अजब डाक्टर की गज़ब कहानी, चक्कर आने पर दे दी पागलों वाली दवा, जानकर बीएचयू वाराणसी के भी डाक्टरों के उड़े होश
*झोलाछाप डॉक्टर पर बेटी को गलत दवा देने का पिता ने लगाया आरोप, कार्रवाई की लगाई गुहार

मीरजापुर। यूपी के मीरजापुर जिले से झोलाछाप डॉक्टर से जुड़ी हुई एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जिसे जानकर ख़ुद बीएचयू वाराणसी के भी डाक्टर सकते में हैं, कि आख़िरकार इतनी बड़ी लापरवाही भला कैसे? मामला, सिर्फ झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही ही नहीं बल्कि शिकायत करने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई का ना होना भी पूरे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मुलाजिमों को कटघरे में खड़े करने के लिए काफी है।

पूरा मामला मीरजापुर जिले के ड्रमंडगंज थाना क्षेत्र के बबुरा कलां गांव से जुड़ा हुआ है जहां के निवासी दिनेश सिंह ने क्षेत्र के रतेह चौराहा स्थित एक झोलाछाप पर बेटी को गलत दवा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने पिछले दिनों सीएम पोर्टल पर प्रार्थना पत्र देकर झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार भी लगाई है। दिए गए प्रार्थना पत्र में दिनेश सिंह आरोप लगाया कि कि गत 20 फरवरी 2026 को अपनी 18 वर्षीया पुत्री स्वचाली सिंह को चक्कर आने पर क्षेत्र के देवरी उत्तर गांव स्थित रतेह चौराहा पर 'चिरंजीवी क्लीनिक' में दिखाया तो झोलाछाप डॉक्टर ने पुत्री को एक सप्ताह की दवा खाने के लिए दी। झोलाछाप द्वारा दी गई दवा को बेटी ने खाया तो चार दिन बाद बेटी घर पर गश खाकर गिर पड़ी और उसे चलने में दिक्कत होने लगी। बेटी की दिमागी हालत विक्षिप्त जैसी हो गई। हालत गंभीर देखकर बेटी को उन्होंने मीरजापुर मंडलीय चिकित्सालय ले जाकर दिखाया। जहां चिकित्सक ने बेटी की हालत गंभीर देखते हुए 27 फरवरी को वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। जहां पुत्री का 19 दिनों तक इलाज चला। *बेटी का इलाज कर रहे बीएचयू ट्रामा सेंटर के न्यूरो विभाग के चिकित्सकों ने बताया कि गलत दवा खाने की वजह से बेटी की ऐसी हालत हुई है।*
बताया कि*यह दवा पागलों के इलाज में दी जाती है।* बेटी को चलने फिरने में दिक्कत हो रही है और उसकी याददाश्त में सुधार नही हो पा रहा है। आरोप लगाया कि उक्त झोलाछाप बिना किसी चिकित्सा डिग्री व बगैर लाइसेंस के क्लीनिक खोलकर चला रहा है। भोली भाली जनता का गलत दवा इलाज कर उनकी सेहत और जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। दिनेश सिंह ने बेटी की हालत के लिए झोलाछाप को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी हलिया डाक्टर अवधेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। झोलाछाप और अवैध रूप से क्लीनिक संचालित करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


*झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई के लिए सीएम, डीएम से लगाई गुहार*


पीड़िता के पिता दिनेश सिंह ने बेटी का गलत दवा इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार लगाई है। दिनेश सिंह ने गत 27 मार्च को सीएम पोर्टल पर झोलाछाप की शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। इस मामले में डिप्टी सीएमओ नोडल अधिकारी अवधेश सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बबुरा कलां निवासी शिकायकर्ता दिनेश सिंह के घर पहुंचकर नोटिस दिया और आठ अप्रैल को झोलाछाप द्वारा दवा इलाज किए जाने का साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा। नोडल अधिकारी अवधेश सिंह ने रतेह चौराहा स्थित चिरंजीव मेडिकल पर पहुंचकर मामले की जांच करते हुए झोलाछाप को नोटिस जारी की और सीएमओ कार्यालय में चिकित्सा संबंधी कागजातों के साथ प्रस्तुत होने के लिए कहा। वहीं दूसरी ओर झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने से नाराज पीड़िता के पिता दिनेश सिंह ने मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी से झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार लगाई है।

*नोडल अधिकारी की भूमिका संदिग्ध, कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति*

दिनेश सिंह ने नोडल अधिकारी द्वारा झोलाछाप के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नोडल अधिकारी अवधेश सिंह दो मिनट के लिए दोपहर बाद हमारे घर पर आए और नोटिस देते हुए घर की और मेरी फोटो खींचवा कर ले गए। आरोप लगाया कि नोडल अधिकारी ने मेरी बात सुनने के लिए समय नहीं दिया जबकि बेटी का किसी तरह से कर्ज लेकर दवा इलाज करा रहे हैं। युवती के पिता ने सीएम पोर्टल पर की गई शिकायत में झोलाछाप पर गलत दवा इलाज करने का आरोप लगाया था। शिकायत में आरोप लगाया था कि झोलाछाप के इलाज से बेटी की हालत गंभीर हो गई और 19 दिनों तक बीएचयू के न्यूरो विभाग में वेंटिलेटर पर पड़ी बेटी का चिकित्सकों ने दवा इलाज किया। इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि गलत दवा खाने से पुत्री की हालत गंभीर हुई है। इस संबंध में डिप्टी सीएमओ नोडल अधिकारी अवधेश सिंह ने बताया कि शिकायत पर मामले की जांच की गई है आरोपित मेडिकल स्टोर संचालक को नोटिस दी गई है। शिकायकर्ता को भी नोटिस देकर दवा इलाज किए जाने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मामले की जांच की जा रही है।


*पीड़ित पिता ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप*


जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के उपर कैसे व किस प्रकार से शिकायत होने पर कार्रवाई की जाती है, इसकी बानगी इसी घटना से देखा जा सकता है। बताया गया है कि पीड़ित पिता दिनेश जब बुधवार, 8 अप्रैल को निर्धारित तिथि को सीएमओ कार्यालय मीरजापुर अपना पक्ष रखने पहुंचे थे तो उनकी पीड़ा को सुनने के बजाए नोडल अधिकारी से लगाय सीएमओ द्वारा उन्हें ही डांट डपेट कर वहां से उन्हें चलता कर दिया गया। व्यथथित होकर दिनेश कुमार सिंह सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर देर शाम तक जिलाधिकारी कार्यालय पर अपनी पत्नी के साथ डटे रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि एनआईसी में मीटिंग के बाद जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने सीएमओ मीरजापुर को दिनेश सिंह की समस्या को सुनकर झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई के निर्देश दिए दिए, लेकिन सीएमओ साहब कार्रवाई को कौन कहें पीड़ित दम्पति को ही फटकार लगाने लगे कि सरकारी डाक्टर को हम देखते हैं, इसमें हम क्या कर सकते हैं।

आश्चर्य कि बात है पीड़ित पिता ने सम्पूर्ण मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर करने के साथ ही जिलाधिकारी से भी की है जिसपर जांच कर कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देशित किया जा चुका है बावजूद इसके तकरीबन डेढ़ माह बीतने को है इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
मेरठ के सेंट्रल मार्केट में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: 40 साल पुराना कारोबार ढहा, 44 भवन सील

मेरठ। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार का दिन इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया।सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुआ सीलिंग अभियान शाम 6 बजे तक चला। सात अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई की, जबकि पूरे इलाके को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बैरिकेड कर दिया गया था।

40 साल पुराना बाजार एक झटके में सील

सेंट्रल मार्केट में दशकों से चल रहे अस्पताल, स्कूल, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट और दर्जनों दुकानें इस कार्रवाई की जद में आ गईं। शुरुआती कार्रवाई में कई प्रतिष्ठानों पर सील लगाई गई, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया।एमपीजीएस गर्ल्स कॉलेज से शुरू हुई कार्रवाई धीरे-धीरे पूरे मार्केट में फैल गई। कुछ ही घंटों में अस्पतालों, क्लीनिकों, रेस्टोरेंट और कॉम्प्लेक्स पर ताले लग गए।

व्यापारियों और कर्मचारियों में कोहराम

सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कई जगहों पर व्यापारी और कर्मचारी रोते-बिलखते नजर आए। लोग अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाते रहे, लेकिन कार्रवाई जारी रही।कई व्यापारियों ने कहा कि वे 20 से 30 साल से यहां कारोबार कर रहे थे और अब अचानक सबकुछ खत्म हो गया। इससे करीब 40 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित होने का अनुमान है।

कोर्ट आदेश के तहत कार्रवाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन को लेकर यह कदम उठाया गया है।सीलिंग के दौरान कई कॉम्प्लेक्सों में व्यापारियों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी देखने को मिली। कुछ स्थानों पर तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में भेदभाव किया जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया।

स्कूल, अस्पताल और दुकानें भी बंद

इस अभियान में कई अस्पताल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल और कॉम्प्लेक्स भी सील कर दिए गए। इससे न सिर्फ व्यापार प्रभावित हुआ बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगारी की स्थिति में आ गए।कार्रवाई के बाद कई दुकानदारों और निवासियों ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बताया। उनका कहना था कि वे वर्षों से यहां रह और काम कर रहे थे, लेकिन अब सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया।सेंट्रल मार्केट में हुई यह कार्रवाई मेरठ के व्यापारिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जिसने हजारों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर डाला है।
लखनऊ समेत शहरों में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए नई एसओपी लागू, अब शहर के बड़े स्कूलों में एक साथ नहीं होगी छुट्टी
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इस व्यवस्था के तहत शहरों में यातायात को सुचारु बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय थानों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
पुलिस विभाग के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य प्रमुख मार्गों और चौराहों पर लगने वाले जाम को कम करना और आम लोगों की यात्रा को आसान बनाना है। इसके लिए 20 शहरों के 172 मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां विशेष रूप से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत व्यस्त चौराहों और तिराहों के आसपास 100 मीटर के दायरे को खाली रखने का निर्देश दिया गया है। इस क्षेत्र में वाहन खड़े करने या सवारियों को चढ़ाने-उतारने पर रोक रहेगी। इसके अलावा, अधिक भीड़ वाले स्थानों पर पीक समय के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। नो एंट्री का उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
साथ ही, सड़कों पर अतिक्रमण हटाने, आवश्यकतानुसार मार्गों को चौड़ा करने और कुछ मुख्य मार्गों को ई-रिक्शा मुक्त क्षेत्र घोषित करने जैसे कदम भी प्रस्तावित किए गए हैं।
ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए स्कूलों और दफ्तरों के समय में बदलाव का सुझाव भी दिया गया है। इसके तहत अलग-अलग संस्थानों के खुलने और बंद होने के समय में 15-15 मिनट का अंतर रखने की सिफारिश की गई है।
इस योजना के तहत किए गए सर्वे में यह सामने आया कि कई प्रमुख मार्गों पर पीक समय में यात्रा का समय सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है। बख्शी का तालाब से पॉलिटेक्निक मार्ग और अवध चौराहा से दुबग्गा मार्ग ऐसे ही प्रमुख उदाहरण हैं, जहां जाम की समस्या ज्यादा देखी जाती है।
पुलिस विभाग का कहना है कि इन उपायों को लागू करने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। फिलहाल संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस जांच में उनके पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है, जो उनकी ज्ञात आय के मुकाबले कई गुना ज्यादा बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से चंदौली जनपद के निवासी केशव लाल वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-34 में रह रहे हैं। वर्ष 2017 में जब उनकी तैनाती कानपुर में थी, उसी दौरान 19 अप्रैल को आयकर विभाग ने उनके आवास पर छापा मारा था। इस छापेमारी में करीब 10 करोड़ रुपये नकद और लगभग 3 करोड़ रुपये के आभूषण बरामद किए गए थे।
छापे के दौरान अधिकारियों को घर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर रखी गई नकदी मिली थी। गद्दों, पूजा कक्ष, अलमारियों के अलावा बाथरूम के बंद फ्लश और बेडरूम से भी नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं। पूछताछ के दौरान वह इस संपत्ति का संतोषजनक विवरण नहीं दे सके थे।
इस कार्रवाई के बाद मई 2017 में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी और पूरे मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई थी। विस्तृत जांच के दौरान यह सामने आया कि उनके पास आय से कई गुना अधिक संपत्ति है, जिसकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अनुमति मिलने पर अब विजिलेंस के कानपुर सेक्टर में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि केशव लाल के पास लखनऊ में दो संपत्तियां हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक संपत्ति मौजूद है, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है।
फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और विजिलेंस विभाग द्वारा संपत्तियों के स्रोत की गहन जांच की जा रही है।
पश्चिम यूपी में आतंकी मॉड्यूल का जाल, शामली के 6 युवक हिरासत में
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल से जुड़े नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम यूपी के कई युवक इस मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।
एटीएस की पूछताछ में शामली के छह युवकों के नाम सामने आने के बाद सभी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ये युवक सोशल मीडिया के माध्यम से मॉड्यूल और पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे।
दरअसल, एटीएस ने हाल ही में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर धमाका करने की साजिश रच रहे चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें मेरठ के साकिब और अरबाब, जबकि गौतमबुद्धनगर के लोकेश और विकास शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन आरोपियों से पूछताछ में पश्चिम यूपी के एक दर्जन से अधिक युवकों के इस मॉड्यूल से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इसके बाद एटीएस ने शामली के छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच तेज कर दी है।
फिलहाल एटीएस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। यदि पूछताछ और साक्ष्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित युवकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यूपी में डीजीपी का सख्त एक्शन: 5 थाना प्रभारी लाइन हाजिर, 2 डिप्टी एसपी पर जांच के आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कानून-व्यवस्था और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को लेकर बड़ा एक्शन लिया है। समीक्षा बैठक के दौरान डीजीपी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 5 थाना प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए, जबकि 2 डिप्टी एसपी (सीओ ट्रैफिक) के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

* वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक
पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर, एडीजी जोन, आईजी/डीआईजी रेंज और जिलों के एसएसपी/एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

* दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी बनी कार्रवाई की वजह
जिन थाना क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में अधिक वृद्धि दर्ज की गई, वहां के थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की गई है।

इन थाना प्रभारियों पर गिरी गाज:

* वाराणसी कमिश्नरेट–चोलापुर थाना प्रभारी दीपक कुमार

* गोरखपुर–कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह
कन्नौज–छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी
* बाराबंकी–रामसनेहीघाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला
* जौनपुर–सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह

इन अधिकारियों पर जांच के आदेश:
* बाराबंकी के सीओ ट्रैफिक आलोक कुमार पाठक
* जौनपुर के सीओ ट्रैफिक गिरेन्द्र कुमार सिंह
डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सरकार का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निषाद समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्री श्री शर्मा ने निषाद समाज की भूमिका और योगदान का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस के प्रसिद्ध केवट प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता भारतीय संस्कृति में सच्ची निष्ठा, भक्ति और आत्मीयता का अद्वितीय उदाहरण है। वनवास के कठिन समय में निषादराज द्वारा भगवान राम की सहायता, विशेष रूप से गंगा नदी पार कराने की घटना, यह दर्शाती है कि सच्चे संबंध जाति और वर्ग से ऊपर होते हैं। यह प्रसंग समाज को आपसी विश्वास, सहयोग और समानता का संदेश देता है।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी को समान अवसर और सम्मान मिल सके।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निषाद समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से अपने भविष्य को सशक्त बनाएं और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर रुद्रपुर, देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निषाद समाज की एकता, संघर्ष और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कृषि में वैल्यू एडिशन और तकनीक के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : केशव प्रसाद मौर्य
* एमिटी विवि में डिप्टी सीएम ने किया अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) विषय पर
“पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उप मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्र, पगड़ी (साफा) पहनाकर तथा एक पौधा सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने “Pathogens, Plant Health and Food Security” नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और प्रभावी विपणन से जुड़ा एक व्यापक विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश की सबसे उपजाऊ भूमि वाला प्रदेश है, जहां उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद फसलों के भंडारण की कमी, कोल्ड चेन की अपर्याप्त व्यवस्था तथा वैल्यू एडिशन के अभाव के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधिक उत्पादन होने पर भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो शोध और नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी तकनीकों का विकास करें, जिससे प्राकृतिक आपदाओं जैसे वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि अब समय क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर ध्यान देने का है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश में चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेल मार्ग या फिर हवाई मार्ग, इन सबके निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीब, किसान, युवा एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य उन्हें “लखपति दीदी” से आगे “करोड़पति दीदी” बनाना है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है तथा अब “एक जनपद, एक व्यंजन” के माध्यम से खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन बढ़ाकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार किसानों और किसानी के सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन (ए.एफ.ए.एफ), एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी (आईएसएमपीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वस्तरीय चर्चा और विचार-मंथन के लिए  प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।
डॉ. अशोक के. चौहान ने वर्चुवल रूप से जुड़ते हुये मुख्य अतिथि सहित सभी का स्वागत करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से जुड़े होने के नाते वे कृषि और किसानों की परेशानियों से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में विश्वभर के वरिष्ठ और स्थापित वैज्ञानिकों को एक साथ देखकर विश्वास मजबूत होता है कि भारत न केवल कृषि में बल्कि हर क्षेत्र में सुपर पावर बनकर रहेगा और एमिटी विश्वविद्यालय इसमें अपना हर प्रकार का सहयोग देगा।
डॉ. असीम चौहान ने अपने वर्चुवल सम्बोधन मे ग्रामीण विकास में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, मूल्य संवर्धन और ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग के महत्व को रेखांकित  किया और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम का सामना करने के उपायों पर  हमे और काम करना होगा।
प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने डॉ. अशोक के. चौहान एवं डॉ. असीम चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन, उभरती पादप बीमारियों तथा खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव जैसे वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सम्मेलन को ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग एवं नवाचार के लिए एक सशक्त मंच बताया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने जलवायु-लचीली कृषि प्राप्त करने में पादप स्वास्थ्य, रोगजनकों के प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सी. डी. मयी ने कृषि को किसान, रोगजनक कीटाणुओं और पर्यावरण के एक जटिल संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संतुलित एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा रासायनिक उपयोग पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान किया।
डॉ. एस. एस. चाहल ने कृषि परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए आक्रामक प्रजातियों, उभरते रोगजनकों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में जीनोमिक्स एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. (डॉ.) पोखर रावल ने इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती सदस्यता और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी शोध पत्रिका के वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. ललित महात्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए शैक्षणिक जीवन में मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजों के माध्यम से वायरस संचरण के प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से पारंपरिक धारणाओं की पुनर्समीक्षा करने का आह्वान किया।
डॉ. डी. आर. सिंह ने भारत की कृषि विविधता, विशेषकर बिहार के मखाना, आम और लीची जैसे उत्पादों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने खाद्य पर्याप्तता से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कीटनाशकों के अवशेष और माइकोटॉक्सिन प्रदूषण के खतरों को उजागर किया।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक उत्कृष्टता का उत्सव भी मनाया गया, जिसमें विशिष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष उपलब्धि पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए।
प्रति कुलपति एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, एमेरिटस प्रेसिडेंट आईएसएमपीपी डॉ. एस. एस. चाहल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ‘कॉटन मैन’ के नाम से विख्यात, प्रेसिडेंट साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, नई दिल्ली, डॉ. सी. डी. मयी, सचिव आईएसएमपीपी प्रो. (डॉ.) पोखर रावल, अध्यक्ष आईएसएमपीपी डॉ. ललित महात्मा, कुलपति बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी डॉ. डी. आर. सिंह और सम्मेलन की आयोजन सचिव एवं निदेशक, एएफएएफ, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ परिसर, प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने  सम्मेलन मे औपचारिकरुप सै भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडर प्रेसिडेंट, एमिटी एजुकेशन ग्रुप, रितनंद बलवेद एजुकेशन फाउंडेशन, डॉ. अशोक के. चौहान, और चेयरमैन एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ कैंपस डॉ. असीम चौहान ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
विष्णुगढ़ के बनासो बुध बाजार में भीषण आंधी-तूफान का कहर, बिजली पोल गिरने से महिला की दर्दनाक मौत

हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत बनासो बुध बाजार में आई भीषण आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दी। ग्राम बकसपुरा निवासी सोहगी देवी, जो हाट-बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं, इस प्राकृतिक आपदा की शिकार हो गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक तेज आंधी और तूफान के बीच एक बिजली का पोल गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से सोहगी देवी की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं किस तरह गरीब और मेहनतकश लोगों पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं।

शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों  का समावेश राष्ट्र के उज्जवल भविष्य की आधारशिला : डॉ नीरजा माधव

सुल्तानपुर। जनपद के ग्राम बीबीपुर तिवारी स्थित नारायण ज्ञान धाम में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं मेधावी छात्र सम्मान समारोह बेहद गरिमामय और प्रेरणादायी माहौल में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा के सुंदर समन्वय का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. नीरजा माधव द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों का समावेश ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
अध्यक्षता करते हुए डा. सुशील कुमार पाण्डेय ‘साहित्येन्दु’ ने चरित्र निर्माण आधारित शिक्षा को छात्रों के समग्र विकास का मूल बताया, वहीं डा. इन्दुशेखर उपाध्याय ने जीवन में नैतिकता, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। समारोह को सम्बोधित करते हुए उदयभान सिंह (पूर्व प्रधानाचार्य) ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। संस्कार ही शिक्षा को सार्थक बनाते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करते हैं। अंजनी कुमार सिंह (पट्टी, प्रतापगढ़) ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मनुष्य को आगे बढ़ने की दिशा देती है, जबकि संस्कार उसे सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं। दोनों का संतुलन ही जीवन को सफल बनाता है। पूर्व प्रवक्ता रामलाल गुप्ता ने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यवहार में दिखे। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही समाज में नैतिकता, अनुशासन और सद्भावना का विकास होता है। संस्थापक पूर्व आईजी बी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला है, जहां बच्चों में अनुशासन, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में चांदनी तिवारी की सरस्वती वंदना ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर आयोजित सामान्य ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए और 41 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रतिभा यादव, रिया गुप्ता, आदर्श यादव, श्रेया, वैभव सिंह, आयुष श्रीवास्तव सहित अनेक छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथियों, अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं के सम्मान का मंच बना, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश भी दे गया।
अजब डाक्टर की गज़ब कहानी, चक्कर आने पर दे दी पागलों वाली दवा, जानकर बीएचयू वाराणसी के भी डाक्टरों के उड़े होश
*झोलाछाप डॉक्टर पर बेटी को गलत दवा देने का पिता ने लगाया आरोप, कार्रवाई की लगाई गुहार

मीरजापुर। यूपी के मीरजापुर जिले से झोलाछाप डॉक्टर से जुड़ी हुई एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जिसे जानकर ख़ुद बीएचयू वाराणसी के भी डाक्टर सकते में हैं, कि आख़िरकार इतनी बड़ी लापरवाही भला कैसे? मामला, सिर्फ झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही ही नहीं बल्कि शिकायत करने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई का ना होना भी पूरे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मुलाजिमों को कटघरे में खड़े करने के लिए काफी है।

पूरा मामला मीरजापुर जिले के ड्रमंडगंज थाना क्षेत्र के बबुरा कलां गांव से जुड़ा हुआ है जहां के निवासी दिनेश सिंह ने क्षेत्र के रतेह चौराहा स्थित एक झोलाछाप पर बेटी को गलत दवा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने पिछले दिनों सीएम पोर्टल पर प्रार्थना पत्र देकर झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार भी लगाई है। दिए गए प्रार्थना पत्र में दिनेश सिंह आरोप लगाया कि कि गत 20 फरवरी 2026 को अपनी 18 वर्षीया पुत्री स्वचाली सिंह को चक्कर आने पर क्षेत्र के देवरी उत्तर गांव स्थित रतेह चौराहा पर 'चिरंजीवी क्लीनिक' में दिखाया तो झोलाछाप डॉक्टर ने पुत्री को एक सप्ताह की दवा खाने के लिए दी। झोलाछाप द्वारा दी गई दवा को बेटी ने खाया तो चार दिन बाद बेटी घर पर गश खाकर गिर पड़ी और उसे चलने में दिक्कत होने लगी। बेटी की दिमागी हालत विक्षिप्त जैसी हो गई। हालत गंभीर देखकर बेटी को उन्होंने मीरजापुर मंडलीय चिकित्सालय ले जाकर दिखाया। जहां चिकित्सक ने बेटी की हालत गंभीर देखते हुए 27 फरवरी को वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। जहां पुत्री का 19 दिनों तक इलाज चला। *बेटी का इलाज कर रहे बीएचयू ट्रामा सेंटर के न्यूरो विभाग के चिकित्सकों ने बताया कि गलत दवा खाने की वजह से बेटी की ऐसी हालत हुई है।*
बताया कि*यह दवा पागलों के इलाज में दी जाती है।* बेटी को चलने फिरने में दिक्कत हो रही है और उसकी याददाश्त में सुधार नही हो पा रहा है। आरोप लगाया कि उक्त झोलाछाप बिना किसी चिकित्सा डिग्री व बगैर लाइसेंस के क्लीनिक खोलकर चला रहा है। भोली भाली जनता का गलत दवा इलाज कर उनकी सेहत और जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। दिनेश सिंह ने बेटी की हालत के लिए झोलाछाप को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी हलिया डाक्टर अवधेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। झोलाछाप और अवैध रूप से क्लीनिक संचालित करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


*झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई के लिए सीएम, डीएम से लगाई गुहार*


पीड़िता के पिता दिनेश सिंह ने बेटी का गलत दवा इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार लगाई है। दिनेश सिंह ने गत 27 मार्च को सीएम पोर्टल पर झोलाछाप की शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। इस मामले में डिप्टी सीएमओ नोडल अधिकारी अवधेश सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बबुरा कलां निवासी शिकायकर्ता दिनेश सिंह के घर पहुंचकर नोटिस दिया और आठ अप्रैल को झोलाछाप द्वारा दवा इलाज किए जाने का साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा। नोडल अधिकारी अवधेश सिंह ने रतेह चौराहा स्थित चिरंजीव मेडिकल पर पहुंचकर मामले की जांच करते हुए झोलाछाप को नोटिस जारी की और सीएमओ कार्यालय में चिकित्सा संबंधी कागजातों के साथ प्रस्तुत होने के लिए कहा। वहीं दूसरी ओर झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने से नाराज पीड़िता के पिता दिनेश सिंह ने मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी से झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार लगाई है।

*नोडल अधिकारी की भूमिका संदिग्ध, कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति*

दिनेश सिंह ने नोडल अधिकारी द्वारा झोलाछाप के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नोडल अधिकारी अवधेश सिंह दो मिनट के लिए दोपहर बाद हमारे घर पर आए और नोटिस देते हुए घर की और मेरी फोटो खींचवा कर ले गए। आरोप लगाया कि नोडल अधिकारी ने मेरी बात सुनने के लिए समय नहीं दिया जबकि बेटी का किसी तरह से कर्ज लेकर दवा इलाज करा रहे हैं। युवती के पिता ने सीएम पोर्टल पर की गई शिकायत में झोलाछाप पर गलत दवा इलाज करने का आरोप लगाया था। शिकायत में आरोप लगाया था कि झोलाछाप के इलाज से बेटी की हालत गंभीर हो गई और 19 दिनों तक बीएचयू के न्यूरो विभाग में वेंटिलेटर पर पड़ी बेटी का चिकित्सकों ने दवा इलाज किया। इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि गलत दवा खाने से पुत्री की हालत गंभीर हुई है। इस संबंध में डिप्टी सीएमओ नोडल अधिकारी अवधेश सिंह ने बताया कि शिकायत पर मामले की जांच की गई है आरोपित मेडिकल स्टोर संचालक को नोटिस दी गई है। शिकायकर्ता को भी नोटिस देकर दवा इलाज किए जाने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मामले की जांच की जा रही है।


*पीड़ित पिता ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप*


जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के उपर कैसे व किस प्रकार से शिकायत होने पर कार्रवाई की जाती है, इसकी बानगी इसी घटना से देखा जा सकता है। बताया गया है कि पीड़ित पिता दिनेश जब बुधवार, 8 अप्रैल को निर्धारित तिथि को सीएमओ कार्यालय मीरजापुर अपना पक्ष रखने पहुंचे थे तो उनकी पीड़ा को सुनने के बजाए नोडल अधिकारी से लगाय सीएमओ द्वारा उन्हें ही डांट डपेट कर वहां से उन्हें चलता कर दिया गया। व्यथथित होकर दिनेश कुमार सिंह सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर देर शाम तक जिलाधिकारी कार्यालय पर अपनी पत्नी के साथ डटे रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि एनआईसी में मीटिंग के बाद जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने सीएमओ मीरजापुर को दिनेश सिंह की समस्या को सुनकर झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई के निर्देश दिए दिए, लेकिन सीएमओ साहब कार्रवाई को कौन कहें पीड़ित दम्पति को ही फटकार लगाने लगे कि सरकारी डाक्टर को हम देखते हैं, इसमें हम क्या कर सकते हैं।

आश्चर्य कि बात है पीड़ित पिता ने सम्पूर्ण मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर करने के साथ ही जिलाधिकारी से भी की है जिसपर जांच कर कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देशित किया जा चुका है बावजूद इसके तकरीबन डेढ़ माह बीतने को है इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
मेरठ के सेंट्रल मार्केट में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: 40 साल पुराना कारोबार ढहा, 44 भवन सील

मेरठ। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार का दिन इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया।सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुआ सीलिंग अभियान शाम 6 बजे तक चला। सात अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई की, जबकि पूरे इलाके को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बैरिकेड कर दिया गया था।

40 साल पुराना बाजार एक झटके में सील

सेंट्रल मार्केट में दशकों से चल रहे अस्पताल, स्कूल, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट और दर्जनों दुकानें इस कार्रवाई की जद में आ गईं। शुरुआती कार्रवाई में कई प्रतिष्ठानों पर सील लगाई गई, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया।एमपीजीएस गर्ल्स कॉलेज से शुरू हुई कार्रवाई धीरे-धीरे पूरे मार्केट में फैल गई। कुछ ही घंटों में अस्पतालों, क्लीनिकों, रेस्टोरेंट और कॉम्प्लेक्स पर ताले लग गए।

व्यापारियों और कर्मचारियों में कोहराम

सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कई जगहों पर व्यापारी और कर्मचारी रोते-बिलखते नजर आए। लोग अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाते रहे, लेकिन कार्रवाई जारी रही।कई व्यापारियों ने कहा कि वे 20 से 30 साल से यहां कारोबार कर रहे थे और अब अचानक सबकुछ खत्म हो गया। इससे करीब 40 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित होने का अनुमान है।

कोर्ट आदेश के तहत कार्रवाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन को लेकर यह कदम उठाया गया है।सीलिंग के दौरान कई कॉम्प्लेक्सों में व्यापारियों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी देखने को मिली। कुछ स्थानों पर तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में भेदभाव किया जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया।

स्कूल, अस्पताल और दुकानें भी बंद

इस अभियान में कई अस्पताल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल और कॉम्प्लेक्स भी सील कर दिए गए। इससे न सिर्फ व्यापार प्रभावित हुआ बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगारी की स्थिति में आ गए।कार्रवाई के बाद कई दुकानदारों और निवासियों ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बताया। उनका कहना था कि वे वर्षों से यहां रह और काम कर रहे थे, लेकिन अब सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया।सेंट्रल मार्केट में हुई यह कार्रवाई मेरठ के व्यापारिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जिसने हजारों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर डाला है।
लखनऊ समेत शहरों में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए नई एसओपी लागू, अब शहर के बड़े स्कूलों में एक साथ नहीं होगी छुट्टी
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इस व्यवस्था के तहत शहरों में यातायात को सुचारु बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय थानों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
पुलिस विभाग के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य प्रमुख मार्गों और चौराहों पर लगने वाले जाम को कम करना और आम लोगों की यात्रा को आसान बनाना है। इसके लिए 20 शहरों के 172 मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां विशेष रूप से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत व्यस्त चौराहों और तिराहों के आसपास 100 मीटर के दायरे को खाली रखने का निर्देश दिया गया है। इस क्षेत्र में वाहन खड़े करने या सवारियों को चढ़ाने-उतारने पर रोक रहेगी। इसके अलावा, अधिक भीड़ वाले स्थानों पर पीक समय के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। नो एंट्री का उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
साथ ही, सड़कों पर अतिक्रमण हटाने, आवश्यकतानुसार मार्गों को चौड़ा करने और कुछ मुख्य मार्गों को ई-रिक्शा मुक्त क्षेत्र घोषित करने जैसे कदम भी प्रस्तावित किए गए हैं।
ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए स्कूलों और दफ्तरों के समय में बदलाव का सुझाव भी दिया गया है। इसके तहत अलग-अलग संस्थानों के खुलने और बंद होने के समय में 15-15 मिनट का अंतर रखने की सिफारिश की गई है।
इस योजना के तहत किए गए सर्वे में यह सामने आया कि कई प्रमुख मार्गों पर पीक समय में यात्रा का समय सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है। बख्शी का तालाब से पॉलिटेक्निक मार्ग और अवध चौराहा से दुबग्गा मार्ग ऐसे ही प्रमुख उदाहरण हैं, जहां जाम की समस्या ज्यादा देखी जाती है।
पुलिस विभाग का कहना है कि इन उपायों को लागू करने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। फिलहाल संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस जांच में उनके पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है, जो उनकी ज्ञात आय के मुकाबले कई गुना ज्यादा बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से चंदौली जनपद के निवासी केशव लाल वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-34 में रह रहे हैं। वर्ष 2017 में जब उनकी तैनाती कानपुर में थी, उसी दौरान 19 अप्रैल को आयकर विभाग ने उनके आवास पर छापा मारा था। इस छापेमारी में करीब 10 करोड़ रुपये नकद और लगभग 3 करोड़ रुपये के आभूषण बरामद किए गए थे।
छापे के दौरान अधिकारियों को घर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर रखी गई नकदी मिली थी। गद्दों, पूजा कक्ष, अलमारियों के अलावा बाथरूम के बंद फ्लश और बेडरूम से भी नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं। पूछताछ के दौरान वह इस संपत्ति का संतोषजनक विवरण नहीं दे सके थे।
इस कार्रवाई के बाद मई 2017 में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी और पूरे मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई थी। विस्तृत जांच के दौरान यह सामने आया कि उनके पास आय से कई गुना अधिक संपत्ति है, जिसकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अनुमति मिलने पर अब विजिलेंस के कानपुर सेक्टर में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि केशव लाल के पास लखनऊ में दो संपत्तियां हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक संपत्ति मौजूद है, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है।
फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और विजिलेंस विभाग द्वारा संपत्तियों के स्रोत की गहन जांच की जा रही है।
पश्चिम यूपी में आतंकी मॉड्यूल का जाल, शामली के 6 युवक हिरासत में
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल से जुड़े नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम यूपी के कई युवक इस मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।
एटीएस की पूछताछ में शामली के छह युवकों के नाम सामने आने के बाद सभी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ये युवक सोशल मीडिया के माध्यम से मॉड्यूल और पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे।
दरअसल, एटीएस ने हाल ही में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर धमाका करने की साजिश रच रहे चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें मेरठ के साकिब और अरबाब, जबकि गौतमबुद्धनगर के लोकेश और विकास शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन आरोपियों से पूछताछ में पश्चिम यूपी के एक दर्जन से अधिक युवकों के इस मॉड्यूल से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इसके बाद एटीएस ने शामली के छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच तेज कर दी है।
फिलहाल एटीएस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। यदि पूछताछ और साक्ष्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित युवकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यूपी में डीजीपी का सख्त एक्शन: 5 थाना प्रभारी लाइन हाजिर, 2 डिप्टी एसपी पर जांच के आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कानून-व्यवस्था और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को लेकर बड़ा एक्शन लिया है। समीक्षा बैठक के दौरान डीजीपी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 5 थाना प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए, जबकि 2 डिप्टी एसपी (सीओ ट्रैफिक) के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

* वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक
पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर, एडीजी जोन, आईजी/डीआईजी रेंज और जिलों के एसएसपी/एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

* दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी बनी कार्रवाई की वजह
जिन थाना क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में अधिक वृद्धि दर्ज की गई, वहां के थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की गई है।

इन थाना प्रभारियों पर गिरी गाज:

* वाराणसी कमिश्नरेट–चोलापुर थाना प्रभारी दीपक कुमार

* गोरखपुर–कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह
कन्नौज–छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी
* बाराबंकी–रामसनेहीघाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला
* जौनपुर–सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह

इन अधिकारियों पर जांच के आदेश:
* बाराबंकी के सीओ ट्रैफिक आलोक कुमार पाठक
* जौनपुर के सीओ ट्रैफिक गिरेन्द्र कुमार सिंह
डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सरकार का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निषाद समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्री श्री शर्मा ने निषाद समाज की भूमिका और योगदान का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस के प्रसिद्ध केवट प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता भारतीय संस्कृति में सच्ची निष्ठा, भक्ति और आत्मीयता का अद्वितीय उदाहरण है। वनवास के कठिन समय में निषादराज द्वारा भगवान राम की सहायता, विशेष रूप से गंगा नदी पार कराने की घटना, यह दर्शाती है कि सच्चे संबंध जाति और वर्ग से ऊपर होते हैं। यह प्रसंग समाज को आपसी विश्वास, सहयोग और समानता का संदेश देता है।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी को समान अवसर और सम्मान मिल सके।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निषाद समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से अपने भविष्य को सशक्त बनाएं और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर रुद्रपुर, देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निषाद समाज की एकता, संघर्ष और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कृषि में वैल्यू एडिशन और तकनीक के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : केशव प्रसाद मौर्य
* एमिटी विवि में डिप्टी सीएम ने किया अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) विषय पर
“पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उप मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्र, पगड़ी (साफा) पहनाकर तथा एक पौधा सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने “Pathogens, Plant Health and Food Security” नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और प्रभावी विपणन से जुड़ा एक व्यापक विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश की सबसे उपजाऊ भूमि वाला प्रदेश है, जहां उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद फसलों के भंडारण की कमी, कोल्ड चेन की अपर्याप्त व्यवस्था तथा वैल्यू एडिशन के अभाव के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधिक उत्पादन होने पर भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो शोध और नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी तकनीकों का विकास करें, जिससे प्राकृतिक आपदाओं जैसे वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि अब समय क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर ध्यान देने का है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश में चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेल मार्ग या फिर हवाई मार्ग, इन सबके निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीब, किसान, युवा एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य उन्हें “लखपति दीदी” से आगे “करोड़पति दीदी” बनाना है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है तथा अब “एक जनपद, एक व्यंजन” के माध्यम से खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन बढ़ाकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार किसानों और किसानी के सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन (ए.एफ.ए.एफ), एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी (आईएसएमपीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वस्तरीय चर्चा और विचार-मंथन के लिए  प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।
डॉ. अशोक के. चौहान ने वर्चुवल रूप से जुड़ते हुये मुख्य अतिथि सहित सभी का स्वागत करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से जुड़े होने के नाते वे कृषि और किसानों की परेशानियों से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में विश्वभर के वरिष्ठ और स्थापित वैज्ञानिकों को एक साथ देखकर विश्वास मजबूत होता है कि भारत न केवल कृषि में बल्कि हर क्षेत्र में सुपर पावर बनकर रहेगा और एमिटी विश्वविद्यालय इसमें अपना हर प्रकार का सहयोग देगा।
डॉ. असीम चौहान ने अपने वर्चुवल सम्बोधन मे ग्रामीण विकास में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, मूल्य संवर्धन और ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग के महत्व को रेखांकित  किया और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम का सामना करने के उपायों पर  हमे और काम करना होगा।
प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने डॉ. अशोक के. चौहान एवं डॉ. असीम चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन, उभरती पादप बीमारियों तथा खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव जैसे वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सम्मेलन को ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग एवं नवाचार के लिए एक सशक्त मंच बताया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने जलवायु-लचीली कृषि प्राप्त करने में पादप स्वास्थ्य, रोगजनकों के प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सी. डी. मयी ने कृषि को किसान, रोगजनक कीटाणुओं और पर्यावरण के एक जटिल संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संतुलित एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा रासायनिक उपयोग पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान किया।
डॉ. एस. एस. चाहल ने कृषि परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए आक्रामक प्रजातियों, उभरते रोगजनकों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में जीनोमिक्स एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. (डॉ.) पोखर रावल ने इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती सदस्यता और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी शोध पत्रिका के वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. ललित महात्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए शैक्षणिक जीवन में मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजों के माध्यम से वायरस संचरण के प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से पारंपरिक धारणाओं की पुनर्समीक्षा करने का आह्वान किया।
डॉ. डी. आर. सिंह ने भारत की कृषि विविधता, विशेषकर बिहार के मखाना, आम और लीची जैसे उत्पादों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने खाद्य पर्याप्तता से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कीटनाशकों के अवशेष और माइकोटॉक्सिन प्रदूषण के खतरों को उजागर किया।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक उत्कृष्टता का उत्सव भी मनाया गया, जिसमें विशिष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष उपलब्धि पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए।
प्रति कुलपति एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, एमेरिटस प्रेसिडेंट आईएसएमपीपी डॉ. एस. एस. चाहल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ‘कॉटन मैन’ के नाम से विख्यात, प्रेसिडेंट साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, नई दिल्ली, डॉ. सी. डी. मयी, सचिव आईएसएमपीपी प्रो. (डॉ.) पोखर रावल, अध्यक्ष आईएसएमपीपी डॉ. ललित महात्मा, कुलपति बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी डॉ. डी. आर. सिंह और सम्मेलन की आयोजन सचिव एवं निदेशक, एएफएएफ, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ परिसर, प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने  सम्मेलन मे औपचारिकरुप सै भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडर प्रेसिडेंट, एमिटी एजुकेशन ग्रुप, रितनंद बलवेद एजुकेशन फाउंडेशन, डॉ. अशोक के. चौहान, और चेयरमैन एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ कैंपस डॉ. असीम चौहान ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
विष्णुगढ़ के बनासो बुध बाजार में भीषण आंधी-तूफान का कहर, बिजली पोल गिरने से महिला की दर्दनाक मौत

हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत बनासो बुध बाजार में आई भीषण आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दी। ग्राम बकसपुरा निवासी सोहगी देवी, जो हाट-बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं, इस प्राकृतिक आपदा की शिकार हो गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक तेज आंधी और तूफान के बीच एक बिजली का पोल गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से सोहगी देवी की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं किस तरह गरीब और मेहनतकश लोगों पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं।

शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों  का समावेश राष्ट्र के उज्जवल भविष्य की आधारशिला : डॉ नीरजा माधव

सुल्तानपुर। जनपद के ग्राम बीबीपुर तिवारी स्थित नारायण ज्ञान धाम में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं मेधावी छात्र सम्मान समारोह बेहद गरिमामय और प्रेरणादायी माहौल में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा के सुंदर समन्वय का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. नीरजा माधव द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों का समावेश ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
अध्यक्षता करते हुए डा. सुशील कुमार पाण्डेय ‘साहित्येन्दु’ ने चरित्र निर्माण आधारित शिक्षा को छात्रों के समग्र विकास का मूल बताया, वहीं डा. इन्दुशेखर उपाध्याय ने जीवन में नैतिकता, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। समारोह को सम्बोधित करते हुए उदयभान सिंह (पूर्व प्रधानाचार्य) ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। संस्कार ही शिक्षा को सार्थक बनाते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करते हैं। अंजनी कुमार सिंह (पट्टी, प्रतापगढ़) ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मनुष्य को आगे बढ़ने की दिशा देती है, जबकि संस्कार उसे सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं। दोनों का संतुलन ही जीवन को सफल बनाता है। पूर्व प्रवक्ता रामलाल गुप्ता ने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यवहार में दिखे। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही समाज में नैतिकता, अनुशासन और सद्भावना का विकास होता है। संस्थापक पूर्व आईजी बी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला है, जहां बच्चों में अनुशासन, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में चांदनी तिवारी की सरस्वती वंदना ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर आयोजित सामान्य ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए और 41 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रतिभा यादव, रिया गुप्ता, आदर्श यादव, श्रेया, वैभव सिंह, आयुष श्रीवास्तव सहित अनेक छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथियों, अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं के सम्मान का मंच बना, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश भी दे गया।