गैलरी विकसित की गयी हैं। जिनके नाम ‘मूल धारा, हुनर का सफर, हस्तशिल्प, सांझी आस्था, गंगा-जमुनी तहजीब, कारीगरी, महफिल-ए-अवध, नृत्यकला, नाट्यशाला, सोच एवं संवाद और जायका-ए-अवध’ हैं। इन गैलरी के माध्यम से अवध की संस्कृति को जीवंत रूप में दर्शाया जाएगा। म्यूजियम में वीआर गेमिंग एरीना भी बनाया गया है, जो दर्शकों को इतिहास से जोड़ने का नया अनुभव देगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस म्यूजियम का निर्माण कराया गया है। यह म्यूजियम लखनऊ की समृद्ध विरासत, कला, शिल्प परंपरा को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देकर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस मौके पर एलडीए के सचिव विवेक श्रीवास्तव, नजूल अधिकारी प्रभाकर सिंह, मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, अधीक्षण अभियंता नवनीत शर्मा, अधिशासी अभियंता मनोज सागर एवं नीरज कुमार समेत अन्य अधिकारी व अभियंता उपस्थित रहे।