तूफान 'अर्नब' रांची में दो दिनों तक सभी स्कूल बंद, मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट जारी

रांची:राज्य में मौसम के कड़े तेवरों और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में मौसम विभाग (IMD) द्वारा 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किए जाने के बाद, एहतियातन जिले के तमाम शिक्षण संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्देश जिला प्रशासन की ओर से जारी किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, आने वाले घंटों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात (आसानी बिजली गिरने) की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

सभी स्कूलों पर रहेगा आदेश लागू

रांची डीसी कार्यालय से मिले निर्देशों के अनुसार, यह पाबंदी जिले के भीतर आने वाले सभी सरकारी, प्राइवेट और मान्यता प्राप्त स्कूलों (प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक कक्षाओं तक) पर समान रूप से लागू होगी। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन दो दिनों तक किसी भी तरह की कक्षाएं या शैक्षणिक गतिविधियां संचालित न की जाएं।

प्रशासन का मानना है कि मूसलाधार बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव, यातायात बाधित होने और वज्रपात जैसी अनहोनी से स्कूली बच्चों को बचाना बेहद जरूरी है।

इन जिलों पर भी मंडरा रहा है खतरा

मौसम वैज्ञानिकों का आकलन है कि झारखंड के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में मौसमी गतिविधियों का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।

ऑरेंज जोन के प्रमुख जिले: रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग और इनसे सटे इलाके।

संभावित हालात: भारी वर्षा, आकाशीय बिजली चमकना, तेज आंधी और शहरी इलाकों में निचले स्थानों पर पानी भरना।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल मुस्तैद

खराब मौसम की चेतावनी के बाद नगर निगम और जिला आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है:

बिजली विभाग अलर्ट: तेज हवाओं के कारण पेड़ों की डालियों के टूटने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका के मद्देनजर 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' (QRT) को हर वक्त तैयार रहने को कहा गया है।

24 घंटे कंट्रोल रूम चालू: किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने और आम जनता को मदद पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर चौबीस घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया गया है।

आम जनता और अभिभावकों के लिए जरूरी निर्देश

प्रशासन और मौसम विभाग ने नागरिकों से एहतियात बरतने की अपील की है:

अभिभावकों के लिए सलाह: स्कूलों की इस छुट्टी के दौरान अभिभावक बच्चों की सुरक्षा का विशेष ख्याल रखें और उन्हें घरों से बाहर न जाने दें।

सावधानी बरतें: आंधी-तूफान और गर्जन के वक्त बड़े पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों या छतों के पास खड़े होने से बचें।

ड्राइविंग में सावधानी: भारी बारिश के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने पर वाहन चालक अपनी गाड़ियों की रफ्तार नियंत्रित रखें।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग के निर्देशों का गंभीरता से पालन करें और बेहद जरूरी काम होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें।

वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा का परचम, लाल बिहारी यादव लगातार दूसरी बार जीते
लखनऊ , वाराणसी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर पार्टी का परचम लहराया है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों से शिकस्त दी। 

वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत की घोषणा होते ही सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी। इस दौरान पार्टी के समर्थन में जमकर नारे लगाए गए। ढोल-नगाड़ों की धुन पर समर्थक खुशी से झूमते नजर आए। देर रात तक एक-दूसरे को बधाई देने का सिलसिला जारी रहा।

जानकारी के अनुसार लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 मत मिले, जबकि डॉ. प्रमोद मिश्रा के खाते में 6,597 मत आए। इस जीत से सपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। परिणाम घोषित होते ही समर्थकों ने नारेबाजी की और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर झूमे।

जीत हासिल करने के बाद लाल बिहारी यादव ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत अखिलेश यादव की नीतियों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का परिणाम है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, गैर-वित्तपोषित शिक्षकों के मानदेय, सहायता प्राप्त और सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की सेवा शर्तों तथा अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों में मानदेय से जुड़े विषयों का उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर आधारित परीक्षाओं के विरोध को भी शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल बताया।

लाल बिहारी यादव ने कहा कि पिछले चुनाव में उन्होंने लगभग एक हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि इस बार जीत का अंतर बढ़कर पांच हजार से अधिक मतों का हो गया है। उनके अनुसार, यह परिणाम पार्टी और उनके प्रति शिक्षकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।उन्होंने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करेंगे। सपा की सरकार शिक्षकों के साथ खड़ी है, इसलिए दूसरी बार भी इन लोगों ने मुझे जिताया है, मैंने इनसे जो वादा किया है उसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास करूंगा।
भदोही में दो दिन मौसम का खतरा! 28-29 अक्टूबर को तेज हवाओं, भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। 28 और 29 अक्टूबर को भदोही सहित कई जनपदों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक, वज्रपात और भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है। मौसम की चेतावनी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश ने किसानों से अपील की है कि तैयार फसलों की जल्द कटाई कर लें और कटी फसलों व अनाज को सुरक्षित, ढके हुए स्थानों पर रखें। खेतों में भराई और पलेवा का कार्य तथा सब्जियों की बुवाई 29 अक्टूबर तक स्थगित रखें। बारिश से खेतों में पानी भरने पर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें।

वज्रपात की आशंका को देखते हुए पशुओं को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न बांधें। किसानों से अपील है कि मौसम चेतावनी को गंभीरता से लें और फसलों, अनाज तथा पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें।
फैशन का महाधमाका! रंगरेज़ा बाय आरंभ लेकर आ रहा है दिवाली एंड करवाचौथ स्पेशल एडिशन

*इंदौर।* साक्षी वर्मा और निधि वर्मा फिर से लेकर आ रही हैं अपने ही शहर में फैशन और फेस्टिवल का सबसे बड़ा संगम। जी हाँ, इंतजार खत्म हुआ, *अपने शहर में आ रहा है* शहर का सबसे पसंदीदा और सबसे बड़ा लाइफस्टाइल फेस्ट - *'रंगरेज़ा बाय आरंभ - दिवाली एंड करवाचौथ एडिशन'*।

पिछले एडिशन की बम्पर सफलता के बाद इस बार यह एडिशन और भी ज्यादा ग्रैंड, रॉयल और एक्सक्लूसिव होने वाला है।

आगामी *27 और 28 अक्टूबर को बॉम्बे हॉस्पिटल के पास स्थित होटल इन्फिनिटी, इंदौर* में दो दिवसीय भव्य एग्जीबिशन का आयोजन होने जा रहा है। प्रदर्शनी दोनों दिन *सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक* खुली रहेगी।

*इस बार होगा डबल फेस्टिव धमाका!*

*करवाचौथ स्पेशल कलेक्शन:* इस करवाचौथ पर सबसे खूबसूरत और सबसे खास दिखने के लिए स्पेशल रॉयल रेड सूट्स, ब्राइडल चूड़ा स्पेशल साड़ियां, हैवी *कट दाना लहंगे*, गोटा-पत्ती वर्क वाले लहंगे और चमचमाती प्रीमियम कुंदन-पोलकी ज्वेलरी का ऐसा कलेक्शन जो आपको कहीं और नहीं मिलेगा।

*दिवाली स्पेशल कलेक्शन:* दिवाली और भाई दूज के त्योहार के लिए डिज़ाइनर साड़ियाँ, फेस्टिव लहंगे, ट्रेंडी इंडो-वेस्टर्न, पार्टी वियर गाउन, किड्स एथनिक वियर और मेंस वियर का सबसे यूनिक और लेटेस्ट कलेक्शन एक ही छत के नीचे मिलेगा।

सिर्फ फैशन ही नहीं, इस बार त्योहार को और भी रोशन बनाने के लिए *लहंगा, साड़ी, सूट, होम डेकोर, प्रीमियम ज्वेलरी और दिवाली डेकोर से लेकर अपनों के लिए स्पेशल गिफ्ट्स तक, सब कुछ मिलेगा एक ही छत के नीचे।* दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की एक्सक्लूसिव मूर्तियां, हैंडमेड दीये, डिज़ाइनर तोरण-बंदनवार, शुभ-लाभ और प्रीमियम गिफ्ट हैम्पर्स का विशाल कलेक्शन भी इस बार का बड़ा आकर्षण है।

इस बार दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई के नामी डिज़ाइनर्स अपने एक्सक्लूसिव फेस्टिव कलेक्शन के साथ इंदौर आ रहे हैं।

त्योहारों पर सबसे अलग दिखना है तो इस फैशन के महाधमाके को मिस मत कीजिए।

इस भव्य मेले में *सभी के लिए प्रवेश निःशुल्क* रखा गया है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें - *6263415113, 9685590973*
21-22 अक्टूबर की रात आसमान में दिखेंगी ओरियोनिड्स उल्का वर्षा की चमकीली लकीरें

- हैली धूमकेतु के मलबे से बनती है यह खगोलीय घटना, अनुकूल परिस्थितियों में प्रति घंटे दिख सकती हैं 15 से 20 उल्काएं

- आधी रात के बाद और भोर से पहले करें आकाश का अवलोकन, अंधेरी जगह पर मिलेगा बेहतर नजारा

गोरखपुर। अक्टूबर की रातों में आसमान में टूटते तारों जैसी चमकीली लकीरें देखने का अवसर मिलने जा रहा है। 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर 2026 की भोर तक ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का प्रमुख चरण रहने की संभावना है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, यह उल्का वर्षा प्रसिद्ध हैली धूमकेतु द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और चट्टानी कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से उत्पन्न होती है। अनुकूल परिस्थितियों में आकाश के अंधेरे स्थान से प्रति घंटे लगभग 15 से 20 उल्काएं देखी जा सकती हैं। हालांकि, वास्तविक संख्या मौसम, प्रकाश प्रदूषण और चंद्रमा की रोशनी पर निर्भर करेगी। अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स तेज गति से चलने वाली उल्काओं के लिए जानी जाती है। ये पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से प्रवेश करती हैं। इस दौरान वायुमंडल में गैसों और कणों के बीच होने वाली प्रक्रियाओं से प्रकाश उत्पन्न होता है और आसमान में कुछ क्षणों के लिए चमकीली लकीर दिखाई देती है। अधिकांश उल्काएं सफेद या हल्के पीले रंग की नजर आती हैं, जबकि कुछ परिस्थितियों में हरे, नारंगी या अन्य रंगों की झलक भी दिखाई दे सकती है।

- पूर्वी आकाश में ओरियन तारामंडल की दिशा से जुड़ा है उल्का वर्षा का नाम

खगोलविद के अनुसार, ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का नाम ओरियन तारामंडल पर पड़ा है, जिसे भारतीय खगोल परंपरा में कालपुरुष के नाम से भी जाना जाता है। इस उल्का वर्षा का दीप्तिमान बिंदु यानी वह स्थान, जहां से उल्काएं आती हुई प्रतीत होती हैं, ओरियन तारामंडल की दिशा में स्थित है। अक्टूबर के दौरान यह तारामंडल रात बढ़ने के साथ पूर्वी आकाश में दिखाई देने लगता है। हालांकि, उल्काएं केवल इसी दिशा में दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। वे आकाश के दूसरे हिस्सों में भी चमकीली लकीर बनाती नजर आ सकती हैं। किसी उल्का की चमकीली लकीर को पीछे की ओर बढ़ाकर यदि उसका रास्ता ओरियन तारामंडल की दिशा तक पहुंचे, तो उसके ओरियोनिड होने की संभावना होती है। ओरियन तारामंडल को पहचानने का सबसे आसान तरीका उसके मध्य में एक सीध में दिखाई देने वाले तीन चमकीले तारों को देखना है। इन तीन तारों को सामान्यतः ओरियन की बेल्ट कहा जाता है। इनके आधार पर तारामंडल की शेष आकृति को पहचानने में मदद मिलती है।

- कब और कैसे देखें ओरियोनिड्स उल्का वर्षा?

अमर पाल सिंह के मुताबिक, 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक उल्का वर्षा देखने के लिए विशेष रूप से समय निकालना चाहिए। सामान्य तौर पर आधी रात के बाद से भोर से पहले का समय उल्काओं के अवलोकन के लिए बेहतर रहता है। हालांकि, 2026 में बढ़ते चंद्रमा की रोशनी कुछ समय तक उल्काओं को देखना कठिन बना सकती है। इसलिए चंद्रमा के अस्त होने के बाद का अंधेरा समय अधिक अनुकूल रहेगा। उल्का वर्षा देखने के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान का चयन करना चाहिए, जहां आकाश का बड़ा हिस्सा साफ दिखाई दे। आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने के लिए लगभग 20 से 30 मिनट का समय देना उपयोगी रहेगा। इसके बाद आकाश को लगातार देखते हुए उल्काओं की चमकीली लकीरों का आनंद लिया जा सकता है। उल्का वर्षा का चरम समय होने का अर्थ यह नहीं है कि हर कुछ सेकंड में उल्का दिखाई देगी। कभी कुछ मिनटों में कई उल्काएं दिख सकती हैं, तो कभी लंबे अंतराल तक कोई उल्का नजर नहीं आएगी। बादलों, धुंध, चांदनी और प्रकाश प्रदूषण से दृश्यता प्रभावित हो सकती है।

- हैली धूमकेतु है ओरियोनिड्स का मूल स्रोत

अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है, जिसका आधिकारिक नाम 1P/हैली है। यह धूमकेतु लगभग 76 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। इसकी वापसी की भविष्यवाणी खगोलविद एडमंड हैली ने की थी। इसी कारण इसका नाम उनके नाम पर रखा गया।जब हैली धूमकेतु सूर्य के निकट से गुजरता है, तो उसकी सतह से धूल और अन्य पदार्थ अंतरिक्ष में निकलकर उसकी कक्षा के आसपास बिखर जाते हैं। पृथ्वी प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में इस मलबे के एक क्षेत्र से गुजरती है। धूल के ये सूक्ष्म कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं और चमकते हुए उल्कापथ बनाते हैं। इसी घटना को ओरियोनिड्स उल्का वर्षा कहा जाता है। आम बोलचाल में इन्हें टूटते तारे भी कहा जाता है, हालांकि ये वास्तव में तारे नहीं होते। हैली धूमकेतु की एक और विशेषता यह है कि इससे संबंधित मलबा मई में दिखाई देने वाली एटा एक्वेरिड्स उल्का वर्षा का भी स्रोत है। इस तरह एक ही धूमकेतु पृथ्वी पर हर साल दिखाई देने वाली दो अलग-अलग उल्का वर्षाओं से जुड़ा है।

- 1986 में दिखा था हैली धूमकेतु, 2061 में फिर लौटेगा

खगोलविद के अनुसार, हैली धूमकेतु पिछली बार 1986 में पृथ्वी के निकट दिखाई दिया था और इसकी अगली वापसी 2061 में अपेक्षित है। हालांकि, इसके मलबे से उत्पन्न ओरियोनिड्स उल्का वर्षा देखने के लिए धूमकेतु की वापसी का इंतजार नहीं करना पड़ता। पृथ्वी हर वर्ष अक्टूबर में इस मलबे के क्षेत्र से गुजरती है, इसलिए यह खगोलीय घटना नियमित रूप से देखने को मिलती है।अमर पाल सिंह ने कहा कि उल्का वर्षाओं का अवलोकन धैर्य और अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ओरियोनिड्स भले ही हर बार असाधारण प्रदर्शन न करे, लेकिन तेज गति से चमकती उल्काओं और कभी-कभी दिखाई देने वाले चमकीले अग्निगोलों के कारण यह खगोल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रखती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि खगोलीय घटनाओं से जुड़ी जानकारी साझा करते समय अप्रमाणित सोशल मीडिया दावों से बचें और वैज्ञानिकों तथा विश्वसनीय खगोलीय संस्थानों की जानकारी पर भरोसा करें।

मिशन शक्ति अभियान के तहत तहसील ज्ञानपुर में 11 बालिकाओं का किया गया कन्या पूजन

*डीएम शैलेष कुमार ने बालिकाओं को तिलक लगाकर चुनरी, फल, मिठाई, शैक्षिक सामग्री एवं उपहार किए भेंट*



रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के उद्देश्य से शारदीय नवरात्र के अवसर पर संचालित मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत तहसील परिसर ज्ञानपुर में कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी शैलेष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ एवं मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 11 बालिकाओं का विधिवत कन्या पूजन किया गया।

जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बालिकाओं को तिलक लगाकर एवं पूजन करते हुए उन्हें टोपी, चुनरी, फल, मिठाई, पेन, भोजन प्रसाद एवं उपहार भेंट किए। उन्होंने बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि बेटियां हमारे समाज की शक्ति और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि महिलाएं हमारे समाज की रीढ़ हैं और राष्ट्र एवं समाज के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है। महिलाओं को समाज में समान अधिकार एवं अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारों की रक्षा और बेटियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराकर ही सशक्त एवं समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है।

*महिला एवं बालिकाओं के हित में संचालित योजनाओं की दी गई जानकारी*

जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा एवं स्वावलम्बन के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि आज देश की बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश एवं प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने समाज में बेटी और बहू के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य), पति की मृत्यु उपरांत निराश्रित महिला पेंशन, स्पॉन्सरशिप योजना, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 एवं टोल फ्री महिला हेल्पलाइन-181 सहित महिला एवं बालिका कल्याण से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी गई।

*कन्या सुमंगला योजना से 20,307 लाभार्थी लाभान्वित*

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत बालिकाओं को छह श्रेणियों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। बालिका के जन्म पर प्रथम श्रेणी में 5,000 रुपये, एक वर्ष तक पूर्ण टीकाकरण के उपरांत द्वितीय श्रेणी में 2,000 रुपये, कक्षा एक में प्रवेश पर तृतीय श्रेणी में 3,000 रुपये, कक्षा छह में प्रवेश पर चतुर्थ श्रेणी में 3,000 रुपये, कक्षा नौ में प्रवेश पर पंचम श्रेणी में 5,000 रुपये तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक अथवा दो वर्षीय या अधिक अवधि के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश पर षष्ठम श्रेणी में 7,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। जनपद में अब तक 20,307 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित किया जा चुका है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19), मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) एवं स्पॉन्सरशिप योजना के पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता एवं पात्रता की भी विस्तार से जानकारी दी गई। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक एवं सामाजिक संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें सुरक्षित पारिवारिक वातावरण में शिक्षा एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला एवं बालिका कल्याण से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का समय से लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी ज्ञानपुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, राजकुमार गुप्ता, संरक्षण अधिकारी मीना, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी किरन यादव, महिला कल्याण अधिकारी ममता सिंह, रिचा चौबे, रेशमा भारती, प्रियंका गुप्ता, आनन्द कुमार मौर्या सहित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
रूल ऑफ माफिया से मुक्त हुआ यूपी, अब रूल ऑफ लॉ का राज: मुख्यमंत्री योगी

- डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने मेधावियों को दिए पदक

- योगी बोले - अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े हों युवा अधिवक्ता 

- शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन रखें, मुख्यमंत्री ने याद दिलाए डॉ. लोहिया के विचार

- 75 जिलों में साइबर थाने, एआई प्रज्ञा से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण

लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश 'रूल ऑफ माफिया' से मुक्त हुआ है और 'रूल ऑफ लॉ' लागू हुआ है। वर्ष 2017 से पहले कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह रहता था। माफिया से विकास बाधित था। सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदली है। कोई व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं है। फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।

मुख्यमंत्री योगी शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने मेधावियों को पदक दिए।

- आपातकाल ने समझाया कानून और शासक के शासन का अंतर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तारीख है। आपातकाल ने 'रूल ऑफ लॉ' और 'रूलर ऑफ लॉ' का अंतर समझाया। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया निर्णय इतिहास में स्थान बनाता है। युवा अधिवक्ताओं को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।

- सत्यं वद, धर्मं चर को हृदय में उतारें

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः' को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें। सत्य और निरंतर अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार हो। डॉ. लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए।

- विकसित भारत की पैरवी करें युवा अधिवक्ता

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया। कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी से करनी होगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी। प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है।

- एआई को सहायक बनाएं, सारथी नहीं

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से होना चाहिए। लापरवाह मसौदे से निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है। डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती पैदा की है। प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। 'एआई प्रज्ञा' से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

- अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, जड़ों से जुड़े रहने और निरंतर अध्ययन की सीख दी। कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान दें। गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से समझौता न करें।

- दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। सफलता का आकलन इससे होगा कि विद्यार्थी दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाते हैं। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

- कानून के शासन को मजबूत करें विद्यार्थी : मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थी उच्च मानकों और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए कानून का शासन मजबूत करेंगे।

- 20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए: कुलपति

कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। यहां से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी है। इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में हो।

- रुपाली और तेजस्वनी को स्वर्ण पदक

एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।

- ईशा अग्रवाल को तीन प्रायोजित स्वर्ण पदक

ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला।

- डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के मेधावी भी सम्मानित

साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिले। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक मिला।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायमूर्तिगण, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।

जनसमस्याओं के समाधान के रास्ते का बैरियर है सपा : योगी आदित्यनाथ

- मीरजापुर में शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने भरी हुंकार, भाजपा प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन

- शिक्षकों को पांच लाख का स्वास्थ्य कवर, दुर्घटना पर डेढ़ करोड़ तक की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी

 - सपा शासन में नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा, अब साढ़े नौ लाख युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

 - जो कभी माफिया के सामने नाक रगड़ते थे, वे आज कानून-व्यवस्था पर दे रहे उपदेश : मुख्यमंत्री योगी

- चुनाव के बाद फिर बंटेंगे टैबलेट, अब तक 62 लाख युवाओं को मिले, दो करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य

मीरजापुर, 15 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी को विकास और जनसमस्याओं के समाधान के रास्ते का बैरियर करार दिया। उन्होंने कहा कि अच्छा जनप्रतिनिधि चुनने से आधी से अधिक समस्याओं के समाधान का रास्ता खुल जाता है, जबकि गलत प्रतिनिधि चुनने से समाधान के मार्ग में बाधा खड़ी हो जाती है। समाजवादी पार्टी ऐसा ही बैरियर है। सपा ने मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर, विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, पुलों और घाटों के निर्माण में रोड़े अटकाए। इनका काम ही विकास में बाधा डालना है। ऐसे लोगों को बैरियर ही बने रहने दीजिए, चुनकर मत भेजिए। इनके बैरियर को एक झटके में उखाड़कर बाहर कर देंगे।

मुख्यमंत्री योगी मीरजापुर में वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षक सीट से भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद मिश्रा और स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह के समर्थन में आयोजित सम्मेलन में कहा कि दोनों प्रत्याशी पिछला चुनाव नहीं जीतने के बावजूद शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं को लेकर लगातार उनके पास आते रहे। उन्होंने 23 अक्टूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक होने वाले मतदान में भागीदारी का आह्वान किया। कहा कि इनके माध्यम से आने वाली शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं के समाधान का रास्ता सरकार निकालेगी।

 - पीडीए का नारा, टिकट परिवार और धन्ना सेठ को

मुख्यमंत्री योगी ने सपा के पीडीए के नारे पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में इसका वास्तविक चेहरा सामने आ गया। दो प्रत्याशी बनाने थे तो एक टिकट अपने चाचा को और दूसरा मुंबई के धन्ना सेठ को दे दिया। न दलित को टिकट दिया, न पिछड़े को और न ही मुसलमान को। दूसरी ओर भाजपा ने आठ टिकटों में तीन सामान्य वर्ग, तीन पिछड़े वर्ग और दो अनुसूचित जाति को दिए। सभी आठ प्रत्याशी जीते। सपा ने परिवार और धन्ना सेठ को प्राथमिकता दी तो पीडीए की हवा निकल गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने खुद को नेहरू परिवार और सपा ने सैफई परिवार तक सीमित रखा। दोनों ने प्रदेश को बेगाना बनाया तो जनता ने भी इन्हें बेगाना बना दिया।

- माफिया के सामने नाक रगड़ने वाले दे रहे उपदेश

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिन लोगों ने प्रदेश के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाते, घुटने टेकते और नाक रगड़ते थे, वे आज कानून-व्यवस्था पर उपदेश दे रहे हैं। सपा शासन में न सड़क थी, न बिजली, न पानी और न शिक्षा की समुचित व्यवस्था। नवरात्र में दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी श्रद्धालुओं को मशक्कत करनी पड़ती थी। मंदिरों में गंदगी और अव्यवस्था रहती थी। आज सरकार जनता के साथ खड़ी है। सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रत्येक ब्लॉक में शिविर लगाकर पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ा गया।

- सैफई सिंडिकेट के कब्जे से मुक्त हुई नौकरियां

मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा शासन में नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा था। जिसे सिंडिकेट चाहता था, उसी को नौकरी मिलती थी। तत्कालीन आयोग अध्यक्ष अनिल यादव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया गया, जिसे हाई कोर्ट ने पद से हटाया। नौजवान सड़कों पर आंदोलन करते थे और अखिलेश सरकार उनकी आवाज अनसुनी करती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। 65 लाख लोगों को रोजगार मिला और एक जिला एक उत्पाद योजना से तीन करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर विकसित हुए। अब युवा स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाला भी बन रहा है।

- चुनाव के बाद फिर शुरू होगा टैबलेट वितरण

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विधान परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद बड़े कार्यक्रम आयोजित कर स्नातक युवाओं को फिर टैबलेट वितरित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य दो करोड़ युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराना है। अब तक 62 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं। डिजिटल अभियान को और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत नीट, आईआईटी-जेईई, यूपीएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराई जा रही है। युवा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से इसका लाभ उठा सकते हैं।

- 15 लाख शिक्षकों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षकों को न सम्मान मिलता था, न स्वास्थ्य सुविधाएं। अब बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और स्ववित्तपोषित संस्थानों के 15 लाख शिक्षकों को परिवार सहित प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर दिया गया है। दुर्घटना की स्थिति में 40 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है। प्रोजेक्ट अलंकार से माध्यमिक विद्यालयों में नए भवन, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और सपा को शिक्षा विरोधी बताते हुए कहा कि इनके शासन में शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा हुई और युवाओं को पलायन करना पड़ा।

- तीन जिलों में न मेडिकल कॉलेज था, न विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा को चार बार प्रदेश में सरकार चलाने का अवसर मिला, लेकिन विकास उसके एजेंडे में नहीं था। वर्ष 2017 से पहले मीरजापुर मंडल के तीनों जिलों में न मेडिकल कॉलेज था, न विश्वविद्यालय। अब मीरजापुर और सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय और भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय प्रारंभ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्र आर्थिक समृद्धि का माध्यम बन रहे हैं। प्रयागराज महाकुंभ, काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या इसके उदाहरण हैं। राम मंदिर का विरोध करने वाले आज अयोध्या पर उपदेश दे रहे हैं।

- पहले जमीनों पर कब्जे में होता था धन का दुरुपयोग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर और त्रिकोण क्षेत्र के विकास से श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिली हैं। प्रतिदिन दो लाख श्रद्धालु दर्शन कर पा रहे हैं। गंगा के पक्के घाट बनने से दुर्घटनाओं की समस्या दूर हुई है। पहले विकास की यही धनराशि गरीबों की जमीनों पर कब्जे के लिए दुरुपयोग की जाती थी। उन्होंने नवरात्र की पंचमी पर मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए और विकास कार्यों तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा भी की।

- नंदी बोले- माफिया की जगह उत्पाद से पहचान

कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में यूपी की पहचान और परसेप्शन बदले हैं। पहले एक जिला एक माफिया की पहचान थी, अब एक जिला एक उत्पाद से प्रदेश जाना जाता है। परिवारवाद और तुष्टीकरण की जगह चुस्त कानून-व्यवस्था तथा औद्योगिक विकास ने ली है। विकास अब सैफई और रायबरेली तक सीमित नहीं है। प्रत्येक जनपद और गांव विकास की नई कहानी लिख रहा है।

- आशीष पटेल बोले- निष्पक्ष भर्ती सरकार की पहचान

कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव महत्वपूर्ण है। यह सरकार के कार्यों पर मुहर लगाने का अवसर है। हाल में पुलिस और होमगार्ड भर्ती के परिणाम आए, लेकिन धांधली का कोई सवाल नहीं उठा। पारदर्शी भर्ती व्यवस्था ही सरकार की पहचान है।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

सम्मेलन में राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड, सांसद डॉ. विनोद बिंद, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली, भाजपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज सहित जनप्रतिनिधि, शिक्षक और स्नातक उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे अहम: स्टारलिंक को न दी जाए मंज़ूरी*
स्वदेशी जागरण मंच दुनिया के सबसे अमीर बिज़नेसमैन एलन मस्क के गैर-ज़िम्मेदाराना बयानों की कड़ी निंदा करता है। यह मामला एलन मस्क की कंपनी 'स्टारलिंक' से जुड़ा है, जिसने भारत में कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस शुरू करने और चलाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है (हालांकि आवेदन को ख़ारिज भी नहीं किया गया है)। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उनकी कंपनी से मांगी गई जानकारी का जवाब देने के बजाय, एलन मस्क ने भारतीय बिज़नेस और सरकार पर परोक्ष रूप से आरोप लगाने का रास्ता चुना। ऐसा लगता है कि स्टारलिंक शायद उन खास ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। नतीजतन, ऐसा लगता है कि एलन मस्क या तो सरकार के खिलाफ़ जनता का दबाव बनाकर लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं या फिर हताशा में ऐसे बयान दे रहे हैं।

यह समझना ज़रूरी है कि स्टारलिंक की टेक्नोलॉजी भारत की रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करने में एक बड़ी चुनौती पेश करती है। स्टारलिंक डेटा को ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचने से पहले सीधे सैटेलाइट के बीच ट्रांसमिट करने के लिए लेज़र-बेस्ड सैटेलाइट लिंक का इस्तेमाल करती है। भारत सरकार इस सिस्टम की जांच कर रही है ताकि यह पक्का किया जा सके कि सुरक्षा से जुड़ी इमरजेंसी के दौरान डेटा भारतीय गेटवे को बायपास न कर सके। एक अहम रेगुलेटरी शर्त यह है कि स्टारलिंक सरकार के कहने पर अपनी सर्विस को ठीक-ठीक तरीके से सीमित करने में सक्षम हो; लेकिन स्टारलिंक ने इस ज़रूरत को पूरा करने का वादा नहीं किया है, या हो सकता है कि उनकी टेक्नोलॉजी इसकी इजाज़त न देती हो।

वर्तमान में भारत कानून-व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसी स्थितियों में, इंटरनेट-बेस्ड सोशल मीडिया अक्सर अफवाहों और देश-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देता है। अलगाववाद, आतंकवाद, दंगे, विरोध-प्रदर्शन और ऐसी ही घटनाओं के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अक्सर इंटरनेट सर्विस को रोकना ज़रूरी हो जाता है।

इसके अलावा, स्टारलिंक सैटेलाइट लेज़र लिंक का इस्तेमाल करके एक-दूसरे से बातचीत हो सकती है। भारत को चिंता है कि भारतीय इंटरनेट ट्रैफ़िक घरेलू गेटवे से न गुज़रकर विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर से होकर जा सकता है, जिससे कानूनी निगरानी और नियम लागू करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार चाहती है कि भारतीय ट्रैफ़िक भारत के अंदर मौजूद गेटवे से होकर गुज़रे।

साथ ही, यह भी डर है कि सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल दुश्मन ताकतों, तस्करों या विद्रोही समूहों द्वारा पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क के दायरे से बाहर बातचीत करने के लिए किया जा सकता है। संवेदनशील सीमाओं और संघर्ष वाले इलाकों के पास अनधिकृत टर्मिनल चलते हुए पाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई जांचों में स्टारलिंक के उपकरण भी बरामद किए हैं।

गौर करने वाली बात है कि भारत ने अब तक स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करके ब्रॉडबैंड और मोबाइल डेटा सेवाएं दी हैं। इन सेवाओं की खासियत यह है कि ये न केवल दुनिया में सबसे सस्ती हैं - आम तौर पर चीन में लगने वाली लागत का 17 प्रतिशत और अमेरिका में लगने वाली लागत का सिर्फ़ 1 प्रतिशत ही है - बल्कि ज़रूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में इन्हें रोका या सीमित भी किया जा सकता है; एक ऐसी गारंटी जो शायद स्टारलिंक की स्पेस-बेस्ड लेज़र तकनीक नहीं दे सकती। इसके अलावा, भारत में मौजूदा टेलीकॉम ऑपरेटर ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करते रहे हैं और उनकी तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरतों के अनुरूप है।

स्वदेशी जागरण मंच की स्टारलिंक से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं यूक्रेन, ईरान, रूस, चीन, ताइवान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील, वेनेजुएला, सूडान और कई अन्य देशों के अनुभवों पर आधारित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषण के लिए सबसे अहम केस स्टडीज़ यूक्रेन, ईरान, रूस, चीन और ताइवान माने जाते हैं।

स्वदेशी जागरण मंच यह बात रिकॉर्ड पर लाना चाहता है कि यह घटना अपनी तरह की पहली घटना नहीं है। मोबाइल इंटरनेट तकनीक में लगातार सुधार और विकास हुआ है। 2G से 3G, 4G और उसके बाद 5G तकनीक तक के सफर ने मोबाइल डेटा की स्पीड को लगातार बढ़ाया है। भारत सरकार ने 2019 में 5G तकनीक लाने की कोशिशें शुरू की थीं, हालांकि उस समय तक देश में यह तकनीक पूरी तरह विकसित नहीं हुई थी। 5G तकनीक को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा कुछ ही कंपनियों तक सीमित थी, जिनमें चीन की हुआवे कीमत के मामले में सबसे आगे थी। तब स्वदेशी जागरण मंच ने सुरक्षा चिंताओं के कारण हुआवे को ट्रायल में शामिल करने का विरोध किया था। एसजेएम के विरोध के बाद, न तो हुआवेई और न ही किसी दूसरी चीनी कंपनी, जेडटीई , को ट्रायल करने की इजाज़त दी गई। इस बीच, 5G तकनीक विकसित करने पर काम कर रही भारतीय कंपनियों और वैज्ञानिकों ने आखिरकार 5G विकसित कर लिया, जिसे आम तौर पर 5Gi के नाम से जाना जाता है। आज, देश में पहले से मौजूद स्वदेशी 4G टेक्नोलॉजी के साथ-साथ कई जगहों पर 5Gi टेक्नोलॉजी भी शुरू की जा चुकी है।

सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट में आत्मनिर्भरता

यह सच है कि भारत ने अमेरिका, यूरोप और रूस जैसे देशों की तुलना में स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देर से कदम रखा, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भारत तेज़ी से ग्लोबल स्पेस क्षेत्र में एक अहम और मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरा है। भारत के PSLV और चंद्रयान मिशन पहले ही ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित कर चुके हैं; वहीं, गगनयान, निसार, चंद्रयान-4, शुक्रयान और इंडियन स्पेस स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट स्पेस सेक्टर में भारत की बढ़ती अहमियत के प्रतीक बन रहे हैं। भारत स्पेस मौसम विज्ञान, कम्युनिकेशन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई देशों की मदद भी कर रहा है। इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में, प्राइवेट स्टार्टअप अब भारत के पब्लिक सेक्टर के उद्यमों के साथ-साथ अपनी जगह बना रहे हैं।
भारत के प्रयासों से विकसित कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स का एक समूह (कॉन्स्टेलेशन) अभी काम कर रहा है। ये सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं में मदद करते हैं, साथ ही सोशल और पॉलिटिकल कम्युनिकेशन को भी मदद  करते हैं। इस क्षेत्र में भारत की क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं; इसके अलावा, सरकारी नीतियां स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे आत्मनिर्भर स्पेस टेक्नोलॉजी का विकास तेज़ी से हो रहा है।

अगर एलन मस्क की स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलता है क्योंकि वह भारत सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर नहीं कर पाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि भारत सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस नहीं दे पाएगा। असल में, अगर देश की अपनी सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस शुरू करने में थोड़ी देर भी होती है, तब भी हम स्टारलिंक की तुलना में बहुत सस्ती सर्विस दे पाएंगे और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा का भी ध्यान रख पाएंगे।

यह साफ़ है कि स्टारलिंक की इंटरनेट सर्विस की कीमत मौजूदा मोबाइल और ब्रॉडबैंड दरों से काफी ज़्यादा होगी। हालांकि, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर स्टारलिंक को रोका जाता है—जो कि पूरी तरह से सही कदम होगा—तो इससे देश की अपनी सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सर्विस के विकास को बहुत बढ़ावा मिलेगा। इससे देश के दूर-दराज़ इलाकों में सस्ती दरों पर इंटरनेट सेवा मिल पाएगी। नतीजतन, जैसे अभी शहरों और गांवों में डेटा बहुत कम दरों पर मिलता है, वैसे ही आत्मनिर्भर स्पेस-बेस्ड इंटरनेट भी जल्द ही दूर-दराज़ इलाकों में उपलब्ध हो सकेगा।
स्वदेशी जागरण मंच सरकार से अपील करता है कि वह स्टारलिंक को अपनी कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस शुरू करने की इजाज़त न दे। एसजेएम का पक्का मानना है कि स्टारलिंक को रोकने से अमेरिका जैसे व्यापारिक साझेदारों को यह संदेश भी जाएगा: अगर उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऊंचे टैरिफ लगाकर भारतीय आयात—जैसे कि हस्तशिल्प उत्पाद—को मनमाने ढंग से रोकने की हिम्मत है, तो भारत को भी अपनी जायज़ राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के आधार पर स्टारलिंक को रोकने का पूरा अधिकार है।
फोन होते ही 30 मिनट में अस्पताल पहुंचेंगे डॉक्टर, हर केंद्र पर लगेगी सूची

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। मरीजों को 24 घंटे उपचार की सुविधा देने के लिए जिला अस्पताल, भदोही एमबीएस के साथ ही सभी सीएचसी पर तैनात ऑनकॉल चिकित्सकों की जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी केंद्रों पर ऑनकॉल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सूची लगाई जाएगी।


अस्पताल से कॉल जाने के बाद डॉक्टरों को 30 मिनट के अंदर पहुंचना होगा। पहले इसके लिए 40 मिनट का समय निर्धारित था, लेकिन जिला अस्पताल के गेट पर बीते सप्ताह प्रसव होने की घटना के बाद नियम में बदलाव किया गया है। मरीज की हालत गंभीर होने पर यदि ईएमओ ने संबंधित डॉक्टर को कॉल नहीं किया, तो उससे भी जवाब मांगा जाएगा।

महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय और महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय, भदोही सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदोही, सुरियावां, भानीपुर, डीघ, गोपीगंज और औराई में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। यहां अक्सर रात में इमरजेंसी के दौरान मरीजों को चिकित्सक नहीं मिलते हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है।



इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को बार-बार शिकायतें मिलती रहती हैं। इसे देखते हुए सभी अस्पतालों के नोटिस बोर्ड और इमरजेंसी वार्ड के बाहर ऑनकॉल डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर चस्पा किए जाएंगे। इससे रात में आने वाले मरीजों को उपचार कराने में सहूलियत होगी और डॉक्टरों से संपर्क करना आसान होगा। लापरवाही करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। नोटिस बोर्ड पर बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिजिशियन, नेत्र सर्जन, ऑर्थो सर्जन और महिला रोग विशेषज्ञ सहित अन्य विशेषज्ञों की ड्यूटी की जानकारी दी जाएगी। ये डॉक्टर ओपीडी के बाद ऑनकॉल रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें 24 घंटे कॉल किया जा सकेगा।


जिला अस्पताल सहित नौ स्वास्थ्य केंद्रों पर आनकाॅल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सूची चम्पा दी जाएगी। समय पर अस्पताल में उपस्थित नहीं होने वाले विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डॉ एसके चक सीएमओ भदोही
तूफान 'अर्नब' रांची में दो दिनों तक सभी स्कूल बंद, मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट जारी

रांची:राज्य में मौसम के कड़े तेवरों और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में मौसम विभाग (IMD) द्वारा 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किए जाने के बाद, एहतियातन जिले के तमाम शिक्षण संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्देश जिला प्रशासन की ओर से जारी किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, आने वाले घंटों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात (आसानी बिजली गिरने) की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

सभी स्कूलों पर रहेगा आदेश लागू

रांची डीसी कार्यालय से मिले निर्देशों के अनुसार, यह पाबंदी जिले के भीतर आने वाले सभी सरकारी, प्राइवेट और मान्यता प्राप्त स्कूलों (प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक कक्षाओं तक) पर समान रूप से लागू होगी। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन दो दिनों तक किसी भी तरह की कक्षाएं या शैक्षणिक गतिविधियां संचालित न की जाएं।

प्रशासन का मानना है कि मूसलाधार बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव, यातायात बाधित होने और वज्रपात जैसी अनहोनी से स्कूली बच्चों को बचाना बेहद जरूरी है।

इन जिलों पर भी मंडरा रहा है खतरा

मौसम वैज्ञानिकों का आकलन है कि झारखंड के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में मौसमी गतिविधियों का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।

ऑरेंज जोन के प्रमुख जिले: रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग और इनसे सटे इलाके।

संभावित हालात: भारी वर्षा, आकाशीय बिजली चमकना, तेज आंधी और शहरी इलाकों में निचले स्थानों पर पानी भरना।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल मुस्तैद

खराब मौसम की चेतावनी के बाद नगर निगम और जिला आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है:

बिजली विभाग अलर्ट: तेज हवाओं के कारण पेड़ों की डालियों के टूटने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका के मद्देनजर 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' (QRT) को हर वक्त तैयार रहने को कहा गया है।

24 घंटे कंट्रोल रूम चालू: किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने और आम जनता को मदद पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर चौबीस घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया गया है।

आम जनता और अभिभावकों के लिए जरूरी निर्देश

प्रशासन और मौसम विभाग ने नागरिकों से एहतियात बरतने की अपील की है:

अभिभावकों के लिए सलाह: स्कूलों की इस छुट्टी के दौरान अभिभावक बच्चों की सुरक्षा का विशेष ख्याल रखें और उन्हें घरों से बाहर न जाने दें।

सावधानी बरतें: आंधी-तूफान और गर्जन के वक्त बड़े पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों या छतों के पास खड़े होने से बचें।

ड्राइविंग में सावधानी: भारी बारिश के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने पर वाहन चालक अपनी गाड़ियों की रफ्तार नियंत्रित रखें।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग के निर्देशों का गंभीरता से पालन करें और बेहद जरूरी काम होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें।

वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा का परचम, लाल बिहारी यादव लगातार दूसरी बार जीते
लखनऊ , वाराणसी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर पार्टी का परचम लहराया है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों से शिकस्त दी। 

वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत की घोषणा होते ही सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी। इस दौरान पार्टी के समर्थन में जमकर नारे लगाए गए। ढोल-नगाड़ों की धुन पर समर्थक खुशी से झूमते नजर आए। देर रात तक एक-दूसरे को बधाई देने का सिलसिला जारी रहा।

जानकारी के अनुसार लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 मत मिले, जबकि डॉ. प्रमोद मिश्रा के खाते में 6,597 मत आए। इस जीत से सपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। परिणाम घोषित होते ही समर्थकों ने नारेबाजी की और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर झूमे।

जीत हासिल करने के बाद लाल बिहारी यादव ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत अखिलेश यादव की नीतियों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का परिणाम है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, गैर-वित्तपोषित शिक्षकों के मानदेय, सहायता प्राप्त और सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की सेवा शर्तों तथा अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों में मानदेय से जुड़े विषयों का उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर आधारित परीक्षाओं के विरोध को भी शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल बताया।

लाल बिहारी यादव ने कहा कि पिछले चुनाव में उन्होंने लगभग एक हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि इस बार जीत का अंतर बढ़कर पांच हजार से अधिक मतों का हो गया है। उनके अनुसार, यह परिणाम पार्टी और उनके प्रति शिक्षकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।उन्होंने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करेंगे। सपा की सरकार शिक्षकों के साथ खड़ी है, इसलिए दूसरी बार भी इन लोगों ने मुझे जिताया है, मैंने इनसे जो वादा किया है उसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास करूंगा।
भदोही में दो दिन मौसम का खतरा! 28-29 अक्टूबर को तेज हवाओं, भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। 28 और 29 अक्टूबर को भदोही सहित कई जनपदों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक, वज्रपात और भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है। मौसम की चेतावनी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश ने किसानों से अपील की है कि तैयार फसलों की जल्द कटाई कर लें और कटी फसलों व अनाज को सुरक्षित, ढके हुए स्थानों पर रखें। खेतों में भराई और पलेवा का कार्य तथा सब्जियों की बुवाई 29 अक्टूबर तक स्थगित रखें। बारिश से खेतों में पानी भरने पर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें।

वज्रपात की आशंका को देखते हुए पशुओं को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न बांधें। किसानों से अपील है कि मौसम चेतावनी को गंभीरता से लें और फसलों, अनाज तथा पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें।
फैशन का महाधमाका! रंगरेज़ा बाय आरंभ लेकर आ रहा है दिवाली एंड करवाचौथ स्पेशल एडिशन

*इंदौर।* साक्षी वर्मा और निधि वर्मा फिर से लेकर आ रही हैं अपने ही शहर में फैशन और फेस्टिवल का सबसे बड़ा संगम। जी हाँ, इंतजार खत्म हुआ, *अपने शहर में आ रहा है* शहर का सबसे पसंदीदा और सबसे बड़ा लाइफस्टाइल फेस्ट - *'रंगरेज़ा बाय आरंभ - दिवाली एंड करवाचौथ एडिशन'*।

पिछले एडिशन की बम्पर सफलता के बाद इस बार यह एडिशन और भी ज्यादा ग्रैंड, रॉयल और एक्सक्लूसिव होने वाला है।

आगामी *27 और 28 अक्टूबर को बॉम्बे हॉस्पिटल के पास स्थित होटल इन्फिनिटी, इंदौर* में दो दिवसीय भव्य एग्जीबिशन का आयोजन होने जा रहा है। प्रदर्शनी दोनों दिन *सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक* खुली रहेगी।

*इस बार होगा डबल फेस्टिव धमाका!*

*करवाचौथ स्पेशल कलेक्शन:* इस करवाचौथ पर सबसे खूबसूरत और सबसे खास दिखने के लिए स्पेशल रॉयल रेड सूट्स, ब्राइडल चूड़ा स्पेशल साड़ियां, हैवी *कट दाना लहंगे*, गोटा-पत्ती वर्क वाले लहंगे और चमचमाती प्रीमियम कुंदन-पोलकी ज्वेलरी का ऐसा कलेक्शन जो आपको कहीं और नहीं मिलेगा।

*दिवाली स्पेशल कलेक्शन:* दिवाली और भाई दूज के त्योहार के लिए डिज़ाइनर साड़ियाँ, फेस्टिव लहंगे, ट्रेंडी इंडो-वेस्टर्न, पार्टी वियर गाउन, किड्स एथनिक वियर और मेंस वियर का सबसे यूनिक और लेटेस्ट कलेक्शन एक ही छत के नीचे मिलेगा।

सिर्फ फैशन ही नहीं, इस बार त्योहार को और भी रोशन बनाने के लिए *लहंगा, साड़ी, सूट, होम डेकोर, प्रीमियम ज्वेलरी और दिवाली डेकोर से लेकर अपनों के लिए स्पेशल गिफ्ट्स तक, सब कुछ मिलेगा एक ही छत के नीचे।* दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की एक्सक्लूसिव मूर्तियां, हैंडमेड दीये, डिज़ाइनर तोरण-बंदनवार, शुभ-लाभ और प्रीमियम गिफ्ट हैम्पर्स का विशाल कलेक्शन भी इस बार का बड़ा आकर्षण है।

इस बार दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई के नामी डिज़ाइनर्स अपने एक्सक्लूसिव फेस्टिव कलेक्शन के साथ इंदौर आ रहे हैं।

त्योहारों पर सबसे अलग दिखना है तो इस फैशन के महाधमाके को मिस मत कीजिए।

इस भव्य मेले में *सभी के लिए प्रवेश निःशुल्क* रखा गया है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें - *6263415113, 9685590973*
21-22 अक्टूबर की रात आसमान में दिखेंगी ओरियोनिड्स उल्का वर्षा की चमकीली लकीरें

- हैली धूमकेतु के मलबे से बनती है यह खगोलीय घटना, अनुकूल परिस्थितियों में प्रति घंटे दिख सकती हैं 15 से 20 उल्काएं

- आधी रात के बाद और भोर से पहले करें आकाश का अवलोकन, अंधेरी जगह पर मिलेगा बेहतर नजारा

गोरखपुर। अक्टूबर की रातों में आसमान में टूटते तारों जैसी चमकीली लकीरें देखने का अवसर मिलने जा रहा है। 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर 2026 की भोर तक ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का प्रमुख चरण रहने की संभावना है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, यह उल्का वर्षा प्रसिद्ध हैली धूमकेतु द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और चट्टानी कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से उत्पन्न होती है। अनुकूल परिस्थितियों में आकाश के अंधेरे स्थान से प्रति घंटे लगभग 15 से 20 उल्काएं देखी जा सकती हैं। हालांकि, वास्तविक संख्या मौसम, प्रकाश प्रदूषण और चंद्रमा की रोशनी पर निर्भर करेगी। अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स तेज गति से चलने वाली उल्काओं के लिए जानी जाती है। ये पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से प्रवेश करती हैं। इस दौरान वायुमंडल में गैसों और कणों के बीच होने वाली प्रक्रियाओं से प्रकाश उत्पन्न होता है और आसमान में कुछ क्षणों के लिए चमकीली लकीर दिखाई देती है। अधिकांश उल्काएं सफेद या हल्के पीले रंग की नजर आती हैं, जबकि कुछ परिस्थितियों में हरे, नारंगी या अन्य रंगों की झलक भी दिखाई दे सकती है।

- पूर्वी आकाश में ओरियन तारामंडल की दिशा से जुड़ा है उल्का वर्षा का नाम

खगोलविद के अनुसार, ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का नाम ओरियन तारामंडल पर पड़ा है, जिसे भारतीय खगोल परंपरा में कालपुरुष के नाम से भी जाना जाता है। इस उल्का वर्षा का दीप्तिमान बिंदु यानी वह स्थान, जहां से उल्काएं आती हुई प्रतीत होती हैं, ओरियन तारामंडल की दिशा में स्थित है। अक्टूबर के दौरान यह तारामंडल रात बढ़ने के साथ पूर्वी आकाश में दिखाई देने लगता है। हालांकि, उल्काएं केवल इसी दिशा में दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। वे आकाश के दूसरे हिस्सों में भी चमकीली लकीर बनाती नजर आ सकती हैं। किसी उल्का की चमकीली लकीर को पीछे की ओर बढ़ाकर यदि उसका रास्ता ओरियन तारामंडल की दिशा तक पहुंचे, तो उसके ओरियोनिड होने की संभावना होती है। ओरियन तारामंडल को पहचानने का सबसे आसान तरीका उसके मध्य में एक सीध में दिखाई देने वाले तीन चमकीले तारों को देखना है। इन तीन तारों को सामान्यतः ओरियन की बेल्ट कहा जाता है। इनके आधार पर तारामंडल की शेष आकृति को पहचानने में मदद मिलती है।

- कब और कैसे देखें ओरियोनिड्स उल्का वर्षा?

अमर पाल सिंह के मुताबिक, 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक उल्का वर्षा देखने के लिए विशेष रूप से समय निकालना चाहिए। सामान्य तौर पर आधी रात के बाद से भोर से पहले का समय उल्काओं के अवलोकन के लिए बेहतर रहता है। हालांकि, 2026 में बढ़ते चंद्रमा की रोशनी कुछ समय तक उल्काओं को देखना कठिन बना सकती है। इसलिए चंद्रमा के अस्त होने के बाद का अंधेरा समय अधिक अनुकूल रहेगा। उल्का वर्षा देखने के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान का चयन करना चाहिए, जहां आकाश का बड़ा हिस्सा साफ दिखाई दे। आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने के लिए लगभग 20 से 30 मिनट का समय देना उपयोगी रहेगा। इसके बाद आकाश को लगातार देखते हुए उल्काओं की चमकीली लकीरों का आनंद लिया जा सकता है। उल्का वर्षा का चरम समय होने का अर्थ यह नहीं है कि हर कुछ सेकंड में उल्का दिखाई देगी। कभी कुछ मिनटों में कई उल्काएं दिख सकती हैं, तो कभी लंबे अंतराल तक कोई उल्का नजर नहीं आएगी। बादलों, धुंध, चांदनी और प्रकाश प्रदूषण से दृश्यता प्रभावित हो सकती है।

- हैली धूमकेतु है ओरियोनिड्स का मूल स्रोत

अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है, जिसका आधिकारिक नाम 1P/हैली है। यह धूमकेतु लगभग 76 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। इसकी वापसी की भविष्यवाणी खगोलविद एडमंड हैली ने की थी। इसी कारण इसका नाम उनके नाम पर रखा गया।जब हैली धूमकेतु सूर्य के निकट से गुजरता है, तो उसकी सतह से धूल और अन्य पदार्थ अंतरिक्ष में निकलकर उसकी कक्षा के आसपास बिखर जाते हैं। पृथ्वी प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में इस मलबे के एक क्षेत्र से गुजरती है। धूल के ये सूक्ष्म कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं और चमकते हुए उल्कापथ बनाते हैं। इसी घटना को ओरियोनिड्स उल्का वर्षा कहा जाता है। आम बोलचाल में इन्हें टूटते तारे भी कहा जाता है, हालांकि ये वास्तव में तारे नहीं होते। हैली धूमकेतु की एक और विशेषता यह है कि इससे संबंधित मलबा मई में दिखाई देने वाली एटा एक्वेरिड्स उल्का वर्षा का भी स्रोत है। इस तरह एक ही धूमकेतु पृथ्वी पर हर साल दिखाई देने वाली दो अलग-अलग उल्का वर्षाओं से जुड़ा है।

- 1986 में दिखा था हैली धूमकेतु, 2061 में फिर लौटेगा

खगोलविद के अनुसार, हैली धूमकेतु पिछली बार 1986 में पृथ्वी के निकट दिखाई दिया था और इसकी अगली वापसी 2061 में अपेक्षित है। हालांकि, इसके मलबे से उत्पन्न ओरियोनिड्स उल्का वर्षा देखने के लिए धूमकेतु की वापसी का इंतजार नहीं करना पड़ता। पृथ्वी हर वर्ष अक्टूबर में इस मलबे के क्षेत्र से गुजरती है, इसलिए यह खगोलीय घटना नियमित रूप से देखने को मिलती है।अमर पाल सिंह ने कहा कि उल्का वर्षाओं का अवलोकन धैर्य और अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ओरियोनिड्स भले ही हर बार असाधारण प्रदर्शन न करे, लेकिन तेज गति से चमकती उल्काओं और कभी-कभी दिखाई देने वाले चमकीले अग्निगोलों के कारण यह खगोल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रखती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि खगोलीय घटनाओं से जुड़ी जानकारी साझा करते समय अप्रमाणित सोशल मीडिया दावों से बचें और वैज्ञानिकों तथा विश्वसनीय खगोलीय संस्थानों की जानकारी पर भरोसा करें।

मिशन शक्ति अभियान के तहत तहसील ज्ञानपुर में 11 बालिकाओं का किया गया कन्या पूजन

*डीएम शैलेष कुमार ने बालिकाओं को तिलक लगाकर चुनरी, फल, मिठाई, शैक्षिक सामग्री एवं उपहार किए भेंट*



रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के उद्देश्य से शारदीय नवरात्र के अवसर पर संचालित मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत तहसील परिसर ज्ञानपुर में कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी शैलेष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ एवं मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 11 बालिकाओं का विधिवत कन्या पूजन किया गया।

जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बालिकाओं को तिलक लगाकर एवं पूजन करते हुए उन्हें टोपी, चुनरी, फल, मिठाई, पेन, भोजन प्रसाद एवं उपहार भेंट किए। उन्होंने बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि बेटियां हमारे समाज की शक्ति और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि महिलाएं हमारे समाज की रीढ़ हैं और राष्ट्र एवं समाज के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है। महिलाओं को समाज में समान अधिकार एवं अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारों की रक्षा और बेटियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराकर ही सशक्त एवं समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है।

*महिला एवं बालिकाओं के हित में संचालित योजनाओं की दी गई जानकारी*

जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा एवं स्वावलम्बन के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि आज देश की बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश एवं प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने समाज में बेटी और बहू के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य), पति की मृत्यु उपरांत निराश्रित महिला पेंशन, स्पॉन्सरशिप योजना, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 एवं टोल फ्री महिला हेल्पलाइन-181 सहित महिला एवं बालिका कल्याण से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी गई।

*कन्या सुमंगला योजना से 20,307 लाभार्थी लाभान्वित*

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत बालिकाओं को छह श्रेणियों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। बालिका के जन्म पर प्रथम श्रेणी में 5,000 रुपये, एक वर्ष तक पूर्ण टीकाकरण के उपरांत द्वितीय श्रेणी में 2,000 रुपये, कक्षा एक में प्रवेश पर तृतीय श्रेणी में 3,000 रुपये, कक्षा छह में प्रवेश पर चतुर्थ श्रेणी में 3,000 रुपये, कक्षा नौ में प्रवेश पर पंचम श्रेणी में 5,000 रुपये तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक अथवा दो वर्षीय या अधिक अवधि के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश पर षष्ठम श्रेणी में 7,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। जनपद में अब तक 20,307 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित किया जा चुका है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19), मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) एवं स्पॉन्सरशिप योजना के पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता एवं पात्रता की भी विस्तार से जानकारी दी गई। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक एवं सामाजिक संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें सुरक्षित पारिवारिक वातावरण में शिक्षा एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला एवं बालिका कल्याण से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का समय से लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी ज्ञानपुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, राजकुमार गुप्ता, संरक्षण अधिकारी मीना, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी किरन यादव, महिला कल्याण अधिकारी ममता सिंह, रिचा चौबे, रेशमा भारती, प्रियंका गुप्ता, आनन्द कुमार मौर्या सहित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
रूल ऑफ माफिया से मुक्त हुआ यूपी, अब रूल ऑफ लॉ का राज: मुख्यमंत्री योगी

- डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने मेधावियों को दिए पदक

- योगी बोले - अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े हों युवा अधिवक्ता 

- शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन रखें, मुख्यमंत्री ने याद दिलाए डॉ. लोहिया के विचार

- 75 जिलों में साइबर थाने, एआई प्रज्ञा से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण

लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश 'रूल ऑफ माफिया' से मुक्त हुआ है और 'रूल ऑफ लॉ' लागू हुआ है। वर्ष 2017 से पहले कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह रहता था। माफिया से विकास बाधित था। सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदली है। कोई व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं है। फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।

मुख्यमंत्री योगी शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने मेधावियों को पदक दिए।

- आपातकाल ने समझाया कानून और शासक के शासन का अंतर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तारीख है। आपातकाल ने 'रूल ऑफ लॉ' और 'रूलर ऑफ लॉ' का अंतर समझाया। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया निर्णय इतिहास में स्थान बनाता है। युवा अधिवक्ताओं को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।

- सत्यं वद, धर्मं चर को हृदय में उतारें

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः' को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें। सत्य और निरंतर अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार हो। डॉ. लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए।

- विकसित भारत की पैरवी करें युवा अधिवक्ता

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया। कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी से करनी होगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी। प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है।

- एआई को सहायक बनाएं, सारथी नहीं

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से होना चाहिए। लापरवाह मसौदे से निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है। डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती पैदा की है। प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। 'एआई प्रज्ञा' से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

- अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, जड़ों से जुड़े रहने और निरंतर अध्ययन की सीख दी। कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान दें। गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से समझौता न करें।

- दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। सफलता का आकलन इससे होगा कि विद्यार्थी दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाते हैं। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

- कानून के शासन को मजबूत करें विद्यार्थी : मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थी उच्च मानकों और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए कानून का शासन मजबूत करेंगे।

- 20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए: कुलपति

कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। यहां से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी है। इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में हो।

- रुपाली और तेजस्वनी को स्वर्ण पदक

एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।

- ईशा अग्रवाल को तीन प्रायोजित स्वर्ण पदक

ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला।

- डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के मेधावी भी सम्मानित

साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिले। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक मिला।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायमूर्तिगण, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।

जनसमस्याओं के समाधान के रास्ते का बैरियर है सपा : योगी आदित्यनाथ

- मीरजापुर में शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने भरी हुंकार, भाजपा प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन

- शिक्षकों को पांच लाख का स्वास्थ्य कवर, दुर्घटना पर डेढ़ करोड़ तक की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी

 - सपा शासन में नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा, अब साढ़े नौ लाख युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

 - जो कभी माफिया के सामने नाक रगड़ते थे, वे आज कानून-व्यवस्था पर दे रहे उपदेश : मुख्यमंत्री योगी

- चुनाव के बाद फिर बंटेंगे टैबलेट, अब तक 62 लाख युवाओं को मिले, दो करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य

मीरजापुर, 15 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी को विकास और जनसमस्याओं के समाधान के रास्ते का बैरियर करार दिया। उन्होंने कहा कि अच्छा जनप्रतिनिधि चुनने से आधी से अधिक समस्याओं के समाधान का रास्ता खुल जाता है, जबकि गलत प्रतिनिधि चुनने से समाधान के मार्ग में बाधा खड़ी हो जाती है। समाजवादी पार्टी ऐसा ही बैरियर है। सपा ने मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर, विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, पुलों और घाटों के निर्माण में रोड़े अटकाए। इनका काम ही विकास में बाधा डालना है। ऐसे लोगों को बैरियर ही बने रहने दीजिए, चुनकर मत भेजिए। इनके बैरियर को एक झटके में उखाड़कर बाहर कर देंगे।

मुख्यमंत्री योगी मीरजापुर में वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षक सीट से भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद मिश्रा और स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह के समर्थन में आयोजित सम्मेलन में कहा कि दोनों प्रत्याशी पिछला चुनाव नहीं जीतने के बावजूद शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं को लेकर लगातार उनके पास आते रहे। उन्होंने 23 अक्टूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक होने वाले मतदान में भागीदारी का आह्वान किया। कहा कि इनके माध्यम से आने वाली शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं के समाधान का रास्ता सरकार निकालेगी।

 - पीडीए का नारा, टिकट परिवार और धन्ना सेठ को

मुख्यमंत्री योगी ने सपा के पीडीए के नारे पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में इसका वास्तविक चेहरा सामने आ गया। दो प्रत्याशी बनाने थे तो एक टिकट अपने चाचा को और दूसरा मुंबई के धन्ना सेठ को दे दिया। न दलित को टिकट दिया, न पिछड़े को और न ही मुसलमान को। दूसरी ओर भाजपा ने आठ टिकटों में तीन सामान्य वर्ग, तीन पिछड़े वर्ग और दो अनुसूचित जाति को दिए। सभी आठ प्रत्याशी जीते। सपा ने परिवार और धन्ना सेठ को प्राथमिकता दी तो पीडीए की हवा निकल गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने खुद को नेहरू परिवार और सपा ने सैफई परिवार तक सीमित रखा। दोनों ने प्रदेश को बेगाना बनाया तो जनता ने भी इन्हें बेगाना बना दिया।

- माफिया के सामने नाक रगड़ने वाले दे रहे उपदेश

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिन लोगों ने प्रदेश के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाते, घुटने टेकते और नाक रगड़ते थे, वे आज कानून-व्यवस्था पर उपदेश दे रहे हैं। सपा शासन में न सड़क थी, न बिजली, न पानी और न शिक्षा की समुचित व्यवस्था। नवरात्र में दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी श्रद्धालुओं को मशक्कत करनी पड़ती थी। मंदिरों में गंदगी और अव्यवस्था रहती थी। आज सरकार जनता के साथ खड़ी है। सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रत्येक ब्लॉक में शिविर लगाकर पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ा गया।

- सैफई सिंडिकेट के कब्जे से मुक्त हुई नौकरियां

मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा शासन में नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा था। जिसे सिंडिकेट चाहता था, उसी को नौकरी मिलती थी। तत्कालीन आयोग अध्यक्ष अनिल यादव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया गया, जिसे हाई कोर्ट ने पद से हटाया। नौजवान सड़कों पर आंदोलन करते थे और अखिलेश सरकार उनकी आवाज अनसुनी करती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। 65 लाख लोगों को रोजगार मिला और एक जिला एक उत्पाद योजना से तीन करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर विकसित हुए। अब युवा स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाला भी बन रहा है।

- चुनाव के बाद फिर शुरू होगा टैबलेट वितरण

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विधान परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद बड़े कार्यक्रम आयोजित कर स्नातक युवाओं को फिर टैबलेट वितरित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य दो करोड़ युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराना है। अब तक 62 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं। डिजिटल अभियान को और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत नीट, आईआईटी-जेईई, यूपीएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराई जा रही है। युवा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से इसका लाभ उठा सकते हैं।

- 15 लाख शिक्षकों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षकों को न सम्मान मिलता था, न स्वास्थ्य सुविधाएं। अब बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और स्ववित्तपोषित संस्थानों के 15 लाख शिक्षकों को परिवार सहित प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर दिया गया है। दुर्घटना की स्थिति में 40 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है। प्रोजेक्ट अलंकार से माध्यमिक विद्यालयों में नए भवन, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और सपा को शिक्षा विरोधी बताते हुए कहा कि इनके शासन में शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा हुई और युवाओं को पलायन करना पड़ा।

- तीन जिलों में न मेडिकल कॉलेज था, न विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा को चार बार प्रदेश में सरकार चलाने का अवसर मिला, लेकिन विकास उसके एजेंडे में नहीं था। वर्ष 2017 से पहले मीरजापुर मंडल के तीनों जिलों में न मेडिकल कॉलेज था, न विश्वविद्यालय। अब मीरजापुर और सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय और भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय प्रारंभ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्र आर्थिक समृद्धि का माध्यम बन रहे हैं। प्रयागराज महाकुंभ, काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या इसके उदाहरण हैं। राम मंदिर का विरोध करने वाले आज अयोध्या पर उपदेश दे रहे हैं।

- पहले जमीनों पर कब्जे में होता था धन का दुरुपयोग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर और त्रिकोण क्षेत्र के विकास से श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिली हैं। प्रतिदिन दो लाख श्रद्धालु दर्शन कर पा रहे हैं। गंगा के पक्के घाट बनने से दुर्घटनाओं की समस्या दूर हुई है। पहले विकास की यही धनराशि गरीबों की जमीनों पर कब्जे के लिए दुरुपयोग की जाती थी। उन्होंने नवरात्र की पंचमी पर मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए और विकास कार्यों तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा भी की।

- नंदी बोले- माफिया की जगह उत्पाद से पहचान

कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में यूपी की पहचान और परसेप्शन बदले हैं। पहले एक जिला एक माफिया की पहचान थी, अब एक जिला एक उत्पाद से प्रदेश जाना जाता है। परिवारवाद और तुष्टीकरण की जगह चुस्त कानून-व्यवस्था तथा औद्योगिक विकास ने ली है। विकास अब सैफई और रायबरेली तक सीमित नहीं है। प्रत्येक जनपद और गांव विकास की नई कहानी लिख रहा है।

- आशीष पटेल बोले- निष्पक्ष भर्ती सरकार की पहचान

कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव महत्वपूर्ण है। यह सरकार के कार्यों पर मुहर लगाने का अवसर है। हाल में पुलिस और होमगार्ड भर्ती के परिणाम आए, लेकिन धांधली का कोई सवाल नहीं उठा। पारदर्शी भर्ती व्यवस्था ही सरकार की पहचान है।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

सम्मेलन में राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड, सांसद डॉ. विनोद बिंद, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली, भाजपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज सहित जनप्रतिनिधि, शिक्षक और स्नातक उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे अहम: स्टारलिंक को न दी जाए मंज़ूरी*
स्वदेशी जागरण मंच दुनिया के सबसे अमीर बिज़नेसमैन एलन मस्क के गैर-ज़िम्मेदाराना बयानों की कड़ी निंदा करता है। यह मामला एलन मस्क की कंपनी 'स्टारलिंक' से जुड़ा है, जिसने भारत में कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस शुरू करने और चलाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है (हालांकि आवेदन को ख़ारिज भी नहीं किया गया है)। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उनकी कंपनी से मांगी गई जानकारी का जवाब देने के बजाय, एलन मस्क ने भारतीय बिज़नेस और सरकार पर परोक्ष रूप से आरोप लगाने का रास्ता चुना। ऐसा लगता है कि स्टारलिंक शायद उन खास ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। नतीजतन, ऐसा लगता है कि एलन मस्क या तो सरकार के खिलाफ़ जनता का दबाव बनाकर लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं या फिर हताशा में ऐसे बयान दे रहे हैं।

यह समझना ज़रूरी है कि स्टारलिंक की टेक्नोलॉजी भारत की रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करने में एक बड़ी चुनौती पेश करती है। स्टारलिंक डेटा को ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचने से पहले सीधे सैटेलाइट के बीच ट्रांसमिट करने के लिए लेज़र-बेस्ड सैटेलाइट लिंक का इस्तेमाल करती है। भारत सरकार इस सिस्टम की जांच कर रही है ताकि यह पक्का किया जा सके कि सुरक्षा से जुड़ी इमरजेंसी के दौरान डेटा भारतीय गेटवे को बायपास न कर सके। एक अहम रेगुलेटरी शर्त यह है कि स्टारलिंक सरकार के कहने पर अपनी सर्विस को ठीक-ठीक तरीके से सीमित करने में सक्षम हो; लेकिन स्टारलिंक ने इस ज़रूरत को पूरा करने का वादा नहीं किया है, या हो सकता है कि उनकी टेक्नोलॉजी इसकी इजाज़त न देती हो।

वर्तमान में भारत कानून-व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसी स्थितियों में, इंटरनेट-बेस्ड सोशल मीडिया अक्सर अफवाहों और देश-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देता है। अलगाववाद, आतंकवाद, दंगे, विरोध-प्रदर्शन और ऐसी ही घटनाओं के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अक्सर इंटरनेट सर्विस को रोकना ज़रूरी हो जाता है।

इसके अलावा, स्टारलिंक सैटेलाइट लेज़र लिंक का इस्तेमाल करके एक-दूसरे से बातचीत हो सकती है। भारत को चिंता है कि भारतीय इंटरनेट ट्रैफ़िक घरेलू गेटवे से न गुज़रकर विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर से होकर जा सकता है, जिससे कानूनी निगरानी और नियम लागू करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार चाहती है कि भारतीय ट्रैफ़िक भारत के अंदर मौजूद गेटवे से होकर गुज़रे।

साथ ही, यह भी डर है कि सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल दुश्मन ताकतों, तस्करों या विद्रोही समूहों द्वारा पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क के दायरे से बाहर बातचीत करने के लिए किया जा सकता है। संवेदनशील सीमाओं और संघर्ष वाले इलाकों के पास अनधिकृत टर्मिनल चलते हुए पाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई जांचों में स्टारलिंक के उपकरण भी बरामद किए हैं।

गौर करने वाली बात है कि भारत ने अब तक स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करके ब्रॉडबैंड और मोबाइल डेटा सेवाएं दी हैं। इन सेवाओं की खासियत यह है कि ये न केवल दुनिया में सबसे सस्ती हैं - आम तौर पर चीन में लगने वाली लागत का 17 प्रतिशत और अमेरिका में लगने वाली लागत का सिर्फ़ 1 प्रतिशत ही है - बल्कि ज़रूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में इन्हें रोका या सीमित भी किया जा सकता है; एक ऐसी गारंटी जो शायद स्टारलिंक की स्पेस-बेस्ड लेज़र तकनीक नहीं दे सकती। इसके अलावा, भारत में मौजूदा टेलीकॉम ऑपरेटर ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करते रहे हैं और उनकी तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरतों के अनुरूप है।

स्वदेशी जागरण मंच की स्टारलिंक से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं यूक्रेन, ईरान, रूस, चीन, ताइवान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील, वेनेजुएला, सूडान और कई अन्य देशों के अनुभवों पर आधारित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषण के लिए सबसे अहम केस स्टडीज़ यूक्रेन, ईरान, रूस, चीन और ताइवान माने जाते हैं।

स्वदेशी जागरण मंच यह बात रिकॉर्ड पर लाना चाहता है कि यह घटना अपनी तरह की पहली घटना नहीं है। मोबाइल इंटरनेट तकनीक में लगातार सुधार और विकास हुआ है। 2G से 3G, 4G और उसके बाद 5G तकनीक तक के सफर ने मोबाइल डेटा की स्पीड को लगातार बढ़ाया है। भारत सरकार ने 2019 में 5G तकनीक लाने की कोशिशें शुरू की थीं, हालांकि उस समय तक देश में यह तकनीक पूरी तरह विकसित नहीं हुई थी। 5G तकनीक को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा कुछ ही कंपनियों तक सीमित थी, जिनमें चीन की हुआवे कीमत के मामले में सबसे आगे थी। तब स्वदेशी जागरण मंच ने सुरक्षा चिंताओं के कारण हुआवे को ट्रायल में शामिल करने का विरोध किया था। एसजेएम के विरोध के बाद, न तो हुआवेई और न ही किसी दूसरी चीनी कंपनी, जेडटीई , को ट्रायल करने की इजाज़त दी गई। इस बीच, 5G तकनीक विकसित करने पर काम कर रही भारतीय कंपनियों और वैज्ञानिकों ने आखिरकार 5G विकसित कर लिया, जिसे आम तौर पर 5Gi के नाम से जाना जाता है। आज, देश में पहले से मौजूद स्वदेशी 4G टेक्नोलॉजी के साथ-साथ कई जगहों पर 5Gi टेक्नोलॉजी भी शुरू की जा चुकी है।

सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट में आत्मनिर्भरता

यह सच है कि भारत ने अमेरिका, यूरोप और रूस जैसे देशों की तुलना में स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देर से कदम रखा, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भारत तेज़ी से ग्लोबल स्पेस क्षेत्र में एक अहम और मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरा है। भारत के PSLV और चंद्रयान मिशन पहले ही ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित कर चुके हैं; वहीं, गगनयान, निसार, चंद्रयान-4, शुक्रयान और इंडियन स्पेस स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट स्पेस सेक्टर में भारत की बढ़ती अहमियत के प्रतीक बन रहे हैं। भारत स्पेस मौसम विज्ञान, कम्युनिकेशन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई देशों की मदद भी कर रहा है। इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में, प्राइवेट स्टार्टअप अब भारत के पब्लिक सेक्टर के उद्यमों के साथ-साथ अपनी जगह बना रहे हैं।
भारत के प्रयासों से विकसित कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स का एक समूह (कॉन्स्टेलेशन) अभी काम कर रहा है। ये सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं में मदद करते हैं, साथ ही सोशल और पॉलिटिकल कम्युनिकेशन को भी मदद  करते हैं। इस क्षेत्र में भारत की क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं; इसके अलावा, सरकारी नीतियां स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे आत्मनिर्भर स्पेस टेक्नोलॉजी का विकास तेज़ी से हो रहा है।

अगर एलन मस्क की स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलता है क्योंकि वह भारत सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर नहीं कर पाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि भारत सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस नहीं दे पाएगा। असल में, अगर देश की अपनी सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस शुरू करने में थोड़ी देर भी होती है, तब भी हम स्टारलिंक की तुलना में बहुत सस्ती सर्विस दे पाएंगे और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा का भी ध्यान रख पाएंगे।

यह साफ़ है कि स्टारलिंक की इंटरनेट सर्विस की कीमत मौजूदा मोबाइल और ब्रॉडबैंड दरों से काफी ज़्यादा होगी। हालांकि, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर स्टारलिंक को रोका जाता है—जो कि पूरी तरह से सही कदम होगा—तो इससे देश की अपनी सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सर्विस के विकास को बहुत बढ़ावा मिलेगा। इससे देश के दूर-दराज़ इलाकों में सस्ती दरों पर इंटरनेट सेवा मिल पाएगी। नतीजतन, जैसे अभी शहरों और गांवों में डेटा बहुत कम दरों पर मिलता है, वैसे ही आत्मनिर्भर स्पेस-बेस्ड इंटरनेट भी जल्द ही दूर-दराज़ इलाकों में उपलब्ध हो सकेगा।
स्वदेशी जागरण मंच सरकार से अपील करता है कि वह स्टारलिंक को अपनी कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस शुरू करने की इजाज़त न दे। एसजेएम का पक्का मानना है कि स्टारलिंक को रोकने से अमेरिका जैसे व्यापारिक साझेदारों को यह संदेश भी जाएगा: अगर उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऊंचे टैरिफ लगाकर भारतीय आयात—जैसे कि हस्तशिल्प उत्पाद—को मनमाने ढंग से रोकने की हिम्मत है, तो भारत को भी अपनी जायज़ राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के आधार पर स्टारलिंक को रोकने का पूरा अधिकार है।
फोन होते ही 30 मिनट में अस्पताल पहुंचेंगे डॉक्टर, हर केंद्र पर लगेगी सूची

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। मरीजों को 24 घंटे उपचार की सुविधा देने के लिए जिला अस्पताल, भदोही एमबीएस के साथ ही सभी सीएचसी पर तैनात ऑनकॉल चिकित्सकों की जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी केंद्रों पर ऑनकॉल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सूची लगाई जाएगी।


अस्पताल से कॉल जाने के बाद डॉक्टरों को 30 मिनट के अंदर पहुंचना होगा। पहले इसके लिए 40 मिनट का समय निर्धारित था, लेकिन जिला अस्पताल के गेट पर बीते सप्ताह प्रसव होने की घटना के बाद नियम में बदलाव किया गया है। मरीज की हालत गंभीर होने पर यदि ईएमओ ने संबंधित डॉक्टर को कॉल नहीं किया, तो उससे भी जवाब मांगा जाएगा।

महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय और महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय, भदोही सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदोही, सुरियावां, भानीपुर, डीघ, गोपीगंज और औराई में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। यहां अक्सर रात में इमरजेंसी के दौरान मरीजों को चिकित्सक नहीं मिलते हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है।



इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को बार-बार शिकायतें मिलती रहती हैं। इसे देखते हुए सभी अस्पतालों के नोटिस बोर्ड और इमरजेंसी वार्ड के बाहर ऑनकॉल डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर चस्पा किए जाएंगे। इससे रात में आने वाले मरीजों को उपचार कराने में सहूलियत होगी और डॉक्टरों से संपर्क करना आसान होगा। लापरवाही करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। नोटिस बोर्ड पर बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिजिशियन, नेत्र सर्जन, ऑर्थो सर्जन और महिला रोग विशेषज्ञ सहित अन्य विशेषज्ञों की ड्यूटी की जानकारी दी जाएगी। ये डॉक्टर ओपीडी के बाद ऑनकॉल रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें 24 घंटे कॉल किया जा सकेगा।


जिला अस्पताल सहित नौ स्वास्थ्य केंद्रों पर आनकाॅल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सूची चम्पा दी जाएगी। समय पर अस्पताल में उपस्थित नहीं होने वाले विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डॉ एसके चक सीएमओ भदोही