जिलाधिकारी ने थाना कोतवाली देहात में जनसमस्याओं की सुनवाई कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हेतु अधिकारियों को दिये निर्देश
समाधान दिवस में अनुपस्थित लेखपालों को शोकाज नोटिस जारी करने के निर्देश-जिलाधिकारी*

*गोण्डा 28 मार्च,2026*।
आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं पारदर्शी समाधान के उद्देश्य से थाना कोतवाली देहात में थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन द्वारा उपस्थित फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
थाना परिसर में आयोजित समाधान दिवस में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र से आए नागरिकों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जा, रास्ता अवरोध, राजस्व अभिलेखों में त्रुटि, पारिवारिक विवाद तथा अन्य स्थानीय समस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायत को ध्यानपूर्वक सुनते हुए संबंधित अधिकारियों से प्रकरण की वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त की।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राप्त सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनके निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

उन्होंने कहा कि राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करे तथा समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करे। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि शिकायतकर्ता एवं विपक्षी पक्ष—दोनों को बुलाकर पारदर्शी तरीके से प्रकरण का समाधान कराया जाए, जिससे भविष्य में विवाद की पुनरावृत्ति न हो।
समाधान दिवस के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष प्रकरणों के लिए संबंधित विभागों को निश्चित समयसीमा निर्धारित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि आमजन को न्याय पाने के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समाधान दिवस जैसी पहल जनता और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करती है।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा प्रत्येक शिकायत का संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करें। जनसुनवाई में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो लेखपाल बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं उनको तत्काल शोकाज नोटिस जारी किया जाए।

कार्यक्रम में थाना प्रभारी कोतवाली देहात तथा राजस्व एवं पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
रजिस्टर में सुरक्षा,टोटी गायब, शौचालय से 100 मीटर दूर से ही आती है दुर्गंध
*रेलवे प्रशासन एयरपोर्ट की तर्ज पर यात्रियों को सुविधाएं देने का करता है दावा*

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। कालीन नगरी के तीनों प्रमुख रेलवे स्टेशन भदोही, ज्ञानपुर रोड और सुरियावां में रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। तीनों स्टेशनों से हर दिन लगभग 50 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। किसी भी रेलवे स्टेशन पर न बैठने की, न पेयजल की, न शौचालय की व्यवस्था है। पेयजल के लिए लगाई गई टोटियां चोरी हो गई हैं। जबकि आरपीएफ और जीआरपी हमेशा पेट्रोलिंग करने का दावा करती है। शौचालय में सफाई की दशा यह है कि 100 मीटर दूर से ही दुर्गंध आ रही है। जबकि सफाई के लिए हर स्टेशन पर रेलवे बोर्ड ने कार्यदायी संस्था कोे जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए हर स्टेशन पर कार्यदायी संस्था के एक-एक सुपरवाइजर तैनात हैं। जो तीन शिफ्ट में सफाई कर्मियों से सफाई कराते हैं।


सीन एक : ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर वेटिंग रूम में ताला बंद
जनपद का सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन ज्ञानपुर रोड है। यहां से नईदिल्ली और गुजरात रूट की ट्रेने जाती हैं। हर दिन लगभग 12 से 15 हजार लोग यात्रा करते हैं। पेयजल के लिए लगाई गई टोटियां गायब हो गई हैं। वेटिंग रूम में ताला लटका रहता है। अवैध वेंडर सक्रिय हैं। कई बार सामान बेचने के चक्कर में अवैध वेंडरों का आमना-सामना हो चुका है। इसमें कई यात्री चोटिल भी हुए थे।



सीन दो : भदोही रेलवे स्टेशन पर कोच इंडिकेटर नहीं, छूट जाती है ट्रेन
जनपद का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन भदोही है। यहां से मुंबई रूट की ट्रेने जाती हैं। हर दिन 20 से 25 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। बीते दो सालों से स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत यात्री सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। किसी भी प्लेटफॉर्म पर कोच इंडिकेटर नहीं है। इस कारण कई बार यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है। सिर्फ एक आरक्षण काउंटर होने से यात्रियों को भीड़ का सामना करना पड़ता है।


सीन तीन : सुरियावां स्टेशन पर शेड नहीं होने से धूप में खड़े रहते हैं यात्री
जंघई-वाराणसी रेलखंड का सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहां से हर दिन लगभग 8 से 10 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। किसी भी प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। तेज धूप में खड़े होकर यात्री ट्रेनों के आने का इंतजार करते हैं। इस स्टेशन पर आरक्षण केंद्र की भी सुविधा नहीं है। दोनों प्लेटफार्मों पर लगे हैंडपंप सूख गए हैं। दो हैंडपंपों से बालू वाला पानी आ रहा है।

सुने यात्रियों की समस्या भी
ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर वेटिंग हॉल और शौचालय प्रमुख समस्या है। आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी। ऐसे में यात्रियों के लिए वेटिंग रूम खोलना जरूरी है।
- सुनील कुमार, खमरिया।

ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक से दो तक जाने के लिए अंडरपास बनाया जाना चाहिए। इससे वृद्धजनों और महिलाओं को सुविधा होगी।
- संजय यादव, कसिदहा

व्यापारिक दृष्टिकोण से यह स्टेशन महत्वपूर्ण है। यहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है। दूर से आने वाले यात्री कहां बैठकर ट्रेन का इंतजार करेंगे। यह तो रेलवे को भी पता नहीं है।
- जतन गुप्ता, सुरियावां

हमें मुंबई जाना है। यहीं से ट्रेन पकड़ूंगा। ट्रेन आने में अभी एक घंटे का समय है। जब से स्टेशन पर आया हूं। खड़ा ही हूं। हाथ धूलने के लिए बोतल बंद पानी खरीदना पड़ा है।
- चंद्रदीप शुक्ला, निदिउरा, अभिया


स्टेशन अधीक्षकों ने कहा

स्टेशन पर कुछ विकास कार्य कराए गए हैं। अभी बहुत काम बचा है। इसकी रिपोर्ट रेलवे प्रशासन को भेज दी गई है। - अमित कुमार, सुरियावां स्टेशन अधीक्षक
नियमित सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी कमियां हैं दूर कराने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। - अरविंद श्रीवास्तव, ज्ञानपुर स्टेशन अधीक्षक
अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन पर विकास कार्य चल रहा है। यात्री सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास जारी हैं। जो भी कमी है जल्द उसमें सुधार किया जाएगा। - कोमल सिंह, भदोही स्टेशन अधीक्षक

ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन की प्रमुख ट्रेनें
- शिवगंगा एक्सप्रेस

- विभूति एक्सप्रेस

- पटना सिकंराबाद एक्सप्रेस
- नई-दिल्ली मंडुआडीह एक्सप्रेस

- उधना-दानापुर एक्सप्रेस
- कामाख्या स्पेशल ट्रेन


भदोही रेलवे स्टेशन की प्रमुख ट्रेनें
- पंजाब मेल
- बुदेंलखंड एक्सप्रेस
- रत्नागिरी एक्सप्रेस

- दादर एक्सप्रेस
- जनता एक्सप्रेस

- काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस
- अर्चना एक्सप्रेस
शादी टूटने से परेशान युवती ने फांसी लगाकर दी जान,8 महीने पहले तय हुआ था रिश्ता

शारीरिक संबंध बनाने व दूसरी जगह शादी तय करने का लगा आरोप

गोंडा।जिले के छपिया थाना क्षेत्र में दहेज की मांग और शादी टूटने से परेशान साक्षी सोनी (22) ने आत्महत्या कर लिया।बैकुंठपुर (भरथीपुर) गांव में युवती ने अपने घर के अंदर फांसी लगाकर जान दे दिया।घटना की सूचना पाकर छपिया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और साक्षी सोनी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।मृतका के पिता भगवान दीन सोनी ने थाने में तहरीर दिया है।तहरीर के अनुसार, उनकी बेटी साक्षी की शादी 8 महीने पहले चांदनी चौक निवासी शिवम सोनी से तय हुई थी।शादी तय होने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और युवक का युवती के घर आना जाना भी होने लगा।परिजनों ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान युवक ने युवती के साथ शारीरिक सम्बन्ध भी बनाया।

परिजनों का आरोप है कि बाद में युवक और उसके परिवार ने पांच लाख रूपए दहेज की मांग  शुरू कर दिया जबकि पहले एक लाख रुपए तय हुआ था और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार मांग पूरी नहीं कर सका।इसके बाद शिवम सोनी ने कहीं और शादी तय कर लिया।हालांकि, दूसरी शादी तय होने के बावजूद युवक युवती से लगातार संपर्क में बना रहा,जिससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी।पिता भगवान दीन सोनी ने बताया कि इसी मानसिक तनाव के चलते दोपहर में युवती ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया।घटना के बाद भी आरोपी युवक द्वारा युवती के मोबाइल पर फोन किए जाने की बात सामने आई है।मामले में छपिया थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने बताया कि उन्हें तहरीर मिल गई है और प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।परिजनों के अनुसार दहेज की बड़ी मांग  और शादी टूटने की स्थिति ने युवती को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया था,जिसके कारण उसने यह कदम उठाया।
आस्था और पर्यावरण का संगम: बागपत का पुरा महादेव बना जीरो वेस्ट तीर्थ पर्यटन का मॉडल

* बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 से सम्मानित पुरा महादेव में ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल से सतत विकास की नई मिसाल

लखनऊ/बागपत। उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव ने ‘बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024’ का गौरव हासिल करने के बाद अब सतत और जिम्मेदार तीर्थ पर्यटन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल के तहत परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर जीरो वेस्ट व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की गई।
इस पहल के तहत मंदिर में चढ़ने वाली भेंट और उत्सव के दौरान उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन किया गया, वह भी धार्मिक परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखते हुए। फूलों, दूध, जैविक अवशेष, प्लास्टिक बोतलों, पूजा धागों और यहां तक कि छोड़ी गई चप्पलों को भी एकत्र कर प्रोसेस कर पुनः उपयोग में लाया गया।

* कचरा नहीं, संसाधन: सफलता की मिसाल
इस अनूठी पहल के परिणाम प्रभावशाली रहे। 450 किलोग्राम से अधिक फूलों को प्रोसेस किया गया, लगभग एक टन जैविक सामग्री से खाद तैयार हुई और करीब 700 किलोग्राम प्लास्टिक को फाइबर फिल में बदला गया। 3,000 से अधिक पूजा धागों का पुनः उपयोग हुआ, 2,500 चप्पलों को मैट व इंस्टॉलेशन में बदला गया, जबकि 4,563 लीटर दूध पशु देखभाल के लिए उपयोग में लाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार यह मॉडल दो प्रमुख स्तंभों—भेंट सामग्री की रिकवरी एवं पुनर्वितरण तथा समुदाय आधारित सर्कुलर पुनः उपयोग—पर आधारित है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिला है।
इस पहल में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही, विशेषकर महिलाओं ने छंटाई और प्रोसेसिंग कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह सिद्ध हुआ कि धार्मिक स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
मंदिर परिसर में स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने स्वच्छ वातावरण और भेंट सामग्री के सम्मानजनक पुनः उपयोग की सराहना की। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल प्रदेश की टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता और सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से धार्मिक स्थलों को जिम्मेदार पर्यटन के प्रभावी मॉडल में बदला जा सकता है। बागपत प्रशासन अब इस मॉडल को अन्य मंदिरों में लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर सततता और स्वच्छता को और बढ़ावा मिल सके।
फोन की रिकार्डिंग सुन पत्नी के प्रेमी की हत्या,फोन कर मिलने के बहाने बुलाया
*लाठी डंडों से पीटा फिर दबाया गला

गोंडा।जिले में हाईस्कूल छात्र हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है।पुलिस ने मृतक छात्र की प्रेमिका के पति समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 24 मार्च की रात साहिल को फोन कर बुलाया।उसको लाठी डंडों से पीटा उसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दिया।जांच में सामने आया है कि 20 साल का साहिल और 22 साल की मानसी चौहान के बीच पिछले तीन साल से अफेयर था,दोनों साथ में पढ़ाई करते थे।मानसी की शादी के बाद भी दोनों का रिश्ता चलता रहा।मानसी के पति ने दोनों की बातचीत की रिकार्डिंग फोन में सुन लिया था,उसके बाद मर्डर का प्लान बनाया।आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।मामला तरबगंज थाना क्षेत्र के लोनियन पुरवा गांव का है।गौरतलब हो कि ग्राम पंचायत पिपरी रोहुआ के तालाब के किनारे बुधवार सुबह एक युवक का शव मिला था।खेतों में सरसों की कटाई कर रहे किसानों ने शव देखकर पुलिस को सूचना दिया था।शव की पहचान बिशुनपुर बनियन गांव निवासी साहिल के रूप में हूई थी।शव से 200 मीटर की दूरी पर साहिल की मोटरसाइकिल मिली थी परन्तु उसका मोबाइल गायब था और हाथ पैर व शरीर पर चोट के नीशान थे।इसके बाद परिजनों ने साहिल के हत्या की आशंका व्यक्त किया था,इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर हत्या के संभावनाओं पर जांच शुरू कर दिया।भरोसेमंद सूत्रों की माने तो तरबगंज तहसील अंतर्गत गत 13 मार्च को हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में लोनियन पुरवा गांव निवासनी मानसी चौहान की शादी उसके परिजनों ने रामशंकर चौहान के साथ कर दिया था परन्तु शादी के बाद भी मानसी और साहिल की बातचीत जारी रही,जिससे पति रामशंकर को शक हो गया तदोपरांत रामशंकर ने पत्नी मानसी की मोबाइल में काल रिकार्डिंग लगा दिया और जब 24 मार्च को उसने फोन चेक किया तो उसे साहिल की काल रिकार्डिंग मिली।काल रिकार्डिंग मिलने के बाद उसने हत्या की साजिश रची और अपने तीन साथियों नानबाबू चौहान, दिनेश चौहान और रमन उर्फ अंगद चौहान को साथ लेकर वारदात को अंजाम दिया।24 मार्च की रात को आरोपियों ने साहिल को सीधे अपने फोन से नहीं बल्कि  मानसी के फोन से काल कर बुलाया ताकि उसे कोई संदेह न हो।फ़ोन आने के बाद साहिल को लगा कि वह मानसी से मिलने जा रहा है,परन्तु यह एक साजिश थी।फोन आने के बाद घर से निकलते समय साहिल ने अपनी माँ से कहा कि वह गांव में एक जन्मदिन कार्यक्रम में जा रहा है,जबकि उसे कोई निमंत्रण नहीं मिला था।साहिल चार भाइयों में सबसे छोटा था और हाल में ही उसने हाईस्कूल की परीक्षा दिया था परन्तु परिणाम आने से पहले ही उसकी हत्या कर दी गई।पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दिया है
गया में “उद्यमिता सम्मेलन 2026” का आयोजन, ग्रामीण उद्यमियों को मिला नया मंच,

गया: ग्रामीण उद्यमिता को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बोधगया स्थित टेकुना फॉर्म के समीप एक निजी होटल में शुक्रवार को “उद्यमिता सम्मेलन 2026” का सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा, जहां विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उद्यमी, विशेषज्ञ, संस्थान और नीति निर्माता एकत्रित होकर विचारों का आदान-प्रदान किया और विकास के नए अवसरों की तलाश की।

सम्मेलन की प्रमुख विशेषताओं में माइक्रो और छोटे उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों, सेवाओं और व्यवसाय मॉडलों का लाइव प्रदर्शन शामिल रहा। इस प्रदर्शनी ने स्थानीय उद्यमियों को अपनी पहचान स्थापित करने का अवसर प्रदान किया, वहीं उपस्थित प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर हो रहे नवाचारों से परिचित होने का मौका मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद किए जा रहे नवाचारों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण उद्यमिता के अवसरों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर आधारित पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इन चर्चाओं में विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए उद्यमियों को बाजार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और वित्तीय सहायता से जुड़ने के उपाय बताए। इसके साथ ही बैंकिंग और निर्यात क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे, जिससे उद्यमियों को व्यावसायिक विस्तार की दिशा में मार्गदर्शन मिला। सम्मेलन का एक विशेष आकर्षण उद्यमियों के अनुभव साझा करने का सत्र रहा, जिसमें उन्होंने अपनी सफलता, संघर्ष और नवाचार की प्रेरणादायक कहानियां प्रस्तुत कीं। इन अनुभवों ने अन्य प्रतिभागियों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का हौसला भी दिया।

इस आयोजन में नेटवर्किंग के लिए भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए, जिससे प्रतिभागियों को विभिन्न संस्थानों, विशेषज्ञों और संभावित सहयोगियों से जुड़ने का अवसर मिला। सम्मेलन के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया गया, जिससे उनके प्रयासों को पहचान मिली और अन्य लोगों को भी प्रेरणा प्राप्त हुई।

सर्व सेवा समिति संस्था 4S इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिहिर शाहना ने बताया कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उद्यमियों के लिए आयोजित किया गया है, जो छोटे स्तर पर कार्य करते हुए अपने साथ-साथ समाज को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं मशरूम उत्पादन, बकरी पालन, स्ट्रॉबेरी खेती और सिलाई जैसे कार्यों के माध्यम से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है।

भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
बूढनपुर भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर महान सम्राट को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन, उनके शासनकाल और उनके द्वारा अपनाए गए बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया गया कि सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश पूरे विश्व में फैलाया।समारोह की अध्यक्षता कांता प्रसाद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बासदेव मौर्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लालचंद मौर्य ने किया। संयोजक के रूप में अमन मौर्य, नागेश मौर्य, मनीष मौर्य और आर्यन सम्राट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर एडवोकेट राजेश मौर्य, एडवोकेट जयप्रकाश मौर्य, अर्जुन मौर्य, अनिल मौर्य, जिम्मी सिंह, सुशील उपाध्याय, सागर मौर्य, अजय मौर्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाने और समाज में शांति, एकता एवं सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें 'मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद' - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।

आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।

मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।

अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।

खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।

अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
नन्हीं यशस्विनी का ‘बुलडोजर गिफ्ट’, सीएम योगी भी नहीं रोक पाए मुस्कान

* गोरखनाथ मंदिर में मासूम बच्ची ने आंखें बंद करवाकर दिया सरप्राइज, मुख्यमंत्री ने चॉकलेट देकर जताया स्नेह

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज गोरखनाथ मंदिर परिसर में एक नन्हीं बच्ची के अनोखे गिफ्ट ने मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। कानपुर से आई 4 वर्षीय यशस्विनी सिंह ने मुख्यमंत्री को खिलौना ‘बुलडोजर’ भेंट कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
शुक्रवार सुबह अपनी नियमित दिनचर्या के तहत मंदिर परिसर में भ्रमण कर रहे मुख्यमंत्री की नजर यशस्विनी पर पड़ी, जो अपने माता-पिता के साथ गोरखपुर आई थी। सीएम ने स्नेहपूर्वक उसे पास बुलाया, चॉकलेट दी और बातचीत की। इसी दौरान बच्ची ने मासूमियत भरे अंदाज में कहा, “आंखें बंद करिए, आपको गिफ्ट देना है।”
मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उसकी बात मान ली। जैसे ही उन्होंने आंखें बंद कीं, यशस्विनी ने उनके हाथों में एक छोटा सा बुलडोजर (खिलौना) रख दिया। गिफ्ट देखते ही मुख्यमंत्री समेत वहां मौजूद सभी लोग हंसी नहीं रोक पाए।
यशस्विनी ने कहा कि मुख्यमंत्री को बुलडोजर पसंद है, इसलिए वह यह खास गिफ्ट लेकर आई है। कानपुर के प्रताप इंटरनेशनल कॉलेज की नर्सरी छात्रा यशस्विनी अपने पिता अभय सिंह राजावत और मां प्रियदम्वा सिंह के साथ गोरक्षपीठाधीश्वर का आशीर्वाद लेने आई थी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद वह बेहद खुश नजर आई।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन को तैयार, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; 12 शहरों के लिए उड़ानें शुरू

* 7 हजार पुलिसकर्मी तैनात, 300 CCTV कैमरों से निगरानी; एक्सप्रेस-वे पर यातायात प्रतिबंध लागू

नोएडा/लखनऊ। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। समारोह में करीब 7000 पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी, जबकि पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी 300 CCTV कैमरों से की जाएगी।
उद्घाटन समारोह के मद्देनजर प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया है। 28 तारीख की सुबह 7 बजे से 11 बजे तक विशेष प्रतिबंध लागू रहेगा। इस दौरान नोएडा एक्सप्रेस-वे पर मालवाहक वाहनों के संचालन पर रोक रहेगी। यही प्रतिबंध यमुना एक्सप्रेस-वे पर भी प्रभावी रहेगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुबह 11:30 से 12:00 बजे के बीच पहुंचने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
एयरपोर्ट के संचालन के पहले चरण में 12 शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू की जाएंगी। इनमें मुंबई, बेंगलूरु, चेन्नई, कोलकाता, कानपुर और लखनऊ सहित अन्य प्रमुख शहर शामिल हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इसे विस्तार देते हुए 47 शहरों तक उड़ान सेवाएं शुरू करने की योजना है। बताया जा रहा है कि अप्रैल के मध्य से कमर्शियल फ्लाइट्स की बुकिंग भी शुरू हो जाएगी, जिससे यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
जिलाधिकारी ने थाना कोतवाली देहात में जनसमस्याओं की सुनवाई कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हेतु अधिकारियों को दिये निर्देश
समाधान दिवस में अनुपस्थित लेखपालों को शोकाज नोटिस जारी करने के निर्देश-जिलाधिकारी*

*गोण्डा 28 मार्च,2026*।
आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं पारदर्शी समाधान के उद्देश्य से थाना कोतवाली देहात में थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन द्वारा उपस्थित फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
थाना परिसर में आयोजित समाधान दिवस में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र से आए नागरिकों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जा, रास्ता अवरोध, राजस्व अभिलेखों में त्रुटि, पारिवारिक विवाद तथा अन्य स्थानीय समस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायत को ध्यानपूर्वक सुनते हुए संबंधित अधिकारियों से प्रकरण की वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त की।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राप्त सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनके निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

उन्होंने कहा कि राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करे तथा समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करे। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि शिकायतकर्ता एवं विपक्षी पक्ष—दोनों को बुलाकर पारदर्शी तरीके से प्रकरण का समाधान कराया जाए, जिससे भविष्य में विवाद की पुनरावृत्ति न हो।
समाधान दिवस के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष प्रकरणों के लिए संबंधित विभागों को निश्चित समयसीमा निर्धारित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि आमजन को न्याय पाने के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समाधान दिवस जैसी पहल जनता और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करती है।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा प्रत्येक शिकायत का संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करें। जनसुनवाई में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो लेखपाल बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं उनको तत्काल शोकाज नोटिस जारी किया जाए।

कार्यक्रम में थाना प्रभारी कोतवाली देहात तथा राजस्व एवं पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
रजिस्टर में सुरक्षा,टोटी गायब, शौचालय से 100 मीटर दूर से ही आती है दुर्गंध
*रेलवे प्रशासन एयरपोर्ट की तर्ज पर यात्रियों को सुविधाएं देने का करता है दावा*

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। कालीन नगरी के तीनों प्रमुख रेलवे स्टेशन भदोही, ज्ञानपुर रोड और सुरियावां में रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। तीनों स्टेशनों से हर दिन लगभग 50 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। किसी भी रेलवे स्टेशन पर न बैठने की, न पेयजल की, न शौचालय की व्यवस्था है। पेयजल के लिए लगाई गई टोटियां चोरी हो गई हैं। जबकि आरपीएफ और जीआरपी हमेशा पेट्रोलिंग करने का दावा करती है। शौचालय में सफाई की दशा यह है कि 100 मीटर दूर से ही दुर्गंध आ रही है। जबकि सफाई के लिए हर स्टेशन पर रेलवे बोर्ड ने कार्यदायी संस्था कोे जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए हर स्टेशन पर कार्यदायी संस्था के एक-एक सुपरवाइजर तैनात हैं। जो तीन शिफ्ट में सफाई कर्मियों से सफाई कराते हैं।


सीन एक : ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर वेटिंग रूम में ताला बंद
जनपद का सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन ज्ञानपुर रोड है। यहां से नईदिल्ली और गुजरात रूट की ट्रेने जाती हैं। हर दिन लगभग 12 से 15 हजार लोग यात्रा करते हैं। पेयजल के लिए लगाई गई टोटियां गायब हो गई हैं। वेटिंग रूम में ताला लटका रहता है। अवैध वेंडर सक्रिय हैं। कई बार सामान बेचने के चक्कर में अवैध वेंडरों का आमना-सामना हो चुका है। इसमें कई यात्री चोटिल भी हुए थे।



सीन दो : भदोही रेलवे स्टेशन पर कोच इंडिकेटर नहीं, छूट जाती है ट्रेन
जनपद का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन भदोही है। यहां से मुंबई रूट की ट्रेने जाती हैं। हर दिन 20 से 25 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। बीते दो सालों से स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत यात्री सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। किसी भी प्लेटफॉर्म पर कोच इंडिकेटर नहीं है। इस कारण कई बार यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है। सिर्फ एक आरक्षण काउंटर होने से यात्रियों को भीड़ का सामना करना पड़ता है।


सीन तीन : सुरियावां स्टेशन पर शेड नहीं होने से धूप में खड़े रहते हैं यात्री
जंघई-वाराणसी रेलखंड का सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहां से हर दिन लगभग 8 से 10 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। किसी भी प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। तेज धूप में खड़े होकर यात्री ट्रेनों के आने का इंतजार करते हैं। इस स्टेशन पर आरक्षण केंद्र की भी सुविधा नहीं है। दोनों प्लेटफार्मों पर लगे हैंडपंप सूख गए हैं। दो हैंडपंपों से बालू वाला पानी आ रहा है।

सुने यात्रियों की समस्या भी
ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर वेटिंग हॉल और शौचालय प्रमुख समस्या है। आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी। ऐसे में यात्रियों के लिए वेटिंग रूम खोलना जरूरी है।
- सुनील कुमार, खमरिया।

ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक से दो तक जाने के लिए अंडरपास बनाया जाना चाहिए। इससे वृद्धजनों और महिलाओं को सुविधा होगी।
- संजय यादव, कसिदहा

व्यापारिक दृष्टिकोण से यह स्टेशन महत्वपूर्ण है। यहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है। दूर से आने वाले यात्री कहां बैठकर ट्रेन का इंतजार करेंगे। यह तो रेलवे को भी पता नहीं है।
- जतन गुप्ता, सुरियावां

हमें मुंबई जाना है। यहीं से ट्रेन पकड़ूंगा। ट्रेन आने में अभी एक घंटे का समय है। जब से स्टेशन पर आया हूं। खड़ा ही हूं। हाथ धूलने के लिए बोतल बंद पानी खरीदना पड़ा है।
- चंद्रदीप शुक्ला, निदिउरा, अभिया


स्टेशन अधीक्षकों ने कहा

स्टेशन पर कुछ विकास कार्य कराए गए हैं। अभी बहुत काम बचा है। इसकी रिपोर्ट रेलवे प्रशासन को भेज दी गई है। - अमित कुमार, सुरियावां स्टेशन अधीक्षक
नियमित सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी कमियां हैं दूर कराने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। - अरविंद श्रीवास्तव, ज्ञानपुर स्टेशन अधीक्षक
अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन पर विकास कार्य चल रहा है। यात्री सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास जारी हैं। जो भी कमी है जल्द उसमें सुधार किया जाएगा। - कोमल सिंह, भदोही स्टेशन अधीक्षक

ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन की प्रमुख ट्रेनें
- शिवगंगा एक्सप्रेस

- विभूति एक्सप्रेस

- पटना सिकंराबाद एक्सप्रेस
- नई-दिल्ली मंडुआडीह एक्सप्रेस

- उधना-दानापुर एक्सप्रेस
- कामाख्या स्पेशल ट्रेन


भदोही रेलवे स्टेशन की प्रमुख ट्रेनें
- पंजाब मेल
- बुदेंलखंड एक्सप्रेस
- रत्नागिरी एक्सप्रेस

- दादर एक्सप्रेस
- जनता एक्सप्रेस

- काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस
- अर्चना एक्सप्रेस
शादी टूटने से परेशान युवती ने फांसी लगाकर दी जान,8 महीने पहले तय हुआ था रिश्ता

शारीरिक संबंध बनाने व दूसरी जगह शादी तय करने का लगा आरोप

गोंडा।जिले के छपिया थाना क्षेत्र में दहेज की मांग और शादी टूटने से परेशान साक्षी सोनी (22) ने आत्महत्या कर लिया।बैकुंठपुर (भरथीपुर) गांव में युवती ने अपने घर के अंदर फांसी लगाकर जान दे दिया।घटना की सूचना पाकर छपिया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और साक्षी सोनी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।मृतका के पिता भगवान दीन सोनी ने थाने में तहरीर दिया है।तहरीर के अनुसार, उनकी बेटी साक्षी की शादी 8 महीने पहले चांदनी चौक निवासी शिवम सोनी से तय हुई थी।शादी तय होने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और युवक का युवती के घर आना जाना भी होने लगा।परिजनों ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान युवक ने युवती के साथ शारीरिक सम्बन्ध भी बनाया।

परिजनों का आरोप है कि बाद में युवक और उसके परिवार ने पांच लाख रूपए दहेज की मांग  शुरू कर दिया जबकि पहले एक लाख रुपए तय हुआ था और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार मांग पूरी नहीं कर सका।इसके बाद शिवम सोनी ने कहीं और शादी तय कर लिया।हालांकि, दूसरी शादी तय होने के बावजूद युवक युवती से लगातार संपर्क में बना रहा,जिससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी।पिता भगवान दीन सोनी ने बताया कि इसी मानसिक तनाव के चलते दोपहर में युवती ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया।घटना के बाद भी आरोपी युवक द्वारा युवती के मोबाइल पर फोन किए जाने की बात सामने आई है।मामले में छपिया थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने बताया कि उन्हें तहरीर मिल गई है और प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।परिजनों के अनुसार दहेज की बड़ी मांग  और शादी टूटने की स्थिति ने युवती को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया था,जिसके कारण उसने यह कदम उठाया।
आस्था और पर्यावरण का संगम: बागपत का पुरा महादेव बना जीरो वेस्ट तीर्थ पर्यटन का मॉडल

* बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 से सम्मानित पुरा महादेव में ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल से सतत विकास की नई मिसाल

लखनऊ/बागपत। उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव ने ‘बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024’ का गौरव हासिल करने के बाद अब सतत और जिम्मेदार तीर्थ पर्यटन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल के तहत परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर जीरो वेस्ट व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की गई।
इस पहल के तहत मंदिर में चढ़ने वाली भेंट और उत्सव के दौरान उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन किया गया, वह भी धार्मिक परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखते हुए। फूलों, दूध, जैविक अवशेष, प्लास्टिक बोतलों, पूजा धागों और यहां तक कि छोड़ी गई चप्पलों को भी एकत्र कर प्रोसेस कर पुनः उपयोग में लाया गया।

* कचरा नहीं, संसाधन: सफलता की मिसाल
इस अनूठी पहल के परिणाम प्रभावशाली रहे। 450 किलोग्राम से अधिक फूलों को प्रोसेस किया गया, लगभग एक टन जैविक सामग्री से खाद तैयार हुई और करीब 700 किलोग्राम प्लास्टिक को फाइबर फिल में बदला गया। 3,000 से अधिक पूजा धागों का पुनः उपयोग हुआ, 2,500 चप्पलों को मैट व इंस्टॉलेशन में बदला गया, जबकि 4,563 लीटर दूध पशु देखभाल के लिए उपयोग में लाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार यह मॉडल दो प्रमुख स्तंभों—भेंट सामग्री की रिकवरी एवं पुनर्वितरण तथा समुदाय आधारित सर्कुलर पुनः उपयोग—पर आधारित है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिला है।
इस पहल में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही, विशेषकर महिलाओं ने छंटाई और प्रोसेसिंग कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह सिद्ध हुआ कि धार्मिक स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
मंदिर परिसर में स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने स्वच्छ वातावरण और भेंट सामग्री के सम्मानजनक पुनः उपयोग की सराहना की। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल प्रदेश की टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता और सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से धार्मिक स्थलों को जिम्मेदार पर्यटन के प्रभावी मॉडल में बदला जा सकता है। बागपत प्रशासन अब इस मॉडल को अन्य मंदिरों में लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर सततता और स्वच्छता को और बढ़ावा मिल सके।
फोन की रिकार्डिंग सुन पत्नी के प्रेमी की हत्या,फोन कर मिलने के बहाने बुलाया
*लाठी डंडों से पीटा फिर दबाया गला

गोंडा।जिले में हाईस्कूल छात्र हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है।पुलिस ने मृतक छात्र की प्रेमिका के पति समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 24 मार्च की रात साहिल को फोन कर बुलाया।उसको लाठी डंडों से पीटा उसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दिया।जांच में सामने आया है कि 20 साल का साहिल और 22 साल की मानसी चौहान के बीच पिछले तीन साल से अफेयर था,दोनों साथ में पढ़ाई करते थे।मानसी की शादी के बाद भी दोनों का रिश्ता चलता रहा।मानसी के पति ने दोनों की बातचीत की रिकार्डिंग फोन में सुन लिया था,उसके बाद मर्डर का प्लान बनाया।आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।मामला तरबगंज थाना क्षेत्र के लोनियन पुरवा गांव का है।गौरतलब हो कि ग्राम पंचायत पिपरी रोहुआ के तालाब के किनारे बुधवार सुबह एक युवक का शव मिला था।खेतों में सरसों की कटाई कर रहे किसानों ने शव देखकर पुलिस को सूचना दिया था।शव की पहचान बिशुनपुर बनियन गांव निवासी साहिल के रूप में हूई थी।शव से 200 मीटर की दूरी पर साहिल की मोटरसाइकिल मिली थी परन्तु उसका मोबाइल गायब था और हाथ पैर व शरीर पर चोट के नीशान थे।इसके बाद परिजनों ने साहिल के हत्या की आशंका व्यक्त किया था,इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर हत्या के संभावनाओं पर जांच शुरू कर दिया।भरोसेमंद सूत्रों की माने तो तरबगंज तहसील अंतर्गत गत 13 मार्च को हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में लोनियन पुरवा गांव निवासनी मानसी चौहान की शादी उसके परिजनों ने रामशंकर चौहान के साथ कर दिया था परन्तु शादी के बाद भी मानसी और साहिल की बातचीत जारी रही,जिससे पति रामशंकर को शक हो गया तदोपरांत रामशंकर ने पत्नी मानसी की मोबाइल में काल रिकार्डिंग लगा दिया और जब 24 मार्च को उसने फोन चेक किया तो उसे साहिल की काल रिकार्डिंग मिली।काल रिकार्डिंग मिलने के बाद उसने हत्या की साजिश रची और अपने तीन साथियों नानबाबू चौहान, दिनेश चौहान और रमन उर्फ अंगद चौहान को साथ लेकर वारदात को अंजाम दिया।24 मार्च की रात को आरोपियों ने साहिल को सीधे अपने फोन से नहीं बल्कि  मानसी के फोन से काल कर बुलाया ताकि उसे कोई संदेह न हो।फ़ोन आने के बाद साहिल को लगा कि वह मानसी से मिलने जा रहा है,परन्तु यह एक साजिश थी।फोन आने के बाद घर से निकलते समय साहिल ने अपनी माँ से कहा कि वह गांव में एक जन्मदिन कार्यक्रम में जा रहा है,जबकि उसे कोई निमंत्रण नहीं मिला था।साहिल चार भाइयों में सबसे छोटा था और हाल में ही उसने हाईस्कूल की परीक्षा दिया था परन्तु परिणाम आने से पहले ही उसकी हत्या कर दी गई।पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दिया है
गया में “उद्यमिता सम्मेलन 2026” का आयोजन, ग्रामीण उद्यमियों को मिला नया मंच,

गया: ग्रामीण उद्यमिता को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बोधगया स्थित टेकुना फॉर्म के समीप एक निजी होटल में शुक्रवार को “उद्यमिता सम्मेलन 2026” का सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा, जहां विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उद्यमी, विशेषज्ञ, संस्थान और नीति निर्माता एकत्रित होकर विचारों का आदान-प्रदान किया और विकास के नए अवसरों की तलाश की।

सम्मेलन की प्रमुख विशेषताओं में माइक्रो और छोटे उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों, सेवाओं और व्यवसाय मॉडलों का लाइव प्रदर्शन शामिल रहा। इस प्रदर्शनी ने स्थानीय उद्यमियों को अपनी पहचान स्थापित करने का अवसर प्रदान किया, वहीं उपस्थित प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर हो रहे नवाचारों से परिचित होने का मौका मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद किए जा रहे नवाचारों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण उद्यमिता के अवसरों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर आधारित पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इन चर्चाओं में विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए उद्यमियों को बाजार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और वित्तीय सहायता से जुड़ने के उपाय बताए। इसके साथ ही बैंकिंग और निर्यात क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे, जिससे उद्यमियों को व्यावसायिक विस्तार की दिशा में मार्गदर्शन मिला। सम्मेलन का एक विशेष आकर्षण उद्यमियों के अनुभव साझा करने का सत्र रहा, जिसमें उन्होंने अपनी सफलता, संघर्ष और नवाचार की प्रेरणादायक कहानियां प्रस्तुत कीं। इन अनुभवों ने अन्य प्रतिभागियों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का हौसला भी दिया।

इस आयोजन में नेटवर्किंग के लिए भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए, जिससे प्रतिभागियों को विभिन्न संस्थानों, विशेषज्ञों और संभावित सहयोगियों से जुड़ने का अवसर मिला। सम्मेलन के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया गया, जिससे उनके प्रयासों को पहचान मिली और अन्य लोगों को भी प्रेरणा प्राप्त हुई।

सर्व सेवा समिति संस्था 4S इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिहिर शाहना ने बताया कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उद्यमियों के लिए आयोजित किया गया है, जो छोटे स्तर पर कार्य करते हुए अपने साथ-साथ समाज को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं मशरूम उत्पादन, बकरी पालन, स्ट्रॉबेरी खेती और सिलाई जैसे कार्यों के माध्यम से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है।

भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
बूढनपुर भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर महान सम्राट को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन, उनके शासनकाल और उनके द्वारा अपनाए गए बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया गया कि सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश पूरे विश्व में फैलाया।समारोह की अध्यक्षता कांता प्रसाद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बासदेव मौर्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लालचंद मौर्य ने किया। संयोजक के रूप में अमन मौर्य, नागेश मौर्य, मनीष मौर्य और आर्यन सम्राट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर एडवोकेट राजेश मौर्य, एडवोकेट जयप्रकाश मौर्य, अर्जुन मौर्य, अनिल मौर्य, जिम्मी सिंह, सुशील उपाध्याय, सागर मौर्य, अजय मौर्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाने और समाज में शांति, एकता एवं सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें 'मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद' - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।

आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।

मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।

अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।

खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।

अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
नन्हीं यशस्विनी का ‘बुलडोजर गिफ्ट’, सीएम योगी भी नहीं रोक पाए मुस्कान

* गोरखनाथ मंदिर में मासूम बच्ची ने आंखें बंद करवाकर दिया सरप्राइज, मुख्यमंत्री ने चॉकलेट देकर जताया स्नेह

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज गोरखनाथ मंदिर परिसर में एक नन्हीं बच्ची के अनोखे गिफ्ट ने मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। कानपुर से आई 4 वर्षीय यशस्विनी सिंह ने मुख्यमंत्री को खिलौना ‘बुलडोजर’ भेंट कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
शुक्रवार सुबह अपनी नियमित दिनचर्या के तहत मंदिर परिसर में भ्रमण कर रहे मुख्यमंत्री की नजर यशस्विनी पर पड़ी, जो अपने माता-पिता के साथ गोरखपुर आई थी। सीएम ने स्नेहपूर्वक उसे पास बुलाया, चॉकलेट दी और बातचीत की। इसी दौरान बच्ची ने मासूमियत भरे अंदाज में कहा, “आंखें बंद करिए, आपको गिफ्ट देना है।”
मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उसकी बात मान ली। जैसे ही उन्होंने आंखें बंद कीं, यशस्विनी ने उनके हाथों में एक छोटा सा बुलडोजर (खिलौना) रख दिया। गिफ्ट देखते ही मुख्यमंत्री समेत वहां मौजूद सभी लोग हंसी नहीं रोक पाए।
यशस्विनी ने कहा कि मुख्यमंत्री को बुलडोजर पसंद है, इसलिए वह यह खास गिफ्ट लेकर आई है। कानपुर के प्रताप इंटरनेशनल कॉलेज की नर्सरी छात्रा यशस्विनी अपने पिता अभय सिंह राजावत और मां प्रियदम्वा सिंह के साथ गोरक्षपीठाधीश्वर का आशीर्वाद लेने आई थी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद वह बेहद खुश नजर आई।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन को तैयार, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; 12 शहरों के लिए उड़ानें शुरू

* 7 हजार पुलिसकर्मी तैनात, 300 CCTV कैमरों से निगरानी; एक्सप्रेस-वे पर यातायात प्रतिबंध लागू

नोएडा/लखनऊ। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। समारोह में करीब 7000 पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी, जबकि पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी 300 CCTV कैमरों से की जाएगी।
उद्घाटन समारोह के मद्देनजर प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया है। 28 तारीख की सुबह 7 बजे से 11 बजे तक विशेष प्रतिबंध लागू रहेगा। इस दौरान नोएडा एक्सप्रेस-वे पर मालवाहक वाहनों के संचालन पर रोक रहेगी। यही प्रतिबंध यमुना एक्सप्रेस-वे पर भी प्रभावी रहेगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुबह 11:30 से 12:00 बजे के बीच पहुंचने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
एयरपोर्ट के संचालन के पहले चरण में 12 शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू की जाएंगी। इनमें मुंबई, बेंगलूरु, चेन्नई, कोलकाता, कानपुर और लखनऊ सहित अन्य प्रमुख शहर शामिल हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इसे विस्तार देते हुए 47 शहरों तक उड़ान सेवाएं शुरू करने की योजना है। बताया जा रहा है कि अप्रैल के मध्य से कमर्शियल फ्लाइट्स की बुकिंग भी शुरू हो जाएगी, जिससे यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।