लोकप्रिय चेयरमैन प्रवीन अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस पर पौध वितरण कर लगाने और सुरक्षा का संकल्प दिलाया*
सुल्तानपुर,लोकप्रिय चेयरमैन श्री प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर "पौध वितरण कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पंचमुखी हनुमान मंदिर डाक घर चौराहा के पास नगर पालिका परिषद के सभी सभासदों ने मिलकर यह आयोजन किया। दरअसल इस आयोजन में सार्वजनिक रूप से 1500 पौधे लोगों में बांटे गए। हर व्यक्ति से यह अपील की गई कि पौधा लेकर जाएं लगाएं और फिर उसकी देखभाल करें।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहाकि " पेड़" हर व्यक्ति को लगाना चाहिए। जो देखभाल कर सके वही यह पौधा ले जाकर लगाने का हकदार है, नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने निवेदन करते हुए पर्यावरण प्रेमियों से कहाकि एक वृक्ष जरूर लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। वैवाहिक वर्षगांठ जैसे मौके को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का यह सन्देश रहा। लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना और सिर्फ पौधा देना ही नहीं,बल्कि उसकी अच्छे से जिम्मेदारी लेने का संकल्प लेना। नगरक्षेत्र के लोकप्रिय भाजपा नेता व नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वर्षगांठ को समाजसेवा से जोड़कर 1500 पौधे वितरण किए गए और लोगों से एक-एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।
35वीं वर्षगांठ पर सुल्तानपुर नगरपालिका परिषद चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल का सराहनीय कार्य,किया पौधा वितरण*
सुल्तानपुर,अपने विवाह की 35वीं वर्षगांठ पर आज सुल्तानपुर के नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने सराहनीय कार्य किया। तामझाम से दूर उन्होंने बेहद सादगी के साथ वैवाहिक वर्षगांठ मनाते हुए नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया और ज्यादा से ज्यादा लोगों से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पौधरोपण का अनुरोध किया । दरअसल नगर के पोस्ट ऑफिस चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर आज नगर पालिका के सभासदों द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान पहले तो चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने मंदिर में जाकर पूजन अर्चन किया और उसके बाद नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया। उन्होंने कहा कि आज उनके विवाह के 35 वर्ष पूरे हुए। इसलिए पौध वितरण कर कार्यक्रम सभासदों द्वारा आयोजित किया गया। प्रवीण अग्रवाल के अनुरोध किया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाये और सबसे जरूरी बात की उसकी देखरेख करे ताकि हमारा पेड़ सुरक्षित रह सके।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
तुलसीपुर एवं गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात
बलरामपुर ।  मुख्यमंत्री  कल दिनांक 05 जून 2026 को तहसील तुलसीपुर के मध्य नगर–चमरगोझिया मार्ग पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा तुलसीपुर एवं विधानसभा गैसड़ी क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे।
कार्यक्रम स्थल का आयुक्त देवीपाटन मंडल श्रीमती दुर्गाशक्ति नागपाल, आईजी देवीपाटन मंडल, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन एवं मुख्य विकास अधिकारी  हिमांशु गुप्ता द्वारा निरीक्षण कर तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
अधिकारियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, साफ-सफाई, मंच, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
पंचम बड़े मंगलवार पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन
मेरठ/बहसूमा, 2 जून 2026। ज्येष्ठ मास के पंचम बड़े मंगलवार के अवसर पर मवाना नगर स्थित शिव मंदिर, पक्का तालाब के निकट समस्त सनातन परिवार के तत्वावधान में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं श्रीहनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने देश में चल रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए राष्ट्र में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूरे वातावरण में भक्तिमय भजनों, जयकारों और आरती से आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नामित सभासद अक्षत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा। उनका उद्देश्य समाज के लोगों को एकजुट कर भक्ति एवं संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग जाति एवं भेदभाव को भुलाकर एकता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ें, यही इस आयोजन का मुख्य संदेश है।

कार्यक्रम में भाजपा नेता अशोक चौधरी, सभासद अवजीत चौहान, ठाकुर शनि प्रताप, अर्पित पांडे, भाजपा उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष सोकीनदर गुर्जर, भरत अरोरा, आदित्य ठाकुर, विनोद गुप्ता, विवेक अग्रवाल, सुभाष गाबा, अंकुर सैनी, अमर गुप्ता, पल्लव गुप्ता, आशीष सैनी, मुकुल चौहान, चिराग चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। ⛳️
श्रुतज्ञान की रक्षा हेतु आरंभ हुआ भगीरथ महायज्ञ
मुंबई। जैन शासन का अविचल प्राण और चौबीसों तीर्थंकर परमात्माओं का साक्षात अक्षरदेह अर्थात ‘श्रुतज्ञान’ (आगम भगवंत) है। समय के प्रभाव से क्षीण हो रहे इस अमूल्य ज्ञानभंडार को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के परम पुण्य और भगीरथ कार्य में 'श्री वर्धमान श्रुतगंगा' संस्था आज संपूर्ण जैन समाज में अग्रणी एवं प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। श्रुतरक्षा के क्षेत्र में यह संस्था एक सशक्त स्तंभ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है। जैन इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब श्रुतज्ञान पर संकट आया, तब-तब महान आचार्यों और महापुरुषों ने आगे बढ़कर इसे सुरक्षित एवं अमर बनाने का कार्य किया। लगभग 1500 वर्ष पूर्व वल्लभीपुर में पड़े भीषण अकाल के समय जब श्रुतज्ञान के लुप्त होने का भय उत्पन्न हुआ था, तब पूज्य देवर्धिगणि क्षमाश्रमणजी ने जिनागमों को ताड़पत्रों पर लिपिबद्ध करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उसी महान परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करते हुए 'श्री वर्धमान श्रुतगंगा' दुर्लभ हस्तलिपियों एवं आगम ग्रंथों के संरक्षण का महाअभियान चला रही है। शास्त्रकारों के अनुसार पंचम आरे के अंत तक जैन शासन का आधार केवल श्रुतज्ञान ही रहेगा। इसी शाश्वत सत्य को आत्मसात करते हुए संस्था आज के अंधकारमय समय में आत्माओं को सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाशस्तंभ बनकर कार्य कर रही है।संस्था के अध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, उपाध्यक्ष सुरेश देवचंद संघवी तथा मंत्री अशोक नरसी चरला के कुशल मार्गदर्शन में संस्था अनेक ऐतिहासिक एवं अनूठे कार्य कर रही है। परमात्मा की ज्ञानवाणी को शास्त्रोक्त एवं पारंपरिक पद्धति से पुनः हस्तलिखित किया जा रहा है। सांगानेरी कागज तथा विशेष पारंपरिक स्याही द्वारा तैयार किए जा रहे ये ग्रंथ प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं। संस्था का उद्देश्य केवल ग्रंथों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि घर-घर तक जिनागम के प्रति श्रद्धा, ज्ञानभक्ति और संस्कार पहुंचाना भी है। पाठशालाओं एवं संस्कार केंद्रों के माध्यम से नई पीढ़ी में धर्म, संस्कृति और जिनवाणी के प्रति गहरा अनुराग जागृत किया जा रहा है।
इसी क्रम में जैन समाज के लिए एक और गौरवपूर्ण समाचार सामने आया है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध 'वेलकम कलेक्शन' द्वारा संरक्षित लगभग 2,000 दुर्लभ जैन पांडुलिपियों को पुनः जैन समाज को लौटाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई है। वर्ष 1919 में अविभाजित भारत के एक जैन मंदिर से प्राप्त ये पांडुलिपियां लंबे समय तक लंदन स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई थीं। अब एक सदी बाद इनकी वापसी को सांस्कृतिक न्याय और विरासत संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इन दुर्लभ पांडुलिपियों में प्राकृत, संस्कृत और गुजराती भाषाओं में लिखित धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का विशाल संग्रह मौजूद है। कई ग्रंथों में प्राकृतिक रंगों और स्वर्ण अलंकरण का अद्भुत प्रयोग भारतीय कला, संस्कृति और जैन परंपरा की समृद्धि को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल पांडुलिपियों की वापसी नहीं, बल्कि जैन समाज की आस्था, इतिहास और पहचान की पुनर्प्रतिष्ठा है। इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अमूल्य अवसर प्राप्त होगा। जैन समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इस ऐतिहासिक निर्णय का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया है। समाज के अग्रणियों के अनुसार यह पहल विश्वभर में भारतीय संस्कृति, जैन दर्शन और श्रुतज्ञान के प्रति बढ़ते सम्मान का प्रतीक है
31 मई 2026 की रात्रि में होगा माइक्रो ब्लू मून/ पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) का दीदार

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि रविवार, 31 मई 2026 की रात्रि को माइक्रो ब्लू मून का दीदार होगा,

क्या होता है माइक्रो ब्लू मून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद, तारों के शौकीन खगोल प्रेमियों के लिए अलविदा होती हुई मई 2026 एक और शानदार खगोलीय नज़ारे को देकर जा रही है तो आपको भरपूर लुत्फ़ उठाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए क्योंकि इस बार दिखाई देगा शानदार खगोलीय ब्लू मून।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ब्लू मून (Blue Moon) किसी कैलेंडर माह में दिखाई देने वाली दूसरी पूर्णिमा (Full Moon) को कहा जाता है। क्योंकि इस वर्ष, मई महीने में पहली पूर्णिमा 1 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा के रूप में दिखाई दी थी और दूसरी पूर्णिमा जोकि ब्लू मून भी होगी वह 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा है यह 31 मई 2026 की दूसरी पूर्णिमा भी इसी मई माह में दिखाई दे रही है इसीली इसको ब्लू मून कहा जायेगा लेकिन इसका चंद्रमा के वास्तविक नीले रंग से कोई लेना-देना नहीं होता है, यह एक सामान्य पूर्णिमा की तरह ही दिखाई देती है, और शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद पूर्वी क्षितिज पर इसका दीदार सबसे खूबसूरत होगा, लेकिन 31 मई की शाम को जब चंद्रमा उदय होगा, तब तक तकनीकी रूप से पूर्णिमा की तिथि समाप्त हो चुकी होगी, (यह पंचांगीय तिथि के समाप्त होने की बात है, परंतु खगोलीय और दृश्यात्मक रूप से यह रात भर पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) के रूप में ही चमकेगा।) या कुछ यूं कहें कि मानवीय आँखों को यह तब भी पूरी तरह गोल और भव्य ही दिखाई देगा,इस बार के ब्लू मून की खास विशेषताएँ बताते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलविज्ञान के नजरिए से यह केवल एक साधारण "कैलेंडर ब्लू मून" (एक ही महीने में दो पूर्णिमा) नहीं है, बल्कि इसमें कुछ और भी दिलचस्प बिंदु शामिल हैं जैसे कि यह माइक्रो ब्लू मून (Micro Blue Moon) का चंद्रमा अपने अपोजी (Apogee पृथ्वी से सबसे दूर का बिंदु) के बेहद करीब होगा (लगभग 2,52,360 मील दूर)। इस वजह से यह आकार में आम पूर्णिमा के मुक़ाबले करीब 6 से 7% प्रतिशत छोटा और थोड़ा कम चमकदार भी दिखेगा, या कुछ यूं कहें कि यह किसी भी औसत पूर्णिमा से लगभग 5–7% छोटा और सुपरमून की तुलना में लगभग 12–14% छोटा होगा जिसे हम माइक्रो मून भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि साथ ही 31 मई 2026 की रात अंटारेस (Antares)  जोकि एक चमकीला तारा है उसके साथ चंद्रमा की युति 31 मई की रात को ही घटित होगी जब आप इसे देखेंगे, तो यह वृश्चिक राशि (Scorpius) के सबसे चमकीले लाल तारे अंटारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र) के बेहद करीब से गुजरता हुआ दिखाई देगा, एंटारेस (Antares), जिसे भारतीय खगोल विज्ञान में ज्येष्ठा तारा भी कहा जाता है, वृश्चिक तारामंडल (Scorpius constellation) का सबसे चमकीला तारा है ,यह रात्रि आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा है, नंगी आँखों से देखने पर यह लाल रंग का दिखाई देता है,जो दृश्यात्मक रूप से काफी सुंदर संयोजन बनाएगा।

कैसे बनता है ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक कैलेंडर माह में आमतौर पर केवल एक ही पूर्णिमा होती है। लेकिन, एक चंद्र चक्र का समय लगभग
29.5 दिन होता है। इस अंतर के कारण लगभग हर 2.5 से 3 साल में किसी एक महीने में दो पूर्णिमाएँ आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में महीने की दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं। एवं पारंपरिक खगोलीय मौसम (ऋतु) में जब सामान्य से अधिक यानी 4 पूर्णिमाएँ होती हैं, तो उस मौसम की तीसरी पूर्णिमा को भी ब्लू मून माना जाता है।

क्या चांद सच में नीला होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद अपने सामान्य सुनहरे, पीले या सफेद रंग में ही दिखता है। हालाँकि, बहुत ही दुर्लभ परिस्थितियों में (जैसे भीषण जंगलों की आग या ज्वालामुखी के विस्फोट के समय) आसमान में मौजूद धूल और धुएँ के कणों के कारण चाँद का रंग हल्का नीला जरूर दिखाई दे सकता है। साथ ही ब्लू मून की घटना कोई बहुत ही दुर्लभ खगोलीय घटना नहीं है। लेकिन इसका अंग्रेजी मुहावरा "once in a blue moon" अक्सर बहुत कम या कभी-कभार होने वाली घटनाओं को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

क्या होगा इसका चरम समय समय?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 में ब्लू मून की सबसे सटीक चरम अवस्था भारतीय समयानुसार 31 मई 2026 को दोपहर 2:15 (IST) बजे होगी। उस दौरान भारत में दिन का समय होगा जोकि एक समय विशेष पर ही घटित होती है,लेकिन साधारण आंखों से पूर्णिमा को देखने पर आप लगभग एक दिन पहले और एक दिन बाद में भी अपने गोल स्वरूप में ही देख सकते हैं, इसीलिए ब्लू मून को देखने के लिए आपको भारत के हिसाब से 31 मई 2026 की रात्रि का समय ही सबसे उपयुक्त होगा।

कैसे और किस दिशा में देखें?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं है इसे आप अपनी नग्न आंखों( साधारण आँखों) से देख सकते हैं शाम होते ही यह दिखाई देना शुरू हो जायेगा और पूरी रात खूबसूरत दिखाई देगा और खूबसूरत देखने और पूर्ण चंद्रोदय (Moonrise) का अद्भुत नज़ारा लेने का सबसे उत्तम समय 31 मई की शाम को सूर्यास्त के बाद का होगा। और भी अधिक सर्वोत्तम समय, शाम 06:30 बजे से रात 08:45 बजे के बीच होगा अगर दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि यह पूरे भारत में दिखाई देगा। आसमान साफ होने पर इसे बिना किसी दूरबीन के आसानी से देखा जा सकता है और माइक्रो मून (Micromoon)/ ब्लू मून होने के साथ-साथ इस साल का  छोटा और सबसे दूर स्थित पूर्ण चंद्रमा भी है, जो सामान्य से थोड़ा छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा और इस घटना का नाम तो 'ब्लू मून' है, लेकिन इसका रंग सामान्य सफेद या हल्का नारंगी (चंद्रोदय के समय) ही रहेगा।

किस तारामण्डल में दिखाई देगा माइक्रो ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उस सटीक समय पर चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 406,135.2 किलोमीटर (252,361.3 मील) दूर होगा तथा भारत से देखने पर यह वृश्चिक (Scorpius) तारामंडल में दिखाई देगा इस दौरान चंद्रमा की चमक का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.52 के क़रीब होगा। जोकि पूरब और दक्षिणी आकाश में नज़र आयेगा।

क्या होता है माइक्रोमून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 की रात्रि की यह पूर्णिमा “माइक्रोमून” होगी। और यह घटना तब होती है जब पूर्ण चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी वाले बिंदु, अर्थात “अपोजी” (Apogee), के निकट होता है। इसके परिणामस्वरूप चंद्रमा आकाश में सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई देता है। उस समय इसका प्रत्यक्ष आकार लगभग 0.49° होगा।

क्या होता है पूर्णिमा का खगोलविज्ञान ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्ण चंद्रमा तब होता है जब पृथ्वी की ओर वाला चंद्रमा का भाग सूर्य के प्रकाश से लगभग 100% प्रकाशित दिखाई देता है। और यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी लगभग सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। अर्थात, चंद्रमा पृथ्वी के उस पार होता है जो सूर्य के विपरीत दिशा में होता है। एवं आकाश में चंद्रमा की गति सूर्य के सापेक्ष इस ज्यामितीय स्थिति (जिसे “Opposition” भी कहा जाता है) के कारण पूर्ण चंद्रमा सामान्यतः सूर्यास्त के समय उदित होता है, और आधी रात के आसपास आकाश में अपनी सबसे अधिक ऊँचाई पर पहुँचता है और सूर्योदय के समय अस्त होता है।
साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि पूर्णिमा की एक और रोचक विशेषता यह है कि 24 घंटों के दौरान आकाश में उसकी गति लगभग सूर्य के विपरीत ऋतु वाले मार्ग का अनुसरण करती है। अर्थात:
सर्दियों में पूर्णिमा आकाश में अधिक ऊँचाई तक पहुँचती है, जैसे गर्मियों में सूर्य पहुँचता है।
वहीं गर्मियों में पूर्णिमा अपेक्षाकृत नीचे दिखाई देती है।
इसी कारण सर्दियों की पूर्णिमाएँ आकाश में अधिक ऊँची और चमकीली प्रतीत होती हैं।

दो पूर्णिमाओं के बीच का अंतराल कितना होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दो पूर्ण चंद्रमाओं के बीच का औसत अंतराल लगभग 29.53 दिन होता है, अर्थात 29 दिन, 12 घंटे और 43 मिनट। इस समय अवधि को खगोलविज्ञान की भाषा में “सिनोडिक महीना” (Synodic Month) या “ल्यूनेशन” (Lunation) कहा जाता है। हालाँकि यह एक औसत मान है; वास्तविक अंतराल कुछ घंटों तक कम या अधिक हो सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा पूर्णतः वृत्ताकार नहीं होती, बल्कि यह अंडाकार या ओवल या दीर्घवृत्ताकार होती है,तथा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा भी दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) होती है।

प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता है क्योंकि चन्द्रमा की कक्षा,पृथ्वी के सापेक्ष 5 डिग्री झुकी हुई होती है या कुछ यूं कहें कि चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी की कक्षा के तल से लगभग 5° झुकी हुई है, इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर ग्रहण नहीं बनता।यह कभी-कभी पूर्णिमा के समय ही चंद्रमा ,पृथ्वी की अंतरिक्ष में पड़ने वाली छाया से होकर गुजरता है। ऐसी स्थिति में “चंद्र ग्रहण” (Lunar Eclipse) घटित होता है,लेकिन हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा की तुलना में थोड़ी झुकी हुई होती है। इसी कारण अधिकांश समय पूर्ण चंद्रमा, पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है और ग्रहण नहीं बनता।
             
CM हेमन्त सोरेन का सख्त निर्देश: जलस्रोतों पर अतिक्रमण हटाओ, अवैध निर्माण ध्वस्त करो*

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज अधिकारियों की उपस्थिति में नगर विकास एवं आवास विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नगर विकास एवं आवास विभाग की योजनाओं का लाभ आमलोगों को समय पर मिले। नगर विकास एवं आवास विभाग का उद्देश्य सड़क निर्माण, आधारभूत संरचनाओं एवं भवनों का निर्माण के साथ-साथ आम जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है। ऐसे में विकासात्मक योजनाओं के ससमय कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने स्मार्ट सिटी परियोजना, नगर निगम अंतर्गत आधारभूत संरचना, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल आपूर्ति, यातायात प्रबंधन और कूड़ा निस्तारण आदि नगरीय व्यवस्था को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि रांची स्मार्ट सिटी परियोजना को गति देने हेतु भूमि अधिग्रहण कार्यों को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी विकास की सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ राजस्व संग्रहण के संसाधनों पर विशेष कार्य करें। मुख्यमंत्री ने शहरी नागरिक परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक में मंत्री नगर विकास एवं आवास विभाग श्री सुदिव्य कुमार भी उपस्थित रहे।

नदी एवं अन्य जलस्रोत क्षेत्रों से हटवायें अतिक्रमण

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शहरों से गुजरने वाली सभी नदियों, तालाबों, डैमों, नालियों अथवा अन्य जलस्रोतों पर बनी अवैध संरचनाओं एवं अन्य निर्माण कार्यों को तत्काल बंद कराएं एवं पूर्व से बनीं अवैध संरचनाओं से अतिक्रमण मुक्त कराएं। अतिक्रमण कर जो घर बनाएं गएं हैं, उनका तत्काल गहन सर्वे कराएं। उन्होंने सभी शहरी निकायों में अवस्थित नदी अथवा अन्य जलस्रोतों में हुए अवैध निर्माण को चिन्हित करते हुए लिखित नोटिस करने, अतिक्रमण नहीं हटाने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने एवं अतिक्रमण कर निर्मित अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी किनारे और अन्य जलस्रोतों पर अतिक्रमण कर घर बनाना पर्यावरण और जल निकासी के लिए गंभीर खतरा है। इस तरह के कार्य क्षमा योग्य नहीं है, ऐसे कार्य करने वाले लोगों पर कड़ी कानूनी-कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से भी अपील किया है कि अवैध अतिक्रमण कर संरचना तैयार नहीं करें।

कांके डैम संरक्षण के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएं

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के राजधानी रांची में अवस्थित कांके डैम के संरक्षण के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाते हुए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। उन्होंने डैम एरिया में सीधे गिरने वाले नालों को तत्काल बंद कराने, डैम के कैचमेंट एरिया की शीघ्र मापी कराकर, उसकी घेराबंदी कराने का निर्देश दिया, ताकि डैम का पानी स्वच्छ, सुरक्षित एवं संरक्षित बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आसपास के लोगों को भी जागरूक करते हुए , यह सुनिश्चित कराया जाए कि वे घरों से निकलने वाले गंदे पानी को डैम में नहीं जाने दें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शहरों में बसे शत-प्रतिशत घरों में पाइपलाईन के माध्यम से शुद्ध पानी उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित की जाए।

परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो, यह सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि नगर विकास एवं आवास विभाग की किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। सभी योजनाओं की समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक सशक्त करें। मुख्यमंत्री ने नगर विकास एवं आवास विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, आधारभूत संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण, नगर निकाय क्षेत्रों में साफ-सफाई/स्वच्छता, पेय जलापूर्ति तथा आवास योजनाओं की गहन समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने नगर निकाय क्षेत्रों में बरसात पूर्व जल जमाव की समस्या का स्थाई समाधान एवं स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरूस्त रखने का निर्देश दिए।

रांची सहित राज्य के सभी रिंग रोड के आसपास सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा प्रणाली विकसित करें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रांची सहित राज्य में जहां भी रिंग रोड है, उसके आसपास सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा प्रणाली विकसित करें। साथ ही सोलर स्ट्रीट लाइट से रोशन करें। अगले 15 दिनों में सोलर पैनल एवं स्ट्रीट लाईट लगाए जाने संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट से पारित कर कार्य को मूर्त रूप दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिंग रोड एरिया में वाटर पाइप लाइन, सीवर लाइन की भी संरचना विकसित की जाए। राज्य के भीतर जिन-जिन शहरों में वाटर सप्लाई प्लान के अंतर्गत योजनाएं चल रही है, उन योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के अंदर पूर्ण कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, डिजिटल मॉनिटरिंग और आधुनिक शहरी नियोजन तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए। नगर विकास योजनाओं में अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने से समय की बचत के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

शहरी क्षेत्र के प्रत्येक घरों में कराएं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं वाटर वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था

शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने को लेकर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शहरी क्षेत्र में स्थापित प्रत्येक घर, बड़ी-बड़ी सोसाइटीज, हाउसिंग क्षेत्र, बड़े होटल, अपार्टमेंट एवं पॉश इलाके में रहने वाले लोग स्वयं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य करें। इस निमित्त कार्य योजना बनाते हुए लोगों को इस कार्य के लिए प्रेरित करते हुए प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए लोगों को जागरूक कर जनभागीदारी बढ़ाने का निर्देश दिया, ताकि भू-जलस्तर संरक्षित रहे और प्रदूषण में कमी आए।

आधुनिक तकनीक एवं उपायों के माध्यम से निकालें समाधान

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान समय में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत कचरे के पहाड़ों (Legacy Waste) का निस्तारण शहरों की एक प्रमुख पर्यावरणीय चुनौती है। मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों के बीच रांची के झिरी स्थित Legacy Waste का निस्तारण हेतु विचार-विमर्श हुआ तथा आधुनिक तकनीक एवं उपायों के माध्यम से इसका समाधान निकालने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के सभी नगर निकाय क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों से भी गीले एवं सूखे कचरे की अलग-अलग पृथ्कीकरण करने की व्यवस्था करने की अपील की है, जिससे एक तरफ बायोडिग्रेबल कूड़ा से ऊर्जा पैदा किया जा सके, उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सके और नॉन बायोडिग्रेडेबल कचरे का पुनर्चक्रण कर पुन: उपयोग में लाया जा सके।

सड़क किनारे लगे पेड़ों की ट्रिमिंग कर सुंदर आकार दें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बारिश के मौसम से पहले सड़क किनारे लगे पेड़ों की ट्रिमिंग कराकर सुंदर आकार दें। पेड़ों को ट्रिमिंग होने से विद्युत तार एवं सड़कों पर गिरने के खतरों से बचा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने ऑनलाइन माध्यम से राज्य के राजमहल, साहिबगंज एवं धनबाद जिलों से जुड़कर वहां अवस्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर बातचीत की तथा उसकी संरचनाओं का अवलोकन कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग श्री सुनील कुमार, आयुक्त रांची नगर निगम श्री सुशांत गौरव, निदेशक सूडा श्री सूरज कुमार, निदेशक डीएमए श्रीमती नैंसी सहाय, पीडीटी जुडको श्री बी०के० राय, जीएम स्मार्ट सिटी परियोजना श्री राकेश कुमार नंदकुलियार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

भाकियू द्वारा चमरौआ में किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर किसान गोष्ठी का आयोजन
संभल।भारतीय किसान यूनियन (बीआरएसएस) भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के तत्वावgccधान में शुक्रवार को चमरौआ में किसान मसीहा, भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा व किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला अध्यक्ष कामेन्द्र चौधरी ने कहा कि चौधरी साहब ने अपना पूरा जीवन गांव, गरीब, किसान और मजदूर के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने नारा दिया था "जिसका हाथ हल की मूठ पर, जमीन उसकी" और इसी सोच के साथ जमींदारी प्रथा को खत्म कर किसान को जमीन का असली मालिक बनाया। आज जब किसान को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा, डीएपी-यूरिया के लिए लाइन लगानी पड़ रही है और बिजली कटौती से फसल सूख रही है, तब चौधरी साहब की नीतियों की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि संगठन चौधरी साहब के रास्ते पर चलकर ही किसानों का भला कर सकता है और एक-एक कार्यकर्ता उनके आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाएगा। जिला उपाध्यक्ष मिंकू चौधरी बोले कि युवा किसानों को चौधरी साहब से प्रेरणा लेकर संगठित होना होगा। युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी ने जमींदारी उन्मूलन, चकबंदी और कर्ज माफी जैसे फैसले लेकर किसान को जमीन का मालिक बनाया। आज एमएसपी, बिजली, खाद की समस्या का समाधान चौधरी साहब की नीतियों में है। किसान गोष्ठी के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा गांव में कैंप लगाकर राहगीरों को शरबत वितरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारी पुलिस बल के साथ मौके पर थाना प्रभारी क्राइम सत्यविजय सिंह, चौकी प्रभारी अरुण कुमार, उपनिरीक्षक विशांत मलिक, उपनिरीक्षक रविन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक सुधीर कुमार, उपनिरीक्षक कैलाश सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन का धन्यवाद व्यक्त किया।
मुख्य रूप से युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, जिला अध्यक्ष कामेन्द्र चौधरी, जिला उपाध्यक्ष मिंकू चौधरी, जिला संरक्षक शिवनारायण सैनी, जिला सलाहकार सरदार गुरु वचन सिंह, जिला मंत्री खेमपाल यादव, युवा जिला मीडिया प्रभारी निर्देश कुमार, तहसील संरक्षक सेवक सैनी, तहसील अध्यक्ष (अ. मो.) मेहंदी हसन, युवा तहसील महासचिव राजीव कुमार, ब्लॉक महासचिव पवाशा श्रीपाल यादव, सुरेन्द्र भाटी, सुनील राठी, धर्म सिंह, कनिक चौधरी, अनवार अली, अंकुल कुमार एवं महिला मोर्चा से सोनी शर्मा आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ
मुंबई । देश की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था "लोढ़ा फाउंडेशन" द्वारा भारत के एक मात्र निजी वित्त पोषित सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारम्भ बुधवार, 27 मई, 2026 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किया गया। यह जानकारी देते हुए लोढ़ा डेवलपर्स के CEO एवं प्रबंध निदेशक और लोढ़ा फाउंडेशन के ट्रस्टी अभिषेक लोढ़ा ने बताया कि भारत आने वाले वर्षों में एक वैश्विक लीडर बनने के लिए तैयार है। इसलिए लोढ़ा फाउंडेशन का मानना है कि एक विकासशील राष्ट्र से एक विकसित राष्ट्र बनने की इस यात्रा में हम सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन में हम 'उत्कृष्टता के परोपकार' (Philanthropy of Excellence) का अभ्यास करते हैं और इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। इसी क्रम में अत्यंत विचार पूर्वक तैयार की गई और विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में अहम योगदान देने वाली सबसे नई पहल  है, जिसे 27 मई, 2026 को मुंबई स्थित लोढ़ा वर्ल्ड टॉवर में लॉन्च किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं डॉ मंजू लोढ़ा ने लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उपस्थित महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार सबसे बड़ी शक्ति हैं और ऐसे संस्थान आने वाले समय में भारत को वैश्विक एवं वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने बताया कि वुल्फ प्राइज विजेता प्रोफेसर जैनेंद्र जैन के नेतृत्व में LTPI, मौलिक भौतिकी में साहसिक विचारों को प्रोत्साहित करेगा। लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट की परिकल्पना भारत में सैद्धांतिक भौतिकी में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में की गई है। यह संस्थान भारत और दुनिया भर के अग्रणी वैज्ञानिकों के बीच केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सार्थक सहयोग के लिए एक शैक्षणिक वातावरण तैयार करके निरंतर और दीर्घकालिक अनुसंधान की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करेगा। अभिषेक लोढ़ा ने कहा कि लोढ़ा फाउंडेशन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें उत्कृष्टता के प्रयास करना, सबसे बड़ा प्रभाव पैदा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चाहे देश भर से प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान  और उन्हें त्वरित कार्यक्रमों में शामिल करना हो, या शहरी स्थिरता के समाधानों में निवेश करना हो। या फिर 'लोढ़ा मैथमैटिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट' और अब 'लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को सहायता व बढ़ावा देना हो, हम भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के इस महत्वपूर्ण सफर में सार्थक योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत विज्ञान में क्रांति के बाद ही परिवर्तनकारी तकनीकी युगों की शुरुआत होती है। इसी विजन पर LTPI की स्थापना की गई है । यह भारत में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ दिमागों को आकर्षित करेगा और बौद्धिक जिज्ञासा की संस्कृति को बढ़ावा देगा । असाधारण फैकल्टी, पोस्ट डॉक्टरल फेलो और दीर्घकालिक आगंतुकों को एक साथ लाकर, यह संस्थान बौद्धिक स्वतंत्रता, स्थिरता, सहयोग की भावना और गहरे प्रश्नों व साहसिक विचारों को तलाशने का साहस प्रदान करेगा, जिससे ऐसी खोज संभव होंगी, जिनका गहरा प्रभाव आने वाले दशकों में दिखाई देगा। लोढ़ा फाउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक आशीष कुमार सिंह ने कहा कि LTPI का उद्देश्य दुनिया भर के सबसे असाधारण बुद्धिमानों को एक साथ लाना और बिना किसी बाधा के भौतिकी के बारे में खुलकर सोचने में समय बिताना है। उन्होंने कहा कि जब असाधारण दिमाग एक साथ आते हैं, तो वे असाधारण परिणाम देते हैं और यह एक ऐसा दाॅंव है, जो हम भारत के लिए लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि LTPI (Lodha Theoretical Physics Insititute) का नेतृत्व संस्थापक निदेशक प्रो. जैनेंद्र के. जैन करेंगे, जो एक प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं और उन्हें 'ऑलिवर ई. बकली प्राइज' एवं भौतिकी में 'वुल्फ प्राइज' मिल चुका है । उन्होंने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' नामक उभरते कणों की खोज की। इसका वर्णन करने वाले उनके सिद्धांत ने correlated quantum matter की समझ को बेहद समृद्ध किया है और आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी को आकार देना जारी रखा है। प्रो. जैन ने कहा कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रकृति के प्रति हमारी समझ के केंद्र में है। सैद्धांतिक भौतिकी में प्रगति ने ऐतिहासिक रूप से वैज्ञानिक सोच को आकार दिया है और विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी विकास की नींव रखी है।2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए, भारत को विश्व स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे के साथ मजबूत संस्थानों का निर्माण करना अनिवार्य होगा। LTPI इसी दिशा में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रयास होगा, क्योंकि यह भारत में पूरी तरह से निजी तौर पर वित्त पोषित पहला भौतिकी संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि एक बड़ी शुरुआत के साथ, LTPI 'इमर्जेंट फेनोमेना इन क्वांटम हॉल सिस्टम्स' (EPQHS-10) पर 10वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक की मेजबानी कर रहा है । यह तीन दिवसीय कार्यशाला श्रृंखला दुनिया भर के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की मेजबानी करेगी, जो रोमांचक हालिया खोजों की घोषणा करेंगे और भौतिकी के क्षेत्र में भविष्य की आशाजनक दिशाओं पर चर्चा करेंगे । संस्थान की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में कार्य करते हुए, EPQHS-10 की मेजबानी करना यह दर्शाता है कि LTPI में पहले दिन से ही तैयार किया जा रहा शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र कितना गम्भीर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक और विश्व स्तरीय गुणवत्ता का है। समारोह के दौरान, नोबेल पुरस्कार विजेता और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सॉलिड स्टेट रिसर्च के डायरेक्टर एमेरिटस क्लाउस वॉन क्लिट्जिंग ने 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' (TIFR) के सहयोग से आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में बताया गया कि कैसे "क्वांटम हॉल इफेक्ट" की खोज अत्यधिक परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर बुनियादी, जिज्ञासा-संचालित अनुसंधान से उभरी। और कैसे इस अप्रत्याशित खोज ने अंततः माप मानकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में क्रांति ला दी । इस अवसर पर डॉ मंजू लोढ़ा द्वारा एक विशेष काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई, जो इस प्रकार है:- आज सजा है ज्ञान का मंदिर, आज जली है नई मशाल, जहाँ विज्ञान के पंख लगाकर, सपने छू लेंगे हर आकाश। यह केवल एक मंच नहीं है, यह भविष्य की पहचान है, जहाँ जिज्ञासा बनती शक्ति, और शोधों से बढ़ता मान है। गिरते सेब से प्रेरित होकर, न्यूटन ने ज्ञान जगाया, गति और गुरुत्वाकर्षण का सुंदर नियम समझाया। समय, प्रकाश और ब्रह्मांड का जिसने नया विज्ञान दिया, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सोच को नया आसमान दिया। दूरबीन से नभ को देखा, सत्य की राह अपनाई, गैलीलियो ने नई चेतना जग में लाई। विद्युत की अद्भुत धारा से दुनिया को जिसने सजाया, निकोला टेस्ला ने नवयुग का दीप जलाया। असंख्य प्रयोगों की तपस्या से अंधियारा दूर भगाया, थॉमस एडीसन ने बल्ब का उजियारा लाया। रेडियम की खोज में जिसने जीवन अपना खपा दिया, मैरी क्यूरी ने नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया। ब्लैक होल के गहरे रहस्य दुनिया को समझाने वाले, स्टीफेन हॉकिंग  थे, जिन्होंने हौसलों से जग जीता। भारत माँ भी गर्वित हुई, जब सी वी रमन ने कमाल दिखाया, प्रकाश की किरणों के बदलते रंगों का अद्भुत रहस्य समझाया। ज्ञान और गणित की शक्ति से नया सिद्धांत बनाया,सत्येन्द्र नाथ बोस ने आइंस्टीन संग इतिहास रचाया। परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भारत को जिसने बढ़ाया, होमी जहांगीर भाभा ने विज्ञान का मान बढ़ाया। अंतरिक्ष के सपनों को भी जिसने साकार बनाया, विक्रम साराभाई ने भारत का गौरव बढ़ाया। मिसाइल मैन कहलाकर भी मन से रहे महान, एपीजे अब्दुल कलाम ने युवाओं को दिए ऊँचे अरमान। ये वैज्ञानिक दीप समान हैं, ज्ञान जिनसे जगमगाता है, इनकी मेहनत और खोजों से मानव आगे बढ़ पाता है। विज्ञान हमें यह सिखलाता, हर मुश्किल आसान बने, जिज्ञासा और कर्म के बल पर मानव चाँद समान बने। कभी रसायन की प्रयोगशाला में, तत्वों ने मिलकर रंग भरे, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ने, जीवन के जल के दीप धरे। कार्बन की छोटी सी रचना ने, हीरे जैसा रूप लिया, विज्ञान ने मिट्टी के कण को, सोने से बढ़कर मूल्य दिया।कभी अम्ल और क्षार मिले तो, संतुलन का संदेश मिला, हर क्रिया ने यह सिखलाया संघर्षों से नव जीवन खिला। आज इसी प्रेरणा की धरती पर, ज्ञान के दीप प्रज्वलित होंगे, प्रो. जैनेंद्र जैन की शोधों से, विज्ञान के नये पथ निर्मित होंगे। “कॉम्पोज़िट फर्मियॉन” की खोज ने, दुनिया को नई दिशा दिखाई, वुल्फ प्राइज़ जैसे महान सम्मान ने, भारत की प्रतिभा चमकाई। दूर विदेशी धरती से आए, नोबेल विजेता वैज्ञानिक महान,प्रो. क्लॉस वॉन क्लिट्जिंग ने, बढ़ाया विज्ञान का गौरवमान। “क्वांटम हॉल इफेक्ट” की खोज ने, भौतिकी को नया विस्तार दिया, सूक्ष्म कणों की अद्भुत दुनिया का, मानव को नया आधार दिया। यहाँ सूत्र केवल अक्षर नहीं, हर सूत्र जीवन गाता है, विज्ञान वही है जो मानव को, अज्ञान से ऊपर उठाता है। लोढ़ा फाउंडेशन की प्रेरणा ने, शिक्षा का नव दीप जलाया है, अभिषेक लोढ़ा के संकल्पों ने, हर युवा को आगे बढ़ाया है। मंगल प्रभात लोढ़ा  जैसे, सेवा जिनकी पहचान बनी, समाज और संस्कृति के संग, जनहित की सुंदर शान बनी। आईएएस आशीष सिंह के प्रयासों ने, कर्तव्य का मान बढ़ाया है।
लोकप्रिय चेयरमैन प्रवीन अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस पर पौध वितरण कर लगाने और सुरक्षा का संकल्प दिलाया*
सुल्तानपुर,लोकप्रिय चेयरमैन श्री प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर "पौध वितरण कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पंचमुखी हनुमान मंदिर डाक घर चौराहा के पास नगर पालिका परिषद के सभी सभासदों ने मिलकर यह आयोजन किया। दरअसल इस आयोजन में सार्वजनिक रूप से 1500 पौधे लोगों में बांटे गए। हर व्यक्ति से यह अपील की गई कि पौधा लेकर जाएं लगाएं और फिर उसकी देखभाल करें।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहाकि " पेड़" हर व्यक्ति को लगाना चाहिए। जो देखभाल कर सके वही यह पौधा ले जाकर लगाने का हकदार है, नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने निवेदन करते हुए पर्यावरण प्रेमियों से कहाकि एक वृक्ष जरूर लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। वैवाहिक वर्षगांठ जैसे मौके को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का यह सन्देश रहा। लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना और सिर्फ पौधा देना ही नहीं,बल्कि उसकी अच्छे से जिम्मेदारी लेने का संकल्प लेना। नगरक्षेत्र के लोकप्रिय भाजपा नेता व नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल की 35वीं वर्षगांठ को समाजसेवा से जोड़कर 1500 पौधे वितरण किए गए और लोगों से एक-एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।
35वीं वर्षगांठ पर सुल्तानपुर नगरपालिका परिषद चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल का सराहनीय कार्य,किया पौधा वितरण*
सुल्तानपुर,अपने विवाह की 35वीं वर्षगांठ पर आज सुल्तानपुर के नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने सराहनीय कार्य किया। तामझाम से दूर उन्होंने बेहद सादगी के साथ वैवाहिक वर्षगांठ मनाते हुए नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया और ज्यादा से ज्यादा लोगों से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पौधरोपण का अनुरोध किया । दरअसल नगर के पोस्ट ऑफिस चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर आज नगर पालिका के सभासदों द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान पहले तो चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल ने मंदिर में जाकर पूजन अर्चन किया और उसके बाद नगर वासियों को 1500 पौधों का निःशुल्क वितरण किया। उन्होंने कहा कि आज उनके विवाह के 35 वर्ष पूरे हुए। इसलिए पौध वितरण कर कार्यक्रम सभासदों द्वारा आयोजित किया गया। प्रवीण अग्रवाल के अनुरोध किया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाये और सबसे जरूरी बात की उसकी देखरेख करे ताकि हमारा पेड़ सुरक्षित रह सके।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
तुलसीपुर एवं गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात
बलरामपुर ।  मुख्यमंत्री  कल दिनांक 05 जून 2026 को तहसील तुलसीपुर के मध्य नगर–चमरगोझिया मार्ग पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा तुलसीपुर एवं विधानसभा गैसड़ी क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे।
कार्यक्रम स्थल का आयुक्त देवीपाटन मंडल श्रीमती दुर्गाशक्ति नागपाल, आईजी देवीपाटन मंडल, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन एवं मुख्य विकास अधिकारी  हिमांशु गुप्ता द्वारा निरीक्षण कर तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
अधिकारियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, साफ-सफाई, मंच, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
पंचम बड़े मंगलवार पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन
मेरठ/बहसूमा, 2 जून 2026। ज्येष्ठ मास के पंचम बड़े मंगलवार के अवसर पर मवाना नगर स्थित शिव मंदिर, पक्का तालाब के निकट समस्त सनातन परिवार के तत्वावधान में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं श्रीहनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने देश में चल रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए राष्ट्र में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूरे वातावरण में भक्तिमय भजनों, जयकारों और आरती से आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नामित सभासद अक्षत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा। उनका उद्देश्य समाज के लोगों को एकजुट कर भक्ति एवं संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग जाति एवं भेदभाव को भुलाकर एकता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ें, यही इस आयोजन का मुख्य संदेश है।

कार्यक्रम में भाजपा नेता अशोक चौधरी, सभासद अवजीत चौहान, ठाकुर शनि प्रताप, अर्पित पांडे, भाजपा उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष सोकीनदर गुर्जर, भरत अरोरा, आदित्य ठाकुर, विनोद गुप्ता, विवेक अग्रवाल, सुभाष गाबा, अंकुर सैनी, अमर गुप्ता, पल्लव गुप्ता, आशीष सैनी, मुकुल चौहान, चिराग चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। ⛳️
श्रुतज्ञान की रक्षा हेतु आरंभ हुआ भगीरथ महायज्ञ
मुंबई। जैन शासन का अविचल प्राण और चौबीसों तीर्थंकर परमात्माओं का साक्षात अक्षरदेह अर्थात ‘श्रुतज्ञान’ (आगम भगवंत) है। समय के प्रभाव से क्षीण हो रहे इस अमूल्य ज्ञानभंडार को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के परम पुण्य और भगीरथ कार्य में 'श्री वर्धमान श्रुतगंगा' संस्था आज संपूर्ण जैन समाज में अग्रणी एवं प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। श्रुतरक्षा के क्षेत्र में यह संस्था एक सशक्त स्तंभ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है। जैन इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब श्रुतज्ञान पर संकट आया, तब-तब महान आचार्यों और महापुरुषों ने आगे बढ़कर इसे सुरक्षित एवं अमर बनाने का कार्य किया। लगभग 1500 वर्ष पूर्व वल्लभीपुर में पड़े भीषण अकाल के समय जब श्रुतज्ञान के लुप्त होने का भय उत्पन्न हुआ था, तब पूज्य देवर्धिगणि क्षमाश्रमणजी ने जिनागमों को ताड़पत्रों पर लिपिबद्ध करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उसी महान परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करते हुए 'श्री वर्धमान श्रुतगंगा' दुर्लभ हस्तलिपियों एवं आगम ग्रंथों के संरक्षण का महाअभियान चला रही है। शास्त्रकारों के अनुसार पंचम आरे के अंत तक जैन शासन का आधार केवल श्रुतज्ञान ही रहेगा। इसी शाश्वत सत्य को आत्मसात करते हुए संस्था आज के अंधकारमय समय में आत्माओं को सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाशस्तंभ बनकर कार्य कर रही है।संस्था के अध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, उपाध्यक्ष सुरेश देवचंद संघवी तथा मंत्री अशोक नरसी चरला के कुशल मार्गदर्शन में संस्था अनेक ऐतिहासिक एवं अनूठे कार्य कर रही है। परमात्मा की ज्ञानवाणी को शास्त्रोक्त एवं पारंपरिक पद्धति से पुनः हस्तलिखित किया जा रहा है। सांगानेरी कागज तथा विशेष पारंपरिक स्याही द्वारा तैयार किए जा रहे ये ग्रंथ प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं। संस्था का उद्देश्य केवल ग्रंथों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि घर-घर तक जिनागम के प्रति श्रद्धा, ज्ञानभक्ति और संस्कार पहुंचाना भी है। पाठशालाओं एवं संस्कार केंद्रों के माध्यम से नई पीढ़ी में धर्म, संस्कृति और जिनवाणी के प्रति गहरा अनुराग जागृत किया जा रहा है।
इसी क्रम में जैन समाज के लिए एक और गौरवपूर्ण समाचार सामने आया है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध 'वेलकम कलेक्शन' द्वारा संरक्षित लगभग 2,000 दुर्लभ जैन पांडुलिपियों को पुनः जैन समाज को लौटाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई है। वर्ष 1919 में अविभाजित भारत के एक जैन मंदिर से प्राप्त ये पांडुलिपियां लंबे समय तक लंदन स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई थीं। अब एक सदी बाद इनकी वापसी को सांस्कृतिक न्याय और विरासत संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इन दुर्लभ पांडुलिपियों में प्राकृत, संस्कृत और गुजराती भाषाओं में लिखित धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का विशाल संग्रह मौजूद है। कई ग्रंथों में प्राकृतिक रंगों और स्वर्ण अलंकरण का अद्भुत प्रयोग भारतीय कला, संस्कृति और जैन परंपरा की समृद्धि को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल पांडुलिपियों की वापसी नहीं, बल्कि जैन समाज की आस्था, इतिहास और पहचान की पुनर्प्रतिष्ठा है। इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अमूल्य अवसर प्राप्त होगा। जैन समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इस ऐतिहासिक निर्णय का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया है। समाज के अग्रणियों के अनुसार यह पहल विश्वभर में भारतीय संस्कृति, जैन दर्शन और श्रुतज्ञान के प्रति बढ़ते सम्मान का प्रतीक है
31 मई 2026 की रात्रि में होगा माइक्रो ब्लू मून/ पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) का दीदार

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि रविवार, 31 मई 2026 की रात्रि को माइक्रो ब्लू मून का दीदार होगा,

क्या होता है माइक्रो ब्लू मून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद, तारों के शौकीन खगोल प्रेमियों के लिए अलविदा होती हुई मई 2026 एक और शानदार खगोलीय नज़ारे को देकर जा रही है तो आपको भरपूर लुत्फ़ उठाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए क्योंकि इस बार दिखाई देगा शानदार खगोलीय ब्लू मून।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ब्लू मून (Blue Moon) किसी कैलेंडर माह में दिखाई देने वाली दूसरी पूर्णिमा (Full Moon) को कहा जाता है। क्योंकि इस वर्ष, मई महीने में पहली पूर्णिमा 1 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा के रूप में दिखाई दी थी और दूसरी पूर्णिमा जोकि ब्लू मून भी होगी वह 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा है यह 31 मई 2026 की दूसरी पूर्णिमा भी इसी मई माह में दिखाई दे रही है इसीली इसको ब्लू मून कहा जायेगा लेकिन इसका चंद्रमा के वास्तविक नीले रंग से कोई लेना-देना नहीं होता है, यह एक सामान्य पूर्णिमा की तरह ही दिखाई देती है, और शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद पूर्वी क्षितिज पर इसका दीदार सबसे खूबसूरत होगा, लेकिन 31 मई की शाम को जब चंद्रमा उदय होगा, तब तक तकनीकी रूप से पूर्णिमा की तिथि समाप्त हो चुकी होगी, (यह पंचांगीय तिथि के समाप्त होने की बात है, परंतु खगोलीय और दृश्यात्मक रूप से यह रात भर पूर्ण चंद्रमा (Full Moon) के रूप में ही चमकेगा।) या कुछ यूं कहें कि मानवीय आँखों को यह तब भी पूरी तरह गोल और भव्य ही दिखाई देगा,इस बार के ब्लू मून की खास विशेषताएँ बताते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलविज्ञान के नजरिए से यह केवल एक साधारण "कैलेंडर ब्लू मून" (एक ही महीने में दो पूर्णिमा) नहीं है, बल्कि इसमें कुछ और भी दिलचस्प बिंदु शामिल हैं जैसे कि यह माइक्रो ब्लू मून (Micro Blue Moon) का चंद्रमा अपने अपोजी (Apogee पृथ्वी से सबसे दूर का बिंदु) के बेहद करीब होगा (लगभग 2,52,360 मील दूर)। इस वजह से यह आकार में आम पूर्णिमा के मुक़ाबले करीब 6 से 7% प्रतिशत छोटा और थोड़ा कम चमकदार भी दिखेगा, या कुछ यूं कहें कि यह किसी भी औसत पूर्णिमा से लगभग 5–7% छोटा और सुपरमून की तुलना में लगभग 12–14% छोटा होगा जिसे हम माइक्रो मून भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि साथ ही 31 मई 2026 की रात अंटारेस (Antares)  जोकि एक चमकीला तारा है उसके साथ चंद्रमा की युति 31 मई की रात को ही घटित होगी जब आप इसे देखेंगे, तो यह वृश्चिक राशि (Scorpius) के सबसे चमकीले लाल तारे अंटारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र) के बेहद करीब से गुजरता हुआ दिखाई देगा, एंटारेस (Antares), जिसे भारतीय खगोल विज्ञान में ज्येष्ठा तारा भी कहा जाता है, वृश्चिक तारामंडल (Scorpius constellation) का सबसे चमकीला तारा है ,यह रात्रि आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा है, नंगी आँखों से देखने पर यह लाल रंग का दिखाई देता है,जो दृश्यात्मक रूप से काफी सुंदर संयोजन बनाएगा।

कैसे बनता है ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक कैलेंडर माह में आमतौर पर केवल एक ही पूर्णिमा होती है। लेकिन, एक चंद्र चक्र का समय लगभग
29.5 दिन होता है। इस अंतर के कारण लगभग हर 2.5 से 3 साल में किसी एक महीने में दो पूर्णिमाएँ आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में महीने की दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं। एवं पारंपरिक खगोलीय मौसम (ऋतु) में जब सामान्य से अधिक यानी 4 पूर्णिमाएँ होती हैं, तो उस मौसम की तीसरी पूर्णिमा को भी ब्लू मून माना जाता है।

क्या चांद सच में नीला होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चांद अपने सामान्य सुनहरे, पीले या सफेद रंग में ही दिखता है। हालाँकि, बहुत ही दुर्लभ परिस्थितियों में (जैसे भीषण जंगलों की आग या ज्वालामुखी के विस्फोट के समय) आसमान में मौजूद धूल और धुएँ के कणों के कारण चाँद का रंग हल्का नीला जरूर दिखाई दे सकता है। साथ ही ब्लू मून की घटना कोई बहुत ही दुर्लभ खगोलीय घटना नहीं है। लेकिन इसका अंग्रेजी मुहावरा "once in a blue moon" अक्सर बहुत कम या कभी-कभार होने वाली घटनाओं को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

क्या होगा इसका चरम समय समय?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 में ब्लू मून की सबसे सटीक चरम अवस्था भारतीय समयानुसार 31 मई 2026 को दोपहर 2:15 (IST) बजे होगी। उस दौरान भारत में दिन का समय होगा जोकि एक समय विशेष पर ही घटित होती है,लेकिन साधारण आंखों से पूर्णिमा को देखने पर आप लगभग एक दिन पहले और एक दिन बाद में भी अपने गोल स्वरूप में ही देख सकते हैं, इसीलिए ब्लू मून को देखने के लिए आपको भारत के हिसाब से 31 मई 2026 की रात्रि का समय ही सबसे उपयुक्त होगा।

कैसे और किस दिशा में देखें?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे देखने के लिए आपको किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं है इसे आप अपनी नग्न आंखों( साधारण आँखों) से देख सकते हैं शाम होते ही यह दिखाई देना शुरू हो जायेगा और पूरी रात खूबसूरत दिखाई देगा और खूबसूरत देखने और पूर्ण चंद्रोदय (Moonrise) का अद्भुत नज़ारा लेने का सबसे उत्तम समय 31 मई की शाम को सूर्यास्त के बाद का होगा। और भी अधिक सर्वोत्तम समय, शाम 06:30 बजे से रात 08:45 बजे के बीच होगा अगर दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि यह पूरे भारत में दिखाई देगा। आसमान साफ होने पर इसे बिना किसी दूरबीन के आसानी से देखा जा सकता है और माइक्रो मून (Micromoon)/ ब्लू मून होने के साथ-साथ इस साल का  छोटा और सबसे दूर स्थित पूर्ण चंद्रमा भी है, जो सामान्य से थोड़ा छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा और इस घटना का नाम तो 'ब्लू मून' है, लेकिन इसका रंग सामान्य सफेद या हल्का नारंगी (चंद्रोदय के समय) ही रहेगा।

किस तारामण्डल में दिखाई देगा माइक्रो ब्लू मून ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उस सटीक समय पर चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 406,135.2 किलोमीटर (252,361.3 मील) दूर होगा तथा भारत से देखने पर यह वृश्चिक (Scorpius) तारामंडल में दिखाई देगा इस दौरान चंद्रमा की चमक का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.52 के क़रीब होगा। जोकि पूरब और दक्षिणी आकाश में नज़र आयेगा।

क्या होता है माइक्रोमून?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 मई 2026 की रात्रि की यह पूर्णिमा “माइक्रोमून” होगी। और यह घटना तब होती है जब पूर्ण चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी वाले बिंदु, अर्थात “अपोजी” (Apogee), के निकट होता है। इसके परिणामस्वरूप चंद्रमा आकाश में सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई देता है। उस समय इसका प्रत्यक्ष आकार लगभग 0.49° होगा।

क्या होता है पूर्णिमा का खगोलविज्ञान ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्ण चंद्रमा तब होता है जब पृथ्वी की ओर वाला चंद्रमा का भाग सूर्य के प्रकाश से लगभग 100% प्रकाशित दिखाई देता है। और यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी लगभग सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। अर्थात, चंद्रमा पृथ्वी के उस पार होता है जो सूर्य के विपरीत दिशा में होता है। एवं आकाश में चंद्रमा की गति सूर्य के सापेक्ष इस ज्यामितीय स्थिति (जिसे “Opposition” भी कहा जाता है) के कारण पूर्ण चंद्रमा सामान्यतः सूर्यास्त के समय उदित होता है, और आधी रात के आसपास आकाश में अपनी सबसे अधिक ऊँचाई पर पहुँचता है और सूर्योदय के समय अस्त होता है।
साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि पूर्णिमा की एक और रोचक विशेषता यह है कि 24 घंटों के दौरान आकाश में उसकी गति लगभग सूर्य के विपरीत ऋतु वाले मार्ग का अनुसरण करती है। अर्थात:
सर्दियों में पूर्णिमा आकाश में अधिक ऊँचाई तक पहुँचती है, जैसे गर्मियों में सूर्य पहुँचता है।
वहीं गर्मियों में पूर्णिमा अपेक्षाकृत नीचे दिखाई देती है।
इसी कारण सर्दियों की पूर्णिमाएँ आकाश में अधिक ऊँची और चमकीली प्रतीत होती हैं।

दो पूर्णिमाओं के बीच का अंतराल कितना होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दो पूर्ण चंद्रमाओं के बीच का औसत अंतराल लगभग 29.53 दिन होता है, अर्थात 29 दिन, 12 घंटे और 43 मिनट। इस समय अवधि को खगोलविज्ञान की भाषा में “सिनोडिक महीना” (Synodic Month) या “ल्यूनेशन” (Lunation) कहा जाता है। हालाँकि यह एक औसत मान है; वास्तविक अंतराल कुछ घंटों तक कम या अधिक हो सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा पूर्णतः वृत्ताकार नहीं होती, बल्कि यह अंडाकार या ओवल या दीर्घवृत्ताकार होती है,तथा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा भी दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) होती है।

प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता है क्योंकि चन्द्रमा की कक्षा,पृथ्वी के सापेक्ष 5 डिग्री झुकी हुई होती है या कुछ यूं कहें कि चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी की कक्षा के तल से लगभग 5° झुकी हुई है, इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर ग्रहण नहीं बनता।यह कभी-कभी पूर्णिमा के समय ही चंद्रमा ,पृथ्वी की अंतरिक्ष में पड़ने वाली छाया से होकर गुजरता है। ऐसी स्थिति में “चंद्र ग्रहण” (Lunar Eclipse) घटित होता है,लेकिन हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा की तुलना में थोड़ी झुकी हुई होती है। इसी कारण अधिकांश समय पूर्ण चंद्रमा, पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है और ग्रहण नहीं बनता।
             
CM हेमन्त सोरेन का सख्त निर्देश: जलस्रोतों पर अतिक्रमण हटाओ, अवैध निर्माण ध्वस्त करो*

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज अधिकारियों की उपस्थिति में नगर विकास एवं आवास विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नगर विकास एवं आवास विभाग की योजनाओं का लाभ आमलोगों को समय पर मिले। नगर विकास एवं आवास विभाग का उद्देश्य सड़क निर्माण, आधारभूत संरचनाओं एवं भवनों का निर्माण के साथ-साथ आम जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है। ऐसे में विकासात्मक योजनाओं के ससमय कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने स्मार्ट सिटी परियोजना, नगर निगम अंतर्गत आधारभूत संरचना, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल आपूर्ति, यातायात प्रबंधन और कूड़ा निस्तारण आदि नगरीय व्यवस्था को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि रांची स्मार्ट सिटी परियोजना को गति देने हेतु भूमि अधिग्रहण कार्यों को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी विकास की सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ राजस्व संग्रहण के संसाधनों पर विशेष कार्य करें। मुख्यमंत्री ने शहरी नागरिक परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक में मंत्री नगर विकास एवं आवास विभाग श्री सुदिव्य कुमार भी उपस्थित रहे।

नदी एवं अन्य जलस्रोत क्षेत्रों से हटवायें अतिक्रमण

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शहरों से गुजरने वाली सभी नदियों, तालाबों, डैमों, नालियों अथवा अन्य जलस्रोतों पर बनी अवैध संरचनाओं एवं अन्य निर्माण कार्यों को तत्काल बंद कराएं एवं पूर्व से बनीं अवैध संरचनाओं से अतिक्रमण मुक्त कराएं। अतिक्रमण कर जो घर बनाएं गएं हैं, उनका तत्काल गहन सर्वे कराएं। उन्होंने सभी शहरी निकायों में अवस्थित नदी अथवा अन्य जलस्रोतों में हुए अवैध निर्माण को चिन्हित करते हुए लिखित नोटिस करने, अतिक्रमण नहीं हटाने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने एवं अतिक्रमण कर निर्मित अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी किनारे और अन्य जलस्रोतों पर अतिक्रमण कर घर बनाना पर्यावरण और जल निकासी के लिए गंभीर खतरा है। इस तरह के कार्य क्षमा योग्य नहीं है, ऐसे कार्य करने वाले लोगों पर कड़ी कानूनी-कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से भी अपील किया है कि अवैध अतिक्रमण कर संरचना तैयार नहीं करें।

कांके डैम संरक्षण के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएं

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के राजधानी रांची में अवस्थित कांके डैम के संरक्षण के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाते हुए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। उन्होंने डैम एरिया में सीधे गिरने वाले नालों को तत्काल बंद कराने, डैम के कैचमेंट एरिया की शीघ्र मापी कराकर, उसकी घेराबंदी कराने का निर्देश दिया, ताकि डैम का पानी स्वच्छ, सुरक्षित एवं संरक्षित बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आसपास के लोगों को भी जागरूक करते हुए , यह सुनिश्चित कराया जाए कि वे घरों से निकलने वाले गंदे पानी को डैम में नहीं जाने दें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शहरों में बसे शत-प्रतिशत घरों में पाइपलाईन के माध्यम से शुद्ध पानी उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित की जाए।

परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो, यह सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि नगर विकास एवं आवास विभाग की किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। सभी योजनाओं की समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक सशक्त करें। मुख्यमंत्री ने नगर विकास एवं आवास विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, आधारभूत संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण, नगर निकाय क्षेत्रों में साफ-सफाई/स्वच्छता, पेय जलापूर्ति तथा आवास योजनाओं की गहन समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने नगर निकाय क्षेत्रों में बरसात पूर्व जल जमाव की समस्या का स्थाई समाधान एवं स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरूस्त रखने का निर्देश दिए।

रांची सहित राज्य के सभी रिंग रोड के आसपास सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा प्रणाली विकसित करें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रांची सहित राज्य में जहां भी रिंग रोड है, उसके आसपास सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा प्रणाली विकसित करें। साथ ही सोलर स्ट्रीट लाइट से रोशन करें। अगले 15 दिनों में सोलर पैनल एवं स्ट्रीट लाईट लगाए जाने संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट से पारित कर कार्य को मूर्त रूप दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिंग रोड एरिया में वाटर पाइप लाइन, सीवर लाइन की भी संरचना विकसित की जाए। राज्य के भीतर जिन-जिन शहरों में वाटर सप्लाई प्लान के अंतर्गत योजनाएं चल रही है, उन योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के अंदर पूर्ण कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, डिजिटल मॉनिटरिंग और आधुनिक शहरी नियोजन तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए। नगर विकास योजनाओं में अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने से समय की बचत के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

शहरी क्षेत्र के प्रत्येक घरों में कराएं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं वाटर वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था

शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने को लेकर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शहरी क्षेत्र में स्थापित प्रत्येक घर, बड़ी-बड़ी सोसाइटीज, हाउसिंग क्षेत्र, बड़े होटल, अपार्टमेंट एवं पॉश इलाके में रहने वाले लोग स्वयं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य करें। इस निमित्त कार्य योजना बनाते हुए लोगों को इस कार्य के लिए प्रेरित करते हुए प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए लोगों को जागरूक कर जनभागीदारी बढ़ाने का निर्देश दिया, ताकि भू-जलस्तर संरक्षित रहे और प्रदूषण में कमी आए।

आधुनिक तकनीक एवं उपायों के माध्यम से निकालें समाधान

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान समय में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत कचरे के पहाड़ों (Legacy Waste) का निस्तारण शहरों की एक प्रमुख पर्यावरणीय चुनौती है। मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों के बीच रांची के झिरी स्थित Legacy Waste का निस्तारण हेतु विचार-विमर्श हुआ तथा आधुनिक तकनीक एवं उपायों के माध्यम से इसका समाधान निकालने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के सभी नगर निकाय क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों से भी गीले एवं सूखे कचरे की अलग-अलग पृथ्कीकरण करने की व्यवस्था करने की अपील की है, जिससे एक तरफ बायोडिग्रेबल कूड़ा से ऊर्जा पैदा किया जा सके, उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सके और नॉन बायोडिग्रेडेबल कचरे का पुनर्चक्रण कर पुन: उपयोग में लाया जा सके।

सड़क किनारे लगे पेड़ों की ट्रिमिंग कर सुंदर आकार दें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बारिश के मौसम से पहले सड़क किनारे लगे पेड़ों की ट्रिमिंग कराकर सुंदर आकार दें। पेड़ों को ट्रिमिंग होने से विद्युत तार एवं सड़कों पर गिरने के खतरों से बचा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने ऑनलाइन माध्यम से राज्य के राजमहल, साहिबगंज एवं धनबाद जिलों से जुड़कर वहां अवस्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर बातचीत की तथा उसकी संरचनाओं का अवलोकन कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग श्री सुनील कुमार, आयुक्त रांची नगर निगम श्री सुशांत गौरव, निदेशक सूडा श्री सूरज कुमार, निदेशक डीएमए श्रीमती नैंसी सहाय, पीडीटी जुडको श्री बी०के० राय, जीएम स्मार्ट सिटी परियोजना श्री राकेश कुमार नंदकुलियार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

भाकियू द्वारा चमरौआ में किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर किसान गोष्ठी का आयोजन
संभल।भारतीय किसान यूनियन (बीआरएसएस) भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के तत्वावgccधान में शुक्रवार को चमरौआ में किसान मसीहा, भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा व किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला अध्यक्ष कामेन्द्र चौधरी ने कहा कि चौधरी साहब ने अपना पूरा जीवन गांव, गरीब, किसान और मजदूर के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने नारा दिया था "जिसका हाथ हल की मूठ पर, जमीन उसकी" और इसी सोच के साथ जमींदारी प्रथा को खत्म कर किसान को जमीन का असली मालिक बनाया। आज जब किसान को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा, डीएपी-यूरिया के लिए लाइन लगानी पड़ रही है और बिजली कटौती से फसल सूख रही है, तब चौधरी साहब की नीतियों की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि संगठन चौधरी साहब के रास्ते पर चलकर ही किसानों का भला कर सकता है और एक-एक कार्यकर्ता उनके आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाएगा। जिला उपाध्यक्ष मिंकू चौधरी बोले कि युवा किसानों को चौधरी साहब से प्रेरणा लेकर संगठित होना होगा। युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी ने जमींदारी उन्मूलन, चकबंदी और कर्ज माफी जैसे फैसले लेकर किसान को जमीन का मालिक बनाया। आज एमएसपी, बिजली, खाद की समस्या का समाधान चौधरी साहब की नीतियों में है। किसान गोष्ठी के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा गांव में कैंप लगाकर राहगीरों को शरबत वितरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारी पुलिस बल के साथ मौके पर थाना प्रभारी क्राइम सत्यविजय सिंह, चौकी प्रभारी अरुण कुमार, उपनिरीक्षक विशांत मलिक, उपनिरीक्षक रविन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक सुधीर कुमार, उपनिरीक्षक कैलाश सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन का धन्यवाद व्यक्त किया।
मुख्य रूप से युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, जिला अध्यक्ष कामेन्द्र चौधरी, जिला उपाध्यक्ष मिंकू चौधरी, जिला संरक्षक शिवनारायण सैनी, जिला सलाहकार सरदार गुरु वचन सिंह, जिला मंत्री खेमपाल यादव, युवा जिला मीडिया प्रभारी निर्देश कुमार, तहसील संरक्षक सेवक सैनी, तहसील अध्यक्ष (अ. मो.) मेहंदी हसन, युवा तहसील महासचिव राजीव कुमार, ब्लॉक महासचिव पवाशा श्रीपाल यादव, सुरेन्द्र भाटी, सुनील राठी, धर्म सिंह, कनिक चौधरी, अनवार अली, अंकुल कुमार एवं महिला मोर्चा से सोनी शर्मा आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ
मुंबई । देश की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था "लोढ़ा फाउंडेशन" द्वारा भारत के एक मात्र निजी वित्त पोषित सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारम्भ बुधवार, 27 मई, 2026 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किया गया। यह जानकारी देते हुए लोढ़ा डेवलपर्स के CEO एवं प्रबंध निदेशक और लोढ़ा फाउंडेशन के ट्रस्टी अभिषेक लोढ़ा ने बताया कि भारत आने वाले वर्षों में एक वैश्विक लीडर बनने के लिए तैयार है। इसलिए लोढ़ा फाउंडेशन का मानना है कि एक विकासशील राष्ट्र से एक विकसित राष्ट्र बनने की इस यात्रा में हम सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन में हम 'उत्कृष्टता के परोपकार' (Philanthropy of Excellence) का अभ्यास करते हैं और इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। इसी क्रम में अत्यंत विचार पूर्वक तैयार की गई और विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में अहम योगदान देने वाली सबसे नई पहल  है, जिसे 27 मई, 2026 को मुंबई स्थित लोढ़ा वर्ल्ड टॉवर में लॉन्च किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं डॉ मंजू लोढ़ा ने लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उपस्थित महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार सबसे बड़ी शक्ति हैं और ऐसे संस्थान आने वाले समय में भारत को वैश्विक एवं वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने बताया कि वुल्फ प्राइज विजेता प्रोफेसर जैनेंद्र जैन के नेतृत्व में LTPI, मौलिक भौतिकी में साहसिक विचारों को प्रोत्साहित करेगा। लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट की परिकल्पना भारत में सैद्धांतिक भौतिकी में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में की गई है। यह संस्थान भारत और दुनिया भर के अग्रणी वैज्ञानिकों के बीच केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सार्थक सहयोग के लिए एक शैक्षणिक वातावरण तैयार करके निरंतर और दीर्घकालिक अनुसंधान की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करेगा। अभिषेक लोढ़ा ने कहा कि लोढ़ा फाउंडेशन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें उत्कृष्टता के प्रयास करना, सबसे बड़ा प्रभाव पैदा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चाहे देश भर से प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान  और उन्हें त्वरित कार्यक्रमों में शामिल करना हो, या शहरी स्थिरता के समाधानों में निवेश करना हो। या फिर 'लोढ़ा मैथमैटिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट' और अब 'लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को सहायता व बढ़ावा देना हो, हम भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के इस महत्वपूर्ण सफर में सार्थक योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत विज्ञान में क्रांति के बाद ही परिवर्तनकारी तकनीकी युगों की शुरुआत होती है। इसी विजन पर LTPI की स्थापना की गई है । यह भारत में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ दिमागों को आकर्षित करेगा और बौद्धिक जिज्ञासा की संस्कृति को बढ़ावा देगा । असाधारण फैकल्टी, पोस्ट डॉक्टरल फेलो और दीर्घकालिक आगंतुकों को एक साथ लाकर, यह संस्थान बौद्धिक स्वतंत्रता, स्थिरता, सहयोग की भावना और गहरे प्रश्नों व साहसिक विचारों को तलाशने का साहस प्रदान करेगा, जिससे ऐसी खोज संभव होंगी, जिनका गहरा प्रभाव आने वाले दशकों में दिखाई देगा। लोढ़ा फाउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक आशीष कुमार सिंह ने कहा कि LTPI का उद्देश्य दुनिया भर के सबसे असाधारण बुद्धिमानों को एक साथ लाना और बिना किसी बाधा के भौतिकी के बारे में खुलकर सोचने में समय बिताना है। उन्होंने कहा कि जब असाधारण दिमाग एक साथ आते हैं, तो वे असाधारण परिणाम देते हैं और यह एक ऐसा दाॅंव है, जो हम भारत के लिए लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि LTPI (Lodha Theoretical Physics Insititute) का नेतृत्व संस्थापक निदेशक प्रो. जैनेंद्र के. जैन करेंगे, जो एक प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं और उन्हें 'ऑलिवर ई. बकली प्राइज' एवं भौतिकी में 'वुल्फ प्राइज' मिल चुका है । उन्होंने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' नामक उभरते कणों की खोज की। इसका वर्णन करने वाले उनके सिद्धांत ने correlated quantum matter की समझ को बेहद समृद्ध किया है और आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी को आकार देना जारी रखा है। प्रो. जैन ने कहा कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रकृति के प्रति हमारी समझ के केंद्र में है। सैद्धांतिक भौतिकी में प्रगति ने ऐतिहासिक रूप से वैज्ञानिक सोच को आकार दिया है और विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी विकास की नींव रखी है।2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए, भारत को विश्व स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे के साथ मजबूत संस्थानों का निर्माण करना अनिवार्य होगा। LTPI इसी दिशा में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रयास होगा, क्योंकि यह भारत में पूरी तरह से निजी तौर पर वित्त पोषित पहला भौतिकी संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि एक बड़ी शुरुआत के साथ, LTPI 'इमर्जेंट फेनोमेना इन क्वांटम हॉल सिस्टम्स' (EPQHS-10) पर 10वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक की मेजबानी कर रहा है । यह तीन दिवसीय कार्यशाला श्रृंखला दुनिया भर के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की मेजबानी करेगी, जो रोमांचक हालिया खोजों की घोषणा करेंगे और भौतिकी के क्षेत्र में भविष्य की आशाजनक दिशाओं पर चर्चा करेंगे । संस्थान की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में कार्य करते हुए, EPQHS-10 की मेजबानी करना यह दर्शाता है कि LTPI में पहले दिन से ही तैयार किया जा रहा शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र कितना गम्भीर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक और विश्व स्तरीय गुणवत्ता का है। समारोह के दौरान, नोबेल पुरस्कार विजेता और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सॉलिड स्टेट रिसर्च के डायरेक्टर एमेरिटस क्लाउस वॉन क्लिट्जिंग ने 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' (TIFR) के सहयोग से आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में बताया गया कि कैसे "क्वांटम हॉल इफेक्ट" की खोज अत्यधिक परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर बुनियादी, जिज्ञासा-संचालित अनुसंधान से उभरी। और कैसे इस अप्रत्याशित खोज ने अंततः माप मानकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में क्रांति ला दी । इस अवसर पर डॉ मंजू लोढ़ा द्वारा एक विशेष काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई, जो इस प्रकार है:- आज सजा है ज्ञान का मंदिर, आज जली है नई मशाल, जहाँ विज्ञान के पंख लगाकर, सपने छू लेंगे हर आकाश। यह केवल एक मंच नहीं है, यह भविष्य की पहचान है, जहाँ जिज्ञासा बनती शक्ति, और शोधों से बढ़ता मान है। गिरते सेब से प्रेरित होकर, न्यूटन ने ज्ञान जगाया, गति और गुरुत्वाकर्षण का सुंदर नियम समझाया। समय, प्रकाश और ब्रह्मांड का जिसने नया विज्ञान दिया, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सोच को नया आसमान दिया। दूरबीन से नभ को देखा, सत्य की राह अपनाई, गैलीलियो ने नई चेतना जग में लाई। विद्युत की अद्भुत धारा से दुनिया को जिसने सजाया, निकोला टेस्ला ने नवयुग का दीप जलाया। असंख्य प्रयोगों की तपस्या से अंधियारा दूर भगाया, थॉमस एडीसन ने बल्ब का उजियारा लाया। रेडियम की खोज में जिसने जीवन अपना खपा दिया, मैरी क्यूरी ने नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया। ब्लैक होल के गहरे रहस्य दुनिया को समझाने वाले, स्टीफेन हॉकिंग  थे, जिन्होंने हौसलों से जग जीता। भारत माँ भी गर्वित हुई, जब सी वी रमन ने कमाल दिखाया, प्रकाश की किरणों के बदलते रंगों का अद्भुत रहस्य समझाया। ज्ञान और गणित की शक्ति से नया सिद्धांत बनाया,सत्येन्द्र नाथ बोस ने आइंस्टीन संग इतिहास रचाया। परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भारत को जिसने बढ़ाया, होमी जहांगीर भाभा ने विज्ञान का मान बढ़ाया। अंतरिक्ष के सपनों को भी जिसने साकार बनाया, विक्रम साराभाई ने भारत का गौरव बढ़ाया। मिसाइल मैन कहलाकर भी मन से रहे महान, एपीजे अब्दुल कलाम ने युवाओं को दिए ऊँचे अरमान। ये वैज्ञानिक दीप समान हैं, ज्ञान जिनसे जगमगाता है, इनकी मेहनत और खोजों से मानव आगे बढ़ पाता है। विज्ञान हमें यह सिखलाता, हर मुश्किल आसान बने, जिज्ञासा और कर्म के बल पर मानव चाँद समान बने। कभी रसायन की प्रयोगशाला में, तत्वों ने मिलकर रंग भरे, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ने, जीवन के जल के दीप धरे। कार्बन की छोटी सी रचना ने, हीरे जैसा रूप लिया, विज्ञान ने मिट्टी के कण को, सोने से बढ़कर मूल्य दिया।कभी अम्ल और क्षार मिले तो, संतुलन का संदेश मिला, हर क्रिया ने यह सिखलाया संघर्षों से नव जीवन खिला। आज इसी प्रेरणा की धरती पर, ज्ञान के दीप प्रज्वलित होंगे, प्रो. जैनेंद्र जैन की शोधों से, विज्ञान के नये पथ निर्मित होंगे। “कॉम्पोज़िट फर्मियॉन” की खोज ने, दुनिया को नई दिशा दिखाई, वुल्फ प्राइज़ जैसे महान सम्मान ने, भारत की प्रतिभा चमकाई। दूर विदेशी धरती से आए, नोबेल विजेता वैज्ञानिक महान,प्रो. क्लॉस वॉन क्लिट्जिंग ने, बढ़ाया विज्ञान का गौरवमान। “क्वांटम हॉल इफेक्ट” की खोज ने, भौतिकी को नया विस्तार दिया, सूक्ष्म कणों की अद्भुत दुनिया का, मानव को नया आधार दिया। यहाँ सूत्र केवल अक्षर नहीं, हर सूत्र जीवन गाता है, विज्ञान वही है जो मानव को, अज्ञान से ऊपर उठाता है। लोढ़ा फाउंडेशन की प्रेरणा ने, शिक्षा का नव दीप जलाया है, अभिषेक लोढ़ा के संकल्पों ने, हर युवा को आगे बढ़ाया है। मंगल प्रभात लोढ़ा  जैसे, सेवा जिनकी पहचान बनी, समाज और संस्कृति के संग, जनहित की सुंदर शान बनी। आईएएस आशीष सिंह के प्रयासों ने, कर्तव्य का मान बढ़ाया है।