मिडिल ईस्ट में फिड़ भड़की युद्ध की चिंगारी, हेलीकॉप्टर गिराने जाने के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला

मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी में युद्ध की चिंगारी एक बार फिर से सुलग उठी है। ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बंदर अब्बास तक एक साथ अटैक किया है। यूएस आर्मी ने ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और रडार साइट्स बम बरसाए है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में हमले शुरू किए हैं। सेंटकॉम का कहना है कि यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया था। सेंटकॉम ने बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर मंगलवार शाम से ये हमले शुरू किए गए। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ईरान की अनुचित आक्रामकता के खिलाफ संतुलित और सीमित जवाबी कार्रवाई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में गूंजी धमाकों की आवाज

ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में केशम द्वीप पर धमाकों की आवाज सुनी गई है। यह एक अहम शिपिंग रूट है, जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान असल में बंद कर दिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट से पता चलता है कि हमले ईरान की राजधानी का दूसरे बड़े शहरों में नहीं बल्कि केशम द्वीप पर हुए है। इससे जानमाल के नुकसान की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ईरानी विदेश मंत्री की खुली चेतावनी

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह सुरक्षित रहना चाहता है तो उसे फारस की खाड़ी क्षेत्र छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युद्ध के मैदान में असफल रहने के बाद अमेरिका ने ईरान के संकल्प को परखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ईरान की शक्तिशाली सेना किसी भी हमले को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि फारस की खाड़ी के इतिहास में बाहरी ताकतों के बुरे अंजाम के कई उदाहरण मौजूद हैं।

इजराइल और ईरान के बीच भी बढ़ा तनाव

बता दें कि हाल के दिनों में ईरान और इस्राइल के बीच भी तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस्राइल ने ईरान के एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया, जबकि ईरान की ओर से इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात को और गंभीर बना सकता है।

प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
सालगिरह से लौट रहे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सड़क हादसे में महिला समेत तीन की मौत
बाराबंकी। जिले के देवा-चिनहट मार्ग पर मंगलवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार देवा कोतवाली क्षेत्र के मलिका असंड गांव निवासी निर्मल रावत अपने परिवार के साथ लखनऊ के अरदासी खेड़ा गांव में बहन की शादी की सालगिरह समारोह में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी लोग मंगलवार रात करीब 12 बजे दो बाइकों से अपने घर लौट रहे थे।

बताया गया कि दूसरी बाइक पर चार वर्षीय नेहा, 42 वर्षीय महिला और 20 वर्षीय विजेंद्र सवार थे। जब वे देवा-चिनहट मार्ग पर गोपालपुर गांव के पास पहुंचे, तभी उनकी बाइक आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने तीनों घायलों को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शादी की सालगिरह की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर के चलते हादसा होने की बात सामने आई है।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रात के समय वाहनों की सावधानीपूर्वक आवाजाही की आवश्यकता को उजागर किया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
पीजीआई युवती लापता मामला: धर्मांतरण और सीरिया ले जाने के दावों पर पुलिस का स्पष्टीकरण, जांच जारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से एक युवती के लापता होने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण और युवती को सीरिया ले जाने के आरोपों को लेकर पुलिस ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहनता से की जा रही है तथा अब तक की जांच में धर्मांतरण और सीरिया ले जाने संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार थाना पीजीआई में प्राप्त तहरीर के आधार पर 22 मई 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 280/2026, धारा 87 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मुकदमा युवती के लापता होने के संबंध में पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने बताया कि युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा जोन दक्षिणी की सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस टीमें लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती और आरोपी की तलाश में जुटी हैं।

मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि युवती का धर्मांतरण कराया गया है और उसे सीरिया ले जाया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई मूल तहरीर में धर्मांतरण संबंधी किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण संबंधी दावों की भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक की विवेचना में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह युवती को सीरिया ले जाने की बात भी जांच में सही नहीं पाई गई है।

जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि लापता युवती हिंदू धर्म से संबंधित है, जबकि नामजद आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया है कि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच पूर्व से बातचीत होती थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाकर तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जांच अभी जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी तथ्य जांच के दौरान सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी है। इसके लिए पुलिस और सर्विलांस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
यूपी में डॉक्टरों का बड़ा संकट: 18,500 पदों में 7,500 खाली, विशेषज्ञों की भर्ती के लिए बनेगा नया बोर्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। प्रदेश में स्वीकृत लगभग 18,500 पदों के सापेक्ष केवल 11 हजार डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि करीब 7,500 पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर भर्ती प्रक्रिया चला रही है और अब इसके लिए एक नया भर्ती बोर्ड गठित करने की तैयारी भी कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस समस्या से निपटने के लिए करीब 2,500 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।

रिवर्स बिडिंग से हो रही विशेषज्ञों की नियुक्ति

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए रिवर्स बिडिंग व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पांच लाख रुपये प्रतिमाह तक के मानदेय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। पिछले वर्ष इस प्रक्रिया के जरिए करीब 170 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इन्हें चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में तैनात किया गया है।

इसके अलावा जनवरी 2026 में संविदा के आधार पर 710 डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू भी आयोजित किए गए थे। सरकार ने डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु भी 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है।

विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड का गठन

डॉक्टरों की कमी और लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। यह बोर्ड एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों (लेवल-2) की सीधी भर्ती करेगा। साथ ही एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों (लेवल-1) की पदोन्नति प्रक्रिया को भी तेज करेगा।

सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और रिक्त पदों को जल्द भरा जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में टिक नहीं पा रहे विशेषज्ञ डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कई विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देते हैं। हर वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 200 से 250 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन इनमें से करीब 25 प्रतिशत डॉक्टर कार्यभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही अनुपस्थित हो जाते हैं।

लंबे समय तक ड्यूटी पर न लौटने पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद जब डॉक्टर वापस नहीं आते तो उनकी सेवाएं समाप्त कर पद को पुनः रिक्त घोषित कर दिया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी छोड़ने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें सरकारी आवास, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। वहीं निजी अस्पतालों में बेहतर शहरी सुविधाओं के साथ आकर्षक वेतन मिलने से कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

अगले दो वर्षों में रिक्त पद भरने का दावा

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि प्रदेश में कई स्तरों पर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। नए मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक भी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो वर्षों में अधिकांश रिक्त पद भर लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर भर्ती और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे
यूपी में गर्मी का कहर: बांदा 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 17 जिलों में लू और 36 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में भीषण गर्मी, लू और उमस लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं, तो दूसरी ओर तराई और कुछ अन्य क्षेत्रों में आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज ने प्रदेशवासियों को असमंजस में डाल दिया है।

मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे अधिक देखने को मिला। बांदा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा प्रयागराज में 44.6 डिग्री, झांसी में 44.4 डिग्री, कानपुर में 43.9 डिग्री और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्म हवाओं और उमस ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया। बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने थोड़ी राहत भी दी। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और उमस ने लोगों को परेशान किया।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में लू चलने की संभावना है। वहीं तराई क्षेत्र समेत 36 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि उमस बरकरार रह सकती है।

राजधानी लखनऊ में भी मौसम का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिला। दिनभर कड़ी धूप और गर्मी के बाद मंगलवार शाम को कई इलाकों में तेज आंधी चली। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 जून से राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि तब तक लोगों को भीषण गर्मी और लू से सतर्क रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से कम निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और बदलते मौसम का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
आदिवासी बच्चों के लिए लोढ़ा फाउंडेशन का “मानवता का हाथ, सबका साथ” अभियान

मुंबई। लोढ़ा फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा की संकल्पना से साकार हुए “मानवता का हाथ, सबका साथ” इस सामाजिक अभियान का शुभारंभ मंगलवार, दि. 9 जून को सायंकाल गामदेवी स्थित धर्म पैलेस, ह्यूजेस रोड में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की प्रमुख उपस्थिति में इस उपक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। समाज के अनेक घरों में उपयोग में न आने वाली, किंतु अच्छी स्थिति में उपलब्ध पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें बड़ी संख्या में पड़ी रहती हैं। इन वस्तुओं को नया जीवन देते हुए उन्हें आदिवासी समुदाय के जरूरतमंद बच्चों और परिवारों तक पहुंचाने का संकल्प इस अभियान के माध्यम से लिया गया है। संकलित सामग्री की आवश्यक मरम्मत, स्वच्छता एवं पुनः उपयोग के लिए तैयारी कर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा। अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में 100 से अधिक नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।सइस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साधन, खिलौनों से मिलने वाला आनंद तथा साइकिलों से प्राप्त गतिशीलता ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर की अनुपयोगी वस्तुएं दान कर इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा, “समाज के प्रत्येक घर में ऐसी अनेक पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें होती हैं, जो भले ही उपयोग में न हों, लेकिन किसी जरूरतमंद बच्चे के लिए अमूल्य साबित हो सकती हैं। ‘मानवता का हाथ, सबका साथ’ यह अभियान केवल वस्तुओं का दान नहीं, बल्कि आनंद, शिक्षा और अवसरों का वितरण करने वाला अभियान है। पालघर के आदिवासी बच्चों से शुरू होने वाला यह आंदोलन समाज के संवेदनशील नागरिकों की सहभागिता से और अधिक व्यापक बनेगा, ऐसा मुझे विश्वास है।”
डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “एक पुरानी पुस्तक किसी बच्चे को शिक्षा का नया अवसर दे सकती है, एक खिलौना उसके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है और एक साइकिल उसके सपनों को नई उड़ान दे सकती है। समाज में उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग कर जरूरतमंदों तक सहायता का हाथ पहुंचाना ही इस पहल के पीछे की प्रेरणा है।” कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वयंसेवी क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति, नागरिक तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। आदिवासी बच्चों की शिक्षा, खुशी और उज्ज्वल भविष्य के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर सहयोग करने का संदेश इस अभियान के माध्यम से दिया गया। लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से नागरिकों से अपने घरों में उपलब्ध पुरानी पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें दान कर इस सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बनने का आह्वान किया गया।
जनसेवा का कार्य निरंतर जारी रहेगा : भारती लवेकर
मुंबई। वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व भाजपा विधायक भारती लवेकर का जन्मदिन उनके जनसंपर्क कार्यालय में धूमधाम पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर भाजपा कामगार मोर्चा के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष तथा भाजपा चित्रपट कामगार आघाड़ी के मुंबई प्रभारी नितिन गुप्ता ने भारती लवेकर को उनके स्क्रेच किए हुए फोटो, पुष्पगुच्छ तथा शाॅल भेंटकर अपनी समूची टीम के साथ जन्मदिन की बधाई दी। इस अवसर पर भाजपा कामगार आघाड़ी के मुंबई अध्यक्ष अभिजीत राणे, फिल्म निर्माता, निर्देशक, लेखक एवं अभिनेता शहजाद मिर्जा, राजन कुमार, ऋतिक कागडा समेत सैकड़ों लोगों ने उपस्थित होकर पूर्व विधायक भारती लवेकर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। भारती लवेकर के सभी शुभचिंतकों के स्नेह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्सोवा विधानसभा का हर नागरिक हमारा परिवार है, जिनके उत्थान और समस्याओं के निराकरण के लिए मैं सतत प्रतिबद्ध हूं। जनसेवा का मेरा कार्य आजीवन जारी रहेगा। वर्सोवा के स्थानीय समाजसेवी व भाजपा कामगार मोर्चा के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने बतौर विधायक दस वर्षों तक भारती लवेकर द्वारा इस विधानसभा क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूलमंत्र पर चलते हुए इन्होंने जन-जन के उत्थान के प्रयास किए। नितिन गुप्ता ने कहा कि चुनाव में जीत-हार व्यवस्था का हिस्सा है। आज वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र की जनता विकास की मंद पड़ी रफ्तार और मूलभूत समस्याओं से जूझते हुए पूर्व विधायक भारती लवेकर की एक जनप्रतिनिधि के तौर पर कमी महसूस कर रही है। अगले चुनाव में भारती मैडम एक बार फिर विधायक निर्वाचित होकर विकास के नए पर्व की शुरुआत करेंगी, इसका हम सभी को पूरा विश्वास है। नितिन गुप्ता ने पूर्व विधायक भारती लवेकर को भरोसा दिलाया कि वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र का हर भाजपा कार्यकर्ता तथा नागरिक उनके साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है, और एक जनसेवक के रूप में उनके कार्यों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्व विधायक भारती लवेकर ने भी नितिन गुप्ता द्वारा व्यापारियों, कामगारों, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कामगारों की समस्याओं के निराकरण तथा उनके हितों के लिए किए जा रहे संघर्ष की सराहना करते हुए मिल-जुलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।।
रतनपुर पमारान में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
बिना रजिस्ट्रेशन मेडिकल स्टोरों और झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, ग्रामीणों की जान से हो रहा खिलवाड़


अमृतपुर फर्रुखाबाद

फर्रुखाबाद के विकास खंड राजेपुर क्षेत्र के अंतर्गत राजपुर गुडेरा संपर्क मार्ग पर स्थित रतनपुर पमारान  में बिना पंजीकरण संचालित मेडिकल स्टोरों और झोलाछाप डॉक्टरों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की कथित अनदेखी के चलते अवैध रूप से चल रहे क्लीनिक और मेडिकल स्टोर ग्रामीणों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई मेडिकल स्टोर बिना वैध लाइसेंस के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। जबकि स्वयंभू डॉक्टर बिना किसी मान्यता प्राप्त डिग्री और चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। मरीजों को मनमाने ढंग से दवाएं देकर मोटी रकम वसूली जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों को मजबूरी में ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज कराने जाना पड़ रहा है। जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं।

क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि रतनपुर पमारान में संचालित अवैध मेडिकल स्टोरों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
जबकि अवैध बंगाली डॉक्टर की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी प्रमित राजपूत द्वारा क्लीनिक को सील कर दिया गया था लेकिन जवाब दे नोटिस भी चश्मा किया गया था पता नहीं किस कारण वर्ष उसका फिर से क्लिनिक फलने फूलने लगा है क्या यही स्वास्थ्य व्यवस्था है और विभाग में बैठे अधिकारी भी मोटी रकम लेकर ऐसे बिना लाइसेंस धारक डॉक्टरों को शरण दे देते हैं जो अवैध तरीके से डॉक्टर कर रहे हैं
Sambhal ग्रेट निकोबार परियोजना के विरोध में कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान, अडानी को लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप
ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित विकास परियोजना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष आरिफ तुर्की ने सरकार पर उद्योगपति समूह को लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण और आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जिले में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की।

आरिफ तुर्की ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर 8 जून से 15 जून तक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित परियोजना के तहत बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की योजना है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। उनका आरोप है कि सरकार एक ओर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, जबकि दूसरी ओर हरे-भरे जंगलों को खत्म करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि द्वीप क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समुदाय और मछली पकड़कर जीवनयापन करने वाले लोगों की आजीविका पर भी इस परियोजना का असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर स्थानीय निवासियों के हितों की अनदेखी कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि सरकार इस परियोजना को निवेश, रोजगार और विकास से जोड़कर देख रही है, तो आरिफ तुर्की ने कहा कि सरकार की नीतियों और दावों पर अब जनता भरोसा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और आम जनता के नाम पर लिए गए फैसलों का लाभ लोगों तक नहीं पहुंचा है और अब लोग सरकार के वादों को समझ चुके हैं। कांग्रेस का यह हस्ताक्षर अभियान आगामी दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से पार्टी ग्रेट निकोबार परियोजना के खिलाफ जनसमर्थन जुटाने का प्रयास करेगी।
मिडिल ईस्ट में फिड़ भड़की युद्ध की चिंगारी, हेलीकॉप्टर गिराने जाने के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला

मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी में युद्ध की चिंगारी एक बार फिर से सुलग उठी है। ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बंदर अब्बास तक एक साथ अटैक किया है। यूएस आर्मी ने ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और रडार साइट्स बम बरसाए है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में हमले शुरू किए हैं। सेंटकॉम का कहना है कि यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया था। सेंटकॉम ने बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर मंगलवार शाम से ये हमले शुरू किए गए। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ईरान की अनुचित आक्रामकता के खिलाफ संतुलित और सीमित जवाबी कार्रवाई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में गूंजी धमाकों की आवाज

ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में केशम द्वीप पर धमाकों की आवाज सुनी गई है। यह एक अहम शिपिंग रूट है, जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान असल में बंद कर दिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट से पता चलता है कि हमले ईरान की राजधानी का दूसरे बड़े शहरों में नहीं बल्कि केशम द्वीप पर हुए है। इससे जानमाल के नुकसान की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ईरानी विदेश मंत्री की खुली चेतावनी

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह सुरक्षित रहना चाहता है तो उसे फारस की खाड़ी क्षेत्र छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युद्ध के मैदान में असफल रहने के बाद अमेरिका ने ईरान के संकल्प को परखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ईरान की शक्तिशाली सेना किसी भी हमले को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि फारस की खाड़ी के इतिहास में बाहरी ताकतों के बुरे अंजाम के कई उदाहरण मौजूद हैं।

इजराइल और ईरान के बीच भी बढ़ा तनाव

बता दें कि हाल के दिनों में ईरान और इस्राइल के बीच भी तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस्राइल ने ईरान के एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया, जबकि ईरान की ओर से इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात को और गंभीर बना सकता है।

प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
सालगिरह से लौट रहे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सड़क हादसे में महिला समेत तीन की मौत
बाराबंकी। जिले के देवा-चिनहट मार्ग पर मंगलवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार देवा कोतवाली क्षेत्र के मलिका असंड गांव निवासी निर्मल रावत अपने परिवार के साथ लखनऊ के अरदासी खेड़ा गांव में बहन की शादी की सालगिरह समारोह में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी लोग मंगलवार रात करीब 12 बजे दो बाइकों से अपने घर लौट रहे थे।

बताया गया कि दूसरी बाइक पर चार वर्षीय नेहा, 42 वर्षीय महिला और 20 वर्षीय विजेंद्र सवार थे। जब वे देवा-चिनहट मार्ग पर गोपालपुर गांव के पास पहुंचे, तभी उनकी बाइक आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने तीनों घायलों को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शादी की सालगिरह की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर के चलते हादसा होने की बात सामने आई है।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रात के समय वाहनों की सावधानीपूर्वक आवाजाही की आवश्यकता को उजागर किया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
पीजीआई युवती लापता मामला: धर्मांतरण और सीरिया ले जाने के दावों पर पुलिस का स्पष्टीकरण, जांच जारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से एक युवती के लापता होने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण और युवती को सीरिया ले जाने के आरोपों को लेकर पुलिस ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहनता से की जा रही है तथा अब तक की जांच में धर्मांतरण और सीरिया ले जाने संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार थाना पीजीआई में प्राप्त तहरीर के आधार पर 22 मई 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 280/2026, धारा 87 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मुकदमा युवती के लापता होने के संबंध में पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने बताया कि युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा जोन दक्षिणी की सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस टीमें लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती और आरोपी की तलाश में जुटी हैं।

मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि युवती का धर्मांतरण कराया गया है और उसे सीरिया ले जाया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई मूल तहरीर में धर्मांतरण संबंधी किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण संबंधी दावों की भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक की विवेचना में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह युवती को सीरिया ले जाने की बात भी जांच में सही नहीं पाई गई है।

जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि लापता युवती हिंदू धर्म से संबंधित है, जबकि नामजद आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया है कि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच पूर्व से बातचीत होती थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाकर तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जांच अभी जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी तथ्य जांच के दौरान सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी है। इसके लिए पुलिस और सर्विलांस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
यूपी में डॉक्टरों का बड़ा संकट: 18,500 पदों में 7,500 खाली, विशेषज्ञों की भर्ती के लिए बनेगा नया बोर्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। प्रदेश में स्वीकृत लगभग 18,500 पदों के सापेक्ष केवल 11 हजार डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि करीब 7,500 पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर भर्ती प्रक्रिया चला रही है और अब इसके लिए एक नया भर्ती बोर्ड गठित करने की तैयारी भी कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस समस्या से निपटने के लिए करीब 2,500 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।

रिवर्स बिडिंग से हो रही विशेषज्ञों की नियुक्ति

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए रिवर्स बिडिंग व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पांच लाख रुपये प्रतिमाह तक के मानदेय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। पिछले वर्ष इस प्रक्रिया के जरिए करीब 170 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इन्हें चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में तैनात किया गया है।

इसके अलावा जनवरी 2026 में संविदा के आधार पर 710 डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू भी आयोजित किए गए थे। सरकार ने डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु भी 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है।

विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड का गठन

डॉक्टरों की कमी और लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। यह बोर्ड एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों (लेवल-2) की सीधी भर्ती करेगा। साथ ही एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों (लेवल-1) की पदोन्नति प्रक्रिया को भी तेज करेगा।

सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और रिक्त पदों को जल्द भरा जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में टिक नहीं पा रहे विशेषज्ञ डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कई विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देते हैं। हर वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 200 से 250 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन इनमें से करीब 25 प्रतिशत डॉक्टर कार्यभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही अनुपस्थित हो जाते हैं।

लंबे समय तक ड्यूटी पर न लौटने पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद जब डॉक्टर वापस नहीं आते तो उनकी सेवाएं समाप्त कर पद को पुनः रिक्त घोषित कर दिया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी छोड़ने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें सरकारी आवास, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। वहीं निजी अस्पतालों में बेहतर शहरी सुविधाओं के साथ आकर्षक वेतन मिलने से कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

अगले दो वर्षों में रिक्त पद भरने का दावा

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि प्रदेश में कई स्तरों पर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। नए मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक भी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो वर्षों में अधिकांश रिक्त पद भर लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर भर्ती और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे
यूपी में गर्मी का कहर: बांदा 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 17 जिलों में लू और 36 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में भीषण गर्मी, लू और उमस लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं, तो दूसरी ओर तराई और कुछ अन्य क्षेत्रों में आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज ने प्रदेशवासियों को असमंजस में डाल दिया है।

मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे अधिक देखने को मिला। बांदा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा प्रयागराज में 44.6 डिग्री, झांसी में 44.4 डिग्री, कानपुर में 43.9 डिग्री और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्म हवाओं और उमस ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया। बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने थोड़ी राहत भी दी। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और उमस ने लोगों को परेशान किया।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में लू चलने की संभावना है। वहीं तराई क्षेत्र समेत 36 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि उमस बरकरार रह सकती है।

राजधानी लखनऊ में भी मौसम का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिला। दिनभर कड़ी धूप और गर्मी के बाद मंगलवार शाम को कई इलाकों में तेज आंधी चली। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 जून से राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि तब तक लोगों को भीषण गर्मी और लू से सतर्क रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से कम निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और बदलते मौसम का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
आदिवासी बच्चों के लिए लोढ़ा फाउंडेशन का “मानवता का हाथ, सबका साथ” अभियान

मुंबई। लोढ़ा फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा की संकल्पना से साकार हुए “मानवता का हाथ, सबका साथ” इस सामाजिक अभियान का शुभारंभ मंगलवार, दि. 9 जून को सायंकाल गामदेवी स्थित धर्म पैलेस, ह्यूजेस रोड में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की प्रमुख उपस्थिति में इस उपक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। समाज के अनेक घरों में उपयोग में न आने वाली, किंतु अच्छी स्थिति में उपलब्ध पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें बड़ी संख्या में पड़ी रहती हैं। इन वस्तुओं को नया जीवन देते हुए उन्हें आदिवासी समुदाय के जरूरतमंद बच्चों और परिवारों तक पहुंचाने का संकल्प इस अभियान के माध्यम से लिया गया है। संकलित सामग्री की आवश्यक मरम्मत, स्वच्छता एवं पुनः उपयोग के लिए तैयारी कर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा। अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में 100 से अधिक नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।सइस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साधन, खिलौनों से मिलने वाला आनंद तथा साइकिलों से प्राप्त गतिशीलता ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर की अनुपयोगी वस्तुएं दान कर इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा, “समाज के प्रत्येक घर में ऐसी अनेक पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें होती हैं, जो भले ही उपयोग में न हों, लेकिन किसी जरूरतमंद बच्चे के लिए अमूल्य साबित हो सकती हैं। ‘मानवता का हाथ, सबका साथ’ यह अभियान केवल वस्तुओं का दान नहीं, बल्कि आनंद, शिक्षा और अवसरों का वितरण करने वाला अभियान है। पालघर के आदिवासी बच्चों से शुरू होने वाला यह आंदोलन समाज के संवेदनशील नागरिकों की सहभागिता से और अधिक व्यापक बनेगा, ऐसा मुझे विश्वास है।”
डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “एक पुरानी पुस्तक किसी बच्चे को शिक्षा का नया अवसर दे सकती है, एक खिलौना उसके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है और एक साइकिल उसके सपनों को नई उड़ान दे सकती है। समाज में उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग कर जरूरतमंदों तक सहायता का हाथ पहुंचाना ही इस पहल के पीछे की प्रेरणा है।” कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वयंसेवी क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति, नागरिक तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। आदिवासी बच्चों की शिक्षा, खुशी और उज्ज्वल भविष्य के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर सहयोग करने का संदेश इस अभियान के माध्यम से दिया गया। लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से नागरिकों से अपने घरों में उपलब्ध पुरानी पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें दान कर इस सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बनने का आह्वान किया गया।
जनसेवा का कार्य निरंतर जारी रहेगा : भारती लवेकर
मुंबई। वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व भाजपा विधायक भारती लवेकर का जन्मदिन उनके जनसंपर्क कार्यालय में धूमधाम पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर भाजपा कामगार मोर्चा के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष तथा भाजपा चित्रपट कामगार आघाड़ी के मुंबई प्रभारी नितिन गुप्ता ने भारती लवेकर को उनके स्क्रेच किए हुए फोटो, पुष्पगुच्छ तथा शाॅल भेंटकर अपनी समूची टीम के साथ जन्मदिन की बधाई दी। इस अवसर पर भाजपा कामगार आघाड़ी के मुंबई अध्यक्ष अभिजीत राणे, फिल्म निर्माता, निर्देशक, लेखक एवं अभिनेता शहजाद मिर्जा, राजन कुमार, ऋतिक कागडा समेत सैकड़ों लोगों ने उपस्थित होकर पूर्व विधायक भारती लवेकर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। भारती लवेकर के सभी शुभचिंतकों के स्नेह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्सोवा विधानसभा का हर नागरिक हमारा परिवार है, जिनके उत्थान और समस्याओं के निराकरण के लिए मैं सतत प्रतिबद्ध हूं। जनसेवा का मेरा कार्य आजीवन जारी रहेगा। वर्सोवा के स्थानीय समाजसेवी व भाजपा कामगार मोर्चा के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने बतौर विधायक दस वर्षों तक भारती लवेकर द्वारा इस विधानसभा क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूलमंत्र पर चलते हुए इन्होंने जन-जन के उत्थान के प्रयास किए। नितिन गुप्ता ने कहा कि चुनाव में जीत-हार व्यवस्था का हिस्सा है। आज वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र की जनता विकास की मंद पड़ी रफ्तार और मूलभूत समस्याओं से जूझते हुए पूर्व विधायक भारती लवेकर की एक जनप्रतिनिधि के तौर पर कमी महसूस कर रही है। अगले चुनाव में भारती मैडम एक बार फिर विधायक निर्वाचित होकर विकास के नए पर्व की शुरुआत करेंगी, इसका हम सभी को पूरा विश्वास है। नितिन गुप्ता ने पूर्व विधायक भारती लवेकर को भरोसा दिलाया कि वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र का हर भाजपा कार्यकर्ता तथा नागरिक उनके साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है, और एक जनसेवक के रूप में उनके कार्यों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्व विधायक भारती लवेकर ने भी नितिन गुप्ता द्वारा व्यापारियों, कामगारों, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कामगारों की समस्याओं के निराकरण तथा उनके हितों के लिए किए जा रहे संघर्ष की सराहना करते हुए मिल-जुलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।।
रतनपुर पमारान में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
बिना रजिस्ट्रेशन मेडिकल स्टोरों और झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, ग्रामीणों की जान से हो रहा खिलवाड़


अमृतपुर फर्रुखाबाद

फर्रुखाबाद के विकास खंड राजेपुर क्षेत्र के अंतर्गत राजपुर गुडेरा संपर्क मार्ग पर स्थित रतनपुर पमारान  में बिना पंजीकरण संचालित मेडिकल स्टोरों और झोलाछाप डॉक्टरों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की कथित अनदेखी के चलते अवैध रूप से चल रहे क्लीनिक और मेडिकल स्टोर ग्रामीणों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई मेडिकल स्टोर बिना वैध लाइसेंस के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। जबकि स्वयंभू डॉक्टर बिना किसी मान्यता प्राप्त डिग्री और चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। मरीजों को मनमाने ढंग से दवाएं देकर मोटी रकम वसूली जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों को मजबूरी में ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज कराने जाना पड़ रहा है। जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं।

क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि रतनपुर पमारान में संचालित अवैध मेडिकल स्टोरों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
जबकि अवैध बंगाली डॉक्टर की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी प्रमित राजपूत द्वारा क्लीनिक को सील कर दिया गया था लेकिन जवाब दे नोटिस भी चश्मा किया गया था पता नहीं किस कारण वर्ष उसका फिर से क्लिनिक फलने फूलने लगा है क्या यही स्वास्थ्य व्यवस्था है और विभाग में बैठे अधिकारी भी मोटी रकम लेकर ऐसे बिना लाइसेंस धारक डॉक्टरों को शरण दे देते हैं जो अवैध तरीके से डॉक्टर कर रहे हैं
Sambhal ग्रेट निकोबार परियोजना के विरोध में कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान, अडानी को लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप
ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित विकास परियोजना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष आरिफ तुर्की ने सरकार पर उद्योगपति समूह को लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण और आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जिले में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की।

आरिफ तुर्की ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर 8 जून से 15 जून तक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित परियोजना के तहत बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की योजना है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। उनका आरोप है कि सरकार एक ओर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, जबकि दूसरी ओर हरे-भरे जंगलों को खत्म करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि द्वीप क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समुदाय और मछली पकड़कर जीवनयापन करने वाले लोगों की आजीविका पर भी इस परियोजना का असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर स्थानीय निवासियों के हितों की अनदेखी कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि सरकार इस परियोजना को निवेश, रोजगार और विकास से जोड़कर देख रही है, तो आरिफ तुर्की ने कहा कि सरकार की नीतियों और दावों पर अब जनता भरोसा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और आम जनता के नाम पर लिए गए फैसलों का लाभ लोगों तक नहीं पहुंचा है और अब लोग सरकार के वादों को समझ चुके हैं। कांग्रेस का यह हस्ताक्षर अभियान आगामी दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से पार्टी ग्रेट निकोबार परियोजना के खिलाफ जनसमर्थन जुटाने का प्रयास करेगी।