*पुलिस लाइन में रिक्रूट्स का शौर्य चमका,तीन दिवसीय खेल महोत्सव संपन्न* सुलतानपुर।पुलिस लाइन सुलतानपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट्स के
*पुलिस लाइन में रिक्रूट्स का शौर्य चमका,तीन दिवसीय खेल महोत्सव संपन्न*


सुलतानपुर।पुलिस लाइन सुलतानपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट्स के लिए आयोजित तीन दिवसीय खेल प्रतियोगिता एकता और शौर्य रविवार को उत्साह के साथ संपन्न हुई। पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह के निर्देशन में हुए इस आयोजन में रिक्रूट्स ने एथलेटिक्स, कोर्ट गेम्स और टीम खेलों में दमखम दिखाया।एसपी ने फीता काटकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया और रिक्रूट्स को खेलों के माध्यम से टीम भावना, अनुशासन और निर्णय क्षमता को मजबूत करने का संदेश दिया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में 1600 मीटर दौड़, रिले, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, रस्साकसी और चेस जैसे मुकाबलों में प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया।खेलों के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक सहित क्षेत्राधिकारी लाइन, प्रतिसार निरीक्षक, प्रभारी आरटीसी और समस्त आरटीसी स्टाफ मौजूद रहा। अधिकारियों ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और उनके प्रदर्शन की सराहना की।बैडमिंटन में टोली नंबर 02 के मनोज सिंह चेस्ट 47 व अशोक धाकड़ चेस्ट 46 विजेता रहे, जबकि टोली 09 के रितिक चंदेल चेस्ट 255 व साहिल यादव चेस्ट 261 उपविजेता बने।टेबल टेनिस में टोली नंबर 01 से साहिल यादव चेस्ट 261 और रितिक चंदेल चेस्ट 255 विजेता रहे, वहीं टोली 02 के शशांक कुमार चेस्ट 157 व सतेन्द्र कुमार चेस्ट 175 उपविजेता रहे।
करनैलगंज नगर पालिका में ‘खड़ाऊं राज’! महिला चेयरमैन के बजाय पति संभाल रहे कुर्सी, एडीएम के बगल की तस्वीर वायरल

गोंडा। करनैलगंज नगर पालिका में नियम-कायदों को ताक पर रखकर खुलेआम “खड़ाऊं राज” चलने की चर्चा ज़ोरों पर है। नाम मात्र की महिला चेयरमैन रामलली घर की ड्योढ़ी तक सीमित हैं, जबकि उनके पति रामजी लाल खुलेआम चेयरमैन की कुर्सी व अधिकारों का इस्तेमाल करते नज़र आ रहे हैं। शासन व जिला प्रशासन की ओर से जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चेयरमैन प्रतिनिधि का इस तरह कुर्सी पर बैठना अवैध है, लेकिन नगर पालिका में मानो नियमों की धज्जियां उड़ाने को ही परंपरा बना दिया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हो गया जब एडीएम गोंडा के ठीक बगल में नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर अध्यक्ष प्रतिनिधि रामजीलाल की बैठे हुए तस्वीर वायरल हो गई, जो बीते 23 नवंबर 2025 को नगर पालिका परिषद कार्यालय में आयोजित सरकारी बैठक की बताई जा रही है जो जीपीएस कैमरे से खींची गई तस्वीर में साफ तौर पर देखी जा सकती है।

यह तस्वीर देखते ही देखते चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है, जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही है। सूत्र बताते हैं कि महिला चेयरमैन रामलली महज़ पद नाम बनकर रह गई हैं। अधिकांश सरकारी पत्रावली, प्रस्ताव और विभागीय फाइलों में चेयरमैन के हस्ताक्षर तक उनके पति व परिजन खुद करते हैं। इतना ही नहीं, अधिकांश बैठकों में महिला चेयरमैन की गैरमौजूदगी रहती है और उनके पति ही चेयरमैन के तौर पर कुर्सी पर आसीन दिखाई देते हैं।

हैरत की बात यह है कि ऐसे कार्यक्रमों और बैठकों में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों की न तो कुर्सी पर इस अवैध कब्जे पर नजर जाती है, न ही कोई आपत्ति दर्ज की जाती है। आखिर यह अनदेखी है या जानबूझकर की जा रही अनदेखी —यह बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। नगर पालिका के इस ‘खड़ाऊं राज’ ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की मूल भावना और शासन के निर्देशों को खुली चुनौती दी है। अब देखना यह है कि वायरल तस्वीर के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है।

लखनऊ में अपहरण की आशंका: मैजापुर के 27 वर्षीय युवक लवलेश पांडे लापता, परिजनों में हड़कंप

गोंडा। जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मैजापुर निवासी 27 वर्षीय लवलेश पाण्डे के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने से परिवार में कोहराम मचा है। लवलेश अपने बड़े भाई अखिलेश पांडे के साथ इंदिरा नगर सी-ब्लॉक में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।

जानकारी के अनुसार, वह बीते दिन दोपहर करीब 2 बजे सब्जी लेने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। शाम करीब 5 बजे अखिलेश पांडे के मोबाइल पर लवलेश के ही फोन से एक संदिग्ध संदेश आया, जिसमें लिखा था कि “आपका भाई हमारे कब्जे में है, उसे सुरक्षित चाहते हो तो 50 लाख रुपये तैयार रखें। रुपये जहाँ लोकेशन भेजी जाएगी, वहीं पहुँचाना।”

इस संदेश के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। परिजनों का आरोप है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद पुलिस ने घटना को मात्र गुमशुदगी के रूप में दर्ज किया है, जबकि संदेश साफ तौर पर अपहरण की ओर इशारा करता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक बावन सिंह ने पुलिस कमिश्नर लखनऊ व संबंधित सीओ से बात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया है कि जांच तेजी से की जा रही है। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर लवलेश के मोबाइल की अंतिम लोकेशन हाथरस-अलीगढ़ सीमा क्षेत्र में मिली है, जिसके आधार पर टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।

उधर, परिवार के लोग बेहद परेशान हैं और अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। परिजनों ने उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि मामले को अपहरण के रूप में लेते हुए लवलेश पांडे की शीघ्र व सकुशल बरामदगी सुनिश्चित की जाए।

मोहम्मदपुर सकिश्त में पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क का कार्य अधूरा

बहसूमा (मेरठ) / ब्लॉक हस्तिनापुर।

ग्राम मोहम्मदपुर सकिश्त से मोड़ खुर्द तक पीडब्ल्यूडी द्वारा कराई जा रही सड़क निर्माण का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने सड़क को महीनों पहले ही अधूरा छोड़कर काम बंद कर दिया, जबकि कागज़ों में सड़क को पूर्ण दिखा दिया गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की आधी-अधूरी स्थिति के कारण आवागमन बेहद प्रभावित है और बरसात में कीचड़ व हादसों की संभावना बढ़ जाती है। गांव के सुभाष कैप्टन, विनोद चौधरी, ईश्वर सिंह, परविंदर चौधरी, शरद कुमार, मनोज चौधरी, अनिल कुमार सहित अन्य किसानों ने बताया कि विभागीय लापरवाही के कारण लोग परेशान हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर इसे पूरा नहीं कराया गया, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

संत कोलंबा महाविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया एनसीसी दिवस

झारखंड बटालियन एनसीसी संत कोलंबा कॉलेज हजारीबाग द्वारा एनसीसी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कॉलेज प्रांगण कैडेट्स के राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और युवा ऊर्जा के उत्सव का साक्षी बना। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक प्रदीप प्रसाद थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ विमल रेवेन और एनसीसी कंपनी कमांडर कैप्टन डॉ. शत्रुघ्न कुमार पांडेय ने विधायक का गर्मजोशी से स्वागत किया। 

कार्यक्रम का आरंभ विधायक द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत कैप्टन पांडेय ने अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर किया। स्वागत भाषण में कैप्टन पांडेय ने कहा कि यह कॉलेज के लिए गर्व की बात है कि इस कॉलेज के विद्यार्थी रहे विधायक महोदय यहां उपस्थित रहे हैं। उन्होंने एनसीसी की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाल।

मुख्य अतिथि विधायक श्री प्रदीप प्रसाद ने अपने एनसीसी के दिनों को याद करते हुए कहा कि वास्तव में एनसीसी एकता और अनुशासन का प्रतीक है। एनसीसी हमारे युवा पीढ़ी को सही दिशा देने और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का कार्य करती है। यह शारीरिक और मानसिक विकास के मदद करती है। विधायक ने अपने कॉलेज के दिनों को भी याद किया।

 प्राचार्य डॉ. विमल रेवेन ने कैडेट्स के परिश्रम और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि हमारे कैडेट्स शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्रसेवा के प्रति भी पूर्णतः समर्पित हैं।उन्होंने कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं और हर कार्य के लिए तत्पर रहते हैं। 

कैडेट्स ने डिजिटल मोड में कॉलेज एनसीसी के कार्य का प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम, पोस्टर प्रतियोगिता और क्विज का कार्यक्रम किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कैडेट्स ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। नृत्य प्रतियोगिता में कैडेट्स ने देशभक्ति और सांस्कृतिक विषयों पर मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। गायन प्रतियोगिता में मधुर स्वरों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया, जबकि वाद्य यंत्रों विशेष रूप से बाँसुरी वादन में कैडेट्स ने अपनी कलात्मकता का परिचय दिया।

एनसीसी महा निदेशक द्वारा सम्मानित यूओ सोनी कुमारी को प्राचार्य और कप्तान पाण्डेय ने सम्मानित किया।

प्रतियोगिताओं के पश्चात विजेता एवं प्रतिभागी कैडेट्स को मेडल देकर कप्तान पाण्डेय ने पुरस्कृत किया। सभी प्रतिभागियों को उनके साहसिक प्रयासों के लिए प्रोत्साहित भी किया गया। इस सफल आयोजन में एसयूओ आलोक कुमार, यूओ नीतीश कुमार, यूओ अभिनंदन कुमार, पियूष कुमार, यूओ सोनी कुमारी और अन्य कैडेट्स के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का संचालन कैडेट्स वैष्णवी सिन्हा और काजल कुमारी के किया। एनसीसी के गीत के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम का समापन सामूहिक एनसीसी गीत के साथ हुआ, जिसने राष्ट्रभक्ति की भावना को और गहरा कर दिया। संत कोलंबा महाविद्यालय का यह एनसीसी दिवस का आयोजन अनुशासन, प्रतिभा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण के संदेश के साथ संपन्न हुआ, जिसने सभी उपस्थित लोगों को गर्व और प्रेरणा से भर दिया। यह कार्यक्रम न केवल कैडेट्स के लिए बल्कि पूरे शैक्षणिक परिसर के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ।

मुंबई : मालाड वॉकथॉन में 7000 से अधिक प्रतियोगियों ने भाग लेकर बनाया रिकॉर्ड
सिद्धेश्वर पाण्डेय
मुंबई। टीम मालाड वॉकथॉन द्वारा 30 नवंबर को संजय गांधी प्लेग्राउंड, मालाड पूर्व में मालाड वॉकथॉन 6.0 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमे 7 हजार से अधिक प्रतिभागियों की अभूतपूर्व भागीदारी के साथ, यह संस्करण उपनगरीय मुंबई के सबसे बड़े और सबसे उद्देश्य-संचालित सार्वजनिक फिटनेस आंदोलनों में से एक के रूप में उभरा, जिसने एक प्रभावशाली मंच के तहत फिट इंडिया और स्किल इंडिया की भावना को एकजुट किया। निर्मल बांग, अग्रवाल ग्रुप ऑफ कंपनीज, डाइनेमिक्स, डॉ. अनील काशीप्रसाद मुरारका (संस्थापक, एम्पल मिशन) और कुसुम मधुसूदन माहेश्वरी (वेदांत फाउंडेशन) सहित प्रमुख संस्थानों द्वारा समर्थित, वॉकथॉन ने सफलतापूर्वक समावेशी फिटनेस, सामाजिक प्रभाव और बड़े पैमाने पर सामुदायिक गतिशीलता का मिश्रण किया। इस आयोजन में 2 लाख रुपए का पुरस्कार पूल भी शामिल था, जिसे प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में वितरित किया गया। इस वर्ष, वॉकथॉन ने बीवीपी फिल्म सिटी चैरिटी ट्रस्ट के साथ अपने जुड़ाव के माध्यम से सशक्तिकरण के अपने मिशन को और मजबूत किया, जिसने पहले ही 800 से अधिक वंचित युवाओं को नौकरी-कौशल पाठ्यक्रम पूरे करने और सार्थक रोज़गार सुरक्षित करने में सक्षम बनाया है। इस आयोजन में रोटरी क्लब, लायंस क्लब, भारत विकास परिषद, ब्रह्मा कुमारी, एम्पल मिशन और कई सामुदायिक संगठनों सहित प्रमुख एनजीओ भागीदारों की मजबूत भागीदारी देखी गई, जिसने इस संस्करण को उपनगरीय मुंबई में सबसे अधिक सहयोगी नागरिक पहलों में से एक बना दिया। क्षेत्र में किसी भी सार्वजनिक दौड़ के लिए एक ऐतिहासिक प्रथम के रूप में, 2025 वॉकथॉन ने भारत के रक्षा और वर्दीधारी सेवाओं के स्पेक्ट्रम से उत्साही भागीदारी देखी, जिसमें भारतीय नौसेना, सेना, वायु सेना, एनएसजी, सीआईएसएफ, फोर्स वन, मुंबई पुलिस, एसआरपीएफ, तटरक्षक बल और अन्य अभिजात वर्ग इकाइयों के कर्मियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। उनकी उपस्थिति ने वॉकथॉन को मुंबई के सबसे अधिक रक्षा-समावेशी फिटनेस समारोहों में से एक में बदल दिया, जिसने हजारों लोगों को प्रेरित किया जिन्होंने भारत के बेहतरीन लोगों के साथ चले और दौड़े। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण सजीव 3 किमी साड़ी वॉक था, जिसमें 1,000 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया, जो सशक्तिकरण, सांस्कृतिक गौरव और सच्ची समावेशिता का प्रतीक था। वॉकथॉन में मजबूत युवा भागीदारी भी देखी गई, जिसमें चिल्ड्रन एकेडमी, डीजी खेतान इंटरनेशनल स्कूल, गोकुलधाम स्कूल्स, राजस्थान सम्मेलन एजुकेशन ट्रस्ट और एसोसिएट्स एजुकेशन ट्रस्ट के तहत कॉलेजों के 2,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया, जिससे यह उपनगरों में सबसे बड़े छात्र-संचालित फिटनेस आयोजनों में से एक बन गया। सभी प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल और नाश्ता मिला, जबकि ऊर्जावान जुम्बा सेशन, संगीत ज़ोन और समर्पित फोटो पॉइंट्स ने दौड़ के दिन के माहौल को जीवंत और आकर्षक बनाए रखा। प्रतिभागी सुरक्षा सुनिश्चित करना एक सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रही, जिसमें संजीवनी सर्जिकल एंड जनरल हॉस्पिटल ने आधिकारिक चिकित्सा भागीदार के रूप में सेवा की, जिसे पूरे स्थान पर तैनात प्रशिक्षित डॉक्टरों, एम्बुलेंसों और फिजियोथेरेपी टीमों द्वारा समर्थित किया गया। टाइटल प्रायोजक किशोर बांग, निर्मल बांग के प्रबंध निदेशक और सिक्स वर्ल्ड मेजर मैराथन फिनिशर ने कहा, "फिटनेस जीवन को बदलता है। मालाड वॉकथॉन परिवारों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और समुदायों को एक उद्देश्य के साथ एक साथ लाता है। अपने उद्देश्य, भारी भागीदारी, राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व, एनजीओ सहयोग और सामुदायिक एकता के मिश्रण के साथ, निर्मल बांग प्रस्तुत मालाड वॉकथॉन 6.0 फिटनेस, सशक्तिकरण और परिवर्तन के लिए मुंबई के सबसे प्रेरणादायक रविवार की सुबह में से एक के रूप में संपन्न हुआ।
झारखंड में 'PM फसल बीमा योजना' की शुरुआत: रबी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित

प्रीमियम का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी; बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर

झारखंड सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए रबी फसलों हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत कर दी है। इस योजना के तहत किसानों को बीमा के लिए भारी-भरकम प्रीमियम नहीं देना होगा, क्योंकि प्रीमियम का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि किसान को देनी होगी।

लागू जिले और अधिसूचित फसलें

लागू जिले (11): धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, पाकुड़, रांची, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और खूंटी।

अधिसूचित फसलें (मौसम 2025-26): आलू, सरसों, चना और गेहूं।

बीमा कवर और भुगतान

कवर: कम बारिश, अत्यधिक बारिश, खेतों में 14 दिन तक पानी भरा रहने या सूखे जैसी आपदा की स्थिति में किसानों का दावा मान्य होगा और उन्हें क्षतिपूर्ति दी जाएगी।

भुगतान: बीमा का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाएगा।

अंतिम तिथि और आवेदन प्रक्रिया

बीमा कराने की अंतिम तिथि: 31 दिसंबर।

आवेदन माध्यम: किसान अपनी फसलों का बीमा नजदीकी सेंटरों और ऑनलाइन माध्यम से करा सकेंगे।

अनिवार्य दस्तावेज: आवेदन के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, भूमि संबंधी कागजात और बैंक खाता अनिवार्य होगा।

लखनऊ की सड़कों पर आफत: बाइक सवार युवक की मौत, कार सवारों का तांडव
लखनऊ । राजधानी में शनिवार को सड़क पर दो अलग-अलग घटनाओं ने सनसनी फैला दी। हुसैनगंज में नशे में कार चला रहे युवक की तेज रफ्तार कार बाइक सवार भाइयों से टकरा गई, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, सरोजनीनगर के बंथरा में कार सवार ने ऑटो चालक से विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया और तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हुसैनगंज में बाइक सवार भाई पर कार की टक्कर

हुसैनगंज इलाके में शनिवार रात बाइक चला रहे मनीष कुमार (39) और उनके भाई दीपक के ऊपर पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। मनीष की मौके पर मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल है।मनीष के भाई नितिन ने बताया कि दोनों भाई शादी से लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष का हेलमेट सिर से छिटक गया और दोनों बाइक सहित करीब 50 मीटर तक घिसटते चले गए।पुलिस ने दोनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मनीष को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दीपक को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। आरोपी कार चालक अभी फरार है। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बंथरा में कार सवार का उत्पात, तीन लोग घायल

सरोजनीनगर के बंथरा कस्बे में शनिवार शाम एक कार चालक ने ऑटो चालक से ओवरटेक विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया। उसने पहले ऑटो चालक को पीटा और फिर गुस्से में कार दौड़ा कर भीड़ में घुस गया।इस घटना में स्कूटी सवार शिक्षिका दिव्या वर्मा, सुशील गुप्ता (50) और गुड्डू (55) घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने कार पर ईंट-पत्थर बरसाए। आरोपी कार छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने घायल शिक्षिका की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।दोनों ही घटनाओं ने सड़क सुरक्षा की अहमियत को दोबारा उजागर कर दिया है। पुलिस जनता से सतर्क रहने और तेज रफ्तार वाहन से बचने की अपील कर रही है।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
*प्रॉपर्टी डीलर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मौत,मृतक का शव बाग में मिला*
सुल्तानपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कोतवाली देहात के उचहरा गांव स्थित एक बाग में मिला है। इस मृतक की पहचान भपटा निवासी 45 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता के रूप में हुई है।......... शिवकुमार गुप्ता हनुमानगंज के असई चौराहे पर अपने परिवार के साथ रहते था। और वह प्रॉपर्टी के काम के साथ-साथ असई चौराहे पर किराना,बर्तन और फल की दुकान भी चलाता था, जिसकी देखरेख उनकी पत्नी करती थीं। मृतक के छोटे बेटे सनी गुप्ता ने बताया कि घटना वाली रात उनके पिता दादाजी के लिए किराना दुकान से दूध और बिस्किट लाए थे। उन्होंने अपनी बहन से रोटी बनाकर रखने को कहा था और बताया था कि वे एक घंटे में लौट आएंगे। सनी के अनुसार,उनके पिता जबरदस्ती गाड़ी की चाबी लेकर गए,जबकि वे उन्हें रात में बाहर जाने से मना कर रहे थे। सुबह पड़ोसियों के फोन से उन्हें पिता की हत्या की जानकारी मिली। तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। सनी ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी के काम के बारे में कुछ नहीं बताते थे, इसलिए उन्हें किसी पर शक नहीं है। शिवकुमार का शव घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर भपटा और पाठक पुरवा गांवों के बीच एक बाग में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे सुमित कुमार गुप्ता की शादी 28 नवंबर 2024 को हुई थी और वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। घटना के बाद से पत्नी सुमन गुप्ता, बेटी शिवानी गुप्ता और पिता राम सिंगार गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे भाई के साथ जो घटना हुई इस सम्बन्ध में हम बहुत ज़्यादा नहीं बता सकते। इसलिए की भाई हनुमानगंज में रहता था और हम तीन किमी दूर भपटा में रहते हैं। सुबह हम गांव में खेत में काम कर रहे थे तब हमें पता चला की भाई के साथ ये घटना घटी। घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो दो सौ लोगों की भीड़ लगी थी। कब निकले घर से, घटना कैसे घटी ये उनका लड़का ही बता सकता है। कोई चोट है नहीं, गाड़ी उनकी मौजूद है मौके पर। क्या किया गया कुछ पता नहीं। शिवकुमार के बड़े भाई अशोक गुप्ता एक शिक्षा मित्र हैं। शिवकुमार हनुमानगंज के एक स्वयं सहायता समूह का भी सदस्य था,जहां से उसने ऋण लिया था।
*पुलिस लाइन में रिक्रूट्स का शौर्य चमका,तीन दिवसीय खेल महोत्सव संपन्न* सुलतानपुर।पुलिस लाइन सुलतानपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट्स के
*पुलिस लाइन में रिक्रूट्स का शौर्य चमका,तीन दिवसीय खेल महोत्सव संपन्न*


सुलतानपुर।पुलिस लाइन सुलतानपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट्स के लिए आयोजित तीन दिवसीय खेल प्रतियोगिता एकता और शौर्य रविवार को उत्साह के साथ संपन्न हुई। पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह के निर्देशन में हुए इस आयोजन में रिक्रूट्स ने एथलेटिक्स, कोर्ट गेम्स और टीम खेलों में दमखम दिखाया।एसपी ने फीता काटकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया और रिक्रूट्स को खेलों के माध्यम से टीम भावना, अनुशासन और निर्णय क्षमता को मजबूत करने का संदेश दिया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में 1600 मीटर दौड़, रिले, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, रस्साकसी और चेस जैसे मुकाबलों में प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया।खेलों के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक सहित क्षेत्राधिकारी लाइन, प्रतिसार निरीक्षक, प्रभारी आरटीसी और समस्त आरटीसी स्टाफ मौजूद रहा। अधिकारियों ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और उनके प्रदर्शन की सराहना की।बैडमिंटन में टोली नंबर 02 के मनोज सिंह चेस्ट 47 व अशोक धाकड़ चेस्ट 46 विजेता रहे, जबकि टोली 09 के रितिक चंदेल चेस्ट 255 व साहिल यादव चेस्ट 261 उपविजेता बने।टेबल टेनिस में टोली नंबर 01 से साहिल यादव चेस्ट 261 और रितिक चंदेल चेस्ट 255 विजेता रहे, वहीं टोली 02 के शशांक कुमार चेस्ट 157 व सतेन्द्र कुमार चेस्ट 175 उपविजेता रहे।
करनैलगंज नगर पालिका में ‘खड़ाऊं राज’! महिला चेयरमैन के बजाय पति संभाल रहे कुर्सी, एडीएम के बगल की तस्वीर वायरल

गोंडा। करनैलगंज नगर पालिका में नियम-कायदों को ताक पर रखकर खुलेआम “खड़ाऊं राज” चलने की चर्चा ज़ोरों पर है। नाम मात्र की महिला चेयरमैन रामलली घर की ड्योढ़ी तक सीमित हैं, जबकि उनके पति रामजी लाल खुलेआम चेयरमैन की कुर्सी व अधिकारों का इस्तेमाल करते नज़र आ रहे हैं। शासन व जिला प्रशासन की ओर से जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चेयरमैन प्रतिनिधि का इस तरह कुर्सी पर बैठना अवैध है, लेकिन नगर पालिका में मानो नियमों की धज्जियां उड़ाने को ही परंपरा बना दिया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हो गया जब एडीएम गोंडा के ठीक बगल में नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर अध्यक्ष प्रतिनिधि रामजीलाल की बैठे हुए तस्वीर वायरल हो गई, जो बीते 23 नवंबर 2025 को नगर पालिका परिषद कार्यालय में आयोजित सरकारी बैठक की बताई जा रही है जो जीपीएस कैमरे से खींची गई तस्वीर में साफ तौर पर देखी जा सकती है।

यह तस्वीर देखते ही देखते चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है, जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही है। सूत्र बताते हैं कि महिला चेयरमैन रामलली महज़ पद नाम बनकर रह गई हैं। अधिकांश सरकारी पत्रावली, प्रस्ताव और विभागीय फाइलों में चेयरमैन के हस्ताक्षर तक उनके पति व परिजन खुद करते हैं। इतना ही नहीं, अधिकांश बैठकों में महिला चेयरमैन की गैरमौजूदगी रहती है और उनके पति ही चेयरमैन के तौर पर कुर्सी पर आसीन दिखाई देते हैं।

हैरत की बात यह है कि ऐसे कार्यक्रमों और बैठकों में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों की न तो कुर्सी पर इस अवैध कब्जे पर नजर जाती है, न ही कोई आपत्ति दर्ज की जाती है। आखिर यह अनदेखी है या जानबूझकर की जा रही अनदेखी —यह बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। नगर पालिका के इस ‘खड़ाऊं राज’ ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की मूल भावना और शासन के निर्देशों को खुली चुनौती दी है। अब देखना यह है कि वायरल तस्वीर के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है।

लखनऊ में अपहरण की आशंका: मैजापुर के 27 वर्षीय युवक लवलेश पांडे लापता, परिजनों में हड़कंप

गोंडा। जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मैजापुर निवासी 27 वर्षीय लवलेश पाण्डे के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने से परिवार में कोहराम मचा है। लवलेश अपने बड़े भाई अखिलेश पांडे के साथ इंदिरा नगर सी-ब्लॉक में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।

जानकारी के अनुसार, वह बीते दिन दोपहर करीब 2 बजे सब्जी लेने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। शाम करीब 5 बजे अखिलेश पांडे के मोबाइल पर लवलेश के ही फोन से एक संदिग्ध संदेश आया, जिसमें लिखा था कि “आपका भाई हमारे कब्जे में है, उसे सुरक्षित चाहते हो तो 50 लाख रुपये तैयार रखें। रुपये जहाँ लोकेशन भेजी जाएगी, वहीं पहुँचाना।”

इस संदेश के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। परिजनों का आरोप है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद पुलिस ने घटना को मात्र गुमशुदगी के रूप में दर्ज किया है, जबकि संदेश साफ तौर पर अपहरण की ओर इशारा करता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक बावन सिंह ने पुलिस कमिश्नर लखनऊ व संबंधित सीओ से बात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया है कि जांच तेजी से की जा रही है। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर लवलेश के मोबाइल की अंतिम लोकेशन हाथरस-अलीगढ़ सीमा क्षेत्र में मिली है, जिसके आधार पर टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।

उधर, परिवार के लोग बेहद परेशान हैं और अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। परिजनों ने उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि मामले को अपहरण के रूप में लेते हुए लवलेश पांडे की शीघ्र व सकुशल बरामदगी सुनिश्चित की जाए।

मोहम्मदपुर सकिश्त में पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क का कार्य अधूरा

बहसूमा (मेरठ) / ब्लॉक हस्तिनापुर।

ग्राम मोहम्मदपुर सकिश्त से मोड़ खुर्द तक पीडब्ल्यूडी द्वारा कराई जा रही सड़क निर्माण का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने सड़क को महीनों पहले ही अधूरा छोड़कर काम बंद कर दिया, जबकि कागज़ों में सड़क को पूर्ण दिखा दिया गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की आधी-अधूरी स्थिति के कारण आवागमन बेहद प्रभावित है और बरसात में कीचड़ व हादसों की संभावना बढ़ जाती है। गांव के सुभाष कैप्टन, विनोद चौधरी, ईश्वर सिंह, परविंदर चौधरी, शरद कुमार, मनोज चौधरी, अनिल कुमार सहित अन्य किसानों ने बताया कि विभागीय लापरवाही के कारण लोग परेशान हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर इसे पूरा नहीं कराया गया, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

संत कोलंबा महाविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया एनसीसी दिवस

झारखंड बटालियन एनसीसी संत कोलंबा कॉलेज हजारीबाग द्वारा एनसीसी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कॉलेज प्रांगण कैडेट्स के राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और युवा ऊर्जा के उत्सव का साक्षी बना। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक प्रदीप प्रसाद थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ विमल रेवेन और एनसीसी कंपनी कमांडर कैप्टन डॉ. शत्रुघ्न कुमार पांडेय ने विधायक का गर्मजोशी से स्वागत किया। 

कार्यक्रम का आरंभ विधायक द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत कैप्टन पांडेय ने अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर किया। स्वागत भाषण में कैप्टन पांडेय ने कहा कि यह कॉलेज के लिए गर्व की बात है कि इस कॉलेज के विद्यार्थी रहे विधायक महोदय यहां उपस्थित रहे हैं। उन्होंने एनसीसी की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाल।

मुख्य अतिथि विधायक श्री प्रदीप प्रसाद ने अपने एनसीसी के दिनों को याद करते हुए कहा कि वास्तव में एनसीसी एकता और अनुशासन का प्रतीक है। एनसीसी हमारे युवा पीढ़ी को सही दिशा देने और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का कार्य करती है। यह शारीरिक और मानसिक विकास के मदद करती है। विधायक ने अपने कॉलेज के दिनों को भी याद किया।

 प्राचार्य डॉ. विमल रेवेन ने कैडेट्स के परिश्रम और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि हमारे कैडेट्स शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्रसेवा के प्रति भी पूर्णतः समर्पित हैं।उन्होंने कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं और हर कार्य के लिए तत्पर रहते हैं। 

कैडेट्स ने डिजिटल मोड में कॉलेज एनसीसी के कार्य का प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम, पोस्टर प्रतियोगिता और क्विज का कार्यक्रम किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कैडेट्स ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। नृत्य प्रतियोगिता में कैडेट्स ने देशभक्ति और सांस्कृतिक विषयों पर मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। गायन प्रतियोगिता में मधुर स्वरों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया, जबकि वाद्य यंत्रों विशेष रूप से बाँसुरी वादन में कैडेट्स ने अपनी कलात्मकता का परिचय दिया।

एनसीसी महा निदेशक द्वारा सम्मानित यूओ सोनी कुमारी को प्राचार्य और कप्तान पाण्डेय ने सम्मानित किया।

प्रतियोगिताओं के पश्चात विजेता एवं प्रतिभागी कैडेट्स को मेडल देकर कप्तान पाण्डेय ने पुरस्कृत किया। सभी प्रतिभागियों को उनके साहसिक प्रयासों के लिए प्रोत्साहित भी किया गया। इस सफल आयोजन में एसयूओ आलोक कुमार, यूओ नीतीश कुमार, यूओ अभिनंदन कुमार, पियूष कुमार, यूओ सोनी कुमारी और अन्य कैडेट्स के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का संचालन कैडेट्स वैष्णवी सिन्हा और काजल कुमारी के किया। एनसीसी के गीत के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम का समापन सामूहिक एनसीसी गीत के साथ हुआ, जिसने राष्ट्रभक्ति की भावना को और गहरा कर दिया। संत कोलंबा महाविद्यालय का यह एनसीसी दिवस का आयोजन अनुशासन, प्रतिभा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण के संदेश के साथ संपन्न हुआ, जिसने सभी उपस्थित लोगों को गर्व और प्रेरणा से भर दिया। यह कार्यक्रम न केवल कैडेट्स के लिए बल्कि पूरे शैक्षणिक परिसर के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ।

मुंबई : मालाड वॉकथॉन में 7000 से अधिक प्रतियोगियों ने भाग लेकर बनाया रिकॉर्ड
सिद्धेश्वर पाण्डेय
मुंबई। टीम मालाड वॉकथॉन द्वारा 30 नवंबर को संजय गांधी प्लेग्राउंड, मालाड पूर्व में मालाड वॉकथॉन 6.0 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमे 7 हजार से अधिक प्रतिभागियों की अभूतपूर्व भागीदारी के साथ, यह संस्करण उपनगरीय मुंबई के सबसे बड़े और सबसे उद्देश्य-संचालित सार्वजनिक फिटनेस आंदोलनों में से एक के रूप में उभरा, जिसने एक प्रभावशाली मंच के तहत फिट इंडिया और स्किल इंडिया की भावना को एकजुट किया। निर्मल बांग, अग्रवाल ग्रुप ऑफ कंपनीज, डाइनेमिक्स, डॉ. अनील काशीप्रसाद मुरारका (संस्थापक, एम्पल मिशन) और कुसुम मधुसूदन माहेश्वरी (वेदांत फाउंडेशन) सहित प्रमुख संस्थानों द्वारा समर्थित, वॉकथॉन ने सफलतापूर्वक समावेशी फिटनेस, सामाजिक प्रभाव और बड़े पैमाने पर सामुदायिक गतिशीलता का मिश्रण किया। इस आयोजन में 2 लाख रुपए का पुरस्कार पूल भी शामिल था, जिसे प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में वितरित किया गया। इस वर्ष, वॉकथॉन ने बीवीपी फिल्म सिटी चैरिटी ट्रस्ट के साथ अपने जुड़ाव के माध्यम से सशक्तिकरण के अपने मिशन को और मजबूत किया, जिसने पहले ही 800 से अधिक वंचित युवाओं को नौकरी-कौशल पाठ्यक्रम पूरे करने और सार्थक रोज़गार सुरक्षित करने में सक्षम बनाया है। इस आयोजन में रोटरी क्लब, लायंस क्लब, भारत विकास परिषद, ब्रह्मा कुमारी, एम्पल मिशन और कई सामुदायिक संगठनों सहित प्रमुख एनजीओ भागीदारों की मजबूत भागीदारी देखी गई, जिसने इस संस्करण को उपनगरीय मुंबई में सबसे अधिक सहयोगी नागरिक पहलों में से एक बना दिया। क्षेत्र में किसी भी सार्वजनिक दौड़ के लिए एक ऐतिहासिक प्रथम के रूप में, 2025 वॉकथॉन ने भारत के रक्षा और वर्दीधारी सेवाओं के स्पेक्ट्रम से उत्साही भागीदारी देखी, जिसमें भारतीय नौसेना, सेना, वायु सेना, एनएसजी, सीआईएसएफ, फोर्स वन, मुंबई पुलिस, एसआरपीएफ, तटरक्षक बल और अन्य अभिजात वर्ग इकाइयों के कर्मियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। उनकी उपस्थिति ने वॉकथॉन को मुंबई के सबसे अधिक रक्षा-समावेशी फिटनेस समारोहों में से एक में बदल दिया, जिसने हजारों लोगों को प्रेरित किया जिन्होंने भारत के बेहतरीन लोगों के साथ चले और दौड़े। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण सजीव 3 किमी साड़ी वॉक था, जिसमें 1,000 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया, जो सशक्तिकरण, सांस्कृतिक गौरव और सच्ची समावेशिता का प्रतीक था। वॉकथॉन में मजबूत युवा भागीदारी भी देखी गई, जिसमें चिल्ड्रन एकेडमी, डीजी खेतान इंटरनेशनल स्कूल, गोकुलधाम स्कूल्स, राजस्थान सम्मेलन एजुकेशन ट्रस्ट और एसोसिएट्स एजुकेशन ट्रस्ट के तहत कॉलेजों के 2,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया, जिससे यह उपनगरों में सबसे बड़े छात्र-संचालित फिटनेस आयोजनों में से एक बन गया। सभी प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल और नाश्ता मिला, जबकि ऊर्जावान जुम्बा सेशन, संगीत ज़ोन और समर्पित फोटो पॉइंट्स ने दौड़ के दिन के माहौल को जीवंत और आकर्षक बनाए रखा। प्रतिभागी सुरक्षा सुनिश्चित करना एक सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रही, जिसमें संजीवनी सर्जिकल एंड जनरल हॉस्पिटल ने आधिकारिक चिकित्सा भागीदार के रूप में सेवा की, जिसे पूरे स्थान पर तैनात प्रशिक्षित डॉक्टरों, एम्बुलेंसों और फिजियोथेरेपी टीमों द्वारा समर्थित किया गया। टाइटल प्रायोजक किशोर बांग, निर्मल बांग के प्रबंध निदेशक और सिक्स वर्ल्ड मेजर मैराथन फिनिशर ने कहा, "फिटनेस जीवन को बदलता है। मालाड वॉकथॉन परिवारों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और समुदायों को एक उद्देश्य के साथ एक साथ लाता है। अपने उद्देश्य, भारी भागीदारी, राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व, एनजीओ सहयोग और सामुदायिक एकता के मिश्रण के साथ, निर्मल बांग प्रस्तुत मालाड वॉकथॉन 6.0 फिटनेस, सशक्तिकरण और परिवर्तन के लिए मुंबई के सबसे प्रेरणादायक रविवार की सुबह में से एक के रूप में संपन्न हुआ।
झारखंड में 'PM फसल बीमा योजना' की शुरुआत: रबी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित

प्रीमियम का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी; बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर

झारखंड सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए रबी फसलों हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत कर दी है। इस योजना के तहत किसानों को बीमा के लिए भारी-भरकम प्रीमियम नहीं देना होगा, क्योंकि प्रीमियम का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि किसान को देनी होगी।

लागू जिले और अधिसूचित फसलें

लागू जिले (11): धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, पाकुड़, रांची, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और खूंटी।

अधिसूचित फसलें (मौसम 2025-26): आलू, सरसों, चना और गेहूं।

बीमा कवर और भुगतान

कवर: कम बारिश, अत्यधिक बारिश, खेतों में 14 दिन तक पानी भरा रहने या सूखे जैसी आपदा की स्थिति में किसानों का दावा मान्य होगा और उन्हें क्षतिपूर्ति दी जाएगी।

भुगतान: बीमा का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाएगा।

अंतिम तिथि और आवेदन प्रक्रिया

बीमा कराने की अंतिम तिथि: 31 दिसंबर।

आवेदन माध्यम: किसान अपनी फसलों का बीमा नजदीकी सेंटरों और ऑनलाइन माध्यम से करा सकेंगे।

अनिवार्य दस्तावेज: आवेदन के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, भूमि संबंधी कागजात और बैंक खाता अनिवार्य होगा।

लखनऊ की सड़कों पर आफत: बाइक सवार युवक की मौत, कार सवारों का तांडव
लखनऊ । राजधानी में शनिवार को सड़क पर दो अलग-अलग घटनाओं ने सनसनी फैला दी। हुसैनगंज में नशे में कार चला रहे युवक की तेज रफ्तार कार बाइक सवार भाइयों से टकरा गई, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, सरोजनीनगर के बंथरा में कार सवार ने ऑटो चालक से विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया और तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हुसैनगंज में बाइक सवार भाई पर कार की टक्कर

हुसैनगंज इलाके में शनिवार रात बाइक चला रहे मनीष कुमार (39) और उनके भाई दीपक के ऊपर पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। मनीष की मौके पर मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल है।मनीष के भाई नितिन ने बताया कि दोनों भाई शादी से लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष का हेलमेट सिर से छिटक गया और दोनों बाइक सहित करीब 50 मीटर तक घिसटते चले गए।पुलिस ने दोनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मनीष को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दीपक को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। आरोपी कार चालक अभी फरार है। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बंथरा में कार सवार का उत्पात, तीन लोग घायल

सरोजनीनगर के बंथरा कस्बे में शनिवार शाम एक कार चालक ने ऑटो चालक से ओवरटेक विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया। उसने पहले ऑटो चालक को पीटा और फिर गुस्से में कार दौड़ा कर भीड़ में घुस गया।इस घटना में स्कूटी सवार शिक्षिका दिव्या वर्मा, सुशील गुप्ता (50) और गुड्डू (55) घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने कार पर ईंट-पत्थर बरसाए। आरोपी कार छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने घायल शिक्षिका की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।दोनों ही घटनाओं ने सड़क सुरक्षा की अहमियत को दोबारा उजागर कर दिया है। पुलिस जनता से सतर्क रहने और तेज रफ्तार वाहन से बचने की अपील कर रही है।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
*प्रॉपर्टी डीलर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मौत,मृतक का शव बाग में मिला*
सुल्तानपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कोतवाली देहात के उचहरा गांव स्थित एक बाग में मिला है। इस मृतक की पहचान भपटा निवासी 45 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता के रूप में हुई है।......... शिवकुमार गुप्ता हनुमानगंज के असई चौराहे पर अपने परिवार के साथ रहते था। और वह प्रॉपर्टी के काम के साथ-साथ असई चौराहे पर किराना,बर्तन और फल की दुकान भी चलाता था, जिसकी देखरेख उनकी पत्नी करती थीं। मृतक के छोटे बेटे सनी गुप्ता ने बताया कि घटना वाली रात उनके पिता दादाजी के लिए किराना दुकान से दूध और बिस्किट लाए थे। उन्होंने अपनी बहन से रोटी बनाकर रखने को कहा था और बताया था कि वे एक घंटे में लौट आएंगे। सनी के अनुसार,उनके पिता जबरदस्ती गाड़ी की चाबी लेकर गए,जबकि वे उन्हें रात में बाहर जाने से मना कर रहे थे। सुबह पड़ोसियों के फोन से उन्हें पिता की हत्या की जानकारी मिली। तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। सनी ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी के काम के बारे में कुछ नहीं बताते थे, इसलिए उन्हें किसी पर शक नहीं है। शिवकुमार का शव घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर भपटा और पाठक पुरवा गांवों के बीच एक बाग में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे सुमित कुमार गुप्ता की शादी 28 नवंबर 2024 को हुई थी और वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। घटना के बाद से पत्नी सुमन गुप्ता, बेटी शिवानी गुप्ता और पिता राम सिंगार गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे भाई के साथ जो घटना हुई इस सम्बन्ध में हम बहुत ज़्यादा नहीं बता सकते। इसलिए की भाई हनुमानगंज में रहता था और हम तीन किमी दूर भपटा में रहते हैं। सुबह हम गांव में खेत में काम कर रहे थे तब हमें पता चला की भाई के साथ ये घटना घटी। घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो दो सौ लोगों की भीड़ लगी थी। कब निकले घर से, घटना कैसे घटी ये उनका लड़का ही बता सकता है। कोई चोट है नहीं, गाड़ी उनकी मौजूद है मौके पर। क्या किया गया कुछ पता नहीं। शिवकुमार के बड़े भाई अशोक गुप्ता एक शिक्षा मित्र हैं। शिवकुमार हनुमानगंज के एक स्वयं सहायता समूह का भी सदस्य था,जहां से उसने ऋण लिया था।