जनगणना-2027: जिला स्तर पर तैयारियां तेज, DM ने दिए सख्त निर्देश
संजीव सिंह बलिया। जनगणना-2027 के सफल संचालन को लेकर जनपद स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को विकास भवन सभागार में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जनगणना 2027 के कार्यक्रम और उसकी समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा की गई।अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का कार्य किया जाएगा, जिसमें 07 मई से 21 मई 2026 तक स्वगणना होगी, जबकि 22 मई से 20 जून 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर विवरण एकत्र करेंगे। द्वितीय चरण में जनसंख्या एवं जाति आधारित गणना की जाएगी। यह चरण 09 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा, जबकि 01 मार्च से 05 मार्च 2027 तक पुनरीक्षण का कार्य किया जाएगा।जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना कार्य में लगे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण की सूची तैयार कर प्रत्येक तहसील स्तर पर ही ट्रेनिंग आयोजित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण के बाद कर्मियों की परीक्षा भी होगी, और जो कर्मचारी उसमें सफल नहीं होंगे, उन्हें पुनः प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा खंड शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य का नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना कार्य में विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। सभी विभागाध्यक्ष अपने-अपने कार्यालयों के कर्मचारियों को स्वगणना के लिए प्रेरित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी जिला स्तरीय अधिकारी स्वयं स्वगणना करें और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से भी इसे अनिवार्य रूप से करवाएं, ताकि जनगणना का कार्य पूरी पारदर्शिता और शुद्धता के साथ संपन्न हो सके।
सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल रसड़ा ने चमकाया परचम: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में 93.20% के साथ टॉपर तानिया सिंह

संजीव सिंह रसड़ा (बलिया), 16 अप्रैल 2026: सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा, जिला बलिया के कक्षा 10 के विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर स्कूल का नाम रोशन किया है। टॉपर कैडेट तानिया सिंह ने 93.20 प्रतिशत अंक हासिल कर सभी को प्रभावित किया, जबकि अन्य छात्रों ने भी सराहनीय सफलता प्राप्त की।यह उपलब्धि शैक्षणिक उत्कृष्टता और सर्वांगीण विकास के प्रति स्कूल की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विद्यार्थियों ने समर्पण, अनुशासन और दृढ़ता से संस्थान का मान बढ़ाया। टॉपर्स में तानिया सिंह (93.20%) के अलावा देवांश तिवारी (88.00%), अनुप्रिया (84.60%), विकास कुमार यादव (84.20%), अदिति सिंह (83.20%), हृषिका गुप्ता (82.80%), प्रियांशी यादव (82.20%) और ऋषभ सिंह (81.00%) शामिल हैं। इनकी मेहनत वाकई काबिले-तारीफ है।स्कूल के प्रधानाचार्य श्री संजीव सिंह चौहान ने सभी छात्रों को हार्दिक बधाई दी और शिक्षकों व अभिभावकों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने छात्रों को एकाग्र रहने, उच्च लक्ष्य रखने और उत्साह बनाए रखने का आह्वान किया।इस अवसर पर स्कूल की निदेशक श्रीमती इंद्रा सिंह ने सफल छात्रों को मिठाई भेंट कर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने छात्रों, कर्मचारियों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों को सफलता का आधार बताया।पूरा विद्यालय परिवार सफल छात्रों को बधाई देता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।
CBSE 10वीं के नतीजों में उदया इंटरनेशनल स्कूल का दबदबा, अस्तित्व उपाध्याय बने स्कूल टॉपर
यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है - डायरेक्टर  पं• उदय राज तिवारी

विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों और संस्कारों से भी समृद्ध बनाना है - प्रबंधक अंकित राज तिवारी


संत कबीर नगर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा घोषित कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणामों में उदया इंटरनेशनल स्कूल,भुजैनी के छात्र-छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया है। इस वर्ष विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत (100%) रहा,जो विद्यार्थियों की मेहनत,शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यालय की उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था को दर्शाता है। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में खुशी और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। मेधावियों ने गाड़े सफलता के झंडे
विद्यालय की मेरिट सूची में अस्तित्व उपाध्याय ने
92 %प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल करते हुए स्कूल टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया !

इस अवसर पर पूछे जाने पर अस्तित्व उपाध्याय ने  टॉपर बनने का श्रेय  विद्यालय के अपने सभी गुरुजनों  और माता-पिता को दिया  भविष्य के टारगेट को बताते हुए अस्तित्व उपाध्याय ने कहा  कि भविष्य में आईएएस बनने का सपना है ! जिसे हर हाल में पूरा करूंगा  !  

इसके अलावा रिद्धिमा शुक्ला ने 90.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि प्रिया सुभाषचंद्र यादव ने 88.6 प्रतिशत अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी क्रम में आयुष चौधरी ने 87 प्रतिशत,अमृत त्रिपाठी और अतुल मौर्य ने 85.6 प्रतिशत, सिद्धि चौधरी ने 84.4 प्रतिशत, समीक्षा जायसवाल ने 83 प्रतिशत, अखिलेश तथा श्रेयांश ने 81.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। सभी छात्रों की इस सफलता से विद्यालय परिवार में गर्व और हर्ष का माहौल है। विद्यार्थियों की इस शानदार उपलब्धि पर विद्यालय के डायरेक्टर पं. उदय राज तिवारी ने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। विद्यालय के प्रबंधक अंकित राज तिवारी  और और विद्यालय के प्रधानाचार्य  ने मिठाई खिलाकर अस्तित्व उपाध्याय  को अपना आशीर्वाद  दिया  और कहा कि  अस्तित्व से विद्यालय को ही नहीं भविष्य में पूरे जिले को उम्मीदें हैं   !  इतनी कम उम्र में अस्तित्व ने विद्यालय टॉप  करके विद्यालय का मान सम्मान बढ़ाया है ! उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में सफलता दिलाना ही नहीं बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और संस्कारों से भी समृद्ध बनाना है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य बसंत कुमार सेनापति ने कहा कि उदया इंटरनेशनल स्कूल सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करता रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी छात्र इसी प्रकार सफलता का परचम लहराते रहेंगे। खुशी और उत्साह का माहौल
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विद्यालय परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षकों ने छात्रों का मुँह मीठा कराकर उन्हें बधाई दी और अभिभावकों ने भी बच्चों की इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया। छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग को दिया।
आधुनिक शिक्षा का केंद्र बन रहा विद्यालय।उदया इंटरनेशनल स्कूल भुजैनी क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। विद्यालय में विज्ञान,कला और वाणिज्य संकायों के साथ कक्षा 11 एवं 12 का सफल संचालन किया जा रहा है। आधुनिक संसाधनों,अनुभवी शिक्षकों और अनुशासित वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,अनुशासन और सतत मार्गदर्शन के बल पर आने वाले समय में भी छात्र सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे और विद्यालय तथा जनपद का नाम रोशन करते रहेंगे  !
एल. बी. एस. डिग्री कॉलेज में 40 छात्र-छात्राओं का कैंपस चयन
गोंडा, 16 अप्रैल। केंद्रीय पेट्रोल रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), लखनऊ द्वारा श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज गोंडा में आयोजित कैंपस चयन प्रक्रिया के अंतर्गत आज 40 छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण हेतु चयन किया गया।
यह चयन ‘ऑपरेटर प्लास्टिक प्रोडक्ट्स मेकिंग (RSC/Q8016)’ पाठ्यक्रम के लिए विभिन्न महाविद्यालयों से आए अभ्यर्थियों के बीच संपन्न हुआ। तीन दिवसीय चयन प्रक्रिया 15 अप्रैल से 17 अप्रैल तक आयोजित की जा रही है, जिसमें आज दूसरे दिन 40 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की।
प्लेसमेंट सेल के समन्वयक डॉ. मनोज मिश्र ने बताया कि चयन प्रक्रिया सिपेट संस्थान से आए सहायक प्रशिक्षक कौशल मि. चंदन गुप्ता एवं सहायक कौशल प्रशिक्षक विशाल अवस्थी की उपस्थिति में संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन डॉ. मनोज मिश्र (समन्वयक, प्लेसमेंट सेल) द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ. हरीश शुक्ला, डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव सहित प्लेसमेंट सेल के सभी सदस्य एवं महाविद्यालय परिवार के अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।
महाविद्यालय में आयोजित इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं चयन कार्यक्रम से छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे उनके कौशल विकास को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।  महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी।
अटल आवासीय विद्यालयों ने पहली CBSE बोर्ड परीक्षा में रचा इतिहास

* 93.15% छात्र सफल, वाराणसी और प्रयागराज ने हासिल किया 100% परिणाम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत संचालित विद्यालयों ने अपनी पहली कक्षा 10 की CBSE बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। प्रदेश के सभी अटल आवासीय विद्यालयों का कुल परीक्षा परिणाम 93.15 प्रतिशत रहा। इस परीक्षा में कुल 2,178 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे।

सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि वाराणसी और प्रयागराज के अटल आवासीय विद्यालयों की रही, जहां 100 प्रतिशत परिणाम दर्ज किया गया। यह सफलता योजना की गुणवत्ता, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों की मेहनत का प्रमाण मानी जा रही है।

* मेधावी छात्रों ने बढ़ाया मान
परीक्षा में आजमगढ़ के छात्र संगम यादव ने 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया।
वहीं वाराणसी के हर्ष कुशवाहा ने 97.2 प्रतिशत अंक के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। प्रयागराज के छात्र हर्षित ने 95.8 प्रतिशत अंक पाकर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा आगरा के गणेश ने 95.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर चौथा स्थान तथा मुरादाबाद के उदय प्रताप ने 95 प्रतिशत अंक के साथ पांचवां स्थान प्राप्त किया।

* 50 से अधिक छात्रों ने पाए 90% से ज्यादा अंक
इस परीक्षा में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए, जबकि लगभग 250 विद्यार्थियों ने 80 से 90 प्रतिशत के बीच अंक प्राप्त किए। इससे विद्यालयों के उच्च शैक्षणिक स्तर का पता चलता है।

* मुख्यमंत्री योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना निर्माण श्रमिकों, निराश्रित एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, खेलकूद, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है।

* मंत्री अनिल राजभर ने दी बधाई
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि अटल आवासीय विद्यालय योजना का उद्देश्य श्रमिकों और वंचित वर्ग के बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर उनका भविष्य उज्ज्वल बनाना है।प्रथम बोर्ड परीक्षा में मिली यह सफलता साबित करती है कि अटल आवासीय विद्यालय आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में स्थापित होंगे और प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य को नई दिशा देंगे।
स्कूलों में शिक्षा नहीं,सिर्फ बेंचें: फीस से लेकर किताब तक परेशान अभिभावक
बच्चे बेंच तोड़ रहे हैं, स्कूल वाले जेब शंकरगढ़ की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी

स्कूल या वसूली केंद्र? शंकरगढ़ में अभिवावकों की जेब पर डाटा



विश्वनाथ प्रताप सिंह


प्रयागराज,प्रयागराज के शंकरगढ़ ब्लॉक के कई निजी और अर्ध-सरकारी स्कूलों में शिक्षा की जगह अब सिर्फ 'व्यापार' चल रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के नाम पर केवल बेंच पर बैठाया जा रहा है, जबकि फीस, यूनिफॉर्म, किताब-कॉपियों और अन्य गतिविधियों के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं।स्थानीय अभिभावकों के अनुसार, ब्लॉक के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। कक्षाएं तो लगती हैं, लेकिन पढ़ाई न के बराबर। कई जगह तो एक ही शिक्षक 3-4 कक्षाओं को एक साथ 'संभाल' रहा है। वहीं दूसरी ओर, हर साल एडमिशन फीस, एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फीस के नाम पर 15 से 25 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी किताबों को लेकर है। स्कूल प्रबंधन हर साल कोर्स बदल देता है और किताबें केवल स्कूल द्वारा तय दुकान से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। बाजार से 400 रुपये में मिलने वाली किताब का सेट स्कूल से 1200 रुपये तक में बेचा जा रहा है। शंकरगढ़ निवासी संदीप सिंह ने बताया, "बच्चे को स्कूल भेजते हैं तो लगता है पढ़ने गया है, पर घर आकर पूछो तो कहता है 'सर आए ही नहीं'। लेकिन फीस में एक दिन की भी देरी पर 50 रुपये जुर्माना लग जाता है। एक अन्य अभिभावक हरी ओम द्विवेदी का कहना है, "किताब, ड्रेस, जूते-मोजे सब स्कूल से ही लेना मजबूरी है। बाहर से लो तो टीचर बच्चे को ताने मारते हैं। शिक्षा तो दूर, बच्चों का मनोबल भी टूट रहा है। इस मामले में जब खंड शिक्षा अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो पाया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शंकरगढ़ ब्लॉक के सैकड़ों अभिभावक इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मांग है कि फीस और किताबों के रेट तय किए जाएं और स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित हो, ताकि 'बेंच' पर बैठने वाले बच्चे सच में 'शिक्षा' पा सकें।
इस बिल को राजनीतिक रंग न दें, महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी

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संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार ने ये विशेष सत्र बुलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर लोकसभा में चर्चा में शामिल हुए। महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। ये 21वीं सदी का सबसे अहम बिल है।

राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने बिल पर लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा, राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं। मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। आवश्यकता यही थी कि 25 से 30 साल पहले जब ये विचार सामने आया। जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते।

देश की दशा-दिशा तय करने वाला बिल- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि, हमारा सौभाग्य है कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने का सौभाग्य मिल रहा है। हम सभी सांसद इस अवसर को जाने न दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन वयवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। इस मंथन से जो अमृत निकलेगा वो देश की राजनीति की भी दशा दिशा तय करेगा।

पीएम मोदी ने कहा- इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं

पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाया। उन्होंने कहा, 'हमारे देश में जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया है उसका हाल बुरा हुआ है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि किसी ने विरोध नहीं किया। आज भी मैं कहता हूं कि हम साथ जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के पक्ष में नहीं जाएगा, ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा। हम सब उसके हकदार रहेंगे। इसलिए जिन को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें। इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे। इसलिए इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

विरोध करने वालों को देश की महिलाएं माफ नहीं करेंगी-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की महिलाएं अब मुखर हो रही हैं। वे समाज की भावनाओं और समस्याओं को गहराई से समझती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएं सशक्त, महत्वाकांक्षी और निर्णय लेने में सक्षम हैं, इसलिए वे शासन और कानून निर्माण में भागीदारी चाहती हैं। उन्होंने साफ कहा कि जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। पीएम मोदी ने विपक्ष से कहा कि देश की बहनों पर भरोसा करें और उन्हें आगे आने का अवसर दें। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।

हमें क्रेडिट नहीं चाहिए- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने सदन में कहा कि यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। पीएम ने कहा क‍ि अगर इसका विरोध करेंगे तो राजनीतिक लाभ मुझे होगा। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इसका क्रेडिट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कानून बन जाए तो कल के कल अखबार में सबकी फोटो के साथ बधाई संदेश छपवाने को तैयार हूं। जिसका भी फोटो छपवााना हो, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको देर रहा हूं।

प्रीपेड मीटर: सुधार या नया संकट? उपभोक्ताओं में बढ़ता असंतोष”
अमर बहादुर सिंह बलिया शहर,नगरा ! देश में बिजली सुधारों के नाम पर लागू की जा रही प्रीपेड मीटर व्यवस्था अब एक नई बहस का केंद्र बनती जा रही है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता, बिलिंग सुधार और बिजली चोरी रोकने का प्रभावी उपाय बता रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। आम उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था धीरे-धीरे एक गंभीर समस्या का रूप लेती नजर आ रही है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रीपेड मीटर उनके लिए सुविधा नहीं, बल्कि अतिरिक्त बोझ बन गया है। जिन इलाकों में आज भी बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं है, वहां पहले से ही परेशान लोग अब रिचार्ज और बैलेंस खत्म होने की नई चिंता में घिर गए हैं। कई जगहों पर यह स्थिति ऐसी हो गई है कि बिजली होने के बावजूद बैलेंस खत्म होने पर घर अंधेरे में डूब जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था को सीधे लागू करने के बजाय इसे एक विकल्प के रूप में पेश किया जाना चाहिए था। बड़े शहरों और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, लेकिन कमजोर और ग्रामीण वर्ग पर इसे थोपना नीतिगत असंतुलन को दर्शाता है। वहीं, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। बिजली चोरी रोकने के लिए पहले से ही अलग थाने, पुलिस बल और निगरानी तंत्र मौजूद हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर ही जिम्मेदारी डालना कई लोगों को समझ से परे लग रहा है। यह भी एक बड़ा मुद्दा है कि वर्षों से संविदा पर काम कर रहे लाइनमैन और तकनीकी कर्मचारी आज भी स्थायी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि पूरी व्यवस्था उन्हीं के भरोसे चल रही है। प्रीपेड मीटर में तकनीकी खराबी आने पर उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली घरों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिल पाता, क्योंकि वहां मौजूद संविदा कर्मचारियों के पास सीमित अधिकार होते हैं। दूसरी ओर, स्थायी अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ अक्सर नए मीटर लगाने के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। नीति-निर्माताओं के लिए यह एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। बढ़ता असंतोष यदि समय रहते नहीं संभाला गया, तो यह एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। यह केवल मीटर बदलने का मामला नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास, सुविधा और बुनियादी अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। सरकार को चाहिए कि वह इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत को समझे, उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान निकाले और प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाने के बजाय विकल्प के रूप में लागू करे। अन्यथा, यह सुधार का कदम कहीं सरकार के लिए ही भारी न पड़ जाए।
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलो पर चर्चा शुरू, विपक्ष का विरोध जारी

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महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिलों पर लोकसभा में चर्चा जारी है। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध किया। महिला संशोधन विधेयक समेत तीन बिल को लोकसभा में बहस के लिए स्‍वीकार किया जाए या नहीं इसपर वोटिंग कराया गया। इसमें 333 सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया। 207 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट किया, ज‍बकि 126 सदस्‍यों ने इसके विरोध में मतदान किया।

जनगणना और परिसीमन के आधार पर होगा लागू

लोकसभा में तीन विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पास हो चुका है और इसे 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा।

कुल सीटें करीब 815 तक पहुंच सकती हैं

मेघवाल ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल सीटें करीब 815 तक पहुंच सकती हैं। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो कुल सीटों का एक-तिहाई हिस्सा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सभी राज्यों की वर्तमान ताकत (सीटों की संख्या) बरकरार रहेगी।

तीनों विधेयक महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर लाए गए

केंद्र सरकार में मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा है कि मोदी सरकार महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और हाल में पेश किए गए विधेयक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने संविधान में संशोधन की शक्ति इसलिए दी थी ताकि समय-समय पर लोकहित में आवश्यक फैसले लिए जा सकें। मेघवाल ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित तीनों विधेयक महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर लाए गए हैं। उनके अनुसार, ये विधेयक महिलाओं के लिए राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी का अवसर देंगे।

गौरव गोगोई ने सरकार पर उठाए सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार महिला आरक्षण के रास्ते में रुकावटें पैदा कर रही है। अगर 2023 में विपक्ष की बात मानी जाती, तो 2024 में ही महिला आरक्षण लागू हो सकता था। गौरव गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने मांग की कि इसे अलग रखा जाए, तभी उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि पीछे के रास्ते से परिसीमन लागू करने का तरीका है।

विपक्ष पर जनता को गुमराह करने की कोशिश का आरोप

वहीं, संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चल रही चर्चा के दौरान भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने पूर्ववर्ती सरकारों, खासकर कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला। सूर्या ने संविधान में संशोधन को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के अनुरूप सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना ठोस आधार के आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। भाजपा सांसद ने कहा कि देश ने पिछले 40 वर्षों में ऐसे अवसर का इंतजार किया है, जब निर्णायक फैसले लेकर राष्ट्र को नई दिशा दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार जनहित में काम कर रही है और हर वर्ग के विकास को प्राथमिकता दे रही है।

संजय निषाद और बाबा दुबे की मुलाकात से बदली बदलापुर की राजनीति
जौनपुर (शिवपूजन पांडे)। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद का पूर्व विधायक बाबा दुबे से बदलापुर स्थित उनके आवास बाबा कुंज में की गई मुलाकात ने बदलापुर विधानसभा में राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। देखा जाए तो बाबा दुबे ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पिछला चुनाव लड़ा था और बहुत ही कम मतों से पराजित हुए थे। लोकसभा चुनाव में बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट दिए जाने से नाराज बाबा दुबे ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ है कि वे किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे? अब तक आठ चुनाव लड़ चुके बाबा दुबे का चुनाव लड़ना तय है और वह बाकायदा जन विश्वास यात्रा के माध्यम से लोगों से लगातार मिल रहे हैं। संजय निषाद की पार्टी, भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाबा दुबे से उनके मिलने का औचित्य क्या है? राजनीतिक जानकारों की माने तो संजय निषाद शाहगंज की सीट के बदले बदलापुर की सीट मांग सकते हैं। शाहगंज विधानसभा में जिस तरह से रमेश सिंह को मामूली मतों से विजय प्राप्त हुई थी, जबकि ओवैसी की पार्टी को 8 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे। 2027 के चुनाव में मुसलमान का यह मत किसी भी कीमत पर बंटता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में रमेश सिंह की विजय पर संदेह के बादल दिखाई दे रहे हैं। शाहगंज के मुकाबले संजय निषाद को बदलापुर की सीट ज्यादा सुरक्षित दिखाई दे रही है। भाजपा भी भीतर ही भीतर समाजवादी पार्टी के पीडीए प्रयोग से डरती दिखाई दे रही है। आने वाले चुनाव में यूजीसी प्रमुख मुद्दा रहेगा, जिसके चलते भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी बदलापुर विधानसभा में निषाद या अन्य ऐसी जाति के कैंडिडेट को खड़ा कर सकती है, जो भाजपा का वोट बैंक माना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा भी इस सीट पर झुकने को तैयार हो सकती है। इस बारे में पूछे जाने पर बाबा दुबे ने कहा कि संजय निषाद उनसे मित्रवत मुलाकात करने आए थे। हम लोगों के बीच कई बातों पर सकारात्मक चर्चा हुई।  एक बात तो तय है कि इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार पूरी तरह से गरम दिखाई दे रहा है।
जनगणना-2027: जिला स्तर पर तैयारियां तेज, DM ने दिए सख्त निर्देश
संजीव सिंह बलिया। जनगणना-2027 के सफल संचालन को लेकर जनपद स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को विकास भवन सभागार में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जनगणना 2027 के कार्यक्रम और उसकी समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा की गई।अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का कार्य किया जाएगा, जिसमें 07 मई से 21 मई 2026 तक स्वगणना होगी, जबकि 22 मई से 20 जून 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर विवरण एकत्र करेंगे। द्वितीय चरण में जनसंख्या एवं जाति आधारित गणना की जाएगी। यह चरण 09 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा, जबकि 01 मार्च से 05 मार्च 2027 तक पुनरीक्षण का कार्य किया जाएगा।जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना कार्य में लगे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण की सूची तैयार कर प्रत्येक तहसील स्तर पर ही ट्रेनिंग आयोजित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण के बाद कर्मियों की परीक्षा भी होगी, और जो कर्मचारी उसमें सफल नहीं होंगे, उन्हें पुनः प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा खंड शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य का नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना कार्य में विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। सभी विभागाध्यक्ष अपने-अपने कार्यालयों के कर्मचारियों को स्वगणना के लिए प्रेरित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी जिला स्तरीय अधिकारी स्वयं स्वगणना करें और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से भी इसे अनिवार्य रूप से करवाएं, ताकि जनगणना का कार्य पूरी पारदर्शिता और शुद्धता के साथ संपन्न हो सके।
सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल रसड़ा ने चमकाया परचम: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में 93.20% के साथ टॉपर तानिया सिंह

संजीव सिंह रसड़ा (बलिया), 16 अप्रैल 2026: सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा, जिला बलिया के कक्षा 10 के विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर स्कूल का नाम रोशन किया है। टॉपर कैडेट तानिया सिंह ने 93.20 प्रतिशत अंक हासिल कर सभी को प्रभावित किया, जबकि अन्य छात्रों ने भी सराहनीय सफलता प्राप्त की।यह उपलब्धि शैक्षणिक उत्कृष्टता और सर्वांगीण विकास के प्रति स्कूल की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विद्यार्थियों ने समर्पण, अनुशासन और दृढ़ता से संस्थान का मान बढ़ाया। टॉपर्स में तानिया सिंह (93.20%) के अलावा देवांश तिवारी (88.00%), अनुप्रिया (84.60%), विकास कुमार यादव (84.20%), अदिति सिंह (83.20%), हृषिका गुप्ता (82.80%), प्रियांशी यादव (82.20%) और ऋषभ सिंह (81.00%) शामिल हैं। इनकी मेहनत वाकई काबिले-तारीफ है।स्कूल के प्रधानाचार्य श्री संजीव सिंह चौहान ने सभी छात्रों को हार्दिक बधाई दी और शिक्षकों व अभिभावकों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने छात्रों को एकाग्र रहने, उच्च लक्ष्य रखने और उत्साह बनाए रखने का आह्वान किया।इस अवसर पर स्कूल की निदेशक श्रीमती इंद्रा सिंह ने सफल छात्रों को मिठाई भेंट कर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने छात्रों, कर्मचारियों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों को सफलता का आधार बताया।पूरा विद्यालय परिवार सफल छात्रों को बधाई देता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।
CBSE 10वीं के नतीजों में उदया इंटरनेशनल स्कूल का दबदबा, अस्तित्व उपाध्याय बने स्कूल टॉपर
यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है - डायरेक्टर  पं• उदय राज तिवारी

विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों और संस्कारों से भी समृद्ध बनाना है - प्रबंधक अंकित राज तिवारी


संत कबीर नगर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा घोषित कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणामों में उदया इंटरनेशनल स्कूल,भुजैनी के छात्र-छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया है। इस वर्ष विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत (100%) रहा,जो विद्यार्थियों की मेहनत,शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यालय की उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था को दर्शाता है। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में खुशी और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। मेधावियों ने गाड़े सफलता के झंडे
विद्यालय की मेरिट सूची में अस्तित्व उपाध्याय ने
92 %प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल करते हुए स्कूल टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया !

इस अवसर पर पूछे जाने पर अस्तित्व उपाध्याय ने  टॉपर बनने का श्रेय  विद्यालय के अपने सभी गुरुजनों  और माता-पिता को दिया  भविष्य के टारगेट को बताते हुए अस्तित्व उपाध्याय ने कहा  कि भविष्य में आईएएस बनने का सपना है ! जिसे हर हाल में पूरा करूंगा  !  

इसके अलावा रिद्धिमा शुक्ला ने 90.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि प्रिया सुभाषचंद्र यादव ने 88.6 प्रतिशत अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी क्रम में आयुष चौधरी ने 87 प्रतिशत,अमृत त्रिपाठी और अतुल मौर्य ने 85.6 प्रतिशत, सिद्धि चौधरी ने 84.4 प्रतिशत, समीक्षा जायसवाल ने 83 प्रतिशत, अखिलेश तथा श्रेयांश ने 81.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। सभी छात्रों की इस सफलता से विद्यालय परिवार में गर्व और हर्ष का माहौल है। विद्यार्थियों की इस शानदार उपलब्धि पर विद्यालय के डायरेक्टर पं. उदय राज तिवारी ने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। विद्यालय के प्रबंधक अंकित राज तिवारी  और और विद्यालय के प्रधानाचार्य  ने मिठाई खिलाकर अस्तित्व उपाध्याय  को अपना आशीर्वाद  दिया  और कहा कि  अस्तित्व से विद्यालय को ही नहीं भविष्य में पूरे जिले को उम्मीदें हैं   !  इतनी कम उम्र में अस्तित्व ने विद्यालय टॉप  करके विद्यालय का मान सम्मान बढ़ाया है ! उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में सफलता दिलाना ही नहीं बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और संस्कारों से भी समृद्ध बनाना है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य बसंत कुमार सेनापति ने कहा कि उदया इंटरनेशनल स्कूल सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करता रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी छात्र इसी प्रकार सफलता का परचम लहराते रहेंगे। खुशी और उत्साह का माहौल
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विद्यालय परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षकों ने छात्रों का मुँह मीठा कराकर उन्हें बधाई दी और अभिभावकों ने भी बच्चों की इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया। छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग को दिया।
आधुनिक शिक्षा का केंद्र बन रहा विद्यालय।उदया इंटरनेशनल स्कूल भुजैनी क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। विद्यालय में विज्ञान,कला और वाणिज्य संकायों के साथ कक्षा 11 एवं 12 का सफल संचालन किया जा रहा है। आधुनिक संसाधनों,अनुभवी शिक्षकों और अनुशासित वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,अनुशासन और सतत मार्गदर्शन के बल पर आने वाले समय में भी छात्र सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे और विद्यालय तथा जनपद का नाम रोशन करते रहेंगे  !
एल. बी. एस. डिग्री कॉलेज में 40 छात्र-छात्राओं का कैंपस चयन
गोंडा, 16 अप्रैल। केंद्रीय पेट्रोल रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), लखनऊ द्वारा श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज गोंडा में आयोजित कैंपस चयन प्रक्रिया के अंतर्गत आज 40 छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण हेतु चयन किया गया।
यह चयन ‘ऑपरेटर प्लास्टिक प्रोडक्ट्स मेकिंग (RSC/Q8016)’ पाठ्यक्रम के लिए विभिन्न महाविद्यालयों से आए अभ्यर्थियों के बीच संपन्न हुआ। तीन दिवसीय चयन प्रक्रिया 15 अप्रैल से 17 अप्रैल तक आयोजित की जा रही है, जिसमें आज दूसरे दिन 40 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की।
प्लेसमेंट सेल के समन्वयक डॉ. मनोज मिश्र ने बताया कि चयन प्रक्रिया सिपेट संस्थान से आए सहायक प्रशिक्षक कौशल मि. चंदन गुप्ता एवं सहायक कौशल प्रशिक्षक विशाल अवस्थी की उपस्थिति में संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन डॉ. मनोज मिश्र (समन्वयक, प्लेसमेंट सेल) द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ. हरीश शुक्ला, डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव सहित प्लेसमेंट सेल के सभी सदस्य एवं महाविद्यालय परिवार के अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।
महाविद्यालय में आयोजित इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं चयन कार्यक्रम से छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे उनके कौशल विकास को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।  महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी।
अटल आवासीय विद्यालयों ने पहली CBSE बोर्ड परीक्षा में रचा इतिहास

* 93.15% छात्र सफल, वाराणसी और प्रयागराज ने हासिल किया 100% परिणाम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत संचालित विद्यालयों ने अपनी पहली कक्षा 10 की CBSE बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। प्रदेश के सभी अटल आवासीय विद्यालयों का कुल परीक्षा परिणाम 93.15 प्रतिशत रहा। इस परीक्षा में कुल 2,178 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे।

सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि वाराणसी और प्रयागराज के अटल आवासीय विद्यालयों की रही, जहां 100 प्रतिशत परिणाम दर्ज किया गया। यह सफलता योजना की गुणवत्ता, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों की मेहनत का प्रमाण मानी जा रही है।

* मेधावी छात्रों ने बढ़ाया मान
परीक्षा में आजमगढ़ के छात्र संगम यादव ने 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया।
वहीं वाराणसी के हर्ष कुशवाहा ने 97.2 प्रतिशत अंक के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। प्रयागराज के छात्र हर्षित ने 95.8 प्रतिशत अंक पाकर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा आगरा के गणेश ने 95.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर चौथा स्थान तथा मुरादाबाद के उदय प्रताप ने 95 प्रतिशत अंक के साथ पांचवां स्थान प्राप्त किया।

* 50 से अधिक छात्रों ने पाए 90% से ज्यादा अंक
इस परीक्षा में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए, जबकि लगभग 250 विद्यार्थियों ने 80 से 90 प्रतिशत के बीच अंक प्राप्त किए। इससे विद्यालयों के उच्च शैक्षणिक स्तर का पता चलता है।

* मुख्यमंत्री योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना निर्माण श्रमिकों, निराश्रित एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, खेलकूद, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है।

* मंत्री अनिल राजभर ने दी बधाई
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि अटल आवासीय विद्यालय योजना का उद्देश्य श्रमिकों और वंचित वर्ग के बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर उनका भविष्य उज्ज्वल बनाना है।प्रथम बोर्ड परीक्षा में मिली यह सफलता साबित करती है कि अटल आवासीय विद्यालय आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में स्थापित होंगे और प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य को नई दिशा देंगे।
स्कूलों में शिक्षा नहीं,सिर्फ बेंचें: फीस से लेकर किताब तक परेशान अभिभावक
बच्चे बेंच तोड़ रहे हैं, स्कूल वाले जेब शंकरगढ़ की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी

स्कूल या वसूली केंद्र? शंकरगढ़ में अभिवावकों की जेब पर डाटा



विश्वनाथ प्रताप सिंह


प्रयागराज,प्रयागराज के शंकरगढ़ ब्लॉक के कई निजी और अर्ध-सरकारी स्कूलों में शिक्षा की जगह अब सिर्फ 'व्यापार' चल रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के नाम पर केवल बेंच पर बैठाया जा रहा है, जबकि फीस, यूनिफॉर्म, किताब-कॉपियों और अन्य गतिविधियों के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं।स्थानीय अभिभावकों के अनुसार, ब्लॉक के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। कक्षाएं तो लगती हैं, लेकिन पढ़ाई न के बराबर। कई जगह तो एक ही शिक्षक 3-4 कक्षाओं को एक साथ 'संभाल' रहा है। वहीं दूसरी ओर, हर साल एडमिशन फीस, एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फीस के नाम पर 15 से 25 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी किताबों को लेकर है। स्कूल प्रबंधन हर साल कोर्स बदल देता है और किताबें केवल स्कूल द्वारा तय दुकान से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। बाजार से 400 रुपये में मिलने वाली किताब का सेट स्कूल से 1200 रुपये तक में बेचा जा रहा है। शंकरगढ़ निवासी संदीप सिंह ने बताया, "बच्चे को स्कूल भेजते हैं तो लगता है पढ़ने गया है, पर घर आकर पूछो तो कहता है 'सर आए ही नहीं'। लेकिन फीस में एक दिन की भी देरी पर 50 रुपये जुर्माना लग जाता है। एक अन्य अभिभावक हरी ओम द्विवेदी का कहना है, "किताब, ड्रेस, जूते-मोजे सब स्कूल से ही लेना मजबूरी है। बाहर से लो तो टीचर बच्चे को ताने मारते हैं। शिक्षा तो दूर, बच्चों का मनोबल भी टूट रहा है। इस मामले में जब खंड शिक्षा अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो पाया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शंकरगढ़ ब्लॉक के सैकड़ों अभिभावक इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मांग है कि फीस और किताबों के रेट तय किए जाएं और स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित हो, ताकि 'बेंच' पर बैठने वाले बच्चे सच में 'शिक्षा' पा सकें।
इस बिल को राजनीतिक रंग न दें, महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी

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संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार ने ये विशेष सत्र बुलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर लोकसभा में चर्चा में शामिल हुए। महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। ये 21वीं सदी का सबसे अहम बिल है।

राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने बिल पर लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा, राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं। मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। आवश्यकता यही थी कि 25 से 30 साल पहले जब ये विचार सामने आया। जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते।

देश की दशा-दिशा तय करने वाला बिल- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि, हमारा सौभाग्य है कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने का सौभाग्य मिल रहा है। हम सभी सांसद इस अवसर को जाने न दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन वयवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। इस मंथन से जो अमृत निकलेगा वो देश की राजनीति की भी दशा दिशा तय करेगा।

पीएम मोदी ने कहा- इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं

पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाया। उन्होंने कहा, 'हमारे देश में जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया है उसका हाल बुरा हुआ है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि किसी ने विरोध नहीं किया। आज भी मैं कहता हूं कि हम साथ जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के पक्ष में नहीं जाएगा, ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा। हम सब उसके हकदार रहेंगे। इसलिए जिन को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें। इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे। इसलिए इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

विरोध करने वालों को देश की महिलाएं माफ नहीं करेंगी-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की महिलाएं अब मुखर हो रही हैं। वे समाज की भावनाओं और समस्याओं को गहराई से समझती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएं सशक्त, महत्वाकांक्षी और निर्णय लेने में सक्षम हैं, इसलिए वे शासन और कानून निर्माण में भागीदारी चाहती हैं। उन्होंने साफ कहा कि जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। पीएम मोदी ने विपक्ष से कहा कि देश की बहनों पर भरोसा करें और उन्हें आगे आने का अवसर दें। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।

हमें क्रेडिट नहीं चाहिए- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने सदन में कहा कि यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। पीएम ने कहा क‍ि अगर इसका विरोध करेंगे तो राजनीतिक लाभ मुझे होगा। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इसका क्रेडिट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कानून बन जाए तो कल के कल अखबार में सबकी फोटो के साथ बधाई संदेश छपवाने को तैयार हूं। जिसका भी फोटो छपवााना हो, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको देर रहा हूं।

प्रीपेड मीटर: सुधार या नया संकट? उपभोक्ताओं में बढ़ता असंतोष”
अमर बहादुर सिंह बलिया शहर,नगरा ! देश में बिजली सुधारों के नाम पर लागू की जा रही प्रीपेड मीटर व्यवस्था अब एक नई बहस का केंद्र बनती जा रही है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता, बिलिंग सुधार और बिजली चोरी रोकने का प्रभावी उपाय बता रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। आम उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था धीरे-धीरे एक गंभीर समस्या का रूप लेती नजर आ रही है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रीपेड मीटर उनके लिए सुविधा नहीं, बल्कि अतिरिक्त बोझ बन गया है। जिन इलाकों में आज भी बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं है, वहां पहले से ही परेशान लोग अब रिचार्ज और बैलेंस खत्म होने की नई चिंता में घिर गए हैं। कई जगहों पर यह स्थिति ऐसी हो गई है कि बिजली होने के बावजूद बैलेंस खत्म होने पर घर अंधेरे में डूब जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था को सीधे लागू करने के बजाय इसे एक विकल्प के रूप में पेश किया जाना चाहिए था। बड़े शहरों और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, लेकिन कमजोर और ग्रामीण वर्ग पर इसे थोपना नीतिगत असंतुलन को दर्शाता है। वहीं, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। बिजली चोरी रोकने के लिए पहले से ही अलग थाने, पुलिस बल और निगरानी तंत्र मौजूद हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर ही जिम्मेदारी डालना कई लोगों को समझ से परे लग रहा है। यह भी एक बड़ा मुद्दा है कि वर्षों से संविदा पर काम कर रहे लाइनमैन और तकनीकी कर्मचारी आज भी स्थायी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि पूरी व्यवस्था उन्हीं के भरोसे चल रही है। प्रीपेड मीटर में तकनीकी खराबी आने पर उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली घरों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिल पाता, क्योंकि वहां मौजूद संविदा कर्मचारियों के पास सीमित अधिकार होते हैं। दूसरी ओर, स्थायी अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ अक्सर नए मीटर लगाने के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। नीति-निर्माताओं के लिए यह एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। बढ़ता असंतोष यदि समय रहते नहीं संभाला गया, तो यह एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। यह केवल मीटर बदलने का मामला नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास, सुविधा और बुनियादी अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। सरकार को चाहिए कि वह इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत को समझे, उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान निकाले और प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाने के बजाय विकल्प के रूप में लागू करे। अन्यथा, यह सुधार का कदम कहीं सरकार के लिए ही भारी न पड़ जाए।
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलो पर चर्चा शुरू, विपक्ष का विरोध जारी

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महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिलों पर लोकसभा में चर्चा जारी है। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध किया। महिला संशोधन विधेयक समेत तीन बिल को लोकसभा में बहस के लिए स्‍वीकार किया जाए या नहीं इसपर वोटिंग कराया गया। इसमें 333 सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया। 207 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट किया, ज‍बकि 126 सदस्‍यों ने इसके विरोध में मतदान किया।

जनगणना और परिसीमन के आधार पर होगा लागू

लोकसभा में तीन विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पास हो चुका है और इसे 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा।

कुल सीटें करीब 815 तक पहुंच सकती हैं

मेघवाल ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल सीटें करीब 815 तक पहुंच सकती हैं। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो कुल सीटों का एक-तिहाई हिस्सा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सभी राज्यों की वर्तमान ताकत (सीटों की संख्या) बरकरार रहेगी।

तीनों विधेयक महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर लाए गए

केंद्र सरकार में मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा है कि मोदी सरकार महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और हाल में पेश किए गए विधेयक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने संविधान में संशोधन की शक्ति इसलिए दी थी ताकि समय-समय पर लोकहित में आवश्यक फैसले लिए जा सकें। मेघवाल ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित तीनों विधेयक महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर लाए गए हैं। उनके अनुसार, ये विधेयक महिलाओं के लिए राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी का अवसर देंगे।

गौरव गोगोई ने सरकार पर उठाए सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार महिला आरक्षण के रास्ते में रुकावटें पैदा कर रही है। अगर 2023 में विपक्ष की बात मानी जाती, तो 2024 में ही महिला आरक्षण लागू हो सकता था। गौरव गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने मांग की कि इसे अलग रखा जाए, तभी उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि पीछे के रास्ते से परिसीमन लागू करने का तरीका है।

विपक्ष पर जनता को गुमराह करने की कोशिश का आरोप

वहीं, संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चल रही चर्चा के दौरान भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने पूर्ववर्ती सरकारों, खासकर कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला। सूर्या ने संविधान में संशोधन को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के अनुरूप सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना ठोस आधार के आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। भाजपा सांसद ने कहा कि देश ने पिछले 40 वर्षों में ऐसे अवसर का इंतजार किया है, जब निर्णायक फैसले लेकर राष्ट्र को नई दिशा दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार जनहित में काम कर रही है और हर वर्ग के विकास को प्राथमिकता दे रही है।

संजय निषाद और बाबा दुबे की मुलाकात से बदली बदलापुर की राजनीति
जौनपुर (शिवपूजन पांडे)। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद का पूर्व विधायक बाबा दुबे से बदलापुर स्थित उनके आवास बाबा कुंज में की गई मुलाकात ने बदलापुर विधानसभा में राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। देखा जाए तो बाबा दुबे ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पिछला चुनाव लड़ा था और बहुत ही कम मतों से पराजित हुए थे। लोकसभा चुनाव में बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट दिए जाने से नाराज बाबा दुबे ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ है कि वे किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे? अब तक आठ चुनाव लड़ चुके बाबा दुबे का चुनाव लड़ना तय है और वह बाकायदा जन विश्वास यात्रा के माध्यम से लोगों से लगातार मिल रहे हैं। संजय निषाद की पार्टी, भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाबा दुबे से उनके मिलने का औचित्य क्या है? राजनीतिक जानकारों की माने तो संजय निषाद शाहगंज की सीट के बदले बदलापुर की सीट मांग सकते हैं। शाहगंज विधानसभा में जिस तरह से रमेश सिंह को मामूली मतों से विजय प्राप्त हुई थी, जबकि ओवैसी की पार्टी को 8 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे। 2027 के चुनाव में मुसलमान का यह मत किसी भी कीमत पर बंटता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में रमेश सिंह की विजय पर संदेह के बादल दिखाई दे रहे हैं। शाहगंज के मुकाबले संजय निषाद को बदलापुर की सीट ज्यादा सुरक्षित दिखाई दे रही है। भाजपा भी भीतर ही भीतर समाजवादी पार्टी के पीडीए प्रयोग से डरती दिखाई दे रही है। आने वाले चुनाव में यूजीसी प्रमुख मुद्दा रहेगा, जिसके चलते भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी बदलापुर विधानसभा में निषाद या अन्य ऐसी जाति के कैंडिडेट को खड़ा कर सकती है, जो भाजपा का वोट बैंक माना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा भी इस सीट पर झुकने को तैयार हो सकती है। इस बारे में पूछे जाने पर बाबा दुबे ने कहा कि संजय निषाद उनसे मित्रवत मुलाकात करने आए थे। हम लोगों के बीच कई बातों पर सकारात्मक चर्चा हुई।  एक बात तो तय है कि इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार पूरी तरह से गरम दिखाई दे रहा है।