AIMIM को झारखंड में मिली मजबूती, पूर्व विधायक अकील अख्तर पार्टी में शामिल
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) हर राज्य में अपनी पकड़ को मजबूत करने में जुटी है. इसी बीच पार्टी ने झारखंड में भी खुद को मजबूत किया है. दरअसल झारखंड के पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक अकील अख्तर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) में शामिल हो गए हैं.
अकील अख्तर ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में हैदराबाद स्थित पार्टी मुख्यालय दारुस्सलाम में AIMIM का दामन थामा है. पार्टी में शामिल होने के बाद अकील अख्तर ने कहा कि AIMIM देश के अल्पसंख्यक, वंचित और कमजोर तबकों की आवाज को मजबूती से उठाने वाली पार्टी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके जुड़ने से झारखंड में संगठन को और मजबूती मिलेगी
झारखंड में पार्टी के विस्तार को मिलेगी दिशा
वहीं, AIMIM अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने अकील अख्तर का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक अनुभव से झारखंड में पार्टी के विस्तार को नई दिशा मिलेगी. इस दौरान AIMIM के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर, प्रदेश महासचिव (संगठन) महताब आलम, प्रदेश महासचिव इंतेखाब अंसारी, प्रदेश कोषाध्यक्ष कैसर इमाम और कोल्हान डिवीजन इंचार्ज सालिक जावेद भी मौजूद रहे.
कौन हैं अकील अख्तर?
दरअसल अकील अख्तर ने झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद पार्टी ने उन्हें किसी कारणवश के 6 साल के लिए निष्काशित कर दिया था. इसके बाद वह अकील ऑल झारखंड स्टूडेंट पार्टी में शामिल हो गए. 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान अकील अख्तर ने एक बार फिर दल को बदल दिया.
इस बार अकील समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद अकील ने सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उस दौरान अकील अख्तर को झारखंड का सबसे अमीर उम्मीदवार माना गया था.




राम कुमार व राकेश प्रवीर को स्मृति सम्मान, साक्षी कुमारी को ‘ईश्वरी देवी मेधा सम्मान’
सभा की अध्यक्षता करते हुए बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि पं. राम नारायण शास्त्री एक प्रणम्य साहित्य-साधु पुरुष थे। प्राच्य-साहित्य की दुर्लभ पोथियों और पांडुलिपियों का अन्वेषण, अनुशीलन एवं सूचीकरण कर उन्होंने हिन्दी साहित्य को अमूल्य धरोहर प्रदान की। उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्री जी का जन्म और निधन एक ही तिथि—24 जनवरी—को हुआ, जो ईश्वरीय कृपा-प्राप्त महापुरुषों के जीवन में ही संभव होता है। संयोगवश उनकी पत्नी ईश्वरी देवी का तिरोधान भी इसी तिथि को हुआ। न्यास के प्रमुख न्यासी एवं शास्त्री जी के पुत्र अभिजीत कश्यप ने न्यास की गतिविधियों पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और सभी आगंतुकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। अतिथियों का स्वागत न्यास अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र सिंहा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पंकज कुमार ने किया। मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कांत ओझा एवं गौरव सुंदरम ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. के.सी. सिन्हा, सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ. मधु वर्मा, डॉ. रत्नेश्वर सिंह, कुमार अनुपम, पारिजात सौरभ, डॉ. मेहता नागेंद्र सिंह, प्रो. आर.आर. सहाय, डॉ. नागेश्वर शर्मा, विभारानी श्रीवास्तव, इंदु भूषण सहाय, डॉ. मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।


















संभल:आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्भल शहर की बाजार सब्जी मंडी में देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला। इस मौके पर एक कार्यक्रम के तहत स्थानीय दुकानदारों को तिरंगा झंडा वितरित किया गया और राष्ट्रीय पर्व को पूरे सम्मान के साथ मनाने की अपील की गई।



2 hours and 59 min ago
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