स्वतंत्रता दिवस 2026: राज्य के 10 जिलों में मंत्री करेंगे झंडोत्तोलन

रांची। स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के अवसर पर 15 अगस्त को राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में माननीय मंत्रियों द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जारी निर्देश के अनुसार पलामू (डालटनगंज) में माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर एवं माननीय मंत्री श्री दीपक बिरुवा, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गुमला में भी माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गोड्डा में माननीय मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, जामताड़ा में माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, देवघर में माननीय मंत्री श्री हफीजूल हसन, पाकुड़ में माननीय मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, बोकारो में माननीय मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद, गिरिडीह में माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार तथा लोहरदगा में माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की झंडोत्तोलन करेंगी।

विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों एवं वरीय पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित मंत्रियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राज्य सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमामय एवं सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने पर विशेष बल दिया है।

11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त 2026 की भोर तक दिखाई देगा 6 ग्रहों का आकाशीय संरेखण/परेड

12 अगस्त 2026 क्यों है खास? 11 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक मिलेगा ख़ास खगोलीय नजारों का सिलसिला।

जानिए सही समय और तरीका।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार यह अगस्त 2026 खगोल प्रेमियों को बहुत बड़ी एवं कुछ विशेष सौगात लेकर आई है।  खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो सम्पूर्ण अगस्त 2026 का महीना की विशेष होने वाला है लेकिन 12 अगस्त 2026 खगोल-विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। छह ग्रहों का दृश्य संरेखण 11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त की भोर में दिखाई देगा, जबकि 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक पर्सिड उल्का-वर्षा अपने अधिकतम सक्रिय चरण में होगी, और 12 अगस्त 2026 की इसी तारीख को वैश्विक स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा, हालांकि वह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।


*क्या है छह ग्रहों का पूर्व-सूर्योदय दृश्य संरेखण।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त 2026 की भोर में छह ग्रह, शनि, वरुण, अरुण, मंगल, बुध और बृहस्पति, क्रांतिवृत्त के आसपास आकाश में एक विस्तृत पट्टी में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह कोई भौतिक सीधी रेखा नहीं, बल्कि पृथ्वी से दिखाई देने वाला आकाशीय परिप्रेक्ष्य है। इनमें बृहस्पति, शनि और मंगल नग्न आंखों से अपेक्षाकृत आसानी से दिख सकते हैं, जबकि बुध ग्रह को क्षितिज के निकट होने के कारण देखना थोड़ा सा कठिन होगा, लेकिन प्रयास करने पर दिखाई दे सकता है जबकि अरुण और वरुण को अति विशेष (binoculars) विनोकुलर  या अच्छी दूरबीन से ही देखना पड़ेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय संरेखण का भारत में सर्वोत्तम अवलोकन स्थानीय सूर्योदय से लगभग 30 से 60 मिनट पहले, खुले और कम प्रकाश-प्रदूषित स्थान से अच्छा हो सकता है। *क्या होती है ग्रहों की परेड या संरेखण।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रहों की परेड या संरेखण (Planetary Alignment) वह खगोलीय स्थिति है जब सौरमंडल के कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के एक ही हिस्से में एक सीधी रेखा या चाप (Arc) में नजर आते हैं। अंतरिक्ष में ये ग्रह वास्तव में एक सीध में नहीं होते, बल्कि अपनी अलग कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के दृष्टिकोण से एक कतार में दिखते हैं। या कुछ यूं कहें कि प्लैनेट परेड खगोल विज्ञान का औपचारिक तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह लोकप्रिय नाम उस स्थिति के लिए प्रयोग किया जाता है जब पृथ्वी से देखने पर कई ग्रह क्रांतिवृत्तीय पट्टी के आसपास एक साथ दिखाई देते हैं। ग्रह अंतरिक्ष में भौतिक रूप से एक सीधी रेखा नहीं बनाते, लेकिन कतार जैसा दृश्य पृथ्वी के दृष्टिकोण और सौरमंडल के लगभग समतलीय कक्षीय विन्यास के कारण दिखाई देता है।

*ग्रहों की परेड के कितने प्रकार होते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सामान्य बोलचाल की भाषा में ग्रहों की परेड या संरेखण चार प्रकार की होती हैं,जैसे कि-
1.मिनी संरेखण (Mini)- जब 3 ग्रह एक साथ दिखाई देते हैं तो इसे मिनी संरेखण कहा जाता है।
2.छोटा संरेखण (Small)- जब 4 ग्रह एक कतार में आते हैं तो इसको छोटा संरेखण कहा जाता है।
3.बड़ा संरेखण (Large)- जब 5 या 6 ग्रह एक साथ दिखते हैं तब इसे बड़ा संरेखण कहा जाता है।
और 12 अगस्त 2026 को यही बड़ा संरेखण घटित होने जा रहा है इसीलिए देखना न भूलें।
4.महान संरेखण (Great)- जब सौरमंडल के लगभग सभी मुख्य ग्रह (8 ग्रह) एक साथ एक ही दिशा में नजर आते हैं तब एक महान संरेखण घटित होता है जोकि एक बहुत ही बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक होती है एवं ऐसा संरेखण अत्यंत ही ज्यादा दुर्लभ संरेखण होता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक आभासी दृश्य होता है जिसे प्लैनेटरी अलाइनमेंट भी कहा जाता है और यह अंतरिक्ष में कोई भौतिक रेखा नहीं बनाता, बल्कि यह पृथ्वी के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य का परिणाम होता है, इसके दौरान नग्न आंखों से दिखाई देने वाले ग्रहों की दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि हमारे सौर मण्डल के पांच ग्रहों को साधारण आँखों से देखा जा सकता है जैसे कि उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि बृहस्पति, शुक्र, बुध, मंगल और शनि ग्रह जैसे चमकीले ग्रह बिना किसी दूरबीन के केवल थोड़ा सा नियमित प्रयास करने भर से आसानी से देखे एवं पहचाने जा सकते हैं, जबकि यूरेनस और नेप्च्यून के लिए किसी विशेष अच्छी दूरबीन की जरूरत होती ही है। *कब और कितने बजे से दिखाई देना शुरू होगा इस परेड/संरेखण में कौन कौन सा ग्रह।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त की भोर में बुध ग्रह लगभग 04:28 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा और सूर्योदय तक दिखाई देगा, इस दौरान बुध ग्रह कर्क तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा एवं इसका मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 0.89 होगा जो थोड़ी मेहनत करने एवं खोजने पर इसको साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर में ही बृहस्पति ग्रह भी लगभग 4:50 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा एवं सूर्योदय तक दिखाई देगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह भी कर्क तारामंडल क्षेत्र में ही स्थिति होगा एवं इसका दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.63 होगा, जो इसे साधारण आंखों से आसानी से देखने योग्य बनायेगा। और अब बात करें शनि ग्रह की तो पाते हैं कि शनि ग्रह 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 9:30 (PM) बजे पूर्वी क्षितिज पर मीन तारामंडल क्षेत्र के साथ ही ऊपर आना शुरू करेगा और  पूरी रात भर अपने दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.58 की चमक साथ लिए हुए 12 अगस्त 2026 की भोर/सूर्योदय तक दिखाई देगा, इसे भी साधारण आंखों से ही देखा जा सकता है, अब अगर हम बात करें हमारे सौर मण्डल के लाल ग्रह की तो हम पाते हैं कि मंगल ग्रह 11 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि के बाद लगभग 1:50 (AM) पर पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा इस दौरान मंगल ग्रह,वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.29 के क़रीब होगा जो इसे साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर सुबह तक दिखाई देगा,अगर अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सातवें ग्रह अरुण ग्रह की तो पाते हैं कि 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 12 बजकर 15 मिनट (AM) बजे यह पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और इस दौरान यह वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 5.74 के क़रीब होगा जो इसको किसी साधारण विनोकुलर एवं दूरबीन से भी देखना मुश्किल बनायेगा इसीलिए इसको देखने के लिए आपको किसी विशेष विनाकुलर एवं अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी ही क्योंकि यह साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है। और अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सबसे ज्यादा दूर के ग्रह वरुण ग्रह की तो पाते हैं कि वरुण ग्रह 11 अगस्त 2026 की रात्रि में लगभग 9:00 (PM) IST से पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और पूरी रात भर आकाश में रहते हुए 12 अगस्त 2026 की भोर तक बना रहेगा एवं इस दौरान यह मीन तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 7.83 होगा, इसीलिए वरुण ग्रह को इतने अधिक मैग्नीट्यूड के कारण,साधारण आंखों से देखना हमेशा ही नामुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव ही है। इसीलिए इसको देखने के लिए साफ़ मौसम एवं पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण से दूर होते हुए आपको किसी विशेष अच्छी दूरबीन की आवश्यकता होगी। तभी वरुण ग्रह को देखा जा सकता है अन्यथा नहीं। *आसानी से कैसे देखें यह ग्रहीय संरेखण।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय सलाह देते हुए बताया कि सबसे पहले पूर्वी क्षितिज को देखें, यहीं पर बृहस्पति और बुध सूर्योदय के समय से कुछ पहले दिखाई देंगे और मंगल ग्रह को देखने के लिए और ऊपर देखें एवं शनि ग्रह को खोजने के लिए आकाश में क्रांतिवृत्त का अनुसरण करें क्योंकि इस दौरान यह सभी ग्रह उत्तरी गोलार्ध में यह दक्षिण-पश्चिम की ओर जाते हुए दिखाई देंगे, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए कहा है कि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए किसी सटीक स्काई चार्ट या उच्च आकाश मानचित्र के साथ ही किसी अच्छी एवं विशेष  टेलीस्कोप/ दूरबीन का उपयोग करें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ये ग्रह आकाश के एक बड़े हिस्से में दिखाई देंगे, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहाँ से खुला और विस्तृत दृश्य दिखाई दे। पूर्वी क्षितिज सबसे महत्वपूर्ण है और सूर्योदय से ठीक पहले बुध और बृहस्पति बहुत नीचे दिखाई देंगे, और उन्हें देखने का समय भी सीमित ही होगा इसलिए साथ ही यह भी विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि दृश्य संयोजन के सामने,प्रकाश प्रदूषण, आंधी, पानी, बरसात, तूफ़ान, या अन्य आकस्मिक स्थितियों या इमारतें, पेड़, पहाड़ियाँ या धुंध आकाश के उस हिस्से को कहीं ढक न लें, अगर दृश्य संयोजन के दौरान ऐसा कुछ भी विघ्न उत्पन्न होता है तो इन ग्रहों को देखना मुश्किल हो सकता है,इसीलिए पूर्व दिशा की ओर स्पष्ट दृश्य वाले खुले मैदान, समुद्र तट, पहाड़ियों की चोटियाँ, छतें और बालकनियाँ जैसी जगहों पर पूर्ण सावधानीपूर्वक रहते हुए अवलोकन के लिए अच्छी जगहें हो सकती हैं, साथ ही सूर्योदय की दिशा के निकट पेड़ों, इमारतों, पहाड़ियों या धुंध एवं प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से पूर्णतः बचें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरबीन/टेलीस्कोप या ज़ूम लेंस को बिना अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स के कभी भी सूर्य के सीधे सामने न रखें, यह भी जानना आवश्यक है कि यदि 12 अगस्त 2026 की भोर में आसमान में बादल छाए हों, तो उससे पहले या बाद की भोर सुबह में भी इन ग्रहों को देखने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि यह ग्रहीय अलाइनमेंट थोड़ा दूर एवं इधर उधर होते हुए भी आप देख सकते हैं।

*12 अगस्त 2026 को और क्या ख़ास है*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी तारीख के आसपास दो अन्य प्रमुख खगोलीय घटनाएँ भी घटित होंगी। जो इस प्रकार हैं।

1.बर्ष भर की सबसे ज्यादा मशहूर एवं बहुप्रतीक्षित  उल्का वर्षाओंं में से प्रमुख जिसे पर्सिड उल्का वृष्टि भी कहा जाता है,उसी पर्सिड उल्का वर्षा का चरम समय भी 12-13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में देखना सबसे अच्छा होगा।

2.12 अगस्त, 2026 को दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण भी घटित होने वाला है लेकिन अफ़सोस कि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, यह सूर्य ग्रहण केवल दुनियां के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों से ही पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं आंशिक सूर्य ग्रहण आदि के रूप में दिखाई देगा।
मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा जतरा को दिखाई हरी झंडी, 10 हजार कलाकार हुए शामिल*

राँची। झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग श्री कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त, श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग, श्री राजीव लोचन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, श्रीमती मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

बिना आवाज़ किये ही बार बार चमकती हुई बिजली का वैज्ञानिक कारण

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यदि बादलों में लगभग 20 से 100 किमी या उससे भी अधिक दूरी पर बिज़ली गिर रही है, तो उसकी चमक और प्रकाश आपको दिखाई देता रहता है क्योंकि प्रकाश बहुत तेज़ गति (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड) से चलता है,लेकिन गरज की आवाज़ ध्वनि है, जो केवल लगभग 343 मीटर/सेकंड (20°C पर) की गति से चलती है, इतनी दूरी तय करते-करते ध्वनि की ऊर्जा कम हो जाती है, इसलिए आवाज़ बहुत हल्की सुनाई देती है या बिल्कुल नहीं भी सुनाई दे सकती है साथ ही बादलों के अंदर होने वाली बिजली जिसको विज्ञान की भाषा में Intra-cloud Lightning कहा जाता है।
कई बार बिजली बादलों के अंदर ही चमकती है और जमीन तक नहीं पहुँचती। ऐसी बिजली बार-बार चमकती है लेकिन उसकी गरज अपेक्षाकृत कम सुनाई देती है, ख़ासकर के यदि बादल दूर हों एवं इसमें वातावरण का प्रभाव भी प्रभावी होता हैं जैसे कि यदि
तापमान, आर्द्रता (Humidity), हवा की दिशा और वायुमंडल की विभिन्न परतें ध्वनि को मोड़ (Refraction) सकती हैं या कमजोर कर सकती हैं। इसलिए कभी-कभी चमक तो स्पष्ट दिखती है लेकिन गरज बहुत कम सुनाई देती है और दूर की बिजली की चमक बार बार दिखाई देती है और
लोग अक्सर इसे Heat Lightning कहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह कोई अलग प्रकार की बिजली नहीं है। अधिकांश मामलों में यह केवल दूर स्थित आंधी-तूफान की बिजली होती है, जिसकी चमक तो दिखती है लेकिन गरज आपके पास तक नहीं पहुँच पाती है साथ ही इसका मतलब  यह भी है कि आपके यहां बारिश हो यह भी ज़रूरी नहीं होता है लेकिन यदि बिजली लगातार एक ही दिशा में है और तूफान उसी क्षेत्र में बना हुआ है, तो संभव है कि बारिश वहीं हो रही हो और आपके स्थान तक न पहुँचे, लेकिन यदि तूफान आपकी ओर बढ़ रहा है, तब कुछ समय बाद बारिश और तेज़ गरज भी हो सकती है या कुछ यूं कहें कि यदि आपको लगातार एक ही दिशा में बिजली दिखाई दे रही है और गरज बहुत कम सुनाई दे रही है, तो इसका सबसे संभावित वैज्ञानिक कारण यह है कि तूफान आपसे काफी दूर है और बिजली बादलों के भीतर या दूर के क्षेत्र में चमक रही है। प्रकाश आपके पास तुरंत पहुँच जाता है, जबकि ध्वनि दूरी के कारण कमजोर पड़ जाती है या सुनाई नहीं देती। *बिजली का चमकना कैसे होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बादलों में जमा विद्युत आवेश अचानक प्रवाहित होने पर तेज प्रकाश निकलता है,इसी को सामान्य बोलचाल की भाषा बिजली चमकना भी कहते हैं।

*बिजली गिरना कैसे होता है?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब धनात्मक और ऋणात्मक क्षेत्रों के बीच वोल्टेज इतना अधिक हो जाता है कि हवा का इन्सुलेशन टूट जाता है (Air Breakdown), तब हवा आयनित (Ionized) होकर चालक बन जाती है। इसके बाद अचानक बहुत बड़ा विद्युत प्रवाह (Current) बहता है। यही Lightning Discharge (बिजली) है। *गरज (Thunder) क्यों होती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बिजली के प्लाज़्मा का तापमान लगभग 30,000 K (सूर्य की सतह से भी अधिक) तक पहुँच सकता है।
इतने अधिक तापमान से आसपास की हवा कुछ माइक्रोसेकंड में अत्यधिक फैलती है। यही तीव्र प्रसार आघात तरंग (Shock Wave) बनाता है, जिसे हम गरज (Thunder) के रूप में सुनते हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में शुक्रवार को सत्र 2026-28 में नवप्रवेशित छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके उपरांत उन्होंने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं से परिचय प्राप्त किया। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष (तृतीय सेमेस्टर) के छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थी अनुशासित, नियमित एवं समर्पित होकर अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक के रूप में आप सभी पर समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माता भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संयम, अनुशासन एवं सतत अध्ययन के माध्यम से अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन किशन मिश्र ने किया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. नीरज यादव, डॉ. लोहंस कुमार कल्याणी, डॉ. चमन कौर, श्री राजेन्द्र मिश्र, श्रीमती प्रतिभा सिंह, डॉ. दीपा गुप्ता एवं श्री अमरजीत वर्मा सहित बी.एड. के छात्राध्यापक-छात्राध्यापिकाएँ प्रखर जैन, अभितोष, खुशी यादव, अक्षय त्रिपाठी, विपिन मौर्य, आस्था तिवारी, वैदेही, प्रिया आर्या, अर्चना भास्कर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मोजुद थे ।
श्रावण मास,श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी,मणिपर्वत (श्रावण झूला)मेला एवं रक्षाबंधन के दृष्टिगत जनपद गोण्डा में विशेष यातायात डायवर्जन व्यवस्था लागू
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श्रावण मास-2026 के दौरान श्रावण सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला एवं रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या धाम एवं आसपास के जनपदों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एवं वाहनों के दबाव को देखते हुए जनपद गोण्डा में विशेष यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।

*निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय श्रावण सोमवार एवं श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर 08 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 12 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे तक, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला, तृतीय श्रावण सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर 14 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 17 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक, चतुर्थ/अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर 23 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 24 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक तथा श्रावण पूर्णिमा स्नान, रक्षाबंधन एवं मेला समापन के अवसर पर 27 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 28 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक विशेष डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी।*

*प्रमुख डायवर्जन व्यवस्था*

*रूट-ए:*
लखनऊ से बाराबंकी एवं गोण्डा होते हुए गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले समस्त वाहनों को दर्जीकुआँ (थाना कोतवाली देहात) से डायवर्ट कर झिलाही रेलवे क्रॉसिंग-मनकापुर-उतरौला मार्ग-डुमरियागंज होते हुए गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*रूट-बी:*
लखनऊ से गोण्डा होकर गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले वाहनों को दर्जीकुआँ से डायवर्ट कर मोतीगंज- मनकापुर-मसकनवा-बभनान मार्ग से गंतव्य के लिए भेजा जाएगा।

*रूट-सी:*
गोण्डा शहर में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों को धानेपुर-उतरौला मार्ग से डायवर्ट कर बेवा चौराहा/डुमरियागंज के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं*

• अयोध्या प्रशासन के निर्देशानुसार लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले भारी वाहनों को सामान्यतः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करना होगा। पर्वों के दौरान लखनऊ-बाराबंकी-रामनगर (महादेवा मंदिर) मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

• बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती एवं गोण्डा से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को जरवल रोड-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग से भेजा जाएगा।

• गोण्डा से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों का संचालन श्रावण सोमवार एवं पर्वों के दौरान जरवल रोड-बाराबंकी मार्ग पर प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को हुजूरपुर मोड़-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा।

• आवश्यकता पड़ने पर उतरौला एवं बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को जानकीनगर पुलिस चौकी (थाना इटियाथोक) से डायवर्ट कर आर्यनगर-कटरा बाजार-कर्नलगंज मार्ग से भेजा जाएगा।

•कर्नलगंज-परसपुर-तरबगंज-नवाबगंज मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

• गोण्डा शहर से जरवल रोड होकर बाराबंकी-लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को हुजूरपुर मोड़ से डायवर्ट किया जाएगा।

• कर्नलगंज, परसपुर एवं तरबगंज से नवाबगंज आने वाले भारी वाहनों को कटी तिराहा से मनकापुर की ओर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य चारपहिया वाहन टिकरी मोड़-कोल्हमपुर-लोलपुर मार्ग से संचालित होंगे।

• कटी तिराहा से अयोध्या की ओर केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

• लकड़मण्डी तिराहा से नया घाट पुल (अयोध्या) तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी।

• लोलपुर से नवाबगंज जाने वाले वाहनों को कोल्हमपुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को लकड़मण्डी-नवाबगंज मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा।

*जनसामान्य से अपील*

जनपद पुलिस द्वारा समस्त वाहन चालकों एवं आमजन से अपील की जाती है कि निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं यातायात पुलिस के निर्देशों का अनुपालन करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा सहयोग एवं संयम बनाए रखते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें। जनसहयोग से ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखना संभव हो
लखनऊ मंडल में पर्यटन विकास को मिलेगी रफ्तार, 59 परियोजनाओं पर नवंबर तक शुरू होगा काम
-  ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों और आस्था स्थलों के सौंदर्यीकरण के प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई; पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ मंडल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं पर्यटन विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत लखनऊ मंडल की विभिन्न विधानसभाओं में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य आस्था स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 59 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी परियोजनाओं को आगामी नवंबर तक धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य किया जाए।
पर्यटन मंत्री ने गुरुवार को बताया कि प्राप्त प्रस्ताव सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, जिलाधिकारियों तथा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों की ओर से भेजे गए हैं। इनमें रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लखनऊ मंडल में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए वहां बुनियादी पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि इन स्थलों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके और स्थानीय पर्यटन को नई गति मिले।

-  इन प्रमुख स्थलों का होगा विकास
प्रस्तावित परियोजनाओं में लखनऊ के प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, नाका हिंडोला गुरुद्वारा, भुइयन देवी मंदिर, आलमबाग स्थित सनातन धर्म मंदिर, उनई देवी मंदिर, कल्याणगिरी महादेव मंदिर, श्री चित्रगुप्त भवन, राजाजीपुरम शीतला देवी मंदिर, अलीगंज हनुमान मंदिर, काकोरी शहीद स्थल और गंगाप्रसाद मेमोरियल हॉल के संरक्षण एवं पर्यटन विकास के प्रस्ताव शामिल हैं।
इसके अलावा लखीमपुर खीरी के बाबा भूतनाथ मंदिर, तुरन्तनाथ बाबा मंदिर, जंगलियानाथ बाबा मंदिर और बाबा भुरिया नाथ धाम, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में पर्यटन सुविधा केंद्र एवं वन स्टॉप सेंटर, महमूदाबाद का मां संकटा देवी धाम, सिधौली का झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, रायबरेली का चंपा देवी मंदिर, ऊंचाहार स्थित महाराज माहे पासी किला तथा प्राचीन विष्णु मंदिर के विकास के प्रस्ताव भी कार्ययोजना में शामिल किए गए हैं।
हरदोई के महर्षि दधीचि मंदिर, शाहाबाद के बाबा वनखंडी मंदिर, संडीला के चौमुखी मंदिर तथा उन्नाव के बुद्ध अंबेडकर पार्क, मोहान स्थित जमदग्नि आश्रम-परशुराम मंदिर, भगवंतनगर के हनुमान मंदिर और श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सभी परियोजनाओं के लिए संबंधित जनपदों से भूमि अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि स्वीकृति के बाद निर्माण एवं विकास कार्य समयबद्ध ढंग से शुरू किए जा सकें।
सरकार का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम, तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के संचालन को मिली हरी झंडी

- उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गाजियाबाद, कानपुर व फतेहपुर के प्रस्तावित विश्वविद्यालयों को सौंपा 'संचालन प्राधिकार पत्र'

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को उच्च शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रदेश में स्थापित होने जा रहे तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन को 'संचालन प्राधिकार पत्र' (अनुज्ञा पत्र) प्रदान किया। योगी सरकार की इस पहल से गाजियाबाद, कानपुर और फतेहपुर जनपदों में उच्च, तकनीकी एवं कृषि शिक्षा का विस्तार होगा तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जनपद गाजियाबाद में 'अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी', गाजियाबाद के सचिव/चेयरमैन को, कानपुर नगर के बिल्हौर में 'महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट', दिल्ली के सचिव को तथा फतेहपुर में 'ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'एंग्लो संस्कृत कॉलेज', फतेहपुर के अध्यक्ष को आधिकारिक संचालन प्राधिकार पत्र सौंपा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 में संशोधन अध्यादेशों के तहत यह स्वीकृति जारी की गई है। इसके अंतर्गत गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय को तृतीय संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 17 सन् 2026), कानपुर के महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय को चतुर्थ संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 18 सन् 2026) तथा फतेहपुर के ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय को पंचम संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 19 सन् 2026) के तहत सम्मिलित करते हुए संचालन की अनुज्ञा संबंधी अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री ने प्राधिकार पत्र सौंपते हुए संबंधित संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे शासन द्वारा निर्धारित मानकों, नियमों एवं शर्तों का  अनुपालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहित कर उच्च शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ कर रही है, जिससे राज्य के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों और उत्कृष्ट वातावरण का लाभ मिल सके।
बीमारी भी नहीं रोक सकी ममता की धारा, जारी रहा स्तनपान
- टीबी, फाइलेरिया और समय से पहले जन्मे शिशु जैसी चुनौतियों के बीच डॉक्टरों की सलाह बनी भरोसा
*गोंडा, 04 अगस्त 2026*: जब कोई मां बीमार होती है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वह अपने शिशु को स्तनपान करा सकती है। कई बार यह डर भी सताता है कि कहीं उसकी बीमारी बच्चे तक न पहुंच जाए। यही आशंका देवीपाटन मंडल की उन माताओं के मन में भी थी, जिन्होंने विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान अपने अनुभव साझा किए। परिवार के कुछ सदस्य भी इसी डर से उन्हें स्तनपान कराने से मना करते थे। लेकिन डॉक्टरों की सही सलाह, आशा और एएनएम के मार्गदर्शन तथा परिवार के सहयोग से उनका यह भ्रम दूर हुआ।
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में देवीपाटन मंडल के 3.18 लाख से अधिक नवजातों को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल से घर लौटने के बाद बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों और परिवार के संकोच के कारण कई माताएं स्तनपान को लेकर असमंजस में पड़ जाती हैं।
अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद इन माताओं ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने शिशुओं को पहले छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाया और कई माताओं ने दो साल तक भी स्तनपान जारी रखा। आज वे कहती हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ हैं, अच्छी तरह बढ़ रहे हैं और दूसरे बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं।
केस -1 फाइलेरिया का डर, लेकिन नहीं रुका स्तनपान-
जरवल ब्लॉक के रिठौढ़ा गांव की रिंकी गर्भावस्था के दौरान फाइलेरिया से पीड़ित हो गई थीं। रिंकी बताती हैं कि प्रसव के बाद परिवार को डर था कि कहीं स्तनपान से बच्चे को भी बीमारी न हो जाए। आशा कार्यकर्ता ने समझाया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलता है, मां के दूध से नहीं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता सामग्री भी दिखाई। इसके बाद परिवार की शंका दूर हुई और रिंकी ने अपने बेटे को दो साल तक स्तनपान कराया। आज वह छह साल का है, स्वस्थ है और स्कूल जाता है।
केस -2 कम वजन की बच्ची के लिए मां का दूध बना संबल-
बलरामपुर के श्रीदत्तगंज निवासी मनोज कुमार की पत्नी मीना देवी ने 4 जून 2026 को जिला अस्पताल में 1635 ग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। कम वजन होने के कारण नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ा। बच्ची स्तन से दूध नहीं खींच पा रही थी, इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों ने मां का दूध निकालकर कटोरी-चम्मच से पिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। मीना देवी कहती हैं, "डॉक्टरों ने बताया कि मेरे दूध से ही मेरी बच्ची को सबसे ज्यादा ताकत मिलेगी। आज बच्ची स्वस्थ है और सामान्य रूप से बढ़ रही है।“
केस -3 टीबी इलाज के साथ जारी रहा स्तनपान -
श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र के अंबेडकरनगर की 26 वर्षीय एक महिला (पहचान गोपनीय रखने के अनुरोध पर नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है) को प्रसव के बाद टीबी का पता चला। परिवार को डर था कि कहीं शिशु को भी संक्रमण न हो जाए। डॉक्टरों ने समझाया कि नियमित उपचार, शुरुआती दिनों में मास्क के उपयोग और पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान सुरक्षित रूप से जारी रखा जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकीय सलाह का पालन किया और अपने शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ा। महिला कहती हैं, "डॉक्टरों की सलाह ने मेरा और मेरे परिवार का डर दूर कर दिया। आज मेरा डेढ़ साल का बेटा स्वस्थ है और मैं भी पूरी तरह टीबी से ठीक हो चुकी हूं।"

"कई माताएं यह भी सोचती हैं कि बीमारी या दवा लेने से उनका दूध खराब हो जाएगा या बच्चे को नुकसान पहुंचाएगा। जबकि अधिकांश सामान्य बीमारियों और उनकी दवाओं के दौरान भी स्तनपान सुरक्षित रहता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के न तो दवा बंद करें और न ही स्तनपान।"
डॉ. संतलाल पटेल- कार्यवाहक अपर निदेशक (देवीपाटन मंडल) एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोंडा
लखनऊ में मानसून का कहर: 24 घंटे में सामान्य से छह गुना ज्यादा बारिश, दीवार गिरने से वाहन दबे; दो दिन का ऑरेंज अलर्ट
सुबह से छाए बादल, दिनभर भारी बारिश के आसार; शहर में जलभराव और बिजली संकट, अगले तीन दिन भी राहत नहीं

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार सुबह से ही शहर बादलों की चादर में लिपटा रहा और मौसम विभाग ने दिनभर मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते 24 घंटों में शहर में 40.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 7 मिलीमीटर की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। लगातार बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

बारिश के बीच लखनऊ सिटी स्टेशन के पास एक बड़ा हादसा भी हुआ। यहां एक पुरानी दीवार भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में एक कार और करीब आधा दर्जन दोपहिया वाहन दब गए। हालांकि, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

मानसून अब भी सामान्य से पीछे

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक लखनऊ में 227.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 345.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राजधानी में अब तक मानसून करीब 34 प्रतिशत कमजोर रहा है। हालांकि हाल के दिनों में हुई तेज बारिश से इस कमी में कुछ सुधार की उम्मीद है।

तापमान में गिरावट, उमस से मिली राहत

मंगलवार को अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1 डिग्री कम था। बारिश के कारण हवा में नमी काफी बढ़ गई और अधिकतम आर्द्रता 97 प्रतिशत तथा न्यूनतम 87 प्रतिशत दर्ज की गई।

जलभराव और बिजली कटौती से बढ़ीं मुश्किलें

लगातार बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे नागरिकों की परेशानियां और बढ़ गईं।

अगले तीन दिन भी झमाझम बारिश के आसार

मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से अगले 2 से 3 दिनों तक लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट आएगी तथा उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।

बीते 24 घंटों में अमौसी मौसम केंद्र पर 66.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन की अब तक की सबसे अधिक वर्षा है। मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।
स्वतंत्रता दिवस 2026: राज्य के 10 जिलों में मंत्री करेंगे झंडोत्तोलन

रांची। स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के अवसर पर 15 अगस्त को राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में माननीय मंत्रियों द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जारी निर्देश के अनुसार पलामू (डालटनगंज) में माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर एवं माननीय मंत्री श्री दीपक बिरुवा, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गुमला में भी माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गोड्डा में माननीय मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, जामताड़ा में माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, देवघर में माननीय मंत्री श्री हफीजूल हसन, पाकुड़ में माननीय मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, बोकारो में माननीय मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद, गिरिडीह में माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार तथा लोहरदगा में माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की झंडोत्तोलन करेंगी।

विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों एवं वरीय पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित मंत्रियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राज्य सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमामय एवं सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने पर विशेष बल दिया है।

11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त 2026 की भोर तक दिखाई देगा 6 ग्रहों का आकाशीय संरेखण/परेड

12 अगस्त 2026 क्यों है खास? 11 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक मिलेगा ख़ास खगोलीय नजारों का सिलसिला।

जानिए सही समय और तरीका।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार यह अगस्त 2026 खगोल प्रेमियों को बहुत बड़ी एवं कुछ विशेष सौगात लेकर आई है।  खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो सम्पूर्ण अगस्त 2026 का महीना की विशेष होने वाला है लेकिन 12 अगस्त 2026 खगोल-विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। छह ग्रहों का दृश्य संरेखण 11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त की भोर में दिखाई देगा, जबकि 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक पर्सिड उल्का-वर्षा अपने अधिकतम सक्रिय चरण में होगी, और 12 अगस्त 2026 की इसी तारीख को वैश्विक स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा, हालांकि वह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।


*क्या है छह ग्रहों का पूर्व-सूर्योदय दृश्य संरेखण।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त 2026 की भोर में छह ग्रह, शनि, वरुण, अरुण, मंगल, बुध और बृहस्पति, क्रांतिवृत्त के आसपास आकाश में एक विस्तृत पट्टी में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह कोई भौतिक सीधी रेखा नहीं, बल्कि पृथ्वी से दिखाई देने वाला आकाशीय परिप्रेक्ष्य है। इनमें बृहस्पति, शनि और मंगल नग्न आंखों से अपेक्षाकृत आसानी से दिख सकते हैं, जबकि बुध ग्रह को क्षितिज के निकट होने के कारण देखना थोड़ा सा कठिन होगा, लेकिन प्रयास करने पर दिखाई दे सकता है जबकि अरुण और वरुण को अति विशेष (binoculars) विनोकुलर  या अच्छी दूरबीन से ही देखना पड़ेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय संरेखण का भारत में सर्वोत्तम अवलोकन स्थानीय सूर्योदय से लगभग 30 से 60 मिनट पहले, खुले और कम प्रकाश-प्रदूषित स्थान से अच्छा हो सकता है। *क्या होती है ग्रहों की परेड या संरेखण।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रहों की परेड या संरेखण (Planetary Alignment) वह खगोलीय स्थिति है जब सौरमंडल के कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के एक ही हिस्से में एक सीधी रेखा या चाप (Arc) में नजर आते हैं। अंतरिक्ष में ये ग्रह वास्तव में एक सीध में नहीं होते, बल्कि अपनी अलग कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के दृष्टिकोण से एक कतार में दिखते हैं। या कुछ यूं कहें कि प्लैनेट परेड खगोल विज्ञान का औपचारिक तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह लोकप्रिय नाम उस स्थिति के लिए प्रयोग किया जाता है जब पृथ्वी से देखने पर कई ग्रह क्रांतिवृत्तीय पट्टी के आसपास एक साथ दिखाई देते हैं। ग्रह अंतरिक्ष में भौतिक रूप से एक सीधी रेखा नहीं बनाते, लेकिन कतार जैसा दृश्य पृथ्वी के दृष्टिकोण और सौरमंडल के लगभग समतलीय कक्षीय विन्यास के कारण दिखाई देता है।

*ग्रहों की परेड के कितने प्रकार होते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सामान्य बोलचाल की भाषा में ग्रहों की परेड या संरेखण चार प्रकार की होती हैं,जैसे कि-
1.मिनी संरेखण (Mini)- जब 3 ग्रह एक साथ दिखाई देते हैं तो इसे मिनी संरेखण कहा जाता है।
2.छोटा संरेखण (Small)- जब 4 ग्रह एक कतार में आते हैं तो इसको छोटा संरेखण कहा जाता है।
3.बड़ा संरेखण (Large)- जब 5 या 6 ग्रह एक साथ दिखते हैं तब इसे बड़ा संरेखण कहा जाता है।
और 12 अगस्त 2026 को यही बड़ा संरेखण घटित होने जा रहा है इसीलिए देखना न भूलें।
4.महान संरेखण (Great)- जब सौरमंडल के लगभग सभी मुख्य ग्रह (8 ग्रह) एक साथ एक ही दिशा में नजर आते हैं तब एक महान संरेखण घटित होता है जोकि एक बहुत ही बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक होती है एवं ऐसा संरेखण अत्यंत ही ज्यादा दुर्लभ संरेखण होता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक आभासी दृश्य होता है जिसे प्लैनेटरी अलाइनमेंट भी कहा जाता है और यह अंतरिक्ष में कोई भौतिक रेखा नहीं बनाता, बल्कि यह पृथ्वी के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य का परिणाम होता है, इसके दौरान नग्न आंखों से दिखाई देने वाले ग्रहों की दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि हमारे सौर मण्डल के पांच ग्रहों को साधारण आँखों से देखा जा सकता है जैसे कि उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि बृहस्पति, शुक्र, बुध, मंगल और शनि ग्रह जैसे चमकीले ग्रह बिना किसी दूरबीन के केवल थोड़ा सा नियमित प्रयास करने भर से आसानी से देखे एवं पहचाने जा सकते हैं, जबकि यूरेनस और नेप्च्यून के लिए किसी विशेष अच्छी दूरबीन की जरूरत होती ही है। *कब और कितने बजे से दिखाई देना शुरू होगा इस परेड/संरेखण में कौन कौन सा ग्रह।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त की भोर में बुध ग्रह लगभग 04:28 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा और सूर्योदय तक दिखाई देगा, इस दौरान बुध ग्रह कर्क तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा एवं इसका मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 0.89 होगा जो थोड़ी मेहनत करने एवं खोजने पर इसको साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर में ही बृहस्पति ग्रह भी लगभग 4:50 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा एवं सूर्योदय तक दिखाई देगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह भी कर्क तारामंडल क्षेत्र में ही स्थिति होगा एवं इसका दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.63 होगा, जो इसे साधारण आंखों से आसानी से देखने योग्य बनायेगा। और अब बात करें शनि ग्रह की तो पाते हैं कि शनि ग्रह 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 9:30 (PM) बजे पूर्वी क्षितिज पर मीन तारामंडल क्षेत्र के साथ ही ऊपर आना शुरू करेगा और  पूरी रात भर अपने दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.58 की चमक साथ लिए हुए 12 अगस्त 2026 की भोर/सूर्योदय तक दिखाई देगा, इसे भी साधारण आंखों से ही देखा जा सकता है, अब अगर हम बात करें हमारे सौर मण्डल के लाल ग्रह की तो हम पाते हैं कि मंगल ग्रह 11 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि के बाद लगभग 1:50 (AM) पर पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा इस दौरान मंगल ग्रह,वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.29 के क़रीब होगा जो इसे साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर सुबह तक दिखाई देगा,अगर अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सातवें ग्रह अरुण ग्रह की तो पाते हैं कि 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 12 बजकर 15 मिनट (AM) बजे यह पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और इस दौरान यह वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 5.74 के क़रीब होगा जो इसको किसी साधारण विनोकुलर एवं दूरबीन से भी देखना मुश्किल बनायेगा इसीलिए इसको देखने के लिए आपको किसी विशेष विनाकुलर एवं अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी ही क्योंकि यह साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है। और अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सबसे ज्यादा दूर के ग्रह वरुण ग्रह की तो पाते हैं कि वरुण ग्रह 11 अगस्त 2026 की रात्रि में लगभग 9:00 (PM) IST से पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और पूरी रात भर आकाश में रहते हुए 12 अगस्त 2026 की भोर तक बना रहेगा एवं इस दौरान यह मीन तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 7.83 होगा, इसीलिए वरुण ग्रह को इतने अधिक मैग्नीट्यूड के कारण,साधारण आंखों से देखना हमेशा ही नामुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव ही है। इसीलिए इसको देखने के लिए साफ़ मौसम एवं पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण से दूर होते हुए आपको किसी विशेष अच्छी दूरबीन की आवश्यकता होगी। तभी वरुण ग्रह को देखा जा सकता है अन्यथा नहीं। *आसानी से कैसे देखें यह ग्रहीय संरेखण।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय सलाह देते हुए बताया कि सबसे पहले पूर्वी क्षितिज को देखें, यहीं पर बृहस्पति और बुध सूर्योदय के समय से कुछ पहले दिखाई देंगे और मंगल ग्रह को देखने के लिए और ऊपर देखें एवं शनि ग्रह को खोजने के लिए आकाश में क्रांतिवृत्त का अनुसरण करें क्योंकि इस दौरान यह सभी ग्रह उत्तरी गोलार्ध में यह दक्षिण-पश्चिम की ओर जाते हुए दिखाई देंगे, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए कहा है कि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए किसी सटीक स्काई चार्ट या उच्च आकाश मानचित्र के साथ ही किसी अच्छी एवं विशेष  टेलीस्कोप/ दूरबीन का उपयोग करें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ये ग्रह आकाश के एक बड़े हिस्से में दिखाई देंगे, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहाँ से खुला और विस्तृत दृश्य दिखाई दे। पूर्वी क्षितिज सबसे महत्वपूर्ण है और सूर्योदय से ठीक पहले बुध और बृहस्पति बहुत नीचे दिखाई देंगे, और उन्हें देखने का समय भी सीमित ही होगा इसलिए साथ ही यह भी विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि दृश्य संयोजन के सामने,प्रकाश प्रदूषण, आंधी, पानी, बरसात, तूफ़ान, या अन्य आकस्मिक स्थितियों या इमारतें, पेड़, पहाड़ियाँ या धुंध आकाश के उस हिस्से को कहीं ढक न लें, अगर दृश्य संयोजन के दौरान ऐसा कुछ भी विघ्न उत्पन्न होता है तो इन ग्रहों को देखना मुश्किल हो सकता है,इसीलिए पूर्व दिशा की ओर स्पष्ट दृश्य वाले खुले मैदान, समुद्र तट, पहाड़ियों की चोटियाँ, छतें और बालकनियाँ जैसी जगहों पर पूर्ण सावधानीपूर्वक रहते हुए अवलोकन के लिए अच्छी जगहें हो सकती हैं, साथ ही सूर्योदय की दिशा के निकट पेड़ों, इमारतों, पहाड़ियों या धुंध एवं प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से पूर्णतः बचें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरबीन/टेलीस्कोप या ज़ूम लेंस को बिना अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स के कभी भी सूर्य के सीधे सामने न रखें, यह भी जानना आवश्यक है कि यदि 12 अगस्त 2026 की भोर में आसमान में बादल छाए हों, तो उससे पहले या बाद की भोर सुबह में भी इन ग्रहों को देखने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि यह ग्रहीय अलाइनमेंट थोड़ा दूर एवं इधर उधर होते हुए भी आप देख सकते हैं।

*12 अगस्त 2026 को और क्या ख़ास है*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी तारीख के आसपास दो अन्य प्रमुख खगोलीय घटनाएँ भी घटित होंगी। जो इस प्रकार हैं।

1.बर्ष भर की सबसे ज्यादा मशहूर एवं बहुप्रतीक्षित  उल्का वर्षाओंं में से प्रमुख जिसे पर्सिड उल्का वृष्टि भी कहा जाता है,उसी पर्सिड उल्का वर्षा का चरम समय भी 12-13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में देखना सबसे अच्छा होगा।

2.12 अगस्त, 2026 को दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण भी घटित होने वाला है लेकिन अफ़सोस कि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, यह सूर्य ग्रहण केवल दुनियां के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों से ही पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं आंशिक सूर्य ग्रहण आदि के रूप में दिखाई देगा।
मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा जतरा को दिखाई हरी झंडी, 10 हजार कलाकार हुए शामिल*

राँची। झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग श्री कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त, श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग, श्री राजीव लोचन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, श्रीमती मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

बिना आवाज़ किये ही बार बार चमकती हुई बिजली का वैज्ञानिक कारण

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यदि बादलों में लगभग 20 से 100 किमी या उससे भी अधिक दूरी पर बिज़ली गिर रही है, तो उसकी चमक और प्रकाश आपको दिखाई देता रहता है क्योंकि प्रकाश बहुत तेज़ गति (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड) से चलता है,लेकिन गरज की आवाज़ ध्वनि है, जो केवल लगभग 343 मीटर/सेकंड (20°C पर) की गति से चलती है, इतनी दूरी तय करते-करते ध्वनि की ऊर्जा कम हो जाती है, इसलिए आवाज़ बहुत हल्की सुनाई देती है या बिल्कुल नहीं भी सुनाई दे सकती है साथ ही बादलों के अंदर होने वाली बिजली जिसको विज्ञान की भाषा में Intra-cloud Lightning कहा जाता है।
कई बार बिजली बादलों के अंदर ही चमकती है और जमीन तक नहीं पहुँचती। ऐसी बिजली बार-बार चमकती है लेकिन उसकी गरज अपेक्षाकृत कम सुनाई देती है, ख़ासकर के यदि बादल दूर हों एवं इसमें वातावरण का प्रभाव भी प्रभावी होता हैं जैसे कि यदि
तापमान, आर्द्रता (Humidity), हवा की दिशा और वायुमंडल की विभिन्न परतें ध्वनि को मोड़ (Refraction) सकती हैं या कमजोर कर सकती हैं। इसलिए कभी-कभी चमक तो स्पष्ट दिखती है लेकिन गरज बहुत कम सुनाई देती है और दूर की बिजली की चमक बार बार दिखाई देती है और
लोग अक्सर इसे Heat Lightning कहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह कोई अलग प्रकार की बिजली नहीं है। अधिकांश मामलों में यह केवल दूर स्थित आंधी-तूफान की बिजली होती है, जिसकी चमक तो दिखती है लेकिन गरज आपके पास तक नहीं पहुँच पाती है साथ ही इसका मतलब  यह भी है कि आपके यहां बारिश हो यह भी ज़रूरी नहीं होता है लेकिन यदि बिजली लगातार एक ही दिशा में है और तूफान उसी क्षेत्र में बना हुआ है, तो संभव है कि बारिश वहीं हो रही हो और आपके स्थान तक न पहुँचे, लेकिन यदि तूफान आपकी ओर बढ़ रहा है, तब कुछ समय बाद बारिश और तेज़ गरज भी हो सकती है या कुछ यूं कहें कि यदि आपको लगातार एक ही दिशा में बिजली दिखाई दे रही है और गरज बहुत कम सुनाई दे रही है, तो इसका सबसे संभावित वैज्ञानिक कारण यह है कि तूफान आपसे काफी दूर है और बिजली बादलों के भीतर या दूर के क्षेत्र में चमक रही है। प्रकाश आपके पास तुरंत पहुँच जाता है, जबकि ध्वनि दूरी के कारण कमजोर पड़ जाती है या सुनाई नहीं देती। *बिजली का चमकना कैसे होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बादलों में जमा विद्युत आवेश अचानक प्रवाहित होने पर तेज प्रकाश निकलता है,इसी को सामान्य बोलचाल की भाषा बिजली चमकना भी कहते हैं।

*बिजली गिरना कैसे होता है?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब धनात्मक और ऋणात्मक क्षेत्रों के बीच वोल्टेज इतना अधिक हो जाता है कि हवा का इन्सुलेशन टूट जाता है (Air Breakdown), तब हवा आयनित (Ionized) होकर चालक बन जाती है। इसके बाद अचानक बहुत बड़ा विद्युत प्रवाह (Current) बहता है। यही Lightning Discharge (बिजली) है। *गरज (Thunder) क्यों होती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बिजली के प्लाज़्मा का तापमान लगभग 30,000 K (सूर्य की सतह से भी अधिक) तक पहुँच सकता है।
इतने अधिक तापमान से आसपास की हवा कुछ माइक्रोसेकंड में अत्यधिक फैलती है। यही तीव्र प्रसार आघात तरंग (Shock Wave) बनाता है, जिसे हम गरज (Thunder) के रूप में सुनते हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में शुक्रवार को सत्र 2026-28 में नवप्रवेशित छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके उपरांत उन्होंने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं से परिचय प्राप्त किया। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष (तृतीय सेमेस्टर) के छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थी अनुशासित, नियमित एवं समर्पित होकर अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक के रूप में आप सभी पर समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माता भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संयम, अनुशासन एवं सतत अध्ययन के माध्यम से अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन किशन मिश्र ने किया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. नीरज यादव, डॉ. लोहंस कुमार कल्याणी, डॉ. चमन कौर, श्री राजेन्द्र मिश्र, श्रीमती प्रतिभा सिंह, डॉ. दीपा गुप्ता एवं श्री अमरजीत वर्मा सहित बी.एड. के छात्राध्यापक-छात्राध्यापिकाएँ प्रखर जैन, अभितोष, खुशी यादव, अक्षय त्रिपाठी, विपिन मौर्य, आस्था तिवारी, वैदेही, प्रिया आर्या, अर्चना भास्कर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मोजुद थे ।
श्रावण मास,श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी,मणिपर्वत (श्रावण झूला)मेला एवं रक्षाबंधन के दृष्टिगत जनपद गोण्डा में विशेष यातायात डायवर्जन व्यवस्था लागू
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श्रावण मास-2026 के दौरान श्रावण सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला एवं रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या धाम एवं आसपास के जनपदों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एवं वाहनों के दबाव को देखते हुए जनपद गोण्डा में विशेष यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।

*निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय श्रावण सोमवार एवं श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर 08 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 12 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे तक, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला, तृतीय श्रावण सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर 14 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 17 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक, चतुर्थ/अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर 23 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 24 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक तथा श्रावण पूर्णिमा स्नान, रक्षाबंधन एवं मेला समापन के अवसर पर 27 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 28 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक विशेष डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी।*

*प्रमुख डायवर्जन व्यवस्था*

*रूट-ए:*
लखनऊ से बाराबंकी एवं गोण्डा होते हुए गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले समस्त वाहनों को दर्जीकुआँ (थाना कोतवाली देहात) से डायवर्ट कर झिलाही रेलवे क्रॉसिंग-मनकापुर-उतरौला मार्ग-डुमरियागंज होते हुए गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*रूट-बी:*
लखनऊ से गोण्डा होकर गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले वाहनों को दर्जीकुआँ से डायवर्ट कर मोतीगंज- मनकापुर-मसकनवा-बभनान मार्ग से गंतव्य के लिए भेजा जाएगा।

*रूट-सी:*
गोण्डा शहर में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों को धानेपुर-उतरौला मार्ग से डायवर्ट कर बेवा चौराहा/डुमरियागंज के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं*

• अयोध्या प्रशासन के निर्देशानुसार लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले भारी वाहनों को सामान्यतः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करना होगा। पर्वों के दौरान लखनऊ-बाराबंकी-रामनगर (महादेवा मंदिर) मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

• बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती एवं गोण्डा से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को जरवल रोड-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग से भेजा जाएगा।

• गोण्डा से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों का संचालन श्रावण सोमवार एवं पर्वों के दौरान जरवल रोड-बाराबंकी मार्ग पर प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को हुजूरपुर मोड़-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा।

• आवश्यकता पड़ने पर उतरौला एवं बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को जानकीनगर पुलिस चौकी (थाना इटियाथोक) से डायवर्ट कर आर्यनगर-कटरा बाजार-कर्नलगंज मार्ग से भेजा जाएगा।

•कर्नलगंज-परसपुर-तरबगंज-नवाबगंज मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

• गोण्डा शहर से जरवल रोड होकर बाराबंकी-लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को हुजूरपुर मोड़ से डायवर्ट किया जाएगा।

• कर्नलगंज, परसपुर एवं तरबगंज से नवाबगंज आने वाले भारी वाहनों को कटी तिराहा से मनकापुर की ओर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य चारपहिया वाहन टिकरी मोड़-कोल्हमपुर-लोलपुर मार्ग से संचालित होंगे।

• कटी तिराहा से अयोध्या की ओर केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

• लकड़मण्डी तिराहा से नया घाट पुल (अयोध्या) तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी।

• लोलपुर से नवाबगंज जाने वाले वाहनों को कोल्हमपुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को लकड़मण्डी-नवाबगंज मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा।

*जनसामान्य से अपील*

जनपद पुलिस द्वारा समस्त वाहन चालकों एवं आमजन से अपील की जाती है कि निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं यातायात पुलिस के निर्देशों का अनुपालन करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा सहयोग एवं संयम बनाए रखते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें। जनसहयोग से ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखना संभव हो
लखनऊ मंडल में पर्यटन विकास को मिलेगी रफ्तार, 59 परियोजनाओं पर नवंबर तक शुरू होगा काम
-  ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों और आस्था स्थलों के सौंदर्यीकरण के प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई; पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ मंडल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं पर्यटन विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत लखनऊ मंडल की विभिन्न विधानसभाओं में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य आस्था स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 59 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी परियोजनाओं को आगामी नवंबर तक धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य किया जाए।
पर्यटन मंत्री ने गुरुवार को बताया कि प्राप्त प्रस्ताव सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, जिलाधिकारियों तथा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों की ओर से भेजे गए हैं। इनमें रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लखनऊ मंडल में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए वहां बुनियादी पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि इन स्थलों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके और स्थानीय पर्यटन को नई गति मिले।

-  इन प्रमुख स्थलों का होगा विकास
प्रस्तावित परियोजनाओं में लखनऊ के प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, नाका हिंडोला गुरुद्वारा, भुइयन देवी मंदिर, आलमबाग स्थित सनातन धर्म मंदिर, उनई देवी मंदिर, कल्याणगिरी महादेव मंदिर, श्री चित्रगुप्त भवन, राजाजीपुरम शीतला देवी मंदिर, अलीगंज हनुमान मंदिर, काकोरी शहीद स्थल और गंगाप्रसाद मेमोरियल हॉल के संरक्षण एवं पर्यटन विकास के प्रस्ताव शामिल हैं।
इसके अलावा लखीमपुर खीरी के बाबा भूतनाथ मंदिर, तुरन्तनाथ बाबा मंदिर, जंगलियानाथ बाबा मंदिर और बाबा भुरिया नाथ धाम, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में पर्यटन सुविधा केंद्र एवं वन स्टॉप सेंटर, महमूदाबाद का मां संकटा देवी धाम, सिधौली का झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, रायबरेली का चंपा देवी मंदिर, ऊंचाहार स्थित महाराज माहे पासी किला तथा प्राचीन विष्णु मंदिर के विकास के प्रस्ताव भी कार्ययोजना में शामिल किए गए हैं।
हरदोई के महर्षि दधीचि मंदिर, शाहाबाद के बाबा वनखंडी मंदिर, संडीला के चौमुखी मंदिर तथा उन्नाव के बुद्ध अंबेडकर पार्क, मोहान स्थित जमदग्नि आश्रम-परशुराम मंदिर, भगवंतनगर के हनुमान मंदिर और श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सभी परियोजनाओं के लिए संबंधित जनपदों से भूमि अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि स्वीकृति के बाद निर्माण एवं विकास कार्य समयबद्ध ढंग से शुरू किए जा सकें।
सरकार का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम, तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के संचालन को मिली हरी झंडी

- उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गाजियाबाद, कानपुर व फतेहपुर के प्रस्तावित विश्वविद्यालयों को सौंपा 'संचालन प्राधिकार पत्र'

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को उच्च शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रदेश में स्थापित होने जा रहे तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन को 'संचालन प्राधिकार पत्र' (अनुज्ञा पत्र) प्रदान किया। योगी सरकार की इस पहल से गाजियाबाद, कानपुर और फतेहपुर जनपदों में उच्च, तकनीकी एवं कृषि शिक्षा का विस्तार होगा तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जनपद गाजियाबाद में 'अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी', गाजियाबाद के सचिव/चेयरमैन को, कानपुर नगर के बिल्हौर में 'महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट', दिल्ली के सचिव को तथा फतेहपुर में 'ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'एंग्लो संस्कृत कॉलेज', फतेहपुर के अध्यक्ष को आधिकारिक संचालन प्राधिकार पत्र सौंपा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 में संशोधन अध्यादेशों के तहत यह स्वीकृति जारी की गई है। इसके अंतर्गत गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय को तृतीय संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 17 सन् 2026), कानपुर के महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय को चतुर्थ संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 18 सन् 2026) तथा फतेहपुर के ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय को पंचम संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 19 सन् 2026) के तहत सम्मिलित करते हुए संचालन की अनुज्ञा संबंधी अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री ने प्राधिकार पत्र सौंपते हुए संबंधित संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे शासन द्वारा निर्धारित मानकों, नियमों एवं शर्तों का  अनुपालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहित कर उच्च शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ कर रही है, जिससे राज्य के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों और उत्कृष्ट वातावरण का लाभ मिल सके।
बीमारी भी नहीं रोक सकी ममता की धारा, जारी रहा स्तनपान
- टीबी, फाइलेरिया और समय से पहले जन्मे शिशु जैसी चुनौतियों के बीच डॉक्टरों की सलाह बनी भरोसा
*गोंडा, 04 अगस्त 2026*: जब कोई मां बीमार होती है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वह अपने शिशु को स्तनपान करा सकती है। कई बार यह डर भी सताता है कि कहीं उसकी बीमारी बच्चे तक न पहुंच जाए। यही आशंका देवीपाटन मंडल की उन माताओं के मन में भी थी, जिन्होंने विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान अपने अनुभव साझा किए। परिवार के कुछ सदस्य भी इसी डर से उन्हें स्तनपान कराने से मना करते थे। लेकिन डॉक्टरों की सही सलाह, आशा और एएनएम के मार्गदर्शन तथा परिवार के सहयोग से उनका यह भ्रम दूर हुआ।
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में देवीपाटन मंडल के 3.18 लाख से अधिक नवजातों को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल से घर लौटने के बाद बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों और परिवार के संकोच के कारण कई माताएं स्तनपान को लेकर असमंजस में पड़ जाती हैं।
अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद इन माताओं ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने शिशुओं को पहले छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाया और कई माताओं ने दो साल तक भी स्तनपान जारी रखा। आज वे कहती हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ हैं, अच्छी तरह बढ़ रहे हैं और दूसरे बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं।
केस -1 फाइलेरिया का डर, लेकिन नहीं रुका स्तनपान-
जरवल ब्लॉक के रिठौढ़ा गांव की रिंकी गर्भावस्था के दौरान फाइलेरिया से पीड़ित हो गई थीं। रिंकी बताती हैं कि प्रसव के बाद परिवार को डर था कि कहीं स्तनपान से बच्चे को भी बीमारी न हो जाए। आशा कार्यकर्ता ने समझाया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलता है, मां के दूध से नहीं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता सामग्री भी दिखाई। इसके बाद परिवार की शंका दूर हुई और रिंकी ने अपने बेटे को दो साल तक स्तनपान कराया। आज वह छह साल का है, स्वस्थ है और स्कूल जाता है।
केस -2 कम वजन की बच्ची के लिए मां का दूध बना संबल-
बलरामपुर के श्रीदत्तगंज निवासी मनोज कुमार की पत्नी मीना देवी ने 4 जून 2026 को जिला अस्पताल में 1635 ग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। कम वजन होने के कारण नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ा। बच्ची स्तन से दूध नहीं खींच पा रही थी, इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों ने मां का दूध निकालकर कटोरी-चम्मच से पिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। मीना देवी कहती हैं, "डॉक्टरों ने बताया कि मेरे दूध से ही मेरी बच्ची को सबसे ज्यादा ताकत मिलेगी। आज बच्ची स्वस्थ है और सामान्य रूप से बढ़ रही है।“
केस -3 टीबी इलाज के साथ जारी रहा स्तनपान -
श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र के अंबेडकरनगर की 26 वर्षीय एक महिला (पहचान गोपनीय रखने के अनुरोध पर नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है) को प्रसव के बाद टीबी का पता चला। परिवार को डर था कि कहीं शिशु को भी संक्रमण न हो जाए। डॉक्टरों ने समझाया कि नियमित उपचार, शुरुआती दिनों में मास्क के उपयोग और पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान सुरक्षित रूप से जारी रखा जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकीय सलाह का पालन किया और अपने शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ा। महिला कहती हैं, "डॉक्टरों की सलाह ने मेरा और मेरे परिवार का डर दूर कर दिया। आज मेरा डेढ़ साल का बेटा स्वस्थ है और मैं भी पूरी तरह टीबी से ठीक हो चुकी हूं।"

"कई माताएं यह भी सोचती हैं कि बीमारी या दवा लेने से उनका दूध खराब हो जाएगा या बच्चे को नुकसान पहुंचाएगा। जबकि अधिकांश सामान्य बीमारियों और उनकी दवाओं के दौरान भी स्तनपान सुरक्षित रहता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के न तो दवा बंद करें और न ही स्तनपान।"
डॉ. संतलाल पटेल- कार्यवाहक अपर निदेशक (देवीपाटन मंडल) एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोंडा
लखनऊ में मानसून का कहर: 24 घंटे में सामान्य से छह गुना ज्यादा बारिश, दीवार गिरने से वाहन दबे; दो दिन का ऑरेंज अलर्ट
सुबह से छाए बादल, दिनभर भारी बारिश के आसार; शहर में जलभराव और बिजली संकट, अगले तीन दिन भी राहत नहीं

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार सुबह से ही शहर बादलों की चादर में लिपटा रहा और मौसम विभाग ने दिनभर मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते 24 घंटों में शहर में 40.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 7 मिलीमीटर की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। लगातार बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

बारिश के बीच लखनऊ सिटी स्टेशन के पास एक बड़ा हादसा भी हुआ। यहां एक पुरानी दीवार भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में एक कार और करीब आधा दर्जन दोपहिया वाहन दब गए। हालांकि, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

मानसून अब भी सामान्य से पीछे

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक लखनऊ में 227.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 345.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राजधानी में अब तक मानसून करीब 34 प्रतिशत कमजोर रहा है। हालांकि हाल के दिनों में हुई तेज बारिश से इस कमी में कुछ सुधार की उम्मीद है।

तापमान में गिरावट, उमस से मिली राहत

मंगलवार को अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1 डिग्री कम था। बारिश के कारण हवा में नमी काफी बढ़ गई और अधिकतम आर्द्रता 97 प्रतिशत तथा न्यूनतम 87 प्रतिशत दर्ज की गई।

जलभराव और बिजली कटौती से बढ़ीं मुश्किलें

लगातार बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे नागरिकों की परेशानियां और बढ़ गईं।

अगले तीन दिन भी झमाझम बारिश के आसार

मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से अगले 2 से 3 दिनों तक लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट आएगी तथा उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।

बीते 24 घंटों में अमौसी मौसम केंद्र पर 66.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन की अब तक की सबसे अधिक वर्षा है। मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।