स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: गांव-गांव बस सेवा, संपत्ति रजिस्ट्रेशन सख्त और शिक्षकों को कैशलेस इलाज

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 को मंजूरी मिल गई, जबकि कुछ प्रस्तावों को फिलहाल विचार के लिए रोक दिया गया। सरकार के फैसलों का असर परिवहन, आवास, संपत्ति रजिस्ट्रेशन और सरकारी कर्मचारियों के नियमों पर सीधे तौर पर पड़ेगा।

सबसे बड़ा फैसला प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने को लेकर लिया गया। अब किसी भी जमीन या मकान की बिक्री से पहले विक्रेता का नाम खतौनी से मिलान किया जाएगा। अगर नाम में अंतर पाया जाता है तो रजिस्ट्रेशन विभाग इसकी जांच करेगा, जिससे फर्जी रजिस्ट्री और विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर लगाम लगेगी।

कैबिनेट ने सीएम ग्राम परिवहन योजना-2026 को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रदेश की करीब 59 हजार ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ा जाएगा। जिन करीब 12,200 गांवों में अब तक बस नहीं पहुंची, वहां 28 सीटों वाली बसें चलाई जाएंगी। इस सेवा को टैक्स से छूट दी जाएगी और निजी ऑपरेटरों को भी बस संचालन की अनुमति दी जाएगी। बसों की औसत आयु 15 वर्ष तय की गई है और संचालन का अनुबंध 10 वर्ष का होगा।

एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये

परिवहन क्षेत्र में एक और अहम निर्णय लेते हुए सरकार ने मोटर व्हीकल नियमों में संशोधन का फैसला किया है। अब Ola और Uber जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को प्रदेश में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ड्राइवरों के लिए मेडिकल जांच, फिटनेस टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन भी जरूरी किया जाएगा। एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये तय की गई है।आवास के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया गया है। Pradhan Mantri Awas Yojana (शहरी) के तहत आवास निर्माण की लागत सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है। अब लाभार्थी 30 वर्गमीटर तक मकान बनवा सकेंगे। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।

डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी

सरकार ने कांशीराम आवास योजना के खाली पड़े मकानों की मरम्मत कराकर उन्हें जरूरतमंद दलित परिवारों को आवंटित करने का भी निर्णय लिया है। वहीं सरकारी कर्मचारियों के सेवा नियमों में बदलाव करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि छह महीने के मूल वेतन से अधिक के निवेश की जानकारी देनी होगी और हर साल अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना होगा।इसके अलावा Ayodhya में खेल परिसर के लिए भूमि हस्तांतरण, Kanpur ट्रांस गंगा सिटी में चार लेन पुल निर्माण और बुंदेलखंड क्षेत्र के Banda व Jhansi में डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव का फैसला

शिक्षकों को राहत देते हुए सरकार ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। अब अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस योजना से प्रदेश के करीब 1.28 लाख शिक्षकों को लाभ मिलने का अनुमान है। इसके लिए प्रति शिक्षक लगभग 2479 रुपये का प्रीमियम तय किया गया है और सरकार पर करीब 31.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।सरकार का कहना है कि इन फैसलों से ग्रामीण परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता आएगी और शिक्षकों व कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
गन्ना लदी ट्राली से टकराई बाइक,परीक्षा देने जा रहे छात्र की मौत

*आज ही बहन की आनी थी लगन

गोंडा।जिले में हाईस्कूल की परीक्षा देने जा रहे छात्र जावेद(16) की सड़क हादसे में मौत हो गई।यह घटना इटियाथोक थाना क्षेत्र के गोंडा बलरामपुर मार्ग पर स्थित गन्ना क्रय केंद्र बकठोरवा के पास हुई।जावेद अपनी मोटरसाइकिल से इंद्र कुंवरि इंटर कॉलेज इटियाथोक जा रहा था।परीक्षा केंद्र जाते समय उसकी मोटरसाइकिल एक गन्ना लदी ट्रैक्टर ट्रॉली से टकरा गई।यह ट्राली गन्ना क्रय केंद्र पर गन्ना बेचने जा रहे एक किसान की थी।टक्कर इतनी भीषण थी कि जावेद सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 के पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे और घायल जावेद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटियाथोक पहुंचाया।जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया।मेडिकल कालेज पहुंचने पर डॉक्टरों ने जावेद को मृत घोषित कर दिया।मृतक छात्र जावेद कौड़िया थाना क्षेत्र के आर्यनगर कस्बे का निवासी था और राम कुमारी इंटर कॉलेज कौड़िया में पढ़ता था।वह माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के हाईस्कूल चित्रकला विषय की परीक्षा देने जा रहा था।इससे पहले भी वह पांच विषयों की परीक्षा मोटरसाइकिल से देकर सकुशल लौट चुका था।इस दुखद हादसे की जानकारी मिलने पर जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने शोक व्यक्त किया है।मृतक जावेद के पिता कलीम अख्तर शटरिंग सर्विस का काम करते हैं।जावेद दो भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटा था।बड़े भाई का नाम परवेज खान है जो 26 वर्ष का है।जबकि मृतक जावेद की उम्र 16 वर्ष है।मृतक जावेद की चार बहनों में दो की शादी हो चुकी है और दो बहनों की अभी शादी नहीं हुई है जिसमें बहन सादिया (22) की आज लगन आनी थी,परन्तु बहन की लगन आने से पहले ही भाई की मौत हो गयी है।छोटी बहन की शादी 30 तारीख को है और परिवार के लोग उसकी तैयारी कर रहे थे।सड़क हादसे में जावेद की मौत के बाद बहन के लगन जाने का कार्यक्रम फिलहाल टल गया है।जावेद के परिजन पूरी तरह से परेशान हैं और रो रो कर बुरा हाल है।जो भी इस हादसे के बारे में सुन रहा है वह जावेद के घर पहुंचकर पिता कलीम और परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहा है।इटियाथोक थानाध्यक्ष कृष्ण गोपाल राय ने  बताया कि जावेद अपनी तेज रफ्तार मोटरसाइकिल से परीक्षा देने जा रहा था कि इसी दौरान गन्ना बेचने के लिए जा रहे एक किसान की ट्रैक्टर ट्रॉली में भिंड़ गया और उसी की टक्कर होने से जावेद की मौत हो गई।मृतक के शव को कब्जे में लेकर पंचायत नामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्यवाही की जा रही है।
भाजपा नेता की गाड़ी में खनन डंपरों की चेकिंग, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप, तहसीलदार का तबादला
मुरादाबाद। मुरादाबाद  में एक तहसीलदार का भाजपा नेता की गाड़ी में बैठकर खनन से जुड़े डंपरों की चेकिंग करना भारी पड़ गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए तहसीलदार Praveen Kumar का तबादला कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, ठाकुरद्वारा में तैनात तहसीलदार प्रवीण कुमार पर आरोप लगा कि वह भाजपा नेता की गाड़ी में बैठकर उत्तराखंड से आने वाले खनन डंपरों की चेकिंग कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
वीडियो सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल एडीएम वित्त एवं राजस्व को जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में मामला गंभीर पाए जाने पर तहसीलदार के वेतन आहरण पर भी रोक लगा दी गई और शासन को रिपोर्ट भेजी गई।
हालांकि तहसीलदार प्रवीण कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी सरकारी गाड़ी रास्ते में खराब हो गई थी, इसलिए उन्होंने भाजपा नेता की गाड़ी से लिफ्ट लेकर मौके तक पहुंचकर चेकिंग की।
बताया जा रहा है कि प्रवीण कुमार विशेष पुनरीक्षण (SIR) कार्य में भी लगे हुए थे। इसी कारण करीब एक माह पहले उनका किया गया तबादला चुनाव आयोग की अनुमति न मिलने के चलते रोक दिया गया था। अब अनुमति मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें ठाकुरद्वारा से हटाकर बिलारी तहसील भेज दिया है।
इसके साथ ही प्रशासनिक फेरबदल में तहसील सदर के तहसीलदार धीरेश कुमार सिंह को ठाकुरद्वारा भेजा गया है, जबकि बिलारी में तैनात अंकित गिरी को तहसील सदर स्थानांतरित किया गया है।इस पूरे मामले ने प्रशासनिक निष्पक्षता और खनन जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मोहनलालगंज में दिव्यांग मां-बेटे की हत्या, पुलिस ने शुरू की गहन जांच
लखनऊ: मोहनलालगंज के सीसेंडी गांव में सोमवार देर शाम एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 45 वर्षीय रेशमा बानो और उनका 18 वर्षीय पुत्र शादाब, दोनों दृष्टिबाधित, अपने घर में मृत पाए गए। घटना की भयावहता इस कदर थी कि रेशमा का शव चारपाई के नीचे पड़ा मिला, जबकि शादाब का शव पानी भरे टब में पड़ा था। दोनों के गले पर कपड़े से दबाव डालने के निशान पाए गए हैं, जिससे प्रारंभिक रूप से दम घोंटकर हत्या करने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पड़ोसियों ने दी घटना की सूचना
सूचना मिलने पर थाना मोहनलालगंज की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पड़ोसियों ने बताया कि शाम करीब 6 बजे रेशमा से फोन पर बात हुई थी, लेकिन थोड़ी देर बाद उनके फोन पर किसी ने हाथ डाल दिया और बातचीत में रुकावट आई। पड़ोसी सलमान और फरहान घर पहुंचे तो देखा कि दरवाजा बाहर से बंद था। अंदर जाकर उन्हें दोनों मृतक मिले।
घटना की परिस्थिति और प्रारंभिक जांच
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। एसीपी विकास कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों शव घर के अंदर पाए गए और प्रथम दृष्टया हत्या से पहले संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही हत्या के कारण और आरोपी की पहचान स्पष्ट होगी।
रेशमा बानो अपने दिव्यांग बेटे के साथ रहती थीं। उनके पति इकबाल पठान की कोरोना के दौरान मौत हो चुकी थी। रेशमा अपने बेटे का पालन-पोषण घर के बाहर छोटे व्यवसाय से करती थीं। घटना के समय परिवार का कोई और सदस्य घर पर नहीं था।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने पूरे घर का निरीक्षण कर फोरेंसिक टीम को बुलाया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। मामले के शीघ्र खुलासे और हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अफवाहों के संबंध में भी चेतावनी जारी की कि केवल अधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
गांव में तनाव का माहौल
घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। पड़ोसी और स्थानीय लोग इस भयावह हत्या की वजह जानने के लिए पुलिस और मीडिया से लगातार संपर्क में हैं।
पुलिस ने बताया कि मामले की तीव्र और गहन जांच जारी है और जल्द ही दोषियों को पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
जब जब मोदी डरते हैं पुलिस  आगे करते हैं यूजीसी काले कानून वापस ले : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे 8 मार्च को जंतर मंतर नई दिल्ली में एडवोकेट अनिल मिश्रा जी के नेतृत्व में प्रदर्शन करने के बाद आज लखनऊ आने पर आवास पर लोगों से बात करते हुए कहा कि देश के 35 करोड़ सवर्ण समाज यह सवाल है कि जवाब जरूर देना यूजीसी के खिलाफ़ दिल्ली मे सवर्ण समाज के आंदोलन को रोकने के बाद क्या सवर्ण समाज मोदी को वोट करेगा? जिस तरह से दिल्ली पुलिस पूरी घेरा बंदी कर संबंधानिक शांति ढंग से प्रोटेस्ट कर ने गए थे को चारों तरफ से घेर कर गिरफ्तार कर रही थी बसे कम हो गई। भाजपा सवर्ण के आंदोलन के आयोजन से भयभीत नहीं है उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया घर घर तक ये बात पहुंच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 11 वर्षों में कौसा तुष्टिकरण किया है जो उनका बनाया हुआ अवतारी पुरुष हिन्दू , हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है वो इस खबर को विषय को यही रोकना चाहते हैं क्यों कि संघ से लेकर भाजपा के अंदुरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया कि यह विषय उतना छोटा नहीं था। क्यों कि जब UGC अधिनियम आया और लोगों ने विरोध करना शुरु किया  तब भाजपा और संघ के नेताओं का अंदरूनी कहना था कि इस विरोध से कुछ होने वाला नहीं है चार लोग सड़क पर नहीं आयेंगे किन्तु जब लोगों ने सड़क पर उतरना शुरू किया तब  हाउस अरेस्ट किया गया और राजधानी आने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन न करने को पूरी ताग़त झोंक दी लेकिन सवर्ण ने यह दिखा दिया कि जब तक UGC बिल वापस नहीं होगा सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा जब भी मोदी सरकार डरती है पुलिस को आगे करती है के नारों से राजधानी नई दिल्ली गुंजा जिंदर देखो पूरा दिल्ली सवर्ण समाज से पटा था।
पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन हुई अटल आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा
लखनऊ। श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में चल रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश हेतु परीक्षा पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन आयोजित की गई। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जनपदों में बनाए गए 89 केंद्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर योजना के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

21 हजार विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश परीक्षा में हिस्सा

कक्षा 6 में प्रवेश के लिए निर्धारित 2880 सीटों के सापेक्ष 12,018 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि कक्षा 9 की 1140 सीटों के लिए 9,054 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार दोनों कक्षाओं को मिलाकर कुल 21,072 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया।

योगी सरकार का सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन पर फोकस

इस बार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र प्रदेश स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराए गए, जिससे सभी परीक्षा केंद्रों पर समान मानकों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जा सकी। योगी सरकार ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग, नामित नोडल अधिकारियों और केंद्र अधीक्षकों के माध्यम से समुचित व्यवस्थाएं कराईं। सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई।

निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा

गौरतलब है कि अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, पुस्तकें, खेलकूद सुविधाएं और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां उपलब्ध कराई जातीं हैं। इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप आधुनिक कक्षाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
संभल में मस्जिद और दरगाह अवैध घोषित, कोर्ट ने इमाम पर लगाया 7 करोड़ का जुर्माना
संभल। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय तहसीलदार काेर्ट ने जिले के पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में सरकारी जमीन पर
बन शाही मस्जिद, मकान और दरगाह काे अवैध बताते हुए हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही काेर्ट ने शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन पर सात कराेड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है। साेमवार काे संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा कर बनाए गए मकान, मस्जिद और दरगाह हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है।

इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। 30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल की गयी जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।

इस प्रकरण में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। वर्ष 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल ने ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है। उन्हाेंने बताया कि आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाएगा और जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
जनपद संभल में शाही इमाम ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया घर, तहसीलदार कोर्ट ने खाली करने का दिया आदेश, 7 करोड़ का जुर्माना लगाया

संभल। जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यहां शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है।
संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है
सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर यह निर्माण किया गया था। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है।
आरोप है कि शाही इमाम आफताब हुसैन पुत्र खुर्शीद हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन ने इस जमीन पर पक्का मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण कराया।
मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिला। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।

30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल किया गया। जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई।

प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
इस विषय में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही।

उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल द्वारा ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाकर जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: गांव-गांव बस सेवा, संपत्ति रजिस्ट्रेशन सख्त और शिक्षकों को कैशलेस इलाज

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 को मंजूरी मिल गई, जबकि कुछ प्रस्तावों को फिलहाल विचार के लिए रोक दिया गया। सरकार के फैसलों का असर परिवहन, आवास, संपत्ति रजिस्ट्रेशन और सरकारी कर्मचारियों के नियमों पर सीधे तौर पर पड़ेगा।

सबसे बड़ा फैसला प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने को लेकर लिया गया। अब किसी भी जमीन या मकान की बिक्री से पहले विक्रेता का नाम खतौनी से मिलान किया जाएगा। अगर नाम में अंतर पाया जाता है तो रजिस्ट्रेशन विभाग इसकी जांच करेगा, जिससे फर्जी रजिस्ट्री और विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर लगाम लगेगी।

कैबिनेट ने सीएम ग्राम परिवहन योजना-2026 को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रदेश की करीब 59 हजार ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ा जाएगा। जिन करीब 12,200 गांवों में अब तक बस नहीं पहुंची, वहां 28 सीटों वाली बसें चलाई जाएंगी। इस सेवा को टैक्स से छूट दी जाएगी और निजी ऑपरेटरों को भी बस संचालन की अनुमति दी जाएगी। बसों की औसत आयु 15 वर्ष तय की गई है और संचालन का अनुबंध 10 वर्ष का होगा।

एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये

परिवहन क्षेत्र में एक और अहम निर्णय लेते हुए सरकार ने मोटर व्हीकल नियमों में संशोधन का फैसला किया है। अब Ola और Uber जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को प्रदेश में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ड्राइवरों के लिए मेडिकल जांच, फिटनेस टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन भी जरूरी किया जाएगा। एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये तय की गई है।आवास के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया गया है। Pradhan Mantri Awas Yojana (शहरी) के तहत आवास निर्माण की लागत सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है। अब लाभार्थी 30 वर्गमीटर तक मकान बनवा सकेंगे। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।

डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी

सरकार ने कांशीराम आवास योजना के खाली पड़े मकानों की मरम्मत कराकर उन्हें जरूरतमंद दलित परिवारों को आवंटित करने का भी निर्णय लिया है। वहीं सरकारी कर्मचारियों के सेवा नियमों में बदलाव करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि छह महीने के मूल वेतन से अधिक के निवेश की जानकारी देनी होगी और हर साल अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना होगा।इसके अलावा Ayodhya में खेल परिसर के लिए भूमि हस्तांतरण, Kanpur ट्रांस गंगा सिटी में चार लेन पुल निर्माण और बुंदेलखंड क्षेत्र के Banda व Jhansi में डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव का फैसला

शिक्षकों को राहत देते हुए सरकार ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। अब अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस योजना से प्रदेश के करीब 1.28 लाख शिक्षकों को लाभ मिलने का अनुमान है। इसके लिए प्रति शिक्षक लगभग 2479 रुपये का प्रीमियम तय किया गया है और सरकार पर करीब 31.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।सरकार का कहना है कि इन फैसलों से ग्रामीण परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता आएगी और शिक्षकों व कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
गन्ना लदी ट्राली से टकराई बाइक,परीक्षा देने जा रहे छात्र की मौत

*आज ही बहन की आनी थी लगन

गोंडा।जिले में हाईस्कूल की परीक्षा देने जा रहे छात्र जावेद(16) की सड़क हादसे में मौत हो गई।यह घटना इटियाथोक थाना क्षेत्र के गोंडा बलरामपुर मार्ग पर स्थित गन्ना क्रय केंद्र बकठोरवा के पास हुई।जावेद अपनी मोटरसाइकिल से इंद्र कुंवरि इंटर कॉलेज इटियाथोक जा रहा था।परीक्षा केंद्र जाते समय उसकी मोटरसाइकिल एक गन्ना लदी ट्रैक्टर ट्रॉली से टकरा गई।यह ट्राली गन्ना क्रय केंद्र पर गन्ना बेचने जा रहे एक किसान की थी।टक्कर इतनी भीषण थी कि जावेद सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 के पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे और घायल जावेद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटियाथोक पहुंचाया।जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया।मेडिकल कालेज पहुंचने पर डॉक्टरों ने जावेद को मृत घोषित कर दिया।मृतक छात्र जावेद कौड़िया थाना क्षेत्र के आर्यनगर कस्बे का निवासी था और राम कुमारी इंटर कॉलेज कौड़िया में पढ़ता था।वह माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के हाईस्कूल चित्रकला विषय की परीक्षा देने जा रहा था।इससे पहले भी वह पांच विषयों की परीक्षा मोटरसाइकिल से देकर सकुशल लौट चुका था।इस दुखद हादसे की जानकारी मिलने पर जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने शोक व्यक्त किया है।मृतक जावेद के पिता कलीम अख्तर शटरिंग सर्विस का काम करते हैं।जावेद दो भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटा था।बड़े भाई का नाम परवेज खान है जो 26 वर्ष का है।जबकि मृतक जावेद की उम्र 16 वर्ष है।मृतक जावेद की चार बहनों में दो की शादी हो चुकी है और दो बहनों की अभी शादी नहीं हुई है जिसमें बहन सादिया (22) की आज लगन आनी थी,परन्तु बहन की लगन आने से पहले ही भाई की मौत हो गयी है।छोटी बहन की शादी 30 तारीख को है और परिवार के लोग उसकी तैयारी कर रहे थे।सड़क हादसे में जावेद की मौत के बाद बहन के लगन जाने का कार्यक्रम फिलहाल टल गया है।जावेद के परिजन पूरी तरह से परेशान हैं और रो रो कर बुरा हाल है।जो भी इस हादसे के बारे में सुन रहा है वह जावेद के घर पहुंचकर पिता कलीम और परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहा है।इटियाथोक थानाध्यक्ष कृष्ण गोपाल राय ने  बताया कि जावेद अपनी तेज रफ्तार मोटरसाइकिल से परीक्षा देने जा रहा था कि इसी दौरान गन्ना बेचने के लिए जा रहे एक किसान की ट्रैक्टर ट्रॉली में भिंड़ गया और उसी की टक्कर होने से जावेद की मौत हो गई।मृतक के शव को कब्जे में लेकर पंचायत नामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्यवाही की जा रही है।
भाजपा नेता की गाड़ी में खनन डंपरों की चेकिंग, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप, तहसीलदार का तबादला
मुरादाबाद। मुरादाबाद  में एक तहसीलदार का भाजपा नेता की गाड़ी में बैठकर खनन से जुड़े डंपरों की चेकिंग करना भारी पड़ गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए तहसीलदार Praveen Kumar का तबादला कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, ठाकुरद्वारा में तैनात तहसीलदार प्रवीण कुमार पर आरोप लगा कि वह भाजपा नेता की गाड़ी में बैठकर उत्तराखंड से आने वाले खनन डंपरों की चेकिंग कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
वीडियो सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल एडीएम वित्त एवं राजस्व को जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में मामला गंभीर पाए जाने पर तहसीलदार के वेतन आहरण पर भी रोक लगा दी गई और शासन को रिपोर्ट भेजी गई।
हालांकि तहसीलदार प्रवीण कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी सरकारी गाड़ी रास्ते में खराब हो गई थी, इसलिए उन्होंने भाजपा नेता की गाड़ी से लिफ्ट लेकर मौके तक पहुंचकर चेकिंग की।
बताया जा रहा है कि प्रवीण कुमार विशेष पुनरीक्षण (SIR) कार्य में भी लगे हुए थे। इसी कारण करीब एक माह पहले उनका किया गया तबादला चुनाव आयोग की अनुमति न मिलने के चलते रोक दिया गया था। अब अनुमति मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें ठाकुरद्वारा से हटाकर बिलारी तहसील भेज दिया है।
इसके साथ ही प्रशासनिक फेरबदल में तहसील सदर के तहसीलदार धीरेश कुमार सिंह को ठाकुरद्वारा भेजा गया है, जबकि बिलारी में तैनात अंकित गिरी को तहसील सदर स्थानांतरित किया गया है।इस पूरे मामले ने प्रशासनिक निष्पक्षता और खनन जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मोहनलालगंज में दिव्यांग मां-बेटे की हत्या, पुलिस ने शुरू की गहन जांच
लखनऊ: मोहनलालगंज के सीसेंडी गांव में सोमवार देर शाम एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 45 वर्षीय रेशमा बानो और उनका 18 वर्षीय पुत्र शादाब, दोनों दृष्टिबाधित, अपने घर में मृत पाए गए। घटना की भयावहता इस कदर थी कि रेशमा का शव चारपाई के नीचे पड़ा मिला, जबकि शादाब का शव पानी भरे टब में पड़ा था। दोनों के गले पर कपड़े से दबाव डालने के निशान पाए गए हैं, जिससे प्रारंभिक रूप से दम घोंटकर हत्या करने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पड़ोसियों ने दी घटना की सूचना
सूचना मिलने पर थाना मोहनलालगंज की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पड़ोसियों ने बताया कि शाम करीब 6 बजे रेशमा से फोन पर बात हुई थी, लेकिन थोड़ी देर बाद उनके फोन पर किसी ने हाथ डाल दिया और बातचीत में रुकावट आई। पड़ोसी सलमान और फरहान घर पहुंचे तो देखा कि दरवाजा बाहर से बंद था। अंदर जाकर उन्हें दोनों मृतक मिले।
घटना की परिस्थिति और प्रारंभिक जांच
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। एसीपी विकास कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों शव घर के अंदर पाए गए और प्रथम दृष्टया हत्या से पहले संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही हत्या के कारण और आरोपी की पहचान स्पष्ट होगी।
रेशमा बानो अपने दिव्यांग बेटे के साथ रहती थीं। उनके पति इकबाल पठान की कोरोना के दौरान मौत हो चुकी थी। रेशमा अपने बेटे का पालन-पोषण घर के बाहर छोटे व्यवसाय से करती थीं। घटना के समय परिवार का कोई और सदस्य घर पर नहीं था।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने पूरे घर का निरीक्षण कर फोरेंसिक टीम को बुलाया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। मामले के शीघ्र खुलासे और हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अफवाहों के संबंध में भी चेतावनी जारी की कि केवल अधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
गांव में तनाव का माहौल
घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। पड़ोसी और स्थानीय लोग इस भयावह हत्या की वजह जानने के लिए पुलिस और मीडिया से लगातार संपर्क में हैं।
पुलिस ने बताया कि मामले की तीव्र और गहन जांच जारी है और जल्द ही दोषियों को पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
जब जब मोदी डरते हैं पुलिस  आगे करते हैं यूजीसी काले कानून वापस ले : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे 8 मार्च को जंतर मंतर नई दिल्ली में एडवोकेट अनिल मिश्रा जी के नेतृत्व में प्रदर्शन करने के बाद आज लखनऊ आने पर आवास पर लोगों से बात करते हुए कहा कि देश के 35 करोड़ सवर्ण समाज यह सवाल है कि जवाब जरूर देना यूजीसी के खिलाफ़ दिल्ली मे सवर्ण समाज के आंदोलन को रोकने के बाद क्या सवर्ण समाज मोदी को वोट करेगा? जिस तरह से दिल्ली पुलिस पूरी घेरा बंदी कर संबंधानिक शांति ढंग से प्रोटेस्ट कर ने गए थे को चारों तरफ से घेर कर गिरफ्तार कर रही थी बसे कम हो गई। भाजपा सवर्ण के आंदोलन के आयोजन से भयभीत नहीं है उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया घर घर तक ये बात पहुंच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 11 वर्षों में कौसा तुष्टिकरण किया है जो उनका बनाया हुआ अवतारी पुरुष हिन्दू , हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है वो इस खबर को विषय को यही रोकना चाहते हैं क्यों कि संघ से लेकर भाजपा के अंदुरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया कि यह विषय उतना छोटा नहीं था। क्यों कि जब UGC अधिनियम आया और लोगों ने विरोध करना शुरु किया  तब भाजपा और संघ के नेताओं का अंदरूनी कहना था कि इस विरोध से कुछ होने वाला नहीं है चार लोग सड़क पर नहीं आयेंगे किन्तु जब लोगों ने सड़क पर उतरना शुरू किया तब  हाउस अरेस्ट किया गया और राजधानी आने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन न करने को पूरी ताग़त झोंक दी लेकिन सवर्ण ने यह दिखा दिया कि जब तक UGC बिल वापस नहीं होगा सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा जब भी मोदी सरकार डरती है पुलिस को आगे करती है के नारों से राजधानी नई दिल्ली गुंजा जिंदर देखो पूरा दिल्ली सवर्ण समाज से पटा था।
पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन हुई अटल आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा
लखनऊ। श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में चल रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश हेतु परीक्षा पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन आयोजित की गई। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जनपदों में बनाए गए 89 केंद्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर योजना के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

21 हजार विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश परीक्षा में हिस्सा

कक्षा 6 में प्रवेश के लिए निर्धारित 2880 सीटों के सापेक्ष 12,018 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि कक्षा 9 की 1140 सीटों के लिए 9,054 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार दोनों कक्षाओं को मिलाकर कुल 21,072 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया।

योगी सरकार का सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन पर फोकस

इस बार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र प्रदेश स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराए गए, जिससे सभी परीक्षा केंद्रों पर समान मानकों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जा सकी। योगी सरकार ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग, नामित नोडल अधिकारियों और केंद्र अधीक्षकों के माध्यम से समुचित व्यवस्थाएं कराईं। सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई।

निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा

गौरतलब है कि अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, पुस्तकें, खेलकूद सुविधाएं और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां उपलब्ध कराई जातीं हैं। इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप आधुनिक कक्षाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
संभल में मस्जिद और दरगाह अवैध घोषित, कोर्ट ने इमाम पर लगाया 7 करोड़ का जुर्माना
संभल। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय तहसीलदार काेर्ट ने जिले के पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में सरकारी जमीन पर
बन शाही मस्जिद, मकान और दरगाह काे अवैध बताते हुए हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही काेर्ट ने शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन पर सात कराेड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है। साेमवार काे संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा कर बनाए गए मकान, मस्जिद और दरगाह हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है।

इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। 30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल की गयी जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।

इस प्रकरण में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। वर्ष 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल ने ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है। उन्हाेंने बताया कि आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाएगा और जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
जनपद संभल में शाही इमाम ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया घर, तहसीलदार कोर्ट ने खाली करने का दिया आदेश, 7 करोड़ का जुर्माना लगाया

संभल। जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यहां शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है।
संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है
सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर यह निर्माण किया गया था। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है।
आरोप है कि शाही इमाम आफताब हुसैन पुत्र खुर्शीद हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन ने इस जमीन पर पक्का मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण कराया।
मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिला। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।

30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल किया गया। जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई।

प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
इस विषय में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही।

उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल द्वारा ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाकर जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।