पश्चिमी सिंहभूम में 'खूनी' हाथी का तांडव: 11 दिनों में 22 मौतें, 72 घंटे से सर्च ऑपरेशन जारी पर अब भी लापता
पश्चिमी सिंहभूम जिले और ओडिशा की सीमा से सटे इलाकों में एक दंतैल हाथी ने पिछले 11 दिनों से मौत का तांडव मचा रखा है। हाथी के हमलों में अब तक 22 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड और ओडिशा के वन विभाग की संयुक्त टीमें, ड्रोन कैमरे और विशेषज्ञ तैनात हैं, लेकिन हाथी पिछले 72 घंटों से वन विभाग की नजरों से ओझल है।
बेनीसागर में ट्रैंकुलाइज करने की कोशिश रही नाकाम वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को मझगांव प्रखंड के बेनीसागर इलाके में हाथी करीब 12 घंटे तक मौजूद था। उसे ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर पकड़ने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी बाधाओं और घने जंगल का फायदा उठाकर वह ओडिशा सीमा की ओर काजू बागानों में भाग निकला। तब से उसकी सटीक लोकेशन नहीं मिल पाई है।
ग्रामीणों की रातें जागकर कट रहीं, दहशत का माहौल हाथी के खौफ से बेनीसागर, खड़पोस और आसपास के ग्रामीण बुरी तरह डरे हुए हैं। लोग अपने कच्चे घरों को छोड़कर 15-20 की संख्या में एक साथ पक्के मकानों में रात गुजार रहे हैं। पुरुष हाथों में मशाल और टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी कर रहे हैं। बीते तीन दिनों में इसी क्षेत्र में तीन और लोगों की जान जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
प्रशासन की तैयारी और चुनौतियां चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि बेनीसागर और खड़पोस क्षेत्र में तीन टीमें और SOS की विशेषज्ञ टीम लगातार गश्त कर रही है। सबसे बड़ी चुनौती अफवाहें हैं, जो सर्च ऑपरेशन को भटका रही हैं। वर्तमान में ओडिशा बॉर्डर से सटे करीब 30 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा:
मझगांव का बेनीसागर इलाका
खड़पोस गांव और नोवामुंडी सीमा
ओडिशा बॉर्डर के काजू बागान
वन विभाग की चेतावनी: विभाग ने ग्रामीणों से सख्त अपील की है कि वे रात में बाहर न निकलें और जंगल की ओर जाने से बचें। विशेष रूप से हाथी के पास जाकर वीडियो बनाने या सेल्फी लेने जैसी जानलेवा गलती न करें। प्रशासन का कहना है कि जैसे ही हाथी की सटीक लोकेशन मिलेगी, उसे काबू करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
43 min ago
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