विकास या महाविनाश घूरपुर–प्रतापपुर सड़क निर्माण में सुस्ती, घटिया काम और भारी अनियमितताओं का आरोप
करोड़ों की लागत वाली सड़क बनी सवालों का गड्ढा—आधा काम अधूरा, जहां बना वहां भी टूट-फूट, जांच पर उठे गंभीर सवाल
बारा,प्रयागराज
विश्वनाथ प्रताप सिंह
यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत घूरपुर से प्रतापपुर तक प्रस्तावित लंबी सड़क, जिसे क्षेत्र के विकास की रीढ़ बताया जा रहा था, अब खुद सवालों के बोझ तले दबती नजर आ रही है। बारा विधायक डॉ वॉचस्पति द्वारा इसे क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि और विकास का प्रतीक बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट कहानी बयां कर रही है।
करीब अट्ठाईस किलोमीटर से अधिक लंबाई में बनने वाली इस सड़क के लिए बत्तीस करोड़ से अधिक की भारी भरकम लागत स्वीकृत हुई और कार्य भी शुरू हुआ, मगर बीते लगभग छह महीनों में निर्माण की रफ्तार इतनी धीमी रही कि अब तक केवल कुछ हिस्सों में ही डामरीकरण हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि जहां सड़क बन भी चुकी है, वहां की हालत पहले से भी बदतर बताई जा रही है—डामर उखड़ चुका है, सड़क फट चुकी है और जगह- जगह गड्ढे उभर आए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का घोर अभाव है। जिन स्थानों पर आरसीसी सड़क बनाई गई है, वहां न तो लोहे के सरिये का जाल दिख रहा है और न ही निर्माण मानकों का पालन होता नजर आता है। यह स्थिति सीधे तौर पर बड़े स्तर पर घोटाले की आशंका को जन्म देती है। कुछ समय पूर्व स्वयं विधायक द्वारा निरीक्षण में घटिया कार्य की पुष्टि भी हुई थी और संबंधित ठेकेदार को फटकार लगाई गई थी, सुधार के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, हालात जस के तस बने हुए हैं। सवाल यह उठता है कि जब अनियमितताएं उजागर हो चुकी हैं, तो निर्माण की गति और गुणवत्ता में सुधार क्यों नहीं हो रहा? घूरपुर से भीटा तक की हालत इतनी दयनीय बताई जा रही है कि लोग कहते हैं कि यदि केवल गिट्टी ही गिर जाए तो भी बड़ी राहत होगी। वहीं, बस्तियों में नालियों का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है। ठेकेदार द्वारा पंद्रह किलोमीटर नाली स्वीकृत होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कहीं भी इसका स्पष्ट प्रमाण नजर नहीं आता। बरसात नजदीक है और जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कई घरों में पानी घुस जाएगा, गलियों में जलभराव होगा और यही गंदा पानी बीमारियों को जन्म देगा। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस पानी की निकासी होगी कैसे? इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठ रहा है। कई बार मीडिया में खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, किसान संगठनों ने ज्ञापन सौंपे, काम कई बार रोका गया, जांच में खामियां सामने आईं—फिर भी सुधार की जगह हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि यदि रोजाना निगरानी और सख्त जांच हो, तभी इस सड़क का वास्तविक विकास संभव है, अन्यथा यह परियोजना विकास के नाम पर महाविनाश का प्रतीक बनती जाएगी। करोड़ों की सरकारी धनराशि जिस तरह खर्च हो रही है, उस पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
8 min ago
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