*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
अब सिर्फ मौजूदगी नहीं, नेतृत्व की तैयारी: मध्य प्रदेश की 40 साल पुरानी कंपनी बदलने
जा रही है भारतीय बेवरेज इंडस्ट्री की तस्वीर

 भारत के कई बड़े और चर्चित ब्रांड्स के पीछे काम करने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, ग्रेट गैलियन वेंचर्स
लिमिटेड अब अपने नए कंज्यूमर ब्रांड्स के साथ आ रही है
 अपने लंबे अनुभव, मजबूत कौशल और बाजार की बदलती जरूरतों की समझ के साथ भारतीय बेवरेज
मार्केट में नई पहचान बनाने की तैयारी
इंदौर, मई 2026: पिछले चार दशकों से ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड (जीजीवीएल) भारत की बेवरेज मैन्युफैक्चरिंग
इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नाम रहा है। कंपनी हमेशा से ही साइलेंट फोर्स की तरह इंडस्ट्री के कई बड़े ब्रांड्स और अहम्
पड़ावों का हिस्सा रही है, भले ही वह खुद ज्यादा चर्चा में न रही हो। सन् 1985 में मध्य प्रदेश के धार में 'हाउस ऑफ
केडियाज़' के तहत शुरू हुई इस कंपनी ने प्रोडक्शन, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबल पैकेजिंग इनोवेशन के क्षेत्र
में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इसी वजह से कई ग्लोबल स्पिरिट ब्रांड्स ने भी कंपनी पर भरोसा जताया है।
अब यही अनुभव और समझ कंपनी अपने खुद के भारतीय ड्रिंक्स पोर्टफोलियो को तैयार करने में लगा रही है, जिसे
खासतौर पर आज के मॉडर्न ग्राहकों की पसंद और जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड के वीपी- बिज़नेस ग्रोथ, उत्सव केडिया ने कहा, "बैच मास्टर की सबसे खास बात यह है
कि यह लोगों को सच में आश्चर्यचकित करती है और अपनी गुणवत्ता से प्रभावित करती है। इसमें इस्तेमाल किए गए
एज्ड स्कॉच माल्ट्स इसे ऐसी गहराई और स्वाद देते हैं, जिसकी उम्मीद लोग इस कीमत में नहीं करते। यह प्रीमियम
फील देती है, लेकिन ऐसी नहीं कि उसे खरीदने से पहले ज्यादा सोचना पड़े। हम इसी संतुलन को हासिल करना
चाहते थे और हमें लगता है कि हम इसमें सफल रहे हैं।"
जीजीवीएल की यह यात्रा भारत की एल्को-बेव इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलाव को भी उजागर करती है। कंपनी मध्य
प्रदेश में बेवरेज रिटेल के निजीकरण को आगे बढ़ाने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र
में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग सेटअप स्थापित करने में भी कंपनी की भूमिका अहम् रही है। समय के साथ इसने एक
ज़ीरो-वेस्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का रूप ले लिया, जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ इन-हाउस बॉटल प्रोडक्शन भी
किया जाता है। आज कंपनी के प्रोडक्ट्स ओमान, सिंगापुर, टोगो, कैमरून, नाइजर और फ्रीटाउन जैसे देशों तक पहुँच
रहे हैं और अपनी सटीकता, लगातार एक जैसी क्वालिटी और बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता के चलते कंपनी इंडस्ट्री की
भरोसेमंद पार्टनर बन चुकी है।
पिछले कुछ सालों में, कंपनी ने अपने रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव को कई कंज्यूमर ब्रांड्स तैयार
करने में लगाया है। इनमें वी21 प्रीमियम, जो भारत की पहली ऐसी वोडका है, जिसे 100 प्रतिशत सर्टिफाइड
आरपीईटी पैकेजिंग में पेश किया गया है, के साथ रास्कल आरटीडी, बिग बुल रम, रिट्ज प्रीमियम व्हिस्की और गोवा
व्हिस्की जैसे ब्रांड्स शामिल हैं।

कंपनी के इसी पोर्टफोलियो में नया नाम जुड़ा है- बैच मास्टर व्हिस्की। यह एक ब्लेंडेड व्हिस्की है, जिसे एज्ड स्कॉच
माल्ट्स के साथ तैयार किया गया है और खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए बनाई गई है, जो अपने रोजमर्रा के ड्रिंकिंग
एक्सपीरियंस को एक बेहतर स्तर पर ले जाना चाहते हैं। आईडब्ल्यूएसआर के आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 की
पहली छमाही में भारतीय व्हिस्की मार्केट में 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि प्रीमियम और उससे ऊपर की
कैटेगरी में 8 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। ऐसे समय में, जब दुनियाभर के कई बाजारों में प्रीमियमाइजेशन की
रफ्तार धीमी पड़ रही है, भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। 700 रुपए की कीमत में उपलब्ध बैच मास्टर फिलहाल
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों- इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, सागर, देवास, सतना, रीवा और
बुरहानपुर में उपलब्ध है। यह ब्रांड जीजीवीएल के उसी विज़न को आगे बढ़ाता है, जहाँ मजबूत मैन्युफैक्चरिंग
अनुभव और बदलते बाजार की माँग का सही मेल देखने को मिलता है।
दबंगों के खौफ और प्रभाव के आगे पीड़िता की पीड़ा पड़ जा रही कमजोर
*मासूम बच्चों संग थाने से लगाएं एसपी आफिस के चक्कर काट रही है पीड़िता
*न्याय न मिला तो बच्चों संग धरने पर बैठने की दी चेतावनी

मीरजापुर। दबंगों के खौफ और प्रताड़ना से डरी सहमी महिला ने बच्चों संग पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक से मिलकर अपनी फरियाद सुनाई है। महिला ने आरोप लगाया है कि यदि उसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो उसके व उसके बच्चों के साथ कभी भी कोई अप्रिय वारदात हो सकती है। जिले के लालगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बनवा (नौगांव) निवासनी पुष्पा पांडे ने एसपी को सौंपे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसी के गांव के रहने वाले लक्ष्मीकांत, कृष्णकांत इत्यादि उसकी जान के दुश्मन बने हुए हैं। पति रोज़ी रोजगार के सिलसिले में मुंबई में रहते हैं गांव में वह अपने पांच बच्चों के साथ गुजर-बसर करती है। उसके विपक्षी काफी सरहंग और दबंग किस्म के हैं जो आएं दिन उसे परेशान करते हुए आएं हैं। बीते 8 मई 2026 उसके घर पर दर्जनों की संख्या में चढ़कर आए उसके विपक्षियों ने जो शराब पीकर एकराय होकर आएं हुए थे जमकर तांडव मचाया। उसे और उसके बच्चों को बुरी तरह से मारने पीटने के साथ उसकी आबरू को भी लूटने का असफल प्रयास किया। इस दौरान पीड़ित बुरी तरह से ललुहान हो उठी उसके मुंह ओठ कट गये वहीं शरीर के कई हिस्सों में चोट भी आई। इतने सबके बाद भी दबंगों का जी नहीं भरा तो वह उसके शरीर के कपड़ों को खींच कर निर्वस्त्र करने लगे थे इसी बीच शोरगुल सुनकर गांव के लोग जुट गए तो वह जान-माल की धमकी देते हुए चले गए। पीड़िता की मानें तो रात्रि में पुलिस को सूचना दी गई तो बरौधा चौकी प्रभारी रात तकरीबन 7.30 बजे मौके पर आएं और सुबह लालगंज थाना पर पहुंचने की बात कह चलें गए‌। आश्चर्य की बात यह है कि चौकी प्रभारी के जाने के बाद रात 9.30 बजे पुनः सभी गोलबंद होकर धमक पड़े और उसके घर का दरवाजा पीटने लगे थे। जिसकी सूचना 112 नंबर पर देने पर 112 नंबर के दरोगा सुबह थाना आने की बात कहकर चलते बने।

*इलाज़ के लिए आए वाहन को भी किया क्षतिग्रस्त*

दबंगों की दहशतगर्दी का आलम यह रहा कि दर्द से कराह रही पीड़ित ने अपनी व बच्चों को इलाज़ के लिए जब एक निजी वाहन को बुलाया तो दबंगों ने उस वाहन को पत्थर के टुकड़ों से प्रहार कर क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे चालक वाहन समेत वापस लौट गया। इस बीच पीड़ित भय और दहशत के साए में पूरी रात घर में दुबकी स्वयं व बच्चों को लेकर डरी सहमी दर्द से कराहती रही है। पीड़िता के मुताबिक उसके विपक्षी इसके पूर्व में भी उसे मारपीट कर घायल कर चुके हैं जिसमें शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने तहरीर दर्ज कर तो ली थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से दबंगों का हौसला बुलंद बना हुआ है।

*महिला को न्याय मिलने में राजनैतिक दबाव आ यहा है आड़े*

पीड़िता पुष्पा ने आरोप लगाया है कि उसे और उसके बच्चों के साथ कभी भी कोई अप्रिय वारदात हो सकती है घटना वाली रात से ही वह बच्चों को लेकर न्याय के लिए दर-दर भटकने को विवश है। इसकी लिखित सूचना लालगंज कोतवाली पुलिस को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से उसे जान-माल का खतरा बना हुआ है। उसने आरोप लगाया है कि उसके विपक्षीयों के कुछ राजनैतिक पकड़ वाले व्यक्तियों से संबंध हैं जिनके प्रभाव में आकर पुलिस ने आजतक उसका मेडिकल भी कराना मुनासिब नहीं समझा है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए पत्र में अपनी व्यथा को सुनाते हुए जान-माल के ख़तरे की आशंका जताते हुए कहा है कि यदि उसके व उसके बच्चों के साथ कोई भी अप्रिय वारदात होती है तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी उसके विपक्षियों और लालगंज कोतवाली पुलिस की होगी।
कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म नहीं बल्कि जश्न का उत्सव-प्रतुल शाह देव


भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि ₹3000 करोड़ के बहुचर्चित टेंडर घोटाले के मुख्य अभियुक्त पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा पटाखे फोड़ना, नाच-गाना करना और उत्सव मनाना झारखंड की राजनीति के नैतिक पतन का सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और उनके सहयोगियों ने जिस प्रकार “बेल उत्सव” मनाया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म का नहीं बल्कि जश्न का विषय बन चुका है।प्रतुल ने कहा कि जिस व्यक्ति के निजी सचिव के सहायक के यहां से ईडी की छापेमारी में ₹32 करोड़ से अधिक नकद बरामद हुआ, जिस मामले में उस सहायक जहांगीर आलम ने स्वयं स्वीकार किया कि पैसा आलमगीर आलम का है, उस मामले में बेल मिलने पर कांग्रेसियों का नाचना पूरे राज्य की जनता का अपमान है। बेल को कांग्रेस “बाइज्जत बरी” की तरह प्रस्तुत कर रही है, जबकि देश की जनता जानती है कि बेल न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, भ्रष्टाचार मुक्त होने का प्रमाणपत्र नहीं।

प्रतुल ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और झामुमो गठबंधन की सरकार ने शायद नया नारा बना लिया है —'जहां घोटाला, वहां शर्म नहीं बल्कि जश्न मनेगा'।प्रतुल ने कहा कि आज झारखंड की स्थिति यह है कि गांवों में पेयजल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। कई जलमीनार शोपीस बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग की हालत इतनी बदतर है कि जिला अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और उपकरणों का भारी अभाव है। मरीज रेफर होकर दर-दर भटक रहे हैं।उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कें टूटी हुई हैं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है, बेरोजगार युवा निराश हैं, लेकिन कांग्रेस और झामुमो के नेताओं को जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं। उन्हें केवल घोटालेबाज नेताओं के स्वागत और बचाव में ऊर्जा दिखाई देती है।प्रतुल ने कहा कि जिस राज्य में किसान परेशान हो, युवा नौकरी के लिए पलायन कर रहे हों, महिलाएं असुरक्षित हों और विकास योजनाओं का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा हो, वहां सत्ता पक्ष द्वारा “भ्रष्टाचार उत्सव” मनाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

राहुल गांधी स्पष्ट करें कि क्या उनके युग में भ्रष्टाचार को उपलब्धि माना जाता है?

प्रतुल ने कहा कि राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो ₹3000 करोड़ के टेंडर घोटाले को “उपलब्धि” मानती है? क्या उनके युग में कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति है कि जनता के पैसे की लूट पर जश्न मनाया जाए?प्रतुल ने कहा कि झारखंड की जनता सब देख रही है। जनता को अब समझ में आ चुका है कि यह गठबंधन सरकार विकास नहीं, “कमीशन, करप्शन और कलेक्शन” के मॉडल पर चल रही है। आने वाले समय में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस भ्रष्ट और संवेदनहीन राजनीति का जवाब देगी। आज की प्रेस वार्ता में झारखंड प्रदेश भाजपा के सह मीडिया प्रभारी श्री योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

नगर पालिका के ठेकेदार कर रहे मनमानी, बनी बनाई सड़क को उखाड़ने का विरोध फर्रुखाबाद विकास मंच अध्यक्ष ने पहुंच कर रुकवाया काम

फर्रुखाबाद lबुधवार को नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद के अंतर्गत पल्ला से बजरिया जाने वाली सड़क पर पलरिया चौराहे से नवाब दिलावर जंग तक की बिल्कुल बनी बनाई नई सड़क पर टेंडर करके नगर पालिका के ठेकेदार ने कार्य को प्रारंभ कराया लोगों के विरोध के कारण जब काम बंद कराया गया तो ठेकेदार ने फिर से काम को प्रारंभ कर दिया l इस पर क्षेत्रवासियों ने फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा को  मौके पर बुलाया भईयन मिश्रा अपने कई समर्थकों के साथ में मौके पर पहुंचे वहां पर लोगों ने बताया की पूरी सड़क बिल्कुल सही है कुछ जगह नाली   गड़बड़ है उसको सही कराने के लिए बोला गया था  पर आज ठेकेदार के द्वारा बनी बनाई सड़क को उखाड़ कर नई सड़क बनाये जाने के लिए कार्य प्रारंभ कराया गया l मौके पर पहुंचे फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा ने कहा कि नगर पालिका भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है बनी बनाई सड़कों पर फिर से काम किया जा रहा है जबकि सारे शहर में बहुत सी ऐसी गालियां और सड़के हैं जहां पर कार्य की आवश्यकता है वहां पर कार्य नहीं कराया जा रहा है कार्य बह हो रहे है जिसमें नाम मात्र का  काम नहीं और बिना काम के लाखों रुपया  निकल जाए उन्होंने बताया कि पालिका अध्यक्ष के पति जो पूर्व में नगर पालिका के अध्यक्ष थे उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में कहा था कि मेरे द्वारा जो सड़क बनाई जाएगी वह 50 वर्षों तक बनवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी जबकि इन्हीं के कार्यकाल की बनी हुई सड़के कई बार बनाई जा चुकी है जब इतनी घटिया आपकी ब्रिक है तो उसको क्यों लगाया जा रहा है सीमेंटेड सड़के क्यों नहीं बनाई जा रही जबकि आवश्यकता गलियों में सीमेंट सड़कों की है बहुत जल्द इस प्रकार की भ्रष्टाचार की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से की जाएगी और शासन स्तर पर यह बताया जाएगा कि किस प्रकार से नगर पालिका सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही है उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि अपने स्तर से टीम गठित करके नगर पालिका के चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया जाए जो सड़के बन चुकी हैं और अच्छी थी उनको दोबारा बनाने की क्या आवश्यकता थी l इस
मौके पर निशित दुबे उर्फ नीशू पूर्व सभासद , आलोक मिश्रा भूरे, अंगद पांडे उर्फ कोमल पांडे, ओम निवास पाठक, सनी बाथम, विशाल कश्यप, नितिन भाटिया, आशू, राजीव वर्मा सहित कई लोगों उपस्थित रहेl
युवाओं के लिए सिविल सेवा का सुनहरा अवसर
* निःशुल्क IAS/PCS  कोचिंग के लिए 18 मई से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन, 5 जुलाई को होगी प्रवेश परीक्षा
* समाज कल्याण विभाग ने जारी किया प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए निःशुल्क कोचिंग और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर प्रशासनिक सेवाओं में अपनी पहचान बना सकें।
  असीम अरुण, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), ने कहा कि प्रदेश के मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रशासनिक सेवा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश में संचालित 8 आवासीय निःशुल्क आईएएस/पीसीएस परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्रों में प्रवेश के लिए सम्मलित प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है।
  समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन 18 मई से 18 जून 2026 तक विभागीय वेबसाइट www.socialwelfareup.upsdc.gov.in  पर किए जा सकेंगे। प्रवेश पत्र 25 जून से डाउनलोड होंगे, जबकि सम्मलित प्रवेश परीक्षा 05 जुलाई को होगी। परीक्षा परिणाम 28 जुलाई तक घोषित किए जाने की संभावना है। वहीं नया शैक्षणिक सत्र 01 अगस्त 2026 से शुरू किया जाएगा।

ये कर सकते हैं आवेदन:
1- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी
2-परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये या उससे कम
विषय विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन
इन केंद्रों पर अभ्यर्थियों को नि:शुल्क आवासीय सुविधा, भोजन, पुस्तकालय, ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लासेज, टेस्ट सीरीज और मुख्य परीक्षा के साथ ही इंटरव्यू के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहां विषय विशेषज्ञों और वरिष्ठ आईएएस और पीसीएस अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है। हाल ही में घोषित UPPCS-2024  परीक्षा में 44 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है।
डीपीएम पब्लिक स्कूल का सीबीएसई इंटरमीडिएट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन
क्षेत्र में लहराया सफलता का परचम, विद्यार्थियों ने बढ़ाया विद्यालय का मान

मेरठ। बहसूमा स्थित डी०पी०एम० पब्लिक स्कूल ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा घोषित कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम में शानदार एवं अभूतपूर्व सफलता हासिल कर क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विद्यालय का परीक्षा परिणाम इस वर्ष अत्यंत उत्कृष्ट रहा, जिसमें अधिकांश छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए तथा कई विद्यार्थियों ने उच्च अंक प्राप्त कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया।

विज्ञान संकाय में सरण्या सिंह ने 92.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं देव चौधरी ने 89.04 प्रतिशत अंक लेकर द्वितीय तथा रिया सोलंकी ने 87.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वाणिज्य संकाय में सिम्बुल ने 85.02 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि आस्था सिरोही ने 82.02 प्रतिशत अंकों के साथ द्वितीय और अंश ने 80.01 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।

विद्यालय के सम्मानित सचिव जगदीश त्यागी ने सभी सफल विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया तथा पूरे विद्यालय परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विद्यालय को मेरठ क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला विद्यालय बताते हुए गर्व व्यक्त किया।

प्रधानाचार्य जिया जैदी ने भी विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों की कड़ी मेहनत और विद्यार्थियों की लगन ने विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

परिणाम घोषित होने के बाद विद्यालय परिसर में खुशी और उत्साह का माहौल देखने क
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
अब सिर्फ मौजूदगी नहीं, नेतृत्व की तैयारी: मध्य प्रदेश की 40 साल पुरानी कंपनी बदलने
जा रही है भारतीय बेवरेज इंडस्ट्री की तस्वीर

 भारत के कई बड़े और चर्चित ब्रांड्स के पीछे काम करने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, ग्रेट गैलियन वेंचर्स
लिमिटेड अब अपने नए कंज्यूमर ब्रांड्स के साथ आ रही है
 अपने लंबे अनुभव, मजबूत कौशल और बाजार की बदलती जरूरतों की समझ के साथ भारतीय बेवरेज
मार्केट में नई पहचान बनाने की तैयारी
इंदौर, मई 2026: पिछले चार दशकों से ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड (जीजीवीएल) भारत की बेवरेज मैन्युफैक्चरिंग
इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नाम रहा है। कंपनी हमेशा से ही साइलेंट फोर्स की तरह इंडस्ट्री के कई बड़े ब्रांड्स और अहम्
पड़ावों का हिस्सा रही है, भले ही वह खुद ज्यादा चर्चा में न रही हो। सन् 1985 में मध्य प्रदेश के धार में 'हाउस ऑफ
केडियाज़' के तहत शुरू हुई इस कंपनी ने प्रोडक्शन, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबल पैकेजिंग इनोवेशन के क्षेत्र
में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इसी वजह से कई ग्लोबल स्पिरिट ब्रांड्स ने भी कंपनी पर भरोसा जताया है।
अब यही अनुभव और समझ कंपनी अपने खुद के भारतीय ड्रिंक्स पोर्टफोलियो को तैयार करने में लगा रही है, जिसे
खासतौर पर आज के मॉडर्न ग्राहकों की पसंद और जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड के वीपी- बिज़नेस ग्रोथ, उत्सव केडिया ने कहा, "बैच मास्टर की सबसे खास बात यह है
कि यह लोगों को सच में आश्चर्यचकित करती है और अपनी गुणवत्ता से प्रभावित करती है। इसमें इस्तेमाल किए गए
एज्ड स्कॉच माल्ट्स इसे ऐसी गहराई और स्वाद देते हैं, जिसकी उम्मीद लोग इस कीमत में नहीं करते। यह प्रीमियम
फील देती है, लेकिन ऐसी नहीं कि उसे खरीदने से पहले ज्यादा सोचना पड़े। हम इसी संतुलन को हासिल करना
चाहते थे और हमें लगता है कि हम इसमें सफल रहे हैं।"
जीजीवीएल की यह यात्रा भारत की एल्को-बेव इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलाव को भी उजागर करती है। कंपनी मध्य
प्रदेश में बेवरेज रिटेल के निजीकरण को आगे बढ़ाने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र
में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग सेटअप स्थापित करने में भी कंपनी की भूमिका अहम् रही है। समय के साथ इसने एक
ज़ीरो-वेस्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का रूप ले लिया, जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ इन-हाउस बॉटल प्रोडक्शन भी
किया जाता है। आज कंपनी के प्रोडक्ट्स ओमान, सिंगापुर, टोगो, कैमरून, नाइजर और फ्रीटाउन जैसे देशों तक पहुँच
रहे हैं और अपनी सटीकता, लगातार एक जैसी क्वालिटी और बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता के चलते कंपनी इंडस्ट्री की
भरोसेमंद पार्टनर बन चुकी है।
पिछले कुछ सालों में, कंपनी ने अपने रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव को कई कंज्यूमर ब्रांड्स तैयार
करने में लगाया है। इनमें वी21 प्रीमियम, जो भारत की पहली ऐसी वोडका है, जिसे 100 प्रतिशत सर्टिफाइड
आरपीईटी पैकेजिंग में पेश किया गया है, के साथ रास्कल आरटीडी, बिग बुल रम, रिट्ज प्रीमियम व्हिस्की और गोवा
व्हिस्की जैसे ब्रांड्स शामिल हैं।

कंपनी के इसी पोर्टफोलियो में नया नाम जुड़ा है- बैच मास्टर व्हिस्की। यह एक ब्लेंडेड व्हिस्की है, जिसे एज्ड स्कॉच
माल्ट्स के साथ तैयार किया गया है और खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए बनाई गई है, जो अपने रोजमर्रा के ड्रिंकिंग
एक्सपीरियंस को एक बेहतर स्तर पर ले जाना चाहते हैं। आईडब्ल्यूएसआर के आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 की
पहली छमाही में भारतीय व्हिस्की मार्केट में 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि प्रीमियम और उससे ऊपर की
कैटेगरी में 8 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। ऐसे समय में, जब दुनियाभर के कई बाजारों में प्रीमियमाइजेशन की
रफ्तार धीमी पड़ रही है, भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। 700 रुपए की कीमत में उपलब्ध बैच मास्टर फिलहाल
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों- इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, सागर, देवास, सतना, रीवा और
बुरहानपुर में उपलब्ध है। यह ब्रांड जीजीवीएल के उसी विज़न को आगे बढ़ाता है, जहाँ मजबूत मैन्युफैक्चरिंग
अनुभव और बदलते बाजार की माँग का सही मेल देखने को मिलता है।
दबंगों के खौफ और प्रभाव के आगे पीड़िता की पीड़ा पड़ जा रही कमजोर
*मासूम बच्चों संग थाने से लगाएं एसपी आफिस के चक्कर काट रही है पीड़िता
*न्याय न मिला तो बच्चों संग धरने पर बैठने की दी चेतावनी

मीरजापुर। दबंगों के खौफ और प्रताड़ना से डरी सहमी महिला ने बच्चों संग पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक से मिलकर अपनी फरियाद सुनाई है। महिला ने आरोप लगाया है कि यदि उसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो उसके व उसके बच्चों के साथ कभी भी कोई अप्रिय वारदात हो सकती है। जिले के लालगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बनवा (नौगांव) निवासनी पुष्पा पांडे ने एसपी को सौंपे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसी के गांव के रहने वाले लक्ष्मीकांत, कृष्णकांत इत्यादि उसकी जान के दुश्मन बने हुए हैं। पति रोज़ी रोजगार के सिलसिले में मुंबई में रहते हैं गांव में वह अपने पांच बच्चों के साथ गुजर-बसर करती है। उसके विपक्षी काफी सरहंग और दबंग किस्म के हैं जो आएं दिन उसे परेशान करते हुए आएं हैं। बीते 8 मई 2026 उसके घर पर दर्जनों की संख्या में चढ़कर आए उसके विपक्षियों ने जो शराब पीकर एकराय होकर आएं हुए थे जमकर तांडव मचाया। उसे और उसके बच्चों को बुरी तरह से मारने पीटने के साथ उसकी आबरू को भी लूटने का असफल प्रयास किया। इस दौरान पीड़ित बुरी तरह से ललुहान हो उठी उसके मुंह ओठ कट गये वहीं शरीर के कई हिस्सों में चोट भी आई। इतने सबके बाद भी दबंगों का जी नहीं भरा तो वह उसके शरीर के कपड़ों को खींच कर निर्वस्त्र करने लगे थे इसी बीच शोरगुल सुनकर गांव के लोग जुट गए तो वह जान-माल की धमकी देते हुए चले गए। पीड़िता की मानें तो रात्रि में पुलिस को सूचना दी गई तो बरौधा चौकी प्रभारी रात तकरीबन 7.30 बजे मौके पर आएं और सुबह लालगंज थाना पर पहुंचने की बात कह चलें गए‌। आश्चर्य की बात यह है कि चौकी प्रभारी के जाने के बाद रात 9.30 बजे पुनः सभी गोलबंद होकर धमक पड़े और उसके घर का दरवाजा पीटने लगे थे। जिसकी सूचना 112 नंबर पर देने पर 112 नंबर के दरोगा सुबह थाना आने की बात कहकर चलते बने।

*इलाज़ के लिए आए वाहन को भी किया क्षतिग्रस्त*

दबंगों की दहशतगर्दी का आलम यह रहा कि दर्द से कराह रही पीड़ित ने अपनी व बच्चों को इलाज़ के लिए जब एक निजी वाहन को बुलाया तो दबंगों ने उस वाहन को पत्थर के टुकड़ों से प्रहार कर क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे चालक वाहन समेत वापस लौट गया। इस बीच पीड़ित भय और दहशत के साए में पूरी रात घर में दुबकी स्वयं व बच्चों को लेकर डरी सहमी दर्द से कराहती रही है। पीड़िता के मुताबिक उसके विपक्षी इसके पूर्व में भी उसे मारपीट कर घायल कर चुके हैं जिसमें शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने तहरीर दर्ज कर तो ली थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से दबंगों का हौसला बुलंद बना हुआ है।

*महिला को न्याय मिलने में राजनैतिक दबाव आ यहा है आड़े*

पीड़िता पुष्पा ने आरोप लगाया है कि उसे और उसके बच्चों के साथ कभी भी कोई अप्रिय वारदात हो सकती है घटना वाली रात से ही वह बच्चों को लेकर न्याय के लिए दर-दर भटकने को विवश है। इसकी लिखित सूचना लालगंज कोतवाली पुलिस को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से उसे जान-माल का खतरा बना हुआ है। उसने आरोप लगाया है कि उसके विपक्षीयों के कुछ राजनैतिक पकड़ वाले व्यक्तियों से संबंध हैं जिनके प्रभाव में आकर पुलिस ने आजतक उसका मेडिकल भी कराना मुनासिब नहीं समझा है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए पत्र में अपनी व्यथा को सुनाते हुए जान-माल के ख़तरे की आशंका जताते हुए कहा है कि यदि उसके व उसके बच्चों के साथ कोई भी अप्रिय वारदात होती है तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी उसके विपक्षियों और लालगंज कोतवाली पुलिस की होगी।
कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म नहीं बल्कि जश्न का उत्सव-प्रतुल शाह देव


भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि ₹3000 करोड़ के बहुचर्चित टेंडर घोटाले के मुख्य अभियुक्त पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा पटाखे फोड़ना, नाच-गाना करना और उत्सव मनाना झारखंड की राजनीति के नैतिक पतन का सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और उनके सहयोगियों ने जिस प्रकार “बेल उत्सव” मनाया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म का नहीं बल्कि जश्न का विषय बन चुका है।प्रतुल ने कहा कि जिस व्यक्ति के निजी सचिव के सहायक के यहां से ईडी की छापेमारी में ₹32 करोड़ से अधिक नकद बरामद हुआ, जिस मामले में उस सहायक जहांगीर आलम ने स्वयं स्वीकार किया कि पैसा आलमगीर आलम का है, उस मामले में बेल मिलने पर कांग्रेसियों का नाचना पूरे राज्य की जनता का अपमान है। बेल को कांग्रेस “बाइज्जत बरी” की तरह प्रस्तुत कर रही है, जबकि देश की जनता जानती है कि बेल न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, भ्रष्टाचार मुक्त होने का प्रमाणपत्र नहीं।

प्रतुल ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और झामुमो गठबंधन की सरकार ने शायद नया नारा बना लिया है —'जहां घोटाला, वहां शर्म नहीं बल्कि जश्न मनेगा'।प्रतुल ने कहा कि आज झारखंड की स्थिति यह है कि गांवों में पेयजल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। कई जलमीनार शोपीस बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग की हालत इतनी बदतर है कि जिला अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और उपकरणों का भारी अभाव है। मरीज रेफर होकर दर-दर भटक रहे हैं।उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कें टूटी हुई हैं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है, बेरोजगार युवा निराश हैं, लेकिन कांग्रेस और झामुमो के नेताओं को जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं। उन्हें केवल घोटालेबाज नेताओं के स्वागत और बचाव में ऊर्जा दिखाई देती है।प्रतुल ने कहा कि जिस राज्य में किसान परेशान हो, युवा नौकरी के लिए पलायन कर रहे हों, महिलाएं असुरक्षित हों और विकास योजनाओं का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा हो, वहां सत्ता पक्ष द्वारा “भ्रष्टाचार उत्सव” मनाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

राहुल गांधी स्पष्ट करें कि क्या उनके युग में भ्रष्टाचार को उपलब्धि माना जाता है?

प्रतुल ने कहा कि राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो ₹3000 करोड़ के टेंडर घोटाले को “उपलब्धि” मानती है? क्या उनके युग में कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति है कि जनता के पैसे की लूट पर जश्न मनाया जाए?प्रतुल ने कहा कि झारखंड की जनता सब देख रही है। जनता को अब समझ में आ चुका है कि यह गठबंधन सरकार विकास नहीं, “कमीशन, करप्शन और कलेक्शन” के मॉडल पर चल रही है। आने वाले समय में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस भ्रष्ट और संवेदनहीन राजनीति का जवाब देगी। आज की प्रेस वार्ता में झारखंड प्रदेश भाजपा के सह मीडिया प्रभारी श्री योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

नगर पालिका के ठेकेदार कर रहे मनमानी, बनी बनाई सड़क को उखाड़ने का विरोध फर्रुखाबाद विकास मंच अध्यक्ष ने पहुंच कर रुकवाया काम

फर्रुखाबाद lबुधवार को नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद के अंतर्गत पल्ला से बजरिया जाने वाली सड़क पर पलरिया चौराहे से नवाब दिलावर जंग तक की बिल्कुल बनी बनाई नई सड़क पर टेंडर करके नगर पालिका के ठेकेदार ने कार्य को प्रारंभ कराया लोगों के विरोध के कारण जब काम बंद कराया गया तो ठेकेदार ने फिर से काम को प्रारंभ कर दिया l इस पर क्षेत्रवासियों ने फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा को  मौके पर बुलाया भईयन मिश्रा अपने कई समर्थकों के साथ में मौके पर पहुंचे वहां पर लोगों ने बताया की पूरी सड़क बिल्कुल सही है कुछ जगह नाली   गड़बड़ है उसको सही कराने के लिए बोला गया था  पर आज ठेकेदार के द्वारा बनी बनाई सड़क को उखाड़ कर नई सड़क बनाये जाने के लिए कार्य प्रारंभ कराया गया l मौके पर पहुंचे फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा ने कहा कि नगर पालिका भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है बनी बनाई सड़कों पर फिर से काम किया जा रहा है जबकि सारे शहर में बहुत सी ऐसी गालियां और सड़के हैं जहां पर कार्य की आवश्यकता है वहां पर कार्य नहीं कराया जा रहा है कार्य बह हो रहे है जिसमें नाम मात्र का  काम नहीं और बिना काम के लाखों रुपया  निकल जाए उन्होंने बताया कि पालिका अध्यक्ष के पति जो पूर्व में नगर पालिका के अध्यक्ष थे उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में कहा था कि मेरे द्वारा जो सड़क बनाई जाएगी वह 50 वर्षों तक बनवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी जबकि इन्हीं के कार्यकाल की बनी हुई सड़के कई बार बनाई जा चुकी है जब इतनी घटिया आपकी ब्रिक है तो उसको क्यों लगाया जा रहा है सीमेंटेड सड़के क्यों नहीं बनाई जा रही जबकि आवश्यकता गलियों में सीमेंट सड़कों की है बहुत जल्द इस प्रकार की भ्रष्टाचार की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से की जाएगी और शासन स्तर पर यह बताया जाएगा कि किस प्रकार से नगर पालिका सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही है उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि अपने स्तर से टीम गठित करके नगर पालिका के चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया जाए जो सड़के बन चुकी हैं और अच्छी थी उनको दोबारा बनाने की क्या आवश्यकता थी l इस
मौके पर निशित दुबे उर्फ नीशू पूर्व सभासद , आलोक मिश्रा भूरे, अंगद पांडे उर्फ कोमल पांडे, ओम निवास पाठक, सनी बाथम, विशाल कश्यप, नितिन भाटिया, आशू, राजीव वर्मा सहित कई लोगों उपस्थित रहेl
युवाओं के लिए सिविल सेवा का सुनहरा अवसर
* निःशुल्क IAS/PCS  कोचिंग के लिए 18 मई से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन, 5 जुलाई को होगी प्रवेश परीक्षा
* समाज कल्याण विभाग ने जारी किया प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए निःशुल्क कोचिंग और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर प्रशासनिक सेवाओं में अपनी पहचान बना सकें।
  असीम अरुण, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), ने कहा कि प्रदेश के मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रशासनिक सेवा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश में संचालित 8 आवासीय निःशुल्क आईएएस/पीसीएस परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्रों में प्रवेश के लिए सम्मलित प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है।
  समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन 18 मई से 18 जून 2026 तक विभागीय वेबसाइट www.socialwelfareup.upsdc.gov.in  पर किए जा सकेंगे। प्रवेश पत्र 25 जून से डाउनलोड होंगे, जबकि सम्मलित प्रवेश परीक्षा 05 जुलाई को होगी। परीक्षा परिणाम 28 जुलाई तक घोषित किए जाने की संभावना है। वहीं नया शैक्षणिक सत्र 01 अगस्त 2026 से शुरू किया जाएगा।

ये कर सकते हैं आवेदन:
1- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी
2-परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये या उससे कम
विषय विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन
इन केंद्रों पर अभ्यर्थियों को नि:शुल्क आवासीय सुविधा, भोजन, पुस्तकालय, ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लासेज, टेस्ट सीरीज और मुख्य परीक्षा के साथ ही इंटरव्यू के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहां विषय विशेषज्ञों और वरिष्ठ आईएएस और पीसीएस अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है। हाल ही में घोषित UPPCS-2024  परीक्षा में 44 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है।
डीपीएम पब्लिक स्कूल का सीबीएसई इंटरमीडिएट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन
क्षेत्र में लहराया सफलता का परचम, विद्यार्थियों ने बढ़ाया विद्यालय का मान

मेरठ। बहसूमा स्थित डी०पी०एम० पब्लिक स्कूल ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा घोषित कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम में शानदार एवं अभूतपूर्व सफलता हासिल कर क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विद्यालय का परीक्षा परिणाम इस वर्ष अत्यंत उत्कृष्ट रहा, जिसमें अधिकांश छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए तथा कई विद्यार्थियों ने उच्च अंक प्राप्त कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया।

विज्ञान संकाय में सरण्या सिंह ने 92.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं देव चौधरी ने 89.04 प्रतिशत अंक लेकर द्वितीय तथा रिया सोलंकी ने 87.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वाणिज्य संकाय में सिम्बुल ने 85.02 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि आस्था सिरोही ने 82.02 प्रतिशत अंकों के साथ द्वितीय और अंश ने 80.01 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।

विद्यालय के सम्मानित सचिव जगदीश त्यागी ने सभी सफल विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया तथा पूरे विद्यालय परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विद्यालय को मेरठ क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला विद्यालय बताते हुए गर्व व्यक्त किया।

प्रधानाचार्य जिया जैदी ने भी विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों की कड़ी मेहनत और विद्यार्थियों की लगन ने विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

परिणाम घोषित होने के बाद विद्यालय परिसर में खुशी और उत्साह का माहौल देखने क