28 फरवरी को जिला पंचायत गोण्डा की सामान्य बैठक, विकास से जुड़े 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होगा निर्णय



गोण्डा। 20 फरवरी 2026  जिला पंचायत, की सामान्य बैठक अध्यक्ष, जिला पंचायत की अध्यक्षता में 28 फरवरी  को पूर्वान्ह 11:30 बजे जिला पंचायत सभागार में आयोजित की जाएगी। बैठक में समस्त सदस्य एवं पदेन सदस्यों से समय पर उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है।

बैठक के एजेण्डे में कुल 12 बिंदुओं को शामिल किया गया है। सबसे पहले जिला पंचायत की गत सामान्य बैठक 07 मार्च 2025 की कार्यवाही की पुष्टि की जाएगी। इसके पश्चात जनपद के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद गोण्डा के श्रम बजट की स्वीकृति पर विचार होगा। साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के अंतर्गत लोकसभा क्षेत्र गोण्डा एवं कैसरगंज में भारत सरकार से स्वीकृत मार्गों की वित्तीय स्वीकृति हेतु जिला पंचायत के अनुमोदन पर निर्णय लिया जाएगा।

इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट तथा 2026-27 के मूल बजट की स्वीकृति पर विचार किया जाएगा। पंचम राज्य वित्त आयोग एवं पन्द्रहवां वित्त आयोग योजनान्तर्गत वर्ष 2025-26 की अनुपूरक कार्ययोजना की स्वीकृति भी बैठक में प्रस्तावित है।

जिला पंचायत विकास योजना के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग एवं केन्द्रीय वित्त आयोग की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजनाओं पर भी निर्णय लिया जाएगा। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिला पंचायत की विभव एवं सम्पत्ति कर प्रस्तावना सूची की स्वीकृति पर भी विचार किया जाएगा।

बैठक में शासन, मंत्री, जनप्रतिनिधियों, आईजीआरएस तथा अन्य माध्यमों से प्राप्त संदर्भों में उल्लिखित विभिन्न परियोजनाओं एवं निर्माण कार्यों की स्वीकृति का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। अंत में अन्य विषयों पर अध्यक्ष की अनुमति से चर्चा की जाएगी। यह बैठक जनपद के विकास, बजट निर्धारण एवं आगामी योजनाओं के क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
झारखंड विधानसभा: बजट सत्र का तीसरा दिन आज, सदन में पेश होगा तृतीय अनुपूरक बजट

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रांची: झारखंड विधानसभा के पंचम बजट सत्र की कार्यवाही आज अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गई है। आज का दिन विधायी कार्यों और वित्तीय चर्चाओं के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 17 कार्यदिवसों के इस लंबे सत्र में राज्य की भावी योजनाओं और वित्तीय स्थिरता पर गहन विचार-विमर्श की तैयारी है।

आज की कार्यसूची:

दिन की शुरुआत प्रश्नकाल के साथ होगी, जिसमें विपक्ष विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा देगा। इसके उपरांत, वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सदन के पटल पर तृतीय अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और उस पर होने वाले वाद-विवाद के बाद सरकार अपना आधिकारिक जवाब पेश करेगी।

वार्षिक बजट पर नजर:

सत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 24 फरवरी 2026 को देखने को मिलेगी, जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। इस बजट से राज्य के युवाओं, किसानों और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

सत्र के दौरान कुल 17 दिनों तक राज्य की नीतियों, वित्तीय प्राथमिकताओं और विभिन्न विकासात्मक योजनाओं पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होने वाली है।

बी.ए.शिक्षाशास्त्र प्रायोगिक परीक्षा 20 को होगी*
सुलतानपुर। राणा प्रताप पी जी कॉलेज के शिक्षाशास्त्र मेजर विषय के बी०ए० प्रथम,तृतीय और पंचम सेमेस्टर की मौखिकी/प्रायोगिकी परीक्षा 20 फरवरी दिन शुक्रवार को महाविद्यालय में प्रातः 10 बजे से कला संकाय में सम्पन्न होगी। विभागाध्यक्ष डॉ० शिल्पी सिंह ने बताया कि सभी परीक्षार्थी अपने परिचय-पत्र, प्रवेश-पत्र एवं प्रायोगिक की फाइल के साथ निर्धारित तिथि एवं समयानुसार महाविद्यालय में उपस्थित हों। परीक्षा में अनुपस्थित रहने और परीक्षा छूट जाने पर सम्पूर्ण जिम्मेदारी स्वयं परीक्षार्थियों की होगी ।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
बीमा क्षेत्र में अनिल गलगली को मिलियन डॉलर राउंड टेबल अवार्ड
मुंबई। प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बीमा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के साथ प्रतिष्ठित एमडीआरटी (मिलियन डॉलर राउंड टेबल) अवॉर्ड प्राप्त किया है। वर्ष 2025 के दौरान श्री गलगली ने बीमा जगत की इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि को सफलतापूर्वक हासिल किया। इस अवसर का भव्य समारोह एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कार्यालय, घाटकोपर पूर्व, मुंबई में आयोजित किया गया। क्षेत्रीय प्रबंधक राहिल जैटली और कार्यालय प्रमुख महेश चौधरी ने एमडीआरटी (MDRT) का मानक हासिल करने वाले उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में अनिल गलगली, अब्दुल लतीफ, अशफाक अहमद, नमिता ठाक्कर और शैजू जोसे शामिल हैं, जिन्होंने भी एमडीआरटी बेंचमार्क सफलतापूर्वक प्राप्त किया है। यह आयोजन एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस परिवार के लिए गर्व का क्षण रहा और बीमा क्षेत्र में बढ़ती उत्कृष्टता का प्रतीक बना।
आजमगढ़:-सड़क दुर्घटना में बाल बाल बचे दोनों युवक

वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। फूलपुर कस्बे में लखनऊ–बलिया मार्ग पर बाबा गेट के पास सोमवार को एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कार चालक की जान बच गई, जबकि साथ बैठे युवक को मामूली चोट आई। घायल का प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अशोक जायसवाल के 28 वर्षीय पुत्र विशाल अपनी शादी (19 नवम्बर) की तैयारियों के सिलसिले में कोलकाता से आने वाले रिश्तेदार को लेने शाहगंज रेलवे स्टेशन जा रहे थे। वह अपने घर से लगभग 100 मीटर ही आगे बढ़े थे कि सामने से तेज गति से आ रही ट्रक से बचने के प्रयास में उनकी लेंजर कार सड़क किनारे खोदे गए गड्ढे में असंतुलित हो गई और पास स्थित सीमेंटेड बिजली के खंभे से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि, एयरबैग खुल जाने से चालक विशाल की जान बच गई। कार में साथ बैठे अब्बास (25), पुत्र गुलाम अज़गर, निवासी चमावा को हल्की चोट आई, जिन्हें उपचार के बाद घर भेज दिया गया। दुर्घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। परिवारजन होने वाले दूल्हे की सकुशलता पर ईश्वर का आभार व्यक्त कर रहे हैं।
आजमगढ़:-शिवरात्रि पर निकली भव्य शिव बारात, उड़े अबीर-गुलाल

वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार रात आठ बजे शिव सेवा समिति के नेतृत्व में नगर में भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई। बारात नागा बाबा मंदिर परिसर से आरंभ हुई, जहां से भगवान शिव की सजीव झांकी स्वर्णिम रथ पर सवार होकर निकली। भगवान शिव की भूमिका में अमर सिंह आकर्षण का केंद्र रहे। बारात में भूत-प्रेत की झांकियों के साथ उत्साहित युवक-युवतियां व बच्चे अबीर-गुलाल उड़ाते हुए डीजे की भक्तिमय धुनों पर झूमते नजर आए। शिव तांडव व अन्य धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिव बारात फूलपुर बस स्टॉप से होते हुए बाबा परम हंस मार्ग, रामलीला मैदान, पशु अस्पताल तिराहा, पुरानी मिर्च मंडी, मां भवानी मंदिर, शनिचर बाजार, पुरानी सब्जी मंडी और चूना चौक होते हुए शंकर जी तिराहा मंदिर परिसर पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। मंदिर परिसर में महिलाओं ने द्वाराचार व परछन की रस्म निभाई और मंगलगीत गाए। हिमाचल की भूमिका सुरेश मौर्य तथा रानी मैनावती की भूमिका चम्पा मौर्य ने निभाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की सभी रस्में संपन्न कराई गईं। पुजारी राज राजेश्वर ने भगवान का पूजन कराया, जबकि आदर्श कुमार ने लावा परछन की रस्म अदा की। सिंदूरदान, फेरे सहित सभी मांगलिक कार्यक्रम विधिवत संपन्न हुए। अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में संतोष जायसवाल, सुनील प्रजापति, बृजेश यादव, निहाल मोदनवाल, उत्कर्ष मोदनवाल, सोहन जायसवाल, किशन, शांति आर्या, ममता, पूनम, रेखा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम समाप्ति तक प्रभारी सच्चिदानंद यादव, दिनेश त्रिपाठी सहित प्रशासनिक अमला व्यवस्था में जुटा रहा।
कवाल में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न: "संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण से ही राष्ट्र का उत्थान संभव--स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज शुक्रत

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ । गांव कवाल के श्री गोपाल मंदिर (कुटिया) प्रांगण में 'हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति' द्वारा एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

रविवार को गांव कव्वाल में आयोजित हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया कार्यक्रम से पूर्व गांव कव्वाल के मुख्य मार्गों से बैंड बाजे के साथ निकाली गई भव्य कलश यात्रा जिसका जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया , जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालुओं ने सहभागिता  रही। आयोजित सम्मेलन के मुख्य वक्ता, विभाग प्रचारक भूपेंद्र जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति परोपकार और त्याग की नींव पर टिकी है। उन्होंने 'विद्या भारती' और 'कल्याण आश्रम' जैसे संगठनों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज को बदलने के लिए व्यक्ति का स्वयं बदलना आवश्यक है। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि--

आज हमारी भाषा, इतिहास और संस्कारों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। हमें पश्चिमी देशों की 'लिव-इन' जैसी विकृतियों को त्याग कर अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। यदि हम अपनी भाषा और इतिहास को छोड़ देंगे, तो हमारा अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।"

उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा संदेश देते हुए कहा कि स्वधर्म का पालन ही सबसे श्रेष्ठ है। उन्होंने पूर्वजों के बलिदानों को याद दिलाते हुए युवाओं का आह्वान किया कि वे मनोरंजन के नाम पर अपनी संस्कृति का अपमान करने वाली फिल्मों के बजाय राष्ट्रभक्ति से प्रेरित इतिहास को जानें। उन्होंने कहा कि थोड़े से लालच में आकर अपना धर्म बदलना पूर्वजों के बलिदान का अपमान है। सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने समाज को एकजुट रहने पर बल दिया और अपने बच्चों को सरस्वती शिशु मंदिर जैसे विद्यालयों में भेजें, जहाँ शिक्षा के साथ तिलक और संस्कारों का मान रखा जाता है। संगठन को मजबूत करने के लिए समाज की शक्ति के जागरण के लिए संघ की शाखाओं से जुड़ें। मोबाइल की लत से बिगड़ती व्यवस्था को सुधारें और गलत संगत से परिवारों को बचाएं।धार्मिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि सप्ताह में कम से कम एक बार सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। सामाजिक समरसता को लेकर उन्होंने कहा कि श्मशान और गंगा घाट एक हैं, तो समाज में भेदभाव कैसा? हमें साथ मिलकर भोजन और संस्कारों पर ध्यान देना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल ने की तथा कार्यक्रम का संचालन अभिषेक शर्मा के द्वारा बड़े ही अच्छे तरीके से किया। तथा तालिया की गड़गड़ाहट लगातार बजती रही। इस दौरान अनेक वक्ताओं ने अपने ओजस्वी भाषण से कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज (हनुमद्धाम, शुक्लतीर्थ) ने कहा देश शताब्दी वर्ष पूरा करने जा रहा है जिसको लेकर जगह-जगह हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है उन्होंने इस सम्मेलन के द्वारा हिंदू चेतना को जागृत होना बताया तथा उन्होंने कहा  देश  विश्व गुरु बनने की ओर बढ़ रहा है और जब हिंदू चेतना जागृत होगी तो अवश्य ही देश विश्व गुरु बनेगा।

सम्मेलन के अंत में संकल्प लिया गया कि समाज में गद्दारों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है और "भारत माता की जय" के उद्घोष के साथ हिंदू समाज ने अपनी एकता का परिचय दिया। इस दौरान मुख्य रूप से उदय जी विभाग संपर्क प्रमुख गोपाल सेवानंद बाई जी पूर्व ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह सैनी शशिकांत राजवंशी नवीन सैनी गौरव जैन नितिन कंबोज पंचमुखी महादेव गढ़ी अध्यक्ष शनि अंकुर राजवंशी सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष मौजूद रहे।

महाशिवरात्रि: जानसठ में श्रद्धा का सैलाब, ‘बम-बम भोले’ के उद्घोष से गुंजायमान हुआ आकाश


जानसठ। अध्यात्म और अटूट श्रद्धा के महापर्व महाशिवरात्रि पर रविवार को जानसठ कस्बा सहित संपूर्ण ग्रामीण अंचल शिवमय हो गया। चहुंओर बिखरी शिवभक्ति की बयार और शिवालयों से गूंजते 'हर-हर महादेव' व 'बम-बम भोले' के जयकारों ने पूरे क्षेत्र को शिवलोक में बदल दिया। भोर की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने आस्था का ऐसा अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया कि हर आंख भक्ति के रंग में सराबोर नजर आई।

दुल्हन की तरह सजे शिवालय, आस्था की लंबी कतारें
पर्व के उल्लास को देखते हुए कस्बे के प्राचीन ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर गढ़ी पंचमुखी शिवालय और प्रमुख शिव मंदिरों का स्वरूप देखते ही बन रहा था। मंदिरों को सुगंधित फूलों, बंदनवारों और मनमोहक विद्युत लड़ियों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। श्रद्धा का आलम यह था कि कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के चार बजे से ही भक्त हाथों में गंगाजल और पूजन सामग्री लेकर कतारों में खड़े हो गए थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, श्रद्धालुओं का रेला बढ़ता गया और देखते ही देखते मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गईं।

पंचामृत अभिषेक से गूंजी प्रार्थनाएं----
भक्तों ने भगवान आशुतोष का प्रिय गंगाजल और दूध से अभिषेक किया। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, दही और शहद अर्पित कर महादेव का पूजन किया गया। कई स्थानों पर भक्तों ने सामूहिक रूप से रुद्राभिषेक का आयोजन किया, जिसमें वेद मंत्रों के उच्चारण से वातावरण पूरी तरह शुद्ध और पवित्र हो उठा। श्रद्धालुओं ने महादेव के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की।

भारी भीड़ और उत्सव की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। क्षेत्र में थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह स्वयं व्यवस्थाओं का जायजा लेते नजर आए। मंदिरों के प्रवेश और निकास द्वारों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी ताकि महिलाओं और बच्चों को जलाभिषेक करने में कोई असुविधा न हो। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बीच पूरा उत्सव शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ।

श्रद्धा और विश्वास का यह संगम के चलते  आज कस्बे से गांव-गांव तक हमारी जड़ें अध्यात्म से कितनी गहराई से जुड़ी हैं। जानसठ से लेकर गांव गांव के हर गली-कूचे में आज सिर्फ महादेव का नाम गुज रहा था।
जानसठ मुजफ्फरपुर
रिपोर्टर ब्रह्म प्रकाश शर्मा

28 फरवरी को जिला पंचायत गोण्डा की सामान्य बैठक, विकास से जुड़े 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होगा निर्णय



गोण्डा। 20 फरवरी 2026  जिला पंचायत, की सामान्य बैठक अध्यक्ष, जिला पंचायत की अध्यक्षता में 28 फरवरी  को पूर्वान्ह 11:30 बजे जिला पंचायत सभागार में आयोजित की जाएगी। बैठक में समस्त सदस्य एवं पदेन सदस्यों से समय पर उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है।

बैठक के एजेण्डे में कुल 12 बिंदुओं को शामिल किया गया है। सबसे पहले जिला पंचायत की गत सामान्य बैठक 07 मार्च 2025 की कार्यवाही की पुष्टि की जाएगी। इसके पश्चात जनपद के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद गोण्डा के श्रम बजट की स्वीकृति पर विचार होगा। साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के अंतर्गत लोकसभा क्षेत्र गोण्डा एवं कैसरगंज में भारत सरकार से स्वीकृत मार्गों की वित्तीय स्वीकृति हेतु जिला पंचायत के अनुमोदन पर निर्णय लिया जाएगा।

इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट तथा 2026-27 के मूल बजट की स्वीकृति पर विचार किया जाएगा। पंचम राज्य वित्त आयोग एवं पन्द्रहवां वित्त आयोग योजनान्तर्गत वर्ष 2025-26 की अनुपूरक कार्ययोजना की स्वीकृति भी बैठक में प्रस्तावित है।

जिला पंचायत विकास योजना के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग एवं केन्द्रीय वित्त आयोग की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजनाओं पर भी निर्णय लिया जाएगा। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिला पंचायत की विभव एवं सम्पत्ति कर प्रस्तावना सूची की स्वीकृति पर भी विचार किया जाएगा।

बैठक में शासन, मंत्री, जनप्रतिनिधियों, आईजीआरएस तथा अन्य माध्यमों से प्राप्त संदर्भों में उल्लिखित विभिन्न परियोजनाओं एवं निर्माण कार्यों की स्वीकृति का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। अंत में अन्य विषयों पर अध्यक्ष की अनुमति से चर्चा की जाएगी। यह बैठक जनपद के विकास, बजट निर्धारण एवं आगामी योजनाओं के क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
झारखंड विधानसभा: बजट सत्र का तीसरा दिन आज, सदन में पेश होगा तृतीय अनुपूरक बजट

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रांची: झारखंड विधानसभा के पंचम बजट सत्र की कार्यवाही आज अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गई है। आज का दिन विधायी कार्यों और वित्तीय चर्चाओं के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 17 कार्यदिवसों के इस लंबे सत्र में राज्य की भावी योजनाओं और वित्तीय स्थिरता पर गहन विचार-विमर्श की तैयारी है।

आज की कार्यसूची:

दिन की शुरुआत प्रश्नकाल के साथ होगी, जिसमें विपक्ष विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा देगा। इसके उपरांत, वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सदन के पटल पर तृतीय अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और उस पर होने वाले वाद-विवाद के बाद सरकार अपना आधिकारिक जवाब पेश करेगी।

वार्षिक बजट पर नजर:

सत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 24 फरवरी 2026 को देखने को मिलेगी, जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। इस बजट से राज्य के युवाओं, किसानों और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

सत्र के दौरान कुल 17 दिनों तक राज्य की नीतियों, वित्तीय प्राथमिकताओं और विभिन्न विकासात्मक योजनाओं पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होने वाली है।

बी.ए.शिक्षाशास्त्र प्रायोगिक परीक्षा 20 को होगी*
सुलतानपुर। राणा प्रताप पी जी कॉलेज के शिक्षाशास्त्र मेजर विषय के बी०ए० प्रथम,तृतीय और पंचम सेमेस्टर की मौखिकी/प्रायोगिकी परीक्षा 20 फरवरी दिन शुक्रवार को महाविद्यालय में प्रातः 10 बजे से कला संकाय में सम्पन्न होगी। विभागाध्यक्ष डॉ० शिल्पी सिंह ने बताया कि सभी परीक्षार्थी अपने परिचय-पत्र, प्रवेश-पत्र एवं प्रायोगिक की फाइल के साथ निर्धारित तिथि एवं समयानुसार महाविद्यालय में उपस्थित हों। परीक्षा में अनुपस्थित रहने और परीक्षा छूट जाने पर सम्पूर्ण जिम्मेदारी स्वयं परीक्षार्थियों की होगी ।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
बीमा क्षेत्र में अनिल गलगली को मिलियन डॉलर राउंड टेबल अवार्ड
मुंबई। प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बीमा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के साथ प्रतिष्ठित एमडीआरटी (मिलियन डॉलर राउंड टेबल) अवॉर्ड प्राप्त किया है। वर्ष 2025 के दौरान श्री गलगली ने बीमा जगत की इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि को सफलतापूर्वक हासिल किया। इस अवसर का भव्य समारोह एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कार्यालय, घाटकोपर पूर्व, मुंबई में आयोजित किया गया। क्षेत्रीय प्रबंधक राहिल जैटली और कार्यालय प्रमुख महेश चौधरी ने एमडीआरटी (MDRT) का मानक हासिल करने वाले उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में अनिल गलगली, अब्दुल लतीफ, अशफाक अहमद, नमिता ठाक्कर और शैजू जोसे शामिल हैं, जिन्होंने भी एमडीआरटी बेंचमार्क सफलतापूर्वक प्राप्त किया है। यह आयोजन एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस परिवार के लिए गर्व का क्षण रहा और बीमा क्षेत्र में बढ़ती उत्कृष्टता का प्रतीक बना।
आजमगढ़:-सड़क दुर्घटना में बाल बाल बचे दोनों युवक

वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। फूलपुर कस्बे में लखनऊ–बलिया मार्ग पर बाबा गेट के पास सोमवार को एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कार चालक की जान बच गई, जबकि साथ बैठे युवक को मामूली चोट आई। घायल का प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अशोक जायसवाल के 28 वर्षीय पुत्र विशाल अपनी शादी (19 नवम्बर) की तैयारियों के सिलसिले में कोलकाता से आने वाले रिश्तेदार को लेने शाहगंज रेलवे स्टेशन जा रहे थे। वह अपने घर से लगभग 100 मीटर ही आगे बढ़े थे कि सामने से तेज गति से आ रही ट्रक से बचने के प्रयास में उनकी लेंजर कार सड़क किनारे खोदे गए गड्ढे में असंतुलित हो गई और पास स्थित सीमेंटेड बिजली के खंभे से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि, एयरबैग खुल जाने से चालक विशाल की जान बच गई। कार में साथ बैठे अब्बास (25), पुत्र गुलाम अज़गर, निवासी चमावा को हल्की चोट आई, जिन्हें उपचार के बाद घर भेज दिया गया। दुर्घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। परिवारजन होने वाले दूल्हे की सकुशलता पर ईश्वर का आभार व्यक्त कर रहे हैं।
आजमगढ़:-शिवरात्रि पर निकली भव्य शिव बारात, उड़े अबीर-गुलाल

वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार रात आठ बजे शिव सेवा समिति के नेतृत्व में नगर में भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई। बारात नागा बाबा मंदिर परिसर से आरंभ हुई, जहां से भगवान शिव की सजीव झांकी स्वर्णिम रथ पर सवार होकर निकली। भगवान शिव की भूमिका में अमर सिंह आकर्षण का केंद्र रहे। बारात में भूत-प्रेत की झांकियों के साथ उत्साहित युवक-युवतियां व बच्चे अबीर-गुलाल उड़ाते हुए डीजे की भक्तिमय धुनों पर झूमते नजर आए। शिव तांडव व अन्य धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिव बारात फूलपुर बस स्टॉप से होते हुए बाबा परम हंस मार्ग, रामलीला मैदान, पशु अस्पताल तिराहा, पुरानी मिर्च मंडी, मां भवानी मंदिर, शनिचर बाजार, पुरानी सब्जी मंडी और चूना चौक होते हुए शंकर जी तिराहा मंदिर परिसर पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। मंदिर परिसर में महिलाओं ने द्वाराचार व परछन की रस्म निभाई और मंगलगीत गाए। हिमाचल की भूमिका सुरेश मौर्य तथा रानी मैनावती की भूमिका चम्पा मौर्य ने निभाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की सभी रस्में संपन्न कराई गईं। पुजारी राज राजेश्वर ने भगवान का पूजन कराया, जबकि आदर्श कुमार ने लावा परछन की रस्म अदा की। सिंदूरदान, फेरे सहित सभी मांगलिक कार्यक्रम विधिवत संपन्न हुए। अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में संतोष जायसवाल, सुनील प्रजापति, बृजेश यादव, निहाल मोदनवाल, उत्कर्ष मोदनवाल, सोहन जायसवाल, किशन, शांति आर्या, ममता, पूनम, रेखा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम समाप्ति तक प्रभारी सच्चिदानंद यादव, दिनेश त्रिपाठी सहित प्रशासनिक अमला व्यवस्था में जुटा रहा।
कवाल में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न: "संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण से ही राष्ट्र का उत्थान संभव--स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज शुक्रत

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ । गांव कवाल के श्री गोपाल मंदिर (कुटिया) प्रांगण में 'हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति' द्वारा एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

रविवार को गांव कव्वाल में आयोजित हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया कार्यक्रम से पूर्व गांव कव्वाल के मुख्य मार्गों से बैंड बाजे के साथ निकाली गई भव्य कलश यात्रा जिसका जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया , जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालुओं ने सहभागिता  रही। आयोजित सम्मेलन के मुख्य वक्ता, विभाग प्रचारक भूपेंद्र जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति परोपकार और त्याग की नींव पर टिकी है। उन्होंने 'विद्या भारती' और 'कल्याण आश्रम' जैसे संगठनों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज को बदलने के लिए व्यक्ति का स्वयं बदलना आवश्यक है। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि--

आज हमारी भाषा, इतिहास और संस्कारों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। हमें पश्चिमी देशों की 'लिव-इन' जैसी विकृतियों को त्याग कर अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। यदि हम अपनी भाषा और इतिहास को छोड़ देंगे, तो हमारा अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।"

उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा संदेश देते हुए कहा कि स्वधर्म का पालन ही सबसे श्रेष्ठ है। उन्होंने पूर्वजों के बलिदानों को याद दिलाते हुए युवाओं का आह्वान किया कि वे मनोरंजन के नाम पर अपनी संस्कृति का अपमान करने वाली फिल्मों के बजाय राष्ट्रभक्ति से प्रेरित इतिहास को जानें। उन्होंने कहा कि थोड़े से लालच में आकर अपना धर्म बदलना पूर्वजों के बलिदान का अपमान है। सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने समाज को एकजुट रहने पर बल दिया और अपने बच्चों को सरस्वती शिशु मंदिर जैसे विद्यालयों में भेजें, जहाँ शिक्षा के साथ तिलक और संस्कारों का मान रखा जाता है। संगठन को मजबूत करने के लिए समाज की शक्ति के जागरण के लिए संघ की शाखाओं से जुड़ें। मोबाइल की लत से बिगड़ती व्यवस्था को सुधारें और गलत संगत से परिवारों को बचाएं।धार्मिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि सप्ताह में कम से कम एक बार सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। सामाजिक समरसता को लेकर उन्होंने कहा कि श्मशान और गंगा घाट एक हैं, तो समाज में भेदभाव कैसा? हमें साथ मिलकर भोजन और संस्कारों पर ध्यान देना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल ने की तथा कार्यक्रम का संचालन अभिषेक शर्मा के द्वारा बड़े ही अच्छे तरीके से किया। तथा तालिया की गड़गड़ाहट लगातार बजती रही। इस दौरान अनेक वक्ताओं ने अपने ओजस्वी भाषण से कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज (हनुमद्धाम, शुक्लतीर्थ) ने कहा देश शताब्दी वर्ष पूरा करने जा रहा है जिसको लेकर जगह-जगह हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है उन्होंने इस सम्मेलन के द्वारा हिंदू चेतना को जागृत होना बताया तथा उन्होंने कहा  देश  विश्व गुरु बनने की ओर बढ़ रहा है और जब हिंदू चेतना जागृत होगी तो अवश्य ही देश विश्व गुरु बनेगा।

सम्मेलन के अंत में संकल्प लिया गया कि समाज में गद्दारों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है और "भारत माता की जय" के उद्घोष के साथ हिंदू समाज ने अपनी एकता का परिचय दिया। इस दौरान मुख्य रूप से उदय जी विभाग संपर्क प्रमुख गोपाल सेवानंद बाई जी पूर्व ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह सैनी शशिकांत राजवंशी नवीन सैनी गौरव जैन नितिन कंबोज पंचमुखी महादेव गढ़ी अध्यक्ष शनि अंकुर राजवंशी सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष मौजूद रहे।

महाशिवरात्रि: जानसठ में श्रद्धा का सैलाब, ‘बम-बम भोले’ के उद्घोष से गुंजायमान हुआ आकाश


जानसठ। अध्यात्म और अटूट श्रद्धा के महापर्व महाशिवरात्रि पर रविवार को जानसठ कस्बा सहित संपूर्ण ग्रामीण अंचल शिवमय हो गया। चहुंओर बिखरी शिवभक्ति की बयार और शिवालयों से गूंजते 'हर-हर महादेव' व 'बम-बम भोले' के जयकारों ने पूरे क्षेत्र को शिवलोक में बदल दिया। भोर की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने आस्था का ऐसा अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया कि हर आंख भक्ति के रंग में सराबोर नजर आई।

दुल्हन की तरह सजे शिवालय, आस्था की लंबी कतारें
पर्व के उल्लास को देखते हुए कस्बे के प्राचीन ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर गढ़ी पंचमुखी शिवालय और प्रमुख शिव मंदिरों का स्वरूप देखते ही बन रहा था। मंदिरों को सुगंधित फूलों, बंदनवारों और मनमोहक विद्युत लड़ियों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। श्रद्धा का आलम यह था कि कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के चार बजे से ही भक्त हाथों में गंगाजल और पूजन सामग्री लेकर कतारों में खड़े हो गए थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, श्रद्धालुओं का रेला बढ़ता गया और देखते ही देखते मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गईं।

पंचामृत अभिषेक से गूंजी प्रार्थनाएं----
भक्तों ने भगवान आशुतोष का प्रिय गंगाजल और दूध से अभिषेक किया। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, दही और शहद अर्पित कर महादेव का पूजन किया गया। कई स्थानों पर भक्तों ने सामूहिक रूप से रुद्राभिषेक का आयोजन किया, जिसमें वेद मंत्रों के उच्चारण से वातावरण पूरी तरह शुद्ध और पवित्र हो उठा। श्रद्धालुओं ने महादेव के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की।

भारी भीड़ और उत्सव की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। क्षेत्र में थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह स्वयं व्यवस्थाओं का जायजा लेते नजर आए। मंदिरों के प्रवेश और निकास द्वारों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी ताकि महिलाओं और बच्चों को जलाभिषेक करने में कोई असुविधा न हो। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बीच पूरा उत्सव शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ।

श्रद्धा और विश्वास का यह संगम के चलते  आज कस्बे से गांव-गांव तक हमारी जड़ें अध्यात्म से कितनी गहराई से जुड़ी हैं। जानसठ से लेकर गांव गांव के हर गली-कूचे में आज सिर्फ महादेव का नाम गुज रहा था।
जानसठ मुजफ्फरपुर
रिपोर्टर ब्रह्म प्रकाश शर्मा