अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट, हेल्पलाइन नंबर जारी .
रितेश मिश्रा
हरदोई। आगामी अक्षय तृतीया के अवसर पर संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनसामान्य से अपील की है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में सहयोग करें और कहीं भी ऐसी सूचना मिलने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें। जारी अपील में कहा गया है कि बाल विवाह के कारण बेटियों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। इसे रोकने के लिए सभी संस्थाओं, महिला समूहों, ग्राम प्रधानों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा बहुओं और समाज सेवकों से सहयोग मांगा गया है।

प्रशासन ने नागरिकों से कहा है कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर 181, 1098 और 112 हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। इसके अलावा सीधे जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय या जिला बाल संरक्षण इकाई, न्यू सिविल लाइन कॉलोनाइज्ड, सीडीओ आवास के पास, हरदोई में भी सूचना दी जा सकती है। प्रेस नोट में बताया गया है कि लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने पर विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो कानूनन अपराध है। बाल विवाह कराने वालों में पंडित, मौलवी, टेंट, बैंड, मैरिज हॉल, हलवाई, माता-पिता और सहयोगी भी दोषी माने जाएंगे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत दोषियों को दो वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
बुजुर्ग पर लाठी डंडे व चाकू से हमला,रास्ते में घात लगाकर कर रहे थे इंतजार
*जबड़ा टूटा,आरोपी फरार

गोंडा।जिले के खोंडारे थाना क्षेत्र अंतर्गत दबंगई की एक वारदात सामने आई है।जिसमें अल्लीपुर नरहरपुर निवासी राजेश चतुर्वेदी अपने घर लौट रहे थे कि तभी उनके ऊपर जानलेवा हमला कर दिया गया।यह घटना उस समय हुई जब राजेश मसकनवां बाजार से काम निपटा कर लौट रहे थे।दौलतपुर ग्रांट प्राथमिक विद्यालय के पास आरोपी अहमद पहले से घात लगाए बैठा था।जैसे ही राजेश वहाँ पहुंचे उनकी मोटरसाइकिल रोक दी गई और गाड़ी में तोड़फोड़ की गई।आरोप है कि अहमद ने अपने साथियों के साथ मिलकर लाठी डंडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया,जिससे इस हमले में राजेश चतुर्वेदी गंभीर रूप से घायल हो गये।इस हमले में उनके जबड़े को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है और उनके शरीर पर कई चोटों के निशान हैं।पीड़ित राजेश चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने मारपीट के दौरान उनकी सोने की अंगूठी भी छीन लिया।घटना के बाद घायल को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनका इलाज जारी है।मामले में थानाध्यक्ष कृष्ण गोपाल राय ने बताया कि आरोपी अहमद के खिलाफ जानलेवा हमले समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया है और आरोपी के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।पुलिस ने घायल का मेडिकल परीक्षण भी कराया है और मामले की जांच जारी है।घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

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महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

लोकसभा में ज्यादा वोट पाकर भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिला, जानें अब आगे क्या?

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महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। मतदान के समय सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसके कारण अधिक वोट मिलने के बाद भी बिल फेल हो गया।

पिछले 12 सालों में पहली बार गिरा कोई संशोधन विधेयक

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। देश की आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए शुक्रवार शाम लोकसभा में वोटिंग हुई। सरकार ने इस बिल को पारित कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन यह बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े और कहानी यहीं पर समाप्त हो गई।

विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है। रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

बाकी दो विधेयकों पर क्यों नहीं हुई वोटिंग

सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल में क्या था प्रस्ताव?

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

विपक्ष क्यों है नाराज?

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा परिसीमन यानी डिलीमिटेशन को लेकर भी सामने आया। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटों का पुनर्निर्धारण करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया। विपक्ष का तर्क था कि परिसीमन के जरिए कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे तुरंत लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया और बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।

सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा 6 जनपदों में शांतिपूर्ण ढंग से शुरू

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) के 09 विषयों—Asian Culture, Music Tabla, Physical Education, Urdu, English, Sociology, Chemistry, Education एवं Zoology—की लिखित पुनर्परीक्षा आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 को प्रथम पाली में प्रातः 09:30 बजे से सफलतापूर्वक प्रारम्भ हो गई।

यह परीक्षा प्रदेश के 6 जनपदों—आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर एवं वाराणसी—के कुल 48 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है। सभी केन्द्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

आयोग द्वारा स्थापित Integrated Control Command Room के माध्यम से सभी परीक्षा केन्द्रों की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

डी मोनफोर अकादमी का सीबीएसई 10वीं में शानदार प्रदर्शन, छात्रा संस्कृति ने किया टॉप
मेरठ, बहसूमा। सीबीएसई कक्षा 10वीं के घोषित परीक्षा परिणाम में डी मोनफोर अकादमी के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल देखने को मिला।

विद्यालय की छात्रा संस्कृति ने 91 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं परी ने 87.8 प्रतिशत अंक के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा नवनीत ने 87.4 प्रतिशत अंक हासिल कर तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी सफल विद्यार्थियों को विद्यालय परिवार और अभिभावकों ने बधाई दी।

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. समीर वर्मा ने विद्यार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। उन्होंने छात्रों को भविष्य में भी इसी लगन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय के निदेशक डॉ. के.के. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से छात्र हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

विद्यालय की निर्देशिका डॉ. गरिमा वर्मा ने सफल विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह परिणाम छात्रों की मेहनत और शिक्षकों के समर्पण का प्रमाण है।

उपप्रधानाचार्या श्रीमती रितु चिकारा ने भी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर ही यह सफलता संभव हो पाई है। उन्होंने सभी छात्रों को निरंतर प्रगति करते रहने का संदेश दिया।

विद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल तय, सफर महंगा—ट्रेन अब भी सस्ता और सुविधाजनक विकल्प
लखनऊ। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल निर्धारित कर दिया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का न्यूनतम टोल 275 रुपये रखा गया है, जिसे आम यात्रियों के लिए महंगा माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 3600 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसके 15 मई के बाद उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है।

अधिकारियों का दावा है कि इस एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से कानपुर तक का सफर करीब 35 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं जाता, बल्कि उन्नाव के शुक्लागंज तक ही सीमित है। इसके बाद यात्रियों को जाजमऊ होते हुए शहर में प्रवेश करना होगा, जहां ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। ऐसे में कुल यात्रा समय बढ़कर डेढ़ से दो घंटे तक पहुंचने की आशंका है।

दूसरी ओर, रेलवे सेवाएं यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती विकल्प बनी हुई हैं। तेजस एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से लखनऊ से कानपुर का सफर लगभग 1 घंटे 10 मिनट से 1 घंटे 20 मिनट में पूरा किया जा सकता है। इन ट्रेनों का किराया भी 489 से 500 रुपये के बीच है, जबकि अन्य ट्रेनों में स्लीपर और एसी श्रेणी में इससे भी कम किराये पर यात्रा संभव है।

टोल दरों की बात करें तो कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का शुल्क 275 रुपये रखा गया है, जबकि हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए 445 रुपये, बस और ट्रक के लिए 935 रुपये तथा थ्री एक्सल वाहनों के लिए 1020 रुपये टोल निर्धारित किया गया है।

इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो चरणों में किया गया है। पहला चरण स्कूटर इंडिया से बनी तक और दूसरा चरण बनी से उन्नाव के शुक्लागंज तक विकसित किया गया है। हालांकि, इसे लेकर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि जब एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं पहुंचता, तो इसे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कहना पूरी तरह उचित नहीं है।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर एक्सप्रेसवे तेज सफर का विकल्प देने का दावा करता है, वहीं अधिक टोल और शहर में प्रवेश की संभावित दिक्कतों के कारण यात्रियों के लिए ट्रेन फिलहाल अधिक बेहतर और किफायती विकल्प बनी हुई है।
उत्तर विकास सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित श्री राम कथा सुनने के लिए भारी भीड़
कल्याण। उत्तर विकास सामाजिक संस्था (रजि.) द्वारा आयोजित तुलसीकृत श्री रामचरितमानस कथा का आयोजन कल्याण (प) के परदेसी ग्राउंड में किया गया है! यह श्रीराम कथा 14 अप्रैल से शुरू होकर 23 अप्रैल तक होगी!
अयोध्या से पधारे हुए पूज्य गायत्री नंदन महाराज द्वारा यह कथा कही जा रही है!
महामंडलेश्वर चन्द्रदेव दास जी की उपस्थिति में और डॉ विजय  पंडित के मार्गदर्शन में आयोजित इस शोभा यात्रा में नीरजा मिश्रा,डॉ पद्मिनी कृष्णा,प्रिया शर्मा,अरुण दूबे,दिनेश दूबे,अनिल दुबे तथा उत्तर भारतीय विकास सामाजिक संस्था के अध्यक्ष रवि गुप्ता, उपाध्यक्ष बृजेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष,मिलिंद सिंह महासचिव दिनेश अग्रहरि,कमलेश तिवारी तथा संस्था के सम्मानित सदस्य उपस्थित थे!
कथा के मुख्य यजमान कासट परिवार है। प्रतिदिन कथा में सभी धर्मप्रेमियों को पधारने का आवाहन संस्था के मार्गदर्शक डॉ विजय पंडित और संस्था के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने किया है!
महानगरपालिका में परिवहन समिति सदस्य निर्वाचित हुए एड. राजकुमार मिश्रा
भायंदर। उत्तर भारतीय समाज के लोकप्रिय युवा चेहरा एडवोकेट राजकुमार मिश्रा को मीरा भायंदर महानगरपालिका में परिवहन समिति का सदस्य निर्वाचित किया गया है। इसके पहले भी परिवहन समिति का सदस्य रह चुके हैं। एड मिश्रा ने विधायक नरेंद्र मेहता, महापौर डिंपल मेहता जिलाध्यक्ष दिलीप जैन उप महापौर ध्रुव किशोर पाटिल स्थाई समिति सभापति हसमुख गहलोत का आभार मानते हुए कहा कि वह दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरे मनोयोग और समर्पित भावना के साथ करेंगे। उन्हें परिवहन समिति का सदस्य बनाए जाने पर शिक्षासम्राट लल्लन तिवारी, वरिष्ठ समाजसेवी दिनेश उपाध्याय,भाजपा नेता अमरजीत मिश्रा, नगरसेवक मदन सिंह, राहुल एजुकेशन के सचिव राहुल तिवारी, एड.आरजे मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, अभयराज चौबे, प्रो. विजयनाथ मिश्रा, नगरसेवक मनोज रामनारायण दुबे, उत्तर भारतीय मोर्चा के जिलाध्यक्ष संतोष दिक्षित,भाजपा नेता सुरेश सिंह, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, नगरसेवक विवेक उपाध्याय, भाजपा प्रवक्ता शैलेश पांडे, अमरनाथ तिवारी, समाजसेवी अरविंद उपाध्याय,रामलीला समिति के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ,विजय मिश्रा, कमलेश दुबे, डॉ उमेश शुक्ला, डॉ सुधाकर मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, जटाशंकर पांडे, बीआर मिश्रा, एड. डीके पांडे, अजय सिंह, उत्तम चौबे, अभयराज पांडे, प्रदीप सिंह,अमृत प्रजापती, उमेश यादव, कैलास यादव,विकास उपाध्याय समेत अनेक लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
किशोरी से दुष्कर्म का प्रयास करने वाला भेजा गया जेल
रितेश मिश्रा
हरदोई।कोतवाली शहर पुलिस ने किशोरी से दुष्कर्म करने के प्रयास में वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
        प्राप्त विवरण में 16 अप्रैल को किशोरी की माँ द्वारा थाना कोतवाली शहर पर तहरीर दी गयी कि प्रताप पुत्र रामस्वरूप यादव निवासी ग्राम शहाबुद्दीनपुर थाना कोतवाली शहर द्वारा उसकी पुत्री के साथ गलत कार्य करने का प्रयास किया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की।
       निरीक्षक शिव गोपाल द्वारा उक्त अभियोग से संबंधित नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट, हेल्पलाइन नंबर जारी .
रितेश मिश्रा
हरदोई। आगामी अक्षय तृतीया के अवसर पर संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनसामान्य से अपील की है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में सहयोग करें और कहीं भी ऐसी सूचना मिलने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें। जारी अपील में कहा गया है कि बाल विवाह के कारण बेटियों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। इसे रोकने के लिए सभी संस्थाओं, महिला समूहों, ग्राम प्रधानों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा बहुओं और समाज सेवकों से सहयोग मांगा गया है।

प्रशासन ने नागरिकों से कहा है कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर 181, 1098 और 112 हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। इसके अलावा सीधे जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय या जिला बाल संरक्षण इकाई, न्यू सिविल लाइन कॉलोनाइज्ड, सीडीओ आवास के पास, हरदोई में भी सूचना दी जा सकती है। प्रेस नोट में बताया गया है कि लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने पर विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो कानूनन अपराध है। बाल विवाह कराने वालों में पंडित, मौलवी, टेंट, बैंड, मैरिज हॉल, हलवाई, माता-पिता और सहयोगी भी दोषी माने जाएंगे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत दोषियों को दो वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
बुजुर्ग पर लाठी डंडे व चाकू से हमला,रास्ते में घात लगाकर कर रहे थे इंतजार
*जबड़ा टूटा,आरोपी फरार

गोंडा।जिले के खोंडारे थाना क्षेत्र अंतर्गत दबंगई की एक वारदात सामने आई है।जिसमें अल्लीपुर नरहरपुर निवासी राजेश चतुर्वेदी अपने घर लौट रहे थे कि तभी उनके ऊपर जानलेवा हमला कर दिया गया।यह घटना उस समय हुई जब राजेश मसकनवां बाजार से काम निपटा कर लौट रहे थे।दौलतपुर ग्रांट प्राथमिक विद्यालय के पास आरोपी अहमद पहले से घात लगाए बैठा था।जैसे ही राजेश वहाँ पहुंचे उनकी मोटरसाइकिल रोक दी गई और गाड़ी में तोड़फोड़ की गई।आरोप है कि अहमद ने अपने साथियों के साथ मिलकर लाठी डंडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया,जिससे इस हमले में राजेश चतुर्वेदी गंभीर रूप से घायल हो गये।इस हमले में उनके जबड़े को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है और उनके शरीर पर कई चोटों के निशान हैं।पीड़ित राजेश चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने मारपीट के दौरान उनकी सोने की अंगूठी भी छीन लिया।घटना के बाद घायल को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनका इलाज जारी है।मामले में थानाध्यक्ष कृष्ण गोपाल राय ने बताया कि आरोपी अहमद के खिलाफ जानलेवा हमले समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया है और आरोपी के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।पुलिस ने घायल का मेडिकल परीक्षण भी कराया है और मामले की जांच जारी है।घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

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महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

लोकसभा में ज्यादा वोट पाकर भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिला, जानें अब आगे क्या?

#womenreservationbill2026whyitfailedinlok_sabha

महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। मतदान के समय सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसके कारण अधिक वोट मिलने के बाद भी बिल फेल हो गया।

पिछले 12 सालों में पहली बार गिरा कोई संशोधन विधेयक

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। देश की आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए शुक्रवार शाम लोकसभा में वोटिंग हुई। सरकार ने इस बिल को पारित कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन यह बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े और कहानी यहीं पर समाप्त हो गई।

विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है। रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

बाकी दो विधेयकों पर क्यों नहीं हुई वोटिंग

सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल में क्या था प्रस्ताव?

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

विपक्ष क्यों है नाराज?

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा परिसीमन यानी डिलीमिटेशन को लेकर भी सामने आया। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटों का पुनर्निर्धारण करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया। विपक्ष का तर्क था कि परिसीमन के जरिए कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे तुरंत लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया और बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।

सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा 6 जनपदों में शांतिपूर्ण ढंग से शुरू

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) के 09 विषयों—Asian Culture, Music Tabla, Physical Education, Urdu, English, Sociology, Chemistry, Education एवं Zoology—की लिखित पुनर्परीक्षा आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 को प्रथम पाली में प्रातः 09:30 बजे से सफलतापूर्वक प्रारम्भ हो गई।

यह परीक्षा प्रदेश के 6 जनपदों—आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर एवं वाराणसी—के कुल 48 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है। सभी केन्द्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

आयोग द्वारा स्थापित Integrated Control Command Room के माध्यम से सभी परीक्षा केन्द्रों की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

डी मोनफोर अकादमी का सीबीएसई 10वीं में शानदार प्रदर्शन, छात्रा संस्कृति ने किया टॉप
मेरठ, बहसूमा। सीबीएसई कक्षा 10वीं के घोषित परीक्षा परिणाम में डी मोनफोर अकादमी के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल देखने को मिला।

विद्यालय की छात्रा संस्कृति ने 91 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं परी ने 87.8 प्रतिशत अंक के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा नवनीत ने 87.4 प्रतिशत अंक हासिल कर तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी सफल विद्यार्थियों को विद्यालय परिवार और अभिभावकों ने बधाई दी।

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. समीर वर्मा ने विद्यार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। उन्होंने छात्रों को भविष्य में भी इसी लगन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय के निदेशक डॉ. के.के. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से छात्र हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

विद्यालय की निर्देशिका डॉ. गरिमा वर्मा ने सफल विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह परिणाम छात्रों की मेहनत और शिक्षकों के समर्पण का प्रमाण है।

उपप्रधानाचार्या श्रीमती रितु चिकारा ने भी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर ही यह सफलता संभव हो पाई है। उन्होंने सभी छात्रों को निरंतर प्रगति करते रहने का संदेश दिया।

विद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल तय, सफर महंगा—ट्रेन अब भी सस्ता और सुविधाजनक विकल्प
लखनऊ। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल निर्धारित कर दिया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का न्यूनतम टोल 275 रुपये रखा गया है, जिसे आम यात्रियों के लिए महंगा माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 3600 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसके 15 मई के बाद उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है।

अधिकारियों का दावा है कि इस एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से कानपुर तक का सफर करीब 35 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं जाता, बल्कि उन्नाव के शुक्लागंज तक ही सीमित है। इसके बाद यात्रियों को जाजमऊ होते हुए शहर में प्रवेश करना होगा, जहां ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। ऐसे में कुल यात्रा समय बढ़कर डेढ़ से दो घंटे तक पहुंचने की आशंका है।

दूसरी ओर, रेलवे सेवाएं यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती विकल्प बनी हुई हैं। तेजस एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से लखनऊ से कानपुर का सफर लगभग 1 घंटे 10 मिनट से 1 घंटे 20 मिनट में पूरा किया जा सकता है। इन ट्रेनों का किराया भी 489 से 500 रुपये के बीच है, जबकि अन्य ट्रेनों में स्लीपर और एसी श्रेणी में इससे भी कम किराये पर यात्रा संभव है।

टोल दरों की बात करें तो कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का शुल्क 275 रुपये रखा गया है, जबकि हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए 445 रुपये, बस और ट्रक के लिए 935 रुपये तथा थ्री एक्सल वाहनों के लिए 1020 रुपये टोल निर्धारित किया गया है।

इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो चरणों में किया गया है। पहला चरण स्कूटर इंडिया से बनी तक और दूसरा चरण बनी से उन्नाव के शुक्लागंज तक विकसित किया गया है। हालांकि, इसे लेकर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि जब एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं पहुंचता, तो इसे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कहना पूरी तरह उचित नहीं है।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर एक्सप्रेसवे तेज सफर का विकल्प देने का दावा करता है, वहीं अधिक टोल और शहर में प्रवेश की संभावित दिक्कतों के कारण यात्रियों के लिए ट्रेन फिलहाल अधिक बेहतर और किफायती विकल्प बनी हुई है।
उत्तर विकास सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित श्री राम कथा सुनने के लिए भारी भीड़
कल्याण। उत्तर विकास सामाजिक संस्था (रजि.) द्वारा आयोजित तुलसीकृत श्री रामचरितमानस कथा का आयोजन कल्याण (प) के परदेसी ग्राउंड में किया गया है! यह श्रीराम कथा 14 अप्रैल से शुरू होकर 23 अप्रैल तक होगी!
अयोध्या से पधारे हुए पूज्य गायत्री नंदन महाराज द्वारा यह कथा कही जा रही है!
महामंडलेश्वर चन्द्रदेव दास जी की उपस्थिति में और डॉ विजय  पंडित के मार्गदर्शन में आयोजित इस शोभा यात्रा में नीरजा मिश्रा,डॉ पद्मिनी कृष्णा,प्रिया शर्मा,अरुण दूबे,दिनेश दूबे,अनिल दुबे तथा उत्तर भारतीय विकास सामाजिक संस्था के अध्यक्ष रवि गुप्ता, उपाध्यक्ष बृजेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष,मिलिंद सिंह महासचिव दिनेश अग्रहरि,कमलेश तिवारी तथा संस्था के सम्मानित सदस्य उपस्थित थे!
कथा के मुख्य यजमान कासट परिवार है। प्रतिदिन कथा में सभी धर्मप्रेमियों को पधारने का आवाहन संस्था के मार्गदर्शक डॉ विजय पंडित और संस्था के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने किया है!
महानगरपालिका में परिवहन समिति सदस्य निर्वाचित हुए एड. राजकुमार मिश्रा
भायंदर। उत्तर भारतीय समाज के लोकप्रिय युवा चेहरा एडवोकेट राजकुमार मिश्रा को मीरा भायंदर महानगरपालिका में परिवहन समिति का सदस्य निर्वाचित किया गया है। इसके पहले भी परिवहन समिति का सदस्य रह चुके हैं। एड मिश्रा ने विधायक नरेंद्र मेहता, महापौर डिंपल मेहता जिलाध्यक्ष दिलीप जैन उप महापौर ध्रुव किशोर पाटिल स्थाई समिति सभापति हसमुख गहलोत का आभार मानते हुए कहा कि वह दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरे मनोयोग और समर्पित भावना के साथ करेंगे। उन्हें परिवहन समिति का सदस्य बनाए जाने पर शिक्षासम्राट लल्लन तिवारी, वरिष्ठ समाजसेवी दिनेश उपाध्याय,भाजपा नेता अमरजीत मिश्रा, नगरसेवक मदन सिंह, राहुल एजुकेशन के सचिव राहुल तिवारी, एड.आरजे मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, अभयराज चौबे, प्रो. विजयनाथ मिश्रा, नगरसेवक मनोज रामनारायण दुबे, उत्तर भारतीय मोर्चा के जिलाध्यक्ष संतोष दिक्षित,भाजपा नेता सुरेश सिंह, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, नगरसेवक विवेक उपाध्याय, भाजपा प्रवक्ता शैलेश पांडे, अमरनाथ तिवारी, समाजसेवी अरविंद उपाध्याय,रामलीला समिति के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ,विजय मिश्रा, कमलेश दुबे, डॉ उमेश शुक्ला, डॉ सुधाकर मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, जटाशंकर पांडे, बीआर मिश्रा, एड. डीके पांडे, अजय सिंह, उत्तम चौबे, अभयराज पांडे, प्रदीप सिंह,अमृत प्रजापती, उमेश यादव, कैलास यादव,विकास उपाध्याय समेत अनेक लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
किशोरी से दुष्कर्म का प्रयास करने वाला भेजा गया जेल
रितेश मिश्रा
हरदोई।कोतवाली शहर पुलिस ने किशोरी से दुष्कर्म करने के प्रयास में वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
        प्राप्त विवरण में 16 अप्रैल को किशोरी की माँ द्वारा थाना कोतवाली शहर पर तहरीर दी गयी कि प्रताप पुत्र रामस्वरूप यादव निवासी ग्राम शहाबुद्दीनपुर थाना कोतवाली शहर द्वारा उसकी पुत्री के साथ गलत कार्य करने का प्रयास किया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की।
       निरीक्षक शिव गोपाल द्वारा उक्त अभियोग से संबंधित नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।