बेटियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी कार्रवाई : सीएम योगी

आजमगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था, राम मंदिर, विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी आदिति यादव के संबंध में सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है तथा इस प्रकार की टिप्पणियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद यह सपना साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के प्रयासों से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका।

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ में होम्योपैथिक कॉलेज की स्वीकृति के बाद भी समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद परियोजना को गति मिली और आज यहां आयुष क्षेत्र के डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और निवेश के अनुकूल माहौल के कारण नए अवसर पैदा हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और अनिश्चितता का माहौल है, लेकिन भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने सीएनजी और एथेनॉल उत्पादन को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि इन प्रयासों से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।

गोरखपुर में योगी ने कहा, नया भारत विकास, सुरक्षा और गरीब कल्याण का प्रतीक



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर संकट और संघर्ष की स्थिति के बावजूद भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव का माहौल है, लेकिन भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत में सीएनजी और एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों का लाभ देश को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर देश को भी महंगाई की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि भारत में महंगाई नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि नया भारत गरीब कल्याण, विकास और सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया है और अपराध व माफिया तंत्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुरक्षा वातावरण और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है।

यूपी सरकार ने लॉन्च किया ‘डिजिटल लेबर चौक’ ऐप

- 10 करोड़ से अधिक श्रमिकों को मिलेगा रोजगार का डिजिटल मंच
- विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर श्रम एवं सेवायोजन विभाग की पहल
- श्रमिकों और नियोजकों को एक मंच पर जोड़ेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण, रोजगार संवर्धन और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘डिजिटल लेबर चौक (डीएलसी)’ मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर 12 जून को श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा इस अभिनव डिजिटल प्लेटफॉर्म को जनता के लिए समर्पित किया गया।
उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा विकसित यह ऐप श्रमिकों और नियोजकों को एक ही मंच पर लाकर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने तथा श्रम बाजार को अधिक संगठित, पारदर्शी और सुलभ बनाने में मदद करेगा।
इस प्लेटफॉर्म पर श्रमिक मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर अपनी प्रोफाइल बना सकेंगे। वे अपने कौशल, व्यवसाय, कार्य अनुभव और पसंदीदा कार्यस्थल सहित अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकेंगे। वहीं नियोजक भी पंजीकरण कर श्रमिकों की आवश्यकता, कार्य का प्रकार और कार्यस्थल संबंधी जानकारी साझा कर सकेंगे।
ऐप में उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर श्रमिकों और नियोजकों की डिजिटल मैचिंग की जाएगी। इससे श्रमिकों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार मिलेगा, जबकि नियोजकों को जरूरत के अनुसार उपयुक्त एवं प्रशिक्षित श्रमिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रदेश में वर्तमान में ई-श्रम पोर्टल पर लगभग 8.40 करोड़ श्रमिक तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में करीब 1.93 करोड़ निर्माण श्रमिक पंजीकृत हैं। इस प्रकार 10 करोड़ से अधिक श्रमिक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अनुसार, डिजिटल लेबर चौक ऐप श्रमिकों और रोजगारदाताओं के बीच की दूरी कम करते हुए रोजगार उपलब्धता को आसान और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
जिले के सरकारी अस्पतालों में 35 रक्तदाताओं की लगेगी सूची
*दफ्तर, डॉक्टर के चेंबर के सामने होगी चस्पा, जरुरतमंद सीधे करेंगे फोन*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अब खून के लिए मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। तीमारदारों को ब्लड बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जरूरतमंद व्यक्ति सीधे रक्तदाताओं से बातकर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पहल की शुरूआत की है। जिला अस्पताल सहित 29 स्वास्थ्य केंद्रों पर अब रक्तदाताओं की सूची चस्पा की जाएगी। जिले में कुल 35 डोनर हैं, जो नियमित रूप से समय समय पर रक्तदान करते हैं। इसके अलावा पांच संस्था हैं, जो किसी विशेष डे पर कैंप लगवाती हैं। अक्सर मरीज को जरूरत पर खून नहीं मिलता है। इससे मरीज, तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है।‌ महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय भदोही, सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल और भानीपुर, डीघ, गोपीगंज, औराई, भदोही, सुरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित 20 प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों पर डोनरों की सूची चस्पा की जाएगी। रक्तदाता का नाम, मोबाइल नंबर, ब्लाॅक, ब्लड ग्रुप लिखा रहेगा : जिसमें रक्तदाता का नाम, मोबाइल नंबर, ब्लाॅक, ब्लड ग्रुप होगा। इससे जरूरत मंद मरीज, तीमारदार सीधे डोनर से बातचीत कर सकते हैं। ब्लड ग्रुप मैच करने पर डोनर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक आएंगे और रक्तदान करेंगे। सारी प्रकिया पूरी करने के बाद मरीज को दिया जाएगा। अस्पताल के ब्लड बैंक में हमेशा खून का टोटा रहता है। इसका मुख्य कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। आज भी लोग रक्तदान करने से पहले सोचते हैं। जबकि चिकित्सकों का मानना है कि रक्तदान करने से शरीर स्वास्थ्य रहती है।
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना विमान क्रैश में 5 जवान शहीद, लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा

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असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में वायुसेना के पांच कर्मी शहीद हो गए, जबकि सह-पायलट गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गए। उनका इलाज चल रहा है।

वायुसेना जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया

वायुसेना की तरफ से जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया गया है। वायुसेना का कहना है कि स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है और दुख की इस घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़ी है।

जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के हादसा

बता दें कि, असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का AN-32 मालवाहक विमान लैंडिंग के तुरंत बाद आग की चपेट में आ गया था। इस घटना के बाद एयरबेस पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने अपना काम शुरू कर दिया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जैसे ही विमान रनवे पर उतरा, उसमें अचानक आग लग गई और उससे घना धुआं उठने लगा।

हादसे के वक्त दो टुकड़ों में टूट गया विमान

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, AN-32 परिवहन विमान अरुणाचल प्रदेश से जोरहाट लौट रहा था। इसी दौरान लैंडिंग के समय विमान हादसे का शिकार हो गया। विमान एयरबेस पर उतर रहा था, तभी यह क्रैश हो गया। हादसे की वजह से एयरफोर्स का विमान दो टुकड़ों में टूट गया और वहां से आग और धुएं का गुबार उठता दिखा। यह नजारा काफी भयावह था, जिसे देखते ही एयरपोर्ट और वायुसेना की फायर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया था।

'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का आदेश

वायु सेना ने इस दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' (जांच समिति) बनाई जा रही है। भारतीय वायु सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। वायु सेना ने कहा, 'आज जोरहाट में लैंडिंग के दौरान आईएएफ के एक एएन-32 विमान का एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का गठन किया जा रहा है'।

खाद की कालाबाजारी के विरोध में किसानों का हल्ला बोल, हाईवे जाम की कोशिश नाकाम
तहसीलदार व सीओ को सौंपा ज्ञापन

पुलिस प्रशासन की सूझबूझ के चलते बडा टकराव टला।

सीओ जानसठ ऋषिका सिंह, इंस्पेक्टर विनोद कुमार, भारी पुलिस फोर्स के साथ डटे रहे और पुलिस प्रशासन सूझबूझ से काम न लेता तो हो सकता था बड़ा टकराव

समस्याओं का समाधान न होने पर किसानों ने उग्र आंदोलन का दिया अल्टीमेटम

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ। क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध न होने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान एकत्र होकर जानसठ तहसील पहुंचे और प्रशासन के ख़िलाफ़ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए।
धरने के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों एवं निजी केंद्रों पर खाद की उपलब्धता को लेकर भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना था कि बुवाई एवं फसलों की देखभाल के महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
धरना प्रदर्शन के बीच स्थिति उस समय बहुत ही तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित किसानों के सब्र का बांध टूट गया किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में हाईवे जाम करने का प्रयास किया। लेकिन किसानों के धरना प्रदर्शन के मद्देनजर जानसठ, रामराज , मीरापुर पुलिस को तैनात किया गया था। सीओ जानसठ ऋषिका सिंह जैसे ही गाड़ी से अपने दफ्तर आने के लिए तहसील परिसर में पहुंची तो उनकी गाड़ी को भी रास्ते में ही रूकना पड़ा, और गाड़ी से उतरकर पैदल ही अपने ऑफिस जाना पड़ा।
इंस्पेक्टर जानसठ विनोद कुमार भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर डटे रहे और लगातार किसानों को समझानें का प्रयास करते नजर आए और आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद किसानों को समझानें में सफलता हासिल करने में कामयाब हो गए ,इसी क्रम के चलते किसानों और प्रशासन के बीच का रास्ता निकालते हुए किसानों से हाईवे पर ही सीओ जानसठ ऋषिका सिंह, तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता द्वारा ज्ञापन लिया गया, और किसानों को समस्याओं का समाधान कराये जाने का मजबूत आश्वासन दिया।
इस दौरान पुलिस की सूझ-बूझ एवं संयमित कार्रवाई के चलते किसी प्रकार के टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और माहौल शांतिपूर्ण बना रहा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाकर किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों की समस्याओं का ज्ञापन लिया गया और ज्ञापन को प्रेषित करनें व समस्याओं का समाधान करानें का आश्वासन दिया गया है।
धरना-प्रदर्शन और हाईवे जाम की कोशिश को लेकर क्षेत्र में दिनभर चर्चाओं का माहौल बना रहा, जबकि पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए रहे। प्रशासनिक अधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपने गंतव्य को लौट गए, तब कहीं जाकर पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस दौरान मुख्य रूप से ओमप्रकाश शर्मा, मास्टरमहकर सिंह, बिट्टू ठाकुर, सहंसरपाल, खालिद गुर्जर, मौ. इरशाद सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
बिलग्राम तहसील प्रशासन के कारनामे, मेड़बंदी कराई, कब्जा दिलाया, फिर बदल गई रिपोर्ट
*गाटा संख्या 75 मे 0.0918 हेक्टेयर भूमि घाटे की पैमाइश पर पारित हुआ था थाकबंदी आदेश*

*मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं बाद की रिपोर्ट ने खड़े किए नए प्रश्न*

रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार जहां प्रशासन में पारदर्शिता और "जीरो टॉलरेंस" नीति को सुशासन का आधार बताती है, वहीं हरदोई जिले की बिलग्राम तहसील का एक भूमि विवाद राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ही प्रकरण में पहले पैमाइश, फिर थाकबंदी आदेश, उसके अनुपालन में मेड़बंदी और कब्जा दिलाने की कार्रवाई, और बाद में उसी मामले में विपरीत रिपोर्ट—पूरा घटनाक्रम ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।बिलग्राम तहसील के ग्राम श्यामपुर में गाटा संख्या 75 से जुड़े इस मामले में न्यायालय के आदेश से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तक की कहानी कई मोड़ों से गुजरती है। हर मोड़ पर एक नया सवाल खड़ा होता है और हर सवाल का जवाब अभी भी फाइलों के पन्नों में तलाशा जा रहा है।ग्राम श्यामपुर निवासी दिवाकर मिश्रा पुत्र प्रेमचंद्र ने गाटा संख्या 75 की भूमि के संबंध में उपजिलाधिकारी बिलग्राम के न्यायालय में थाकबदी वाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय के निर्देश पर क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने मौके पर पैमाइश कर नक्शा नजरी एवं थाकबंदी आख्या तैयार की।
पैमाइश में सामने आया 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा
राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 75 का क्षेत्रफल 0.2710 हेक्टेयर दर्ज था, जबकि मौके पर हुई पैमाइश में उसका वास्तविक क्षेत्रफल मात्र 0.1792 हेक्टेयर पाया गया। इस प्रकार गाटा संख्या 75 में कुल 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा दर्ज हुआ।
इतना ही नहीं, आसपास के कई गाटों में क्षेत्रफल की बढ़त भी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार—
गाटा संख्या 55 में 0.0635 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 74 में 0.0376 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 76 में 0.0278 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 77 में 0.0283 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 72 एवं 73 में भी क्षेत्रफल का अंतर दर्ज किया गया
पड़ोसी गाटों की पैमाइश के आधार पर तैयार आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की गई। प्रभावित पक्षों को समन और समाचार पत्र के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन किसी भी पक्ष ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद एसडीएम न्यायालय ने 28 मई 2025 को प्रस्तुत आख्या को स्वीकार करते हुए थाकबंदी आदेश पारित कर दिया।
आदेश मिला, लेकिन अनुपालन में हुई देरी

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि न्यायालय का आदेश पारित होने के बावजूद लंबे समय तक उसका अनुपालन नहीं कराया गया। न्यायालय का आदेश अभिलेखों में दर्ज रहा, लेकिन जमीन पर उसकी तस्वीर दिखाई नहीं दी।आखिरकार 11 मार्च 2026 को दिवाकर मिश्रा ने जिलाधिकारी हरदोई को शिकायत देकर थाकबंदी आदेश का अनुपालन कराने की मांग कीजिलाधिकारी के निर्देश के बाद एसडीएम बिलग्राम ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को मौके पर भेजा। इसके बाद मेड़बंदी कराई गई और दिवाकर मिश्रा को भूमि पर कब्जा दिलाया गया।

कब्जे के बाद फिर शुरू हुआ विवाद

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि कब्जा मिलने के बाद रामलखन त्रिपाठी पुत्र श्याममोहन तथा उमाकांत शुक्ल निवासी बालामऊ चार-पांच अन्य व्यक्तियों के साथ मौके पर पहुंचे और बनाई गई मेड़ को तोड़ दिया। आरोप है कि भूमि को पुनः अपने खेत में मिला लिया गया तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस संबंध में दिवाकर मिश्रा नेआईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या20015536022250 दर्ज कराई।

पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़ने की पुष्टि

शिकायत की जांच में क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने 19 मई 2026 को प्रस्तुत अपनी आख्या में मेड़ तोड़े जाने का उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि थाकबंदी आदेश के अनुरूप की गई मेड़बंदी को नहीं माना गया और मौके की स्थिति बदल दी गई।
रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी, लेकिन दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी शिकायत और बदल गई पूरी तस्वीर

इसके बाद दिवाकर मिश्रा ने पुनः आईजीआरएस शिकायत संख्या 20015526024152 दर्ज कराई। इस बार जांच में प्रस्तुत रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
आरोप है कि उसी राजस्व निरीक्षक ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि आवेदक का भू-चित्र छोटा बना हुआ है, इसलिए उसे पूरी भूमि नहीं दी जा सकती। रिपोर्ट में विपक्षी पक्ष के प्रत्यावेदन का भी उल्लेख किया गया। बाद में एसडीएम बिलग्राम स्तर से भी इसी आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई।

सवालों के घेरे में पूरा घटनाक्रम

यहीं से कई प्रश्न जन्म लेते हैं। यदि भू-चित्र छोटा था तो उसी पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर थाकबंदी आदेश कैसे पारित हुआ? यदि आदेश सही नहीं था तो प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर मेड़बंदी कर कब्जा क्यों दिलाया? और यदि कब्जा दिलाना सही था तो बाद में अधिकारियों की रिपोर्ट का आधार क्या था?
जब पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि हो चुकी थी, तब संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि दूसरी रिपोर्ट सही है तो पहली रिपोर्ट तथा उसके आधार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को किस नजर से देखा जाए?
यही वे प्रश्न हैं जो आज ग्राम श्यामपुर से लेकर तहसील मुख्यालय तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जांच की मांग तेज
दिवाकर मिश्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश, पैमाइश रिपोर्ट, नक्शा नजरी, आईजीआरएस शिकायतों और बाद में प्रस्तुतविरोधाभासी रिपोर्टों की समग्र जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक ही मामले में सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक निष्कर्षों में इतना बड़ा अंतर आखिर क्यों दिखाई दे रहा है। ऐसे मे अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर गाटा संख्या 75 का यह विवाद आने वाले समय में और बड़े सवाल खड़े करेगा।
आज गोरखपुर और आजमगढ़ को विकास की बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी

1,250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

गोरखपुर में 319 और आजमगढ़ में 39 विकास परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ

* सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और बाढ़ सुरक्षा पर रहेगा फोकस

लखनऊ/गोरखपुर/आजमगढ़। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को पूर्वांचल के दो प्रमुख जनपदों गोरखपुर और आजमगढ़ के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह 1,250 करोड़ रुपये से अधिक लागत की कुल 358 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर प्रदेश के विकास अभियान को नई गति देंगे।

गोरखपुर में 295 करोड़ रुपये की 319 परियोजनाओं का शुभारंभ

मुख्यमंत्री गोरखपुर के बड़हलगंज स्थित गांधी इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर 295 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 319 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में शाहपुर-बेलघाट मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण परियोजना का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही राप्ती और सरयू नदी तट विकास तथा कटान रोधी कार्यों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री बड़हलगंज में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) समेत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे, जबकि राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में नए बुनियादी ढांचे के निर्माण का शिलान्यास भी करेंगे।

सड़क, शिक्षा, पर्यटन, कौशल विकास और बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाएं कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहेंगी। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान, मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद, सांसद रवि किशन सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

आजमगढ़ को 955 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 955 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और शहरी विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं। विश्वविद्यालय परिसर की विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण के साथ ही राजकीय मेडिकल कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से संबंधित विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी।

तमसा नदी तट विकास, शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा क्षेत्रीय एवं जिला ग्राम्य विकास संस्थान की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री करेंगे। दौरे के दौरान वह विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर, दारा सिंह चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे।

बलिया  शिवमहापुराण कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया श्रद्धालुओं को जीवन सुखी बनाने का संदेश
संजीव सिंह बलिया!बाबा बालखंडी नाथ दिउली के सानिध्य में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि शिवत्व के माध्यम से जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नियमित भजन-नाम स्मरण और भगवान की भक्ति से न केवल मनचाही भौतिक संपदाएँ प्राप्त होती हैं, बल्कि शिव की विशेष कृपा भी मिलती है, जबकि व्यसनों में लिप्तता व्यक्ति के जीवन को बर्बाद कर देती है।
पंडित मिश्रा ने कहा कि सफलता पाने के लिए 'मैं' की भावना का त्याग कर 'आप' और 'हम' शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि सच्चे शिवभक्त किसी कार्य का श्रेय स्वयं नहीं लेते, बल्कि उसे भोलेनाथ की कृपा मानते हैं और सामूहिकता को महत्व देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मन में यह भावना स्थिर हो जाए कि उसका घर नहीं बल्कि शिव का घर है, तो उसके जीवन एवं परिवार से स्वतः अशांति दूर हो जाती है।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने बलियावासियों को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि अधिक मास, प्रदोष, शिवरात्रि और सोमवती अमावस्या जैसे विशेष संयोगों के बीच शिव महापुराण कथा का श्रवण अत्यंत पुण्यदायी है। उन्होंने एक क्षण की महत्ता समझाने के लिए संत और लोहार की कथा सुनाई। कथा में बताया गया कि एक गरीब लोहार प्रतिदिन कुछ समय के लिए शिवालय जाकर नंदी के कान में अपनी बात कहता था; एक बार तेज वर्षा और जलभराव के कारण उस गांव में संकट उत्पन्न हुआ तो लोहार ने नंदी के माध्यम से भोलेनाथ से मदद मांगी, जिससे वर्षा रुक गई और पूरा गांव संकट से बच गया। पंडित मिश्रा ने कहा कि शिव से संबंध जोड़ने के लिए घंटों की साधना जरूरी नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया गया एक क्षण का स्मरण भी पर्याप्त है।
कार्यक्रम में मंत्री के अनुज धर्मेंद्र सिंह और उनके परिजनों के साथ अनुज सरावगी, अनिल पांडेय, राजाराम सिंह, राजेश गुप्ता आदि ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की और कथा का आशीर्वाद लिया। शिव महापुराण कथा आगामी दिनों में भी जारी रहेगी और श्रद्धालु भारी संख्या में भाग ले रहे हैं।
धुर्वा के 3 बच्चे 12 दिन से लापता, पुलिस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का बड़ा सवाल

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने धुर्वा एवं जगरनाथपुर क्षेत्र से लापता तीन बच्चे करण, अर्जुन और शिवा के परिजनों से मुलाकात की। परिजनों से उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि प्रारंभिक सूचना के आधार पर भाजपा प्रतिनिधिमंडल मौके पर पहुंचा और मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार द्वारा बताई गई बातें और थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के विवरण में गंभीर विरोधाभास दिखाई देता है। बच्चों की माता का बयान कुछ और है, जबकि एफआईआर में अलग बातें दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार पढ़ा-लिखा नहीं है और पुलिस ने अपने बचाव में मनमाने ढंग से प्राथमिकी दर्ज करने का काम किया है। इससे पुलिस की भूमिका पर संदेह उत्पन्न होता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन से तीनों बच्चों की अविलंब बरामदगी सुनिश्चित करने तथा मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय जनता पार्टी जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी।

उन्होंने धुर्वा मंडल एवं भाजपा राँची महानगर के कार्यकर्ताओं और आम जनता से आह्वान किया कि बच्चों की बरामदगी और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के विरोध में कल शाम 6 बजे मशाल जुलूस निकाला जाएगा। साथ ही कहा कि यदि इसके बाद भी बच्चों की बरामदगी नहीं होती है तो पार्टी आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय करेगी।

श्री साहू ने कहा कि रांची के कोकर स्थित खोरहा टोली रोड नं-02 से लापता 18 माह की मासूम बच्ची अदिति का आज तक कोई पता पुलिस प्रशासन नहीं लगा सकी है। स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन अपने दायित्वों को लेकर गंभीर नहीं दिखती है। इस दिशा में भी पुलिस ठोस कदम उठावें।

श्री साहू ने कहा कि राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में बच्चों के अपहरण और लापता होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। भाजपा ऐसे प्रत्येक मामले में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जहां भी ऐसी घटनाएं होती हैं, वहां पार्टी कार्यकर्ता जनहित में आवाज उठाने का कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को भी इस देश में समान अधिकार प्राप्त हैं। धुर्वा इलाके के बच्चों के लापता होने के लगभग 12 दिन बाद भी पुलिस कोई ठोस सफलता हासिल नहीं कर सकी है। पीड़ित परिवार के अनुसार पुलिस केवल औपचारिकताएं पूरी कर रही है और अब तक प्रभावी खोजबीन नहीं की गई है।

इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, सरोज सिंह, अशोक बड़ाईक, रामकुमार पाहन, रमेश सिंह, उमेश यादव, शुचिता रानी राय, जितेंद्र वर्मा, वीणा मिश्रा, दीपक लोहरा, पंकज सिन्हा, नीरज सिंह, सूरज शाहदेव, राजेंद्र मुंडा सहित कई लोग थे।

पैतृक भूमि को लेकर एक परिवार आमरण अनशन व भूख हड़ताल पर बैठा
अमृतपुर - फर्रुखाबाद l थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम अंबरपुर की मढ़ैया में पैतृक भूमि विवाद को लेकर एक परिवार शुक्रवार को आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल पर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।ग्राम अंबरपुर की मढ़ैया निवासी गिरीश चंद्र मिश्रा शुक्रवार सुबह लगभग 10 बजे अपनी पत्नी गायत्री देवी, पुत्री सुमन, पुत्र देवेश तथा बहू गंगा देवी के साथ आमरण अनशन पर बैठ गए। गिरीश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि लगभग 7 डिसमिल भूमि पर पिछले 40 वर्षों से उनका कब्जा चला आ रहा है, लेकिन दूसरे पक्ष के लोगों ने उक्त भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जा करने का प्रयास किया है।उन्होंने बताया कि वह इस भूमि पर अपने पूर्वज बाबू कल्याण सिंह की स्मृति में एक पार्क का निर्माण कराना चाहते हैं। न्याय की मांग को लेकर उन्होंने परिवार सहित भूख हड़ताल शुरू कर दी है।वहीं दूसरे पक्ष के रमाकांत का कहना है कि अंबरपुर मोड़ के निकट गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए उन्होंने लगभग 14 डिसमिल भूमि दी थी, जिसके बदले में उन्हें यह भूमि आवंटित हुई है। इसलिए वह भूमि पर अपना वैध अधिकार बताते हैं।उल्लेखनीय है कि रमाकांत ने इससे पूर्व 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना में अधिग्रहित हो रही अपनी भूमि एवं मकान के मुआवजे को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि ग्राम सभा अंबरपुर की गाटा संख्या 202 एवं 203 में स्थित उनके मकान का सही मूल्यांकन नहीं किया गया है, जबकि मकान के निर्माण में लगभग 25 लाख रुपये खर्च हुए हैं।रमाकांत ने जिलाधिकारी से मांग की थी कि उनके मकान का पुनः निरीक्षण उनकी उपस्थिति में कराया जाए तथा निष्पक्ष मूल्यांकन के बाद ही उचित मुआवजा निर्धारित किया जाए। उनका कहना था कि जब तक दोबारा सर्वे और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक वह अपनी भूमि और मकान परियोजना के लिए देने को तैयार नहीं हैं।भूमि विवाद और अनशन की सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस तथा थाना राजेपुर पुलिस मौके पर पहुंची। उपनिरीक्षक जगदीश वर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दोनों पक्षों से जानकारी ली। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए मौके पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।थानाध्यक्ष राजेपुर नागेंद्र सिंह ने बताया कि जमीनी विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया था। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है तथा मामले की जानकारी राजस्व विभाग को भी दे दी गई है। राजस्व विभाग द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।ग्रामीण क्षेत्र में इस विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, जबकि प्रशासन मामले पर नजर बनाए हुए है।
बेटियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी कार्रवाई : सीएम योगी

आजमगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था, राम मंदिर, विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी आदिति यादव के संबंध में सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है तथा इस प्रकार की टिप्पणियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद यह सपना साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के प्रयासों से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका।

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ में होम्योपैथिक कॉलेज की स्वीकृति के बाद भी समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद परियोजना को गति मिली और आज यहां आयुष क्षेत्र के डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और निवेश के अनुकूल माहौल के कारण नए अवसर पैदा हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और अनिश्चितता का माहौल है, लेकिन भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने सीएनजी और एथेनॉल उत्पादन को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि इन प्रयासों से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।

गोरखपुर में योगी ने कहा, नया भारत विकास, सुरक्षा और गरीब कल्याण का प्रतीक



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर संकट और संघर्ष की स्थिति के बावजूद भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव का माहौल है, लेकिन भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत में सीएनजी और एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों का लाभ देश को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर देश को भी महंगाई की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि भारत में महंगाई नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि नया भारत गरीब कल्याण, विकास और सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया है और अपराध व माफिया तंत्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुरक्षा वातावरण और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है।

यूपी सरकार ने लॉन्च किया ‘डिजिटल लेबर चौक’ ऐप

- 10 करोड़ से अधिक श्रमिकों को मिलेगा रोजगार का डिजिटल मंच
- विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर श्रम एवं सेवायोजन विभाग की पहल
- श्रमिकों और नियोजकों को एक मंच पर जोड़ेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण, रोजगार संवर्धन और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘डिजिटल लेबर चौक (डीएलसी)’ मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर 12 जून को श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा इस अभिनव डिजिटल प्लेटफॉर्म को जनता के लिए समर्पित किया गया।
उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा विकसित यह ऐप श्रमिकों और नियोजकों को एक ही मंच पर लाकर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने तथा श्रम बाजार को अधिक संगठित, पारदर्शी और सुलभ बनाने में मदद करेगा।
इस प्लेटफॉर्म पर श्रमिक मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर अपनी प्रोफाइल बना सकेंगे। वे अपने कौशल, व्यवसाय, कार्य अनुभव और पसंदीदा कार्यस्थल सहित अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकेंगे। वहीं नियोजक भी पंजीकरण कर श्रमिकों की आवश्यकता, कार्य का प्रकार और कार्यस्थल संबंधी जानकारी साझा कर सकेंगे।
ऐप में उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर श्रमिकों और नियोजकों की डिजिटल मैचिंग की जाएगी। इससे श्रमिकों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार मिलेगा, जबकि नियोजकों को जरूरत के अनुसार उपयुक्त एवं प्रशिक्षित श्रमिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रदेश में वर्तमान में ई-श्रम पोर्टल पर लगभग 8.40 करोड़ श्रमिक तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में करीब 1.93 करोड़ निर्माण श्रमिक पंजीकृत हैं। इस प्रकार 10 करोड़ से अधिक श्रमिक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अनुसार, डिजिटल लेबर चौक ऐप श्रमिकों और रोजगारदाताओं के बीच की दूरी कम करते हुए रोजगार उपलब्धता को आसान और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
जिले के सरकारी अस्पतालों में 35 रक्तदाताओं की लगेगी सूची
*दफ्तर, डॉक्टर के चेंबर के सामने होगी चस्पा, जरुरतमंद सीधे करेंगे फोन*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अब खून के लिए मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। तीमारदारों को ब्लड बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जरूरतमंद व्यक्ति सीधे रक्तदाताओं से बातकर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पहल की शुरूआत की है। जिला अस्पताल सहित 29 स्वास्थ्य केंद्रों पर अब रक्तदाताओं की सूची चस्पा की जाएगी। जिले में कुल 35 डोनर हैं, जो नियमित रूप से समय समय पर रक्तदान करते हैं। इसके अलावा पांच संस्था हैं, जो किसी विशेष डे पर कैंप लगवाती हैं। अक्सर मरीज को जरूरत पर खून नहीं मिलता है। इससे मरीज, तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है।‌ महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय भदोही, सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल और भानीपुर, डीघ, गोपीगंज, औराई, भदोही, सुरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित 20 प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों पर डोनरों की सूची चस्पा की जाएगी। रक्तदाता का नाम, मोबाइल नंबर, ब्लाॅक, ब्लड ग्रुप लिखा रहेगा : जिसमें रक्तदाता का नाम, मोबाइल नंबर, ब्लाॅक, ब्लड ग्रुप होगा। इससे जरूरत मंद मरीज, तीमारदार सीधे डोनर से बातचीत कर सकते हैं। ब्लड ग्रुप मैच करने पर डोनर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक आएंगे और रक्तदान करेंगे। सारी प्रकिया पूरी करने के बाद मरीज को दिया जाएगा। अस्पताल के ब्लड बैंक में हमेशा खून का टोटा रहता है। इसका मुख्य कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। आज भी लोग रक्तदान करने से पहले सोचते हैं। जबकि चिकित्सकों का मानना है कि रक्तदान करने से शरीर स्वास्थ्य रहती है।
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना विमान क्रैश में 5 जवान शहीद, लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा

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असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में वायुसेना के पांच कर्मी शहीद हो गए, जबकि सह-पायलट गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गए। उनका इलाज चल रहा है।

वायुसेना जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया

वायुसेना की तरफ से जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया गया है। वायुसेना का कहना है कि स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है और दुख की इस घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़ी है।

जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के हादसा

बता दें कि, असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का AN-32 मालवाहक विमान लैंडिंग के तुरंत बाद आग की चपेट में आ गया था। इस घटना के बाद एयरबेस पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने अपना काम शुरू कर दिया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जैसे ही विमान रनवे पर उतरा, उसमें अचानक आग लग गई और उससे घना धुआं उठने लगा।

हादसे के वक्त दो टुकड़ों में टूट गया विमान

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, AN-32 परिवहन विमान अरुणाचल प्रदेश से जोरहाट लौट रहा था। इसी दौरान लैंडिंग के समय विमान हादसे का शिकार हो गया। विमान एयरबेस पर उतर रहा था, तभी यह क्रैश हो गया। हादसे की वजह से एयरफोर्स का विमान दो टुकड़ों में टूट गया और वहां से आग और धुएं का गुबार उठता दिखा। यह नजारा काफी भयावह था, जिसे देखते ही एयरपोर्ट और वायुसेना की फायर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया था।

'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का आदेश

वायु सेना ने इस दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' (जांच समिति) बनाई जा रही है। भारतीय वायु सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। वायु सेना ने कहा, 'आज जोरहाट में लैंडिंग के दौरान आईएएफ के एक एएन-32 विमान का एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का गठन किया जा रहा है'।

खाद की कालाबाजारी के विरोध में किसानों का हल्ला बोल, हाईवे जाम की कोशिश नाकाम
तहसीलदार व सीओ को सौंपा ज्ञापन

पुलिस प्रशासन की सूझबूझ के चलते बडा टकराव टला।

सीओ जानसठ ऋषिका सिंह, इंस्पेक्टर विनोद कुमार, भारी पुलिस फोर्स के साथ डटे रहे और पुलिस प्रशासन सूझबूझ से काम न लेता तो हो सकता था बड़ा टकराव

समस्याओं का समाधान न होने पर किसानों ने उग्र आंदोलन का दिया अल्टीमेटम

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ। क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध न होने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान एकत्र होकर जानसठ तहसील पहुंचे और प्रशासन के ख़िलाफ़ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए।
धरने के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों एवं निजी केंद्रों पर खाद की उपलब्धता को लेकर भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना था कि बुवाई एवं फसलों की देखभाल के महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
धरना प्रदर्शन के बीच स्थिति उस समय बहुत ही तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित किसानों के सब्र का बांध टूट गया किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में हाईवे जाम करने का प्रयास किया। लेकिन किसानों के धरना प्रदर्शन के मद्देनजर जानसठ, रामराज , मीरापुर पुलिस को तैनात किया गया था। सीओ जानसठ ऋषिका सिंह जैसे ही गाड़ी से अपने दफ्तर आने के लिए तहसील परिसर में पहुंची तो उनकी गाड़ी को भी रास्ते में ही रूकना पड़ा, और गाड़ी से उतरकर पैदल ही अपने ऑफिस जाना पड़ा।
इंस्पेक्टर जानसठ विनोद कुमार भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर डटे रहे और लगातार किसानों को समझानें का प्रयास करते नजर आए और आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद किसानों को समझानें में सफलता हासिल करने में कामयाब हो गए ,इसी क्रम के चलते किसानों और प्रशासन के बीच का रास्ता निकालते हुए किसानों से हाईवे पर ही सीओ जानसठ ऋषिका सिंह, तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता द्वारा ज्ञापन लिया गया, और किसानों को समस्याओं का समाधान कराये जाने का मजबूत आश्वासन दिया।
इस दौरान पुलिस की सूझ-बूझ एवं संयमित कार्रवाई के चलते किसी प्रकार के टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और माहौल शांतिपूर्ण बना रहा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाकर किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों की समस्याओं का ज्ञापन लिया गया और ज्ञापन को प्रेषित करनें व समस्याओं का समाधान करानें का आश्वासन दिया गया है।
धरना-प्रदर्शन और हाईवे जाम की कोशिश को लेकर क्षेत्र में दिनभर चर्चाओं का माहौल बना रहा, जबकि पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए रहे। प्रशासनिक अधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपने गंतव्य को लौट गए, तब कहीं जाकर पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस दौरान मुख्य रूप से ओमप्रकाश शर्मा, मास्टरमहकर सिंह, बिट्टू ठाकुर, सहंसरपाल, खालिद गुर्जर, मौ. इरशाद सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
बिलग्राम तहसील प्रशासन के कारनामे, मेड़बंदी कराई, कब्जा दिलाया, फिर बदल गई रिपोर्ट
*गाटा संख्या 75 मे 0.0918 हेक्टेयर भूमि घाटे की पैमाइश पर पारित हुआ था थाकबंदी आदेश*

*मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं बाद की रिपोर्ट ने खड़े किए नए प्रश्न*

रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार जहां प्रशासन में पारदर्शिता और "जीरो टॉलरेंस" नीति को सुशासन का आधार बताती है, वहीं हरदोई जिले की बिलग्राम तहसील का एक भूमि विवाद राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ही प्रकरण में पहले पैमाइश, फिर थाकबंदी आदेश, उसके अनुपालन में मेड़बंदी और कब्जा दिलाने की कार्रवाई, और बाद में उसी मामले में विपरीत रिपोर्ट—पूरा घटनाक्रम ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।बिलग्राम तहसील के ग्राम श्यामपुर में गाटा संख्या 75 से जुड़े इस मामले में न्यायालय के आदेश से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तक की कहानी कई मोड़ों से गुजरती है। हर मोड़ पर एक नया सवाल खड़ा होता है और हर सवाल का जवाब अभी भी फाइलों के पन्नों में तलाशा जा रहा है।ग्राम श्यामपुर निवासी दिवाकर मिश्रा पुत्र प्रेमचंद्र ने गाटा संख्या 75 की भूमि के संबंध में उपजिलाधिकारी बिलग्राम के न्यायालय में थाकबदी वाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय के निर्देश पर क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने मौके पर पैमाइश कर नक्शा नजरी एवं थाकबंदी आख्या तैयार की।
पैमाइश में सामने आया 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा
राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 75 का क्षेत्रफल 0.2710 हेक्टेयर दर्ज था, जबकि मौके पर हुई पैमाइश में उसका वास्तविक क्षेत्रफल मात्र 0.1792 हेक्टेयर पाया गया। इस प्रकार गाटा संख्या 75 में कुल 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा दर्ज हुआ।
इतना ही नहीं, आसपास के कई गाटों में क्षेत्रफल की बढ़त भी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार—
गाटा संख्या 55 में 0.0635 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 74 में 0.0376 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 76 में 0.0278 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 77 में 0.0283 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 72 एवं 73 में भी क्षेत्रफल का अंतर दर्ज किया गया
पड़ोसी गाटों की पैमाइश के आधार पर तैयार आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की गई। प्रभावित पक्षों को समन और समाचार पत्र के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन किसी भी पक्ष ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद एसडीएम न्यायालय ने 28 मई 2025 को प्रस्तुत आख्या को स्वीकार करते हुए थाकबंदी आदेश पारित कर दिया।
आदेश मिला, लेकिन अनुपालन में हुई देरी

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि न्यायालय का आदेश पारित होने के बावजूद लंबे समय तक उसका अनुपालन नहीं कराया गया। न्यायालय का आदेश अभिलेखों में दर्ज रहा, लेकिन जमीन पर उसकी तस्वीर दिखाई नहीं दी।आखिरकार 11 मार्च 2026 को दिवाकर मिश्रा ने जिलाधिकारी हरदोई को शिकायत देकर थाकबंदी आदेश का अनुपालन कराने की मांग कीजिलाधिकारी के निर्देश के बाद एसडीएम बिलग्राम ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को मौके पर भेजा। इसके बाद मेड़बंदी कराई गई और दिवाकर मिश्रा को भूमि पर कब्जा दिलाया गया।

कब्जे के बाद फिर शुरू हुआ विवाद

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि कब्जा मिलने के बाद रामलखन त्रिपाठी पुत्र श्याममोहन तथा उमाकांत शुक्ल निवासी बालामऊ चार-पांच अन्य व्यक्तियों के साथ मौके पर पहुंचे और बनाई गई मेड़ को तोड़ दिया। आरोप है कि भूमि को पुनः अपने खेत में मिला लिया गया तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस संबंध में दिवाकर मिश्रा नेआईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या20015536022250 दर्ज कराई।

पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़ने की पुष्टि

शिकायत की जांच में क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने 19 मई 2026 को प्रस्तुत अपनी आख्या में मेड़ तोड़े जाने का उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि थाकबंदी आदेश के अनुरूप की गई मेड़बंदी को नहीं माना गया और मौके की स्थिति बदल दी गई।
रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी, लेकिन दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी शिकायत और बदल गई पूरी तस्वीर

इसके बाद दिवाकर मिश्रा ने पुनः आईजीआरएस शिकायत संख्या 20015526024152 दर्ज कराई। इस बार जांच में प्रस्तुत रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
आरोप है कि उसी राजस्व निरीक्षक ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि आवेदक का भू-चित्र छोटा बना हुआ है, इसलिए उसे पूरी भूमि नहीं दी जा सकती। रिपोर्ट में विपक्षी पक्ष के प्रत्यावेदन का भी उल्लेख किया गया। बाद में एसडीएम बिलग्राम स्तर से भी इसी आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई।

सवालों के घेरे में पूरा घटनाक्रम

यहीं से कई प्रश्न जन्म लेते हैं। यदि भू-चित्र छोटा था तो उसी पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर थाकबंदी आदेश कैसे पारित हुआ? यदि आदेश सही नहीं था तो प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर मेड़बंदी कर कब्जा क्यों दिलाया? और यदि कब्जा दिलाना सही था तो बाद में अधिकारियों की रिपोर्ट का आधार क्या था?
जब पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि हो चुकी थी, तब संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि दूसरी रिपोर्ट सही है तो पहली रिपोर्ट तथा उसके आधार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को किस नजर से देखा जाए?
यही वे प्रश्न हैं जो आज ग्राम श्यामपुर से लेकर तहसील मुख्यालय तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जांच की मांग तेज
दिवाकर मिश्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश, पैमाइश रिपोर्ट, नक्शा नजरी, आईजीआरएस शिकायतों और बाद में प्रस्तुतविरोधाभासी रिपोर्टों की समग्र जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक ही मामले में सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक निष्कर्षों में इतना बड़ा अंतर आखिर क्यों दिखाई दे रहा है। ऐसे मे अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर गाटा संख्या 75 का यह विवाद आने वाले समय में और बड़े सवाल खड़े करेगा।
आज गोरखपुर और आजमगढ़ को विकास की बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी

1,250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

गोरखपुर में 319 और आजमगढ़ में 39 विकास परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ

* सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और बाढ़ सुरक्षा पर रहेगा फोकस

लखनऊ/गोरखपुर/आजमगढ़। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को पूर्वांचल के दो प्रमुख जनपदों गोरखपुर और आजमगढ़ के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह 1,250 करोड़ रुपये से अधिक लागत की कुल 358 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर प्रदेश के विकास अभियान को नई गति देंगे।

गोरखपुर में 295 करोड़ रुपये की 319 परियोजनाओं का शुभारंभ

मुख्यमंत्री गोरखपुर के बड़हलगंज स्थित गांधी इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर 295 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 319 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में शाहपुर-बेलघाट मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण परियोजना का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही राप्ती और सरयू नदी तट विकास तथा कटान रोधी कार्यों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री बड़हलगंज में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) समेत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे, जबकि राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में नए बुनियादी ढांचे के निर्माण का शिलान्यास भी करेंगे।

सड़क, शिक्षा, पर्यटन, कौशल विकास और बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाएं कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहेंगी। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान, मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद, सांसद रवि किशन सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

आजमगढ़ को 955 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 955 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और शहरी विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं। विश्वविद्यालय परिसर की विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण के साथ ही राजकीय मेडिकल कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से संबंधित विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी।

तमसा नदी तट विकास, शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा क्षेत्रीय एवं जिला ग्राम्य विकास संस्थान की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री करेंगे। दौरे के दौरान वह विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर, दारा सिंह चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे।

बलिया  शिवमहापुराण कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया श्रद्धालुओं को जीवन सुखी बनाने का संदेश
संजीव सिंह बलिया!बाबा बालखंडी नाथ दिउली के सानिध्य में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि शिवत्व के माध्यम से जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नियमित भजन-नाम स्मरण और भगवान की भक्ति से न केवल मनचाही भौतिक संपदाएँ प्राप्त होती हैं, बल्कि शिव की विशेष कृपा भी मिलती है, जबकि व्यसनों में लिप्तता व्यक्ति के जीवन को बर्बाद कर देती है।
पंडित मिश्रा ने कहा कि सफलता पाने के लिए 'मैं' की भावना का त्याग कर 'आप' और 'हम' शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि सच्चे शिवभक्त किसी कार्य का श्रेय स्वयं नहीं लेते, बल्कि उसे भोलेनाथ की कृपा मानते हैं और सामूहिकता को महत्व देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मन में यह भावना स्थिर हो जाए कि उसका घर नहीं बल्कि शिव का घर है, तो उसके जीवन एवं परिवार से स्वतः अशांति दूर हो जाती है।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने बलियावासियों को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि अधिक मास, प्रदोष, शिवरात्रि और सोमवती अमावस्या जैसे विशेष संयोगों के बीच शिव महापुराण कथा का श्रवण अत्यंत पुण्यदायी है। उन्होंने एक क्षण की महत्ता समझाने के लिए संत और लोहार की कथा सुनाई। कथा में बताया गया कि एक गरीब लोहार प्रतिदिन कुछ समय के लिए शिवालय जाकर नंदी के कान में अपनी बात कहता था; एक बार तेज वर्षा और जलभराव के कारण उस गांव में संकट उत्पन्न हुआ तो लोहार ने नंदी के माध्यम से भोलेनाथ से मदद मांगी, जिससे वर्षा रुक गई और पूरा गांव संकट से बच गया। पंडित मिश्रा ने कहा कि शिव से संबंध जोड़ने के लिए घंटों की साधना जरूरी नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया गया एक क्षण का स्मरण भी पर्याप्त है।
कार्यक्रम में मंत्री के अनुज धर्मेंद्र सिंह और उनके परिजनों के साथ अनुज सरावगी, अनिल पांडेय, राजाराम सिंह, राजेश गुप्ता आदि ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की और कथा का आशीर्वाद लिया। शिव महापुराण कथा आगामी दिनों में भी जारी रहेगी और श्रद्धालु भारी संख्या में भाग ले रहे हैं।
धुर्वा के 3 बच्चे 12 दिन से लापता, पुलिस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का बड़ा सवाल

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने धुर्वा एवं जगरनाथपुर क्षेत्र से लापता तीन बच्चे करण, अर्जुन और शिवा के परिजनों से मुलाकात की। परिजनों से उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि प्रारंभिक सूचना के आधार पर भाजपा प्रतिनिधिमंडल मौके पर पहुंचा और मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार द्वारा बताई गई बातें और थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के विवरण में गंभीर विरोधाभास दिखाई देता है। बच्चों की माता का बयान कुछ और है, जबकि एफआईआर में अलग बातें दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार पढ़ा-लिखा नहीं है और पुलिस ने अपने बचाव में मनमाने ढंग से प्राथमिकी दर्ज करने का काम किया है। इससे पुलिस की भूमिका पर संदेह उत्पन्न होता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन से तीनों बच्चों की अविलंब बरामदगी सुनिश्चित करने तथा मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय जनता पार्टी जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी।

उन्होंने धुर्वा मंडल एवं भाजपा राँची महानगर के कार्यकर्ताओं और आम जनता से आह्वान किया कि बच्चों की बरामदगी और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के विरोध में कल शाम 6 बजे मशाल जुलूस निकाला जाएगा। साथ ही कहा कि यदि इसके बाद भी बच्चों की बरामदगी नहीं होती है तो पार्टी आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय करेगी।

श्री साहू ने कहा कि रांची के कोकर स्थित खोरहा टोली रोड नं-02 से लापता 18 माह की मासूम बच्ची अदिति का आज तक कोई पता पुलिस प्रशासन नहीं लगा सकी है। स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन अपने दायित्वों को लेकर गंभीर नहीं दिखती है। इस दिशा में भी पुलिस ठोस कदम उठावें।

श्री साहू ने कहा कि राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में बच्चों के अपहरण और लापता होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। भाजपा ऐसे प्रत्येक मामले में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जहां भी ऐसी घटनाएं होती हैं, वहां पार्टी कार्यकर्ता जनहित में आवाज उठाने का कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को भी इस देश में समान अधिकार प्राप्त हैं। धुर्वा इलाके के बच्चों के लापता होने के लगभग 12 दिन बाद भी पुलिस कोई ठोस सफलता हासिल नहीं कर सकी है। पीड़ित परिवार के अनुसार पुलिस केवल औपचारिकताएं पूरी कर रही है और अब तक प्रभावी खोजबीन नहीं की गई है।

इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, सरोज सिंह, अशोक बड़ाईक, रामकुमार पाहन, रमेश सिंह, उमेश यादव, शुचिता रानी राय, जितेंद्र वर्मा, वीणा मिश्रा, दीपक लोहरा, पंकज सिन्हा, नीरज सिंह, सूरज शाहदेव, राजेंद्र मुंडा सहित कई लोग थे।

पैतृक भूमि को लेकर एक परिवार आमरण अनशन व भूख हड़ताल पर बैठा
अमृतपुर - फर्रुखाबाद l थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम अंबरपुर की मढ़ैया में पैतृक भूमि विवाद को लेकर एक परिवार शुक्रवार को आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल पर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।ग्राम अंबरपुर की मढ़ैया निवासी गिरीश चंद्र मिश्रा शुक्रवार सुबह लगभग 10 बजे अपनी पत्नी गायत्री देवी, पुत्री सुमन, पुत्र देवेश तथा बहू गंगा देवी के साथ आमरण अनशन पर बैठ गए। गिरीश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि लगभग 7 डिसमिल भूमि पर पिछले 40 वर्षों से उनका कब्जा चला आ रहा है, लेकिन दूसरे पक्ष के लोगों ने उक्त भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जा करने का प्रयास किया है।उन्होंने बताया कि वह इस भूमि पर अपने पूर्वज बाबू कल्याण सिंह की स्मृति में एक पार्क का निर्माण कराना चाहते हैं। न्याय की मांग को लेकर उन्होंने परिवार सहित भूख हड़ताल शुरू कर दी है।वहीं दूसरे पक्ष के रमाकांत का कहना है कि अंबरपुर मोड़ के निकट गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए उन्होंने लगभग 14 डिसमिल भूमि दी थी, जिसके बदले में उन्हें यह भूमि आवंटित हुई है। इसलिए वह भूमि पर अपना वैध अधिकार बताते हैं।उल्लेखनीय है कि रमाकांत ने इससे पूर्व 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना में अधिग्रहित हो रही अपनी भूमि एवं मकान के मुआवजे को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि ग्राम सभा अंबरपुर की गाटा संख्या 202 एवं 203 में स्थित उनके मकान का सही मूल्यांकन नहीं किया गया है, जबकि मकान के निर्माण में लगभग 25 लाख रुपये खर्च हुए हैं।रमाकांत ने जिलाधिकारी से मांग की थी कि उनके मकान का पुनः निरीक्षण उनकी उपस्थिति में कराया जाए तथा निष्पक्ष मूल्यांकन के बाद ही उचित मुआवजा निर्धारित किया जाए। उनका कहना था कि जब तक दोबारा सर्वे और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक वह अपनी भूमि और मकान परियोजना के लिए देने को तैयार नहीं हैं।भूमि विवाद और अनशन की सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस तथा थाना राजेपुर पुलिस मौके पर पहुंची। उपनिरीक्षक जगदीश वर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दोनों पक्षों से जानकारी ली। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए मौके पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।थानाध्यक्ष राजेपुर नागेंद्र सिंह ने बताया कि जमीनी विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया था। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है तथा मामले की जानकारी राजस्व विभाग को भी दे दी गई है। राजस्व विभाग द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।ग्रामीण क्षेत्र में इस विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, जबकि प्रशासन मामले पर नजर बनाए हुए है।