जब जब मोदी डरते हैं पुलिस  आगे करते हैं यूजीसी काले कानून वापस ले : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे 8 मार्च को जंतर मंतर नई दिल्ली में एडवोकेट अनिल मिश्रा जी के नेतृत्व में प्रदर्शन करने के बाद आज लखनऊ आने पर आवास पर लोगों से बात करते हुए कहा कि देश के 35 करोड़ सवर्ण समाज यह सवाल है कि जवाब जरूर देना यूजीसी के खिलाफ़ दिल्ली मे सवर्ण समाज के आंदोलन को रोकने के बाद क्या सवर्ण समाज मोदी को वोट करेगा? जिस तरह से दिल्ली पुलिस पूरी घेरा बंदी कर संबंधानिक शांति ढंग से प्रोटेस्ट कर ने गए थे को चारों तरफ से घेर कर गिरफ्तार कर रही थी बसे कम हो गई। भाजपा सवर्ण के आंदोलन के आयोजन से भयभीत नहीं है उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया घर घर तक ये बात पहुंच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 11 वर्षों में कौसा तुष्टिकरण किया है जो उनका बनाया हुआ अवतारी पुरुष हिन्दू , हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है वो इस खबर को विषय को यही रोकना चाहते हैं क्यों कि संघ से लेकर भाजपा के अंदुरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया कि यह विषय उतना छोटा नहीं था। क्यों कि जब UGC अधिनियम आया और लोगों ने विरोध करना शुरु किया  तब भाजपा और संघ के नेताओं का अंदरूनी कहना था कि इस विरोध से कुछ होने वाला नहीं है चार लोग सड़क पर नहीं आयेंगे किन्तु जब लोगों ने सड़क पर उतरना शुरू किया तब  हाउस अरेस्ट किया गया और राजधानी आने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन न करने को पूरी ताग़त झोंक दी लेकिन सवर्ण ने यह दिखा दिया कि जब तक UGC बिल वापस नहीं होगा सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा जब भी मोदी सरकार डरती है पुलिस को आगे करती है के नारों से राजधानी नई दिल्ली गुंजा जिंदर देखो पूरा दिल्ली सवर्ण समाज से पटा था।
पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन हुई अटल आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा
लखनऊ। श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में चल रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश हेतु परीक्षा पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन आयोजित की गई। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जनपदों में बनाए गए 89 केंद्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर योजना के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

21 हजार विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश परीक्षा में हिस्सा

कक्षा 6 में प्रवेश के लिए निर्धारित 2880 सीटों के सापेक्ष 12,018 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि कक्षा 9 की 1140 सीटों के लिए 9,054 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार दोनों कक्षाओं को मिलाकर कुल 21,072 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया।

योगी सरकार का सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन पर फोकस

इस बार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र प्रदेश स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराए गए, जिससे सभी परीक्षा केंद्रों पर समान मानकों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जा सकी। योगी सरकार ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग, नामित नोडल अधिकारियों और केंद्र अधीक्षकों के माध्यम से समुचित व्यवस्थाएं कराईं। सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई।

निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा

गौरतलब है कि अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, पुस्तकें, खेलकूद सुविधाएं और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां उपलब्ध कराई जातीं हैं। इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप आधुनिक कक्षाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
संभल में मस्जिद और दरगाह अवैध घोषित, कोर्ट ने इमाम पर लगाया 7 करोड़ का जुर्माना
संभल। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय तहसीलदार काेर्ट ने जिले के पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में सरकारी जमीन पर
बन शाही मस्जिद, मकान और दरगाह काे अवैध बताते हुए हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही काेर्ट ने शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन पर सात कराेड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है। साेमवार काे संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा कर बनाए गए मकान, मस्जिद और दरगाह हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है।

इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। 30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल की गयी जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।

इस प्रकरण में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। वर्ष 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल ने ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है। उन्हाेंने बताया कि आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाएगा और जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
जनपद संभल में शाही इमाम ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया घर, तहसीलदार कोर्ट ने खाली करने का दिया आदेश, 7 करोड़ का जुर्माना लगाया

संभल। जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यहां शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है।
संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है
सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर यह निर्माण किया गया था। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है।
आरोप है कि शाही इमाम आफताब हुसैन पुत्र खुर्शीद हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन ने इस जमीन पर पक्का मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण कराया।
मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिला। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।

30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल किया गया। जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई।

प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
इस विषय में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही।

उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल द्वारा ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाकर जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

झारखंड की राजनीति में उबाल: राष्ट्रपति के बंगाल दौरे और नीतीश कुमार के फैसलों पर सरयू राय और बाबूलाल मरांडी का कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर चल रहा सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है. जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मित्र माने जाने वाले सरयू राय की नाराजगी कम होती नहीं दिख रही है.

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बजट सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सरयू राय ने एक बार फिर इस फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मुझे व्यक्तिगत रुप से राज्यसभा जाने का उनका फैसला अच्छा नहीं लगा है. उन्होंने कहा कि बहुत लोग सराह रहे हैं लेकिन मैंने पहले दिन से कहा है कि मुझे अच्छा नहीं लगा है. उन्होंने कहा कि उचित समय पर उचित निर्णय होता तो अच्छा रहता. जिस तरह से अफरातफरी में निर्णय लिया गया उससे परहेज किया जा सकता था. नीतीश कुमार पर दबाव होने के सवाल पर सरयू राय ने कहा कि इस निर्णय के पीछे कोई ना कोई कारण रहा होगा, अभी तो इस कारण का अनुमान ही लगाया जा सकता है.

निशांत कुमार का इतना ही महत्व है कि वो नीतीश कुमार के पुत्र हैंः सरयू राय

निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में एंट्री पर सरयू राय ने कहा कि उनका इतना ही महत्व है कि वो नीतीश कुमार के पुत्र हैं, आगे वो अपने कर्तव्य से अपनी प्रासंगिकता साबित करेंगे. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की इसमें कितनी भूमिका है वह समझना होगा क्योंकि नीतीश कुमार को अपने पुत्र को राजनीति में लाना होता तो पहले ही लाकर स्थापित कर सकते थे.

सरयू राय ने नीतीश कुमार को परिवारवाद करने वालों की श्रेणी में नहीं लाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे परिवारवाद करने वाले का चेहरा ढक जाएगा. उन्होंने कहा कि जदयू आंचलिक पार्टी है जिसके विस्तार की सोच बिहार तक ही सीमित है. जदयू आंचलिक दल है जिसकी सोच कहीं ना कहीं उनके नेता की सोच पर निर्भर करता है. ऐसे में नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं यह रणनीति कितनी स्वस्थ रणनीति के तहत होती है यह जदयू का भविष्य तय करेगा.

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने को नेता प्रतिपक्ष ने राष्ट्रपति पद की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का अपमान करार दिया है. विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही में भाग लेने आये पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति इस प्रकार का रवैया न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि यह आदिवासी समाज की भावनाओं को भी आहत करता है. राष्ट्रपति महोदया के शब्दों में जो पीड़ा और असहजता झलक रही थी उसे पूरे देश ने महसूस किया है.

कार्यक्रम में शुरू से बाधा डालने की कोशिश- बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मैंने इंटरनेशनल संथाल काउंसिल के पदाधिकारी से बातचीत कर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के साथ हुए दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी ली. उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कार्यक्रम के आयोजन स्थल को तीन बार बदला गया. इतना ही नहीं, कार्यक्रम के दिन अचानक पास की अनिवार्यता लागू कर दी गई, जबकि पहले से ऐसी कोई व्यवस्था प्रस्तावित नहीं थी. इससे स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम में व्यवधान डालने की कोशिश की गई.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि परंपरा और प्रोटोकॉल के अनुसार जब भी राष्ट्रपति किसी कार्यक्रम में पहुंचती हैं तो मुख्यमंत्री या उनका अधिकृत प्रतिनिधि उनकी अगवानी के लिए मौजूद रहता है. लेकिन आश्चर्य की बात है कि पश्चिम बंगाल में न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री वहां पहुंचे. यहां तक कि जिला प्रशासन की ओर से डीएम तक की उपस्थिति नहीं रही. यह केवल देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति का अपमान नहीं है, यह संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का भी अनादर है. ममता बनर्जी सरकार द्वारा किया गया यह व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और किसी भी दृष्टि से क्षम्य नहीं माना जा सकता है.

गिरिडीह के डीसी कान पकड़कर उठक बैठक करें, मांगें माफी- बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने महिला दिवस पर गिरिडीह में अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठी जल सहियाओं के साथ वहां के डीसी के व्यवहार को आपत्तिजनक बताते हुए मुख्यमंत्री से डीसी पर कार्रवाई करने की मांग की है. गिरिडीह, चतरा एवं अन्य जगहों पर प्रशासनिक अधिकारियों के वायरल हो रहे वीडियो का हवाला देते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में नौकरशाह बेलगाम हो गया हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गिरिडीह डीसी से सरेआम उन महिलाओं से माफी मंगवाए और कान पकड़ कर उठक बैठक करवाएं. जिससे ऐसे अधिकारी को सबक मिले कि महिलाओं से कैसा व्यवहार उन्हें करना चाहिए.

पीड़ित लाइनमैन छह माह से लगा रहा अधिकारियों के यहाँ चक्कर
जौनपुर।  बिजली विभाग के मछलीशहर डिवीजन में अधिशासी अभियंता द्वारा किए गए घोटाले की जांच के लिए दो सदस्यीय एक टीम मछलीशहर कार्यालय पहुंची। जहाँ पीड़ित संविदा लाइनमैन अखिलेश कुमार ने अपने गलत तरीके से किए गए निष्कासन के मामले की सुनवाई के लिए जाँच टीम से पुरजोर मांग की। मुंगरा बादशाहपुर के धौरहरा गांव निवासी पवन कुमार पाण्डेय ने अधिशासी अभियंता मछलीशहर राजन कुमार द्वारा किए गए बिजली विभाग के राजस्व घोटाले का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री सहित विद्युत उच्चाघिकारियों को शिकायती पत्र के साथ साक्ष्य सहित शपथ पत्र देते हुए आरोप लगाया है जिसमे दस लोगों के साथ हुए इस भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उठाया गया है। इन उपभोक्तओं का 1 लाख का बिजली बिल महज 5 हजार लेकर एक्स ई एन मछलीशहर द्वारा खत्मकर दिया गया हैं। पी.डी. करने के बाद उसी नाम से उसी परिसर में नया कनेक्शन दे दिया गया हैं।अधिशासी अभियंता  की शिकायत कि जाँच के लिए अधिशासी अभियंता मीटर व लेखाकार की टीम मछलीशहर पहुँची। उधर पवन का यह भी आरोप है कि वहाँ
लाइन शिफ्ट करने के नाम पर लाखो के राजस्व का  नुकसान हुआ है। बिल रिवीजन के नाम पर यदि  मछलीशहर डिविजन कि जाँच करायी जाये तो कई करोड़ का घोटाला सामने आयेगा। आरोप यह भी है की विद्युत विभाग के नियमों व दिशा निर्देशों को दर किनार करते हुए कनेक्शन के नाम पर अलग-अलग देय शुल्को में रसीद काटी जा रही हैं। जिले के इस डिविजन में सुविधा शुल्क देने पर 1100, 1000, 2700 कि रसीद काटी जाती है जबकि सामान्यतः  6100 कि रसीद कट रही हैं। अधिशासी अभियंता की शिकायत पाँच माह पूर्व ही की गई थी। साक्ष्य सहित आठ मामलों को विभाग को दिया गया था। अभी यह जांच पूरी नहीं हुई थी, तब तक  आठ मामलों को और उजागर करते हुए फिर से जांच कराये जाने की माँग की गई। अधीक्षण अभियंता बिजली जौनपुर, अनिल कुमार पाठक ने बताया कि राजस्व घोटाले के मामले की शिकायत में अधिशासी अभियंता मछलीशहर की जाँच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जाँच टीम वहाँ अपना काम कर रही है। जाँच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जायेगी।
भारत ने जीता टी20 वर्ल्ड कप 2026: ज्ञानपुर पुलिस लाइन्स में फाइनल मैच का लाइव प्रसारण देखा गया

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भारतीय क्रिकेट टीम ने आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीत लिया है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। यह जीत करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों के लिए गर्व का क्षण है। इस ऐतिहासिक मैच का लाइव प्रसारण ज्ञानपुर स्थित पुलिस लाइन्स में एक बड़ी प्रोजेक्टर स्क्रीन पर दिखाया गया। भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने अधिकारी, कर्मचारीगण और रिक्रूट आरक्षियों के साथ मिलकर मैच का आनंद लिया। फाइनल मुकाबले में भारत के ओपनर बल्लेबाज संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की शुरुआत की। संजू सैमसन ने सर्वाधिक 89 रन बनाए, जबकि अभिषेक शर्मा ने 52 और ईशान किशन ने 54 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत ने निर्धारित ओवरों में पांच विकेट खोकर 255 रन बनाए और न्यूजीलैंड को जीत के लिए 256 रनों का लक्ष्य दिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम शुरुआती झटकों से उबर नहीं पाई और 159 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।
पीलीभीत–पूरनपुर हाईवे पर अनियंत्रित होकर बस खाई में पलटी, 15 से अधिक यात्री घायल

लखनऊ। यूपी के पीलीभीत जिले में सोमवार तड़के भीषण सड़क हादसा हो गया। दिल्ली से लखीमपुर और बहराइच जा रही एक निजी ट्रैवल कंपनी की बस पीलीभीत–पूरनपुर हाईवे पर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई। हादसे में बस में सवार 15 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

करीब 35 से 40 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी

जानकारी के अनुसार निजी ट्रैवल कंपनी की बस दिल्ली से लखीमपुर खीरी और बहराइच जिले के विभिन्न स्थानों के करीब 35 से 40 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी। सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे बस पीलीभीत–पूरनपुर हाईवे पर गजरौला थाना क्षेत्र के गांव कैंच के पास पहुंची, तभी अचानक बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई।

बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई

बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कुछ यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अन्य घायलों को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर गजरौला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।हादसे में पारुल (25) पत्नी दीपक निवासी बहराइच, बानो (50) पत्नी तस्सुन निवासी बहराइच, चार वर्षीय दृष्टि पुत्री दुखहरण, नेपाल निवासी लक्ष्मी, लखीमपुर खीरी निवासी सनी (18) और अजय पुत्र जय भगवान सहित करीब 15 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

तीन यात्रियों के पैर कट जाने की भी जानकारी सामने आई

इनमें से तीन यात्रियों के पैर कट जाने की भी जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य को भी गंभीर चोटें आई हैं।घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। यात्रियों का आरोप है कि बस चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
महराजगंज में दिल दहला देने वाली वारदात: पिता ने दो मासूम बच्चों की हत्या कर दी जान, सुसाइड नोट में पत्नी को ठहराया जिम्मेदार


लखनऊ /महराजगंज। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति ने अपने दो छोटे बच्चों की हत्या करने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार गाजीपुर जिले के सैदपुर क्षेत्र के मिर्जापुर गांव निवासी बंदना सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 66वीं वाहिनी में सफाईकर्मी के पद पर तैनात हैं। वह अपने पति अमरीश कुमार और दो बच्चों—कंचन (4 वर्ष) और अमरेंद्र (3 वर्ष)—के साथ नौतनवा के गांधी नगर वार्ड में किराए के मकान में रहती थीं।
बताया जा रहा है कि रविवार सुबह बंदना ड्यूटी पर चली गई थीं। कुछ देर बाद उन्हें सूचना मिली कि उनके पति ने किसी अनहोनी की बात कही है। सूचना मिलने पर उन्होंने पुलिस को जानकारी दी और घर पहुंचीं।
घर पहुंचने पर देखा गया कि बेटी कंचन का शव रसोई की खिड़की से रस्सी के सहारे लटका हुआ था, जबकि बेटे अमरेंद्र का शव जमीन पर पड़ा मिला। वहीं अमरीश का शव कमरे में पंखे से फंदे के सहारे लटका हुआ था और उसके हाथ की नस भी कटी हुई थी।
सूचना मिलने पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें अमरीश ने इस घटना के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदार ठहराया है।
बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था और इसी तनाव के चलते यह घटना हुई।
इस मामले में मृतक के भाई की तहरीर पर बंदना समेत छह लोगों के खिलाफ नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
जब जब मोदी डरते हैं पुलिस  आगे करते हैं यूजीसी काले कानून वापस ले : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे 8 मार्च को जंतर मंतर नई दिल्ली में एडवोकेट अनिल मिश्रा जी के नेतृत्व में प्रदर्शन करने के बाद आज लखनऊ आने पर आवास पर लोगों से बात करते हुए कहा कि देश के 35 करोड़ सवर्ण समाज यह सवाल है कि जवाब जरूर देना यूजीसी के खिलाफ़ दिल्ली मे सवर्ण समाज के आंदोलन को रोकने के बाद क्या सवर्ण समाज मोदी को वोट करेगा? जिस तरह से दिल्ली पुलिस पूरी घेरा बंदी कर संबंधानिक शांति ढंग से प्रोटेस्ट कर ने गए थे को चारों तरफ से घेर कर गिरफ्तार कर रही थी बसे कम हो गई। भाजपा सवर्ण के आंदोलन के आयोजन से भयभीत नहीं है उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया घर घर तक ये बात पहुंच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 11 वर्षों में कौसा तुष्टिकरण किया है जो उनका बनाया हुआ अवतारी पुरुष हिन्दू , हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है वो इस खबर को विषय को यही रोकना चाहते हैं क्यों कि संघ से लेकर भाजपा के अंदुरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया कि यह विषय उतना छोटा नहीं था। क्यों कि जब UGC अधिनियम आया और लोगों ने विरोध करना शुरु किया  तब भाजपा और संघ के नेताओं का अंदरूनी कहना था कि इस विरोध से कुछ होने वाला नहीं है चार लोग सड़क पर नहीं आयेंगे किन्तु जब लोगों ने सड़क पर उतरना शुरू किया तब  हाउस अरेस्ट किया गया और राजधानी आने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन न करने को पूरी ताग़त झोंक दी लेकिन सवर्ण ने यह दिखा दिया कि जब तक UGC बिल वापस नहीं होगा सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा जब भी मोदी सरकार डरती है पुलिस को आगे करती है के नारों से राजधानी नई दिल्ली गुंजा जिंदर देखो पूरा दिल्ली सवर्ण समाज से पटा था।
पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन हुई अटल आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा
लखनऊ। श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में चल रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश हेतु परीक्षा पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन आयोजित की गई। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जनपदों में बनाए गए 89 केंद्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर योजना के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

21 हजार विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश परीक्षा में हिस्सा

कक्षा 6 में प्रवेश के लिए निर्धारित 2880 सीटों के सापेक्ष 12,018 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि कक्षा 9 की 1140 सीटों के लिए 9,054 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार दोनों कक्षाओं को मिलाकर कुल 21,072 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया।

योगी सरकार का सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन पर फोकस

इस बार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र प्रदेश स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराए गए, जिससे सभी परीक्षा केंद्रों पर समान मानकों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जा सकी। योगी सरकार ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग, नामित नोडल अधिकारियों और केंद्र अधीक्षकों के माध्यम से समुचित व्यवस्थाएं कराईं। सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई।

निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा

गौरतलब है कि अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, पुस्तकें, खेलकूद सुविधाएं और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां उपलब्ध कराई जातीं हैं। इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप आधुनिक कक्षाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
संभल में मस्जिद और दरगाह अवैध घोषित, कोर्ट ने इमाम पर लगाया 7 करोड़ का जुर्माना
संभल। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय तहसीलदार काेर्ट ने जिले के पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में सरकारी जमीन पर
बन शाही मस्जिद, मकान और दरगाह काे अवैध बताते हुए हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही काेर्ट ने शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन पर सात कराेड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है। साेमवार काे संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा कर बनाए गए मकान, मस्जिद और दरगाह हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है।

इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। 30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल की गयी जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।

इस प्रकरण में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। वर्ष 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल ने ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है। उन्हाेंने बताया कि आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाएगा और जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
जनपद संभल में शाही इमाम ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया घर, तहसीलदार कोर्ट ने खाली करने का दिया आदेश, 7 करोड़ का जुर्माना लगाया

संभल। जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यहां शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है।
संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है
सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर यह निर्माण किया गया था। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है।
आरोप है कि शाही इमाम आफताब हुसैन पुत्र खुर्शीद हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन ने इस जमीन पर पक्का मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण कराया।
मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिला। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।

30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल किया गया। जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई।

प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
इस विषय में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही।

उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल द्वारा ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाकर जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

झारखंड की राजनीति में उबाल: राष्ट्रपति के बंगाल दौरे और नीतीश कुमार के फैसलों पर सरयू राय और बाबूलाल मरांडी का कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर चल रहा सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है. जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मित्र माने जाने वाले सरयू राय की नाराजगी कम होती नहीं दिख रही है.

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बजट सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सरयू राय ने एक बार फिर इस फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मुझे व्यक्तिगत रुप से राज्यसभा जाने का उनका फैसला अच्छा नहीं लगा है. उन्होंने कहा कि बहुत लोग सराह रहे हैं लेकिन मैंने पहले दिन से कहा है कि मुझे अच्छा नहीं लगा है. उन्होंने कहा कि उचित समय पर उचित निर्णय होता तो अच्छा रहता. जिस तरह से अफरातफरी में निर्णय लिया गया उससे परहेज किया जा सकता था. नीतीश कुमार पर दबाव होने के सवाल पर सरयू राय ने कहा कि इस निर्णय के पीछे कोई ना कोई कारण रहा होगा, अभी तो इस कारण का अनुमान ही लगाया जा सकता है.

निशांत कुमार का इतना ही महत्व है कि वो नीतीश कुमार के पुत्र हैंः सरयू राय

निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में एंट्री पर सरयू राय ने कहा कि उनका इतना ही महत्व है कि वो नीतीश कुमार के पुत्र हैं, आगे वो अपने कर्तव्य से अपनी प्रासंगिकता साबित करेंगे. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की इसमें कितनी भूमिका है वह समझना होगा क्योंकि नीतीश कुमार को अपने पुत्र को राजनीति में लाना होता तो पहले ही लाकर स्थापित कर सकते थे.

सरयू राय ने नीतीश कुमार को परिवारवाद करने वालों की श्रेणी में नहीं लाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे परिवारवाद करने वाले का चेहरा ढक जाएगा. उन्होंने कहा कि जदयू आंचलिक पार्टी है जिसके विस्तार की सोच बिहार तक ही सीमित है. जदयू आंचलिक दल है जिसकी सोच कहीं ना कहीं उनके नेता की सोच पर निर्भर करता है. ऐसे में नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं यह रणनीति कितनी स्वस्थ रणनीति के तहत होती है यह जदयू का भविष्य तय करेगा.

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने को नेता प्रतिपक्ष ने राष्ट्रपति पद की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का अपमान करार दिया है. विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही में भाग लेने आये पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति इस प्रकार का रवैया न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि यह आदिवासी समाज की भावनाओं को भी आहत करता है. राष्ट्रपति महोदया के शब्दों में जो पीड़ा और असहजता झलक रही थी उसे पूरे देश ने महसूस किया है.

कार्यक्रम में शुरू से बाधा डालने की कोशिश- बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मैंने इंटरनेशनल संथाल काउंसिल के पदाधिकारी से बातचीत कर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के साथ हुए दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी ली. उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कार्यक्रम के आयोजन स्थल को तीन बार बदला गया. इतना ही नहीं, कार्यक्रम के दिन अचानक पास की अनिवार्यता लागू कर दी गई, जबकि पहले से ऐसी कोई व्यवस्था प्रस्तावित नहीं थी. इससे स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम में व्यवधान डालने की कोशिश की गई.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि परंपरा और प्रोटोकॉल के अनुसार जब भी राष्ट्रपति किसी कार्यक्रम में पहुंचती हैं तो मुख्यमंत्री या उनका अधिकृत प्रतिनिधि उनकी अगवानी के लिए मौजूद रहता है. लेकिन आश्चर्य की बात है कि पश्चिम बंगाल में न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री वहां पहुंचे. यहां तक कि जिला प्रशासन की ओर से डीएम तक की उपस्थिति नहीं रही. यह केवल देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति का अपमान नहीं है, यह संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का भी अनादर है. ममता बनर्जी सरकार द्वारा किया गया यह व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और किसी भी दृष्टि से क्षम्य नहीं माना जा सकता है.

गिरिडीह के डीसी कान पकड़कर उठक बैठक करें, मांगें माफी- बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने महिला दिवस पर गिरिडीह में अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठी जल सहियाओं के साथ वहां के डीसी के व्यवहार को आपत्तिजनक बताते हुए मुख्यमंत्री से डीसी पर कार्रवाई करने की मांग की है. गिरिडीह, चतरा एवं अन्य जगहों पर प्रशासनिक अधिकारियों के वायरल हो रहे वीडियो का हवाला देते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में नौकरशाह बेलगाम हो गया हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गिरिडीह डीसी से सरेआम उन महिलाओं से माफी मंगवाए और कान पकड़ कर उठक बैठक करवाएं. जिससे ऐसे अधिकारी को सबक मिले कि महिलाओं से कैसा व्यवहार उन्हें करना चाहिए.

पीड़ित लाइनमैन छह माह से लगा रहा अधिकारियों के यहाँ चक्कर
जौनपुर।  बिजली विभाग के मछलीशहर डिवीजन में अधिशासी अभियंता द्वारा किए गए घोटाले की जांच के लिए दो सदस्यीय एक टीम मछलीशहर कार्यालय पहुंची। जहाँ पीड़ित संविदा लाइनमैन अखिलेश कुमार ने अपने गलत तरीके से किए गए निष्कासन के मामले की सुनवाई के लिए जाँच टीम से पुरजोर मांग की। मुंगरा बादशाहपुर के धौरहरा गांव निवासी पवन कुमार पाण्डेय ने अधिशासी अभियंता मछलीशहर राजन कुमार द्वारा किए गए बिजली विभाग के राजस्व घोटाले का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री सहित विद्युत उच्चाघिकारियों को शिकायती पत्र के साथ साक्ष्य सहित शपथ पत्र देते हुए आरोप लगाया है जिसमे दस लोगों के साथ हुए इस भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उठाया गया है। इन उपभोक्तओं का 1 लाख का बिजली बिल महज 5 हजार लेकर एक्स ई एन मछलीशहर द्वारा खत्मकर दिया गया हैं। पी.डी. करने के बाद उसी नाम से उसी परिसर में नया कनेक्शन दे दिया गया हैं।अधिशासी अभियंता  की शिकायत कि जाँच के लिए अधिशासी अभियंता मीटर व लेखाकार की टीम मछलीशहर पहुँची। उधर पवन का यह भी आरोप है कि वहाँ
लाइन शिफ्ट करने के नाम पर लाखो के राजस्व का  नुकसान हुआ है। बिल रिवीजन के नाम पर यदि  मछलीशहर डिविजन कि जाँच करायी जाये तो कई करोड़ का घोटाला सामने आयेगा। आरोप यह भी है की विद्युत विभाग के नियमों व दिशा निर्देशों को दर किनार करते हुए कनेक्शन के नाम पर अलग-अलग देय शुल्को में रसीद काटी जा रही हैं। जिले के इस डिविजन में सुविधा शुल्क देने पर 1100, 1000, 2700 कि रसीद काटी जाती है जबकि सामान्यतः  6100 कि रसीद कट रही हैं। अधिशासी अभियंता की शिकायत पाँच माह पूर्व ही की गई थी। साक्ष्य सहित आठ मामलों को विभाग को दिया गया था। अभी यह जांच पूरी नहीं हुई थी, तब तक  आठ मामलों को और उजागर करते हुए फिर से जांच कराये जाने की माँग की गई। अधीक्षण अभियंता बिजली जौनपुर, अनिल कुमार पाठक ने बताया कि राजस्व घोटाले के मामले की शिकायत में अधिशासी अभियंता मछलीशहर की जाँच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जाँच टीम वहाँ अपना काम कर रही है। जाँच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जायेगी।
भारत ने जीता टी20 वर्ल्ड कप 2026: ज्ञानपुर पुलिस लाइन्स में फाइनल मैच का लाइव प्रसारण देखा गया

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भारतीय क्रिकेट टीम ने आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीत लिया है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। यह जीत करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों के लिए गर्व का क्षण है। इस ऐतिहासिक मैच का लाइव प्रसारण ज्ञानपुर स्थित पुलिस लाइन्स में एक बड़ी प्रोजेक्टर स्क्रीन पर दिखाया गया। भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने अधिकारी, कर्मचारीगण और रिक्रूट आरक्षियों के साथ मिलकर मैच का आनंद लिया। फाइनल मुकाबले में भारत के ओपनर बल्लेबाज संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की शुरुआत की। संजू सैमसन ने सर्वाधिक 89 रन बनाए, जबकि अभिषेक शर्मा ने 52 और ईशान किशन ने 54 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत ने निर्धारित ओवरों में पांच विकेट खोकर 255 रन बनाए और न्यूजीलैंड को जीत के लिए 256 रनों का लक्ष्य दिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम शुरुआती झटकों से उबर नहीं पाई और 159 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।
पीलीभीत–पूरनपुर हाईवे पर अनियंत्रित होकर बस खाई में पलटी, 15 से अधिक यात्री घायल

लखनऊ। यूपी के पीलीभीत जिले में सोमवार तड़के भीषण सड़क हादसा हो गया। दिल्ली से लखीमपुर और बहराइच जा रही एक निजी ट्रैवल कंपनी की बस पीलीभीत–पूरनपुर हाईवे पर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई। हादसे में बस में सवार 15 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

करीब 35 से 40 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी

जानकारी के अनुसार निजी ट्रैवल कंपनी की बस दिल्ली से लखीमपुर खीरी और बहराइच जिले के विभिन्न स्थानों के करीब 35 से 40 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी। सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे बस पीलीभीत–पूरनपुर हाईवे पर गजरौला थाना क्षेत्र के गांव कैंच के पास पहुंची, तभी अचानक बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई।

बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई

बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कुछ यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अन्य घायलों को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर गजरौला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।हादसे में पारुल (25) पत्नी दीपक निवासी बहराइच, बानो (50) पत्नी तस्सुन निवासी बहराइच, चार वर्षीय दृष्टि पुत्री दुखहरण, नेपाल निवासी लक्ष्मी, लखीमपुर खीरी निवासी सनी (18) और अजय पुत्र जय भगवान सहित करीब 15 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

तीन यात्रियों के पैर कट जाने की भी जानकारी सामने आई

इनमें से तीन यात्रियों के पैर कट जाने की भी जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य को भी गंभीर चोटें आई हैं।घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। यात्रियों का आरोप है कि बस चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
महराजगंज में दिल दहला देने वाली वारदात: पिता ने दो मासूम बच्चों की हत्या कर दी जान, सुसाइड नोट में पत्नी को ठहराया जिम्मेदार


लखनऊ /महराजगंज। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति ने अपने दो छोटे बच्चों की हत्या करने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार गाजीपुर जिले के सैदपुर क्षेत्र के मिर्जापुर गांव निवासी बंदना सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 66वीं वाहिनी में सफाईकर्मी के पद पर तैनात हैं। वह अपने पति अमरीश कुमार और दो बच्चों—कंचन (4 वर्ष) और अमरेंद्र (3 वर्ष)—के साथ नौतनवा के गांधी नगर वार्ड में किराए के मकान में रहती थीं।
बताया जा रहा है कि रविवार सुबह बंदना ड्यूटी पर चली गई थीं। कुछ देर बाद उन्हें सूचना मिली कि उनके पति ने किसी अनहोनी की बात कही है। सूचना मिलने पर उन्होंने पुलिस को जानकारी दी और घर पहुंचीं।
घर पहुंचने पर देखा गया कि बेटी कंचन का शव रसोई की खिड़की से रस्सी के सहारे लटका हुआ था, जबकि बेटे अमरेंद्र का शव जमीन पर पड़ा मिला। वहीं अमरीश का शव कमरे में पंखे से फंदे के सहारे लटका हुआ था और उसके हाथ की नस भी कटी हुई थी।
सूचना मिलने पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें अमरीश ने इस घटना के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदार ठहराया है।
बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था और इसी तनाव के चलते यह घटना हुई।
इस मामले में मृतक के भाई की तहरीर पर बंदना समेत छह लोगों के खिलाफ नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।