सोनभद्र: मानसून की पहली बारिश में उफनाया नाला, मां और 8 महीने का मासूम बहा; बच्चे का शव बरामद, मां की तलाश जारी

विकास कुमार सोनभद्र अनपरा। सोनभद्र जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में उजाड़ दीं। अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास अचानक उफनाए एक बरसाती नाले ने मां और उसके आठ महीने के मासूम बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में मासूम बच्चे की मौत हो गई है, जिसका शव घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर बरामद किया गया। वहीं, लापता मां का अब तक सिर्फ कपड़ा ही मिल सका है, उसका कोई सुराग नहीं लगा है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

अचानक बढ़े जलस्तर ने दोनों को आगोश में लिया
मिली जानकारी के अनुसार, अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास रहने वाली 25 वर्षीय सविता देर शाम अपने आठ महीने के मासूम बच्चे को लेकर घर से निकली थी। थाना प्रभारी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का घर नाले के बिल्कुल करीब है और वह संभवतः शौच के लिए निकली थी। इसी दौरान अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे बरसाती नाले का जलस्तर और बहाव पल भर में बेहद तेज हो गया। नाला पार करते समय मां और बेटा पानी के इस प्रचंड वेग को संभाल नहीं पाए और तेज धारा में बह गए।

सुबह शुरू हुआ रेस्क्यू, 3 किमी दूर मिला मासूम का शव
यह घटना देर रात की होने के कारण शुरुआत में किसी को इसकी भनक नहीं लगी। सुबह होते ही जब पुलिस को मामले की जानकारी मिली, तो तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद, घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर मासूम बच्चे का शव बरामद कर लिया गया। हालांकि, काफी खोजबीन के बाद भी मां सविता का कुछ पता नहीं चल सका है, पुलिस को नाले के पास से केवल उसके कपड़े बरामद हुए हैं।

पति था घर से बाहर, परिजनों को 'चमत्कार' की उम्मीद
बताया जा रहा है कि घटना के वक्त महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। जैसे ही उसे इस अनहोनी की सूचना मिली, वह बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा। इस हादसे ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

वर्तमान में पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें नाले और उसके आसपास के संभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

मासूम की मौत से जहां पूरे गांव की आंखें नम हैं, वहीं परिजन और ग्रामीण अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि काश सविता सकुशल मिल जाए। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बारिश के मौसम में उफनते नदी-नाले और थोड़ी सी भी लापरवाही पल भर में जिंदगी को खत्म कर सकती है।
गंगा में नाला का पानी गिरने से आचमन योग नहीं ,बल्कि आपवित्र हो रहा

बच्चा स्वामी ने  गंगा की अविरलधारा को स्वच्छ रखने और आश्रम के आसपास सफाई करने की भरी हुंकार, डीएम को दिया पत्र,नाला गंगा जल को कर रहा अपवित्र

फर्रुखाबाद l शिव शक्ति अखाड़ा के महंत बच्चा स्वामी ने गुरुवार को अपने दर्जनों शिष्यों के साथ आश्रम के आसपास फैली गंदगी और गंदा नाला का पानी गंगा की अविरल धारा को गंदा ही नहीं बल्कि अपवित्र कर साधु संतों के लिए आचमन के योग्य तक नहीं रखा है इससे नाराज दर्जनों साधु संतों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर को शिकायती पत्र दिया  जिसमें कहा है कि इस नाले के साथ जो गंदगी आ रही है उससे आश्रम के आसपास गंदगी का ढेर लगा हुआ है यही नहीं साधु संत गंगा में ना तो स्नान कर पा रहे और ना आचमन कर सकते हैं। महंत बच्चा स्वामी ने कहा कि पांचाल घाट से लेकर शमशान घाट तक सड़क चौड़ीकरण किया जाना चाहिए जिससे आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सके उन्होंने कहा कि दूर-दराज से लोग यहां अंतिम संस्कार करने के लिए आते हैं और जाम में फंसने पर कई की घंटे खड़ा होना पड़ता है इसलिए सड़क का भी निर्माण किया जाना चाहिए।
आगामी सप्ताह हो सकती है तेज बरसात  आंधी और तूफान
फर्रुखाबाद । आगामी सप्ताह में वर्षा, आंधी-तूफान एवं वज्रपात की संभावना, नागरिक सतर्क रहें : जिला प्रशासन
भारत मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ द्वारा जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार जनपद फर्रुखाबाद में आगामी सात दिनों के दौरान वर्षा, गरज-चमक, तेज झोंकेदार हवाओं तथा वज्रपात की संभावना व्यक्त की गई है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करने तथा अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार 29 जून को जनपद के कहीं-कहीं क्षेत्रों में वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान मेघगर्जन एवं वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।
30 जून से 02 जुलाई तक जनपद के अनेक स्थानों पर वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस अवधि में मेघगर्जन, वज्रपात, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
03 जुलाई से 05 जुलाई के बीच भी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं-कहीं वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने तथा मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना बनी रहेगी।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा एवं नम रहेगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि गरज-चमक सुनाई देते ही सुरक्षित पक्के भवन के अंदर चले जाएं। घरों में बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें तथा बिजली के तारों एवं विद्युत कनेक्शनों से दूरी बनाए रखें। यदि किसी कारणवश खुले स्थान पर फंस जाएं तो दोनों पैर पास-पास रखते हुए सिर झुकाकर बैठें तथा जमीन से संपर्क कम से कम रखें। वाहन में यात्रा कर रहे हों तो वाहन के अंदर ही रहें और खिड़कियां बंद रखें।
प्रशासन ने यह भी सलाह दी है कि आंधी-तूफान अथवा वज्रपात के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों, टावरों अथवा अन्य ऊंची संरचनाओं के नीचे शरण न लें। खुले मैदान, खेत, छत या जलाशयों के आसपास खड़े न हों तथा धातु की वस्तुओं का प्रयोग करने से बचें। खराब मौसम के दौरान बाहर निकलकर सेल्फी अथवा वीडियो बनाने का प्रयास न करें तथा वर्षा के पानी से भरे गड्ढों एवं नालों को पार करने से बचें।
किसान भाइयों से विशेष अनुरोध किया गया है कि खेतों में कार्य करते समय मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा संभावित वर्षा और तेज हवाओं को देखते हुए फसलों, मंडियों में खुले में रखे आलू एवं अन्य कृषि उपज तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली चेतावनियों एवं परामर्शों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में संबंधित विभागों एवं स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें।
श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण, निकली भव्य कलश यात्रा
- श्रद्धालुओं के जयघोष से भक्तिमय हुआ क्षेत्र, 1 जुलाई को होगा विशाल भंडारा

मऊ। जनपद के मानिकपुर हड़हुआ स्थित श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालुओं के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रोहतम निषाद तथा महिला मुख्य अतिथि के रूप में प्रभावती देवी उपस्थित रहीं। दोनों अतिथियों ने मंदिर की प्रगति और धार्मिक आयोजनों की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया।
इस आयोजन को सफल बनाने में सुभाष निषाद, हरिनाथ निषाद, सत्यदेव निषाद, छेदी निषाद एवं अमित निषाद की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में रामसिंह निषाद, श्रीराम निषाद, लालमन निषाद, राजेंद्र निषाद, रामभुवन निषाद, बेचन निषाद, राजेश निषाद, अजय निषाद, मुखराम राजभर, लल्लन राजभर तथा छोटक निषाद सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महिला श्रद्धालुओं में प्रेमशिला देवी, रीता देवी, सुमन देवी, दुर्गावती देवी, सुपली देवी, गुड्डी देवी, पाना देवी, होशिला देवी, राधिका देवी एवं सुगवती देवी ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
आयोजकों ने बताया कि मंदिर स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 1 जुलाई को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना है। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों एवं भंडारे में सहभागिता करने की अपील की है।
अपनों की बात आखिर सबसे अंत में क्यों?
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा वरिष्ठ साहित्यकार

कुछ दिन पहले मैं अचानक अपनी एक प्रिय सखी के घर मिलने चली गई। हम दोनों परिवार वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए औपचारिकता का प्रश्न ही नहीं था।

मैंने देखा कि वह और उनके पति किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। मेरी सखी कोई बात कहती और उनके पति तुरंत उसकी बात काट देते। उसकी लगभग हर राय का विरोध हो रहा था। कुछ देर तक उसने धैर्य रखा, फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ, लेकिन भीतर से आहत होकर बोली

"आपको जो ठीक लगे, वही कर लीजिए। मेरा काम था समझाना, मैंने समझा दिया।"

उसके शब्दों में शिकायत कम और हार अधिक थी।

उस दिन घर से लौटते समय मन में एक ही प्रश्न बार-बार उठता रहा :
आख़िर ऐसा क्यों होता है कि जिन लोगों को हम सबसे अधिक अपना मानते हैं, उनकी बात ही सबसे अंत में सुनते हैं?

पति-पत्नी हों, माता-पिता हों, भाई-बहन हों या परिवार का कोई अन्य सदस्य—जब वे हमें कोई सलाह देते हैं, तो हम उसमें कमियाँ खोजने लगते हैं। लेकिन वही बात यदि कोई मित्र, पड़ोसी या बाहरी व्यक्ति कह दे, तो वह हमें बहुत समझदारी भरी लगने लगती है।

क्या इसलिए कि अपने लोग हमेशा हमारे साथ रहते हैं और हम उन्हें "टेकन फॉर ग्रांटेड" लेने लगते हैं?

सच तो यह हैं कि दुनिया में सबसे निस्वार्थ सलाह वही देता है, जिसका दिल हमारे लिए धड़कता है। बाहर वाले सलाह तो दे सकते हैं, लेकिन उसके परिणामों की जिम्मेदारी नहीं उठाते। यदि बात गलत हो जाए तो सहज कह देंगे—"हमने तो सिर्फ राय दी थी, मानना या न मानना आपका निर्णय था।"

लेकिन परिवार का सदस्य ऐसा नहीं कह सकता, क्योंकि उसका सुख-दुःख हमारे जीवन से जुड़ा होता है।

सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब हम दूसरों के सामने अपने ही जीवनसाथी की बात काट देते हैं, उसकी राय को महत्व नहीं देते या उसका मज़ाक बना देते हैं। उस समय हम यह भूल जाते हैं कि शब्दों के घाव दिखाई नहीं देते, लेकिन वे बहुत गहरे होते हैं।

बाहर बैठे लोग भले मुस्कुरा दें, लेकिन मन ही मन यही सोचते हैं—"जो एक-दूसरे का सम्मान नहीं कर सकते, वे साथ कैसे निभाएँगे?"

इसके विपरीत कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ पति-पत्नी बिना अधिक शब्दों के भी एक-दूसरे का मन समझ लेते हैं। वे जानते हैं कि हर बार मैं ही सही नहीं हो सकता। वे एक-दूसरे को अपनी बात रखने का अवसर देते हैं, एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं। यही परिपक्वता रिश्तों को मजबूत बनाती है।

हर इंसान चाहता हैं कि उसकी बात सुनी जाए, उसकी राय का सम्मान हो, उसके योगदान की कद्र हो। विशेषकर उस घर में, जिसके लिए उसने अपना समय, श्रम, प्रेम और पूरा जीवन समर्पित कर दिया हो।

जब किसी को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि उसकी बात का कोई मूल्य नहीं है, उसकी राय का कोई महत्व नहीं है, तब वह धीरे-धीरे भीतर से टूटने लगता है। उपेक्षा का दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन यह इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। कई बार यही उपेक्षा उसे अवसाद और निराशा की ओर भी धकेल देती है।

आज एक और समस्या तेजी से बढ़ रही है—"टेकन फॉर ग्रांटेड"।

घर का जो सदस्य सबसे अधिक करता है, उसी से सबसे अधिक अपेक्षाएँ रखी जाती हैं। चाहे माता-पिता हों, बड़े भाई-भाभी हों, जेठ-जेठानी हों या पति-पत्नी—जो जिम्मेदार होता है, उससे सबको उम्मीद रहती हैं कि वह करता ही रहेगा। लेकिन उसके लिए हम क्या कर सकते हैं, यह सोचने का समय बहुत कम लोग निकालते हैं।

रिश्ते केवल लेने से नहीं चलते, देने से भी चलते हैं। सम्मान केवल पाने की चीज़ नहीं, देने की आदत भी है।

आजकल कुछ लोग बाहर की दुनिया में आदर्श पति-पत्नी होने का ऐसा प्रदर्शन करते हैं कि लगता है उनसे अधिक प्रेम करने वाला कोई नहीं। लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर वही रिश्ता तानों, कटु शब्दों और अपमान से भर जाता है। सुबह की चाय के साथ कभी पत्नी की आँखों से आँसू बहते हैं, तो कभी पति चुपचाप अपनी पीड़ा भीतर ही दबा लेता है।

यदि सचमुच एक सुखी परिवार बनाना है, तो सबसे पहले बाहर वालों से अधिक अपने जीवनसाथी को महत्व देना होगा। क्योंकि अंत में जीवन की हर कठिन राह पर साथ मित्र नहीं, समाज नहीं, बल्कि पति-पत्नी ही निभाते हैं। बच्चे भी एक दिन अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन जीवनसाथी का साथ जीवन के अंतिम पड़ाव तक बना रहता है।

मुझे अपना बचपन याद आता है।

मैंने अपने माता-पिता को कभी हमारे सामने एक-दूसरे का अपमान करते नहीं देखा। मतभेद अवश्य होते होंगे, लेकिन मनभेद कभी नहीं देखा , उन्होंने अपने मतभेद को कभी बच्चों के सामने तमाशा नहीं बनने दिया। यदि किसी से भूल हो जाती, तो "सॉरी" कहने में किसी का अहंकार आड़े नहीं आता था।

शायद यही कारण था कि हमारा बचपन इतना तनावमुक्त और सुखद था। संयुक्त परिवार में रहते हुए हमें हर ओर अपनापन, सुरक्षा और स्नेह का अनुभव होता था। ऐसा लगता था कि पूरा परिवार हमारी ताकत है, हमारी ढाल है।

आज भी मन कहता है—काश! हर घर में फिर वही अपनापन लौट आए। चाहे संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, यदि संवाद रहेगा, सम्मान रहेगा, संवेदनशीलता रहेगी, तो हर घर फिर से मुस्कुराने लगेगा।

याद रखिए :
रिश्तों को सबसे अधिक प्रेम नहीं, सम्मान जीवित रखता है।
जिस दिन हम बाहर वालों से पहले अपनों की बात सुनना सीख जाएँगे, उसी दिन हमारे घरों की आधी समस्याएँ अपने आप समाप्त हो जाएँगी।

क्योंकि जो व्यक्ति आपके सुख-दुःख में आपके साथ खड़ा रहता है, उसकी सलाह केवल शब्द नहीं होती, उसमें उसका प्रेम, अनुभव और आपका भविष्य छिपा होता है। इसलिए अपनों की बात को सबसे अंत में नहीं, सबसे पहले सुनिए। वहीं से रिश्तों की मिठास और जीवन की सच्ची खुशियाँ शुरू होती हैं।

अपनों की बातों में अनुभव का सार होता है,
हर शब्द में छिपा सच्चा प्यार होता है।
जो बाहर वालों की आवाज़ में अपने खो देते हैं,
अक्सर वे रिश्तों का सबसे अनमोल उपहार खो देते हैं।

रिश्ते तब नहीं टूटते जब मतभेद होते हैं,
रिश्ते तब टूटते हैं जब सम्मान समाप्त हो जाता है।
इसलिए अपनों की बात सुनिए, समझिए और उन्हें महसूस कराइए—
कि वे केवल आपके परिवार का हिस्सा नहीं,
आपके जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं।
पद्मश्री उदित नारायण और पलक मुच्छल की आवाज़ में सजा रोमांटिक गीत "मेरे मन को" हुआ रिलीज़

मुंबई। भारतीय संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके उभरते हुए कलाकार एवं रॉक-स्टार संगीत मासूम एक बार फिर अपने नए रोमांटिक गीत "मेरे मन को" के साथ श्रोताओं के दिलों को छूने के लिए तैयार हैं। मासूम फ़िल्म कंपनी एवं द ग्रेट बॉलीवुड के बैनर तले प्रस्तुत यह गीत रिलीज़ होते ही संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। गीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से सजाया है पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण तथा लोकप्रिय गायिका पलक मुच्छल ने। गीत का संगीत अमन श्लोक ने तैयार किया है, जबकि इसके भावपूर्ण बोल सुप्रसिद्ध गीतकार एवं लेखक मुकेश कुमार मासूम ने लिखे हैं। वीडियो का निर्देशन अनिल एस. मेहता ने किया है, कोरियोग्राफी संजय चौधरी ने की है तथा इसकी निर्माता सीमा हैं। म्यूज़िक वीडियो में संगीत मासूम और गंगा अधिकारी की जोड़ी ने अपने सशक्त अभिनय से प्रेम और भावनाओं को जीवंत कर दिया है। संगीत मासूम आज हिंदी संगीत जगत के उन युवा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक सरोज खान से नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा रोशन तनेजा अभिनय अकादमी से अभिनय का चार माह का डिप्लोमा किया है। हाल ही में हिंदी फ़िल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय के हाथों उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मानित भी किया गया, जो उनके निरंतर बढ़ते कलात्मक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले संगीत मासूम "दिल का ख़ुदा", "ब्रेकअप पार्टी", "साजन के शहर" और "बेदर्दी" जैसे चर्चित एवं लोकप्रिय गीतों के माध्यम से संगीत प्रेमियों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। अब "मेरे मन को" से भी उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। गीत के बोल मुकेश कुमार मासूम द्वारा रचे गए हैं, जो शब्दों के माध्यम से प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन के एक संवेदनशील, प्रखर एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। उनकी लेखनी की पहचान सरल भाषा में गहन भाव, तथ्यात्मक स्पष्टता और साहित्यिक प्रवाह के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार हैं। मुकेश कुमार मासूम स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन तथा इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, जो उनके साहित्य और फ़िल्म उद्योग से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। वे बॉलीवुड के स्थापित गीतकारों में गिने जाते हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में "दिल तोड़ने वाला, दिल का ख़ुदा निकला" (उदित नारायण), "दारू सिगरेट छोड़ दे" (ममता शर्मा), "जीवन एक अमृत है" (उदित नारायण), "मेरे मन को" (उदित नारायण एवं पलक मुच्छल), "भगवान ज़रूरी है" (अल्तमश फ़रीदी), "खाटू श्याम जाना है" (अनूप जलोटा), "जय भीम बोलो रे" (स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़), "ब्रेकअप पार्टी" (हरमन नाज़िम), "मेनू हँसके विदा कर दे" (शबाब साबरी), "बौद्ध धर्म के अनुयायी" (अनूप जलोटा) तथा "उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा" (अगम कुमार निगम) जैसे अनेक लोकप्रिय गीत शामिल हैं। उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई, लोकसंवेदना और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

वर्तमान में मुकेश कुमार मासूम सिनेविस्टा लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित फ़िल्म एवं धारावाहिक निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की अनेक प्रमुख हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक "योगी आदित्यनाथ : अध्यात्म और राजनीति के आकाश पर चमकता सितारा" लिखी है। हाल ही में इस पुस्तक के संबंध में उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट भी की।उच्च गुणवत्ता वाले संगीत, उत्कृष्ट गायन, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण शब्दों से सजा "मेरे मन को" अब विभिन्न डिजिटल संगीत मंचों पर उपलब्ध है। संगीत प्रेमियों और समीक्षकों का मानना है कि यह गीत वर्ष के चर्चित रोमांटिक गीतों में अपनी विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

पचमढ़ी में ज्योति सिंह ने रचा इतिहास,बनीं सुलतानपुर की पहली लीडर ट्रेनर गाइड
*ज्योति सिंह ने राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी से प्रशिक्षण प्राप्त कर रचा इतिहास*

*राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी से पहली लीडर ट्रेनर गाइड  बनीं ज्योति सिंह,सुलतानपुर गौरवान्वित*

सुलतानपुर।जनपद सुलतानपुर के लिए गौरव का क्षण तब आया जब भारत स्काउट एवं गाइड उत्तर प्रदेश की जिला ट्रेनिंग कमिश्नर (गाइड) ज्योति सिंह ने मध्य प्रदेश स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी में आयोजित उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लीडर ट्रेनर गाइड की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त की। इस उपलब्धि के साथ ही ज्योति सिंह सुलतानपुर की पहली लीडर ट्रेनर गाइड बन गई हैं,जिससे जिले के स्काउट- गाइड आंदोलन को नई पहचान मिली है।

ज्योति सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता पर जिला मुख्य आयुक्त एवं जिला विद्यालय निरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह,सह जिला विद्यालय निरीक्षक जटाशंकर यादव ,जिला कमिश्नर स्काउट डॉ. दिनेश प्रताप सिंह एवं सचिव डॉ गुलाब सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्काउट-गाइड गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।

जिला ट्रेनिंग कमिश्नर स्काउट धर्मेंद्र प्रताप सिंह,जिला संगठन कमिश्नर गौरव सिंह एवं जिला संगठन आयुक्त (गाइड) कांती सिंह ने भी ज्योति सिंह को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

जिला प्रशिक्षण टीम एवं स्काउट-गाइड परिवार के सदस्यों ने कहा कि उनकी सफलता युवाओं और गाइड्स के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी तथा प्रशिक्षण गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगी।आपको बता दें उत्तर प्रदेश से ज्योति सिंह समेत चार महिलाओं ने लीडर ट्रेनर गाइड का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं।

ज्योति सिंह की इस उपलब्धि से जनपद के स्काउट-गाइड कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और इसे जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
या हुसैन सदाओं के बीच दफनाए गए सभी ताजिये
रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। शहीदाने कर्बला की याद में मनाया जाने वाला चेहल्लुम का जुलूस , चांद की दसवीं तारीख यानी शुक्रवार को अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। नगर के बालीपुर से निकले ताजिया जूलुस में शामिल लोग या हुसैन व नारा ए तकबीर की सदा बुलंद करते हुए पाल तिराहे होते हुए मुखर्जी पार्क के पास स्थित इमाम चौक पर ताजिये को लेकर कोतवाली, पुरानी बाजार लालानर मोड़ से फकिरान बस्ती और भुड़की के ताजियों को शामिल कर वापस प्रोफेसर कालोनी,कारागार, दुर्गागंज मार्ग होते हुए लाठी डंडों, तलवार,भाला आदि के विभिन्न करतबों को दिखाते हुए कर्बला तक पहुंचे।जहां ताजियों को ठंडा किया गया। भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
नगर के विभिन्न मोहल्ले के ताजिये दोपहर दो बजे तक मेन रोड पर आ गए थे। लगभग ढाई बजे ताजिया जुलूस परंपरागत रास्तों से या हुसैन की सदायें बुलंद करते हुए, पुरानी तहसील प्रोफेसर कालोनी मार्ग होते हुए मुख्य मार्ग से नथईपुर तिराहे से कर्बला की ओर रवाना हुआ। जुलूस में छोटे-बड़े लगभग तीन दर्जन से अधिक ताजिये शामिल थे। अधिकांश तो छोटे छोटे ताजिया थे जो बच्चों ने पूरे उत्साह व अकीदत से तैयार किया था। जहां देवगजितपुर और पसड़ियापुर के ताजिये शाम लगभग साढ़े छह बजे तक  कर्बला पहुंच गए थे। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में पूलिस अधीक्षक अभिनव के नेतृत्व में अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल सीओ चमन सिंह चावड़ा उपस्थित रहे।
नशामुक्त झारखंड की ओर एक और कदम: 15 दिवसीय राज्यव्यापी जागरूकता अभियान संपन्न

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी बर्बाद कर देता है। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड को नशामुक्त करने का प्रण लिया है । और जो निर्णय लिया है उसे पूरे करने में सभी विभाग आपसी समन्वय बना झारखंड को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने का काम हमलोग करेंगे । इसी उद्देश्य से पिछले 15 दिनों से नशामुक्ति हेतु जागरूकता अभियान पूरे राज्यभर में सरकार द्वारा चलाया जा रहा था जिसका आज समापन हो गया ।

उन्होंने कहा कि यह अभियान पिछले तीन वर्षों से चलाया जा रहा है । आने वाले समय में प्रयास रहेगा कि पूरे साल यह अभियान चलाया जाए। डॉ इरफ़ान अंसारी गुरूवार को शौर्य सभागार में गृह,कारा एवं आपदा प्रबंधन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित निषिध मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जागरूकता अभियान के समापन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे । इस अवसर पर मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने युवाओं और उपस्थित लोगों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से बचने और नशा से दूर रहने की शपथ दिलायी ।

अभियान की अच्छी शुरुआत हुई , मजबूती के साथ चलाया गया अभियान

डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार का मक़सद नशामुक्त झारखंड, युवा झारखंड बनाने का है और इस दिशा में पिछले तीन साल से लगातार यह अभियान चलाया जा रहा है ।युवा हमारे राज्य हमारे देश का भविष्य हैं और नशे में अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं । नशे से सिर्फ़ वे अपना जीवन बर्बाद नहीं करते हैं बल्कि परिवार ,पूरे समाज देश राज्य को प्रभावित करते हैं। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के निदेश पर ही झारखंड के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए यह अभियान चलाया जा रह है । उन्होंने कहा कि नशा केवल झारखंड या भारत की समस्या नहीं बल्कि यह पूरे विश्व की समस्या है । युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए नए-नए इनिशिएटिव लेना होगा । उन्हें कई प्रकार के एक्टिविटीज में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना होगा । साथ ही सभी प्रकार के संसाधनों का उपयोग करके युवाओं में नशे की लत की समस्या को दूर करने का प्रयास करना होगा ।

जागरूकता अभियान में जन भागीदारी और सहयोग जरूरी

डॉ. अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में नशामुक्त एवं स्वस्थ झारखंड के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अभियान तभी सफल होगा जब आम जनता भी सरकार का सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा नशे की लत के कारण रिनपास और सीआईपी जैसे संस्थानों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा देर रात रास्ते पर , फ्लाईओवर के नीचे विशेष रूप से सिरप और सॉल्यूशन का नशा करते युवा दिखाई देते है इसके प्रति पुलिस-प्रशासन को ध्यान रखने की जरूरत है ।

मेयर रांची श्रीमती रोशनी खलखो ने कहा कि नशामुक्ति अभियान में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत और जब हर एक व्यक्ति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तब सचमुच हम लोग झारखंड को सिर्फ़ स्वस्थ और सुरक्षित नहीं बल्कि नशामुक्त झारखंड भी बना पाएंगे । साथ ही सभी के सहयोग सुरक्षित रांची ,सुरक्षित झारखंड बना सकते है।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री अजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2024 में शुरू हुआ यह अभियान लगातार तीसरे वर्ष आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल झारखंड या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक चुनौती है। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित करने, जोखिमग्रस्त बच्चों पर विशेष निगरानी रखने तथा नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से ड्रग्स कारोबार की जानकारी मिलने पर टोल-फ्री और हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करने की अपील भी की।

अपर मुख्य सचिव गृह विभाग श्रीमती वंदना दादेल ने कहा कि सभी विभागों के सहयोग से यह जागरूकता अभियान सफल रहा । सूचना जनसंपर्क विभाग की भूमिका प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण रही। जागरूकता अभियान का मकसद सभी कटिबद्ध ,मुखर, होकर खुलकर नशे के दुष्प्रभाव पर बात करें।

सरकार और प्रशासन आपके साथ खड़ी है । उन्होंने कहा कि पूरे साल यह अभियान विशेषकर युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया जाए इसे लेकर शिक्षा विभाग द्वारा कार्यकम बनाये गए हैं ।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री राहुल पुरवार ने कहा कि नशे की समस्या पर समय रहते नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में नशे से संबंधित गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।

साथ ही नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाने, नशा मुक्ति से संबंधित मॉड्यूल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने तथा विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के लिए काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करने की योजना पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री डॉ इरफान अंसारी द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा नशामुक्ति जागरूकता हेतु तैयार पुस्तिका का विमोचन किया गया साथ ही उन्होंने नशा मुक्ति अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों जिसमें सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक श्री आनंद , श्रीमती उर्वशी पांडे डीपीआरओ रांची , सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक श्री अभय कुमार ,श्रीमती अंजना भारती डीपीआरओ गिरिडीह ,

डॉ असीम कुमार डीपीआरओ पलामू , डॉ लाल मांझी एनएचएम से , उच्च शिक्षा से श्री नोइनिता , आलोक रंजन, निर्मला सिन्ह, सहायक शिक्षिका,डॉ सजल आशीष नाग , रिनपास , पर्यटन से आशीष कुमार बनर्जी,मुकेश कुमार ,स्वास्थ्य से सुशांत कुमार , सहित विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया । साथ ही झारखंड में पहली बार राज्य में फाइनेंसियल सीजर की करवाई करने पर सनोज कुमार चौधरी को सम्मानित किया गया । इसके अलावा कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों, स्वयंसेवी संस्थाओं को सम्मान प्रदान किया गया ।

गायत्री जयंती के उपलक्ष्य में नवकुंभ ने आयोजित की कविगोष्ठी
मुंबई। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान के तत्वावधान में बुधवार 24 जून 2026 को वेदमाता गायत्री जयंती के उपलक्ष्य में आनलाइन गूगल मीट के माध्यम से कविगोष्ठी का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार शिक्षाविद् अवनीश कुमार दीक्षित 'दिव्य' ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में संगीत साहित्य मंच के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत गुप्त उपस्थित थे।ज्ञान की देवी मां गायत्री की वंदना कवयित्री अन्नपूर्णा गुप्ता के मधुर छंद से हुआ।गोष्ठी का संचालन राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी विनय शर्मा दीप ने किया। उपस्थित साहित्यकारों में मुंबई से शारदा प्रसाद दुबे शरतचंद्र, ओमप्रकाश सिंह,कवयित्री शोभा स्वप्निल,प्रमोद कुमार शर्मा प्रेमी जौनपुर उत्तर प्रदेश,रमेश चंद्र नंदवंशी सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश से उपस्थित थे। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने मां गायत्री की महिमा का गुणगान काव्य के माध्यम छंद, गीत, मुक्तक, भजन, सोहर से किया।उपस्थित सभी श्रोता साहित्यकारो ने सभी की रचनाओं की सराहना किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में अवनीश कुमार दीक्षित दिव्य ने मां गायत्री के पंचमुख एवं दस हाथ की विशेषता को सविस्तार सभी के समक्ष रखा और अपने काव्य विधाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंत में आयोजक विनय शर्मा दीप ने उपस्थित सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए गायत्री मंत्र उच्चारण के साथ गोष्ठी का समापन किया।
सोनभद्र: मानसून की पहली बारिश में उफनाया नाला, मां और 8 महीने का मासूम बहा; बच्चे का शव बरामद, मां की तलाश जारी

विकास कुमार सोनभद्र अनपरा। सोनभद्र जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में उजाड़ दीं। अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास अचानक उफनाए एक बरसाती नाले ने मां और उसके आठ महीने के मासूम बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में मासूम बच्चे की मौत हो गई है, जिसका शव घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर बरामद किया गया। वहीं, लापता मां का अब तक सिर्फ कपड़ा ही मिल सका है, उसका कोई सुराग नहीं लगा है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

अचानक बढ़े जलस्तर ने दोनों को आगोश में लिया
मिली जानकारी के अनुसार, अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास रहने वाली 25 वर्षीय सविता देर शाम अपने आठ महीने के मासूम बच्चे को लेकर घर से निकली थी। थाना प्रभारी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का घर नाले के बिल्कुल करीब है और वह संभवतः शौच के लिए निकली थी। इसी दौरान अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे बरसाती नाले का जलस्तर और बहाव पल भर में बेहद तेज हो गया। नाला पार करते समय मां और बेटा पानी के इस प्रचंड वेग को संभाल नहीं पाए और तेज धारा में बह गए।

सुबह शुरू हुआ रेस्क्यू, 3 किमी दूर मिला मासूम का शव
यह घटना देर रात की होने के कारण शुरुआत में किसी को इसकी भनक नहीं लगी। सुबह होते ही जब पुलिस को मामले की जानकारी मिली, तो तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद, घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर मासूम बच्चे का शव बरामद कर लिया गया। हालांकि, काफी खोजबीन के बाद भी मां सविता का कुछ पता नहीं चल सका है, पुलिस को नाले के पास से केवल उसके कपड़े बरामद हुए हैं।

पति था घर से बाहर, परिजनों को 'चमत्कार' की उम्मीद
बताया जा रहा है कि घटना के वक्त महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। जैसे ही उसे इस अनहोनी की सूचना मिली, वह बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा। इस हादसे ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

वर्तमान में पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें नाले और उसके आसपास के संभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

मासूम की मौत से जहां पूरे गांव की आंखें नम हैं, वहीं परिजन और ग्रामीण अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि काश सविता सकुशल मिल जाए। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बारिश के मौसम में उफनते नदी-नाले और थोड़ी सी भी लापरवाही पल भर में जिंदगी को खत्म कर सकती है।
गंगा में नाला का पानी गिरने से आचमन योग नहीं ,बल्कि आपवित्र हो रहा

बच्चा स्वामी ने  गंगा की अविरलधारा को स्वच्छ रखने और आश्रम के आसपास सफाई करने की भरी हुंकार, डीएम को दिया पत्र,नाला गंगा जल को कर रहा अपवित्र

फर्रुखाबाद l शिव शक्ति अखाड़ा के महंत बच्चा स्वामी ने गुरुवार को अपने दर्जनों शिष्यों के साथ आश्रम के आसपास फैली गंदगी और गंदा नाला का पानी गंगा की अविरल धारा को गंदा ही नहीं बल्कि अपवित्र कर साधु संतों के लिए आचमन के योग्य तक नहीं रखा है इससे नाराज दर्जनों साधु संतों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर को शिकायती पत्र दिया  जिसमें कहा है कि इस नाले के साथ जो गंदगी आ रही है उससे आश्रम के आसपास गंदगी का ढेर लगा हुआ है यही नहीं साधु संत गंगा में ना तो स्नान कर पा रहे और ना आचमन कर सकते हैं। महंत बच्चा स्वामी ने कहा कि पांचाल घाट से लेकर शमशान घाट तक सड़क चौड़ीकरण किया जाना चाहिए जिससे आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सके उन्होंने कहा कि दूर-दराज से लोग यहां अंतिम संस्कार करने के लिए आते हैं और जाम में फंसने पर कई की घंटे खड़ा होना पड़ता है इसलिए सड़क का भी निर्माण किया जाना चाहिए।
आगामी सप्ताह हो सकती है तेज बरसात  आंधी और तूफान
फर्रुखाबाद । आगामी सप्ताह में वर्षा, आंधी-तूफान एवं वज्रपात की संभावना, नागरिक सतर्क रहें : जिला प्रशासन
भारत मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ द्वारा जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार जनपद फर्रुखाबाद में आगामी सात दिनों के दौरान वर्षा, गरज-चमक, तेज झोंकेदार हवाओं तथा वज्रपात की संभावना व्यक्त की गई है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करने तथा अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार 29 जून को जनपद के कहीं-कहीं क्षेत्रों में वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान मेघगर्जन एवं वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।
30 जून से 02 जुलाई तक जनपद के अनेक स्थानों पर वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस अवधि में मेघगर्जन, वज्रपात, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
03 जुलाई से 05 जुलाई के बीच भी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं-कहीं वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने तथा मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना बनी रहेगी।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा एवं नम रहेगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि गरज-चमक सुनाई देते ही सुरक्षित पक्के भवन के अंदर चले जाएं। घरों में बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें तथा बिजली के तारों एवं विद्युत कनेक्शनों से दूरी बनाए रखें। यदि किसी कारणवश खुले स्थान पर फंस जाएं तो दोनों पैर पास-पास रखते हुए सिर झुकाकर बैठें तथा जमीन से संपर्क कम से कम रखें। वाहन में यात्रा कर रहे हों तो वाहन के अंदर ही रहें और खिड़कियां बंद रखें।
प्रशासन ने यह भी सलाह दी है कि आंधी-तूफान अथवा वज्रपात के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों, टावरों अथवा अन्य ऊंची संरचनाओं के नीचे शरण न लें। खुले मैदान, खेत, छत या जलाशयों के आसपास खड़े न हों तथा धातु की वस्तुओं का प्रयोग करने से बचें। खराब मौसम के दौरान बाहर निकलकर सेल्फी अथवा वीडियो बनाने का प्रयास न करें तथा वर्षा के पानी से भरे गड्ढों एवं नालों को पार करने से बचें।
किसान भाइयों से विशेष अनुरोध किया गया है कि खेतों में कार्य करते समय मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा संभावित वर्षा और तेज हवाओं को देखते हुए फसलों, मंडियों में खुले में रखे आलू एवं अन्य कृषि उपज तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली चेतावनियों एवं परामर्शों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में संबंधित विभागों एवं स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें।
श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण, निकली भव्य कलश यात्रा
- श्रद्धालुओं के जयघोष से भक्तिमय हुआ क्षेत्र, 1 जुलाई को होगा विशाल भंडारा

मऊ। जनपद के मानिकपुर हड़हुआ स्थित श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालुओं के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रोहतम निषाद तथा महिला मुख्य अतिथि के रूप में प्रभावती देवी उपस्थित रहीं। दोनों अतिथियों ने मंदिर की प्रगति और धार्मिक आयोजनों की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया।
इस आयोजन को सफल बनाने में सुभाष निषाद, हरिनाथ निषाद, सत्यदेव निषाद, छेदी निषाद एवं अमित निषाद की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में रामसिंह निषाद, श्रीराम निषाद, लालमन निषाद, राजेंद्र निषाद, रामभुवन निषाद, बेचन निषाद, राजेश निषाद, अजय निषाद, मुखराम राजभर, लल्लन राजभर तथा छोटक निषाद सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महिला श्रद्धालुओं में प्रेमशिला देवी, रीता देवी, सुमन देवी, दुर्गावती देवी, सुपली देवी, गुड्डी देवी, पाना देवी, होशिला देवी, राधिका देवी एवं सुगवती देवी ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
आयोजकों ने बताया कि मंदिर स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 1 जुलाई को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना है। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों एवं भंडारे में सहभागिता करने की अपील की है।
अपनों की बात आखिर सबसे अंत में क्यों?
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा वरिष्ठ साहित्यकार

कुछ दिन पहले मैं अचानक अपनी एक प्रिय सखी के घर मिलने चली गई। हम दोनों परिवार वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए औपचारिकता का प्रश्न ही नहीं था।

मैंने देखा कि वह और उनके पति किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। मेरी सखी कोई बात कहती और उनके पति तुरंत उसकी बात काट देते। उसकी लगभग हर राय का विरोध हो रहा था। कुछ देर तक उसने धैर्य रखा, फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ, लेकिन भीतर से आहत होकर बोली

"आपको जो ठीक लगे, वही कर लीजिए। मेरा काम था समझाना, मैंने समझा दिया।"

उसके शब्दों में शिकायत कम और हार अधिक थी।

उस दिन घर से लौटते समय मन में एक ही प्रश्न बार-बार उठता रहा :
आख़िर ऐसा क्यों होता है कि जिन लोगों को हम सबसे अधिक अपना मानते हैं, उनकी बात ही सबसे अंत में सुनते हैं?

पति-पत्नी हों, माता-पिता हों, भाई-बहन हों या परिवार का कोई अन्य सदस्य—जब वे हमें कोई सलाह देते हैं, तो हम उसमें कमियाँ खोजने लगते हैं। लेकिन वही बात यदि कोई मित्र, पड़ोसी या बाहरी व्यक्ति कह दे, तो वह हमें बहुत समझदारी भरी लगने लगती है।

क्या इसलिए कि अपने लोग हमेशा हमारे साथ रहते हैं और हम उन्हें "टेकन फॉर ग्रांटेड" लेने लगते हैं?

सच तो यह हैं कि दुनिया में सबसे निस्वार्थ सलाह वही देता है, जिसका दिल हमारे लिए धड़कता है। बाहर वाले सलाह तो दे सकते हैं, लेकिन उसके परिणामों की जिम्मेदारी नहीं उठाते। यदि बात गलत हो जाए तो सहज कह देंगे—"हमने तो सिर्फ राय दी थी, मानना या न मानना आपका निर्णय था।"

लेकिन परिवार का सदस्य ऐसा नहीं कह सकता, क्योंकि उसका सुख-दुःख हमारे जीवन से जुड़ा होता है।

सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब हम दूसरों के सामने अपने ही जीवनसाथी की बात काट देते हैं, उसकी राय को महत्व नहीं देते या उसका मज़ाक बना देते हैं। उस समय हम यह भूल जाते हैं कि शब्दों के घाव दिखाई नहीं देते, लेकिन वे बहुत गहरे होते हैं।

बाहर बैठे लोग भले मुस्कुरा दें, लेकिन मन ही मन यही सोचते हैं—"जो एक-दूसरे का सम्मान नहीं कर सकते, वे साथ कैसे निभाएँगे?"

इसके विपरीत कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ पति-पत्नी बिना अधिक शब्दों के भी एक-दूसरे का मन समझ लेते हैं। वे जानते हैं कि हर बार मैं ही सही नहीं हो सकता। वे एक-दूसरे को अपनी बात रखने का अवसर देते हैं, एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं। यही परिपक्वता रिश्तों को मजबूत बनाती है।

हर इंसान चाहता हैं कि उसकी बात सुनी जाए, उसकी राय का सम्मान हो, उसके योगदान की कद्र हो। विशेषकर उस घर में, जिसके लिए उसने अपना समय, श्रम, प्रेम और पूरा जीवन समर्पित कर दिया हो।

जब किसी को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि उसकी बात का कोई मूल्य नहीं है, उसकी राय का कोई महत्व नहीं है, तब वह धीरे-धीरे भीतर से टूटने लगता है। उपेक्षा का दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन यह इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। कई बार यही उपेक्षा उसे अवसाद और निराशा की ओर भी धकेल देती है।

आज एक और समस्या तेजी से बढ़ रही है—"टेकन फॉर ग्रांटेड"।

घर का जो सदस्य सबसे अधिक करता है, उसी से सबसे अधिक अपेक्षाएँ रखी जाती हैं। चाहे माता-पिता हों, बड़े भाई-भाभी हों, जेठ-जेठानी हों या पति-पत्नी—जो जिम्मेदार होता है, उससे सबको उम्मीद रहती हैं कि वह करता ही रहेगा। लेकिन उसके लिए हम क्या कर सकते हैं, यह सोचने का समय बहुत कम लोग निकालते हैं।

रिश्ते केवल लेने से नहीं चलते, देने से भी चलते हैं। सम्मान केवल पाने की चीज़ नहीं, देने की आदत भी है।

आजकल कुछ लोग बाहर की दुनिया में आदर्श पति-पत्नी होने का ऐसा प्रदर्शन करते हैं कि लगता है उनसे अधिक प्रेम करने वाला कोई नहीं। लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर वही रिश्ता तानों, कटु शब्दों और अपमान से भर जाता है। सुबह की चाय के साथ कभी पत्नी की आँखों से आँसू बहते हैं, तो कभी पति चुपचाप अपनी पीड़ा भीतर ही दबा लेता है।

यदि सचमुच एक सुखी परिवार बनाना है, तो सबसे पहले बाहर वालों से अधिक अपने जीवनसाथी को महत्व देना होगा। क्योंकि अंत में जीवन की हर कठिन राह पर साथ मित्र नहीं, समाज नहीं, बल्कि पति-पत्नी ही निभाते हैं। बच्चे भी एक दिन अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन जीवनसाथी का साथ जीवन के अंतिम पड़ाव तक बना रहता है।

मुझे अपना बचपन याद आता है।

मैंने अपने माता-पिता को कभी हमारे सामने एक-दूसरे का अपमान करते नहीं देखा। मतभेद अवश्य होते होंगे, लेकिन मनभेद कभी नहीं देखा , उन्होंने अपने मतभेद को कभी बच्चों के सामने तमाशा नहीं बनने दिया। यदि किसी से भूल हो जाती, तो "सॉरी" कहने में किसी का अहंकार आड़े नहीं आता था।

शायद यही कारण था कि हमारा बचपन इतना तनावमुक्त और सुखद था। संयुक्त परिवार में रहते हुए हमें हर ओर अपनापन, सुरक्षा और स्नेह का अनुभव होता था। ऐसा लगता था कि पूरा परिवार हमारी ताकत है, हमारी ढाल है।

आज भी मन कहता है—काश! हर घर में फिर वही अपनापन लौट आए। चाहे संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, यदि संवाद रहेगा, सम्मान रहेगा, संवेदनशीलता रहेगी, तो हर घर फिर से मुस्कुराने लगेगा।

याद रखिए :
रिश्तों को सबसे अधिक प्रेम नहीं, सम्मान जीवित रखता है।
जिस दिन हम बाहर वालों से पहले अपनों की बात सुनना सीख जाएँगे, उसी दिन हमारे घरों की आधी समस्याएँ अपने आप समाप्त हो जाएँगी।

क्योंकि जो व्यक्ति आपके सुख-दुःख में आपके साथ खड़ा रहता है, उसकी सलाह केवल शब्द नहीं होती, उसमें उसका प्रेम, अनुभव और आपका भविष्य छिपा होता है। इसलिए अपनों की बात को सबसे अंत में नहीं, सबसे पहले सुनिए। वहीं से रिश्तों की मिठास और जीवन की सच्ची खुशियाँ शुरू होती हैं।

अपनों की बातों में अनुभव का सार होता है,
हर शब्द में छिपा सच्चा प्यार होता है।
जो बाहर वालों की आवाज़ में अपने खो देते हैं,
अक्सर वे रिश्तों का सबसे अनमोल उपहार खो देते हैं।

रिश्ते तब नहीं टूटते जब मतभेद होते हैं,
रिश्ते तब टूटते हैं जब सम्मान समाप्त हो जाता है।
इसलिए अपनों की बात सुनिए, समझिए और उन्हें महसूस कराइए—
कि वे केवल आपके परिवार का हिस्सा नहीं,
आपके जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं।
पद्मश्री उदित नारायण और पलक मुच्छल की आवाज़ में सजा रोमांटिक गीत "मेरे मन को" हुआ रिलीज़

मुंबई। भारतीय संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके उभरते हुए कलाकार एवं रॉक-स्टार संगीत मासूम एक बार फिर अपने नए रोमांटिक गीत "मेरे मन को" के साथ श्रोताओं के दिलों को छूने के लिए तैयार हैं। मासूम फ़िल्म कंपनी एवं द ग्रेट बॉलीवुड के बैनर तले प्रस्तुत यह गीत रिलीज़ होते ही संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। गीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से सजाया है पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण तथा लोकप्रिय गायिका पलक मुच्छल ने। गीत का संगीत अमन श्लोक ने तैयार किया है, जबकि इसके भावपूर्ण बोल सुप्रसिद्ध गीतकार एवं लेखक मुकेश कुमार मासूम ने लिखे हैं। वीडियो का निर्देशन अनिल एस. मेहता ने किया है, कोरियोग्राफी संजय चौधरी ने की है तथा इसकी निर्माता सीमा हैं। म्यूज़िक वीडियो में संगीत मासूम और गंगा अधिकारी की जोड़ी ने अपने सशक्त अभिनय से प्रेम और भावनाओं को जीवंत कर दिया है। संगीत मासूम आज हिंदी संगीत जगत के उन युवा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक सरोज खान से नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा रोशन तनेजा अभिनय अकादमी से अभिनय का चार माह का डिप्लोमा किया है। हाल ही में हिंदी फ़िल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय के हाथों उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मानित भी किया गया, जो उनके निरंतर बढ़ते कलात्मक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले संगीत मासूम "दिल का ख़ुदा", "ब्रेकअप पार्टी", "साजन के शहर" और "बेदर्दी" जैसे चर्चित एवं लोकप्रिय गीतों के माध्यम से संगीत प्रेमियों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। अब "मेरे मन को" से भी उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। गीत के बोल मुकेश कुमार मासूम द्वारा रचे गए हैं, जो शब्दों के माध्यम से प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन के एक संवेदनशील, प्रखर एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। उनकी लेखनी की पहचान सरल भाषा में गहन भाव, तथ्यात्मक स्पष्टता और साहित्यिक प्रवाह के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार हैं। मुकेश कुमार मासूम स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन तथा इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, जो उनके साहित्य और फ़िल्म उद्योग से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। वे बॉलीवुड के स्थापित गीतकारों में गिने जाते हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में "दिल तोड़ने वाला, दिल का ख़ुदा निकला" (उदित नारायण), "दारू सिगरेट छोड़ दे" (ममता शर्मा), "जीवन एक अमृत है" (उदित नारायण), "मेरे मन को" (उदित नारायण एवं पलक मुच्छल), "भगवान ज़रूरी है" (अल्तमश फ़रीदी), "खाटू श्याम जाना है" (अनूप जलोटा), "जय भीम बोलो रे" (स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़), "ब्रेकअप पार्टी" (हरमन नाज़िम), "मेनू हँसके विदा कर दे" (शबाब साबरी), "बौद्ध धर्म के अनुयायी" (अनूप जलोटा) तथा "उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा" (अगम कुमार निगम) जैसे अनेक लोकप्रिय गीत शामिल हैं। उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई, लोकसंवेदना और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

वर्तमान में मुकेश कुमार मासूम सिनेविस्टा लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित फ़िल्म एवं धारावाहिक निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की अनेक प्रमुख हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक "योगी आदित्यनाथ : अध्यात्म और राजनीति के आकाश पर चमकता सितारा" लिखी है। हाल ही में इस पुस्तक के संबंध में उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट भी की।उच्च गुणवत्ता वाले संगीत, उत्कृष्ट गायन, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण शब्दों से सजा "मेरे मन को" अब विभिन्न डिजिटल संगीत मंचों पर उपलब्ध है। संगीत प्रेमियों और समीक्षकों का मानना है कि यह गीत वर्ष के चर्चित रोमांटिक गीतों में अपनी विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

पचमढ़ी में ज्योति सिंह ने रचा इतिहास,बनीं सुलतानपुर की पहली लीडर ट्रेनर गाइड
*ज्योति सिंह ने राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी से प्रशिक्षण प्राप्त कर रचा इतिहास*

*राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी से पहली लीडर ट्रेनर गाइड  बनीं ज्योति सिंह,सुलतानपुर गौरवान्वित*

सुलतानपुर।जनपद सुलतानपुर के लिए गौरव का क्षण तब आया जब भारत स्काउट एवं गाइड उत्तर प्रदेश की जिला ट्रेनिंग कमिश्नर (गाइड) ज्योति सिंह ने मध्य प्रदेश स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी में आयोजित उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लीडर ट्रेनर गाइड की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त की। इस उपलब्धि के साथ ही ज्योति सिंह सुलतानपुर की पहली लीडर ट्रेनर गाइड बन गई हैं,जिससे जिले के स्काउट- गाइड आंदोलन को नई पहचान मिली है।

ज्योति सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता पर जिला मुख्य आयुक्त एवं जिला विद्यालय निरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह,सह जिला विद्यालय निरीक्षक जटाशंकर यादव ,जिला कमिश्नर स्काउट डॉ. दिनेश प्रताप सिंह एवं सचिव डॉ गुलाब सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्काउट-गाइड गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।

जिला ट्रेनिंग कमिश्नर स्काउट धर्मेंद्र प्रताप सिंह,जिला संगठन कमिश्नर गौरव सिंह एवं जिला संगठन आयुक्त (गाइड) कांती सिंह ने भी ज्योति सिंह को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

जिला प्रशिक्षण टीम एवं स्काउट-गाइड परिवार के सदस्यों ने कहा कि उनकी सफलता युवाओं और गाइड्स के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी तथा प्रशिक्षण गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगी।आपको बता दें उत्तर प्रदेश से ज्योति सिंह समेत चार महिलाओं ने लीडर ट्रेनर गाइड का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं।

ज्योति सिंह की इस उपलब्धि से जनपद के स्काउट-गाइड कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और इसे जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
या हुसैन सदाओं के बीच दफनाए गए सभी ताजिये
रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। शहीदाने कर्बला की याद में मनाया जाने वाला चेहल्लुम का जुलूस , चांद की दसवीं तारीख यानी शुक्रवार को अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। नगर के बालीपुर से निकले ताजिया जूलुस में शामिल लोग या हुसैन व नारा ए तकबीर की सदा बुलंद करते हुए पाल तिराहे होते हुए मुखर्जी पार्क के पास स्थित इमाम चौक पर ताजिये को लेकर कोतवाली, पुरानी बाजार लालानर मोड़ से फकिरान बस्ती और भुड़की के ताजियों को शामिल कर वापस प्रोफेसर कालोनी,कारागार, दुर्गागंज मार्ग होते हुए लाठी डंडों, तलवार,भाला आदि के विभिन्न करतबों को दिखाते हुए कर्बला तक पहुंचे।जहां ताजियों को ठंडा किया गया। भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
नगर के विभिन्न मोहल्ले के ताजिये दोपहर दो बजे तक मेन रोड पर आ गए थे। लगभग ढाई बजे ताजिया जुलूस परंपरागत रास्तों से या हुसैन की सदायें बुलंद करते हुए, पुरानी तहसील प्रोफेसर कालोनी मार्ग होते हुए मुख्य मार्ग से नथईपुर तिराहे से कर्बला की ओर रवाना हुआ। जुलूस में छोटे-बड़े लगभग तीन दर्जन से अधिक ताजिये शामिल थे। अधिकांश तो छोटे छोटे ताजिया थे जो बच्चों ने पूरे उत्साह व अकीदत से तैयार किया था। जहां देवगजितपुर और पसड़ियापुर के ताजिये शाम लगभग साढ़े छह बजे तक  कर्बला पहुंच गए थे। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में पूलिस अधीक्षक अभिनव के नेतृत्व में अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल सीओ चमन सिंह चावड़ा उपस्थित रहे।
नशामुक्त झारखंड की ओर एक और कदम: 15 दिवसीय राज्यव्यापी जागरूकता अभियान संपन्न

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी बर्बाद कर देता है। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड को नशामुक्त करने का प्रण लिया है । और जो निर्णय लिया है उसे पूरे करने में सभी विभाग आपसी समन्वय बना झारखंड को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने का काम हमलोग करेंगे । इसी उद्देश्य से पिछले 15 दिनों से नशामुक्ति हेतु जागरूकता अभियान पूरे राज्यभर में सरकार द्वारा चलाया जा रहा था जिसका आज समापन हो गया ।

उन्होंने कहा कि यह अभियान पिछले तीन वर्षों से चलाया जा रहा है । आने वाले समय में प्रयास रहेगा कि पूरे साल यह अभियान चलाया जाए। डॉ इरफ़ान अंसारी गुरूवार को शौर्य सभागार में गृह,कारा एवं आपदा प्रबंधन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित निषिध मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जागरूकता अभियान के समापन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे । इस अवसर पर मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने युवाओं और उपस्थित लोगों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से बचने और नशा से दूर रहने की शपथ दिलायी ।

अभियान की अच्छी शुरुआत हुई , मजबूती के साथ चलाया गया अभियान

डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार का मक़सद नशामुक्त झारखंड, युवा झारखंड बनाने का है और इस दिशा में पिछले तीन साल से लगातार यह अभियान चलाया जा रहा है ।युवा हमारे राज्य हमारे देश का भविष्य हैं और नशे में अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं । नशे से सिर्फ़ वे अपना जीवन बर्बाद नहीं करते हैं बल्कि परिवार ,पूरे समाज देश राज्य को प्रभावित करते हैं। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के निदेश पर ही झारखंड के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए यह अभियान चलाया जा रह है । उन्होंने कहा कि नशा केवल झारखंड या भारत की समस्या नहीं बल्कि यह पूरे विश्व की समस्या है । युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए नए-नए इनिशिएटिव लेना होगा । उन्हें कई प्रकार के एक्टिविटीज में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना होगा । साथ ही सभी प्रकार के संसाधनों का उपयोग करके युवाओं में नशे की लत की समस्या को दूर करने का प्रयास करना होगा ।

जागरूकता अभियान में जन भागीदारी और सहयोग जरूरी

डॉ. अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में नशामुक्त एवं स्वस्थ झारखंड के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अभियान तभी सफल होगा जब आम जनता भी सरकार का सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा नशे की लत के कारण रिनपास और सीआईपी जैसे संस्थानों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा देर रात रास्ते पर , फ्लाईओवर के नीचे विशेष रूप से सिरप और सॉल्यूशन का नशा करते युवा दिखाई देते है इसके प्रति पुलिस-प्रशासन को ध्यान रखने की जरूरत है ।

मेयर रांची श्रीमती रोशनी खलखो ने कहा कि नशामुक्ति अभियान में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत और जब हर एक व्यक्ति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तब सचमुच हम लोग झारखंड को सिर्फ़ स्वस्थ और सुरक्षित नहीं बल्कि नशामुक्त झारखंड भी बना पाएंगे । साथ ही सभी के सहयोग सुरक्षित रांची ,सुरक्षित झारखंड बना सकते है।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री अजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2024 में शुरू हुआ यह अभियान लगातार तीसरे वर्ष आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल झारखंड या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक चुनौती है। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित करने, जोखिमग्रस्त बच्चों पर विशेष निगरानी रखने तथा नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से ड्रग्स कारोबार की जानकारी मिलने पर टोल-फ्री और हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करने की अपील भी की।

अपर मुख्य सचिव गृह विभाग श्रीमती वंदना दादेल ने कहा कि सभी विभागों के सहयोग से यह जागरूकता अभियान सफल रहा । सूचना जनसंपर्क विभाग की भूमिका प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण रही। जागरूकता अभियान का मकसद सभी कटिबद्ध ,मुखर, होकर खुलकर नशे के दुष्प्रभाव पर बात करें।

सरकार और प्रशासन आपके साथ खड़ी है । उन्होंने कहा कि पूरे साल यह अभियान विशेषकर युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया जाए इसे लेकर शिक्षा विभाग द्वारा कार्यकम बनाये गए हैं ।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री राहुल पुरवार ने कहा कि नशे की समस्या पर समय रहते नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में नशे से संबंधित गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।

साथ ही नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाने, नशा मुक्ति से संबंधित मॉड्यूल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने तथा विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के लिए काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करने की योजना पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री डॉ इरफान अंसारी द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा नशामुक्ति जागरूकता हेतु तैयार पुस्तिका का विमोचन किया गया साथ ही उन्होंने नशा मुक्ति अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों जिसमें सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक श्री आनंद , श्रीमती उर्वशी पांडे डीपीआरओ रांची , सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक श्री अभय कुमार ,श्रीमती अंजना भारती डीपीआरओ गिरिडीह ,

डॉ असीम कुमार डीपीआरओ पलामू , डॉ लाल मांझी एनएचएम से , उच्च शिक्षा से श्री नोइनिता , आलोक रंजन, निर्मला सिन्ह, सहायक शिक्षिका,डॉ सजल आशीष नाग , रिनपास , पर्यटन से आशीष कुमार बनर्जी,मुकेश कुमार ,स्वास्थ्य से सुशांत कुमार , सहित विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया । साथ ही झारखंड में पहली बार राज्य में फाइनेंसियल सीजर की करवाई करने पर सनोज कुमार चौधरी को सम्मानित किया गया । इसके अलावा कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों, स्वयंसेवी संस्थाओं को सम्मान प्रदान किया गया ।

गायत्री जयंती के उपलक्ष्य में नवकुंभ ने आयोजित की कविगोष्ठी
मुंबई। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान के तत्वावधान में बुधवार 24 जून 2026 को वेदमाता गायत्री जयंती के उपलक्ष्य में आनलाइन गूगल मीट के माध्यम से कविगोष्ठी का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार शिक्षाविद् अवनीश कुमार दीक्षित 'दिव्य' ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में संगीत साहित्य मंच के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत गुप्त उपस्थित थे।ज्ञान की देवी मां गायत्री की वंदना कवयित्री अन्नपूर्णा गुप्ता के मधुर छंद से हुआ।गोष्ठी का संचालन राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी विनय शर्मा दीप ने किया। उपस्थित साहित्यकारों में मुंबई से शारदा प्रसाद दुबे शरतचंद्र, ओमप्रकाश सिंह,कवयित्री शोभा स्वप्निल,प्रमोद कुमार शर्मा प्रेमी जौनपुर उत्तर प्रदेश,रमेश चंद्र नंदवंशी सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश से उपस्थित थे। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने मां गायत्री की महिमा का गुणगान काव्य के माध्यम छंद, गीत, मुक्तक, भजन, सोहर से किया।उपस्थित सभी श्रोता साहित्यकारो ने सभी की रचनाओं की सराहना किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में अवनीश कुमार दीक्षित दिव्य ने मां गायत्री के पंचमुख एवं दस हाथ की विशेषता को सविस्तार सभी के समक्ष रखा और अपने काव्य विधाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंत में आयोजक विनय शर्मा दीप ने उपस्थित सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए गायत्री मंत्र उच्चारण के साथ गोष्ठी का समापन किया।