‘12 साल बेमिसाल’ अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया सामूहिक पूजन, मोदी की दीर्घायु और राष्ट्र की उन्नति की कामना
ब्रह्म प्रकाश शर्मा

मीरापुर। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘12 साल बेमिसाल’ अभियान के अंतर्गत बुधवार को मीरापुर विधानसभा क्षेत्र के गांव संभलहेड़ा स्थित पंचमुखी शिव मंदिर में भव्य सामूहिक पूजन एवं प्रार्थना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन तथा देश की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से भगवान शिव के पूजन-अर्चन के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने राष्ट्र की सुख-समृद्धि, सामाजिक समरसता तथा भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि की कामना की। इस दौरान वक्ताओं ने केन्द्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, डिजिटल क्रांति, गरीब कल्याण और वैश्विक स्तर पर सम्मान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है।

कार्यक्रम के संयोजक एवं भाजपा जिला कोषाध्यक्ष अमरजीत गुर्जर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने अनेक ऐतिहासिक निर्णयों और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देखा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की नीतियों ने समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाने का कार्य किया है।

मुख्य अतिथि एवं विधान परिषद सदस्य श्रीमती वंदना वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा का लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है।

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता नजर सिंह, मण्डल प्रभारी इन्दर सिंह कश्यप, मण्डल अध्यक्ष सचिन ठाकुर, सुबोध सैनी, अरुण पाल, पूर्व मण्डल अध्यक्ष सत्येन्द्र चौधरी, नरेन्द्र गर्ग, कृष्णपाल सैनी, रूप सिंह प्रजापति, संदीप शर्मा, सुभाष पाल, संदीप पाल सहित मण्डल के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पूजन कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रहित और जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने क्षेत्र में भाजपा के ‘12 साल बेमिसाल’ अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की तथा कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार किया।
मोदी  सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मीरापुर में हुआ सामूहिक पूजन, राष्ट्र की उन्नति और प्रधानमंत्री की दीर्घायु की कामना

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ । केंद्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी मीरापुर मंडल ने ग्राम संभलहेड़ा स्थित पंचमुखी शिव मंदिर में भव्य सामूहिक पूजन एवं प्रार्थना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि एवं प्रधानमंत्री की दीर्घायु की कामना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भगवान शिव के पूजन-अर्चन से हुआ। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले 12 वर्षों में विकास, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसी क्रम में सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक रूप से ईश्वर का आभार व्यक्त किया गया तथा राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। मंडल अध्यक्ष इंदर सिंह कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है और देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। कार्यक्रम संयोजक एवं भाजपा जिला कोषाध्यक्ष अमरजीत गुर्जर ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। देश आज आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विश्व समुदाय भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार कर रहा है। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नजर सिंह, मंडल प्रभारी इन्दर सिंह कश्यप, मंडल अध्यक्ष सचिन ठाकुर, सुबोध सैनी, अरुण पाल, पूर्व मंडल अध्यक्ष सत्येंद्र चौधरी, नरेंद्र गर्ग, कृष्णपाल सैनी, रूप सिंह प्रजापति, संदीप शर्मा, सुभाष पाल, संदीप पाल सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना करते हुए भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रहित एवं जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया
प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
यूपी में गर्मी का कहर: बांदा 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 17 जिलों में लू और 36 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में भीषण गर्मी, लू और उमस लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं, तो दूसरी ओर तराई और कुछ अन्य क्षेत्रों में आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज ने प्रदेशवासियों को असमंजस में डाल दिया है।

मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे अधिक देखने को मिला। बांदा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा प्रयागराज में 44.6 डिग्री, झांसी में 44.4 डिग्री, कानपुर में 43.9 डिग्री और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्म हवाओं और उमस ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया। बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने थोड़ी राहत भी दी। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और उमस ने लोगों को परेशान किया।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में लू चलने की संभावना है। वहीं तराई क्षेत्र समेत 36 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि उमस बरकरार रह सकती है।

राजधानी लखनऊ में भी मौसम का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिला। दिनभर कड़ी धूप और गर्मी के बाद मंगलवार शाम को कई इलाकों में तेज आंधी चली। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 जून से राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि तब तक लोगों को भीषण गर्मी और लू से सतर्क रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से कम निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और बदलते मौसम का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
झारखंड के 17 जिलों में येलो अलर्ट। अगले 24-48 घंटे भारी बारिश, आंधी, वज्रपात की आशंका।

राँची। मौसम एक बार फिर अपना रुप बदल रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, राँची और आसपास के क्षेत्रों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान 200 मिमी तक बारिश दर्ज की जा सकती है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा।

आईएमडी ने राँची, खूँटी, गुमला, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, धनबाद और गिरिडीह समेत 17 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

मौसम विभाग ने राँची, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में वज्रपात की आशंका जताई है। बारिश के बावजूद पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम के कुछ इलाकों में भीषण गर्मी बनी रह सकती है। यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने की संभावना है।

राँची, दुमका, देवघर, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा में बादल और बारिश के कारण मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की उम्मीद है।

लोकप्रिय चेयरमैन प्रवीन अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस पर पौध वितरण कर लगाने और सुरक्षा का संकल्प दिलाया*
सुल्तानपुर,लोकप्रिय चेयरमैन श्री प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर "पौध वितरण कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पंचमुखी हनुमान मंदिर डाक घर चौराहा के पास नगर पालिका परिषद के सभी सभासदों ने मिलकर यह आयोजन किया। दरअसल इस आयोजन में सार्वजनिक रूप से 1500 पौधे लोगों में बांटे गए। हर व्यक्ति से यह अपील की गई कि पौधा लेकर जाएं लगाएं और फिर उसकी देखभाल करें।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहाकि " पेड़" हर व्यक्ति को लगाना चाहिए। जो देखभाल कर सके वही यह पौधा ले जाकर लगाने का हकदार है, नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने निवेदन करते हुए पर्यावरण प्रेमियों से कहाकि एक वृक्ष जरूर लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। वैवाहिक वर्षगांठ जैसे मौके को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का यह सन्देश रहा। लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना और सिर्फ पौधा देना ही नहीं,बल्कि उसकी अच्छे से जिम्मेदारी लेने का संकल्प लेना। नगरक्षेत्र के लोकप्रिय भाजपा नेता व नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वर्षगांठ को समाजसेवा से जोड़कर 1500 पौधे वितरण किए गए और लोगों से एक-एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।
35वीं वर्षगांठ पर सुल्तानपुर नगरपालिका परिषद चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल का सराहनीय कार्य,किया पौधा वितरण*
सुल्तानपुर,अपने विवाह की 35वीं वर्षगांठ पर आज सुल्तानपुर के नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने सराहनीय कार्य किया। तामझाम से दूर उन्होंने बेहद सादगी के साथ वैवाहिक वर्षगांठ मनाते हुए नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया और ज्यादा से ज्यादा लोगों से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पौधरोपण का अनुरोध किया । दरअसल नगर के पोस्ट ऑफिस चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर आज नगर पालिका के सभासदों द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान पहले तो चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने मंदिर में जाकर पूजन अर्चन किया और उसके बाद नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया। उन्होंने कहा कि आज उनके विवाह के 35 वर्ष पूरे हुए। इसलिए पौध वितरण कर कार्यक्रम सभासदों द्वारा आयोजित किया गया। प्रवीण अग्रवाल के अनुरोध किया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाये और सबसे जरूरी बात की उसकी देखरेख करे ताकि हमारा पेड़ सुरक्षित रह सके।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
तुलसीपुर एवं गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात
बलरामपुर ।  मुख्यमंत्री  कल दिनांक 05 जून 2026 को तहसील तुलसीपुर के मध्य नगर–चमरगोझिया मार्ग पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा तुलसीपुर एवं विधानसभा गैसड़ी क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे।
कार्यक्रम स्थल का आयुक्त देवीपाटन मंडल श्रीमती दुर्गाशक्ति नागपाल, आईजी देवीपाटन मंडल, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन एवं मुख्य विकास अधिकारी  हिमांशु गुप्ता द्वारा निरीक्षण कर तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
अधिकारियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, साफ-सफाई, मंच, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
पंचम बड़े मंगलवार पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन
मेरठ/बहसूमा, 2 जून 2026। ज्येष्ठ मास के पंचम बड़े मंगलवार के अवसर पर मवाना नगर स्थित शिव मंदिर, पक्का तालाब के निकट समस्त सनातन परिवार के तत्वावधान में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं श्रीहनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने देश में चल रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए राष्ट्र में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूरे वातावरण में भक्तिमय भजनों, जयकारों और आरती से आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नामित सभासद अक्षत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा। उनका उद्देश्य समाज के लोगों को एकजुट कर भक्ति एवं संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग जाति एवं भेदभाव को भुलाकर एकता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ें, यही इस आयोजन का मुख्य संदेश है।

कार्यक्रम में भाजपा नेता अशोक चौधरी, सभासद अवजीत चौहान, ठाकुर शनि प्रताप, अर्पित पांडे, भाजपा उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष सोकीनदर गुर्जर, भरत अरोरा, आदित्य ठाकुर, विनोद गुप्ता, विवेक अग्रवाल, सुभाष गाबा, अंकुर सैनी, अमर गुप्ता, पल्लव गुप्ता, आशीष सैनी, मुकुल चौहान, चिराग चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। ⛳️
‘12 साल बेमिसाल’ अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया सामूहिक पूजन, मोदी की दीर्घायु और राष्ट्र की उन्नति की कामना
ब्रह्म प्रकाश शर्मा

मीरापुर। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘12 साल बेमिसाल’ अभियान के अंतर्गत बुधवार को मीरापुर विधानसभा क्षेत्र के गांव संभलहेड़ा स्थित पंचमुखी शिव मंदिर में भव्य सामूहिक पूजन एवं प्रार्थना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन तथा देश की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से भगवान शिव के पूजन-अर्चन के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने राष्ट्र की सुख-समृद्धि, सामाजिक समरसता तथा भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि की कामना की। इस दौरान वक्ताओं ने केन्द्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, डिजिटल क्रांति, गरीब कल्याण और वैश्विक स्तर पर सम्मान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है।

कार्यक्रम के संयोजक एवं भाजपा जिला कोषाध्यक्ष अमरजीत गुर्जर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने अनेक ऐतिहासिक निर्णयों और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देखा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की नीतियों ने समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाने का कार्य किया है।

मुख्य अतिथि एवं विधान परिषद सदस्य श्रीमती वंदना वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा का लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है।

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता नजर सिंह, मण्डल प्रभारी इन्दर सिंह कश्यप, मण्डल अध्यक्ष सचिन ठाकुर, सुबोध सैनी, अरुण पाल, पूर्व मण्डल अध्यक्ष सत्येन्द्र चौधरी, नरेन्द्र गर्ग, कृष्णपाल सैनी, रूप सिंह प्रजापति, संदीप शर्मा, सुभाष पाल, संदीप पाल सहित मण्डल के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पूजन कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रहित और जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने क्षेत्र में भाजपा के ‘12 साल बेमिसाल’ अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की तथा कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार किया।
मोदी  सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मीरापुर में हुआ सामूहिक पूजन, राष्ट्र की उन्नति और प्रधानमंत्री की दीर्घायु की कामना

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ । केंद्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी मीरापुर मंडल ने ग्राम संभलहेड़ा स्थित पंचमुखी शिव मंदिर में भव्य सामूहिक पूजन एवं प्रार्थना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि एवं प्रधानमंत्री की दीर्घायु की कामना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भगवान शिव के पूजन-अर्चन से हुआ। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले 12 वर्षों में विकास, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसी क्रम में सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक रूप से ईश्वर का आभार व्यक्त किया गया तथा राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। मंडल अध्यक्ष इंदर सिंह कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है और देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। कार्यक्रम संयोजक एवं भाजपा जिला कोषाध्यक्ष अमरजीत गुर्जर ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। देश आज आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विश्व समुदाय भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार कर रहा है। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नजर सिंह, मंडल प्रभारी इन्दर सिंह कश्यप, मंडल अध्यक्ष सचिन ठाकुर, सुबोध सैनी, अरुण पाल, पूर्व मंडल अध्यक्ष सत्येंद्र चौधरी, नरेंद्र गर्ग, कृष्णपाल सैनी, रूप सिंह प्रजापति, संदीप शर्मा, सुभाष पाल, संदीप पाल सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना करते हुए भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रहित एवं जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया
प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
यूपी में गर्मी का कहर: बांदा 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 17 जिलों में लू और 36 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में भीषण गर्मी, लू और उमस लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं, तो दूसरी ओर तराई और कुछ अन्य क्षेत्रों में आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज ने प्रदेशवासियों को असमंजस में डाल दिया है।

मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे अधिक देखने को मिला। बांदा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा प्रयागराज में 44.6 डिग्री, झांसी में 44.4 डिग्री, कानपुर में 43.9 डिग्री और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्म हवाओं और उमस ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया। बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने थोड़ी राहत भी दी। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और उमस ने लोगों को परेशान किया।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में लू चलने की संभावना है। वहीं तराई क्षेत्र समेत 36 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि उमस बरकरार रह सकती है।

राजधानी लखनऊ में भी मौसम का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिला। दिनभर कड़ी धूप और गर्मी के बाद मंगलवार शाम को कई इलाकों में तेज आंधी चली। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 जून से राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि तब तक लोगों को भीषण गर्मी और लू से सतर्क रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से कम निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और बदलते मौसम का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
झारखंड के 17 जिलों में येलो अलर्ट। अगले 24-48 घंटे भारी बारिश, आंधी, वज्रपात की आशंका।

राँची। मौसम एक बार फिर अपना रुप बदल रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, राँची और आसपास के क्षेत्रों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान 200 मिमी तक बारिश दर्ज की जा सकती है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा।

आईएमडी ने राँची, खूँटी, गुमला, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, धनबाद और गिरिडीह समेत 17 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

मौसम विभाग ने राँची, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में वज्रपात की आशंका जताई है। बारिश के बावजूद पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम के कुछ इलाकों में भीषण गर्मी बनी रह सकती है। यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने की संभावना है।

राँची, दुमका, देवघर, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा में बादल और बारिश के कारण मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की उम्मीद है।

लोकप्रिय चेयरमैन प्रवीन अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस पर पौध वितरण कर लगाने और सुरक्षा का संकल्प दिलाया*
सुल्तानपुर,लोकप्रिय चेयरमैन श्री प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर "पौध वितरण कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पंचमुखी हनुमान मंदिर डाक घर चौराहा के पास नगर पालिका परिषद के सभी सभासदों ने मिलकर यह आयोजन किया। दरअसल इस आयोजन में सार्वजनिक रूप से 1500 पौधे लोगों में बांटे गए। हर व्यक्ति से यह अपील की गई कि पौधा लेकर जाएं लगाएं और फिर उसकी देखभाल करें।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहाकि " पेड़" हर व्यक्ति को लगाना चाहिए। जो देखभाल कर सके वही यह पौधा ले जाकर लगाने का हकदार है, नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने निवेदन करते हुए पर्यावरण प्रेमियों से कहाकि एक वृक्ष जरूर लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। वैवाहिक वर्षगांठ जैसे मौके को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का यह सन्देश रहा। लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना और सिर्फ पौधा देना ही नहीं,बल्कि उसकी अच्छे से जिम्मेदारी लेने का संकल्प लेना। नगरक्षेत्र के लोकप्रिय भाजपा नेता व नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वर्षगांठ को समाजसेवा से जोड़कर 1500 पौधे वितरण किए गए और लोगों से एक-एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।
35वीं वर्षगांठ पर सुल्तानपुर नगरपालिका परिषद चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल का सराहनीय कार्य,किया पौधा वितरण*
सुल्तानपुर,अपने विवाह की 35वीं वर्षगांठ पर आज सुल्तानपुर के नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने सराहनीय कार्य किया। तामझाम से दूर उन्होंने बेहद सादगी के साथ वैवाहिक वर्षगांठ मनाते हुए नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया और ज्यादा से ज्यादा लोगों से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पौधरोपण का अनुरोध किया । दरअसल नगर के पोस्ट ऑफिस चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर आज नगर पालिका के सभासदों द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान पहले तो चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने मंदिर में जाकर पूजन अर्चन किया और उसके बाद नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया। उन्होंने कहा कि आज उनके विवाह के 35 वर्ष पूरे हुए। इसलिए पौध वितरण कर कार्यक्रम सभासदों द्वारा आयोजित किया गया। प्रवीण अग्रवाल के अनुरोध किया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाये और सबसे जरूरी बात की उसकी देखरेख करे ताकि हमारा पेड़ सुरक्षित रह सके।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
तुलसीपुर एवं गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात
बलरामपुर ।  मुख्यमंत्री  कल दिनांक 05 जून 2026 को तहसील तुलसीपुर के मध्य नगर–चमरगोझिया मार्ग पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा तुलसीपुर एवं विधानसभा गैसड़ी क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे।
कार्यक्रम स्थल का आयुक्त देवीपाटन मंडल श्रीमती दुर्गाशक्ति नागपाल, आईजी देवीपाटन मंडल, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन एवं मुख्य विकास अधिकारी  हिमांशु गुप्ता द्वारा निरीक्षण कर तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
अधिकारियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, साफ-सफाई, मंच, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
पंचम बड़े मंगलवार पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन
मेरठ/बहसूमा, 2 जून 2026। ज्येष्ठ मास के पंचम बड़े मंगलवार के अवसर पर मवाना नगर स्थित शिव मंदिर, पक्का तालाब के निकट समस्त सनातन परिवार के तत्वावधान में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं श्रीहनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने देश में चल रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए राष्ट्र में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूरे वातावरण में भक्तिमय भजनों, जयकारों और आरती से आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नामित सभासद अक्षत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा। उनका उद्देश्य समाज के लोगों को एकजुट कर भक्ति एवं संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग जाति एवं भेदभाव को भुलाकर एकता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ें, यही इस आयोजन का मुख्य संदेश है।

कार्यक्रम में भाजपा नेता अशोक चौधरी, सभासद अवजीत चौहान, ठाकुर शनि प्रताप, अर्पित पांडे, भाजपा उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष सोकीनदर गुर्जर, भरत अरोरा, आदित्य ठाकुर, विनोद गुप्ता, विवेक अग्रवाल, सुभाष गाबा, अंकुर सैनी, अमर गुप्ता, पल्लव गुप्ता, आशीष सैनी, मुकुल चौहान, चिराग चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। ⛳️