आप के 7 सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी, राज्यसभा चेयरमैन ने दी अनुमति, बीजेपी हुई मजबूत
#numberofbjpmpsintherajyasabhahasreached113withanewnotification

आम आदमी पार्टी में हुई बगावत के बाद राज्यसभा में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आप से अलग हुए सभी 7 सांसदों को अब औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा मान लिया गया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आप को बड़ा झटका लगा है।
राज्यसभा सचिवालय ने दी विलय को मंजूरी
शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों का बीजेपी में विलय करने का ऐलान किया था। राघव चड्ढा ने इसे 'आप' के दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का भाजपा में विलय बताया। साथ ही राज्यसभा को लेटर लिख विलय की अनुमति मांगी थी। ऐसे में सोमवार को राज्यसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर इस विलय को मंजूरी दे दी है।
राज्यसभा में BJP की ताकत बढ़कर 113 पहुंची
वहीं, इस बदलाव से बीजेपी को सीधा फायदा हुआ है और उसकी संख्या राज्यसभा में बढ़कर 113 पहुंच गई है। इसके साथ ही एनडीए का आंकड़ा 148 पहुंच गया। वहीं, इस फैसले के बाद आप की ताकत राज्यसभा में सिमटकर बेहद कम हो गई है। अब आप पार्टी के पास महज तीन सांसद ही बचे हैं। इनमें एक सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल पंजाब से हैं, जबकि दो सदस्य संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता दिल्ली से आते हैं।
इन सांसदों का बीजेपी में विलय
जिन सात सांसदों का बीजेपी में विलय हुआ है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। अब राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी को बीजेपी सांसदों की सूची में दिखाया जा रहा है।
आप ने की थी सदस्यता खत्म करने की मांग
दरअसल, पार्टी से बागी हुए तीन सांसदों के खिलाफ राज्य सभा के चेयरमैन को अर्जी भी दी थी। पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की भी मांग की। पार्टी ने दलील दी थी जब इन तीन सांसदों ने AAP छोड़ने का ऐलान किया था, उस समय 4 अन्य सांसद मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये अल्पमत में है और इनका पार्टी छोड़ना दल-बदल कानून के तहत आता है।
आप के बागी सांसदों पर दल-बदल कानून नहीं होगा लागू
बता दें कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के बावजूद आप के सांसदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि इसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य अलग या किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
7 hours ago
शामिल हैं।
₹350 करोड़ की अनुदान राशि वितरित
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी.एल. मीणा ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में पूंजी निवेश के मामले में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब तक स्वीकृत परियोजनाओं को ₹350 करोड़ की अनुदान राशि वितरित की जा चुकी है।
निवेशकों को सम्मानित किया गया
बैठक में जनपद बागपत स्थित Ambrosia Products India Pvt. Ltd. के निवेशक जयदेव सिंह को समयबद्ध इकाई स्थापना और निवेश के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
वहीं अमेठी की एफिकनो फिनटेक कंसल्टेंट्स प्रा. लि. द्वारा स्टार्च उत्पादन परियोजना को भी मंजूरी दी गई। यह स्टार्च बिस्कुट, टॉफी और अन्य खाद्य उत्पादों में उपयोग होगा।
ऑर्गेनिक उद्योग को भी बढ़ावा
बुलंदशहर की शाकुंभरी ऑर्गेनिक एक्जिम LLP द्वारा तिल, मूंगफली, गेहूं और दालों के प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग परियोजना हेतु सब्सिडी आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसे भी सकारात्मक रूप से लिया गया।
पीएमएफएमई योजना में यूपी देश में प्रथम
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत 26,000 परियोजनाओं की स्वीकृति के साथ उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में प्रयागराज जिला प्रथम स्थान पर है।
विभागवार परियोजनाओं का प्रतिशत
खाद्य प्रसंस्करण नीति के तहत जारी लेटर ऑफ कम्फर्ट में—
परियोजनाएँ शामिल हैं।
निवेशकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने सभी संबंधित विभागों और प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि निवेशकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। बैठक में खाद्य प्रसंस्करण विभाग, अन्य विभागों के अधिकारी एवं उद्यमी मौजूद रहे।
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1.2k