*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
अब सिर्फ मौजूदगी नहीं, नेतृत्व की तैयारी: मध्य प्रदेश की 40 साल पुरानी कंपनी बदलने
जा रही है भारतीय बेवरेज इंडस्ट्री की तस्वीर

 भारत के कई बड़े और चर्चित ब्रांड्स के पीछे काम करने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, ग्रेट गैलियन वेंचर्स
लिमिटेड अब अपने नए कंज्यूमर ब्रांड्स के साथ आ रही है
 अपने लंबे अनुभव, मजबूत कौशल और बाजार की बदलती जरूरतों की समझ के साथ भारतीय बेवरेज
मार्केट में नई पहचान बनाने की तैयारी
इंदौर, मई 2026: पिछले चार दशकों से ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड (जीजीवीएल) भारत की बेवरेज मैन्युफैक्चरिंग
इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नाम रहा है। कंपनी हमेशा से ही साइलेंट फोर्स की तरह इंडस्ट्री के कई बड़े ब्रांड्स और अहम्
पड़ावों का हिस्सा रही है, भले ही वह खुद ज्यादा चर्चा में न रही हो। सन् 1985 में मध्य प्रदेश के धार में 'हाउस ऑफ
केडियाज़' के तहत शुरू हुई इस कंपनी ने प्रोडक्शन, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबल पैकेजिंग इनोवेशन के क्षेत्र
में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इसी वजह से कई ग्लोबल स्पिरिट ब्रांड्स ने भी कंपनी पर भरोसा जताया है।
अब यही अनुभव और समझ कंपनी अपने खुद के भारतीय ड्रिंक्स पोर्टफोलियो को तैयार करने में लगा रही है, जिसे
खासतौर पर आज के मॉडर्न ग्राहकों की पसंद और जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड के वीपी- बिज़नेस ग्रोथ, उत्सव केडिया ने कहा, "बैच मास्टर की सबसे खास बात यह है
कि यह लोगों को सच में आश्चर्यचकित करती है और अपनी गुणवत्ता से प्रभावित करती है। इसमें इस्तेमाल किए गए
एज्ड स्कॉच माल्ट्स इसे ऐसी गहराई और स्वाद देते हैं, जिसकी उम्मीद लोग इस कीमत में नहीं करते। यह प्रीमियम
फील देती है, लेकिन ऐसी नहीं कि उसे खरीदने से पहले ज्यादा सोचना पड़े। हम इसी संतुलन को हासिल करना
चाहते थे और हमें लगता है कि हम इसमें सफल रहे हैं।"
जीजीवीएल की यह यात्रा भारत की एल्को-बेव इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलाव को भी उजागर करती है। कंपनी मध्य
प्रदेश में बेवरेज रिटेल के निजीकरण को आगे बढ़ाने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र
में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग सेटअप स्थापित करने में भी कंपनी की भूमिका अहम् रही है। समय के साथ इसने एक
ज़ीरो-वेस्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का रूप ले लिया, जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ इन-हाउस बॉटल प्रोडक्शन भी
किया जाता है। आज कंपनी के प्रोडक्ट्स ओमान, सिंगापुर, टोगो, कैमरून, नाइजर और फ्रीटाउन जैसे देशों तक पहुँच
रहे हैं और अपनी सटीकता, लगातार एक जैसी क्वालिटी और बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता के चलते कंपनी इंडस्ट्री की
भरोसेमंद पार्टनर बन चुकी है।
पिछले कुछ सालों में, कंपनी ने अपने रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव को कई कंज्यूमर ब्रांड्स तैयार
करने में लगाया है। इनमें वी21 प्रीमियम, जो भारत की पहली ऐसी वोडका है, जिसे 100 प्रतिशत सर्टिफाइड
आरपीईटी पैकेजिंग में पेश किया गया है, के साथ रास्कल आरटीडी, बिग बुल रम, रिट्ज प्रीमियम व्हिस्की और गोवा
व्हिस्की जैसे ब्रांड्स शामिल हैं।

कंपनी के इसी पोर्टफोलियो में नया नाम जुड़ा है- बैच मास्टर व्हिस्की। यह एक ब्लेंडेड व्हिस्की है, जिसे एज्ड स्कॉच
माल्ट्स के साथ तैयार किया गया है और खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए बनाई गई है, जो अपने रोजमर्रा के ड्रिंकिंग
एक्सपीरियंस को एक बेहतर स्तर पर ले जाना चाहते हैं। आईडब्ल्यूएसआर के आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 की
पहली छमाही में भारतीय व्हिस्की मार्केट में 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि प्रीमियम और उससे ऊपर की
कैटेगरी में 8 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। ऐसे समय में, जब दुनियाभर के कई बाजारों में प्रीमियमाइजेशन की
रफ्तार धीमी पड़ रही है, भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। 700 रुपए की कीमत में उपलब्ध बैच मास्टर फिलहाल
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों- इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, सागर, देवास, सतना, रीवा और
बुरहानपुर में उपलब्ध है। यह ब्रांड जीजीवीएल के उसी विज़न को आगे बढ़ाता है, जहाँ मजबूत मैन्युफैक्चरिंग
अनुभव और बदलते बाजार की माँग का सही मेल देखने को मिलता है।
देवघर-स्व. वर्धन खवाड़े ट्रॉफी: दूसरा दिन अंकित पांडेय का ऑलराउंड धमाल, मिश्रा इलेवन को मिली करारी शिकस्त।
देवघर: स्थानीय टेनिस बॉल क्रिकेट के महाकुंभ स्व. वर्धन खवाड़े ट्रॉफी के दूसरे दिन मैदान पर रनों की बारिश और रोमांचक मुकाबलों का बोलबाला रहा। दिन का सबसे बड़ा आकर्षण अंकित पांडेय का तूफानी प्रदर्शन रहा, जिनकी बदौलत मुकेश फ्लावर ने एकतरफा जीत दर्ज की। मैचों का लेखा-जोखा अंकित की पावर-हिटिंग से दहली विपक्षी टीम आज के मुकाबलों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। मुख्य आकर्षणों का विवरण इस प्रकार है। मुकेश फ्लावर बनाम मिश्रा इलेवन इस मैच में अंकित पांडेय का बल्ला आग उगलता नजर आया। अंकित ने मात्र 37 गेंदों में 92 रनों की आतिशी पारी खेली, जिसमें 10 गगनचुंबी छक्के और 5 चौके शामिल थे। बल्लेबाजी के बाद उन्होंने गेंदबाजी में भी अपना जलवा बिखेरा और 3 विकेट चटकाए। उनके इस शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की मदद से मुकेश फ्लावर ने मिश्रा इलेवन को 97 रनों के विशाल अंतर से हराया। मां मनसा ऑरेंज लायंस बनाम राजा कैटरिंग एक बेहद करीबी मुकाबले में ऑरेंज लायंस ने राजा कैटरिंग को 3 विकेट से मात देकर अगले दौर में अपनी जगह पक्की की। वीरांश स्टाइलिश बनाम बादशाह इलेवन वीरांश स्टाइलिश की टीम ने सधे हुए खेल का प्रदर्शन करते हुए बादशाह इलेवन को 13 रनों से पराजित किया। त्रिकाल इलेवन बनाम जोई इलेवन सारवा त्रिकाल इलेवन ने मैच में दबदबा बनाए रखा। पहले बल्लेबाजी करते हुए त्रिकाल इलेवन ने 141 रन बनाए, जिसके जवाब में जोई इलेवन मात्र 37 रनों पर ढेर हो गई। त्रिकाल इलेवन की ओर से लोकनाथ और प्रवीण ने घातक गेंदबाजी करते हुए 4-4 विकेट लिए। जोई इलेवन की ओर से केवल कुणाल मिश्रा ही दहाई के आंकड़े तक पहुँच सके। खिलाड़ियों का सम्मान और आयोजन मैच के समापन पर आयोजन समिति के सचिव आशिष झा और कार्यकारी सचिव नीरज झा ने सभी 'मैन ऑफ द मैच' विजेताओं को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर दीपक दुबे, अजय खवाड़े सहित आयोजन समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे, जिन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। टेनिस बॉल क्रिकेट: प्रतिभा निखारने का सशक्त माध्यम टेनिस बॉल क्रिकेट मात्र एक खेल नहीं, बल्कि जमीनी स्तर के खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का सबसे बड़ा मंच है। इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि युवाओं में अनुशासन और टीम भावना का भी विकास होता है। स्व. वर्धन खवाड़े ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट यह साबित करते हैं कि यदि सही अवसर मिले, तो गलियों से निकले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का कौशल दिखा सकते हैं। टेनिस बॉल क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, ऐसे आयोजन खेल जगत के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। यह खेल की सादगी और रोमांच ही है जो हजारों दर्शकों को मैदान की ओर खींच लाता है।
देवघर के डीएवी भंडारकोला के विद्यार्थियों ने बारहवीं की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता प्राप्त कर लहराया परचम।
देवघर: गीता देवी डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, भंडारकोला, के विद्यार्थियों ने सीबीएसई की बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रौशन किया। विद्यार्थियों की शानदार सफलता से विद्यालय परिसर में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण व्याप्त है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान एवं वाणिज्य कला संकाय में बेहतरीन अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विज्ञान संकाय में 91.4 प्रतिशत अंक के साथ सुंदरम प्रथम स्थान, 85 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम राज दूसरे और 84 प्रतिशत अंक के साथ मो असजद अंसारी तीसरे स्थान पर रहे। वाणिज्य संकाय में 90.6 प्रतिशत अंक के साथ ओम भारद्वाज प्रथम, 86.6 प्रतिशत अंक के साथ ऋचा सिंह दूसरे और 83.6 प्रतिशत अंक के साथ क्रमशः श्रेयश कुमार और निधि कुमारी तीसरे स्थान पर रहे। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि का श्रेय उनके कठिन परिश्रम, शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं अभिभावकों के सहयोग को दिया गया। विद्यालय के प्राचार्य ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह परिणाम विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन एवं शिक्षकों की समर्पित शिक्षण पद्धति का प्रतिफल है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पीएम के आह्वान पर कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने पेश की मिसाल, पैदल जाएंगे कार्यालय कुलपति ने की ईधन बचाने की अपील

प्रयागराज, 13 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने की अपील का असर उ.प्र. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में व्यापक रूप से दिखा है। कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने लीड बाय एक्जाम्पल  की भावना से खुद पैदल कार्यालय जाने का फैसला लिया है और साथ ही विश्वविद्यालय के सभी 12 क्षेत्रीय केंद्रों के समन्वयकों व समस्त शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों से भी ईंधन बचाने की अपील की है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सत्यकाम ने घोषणा की कि वे प्रतिदिन आवास से गंगा परिसर स्थित कार्यालय तक पैदल आएंगे।
कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का आह्वान राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। मैंने अपने सभी क्षेत्रीय केंद्रों के निदेशकों, समन्वयकों एवं शिक्षक साथियों से अनुरोध किया है कि वे भी सप्ताह में कम से कम एक दिन पैदल या साइकिल से कार्यालय आएं। जब 12 केंद्रों का परिवार एक साथ यह कदम उठाएगा, तो हजारों लीटर ईंधन बचेगा और लाखों छात्रों तक पर्यावरण का संदेश जाएगा। यह एक भारत श्रेष्ठ भारत की सच्ची भावना है।
मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल एवं डीज़ल जैसे जीवाश्म ईंधनों की खपत कम करने तथा भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने हेतु निरंतर प्रेरित किया जा रहा है। यह केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक राष्ट्रीय दायित्व भी है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि कि वे ऊर्जा संरक्षण एवं ईंधन बचत को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं तथा छोटी दूरी की यात्रा हेतु साइकिल अथवा पैदल चलने को प्राथमिकता दें। यथासंभव सार्वजनिक परिवहन, बस का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक करें। मुक्त विश्वविद्यालय सदैव सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना एवं राष्ट्र निर्माण के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। आज आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर स्वच्छ, हरित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी ऊर्जा संरक्षण का संकल्प लेकर राष्ट्रहित में अपना योगदान दें।

  डॉ प्रभात चंद्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
अब सिर्फ मौजूदगी नहीं, नेतृत्व की तैयारी: मध्य प्रदेश की 40 साल पुरानी कंपनी बदलने
जा रही है भारतीय बेवरेज इंडस्ट्री की तस्वीर

 भारत के कई बड़े और चर्चित ब्रांड्स के पीछे काम करने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, ग्रेट गैलियन वेंचर्स
लिमिटेड अब अपने नए कंज्यूमर ब्रांड्स के साथ आ रही है
 अपने लंबे अनुभव, मजबूत कौशल और बाजार की बदलती जरूरतों की समझ के साथ भारतीय बेवरेज
मार्केट में नई पहचान बनाने की तैयारी
इंदौर, मई 2026: पिछले चार दशकों से ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड (जीजीवीएल) भारत की बेवरेज मैन्युफैक्चरिंग
इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नाम रहा है। कंपनी हमेशा से ही साइलेंट फोर्स की तरह इंडस्ट्री के कई बड़े ब्रांड्स और अहम्
पड़ावों का हिस्सा रही है, भले ही वह खुद ज्यादा चर्चा में न रही हो। सन् 1985 में मध्य प्रदेश के धार में 'हाउस ऑफ
केडियाज़' के तहत शुरू हुई इस कंपनी ने प्रोडक्शन, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबल पैकेजिंग इनोवेशन के क्षेत्र
में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इसी वजह से कई ग्लोबल स्पिरिट ब्रांड्स ने भी कंपनी पर भरोसा जताया है।
अब यही अनुभव और समझ कंपनी अपने खुद के भारतीय ड्रिंक्स पोर्टफोलियो को तैयार करने में लगा रही है, जिसे
खासतौर पर आज के मॉडर्न ग्राहकों की पसंद और जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
ग्रेट गैलियन वेंचर्स लिमिटेड के वीपी- बिज़नेस ग्रोथ, उत्सव केडिया ने कहा, "बैच मास्टर की सबसे खास बात यह है
कि यह लोगों को सच में आश्चर्यचकित करती है और अपनी गुणवत्ता से प्रभावित करती है। इसमें इस्तेमाल किए गए
एज्ड स्कॉच माल्ट्स इसे ऐसी गहराई और स्वाद देते हैं, जिसकी उम्मीद लोग इस कीमत में नहीं करते। यह प्रीमियम
फील देती है, लेकिन ऐसी नहीं कि उसे खरीदने से पहले ज्यादा सोचना पड़े। हम इसी संतुलन को हासिल करना
चाहते थे और हमें लगता है कि हम इसमें सफल रहे हैं।"
जीजीवीएल की यह यात्रा भारत की एल्को-बेव इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलाव को भी उजागर करती है। कंपनी मध्य
प्रदेश में बेवरेज रिटेल के निजीकरण को आगे बढ़ाने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र
में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग सेटअप स्थापित करने में भी कंपनी की भूमिका अहम् रही है। समय के साथ इसने एक
ज़ीरो-वेस्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का रूप ले लिया, जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ इन-हाउस बॉटल प्रोडक्शन भी
किया जाता है। आज कंपनी के प्रोडक्ट्स ओमान, सिंगापुर, टोगो, कैमरून, नाइजर और फ्रीटाउन जैसे देशों तक पहुँच
रहे हैं और अपनी सटीकता, लगातार एक जैसी क्वालिटी और बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता के चलते कंपनी इंडस्ट्री की
भरोसेमंद पार्टनर बन चुकी है।
पिछले कुछ सालों में, कंपनी ने अपने रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव को कई कंज्यूमर ब्रांड्स तैयार
करने में लगाया है। इनमें वी21 प्रीमियम, जो भारत की पहली ऐसी वोडका है, जिसे 100 प्रतिशत सर्टिफाइड
आरपीईटी पैकेजिंग में पेश किया गया है, के साथ रास्कल आरटीडी, बिग बुल रम, रिट्ज प्रीमियम व्हिस्की और गोवा
व्हिस्की जैसे ब्रांड्स शामिल हैं।

कंपनी के इसी पोर्टफोलियो में नया नाम जुड़ा है- बैच मास्टर व्हिस्की। यह एक ब्लेंडेड व्हिस्की है, जिसे एज्ड स्कॉच
माल्ट्स के साथ तैयार किया गया है और खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए बनाई गई है, जो अपने रोजमर्रा के ड्रिंकिंग
एक्सपीरियंस को एक बेहतर स्तर पर ले जाना चाहते हैं। आईडब्ल्यूएसआर के आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 की
पहली छमाही में भारतीय व्हिस्की मार्केट में 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि प्रीमियम और उससे ऊपर की
कैटेगरी में 8 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। ऐसे समय में, जब दुनियाभर के कई बाजारों में प्रीमियमाइजेशन की
रफ्तार धीमी पड़ रही है, भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। 700 रुपए की कीमत में उपलब्ध बैच मास्टर फिलहाल
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों- इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, सागर, देवास, सतना, रीवा और
बुरहानपुर में उपलब्ध है। यह ब्रांड जीजीवीएल के उसी विज़न को आगे बढ़ाता है, जहाँ मजबूत मैन्युफैक्चरिंग
अनुभव और बदलते बाजार की माँग का सही मेल देखने को मिलता है।
देवघर-स्व. वर्धन खवाड़े ट्रॉफी: दूसरा दिन अंकित पांडेय का ऑलराउंड धमाल, मिश्रा इलेवन को मिली करारी शिकस्त।
देवघर: स्थानीय टेनिस बॉल क्रिकेट के महाकुंभ स्व. वर्धन खवाड़े ट्रॉफी के दूसरे दिन मैदान पर रनों की बारिश और रोमांचक मुकाबलों का बोलबाला रहा। दिन का सबसे बड़ा आकर्षण अंकित पांडेय का तूफानी प्रदर्शन रहा, जिनकी बदौलत मुकेश फ्लावर ने एकतरफा जीत दर्ज की। मैचों का लेखा-जोखा अंकित की पावर-हिटिंग से दहली विपक्षी टीम आज के मुकाबलों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। मुख्य आकर्षणों का विवरण इस प्रकार है। मुकेश फ्लावर बनाम मिश्रा इलेवन इस मैच में अंकित पांडेय का बल्ला आग उगलता नजर आया। अंकित ने मात्र 37 गेंदों में 92 रनों की आतिशी पारी खेली, जिसमें 10 गगनचुंबी छक्के और 5 चौके शामिल थे। बल्लेबाजी के बाद उन्होंने गेंदबाजी में भी अपना जलवा बिखेरा और 3 विकेट चटकाए। उनके इस शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की मदद से मुकेश फ्लावर ने मिश्रा इलेवन को 97 रनों के विशाल अंतर से हराया। मां मनसा ऑरेंज लायंस बनाम राजा कैटरिंग एक बेहद करीबी मुकाबले में ऑरेंज लायंस ने राजा कैटरिंग को 3 विकेट से मात देकर अगले दौर में अपनी जगह पक्की की। वीरांश स्टाइलिश बनाम बादशाह इलेवन वीरांश स्टाइलिश की टीम ने सधे हुए खेल का प्रदर्शन करते हुए बादशाह इलेवन को 13 रनों से पराजित किया। त्रिकाल इलेवन बनाम जोई इलेवन सारवा त्रिकाल इलेवन ने मैच में दबदबा बनाए रखा। पहले बल्लेबाजी करते हुए त्रिकाल इलेवन ने 141 रन बनाए, जिसके जवाब में जोई इलेवन मात्र 37 रनों पर ढेर हो गई। त्रिकाल इलेवन की ओर से लोकनाथ और प्रवीण ने घातक गेंदबाजी करते हुए 4-4 विकेट लिए। जोई इलेवन की ओर से केवल कुणाल मिश्रा ही दहाई के आंकड़े तक पहुँच सके। खिलाड़ियों का सम्मान और आयोजन मैच के समापन पर आयोजन समिति के सचिव आशिष झा और कार्यकारी सचिव नीरज झा ने सभी 'मैन ऑफ द मैच' विजेताओं को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर दीपक दुबे, अजय खवाड़े सहित आयोजन समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे, जिन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। टेनिस बॉल क्रिकेट: प्रतिभा निखारने का सशक्त माध्यम टेनिस बॉल क्रिकेट मात्र एक खेल नहीं, बल्कि जमीनी स्तर के खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का सबसे बड़ा मंच है। इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि युवाओं में अनुशासन और टीम भावना का भी विकास होता है। स्व. वर्धन खवाड़े ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट यह साबित करते हैं कि यदि सही अवसर मिले, तो गलियों से निकले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का कौशल दिखा सकते हैं। टेनिस बॉल क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, ऐसे आयोजन खेल जगत के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। यह खेल की सादगी और रोमांच ही है जो हजारों दर्शकों को मैदान की ओर खींच लाता है।
देवघर के डीएवी भंडारकोला के विद्यार्थियों ने बारहवीं की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता प्राप्त कर लहराया परचम।
देवघर: गीता देवी डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, भंडारकोला, के विद्यार्थियों ने सीबीएसई की बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रौशन किया। विद्यार्थियों की शानदार सफलता से विद्यालय परिसर में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण व्याप्त है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान एवं वाणिज्य कला संकाय में बेहतरीन अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विज्ञान संकाय में 91.4 प्रतिशत अंक के साथ सुंदरम प्रथम स्थान, 85 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम राज दूसरे और 84 प्रतिशत अंक के साथ मो असजद अंसारी तीसरे स्थान पर रहे। वाणिज्य संकाय में 90.6 प्रतिशत अंक के साथ ओम भारद्वाज प्रथम, 86.6 प्रतिशत अंक के साथ ऋचा सिंह दूसरे और 83.6 प्रतिशत अंक के साथ क्रमशः श्रेयश कुमार और निधि कुमारी तीसरे स्थान पर रहे। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि का श्रेय उनके कठिन परिश्रम, शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं अभिभावकों के सहयोग को दिया गया। विद्यालय के प्राचार्य ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह परिणाम विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन एवं शिक्षकों की समर्पित शिक्षण पद्धति का प्रतिफल है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पीएम के आह्वान पर कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने पेश की मिसाल, पैदल जाएंगे कार्यालय कुलपति ने की ईधन बचाने की अपील

प्रयागराज, 13 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने की अपील का असर उ.प्र. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में व्यापक रूप से दिखा है। कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने लीड बाय एक्जाम्पल  की भावना से खुद पैदल कार्यालय जाने का फैसला लिया है और साथ ही विश्वविद्यालय के सभी 12 क्षेत्रीय केंद्रों के समन्वयकों व समस्त शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों से भी ईंधन बचाने की अपील की है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सत्यकाम ने घोषणा की कि वे प्रतिदिन आवास से गंगा परिसर स्थित कार्यालय तक पैदल आएंगे।
कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का आह्वान राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। मैंने अपने सभी क्षेत्रीय केंद्रों के निदेशकों, समन्वयकों एवं शिक्षक साथियों से अनुरोध किया है कि वे भी सप्ताह में कम से कम एक दिन पैदल या साइकिल से कार्यालय आएं। जब 12 केंद्रों का परिवार एक साथ यह कदम उठाएगा, तो हजारों लीटर ईंधन बचेगा और लाखों छात्रों तक पर्यावरण का संदेश जाएगा। यह एक भारत श्रेष्ठ भारत की सच्ची भावना है।
मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल एवं डीज़ल जैसे जीवाश्म ईंधनों की खपत कम करने तथा भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने हेतु निरंतर प्रेरित किया जा रहा है। यह केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक राष्ट्रीय दायित्व भी है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि कि वे ऊर्जा संरक्षण एवं ईंधन बचत को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं तथा छोटी दूरी की यात्रा हेतु साइकिल अथवा पैदल चलने को प्राथमिकता दें। यथासंभव सार्वजनिक परिवहन, बस का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक करें। मुक्त विश्वविद्यालय सदैव सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना एवं राष्ट्र निर्माण के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। आज आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर स्वच्छ, हरित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी ऊर्जा संरक्षण का संकल्प लेकर राष्ट्रहित में अपना योगदान दें।

  डॉ प्रभात चंद्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी