एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री
—  डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार


माना कि महिलाएँ आज भी
रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र,
प्रबंधन, बैंकिंग और अनेक क्षेत्रों में
संख्या के आधार पर पुरुषों से कम दिखाई देती हैं…

लेकिन फिर भी
इन सभी क्षेत्रों के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों,
अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और विद्वानों की
पहली गुरु, पहली पाठशाला
और पहली प्रयोगशाला
एक स्त्री ही होती है —
माँ।

वह प्रयोगशाला
जहाँ इंसान गढ़े जाते हैं…
जहाँ संस्कारों की नींव रखी जाती है,
जहाँ प्रेम, त्याग, अनुशासन
और मानवता का निर्माण होता है।

स्त्रियाँ जन्मजात विदुषी होती हैं।
वह लक्ष्मी भी हैं,
अन्नपूर्णा भी हैं,
सरस्वती भी हैं…
और समय आने पर
दुर्गा भी बन जाती हैं।

जिसे दुनिया अक्सर
केवल “घर संभालना” कहकर
छोटा समझ लेती है,
असल में वही
सबसे बड़ा प्रबंधन है।

एक पुरुष शायद घर चला सकता है,
पर एक स्त्री
पूरे घर में जीवन भर देती है।
वह दीवारों को घर
और घर को परिवार बनाती है।

इतिहास गवाह है
कि संसार के बड़े-बड़े वीर,
महापुरुष और युग निर्माता भी
किसी स्त्री की गोद में ही
संस्कार पाकर महान बने।

वह माँ राजमाता जिजाबाई ही थीं
जिन्होंने बालक शिवा को
केवल पुत्र नहीं,
एक वीर, धर्मरक्षक और राष्ट्रनायक
छत्रपति शिवाजी महाराज बनाया।

वह माँ जयवंता बाई ही थीं
जिन्होंने अपने पुत्र में
स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम के
ऐसे संस्कार डाले
कि वही बालक आगे चलकर
महाराणा प्रताप बना।

क्योंकि संसार की हर महान प्रतिभा की
पहली पाठशाला
एक माँ होती है।

एक स्त्री कितनी विदुषी होती है,
आइए उसके जीवन को ही
एक जीवित विश्वविद्यालय मानकर
उसकी अद्भुत विद्वता को समझने का प्रयास करें।

क्या कभी किसी ने
सच में समझा है
उस स्त्री की बुद्धिमत्ता को
जो दिन-रात
सिर्फ घर नहीं संभालती,
बल्कि जीवन सँवारती है?

हम डिग्रियों में ज्ञान ढूँढते हैं,
पद और पहचान में सम्मान ढूँढते हैं…
पर हर घर में
एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय बसता है।

जहाँ बिना किसी किताब के
हर दिन जीवन का विज्ञान जन्म लेता है…
जहाँ अनुभव ही शिक्षा है,
और प्रेम ही सबसे बड़ी डिग्री।

जिसे दुनिया केवल घर समझती है,
वहीं से पीढ़ियाँ संस्कार सीखती हैं।
वहाँ केवल दिनचर्या नहीं चलती,
वहाँ रिश्ते, संवेदनाएँ
और सभ्यताएँ जन्म लेती हैं।

गणित वहाँ हर रोज़ मुस्कुराता है—

कितने लोगों की कितनी ज़रूरतें,
कहाँ कितना समय देना है,
कैसे सीमित साधनों में
सबकी इच्छाओं को संतुलित करना है।

बिना कॉपी-कलम के
हर हिसाब सही हो जाता है,
क्योंकि माँ के अनुभव में
ईश्वर का ज्ञान समा जाता है।

भौतिक विज्ञान भी वहीं बसता है—

कब धैर्य रखना है,
कब दृढ़ होना है,
कब मौन रहकर समझाना है,
और कब आवाज़ उठानी है।

जीवन की परिस्थितियों का
इतना सटीक संतुलन,
शायद किताबें भी
इतने प्रेम से न सिखा पाएँ।

रसायन विज्ञान का अद्भुत संसार—

वह टूटे मनों को जोड़ देती है,
क्रोध को प्रेम में बदल देती है,
उदासी में आशा घोल देती है,
और संघर्षों में साहस मिला देती है।

उसके स्पर्श में ऐसा जादू होता है
कि बिखरे हुए रिश्ते भी
फिर मुस्कुराने लगते हैं।

प्रबंधन कला की वह जीवित मिसाल है—

एक साथ चार काम करना,
सबको समय पर संभालना,
कम समय में सब व्यवस्थित करना।

यह किसी बड़ी कंपनी का
मैनेजमेंट नहीं तो और क्या है?

कॉरपोरेट की बड़ी-बड़ी बैठकों में
जिस “मैनेजमेंट स्किल” की बातें होती हैं,
उसका सबसे जीवंत रूप तो
सदियों से एक स्त्री के जीवन में दिखाई देता है।

मल्टीटास्किंग उसकी पहचान है—

एक तरफ चाय उबल रही है,
पूजा की थाली भी सज रही है,
पति और बच्चों का टिफिन भी भर रहा है,
बच्चों को उठाकर तैयार भी किया जा रहा है।

फोन भी उठा रही है,
दरवाज़ा भी खोल रही है,
और बारिश आ जाए तो
छत से कपड़े भी दौड़कर ला रही है।

खुद भी ऑफिस के लिए
तैयार हो रही है,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है,
और घर व्यवस्थित चलता रहता है।

उसकी निरीक्षण शक्ति अद्भुत होती है—

दाल पकी या नहीं,
बच्चे का मन उदास है या नहीं,
पति की थकान चेहरे पर दिख रही है या नहीं,
घर में कौन चुपचाप किसी चिंता में है—

उसकी नज़र सब समझ जाती है।
वह शब्दों से पहले
चेहरों की भाषा पढ़ लेती है।

अर्थशास्त्र भी वही संभालती है—

सीमित बजट में घर चलाना,
भोजन तैयार करना,
बचे हुए संसाधनों का सदुपयोग करना,
मौसम के अनुसार आवश्यकताओं को चुनना।

तीज-त्योहार की तैयारी,
अतिथियों की आवभगत,
नेग और रिश्तों का निर्वाह—
घर की आर्थिक नीति
अक्सर उसी की समझ से चलती है।

मनोविज्ञान भी उसे भलीभाँति आता है—

किसका मन उदास है,
किसे प्रोत्साहन चाहिए,
कौन बिना कहे दर्द छिपा रहा है—

वह सब जानती है।

कभी वह
मदर टेरेसा सी ममता बन जाती है,
तो कभी अपने दुःख छिपाकर
सबके जीवन में उजाला भर देती है।

वह केवल परिवार नहीं संभालती,
पूरा संसार सँभालने की क्षमता रखती है।

वह स्त्री चाहे पढ़ी-लिखी हो या नहीं,
अंग्रेज़ी जानती हो या नहीं,
पर उसके अनुभव, धैर्य और प्रेम के आगे
बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ भी छोटी लगती हैं।

वह केवल अन्नपूर्णा नहीं,
समय आने पर दुर्गा भी बन जाती है।
प्रेम दे तो गंगा सी निर्मल,
और अन्याय हो तो
चंडी सी प्रखर हो जाती है।

स्त्री को कम मत आँकिए,
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक,
डॉक्टर, लेखक, सैनिक और उद्योगपति भी
सबसे पहले
एक माँ की गोद में ही गढ़े जाते हैं।

दुनिया की हर महान प्रतिभा की
पहली प्रयोगशाला,
एक स्त्री की ममता ही होती है।

क्योंकि
स्त्री केवल घर नहीं संभालती,
वह पीढ़ियाँ गढ़ती है,
संस्कार बोती है,
और प्रेम से संसार रचती है।

इसलिए अगली बार
जब वह चुपचाप
सबकी चिंता करती दिखाई दे,
तो उसे सामान्य मत समझिए…

एक पल रुककर
उस माँ, पत्नी, बहन या बेटी को
दिल से धन्यवाद ज़रूर कहिए,
जो अपने हिस्से की थकान छिपाकर भी
आपके जीवन को सहज बनाती है।

और केवल धन्यवाद ही नहीं…
कभी उसके लिए भी
थोड़ा समय निकालिए,
उसकी मुस्कान का कारण बनिए।

आइए नमन करें
उस महामानवी को,
जो अपने हाथों से
केवल कार्य नहीं करती,
बल्कि पूरे घर में
प्रेम, अपनापन और जीवन भर देती है।

जो हर परेशानी को
मुस्कान से हल्का कर देती है,
और अपने त्याग से
घर को सचमुच स्वर्ग बना देती है।
देवघर भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 : विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन ।
देवघर: भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन - फाइनल में बादशाह - 11 को 5 विकेट से रौंदा - आकर्षक आतिशबाजी के बीच केकेएन स्टेडियम में समापन देवघर स्थानीय केकेएन स्टेडियम में खेले गए 'स्व. बर्धन खवाड़े ट्रॉफी सीजन- 2 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में विरांश स्टाइलिश- 11 ने बादशाह-11 को 5 विकेट से हराकर चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। खेल प्रेमियों की भारी भीड़ के बीच खेला गया खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। इस अवसर पर अपने संबोधन के क्रम में खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह से यह क्रिकेट टूर्नामेंट देवघर सहित झारखंड में प्रसिद्ध हो रहा है आने वाले दिनों में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा। खिलाड़ियों के जोश को देखते हुए घोषणा की कि खिलाड़ियों को और बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए अगले साल स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट को और आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नकद पुरस्कार राशि भी बढ़ाई जाएगी। कहा कि क्रिकेट सहित अन्य खेलों को भी भी बढ़ावा देने के लिए हमेशा पहल होगी। कोशिश के प्रयासों ने दिलायी जीत :- टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बादशाह - 11 की शुरुआत ठीक-ठाक रही, लेकिन विरांश स्टाइलिश 11 की कसी हुई गेंदबाजी के सामने निर्धारित 12 ओवरों में 9 विकेट खोकर 119 रन ही बना सकी। बादशाह 11 की ओर से सीनियर वर्मा ने सर्वाधिक 39 रन (24 गेंद) और अभिषेक ने 22 रनों का योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 की तरफ से तुपलाला ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 3 ओवर में केवल 16 रन देकर 2 विकेट चटकाए। 120 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी विरांश स्टाइलिश 11 की शुरुआत बेहद खराब रही और शीर्ष 4 बल्लेबाज मात्र 14 रन के कुल स्कोर पर पवेलियन लौट गए। उसके बाद कोशिश कुमार ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए मैच का पासा ही पलट दिया। कोशिश ने मात्र 31 गेंदों में 4 चौकों और 6 गगनचुंबी छक्कों की मदद से नाबाद 70 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। वहीं, मोनू सिंह ने 29 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 ने 11.1 ओवर में 5 विकेट खोकर 123 रन बनाकर खिताबी जीत दर्ज की। विजेता और उपविजेता पर हुई पैसों की बारिश :- टूर्नामेंट के समापन के बाद मुख्य अतिथि सह टूर्नामेंट के चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े सहित विशिष्ट अतिथि एसबीआई के आरएम प्रशांत मिश्रा ने संयुक्त रूप से विजेता टीम विरांश स्टाइलिश 11 के कैप्टन को चमचमाती ट्रॉफी और 1 लाख 10 हजार रुपए का नकद पुरस्कार सौंपा। वहीं, उपविजेता टीम बादशाह 11 के कैप्टन व फ्रेंचाइजी को प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. निशांत चौरसिया और टोयोटा धनबाद के मैनेजर राजीव रंजन द्वारा उप- विजेता ट्रॉफी और 55 हजार रुपए की नगद राशि प्रदान की गई। टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों का उत्साह भी चरम पर था। कैच पकड़ने वाले दर्शक को 5100 :- चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े द्वारा स्टैंड्स में एक शानदार कैच पकड़ने वाले दर्शक राज को 5100 रुपए का नकद पुरस्कार भी दिया गया। टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कार :- - मैन ऑफ द सीरीज :- लोकनाथ (पीवीआर पैंथर) - बेस्ट बैट्समैन :- संजू यादव (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट बॉलर :- विशाल (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट फील्डर :- अभिषेक (बादशाह 11) इनकी रही भूमिका :- मैच में निर्णायक (अंपायर) की भूमिका लाली और खुशहाल शेख ने निभाई, जबकि राकेश राय, अशोक कुमार, शैलेश कुमार और गौरव ने उद्घोषक के रूप में समां बांधा। कौन-कौन रहे उपस्थित :- मंच पर उपस्थित अतिथियों और कमेटी सदस्यों में आयोजन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह, रितेश केसरी, धर्मेंद्र देव और ऋषि राज सिंह ने भी खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर मुख्य रूप से नवीन शर्मा मुखिया सुशील महथा, दीपक दुबे, अजय खवाड़े, रोहित कुमार, नीरज झा, धीरज और पंकज वाजपेई आदि उपस्थित रहे। डॉल्फ़िन डांस के कलाकारों ने मोहा मन :- डॉल्फिन डांस एकेडमी के बच्चों द्वारा प्रशिक्षक पल्लवी झा के नेतृत्व में गणेश वंदना सहित अन्य गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
गर्मी पर भारी पड़ा आस्था का संकल्प,सीताकुण्ड धाम पर गोमती मित्रों की तीन घंटे चली सफाई मुहिम
सुलतानपुर:-भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद गोमती मित्रों का सेवा संकल्प डिगा नहीं,रविवार को गोमती मित्र मण्डल के सदस्यों ने सीताकुण्ड धाम पर अपना साप्ताहिक श्रमदान अभियान पूरी निष्ठा के साथ जारी रखा,भारी तपन के बीच गोमती मित्रों ने लगातार तीन घंटे तक पूरे परिसर और सीता उपवन की सफाई की।
अभियान के दौरान न केवल तट व परिसर को चमकाया बल्कि नदी के भीतर प्रवेश कर भारी मात्रा में कूड़ा-करकट, प्लास्टिक,फटे कपड़े और सड़ रही पूजन सामग्री को बाहर निकाल उसे एकत्रित कर उचित निस्तारण के लिए भेजा गया।
वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश पाठक ने बताया कि मौसम चाहे जैसा भी हो प्रदेश अध्यक्ष मदन सिंह के नेतृत्व में आदि गंगा माँ गोमती को स्वच्छ और निर्मल बनाने का उनका यह संकल्प रुकता नहीं है।
श्रमदान में प्रदेश अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह मदन,प्रवक्ता रमेश माहेश्वरी, सेनजीत कसौधन, डॉ कुंवर दिनकर प्रताप सिंह,अरुण गुप्ता,मुन्ना सोनी,विकास यादव,सौरभ गुप्ता, अजीत शर्मा, राकेश मिश्रा,विकास शर्मा,मुन्ना पाठक,अजय प्रताप सिंह,अभय मिश्रा,अभय सोनी,रामू सोनी,राकेश सिंह दद्दू,ऋतिक आदि उपस्थित रहे।
गर्मी पर भारी पड़ा आस्था का संकल्प,सीताकुण्ड धाम पर गोमती मित्रों की तीन घंटे चली सफाई मुहिम*
सुलतानपुर,भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद गोमती मित्रों का सेवा संकल्प डिगा नहीं,रविवार को गोमती मित्र मण्डल के सदस्यों ने सीताकुण्ड धाम पर अपना साप्ताहिक श्रमदान अभियान पूरी निष्ठा के साथ जारी रखा,भारी तपन के बीच गोमती मित्रों ने लगातार तीन घंटे तक पूरे परिसर और सीता उपवन की सफाई की। अभियान के दौरान न केवल तट व परिसर को चमकाया बल्कि नदी के भीतर प्रवेश कर भारी मात्रा में कूड़ा-करकट, प्लास्टिक,फटे कपड़े और सड़ रही पूजन सामग्री को बाहर निकाल उसे एकत्रित कर उचित निस्तारण के लिए भेजा गया। वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश पाठक ने बताया कि मौसम चाहे जैसा भी हो प्रदेश अध्यक्ष मदन सिंह के नेतृत्व में आदि गंगा माँ गोमती को स्वच्छ और निर्मल बनाने का उनका यह संकल्प रुकता नहीं है। श्रमदान में प्रदेश अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह मदन,प्रवक्ता रमेश माहेश्वरी, सेनजीत कसौधन, डॉ कुंवर दिनकर प्रताप सिंह,अरुण गुप्ता,मुन्ना सोनी,विकास यादव,सौरभ गुप्ता, अजीत शर्मा, राकेश मिश्रा,विकास शर्मा,मुन्ना पाठक,अजय प्रताप सिंह,अभय मिश्रा,अभय सोनी,रामू सोनी,राकेश सिंह दद्दू,ऋतिक आदि उपस्थित रहे।
एसपी के आदेश पर आत्महत्या के मामले में आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज
बीस दिन पूर्व पत्नी की बेवफाई से दुखी युवक ने लगाई थी फांसी

रितेश मिश्रा
हरदोई।मझिला थाना के ग्राम कोरिगावा के मजरा झबरा पुरवा में गांव के बाहर बीस दिन पूर्व युवक द्वारा लगाई गई फांसी की घटना के मामले में मृतक के पिता की गुहार पर एसपी ने मझिला पुलिस को आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जाँच करने के आदेश दिए हैँ।
      मृतक के पिता रामकिशोर पुत्र मिहीलाल के अनुसार उसके पुत्र शिवाय रतन का विवाह करीब पंद्रह वर्ष पूर्व नन्ही के साथ हुआ था। नन्ही के अवैध संबंध पड़ोस गांव रामभजन पुरवा निवासी प्रदीप पुत्र विश्राम के साथ बन गए जिसका पता पुत्र शिव रतन को चल गया उसके बाद आये दिन लड़ाई झगड़ा होने लगा नन्ही अपने पति के साथ मारपीट करने लगी। 28 अप्रैल की रात करीब बारह बजे शिव रतन ने अपनी पत्नी नन्ही को विपक्षी के साथ हम बिस्तर रंगे हाथ पकड़ लिया। विपक्षी के चाचा पंचम उसके साथ था।नन्ही ने दोनों के साथ मिलकर पति शिवरतन को काफ़ी धमकाया और जान से मारने की धमकी दी। नन्ही विपक्षी प्रदीप के साथ घर से चली गई। शिव रतन ने अपनी पत्नी को काफ़ी तलाश किया न मिलने पर दुखी होकर 29 अप्रैल को गांव के बाहर रामपाल पंडित के बाग़ में पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।पुलिस द्वारा उसके पति के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। एसपी के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
समाज के माथे पर कलंक –“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो”
–डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

आज सुबह जैसे ही हाथ में नवभारत टाइम्स का अखबार लिया, एक मार्मिक शीर्षक ने मन को भीतर तक झकझोर दिया —
“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…”

यह केवल एक पंक्ति नहीं थी, यह उन असंख्य बेटियों की मौन चीख थी, जो दहेज जैसी कुप्रथा की भेंट चढ़ जाती हैं।
33 वर्षीय टि्वशा  शर्मा और 25 वर्षीय दीपिका…
दो नाम नहीं, दो अधूरे सपने थे।
दो जिंदगियाँ थीं, जिन्हें जीने का पूरा अधिकार था।
लेकिन दहेज की प्रताड़ना ने उन्हें इस हद तक तोड़ दिया कि उनकी जिंदगी खत्म हो गई।

यह हत्या थी या आत्महत्या — यह तो जांच का विषय है,
लेकिन इतना तय है कि जिन लोगों ने एक लड़की को अपने जीवन से हाथ धोने पर मजबूर कर दिया, वे किसी भी रूप में दोषी हैं।
ऐसे दरिंदों को कठोर से कठोर सजा मिलनी ही चाहिए।
क्योंकि किसी इंसान को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित कर देना कि वह जीने की इच्छा ही खो दे, यह भी किसी हत्या से कम नहीं।

यह समाचार पढ़कर मन में एक ही प्रश्न उठता है —
क्या सचमुच हम 21वीं सदी में जी रहे हैं?

आज महिलाएँ युद्ध क्षेत्र में देश की रक्षा कर रही हैं, अंतरिक्ष में भारत का परचम फहरा रही हैं, विज्ञान, राजनीति, साहित्य, खेल और व्यापार हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
फिर भी, उसी समाज में एक बेटी को विवाह के बाद दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, जलाया जाता है, अपमानित किया जाता है।
यह केवल अपराध नहीं, मानवता की हार है।

सबसे दुखद बात यह है कि दहेज मांगने वाले घरों में भी बहनें और बेटियाँ होती हैं।
फिर क्यों किसी और की बेटी को केवल पैसों और सामान के लिए यातना दी जाती है?
क्या रिश्तों की कीमत अब रुपयों से तय होगी?
क्या बहू अब इंसान नहीं, बल्कि मायके से सामान और धन लाने वाली एक “बैंक” बनकर रह गई है?

दहेज कभी किसी का जीवन नहीं चला सकता।
जीवन चलता है संस्कारों से, प्रेम से, सम्मान से और परिश्रम से।
भगवान ने सबको हाथ-पैर दिए हैं, शिक्षा दी है, क्षमता दी है —
तो फिर किसी बेटी के पिता की मेहनत की कमाई पर अपना अधिकार क्यों?

आज आवश्यकता केवल कानून बनाने की नहीं, सोच बदलने की है।
माता-पिता को भी चाहिए कि वे केवल “अच्छा घर” या ऊँचा दिखावा देखकर जल्दबाजी में बेटी का विवाह न करें।
रिश्तों की चमक-दमक से ज्यादा जरूरी है उस परिवार की मानसिकता को समझना।
दहेज के लालचियों की पहचान अक्सर शादी से पहले ही हो जाती है ।
कभी महंगे उपहारों की अपेक्षा में,
कभी बार-बार की मांगों में,
तो कभी तानों और व्यवहार में।

ऐसे समय में डरना नहीं चाहिए।
जरूरत पड़े तो सगाई तोड़ देनी चाहिए।
और यदि विवाह मंडप तक बात पहुँच जाए, तब भी हिम्मत करके बारात लौटा देनी चाहिए।
क्योंकि एक टूटा रिश्ता फिर भी जीवन बचा सकता है,
लेकिन गलत घर में की गई शादी पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती है।

समाज को यह समझना होगा कि बेटी कोई बोझ नहीं, वह घर की सबसे सुंदर रचना है।
जिस घर में बेटियों का सम्मान नहीं, वह घर कभी सुखी नहीं हो सकता।

आइए संकल्प लें —
न दहेज देंगे,
न दहेज लेंगे,
और न ही दहेज मांगने वालों का समर्थन करेंगे।

ताकि फिर कभी किसी अखबार की हेडिंग यह न कहे —
“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…”।
20 मई 2026 को दिखेगी चंद्रमा और बृहस्पति की शानदार खगोलीय युति


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में बनेगा अद्भुत नज़ारा, रात लगभग 10 बजे तक रहेगा दृश्य।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 20 मई 2026 की शाम, आकाश प्रेमियों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अत्यंत विशेष रहने वाली है। इस दिन पश्चिमी आकाश में चंद्रमा और सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) की मनमोहक खगोलीय युति (Conjunction) देखने को मिलेगी। यह दृश्य सूर्यास्त के बाद से लेकर लगभग रात 10 बजे तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा, जिसके बाद दोनों खगोलीय पिंड पश्चिमी क्षितिज के नीचे चले जाएंगे। यह खगोलीय घटना बिना किसी दूरबीन के भी खुली आँखों से आसानी से देखी जा सकेगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 20 मई की शाम पश्चिम दिशा में एक चमकीले अर्धचंद्राकार चंद्रमा के पास बृहस्पति ग्रह दिखाई देगा। दोनों खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत निकट प्रतीत होंगे, जिससे यह दृश्य अत्यंत आकर्षक लगेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल वैज्ञानिक दृष्टि से यह केवल दृष्टि-रेखा (Line of Sight) का प्रभाव होता है लेकिन वास्तव में चंद्रमा और बृहस्पति के बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी बनी रहती है।

*क्या होती है युति?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में “युति” उस स्थिति को कहा जाता है जब पृथ्वी से देखने पर दो खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के बहुत पास दिखाई देते हैं। इस घटना में चंद्रमा और बृहस्पति एक ही खगोलीय देशांतर (Celestial Longitude) अथवा लगभग समान राइट एसेन्शन (Right Ascension) के आसपास दिखाई देंगे। वैज्ञानिक रूप से इसे ही युति (Conjunction)  कहा जाता है।

*कितना होगा इस दौरान मैग्नीट्यूड?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान चंद्रमा का औसत प्रत्यक्ष मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 8.5 तथा बृहस्पति का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.78 के क़रीब रहेगा। खगोल विज्ञान में मैग्नीट्यूड किसी खगोलीय पिंड की चमक मापने की इकाई है। जितना अधिक ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का मान होता है, कोई भी खगोलीय पिण्ड उतना ही अधिक चमकीला दिखाई देता है। इसी कारण चंद्रमा अत्यधिक चमकीला और बृहस्पति उसके पास एक उज्ज्वल तारे जैसा दिखाई देगा।

*कितना होगा कोणीय अंतर (Angular Separation) ?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय गणनाओं के अनुसार 20 मई 2026 को चंद्रमा और बृहस्पति लगभग 3 डिग्री के कोणीय अंतर (Angular Separation) पर दिखाई देंगे। यह दूरी इतनी कम होगी कि दोनों को एक साथ साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा। हालांकि यह दूरी इतनी कम नहीं होगी कि दोनों एक ही दूरबीन फ्रेम में उच्च आवर्धन पर दिखाई दें, लेकिन सामान्य दूरबीन और बाइनोक्युलर से यह दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देगा।

*किस दिशा में और किस तारामण्डल में देखें?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह खगोलीय युति पश्चिमी आकाश में मिथुन (Gemini) तारामंडल के क्षेत्र में दिखाई देगी। इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध तारे कैस्टर (Castor) और पोलक्स (Pollux) भी मौजूद हैं। जिस शानदार खगोलीय मिथुन तारामंडल क्षेत्र में इस नज़ारे जिसमें बृहस्पति ग्रह और चंद्रमा की युति होगी, और उसी मिथुन तारामंडल क्षेत्र में नीचे की तरफ ही आप शुक्र ग्रह को भी अपनी साधारण आंखों से ही देख सकते हैं ,और इसके बाद धीरे धीरे आगामी आने वाले दिनों में बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह भी एक-दूसरे के निकट आते दिखाई देंगे,और अगले माह 9 जून 2026 को बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह की भी युति मिथुन तारामंडल में ही घटित होगी उस दौरान बुद्ध ग्रह भी मिथुन तारामंडल में दिखाई देगा इसलिए यह पूरा महीना और आगामी दिनों में ग्रहों ,उपग्रहों नक्षत्रों आदि के खगोलीय अवलोकन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो रहा है।

*कैसे देखें इस शानदार खगोलीय नज़ारे को?।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार खगोलीय घटना को देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी। यदि मौसम साफ हो और पश्चिम दिशा का क्षितिज खुला हो, तो शहरों से भी यह दृश्य आसानी से देखा जा सकेगा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह दृश्य और भी अधिक स्पष्ट रूप में नज़र आयेगा। वैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही आप इस युति को देखना शुरू कर सकते हैं लेकिन और भी अधिक बेहतर परिणाम हेतु सूर्यास्त के लगभग 30 से 40 मिनट बाद आकाश पर्याप्त अंधकारमय होने लगेगा और तभी यह युति सबसे बेहतर दिखाई देगी। ख़ासकर ग्रामीण क्षेत्रों या कम प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से यह दृश्य और अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह का कहना है कि बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसका व्यास पृथ्वी से लगभग 11 गुना अधिक है। इसके चार प्रमुख उपग्रह, आयो (Io), यूरोपा (Europa), गैनीमीड (Ganymede) और कैलिस्टो (Callisto) जोकि छोटी दूरबीन से देखे जा सकते हैं। लेकिन यदि आप कोई अच्छी सी बाइनोक्युलर या छोटी दूरबीन का उपयोग करे तो वह बृहस्पति के पास इन उपग्रहों को छोटे प्रकाश बिंदुओं के रूप में देख सकते हैं और इस युति का भी विशेष आनंद भी उठा सकते हैं।

*क्या होता है अर्थ शाइन और इस दौरान कैसे देखें ?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अर्थशाइन (Earthshine) वह हल्की रोशनी होती है जो पृथ्वी से परावर्तित होकर चंद्रमा के अंधेरे भाग पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का धुंधला हिस्सा भी दिखाई देता है। इसे “चंद्रमा पर पृथ्वी की चमक” या अर्थ शाइन भी कहा जाता है। और 20 मई 2026 को दिखाई देने वाला चंद्रमा लगभग 4 दिन पुराना बढ़ता हुआ (Waxing Crescent) चंद्रमा होगा और इसकी प्रकाशित सतह लगभग 20 से 23 प्रतिशत के आसपास रहेगी। इसलिए चंद्रमा एक सुंदर पतले अर्धचंद्र के रूप में दिखाई देगा, इसी दौरान चंद्रमा पर आप अर्थ शाइन को भी देख सकते हैं जो इस दृश्य को और भी आकर्षक बनाएगा।

*क्या होगा, पृथ्वी पर इसका असर?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में ऐसी युतियाँ केवल सुंदर दृश्य ही नहीं होतीं, बल्कि खगोल वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं। इन घटनाओं की सहायता से ग्रहों की स्थिति, कक्षीय गति और खगोलीय यांत्रिकी (Celestial Mechanics) को समझने में मदद मिलती है। प्राचीन भारतीय खगोलविद भी ग्रहों और चंद्रमा की युतियों का विस्तृत अध्ययन करते थे और कैलेंडर (पंचांग) निर्माण में उनका उपयोग किया जाता था।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार की घटनाएँ लोगों में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करती हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं को ऐसी घटनाओं का अवलोकन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्मांड की गतिशीलता को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे 20 मई 2026 की शाम पश्चिम दिशा में खुला स्थान चुनकर इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का आनंद लें। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना पूर्णतः प्राकृतिक और सुरक्षित है। इसका पृथ्वी पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है ,यह केवल ग्रहों और चंद्रमा की नियमित कक्षीय गति का परिणाम है। अंतरिक्ष विज्ञान के अनुसार पृथ्वी, चंद्रमा और ग्रह निरंतर सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं, और समय-समय पर उनकी स्थिति ऐसी बनती है कि वे पृथ्वी से देखने पर एक-दूसरे के निकट दिखाई देते हैं। इस प्रकार 20 मई 2026 की शाम खगोलीय घटनाओं के प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर बनने जा रही है, जब आकाश में चंद्रमा और बृहस्पति की चमकदार युति पश्चिमी क्षितिज को अद्भुत सौंदर्य से भर देगी।
महाराणा प्रताप जयंती व बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव का भव्य आयोजन

वसई। राजपूताना परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में चैत्र महोत्सव, संवत 2083 का भव्य स्वागत श्रद्धा, शौर्य एवं संस्कार के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति एवं क्षत्रिय धर्म का जीवंत उत्सव था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा महापुरुषों को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ ने जैसे ही सभा को आलोकित किया, पूरा प्रांगणजय भवानी  के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कारगिल के वीर योद्धा नायक दीपचंद पंचग्रामी रहे, जिनका वीरता के लिए भव्य सम्मान किया गया। जनता ने खड़े होकर अपने नायक का अभिनंदन किया।
विश्वामित्र की भूमिका में "महर्षि" टाइटल से अलंकृत नालासोपारा के अघोर पीठाधीश्वर महंत बाबा अलख राम ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सनातन  का आध्यात्मिक महत्व बताया एवं क्षत्रिय धर्म पर जोर देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य है। मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने मार्गदर्शन देते हुए कहा, _"आज से 200 साल पहले जब अंग्रेज नहीं आए थे तब एक जनवरी को नववर्ष नही मनाया जाता था, तब हमारे यहां केवल विक्रम संवत ही चलता था तथा वसंत पंचमी से होली तक पिछले वर्ष की विदाई की जाती थी एवं संपूर्ण चैत्र माह में चैत्र महोत्सव मनाकर नववर्ष का स्वागत किया जाता था । हमारे देश का हर वर्ग पूरे उत्साह से चैत्र महोत्सव मनाता था. आजके आधुनिक काल मे हर वर्ष चैत्र महोत्सव मनाकर ददन सिंह अपनी खोई हुई संस्कृती की पुनर्स्थापना कर रहे है. अपनी जड़ों से जुड़ना ही सच्चा राष्ट्रवाद है। मंच संचालन की बागडोर श्रीप्रकाश सिंह ने कुशलता से संभाली। पधारे हुए सभी अतिथियों का सत्कार राजपूताना परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष दद्दन सिंह चौहान ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर किया। कार्यक्रम में सम्मानमूर्ति के रूप में पधारीं क्षत्राणी नगरसेविका का विशेष सम्मान किया गया एवं  समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु श्रीमती बबीता देवराज सिंह, एकता सिंह, पिंकी राठौर, प्रदीपिका सिंह, जेपी सिंह, अभय कक्कड़, अशोक शेलके आदि को सम्मानित किया गया। 
नासिक से पधारे राजेंद्र सिंह चौहान, रामदुलार सिंह, लाल साहब सिंह, वीरेंद्र सिंह तोमर, कुमार शैलेंद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह एवं श्रीमती रीता सिंह सहित अनेक आर्मी एवं नेवी के जवानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। सभी वीरों ने महाराणा प्रताप जयंती एवं बाबू वीर कुंवर सिंह जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गायक दामोदर राव, नंदिनी तिवारी, पूनम सिंह एवं सूरज सिंह 'तूफानी ने अपनी सुमधुर गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति और वीर रस के गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। राजपूताना परिवार के सदस्य वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, राजेश सिंह सूर्यवंशी, बबन सिंह, ललन सिंह, अरबिंद सिंह मनोज सिंह राकेश सिंह नाहर सिंह केदार सिंह रूपेश सिंह अजय सिंह सरवन सिंह सिसोदिया नरेंद्र सिंह राणावत वीरभद्र सिंह जडेजा अश्विन सिंह जाडेजा स्वरूप सिंह जडेजा जयेंद्र सिंह जडेजा जगदीश सिंह जडेजा सत्येंद्र रावत सुनील सिंह, मोहित सिंह, विजय सिंह, विनोद सिंह, राधा रमन सिंह, अमित सिंह, नाहर सिंह, भावेश सिंह, रोहित सिंह, राम सिंह, केदारनाथ सिंह, राज चौरसिया, जयकुमार यादव एवं संस्था के सभी सदस्यो पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। श्रीमती अंजू सिंह, खुशबू सिंह, आशा सिंह, गरिमा सिंह, सुषमा सिंह, संध्या सिंह, किरण सिंह, बबीता सिंह सहित तमाम बहनों एवं माताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम के पश्चात सभी ने *सुरुचिपूर्ण भोज* का आनंद लिया एवं प्रसाद ग्रहण किया।
मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक चोरी
रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।कोतवाली छेत्र के ग्राम लोनी में लगे मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक अज्ञात चोर लेकर चम्पत हो गया।पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है। मझिला थाना के ग्राम चठिया निवासी श्यामू पुत्र प्रमोद यादव के अनुसार वह 16 मई को ग्राम लोनी में मेला देखने गया था। मेले के बाहर अपनी बाइक संख्या यूपी 34बीएच 4627 ख़डी कर कुछ सामान खरीदने लगा वापस आने पर उसकी बाइक कोई अज्ञात चोर चोरी कर ले गया। पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है।
स्वर्गीय आजाद बंसल की पंचम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित
मेरठ/रामराज। अपनी सरलता, मिलनसार स्वभाव और समाज सेवा के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता स्वर्गीय श्री आजाद बंसल आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। उनके निधन के वर्षों बाद भी क्षेत्रवासियों के मन में उनके प्रति वही सम्मान, प्रेम और अपनापन देखने को मिलता है।

रविवार को उनकी पंचम पुण्यतिथि के अवसर पर श्री सिद्धपीठ फिरोजपुर महादेव, रामराज में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, समाजसेवी एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग पहुंचे और स्वर्गीय आजाद बंसल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने कहा कि स्वर्गीय आजाद बंसल ने अपने जीवन में सदैव समाजहित और जनसेवा को सर्वोपरि रखा। उनकी सादगी, व्यवहार कुशलता और लोगों के प्रति अपनापन ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

बताया गया कि स्वर्गीय आजाद बंसल का जन्म 15 अगस्त 1947 को हुआ था। उनके परिवार में पत्नी राकेश बंसल, बड़े पुत्र राहुल बंसल एवं छोटे पुत्र रोहित बंसल हैं। श्रद्धांजलि सभा में राहुल बंसल एवं रोहित बंसल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता द्वारा दिखाए गए सेवा और सद्भाव के मार्ग पर परिवार आगे भी चलता रहेगा।

इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष हरवीर पाल ब्रह्मचारी, मास्टर श्रीपाल कोहली, डॉ. मनचंदा, सोनी गोयल, बब्बू, विपेंद्र तथा सुधा वाल्मीकि सहित विभिन्न जिलों के भाजपा नेता और क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्रद्धांजलि सभा के उपरांत प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरा वातावरण श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दिया।
एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री
—  डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार


माना कि महिलाएँ आज भी
रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र,
प्रबंधन, बैंकिंग और अनेक क्षेत्रों में
संख्या के आधार पर पुरुषों से कम दिखाई देती हैं…

लेकिन फिर भी
इन सभी क्षेत्रों के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों,
अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और विद्वानों की
पहली गुरु, पहली पाठशाला
और पहली प्रयोगशाला
एक स्त्री ही होती है —
माँ।

वह प्रयोगशाला
जहाँ इंसान गढ़े जाते हैं…
जहाँ संस्कारों की नींव रखी जाती है,
जहाँ प्रेम, त्याग, अनुशासन
और मानवता का निर्माण होता है।

स्त्रियाँ जन्मजात विदुषी होती हैं।
वह लक्ष्मी भी हैं,
अन्नपूर्णा भी हैं,
सरस्वती भी हैं…
और समय आने पर
दुर्गा भी बन जाती हैं।

जिसे दुनिया अक्सर
केवल “घर संभालना” कहकर
छोटा समझ लेती है,
असल में वही
सबसे बड़ा प्रबंधन है।

एक पुरुष शायद घर चला सकता है,
पर एक स्त्री
पूरे घर में जीवन भर देती है।
वह दीवारों को घर
और घर को परिवार बनाती है।

इतिहास गवाह है
कि संसार के बड़े-बड़े वीर,
महापुरुष और युग निर्माता भी
किसी स्त्री की गोद में ही
संस्कार पाकर महान बने।

वह माँ राजमाता जिजाबाई ही थीं
जिन्होंने बालक शिवा को
केवल पुत्र नहीं,
एक वीर, धर्मरक्षक और राष्ट्रनायक
छत्रपति शिवाजी महाराज बनाया।

वह माँ जयवंता बाई ही थीं
जिन्होंने अपने पुत्र में
स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम के
ऐसे संस्कार डाले
कि वही बालक आगे चलकर
महाराणा प्रताप बना।

क्योंकि संसार की हर महान प्रतिभा की
पहली पाठशाला
एक माँ होती है।

एक स्त्री कितनी विदुषी होती है,
आइए उसके जीवन को ही
एक जीवित विश्वविद्यालय मानकर
उसकी अद्भुत विद्वता को समझने का प्रयास करें।

क्या कभी किसी ने
सच में समझा है
उस स्त्री की बुद्धिमत्ता को
जो दिन-रात
सिर्फ घर नहीं संभालती,
बल्कि जीवन सँवारती है?

हम डिग्रियों में ज्ञान ढूँढते हैं,
पद और पहचान में सम्मान ढूँढते हैं…
पर हर घर में
एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय बसता है।

जहाँ बिना किसी किताब के
हर दिन जीवन का विज्ञान जन्म लेता है…
जहाँ अनुभव ही शिक्षा है,
और प्रेम ही सबसे बड़ी डिग्री।

जिसे दुनिया केवल घर समझती है,
वहीं से पीढ़ियाँ संस्कार सीखती हैं।
वहाँ केवल दिनचर्या नहीं चलती,
वहाँ रिश्ते, संवेदनाएँ
और सभ्यताएँ जन्म लेती हैं।

गणित वहाँ हर रोज़ मुस्कुराता है—

कितने लोगों की कितनी ज़रूरतें,
कहाँ कितना समय देना है,
कैसे सीमित साधनों में
सबकी इच्छाओं को संतुलित करना है।

बिना कॉपी-कलम के
हर हिसाब सही हो जाता है,
क्योंकि माँ के अनुभव में
ईश्वर का ज्ञान समा जाता है।

भौतिक विज्ञान भी वहीं बसता है—

कब धैर्य रखना है,
कब दृढ़ होना है,
कब मौन रहकर समझाना है,
और कब आवाज़ उठानी है।

जीवन की परिस्थितियों का
इतना सटीक संतुलन,
शायद किताबें भी
इतने प्रेम से न सिखा पाएँ।

रसायन विज्ञान का अद्भुत संसार—

वह टूटे मनों को जोड़ देती है,
क्रोध को प्रेम में बदल देती है,
उदासी में आशा घोल देती है,
और संघर्षों में साहस मिला देती है।

उसके स्पर्श में ऐसा जादू होता है
कि बिखरे हुए रिश्ते भी
फिर मुस्कुराने लगते हैं।

प्रबंधन कला की वह जीवित मिसाल है—

एक साथ चार काम करना,
सबको समय पर संभालना,
कम समय में सब व्यवस्थित करना।

यह किसी बड़ी कंपनी का
मैनेजमेंट नहीं तो और क्या है?

कॉरपोरेट की बड़ी-बड़ी बैठकों में
जिस “मैनेजमेंट स्किल” की बातें होती हैं,
उसका सबसे जीवंत रूप तो
सदियों से एक स्त्री के जीवन में दिखाई देता है।

मल्टीटास्किंग उसकी पहचान है—

एक तरफ चाय उबल रही है,
पूजा की थाली भी सज रही है,
पति और बच्चों का टिफिन भी भर रहा है,
बच्चों को उठाकर तैयार भी किया जा रहा है।

फोन भी उठा रही है,
दरवाज़ा भी खोल रही है,
और बारिश आ जाए तो
छत से कपड़े भी दौड़कर ला रही है।

खुद भी ऑफिस के लिए
तैयार हो रही है,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है,
और घर व्यवस्थित चलता रहता है।

उसकी निरीक्षण शक्ति अद्भुत होती है—

दाल पकी या नहीं,
बच्चे का मन उदास है या नहीं,
पति की थकान चेहरे पर दिख रही है या नहीं,
घर में कौन चुपचाप किसी चिंता में है—

उसकी नज़र सब समझ जाती है।
वह शब्दों से पहले
चेहरों की भाषा पढ़ लेती है।

अर्थशास्त्र भी वही संभालती है—

सीमित बजट में घर चलाना,
भोजन तैयार करना,
बचे हुए संसाधनों का सदुपयोग करना,
मौसम के अनुसार आवश्यकताओं को चुनना।

तीज-त्योहार की तैयारी,
अतिथियों की आवभगत,
नेग और रिश्तों का निर्वाह—
घर की आर्थिक नीति
अक्सर उसी की समझ से चलती है।

मनोविज्ञान भी उसे भलीभाँति आता है—

किसका मन उदास है,
किसे प्रोत्साहन चाहिए,
कौन बिना कहे दर्द छिपा रहा है—

वह सब जानती है।

कभी वह
मदर टेरेसा सी ममता बन जाती है,
तो कभी अपने दुःख छिपाकर
सबके जीवन में उजाला भर देती है।

वह केवल परिवार नहीं संभालती,
पूरा संसार सँभालने की क्षमता रखती है।

वह स्त्री चाहे पढ़ी-लिखी हो या नहीं,
अंग्रेज़ी जानती हो या नहीं,
पर उसके अनुभव, धैर्य और प्रेम के आगे
बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ भी छोटी लगती हैं।

वह केवल अन्नपूर्णा नहीं,
समय आने पर दुर्गा भी बन जाती है।
प्रेम दे तो गंगा सी निर्मल,
और अन्याय हो तो
चंडी सी प्रखर हो जाती है।

स्त्री को कम मत आँकिए,
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक,
डॉक्टर, लेखक, सैनिक और उद्योगपति भी
सबसे पहले
एक माँ की गोद में ही गढ़े जाते हैं।

दुनिया की हर महान प्रतिभा की
पहली प्रयोगशाला,
एक स्त्री की ममता ही होती है।

क्योंकि
स्त्री केवल घर नहीं संभालती,
वह पीढ़ियाँ गढ़ती है,
संस्कार बोती है,
और प्रेम से संसार रचती है।

इसलिए अगली बार
जब वह चुपचाप
सबकी चिंता करती दिखाई दे,
तो उसे सामान्य मत समझिए…

एक पल रुककर
उस माँ, पत्नी, बहन या बेटी को
दिल से धन्यवाद ज़रूर कहिए,
जो अपने हिस्से की थकान छिपाकर भी
आपके जीवन को सहज बनाती है।

और केवल धन्यवाद ही नहीं…
कभी उसके लिए भी
थोड़ा समय निकालिए,
उसकी मुस्कान का कारण बनिए।

आइए नमन करें
उस महामानवी को,
जो अपने हाथों से
केवल कार्य नहीं करती,
बल्कि पूरे घर में
प्रेम, अपनापन और जीवन भर देती है।

जो हर परेशानी को
मुस्कान से हल्का कर देती है,
और अपने त्याग से
घर को सचमुच स्वर्ग बना देती है।
देवघर भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 : विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन ।
देवघर: भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन - फाइनल में बादशाह - 11 को 5 विकेट से रौंदा - आकर्षक आतिशबाजी के बीच केकेएन स्टेडियम में समापन देवघर स्थानीय केकेएन स्टेडियम में खेले गए 'स्व. बर्धन खवाड़े ट्रॉफी सीजन- 2 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में विरांश स्टाइलिश- 11 ने बादशाह-11 को 5 विकेट से हराकर चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। खेल प्रेमियों की भारी भीड़ के बीच खेला गया खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। इस अवसर पर अपने संबोधन के क्रम में खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह से यह क्रिकेट टूर्नामेंट देवघर सहित झारखंड में प्रसिद्ध हो रहा है आने वाले दिनों में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा। खिलाड़ियों के जोश को देखते हुए घोषणा की कि खिलाड़ियों को और बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए अगले साल स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट को और आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नकद पुरस्कार राशि भी बढ़ाई जाएगी। कहा कि क्रिकेट सहित अन्य खेलों को भी भी बढ़ावा देने के लिए हमेशा पहल होगी। कोशिश के प्रयासों ने दिलायी जीत :- टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बादशाह - 11 की शुरुआत ठीक-ठाक रही, लेकिन विरांश स्टाइलिश 11 की कसी हुई गेंदबाजी के सामने निर्धारित 12 ओवरों में 9 विकेट खोकर 119 रन ही बना सकी। बादशाह 11 की ओर से सीनियर वर्मा ने सर्वाधिक 39 रन (24 गेंद) और अभिषेक ने 22 रनों का योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 की तरफ से तुपलाला ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 3 ओवर में केवल 16 रन देकर 2 विकेट चटकाए। 120 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी विरांश स्टाइलिश 11 की शुरुआत बेहद खराब रही और शीर्ष 4 बल्लेबाज मात्र 14 रन के कुल स्कोर पर पवेलियन लौट गए। उसके बाद कोशिश कुमार ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए मैच का पासा ही पलट दिया। कोशिश ने मात्र 31 गेंदों में 4 चौकों और 6 गगनचुंबी छक्कों की मदद से नाबाद 70 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। वहीं, मोनू सिंह ने 29 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 ने 11.1 ओवर में 5 विकेट खोकर 123 रन बनाकर खिताबी जीत दर्ज की। विजेता और उपविजेता पर हुई पैसों की बारिश :- टूर्नामेंट के समापन के बाद मुख्य अतिथि सह टूर्नामेंट के चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े सहित विशिष्ट अतिथि एसबीआई के आरएम प्रशांत मिश्रा ने संयुक्त रूप से विजेता टीम विरांश स्टाइलिश 11 के कैप्टन को चमचमाती ट्रॉफी और 1 लाख 10 हजार रुपए का नकद पुरस्कार सौंपा। वहीं, उपविजेता टीम बादशाह 11 के कैप्टन व फ्रेंचाइजी को प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. निशांत चौरसिया और टोयोटा धनबाद के मैनेजर राजीव रंजन द्वारा उप- विजेता ट्रॉफी और 55 हजार रुपए की नगद राशि प्रदान की गई। टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों का उत्साह भी चरम पर था। कैच पकड़ने वाले दर्शक को 5100 :- चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े द्वारा स्टैंड्स में एक शानदार कैच पकड़ने वाले दर्शक राज को 5100 रुपए का नकद पुरस्कार भी दिया गया। टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कार :- - मैन ऑफ द सीरीज :- लोकनाथ (पीवीआर पैंथर) - बेस्ट बैट्समैन :- संजू यादव (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट बॉलर :- विशाल (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट फील्डर :- अभिषेक (बादशाह 11) इनकी रही भूमिका :- मैच में निर्णायक (अंपायर) की भूमिका लाली और खुशहाल शेख ने निभाई, जबकि राकेश राय, अशोक कुमार, शैलेश कुमार और गौरव ने उद्घोषक के रूप में समां बांधा। कौन-कौन रहे उपस्थित :- मंच पर उपस्थित अतिथियों और कमेटी सदस्यों में आयोजन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह, रितेश केसरी, धर्मेंद्र देव और ऋषि राज सिंह ने भी खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर मुख्य रूप से नवीन शर्मा मुखिया सुशील महथा, दीपक दुबे, अजय खवाड़े, रोहित कुमार, नीरज झा, धीरज और पंकज वाजपेई आदि उपस्थित रहे। डॉल्फ़िन डांस के कलाकारों ने मोहा मन :- डॉल्फिन डांस एकेडमी के बच्चों द्वारा प्रशिक्षक पल्लवी झा के नेतृत्व में गणेश वंदना सहित अन्य गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
गर्मी पर भारी पड़ा आस्था का संकल्प,सीताकुण्ड धाम पर गोमती मित्रों की तीन घंटे चली सफाई मुहिम
सुलतानपुर:-भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद गोमती मित्रों का सेवा संकल्प डिगा नहीं,रविवार को गोमती मित्र मण्डल के सदस्यों ने सीताकुण्ड धाम पर अपना साप्ताहिक श्रमदान अभियान पूरी निष्ठा के साथ जारी रखा,भारी तपन के बीच गोमती मित्रों ने लगातार तीन घंटे तक पूरे परिसर और सीता उपवन की सफाई की।
अभियान के दौरान न केवल तट व परिसर को चमकाया बल्कि नदी के भीतर प्रवेश कर भारी मात्रा में कूड़ा-करकट, प्लास्टिक,फटे कपड़े और सड़ रही पूजन सामग्री को बाहर निकाल उसे एकत्रित कर उचित निस्तारण के लिए भेजा गया।
वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश पाठक ने बताया कि मौसम चाहे जैसा भी हो प्रदेश अध्यक्ष मदन सिंह के नेतृत्व में आदि गंगा माँ गोमती को स्वच्छ और निर्मल बनाने का उनका यह संकल्प रुकता नहीं है।
श्रमदान में प्रदेश अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह मदन,प्रवक्ता रमेश माहेश्वरी, सेनजीत कसौधन, डॉ कुंवर दिनकर प्रताप सिंह,अरुण गुप्ता,मुन्ना सोनी,विकास यादव,सौरभ गुप्ता, अजीत शर्मा, राकेश मिश्रा,विकास शर्मा,मुन्ना पाठक,अजय प्रताप सिंह,अभय मिश्रा,अभय सोनी,रामू सोनी,राकेश सिंह दद्दू,ऋतिक आदि उपस्थित रहे।
गर्मी पर भारी पड़ा आस्था का संकल्प,सीताकुण्ड धाम पर गोमती मित्रों की तीन घंटे चली सफाई मुहिम*
सुलतानपुर,भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद गोमती मित्रों का सेवा संकल्प डिगा नहीं,रविवार को गोमती मित्र मण्डल के सदस्यों ने सीताकुण्ड धाम पर अपना साप्ताहिक श्रमदान अभियान पूरी निष्ठा के साथ जारी रखा,भारी तपन के बीच गोमती मित्रों ने लगातार तीन घंटे तक पूरे परिसर और सीता उपवन की सफाई की। अभियान के दौरान न केवल तट व परिसर को चमकाया बल्कि नदी के भीतर प्रवेश कर भारी मात्रा में कूड़ा-करकट, प्लास्टिक,फटे कपड़े और सड़ रही पूजन सामग्री को बाहर निकाल उसे एकत्रित कर उचित निस्तारण के लिए भेजा गया। वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश पाठक ने बताया कि मौसम चाहे जैसा भी हो प्रदेश अध्यक्ष मदन सिंह के नेतृत्व में आदि गंगा माँ गोमती को स्वच्छ और निर्मल बनाने का उनका यह संकल्प रुकता नहीं है। श्रमदान में प्रदेश अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह मदन,प्रवक्ता रमेश माहेश्वरी, सेनजीत कसौधन, डॉ कुंवर दिनकर प्रताप सिंह,अरुण गुप्ता,मुन्ना सोनी,विकास यादव,सौरभ गुप्ता, अजीत शर्मा, राकेश मिश्रा,विकास शर्मा,मुन्ना पाठक,अजय प्रताप सिंह,अभय मिश्रा,अभय सोनी,रामू सोनी,राकेश सिंह दद्दू,ऋतिक आदि उपस्थित रहे।
एसपी के आदेश पर आत्महत्या के मामले में आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज
बीस दिन पूर्व पत्नी की बेवफाई से दुखी युवक ने लगाई थी फांसी

रितेश मिश्रा
हरदोई।मझिला थाना के ग्राम कोरिगावा के मजरा झबरा पुरवा में गांव के बाहर बीस दिन पूर्व युवक द्वारा लगाई गई फांसी की घटना के मामले में मृतक के पिता की गुहार पर एसपी ने मझिला पुलिस को आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जाँच करने के आदेश दिए हैँ।
      मृतक के पिता रामकिशोर पुत्र मिहीलाल के अनुसार उसके पुत्र शिवाय रतन का विवाह करीब पंद्रह वर्ष पूर्व नन्ही के साथ हुआ था। नन्ही के अवैध संबंध पड़ोस गांव रामभजन पुरवा निवासी प्रदीप पुत्र विश्राम के साथ बन गए जिसका पता पुत्र शिव रतन को चल गया उसके बाद आये दिन लड़ाई झगड़ा होने लगा नन्ही अपने पति के साथ मारपीट करने लगी। 28 अप्रैल की रात करीब बारह बजे शिव रतन ने अपनी पत्नी नन्ही को विपक्षी के साथ हम बिस्तर रंगे हाथ पकड़ लिया। विपक्षी के चाचा पंचम उसके साथ था।नन्ही ने दोनों के साथ मिलकर पति शिवरतन को काफ़ी धमकाया और जान से मारने की धमकी दी। नन्ही विपक्षी प्रदीप के साथ घर से चली गई। शिव रतन ने अपनी पत्नी को काफ़ी तलाश किया न मिलने पर दुखी होकर 29 अप्रैल को गांव के बाहर रामपाल पंडित के बाग़ में पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।पुलिस द्वारा उसके पति के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। एसपी के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
समाज के माथे पर कलंक –“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो”
–डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

आज सुबह जैसे ही हाथ में नवभारत टाइम्स का अखबार लिया, एक मार्मिक शीर्षक ने मन को भीतर तक झकझोर दिया —
“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…”

यह केवल एक पंक्ति नहीं थी, यह उन असंख्य बेटियों की मौन चीख थी, जो दहेज जैसी कुप्रथा की भेंट चढ़ जाती हैं।
33 वर्षीय टि्वशा  शर्मा और 25 वर्षीय दीपिका…
दो नाम नहीं, दो अधूरे सपने थे।
दो जिंदगियाँ थीं, जिन्हें जीने का पूरा अधिकार था।
लेकिन दहेज की प्रताड़ना ने उन्हें इस हद तक तोड़ दिया कि उनकी जिंदगी खत्म हो गई।

यह हत्या थी या आत्महत्या — यह तो जांच का विषय है,
लेकिन इतना तय है कि जिन लोगों ने एक लड़की को अपने जीवन से हाथ धोने पर मजबूर कर दिया, वे किसी भी रूप में दोषी हैं।
ऐसे दरिंदों को कठोर से कठोर सजा मिलनी ही चाहिए।
क्योंकि किसी इंसान को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित कर देना कि वह जीने की इच्छा ही खो दे, यह भी किसी हत्या से कम नहीं।

यह समाचार पढ़कर मन में एक ही प्रश्न उठता है —
क्या सचमुच हम 21वीं सदी में जी रहे हैं?

आज महिलाएँ युद्ध क्षेत्र में देश की रक्षा कर रही हैं, अंतरिक्ष में भारत का परचम फहरा रही हैं, विज्ञान, राजनीति, साहित्य, खेल और व्यापार हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
फिर भी, उसी समाज में एक बेटी को विवाह के बाद दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, जलाया जाता है, अपमानित किया जाता है।
यह केवल अपराध नहीं, मानवता की हार है।

सबसे दुखद बात यह है कि दहेज मांगने वाले घरों में भी बहनें और बेटियाँ होती हैं।
फिर क्यों किसी और की बेटी को केवल पैसों और सामान के लिए यातना दी जाती है?
क्या रिश्तों की कीमत अब रुपयों से तय होगी?
क्या बहू अब इंसान नहीं, बल्कि मायके से सामान और धन लाने वाली एक “बैंक” बनकर रह गई है?

दहेज कभी किसी का जीवन नहीं चला सकता।
जीवन चलता है संस्कारों से, प्रेम से, सम्मान से और परिश्रम से।
भगवान ने सबको हाथ-पैर दिए हैं, शिक्षा दी है, क्षमता दी है —
तो फिर किसी बेटी के पिता की मेहनत की कमाई पर अपना अधिकार क्यों?

आज आवश्यकता केवल कानून बनाने की नहीं, सोच बदलने की है।
माता-पिता को भी चाहिए कि वे केवल “अच्छा घर” या ऊँचा दिखावा देखकर जल्दबाजी में बेटी का विवाह न करें।
रिश्तों की चमक-दमक से ज्यादा जरूरी है उस परिवार की मानसिकता को समझना।
दहेज के लालचियों की पहचान अक्सर शादी से पहले ही हो जाती है ।
कभी महंगे उपहारों की अपेक्षा में,
कभी बार-बार की मांगों में,
तो कभी तानों और व्यवहार में।

ऐसे समय में डरना नहीं चाहिए।
जरूरत पड़े तो सगाई तोड़ देनी चाहिए।
और यदि विवाह मंडप तक बात पहुँच जाए, तब भी हिम्मत करके बारात लौटा देनी चाहिए।
क्योंकि एक टूटा रिश्ता फिर भी जीवन बचा सकता है,
लेकिन गलत घर में की गई शादी पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती है।

समाज को यह समझना होगा कि बेटी कोई बोझ नहीं, वह घर की सबसे सुंदर रचना है।
जिस घर में बेटियों का सम्मान नहीं, वह घर कभी सुखी नहीं हो सकता।

आइए संकल्प लें —
न दहेज देंगे,
न दहेज लेंगे,
और न ही दहेज मांगने वालों का समर्थन करेंगे।

ताकि फिर कभी किसी अखबार की हेडिंग यह न कहे —
“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…”।
20 मई 2026 को दिखेगी चंद्रमा और बृहस्पति की शानदार खगोलीय युति


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में बनेगा अद्भुत नज़ारा, रात लगभग 10 बजे तक रहेगा दृश्य।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 20 मई 2026 की शाम, आकाश प्रेमियों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अत्यंत विशेष रहने वाली है। इस दिन पश्चिमी आकाश में चंद्रमा और सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) की मनमोहक खगोलीय युति (Conjunction) देखने को मिलेगी। यह दृश्य सूर्यास्त के बाद से लेकर लगभग रात 10 बजे तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा, जिसके बाद दोनों खगोलीय पिंड पश्चिमी क्षितिज के नीचे चले जाएंगे। यह खगोलीय घटना बिना किसी दूरबीन के भी खुली आँखों से आसानी से देखी जा सकेगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 20 मई की शाम पश्चिम दिशा में एक चमकीले अर्धचंद्राकार चंद्रमा के पास बृहस्पति ग्रह दिखाई देगा। दोनों खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत निकट प्रतीत होंगे, जिससे यह दृश्य अत्यंत आकर्षक लगेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल वैज्ञानिक दृष्टि से यह केवल दृष्टि-रेखा (Line of Sight) का प्रभाव होता है लेकिन वास्तव में चंद्रमा और बृहस्पति के बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी बनी रहती है।

*क्या होती है युति?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में “युति” उस स्थिति को कहा जाता है जब पृथ्वी से देखने पर दो खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के बहुत पास दिखाई देते हैं। इस घटना में चंद्रमा और बृहस्पति एक ही खगोलीय देशांतर (Celestial Longitude) अथवा लगभग समान राइट एसेन्शन (Right Ascension) के आसपास दिखाई देंगे। वैज्ञानिक रूप से इसे ही युति (Conjunction)  कहा जाता है।

*कितना होगा इस दौरान मैग्नीट्यूड?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान चंद्रमा का औसत प्रत्यक्ष मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 8.5 तथा बृहस्पति का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.78 के क़रीब रहेगा। खगोल विज्ञान में मैग्नीट्यूड किसी खगोलीय पिंड की चमक मापने की इकाई है। जितना अधिक ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का मान होता है, कोई भी खगोलीय पिण्ड उतना ही अधिक चमकीला दिखाई देता है। इसी कारण चंद्रमा अत्यधिक चमकीला और बृहस्पति उसके पास एक उज्ज्वल तारे जैसा दिखाई देगा।

*कितना होगा कोणीय अंतर (Angular Separation) ?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय गणनाओं के अनुसार 20 मई 2026 को चंद्रमा और बृहस्पति लगभग 3 डिग्री के कोणीय अंतर (Angular Separation) पर दिखाई देंगे। यह दूरी इतनी कम होगी कि दोनों को एक साथ साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा। हालांकि यह दूरी इतनी कम नहीं होगी कि दोनों एक ही दूरबीन फ्रेम में उच्च आवर्धन पर दिखाई दें, लेकिन सामान्य दूरबीन और बाइनोक्युलर से यह दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देगा।

*किस दिशा में और किस तारामण्डल में देखें?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह खगोलीय युति पश्चिमी आकाश में मिथुन (Gemini) तारामंडल के क्षेत्र में दिखाई देगी। इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध तारे कैस्टर (Castor) और पोलक्स (Pollux) भी मौजूद हैं। जिस शानदार खगोलीय मिथुन तारामंडल क्षेत्र में इस नज़ारे जिसमें बृहस्पति ग्रह और चंद्रमा की युति होगी, और उसी मिथुन तारामंडल क्षेत्र में नीचे की तरफ ही आप शुक्र ग्रह को भी अपनी साधारण आंखों से ही देख सकते हैं ,और इसके बाद धीरे धीरे आगामी आने वाले दिनों में बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह भी एक-दूसरे के निकट आते दिखाई देंगे,और अगले माह 9 जून 2026 को बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह की भी युति मिथुन तारामंडल में ही घटित होगी उस दौरान बुद्ध ग्रह भी मिथुन तारामंडल में दिखाई देगा इसलिए यह पूरा महीना और आगामी दिनों में ग्रहों ,उपग्रहों नक्षत्रों आदि के खगोलीय अवलोकन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो रहा है।

*कैसे देखें इस शानदार खगोलीय नज़ारे को?।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार खगोलीय घटना को देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी। यदि मौसम साफ हो और पश्चिम दिशा का क्षितिज खुला हो, तो शहरों से भी यह दृश्य आसानी से देखा जा सकेगा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह दृश्य और भी अधिक स्पष्ट रूप में नज़र आयेगा। वैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही आप इस युति को देखना शुरू कर सकते हैं लेकिन और भी अधिक बेहतर परिणाम हेतु सूर्यास्त के लगभग 30 से 40 मिनट बाद आकाश पर्याप्त अंधकारमय होने लगेगा और तभी यह युति सबसे बेहतर दिखाई देगी। ख़ासकर ग्रामीण क्षेत्रों या कम प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से यह दृश्य और अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह का कहना है कि बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसका व्यास पृथ्वी से लगभग 11 गुना अधिक है। इसके चार प्रमुख उपग्रह, आयो (Io), यूरोपा (Europa), गैनीमीड (Ganymede) और कैलिस्टो (Callisto) जोकि छोटी दूरबीन से देखे जा सकते हैं। लेकिन यदि आप कोई अच्छी सी बाइनोक्युलर या छोटी दूरबीन का उपयोग करे तो वह बृहस्पति के पास इन उपग्रहों को छोटे प्रकाश बिंदुओं के रूप में देख सकते हैं और इस युति का भी विशेष आनंद भी उठा सकते हैं।

*क्या होता है अर्थ शाइन और इस दौरान कैसे देखें ?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अर्थशाइन (Earthshine) वह हल्की रोशनी होती है जो पृथ्वी से परावर्तित होकर चंद्रमा के अंधेरे भाग पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का धुंधला हिस्सा भी दिखाई देता है। इसे “चंद्रमा पर पृथ्वी की चमक” या अर्थ शाइन भी कहा जाता है। और 20 मई 2026 को दिखाई देने वाला चंद्रमा लगभग 4 दिन पुराना बढ़ता हुआ (Waxing Crescent) चंद्रमा होगा और इसकी प्रकाशित सतह लगभग 20 से 23 प्रतिशत के आसपास रहेगी। इसलिए चंद्रमा एक सुंदर पतले अर्धचंद्र के रूप में दिखाई देगा, इसी दौरान चंद्रमा पर आप अर्थ शाइन को भी देख सकते हैं जो इस दृश्य को और भी आकर्षक बनाएगा।

*क्या होगा, पृथ्वी पर इसका असर?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में ऐसी युतियाँ केवल सुंदर दृश्य ही नहीं होतीं, बल्कि खगोल वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं। इन घटनाओं की सहायता से ग्रहों की स्थिति, कक्षीय गति और खगोलीय यांत्रिकी (Celestial Mechanics) को समझने में मदद मिलती है। प्राचीन भारतीय खगोलविद भी ग्रहों और चंद्रमा की युतियों का विस्तृत अध्ययन करते थे और कैलेंडर (पंचांग) निर्माण में उनका उपयोग किया जाता था।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार की घटनाएँ लोगों में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करती हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं को ऐसी घटनाओं का अवलोकन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्मांड की गतिशीलता को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे 20 मई 2026 की शाम पश्चिम दिशा में खुला स्थान चुनकर इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का आनंद लें। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना पूर्णतः प्राकृतिक और सुरक्षित है। इसका पृथ्वी पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है ,यह केवल ग्रहों और चंद्रमा की नियमित कक्षीय गति का परिणाम है। अंतरिक्ष विज्ञान के अनुसार पृथ्वी, चंद्रमा और ग्रह निरंतर सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं, और समय-समय पर उनकी स्थिति ऐसी बनती है कि वे पृथ्वी से देखने पर एक-दूसरे के निकट दिखाई देते हैं। इस प्रकार 20 मई 2026 की शाम खगोलीय घटनाओं के प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर बनने जा रही है, जब आकाश में चंद्रमा और बृहस्पति की चमकदार युति पश्चिमी क्षितिज को अद्भुत सौंदर्य से भर देगी।
महाराणा प्रताप जयंती व बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव का भव्य आयोजन

वसई। राजपूताना परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में चैत्र महोत्सव, संवत 2083 का भव्य स्वागत श्रद्धा, शौर्य एवं संस्कार के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति एवं क्षत्रिय धर्म का जीवंत उत्सव था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा महापुरुषों को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ ने जैसे ही सभा को आलोकित किया, पूरा प्रांगणजय भवानी  के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कारगिल के वीर योद्धा नायक दीपचंद पंचग्रामी रहे, जिनका वीरता के लिए भव्य सम्मान किया गया। जनता ने खड़े होकर अपने नायक का अभिनंदन किया।
विश्वामित्र की भूमिका में "महर्षि" टाइटल से अलंकृत नालासोपारा के अघोर पीठाधीश्वर महंत बाबा अलख राम ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सनातन  का आध्यात्मिक महत्व बताया एवं क्षत्रिय धर्म पर जोर देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य है। मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने मार्गदर्शन देते हुए कहा, _"आज से 200 साल पहले जब अंग्रेज नहीं आए थे तब एक जनवरी को नववर्ष नही मनाया जाता था, तब हमारे यहां केवल विक्रम संवत ही चलता था तथा वसंत पंचमी से होली तक पिछले वर्ष की विदाई की जाती थी एवं संपूर्ण चैत्र माह में चैत्र महोत्सव मनाकर नववर्ष का स्वागत किया जाता था । हमारे देश का हर वर्ग पूरे उत्साह से चैत्र महोत्सव मनाता था. आजके आधुनिक काल मे हर वर्ष चैत्र महोत्सव मनाकर ददन सिंह अपनी खोई हुई संस्कृती की पुनर्स्थापना कर रहे है. अपनी जड़ों से जुड़ना ही सच्चा राष्ट्रवाद है। मंच संचालन की बागडोर श्रीप्रकाश सिंह ने कुशलता से संभाली। पधारे हुए सभी अतिथियों का सत्कार राजपूताना परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष दद्दन सिंह चौहान ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर किया। कार्यक्रम में सम्मानमूर्ति के रूप में पधारीं क्षत्राणी नगरसेविका का विशेष सम्मान किया गया एवं  समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु श्रीमती बबीता देवराज सिंह, एकता सिंह, पिंकी राठौर, प्रदीपिका सिंह, जेपी सिंह, अभय कक्कड़, अशोक शेलके आदि को सम्मानित किया गया। 
नासिक से पधारे राजेंद्र सिंह चौहान, रामदुलार सिंह, लाल साहब सिंह, वीरेंद्र सिंह तोमर, कुमार शैलेंद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह एवं श्रीमती रीता सिंह सहित अनेक आर्मी एवं नेवी के जवानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। सभी वीरों ने महाराणा प्रताप जयंती एवं बाबू वीर कुंवर सिंह जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गायक दामोदर राव, नंदिनी तिवारी, पूनम सिंह एवं सूरज सिंह 'तूफानी ने अपनी सुमधुर गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति और वीर रस के गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। राजपूताना परिवार के सदस्य वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, राजेश सिंह सूर्यवंशी, बबन सिंह, ललन सिंह, अरबिंद सिंह मनोज सिंह राकेश सिंह नाहर सिंह केदार सिंह रूपेश सिंह अजय सिंह सरवन सिंह सिसोदिया नरेंद्र सिंह राणावत वीरभद्र सिंह जडेजा अश्विन सिंह जाडेजा स्वरूप सिंह जडेजा जयेंद्र सिंह जडेजा जगदीश सिंह जडेजा सत्येंद्र रावत सुनील सिंह, मोहित सिंह, विजय सिंह, विनोद सिंह, राधा रमन सिंह, अमित सिंह, नाहर सिंह, भावेश सिंह, रोहित सिंह, राम सिंह, केदारनाथ सिंह, राज चौरसिया, जयकुमार यादव एवं संस्था के सभी सदस्यो पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। श्रीमती अंजू सिंह, खुशबू सिंह, आशा सिंह, गरिमा सिंह, सुषमा सिंह, संध्या सिंह, किरण सिंह, बबीता सिंह सहित तमाम बहनों एवं माताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम के पश्चात सभी ने *सुरुचिपूर्ण भोज* का आनंद लिया एवं प्रसाद ग्रहण किया।
मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक चोरी
रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।कोतवाली छेत्र के ग्राम लोनी में लगे मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक अज्ञात चोर लेकर चम्पत हो गया।पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है। मझिला थाना के ग्राम चठिया निवासी श्यामू पुत्र प्रमोद यादव के अनुसार वह 16 मई को ग्राम लोनी में मेला देखने गया था। मेले के बाहर अपनी बाइक संख्या यूपी 34बीएच 4627 ख़डी कर कुछ सामान खरीदने लगा वापस आने पर उसकी बाइक कोई अज्ञात चोर चोरी कर ले गया। पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है।
स्वर्गीय आजाद बंसल की पंचम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित
मेरठ/रामराज। अपनी सरलता, मिलनसार स्वभाव और समाज सेवा के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता स्वर्गीय श्री आजाद बंसल आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। उनके निधन के वर्षों बाद भी क्षेत्रवासियों के मन में उनके प्रति वही सम्मान, प्रेम और अपनापन देखने को मिलता है।

रविवार को उनकी पंचम पुण्यतिथि के अवसर पर श्री सिद्धपीठ फिरोजपुर महादेव, रामराज में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, समाजसेवी एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग पहुंचे और स्वर्गीय आजाद बंसल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने कहा कि स्वर्गीय आजाद बंसल ने अपने जीवन में सदैव समाजहित और जनसेवा को सर्वोपरि रखा। उनकी सादगी, व्यवहार कुशलता और लोगों के प्रति अपनापन ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

बताया गया कि स्वर्गीय आजाद बंसल का जन्म 15 अगस्त 1947 को हुआ था। उनके परिवार में पत्नी राकेश बंसल, बड़े पुत्र राहुल बंसल एवं छोटे पुत्र रोहित बंसल हैं। श्रद्धांजलि सभा में राहुल बंसल एवं रोहित बंसल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता द्वारा दिखाए गए सेवा और सद्भाव के मार्ग पर परिवार आगे भी चलता रहेगा।

इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष हरवीर पाल ब्रह्मचारी, मास्टर श्रीपाल कोहली, डॉ. मनचंदा, सोनी गोयल, बब्बू, विपेंद्र तथा सुधा वाल्मीकि सहित विभिन्न जिलों के भाजपा नेता और क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्रद्धांजलि सभा के उपरांत प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरा वातावरण श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दिया।