चम्पत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कार्यकारी महासचिव बने कृष्ण मोहन त्रिपाठी
— ट्रस्ट ने सार्वजनिक की भेंट, दान और चढ़ावा की राशि, श्रद्धालु अयोध्या आकर कर सकते हैं सत्यापन

— गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटाया गया

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की राम जन्मभूमि परिसर में सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। साथ ही ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया। श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए ट्रस्ट ने अब तक की भेंट, दान और चढ़ाव की धनराशि को सार्वजनिक करते हुए कहा कि कोई भी दानकर्ता यहां आकर अपनी भेंट या दान का सत्यापन कर सकता है।

ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों का कोरम पूरा हुआ

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि महाराज ने बैठक में लिये गए फैसलों की मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों का कोरम पूरा हुआ और इस बैठक में ट्रस्ट के सदस्य के. पारासरन आभासी रूप से जुड़े। बैठक में मंदिर के दान में चोरी की घटना को अत्यंत दुर्भाग्य और आहत करने वाली बताया गया। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र द्वारा नैतिक रूप से अपने अपने पदों से दिए गए त्यागपत्र पर ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप चर्चा की गयी।

कोई सदस्य त्यागपत्र देता है तो त्यागपत्र स्वीकार हो जाएगा

बैठक के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ट्रस्टी के. पारासरन ने सदस्यों को बताया कि ट्रस्ट का नियम है कि अगर कोई सदस्य त्यागपत्र देता है तो त्यागपत्र स्वीकार हो जाएगा। ऐसे में नैतिक आधार पर महामंत्री चम्पत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया है। इनकी मदद के लिए एक समिति भी गठित की गयी। इसके अलावा गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटा दिया गया है।

22 जुलाई को होगी ट्रस्ट की पुन: बैठक

गोविंद देव गिरि ने बताया कि 22 जुलाई को ट्रस्ट की पुन: बैठक होगी। बैठक में ट्रस्ट के नए सदस्यों की नियुक्ति पर विचार किया जाएगा। तब तक एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। दान चोरी करने वाले अन्य अपराधियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए दान की गयी 2800 वस्तुतों की सूची बनी है और अगर किसी भी दानदाता के मन में संशय है तो वे ट्रस्ट के अयोध्या कार्यालय आकर देख सकते हैं। सभी वस्तुओं को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है।

श्रद्धालुओं का विश्वास पुन: स्थापित करेगा ट्रस्ट

बड़े ही भावुक हाेते हुए गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि मंदिर चोरी के प्रकरण को लेकर अनर्गल बातें मीडिया में आने और कुछ राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर जो चिंता दिखायी जा रही है वे राष्ट्र के लिए घातक हैं, क्योंकि यही वे राजनीतिक दल और नेता हैं जो भगवान राम को काल्पनिक बता कर न्यायालय तक गए। मंदिर आंदोलन के समय कारसेवकों पर गोलियां तक चलवाईं। ऐसे नेताओं एवं संगठनों का मकसद राजनीतिक रोटियां सेंकना और हिंदू एकता, रामभक्तों और सनातन पर चोट करना है, लेकिन ट्रस्ट आह्र्वान करता है कि सभी हिंदू समाज की अपेक्षा के अनुरूप काम करेगा और उनका विश्वास पुन:स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि राम भक्त धैर्य रखें और किसी प्रकार के अनर्गल समाचारों पर ध्यान न दें।

चोरी करने वालों को दंड दिलाना प्राथमिकता

बैठक में कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि पहला काम चढ़ावा चोरी करने वाले अपराधियों को दंड दिलाना और मंदिर प्रबंधन में अब तक रहीं कमियां दूर करना है। ट्रस्ट के सदस्य समाज में राम मंदिर की पुन: प्रतिष्ठा और विश्वास बनाएंगे।

सार्वजनिक की गई धनराशि

ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि आज की बैठक में प्रमुख रूप से दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना की प्रक्रिया में अनियमितता, उसकी जांच और कार्यवाही, महामंत्री और एक न्यासी के न्यासी पद से त्यागपत्रों, मीडिया में चल रही चर्चाओं, भावी अन्तरिम व्यवस्थाओं आदि विषयों पर विचार हुआ। अब तक निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि 3,264 करोड़ रुपये में से 2,370 करोड़ रुपये निर्माण एवं पूंजीगत व्यय में उपयोग की गई है।

2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ

प्रारम्भ से लेकर 31 मार्च 2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ, जिसमें से 391 करोड़ रुपये की राशि संचालन व्यय में उपयोग ली गई। शेष राशियां बैंक खातों में उपलब्ध है। ये समस्त वितीय सूचनाएं समय—समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं। नकद राशि के अतिरिक्त अनेक श्रद्धालुओं ने वस्तु के रूप में प्रभु श्री रामलला को भेंट अर्पित की हैं। ऐसी कुल 2,926 भेंट प्राप्त हुई हैं जो समस्त, तिथि अनुसार, सम्पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर में दर्ज हैं और उनका भौतिक सत्यापन एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्म द्वारा आंतरिक अंकेक्षक के नाते प्रति वर्ष किया जाता है। काउंटर पर ऐसी भेंट देने वाले समस्त श्रद्धालुओं को रशीद दी गई हैं और काउंटर के अतिरिक्त दी गई भेंट हेतु भी उन समस्त श्रद्धालुओं को रशीद दी गई है जिन्होने दानदाता का विवरण दिया।

कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध

समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन है कि जो भी अपनी दी हुई भेंट का उपयोग जानना अथवा सत्यापन करना चाहें, वे कभी भी ट्रस्ट के अधिकारी से तिथि व समय निश्चित कर अयोध्या पधारें और प्रभु श्री रामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन कर सकते हैं। चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल (मिंट) में गला कर छड़ें बनाई गई हैं जिनके मूल स्वरूप का विवरण फोटो व वजन सहित उपलब्ध है। गलाने के पश्चात चाँदी की शुद्धता और कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध हैं।

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) से सेवानिवृत्त हैं कृष्ण मोहन

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को श्री राम जन्मभूमि परिसर में हुई बैठक में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। अब वे ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का दायित्व संभालेंगे। उन्हें ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। अब वे ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का दायित्व संभालेंगे। कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक के दायित्व पर अपनी सेवा दे रहे हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं

कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में हुआ और उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक और जनसेवा के कार्यों से जुड़े रहे।

कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ

कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ। उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे। मूल रूप से हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर बाजार निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद करीब पांच वर्ष तक एटॉमिक एनर्जी विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ और महाराष्ट्र कैडर मिला। वर्ष 2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
यूपी में उच्च शिक्षा का विस्तार: कैबिनेट ने तीन नए निजी विश्वविद्यालयों को दी मंजूरी
-  कानपुर, गाजियाबाद और फतेहपुर में खुलेंगे नए विश्वविद्यालय; उच्च शिक्षा मंत्री बोले— अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार का लक्ष्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को 5, कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने प्रदेश में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की, जिससे उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता को भी नई मजबूती मिलेगी।
लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 के तहत मूल्यांकन के बाद तीन संस्थाओं को आशय पत्र (एलओपी) जारी करने तथा संचालन प्राधिकार-पत्र देने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुंचाना है और सरकार उसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा कानपुर नगर की बिल्हौर तहसील के ग्राम गदनपुर आहार में 51.739 एकड़ भूमि पर कृषि आधारित निजी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) अध्यादेश-2026 लागू किया जाएगा।
इसी प्रकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी, गाजियाबाद को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण क्षेत्र के ग्राम डासना में 26.2656 एकड़ भूमि पर निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। संस्था पहले से मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित कर रही है। नए विश्वविद्यालय से क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) अध्यादेश-2026 प्रख्यापित किया जाएगा।
वहीं एंग्लो संस्कृत कॉलेज, फतेहपुर को फतेहपुर तहसील के कस्बा फतेहपुर दक्षिणी में 20.45 एकड़ भूमि पर निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति मिली है। इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (पंचम संशोधन) अध्यादेश-2026 लागू किया जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश में 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे, जबकि पिछले नौ वर्षों में 8 नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। इसी तरह 2017 तक प्रदेश में 27 निजी विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 56 हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि तीनों प्रस्तावित विश्वविद्यालय निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इनके शुरू होने से प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों की बेहतर सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध होंगी।
उत्तराखंड की सूखती 13 नदियों को मिलेगा नया जीवन, बड़े संस्थान करेंगे अध्ययन
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार घटते जल प्रवाह और सूखते जल स्रोतों को देखते हुए राज्य सरकार ने नदियों के पुनर्जीवन के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी ने राज्य की 13 प्रमुख नदियों के वैज्ञानिक अध्ययन की योजना तैयार की है, जिसमें देश के प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के संस्थान शामिल होंगे।
स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी (सारा) की इस पहल के तहत ‘एक जिला-एक नदी’ मॉडल पर हर जिले से एक नदी का चयन किया गया है। इन नदियों के साथ-साथ उनके जलग्रहण क्षेत्र, भूजल पुनर्भरण, झीलों और तालाबों की स्थिति का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
इस परियोजना में आईआईटी रुड़की, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान और भारतीय वन्यजीव संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों को जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञ वैज्ञानिक आधार पर यह आकलन करेंगे कि नदियों का जल प्रवाह क्यों कम हुआ और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए कौन से कदम जरूरी हैं।
अल्मोड़ा की जटा गंगा, बागेश्वर की गरुड़ गंगा, पिथौरागढ़ की पूर्वी रामगंगा, नैनीताल की शिप्रा, चंपावत की गौड़ी, पौड़ी की नयार पूर्वी और नयार पश्चिमी, देहरादून और टिहरी की सोंग, चमोली की चंद्रभागा, रुद्रप्रयाग की पुनार, उत्तरकाशी की कमल गंगा, हरिद्वार की पथरी और उधम सिंह नगर की फीका नदी का अध्ययन किया जाएगा।
अध्ययन के बाद संबंधित संस्थान विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें नदियों के पुनर्जीवन के उपाय, जल संरक्षण के तरीके और आवश्यक सुधार शामिल होंगे। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे की योजनाओं को मंजूरी दी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार इस योजना की निगरानी अगले 10 वर्ष तक की जाएगी और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जल संरक्षण के प्रयास जमीनी स्तर पर सफल हो सकें।
शादी में आए रिश्तेदार की बाइक चोरी, खेत में क्षतिग्रस्त हालत में मिली,थाना पुलिस जांच में जुटी
अमृतपुर, फर्रुखाबाद। थाना अमृतपुर क्षेत्र के ग्राम करपुरदस्त में शादी समारोह में आए एक रिश्तेदार की बाइक चोरी होने का मामला सामने आया है। पीड़ित संजेश कुमार के अनुसार, 1 जुलाई की रात उनकी UP-30 BV 2763 नंबर की मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। तलाश के दौरान गांव मोकुलपुर निवासी एक युवक पर शक होने पर डायल 112 को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले गई। अगले दिन गांव के चमन मोहम्मद के खेत में चोरी गई बाइक क्षतिग्रस्त अवस्था में बरामद हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाइक कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
सोनभद्र: मानसून की पहली बारिश में उफनाया नाला, मां और 8 महीने का मासूम बहा; बच्चे का शव बरामद, मां की तलाश जारी

विकास कुमार सोनभद्र अनपरा। सोनभद्र जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में उजाड़ दीं। अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास अचानक उफनाए एक बरसाती नाले ने मां और उसके आठ महीने के मासूम बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में मासूम बच्चे की मौत हो गई है, जिसका शव घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर बरामद किया गया। वहीं, लापता मां का अब तक सिर्फ कपड़ा ही मिल सका है, उसका कोई सुराग नहीं लगा है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

अचानक बढ़े जलस्तर ने दोनों को आगोश में लिया
मिली जानकारी के अनुसार, अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास रहने वाली 25 वर्षीय सविता देर शाम अपने आठ महीने के मासूम बच्चे को लेकर घर से निकली थी। थाना प्रभारी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का घर नाले के बिल्कुल करीब है और वह संभवतः शौच के लिए निकली थी। इसी दौरान अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे बरसाती नाले का जलस्तर और बहाव पल भर में बेहद तेज हो गया। नाला पार करते समय मां और बेटा पानी के इस प्रचंड वेग को संभाल नहीं पाए और तेज धारा में बह गए।

सुबह शुरू हुआ रेस्क्यू, 3 किमी दूर मिला मासूम का शव
यह घटना देर रात की होने के कारण शुरुआत में किसी को इसकी भनक नहीं लगी। सुबह होते ही जब पुलिस को मामले की जानकारी मिली, तो तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद, घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर मासूम बच्चे का शव बरामद कर लिया गया। हालांकि, काफी खोजबीन के बाद भी मां सविता का कुछ पता नहीं चल सका है, पुलिस को नाले के पास से केवल उसके कपड़े बरामद हुए हैं।

पति था घर से बाहर, परिजनों को 'चमत्कार' की उम्मीद
बताया जा रहा है कि घटना के वक्त महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। जैसे ही उसे इस अनहोनी की सूचना मिली, वह बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा। इस हादसे ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

वर्तमान में पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें नाले और उसके आसपास के संभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

मासूम की मौत से जहां पूरे गांव की आंखें नम हैं, वहीं परिजन और ग्रामीण अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि काश सविता सकुशल मिल जाए। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बारिश के मौसम में उफनते नदी-नाले और थोड़ी सी भी लापरवाही पल भर में जिंदगी को खत्म कर सकती है।
गंगा में नाला का पानी गिरने से आचमन योग नहीं ,बल्कि आपवित्र हो रहा

बच्चा स्वामी ने  गंगा की अविरलधारा को स्वच्छ रखने और आश्रम के आसपास सफाई करने की भरी हुंकार, डीएम को दिया पत्र,नाला गंगा जल को कर रहा अपवित्र

फर्रुखाबाद l शिव शक्ति अखाड़ा के महंत बच्चा स्वामी ने गुरुवार को अपने दर्जनों शिष्यों के साथ आश्रम के आसपास फैली गंदगी और गंदा नाला का पानी गंगा की अविरल धारा को गंदा ही नहीं बल्कि अपवित्र कर साधु संतों के लिए आचमन के योग्य तक नहीं रखा है इससे नाराज दर्जनों साधु संतों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर को शिकायती पत्र दिया  जिसमें कहा है कि इस नाले के साथ जो गंदगी आ रही है उससे आश्रम के आसपास गंदगी का ढेर लगा हुआ है यही नहीं साधु संत गंगा में ना तो स्नान कर पा रहे और ना आचमन कर सकते हैं। महंत बच्चा स्वामी ने कहा कि पांचाल घाट से लेकर शमशान घाट तक सड़क चौड़ीकरण किया जाना चाहिए जिससे आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सके उन्होंने कहा कि दूर-दराज से लोग यहां अंतिम संस्कार करने के लिए आते हैं और जाम में फंसने पर कई की घंटे खड़ा होना पड़ता है इसलिए सड़क का भी निर्माण किया जाना चाहिए।
आगामी सप्ताह हो सकती है तेज बरसात  आंधी और तूफान
फर्रुखाबाद । आगामी सप्ताह में वर्षा, आंधी-तूफान एवं वज्रपात की संभावना, नागरिक सतर्क रहें : जिला प्रशासन
भारत मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ द्वारा जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार जनपद फर्रुखाबाद में आगामी सात दिनों के दौरान वर्षा, गरज-चमक, तेज झोंकेदार हवाओं तथा वज्रपात की संभावना व्यक्त की गई है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करने तथा अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार 29 जून को जनपद के कहीं-कहीं क्षेत्रों में वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान मेघगर्जन एवं वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।
30 जून से 02 जुलाई तक जनपद के अनेक स्थानों पर वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस अवधि में मेघगर्जन, वज्रपात, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
03 जुलाई से 05 जुलाई के बीच भी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं-कहीं वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने तथा मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना बनी रहेगी।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा एवं नम रहेगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि गरज-चमक सुनाई देते ही सुरक्षित पक्के भवन के अंदर चले जाएं। घरों में बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें तथा बिजली के तारों एवं विद्युत कनेक्शनों से दूरी बनाए रखें। यदि किसी कारणवश खुले स्थान पर फंस जाएं तो दोनों पैर पास-पास रखते हुए सिर झुकाकर बैठें तथा जमीन से संपर्क कम से कम रखें। वाहन में यात्रा कर रहे हों तो वाहन के अंदर ही रहें और खिड़कियां बंद रखें।
प्रशासन ने यह भी सलाह दी है कि आंधी-तूफान अथवा वज्रपात के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों, टावरों अथवा अन्य ऊंची संरचनाओं के नीचे शरण न लें। खुले मैदान, खेत, छत या जलाशयों के आसपास खड़े न हों तथा धातु की वस्तुओं का प्रयोग करने से बचें। खराब मौसम के दौरान बाहर निकलकर सेल्फी अथवा वीडियो बनाने का प्रयास न करें तथा वर्षा के पानी से भरे गड्ढों एवं नालों को पार करने से बचें।
किसान भाइयों से विशेष अनुरोध किया गया है कि खेतों में कार्य करते समय मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा संभावित वर्षा और तेज हवाओं को देखते हुए फसलों, मंडियों में खुले में रखे आलू एवं अन्य कृषि उपज तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली चेतावनियों एवं परामर्शों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में संबंधित विभागों एवं स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें।
श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण, निकली भव्य कलश यात्रा
- श्रद्धालुओं के जयघोष से भक्तिमय हुआ क्षेत्र, 1 जुलाई को होगा विशाल भंडारा

मऊ। जनपद के मानिकपुर हड़हुआ स्थित श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालुओं के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रोहतम निषाद तथा महिला मुख्य अतिथि के रूप में प्रभावती देवी उपस्थित रहीं। दोनों अतिथियों ने मंदिर की प्रगति और धार्मिक आयोजनों की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया।
इस आयोजन को सफल बनाने में सुभाष निषाद, हरिनाथ निषाद, सत्यदेव निषाद, छेदी निषाद एवं अमित निषाद की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में रामसिंह निषाद, श्रीराम निषाद, लालमन निषाद, राजेंद्र निषाद, रामभुवन निषाद, बेचन निषाद, राजेश निषाद, अजय निषाद, मुखराम राजभर, लल्लन राजभर तथा छोटक निषाद सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महिला श्रद्धालुओं में प्रेमशिला देवी, रीता देवी, सुमन देवी, दुर्गावती देवी, सुपली देवी, गुड्डी देवी, पाना देवी, होशिला देवी, राधिका देवी एवं सुगवती देवी ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
आयोजकों ने बताया कि मंदिर स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 1 जुलाई को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना है। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों एवं भंडारे में सहभागिता करने की अपील की है।
अपनों की बात आखिर सबसे अंत में क्यों?
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा वरिष्ठ साहित्यकार

कुछ दिन पहले मैं अचानक अपनी एक प्रिय सखी के घर मिलने चली गई। हम दोनों परिवार वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए औपचारिकता का प्रश्न ही नहीं था।

मैंने देखा कि वह और उनके पति किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। मेरी सखी कोई बात कहती और उनके पति तुरंत उसकी बात काट देते। उसकी लगभग हर राय का विरोध हो रहा था। कुछ देर तक उसने धैर्य रखा, फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ, लेकिन भीतर से आहत होकर बोली

"आपको जो ठीक लगे, वही कर लीजिए। मेरा काम था समझाना, मैंने समझा दिया।"

उसके शब्दों में शिकायत कम और हार अधिक थी।

उस दिन घर से लौटते समय मन में एक ही प्रश्न बार-बार उठता रहा :
आख़िर ऐसा क्यों होता है कि जिन लोगों को हम सबसे अधिक अपना मानते हैं, उनकी बात ही सबसे अंत में सुनते हैं?

पति-पत्नी हों, माता-पिता हों, भाई-बहन हों या परिवार का कोई अन्य सदस्य—जब वे हमें कोई सलाह देते हैं, तो हम उसमें कमियाँ खोजने लगते हैं। लेकिन वही बात यदि कोई मित्र, पड़ोसी या बाहरी व्यक्ति कह दे, तो वह हमें बहुत समझदारी भरी लगने लगती है।

क्या इसलिए कि अपने लोग हमेशा हमारे साथ रहते हैं और हम उन्हें "टेकन फॉर ग्रांटेड" लेने लगते हैं?

सच तो यह हैं कि दुनिया में सबसे निस्वार्थ सलाह वही देता है, जिसका दिल हमारे लिए धड़कता है। बाहर वाले सलाह तो दे सकते हैं, लेकिन उसके परिणामों की जिम्मेदारी नहीं उठाते। यदि बात गलत हो जाए तो सहज कह देंगे—"हमने तो सिर्फ राय दी थी, मानना या न मानना आपका निर्णय था।"

लेकिन परिवार का सदस्य ऐसा नहीं कह सकता, क्योंकि उसका सुख-दुःख हमारे जीवन से जुड़ा होता है।

सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब हम दूसरों के सामने अपने ही जीवनसाथी की बात काट देते हैं, उसकी राय को महत्व नहीं देते या उसका मज़ाक बना देते हैं। उस समय हम यह भूल जाते हैं कि शब्दों के घाव दिखाई नहीं देते, लेकिन वे बहुत गहरे होते हैं।

बाहर बैठे लोग भले मुस्कुरा दें, लेकिन मन ही मन यही सोचते हैं—"जो एक-दूसरे का सम्मान नहीं कर सकते, वे साथ कैसे निभाएँगे?"

इसके विपरीत कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ पति-पत्नी बिना अधिक शब्दों के भी एक-दूसरे का मन समझ लेते हैं। वे जानते हैं कि हर बार मैं ही सही नहीं हो सकता। वे एक-दूसरे को अपनी बात रखने का अवसर देते हैं, एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं। यही परिपक्वता रिश्तों को मजबूत बनाती है।

हर इंसान चाहता हैं कि उसकी बात सुनी जाए, उसकी राय का सम्मान हो, उसके योगदान की कद्र हो। विशेषकर उस घर में, जिसके लिए उसने अपना समय, श्रम, प्रेम और पूरा जीवन समर्पित कर दिया हो।

जब किसी को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि उसकी बात का कोई मूल्य नहीं है, उसकी राय का कोई महत्व नहीं है, तब वह धीरे-धीरे भीतर से टूटने लगता है। उपेक्षा का दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन यह इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। कई बार यही उपेक्षा उसे अवसाद और निराशा की ओर भी धकेल देती है।

आज एक और समस्या तेजी से बढ़ रही है—"टेकन फॉर ग्रांटेड"।

घर का जो सदस्य सबसे अधिक करता है, उसी से सबसे अधिक अपेक्षाएँ रखी जाती हैं। चाहे माता-पिता हों, बड़े भाई-भाभी हों, जेठ-जेठानी हों या पति-पत्नी—जो जिम्मेदार होता है, उससे सबको उम्मीद रहती हैं कि वह करता ही रहेगा। लेकिन उसके लिए हम क्या कर सकते हैं, यह सोचने का समय बहुत कम लोग निकालते हैं।

रिश्ते केवल लेने से नहीं चलते, देने से भी चलते हैं। सम्मान केवल पाने की चीज़ नहीं, देने की आदत भी है।

आजकल कुछ लोग बाहर की दुनिया में आदर्श पति-पत्नी होने का ऐसा प्रदर्शन करते हैं कि लगता है उनसे अधिक प्रेम करने वाला कोई नहीं। लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर वही रिश्ता तानों, कटु शब्दों और अपमान से भर जाता है। सुबह की चाय के साथ कभी पत्नी की आँखों से आँसू बहते हैं, तो कभी पति चुपचाप अपनी पीड़ा भीतर ही दबा लेता है।

यदि सचमुच एक सुखी परिवार बनाना है, तो सबसे पहले बाहर वालों से अधिक अपने जीवनसाथी को महत्व देना होगा। क्योंकि अंत में जीवन की हर कठिन राह पर साथ मित्र नहीं, समाज नहीं, बल्कि पति-पत्नी ही निभाते हैं। बच्चे भी एक दिन अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन जीवनसाथी का साथ जीवन के अंतिम पड़ाव तक बना रहता है।

मुझे अपना बचपन याद आता है।

मैंने अपने माता-पिता को कभी हमारे सामने एक-दूसरे का अपमान करते नहीं देखा। मतभेद अवश्य होते होंगे, लेकिन मनभेद कभी नहीं देखा , उन्होंने अपने मतभेद को कभी बच्चों के सामने तमाशा नहीं बनने दिया। यदि किसी से भूल हो जाती, तो "सॉरी" कहने में किसी का अहंकार आड़े नहीं आता था।

शायद यही कारण था कि हमारा बचपन इतना तनावमुक्त और सुखद था। संयुक्त परिवार में रहते हुए हमें हर ओर अपनापन, सुरक्षा और स्नेह का अनुभव होता था। ऐसा लगता था कि पूरा परिवार हमारी ताकत है, हमारी ढाल है।

आज भी मन कहता है—काश! हर घर में फिर वही अपनापन लौट आए। चाहे संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, यदि संवाद रहेगा, सम्मान रहेगा, संवेदनशीलता रहेगी, तो हर घर फिर से मुस्कुराने लगेगा।

याद रखिए :
रिश्तों को सबसे अधिक प्रेम नहीं, सम्मान जीवित रखता है।
जिस दिन हम बाहर वालों से पहले अपनों की बात सुनना सीख जाएँगे, उसी दिन हमारे घरों की आधी समस्याएँ अपने आप समाप्त हो जाएँगी।

क्योंकि जो व्यक्ति आपके सुख-दुःख में आपके साथ खड़ा रहता है, उसकी सलाह केवल शब्द नहीं होती, उसमें उसका प्रेम, अनुभव और आपका भविष्य छिपा होता है। इसलिए अपनों की बात को सबसे अंत में नहीं, सबसे पहले सुनिए। वहीं से रिश्तों की मिठास और जीवन की सच्ची खुशियाँ शुरू होती हैं।

अपनों की बातों में अनुभव का सार होता है,
हर शब्द में छिपा सच्चा प्यार होता है।
जो बाहर वालों की आवाज़ में अपने खो देते हैं,
अक्सर वे रिश्तों का सबसे अनमोल उपहार खो देते हैं।

रिश्ते तब नहीं टूटते जब मतभेद होते हैं,
रिश्ते तब टूटते हैं जब सम्मान समाप्त हो जाता है।
इसलिए अपनों की बात सुनिए, समझिए और उन्हें महसूस कराइए—
कि वे केवल आपके परिवार का हिस्सा नहीं,
आपके जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं।
पद्मश्री उदित नारायण और पलक मुच्छल की आवाज़ में सजा रोमांटिक गीत "मेरे मन को" हुआ रिलीज़

मुंबई। भारतीय संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके उभरते हुए कलाकार एवं रॉक-स्टार संगीत मासूम एक बार फिर अपने नए रोमांटिक गीत "मेरे मन को" के साथ श्रोताओं के दिलों को छूने के लिए तैयार हैं। मासूम फ़िल्म कंपनी एवं द ग्रेट बॉलीवुड के बैनर तले प्रस्तुत यह गीत रिलीज़ होते ही संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। गीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से सजाया है पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण तथा लोकप्रिय गायिका पलक मुच्छल ने। गीत का संगीत अमन श्लोक ने तैयार किया है, जबकि इसके भावपूर्ण बोल सुप्रसिद्ध गीतकार एवं लेखक मुकेश कुमार मासूम ने लिखे हैं। वीडियो का निर्देशन अनिल एस. मेहता ने किया है, कोरियोग्राफी संजय चौधरी ने की है तथा इसकी निर्माता सीमा हैं। म्यूज़िक वीडियो में संगीत मासूम और गंगा अधिकारी की जोड़ी ने अपने सशक्त अभिनय से प्रेम और भावनाओं को जीवंत कर दिया है। संगीत मासूम आज हिंदी संगीत जगत के उन युवा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक सरोज खान से नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा रोशन तनेजा अभिनय अकादमी से अभिनय का चार माह का डिप्लोमा किया है। हाल ही में हिंदी फ़िल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय के हाथों उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मानित भी किया गया, जो उनके निरंतर बढ़ते कलात्मक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले संगीत मासूम "दिल का ख़ुदा", "ब्रेकअप पार्टी", "साजन के शहर" और "बेदर्दी" जैसे चर्चित एवं लोकप्रिय गीतों के माध्यम से संगीत प्रेमियों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। अब "मेरे मन को" से भी उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। गीत के बोल मुकेश कुमार मासूम द्वारा रचे गए हैं, जो शब्दों के माध्यम से प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन के एक संवेदनशील, प्रखर एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। उनकी लेखनी की पहचान सरल भाषा में गहन भाव, तथ्यात्मक स्पष्टता और साहित्यिक प्रवाह के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार हैं। मुकेश कुमार मासूम स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन तथा इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, जो उनके साहित्य और फ़िल्म उद्योग से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। वे बॉलीवुड के स्थापित गीतकारों में गिने जाते हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में "दिल तोड़ने वाला, दिल का ख़ुदा निकला" (उदित नारायण), "दारू सिगरेट छोड़ दे" (ममता शर्मा), "जीवन एक अमृत है" (उदित नारायण), "मेरे मन को" (उदित नारायण एवं पलक मुच्छल), "भगवान ज़रूरी है" (अल्तमश फ़रीदी), "खाटू श्याम जाना है" (अनूप जलोटा), "जय भीम बोलो रे" (स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़), "ब्रेकअप पार्टी" (हरमन नाज़िम), "मेनू हँसके विदा कर दे" (शबाब साबरी), "बौद्ध धर्म के अनुयायी" (अनूप जलोटा) तथा "उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा" (अगम कुमार निगम) जैसे अनेक लोकप्रिय गीत शामिल हैं। उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई, लोकसंवेदना और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

वर्तमान में मुकेश कुमार मासूम सिनेविस्टा लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित फ़िल्म एवं धारावाहिक निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की अनेक प्रमुख हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक "योगी आदित्यनाथ : अध्यात्म और राजनीति के आकाश पर चमकता सितारा" लिखी है। हाल ही में इस पुस्तक के संबंध में उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट भी की।उच्च गुणवत्ता वाले संगीत, उत्कृष्ट गायन, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण शब्दों से सजा "मेरे मन को" अब विभिन्न डिजिटल संगीत मंचों पर उपलब्ध है। संगीत प्रेमियों और समीक्षकों का मानना है कि यह गीत वर्ष के चर्चित रोमांटिक गीतों में अपनी विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

चम्पत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कार्यकारी महासचिव बने कृष्ण मोहन त्रिपाठी
— ट्रस्ट ने सार्वजनिक की भेंट, दान और चढ़ावा की राशि, श्रद्धालु अयोध्या आकर कर सकते हैं सत्यापन

— गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटाया गया

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की राम जन्मभूमि परिसर में सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। साथ ही ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया। श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए ट्रस्ट ने अब तक की भेंट, दान और चढ़ाव की धनराशि को सार्वजनिक करते हुए कहा कि कोई भी दानकर्ता यहां आकर अपनी भेंट या दान का सत्यापन कर सकता है।

ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों का कोरम पूरा हुआ

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि महाराज ने बैठक में लिये गए फैसलों की मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों का कोरम पूरा हुआ और इस बैठक में ट्रस्ट के सदस्य के. पारासरन आभासी रूप से जुड़े। बैठक में मंदिर के दान में चोरी की घटना को अत्यंत दुर्भाग्य और आहत करने वाली बताया गया। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र द्वारा नैतिक रूप से अपने अपने पदों से दिए गए त्यागपत्र पर ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप चर्चा की गयी।

कोई सदस्य त्यागपत्र देता है तो त्यागपत्र स्वीकार हो जाएगा

बैठक के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ट्रस्टी के. पारासरन ने सदस्यों को बताया कि ट्रस्ट का नियम है कि अगर कोई सदस्य त्यागपत्र देता है तो त्यागपत्र स्वीकार हो जाएगा। ऐसे में नैतिक आधार पर महामंत्री चम्पत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया है। इनकी मदद के लिए एक समिति भी गठित की गयी। इसके अलावा गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटा दिया गया है।

22 जुलाई को होगी ट्रस्ट की पुन: बैठक

गोविंद देव गिरि ने बताया कि 22 जुलाई को ट्रस्ट की पुन: बैठक होगी। बैठक में ट्रस्ट के नए सदस्यों की नियुक्ति पर विचार किया जाएगा। तब तक एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। दान चोरी करने वाले अन्य अपराधियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए दान की गयी 2800 वस्तुतों की सूची बनी है और अगर किसी भी दानदाता के मन में संशय है तो वे ट्रस्ट के अयोध्या कार्यालय आकर देख सकते हैं। सभी वस्तुओं को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है।

श्रद्धालुओं का विश्वास पुन: स्थापित करेगा ट्रस्ट

बड़े ही भावुक हाेते हुए गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि मंदिर चोरी के प्रकरण को लेकर अनर्गल बातें मीडिया में आने और कुछ राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर जो चिंता दिखायी जा रही है वे राष्ट्र के लिए घातक हैं, क्योंकि यही वे राजनीतिक दल और नेता हैं जो भगवान राम को काल्पनिक बता कर न्यायालय तक गए। मंदिर आंदोलन के समय कारसेवकों पर गोलियां तक चलवाईं। ऐसे नेताओं एवं संगठनों का मकसद राजनीतिक रोटियां सेंकना और हिंदू एकता, रामभक्तों और सनातन पर चोट करना है, लेकिन ट्रस्ट आह्र्वान करता है कि सभी हिंदू समाज की अपेक्षा के अनुरूप काम करेगा और उनका विश्वास पुन:स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि राम भक्त धैर्य रखें और किसी प्रकार के अनर्गल समाचारों पर ध्यान न दें।

चोरी करने वालों को दंड दिलाना प्राथमिकता

बैठक में कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि पहला काम चढ़ावा चोरी करने वाले अपराधियों को दंड दिलाना और मंदिर प्रबंधन में अब तक रहीं कमियां दूर करना है। ट्रस्ट के सदस्य समाज में राम मंदिर की पुन: प्रतिष्ठा और विश्वास बनाएंगे।

सार्वजनिक की गई धनराशि

ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि आज की बैठक में प्रमुख रूप से दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना की प्रक्रिया में अनियमितता, उसकी जांच और कार्यवाही, महामंत्री और एक न्यासी के न्यासी पद से त्यागपत्रों, मीडिया में चल रही चर्चाओं, भावी अन्तरिम व्यवस्थाओं आदि विषयों पर विचार हुआ। अब तक निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि 3,264 करोड़ रुपये में से 2,370 करोड़ रुपये निर्माण एवं पूंजीगत व्यय में उपयोग की गई है।

2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ

प्रारम्भ से लेकर 31 मार्च 2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ, जिसमें से 391 करोड़ रुपये की राशि संचालन व्यय में उपयोग ली गई। शेष राशियां बैंक खातों में उपलब्ध है। ये समस्त वितीय सूचनाएं समय—समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं। नकद राशि के अतिरिक्त अनेक श्रद्धालुओं ने वस्तु के रूप में प्रभु श्री रामलला को भेंट अर्पित की हैं। ऐसी कुल 2,926 भेंट प्राप्त हुई हैं जो समस्त, तिथि अनुसार, सम्पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर में दर्ज हैं और उनका भौतिक सत्यापन एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्म द्वारा आंतरिक अंकेक्षक के नाते प्रति वर्ष किया जाता है। काउंटर पर ऐसी भेंट देने वाले समस्त श्रद्धालुओं को रशीद दी गई हैं और काउंटर के अतिरिक्त दी गई भेंट हेतु भी उन समस्त श्रद्धालुओं को रशीद दी गई है जिन्होने दानदाता का विवरण दिया।

कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध

समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन है कि जो भी अपनी दी हुई भेंट का उपयोग जानना अथवा सत्यापन करना चाहें, वे कभी भी ट्रस्ट के अधिकारी से तिथि व समय निश्चित कर अयोध्या पधारें और प्रभु श्री रामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन कर सकते हैं। चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल (मिंट) में गला कर छड़ें बनाई गई हैं जिनके मूल स्वरूप का विवरण फोटो व वजन सहित उपलब्ध है। गलाने के पश्चात चाँदी की शुद्धता और कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध हैं।

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) से सेवानिवृत्त हैं कृष्ण मोहन

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को श्री राम जन्मभूमि परिसर में हुई बैठक में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। अब वे ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का दायित्व संभालेंगे। उन्हें ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। अब वे ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का दायित्व संभालेंगे। कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक के दायित्व पर अपनी सेवा दे रहे हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं

कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में हुआ और उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक और जनसेवा के कार्यों से जुड़े रहे।

कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ

कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ। उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे। मूल रूप से हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर बाजार निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद करीब पांच वर्ष तक एटॉमिक एनर्जी विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ और महाराष्ट्र कैडर मिला। वर्ष 2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
यूपी में उच्च शिक्षा का विस्तार: कैबिनेट ने तीन नए निजी विश्वविद्यालयों को दी मंजूरी
-  कानपुर, गाजियाबाद और फतेहपुर में खुलेंगे नए विश्वविद्यालय; उच्च शिक्षा मंत्री बोले— अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार का लक्ष्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को 5, कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने प्रदेश में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की, जिससे उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता को भी नई मजबूती मिलेगी।
लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 के तहत मूल्यांकन के बाद तीन संस्थाओं को आशय पत्र (एलओपी) जारी करने तथा संचालन प्राधिकार-पत्र देने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुंचाना है और सरकार उसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा कानपुर नगर की बिल्हौर तहसील के ग्राम गदनपुर आहार में 51.739 एकड़ भूमि पर कृषि आधारित निजी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) अध्यादेश-2026 लागू किया जाएगा।
इसी प्रकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी, गाजियाबाद को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण क्षेत्र के ग्राम डासना में 26.2656 एकड़ भूमि पर निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। संस्था पहले से मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित कर रही है। नए विश्वविद्यालय से क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) अध्यादेश-2026 प्रख्यापित किया जाएगा।
वहीं एंग्लो संस्कृत कॉलेज, फतेहपुर को फतेहपुर तहसील के कस्बा फतेहपुर दक्षिणी में 20.45 एकड़ भूमि पर निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति मिली है। इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (पंचम संशोधन) अध्यादेश-2026 लागू किया जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश में 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे, जबकि पिछले नौ वर्षों में 8 नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। इसी तरह 2017 तक प्रदेश में 27 निजी विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 56 हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि तीनों प्रस्तावित विश्वविद्यालय निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इनके शुरू होने से प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों की बेहतर सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध होंगी।
उत्तराखंड की सूखती 13 नदियों को मिलेगा नया जीवन, बड़े संस्थान करेंगे अध्ययन
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार घटते जल प्रवाह और सूखते जल स्रोतों को देखते हुए राज्य सरकार ने नदियों के पुनर्जीवन के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी ने राज्य की 13 प्रमुख नदियों के वैज्ञानिक अध्ययन की योजना तैयार की है, जिसमें देश के प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के संस्थान शामिल होंगे।
स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी (सारा) की इस पहल के तहत ‘एक जिला-एक नदी’ मॉडल पर हर जिले से एक नदी का चयन किया गया है। इन नदियों के साथ-साथ उनके जलग्रहण क्षेत्र, भूजल पुनर्भरण, झीलों और तालाबों की स्थिति का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
इस परियोजना में आईआईटी रुड़की, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान और भारतीय वन्यजीव संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों को जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञ वैज्ञानिक आधार पर यह आकलन करेंगे कि नदियों का जल प्रवाह क्यों कम हुआ और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए कौन से कदम जरूरी हैं।
अल्मोड़ा की जटा गंगा, बागेश्वर की गरुड़ गंगा, पिथौरागढ़ की पूर्वी रामगंगा, नैनीताल की शिप्रा, चंपावत की गौड़ी, पौड़ी की नयार पूर्वी और नयार पश्चिमी, देहरादून और टिहरी की सोंग, चमोली की चंद्रभागा, रुद्रप्रयाग की पुनार, उत्तरकाशी की कमल गंगा, हरिद्वार की पथरी और उधम सिंह नगर की फीका नदी का अध्ययन किया जाएगा।
अध्ययन के बाद संबंधित संस्थान विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें नदियों के पुनर्जीवन के उपाय, जल संरक्षण के तरीके और आवश्यक सुधार शामिल होंगे। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे की योजनाओं को मंजूरी दी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार इस योजना की निगरानी अगले 10 वर्ष तक की जाएगी और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जल संरक्षण के प्रयास जमीनी स्तर पर सफल हो सकें।
शादी में आए रिश्तेदार की बाइक चोरी, खेत में क्षतिग्रस्त हालत में मिली,थाना पुलिस जांच में जुटी
अमृतपुर, फर्रुखाबाद। थाना अमृतपुर क्षेत्र के ग्राम करपुरदस्त में शादी समारोह में आए एक रिश्तेदार की बाइक चोरी होने का मामला सामने आया है। पीड़ित संजेश कुमार के अनुसार, 1 जुलाई की रात उनकी UP-30 BV 2763 नंबर की मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। तलाश के दौरान गांव मोकुलपुर निवासी एक युवक पर शक होने पर डायल 112 को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले गई। अगले दिन गांव के चमन मोहम्मद के खेत में चोरी गई बाइक क्षतिग्रस्त अवस्था में बरामद हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाइक कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
सोनभद्र: मानसून की पहली बारिश में उफनाया नाला, मां और 8 महीने का मासूम बहा; बच्चे का शव बरामद, मां की तलाश जारी

विकास कुमार सोनभद्र अनपरा। सोनभद्र जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में उजाड़ दीं। अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास अचानक उफनाए एक बरसाती नाले ने मां और उसके आठ महीने के मासूम बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में मासूम बच्चे की मौत हो गई है, जिसका शव घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर बरामद किया गया। वहीं, लापता मां का अब तक सिर्फ कपड़ा ही मिल सका है, उसका कोई सुराग नहीं लगा है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

अचानक बढ़े जलस्तर ने दोनों को आगोश में लिया
मिली जानकारी के अनुसार, अनपरा थाना क्षेत्र के एमटीसी कंपनी के पास रहने वाली 25 वर्षीय सविता देर शाम अपने आठ महीने के मासूम बच्चे को लेकर घर से निकली थी। थाना प्रभारी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का घर नाले के बिल्कुल करीब है और वह संभवतः शौच के लिए निकली थी। इसी दौरान अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे बरसाती नाले का जलस्तर और बहाव पल भर में बेहद तेज हो गया। नाला पार करते समय मां और बेटा पानी के इस प्रचंड वेग को संभाल नहीं पाए और तेज धारा में बह गए।

सुबह शुरू हुआ रेस्क्यू, 3 किमी दूर मिला मासूम का शव
यह घटना देर रात की होने के कारण शुरुआत में किसी को इसकी भनक नहीं लगी। सुबह होते ही जब पुलिस को मामले की जानकारी मिली, तो तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद, घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर मासूम बच्चे का शव बरामद कर लिया गया। हालांकि, काफी खोजबीन के बाद भी मां सविता का कुछ पता नहीं चल सका है, पुलिस को नाले के पास से केवल उसके कपड़े बरामद हुए हैं।

पति था घर से बाहर, परिजनों को 'चमत्कार' की उम्मीद
बताया जा रहा है कि घटना के वक्त महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। जैसे ही उसे इस अनहोनी की सूचना मिली, वह बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा। इस हादसे ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

वर्तमान में पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें नाले और उसके आसपास के संभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

मासूम की मौत से जहां पूरे गांव की आंखें नम हैं, वहीं परिजन और ग्रामीण अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि काश सविता सकुशल मिल जाए। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बारिश के मौसम में उफनते नदी-नाले और थोड़ी सी भी लापरवाही पल भर में जिंदगी को खत्म कर सकती है।
गंगा में नाला का पानी गिरने से आचमन योग नहीं ,बल्कि आपवित्र हो रहा

बच्चा स्वामी ने  गंगा की अविरलधारा को स्वच्छ रखने और आश्रम के आसपास सफाई करने की भरी हुंकार, डीएम को दिया पत्र,नाला गंगा जल को कर रहा अपवित्र

फर्रुखाबाद l शिव शक्ति अखाड़ा के महंत बच्चा स्वामी ने गुरुवार को अपने दर्जनों शिष्यों के साथ आश्रम के आसपास फैली गंदगी और गंदा नाला का पानी गंगा की अविरल धारा को गंदा ही नहीं बल्कि अपवित्र कर साधु संतों के लिए आचमन के योग्य तक नहीं रखा है इससे नाराज दर्जनों साधु संतों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर को शिकायती पत्र दिया  जिसमें कहा है कि इस नाले के साथ जो गंदगी आ रही है उससे आश्रम के आसपास गंदगी का ढेर लगा हुआ है यही नहीं साधु संत गंगा में ना तो स्नान कर पा रहे और ना आचमन कर सकते हैं। महंत बच्चा स्वामी ने कहा कि पांचाल घाट से लेकर शमशान घाट तक सड़क चौड़ीकरण किया जाना चाहिए जिससे आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सके उन्होंने कहा कि दूर-दराज से लोग यहां अंतिम संस्कार करने के लिए आते हैं और जाम में फंसने पर कई की घंटे खड़ा होना पड़ता है इसलिए सड़क का भी निर्माण किया जाना चाहिए।
आगामी सप्ताह हो सकती है तेज बरसात  आंधी और तूफान
फर्रुखाबाद । आगामी सप्ताह में वर्षा, आंधी-तूफान एवं वज्रपात की संभावना, नागरिक सतर्क रहें : जिला प्रशासन
भारत मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ द्वारा जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार जनपद फर्रुखाबाद में आगामी सात दिनों के दौरान वर्षा, गरज-चमक, तेज झोंकेदार हवाओं तथा वज्रपात की संभावना व्यक्त की गई है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करने तथा अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार 29 जून को जनपद के कहीं-कहीं क्षेत्रों में वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान मेघगर्जन एवं वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।
30 जून से 02 जुलाई तक जनपद के अनेक स्थानों पर वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस अवधि में मेघगर्जन, वज्रपात, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
03 जुलाई से 05 जुलाई के बीच भी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं-कहीं वर्षा एवं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने तथा मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना बनी रहेगी।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा एवं नम रहेगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि गरज-चमक सुनाई देते ही सुरक्षित पक्के भवन के अंदर चले जाएं। घरों में बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें तथा बिजली के तारों एवं विद्युत कनेक्शनों से दूरी बनाए रखें। यदि किसी कारणवश खुले स्थान पर फंस जाएं तो दोनों पैर पास-पास रखते हुए सिर झुकाकर बैठें तथा जमीन से संपर्क कम से कम रखें। वाहन में यात्रा कर रहे हों तो वाहन के अंदर ही रहें और खिड़कियां बंद रखें।
प्रशासन ने यह भी सलाह दी है कि आंधी-तूफान अथवा वज्रपात के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों, टावरों अथवा अन्य ऊंची संरचनाओं के नीचे शरण न लें। खुले मैदान, खेत, छत या जलाशयों के आसपास खड़े न हों तथा धातु की वस्तुओं का प्रयोग करने से बचें। खराब मौसम के दौरान बाहर निकलकर सेल्फी अथवा वीडियो बनाने का प्रयास न करें तथा वर्षा के पानी से भरे गड्ढों एवं नालों को पार करने से बचें।
किसान भाइयों से विशेष अनुरोध किया गया है कि खेतों में कार्य करते समय मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा संभावित वर्षा और तेज हवाओं को देखते हुए फसलों, मंडियों में खुले में रखे आलू एवं अन्य कृषि उपज तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली चेतावनियों एवं परामर्शों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में संबंधित विभागों एवं स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें।
श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण, निकली भव्य कलश यात्रा
- श्रद्धालुओं के जयघोष से भक्तिमय हुआ क्षेत्र, 1 जुलाई को होगा विशाल भंडारा

मऊ। जनपद के मानिकपुर हड़हुआ स्थित श्री बालेश्वर धाम पंचमुखी हनुमान मंदिर के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालुओं के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रोहतम निषाद तथा महिला मुख्य अतिथि के रूप में प्रभावती देवी उपस्थित रहीं। दोनों अतिथियों ने मंदिर की प्रगति और धार्मिक आयोजनों की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया।
इस आयोजन को सफल बनाने में सुभाष निषाद, हरिनाथ निषाद, सत्यदेव निषाद, छेदी निषाद एवं अमित निषाद की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में रामसिंह निषाद, श्रीराम निषाद, लालमन निषाद, राजेंद्र निषाद, रामभुवन निषाद, बेचन निषाद, राजेश निषाद, अजय निषाद, मुखराम राजभर, लल्लन राजभर तथा छोटक निषाद सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महिला श्रद्धालुओं में प्रेमशिला देवी, रीता देवी, सुमन देवी, दुर्गावती देवी, सुपली देवी, गुड्डी देवी, पाना देवी, होशिला देवी, राधिका देवी एवं सुगवती देवी ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
आयोजकों ने बताया कि मंदिर स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 1 जुलाई को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना है। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों एवं भंडारे में सहभागिता करने की अपील की है।
अपनों की बात आखिर सबसे अंत में क्यों?
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा वरिष्ठ साहित्यकार

कुछ दिन पहले मैं अचानक अपनी एक प्रिय सखी के घर मिलने चली गई। हम दोनों परिवार वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए औपचारिकता का प्रश्न ही नहीं था।

मैंने देखा कि वह और उनके पति किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। मेरी सखी कोई बात कहती और उनके पति तुरंत उसकी बात काट देते। उसकी लगभग हर राय का विरोध हो रहा था। कुछ देर तक उसने धैर्य रखा, फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ, लेकिन भीतर से आहत होकर बोली

"आपको जो ठीक लगे, वही कर लीजिए। मेरा काम था समझाना, मैंने समझा दिया।"

उसके शब्दों में शिकायत कम और हार अधिक थी।

उस दिन घर से लौटते समय मन में एक ही प्रश्न बार-बार उठता रहा :
आख़िर ऐसा क्यों होता है कि जिन लोगों को हम सबसे अधिक अपना मानते हैं, उनकी बात ही सबसे अंत में सुनते हैं?

पति-पत्नी हों, माता-पिता हों, भाई-बहन हों या परिवार का कोई अन्य सदस्य—जब वे हमें कोई सलाह देते हैं, तो हम उसमें कमियाँ खोजने लगते हैं। लेकिन वही बात यदि कोई मित्र, पड़ोसी या बाहरी व्यक्ति कह दे, तो वह हमें बहुत समझदारी भरी लगने लगती है।

क्या इसलिए कि अपने लोग हमेशा हमारे साथ रहते हैं और हम उन्हें "टेकन फॉर ग्रांटेड" लेने लगते हैं?

सच तो यह हैं कि दुनिया में सबसे निस्वार्थ सलाह वही देता है, जिसका दिल हमारे लिए धड़कता है। बाहर वाले सलाह तो दे सकते हैं, लेकिन उसके परिणामों की जिम्मेदारी नहीं उठाते। यदि बात गलत हो जाए तो सहज कह देंगे—"हमने तो सिर्फ राय दी थी, मानना या न मानना आपका निर्णय था।"

लेकिन परिवार का सदस्य ऐसा नहीं कह सकता, क्योंकि उसका सुख-दुःख हमारे जीवन से जुड़ा होता है।

सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब हम दूसरों के सामने अपने ही जीवनसाथी की बात काट देते हैं, उसकी राय को महत्व नहीं देते या उसका मज़ाक बना देते हैं। उस समय हम यह भूल जाते हैं कि शब्दों के घाव दिखाई नहीं देते, लेकिन वे बहुत गहरे होते हैं।

बाहर बैठे लोग भले मुस्कुरा दें, लेकिन मन ही मन यही सोचते हैं—"जो एक-दूसरे का सम्मान नहीं कर सकते, वे साथ कैसे निभाएँगे?"

इसके विपरीत कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ पति-पत्नी बिना अधिक शब्दों के भी एक-दूसरे का मन समझ लेते हैं। वे जानते हैं कि हर बार मैं ही सही नहीं हो सकता। वे एक-दूसरे को अपनी बात रखने का अवसर देते हैं, एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं। यही परिपक्वता रिश्तों को मजबूत बनाती है।

हर इंसान चाहता हैं कि उसकी बात सुनी जाए, उसकी राय का सम्मान हो, उसके योगदान की कद्र हो। विशेषकर उस घर में, जिसके लिए उसने अपना समय, श्रम, प्रेम और पूरा जीवन समर्पित कर दिया हो।

जब किसी को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि उसकी बात का कोई मूल्य नहीं है, उसकी राय का कोई महत्व नहीं है, तब वह धीरे-धीरे भीतर से टूटने लगता है। उपेक्षा का दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन यह इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। कई बार यही उपेक्षा उसे अवसाद और निराशा की ओर भी धकेल देती है।

आज एक और समस्या तेजी से बढ़ रही है—"टेकन फॉर ग्रांटेड"।

घर का जो सदस्य सबसे अधिक करता है, उसी से सबसे अधिक अपेक्षाएँ रखी जाती हैं। चाहे माता-पिता हों, बड़े भाई-भाभी हों, जेठ-जेठानी हों या पति-पत्नी—जो जिम्मेदार होता है, उससे सबको उम्मीद रहती हैं कि वह करता ही रहेगा। लेकिन उसके लिए हम क्या कर सकते हैं, यह सोचने का समय बहुत कम लोग निकालते हैं।

रिश्ते केवल लेने से नहीं चलते, देने से भी चलते हैं। सम्मान केवल पाने की चीज़ नहीं, देने की आदत भी है।

आजकल कुछ लोग बाहर की दुनिया में आदर्श पति-पत्नी होने का ऐसा प्रदर्शन करते हैं कि लगता है उनसे अधिक प्रेम करने वाला कोई नहीं। लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर वही रिश्ता तानों, कटु शब्दों और अपमान से भर जाता है। सुबह की चाय के साथ कभी पत्नी की आँखों से आँसू बहते हैं, तो कभी पति चुपचाप अपनी पीड़ा भीतर ही दबा लेता है।

यदि सचमुच एक सुखी परिवार बनाना है, तो सबसे पहले बाहर वालों से अधिक अपने जीवनसाथी को महत्व देना होगा। क्योंकि अंत में जीवन की हर कठिन राह पर साथ मित्र नहीं, समाज नहीं, बल्कि पति-पत्नी ही निभाते हैं। बच्चे भी एक दिन अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन जीवनसाथी का साथ जीवन के अंतिम पड़ाव तक बना रहता है।

मुझे अपना बचपन याद आता है।

मैंने अपने माता-पिता को कभी हमारे सामने एक-दूसरे का अपमान करते नहीं देखा। मतभेद अवश्य होते होंगे, लेकिन मनभेद कभी नहीं देखा , उन्होंने अपने मतभेद को कभी बच्चों के सामने तमाशा नहीं बनने दिया। यदि किसी से भूल हो जाती, तो "सॉरी" कहने में किसी का अहंकार आड़े नहीं आता था।

शायद यही कारण था कि हमारा बचपन इतना तनावमुक्त और सुखद था। संयुक्त परिवार में रहते हुए हमें हर ओर अपनापन, सुरक्षा और स्नेह का अनुभव होता था। ऐसा लगता था कि पूरा परिवार हमारी ताकत है, हमारी ढाल है।

आज भी मन कहता है—काश! हर घर में फिर वही अपनापन लौट आए। चाहे संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, यदि संवाद रहेगा, सम्मान रहेगा, संवेदनशीलता रहेगी, तो हर घर फिर से मुस्कुराने लगेगा।

याद रखिए :
रिश्तों को सबसे अधिक प्रेम नहीं, सम्मान जीवित रखता है।
जिस दिन हम बाहर वालों से पहले अपनों की बात सुनना सीख जाएँगे, उसी दिन हमारे घरों की आधी समस्याएँ अपने आप समाप्त हो जाएँगी।

क्योंकि जो व्यक्ति आपके सुख-दुःख में आपके साथ खड़ा रहता है, उसकी सलाह केवल शब्द नहीं होती, उसमें उसका प्रेम, अनुभव और आपका भविष्य छिपा होता है। इसलिए अपनों की बात को सबसे अंत में नहीं, सबसे पहले सुनिए। वहीं से रिश्तों की मिठास और जीवन की सच्ची खुशियाँ शुरू होती हैं।

अपनों की बातों में अनुभव का सार होता है,
हर शब्द में छिपा सच्चा प्यार होता है।
जो बाहर वालों की आवाज़ में अपने खो देते हैं,
अक्सर वे रिश्तों का सबसे अनमोल उपहार खो देते हैं।

रिश्ते तब नहीं टूटते जब मतभेद होते हैं,
रिश्ते तब टूटते हैं जब सम्मान समाप्त हो जाता है।
इसलिए अपनों की बात सुनिए, समझिए और उन्हें महसूस कराइए—
कि वे केवल आपके परिवार का हिस्सा नहीं,
आपके जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं।
पद्मश्री उदित नारायण और पलक मुच्छल की आवाज़ में सजा रोमांटिक गीत "मेरे मन को" हुआ रिलीज़

मुंबई। भारतीय संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके उभरते हुए कलाकार एवं रॉक-स्टार संगीत मासूम एक बार फिर अपने नए रोमांटिक गीत "मेरे मन को" के साथ श्रोताओं के दिलों को छूने के लिए तैयार हैं। मासूम फ़िल्म कंपनी एवं द ग्रेट बॉलीवुड के बैनर तले प्रस्तुत यह गीत रिलीज़ होते ही संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। गीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से सजाया है पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण तथा लोकप्रिय गायिका पलक मुच्छल ने। गीत का संगीत अमन श्लोक ने तैयार किया है, जबकि इसके भावपूर्ण बोल सुप्रसिद्ध गीतकार एवं लेखक मुकेश कुमार मासूम ने लिखे हैं। वीडियो का निर्देशन अनिल एस. मेहता ने किया है, कोरियोग्राफी संजय चौधरी ने की है तथा इसकी निर्माता सीमा हैं। म्यूज़िक वीडियो में संगीत मासूम और गंगा अधिकारी की जोड़ी ने अपने सशक्त अभिनय से प्रेम और भावनाओं को जीवंत कर दिया है। संगीत मासूम आज हिंदी संगीत जगत के उन युवा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक सरोज खान से नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा रोशन तनेजा अभिनय अकादमी से अभिनय का चार माह का डिप्लोमा किया है। हाल ही में हिंदी फ़िल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय के हाथों उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मानित भी किया गया, जो उनके निरंतर बढ़ते कलात्मक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले संगीत मासूम "दिल का ख़ुदा", "ब्रेकअप पार्टी", "साजन के शहर" और "बेदर्दी" जैसे चर्चित एवं लोकप्रिय गीतों के माध्यम से संगीत प्रेमियों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। अब "मेरे मन को" से भी उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। गीत के बोल मुकेश कुमार मासूम द्वारा रचे गए हैं, जो शब्दों के माध्यम से प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन के एक संवेदनशील, प्रखर एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। उनकी लेखनी की पहचान सरल भाषा में गहन भाव, तथ्यात्मक स्पष्टता और साहित्यिक प्रवाह के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचार हैं। मुकेश कुमार मासूम स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन तथा इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, जो उनके साहित्य और फ़िल्म उद्योग से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। वे बॉलीवुड के स्थापित गीतकारों में गिने जाते हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में "दिल तोड़ने वाला, दिल का ख़ुदा निकला" (उदित नारायण), "दारू सिगरेट छोड़ दे" (ममता शर्मा), "जीवन एक अमृत है" (उदित नारायण), "मेरे मन को" (उदित नारायण एवं पलक मुच्छल), "भगवान ज़रूरी है" (अल्तमश फ़रीदी), "खाटू श्याम जाना है" (अनूप जलोटा), "जय भीम बोलो रे" (स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़), "ब्रेकअप पार्टी" (हरमन नाज़िम), "मेनू हँसके विदा कर दे" (शबाब साबरी), "बौद्ध धर्म के अनुयायी" (अनूप जलोटा) तथा "उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा" (अगम कुमार निगम) जैसे अनेक लोकप्रिय गीत शामिल हैं। उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई, लोकसंवेदना और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

वर्तमान में मुकेश कुमार मासूम सिनेविस्टा लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित फ़िल्म एवं धारावाहिक निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की अनेक प्रमुख हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक "योगी आदित्यनाथ : अध्यात्म और राजनीति के आकाश पर चमकता सितारा" लिखी है। हाल ही में इस पुस्तक के संबंध में उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट भी की।उच्च गुणवत्ता वाले संगीत, उत्कृष्ट गायन, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण शब्दों से सजा "मेरे मन को" अब विभिन्न डिजिटल संगीत मंचों पर उपलब्ध है। संगीत प्रेमियों और समीक्षकों का मानना है कि यह गीत वर्ष के चर्चित रोमांटिक गीतों में अपनी विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।