पर्यवेक्षकों ने बैठक कर टटोली संगठन की नब्ज,संगठन सृजन अभियान पर दिया जोर

गोंडा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त किए गए पदाधिकारियों ने जिला कांग्रेस कार्यालय पर प्रेस वार्ता के उपरांत जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की बैठक और  1के बाद एक सभी कार्यकर्ताओं से मिलकर बूथ स्तर तक संगठन सृजन अभियान का संकल्प दोहराया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पूरे देश में संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी संगठन सर्जन अभियान का शुभारंभ 11 अगस्त से शुरू किया गया है संगठन सृजन के लिए एक केंद्रीय एवं तीन प्रदेश आब्जर्वरों कों जिला वार  नियुक्त किया गया है ।
इसी क्रम में जनपद के लिए नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक गुजरात कांग्रेस के मानसिंह डोडिया और प्रदेश के पर्यवेक्षक पूर्व विधायक धीरेंद्र सिंह धीरू पूर्व प्रदेश पदाधिकारी चंद्र प्रकाश और राहुल त्रिपाठी को गोंडा जनपद में संगठन सृजन के लिए नियुक्त किया गया है।
जिला कांग्रेस कार्यालय पर जिला अध्यक्ष पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपरोक्त नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन को तैयार करने की रूपरेखा के साथ ही जिला व शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ ही पदाधिकारियों को जरूरत के अनुसार नई जिम्मेदारी की बात की। बैठक के उपरांत एक-एक कार्यकर्ता से मिलकर वर्तमान नेतृत्व के साथ ही संगठन की गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा कर उनकी राय ली।
कल से प्रत्येक ब्लॉक में जाकर संगठन की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करने की भी बात की इसी क्रम में कल दिनांक 13 अगस्त को वजीरगंज, नवाबगंज, बेलसर, और परसपुर ब्लॉक में जाकर संगठन की स्थिति को धरातल पर देखेंगे।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद मिश्र शहर अध्यक्ष शाहिद अली कुरेशी पूर्व प्रदेश प्रवक्ता बृजेंद्र सिंह ,अरुण सिंह डिंपल, मान सिंह, रघुपति त्रिपाठी पूर्व प्रत्याशी तववाज खान,राम कश्यप, प्रदुमन शुक्ला, सगीर खान, सुभाष पांडे, अरविंद शुक्ला, बासदेव शुक्ला, अवधेश दूबे, अब्दुल रहमान, राजेश सिंह, अब्दुल सलाम , सुरेश गौतम, इरशाद खान, संतोष सिंह, अनिल कुमार, जैनुल आब्दीन खान, अनीस नाना, राम सिंह, वेद प्रकाश सिंह, राकेश सिंह, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव , राज बहादुर सिंह, अब्दुल मुजीब, अब्दुल्ला , पंचम राम, मुन्नीलाल, संत बक्स मिश्रा सहित सैकड़ों कांग्रेस जय उपस्थित रहे।
भदोही पुलिस की महाशिवरात्रि के लिए व्यापक तैयारी:मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर पर्याप्त बल तैनात

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही पुलिस ने श्रावण मास की महाशिवरात्रि के मद्देनजर कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल और क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर चमन सिंह चावड़ा ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

अधिकारियों ने मंगलवार को सेमराधनाथ मंदिर, कोईरौना और गंगा घाट का संयुक्त रूप से भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल को श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, सतर्कता और यातायात व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में स्थित प्रमुख शिव मंदिरों, गंगा घाटों और कांवड़ यात्रा मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए यातायात व्यवस्था को भी व्यवस्थित किया गया है।

संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भदोही पुलिस कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन तथा शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए लगातार भ्रमण और निगरानी कर रही है।
पं0 राम नरेश त्रिपाठी सभागार में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन*
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत मेधावी/टॉपर छात्रओं का हुआ सम्मान।*

सुलतानपुर,मा0 सदस्या उ0 प्र0 राज्य महिला आयोग श्रीमती नीलम प्रभात की अध्यक्षता एवं श्रीमती ऊषा सिंह अध्यक्ष, जिला पंचायत जनपद-सुलतानपुर की सह-अध्यक्षता व जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की उपस्थिति में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत मेधावीं/टापर छात्राओं को सम्मान कार्यक्रम पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम का शुभारम्भ मेधावीं छात्राओं के साथ सदस्या व अध्यक्ष द्वारा सेल्फी प्वाइन्ट पर सेल्फी लेकर किया गया। तदपश्चात हस्ताक्षर अभियान के अन्तर्गत अपने संदेश दिये गये, जिसके पश्चात् मंच पर मॉ सरस्वती की प्रतिमा का माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। जिलाधिकारी द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा गया कि आज के आधुनिक युग में बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल का आपसी तालमेल अत्यंत आवश्यक है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित खेल कूद एवं बेहतर स्वास्थ्य और पोषण हेतु बच्चों के संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। महिला सशक्तिकरण को बढावा देने हेतु सभी को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। समाज में जितने पुरूष काम कर रहें है अगर उतनी ही महिलाऐं काम कर रहीं है तो समाज में बराबरी आपने-आप हो जायेगी और समाज एवं देश का विकास होगा। वर्तमान समय में कॉमन बेल्थगेम में महिला खिलाड़ियों ने अपना परचम लहराया है। उपस्थित छात्राओं को अपने स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। क्योंकि आगे चालकर एनिमिया जैसी बीमारी प्रसवपूर्व व प्रसव उपरान्त हो सकती है इस लिए खान-पान के साथ सभी को योग करना जरूरी हैं। स्वास्थ्य के प्रति बच्चों में बेसिक जानकारी होना जारूरी हैं। जनपद के समस्त कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को एनिमिया के अभियान से जोड़ना चाहिए। उनकों साइंस हेल्थ पर खुलकर बात करनी चाहिए। इसके लिए जन जागरूकता अभियान चलाये जाने की आवश्यकता है। मा0 सदस्या उ0प्र0 राज्य महिला आयोग द्वारा उपस्थित जन समूह को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत शपथ दिलाकर सम्बोधित किया गया कि बालिकाओं को शिक्षा,आत्मनिर्भरता,समानता एवं सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक होना होगा। महिलाओं को समाजिक,आर्थिक, राजनितिक और कानूनी रूप से मजबूत बनाना होगा, जिससे महिलाओं को अपने जीवन से जुडे़ हर फैसले खुद लेने की आजादी और बारबरी का अधिकार मिले, जिससे वह समाज में आत्म विशवास के साथ जी सकें। सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाऐं संचालित है। उसका लाभ लेकर छात्राऐं प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके उज्जवल भविष्य के लिए हमारी सरकार व जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्व हैं। अध्यक्ष, जिला पंचायत द्वारा उपस्थित छात्राओं को सम्बोधित कर, जनपद की मेधावी/टापर छात्राओं व नारी शक्ति को शुभकानमाएं देते हुए कहा गया कि बेटियॉ यदि ठान ले तो अपने दम पर आत्म निर्भर बन सकती हैं। नारी शक्ति को सम्बोधित करते हुए कहा गया कि सशक्त महिला केवल स्वयं का जीवन नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार व समाज को नई दिशा देती हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा डा0 आर0 ए0 वर्मा द्वारा इस विशेष अवसर पर समाज और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने जिले की होन-हार बेटियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान न सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत का प्रतिफल है बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। यदि बेटियों को समान असवर व शिक्षा मिले तो वे हर मुकाम हासिल कर सकती है। आइयें हम सब मिलकर बेटियों को पढ़ायें, उन्हें आगे बढ़ाये और सशक्त भारत के निमार्ण में अपना योगदान दें। जिला प्रोबेशन अधिकारी वी0पी0 वर्मा द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का सफल संचालन किये जाने के उद्देश्य से उपरोक्त कार्यकम का संक्षिप्त परिचय दिया गया एवं महिला कल्याण विभाग से सम्बन्धित समस्त योजनाओं की जानकारी दी गयी। मा0 सदस्या, मा0 अध्यक्ष एवं पूर्व मा0 जिलाध्यक्ष भाजपा द्वारा जनपद-सुलतानपुर में वर्ष 2026 में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली माध्यमिक शिक्षा परिषद उ0प्र0 की राजकीय विद्यालयों की हाई स्कूल एवं इण्टरमीडिएट की मेधावी 10-10 छात्राओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत रू0 5000/- का डेमो चेक, सम्मान-पत्र, एवं उपहार दिया गया। माध्यमिक शिक्षा परिषद उ0प्र0 राजकीय विद्यालय की इण्टर मीडिएट की छात्रा जिसने कक्षा 12 की परीक्षा में 81.20 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त कर जनपद का नाम रोशन किया, जिसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत रू0 20,000/-का डेमो चेक, सम्मान-पत्र, उपहार दे कर भविष्य की शुभकामना देते हुए सम्मानित किया गया, साथ ही सी0बी0एस0सी हाई स्कूल एवं इण्टर मीडिएट एवं आई0सी0एस0सी0 की हाईस्कूल की परीक्षा वर्ष 2026 में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली मेधावी 5-5 छात्राओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत उज्जवल भविष्य की शुभकामना के साथ सम्मान-पत्र, उपहार दिया। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञपान कर कार्यकम को समाप्त किया गया। इस अवसर पर सुश्री नेहा सिंह उपायुक्त उद्योग, श्रीमती विद्या देवी जिला दिव्यागंजन सशक्तिकरण कल्याण अधिकारी, आर0पी0 शुक्ला अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, श्रीमती हंसमती महिला थानाध्यक्ष, श्रीमती पल्लवी सिंह प्रधानाचार्या पी0एम0 श्री केश कुमारी राजकीय बालिका इण्टर, रेखा गुप्ता, जिला मिशन समन्वयक, श्रीमती मनीषी त्रिपाठी कनिष्ठ सहायक, सीता सिंह केन्द्र प्रबंधक, वन स्टाप संेटर, रूपाली सिंह संरक्षण अधिकारी, मिशन वात्सल्य, नीलम वर्मा प्रबंधक/समन्वयक, संतोष पाल श्रीमती सरोज यादव जेण्डर स्पेशलिस्ट, दीपमाला सिंह, पूजा सिंह, रीता मौर्या, खुशबू दूबे, अर्चना पाल, राहुल विश्वकर्मा, विपिन कुमार कश्यप व कार्यालय-जिला प्रोबेशन अधिकारी अन्य स्टाफ के साथ शिक्षक छात्राएं एवं आम जनमानस उपस्थित रहे।
विशेष खगोलीय घटना। 12/13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात आसमान में होगी रोशनी की बौछार।* *दिखाई देगी पर्सीड उल्का वर्षा
*12-13 अगस्त की रात सक्रिय होगा पर्सीड उल्का वर्षा का चरम* ।

जानिए सही समय और सटीक तरीका और संपूर्ण खगोल वैज्ञानिक जानकारियों से ओत प्रोत, उल्काओं के बारे में विशेष आलेख।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 का पूरा महीना ही खगोल प्रेमियों के लिए बड़ा ही मनमोहत खगोलीय दृश्यों से भरा हुआ है क्योंकि भारत में भी दिखाई देंगे तेज और चमकीली उल्का वृष्टि, क्योंकि इस दिन चंद्रमा की रोशनी नहीं डालेगी खलल, अंधेरे आसमान में बेहतर रहेगा नजारा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त के महीने में रात के आकाश में होने वाली सबसे लोकप्रिय खगोलीय घटनाओं में शामिल पर्सीड उल्का वर्षा (Perseid Meteor Shower) इस समय सक्रिय है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो उल्का-वर्षा कैलेंडर के अनुसार पर्सीड उल्का वर्षा 17 जुलाई से 24 अगस्त 2026 तक सक्रिय रहेगी और इसका अधिकतम गतिविधि काल भारतीय समयानुसार लगभग 12/13 अगस्त की दरम्यानी रात विशेषकर आधी रात के बाद और भोर से पहले का समय, भारत में इसे देखने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

*भारत में क्यों खास होगा 2026 का पर्सीड उल्का वर्षा ?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 में पर्सीड उल्का वर्षा के अवलोकन के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलता यह है कि इसका अधिकतम काल अमावस्या के आसपास पड़ रहा है। इसका अर्थ है कि रात के आकाश में चंद्रमा की तेज रोशनी उल्काओं की चमक को दबाने में बड़ी बाधा नहीं बनेगी। इसलिए शहरों से दूर, कम प्रकाश-प्रदूषण वाले स्थानों से इस वर्ष, पर्सीड उल्का वर्षा का अवलोकन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है।

*कितनी उल्का प्रति घंटे दिखाई दे सकती हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 के पर्सीड के लिए लगभग 60 से 100 उल्का प्रति घंटा के आदर्श (ZHR) शीर्षबिंदु प्रति घंटा दर और अमावस्या के कारण अनुकूल परिस्थितियों में दिखाई दे सकती हैं, हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में किसी भी व्यक्ति को हर घंटे 100 उल्काएँ दिखाई देंगी। ZHR (Zenithal Hourly Rate) शीर्षबिंदु प्रति घंटा दर एक मानकीकृत सैद्धांतिक दर है, जो आदर्श अंधेरे आकाश, उपयुक्त रेडिएंट ऊंचाई और अनुकूल पर्यवेक्षण परिस्थितियों में अनुमानित उल्का दर को दर्शाती है। वास्तविक संख्या मौसम, प्रकाश प्रदूषण, क्षितिज की स्थिति, रेडिएंट की ऊंचाई और पर्यवेक्षक की दृष्टि जैसे अनेक कारकों पर निर्भर करती है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यहां एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर समझना जरूरी है कि उल्का वृष्टि मॉडल कैलेंडर के अनुसार अगस्त 2026 के लिए सुरक्षित आदर्श परिस्थितियों में पर्सीड की दर लगभग 100 उल्का प्रति घंटा के आसपास हो सकती है।

*क्या है पर्सीड उल्का वर्षा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्का वर्षा वास्तव में अंतरिक्ष में किसी एक स्थान से निकलने वाली आग की कोई धार नहीं है बल्कि यह पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा करते समय धूमकेतु (109P/Swift-Tuttle) /स्विफ्ट टटल द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और छोटे चट्टानी कणों के प्रवाह से होकर गुजरने के कारण दिखाई देने वाली वार्षिक उल्का वर्षा है,जब ये छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं, तो वायुमंडल के साथ उनकी परस्पर घर्षण क्रिया से उनके आसपास की गैस आयनित और उत्तेजित होती है तथा आकाश में चमकदार प्रकाश-पथ दिखाई देता है। इन्हीं चमकदार घटनाओं को हम उल्का या आम बोलचाल की भाषा में टूटते हुए तारे भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार पर्सीड उल्काओं की औसत प्रवेश गति लगभग 59 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

*कौन है इस पर्सीड उल्का वृष्टि का जनक धूमकेतु।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्का वृष्टि का स्रोत (109P/Swift-Tuttle) /स्विफ्ट टटल धूमकेतु है,इस धूमकेतु की कक्षीय अवधि लगभग 130 वर्ष है। धूमकेतु की सूर्य के आसपास यात्रा के दौरान छोड़े गए कण उसकी कक्षा के आसपास एक मलबा-धारा बनाते हैं। पृथ्वी हर वर्ष जुलाई-अगस्त में इस धारा के क्षेत्र से गुजरती है और इसी कारण पर्सीड उल्का वर्षा दिखाई देती है।

*पर्सीड उल्का वृष्टि का रेडिएंट किस तारामण्डल तारामंडल में होगा।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्काओं का रेडिएंट (Radiant) पर्सियस तारामंडल की दिशा में स्थित दिखाई देता है। रेडिएंट का मतलब होता है उल्का विकीर्णक बिंदु लेकिन केवल कोई भी रेडिएंट वह वास्तविक स्थान नहीं होता है जहां से उल्काएँ निकल रही होती हैं। यह केवल पृथ्वी से देखने पर उनका परिप्रेक्ष्य प्रभाव है। अंतरिक्ष में उल्का-कण लगभग समानांतर पथों पर वायुमंडल की ओर आते हैं, लेकिन दृष्टि-रेखाओं के कारण वे आकाश में एक ही क्षेत्र से आती हुई प्रतीत होती हैं। इसे ही रेडिएंट पॉइंट कहा जाता है।

*भारत में कब और कैसे देखें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में पर्सीड देखने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर के बीच ही रहेगा लेकिन उसके बाद 13 अगस्त की रात से 14 अगस्त की भोर में भी कुछ उल्काएं देख सकते हैं इसलिए भारतीय पर्यवेक्षकों के लिए अधिकतम के आसपास की यह रातें अधिक उपयोगी रहेंगी। *कैसे और आकाश की किस दिशा में देखें।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काओं को देखने के लिए किसी भी विशेष दूरबीन या टेलीस्कोप एवं विनाकुलर आदि आवश्यक उपकरण की भी आवश्यकता नहीं है आपको केवल साधारण आंखों से ही पर्सियस तारामंडल की दिशा में देखने के साथ ही संपूर्ण आकाश का अवलोकन करना होगा और वास्तव में व्यापक आकाश को देखने के लिए नंगी आंखें अधिक उपयोगी होती हैं। इसीलिए किसी खुले और अपेक्षाकृत घने अंधेरे स्थान से आकाश का बड़ा हिस्सा दिखाई देने पर अनुभव बेहतर रहेगा। शहरों में कृत्रिम प्रकाश एवं प्रकाश प्रदूषण के कारण बहुत सी मंद उल्काएँ दिखाई नहीं दे पाएंगी, इसीलिए यह उल्का वृष्टि का विहंगम दृश्य ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा बेहतर परिणाम देगा लेकिन ध्यान रहे कि मौसम साफ़ होना चाहिए।

*सबसे अच्छा समय एवं किस दिशा में होगा पर्सीड उल्का-वर्षा और क्यों पड़ा इसका नाम पर्सिड्स उल्का वर्षा।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार उल्का वृष्टि को देखने के लिए 12–13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में सबसे अच्छा समय भारतीय समयानुसार रात लगभग 12 बजे से सुबह 4:30 बजे तक होगा साथ ही उत्तर-पूर्व दिशा की ओर देखें जहां पर पर्सियस तारामंडल दिखाई देगा,यह उत्तरी आकाश में स्थित है, और यह भी जानना आवश्यक है कि उल्काओं की इस बौछार को पर्सिड्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि आसमान में ये सभी उल्काएं पर्सियस तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं।

*क्या केवल पर्सियस तारामंडल की ओर देखना चाहिए ?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक सामान्य गलतफहमी है। यद्यपि पर्सीड का रेडिएंट पर्सियस तारामण्डल में मौजूद है, लेकिन उल्काएँ आकाश के विभिन्न हिस्सों में दिखाई दे सकती हैं। यदि पर्यवेक्षक केवल रेडिएंट के बिल्कुल पास देखेगा तो उल्काओं की लकीरें अपेक्षाकृत छोटी दिखाई दे सकती हैं। इसलिए खुले आकाश में व्यापक दृष्टि-क्षेत्र रखना अधिक उपयोगी है।

*पर्सीड उल्का चमकीली और तेज उल्काओं के लिए क्यों हैं प्रसिद्ध ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड को दुनिया की सबसे लोकप्रिय वार्षिक उल्का वर्षाओं में गिना जाता है। अमर पाल सिंह के अनुसार इनके उल्का अक्सर तेज और चमकीले होते हैं तथा कुछ उल्काएँ लंबे प्रकाश-पथ भी छोड़ सकती हैं। इसी कारण पर्सीड को सामान्य पर्यवेक्षकों और खगोल प्रेमियों एवं विज्ञान के विद्यार्थियों आदि के लिए आकर्षक उल्का वर्षा माना जाता है। *क्या हर साल गतिविधि बिल्कुल समान रहती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्का वर्षा की गतिविधि वर्ष-दर-वर्ष बदल सकती है। पृथ्वी धूमकेतु द्वारा छोड़े गए मलबे के अलग-अलग घनत्व वाले क्षेत्रों से गुजर सकती है। इसके ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार 2016 में पर्सीड में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी, जिसका संबंध अलग-अलग घने धूल-पथों से गुजरने से था। इसके अलावा 2018, 2020 और 2021 में मुख्य अधिकतम के लगभग 0.7 से 1.5 दिन बाद अतिरिक्त उच्च गतिविधि रिपोर्ट की गई थी। हालांकि 2022 से 2024 के दौरान ऐसी समान गतिविधि नहीं देखी गई। इसलिए 2016 या 2021 जैसी गतिविधि को 2026 में विशेष खगोलीय परिस्थितियों में किसी ख़ास स्थान से दोहराए जाने की संभावना हो भी सकती है। *2026 में खगोल वैज्ञानिकों की नजर क्यों रहेगी?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड केवल मनोरंजन या आकाशीय दृश्य नहीं है बल्कि उल्का बरसातों का अध्ययन खगोल वैज्ञानिकों को धूमकेतुओं द्वारा छोड़े गए पदार्थ, पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष में धूल-कणों के वितरण और पृथ्वी के वायुमंडल के साथ छोटे अंतरिक्षीय कणों की परस्पर क्रिया को समझने में सहायता करता है। उल्का वर्षाओं का व्यवस्थित अवलोकन अंतरिक्ष पर्यावरण के अध्ययन में भी उपयोगी होता है।

*भारत के लिए क्या है ख़ास।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में अगस्त 2026 का पर्सीड प्रदर्शन देखने का सबसे अच्छा अवसर अगस्त की 12/13 की दरम्यानी रात में ही रहेगा और साथ ही थोड़ा सा कम लेकिन दृश्य तौर पर 13/14 की रातों में भी रहेगा। विशेष रूप से आधी रात के बाद से भोर तक का समय व्यावहारिक रूप से बेहतर रहेगा, क्योंकि उस समय पर्सियस का रेडिएंट अधिक ऊंचाई पर पहुंचता है और आकाश का बड़ा हिस्सा उल्का गतिविधि के लिए अनुकूल होता है। वास्तविक संख्या मौसम और स्थानीय प्रकाश प्रदूषण पर निर्भर करेगी। *क्या होती है उल्का-वृष्टि और उल्का पिंड।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सौर मंडल के ग्रहों के बीच के अंतरिक्ष में पत्थर और लोहे एवं अन्य मटेरियल्स युक्त अनगिनत छोटे-बड़े कंकड या कण मौजद होते हैं। ऐसा कोई कण जब तीव्र वेग से पृथ्वी के वायुमंडल में उतरकर क्षण भर के लिए चमक उठता है, तब वह 'उल्का' या 'टूटता तारा' कहलाता है। ये कण  लगभग 70 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से वायुमंडल में उतरते हैं और धरातल से करीब 100 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल के अणु-परमाणुओं के साथ घिसकर उद्दीप्त हो उठते हैं, लेकिन अंतरिक्ष से आने वाले धातु या पत्थर के जो बड़े पिंड पृथ्वी के वायुमंडल को पार करके पृथ्वी के धरातल पर पहुंच जाते हैं वे
'उल्कापिंड' कहलाते हैं।

*कितने प्रकार की होती हैं उल्काएं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काओं के मुख्यतः दो प्रकार हैं, पहला है विरल उल्काएं और दूसरे को उल्का-वृष्टि कहा जाता है,जो उल्काएं एक-दूसरे से स्वतंत्र होती हैं और आकाश में भी लगभग वर्षभर नजर आती हैं, वे विरल उल्काएं कहलाती हैं। भिन्न-भिन्न दिनों और ऋतुओं में इनकी संख्या भी घटती-बढ़ती रहती है। ऐसी उल्काएं मध्यरात्रि के पहले कम और मध्यरात्रि के बाद ज्यादा संख्या में दिखाई देती हैं। शरद ऋतु की अपेक्षा ग्रीष्म में इनकी संख्या कम रहती है। अब अगर हम बात करें दोनों प्रकार की उल्का की तो पाते हैं कि इनका संबंध धूमकेतुओं से है,धूमकेतु धूलिकणों और बर्फ बनी गैसों के पिंड होते हैं। ये लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। जब पृथ्वी किसी धूमकेतु के यात्रापथ से गुजरती है, तब धूमकेतु के वे कण वायुमंडल में उतरकर उल्काओं के रूप में चमक उठते हैं और तब आकश में हमें उल्का-वृष्टि का आकर्षक नजारा दिखाई देता है।

*क्या होता है उल्का विकीर्णक-बिंदु और इसको क्यों  जानना आवश्यक होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर उल्का-वृष्टि को तारों के मानचित्र पर रेखांकित करके उन्हें पीछे की ओर ले जाया जाए, तो पता चलता है कि सभी 'टूटते तारे' आकाश के लगभग एक ही स्थान से निकलते नजर आते आयेंगे,आकाश के उस स्थान या बिंदु को खगोल विज्ञान की भाषा में 'उल्का विकीर्णक-बिंदु' कहते हैं। उल्का-विकीर्णक-बिंदु जिस तारा-मंडल में होता है, उसी का नाम उस उल्का-वृष्टि को दिया जाता है, जैसे अगस्त में होने वाली उल्का वृष्टि को पर्सिड्स उल्का बौछार कहा जाता है क्योंकि नामकरण भी उसी तारामंडल के अनुसार किया जाता है जिस तरफ़ से इनका रेडियंट पॉइंट होता है इसीलिए इसका नाम 'पर्सीयस' (Perseus) तारामंडल के नाम पर रखा गया है क्योंकि ये उल्काएं उसी दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं,लेकिन यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि किसी तारा-मंडल के एक बिंदु से उल्काओं के विकीर्णन का यह नजारा महज एक दृष्टिभ्रम ही होता है। पहली बात तो यही है कि तारे हमसे बहुत-बहुत दूर हैं, परंतु उल्काएं करीब 100-120 किलोमीटर ऊपर ही वायुमंडल में पहुंचकर उद्दीप्त हो उठती हैं। दूसरी बात यह है कि उल्काएं वास्तव में समांतर पथों में ही धरातल की ओर आती हैं, दोनों रेल-पटरियों की तरह। परंतु पटरियों को दूर तक देखने पर वे जैसी एक-दूसरे के साथ मिल जाती हैं, उसी प्रकार हमें आभास होता है कि उल्काओं की वृष्टि भी आकाश के लगभग एक स्थान से हो रही है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि लेकिन खगोल-विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों को प्रकाश प्रदूषण एवं मौसम साफ़ होने पर ख़ास कर के ग्रामीण इलाकों से तो इन उल्का-वृष्टियों को अवश्य ही देखना चाहिए और गिनती भी करनी चाहिए कि एक घंटे में आकाश से कितने 'तारे टूटते हैं'।

*उल्का वृष्टि में पृथ्वी की कक्षा का क्या महत्ब है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्कावृष्टि का संबंध धूमकेतुओं से है। धूमकेतु धूलिकणों और बर्फ बनी गैसों के पिंड होते हैं। ये लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। पृथ्वी जब किसी धूमकेतु की कक्षा से गुजरती है, तो 'उल्कावृष्टि' का भव्य नजारा देखने को मिलता है। उल्काएं-हमारे सौर-मंडल में ग्रह, उपग्रह और धूमकेतुओं के अतिरिक्त ऐसे असंख्य छोटे-बड़े पत्थर और लौह-टुकड़े हैं जो दीर्घवृत्ताकार मार्ग में सूर्य का चक्कर लगाते रहते हैं। इनमें अधिकांश तो मटर के दाने से बड़े नहीं हैं, परंतु कुछ इतने विशाल हैं कि टनों में भी तौले जा सकते हैं, तमाम उल्का प्रतिदिन हमारी पृथ्वी के वायुमंडल में चले आते हैं लेकिन सोचिए यदि हमारी पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो क्या होता। ये सब पृथ्वी के धरातल पर आ टकराते, लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचकर ये उल्का-पत्थर संघर्षण के कारण 'टूटते तारे' की तरह चमक उठते हैं और इनमें अधिकांश पृथ्वी के धरातल पर पहुंचने के पहले ही नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये इतने बडे होते हैं कि वायुमंडल में पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होते और पृथ्वी पर आ टकराते हैं। ऐसे उल्का-पत्थरों से भारी नुकसान होता है। कितने ही उल्का-पत्थर तो हजारों टन वजन के होते हैं। ऐसा ही एक उल्का-पत्थर जून 1908 में साइबेरिया (रूस) में गिरा था। साइबेरिया के इस उल्कापात के फलस्वरूप 70 मील व्यास के घेरे में सब-कुछ जलकर राख हो गया था। जिस जगह पर यह उल्का पत्थर गिरा था, वहां से 50 मील दूर के गांवों में एक भी मकान नहीं बचा था। अनेक वर्ष पूर्व ऐसा ही एक प्रचंड उल्कापात दक्षिण अमेरिका के एरिजोना प्रदेश में हुआ था। आज भी उसका 500 फीट गहरा तथा 4,000 फीट व्यास का खड्डा मौजूद है। ऐसा ही उल्का पिंड हमारे भारत में भी गिर चुका है जिसका नाम लोनार क्रेटर है जिसके कारण काफ़ी बड़ी झील बनी है जोकि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित है या कुछ यूं कहें कि महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील लगभग 50,000 वर्ष पहले अंतरिक्ष से गिरे एक तीव्र गति वाले उल्कापिंड के प्रभाव से बनी थी एवं इसका व्यास लगभग 1.2 किलोमीटर है जोकि आज एक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित है और यह भी जानना आवश्यक है कि यह बेसाल्ट चट्टान में बनी दुनिया की एकमात्र और एक खारी व सोडायुक्त (अल्कलाइन) अनोखी क्रेटर झील भी है।

*सबसे अधिक उल्काएं किस महीने में दिखाई देते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया सबसे अधिक 'टूटते तारे' आपको अगस्त के महीने में दिखाई देंगे। इसका कारण यह है कि इस महीने में पृथ्वी उस पथ को पार करती है जिस पर किसी समय बड़े पुराने जमाने में एक विशाल महा दानव धूमकेतु चला करता था और जहां उसके तमाम टुकड़े अब भी घूमते रहते हैं, इस मार्ग को हम उल्का पथ कहते हैं। किंतु उल्काएं केवल अगस्त में ही नहीं दिखाई देतीं हैं, बल्कि आदर्श परिस्थितियों में किसी भी रात को प्रति घंटे आपको कई उल्काएं दिखाई दे सकती हैं,परंतु 12 अगस्त तथा 16 नवंबर के दिन ये अधिक तादाद में दिखाई देती हैं। जब पृथ्वी किसी उल्का-पथ से गुजरती है तो बड़ी संख्या में ये पृथ्वी के वायुमंडल में घुस आती हैं। ऐसे समय इनकी 'वर्षा' देखने लायक होती है। *क्या होता है उल्का वृष्टि का खगोलीय गणित और कैसे पता चलता है कि कितनी गति से वायुमंडल से टकरायेंगे उल्का।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने समझाया कि मान लीजिए कि कोई उल्का 20 किलो मीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की ओर आ रही है तो पृथ्वी भी प्रति सेकंड 30 किलो मीटर की गति से उसकी ओर जा रही होगी। इसलिए उल्का-प्रस्तर का जो घर्षण पृथ्वी के वायुमंडल से होगा वह 20 + 30= 50 किलो मीटर प्रति सेकंड के हिसाब से होगा। क्योंकि इस प्रकार पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा गति के कारण, जो 30 किलो मीटर प्रति सेकंड की है, उल्काओं की गति और भी अधिक हो जाती है। परंतु जो उल्काएं पृथ्वी की ही दिशा में चलती हैं, वे इतनी वेगवान नहीं मालूम होतीं, क्योंकि उनकी गति में से पृथ्वी की गति घटा देनी पड़ती है।

*क्यों दिखाई देती हैं रंग बिरंगी उल्काएं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काएं (टूटे हुए तारे) रंग-बिरंगी इसलिए दिखाई देती हैं क्योंकि अंतरिक्ष से आने वाली चट्टानें जब तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इससे उनका और हवा का तापमान बढ़ जाता है और चट्टान के अंदर मौजूद विभिन्न तत्वों और हवा की गैसों के वाष्पीकरण से विशिष्ट रंग उत्सर्जित होते हैं,जैसे सोडियम से पीला,मैग्नीशियम से नीला-हरा और आयरन से पीला-सफेद एवं कैल्शियम से बैंगनी रंग और नाइट्रोजन और ऑक्सीजन (वायुमंडल की गैसों के कारण) लाल या नीला रंग चमकता है।


*कितनी तेज़ होगी इस पर्सीड उल्का वर्षा की स्पीड।*

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार पर्सीड 17 जुलाई से 24 अगस्त तक सक्रिय रहेगी हालांकि 12 अगस्त 2026 की रात्रि को अधिकतम होगी जोकि लगभग 59 किमी/सेकंड की गति वाले उल्काओं वाली और 109P/Swift-Tuttle धूमकेतु से उत्पन्न वार्षिक उल्का वर्षा है इसीलिए आप शहर की रोशनी से दूर किसी अति महत्वपूर्ण एवं पूर्णतः सुरक्षित,साफ़ स्वच्छ एवं संपूर्ण सावधानी पूर्वक ही किसी भी अंधेरे स्थान का चयन करें और आसमान में चमकती उल्काओं का अद्भुत नजारा देखें क्योंकि इसको किसी भी प्रकार की टेलिस्कोप्स/ दूरबीनों की कोई भी जरूरत नहीं है , इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि भारत के आसमान में अगस्त की इन रातों में दिखने वाली हर चमकती लकीर केवल ‘टूटता तारा’ नहीं, बल्कि अरबों किलोमीटर दूर से आए अनजाने खगोलीय मेहमानों की तरह ही ब्रह्मांडीय बस्ती के धूमकेतु एवं उनके द्वारा छोड़े हुए पदार्थ का पृथ्वी के वायुमंडल से हुआ एक क्षणिक वैज्ञानिक संवाद होगी जिसे आप देखने के साथ ही अनंत अंतरिक्ष एवं समय के कालजयी पिटारे का ज्ञानार्जन भी कर सकते हैं।
        
स्वतंत्रता दिवस 2026: राज्य के 10 जिलों में मंत्री करेंगे झंडोत्तोलन

रांची। स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के अवसर पर 15 अगस्त को राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में माननीय मंत्रियों द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जारी निर्देश के अनुसार पलामू (डालटनगंज) में माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर एवं माननीय मंत्री श्री दीपक बिरुवा, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गुमला में भी माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गोड्डा में माननीय मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, जामताड़ा में माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, देवघर में माननीय मंत्री श्री हफीजूल हसन, पाकुड़ में माननीय मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, बोकारो में माननीय मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद, गिरिडीह में माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार तथा लोहरदगा में माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की झंडोत्तोलन करेंगी।

विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों एवं वरीय पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित मंत्रियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राज्य सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमामय एवं सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने पर विशेष बल दिया है।

11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त 2026 की भोर तक दिखाई देगा 6 ग्रहों का आकाशीय संरेखण/परेड

12 अगस्त 2026 क्यों है खास? 11 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक मिलेगा ख़ास खगोलीय नजारों का सिलसिला।

जानिए सही समय और तरीका।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार यह अगस्त 2026 खगोल प्रेमियों को बहुत बड़ी एवं कुछ विशेष सौगात लेकर आई है।  खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो सम्पूर्ण अगस्त 2026 का महीना की विशेष होने वाला है लेकिन 12 अगस्त 2026 खगोल-विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। छह ग्रहों का दृश्य संरेखण 11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त की भोर में दिखाई देगा, जबकि 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक पर्सिड उल्का-वर्षा अपने अधिकतम सक्रिय चरण में होगी, और 12 अगस्त 2026 की इसी तारीख को वैश्विक स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा, हालांकि वह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।


*क्या है छह ग्रहों का पूर्व-सूर्योदय दृश्य संरेखण।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त 2026 की भोर में छह ग्रह, शनि, वरुण, अरुण, मंगल, बुध और बृहस्पति, क्रांतिवृत्त के आसपास आकाश में एक विस्तृत पट्टी में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह कोई भौतिक सीधी रेखा नहीं, बल्कि पृथ्वी से दिखाई देने वाला आकाशीय परिप्रेक्ष्य है। इनमें बृहस्पति, शनि और मंगल नग्न आंखों से अपेक्षाकृत आसानी से दिख सकते हैं, जबकि बुध ग्रह को क्षितिज के निकट होने के कारण देखना थोड़ा सा कठिन होगा, लेकिन प्रयास करने पर दिखाई दे सकता है जबकि अरुण और वरुण को अति विशेष (binoculars) विनोकुलर  या अच्छी दूरबीन से ही देखना पड़ेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय संरेखण का भारत में सर्वोत्तम अवलोकन स्थानीय सूर्योदय से लगभग 30 से 60 मिनट पहले, खुले और कम प्रकाश-प्रदूषित स्थान से अच्छा हो सकता है। *क्या होती है ग्रहों की परेड या संरेखण।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रहों की परेड या संरेखण (Planetary Alignment) वह खगोलीय स्थिति है जब सौरमंडल के कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के एक ही हिस्से में एक सीधी रेखा या चाप (Arc) में नजर आते हैं। अंतरिक्ष में ये ग्रह वास्तव में एक सीध में नहीं होते, बल्कि अपनी अलग कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के दृष्टिकोण से एक कतार में दिखते हैं। या कुछ यूं कहें कि प्लैनेट परेड खगोल विज्ञान का औपचारिक तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह लोकप्रिय नाम उस स्थिति के लिए प्रयोग किया जाता है जब पृथ्वी से देखने पर कई ग्रह क्रांतिवृत्तीय पट्टी के आसपास एक साथ दिखाई देते हैं। ग्रह अंतरिक्ष में भौतिक रूप से एक सीधी रेखा नहीं बनाते, लेकिन कतार जैसा दृश्य पृथ्वी के दृष्टिकोण और सौरमंडल के लगभग समतलीय कक्षीय विन्यास के कारण दिखाई देता है।

*ग्रहों की परेड के कितने प्रकार होते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सामान्य बोलचाल की भाषा में ग्रहों की परेड या संरेखण चार प्रकार की होती हैं,जैसे कि-
1.मिनी संरेखण (Mini)- जब 3 ग्रह एक साथ दिखाई देते हैं तो इसे मिनी संरेखण कहा जाता है।
2.छोटा संरेखण (Small)- जब 4 ग्रह एक कतार में आते हैं तो इसको छोटा संरेखण कहा जाता है।
3.बड़ा संरेखण (Large)- जब 5 या 6 ग्रह एक साथ दिखते हैं तब इसे बड़ा संरेखण कहा जाता है।
और 12 अगस्त 2026 को यही बड़ा संरेखण घटित होने जा रहा है इसीलिए देखना न भूलें।
4.महान संरेखण (Great)- जब सौरमंडल के लगभग सभी मुख्य ग्रह (8 ग्रह) एक साथ एक ही दिशा में नजर आते हैं तब एक महान संरेखण घटित होता है जोकि एक बहुत ही बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक होती है एवं ऐसा संरेखण अत्यंत ही ज्यादा दुर्लभ संरेखण होता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक आभासी दृश्य होता है जिसे प्लैनेटरी अलाइनमेंट भी कहा जाता है और यह अंतरिक्ष में कोई भौतिक रेखा नहीं बनाता, बल्कि यह पृथ्वी के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य का परिणाम होता है, इसके दौरान नग्न आंखों से दिखाई देने वाले ग्रहों की दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि हमारे सौर मण्डल के पांच ग्रहों को साधारण आँखों से देखा जा सकता है जैसे कि उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि बृहस्पति, शुक्र, बुध, मंगल और शनि ग्रह जैसे चमकीले ग्रह बिना किसी दूरबीन के केवल थोड़ा सा नियमित प्रयास करने भर से आसानी से देखे एवं पहचाने जा सकते हैं, जबकि यूरेनस और नेप्च्यून के लिए किसी विशेष अच्छी दूरबीन की जरूरत होती ही है। *कब और कितने बजे से दिखाई देना शुरू होगा इस परेड/संरेखण में कौन कौन सा ग्रह।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त की भोर में बुध ग्रह लगभग 04:28 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा और सूर्योदय तक दिखाई देगा, इस दौरान बुध ग्रह कर्क तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा एवं इसका मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 0.89 होगा जो थोड़ी मेहनत करने एवं खोजने पर इसको साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर में ही बृहस्पति ग्रह भी लगभग 4:50 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा एवं सूर्योदय तक दिखाई देगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह भी कर्क तारामंडल क्षेत्र में ही स्थिति होगा एवं इसका दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.63 होगा, जो इसे साधारण आंखों से आसानी से देखने योग्य बनायेगा। और अब बात करें शनि ग्रह की तो पाते हैं कि शनि ग्रह 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 9:30 (PM) बजे पूर्वी क्षितिज पर मीन तारामंडल क्षेत्र के साथ ही ऊपर आना शुरू करेगा और  पूरी रात भर अपने दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.58 की चमक साथ लिए हुए 12 अगस्त 2026 की भोर/सूर्योदय तक दिखाई देगा, इसे भी साधारण आंखों से ही देखा जा सकता है, अब अगर हम बात करें हमारे सौर मण्डल के लाल ग्रह की तो हम पाते हैं कि मंगल ग्रह 11 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि के बाद लगभग 1:50 (AM) पर पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा इस दौरान मंगल ग्रह,वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.29 के क़रीब होगा जो इसे साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर सुबह तक दिखाई देगा,अगर अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सातवें ग्रह अरुण ग्रह की तो पाते हैं कि 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 12 बजकर 15 मिनट (AM) बजे यह पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और इस दौरान यह वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 5.74 के क़रीब होगा जो इसको किसी साधारण विनोकुलर एवं दूरबीन से भी देखना मुश्किल बनायेगा इसीलिए इसको देखने के लिए आपको किसी विशेष विनाकुलर एवं अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी ही क्योंकि यह साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है। और अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सबसे ज्यादा दूर के ग्रह वरुण ग्रह की तो पाते हैं कि वरुण ग्रह 11 अगस्त 2026 की रात्रि में लगभग 9:00 (PM) IST से पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और पूरी रात भर आकाश में रहते हुए 12 अगस्त 2026 की भोर तक बना रहेगा एवं इस दौरान यह मीन तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 7.83 होगा, इसीलिए वरुण ग्रह को इतने अधिक मैग्नीट्यूड के कारण,साधारण आंखों से देखना हमेशा ही नामुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव ही है। इसीलिए इसको देखने के लिए साफ़ मौसम एवं पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण से दूर होते हुए आपको किसी विशेष अच्छी दूरबीन की आवश्यकता होगी। तभी वरुण ग्रह को देखा जा सकता है अन्यथा नहीं। *आसानी से कैसे देखें यह ग्रहीय संरेखण।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय सलाह देते हुए बताया कि सबसे पहले पूर्वी क्षितिज को देखें, यहीं पर बृहस्पति और बुध सूर्योदय के समय से कुछ पहले दिखाई देंगे और मंगल ग्रह को देखने के लिए और ऊपर देखें एवं शनि ग्रह को खोजने के लिए आकाश में क्रांतिवृत्त का अनुसरण करें क्योंकि इस दौरान यह सभी ग्रह उत्तरी गोलार्ध में यह दक्षिण-पश्चिम की ओर जाते हुए दिखाई देंगे, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए कहा है कि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए किसी सटीक स्काई चार्ट या उच्च आकाश मानचित्र के साथ ही किसी अच्छी एवं विशेष  टेलीस्कोप/ दूरबीन का उपयोग करें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ये ग्रह आकाश के एक बड़े हिस्से में दिखाई देंगे, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहाँ से खुला और विस्तृत दृश्य दिखाई दे। पूर्वी क्षितिज सबसे महत्वपूर्ण है और सूर्योदय से ठीक पहले बुध और बृहस्पति बहुत नीचे दिखाई देंगे, और उन्हें देखने का समय भी सीमित ही होगा इसलिए साथ ही यह भी विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि दृश्य संयोजन के सामने,प्रकाश प्रदूषण, आंधी, पानी, बरसात, तूफ़ान, या अन्य आकस्मिक स्थितियों या इमारतें, पेड़, पहाड़ियाँ या धुंध आकाश के उस हिस्से को कहीं ढक न लें, अगर दृश्य संयोजन के दौरान ऐसा कुछ भी विघ्न उत्पन्न होता है तो इन ग्रहों को देखना मुश्किल हो सकता है,इसीलिए पूर्व दिशा की ओर स्पष्ट दृश्य वाले खुले मैदान, समुद्र तट, पहाड़ियों की चोटियाँ, छतें और बालकनियाँ जैसी जगहों पर पूर्ण सावधानीपूर्वक रहते हुए अवलोकन के लिए अच्छी जगहें हो सकती हैं, साथ ही सूर्योदय की दिशा के निकट पेड़ों, इमारतों, पहाड़ियों या धुंध एवं प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से पूर्णतः बचें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरबीन/टेलीस्कोप या ज़ूम लेंस को बिना अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स के कभी भी सूर्य के सीधे सामने न रखें, यह भी जानना आवश्यक है कि यदि 12 अगस्त 2026 की भोर में आसमान में बादल छाए हों, तो उससे पहले या बाद की भोर सुबह में भी इन ग्रहों को देखने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि यह ग्रहीय अलाइनमेंट थोड़ा दूर एवं इधर उधर होते हुए भी आप देख सकते हैं।

*12 अगस्त 2026 को और क्या ख़ास है*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी तारीख के आसपास दो अन्य प्रमुख खगोलीय घटनाएँ भी घटित होंगी। जो इस प्रकार हैं।

1.बर्ष भर की सबसे ज्यादा मशहूर एवं बहुप्रतीक्षित  उल्का वर्षाओंं में से प्रमुख जिसे पर्सिड उल्का वृष्टि भी कहा जाता है,उसी पर्सिड उल्का वर्षा का चरम समय भी 12-13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में देखना सबसे अच्छा होगा।

2.12 अगस्त, 2026 को दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण भी घटित होने वाला है लेकिन अफ़सोस कि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, यह सूर्य ग्रहण केवल दुनियां के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों से ही पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं आंशिक सूर्य ग्रहण आदि के रूप में दिखाई देगा।
मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा जतरा को दिखाई हरी झंडी, 10 हजार कलाकार हुए शामिल*

राँची। झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग श्री कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त, श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग, श्री राजीव लोचन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, श्रीमती मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

बिना आवाज़ किये ही बार बार चमकती हुई बिजली का वैज्ञानिक कारण

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यदि बादलों में लगभग 20 से 100 किमी या उससे भी अधिक दूरी पर बिज़ली गिर रही है, तो उसकी चमक और प्रकाश आपको दिखाई देता रहता है क्योंकि प्रकाश बहुत तेज़ गति (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड) से चलता है,लेकिन गरज की आवाज़ ध्वनि है, जो केवल लगभग 343 मीटर/सेकंड (20°C पर) की गति से चलती है, इतनी दूरी तय करते-करते ध्वनि की ऊर्जा कम हो जाती है, इसलिए आवाज़ बहुत हल्की सुनाई देती है या बिल्कुल नहीं भी सुनाई दे सकती है साथ ही बादलों के अंदर होने वाली बिजली जिसको विज्ञान की भाषा में Intra-cloud Lightning कहा जाता है।
कई बार बिजली बादलों के अंदर ही चमकती है और जमीन तक नहीं पहुँचती। ऐसी बिजली बार-बार चमकती है लेकिन उसकी गरज अपेक्षाकृत कम सुनाई देती है, ख़ासकर के यदि बादल दूर हों एवं इसमें वातावरण का प्रभाव भी प्रभावी होता हैं जैसे कि यदि
तापमान, आर्द्रता (Humidity), हवा की दिशा और वायुमंडल की विभिन्न परतें ध्वनि को मोड़ (Refraction) सकती हैं या कमजोर कर सकती हैं। इसलिए कभी-कभी चमक तो स्पष्ट दिखती है लेकिन गरज बहुत कम सुनाई देती है और दूर की बिजली की चमक बार बार दिखाई देती है और
लोग अक्सर इसे Heat Lightning कहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह कोई अलग प्रकार की बिजली नहीं है। अधिकांश मामलों में यह केवल दूर स्थित आंधी-तूफान की बिजली होती है, जिसकी चमक तो दिखती है लेकिन गरज आपके पास तक नहीं पहुँच पाती है साथ ही इसका मतलब  यह भी है कि आपके यहां बारिश हो यह भी ज़रूरी नहीं होता है लेकिन यदि बिजली लगातार एक ही दिशा में है और तूफान उसी क्षेत्र में बना हुआ है, तो संभव है कि बारिश वहीं हो रही हो और आपके स्थान तक न पहुँचे, लेकिन यदि तूफान आपकी ओर बढ़ रहा है, तब कुछ समय बाद बारिश और तेज़ गरज भी हो सकती है या कुछ यूं कहें कि यदि आपको लगातार एक ही दिशा में बिजली दिखाई दे रही है और गरज बहुत कम सुनाई दे रही है, तो इसका सबसे संभावित वैज्ञानिक कारण यह है कि तूफान आपसे काफी दूर है और बिजली बादलों के भीतर या दूर के क्षेत्र में चमक रही है। प्रकाश आपके पास तुरंत पहुँच जाता है, जबकि ध्वनि दूरी के कारण कमजोर पड़ जाती है या सुनाई नहीं देती। *बिजली का चमकना कैसे होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बादलों में जमा विद्युत आवेश अचानक प्रवाहित होने पर तेज प्रकाश निकलता है,इसी को सामान्य बोलचाल की भाषा बिजली चमकना भी कहते हैं।

*बिजली गिरना कैसे होता है?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब धनात्मक और ऋणात्मक क्षेत्रों के बीच वोल्टेज इतना अधिक हो जाता है कि हवा का इन्सुलेशन टूट जाता है (Air Breakdown), तब हवा आयनित (Ionized) होकर चालक बन जाती है। इसके बाद अचानक बहुत बड़ा विद्युत प्रवाह (Current) बहता है। यही Lightning Discharge (बिजली) है। *गरज (Thunder) क्यों होती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बिजली के प्लाज़्मा का तापमान लगभग 30,000 K (सूर्य की सतह से भी अधिक) तक पहुँच सकता है।
इतने अधिक तापमान से आसपास की हवा कुछ माइक्रोसेकंड में अत्यधिक फैलती है। यही तीव्र प्रसार आघात तरंग (Shock Wave) बनाता है, जिसे हम गरज (Thunder) के रूप में सुनते हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में शुक्रवार को सत्र 2026-28 में नवप्रवेशित छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके उपरांत उन्होंने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं से परिचय प्राप्त किया। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष (तृतीय सेमेस्टर) के छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थी अनुशासित, नियमित एवं समर्पित होकर अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक के रूप में आप सभी पर समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माता भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संयम, अनुशासन एवं सतत अध्ययन के माध्यम से अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन किशन मिश्र ने किया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. नीरज यादव, डॉ. लोहंस कुमार कल्याणी, डॉ. चमन कौर, श्री राजेन्द्र मिश्र, श्रीमती प्रतिभा सिंह, डॉ. दीपा गुप्ता एवं श्री अमरजीत वर्मा सहित बी.एड. के छात्राध्यापक-छात्राध्यापिकाएँ प्रखर जैन, अभितोष, खुशी यादव, अक्षय त्रिपाठी, विपिन मौर्य, आस्था तिवारी, वैदेही, प्रिया आर्या, अर्चना भास्कर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मोजुद थे ।
श्रावण मास,श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी,मणिपर्वत (श्रावण झूला)मेला एवं रक्षाबंधन के दृष्टिगत जनपद गोण्डा में विशेष यातायात डायवर्जन व्यवस्था लागू
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श्रावण मास-2026 के दौरान श्रावण सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला एवं रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या धाम एवं आसपास के जनपदों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एवं वाहनों के दबाव को देखते हुए जनपद गोण्डा में विशेष यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।

*निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय श्रावण सोमवार एवं श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर 08 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 12 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे तक, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला, तृतीय श्रावण सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर 14 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 17 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक, चतुर्थ/अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर 23 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 24 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक तथा श्रावण पूर्णिमा स्नान, रक्षाबंधन एवं मेला समापन के अवसर पर 27 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 28 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक विशेष डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी।*

*प्रमुख डायवर्जन व्यवस्था*

*रूट-ए:*
लखनऊ से बाराबंकी एवं गोण्डा होते हुए गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले समस्त वाहनों को दर्जीकुआँ (थाना कोतवाली देहात) से डायवर्ट कर झिलाही रेलवे क्रॉसिंग-मनकापुर-उतरौला मार्ग-डुमरियागंज होते हुए गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*रूट-बी:*
लखनऊ से गोण्डा होकर गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले वाहनों को दर्जीकुआँ से डायवर्ट कर मोतीगंज- मनकापुर-मसकनवा-बभनान मार्ग से गंतव्य के लिए भेजा जाएगा।

*रूट-सी:*
गोण्डा शहर में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों को धानेपुर-उतरौला मार्ग से डायवर्ट कर बेवा चौराहा/डुमरियागंज के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं*

• अयोध्या प्रशासन के निर्देशानुसार लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले भारी वाहनों को सामान्यतः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करना होगा। पर्वों के दौरान लखनऊ-बाराबंकी-रामनगर (महादेवा मंदिर) मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

• बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती एवं गोण्डा से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को जरवल रोड-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग से भेजा जाएगा।

• गोण्डा से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों का संचालन श्रावण सोमवार एवं पर्वों के दौरान जरवल रोड-बाराबंकी मार्ग पर प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को हुजूरपुर मोड़-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा।

• आवश्यकता पड़ने पर उतरौला एवं बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को जानकीनगर पुलिस चौकी (थाना इटियाथोक) से डायवर्ट कर आर्यनगर-कटरा बाजार-कर्नलगंज मार्ग से भेजा जाएगा।

•कर्नलगंज-परसपुर-तरबगंज-नवाबगंज मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

• गोण्डा शहर से जरवल रोड होकर बाराबंकी-लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को हुजूरपुर मोड़ से डायवर्ट किया जाएगा।

• कर्नलगंज, परसपुर एवं तरबगंज से नवाबगंज आने वाले भारी वाहनों को कटी तिराहा से मनकापुर की ओर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य चारपहिया वाहन टिकरी मोड़-कोल्हमपुर-लोलपुर मार्ग से संचालित होंगे।

• कटी तिराहा से अयोध्या की ओर केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

• लकड़मण्डी तिराहा से नया घाट पुल (अयोध्या) तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी।

• लोलपुर से नवाबगंज जाने वाले वाहनों को कोल्हमपुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को लकड़मण्डी-नवाबगंज मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा।

*जनसामान्य से अपील*

जनपद पुलिस द्वारा समस्त वाहन चालकों एवं आमजन से अपील की जाती है कि निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं यातायात पुलिस के निर्देशों का अनुपालन करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा सहयोग एवं संयम बनाए रखते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें। जनसहयोग से ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखना संभव हो
पर्यवेक्षकों ने बैठक कर टटोली संगठन की नब्ज,संगठन सृजन अभियान पर दिया जोर

गोंडा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त किए गए पदाधिकारियों ने जिला कांग्रेस कार्यालय पर प्रेस वार्ता के उपरांत जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की बैठक और  1के बाद एक सभी कार्यकर्ताओं से मिलकर बूथ स्तर तक संगठन सृजन अभियान का संकल्प दोहराया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पूरे देश में संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी संगठन सर्जन अभियान का शुभारंभ 11 अगस्त से शुरू किया गया है संगठन सृजन के लिए एक केंद्रीय एवं तीन प्रदेश आब्जर्वरों कों जिला वार  नियुक्त किया गया है ।
इसी क्रम में जनपद के लिए नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक गुजरात कांग्रेस के मानसिंह डोडिया और प्रदेश के पर्यवेक्षक पूर्व विधायक धीरेंद्र सिंह धीरू पूर्व प्रदेश पदाधिकारी चंद्र प्रकाश और राहुल त्रिपाठी को गोंडा जनपद में संगठन सृजन के लिए नियुक्त किया गया है।
जिला कांग्रेस कार्यालय पर जिला अध्यक्ष पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपरोक्त नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन को तैयार करने की रूपरेखा के साथ ही जिला व शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ ही पदाधिकारियों को जरूरत के अनुसार नई जिम्मेदारी की बात की। बैठक के उपरांत एक-एक कार्यकर्ता से मिलकर वर्तमान नेतृत्व के साथ ही संगठन की गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा कर उनकी राय ली।
कल से प्रत्येक ब्लॉक में जाकर संगठन की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करने की भी बात की इसी क्रम में कल दिनांक 13 अगस्त को वजीरगंज, नवाबगंज, बेलसर, और परसपुर ब्लॉक में जाकर संगठन की स्थिति को धरातल पर देखेंगे।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद मिश्र शहर अध्यक्ष शाहिद अली कुरेशी पूर्व प्रदेश प्रवक्ता बृजेंद्र सिंह ,अरुण सिंह डिंपल, मान सिंह, रघुपति त्रिपाठी पूर्व प्रत्याशी तववाज खान,राम कश्यप, प्रदुमन शुक्ला, सगीर खान, सुभाष पांडे, अरविंद शुक्ला, बासदेव शुक्ला, अवधेश दूबे, अब्दुल रहमान, राजेश सिंह, अब्दुल सलाम , सुरेश गौतम, इरशाद खान, संतोष सिंह, अनिल कुमार, जैनुल आब्दीन खान, अनीस नाना, राम सिंह, वेद प्रकाश सिंह, राकेश सिंह, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव , राज बहादुर सिंह, अब्दुल मुजीब, अब्दुल्ला , पंचम राम, मुन्नीलाल, संत बक्स मिश्रा सहित सैकड़ों कांग्रेस जय उपस्थित रहे।
भदोही पुलिस की महाशिवरात्रि के लिए व्यापक तैयारी:मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर पर्याप्त बल तैनात

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही पुलिस ने श्रावण मास की महाशिवरात्रि के मद्देनजर कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल और क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर चमन सिंह चावड़ा ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

अधिकारियों ने मंगलवार को सेमराधनाथ मंदिर, कोईरौना और गंगा घाट का संयुक्त रूप से भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल को श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, सतर्कता और यातायात व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में स्थित प्रमुख शिव मंदिरों, गंगा घाटों और कांवड़ यात्रा मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए यातायात व्यवस्था को भी व्यवस्थित किया गया है।

संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भदोही पुलिस कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन तथा शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए लगातार भ्रमण और निगरानी कर रही है।
पं0 राम नरेश त्रिपाठी सभागार में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन*
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत मेधावी/टॉपर छात्रओं का हुआ सम्मान।*

सुलतानपुर,मा0 सदस्या उ0 प्र0 राज्य महिला आयोग श्रीमती नीलम प्रभात की अध्यक्षता एवं श्रीमती ऊषा सिंह अध्यक्ष, जिला पंचायत जनपद-सुलतानपुर की सह-अध्यक्षता व जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की उपस्थिति में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत मेधावीं/टापर छात्राओं को सम्मान कार्यक्रम पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम का शुभारम्भ मेधावीं छात्राओं के साथ सदस्या व अध्यक्ष द्वारा सेल्फी प्वाइन्ट पर सेल्फी लेकर किया गया। तदपश्चात हस्ताक्षर अभियान के अन्तर्गत अपने संदेश दिये गये, जिसके पश्चात् मंच पर मॉ सरस्वती की प्रतिमा का माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। जिलाधिकारी द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा गया कि आज के आधुनिक युग में बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल का आपसी तालमेल अत्यंत आवश्यक है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित खेल कूद एवं बेहतर स्वास्थ्य और पोषण हेतु बच्चों के संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। महिला सशक्तिकरण को बढावा देने हेतु सभी को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। समाज में जितने पुरूष काम कर रहें है अगर उतनी ही महिलाऐं काम कर रहीं है तो समाज में बराबरी आपने-आप हो जायेगी और समाज एवं देश का विकास होगा। वर्तमान समय में कॉमन बेल्थगेम में महिला खिलाड़ियों ने अपना परचम लहराया है। उपस्थित छात्राओं को अपने स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। क्योंकि आगे चालकर एनिमिया जैसी बीमारी प्रसवपूर्व व प्रसव उपरान्त हो सकती है इस लिए खान-पान के साथ सभी को योग करना जरूरी हैं। स्वास्थ्य के प्रति बच्चों में बेसिक जानकारी होना जारूरी हैं। जनपद के समस्त कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को एनिमिया के अभियान से जोड़ना चाहिए। उनकों साइंस हेल्थ पर खुलकर बात करनी चाहिए। इसके लिए जन जागरूकता अभियान चलाये जाने की आवश्यकता है। मा0 सदस्या उ0प्र0 राज्य महिला आयोग द्वारा उपस्थित जन समूह को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत शपथ दिलाकर सम्बोधित किया गया कि बालिकाओं को शिक्षा,आत्मनिर्भरता,समानता एवं सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक होना होगा। महिलाओं को समाजिक,आर्थिक, राजनितिक और कानूनी रूप से मजबूत बनाना होगा, जिससे महिलाओं को अपने जीवन से जुडे़ हर फैसले खुद लेने की आजादी और बारबरी का अधिकार मिले, जिससे वह समाज में आत्म विशवास के साथ जी सकें। सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाऐं संचालित है। उसका लाभ लेकर छात्राऐं प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके उज्जवल भविष्य के लिए हमारी सरकार व जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्व हैं। अध्यक्ष, जिला पंचायत द्वारा उपस्थित छात्राओं को सम्बोधित कर, जनपद की मेधावी/टापर छात्राओं व नारी शक्ति को शुभकानमाएं देते हुए कहा गया कि बेटियॉ यदि ठान ले तो अपने दम पर आत्म निर्भर बन सकती हैं। नारी शक्ति को सम्बोधित करते हुए कहा गया कि सशक्त महिला केवल स्वयं का जीवन नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार व समाज को नई दिशा देती हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा डा0 आर0 ए0 वर्मा द्वारा इस विशेष अवसर पर समाज और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने जिले की होन-हार बेटियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान न सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत का प्रतिफल है बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। यदि बेटियों को समान असवर व शिक्षा मिले तो वे हर मुकाम हासिल कर सकती है। आइयें हम सब मिलकर बेटियों को पढ़ायें, उन्हें आगे बढ़ाये और सशक्त भारत के निमार्ण में अपना योगदान दें। जिला प्रोबेशन अधिकारी वी0पी0 वर्मा द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का सफल संचालन किये जाने के उद्देश्य से उपरोक्त कार्यकम का संक्षिप्त परिचय दिया गया एवं महिला कल्याण विभाग से सम्बन्धित समस्त योजनाओं की जानकारी दी गयी। मा0 सदस्या, मा0 अध्यक्ष एवं पूर्व मा0 जिलाध्यक्ष भाजपा द्वारा जनपद-सुलतानपुर में वर्ष 2026 में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली माध्यमिक शिक्षा परिषद उ0प्र0 की राजकीय विद्यालयों की हाई स्कूल एवं इण्टरमीडिएट की मेधावी 10-10 छात्राओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत रू0 5000/- का डेमो चेक, सम्मान-पत्र, एवं उपहार दिया गया। माध्यमिक शिक्षा परिषद उ0प्र0 राजकीय विद्यालय की इण्टर मीडिएट की छात्रा जिसने कक्षा 12 की परीक्षा में 81.20 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त कर जनपद का नाम रोशन किया, जिसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत रू0 20,000/-का डेमो चेक, सम्मान-पत्र, उपहार दे कर भविष्य की शुभकामना देते हुए सम्मानित किया गया, साथ ही सी0बी0एस0सी हाई स्कूल एवं इण्टर मीडिएट एवं आई0सी0एस0सी0 की हाईस्कूल की परीक्षा वर्ष 2026 में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली मेधावी 5-5 छात्राओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत उज्जवल भविष्य की शुभकामना के साथ सम्मान-पत्र, उपहार दिया। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञपान कर कार्यकम को समाप्त किया गया। इस अवसर पर सुश्री नेहा सिंह उपायुक्त उद्योग, श्रीमती विद्या देवी जिला दिव्यागंजन सशक्तिकरण कल्याण अधिकारी, आर0पी0 शुक्ला अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, श्रीमती हंसमती महिला थानाध्यक्ष, श्रीमती पल्लवी सिंह प्रधानाचार्या पी0एम0 श्री केश कुमारी राजकीय बालिका इण्टर, रेखा गुप्ता, जिला मिशन समन्वयक, श्रीमती मनीषी त्रिपाठी कनिष्ठ सहायक, सीता सिंह केन्द्र प्रबंधक, वन स्टाप संेटर, रूपाली सिंह संरक्षण अधिकारी, मिशन वात्सल्य, नीलम वर्मा प्रबंधक/समन्वयक, संतोष पाल श्रीमती सरोज यादव जेण्डर स्पेशलिस्ट, दीपमाला सिंह, पूजा सिंह, रीता मौर्या, खुशबू दूबे, अर्चना पाल, राहुल विश्वकर्मा, विपिन कुमार कश्यप व कार्यालय-जिला प्रोबेशन अधिकारी अन्य स्टाफ के साथ शिक्षक छात्राएं एवं आम जनमानस उपस्थित रहे।
विशेष खगोलीय घटना। 12/13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात आसमान में होगी रोशनी की बौछार।* *दिखाई देगी पर्सीड उल्का वर्षा
*12-13 अगस्त की रात सक्रिय होगा पर्सीड उल्का वर्षा का चरम* ।

जानिए सही समय और सटीक तरीका और संपूर्ण खगोल वैज्ञानिक जानकारियों से ओत प्रोत, उल्काओं के बारे में विशेष आलेख।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 का पूरा महीना ही खगोल प्रेमियों के लिए बड़ा ही मनमोहत खगोलीय दृश्यों से भरा हुआ है क्योंकि भारत में भी दिखाई देंगे तेज और चमकीली उल्का वृष्टि, क्योंकि इस दिन चंद्रमा की रोशनी नहीं डालेगी खलल, अंधेरे आसमान में बेहतर रहेगा नजारा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त के महीने में रात के आकाश में होने वाली सबसे लोकप्रिय खगोलीय घटनाओं में शामिल पर्सीड उल्का वर्षा (Perseid Meteor Shower) इस समय सक्रिय है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो उल्का-वर्षा कैलेंडर के अनुसार पर्सीड उल्का वर्षा 17 जुलाई से 24 अगस्त 2026 तक सक्रिय रहेगी और इसका अधिकतम गतिविधि काल भारतीय समयानुसार लगभग 12/13 अगस्त की दरम्यानी रात विशेषकर आधी रात के बाद और भोर से पहले का समय, भारत में इसे देखने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

*भारत में क्यों खास होगा 2026 का पर्सीड उल्का वर्षा ?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 में पर्सीड उल्का वर्षा के अवलोकन के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलता यह है कि इसका अधिकतम काल अमावस्या के आसपास पड़ रहा है। इसका अर्थ है कि रात के आकाश में चंद्रमा की तेज रोशनी उल्काओं की चमक को दबाने में बड़ी बाधा नहीं बनेगी। इसलिए शहरों से दूर, कम प्रकाश-प्रदूषण वाले स्थानों से इस वर्ष, पर्सीड उल्का वर्षा का अवलोकन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है।

*कितनी उल्का प्रति घंटे दिखाई दे सकती हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगस्त 2026 के पर्सीड के लिए लगभग 60 से 100 उल्का प्रति घंटा के आदर्श (ZHR) शीर्षबिंदु प्रति घंटा दर और अमावस्या के कारण अनुकूल परिस्थितियों में दिखाई दे सकती हैं, हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में किसी भी व्यक्ति को हर घंटे 100 उल्काएँ दिखाई देंगी। ZHR (Zenithal Hourly Rate) शीर्षबिंदु प्रति घंटा दर एक मानकीकृत सैद्धांतिक दर है, जो आदर्श अंधेरे आकाश, उपयुक्त रेडिएंट ऊंचाई और अनुकूल पर्यवेक्षण परिस्थितियों में अनुमानित उल्का दर को दर्शाती है। वास्तविक संख्या मौसम, प्रकाश प्रदूषण, क्षितिज की स्थिति, रेडिएंट की ऊंचाई और पर्यवेक्षक की दृष्टि जैसे अनेक कारकों पर निर्भर करती है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यहां एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर समझना जरूरी है कि उल्का वृष्टि मॉडल कैलेंडर के अनुसार अगस्त 2026 के लिए सुरक्षित आदर्श परिस्थितियों में पर्सीड की दर लगभग 100 उल्का प्रति घंटा के आसपास हो सकती है।

*क्या है पर्सीड उल्का वर्षा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्का वर्षा वास्तव में अंतरिक्ष में किसी एक स्थान से निकलने वाली आग की कोई धार नहीं है बल्कि यह पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा करते समय धूमकेतु (109P/Swift-Tuttle) /स्विफ्ट टटल द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और छोटे चट्टानी कणों के प्रवाह से होकर गुजरने के कारण दिखाई देने वाली वार्षिक उल्का वर्षा है,जब ये छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं, तो वायुमंडल के साथ उनकी परस्पर घर्षण क्रिया से उनके आसपास की गैस आयनित और उत्तेजित होती है तथा आकाश में चमकदार प्रकाश-पथ दिखाई देता है। इन्हीं चमकदार घटनाओं को हम उल्का या आम बोलचाल की भाषा में टूटते हुए तारे भी कहते हैं। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार पर्सीड उल्काओं की औसत प्रवेश गति लगभग 59 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

*कौन है इस पर्सीड उल्का वृष्टि का जनक धूमकेतु।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्का वृष्टि का स्रोत (109P/Swift-Tuttle) /स्विफ्ट टटल धूमकेतु है,इस धूमकेतु की कक्षीय अवधि लगभग 130 वर्ष है। धूमकेतु की सूर्य के आसपास यात्रा के दौरान छोड़े गए कण उसकी कक्षा के आसपास एक मलबा-धारा बनाते हैं। पृथ्वी हर वर्ष जुलाई-अगस्त में इस धारा के क्षेत्र से गुजरती है और इसी कारण पर्सीड उल्का वर्षा दिखाई देती है।

*पर्सीड उल्का वृष्टि का रेडिएंट किस तारामण्डल तारामंडल में होगा।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड उल्काओं का रेडिएंट (Radiant) पर्सियस तारामंडल की दिशा में स्थित दिखाई देता है। रेडिएंट का मतलब होता है उल्का विकीर्णक बिंदु लेकिन केवल कोई भी रेडिएंट वह वास्तविक स्थान नहीं होता है जहां से उल्काएँ निकल रही होती हैं। यह केवल पृथ्वी से देखने पर उनका परिप्रेक्ष्य प्रभाव है। अंतरिक्ष में उल्का-कण लगभग समानांतर पथों पर वायुमंडल की ओर आते हैं, लेकिन दृष्टि-रेखाओं के कारण वे आकाश में एक ही क्षेत्र से आती हुई प्रतीत होती हैं। इसे ही रेडिएंट पॉइंट कहा जाता है।

*भारत में कब और कैसे देखें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में पर्सीड देखने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर के बीच ही रहेगा लेकिन उसके बाद 13 अगस्त की रात से 14 अगस्त की भोर में भी कुछ उल्काएं देख सकते हैं इसलिए भारतीय पर्यवेक्षकों के लिए अधिकतम के आसपास की यह रातें अधिक उपयोगी रहेंगी। *कैसे और आकाश की किस दिशा में देखें।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काओं को देखने के लिए किसी भी विशेष दूरबीन या टेलीस्कोप एवं विनाकुलर आदि आवश्यक उपकरण की भी आवश्यकता नहीं है आपको केवल साधारण आंखों से ही पर्सियस तारामंडल की दिशा में देखने के साथ ही संपूर्ण आकाश का अवलोकन करना होगा और वास्तव में व्यापक आकाश को देखने के लिए नंगी आंखें अधिक उपयोगी होती हैं। इसीलिए किसी खुले और अपेक्षाकृत घने अंधेरे स्थान से आकाश का बड़ा हिस्सा दिखाई देने पर अनुभव बेहतर रहेगा। शहरों में कृत्रिम प्रकाश एवं प्रकाश प्रदूषण के कारण बहुत सी मंद उल्काएँ दिखाई नहीं दे पाएंगी, इसीलिए यह उल्का वृष्टि का विहंगम दृश्य ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा बेहतर परिणाम देगा लेकिन ध्यान रहे कि मौसम साफ़ होना चाहिए।

*सबसे अच्छा समय एवं किस दिशा में होगा पर्सीड उल्का-वर्षा और क्यों पड़ा इसका नाम पर्सिड्स उल्का वर्षा।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार उल्का वृष्टि को देखने के लिए 12–13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में सबसे अच्छा समय भारतीय समयानुसार रात लगभग 12 बजे से सुबह 4:30 बजे तक होगा साथ ही उत्तर-पूर्व दिशा की ओर देखें जहां पर पर्सियस तारामंडल दिखाई देगा,यह उत्तरी आकाश में स्थित है, और यह भी जानना आवश्यक है कि उल्काओं की इस बौछार को पर्सिड्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि आसमान में ये सभी उल्काएं पर्सियस तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं।

*क्या केवल पर्सियस तारामंडल की ओर देखना चाहिए ?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक सामान्य गलतफहमी है। यद्यपि पर्सीड का रेडिएंट पर्सियस तारामण्डल में मौजूद है, लेकिन उल्काएँ आकाश के विभिन्न हिस्सों में दिखाई दे सकती हैं। यदि पर्यवेक्षक केवल रेडिएंट के बिल्कुल पास देखेगा तो उल्काओं की लकीरें अपेक्षाकृत छोटी दिखाई दे सकती हैं। इसलिए खुले आकाश में व्यापक दृष्टि-क्षेत्र रखना अधिक उपयोगी है।

*पर्सीड उल्का चमकीली और तेज उल्काओं के लिए क्यों हैं प्रसिद्ध ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड को दुनिया की सबसे लोकप्रिय वार्षिक उल्का वर्षाओं में गिना जाता है। अमर पाल सिंह के अनुसार इनके उल्का अक्सर तेज और चमकीले होते हैं तथा कुछ उल्काएँ लंबे प्रकाश-पथ भी छोड़ सकती हैं। इसी कारण पर्सीड को सामान्य पर्यवेक्षकों और खगोल प्रेमियों एवं विज्ञान के विद्यार्थियों आदि के लिए आकर्षक उल्का वर्षा माना जाता है। *क्या हर साल गतिविधि बिल्कुल समान रहती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्का वर्षा की गतिविधि वर्ष-दर-वर्ष बदल सकती है। पृथ्वी धूमकेतु द्वारा छोड़े गए मलबे के अलग-अलग घनत्व वाले क्षेत्रों से गुजर सकती है। इसके ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार 2016 में पर्सीड में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी, जिसका संबंध अलग-अलग घने धूल-पथों से गुजरने से था। इसके अलावा 2018, 2020 और 2021 में मुख्य अधिकतम के लगभग 0.7 से 1.5 दिन बाद अतिरिक्त उच्च गतिविधि रिपोर्ट की गई थी। हालांकि 2022 से 2024 के दौरान ऐसी समान गतिविधि नहीं देखी गई। इसलिए 2016 या 2021 जैसी गतिविधि को 2026 में विशेष खगोलीय परिस्थितियों में किसी ख़ास स्थान से दोहराए जाने की संभावना हो भी सकती है। *2026 में खगोल वैज्ञानिकों की नजर क्यों रहेगी?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पर्सीड केवल मनोरंजन या आकाशीय दृश्य नहीं है बल्कि उल्का बरसातों का अध्ययन खगोल वैज्ञानिकों को धूमकेतुओं द्वारा छोड़े गए पदार्थ, पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष में धूल-कणों के वितरण और पृथ्वी के वायुमंडल के साथ छोटे अंतरिक्षीय कणों की परस्पर क्रिया को समझने में सहायता करता है। उल्का वर्षाओं का व्यवस्थित अवलोकन अंतरिक्ष पर्यावरण के अध्ययन में भी उपयोगी होता है।

*भारत के लिए क्या है ख़ास।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में अगस्त 2026 का पर्सीड प्रदर्शन देखने का सबसे अच्छा अवसर अगस्त की 12/13 की दरम्यानी रात में ही रहेगा और साथ ही थोड़ा सा कम लेकिन दृश्य तौर पर 13/14 की रातों में भी रहेगा। विशेष रूप से आधी रात के बाद से भोर तक का समय व्यावहारिक रूप से बेहतर रहेगा, क्योंकि उस समय पर्सियस का रेडिएंट अधिक ऊंचाई पर पहुंचता है और आकाश का बड़ा हिस्सा उल्का गतिविधि के लिए अनुकूल होता है। वास्तविक संख्या मौसम और स्थानीय प्रकाश प्रदूषण पर निर्भर करेगी। *क्या होती है उल्का-वृष्टि और उल्का पिंड।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सौर मंडल के ग्रहों के बीच के अंतरिक्ष में पत्थर और लोहे एवं अन्य मटेरियल्स युक्त अनगिनत छोटे-बड़े कंकड या कण मौजद होते हैं। ऐसा कोई कण जब तीव्र वेग से पृथ्वी के वायुमंडल में उतरकर क्षण भर के लिए चमक उठता है, तब वह 'उल्का' या 'टूटता तारा' कहलाता है। ये कण  लगभग 70 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से वायुमंडल में उतरते हैं और धरातल से करीब 100 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल के अणु-परमाणुओं के साथ घिसकर उद्दीप्त हो उठते हैं, लेकिन अंतरिक्ष से आने वाले धातु या पत्थर के जो बड़े पिंड पृथ्वी के वायुमंडल को पार करके पृथ्वी के धरातल पर पहुंच जाते हैं वे
'उल्कापिंड' कहलाते हैं।

*कितने प्रकार की होती हैं उल्काएं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काओं के मुख्यतः दो प्रकार हैं, पहला है विरल उल्काएं और दूसरे को उल्का-वृष्टि कहा जाता है,जो उल्काएं एक-दूसरे से स्वतंत्र होती हैं और आकाश में भी लगभग वर्षभर नजर आती हैं, वे विरल उल्काएं कहलाती हैं। भिन्न-भिन्न दिनों और ऋतुओं में इनकी संख्या भी घटती-बढ़ती रहती है। ऐसी उल्काएं मध्यरात्रि के पहले कम और मध्यरात्रि के बाद ज्यादा संख्या में दिखाई देती हैं। शरद ऋतु की अपेक्षा ग्रीष्म में इनकी संख्या कम रहती है। अब अगर हम बात करें दोनों प्रकार की उल्का की तो पाते हैं कि इनका संबंध धूमकेतुओं से है,धूमकेतु धूलिकणों और बर्फ बनी गैसों के पिंड होते हैं। ये लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। जब पृथ्वी किसी धूमकेतु के यात्रापथ से गुजरती है, तब धूमकेतु के वे कण वायुमंडल में उतरकर उल्काओं के रूप में चमक उठते हैं और तब आकश में हमें उल्का-वृष्टि का आकर्षक नजारा दिखाई देता है।

*क्या होता है उल्का विकीर्णक-बिंदु और इसको क्यों  जानना आवश्यक होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर उल्का-वृष्टि को तारों के मानचित्र पर रेखांकित करके उन्हें पीछे की ओर ले जाया जाए, तो पता चलता है कि सभी 'टूटते तारे' आकाश के लगभग एक ही स्थान से निकलते नजर आते आयेंगे,आकाश के उस स्थान या बिंदु को खगोल विज्ञान की भाषा में 'उल्का विकीर्णक-बिंदु' कहते हैं। उल्का-विकीर्णक-बिंदु जिस तारा-मंडल में होता है, उसी का नाम उस उल्का-वृष्टि को दिया जाता है, जैसे अगस्त में होने वाली उल्का वृष्टि को पर्सिड्स उल्का बौछार कहा जाता है क्योंकि नामकरण भी उसी तारामंडल के अनुसार किया जाता है जिस तरफ़ से इनका रेडियंट पॉइंट होता है इसीलिए इसका नाम 'पर्सीयस' (Perseus) तारामंडल के नाम पर रखा गया है क्योंकि ये उल्काएं उसी दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं,लेकिन यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि किसी तारा-मंडल के एक बिंदु से उल्काओं के विकीर्णन का यह नजारा महज एक दृष्टिभ्रम ही होता है। पहली बात तो यही है कि तारे हमसे बहुत-बहुत दूर हैं, परंतु उल्काएं करीब 100-120 किलोमीटर ऊपर ही वायुमंडल में पहुंचकर उद्दीप्त हो उठती हैं। दूसरी बात यह है कि उल्काएं वास्तव में समांतर पथों में ही धरातल की ओर आती हैं, दोनों रेल-पटरियों की तरह। परंतु पटरियों को दूर तक देखने पर वे जैसी एक-दूसरे के साथ मिल जाती हैं, उसी प्रकार हमें आभास होता है कि उल्काओं की वृष्टि भी आकाश के लगभग एक स्थान से हो रही है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि लेकिन खगोल-विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों को प्रकाश प्रदूषण एवं मौसम साफ़ होने पर ख़ास कर के ग्रामीण इलाकों से तो इन उल्का-वृष्टियों को अवश्य ही देखना चाहिए और गिनती भी करनी चाहिए कि एक घंटे में आकाश से कितने 'तारे टूटते हैं'।

*उल्का वृष्टि में पृथ्वी की कक्षा का क्या महत्ब है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्कावृष्टि का संबंध धूमकेतुओं से है। धूमकेतु धूलिकणों और बर्फ बनी गैसों के पिंड होते हैं। ये लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनसे निकले हुए कण इनकी कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं। पृथ्वी जब किसी धूमकेतु की कक्षा से गुजरती है, तो 'उल्कावृष्टि' का भव्य नजारा देखने को मिलता है। उल्काएं-हमारे सौर-मंडल में ग्रह, उपग्रह और धूमकेतुओं के अतिरिक्त ऐसे असंख्य छोटे-बड़े पत्थर और लौह-टुकड़े हैं जो दीर्घवृत्ताकार मार्ग में सूर्य का चक्कर लगाते रहते हैं। इनमें अधिकांश तो मटर के दाने से बड़े नहीं हैं, परंतु कुछ इतने विशाल हैं कि टनों में भी तौले जा सकते हैं, तमाम उल्का प्रतिदिन हमारी पृथ्वी के वायुमंडल में चले आते हैं लेकिन सोचिए यदि हमारी पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो क्या होता। ये सब पृथ्वी के धरातल पर आ टकराते, लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचकर ये उल्का-पत्थर संघर्षण के कारण 'टूटते तारे' की तरह चमक उठते हैं और इनमें अधिकांश पृथ्वी के धरातल पर पहुंचने के पहले ही नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये इतने बडे होते हैं कि वायुमंडल में पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होते और पृथ्वी पर आ टकराते हैं। ऐसे उल्का-पत्थरों से भारी नुकसान होता है। कितने ही उल्का-पत्थर तो हजारों टन वजन के होते हैं। ऐसा ही एक उल्का-पत्थर जून 1908 में साइबेरिया (रूस) में गिरा था। साइबेरिया के इस उल्कापात के फलस्वरूप 70 मील व्यास के घेरे में सब-कुछ जलकर राख हो गया था। जिस जगह पर यह उल्का पत्थर गिरा था, वहां से 50 मील दूर के गांवों में एक भी मकान नहीं बचा था। अनेक वर्ष पूर्व ऐसा ही एक प्रचंड उल्कापात दक्षिण अमेरिका के एरिजोना प्रदेश में हुआ था। आज भी उसका 500 फीट गहरा तथा 4,000 फीट व्यास का खड्डा मौजूद है। ऐसा ही उल्का पिंड हमारे भारत में भी गिर चुका है जिसका नाम लोनार क्रेटर है जिसके कारण काफ़ी बड़ी झील बनी है जोकि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित है या कुछ यूं कहें कि महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील लगभग 50,000 वर्ष पहले अंतरिक्ष से गिरे एक तीव्र गति वाले उल्कापिंड के प्रभाव से बनी थी एवं इसका व्यास लगभग 1.2 किलोमीटर है जोकि आज एक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित है और यह भी जानना आवश्यक है कि यह बेसाल्ट चट्टान में बनी दुनिया की एकमात्र और एक खारी व सोडायुक्त (अल्कलाइन) अनोखी क्रेटर झील भी है।

*सबसे अधिक उल्काएं किस महीने में दिखाई देते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया सबसे अधिक 'टूटते तारे' आपको अगस्त के महीने में दिखाई देंगे। इसका कारण यह है कि इस महीने में पृथ्वी उस पथ को पार करती है जिस पर किसी समय बड़े पुराने जमाने में एक विशाल महा दानव धूमकेतु चला करता था और जहां उसके तमाम टुकड़े अब भी घूमते रहते हैं, इस मार्ग को हम उल्का पथ कहते हैं। किंतु उल्काएं केवल अगस्त में ही नहीं दिखाई देतीं हैं, बल्कि आदर्श परिस्थितियों में किसी भी रात को प्रति घंटे आपको कई उल्काएं दिखाई दे सकती हैं,परंतु 12 अगस्त तथा 16 नवंबर के दिन ये अधिक तादाद में दिखाई देती हैं। जब पृथ्वी किसी उल्का-पथ से गुजरती है तो बड़ी संख्या में ये पृथ्वी के वायुमंडल में घुस आती हैं। ऐसे समय इनकी 'वर्षा' देखने लायक होती है। *क्या होता है उल्का वृष्टि का खगोलीय गणित और कैसे पता चलता है कि कितनी गति से वायुमंडल से टकरायेंगे उल्का।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने समझाया कि मान लीजिए कि कोई उल्का 20 किलो मीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की ओर आ रही है तो पृथ्वी भी प्रति सेकंड 30 किलो मीटर की गति से उसकी ओर जा रही होगी। इसलिए उल्का-प्रस्तर का जो घर्षण पृथ्वी के वायुमंडल से होगा वह 20 + 30= 50 किलो मीटर प्रति सेकंड के हिसाब से होगा। क्योंकि इस प्रकार पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा गति के कारण, जो 30 किलो मीटर प्रति सेकंड की है, उल्काओं की गति और भी अधिक हो जाती है। परंतु जो उल्काएं पृथ्वी की ही दिशा में चलती हैं, वे इतनी वेगवान नहीं मालूम होतीं, क्योंकि उनकी गति में से पृथ्वी की गति घटा देनी पड़ती है।

*क्यों दिखाई देती हैं रंग बिरंगी उल्काएं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उल्काएं (टूटे हुए तारे) रंग-बिरंगी इसलिए दिखाई देती हैं क्योंकि अंतरिक्ष से आने वाली चट्टानें जब तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इससे उनका और हवा का तापमान बढ़ जाता है और चट्टान के अंदर मौजूद विभिन्न तत्वों और हवा की गैसों के वाष्पीकरण से विशिष्ट रंग उत्सर्जित होते हैं,जैसे सोडियम से पीला,मैग्नीशियम से नीला-हरा और आयरन से पीला-सफेद एवं कैल्शियम से बैंगनी रंग और नाइट्रोजन और ऑक्सीजन (वायुमंडल की गैसों के कारण) लाल या नीला रंग चमकता है।


*कितनी तेज़ होगी इस पर्सीड उल्का वर्षा की स्पीड।*

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार पर्सीड 17 जुलाई से 24 अगस्त तक सक्रिय रहेगी हालांकि 12 अगस्त 2026 की रात्रि को अधिकतम होगी जोकि लगभग 59 किमी/सेकंड की गति वाले उल्काओं वाली और 109P/Swift-Tuttle धूमकेतु से उत्पन्न वार्षिक उल्का वर्षा है इसीलिए आप शहर की रोशनी से दूर किसी अति महत्वपूर्ण एवं पूर्णतः सुरक्षित,साफ़ स्वच्छ एवं संपूर्ण सावधानी पूर्वक ही किसी भी अंधेरे स्थान का चयन करें और आसमान में चमकती उल्काओं का अद्भुत नजारा देखें क्योंकि इसको किसी भी प्रकार की टेलिस्कोप्स/ दूरबीनों की कोई भी जरूरत नहीं है , इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि भारत के आसमान में अगस्त की इन रातों में दिखने वाली हर चमकती लकीर केवल ‘टूटता तारा’ नहीं, बल्कि अरबों किलोमीटर दूर से आए अनजाने खगोलीय मेहमानों की तरह ही ब्रह्मांडीय बस्ती के धूमकेतु एवं उनके द्वारा छोड़े हुए पदार्थ का पृथ्वी के वायुमंडल से हुआ एक क्षणिक वैज्ञानिक संवाद होगी जिसे आप देखने के साथ ही अनंत अंतरिक्ष एवं समय के कालजयी पिटारे का ज्ञानार्जन भी कर सकते हैं।
        
स्वतंत्रता दिवस 2026: राज्य के 10 जिलों में मंत्री करेंगे झंडोत्तोलन

रांची। स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के अवसर पर 15 अगस्त को राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में माननीय मंत्रियों द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जारी निर्देश के अनुसार पलामू (डालटनगंज) में माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर एवं माननीय मंत्री श्री दीपक बिरुवा, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गुमला में भी माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गोड्डा में माननीय मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, जामताड़ा में माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, देवघर में माननीय मंत्री श्री हफीजूल हसन, पाकुड़ में माननीय मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, बोकारो में माननीय मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद, गिरिडीह में माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार तथा लोहरदगा में माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की झंडोत्तोलन करेंगी।

विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों एवं वरीय पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित मंत्रियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राज्य सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमामय एवं सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने पर विशेष बल दिया है।

11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त 2026 की भोर तक दिखाई देगा 6 ग्रहों का आकाशीय संरेखण/परेड

12 अगस्त 2026 क्यों है खास? 11 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक मिलेगा ख़ास खगोलीय नजारों का सिलसिला।

जानिए सही समय और तरीका।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार यह अगस्त 2026 खगोल प्रेमियों को बहुत बड़ी एवं कुछ विशेष सौगात लेकर आई है।  खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो सम्पूर्ण अगस्त 2026 का महीना की विशेष होने वाला है लेकिन 12 अगस्त 2026 खगोल-विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। छह ग्रहों का दृश्य संरेखण 11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त की भोर में दिखाई देगा, जबकि 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक पर्सिड उल्का-वर्षा अपने अधिकतम सक्रिय चरण में होगी, और 12 अगस्त 2026 की इसी तारीख को वैश्विक स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा, हालांकि वह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।


*क्या है छह ग्रहों का पूर्व-सूर्योदय दृश्य संरेखण।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त 2026 की भोर में छह ग्रह, शनि, वरुण, अरुण, मंगल, बुध और बृहस्पति, क्रांतिवृत्त के आसपास आकाश में एक विस्तृत पट्टी में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह कोई भौतिक सीधी रेखा नहीं, बल्कि पृथ्वी से दिखाई देने वाला आकाशीय परिप्रेक्ष्य है। इनमें बृहस्पति, शनि और मंगल नग्न आंखों से अपेक्षाकृत आसानी से दिख सकते हैं, जबकि बुध ग्रह को क्षितिज के निकट होने के कारण देखना थोड़ा सा कठिन होगा, लेकिन प्रयास करने पर दिखाई दे सकता है जबकि अरुण और वरुण को अति विशेष (binoculars) विनोकुलर  या अच्छी दूरबीन से ही देखना पड़ेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय संरेखण का भारत में सर्वोत्तम अवलोकन स्थानीय सूर्योदय से लगभग 30 से 60 मिनट पहले, खुले और कम प्रकाश-प्रदूषित स्थान से अच्छा हो सकता है। *क्या होती है ग्रहों की परेड या संरेखण।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रहों की परेड या संरेखण (Planetary Alignment) वह खगोलीय स्थिति है जब सौरमंडल के कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के एक ही हिस्से में एक सीधी रेखा या चाप (Arc) में नजर आते हैं। अंतरिक्ष में ये ग्रह वास्तव में एक सीध में नहीं होते, बल्कि अपनी अलग कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के दृष्टिकोण से एक कतार में दिखते हैं। या कुछ यूं कहें कि प्लैनेट परेड खगोल विज्ञान का औपचारिक तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह लोकप्रिय नाम उस स्थिति के लिए प्रयोग किया जाता है जब पृथ्वी से देखने पर कई ग्रह क्रांतिवृत्तीय पट्टी के आसपास एक साथ दिखाई देते हैं। ग्रह अंतरिक्ष में भौतिक रूप से एक सीधी रेखा नहीं बनाते, लेकिन कतार जैसा दृश्य पृथ्वी के दृष्टिकोण और सौरमंडल के लगभग समतलीय कक्षीय विन्यास के कारण दिखाई देता है।

*ग्रहों की परेड के कितने प्रकार होते हैं।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सामान्य बोलचाल की भाषा में ग्रहों की परेड या संरेखण चार प्रकार की होती हैं,जैसे कि-
1.मिनी संरेखण (Mini)- जब 3 ग्रह एक साथ दिखाई देते हैं तो इसे मिनी संरेखण कहा जाता है।
2.छोटा संरेखण (Small)- जब 4 ग्रह एक कतार में आते हैं तो इसको छोटा संरेखण कहा जाता है।
3.बड़ा संरेखण (Large)- जब 5 या 6 ग्रह एक साथ दिखते हैं तब इसे बड़ा संरेखण कहा जाता है।
और 12 अगस्त 2026 को यही बड़ा संरेखण घटित होने जा रहा है इसीलिए देखना न भूलें।
4.महान संरेखण (Great)- जब सौरमंडल के लगभग सभी मुख्य ग्रह (8 ग्रह) एक साथ एक ही दिशा में नजर आते हैं तब एक महान संरेखण घटित होता है जोकि एक बहुत ही बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक होती है एवं ऐसा संरेखण अत्यंत ही ज्यादा दुर्लभ संरेखण होता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक आभासी दृश्य होता है जिसे प्लैनेटरी अलाइनमेंट भी कहा जाता है और यह अंतरिक्ष में कोई भौतिक रेखा नहीं बनाता, बल्कि यह पृथ्वी के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य का परिणाम होता है, इसके दौरान नग्न आंखों से दिखाई देने वाले ग्रहों की दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि हमारे सौर मण्डल के पांच ग्रहों को साधारण आँखों से देखा जा सकता है जैसे कि उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि बृहस्पति, शुक्र, बुध, मंगल और शनि ग्रह जैसे चमकीले ग्रह बिना किसी दूरबीन के केवल थोड़ा सा नियमित प्रयास करने भर से आसानी से देखे एवं पहचाने जा सकते हैं, जबकि यूरेनस और नेप्च्यून के लिए किसी विशेष अच्छी दूरबीन की जरूरत होती ही है। *कब और कितने बजे से दिखाई देना शुरू होगा इस परेड/संरेखण में कौन कौन सा ग्रह।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त की भोर में बुध ग्रह लगभग 04:28 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा और सूर्योदय तक दिखाई देगा, इस दौरान बुध ग्रह कर्क तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा एवं इसका मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 0.89 होगा जो थोड़ी मेहनत करने एवं खोजने पर इसको साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर में ही बृहस्पति ग्रह भी लगभग 4:50 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा एवं सूर्योदय तक दिखाई देगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह भी कर्क तारामंडल क्षेत्र में ही स्थिति होगा एवं इसका दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.63 होगा, जो इसे साधारण आंखों से आसानी से देखने योग्य बनायेगा। और अब बात करें शनि ग्रह की तो पाते हैं कि शनि ग्रह 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 9:30 (PM) बजे पूर्वी क्षितिज पर मीन तारामंडल क्षेत्र के साथ ही ऊपर आना शुरू करेगा और  पूरी रात भर अपने दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.58 की चमक साथ लिए हुए 12 अगस्त 2026 की भोर/सूर्योदय तक दिखाई देगा, इसे भी साधारण आंखों से ही देखा जा सकता है, अब अगर हम बात करें हमारे सौर मण्डल के लाल ग्रह की तो हम पाते हैं कि मंगल ग्रह 11 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि के बाद लगभग 1:50 (AM) पर पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा इस दौरान मंगल ग्रह,वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.29 के क़रीब होगा जो इसे साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर सुबह तक दिखाई देगा,अगर अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सातवें ग्रह अरुण ग्रह की तो पाते हैं कि 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 12 बजकर 15 मिनट (AM) बजे यह पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और इस दौरान यह वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 5.74 के क़रीब होगा जो इसको किसी साधारण विनोकुलर एवं दूरबीन से भी देखना मुश्किल बनायेगा इसीलिए इसको देखने के लिए आपको किसी विशेष विनाकुलर एवं अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी ही क्योंकि यह साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है। और अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सबसे ज्यादा दूर के ग्रह वरुण ग्रह की तो पाते हैं कि वरुण ग्रह 11 अगस्त 2026 की रात्रि में लगभग 9:00 (PM) IST से पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और पूरी रात भर आकाश में रहते हुए 12 अगस्त 2026 की भोर तक बना रहेगा एवं इस दौरान यह मीन तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 7.83 होगा, इसीलिए वरुण ग्रह को इतने अधिक मैग्नीट्यूड के कारण,साधारण आंखों से देखना हमेशा ही नामुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव ही है। इसीलिए इसको देखने के लिए साफ़ मौसम एवं पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण से दूर होते हुए आपको किसी विशेष अच्छी दूरबीन की आवश्यकता होगी। तभी वरुण ग्रह को देखा जा सकता है अन्यथा नहीं। *आसानी से कैसे देखें यह ग्रहीय संरेखण।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय सलाह देते हुए बताया कि सबसे पहले पूर्वी क्षितिज को देखें, यहीं पर बृहस्पति और बुध सूर्योदय के समय से कुछ पहले दिखाई देंगे और मंगल ग्रह को देखने के लिए और ऊपर देखें एवं शनि ग्रह को खोजने के लिए आकाश में क्रांतिवृत्त का अनुसरण करें क्योंकि इस दौरान यह सभी ग्रह उत्तरी गोलार्ध में यह दक्षिण-पश्चिम की ओर जाते हुए दिखाई देंगे, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए कहा है कि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए किसी सटीक स्काई चार्ट या उच्च आकाश मानचित्र के साथ ही किसी अच्छी एवं विशेष  टेलीस्कोप/ दूरबीन का उपयोग करें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ये ग्रह आकाश के एक बड़े हिस्से में दिखाई देंगे, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहाँ से खुला और विस्तृत दृश्य दिखाई दे। पूर्वी क्षितिज सबसे महत्वपूर्ण है और सूर्योदय से ठीक पहले बुध और बृहस्पति बहुत नीचे दिखाई देंगे, और उन्हें देखने का समय भी सीमित ही होगा इसलिए साथ ही यह भी विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि दृश्य संयोजन के सामने,प्रकाश प्रदूषण, आंधी, पानी, बरसात, तूफ़ान, या अन्य आकस्मिक स्थितियों या इमारतें, पेड़, पहाड़ियाँ या धुंध आकाश के उस हिस्से को कहीं ढक न लें, अगर दृश्य संयोजन के दौरान ऐसा कुछ भी विघ्न उत्पन्न होता है तो इन ग्रहों को देखना मुश्किल हो सकता है,इसीलिए पूर्व दिशा की ओर स्पष्ट दृश्य वाले खुले मैदान, समुद्र तट, पहाड़ियों की चोटियाँ, छतें और बालकनियाँ जैसी जगहों पर पूर्ण सावधानीपूर्वक रहते हुए अवलोकन के लिए अच्छी जगहें हो सकती हैं, साथ ही सूर्योदय की दिशा के निकट पेड़ों, इमारतों, पहाड़ियों या धुंध एवं प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से पूर्णतः बचें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरबीन/टेलीस्कोप या ज़ूम लेंस को बिना अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स के कभी भी सूर्य के सीधे सामने न रखें, यह भी जानना आवश्यक है कि यदि 12 अगस्त 2026 की भोर में आसमान में बादल छाए हों, तो उससे पहले या बाद की भोर सुबह में भी इन ग्रहों को देखने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि यह ग्रहीय अलाइनमेंट थोड़ा दूर एवं इधर उधर होते हुए भी आप देख सकते हैं।

*12 अगस्त 2026 को और क्या ख़ास है*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी तारीख के आसपास दो अन्य प्रमुख खगोलीय घटनाएँ भी घटित होंगी। जो इस प्रकार हैं।

1.बर्ष भर की सबसे ज्यादा मशहूर एवं बहुप्रतीक्षित  उल्का वर्षाओंं में से प्रमुख जिसे पर्सिड उल्का वृष्टि भी कहा जाता है,उसी पर्सिड उल्का वर्षा का चरम समय भी 12-13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में देखना सबसे अच्छा होगा।

2.12 अगस्त, 2026 को दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण भी घटित होने वाला है लेकिन अफ़सोस कि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, यह सूर्य ग्रहण केवल दुनियां के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों से ही पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं आंशिक सूर्य ग्रहण आदि के रूप में दिखाई देगा।
मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा जतरा को दिखाई हरी झंडी, 10 हजार कलाकार हुए शामिल*

राँची। झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग श्री कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त, श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग, श्री राजीव लोचन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, श्रीमती मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

बिना आवाज़ किये ही बार बार चमकती हुई बिजली का वैज्ञानिक कारण

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यदि बादलों में लगभग 20 से 100 किमी या उससे भी अधिक दूरी पर बिज़ली गिर रही है, तो उसकी चमक और प्रकाश आपको दिखाई देता रहता है क्योंकि प्रकाश बहुत तेज़ गति (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड) से चलता है,लेकिन गरज की आवाज़ ध्वनि है, जो केवल लगभग 343 मीटर/सेकंड (20°C पर) की गति से चलती है, इतनी दूरी तय करते-करते ध्वनि की ऊर्जा कम हो जाती है, इसलिए आवाज़ बहुत हल्की सुनाई देती है या बिल्कुल नहीं भी सुनाई दे सकती है साथ ही बादलों के अंदर होने वाली बिजली जिसको विज्ञान की भाषा में Intra-cloud Lightning कहा जाता है।
कई बार बिजली बादलों के अंदर ही चमकती है और जमीन तक नहीं पहुँचती। ऐसी बिजली बार-बार चमकती है लेकिन उसकी गरज अपेक्षाकृत कम सुनाई देती है, ख़ासकर के यदि बादल दूर हों एवं इसमें वातावरण का प्रभाव भी प्रभावी होता हैं जैसे कि यदि
तापमान, आर्द्रता (Humidity), हवा की दिशा और वायुमंडल की विभिन्न परतें ध्वनि को मोड़ (Refraction) सकती हैं या कमजोर कर सकती हैं। इसलिए कभी-कभी चमक तो स्पष्ट दिखती है लेकिन गरज बहुत कम सुनाई देती है और दूर की बिजली की चमक बार बार दिखाई देती है और
लोग अक्सर इसे Heat Lightning कहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह कोई अलग प्रकार की बिजली नहीं है। अधिकांश मामलों में यह केवल दूर स्थित आंधी-तूफान की बिजली होती है, जिसकी चमक तो दिखती है लेकिन गरज आपके पास तक नहीं पहुँच पाती है साथ ही इसका मतलब  यह भी है कि आपके यहां बारिश हो यह भी ज़रूरी नहीं होता है लेकिन यदि बिजली लगातार एक ही दिशा में है और तूफान उसी क्षेत्र में बना हुआ है, तो संभव है कि बारिश वहीं हो रही हो और आपके स्थान तक न पहुँचे, लेकिन यदि तूफान आपकी ओर बढ़ रहा है, तब कुछ समय बाद बारिश और तेज़ गरज भी हो सकती है या कुछ यूं कहें कि यदि आपको लगातार एक ही दिशा में बिजली दिखाई दे रही है और गरज बहुत कम सुनाई दे रही है, तो इसका सबसे संभावित वैज्ञानिक कारण यह है कि तूफान आपसे काफी दूर है और बिजली बादलों के भीतर या दूर के क्षेत्र में चमक रही है। प्रकाश आपके पास तुरंत पहुँच जाता है, जबकि ध्वनि दूरी के कारण कमजोर पड़ जाती है या सुनाई नहीं देती। *बिजली का चमकना कैसे होता है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बादलों में जमा विद्युत आवेश अचानक प्रवाहित होने पर तेज प्रकाश निकलता है,इसी को सामान्य बोलचाल की भाषा बिजली चमकना भी कहते हैं।

*बिजली गिरना कैसे होता है?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब धनात्मक और ऋणात्मक क्षेत्रों के बीच वोल्टेज इतना अधिक हो जाता है कि हवा का इन्सुलेशन टूट जाता है (Air Breakdown), तब हवा आयनित (Ionized) होकर चालक बन जाती है। इसके बाद अचानक बहुत बड़ा विद्युत प्रवाह (Current) बहता है। यही Lightning Discharge (बिजली) है। *गरज (Thunder) क्यों होती है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बिजली के प्लाज़्मा का तापमान लगभग 30,000 K (सूर्य की सतह से भी अधिक) तक पहुँच सकता है।
इतने अधिक तापमान से आसपास की हवा कुछ माइक्रोसेकंड में अत्यधिक फैलती है। यही तीव्र प्रसार आघात तरंग (Shock Wave) बनाता है, जिसे हम गरज (Thunder) के रूप में सुनते हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के बी.एड. विभाग में शुक्रवार को सत्र 2026-28 में नवप्रवेशित छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके उपरांत उन्होंने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं से परिचय प्राप्त किया। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष (तृतीय सेमेस्टर) के छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थी अनुशासित, नियमित एवं समर्पित होकर अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक के रूप में आप सभी पर समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का निर्माता भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संयम, अनुशासन एवं सतत अध्ययन के माध्यम से अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन किशन मिश्र ने किया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. नीरज यादव, डॉ. लोहंस कुमार कल्याणी, डॉ. चमन कौर, श्री राजेन्द्र मिश्र, श्रीमती प्रतिभा सिंह, डॉ. दीपा गुप्ता एवं श्री अमरजीत वर्मा सहित बी.एड. के छात्राध्यापक-छात्राध्यापिकाएँ प्रखर जैन, अभितोष, खुशी यादव, अक्षय त्रिपाठी, विपिन मौर्य, आस्था तिवारी, वैदेही, प्रिया आर्या, अर्चना भास्कर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मोजुद थे ।
श्रावण मास,श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी,मणिपर्वत (श्रावण झूला)मेला एवं रक्षाबंधन के दृष्टिगत जनपद गोण्डा में विशेष यातायात डायवर्जन व्यवस्था लागू
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श्रावण मास-2026 के दौरान श्रावण सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नागपंचमी, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला एवं रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या धाम एवं आसपास के जनपदों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एवं वाहनों के दबाव को देखते हुए जनपद गोण्डा में विशेष यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।

*निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय श्रावण सोमवार एवं श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर 08 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 12 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे तक, मणिपर्वत (श्रावण झूला) मेला, तृतीय श्रावण सोमवार एवं नागपंचमी के अवसर पर 14 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 17 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक, चतुर्थ/अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर 23 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 24 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक तथा श्रावण पूर्णिमा स्नान, रक्षाबंधन एवं मेला समापन के अवसर पर 27 अगस्त 2026 प्रातः 08:00 बजे से 28 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 बजे अथवा भीड़ समाप्ति तक विशेष डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी।*

*प्रमुख डायवर्जन व्यवस्था*

*रूट-ए:*
लखनऊ से बाराबंकी एवं गोण्डा होते हुए गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले समस्त वाहनों को दर्जीकुआँ (थाना कोतवाली देहात) से डायवर्ट कर झिलाही रेलवे क्रॉसिंग-मनकापुर-उतरौला मार्ग-डुमरियागंज होते हुए गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*रूट-बी:*
लखनऊ से गोण्डा होकर गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर एवं संतकबीरनगर जाने वाले वाहनों को दर्जीकुआँ से डायवर्ट कर मोतीगंज- मनकापुर-मसकनवा-बभनान मार्ग से गंतव्य के लिए भेजा जाएगा।

*रूट-सी:*
गोण्डा शहर में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों को धानेपुर-उतरौला मार्ग से डायवर्ट कर बेवा चौराहा/डुमरियागंज के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

*अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं*

• अयोध्या प्रशासन के निर्देशानुसार लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले भारी वाहनों को सामान्यतः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करना होगा। पर्वों के दौरान लखनऊ-बाराबंकी-रामनगर (महादेवा मंदिर) मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

• बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती एवं गोण्डा से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को जरवल रोड-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग से भेजा जाएगा।

• गोण्डा से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों का संचालन श्रावण सोमवार एवं पर्वों के दौरान जरवल रोड-बाराबंकी मार्ग पर प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को हुजूरपुर मोड़-टिकोरा मोड़-चहलरीघाट-सिधौली-सीतापुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा।

• आवश्यकता पड़ने पर उतरौला एवं बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को जानकीनगर पुलिस चौकी (थाना इटियाथोक) से डायवर्ट कर आर्यनगर-कटरा बाजार-कर्नलगंज मार्ग से भेजा जाएगा।

•कर्नलगंज-परसपुर-तरबगंज-नवाबगंज मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

• गोण्डा शहर से जरवल रोड होकर बाराबंकी-लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को हुजूरपुर मोड़ से डायवर्ट किया जाएगा।

• कर्नलगंज, परसपुर एवं तरबगंज से नवाबगंज आने वाले भारी वाहनों को कटी तिराहा से मनकापुर की ओर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य चारपहिया वाहन टिकरी मोड़-कोल्हमपुर-लोलपुर मार्ग से संचालित होंगे।

• कटी तिराहा से अयोध्या की ओर केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

• लकड़मण्डी तिराहा से नया घाट पुल (अयोध्या) तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी।

• लोलपुर से नवाबगंज जाने वाले वाहनों को कोल्हमपुर मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। केवल श्रद्धालुओं एवं उनके वाहनों को लकड़मण्डी-नवाबगंज मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा।

*जनसामान्य से अपील*

जनपद पुलिस द्वारा समस्त वाहन चालकों एवं आमजन से अपील की जाती है कि निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं यातायात पुलिस के निर्देशों का अनुपालन करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा सहयोग एवं संयम बनाए रखते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें। जनसहयोग से ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखना संभव हो