श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में शुक्रवार को सत्र 2026-28 में नवप्रवेशित छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके उपरांत उन्होंने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं से परिचय प्राप्त किया। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष (तृतीय सेमेस्टर) के छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थी अनुशासित, नियमित एवं समर्पित होकर अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक के रूप में आप सभी पर समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माता भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संयम, अनुशासन एवं सतत अध्ययन के माध्यम से अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन किशन मिश्र ने किया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. नीरज यादव, डॉ. लोहंस कुमार कल्याणी, डॉ. चमन कौर, श्री राजेन्द्र मिश्र, श्रीमती प्रतिभा सिंह, डॉ. दीपा गुप्ता एवं श्री अमरजीत वर्मा सहित बी.एड. के छात्राध्यापक-छात्राध्यापिकाएँ प्रखर जैन, अभितोष, खुशी यादव, अक्षय त्रिपाठी, विपिन मौर्य, आस्था तिवारी, वैदेही, प्रिया आर्या, अर्चना भास्कर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मोजुद थे ।
श्रावण मास,श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी,मणिपर्वत (श्रावण झूला)मेला एवं रक्षाबंधन के दृष्टिगत जनपद गोण्डा में विशेष यातायात डायवर्जन व्यवस्था लागू
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श्रावण मास-2026 के दौरान श्रावण सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला एवं रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या धाम एवं आसपास के जनपदों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एवं वाहनों के दबाव को देखते हुए जनपद गोण्डा में विशेष यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।

*निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय श्रावण सोमवार एवं श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर 08 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 12 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे तक, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला, तृतीय श्रावण सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर 14 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 17 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक, चतुर्थ/अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर 23 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 24 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक तथा श्रावण पूर्णिमा स्नान, रक्षाबंधन एवं मेला समापन के अवसर पर 27 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 28 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक विशेष डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी।*

*प्रमुख डायवर्जन व्यवस्था*

*रूट-ए:*
लखनऊ से बाराबंकी एवं गोण्डा होते हुए गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले समस्त वाहनों को दर्जीकुआँ (थाना कोतवाली देहात) से डायवर्ट कर झिलाही रेलवे क्रॉसिंग-मनकापुर-उतरौला मार्ग-डुमरियागंज होते हुए गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*रूट-बी:*
लखनऊ से गोण्डा होकर गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले वाहनों को दर्जीकुआँ से डायवर्ट कर मोतीगंज- मनकापुर-मसकनवा-बभनान मार्ग से गंतव्य के लिए भेजा जाएगा।

*रूट-सी:*
गोण्डा शहर में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों को धानेपुर-उतरौला मार्ग से डायवर्ट कर बेवा चौराहा/डुमरियागंज के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं*

• अयोध्या प्रशासन के निर्देशानुसार लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले भारी वाहनों को सामान्यतः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करना होगा। पर्वों के दौरान लखनऊ-बाराबंकी-रामनगर (महादेवा मंदिर) मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

• बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती एवं गोण्डा से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को जरवल रोड-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग से भेजा जाएगा।

• गोण्डा से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों का संचालन श्रावण सोमवार एवं पर्वों के दौरान जरवल रोड-बाराबंकी मार्ग पर प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को हुजूरपुर मोड़-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा।

• आवश्यकता पड़ने पर उतरौला एवं बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को जानकीनगर पुलिस चौकी (थाना इटियाथोक) से डायवर्ट कर आर्यनगर-कटरा बाजार-कर्नलगंज मार्ग से भेजा जाएगा।

•कर्नलगंज-परसपुर-तरबगंज-नवाबगंज मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

• गोण्डा शहर से जरवल रोड होकर बाराबंकी-लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को हुजूरपुर मोड़ से डायवर्ट किया जाएगा।

• कर्नलगंज, परसपुर एवं तरबगंज से नवाबगंज आने वाले भारी वाहनों को कटी तिराहा से मनकापुर की ओर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य चारपहिया वाहन टिकरी मोड़-कोल्हमपुर-लोलपुर मार्ग से संचालित होंगे।

• कटी तिराहा से अयोध्या की ओर केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

• लकड़मण्डी तिराहा से नया घाट पुल (अयोध्या) तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी।

• लोलपुर से नवाबगंज जाने वाले वाहनों को कोल्हमपुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को लकड़मण्डी-नवाबगंज मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा।

*जनसामान्य से अपील*

जनपद पुलिस द्वारा समस्त वाहन चालकों एवं आमजन से अपील की जाती है कि निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं यातायात पुलिस के निर्देशों का अनुपालन करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा सहयोग एवं संयम बनाए रखते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें। जनसहयोग से ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखना संभव हो
लखनऊ मंडल में पर्यटन विकास को मिलेगी रफ्तार, 59 परियोजनाओं पर नवंबर तक शुरू होगा काम
-  ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों और आस्था स्थलों के सौंदर्यीकरण के प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई; पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ मंडल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं पर्यटन विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत लखनऊ मंडल की विभिन्न विधानसभाओं में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य आस्था स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 59 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी परियोजनाओं को आगामी नवंबर तक धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य किया जाए।
पर्यटन मंत्री ने गुरुवार को बताया कि प्राप्त प्रस्ताव सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, जिलाधिकारियों तथा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों की ओर से भेजे गए हैं। इनमें रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लखनऊ मंडल में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए वहां बुनियादी पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि इन स्थलों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके और स्थानीय पर्यटन को नई गति मिले।

-  इन प्रमुख स्थलों का होगा विकास
प्रस्तावित परियोजनाओं में लखनऊ के प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, नाका हिंडोला गुरुद्वारा, भुइयन देवी मंदिर, आलमबाग स्थित सनातन धर्म मंदिर, उनई देवी मंदिर, कल्याणगिरी महादेव मंदिर, श्री चित्रगुप्त भवन, राजाजीपुरम शीतला देवी मंदिर, अलीगंज हनुमान मंदिर, काकोरी शहीद स्थल और गंगाप्रसाद मेमोरियल हॉल के संरक्षण एवं पर्यटन विकास के प्रस्ताव शामिल हैं।
इसके अलावा लखीमपुर खीरी के बाबा भूतनाथ मंदिर, तुरन्तनाथ बाबा मंदिर, जंगलियानाथ बाबा मंदिर और बाबा भुरिया नाथ धाम, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में पर्यटन सुविधा केंद्र एवं वन स्टॉप सेंटर, महमूदाबाद का मां संकटा देवी धाम, सिधौली का झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, रायबरेली का चंपा देवी मंदिर, ऊंचाहार स्थित महाराज माहे पासी किला तथा प्राचीन विष्णु मंदिर के विकास के प्रस्ताव भी कार्ययोजना में शामिल किए गए हैं।
हरदोई के महर्षि दधीचि मंदिर, शाहाबाद के बाबा वनखंडी मंदिर, संडीला के चौमुखी मंदिर तथा उन्नाव के बुद्ध अंबेडकर पार्क, मोहान स्थित जमदग्नि आश्रम-परशुराम मंदिर, भगवंतनगर के हनुमान मंदिर और श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सभी परियोजनाओं के लिए संबंधित जनपदों से भूमि अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि स्वीकृति के बाद निर्माण एवं विकास कार्य समयबद्ध ढंग से शुरू किए जा सकें।
सरकार का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम, तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के संचालन को मिली हरी झंडी

- उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गाजियाबाद, कानपुर व फतेहपुर के प्रस्तावित विश्वविद्यालयों को सौंपा 'संचालन प्राधिकार पत्र'

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को उच्च शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रदेश में स्थापित होने जा रहे तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन को 'संचालन प्राधिकार पत्र' (अनुज्ञा पत्र) प्रदान किया। योगी सरकार की इस पहल से गाजियाबाद, कानपुर और फतेहपुर जनपदों में उच्च, तकनीकी एवं कृषि शिक्षा का विस्तार होगा तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जनपद गाजियाबाद में 'अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी', गाजियाबाद के सचिव/चेयरमैन को, कानपुर नगर के बिल्हौर में 'महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट', दिल्ली के सचिव को तथा फतेहपुर में 'ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'एंग्लो संस्कृत कॉलेज', फतेहपुर के अध्यक्ष को आधिकारिक संचालन प्राधिकार पत्र सौंपा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 में संशोधन अध्यादेशों के तहत यह स्वीकृति जारी की गई है। इसके अंतर्गत गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय को तृतीय संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 17 सन् 2026), कानपुर के महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय को चतुर्थ संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 18 सन् 2026) तथा फतेहपुर के ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय को पंचम संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 19 सन् 2026) के तहत सम्मिलित करते हुए संचालन की अनुज्ञा संबंधी अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री ने प्राधिकार पत्र सौंपते हुए संबंधित संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे शासन द्वारा निर्धारित मानकों, नियमों एवं शर्तों का  अनुपालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहित कर उच्च शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ कर रही है, जिससे राज्य के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों और उत्कृष्ट वातावरण का लाभ मिल सके।
बीमारी भी नहीं रोक सकी ममता की धारा, जारी रहा स्तनपान
- टीबी, फाइलेरिया और समय से पहले जन्मे शिशु जैसी चुनौतियों के बीच डॉक्टरों की सलाह बनी भरोसा
*गोंडा, 04 अगस्त 2026*: जब कोई मां बीमार होती है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वह अपने शिशु को स्तनपान करा सकती है। कई बार यह डर भी सताता है कि कहीं उसकी बीमारी बच्चे तक न पहुंच जाए। यही आशंका देवीपाटन मंडल की उन माताओं के मन में भी थी, जिन्होंने विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान अपने अनुभव साझा किए। परिवार के कुछ सदस्य भी इसी डर से उन्हें स्तनपान कराने से मना करते थे। लेकिन डॉक्टरों की सही सलाह, आशा और एएनएम के मार्गदर्शन तथा परिवार के सहयोग से उनका यह भ्रम दूर हुआ।
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में देवीपाटन मंडल के 3.18 लाख से अधिक नवजातों को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल से घर लौटने के बाद बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों और परिवार के संकोच के कारण कई माताएं स्तनपान को लेकर असमंजस में पड़ जाती हैं।
अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद इन माताओं ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने शिशुओं को पहले छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाया और कई माताओं ने दो साल तक भी स्तनपान जारी रखा। आज वे कहती हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ हैं, अच्छी तरह बढ़ रहे हैं और दूसरे बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं।
केस -1 फाइलेरिया का डर, लेकिन नहीं रुका स्तनपान-
जरवल ब्लॉक के रिठौढ़ा गांव की रिंकी गर्भावस्था के दौरान फाइलेरिया से पीड़ित हो गई थीं। रिंकी बताती हैं कि प्रसव के बाद परिवार को डर था कि कहीं स्तनपान से बच्चे को भी बीमारी न हो जाए। आशा कार्यकर्ता ने समझाया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलता है, मां के दूध से नहीं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता सामग्री भी दिखाई। इसके बाद परिवार की शंका दूर हुई और रिंकी ने अपने बेटे को दो साल तक स्तनपान कराया। आज वह छह साल का है, स्वस्थ है और स्कूल जाता है।
केस -2 कम वजन की बच्ची के लिए मां का दूध बना संबल-
बलरामपुर के श्रीदत्तगंज निवासी मनोज कुमार की पत्नी मीना देवी ने 4 जून 2026 को जिला अस्पताल में 1635 ग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। कम वजन होने के कारण नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ा। बच्ची स्तन से दूध नहीं खींच पा रही थी, इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों ने मां का दूध निकालकर कटोरी-चम्मच से पिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। मीना देवी कहती हैं, "डॉक्टरों ने बताया कि मेरे दूध से ही मेरी बच्ची को सबसे ज्यादा ताकत मिलेगी। आज बच्ची स्वस्थ है और सामान्य रूप से बढ़ रही है।“
केस -3 टीबी इलाज के साथ जारी रहा स्तनपान -
श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र के अंबेडकरनगर की 26 वर्षीय एक महिला (पहचान गोपनीय रखने के अनुरोध पर नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है) को प्रसव के बाद टीबी का पता चला। परिवार को डर था कि कहीं शिशु को भी संक्रमण न हो जाए। डॉक्टरों ने समझाया कि नियमित उपचार, शुरुआती दिनों में मास्क के उपयोग और पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान सुरक्षित रूप से जारी रखा जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकीय सलाह का पालन किया और अपने शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ा। महिला कहती हैं, "डॉक्टरों की सलाह ने मेरा और मेरे परिवार का डर दूर कर दिया। आज मेरा डेढ़ साल का बेटा स्वस्थ है और मैं भी पूरी तरह टीबी से ठीक हो चुकी हूं।"

"कई माताएं यह भी सोचती हैं कि बीमारी या दवा लेने से उनका दूध खराब हो जाएगा या बच्चे को नुकसान पहुंचाएगा। जबकि अधिकांश सामान्य बीमारियों और उनकी दवाओं के दौरान भी स्तनपान सुरक्षित रहता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के न तो दवा बंद करें और न ही स्तनपान।"
डॉ. संतलाल पटेल- कार्यवाहक अपर निदेशक (देवीपाटन मंडल) एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोंडा
लखनऊ में मानसून का कहर: 24 घंटे में सामान्य से छह गुना ज्यादा बारिश, दीवार गिरने से वाहन दबे; दो दिन का ऑरेंज अलर्ट
सुबह से छाए बादल, दिनभर भारी बारिश के आसार; शहर में जलभराव और बिजली संकट, अगले तीन दिन भी राहत नहीं

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार सुबह से ही शहर बादलों की चादर में लिपटा रहा और मौसम विभाग ने दिनभर मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते 24 घंटों में शहर में 40.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 7 मिलीमीटर की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। लगातार बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

बारिश के बीच लखनऊ सिटी स्टेशन के पास एक बड़ा हादसा भी हुआ। यहां एक पुरानी दीवार भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में एक कार और करीब आधा दर्जन दोपहिया वाहन दब गए। हालांकि, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

मानसून अब भी सामान्य से पीछे

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक लखनऊ में 227.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 345.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राजधानी में अब तक मानसून करीब 34 प्रतिशत कमजोर रहा है। हालांकि हाल के दिनों में हुई तेज बारिश से इस कमी में कुछ सुधार की उम्मीद है।

तापमान में गिरावट, उमस से मिली राहत

मंगलवार को अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1 डिग्री कम था। बारिश के कारण हवा में नमी काफी बढ़ गई और अधिकतम आर्द्रता 97 प्रतिशत तथा न्यूनतम 87 प्रतिशत दर्ज की गई।

जलभराव और बिजली कटौती से बढ़ीं मुश्किलें

लगातार बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे नागरिकों की परेशानियां और बढ़ गईं।

अगले तीन दिन भी झमाझम बारिश के आसार

मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से अगले 2 से 3 दिनों तक लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट आएगी तथा उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।

बीते 24 घंटों में अमौसी मौसम केंद्र पर 66.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन की अब तक की सबसे अधिक वर्षा है। मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।
खगोलीय घटना। 4 अगस्त 2026 की शाम पश्चिमी आकाश में शुक्र, स्पाइका और रेगुलस का सुंदर दृश्य संयोजन दिखेगा
* क्या है यह दृश्य संयोजन ?

गोरखपुर। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चित्रा तारा और मघा तारा के बीच दिखाई देगा शुक्र ग्रह या कुछ यूं कहें कि 4 अगस्त, 2026 को शुक्र ग्रह की सीध में होंगे स्पाइका और रेगुलस तारे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर बनेगा मनमोहक खगोलीय दृश्य इसका नग्न आंखों से भी किया जा सकेगा अवलोकन ।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि स्पाइका तारा जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में अल्फा वर्जिनिस भी कहा जाता है,यह कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है जोकि पृथ्वी से लगभग 250 प्रकाश वर्ष की दूरी पर मौजूद है , स्पाइका एक अकेले नीले-सफेद तारे के रूप में दिखाई देता है। लेकिन स्पिका के रूप में हमें जो प्रकाश का एक बिंदु दिखाई देता है, वह वास्तव में कम से कम दो तारे हैं। इसका मतलब हुआ कि यह एक बाइनरी तारा है और इसकी चमक के मैग्नीट्यूड के कारण ही जो इसे कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा बनाती है। साथ ही यह पृथ्वी पर कहीं से भी दिखाई देने वाला 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। यह भी जानना आवश्यक है कि इसकी चमक वृश्चिक तारामंडल में स्थित एंटारेस तारे के लगभग बराबर है, इसलिए कभी-कभी प्राचीन खगोल विज्ञान में एंटारेस को 15वां और स्पिका को 16वां सबसे चमकीला तारा भी मान लिया गया है। यह मैग्नीट्यूड में परिवर्तन की प्रक्रिया के कारण होता है। अब हम बात करें रेगुलस तारे की तो पाते हैं कि रेगुलस तारा,सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है, जिसको खगोल विज्ञान में अल्फा लियोनिस के नाम से भी जाना जाने वाला यह तारा हमारे आकाश के सबसे चमकीले तारों की सूची में 21वें स्थान पर है। इसको हिंदी भाषा में मघा तारा के नाम से भी जाना जाता है यह सूर्य के आकाशीय पथ, यानी क्रांतिवृत्त के निकट स्थित है। इसलिए पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों से रेगुलस तारामंडल समान रूप से स्पष्ट दिखाई देता है और रेगुलस पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उत्तरी गोलार्ध से रेगुलस वर्ष भर रात के किसी न किसी समय दिखाई देता है, सिवाय 22 अगस्त के आसपास के लगभग एक महीने को छोड़कर। साथ ही उत्तरी गोलार्ध में, रेगुलस को स्प्रिंग ट्रायंगल नामक तारामंडल बनाने वाले तीन चमकीले तारों में से एक के रूप में भी जाना जाता है एवं साथ ही उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध से देखने पर, रेगुलस लगभग सूर्य और चंद्रमा के पथ का अनुसरण करता है। इसलिए उत्तरी गोलार्ध में रहने वाले लोग आमतौर पर दक्षिण की ओर मुख करके रेगुलस को आकाश में अपना विस्तृत चाप बनाते हुए देखते हैं। लेकिन दक्षिणी गोलार्ध में रहने वाले लोग इसे देखने के लिए आमतौर पर उत्तर की ओर मुख करते हैं।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सिंह राशि का सबसे चमकीला तारा रेगुलस जिसे सिंह का हृदय भी कहा जाता है और सिंह तारामंडल को देखने पर रेगुलस उल्टे प्रश्न चिह्न के निचले भाग में स्थित चमकीले बिंदु को दर्शाता है, जो सिंह के सिर और कंधों का आकार बनाता है। इस आकृति को हंसिया कहा जाता है साथ ही एक आसानी से पहचाने जाने वाला त्रिभुज सिंह के पिछले हिस्से और पूंछ को दर्शाता है, और डेनेबोला तारा सिंह की पूंछ को चिह्नित करता है खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक ख़ास बात यह भी है कि जब भी ग्रह और चंद्रमा इसके पास से गुजरते हुए प्रतीत होते हैं तो इसका मतलब हुआ कि रेगुलस एकमात्र प्रथम परिमाण का तारा है जो लगभग पूरी तरह से क्रांतिवृत्त पर स्थित है,या कुछ यूं कहें कि रेगुलस तारा ,हमारे आकाश में सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों के पथ पर स्थित है। इसीलिए जब रेगुलस तारा दिखाई देता है, तब चंद्रमा महीने में एक बार उसके सामने से गुजरता है। कुछ वर्षों में, पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा रेगुलस को ढक भी लेता है ,यानी उसके सामने से गुजरता है। और अभी हम रेगुलस के 20 चंद्र ग्रहणों की एक श्रृंखला में हैं, जो जुलाई 2025 से दिसंबर 2026 तक चलेगी। दिसंबर 2026 के ग्रहण के दौरान, मंगल और बृहस्पति ग्रह इसके पास में होंगे।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रह भी कभी-कभी रेगुलस के सामने से गुजरते हैं और ग्रह कभी-कभी इस तारे को ढक भी लेते हैं ,या कुछ यूं कहें कि इसके सामने से गुजर जाते हैं साथ ही रेगुलस को ढकने वाला आखिरी ग्रह शुक्र था, जिसने 7 जुलाई 1959 को यह दृश्य प्रदर्शित किया था। फिर 1 अक्टूबर 2044 को शुक्र एक बार फिर रेगुलस को ढक लेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश प्रेमियों के लिए 4 अगस्त, 2026 की शाम एक आकर्षक खगोलीय दृश्य लेकर आएगी। इस दिन सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर सौर मंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र, दो प्रसिद्ध चमकदार तारों स्पाइका और रेगुलस के बीच एक सुंदर स्थिति में दिखाई देगा। यह दुर्लभ दृश्य न केवल खगोल विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए रोचक होगा, बल्कि सामान्य लोग भी इसे बिना किसी विशेष उपकरण के नग्न आंखों से ही देख सकेंगे। यदि दूरबीन या बाइनोकुलर का उपयोग किया जाए तो यह खगोलीय संयोजन और भी अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक दिखाई देगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस अवसर पर सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा रेगुलस तथा कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा स्पाइका, शुक्र ग्रह के आसपास एक सुंदर ज्यामितीय दृश्य संयोजन युक्त विन्यास बनाते हुए नजर आएंगे। अपनी असाधारण चमक के कारण शुक्र ग्रह पहले ही पश्चिमी आकाश में आसानी से पहचाना जा सकेगा, जबकि उसके  दृश्य संयोजन स्थित दोनों प्रमुख तारे इस दृश्य को और अधिक मनोहारी बना देंगे।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 4 अगस्त 2026 की शाम सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर यह विशेष खगोलीय संयोजन देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस समय शुक्र ग्रह, स्पाइका और रेगुलस लगभग एक ही दिशा में दिखाई देंगे और आकाश में एक आकर्षक पैटर्न का निर्माण करेंगे। मौसम साफ रहने पर यह दृश्य काफी देर तक आसानी से देखा जा सकेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वा ग्रह भी कहा जाता है। आकार और संरचना की कुछ समानताओं के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वां माना जाता है। यही कारण है कि इसे "पृथ्वी की बहन" भी कहा जाता है। अपनी अत्यधिक चमक के कारण शुक्र ग्रह को संध्या तारा तथा भोर का तारा के नाम से भी जाना जाता है, हालांकि यह वास्तव में तारा नहीं बल्कि एक ग्रह है। वर्तमान समय में यह सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में अत्यंत चमकीला दिखाई दे रहा है और 4 अगस्त की शाम इसकी स्थिति स्पाइका तथा रेगुलस के साथ एक विशेष दृश्य प्रस्तुत करेगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि स्पाइका कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है तथा यह आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। दूसरी ओर, सिंह तारामंडल का प्रमुख तारा रेगुलस अपने नीले-सफेद रंग और अत्यधिक तापमान के कारण विशेष पहचान रखता है। दोनों तारों की उपस्थिति के बीच चमकता हुआ शुक्र ग्रह आकाश में एक आकर्षक स्थिति युक्त विन्यास जैसा दृश्य प्रस्तुत करेगा, जो आकाश प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
*  इस दौरान कितना होगा शुक्र ग्रह और चित्रा तारा एवं मघा तारा का मैग्नीट्यूड ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बताया कि इस खगोलीय संयोजन के दौरान शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 4.14 रहेगा। वहीं स्पाइका का मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.97 होगा, जबकि रेगुलस लगभग प्लस 1.40 मैग्नीट्यूड के साथ अपनी चमक बिखेरता दिखाई देगा। चमक के इन अंतर के कारण शुक्र, दोनों तारों की तुलना में कहीं अधिक तेजस्वी नजर आएगा और पश्चिमी आकाश में सबसे पहले ध्यान आकर्षित करेगा।
*  कितने बजे से कितने बजे तक और किस दिशा में नज़र आयेगा यह दृश्य संयोजन
खगोलविद अमर पाल सिंह ने अवलोकन के समय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वैसे तो यह तीनों खगोलीय पिण्ड सूर्यास्त के बाद से ही आकाश के पश्चिमी दिशा में दिखना शुरू हो जाएंगे लेकिन अगर बात करें इनके अस्त होने की तो पाते हैं कि रेगुलस तारा लगभग शाम 7:30 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे चला जाएगा। इसके बाद शुक्र ग्रह लगभग रात 8:45 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त हो जाएगा। वहीं स्पाइका तारा लगभग रात 10 बजे तक पश्चिमी क्षितिज पर दिखाई देता रहेगा इसके बाद पश्चिमी क्षितिज पर नीचे चला जायेगा। इसलिए इस खगोलीय घटना का सर्वोत्तम अवलोकन सूर्यास्त के तुरंत बाद से लेकर शुरुआती शाम के समय तक किया जा सकता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने आकाश प्रेमियों से अपील की है कि यदि मौसम साफ रहे तो शहर की तेज रोशनी और प्रकाश प्रदूषण से दूर किसी खुले स्थान का चयन करें। खुले क्षितिज वाले स्थान से पश्चिम दिशा में देखने पर यह सुंदर खगोलीय दृश्य अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। दूरबीन अथवा बाइनोकुलर की सहायता लेने पर शुक्र ग्रह और उसके आसपास स्थित दोनों चमकीले तारों का दृश्य और भी मनमोहक तथा प्रभावशाली प्रतीत होगा।
*  खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से ऐसे दृश्य संयोजन क्यों महत्वपूर्ण होते हैं ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से यह संयोजन आकाश में ग्रहों और तारों की प्रत्यक्ष स्थिति को समझने का भी एक उत्कृष्ट अवसर है। यद्यपि शुक्र, स्पाइका और रेगुलस वास्तविक अंतरिक्ष में एक-दूसरे से अत्यधिक दूर स्थित हैं, लेकिन कभी कभी पृथ्वी से देखने पर वे एक ही दिशा में दिखाई देते हैं, जिससे यह आकर्षक दृश्य बनता है। ऐसे विशेष खगोलीय संयोजन विद्यार्थियों एवं आमलोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ रात के आकाश के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी प्रेरित करते हैं।
मॉडलिंग में भी लहराया एबीसी किड्स मॉन्टेसरी स्कूल का परचम, लगभग 30 स्कूलों को पछाड़ नन्हे सितारों ने जीते गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल

संभल, चंदौसी।"जहाँ प्रतिभा को सही मंच और सही मार्गदर्शन मिलता है, वहाँ सफलता कदम चूमती है।" इसी कहावत को एक बार फिर एबीसी किड्स मॉन्टेसरी स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने सच साबित कर दिखाया। स्केटिंग और ताइक्वांडो में लगातार अपनी शानदार सफलता का परचम लहराने के बाद अब विद्यालय के बच्चों ने मॉडलिंग के क्षेत्र में भी अपना जलवा बिखेरते हुए पूरे विद्यालय का नाम गर्व से ऊँचा कर दिया।

2 अगस्त 2026 को मुरादाबाद में आयोजित North India Zone Dance Championship एवं मॉडलिंग प्रतियोगिता में लगभग ३०  प्रतिष्ठित विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच एबीसी किड्स मॉन्टेसरी स्कूल के नन्हे मॉडल्स ने अपने आत्मविश्वास, आकर्षक रैंप वॉक, बेहतरीन स्टाइल और दमदार प्रस्तुति से निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल के साथ शील्ड अपने नाम कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया।
पूरा सिस्टम बचाने में जुटा था...', बृजभूषण के बरी होने पर विनेश फोगाट का झलका दर्द

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भारतीय जनता पार्टी के नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले पर महिला पहलवान विनेश फोगाट दुख जाहिर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू से ही पूरा प्रशासन, सरकार और व्यवस्था बृजभूषण को बचाने में लगी थी।

विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर जाताया दुख

कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट करते हुए विनेश ने लिखा कि ‘हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं, लेकिन कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ती रहीं। हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना।’

फैसले के खिलाफ जाएंगे कोर्ट- विनेश

विनेश ने लिखा कि ‘शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।’पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ जल्द से जल्द अपील दायर करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने उम्मीद नहीं खोई है और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

सारी ताकत बृज भूषण के पास- बजरंग पूनिया

इसके अलावा बजरंग पूनिया ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि 'आज के फैसले से यह साफ हो गया है कि सारी ताकत बृज भूषण के पास है। उन्होंने गवाह तोड़ दिए। हम कोर्ट के आदेश का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और हमें समझ नहीं आ रहा कि किस आधार पर उन्हें बरी किया गया।'

बृज भूषण शरण सिंह ने क्या कहा?

वहीं, कोर्ट का फैसला आने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा, 'मैंने पहले ही दिन कहा था कि अगर मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित होता है तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा।' विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रियंका गांधी से लेकर आम आदमी पार्टी और वामपंथी नेता सब जुट गए थे और उनकी फांसी की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। उन्होंने यह भी कहा कि वे जूनियर पहलवानों के हक के लिए लड़े थे और अब वही खिलाड़ी देश का परचम लहराएंगे।

जंतर-मंतर पर हुआ था लंबा आंदोलन

बता दें कि साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया सहित देश के प्रमुख पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले ने पूरे देश में तूल पकड़ा था। अब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है।

शादी के लिए प्रताड़ित करने वाला गिरफ्तार:टावर पर चढ़कर दी थी आत्महत्या, झूठे मुकदमे की धमकी

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही जिले के गोपीगंज थाना पुलिस ने एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी शादी के लिए एक महिला को प्रताड़ित करने, आत्महत्या की धमकी देने और झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोप में की गई है। आरोपी ने मोबाइल टावर पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी दी थी।

विकास गुप्ता नामक व्यक्ति ने गोपीगंज थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि विजय कुमार गौतम नामक अभियुक्त उनकी बहन को लंबे समय से शादी के लिए परेशान कर रहा था। आरोपी एक लाख रुपये की मांग कर रहा था और परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने तथा जान से मारने की धमकी भी दे रहा था।

शिकायत के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को अभियुक्त विजय कुमार गौतम एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसने धमकी दी कि यदि उसकी शादी वादी की बहन से नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर लेगा और वादी के परिवार को झूठे मुकदमे में फंसा देगा। इस तहरीर के आधार पर गोपीगंज थाने में मु0अ0सं. 0326/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 78, 74, 308(5), 351(3) और 226 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देश पर और अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर चमन सिंह चावड़ा के नेतृत्व में गोपीगंज पुलिस ने सोमवार को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए वांछित अभियुक्त विजय कुमार गौतम को धनापुर मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान विजय कुमार गौतम (उम्र करीब 26 वर्ष) पुत्र होरीलाल गौतम निवासी ग्राम घनश्यामपुर, थाना गोपीगंज, जनपद भदोही के रूप में हुई है। इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक संतोष कुमार और मुख्य आरक्षी संजय सरोज द्वारा की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद, अभियुक्त को नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्यवाही पूरी कर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में शुक्रवार को सत्र 2026-28 में नवप्रवेशित छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके उपरांत उन्होंने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं से परिचय प्राप्त किया। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष (तृतीय सेमेस्टर) के छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थी अनुशासित, नियमित एवं समर्पित होकर अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक के रूप में आप सभी पर समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माता भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संयम, अनुशासन एवं सतत अध्ययन के माध्यम से अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन किशन मिश्र ने किया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. नीरज यादव, डॉ. लोहंस कुमार कल्याणी, डॉ. चमन कौर, श्री राजेन्द्र मिश्र, श्रीमती प्रतिभा सिंह, डॉ. दीपा गुप्ता एवं श्री अमरजीत वर्मा सहित बी.एड. के छात्राध्यापक-छात्राध्यापिकाएँ प्रखर जैन, अभितोष, खुशी यादव, अक्षय त्रिपाठी, विपिन मौर्य, आस्था तिवारी, वैदेही, प्रिया आर्या, अर्चना भास्कर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मोजुद थे ।
श्रावण मास,श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी,मणिपर्वत (श्रावण झूला)मेला एवं रक्षाबंधन के दृष्टिगत जनपद गोण्डा में विशेष यातायात डायवर्जन व्यवस्था लागू
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श्रावण मास-2026 के दौरान श्रावण सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला एवं रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या धाम एवं आसपास के जनपदों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एवं वाहनों के दबाव को देखते हुए जनपद गोण्डा में विशेष यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।

*निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय श्रावण सोमवार एवं श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर 08 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 12 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे तक, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला, तृतीय श्रावण सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर 14 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 17 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक, चतुर्थ/अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर 23 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 24 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक तथा श्रावण पूर्णिमा स्नान, रक्षाबंधन एवं मेला समापन के अवसर पर 27 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 28 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक विशेष डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी।*

*प्रमुख डायवर्जन व्यवस्था*

*रूट-ए:*
लखनऊ से बाराबंकी एवं गोण्डा होते हुए गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले समस्त वाहनों को दर्जीकुआँ (थाना कोतवाली देहात) से डायवर्ट कर झिलाही रेलवे क्रॉसिंग-मनकापुर-उतरौला मार्ग-डुमरियागंज होते हुए गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*रूट-बी:*
लखनऊ से गोण्डा होकर गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले वाहनों को दर्जीकुआँ से डायवर्ट कर मोतीगंज- मनकापुर-मसकनवा-बभनान मार्ग से गंतव्य के लिए भेजा जाएगा।

*रूट-सी:*
गोण्डा शहर में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों को धानेपुर-उतरौला मार्ग से डायवर्ट कर बेवा चौराहा/डुमरियागंज के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं*

• अयोध्या प्रशासन के निर्देशानुसार लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले भारी वाहनों को सामान्यतः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करना होगा। पर्वों के दौरान लखनऊ-बाराबंकी-रामनगर (महादेवा मंदिर) मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

• बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती एवं गोण्डा से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को जरवल रोड-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग से भेजा जाएगा।

• गोण्डा से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों का संचालन श्रावण सोमवार एवं पर्वों के दौरान जरवल रोड-बाराबंकी मार्ग पर प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को हुजूरपुर मोड़-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा।

• आवश्यकता पड़ने पर उतरौला एवं बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को जानकीनगर पुलिस चौकी (थाना इटियाथोक) से डायवर्ट कर आर्यनगर-कटरा बाजार-कर्नलगंज मार्ग से भेजा जाएगा।

•कर्नलगंज-परसपुर-तरबगंज-नवाबगंज मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

• गोण्डा शहर से जरवल रोड होकर बाराबंकी-लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को हुजूरपुर मोड़ से डायवर्ट किया जाएगा।

• कर्नलगंज, परसपुर एवं तरबगंज से नवाबगंज आने वाले भारी वाहनों को कटी तिराहा से मनकापुर की ओर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य चारपहिया वाहन टिकरी मोड़-कोल्हमपुर-लोलपुर मार्ग से संचालित होंगे।

• कटी तिराहा से अयोध्या की ओर केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

• लकड़मण्डी तिराहा से नया घाट पुल (अयोध्या) तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी।

• लोलपुर से नवाबगंज जाने वाले वाहनों को कोल्हमपुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को लकड़मण्डी-नवाबगंज मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा।

*जनसामान्य से अपील*

जनपद पुलिस द्वारा समस्त वाहन चालकों एवं आमजन से अपील की जाती है कि निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं यातायात पुलिस के निर्देशों का अनुपालन करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा सहयोग एवं संयम बनाए रखते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें। जनसहयोग से ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखना संभव हो
लखनऊ मंडल में पर्यटन विकास को मिलेगी रफ्तार, 59 परियोजनाओं पर नवंबर तक शुरू होगा काम
-  ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों और आस्था स्थलों के सौंदर्यीकरण के प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई; पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ मंडल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं पर्यटन विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत लखनऊ मंडल की विभिन्न विधानसभाओं में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य आस्था स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 59 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी परियोजनाओं को आगामी नवंबर तक धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य किया जाए।
पर्यटन मंत्री ने गुरुवार को बताया कि प्राप्त प्रस्ताव सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, जिलाधिकारियों तथा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों की ओर से भेजे गए हैं। इनमें रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लखनऊ मंडल में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए वहां बुनियादी पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि इन स्थलों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके और स्थानीय पर्यटन को नई गति मिले।

-  इन प्रमुख स्थलों का होगा विकास
प्रस्तावित परियोजनाओं में लखनऊ के प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, नाका हिंडोला गुरुद्वारा, भुइयन देवी मंदिर, आलमबाग स्थित सनातन धर्म मंदिर, उनई देवी मंदिर, कल्याणगिरी महादेव मंदिर, श्री चित्रगुप्त भवन, राजाजीपुरम शीतला देवी मंदिर, अलीगंज हनुमान मंदिर, काकोरी शहीद स्थल और गंगाप्रसाद मेमोरियल हॉल के संरक्षण एवं पर्यटन विकास के प्रस्ताव शामिल हैं।
इसके अलावा लखीमपुर खीरी के बाबा भूतनाथ मंदिर, तुरन्तनाथ बाबा मंदिर, जंगलियानाथ बाबा मंदिर और बाबा भुरिया नाथ धाम, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में पर्यटन सुविधा केंद्र एवं वन स्टॉप सेंटर, महमूदाबाद का मां संकटा देवी धाम, सिधौली का झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, रायबरेली का चंपा देवी मंदिर, ऊंचाहार स्थित महाराज माहे पासी किला तथा प्राचीन विष्णु मंदिर के विकास के प्रस्ताव भी कार्ययोजना में शामिल किए गए हैं।
हरदोई के महर्षि दधीचि मंदिर, शाहाबाद के बाबा वनखंडी मंदिर, संडीला के चौमुखी मंदिर तथा उन्नाव के बुद्ध अंबेडकर पार्क, मोहान स्थित जमदग्नि आश्रम-परशुराम मंदिर, भगवंतनगर के हनुमान मंदिर और श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सभी परियोजनाओं के लिए संबंधित जनपदों से भूमि अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि स्वीकृति के बाद निर्माण एवं विकास कार्य समयबद्ध ढंग से शुरू किए जा सकें।
सरकार का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम, तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के संचालन को मिली हरी झंडी

- उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गाजियाबाद, कानपुर व फतेहपुर के प्रस्तावित विश्वविद्यालयों को सौंपा 'संचालन प्राधिकार पत्र'

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को उच्च शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रदेश में स्थापित होने जा रहे तीन नए निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन को 'संचालन प्राधिकार पत्र' (अनुज्ञा पत्र) प्रदान किया। योगी सरकार की इस पहल से गाजियाबाद, कानपुर और फतेहपुर जनपदों में उच्च, तकनीकी एवं कृषि शिक्षा का विस्तार होगा तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जनपद गाजियाबाद में 'अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी', गाजियाबाद के सचिव/चेयरमैन को, कानपुर नगर के बिल्हौर में 'महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट', दिल्ली के सचिव को तथा फतेहपुर में 'ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय' के संचालन हेतु 'एंग्लो संस्कृत कॉलेज', फतेहपुर के अध्यक्ष को आधिकारिक संचालन प्राधिकार पत्र सौंपा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 में संशोधन अध्यादेशों के तहत यह स्वीकृति जारी की गई है। इसके अंतर्गत गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय को तृतीय संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 17 सन् 2026), कानपुर के महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय को चतुर्थ संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 18 सन् 2026) तथा फतेहपुर के ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय को पंचम संशोधन अध्यादेश (अध्यादेश संख्या 19 सन् 2026) के तहत सम्मिलित करते हुए संचालन की अनुज्ञा संबंधी अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री ने प्राधिकार पत्र सौंपते हुए संबंधित संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे शासन द्वारा निर्धारित मानकों, नियमों एवं शर्तों का  अनुपालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहित कर उच्च शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ कर रही है, जिससे राज्य के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों और उत्कृष्ट वातावरण का लाभ मिल सके।
बीमारी भी नहीं रोक सकी ममता की धारा, जारी रहा स्तनपान
- टीबी, फाइलेरिया और समय से पहले जन्मे शिशु जैसी चुनौतियों के बीच डॉक्टरों की सलाह बनी भरोसा
*गोंडा, 04 अगस्त 2026*: जब कोई मां बीमार होती है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वह अपने शिशु को स्तनपान करा सकती है। कई बार यह डर भी सताता है कि कहीं उसकी बीमारी बच्चे तक न पहुंच जाए। यही आशंका देवीपाटन मंडल की उन माताओं के मन में भी थी, जिन्होंने विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान अपने अनुभव साझा किए। परिवार के कुछ सदस्य भी इसी डर से उन्हें स्तनपान कराने से मना करते थे। लेकिन डॉक्टरों की सही सलाह, आशा और एएनएम के मार्गदर्शन तथा परिवार के सहयोग से उनका यह भ्रम दूर हुआ।
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में देवीपाटन मंडल के 3.18 लाख से अधिक नवजातों को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल से घर लौटने के बाद बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों और परिवार के संकोच के कारण कई माताएं स्तनपान को लेकर असमंजस में पड़ जाती हैं।
अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद इन माताओं ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने शिशुओं को पहले छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाया और कई माताओं ने दो साल तक भी स्तनपान जारी रखा। आज वे कहती हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ हैं, अच्छी तरह बढ़ रहे हैं और दूसरे बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं।
केस -1 फाइलेरिया का डर, लेकिन नहीं रुका स्तनपान-
जरवल ब्लॉक के रिठौढ़ा गांव की रिंकी गर्भावस्था के दौरान फाइलेरिया से पीड़ित हो गई थीं। रिंकी बताती हैं कि प्रसव के बाद परिवार को डर था कि कहीं स्तनपान से बच्चे को भी बीमारी न हो जाए। आशा कार्यकर्ता ने समझाया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलता है, मां के दूध से नहीं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता सामग्री भी दिखाई। इसके बाद परिवार की शंका दूर हुई और रिंकी ने अपने बेटे को दो साल तक स्तनपान कराया। आज वह छह साल का है, स्वस्थ है और स्कूल जाता है।
केस -2 कम वजन की बच्ची के लिए मां का दूध बना संबल-
बलरामपुर के श्रीदत्तगंज निवासी मनोज कुमार की पत्नी मीना देवी ने 4 जून 2026 को जिला अस्पताल में 1635 ग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। कम वजन होने के कारण नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ा। बच्ची स्तन से दूध नहीं खींच पा रही थी, इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों ने मां का दूध निकालकर कटोरी-चम्मच से पिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। मीना देवी कहती हैं, "डॉक्टरों ने बताया कि मेरे दूध से ही मेरी बच्ची को सबसे ज्यादा ताकत मिलेगी। आज बच्ची स्वस्थ है और सामान्य रूप से बढ़ रही है।“
केस -3 टीबी इलाज के साथ जारी रहा स्तनपान -
श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र के अंबेडकरनगर की 26 वर्षीय एक महिला (पहचान गोपनीय रखने के अनुरोध पर नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है) को प्रसव के बाद टीबी का पता चला। परिवार को डर था कि कहीं शिशु को भी संक्रमण न हो जाए। डॉक्टरों ने समझाया कि नियमित उपचार, शुरुआती दिनों में मास्क के उपयोग और पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान सुरक्षित रूप से जारी रखा जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकीय सलाह का पालन किया और अपने शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ा। महिला कहती हैं, "डॉक्टरों की सलाह ने मेरा और मेरे परिवार का डर दूर कर दिया। आज मेरा डेढ़ साल का बेटा स्वस्थ है और मैं भी पूरी तरह टीबी से ठीक हो चुकी हूं।"

"कई माताएं यह भी सोचती हैं कि बीमारी या दवा लेने से उनका दूध खराब हो जाएगा या बच्चे को नुकसान पहुंचाएगा। जबकि अधिकांश सामान्य बीमारियों और उनकी दवाओं के दौरान भी स्तनपान सुरक्षित रहता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के न तो दवा बंद करें और न ही स्तनपान।"
डॉ. संतलाल पटेल- कार्यवाहक अपर निदेशक (देवीपाटन मंडल) एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोंडा
लखनऊ में मानसून का कहर: 24 घंटे में सामान्य से छह गुना ज्यादा बारिश, दीवार गिरने से वाहन दबे; दो दिन का ऑरेंज अलर्ट
सुबह से छाए बादल, दिनभर भारी बारिश के आसार; शहर में जलभराव और बिजली संकट, अगले तीन दिन भी राहत नहीं

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार सुबह से ही शहर बादलों की चादर में लिपटा रहा और मौसम विभाग ने दिनभर मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते 24 घंटों में शहर में 40.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 7 मिलीमीटर की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। लगातार बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

बारिश के बीच लखनऊ सिटी स्टेशन के पास एक बड़ा हादसा भी हुआ। यहां एक पुरानी दीवार भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में एक कार और करीब आधा दर्जन दोपहिया वाहन दब गए। हालांकि, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

मानसून अब भी सामान्य से पीछे

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक लखनऊ में 227.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 345.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राजधानी में अब तक मानसून करीब 34 प्रतिशत कमजोर रहा है। हालांकि हाल के दिनों में हुई तेज बारिश से इस कमी में कुछ सुधार की उम्मीद है।

तापमान में गिरावट, उमस से मिली राहत

मंगलवार को अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1 डिग्री कम था। बारिश के कारण हवा में नमी काफी बढ़ गई और अधिकतम आर्द्रता 97 प्रतिशत तथा न्यूनतम 87 प्रतिशत दर्ज की गई।

जलभराव और बिजली कटौती से बढ़ीं मुश्किलें

लगातार बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे नागरिकों की परेशानियां और बढ़ गईं।

अगले तीन दिन भी झमाझम बारिश के आसार

मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से अगले 2 से 3 दिनों तक लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट आएगी तथा उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।

बीते 24 घंटों में अमौसी मौसम केंद्र पर 66.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन की अब तक की सबसे अधिक वर्षा है। मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।
खगोलीय घटना। 4 अगस्त 2026 की शाम पश्चिमी आकाश में शुक्र, स्पाइका और रेगुलस का सुंदर दृश्य संयोजन दिखेगा
* क्या है यह दृश्य संयोजन ?

गोरखपुर। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चित्रा तारा और मघा तारा के बीच दिखाई देगा शुक्र ग्रह या कुछ यूं कहें कि 4 अगस्त, 2026 को शुक्र ग्रह की सीध में होंगे स्पाइका और रेगुलस तारे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर बनेगा मनमोहक खगोलीय दृश्य इसका नग्न आंखों से भी किया जा सकेगा अवलोकन ।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि स्पाइका तारा जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में अल्फा वर्जिनिस भी कहा जाता है,यह कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है जोकि पृथ्वी से लगभग 250 प्रकाश वर्ष की दूरी पर मौजूद है , स्पाइका एक अकेले नीले-सफेद तारे के रूप में दिखाई देता है। लेकिन स्पिका के रूप में हमें जो प्रकाश का एक बिंदु दिखाई देता है, वह वास्तव में कम से कम दो तारे हैं। इसका मतलब हुआ कि यह एक बाइनरी तारा है और इसकी चमक के मैग्नीट्यूड के कारण ही जो इसे कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा बनाती है। साथ ही यह पृथ्वी पर कहीं से भी दिखाई देने वाला 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। यह भी जानना आवश्यक है कि इसकी चमक वृश्चिक तारामंडल में स्थित एंटारेस तारे के लगभग बराबर है, इसलिए कभी-कभी प्राचीन खगोल विज्ञान में एंटारेस को 15वां और स्पिका को 16वां सबसे चमकीला तारा भी मान लिया गया है। यह मैग्नीट्यूड में परिवर्तन की प्रक्रिया के कारण होता है। अब हम बात करें रेगुलस तारे की तो पाते हैं कि रेगुलस तारा,सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है, जिसको खगोल विज्ञान में अल्फा लियोनिस के नाम से भी जाना जाने वाला यह तारा हमारे आकाश के सबसे चमकीले तारों की सूची में 21वें स्थान पर है। इसको हिंदी भाषा में मघा तारा के नाम से भी जाना जाता है यह सूर्य के आकाशीय पथ, यानी क्रांतिवृत्त के निकट स्थित है। इसलिए पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों से रेगुलस तारामंडल समान रूप से स्पष्ट दिखाई देता है और रेगुलस पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उत्तरी गोलार्ध से रेगुलस वर्ष भर रात के किसी न किसी समय दिखाई देता है, सिवाय 22 अगस्त के आसपास के लगभग एक महीने को छोड़कर। साथ ही उत्तरी गोलार्ध में, रेगुलस को स्प्रिंग ट्रायंगल नामक तारामंडल बनाने वाले तीन चमकीले तारों में से एक के रूप में भी जाना जाता है एवं साथ ही उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध से देखने पर, रेगुलस लगभग सूर्य और चंद्रमा के पथ का अनुसरण करता है। इसलिए उत्तरी गोलार्ध में रहने वाले लोग आमतौर पर दक्षिण की ओर मुख करके रेगुलस को आकाश में अपना विस्तृत चाप बनाते हुए देखते हैं। लेकिन दक्षिणी गोलार्ध में रहने वाले लोग इसे देखने के लिए आमतौर पर उत्तर की ओर मुख करते हैं।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सिंह राशि का सबसे चमकीला तारा रेगुलस जिसे सिंह का हृदय भी कहा जाता है और सिंह तारामंडल को देखने पर रेगुलस उल्टे प्रश्न चिह्न के निचले भाग में स्थित चमकीले बिंदु को दर्शाता है, जो सिंह के सिर और कंधों का आकार बनाता है। इस आकृति को हंसिया कहा जाता है साथ ही एक आसानी से पहचाने जाने वाला त्रिभुज सिंह के पिछले हिस्से और पूंछ को दर्शाता है, और डेनेबोला तारा सिंह की पूंछ को चिह्नित करता है खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक ख़ास बात यह भी है कि जब भी ग्रह और चंद्रमा इसके पास से गुजरते हुए प्रतीत होते हैं तो इसका मतलब हुआ कि रेगुलस एकमात्र प्रथम परिमाण का तारा है जो लगभग पूरी तरह से क्रांतिवृत्त पर स्थित है,या कुछ यूं कहें कि रेगुलस तारा ,हमारे आकाश में सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों के पथ पर स्थित है। इसीलिए जब रेगुलस तारा दिखाई देता है, तब चंद्रमा महीने में एक बार उसके सामने से गुजरता है। कुछ वर्षों में, पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा रेगुलस को ढक भी लेता है ,यानी उसके सामने से गुजरता है। और अभी हम रेगुलस के 20 चंद्र ग्रहणों की एक श्रृंखला में हैं, जो जुलाई 2025 से दिसंबर 2026 तक चलेगी। दिसंबर 2026 के ग्रहण के दौरान, मंगल और बृहस्पति ग्रह इसके पास में होंगे।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रह भी कभी-कभी रेगुलस के सामने से गुजरते हैं और ग्रह कभी-कभी इस तारे को ढक भी लेते हैं ,या कुछ यूं कहें कि इसके सामने से गुजर जाते हैं साथ ही रेगुलस को ढकने वाला आखिरी ग्रह शुक्र था, जिसने 7 जुलाई 1959 को यह दृश्य प्रदर्शित किया था। फिर 1 अक्टूबर 2044 को शुक्र एक बार फिर रेगुलस को ढक लेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश प्रेमियों के लिए 4 अगस्त, 2026 की शाम एक आकर्षक खगोलीय दृश्य लेकर आएगी। इस दिन सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर सौर मंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र, दो प्रसिद्ध चमकदार तारों स्पाइका और रेगुलस के बीच एक सुंदर स्थिति में दिखाई देगा। यह दुर्लभ दृश्य न केवल खगोल विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए रोचक होगा, बल्कि सामान्य लोग भी इसे बिना किसी विशेष उपकरण के नग्न आंखों से ही देख सकेंगे। यदि दूरबीन या बाइनोकुलर का उपयोग किया जाए तो यह खगोलीय संयोजन और भी अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक दिखाई देगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस अवसर पर सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा रेगुलस तथा कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा स्पाइका, शुक्र ग्रह के आसपास एक सुंदर ज्यामितीय दृश्य संयोजन युक्त विन्यास बनाते हुए नजर आएंगे। अपनी असाधारण चमक के कारण शुक्र ग्रह पहले ही पश्चिमी आकाश में आसानी से पहचाना जा सकेगा, जबकि उसके  दृश्य संयोजन स्थित दोनों प्रमुख तारे इस दृश्य को और अधिक मनोहारी बना देंगे।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 4 अगस्त 2026 की शाम सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर यह विशेष खगोलीय संयोजन देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस समय शुक्र ग्रह, स्पाइका और रेगुलस लगभग एक ही दिशा में दिखाई देंगे और आकाश में एक आकर्षक पैटर्न का निर्माण करेंगे। मौसम साफ रहने पर यह दृश्य काफी देर तक आसानी से देखा जा सकेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वा ग्रह भी कहा जाता है। आकार और संरचना की कुछ समानताओं के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वां माना जाता है। यही कारण है कि इसे "पृथ्वी की बहन" भी कहा जाता है। अपनी अत्यधिक चमक के कारण शुक्र ग्रह को संध्या तारा तथा भोर का तारा के नाम से भी जाना जाता है, हालांकि यह वास्तव में तारा नहीं बल्कि एक ग्रह है। वर्तमान समय में यह सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में अत्यंत चमकीला दिखाई दे रहा है और 4 अगस्त की शाम इसकी स्थिति स्पाइका तथा रेगुलस के साथ एक विशेष दृश्य प्रस्तुत करेगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि स्पाइका कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है तथा यह आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। दूसरी ओर, सिंह तारामंडल का प्रमुख तारा रेगुलस अपने नीले-सफेद रंग और अत्यधिक तापमान के कारण विशेष पहचान रखता है। दोनों तारों की उपस्थिति के बीच चमकता हुआ शुक्र ग्रह आकाश में एक आकर्षक स्थिति युक्त विन्यास जैसा दृश्य प्रस्तुत करेगा, जो आकाश प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
*  इस दौरान कितना होगा शुक्र ग्रह और चित्रा तारा एवं मघा तारा का मैग्नीट्यूड ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बताया कि इस खगोलीय संयोजन के दौरान शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 4.14 रहेगा। वहीं स्पाइका का मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.97 होगा, जबकि रेगुलस लगभग प्लस 1.40 मैग्नीट्यूड के साथ अपनी चमक बिखेरता दिखाई देगा। चमक के इन अंतर के कारण शुक्र, दोनों तारों की तुलना में कहीं अधिक तेजस्वी नजर आएगा और पश्चिमी आकाश में सबसे पहले ध्यान आकर्षित करेगा।
*  कितने बजे से कितने बजे तक और किस दिशा में नज़र आयेगा यह दृश्य संयोजन
खगोलविद अमर पाल सिंह ने अवलोकन के समय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वैसे तो यह तीनों खगोलीय पिण्ड सूर्यास्त के बाद से ही आकाश के पश्चिमी दिशा में दिखना शुरू हो जाएंगे लेकिन अगर बात करें इनके अस्त होने की तो पाते हैं कि रेगुलस तारा लगभग शाम 7:30 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे चला जाएगा। इसके बाद शुक्र ग्रह लगभग रात 8:45 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त हो जाएगा। वहीं स्पाइका तारा लगभग रात 10 बजे तक पश्चिमी क्षितिज पर दिखाई देता रहेगा इसके बाद पश्चिमी क्षितिज पर नीचे चला जायेगा। इसलिए इस खगोलीय घटना का सर्वोत्तम अवलोकन सूर्यास्त के तुरंत बाद से लेकर शुरुआती शाम के समय तक किया जा सकता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने आकाश प्रेमियों से अपील की है कि यदि मौसम साफ रहे तो शहर की तेज रोशनी और प्रकाश प्रदूषण से दूर किसी खुले स्थान का चयन करें। खुले क्षितिज वाले स्थान से पश्चिम दिशा में देखने पर यह सुंदर खगोलीय दृश्य अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। दूरबीन अथवा बाइनोकुलर की सहायता लेने पर शुक्र ग्रह और उसके आसपास स्थित दोनों चमकीले तारों का दृश्य और भी मनमोहक तथा प्रभावशाली प्रतीत होगा।
*  खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से ऐसे दृश्य संयोजन क्यों महत्वपूर्ण होते हैं ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से यह संयोजन आकाश में ग्रहों और तारों की प्रत्यक्ष स्थिति को समझने का भी एक उत्कृष्ट अवसर है। यद्यपि शुक्र, स्पाइका और रेगुलस वास्तविक अंतरिक्ष में एक-दूसरे से अत्यधिक दूर स्थित हैं, लेकिन कभी कभी पृथ्वी से देखने पर वे एक ही दिशा में दिखाई देते हैं, जिससे यह आकर्षक दृश्य बनता है। ऐसे विशेष खगोलीय संयोजन विद्यार्थियों एवं आमलोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ रात के आकाश के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी प्रेरित करते हैं।
मॉडलिंग में भी लहराया एबीसी किड्स मॉन्टेसरी स्कूल का परचम, लगभग 30 स्कूलों को पछाड़ नन्हे सितारों ने जीते गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल

संभल, चंदौसी।"जहाँ प्रतिभा को सही मंच और सही मार्गदर्शन मिलता है, वहाँ सफलता कदम चूमती है।" इसी कहावत को एक बार फिर एबीसी किड्स मॉन्टेसरी स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने सच साबित कर दिखाया। स्केटिंग और ताइक्वांडो में लगातार अपनी शानदार सफलता का परचम लहराने के बाद अब विद्यालय के बच्चों ने मॉडलिंग के क्षेत्र में भी अपना जलवा बिखेरते हुए पूरे विद्यालय का नाम गर्व से ऊँचा कर दिया।

2 अगस्त 2026 को मुरादाबाद में आयोजित North India Zone Dance Championship एवं मॉडलिंग प्रतियोगिता में लगभग ३०  प्रतिष्ठित विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच एबीसी किड्स मॉन्टेसरी स्कूल के नन्हे मॉडल्स ने अपने आत्मविश्वास, आकर्षक रैंप वॉक, बेहतरीन स्टाइल और दमदार प्रस्तुति से निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल के साथ शील्ड अपने नाम कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया।
पूरा सिस्टम बचाने में जुटा था...', बृजभूषण के बरी होने पर विनेश फोगाट का झलका दर्द

#vineshphogatoncourtdecisionfightagainstbrijbhushan

भारतीय जनता पार्टी के नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले पर महिला पहलवान विनेश फोगाट दुख जाहिर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू से ही पूरा प्रशासन, सरकार और व्यवस्था बृजभूषण को बचाने में लगी थी।

विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर जाताया दुख

कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट करते हुए विनेश ने लिखा कि ‘हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं, लेकिन कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ती रहीं। हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना।’

फैसले के खिलाफ जाएंगे कोर्ट- विनेश

विनेश ने लिखा कि ‘शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।’पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ जल्द से जल्द अपील दायर करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने उम्मीद नहीं खोई है और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

सारी ताकत बृज भूषण के पास- बजरंग पूनिया

इसके अलावा बजरंग पूनिया ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि 'आज के फैसले से यह साफ हो गया है कि सारी ताकत बृज भूषण के पास है। उन्होंने गवाह तोड़ दिए। हम कोर्ट के आदेश का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और हमें समझ नहीं आ रहा कि किस आधार पर उन्हें बरी किया गया।'

बृज भूषण शरण सिंह ने क्या कहा?

वहीं, कोर्ट का फैसला आने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा, 'मैंने पहले ही दिन कहा था कि अगर मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित होता है तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा।' विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रियंका गांधी से लेकर आम आदमी पार्टी और वामपंथी नेता सब जुट गए थे और उनकी फांसी की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। उन्होंने यह भी कहा कि वे जूनियर पहलवानों के हक के लिए लड़े थे और अब वही खिलाड़ी देश का परचम लहराएंगे।

जंतर-मंतर पर हुआ था लंबा आंदोलन

बता दें कि साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया सहित देश के प्रमुख पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले ने पूरे देश में तूल पकड़ा था। अब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है।

शादी के लिए प्रताड़ित करने वाला गिरफ्तार:टावर पर चढ़कर दी थी आत्महत्या, झूठे मुकदमे की धमकी

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही जिले के गोपीगंज थाना पुलिस ने एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी शादी के लिए एक महिला को प्रताड़ित करने, आत्महत्या की धमकी देने और झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोप में की गई है। आरोपी ने मोबाइल टावर पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी दी थी।

विकास गुप्ता नामक व्यक्ति ने गोपीगंज थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि विजय कुमार गौतम नामक अभियुक्त उनकी बहन को लंबे समय से शादी के लिए परेशान कर रहा था। आरोपी एक लाख रुपये की मांग कर रहा था और परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने तथा जान से मारने की धमकी भी दे रहा था।

शिकायत के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को अभियुक्त विजय कुमार गौतम एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसने धमकी दी कि यदि उसकी शादी वादी की बहन से नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर लेगा और वादी के परिवार को झूठे मुकदमे में फंसा देगा। इस तहरीर के आधार पर गोपीगंज थाने में मु0अ0सं. 0326/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 78, 74, 308(5), 351(3) और 226 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देश पर और अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर चमन सिंह चावड़ा के नेतृत्व में गोपीगंज पुलिस ने सोमवार को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए वांछित अभियुक्त विजय कुमार गौतम को धनापुर मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान विजय कुमार गौतम (उम्र करीब 26 वर्ष) पुत्र होरीलाल गौतम निवासी ग्राम घनश्यामपुर, थाना गोपीगंज, जनपद भदोही के रूप में हुई है। इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक संतोष कुमार और मुख्य आरक्षी संजय सरोज द्वारा की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद, अभियुक्त को नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्यवाही पूरी कर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।