हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सरकार का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निषाद समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्री श्री शर्मा ने निषाद समाज की भूमिका और योगदान का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस के प्रसिद्ध केवट प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता भारतीय संस्कृति में सच्ची निष्ठा, भक्ति और आत्मीयता का अद्वितीय उदाहरण है। वनवास के कठिन समय में निषादराज द्वारा भगवान राम की सहायता, विशेष रूप से गंगा नदी पार कराने की घटना, यह दर्शाती है कि सच्चे संबंध जाति और वर्ग से ऊपर होते हैं। यह प्रसंग समाज को आपसी विश्वास, सहयोग और समानता का संदेश देता है।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी को समान अवसर और सम्मान मिल सके।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निषाद समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से अपने भविष्य को सशक्त बनाएं और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर रुद्रपुर, देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निषाद समाज की एकता, संघर्ष और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कृषि में वैल्यू एडिशन और तकनीक के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : केशव प्रसाद मौर्य
* एमिटी विवि में डिप्टी सीएम ने किया अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) विषय पर
“पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उप मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्र, पगड़ी (साफा) पहनाकर तथा एक पौधा सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने “Pathogens, Plant Health and Food Security” नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और प्रभावी विपणन से जुड़ा एक व्यापक विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश की सबसे उपजाऊ भूमि वाला प्रदेश है, जहां उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद फसलों के भंडारण की कमी, कोल्ड चेन की अपर्याप्त व्यवस्था तथा वैल्यू एडिशन के अभाव के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधिक उत्पादन होने पर भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो शोध और नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी तकनीकों का विकास करें, जिससे प्राकृतिक आपदाओं जैसे वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि अब समय क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर ध्यान देने का है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश में चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेल मार्ग या फिर हवाई मार्ग, इन सबके निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीब, किसान, युवा एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य उन्हें “लखपति दीदी” से आगे “करोड़पति दीदी” बनाना है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है तथा अब “एक जनपद, एक व्यंजन” के माध्यम से खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन बढ़ाकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार किसानों और किसानी के सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन (ए.एफ.ए.एफ), एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी (आईएसएमपीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वस्तरीय चर्चा और विचार-मंथन के लिए  प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।
डॉ. अशोक के. चौहान ने वर्चुवल रूप से जुड़ते हुये मुख्य अतिथि सहित सभी का स्वागत करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से जुड़े होने के नाते वे कृषि और किसानों की परेशानियों से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में विश्वभर के वरिष्ठ और स्थापित वैज्ञानिकों को एक साथ देखकर विश्वास मजबूत होता है कि भारत न केवल कृषि में बल्कि हर क्षेत्र में सुपर पावर बनकर रहेगा और एमिटी विश्वविद्यालय इसमें अपना हर प्रकार का सहयोग देगा।
डॉ. असीम चौहान ने अपने वर्चुवल सम्बोधन मे ग्रामीण विकास में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, मूल्य संवर्धन और ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग के महत्व को रेखांकित  किया और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम का सामना करने के उपायों पर  हमे और काम करना होगा।
प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने डॉ. अशोक के. चौहान एवं डॉ. असीम चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन, उभरती पादप बीमारियों तथा खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव जैसे वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सम्मेलन को ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग एवं नवाचार के लिए एक सशक्त मंच बताया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने जलवायु-लचीली कृषि प्राप्त करने में पादप स्वास्थ्य, रोगजनकों के प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सी. डी. मयी ने कृषि को किसान, रोगजनक कीटाणुओं और पर्यावरण के एक जटिल संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संतुलित एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा रासायनिक उपयोग पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान किया।
डॉ. एस. एस. चाहल ने कृषि परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए आक्रामक प्रजातियों, उभरते रोगजनकों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में जीनोमिक्स एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. (डॉ.) पोखर रावल ने इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती सदस्यता और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी शोध पत्रिका के वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. ललित महात्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए शैक्षणिक जीवन में मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजों के माध्यम से वायरस संचरण के प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से पारंपरिक धारणाओं की पुनर्समीक्षा करने का आह्वान किया।
डॉ. डी. आर. सिंह ने भारत की कृषि विविधता, विशेषकर बिहार के मखाना, आम और लीची जैसे उत्पादों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने खाद्य पर्याप्तता से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कीटनाशकों के अवशेष और माइकोटॉक्सिन प्रदूषण के खतरों को उजागर किया।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक उत्कृष्टता का उत्सव भी मनाया गया, जिसमें विशिष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष उपलब्धि पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए।
प्रति कुलपति एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, एमेरिटस प्रेसिडेंट आईएसएमपीपी डॉ. एस. एस. चाहल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ‘कॉटन मैन’ के नाम से विख्यात, प्रेसिडेंट साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, नई दिल्ली, डॉ. सी. डी. मयी, सचिव आईएसएमपीपी प्रो. (डॉ.) पोखर रावल, अध्यक्ष आईएसएमपीपी डॉ. ललित महात्मा, कुलपति बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी डॉ. डी. आर. सिंह और सम्मेलन की आयोजन सचिव एवं निदेशक, एएफएएफ, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ परिसर, प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने  सम्मेलन मे औपचारिकरुप सै भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडर प्रेसिडेंट, एमिटी एजुकेशन ग्रुप, रितनंद बलवेद एजुकेशन फाउंडेशन, डॉ. अशोक के. चौहान, और चेयरमैन एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ कैंपस डॉ. असीम चौहान ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
विष्णुगढ़ के बनासो बुध बाजार में भीषण आंधी-तूफान का कहर, बिजली पोल गिरने से महिला की दर्दनाक मौत

हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत बनासो बुध बाजार में आई भीषण आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दी। ग्राम बकसपुरा निवासी सोहगी देवी, जो हाट-बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं, इस प्राकृतिक आपदा की शिकार हो गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक तेज आंधी और तूफान के बीच एक बिजली का पोल गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से सोहगी देवी की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं किस तरह गरीब और मेहनतकश लोगों पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं।

शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों  का समावेश राष्ट्र के उज्जवल भविष्य की आधारशिला : डॉ नीरजा माधव

सुल्तानपुर। जनपद के ग्राम बीबीपुर तिवारी स्थित नारायण ज्ञान धाम में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं मेधावी छात्र सम्मान समारोह बेहद गरिमामय और प्रेरणादायी माहौल में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा के सुंदर समन्वय का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. नीरजा माधव द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों का समावेश ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
अध्यक्षता करते हुए डा. सुशील कुमार पाण्डेय ‘साहित्येन्दु’ ने चरित्र निर्माण आधारित शिक्षा को छात्रों के समग्र विकास का मूल बताया, वहीं डा. इन्दुशेखर उपाध्याय ने जीवन में नैतिकता, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। समारोह को सम्बोधित करते हुए उदयभान सिंह (पूर्व प्रधानाचार्य) ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। संस्कार ही शिक्षा को सार्थक बनाते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करते हैं। अंजनी कुमार सिंह (पट्टी, प्रतापगढ़) ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मनुष्य को आगे बढ़ने की दिशा देती है, जबकि संस्कार उसे सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं। दोनों का संतुलन ही जीवन को सफल बनाता है। पूर्व प्रवक्ता रामलाल गुप्ता ने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यवहार में दिखे। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही समाज में नैतिकता, अनुशासन और सद्भावना का विकास होता है। संस्थापक पूर्व आईजी बी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला है, जहां बच्चों में अनुशासन, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में चांदनी तिवारी की सरस्वती वंदना ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर आयोजित सामान्य ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए और 41 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रतिभा यादव, रिया गुप्ता, आदर्श यादव, श्रेया, वैभव सिंह, आयुष श्रीवास्तव सहित अनेक छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथियों, अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं के सम्मान का मंच बना, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश भी दे गया।
इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों में वृद्धि

*पंखा - कूलर और एसी के मूल्य में दिख रहा 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा, दुकानदार - ग्राहक हैं परेशान*


रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका-ईरान युद्ध की तीव्रता हर दिन बढ़ती जा रही है। वहीं इसकी मार से इलेक्ट्रानिक सामानों के दाम आसमान छूने लगे हैं। गैस सिलेंडर किल्लत से उपभोक्ता जूझ ही रहे थे कि अब इलेक्ट्रानिक उपकरणों और सामानों के दाम में भी पंद्रह से तीस प्रतिशत तक इजाफा हो गया है। लगन में इलेक्ट्रानिक सामान के दाम बढ़ने से लोगों की दिक्कत काफी बढ़ गई है। वहीं गर्मी का मौसम होने से पंखा-कूलर और एसी जैसे इलेक्ट्रानिक सामानों की भारी मांग है। वहीं दाम बढ़ जाने से लोगों की काफी फजीहत हो गई है। आगे महंगाई कितनी बढ़ेगी यह आम नागरिक समझ नहीं पा रहे हैं।
जिले के कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों इलेक्ट्रानिक सामानों के दाम में पंद्रह से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसी, इंडक्शन, पंखा, कूलर, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन समेत अन्य सामान महंगे हो गए हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध अब भारतीय इलेक्ट्रानिक बाजार को प्रभावित करने लगा है। कच्चे माल (प्लास्टिक, मेटल) और चिप्स की कीमतें आसमान छूने से इंडक्शन, चूल्हा कीमत करीब डेढ़ गुना ज्यादा हो गया है।नगर पंचायत ज्ञानपुर के इलेक्ट्रानिक कारोबारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जो पंखा एक हजार में बिक रहा था वह युद्ध के चलते इस साल 13 सौ रुपये प्रति पीस बिक रहा है। केबिल 12 सौ रुपये से बढ़कर 15 सौ रुपये प्रति बंडल हो गया है। कूलर छह हजार से सात हजार रुपये और बैटरी 12 हजार से बढ़कर 13 हजार रुपये प्रति पीस हो गया है। मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि इलेक्ट्रानिक सामानों के दाम एक अप्रैल तक बढ़ गए हैं। जो तार पांच सौ रुपया बंडल हम लोग बिक्री करते थे वह अब साढ़े छह से सात सौ रुपया हो गया है। दो देश के बीच चल रहा तनाव हर क्षेत्र में अर्थ व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। गर्मी का सितम बढ़ने लगा है। ऐसे में कूलर-एसी और पंखा, फ्रिज लेने वालों की चिंता बढ़ने लगी है। रसोई गैस सिलेंडर, परिवहन, टायर, अनाज और इलेक्ट्रानिक सामान महंगा होने से हर तबके की चिंता घर-गृहस्थी चलाने को लेकर बढ़ने लगी है। परिवार का भरण-पोषण कैसे किया जाए यह चिंता लोगों को सताए जा रही है। स्थानीय बाजारों में दिख रहा युद्ध का स्तर लोगों को यह सोंचने पर विवश कर दिया है कि अब घर-गृहस्थी का खर्च कैसे चले।
यूपी बिजली विभाग में बड़े स्तर पर रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी, पद खत्म होने और छंटनी का खतरा

लखनऊ। प्रदेश के बिजली विभाग में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। Uttar Pradesh Power Corporation Limited (यूपीपीसीएल) द्वारा विद्युत वितरण क्षेत्र के बाद अब ट्रांसमिशन सेक्टर में भी व्यापक रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी की जा रही है।

Vidyut Karmchari Sanyukt Sangharsh Samiti ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर पद समाप्त किए जाएंगे, जिससे नियमित और संविदा कर्मचारियों की छंटनी की आशंका है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ट्रांसमिशन क्षेत्र में रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के संकेत दिए हैं। पहले चरण में सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े करीब 150 पद समाप्त किए जाने की योजना है।

इसके अलावा कई मंडलों और खंडों के विलय की भी तैयारी है। प्रस्ताव के तहत गोरखपुर और प्रयागराज मंडल को मिलाकर वाराणसी मंडल, जबकि मुरादाबाद और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर मेरठ मंडल बनाए जाने की योजना है। अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के मर्जर प्रस्तावित हैं।

प्रस्तावित ढांचे में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर के पदों में बड़ी कटौती की बात सामने आई है। कुल मिलाकर पहले चरण में ही डेढ़ सौ से अधिक पद समाप्त किए जा सकते हैं।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि आगे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और अन्य विभागों में भी बड़े स्तर पर पद समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों पर असर पड़ेगा।

कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि इस फैसले से बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के दौरान जब मांग अधिक होती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

इसी क्रम में 12 अप्रैल को Lucknow में संघर्ष समिति की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
लखनऊ में नामी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा सवाल, आदेशों के बावजूद अभिभावकों से वसूली जारी

लखनऊ।  प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की फीस और अन्य मदों में वसूली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजधानी लखनऊ के कई नामी स्कूलों पर अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
Yogi Adityanath ने पहले ही निर्देश दिए हैं कि स्कूल किताबें, कॉपी, यूनिफॉर्म, डायरी या अन्य सामग्री के नाम पर अनावश्यक वसूली न करें और री-एडमिशन फीस भी न ली जाए। इसके बावजूद कई प्रतिष्ठित स्कूल इन निर्देशों की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं।
अभिभावकों के अनुसार, City Montessori School, Lucknow Public School, Delhi Public School, La Martiniere College, St. Mary's Convent Inter College, Cathedral Senior Secondary School, Spring Dale College, Amity International School, New Public School और Scholars' Home School जैसे संस्थानों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर तय दुकानों से खरीदारी का दबाव बनाया जाता है। इससे अभिभावकों को महंगे दामों पर सामान खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।
सूत्रों का कहना है कि हर साल अलग-अलग शीर्षकों के नाम पर फीस बढ़ा दी जाती है, जबकि कई मामलों में शुल्क का स्पष्ट विवरण भी नहीं दिया जाता। इससे खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ स्कूल अपनी छवि बेहतर दिखाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करते हैं और कई बार वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती।
वहीं प्रशासन की ओर से सख्ती के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव नजर आता है। अभिभावकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे स्कूलों की मनमानी जारी है।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सभी प्राइवेट स्कूलों की फीस संरचना की जांच हो, तय दुकानों से खरीद की बाध्यता खत्म की जाए, अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई हो और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी का 405 साला प्रकाश उत्सव बड़ी आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया।

तपस्थान श्री गुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा पक्की संगत प्रयागराज में भोर बेला से शबद- कीर्तन का दीवान सजा।

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज, श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी का 405 साला प्रकाश उत्सव मंगलवार को तपस्थान श्री गुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा पक्की संगत प्रयागराज में बड़ी आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया।संगत ने भोर बेला मे तपस्थान से प्रभात फेरी निकली जो क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से होते हुए गुरु द्वारा प्रांगण में संपन्न हुई। तत्पश्चात रविवार से आरंभ श्री अखंड पाठ साहिब की पाठ की संपूर्णता के उपरांत शब्द कीर्तन,गुरु इतिहास,आरती,हुकमनामा उपरांत गुरु का लंगर संगतो ने छका।

संध्याकाल मे खुले दीवान हॉल में संत विंरेद्र सिंह,परमजीत सिंह,ज्ञानी निशांत सिंह,महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री,जसविंदर सिंह शास्त्री पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थो, कथावाचक,इतिहासकार द्वारा गुरवाणी विचार देर रात तक चलता रहा साथ ही गुरु का लंगर भी चलता रहा। संचालन मुख्य सेवादार महंत ज्ञान सिंह ने किया।

वहीं दूसरी और जगह-जगह चौपाल लगाकर सिख पंथ के नौवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी के प्रकाश पर्व पर कोटि-कोटि नमन करते हुए सुविख्यात समाजसेवी व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्याय सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने वैश्विक चिंतन में त्याग,सेवा और समरसता के सनातन मूल्यो के प्रति अडिंग इच्छा की अभिव्यक्ति की और भारतीय दार्शनिक चिंतन में योगदान किया गुरु जी का बलिदान यात्रा का मानवीय पक्ष भी संवेदन शील है गुरु जी की जिन कस्बो,नगरों और गांव से गुजरे,लोगों ने उन स्थानों पर तंबाकू की खेती बंद कर दी सैकड़ो गांव नशा मुक्त हो गए और नवम गुरु की वाणी का आंचल पकडकर मुक्ति के पथ पर चल पड़े आज विश्व को नशा मुक्त करने के लिए नवम गुरु के व्यक्तित्व से सबक लेना चाहिए।

सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन, मानवता की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की सर्वोच्च मिसाल है उनका जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध निर्भीक खड़े रहने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है हम गुरु साहिब के दिखाएं मार्ग पर चलते हुए आपसी भाईचारे और मानवता के नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। चौपाल में दलजीत कौर,हरमनजी सिंह ने विचार रखें।

आजमगढ़:-फूलपुर में अखिलेश यादव और सपा सरकार के खिलाफ लगे पोस्टर, अखिलेश सरकार को ल्यारी राज और योगी सरकार को बताया धुरंधर राज

-सपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश, कार्रवाई की मांग

वी कुमार यदुवंशी

आजमगढ़।  बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' को लेकर सियासी पोस्टर वॉर छिड़ गया है। जिसमें समाजवादी पार्टी की सरकार की तुलना फिल्म में दिखाए गए 'ल्यारी राज' से की गई है और अखिलेश यादव को रहमान डकैत के स्टाइल में दिखाते हुए निशाना साधा गया है जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ को धुरंधर बताया गया है। जिसे लेकर सपाई में काफी आक्रोश व्याप्त है। पोस्टर ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ संगठन के नाम से फूलपुर के जगदीशपुर पुल पर पोस्टर लगाया गया है। इन पोस्टरों में सपा राज में हुई घटनाओं को ल्यारी राज के तौर पर बताने की कोशिश की गई है. होर्डिंग में सपा राज में हुए मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली दंगों को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है। अखिलेश यादव की तस्वीर लगी है जिसमें उन्होंने फिल्म के विलेज रहमान डकैत की तरह दिखाया है। उनकी तस्वीर के नीचे लिखा है 'अखिलेश का ल्यारी राज', वहीं दूसरी तरफ़ सीएम योगी आदित्यनाथ की तस्वीर है जिसमें वो कन्या के पैर धोते हुए नज़र आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा है ‘धुरंधर सीएम’। सीएम योगी की तस्वीर के साथ माफिया अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, मुकीम काला के मौत की अखबारों की कटिंग लगाई गई है, जिसके ज़रिए ये दिखाया गया है कि किस तरह से योगी सरकार में माफियाओं पर कार्रवाई की गई है। सीओ फूलपुर किरन पाल सिंह का कहना है कि जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
‘एल्युमिनियम भारत’ पहल लॉन्च: उद्योग को सस्ती ऊर्जा व कच्चे माल पर तुरंत नीति समर्थन की मांग
नई दिल्ली। एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMAI) ने मंगलवार को ‘एल्युमिनियम भारत’ पहल की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार से सस्ती और सतत ऊर्जा उपलब्ध कराने तथा कच्चे माल की कमी दूर करने के लिए त्वरित नीति समर्थन की मांग की।
इस पहल का उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने नई दिल्ली में किया। ‘एल्युमिनियम भारत’ का उद्देश्य देश के एल्युमिनियम सेक्टर को सशक्त बनाना और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग, नीति-निर्माताओं तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक मंच पर लाना है।
ALEMAI के अनुसार, इस पहल के तहत उद्योग से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर विचार-विमर्श कर एक ठोस और सतत विकास रोडमैप तैयार किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत ‘एल्युमिनियम भारत-2026’ नाम से देश की पहली और सबसे बड़ी एल्युमिनियम प्रदर्शनी 26 से 29 सितंबर 2025 तक गांधीनगर के हेलिपैड एग्ज़ीबिशन सेंटर में आयोजित की जाएगी। यह आयोजन ‘एल्युमेक्स इंडिया-2026’ के साथ होगा, जिसका उद्देश्य भारतीय एल्युमिनियम उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना है।
इस अवसर पर मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल भारत को उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
वहीं ALEMAI के अध्यक्ष जीतेन्द्र चोपड़ा ने उद्योग की मौजूदा चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है। उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जबकि देश की 4.2 मिलियन टन की कुल उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते नीतिगत सहयोग मिलने पर यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सरकार का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निषाद समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्री श्री शर्मा ने निषाद समाज की भूमिका और योगदान का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस के प्रसिद्ध केवट प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता भारतीय संस्कृति में सच्ची निष्ठा, भक्ति और आत्मीयता का अद्वितीय उदाहरण है। वनवास के कठिन समय में निषादराज द्वारा भगवान राम की सहायता, विशेष रूप से गंगा नदी पार कराने की घटना, यह दर्शाती है कि सच्चे संबंध जाति और वर्ग से ऊपर होते हैं। यह प्रसंग समाज को आपसी विश्वास, सहयोग और समानता का संदेश देता है।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी को समान अवसर और सम्मान मिल सके।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निषाद समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से अपने भविष्य को सशक्त बनाएं और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर रुद्रपुर, देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निषाद समाज की एकता, संघर्ष और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कृषि में वैल्यू एडिशन और तकनीक के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : केशव प्रसाद मौर्य
* एमिटी विवि में डिप्टी सीएम ने किया अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) विषय पर
“पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उप मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्र, पगड़ी (साफा) पहनाकर तथा एक पौधा सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने “Pathogens, Plant Health and Food Security” नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और प्रभावी विपणन से जुड़ा एक व्यापक विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश की सबसे उपजाऊ भूमि वाला प्रदेश है, जहां उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद फसलों के भंडारण की कमी, कोल्ड चेन की अपर्याप्त व्यवस्था तथा वैल्यू एडिशन के अभाव के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधिक उत्पादन होने पर भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो शोध और नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी तकनीकों का विकास करें, जिससे प्राकृतिक आपदाओं जैसे वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि अब समय क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर ध्यान देने का है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश में चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेल मार्ग या फिर हवाई मार्ग, इन सबके निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीब, किसान, युवा एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य उन्हें “लखपति दीदी” से आगे “करोड़पति दीदी” बनाना है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है तथा अब “एक जनपद, एक व्यंजन” के माध्यम से खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन बढ़ाकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार किसानों और किसानी के सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन (ए.एफ.ए.एफ), एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी (आईएसएमपीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वस्तरीय चर्चा और विचार-मंथन के लिए  प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।
डॉ. अशोक के. चौहान ने वर्चुवल रूप से जुड़ते हुये मुख्य अतिथि सहित सभी का स्वागत करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से जुड़े होने के नाते वे कृषि और किसानों की परेशानियों से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में विश्वभर के वरिष्ठ और स्थापित वैज्ञानिकों को एक साथ देखकर विश्वास मजबूत होता है कि भारत न केवल कृषि में बल्कि हर क्षेत्र में सुपर पावर बनकर रहेगा और एमिटी विश्वविद्यालय इसमें अपना हर प्रकार का सहयोग देगा।
डॉ. असीम चौहान ने अपने वर्चुवल सम्बोधन मे ग्रामीण विकास में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, मूल्य संवर्धन और ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग के महत्व को रेखांकित  किया और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम का सामना करने के उपायों पर  हमे और काम करना होगा।
प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने डॉ. अशोक के. चौहान एवं डॉ. असीम चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन, उभरती पादप बीमारियों तथा खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव जैसे वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सम्मेलन को ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग एवं नवाचार के लिए एक सशक्त मंच बताया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने जलवायु-लचीली कृषि प्राप्त करने में पादप स्वास्थ्य, रोगजनकों के प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सी. डी. मयी ने कृषि को किसान, रोगजनक कीटाणुओं और पर्यावरण के एक जटिल संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संतुलित एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा रासायनिक उपयोग पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान किया।
डॉ. एस. एस. चाहल ने कृषि परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए आक्रामक प्रजातियों, उभरते रोगजनकों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में जीनोमिक्स एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. (डॉ.) पोखर रावल ने इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती सदस्यता और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी शोध पत्रिका के वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. ललित महात्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए शैक्षणिक जीवन में मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजों के माध्यम से वायरस संचरण के प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से पारंपरिक धारणाओं की पुनर्समीक्षा करने का आह्वान किया।
डॉ. डी. आर. सिंह ने भारत की कृषि विविधता, विशेषकर बिहार के मखाना, आम और लीची जैसे उत्पादों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने खाद्य पर्याप्तता से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कीटनाशकों के अवशेष और माइकोटॉक्सिन प्रदूषण के खतरों को उजागर किया।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक उत्कृष्टता का उत्सव भी मनाया गया, जिसमें विशिष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष उपलब्धि पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए।
प्रति कुलपति एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, एमेरिटस प्रेसिडेंट आईएसएमपीपी डॉ. एस. एस. चाहल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ‘कॉटन मैन’ के नाम से विख्यात, प्रेसिडेंट साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, नई दिल्ली, डॉ. सी. डी. मयी, सचिव आईएसएमपीपी प्रो. (डॉ.) पोखर रावल, अध्यक्ष आईएसएमपीपी डॉ. ललित महात्मा, कुलपति बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी डॉ. डी. आर. सिंह और सम्मेलन की आयोजन सचिव एवं निदेशक, एएफएएफ, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ परिसर, प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने  सम्मेलन मे औपचारिकरुप सै भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडर प्रेसिडेंट, एमिटी एजुकेशन ग्रुप, रितनंद बलवेद एजुकेशन फाउंडेशन, डॉ. अशोक के. चौहान, और चेयरमैन एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ कैंपस डॉ. असीम चौहान ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
विष्णुगढ़ के बनासो बुध बाजार में भीषण आंधी-तूफान का कहर, बिजली पोल गिरने से महिला की दर्दनाक मौत

हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत बनासो बुध बाजार में आई भीषण आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दी। ग्राम बकसपुरा निवासी सोहगी देवी, जो हाट-बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं, इस प्राकृतिक आपदा की शिकार हो गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक तेज आंधी और तूफान के बीच एक बिजली का पोल गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से सोहगी देवी की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं किस तरह गरीब और मेहनतकश लोगों पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं।

शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों  का समावेश राष्ट्र के उज्जवल भविष्य की आधारशिला : डॉ नीरजा माधव

सुल्तानपुर। जनपद के ग्राम बीबीपुर तिवारी स्थित नारायण ज्ञान धाम में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं मेधावी छात्र सम्मान समारोह बेहद गरिमामय और प्रेरणादायी माहौल में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा के सुंदर समन्वय का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. नीरजा माधव द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन मूल्यों का समावेश ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
अध्यक्षता करते हुए डा. सुशील कुमार पाण्डेय ‘साहित्येन्दु’ ने चरित्र निर्माण आधारित शिक्षा को छात्रों के समग्र विकास का मूल बताया, वहीं डा. इन्दुशेखर उपाध्याय ने जीवन में नैतिकता, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। समारोह को सम्बोधित करते हुए उदयभान सिंह (पूर्व प्रधानाचार्य) ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। संस्कार ही शिक्षा को सार्थक बनाते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करते हैं। अंजनी कुमार सिंह (पट्टी, प्रतापगढ़) ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मनुष्य को आगे बढ़ने की दिशा देती है, जबकि संस्कार उसे सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं। दोनों का संतुलन ही जीवन को सफल बनाता है। पूर्व प्रवक्ता रामलाल गुप्ता ने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यवहार में दिखे। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही समाज में नैतिकता, अनुशासन और सद्भावना का विकास होता है। संस्थापक पूर्व आईजी बी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला है, जहां बच्चों में अनुशासन, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में चांदनी तिवारी की सरस्वती वंदना ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर आयोजित सामान्य ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए और 41 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रतिभा यादव, रिया गुप्ता, आदर्श यादव, श्रेया, वैभव सिंह, आयुष श्रीवास्तव सहित अनेक छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथियों, अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं के सम्मान का मंच बना, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश भी दे गया।
इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों में वृद्धि

*पंखा - कूलर और एसी के मूल्य में दिख रहा 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा, दुकानदार - ग्राहक हैं परेशान*


रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका-ईरान युद्ध की तीव्रता हर दिन बढ़ती जा रही है। वहीं इसकी मार से इलेक्ट्रानिक सामानों के दाम आसमान छूने लगे हैं। गैस सिलेंडर किल्लत से उपभोक्ता जूझ ही रहे थे कि अब इलेक्ट्रानिक उपकरणों और सामानों के दाम में भी पंद्रह से तीस प्रतिशत तक इजाफा हो गया है। लगन में इलेक्ट्रानिक सामान के दाम बढ़ने से लोगों की दिक्कत काफी बढ़ गई है। वहीं गर्मी का मौसम होने से पंखा-कूलर और एसी जैसे इलेक्ट्रानिक सामानों की भारी मांग है। वहीं दाम बढ़ जाने से लोगों की काफी फजीहत हो गई है। आगे महंगाई कितनी बढ़ेगी यह आम नागरिक समझ नहीं पा रहे हैं।
जिले के कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों इलेक्ट्रानिक सामानों के दाम में पंद्रह से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसी, इंडक्शन, पंखा, कूलर, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन समेत अन्य सामान महंगे हो गए हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध अब भारतीय इलेक्ट्रानिक बाजार को प्रभावित करने लगा है। कच्चे माल (प्लास्टिक, मेटल) और चिप्स की कीमतें आसमान छूने से इंडक्शन, चूल्हा कीमत करीब डेढ़ गुना ज्यादा हो गया है।नगर पंचायत ज्ञानपुर के इलेक्ट्रानिक कारोबारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जो पंखा एक हजार में बिक रहा था वह युद्ध के चलते इस साल 13 सौ रुपये प्रति पीस बिक रहा है। केबिल 12 सौ रुपये से बढ़कर 15 सौ रुपये प्रति बंडल हो गया है। कूलर छह हजार से सात हजार रुपये और बैटरी 12 हजार से बढ़कर 13 हजार रुपये प्रति पीस हो गया है। मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि इलेक्ट्रानिक सामानों के दाम एक अप्रैल तक बढ़ गए हैं। जो तार पांच सौ रुपया बंडल हम लोग बिक्री करते थे वह अब साढ़े छह से सात सौ रुपया हो गया है। दो देश के बीच चल रहा तनाव हर क्षेत्र में अर्थ व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। गर्मी का सितम बढ़ने लगा है। ऐसे में कूलर-एसी और पंखा, फ्रिज लेने वालों की चिंता बढ़ने लगी है। रसोई गैस सिलेंडर, परिवहन, टायर, अनाज और इलेक्ट्रानिक सामान महंगा होने से हर तबके की चिंता घर-गृहस्थी चलाने को लेकर बढ़ने लगी है। परिवार का भरण-पोषण कैसे किया जाए यह चिंता लोगों को सताए जा रही है। स्थानीय बाजारों में दिख रहा युद्ध का स्तर लोगों को यह सोंचने पर विवश कर दिया है कि अब घर-गृहस्थी का खर्च कैसे चले।
यूपी बिजली विभाग में बड़े स्तर पर रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी, पद खत्म होने और छंटनी का खतरा

लखनऊ। प्रदेश के बिजली विभाग में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। Uttar Pradesh Power Corporation Limited (यूपीपीसीएल) द्वारा विद्युत वितरण क्षेत्र के बाद अब ट्रांसमिशन सेक्टर में भी व्यापक रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी की जा रही है।

Vidyut Karmchari Sanyukt Sangharsh Samiti ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर पद समाप्त किए जाएंगे, जिससे नियमित और संविदा कर्मचारियों की छंटनी की आशंका है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ट्रांसमिशन क्षेत्र में रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के संकेत दिए हैं। पहले चरण में सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े करीब 150 पद समाप्त किए जाने की योजना है।

इसके अलावा कई मंडलों और खंडों के विलय की भी तैयारी है। प्रस्ताव के तहत गोरखपुर और प्रयागराज मंडल को मिलाकर वाराणसी मंडल, जबकि मुरादाबाद और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर मेरठ मंडल बनाए जाने की योजना है। अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के मर्जर प्रस्तावित हैं।

प्रस्तावित ढांचे में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर के पदों में बड़ी कटौती की बात सामने आई है। कुल मिलाकर पहले चरण में ही डेढ़ सौ से अधिक पद समाप्त किए जा सकते हैं।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि आगे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और अन्य विभागों में भी बड़े स्तर पर पद समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों पर असर पड़ेगा।

कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि इस फैसले से बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के दौरान जब मांग अधिक होती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

इसी क्रम में 12 अप्रैल को Lucknow में संघर्ष समिति की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
लखनऊ में नामी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा सवाल, आदेशों के बावजूद अभिभावकों से वसूली जारी

लखनऊ।  प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की फीस और अन्य मदों में वसूली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजधानी लखनऊ के कई नामी स्कूलों पर अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
Yogi Adityanath ने पहले ही निर्देश दिए हैं कि स्कूल किताबें, कॉपी, यूनिफॉर्म, डायरी या अन्य सामग्री के नाम पर अनावश्यक वसूली न करें और री-एडमिशन फीस भी न ली जाए। इसके बावजूद कई प्रतिष्ठित स्कूल इन निर्देशों की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं।
अभिभावकों के अनुसार, City Montessori School, Lucknow Public School, Delhi Public School, La Martiniere College, St. Mary's Convent Inter College, Cathedral Senior Secondary School, Spring Dale College, Amity International School, New Public School और Scholars' Home School जैसे संस्थानों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर तय दुकानों से खरीदारी का दबाव बनाया जाता है। इससे अभिभावकों को महंगे दामों पर सामान खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।
सूत्रों का कहना है कि हर साल अलग-अलग शीर्षकों के नाम पर फीस बढ़ा दी जाती है, जबकि कई मामलों में शुल्क का स्पष्ट विवरण भी नहीं दिया जाता। इससे खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ स्कूल अपनी छवि बेहतर दिखाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करते हैं और कई बार वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती।
वहीं प्रशासन की ओर से सख्ती के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव नजर आता है। अभिभावकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे स्कूलों की मनमानी जारी है।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सभी प्राइवेट स्कूलों की फीस संरचना की जांच हो, तय दुकानों से खरीद की बाध्यता खत्म की जाए, अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई हो और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी का 405 साला प्रकाश उत्सव बड़ी आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया।

तपस्थान श्री गुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा पक्की संगत प्रयागराज में भोर बेला से शबद- कीर्तन का दीवान सजा।

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज, श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी का 405 साला प्रकाश उत्सव मंगलवार को तपस्थान श्री गुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा पक्की संगत प्रयागराज में बड़ी आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया।संगत ने भोर बेला मे तपस्थान से प्रभात फेरी निकली जो क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से होते हुए गुरु द्वारा प्रांगण में संपन्न हुई। तत्पश्चात रविवार से आरंभ श्री अखंड पाठ साहिब की पाठ की संपूर्णता के उपरांत शब्द कीर्तन,गुरु इतिहास,आरती,हुकमनामा उपरांत गुरु का लंगर संगतो ने छका।

संध्याकाल मे खुले दीवान हॉल में संत विंरेद्र सिंह,परमजीत सिंह,ज्ञानी निशांत सिंह,महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री,जसविंदर सिंह शास्त्री पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थो, कथावाचक,इतिहासकार द्वारा गुरवाणी विचार देर रात तक चलता रहा साथ ही गुरु का लंगर भी चलता रहा। संचालन मुख्य सेवादार महंत ज्ञान सिंह ने किया।

वहीं दूसरी और जगह-जगह चौपाल लगाकर सिख पंथ के नौवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी के प्रकाश पर्व पर कोटि-कोटि नमन करते हुए सुविख्यात समाजसेवी व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्याय सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने वैश्विक चिंतन में त्याग,सेवा और समरसता के सनातन मूल्यो के प्रति अडिंग इच्छा की अभिव्यक्ति की और भारतीय दार्शनिक चिंतन में योगदान किया गुरु जी का बलिदान यात्रा का मानवीय पक्ष भी संवेदन शील है गुरु जी की जिन कस्बो,नगरों और गांव से गुजरे,लोगों ने उन स्थानों पर तंबाकू की खेती बंद कर दी सैकड़ो गांव नशा मुक्त हो गए और नवम गुरु की वाणी का आंचल पकडकर मुक्ति के पथ पर चल पड़े आज विश्व को नशा मुक्त करने के लिए नवम गुरु के व्यक्तित्व से सबक लेना चाहिए।

सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन, मानवता की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की सर्वोच्च मिसाल है उनका जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध निर्भीक खड़े रहने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है हम गुरु साहिब के दिखाएं मार्ग पर चलते हुए आपसी भाईचारे और मानवता के नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। चौपाल में दलजीत कौर,हरमनजी सिंह ने विचार रखें।

आजमगढ़:-फूलपुर में अखिलेश यादव और सपा सरकार के खिलाफ लगे पोस्टर, अखिलेश सरकार को ल्यारी राज और योगी सरकार को बताया धुरंधर राज

-सपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश, कार्रवाई की मांग

वी कुमार यदुवंशी

आजमगढ़।  बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' को लेकर सियासी पोस्टर वॉर छिड़ गया है। जिसमें समाजवादी पार्टी की सरकार की तुलना फिल्म में दिखाए गए 'ल्यारी राज' से की गई है और अखिलेश यादव को रहमान डकैत के स्टाइल में दिखाते हुए निशाना साधा गया है जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ को धुरंधर बताया गया है। जिसे लेकर सपाई में काफी आक्रोश व्याप्त है। पोस्टर ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ संगठन के नाम से फूलपुर के जगदीशपुर पुल पर पोस्टर लगाया गया है। इन पोस्टरों में सपा राज में हुई घटनाओं को ल्यारी राज के तौर पर बताने की कोशिश की गई है. होर्डिंग में सपा राज में हुए मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली दंगों को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है। अखिलेश यादव की तस्वीर लगी है जिसमें उन्होंने फिल्म के विलेज रहमान डकैत की तरह दिखाया है। उनकी तस्वीर के नीचे लिखा है 'अखिलेश का ल्यारी राज', वहीं दूसरी तरफ़ सीएम योगी आदित्यनाथ की तस्वीर है जिसमें वो कन्या के पैर धोते हुए नज़र आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा है ‘धुरंधर सीएम’। सीएम योगी की तस्वीर के साथ माफिया अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, मुकीम काला के मौत की अखबारों की कटिंग लगाई गई है, जिसके ज़रिए ये दिखाया गया है कि किस तरह से योगी सरकार में माफियाओं पर कार्रवाई की गई है। सीओ फूलपुर किरन पाल सिंह का कहना है कि जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
‘एल्युमिनियम भारत’ पहल लॉन्च: उद्योग को सस्ती ऊर्जा व कच्चे माल पर तुरंत नीति समर्थन की मांग
नई दिल्ली। एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMAI) ने मंगलवार को ‘एल्युमिनियम भारत’ पहल की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार से सस्ती और सतत ऊर्जा उपलब्ध कराने तथा कच्चे माल की कमी दूर करने के लिए त्वरित नीति समर्थन की मांग की।
इस पहल का उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने नई दिल्ली में किया। ‘एल्युमिनियम भारत’ का उद्देश्य देश के एल्युमिनियम सेक्टर को सशक्त बनाना और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग, नीति-निर्माताओं तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक मंच पर लाना है।
ALEMAI के अनुसार, इस पहल के तहत उद्योग से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर विचार-विमर्श कर एक ठोस और सतत विकास रोडमैप तैयार किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत ‘एल्युमिनियम भारत-2026’ नाम से देश की पहली और सबसे बड़ी एल्युमिनियम प्रदर्शनी 26 से 29 सितंबर 2025 तक गांधीनगर के हेलिपैड एग्ज़ीबिशन सेंटर में आयोजित की जाएगी। यह आयोजन ‘एल्युमेक्स इंडिया-2026’ के साथ होगा, जिसका उद्देश्य भारतीय एल्युमिनियम उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना है।
इस अवसर पर मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल भारत को उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
वहीं ALEMAI के अध्यक्ष जीतेन्द्र चोपड़ा ने उद्योग की मौजूदा चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है। उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जबकि देश की 4.2 मिलियन टन की कुल उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते नीतिगत सहयोग मिलने पर यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।