चित्रकूट में बाढ़ के बाद योगी का एक्शन प्लान: क्षति का तत्काल सर्वे, मुआवजा और मंदाकिनी से अतिक्रमण हटाने के निर्देश
लखनऊ। अतिवृष्टि से प्रभावित चित्रकूट धाम का दौरा कर लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और फसल व मकान की क्षति का तत्काल सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा। प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सर्वे भी शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।

- व्यापारियों और मठ-मंदिरों को भी मिलेगी सहायता
योगी ने चित्रकूट धाम के बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को हुए नुकसान का आकलन कराने और उन्हें सहायता व मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा। मठ-मंदिरों को हुई क्षति का भी सर्वे कराने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण में शासन आवश्यक सहयोग करेगा।
राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने शेष राहत किट का वितरण 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत सामग्री पहुंचाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को प्रभावित परिवारों के बीच लगातार मौजूद रहकर उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

- बाढ़ के बाद बीमारियों से निपटने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और जरूरतमंदों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमारी के लक्षणों पर नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करें।

- मंदाकिनी के कैचमेंट से हटेगा अतिक्रमण
मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण का चिन्हांकन कर नियमानुसार उसे हटाने के निर्देश दिए। इसके लिए जनपदीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद करने को कहा गया। साथ ही घाटों के विस्तारीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी में किसी भी दशा में सीवर और नालों का पानी नहीं जाना चाहिए। पर्यटन, सिंचाई और नगर विकास विभाग आपसी समन्वय से इसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी चित्रकूट की आस्था से जुड़ी नदी है और इसकी स्वच्छता व निर्मलता बनाए रखना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

- फुट ओवरब्रिज की सुरक्षा जांच के निर्देश
मंदाकिनी नदी पर बने फुट ओवरब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े सभी निर्माण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरत के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई हो।चित्रकूट धाम से एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग की भी मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि सड़क का निर्माण कार्य विजयादशमी से पहले हर हाल में पूरा कराया जाए। विलंब के कारणों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने को भी कहा।
- गोशालाओं में चारे और पशु स्वास्थ्य की जांच
मुख्यमंत्री ने पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाओं की जांच कराने और वहां पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंपी डिजीज से बचाव के लिए भी आवश्यक प्रबंध करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत और पुनर्वास के साथ चित्रकूट के लिए दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि भविष्य में अतिवृष्टि और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसमें मंदाकिनी के प्राकृतिक प्रवाह, कैचमेंट एरिया, अतिक्रमण और जल निकासी व्यवस्था को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
भदोही पुलिस लाइन और थानों में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: डीएम-एसपी ने की पूजा

पुलिसकर्मियों और परिजनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लिया हिस्सा

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। बीती रात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भदोही जिले की पुलिस लाइन और सभी थानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर पुलिस लाइन और थानों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और लीलाओं से जुड़ी सुंदर झांकियां सजाई गईं। साथ ही, कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।

भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार और पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने पुलिस लाइन स्थित मंदिर में हवन-पूजन किया। उन्होंने भगवान कृष्ण से जिले में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों ने श्रद्धा से पूजा की।

पुलिस लाइन में हुए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल, क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर चमन सिंह चावड़ा, क्षेत्राधिकारी लाइन धीरेंद्र सिंह, क्षेत्राधिकारी राजीव कुमार और प्रतिसार निरीक्षक, पुलिस लाइन ज्ञानपुर समेत कई पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिजन मौजूद रहे। सभी ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों में उत्साह से हिस्सा लिया।

पुलिस अधीक्षक भदोही ने जिले के लोगों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपील की कि इस पर्व को आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया जाए।
छात्रों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर रही भाजपा : विनोद पांडेय

झामुमो महासचिव ने कहा कि 48 घंटे का अल्टीमेटम देना भाजपा की हताशा और राजनीतिक अहंकार का परिचायक

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा के 48 घंटे के अल्टीमेटम और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा पर

कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा छात्रों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर रही है और युवाओं के आक्रोश को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। केंद्र और झारखंड में वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद युवाओं के लिए रोजगार के कितने अवसर पैदा किए, इसका जवाब भाजपा दे। झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने से भाजपा की असलियत नहीं छिपेगी।

उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज मुकदमों को भाजपा नेता फर्जी बता रहे हैं। यदि मुकदमे फर्जी हैं तो भाजपा तथ्य और प्रमाण सामने रखे। कानून तोड़ने वालों को राजनीतिक संरक्षण देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा आंदोलन के नाम पर सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने की राजनीति कर रही है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि 48 घंटे का अल्टीमेटम देना भाजपा की हताशा और राजनीतिक अहंकार का परिचायक है। झारखंड सरकार भाजपा के अल्टीमेटम से नहीं चलती। भाजपा को लगता है कि धमकी और दबाव की राजनीति से सरकार को झुकाया जा सकता है, तो यह उसकी बड़ी भूल है।

‘नौकरी बेचने’ के भाजपा के आरोप पर उन्होंने कहा कि भाजपा के पास यदि कोई प्रमाण है तो सामने लाए, अन्यथा झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना बंद करे। बिना प्रमाण आरोप लगाना भाजपा की पुरानी राजनीतिक आदत रही है।

मुख्य सचिव से इंडिया गठबंधन के नेताओं की मुलाकात पर भाजपा की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव से मिलने पर भाजपा को तकलीफ इसलिए हो रही है, क्योंकि उसे हर राजनीतिक गतिविधि में अपना राजनीतिक संकट दिखाई देता है। मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं होने की भाजपा की बात पूरी तरह हास्यास्पद है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है। झारखंड के युवा भाजपा की इस राजनीति को समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितने अल्टीमेटम दे और जितने प्रदर्शन कर ले, सरकार को धमकी देकर राजनीतिक दबाव में लेने का उसका मंसूबा पूरा नहीं होगा।

32 मन विशुद्ध सोने के अलौकिक विग्रह : श्री वंशीधर नगर धाम - पंचम धाम की महिमा

अभय तिवारी ।

गढ़वा :- विंध्य क्षेत्र अंतर्गत झारखंड के पश्चिम छोर पर गढ़वा जिला के बंशीधर नगर धाम, छत्तीसगढ़, यूपी और बिहार यानी तीन राज्यों के त्रिकोण पर वनों एवं पर्वतों से आच्छादित खूबसूरत वादियों के बीच और पतित पावनी कल कल निनादिनी मां बांकी नदी के किनारे बसा श्री बंशीधर नगर इस भूमंडल पर पांचवां धाम है।

विद्वानों के मुताबिक ऐसा भगवान श्रीकृष्ण जी द्वारा विग्रह रुप में यहां स्वयं आकर विराजमान होना है। विग्रह रुप में श्री वंशीधर जी का प्राकट्य विग्रहावतार माना जाता है। विद्वानों के मुताबिक श्री वंशीधर जी के रुप में उनका विग्रहावतार, अर्चावतार भी है। इसलिए इसे श्री बंशीधर नगर धाम के नाम से जाना जाता है।

विद्वानों की राय है कि आमतौर पर पहले किसी मंदिर का निर्माण होता है, उसके बाद मंदिर में भगवान का विग्रह स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। लेकिन श्री वंशीधर मंदिर में ठीक इसके विपरीत रानी शिवमानी देवी को स्वप्न देकर पधारे भगवान श्री वंशीधर जी के विग्रह की स्थापना हुई और उसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ है। श्री वंशीधर जी का प्रतिमा 32 मन विशुद्ध सोने का विग्रह मनमोहक, अदभुत, अलौकिक और अकल्पनीय है। भगवान श्रीकृष्ण जी का ऐसा विग्रह दुनियां के किसी कोने में नहीं है।

भगवान के विग्रह का वर्णन शब्दों में करना कठिन है, लेकिन एक वाक्य कहना और लिखना हो तो बस यही कहा और लिखा जायेगा कि जिनके दर्शन मात्र से सारे पीड़ा और संताप दूर हो जाते हैं। तन और मन हर्षित हो जाता है। विग्रह ऐसा कि नजर नहीं हटती। हमेशा देखते रहने का जी करता है।

श्री बंशीधर नगर में श्री वंशीधर जी के कण कण में विद्यमान रहने का अहसास होता है। इसके कारण यह स्थान श्रीकृष्ण की उपासना करने वाले व वैष्णवों के प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां सुविख्यात वैष्णव संत जगदाचार्य श्री श्री 1008 त्रिदंडी स्वामी जी महाराज, उनके शिष्य श्री श्री 1008 लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज व श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज समेत वैष्णव संप्रदाय के कई चोटी के संत यहां भगवान का दर्शन पूजन कर श्री वंशीधर धाम व श्री वंशीधर जी की महिमा का वर्णन कर चुके हैं।

पंडित राहुल सांकृत्यायन और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय कई जानी मानी हस्तियां भी भगवान का दर्शन अर्चन कर चुके हैं। श्री वंशीधर मंदिर में श्रीकृष्ण जी की वंशीवादन करती आदमकद प्रतिमा के दर्शन के बाद लोगों को अदभुत सुख शांति की अनुभूति होती है। इस नगरी में कभी शोक और उदासी का भाव किसी के मन में उत्पन्न नहीं होता है। बाहर से श्री वंशीधर जी की नगरी में जो भी श्रद्धालु आते हैं, बस भगवान के दर्शन मात्र से उनके चित्त को परम शांति मिलती है। श्री वंशीधर जी के द्वार पर कभी किसी को मांगने की जरुरत नहीं पड़ी है। श्री वंशीधर के द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। जो भी श्रद्धालु श्री वंशीधरजी के दरबार में गया, उसकी अभिष्ट कामना की पूर्ति अवश्य हुई है। ऐसी मान्यता है कि भगवान अपने द्वार पर आने वाले भक्तों की मनोकामना को अवश्य पूरी करते हैं।

श्री बंशीधर नगरी की परिधि के भीतर अब तक कभी किसी प्रकार के प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नहीं पड़ा है। लगभग एक दशक तक घोर उग्रवाद क्षेत्र से ग्रसित होने के बाद भी श्री बंशीधर नगर के लोगों में भय के वातावरण का कभी अहसास नहीं हुआ। श्री वंशीधर क्षेत्र में कभी महामारी को आसपास भटकने का भी अवसर नहीं मिला है। मतलब इस नगरी में सब कुछ श्री वंशीधर जी की इच्छा के अनुकूल होता है। प्राकृतिक आपदा और महामारी जैसे असामयिक घटना जिससे श्री वंशीधर जी के भक्त को परेशानी और शोक हो, इन सब चीजों को श्री वंशीधरजी अपने क्षेत्र में कभी फटकने नहीं देते। श्री वंशीधर जी की प्रेरणा से यहां वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठान, संत्सग आदि का क्रम जारी रहता है। लोग एक दूसरे के हर सुख दुख में सहभागी बनकर जीवन यापन करते हैं। श्री वंशीधर की कृपा ही है कि लोग बिना किसी भय अथवा चिंता किये यहां सुखपूर्वक निवास करते हैं।

श्री बंशीधर नगर को योगेश्वर कृष्ण की भूमि और इस धरती को द्वितीय मथुरा और वृंदावन माना जाता है। श्री बंशीधर जी की स्थापना के बारे में पलामू के प्रसिद्ध इतिहासकारों स्व. रामदीन पाण्डेय, स्व. हवलधारी राम गुप्त हलधर एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक सह इतिहासकार डॉ रमेश चंचल ने अपनी रचनाओं में बड़ी विस्तार से की है। इतिहासकारों के अनुसार संवत 1885 में राजा स्व भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर राजकाज का संचालन कर रही थी। रानी शिवमानी कुंवर धर्मपरायण एवं भगवत भक्ति में पूर्ण निष्ठावान थी। 14 अगस्त 1827 को रानी साहिबा जन्माष्टमी व्रत किया था उसी दिन मध्य रात्रि में उन्हें स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हुआ।

स्वप्न में श्री कृष्ण ने रानी से वर मांगने को कहा। रानी ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि प्रभु आपकी सदैव कृपा हम पर रहे। तब भगवान कृष्ण ने रानी से कनहर नदी के किनारे यूपी के महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी अपनी प्रतिमा के गड़े होने की जानकारी दी और उन्हें अपने राज्य में लाने को कहा। भगवत कृपा जान रानी ने शिवपहाड़ी जाकर विधिवत पूजा अर्चना के बाद खुदाई करायी तो श्री बंशीधर जी की अद्वितीय असाधारण प्रतिमा मिली। जिसे हाथियों पर बैठाकर श्री बंशीधर नगर लाया गया। गढ़ के मुख्य द्वार पर अंतिम हाथी बैठ गया। लाख प्रयत्न के बावजूद हाथी नहीं उठने पर रानी ने राजपुरोहितों से राय मशविरा कर वहीं पर मंदिर का निर्माण कराया तथा वाराणसी से राधा रानी की अष्टधातु की प्रतिमा मंगाकर दिनांक 21 जनवरी 1828 स्थापित करायी।।।

संवत 1885 तदनुसार 21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन श्री राधा वंशीधर जी की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराई। जिसके बाद मंदिर में शुरू हुआ पूजन दर्शन अनवरत जारी है। प्रतिवर्ष असंख्य लोग भगवान का दर्शन पूजन कर मनवांछित फल प्राप्त करते हैं। श्री बंशीधर जी की प्रतिमा कला के दृष्टिकोण से अति सुंदर एवं अद्वितीय है। बिना किसी रसायन के प्रयोग या अन्य पॉलिस के प्रतिमा की चमक पूर्ववत है। भगवान श्री कृष्ण शेषनाग के उपर कमल पीड़िका पर बंशीवादन नृत्य करते विराजमान हैं। भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग दृष्टिगोचर नहीं होते हैं।।।

श्री बंशीधर मंदिर के बारे में विद्वानों का मत है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरूप में हैं। विद्वानों का तर्क है कि यहां स्थित श्री बंशीधरजी जटाधारी के रूप में दिखाई देते है जबकि शास्त्रों में श्रीकृष्ण के खुले लट और घुंघराले बाल का वर्णन है इस लिहाज से मान्यता है कि श्रीकृष्ण जटाधारी अर्थात देवाधिदेव महादेव के रूप में विराजमान हैं। श्रीकृष्ण के शेषशैय्या पर होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है लेकिन यहां श्री बंशीधर जी शेषनाग के उपर कमलपुष्प पर विराजमान हैं, जबकि कमलपुष्प ब्रह्मा का आसन है। इस लिहाज से मान्यता है कि कमल पुष्पासीन श्री कृष्ण कमलासन ब्रह्मा के रूप में विराजमान हैं। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं लक्ष्मीनाथ विष्णु के अवतार है इसलिये विष्णु के स्वरूप में विराजमान हैं। त्रिदेव के रूप में विराजमान भगवान सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।।।

मंदिर में होने वाले कार्यक्रम व श्रद्धालुओं का आगमन

श्री बंशीधर मंदिर में वर्ष भर प्रतिमाह धार्मिक कार्यक्रम जारी रहता है। प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण की जयंती जन्माष्टमी मथुरा एवं वृंदावन की तरह मनाई जाती है। इस मौके पर एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा और रात्रि काल में वृंदावन की मंडली द्वारा रासलीला का आयोजन किया जाता है ।जिससे श्री बंशीधर नगर सहित आस पास के गांवों का माहौल भक्तिमय हो जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर आठ दिनों तक आयोजित जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में हजारों श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर एक महीने तक मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है।

कार्तिक छठ पूजा पर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु छठ व्रत करने मंदिर में दर्शन करने आते हैं। शारदीय और वासंतिक नवरात्रि दीपावली, गोवर्धन पूजा, चौबीसों एकादशी, वसंत पंचमी पर मंदिर स्थापना दिवस, अन्नकूट एवं हर माह पूर्णिमा आदि त्योहार पर मंदिर में विशेष कार्यक्रम व अनुष्ठान, भंडारा आयोजित होता है। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय एवं बाहरी श्रद्धालु शामिल होते हैं। उपरोक्त विशेष आयोजन और अवसरों पर स्थानीय एवं पड़ोसी राज्यों के हजारों श्रद्धालु आते हैं।वही हर वर्ष में एक बार बंशीधर महोत्सव मनाया जाता है। साथ ही पहले से नगर उंटारी का नाम था उसे बदल कर श्री बंशीधर नगर कर दिया गया है। सांसद श्री विष्णुदयाल राम ने लोकसभा में श्री बंशीधर जी का महात्म्य बताते हुए भारत सरकार से श्री बंशीधर नगर को तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने और श्री कृष्ण सर्किट से जोड़ने का अनुरोध किया है।।।

मंदिर से विभिन्न स्थानों की दूरी

मंदिर से रेलवे स्टेशन की दूरी 2.5 किमी, बस स्टैंड की दूरी 1.5 और थाना की दूरी 1.8 किमी, अनुमंडल की दूरी 2.8 और प्रखंड कार्यालय की दूरी 2.5 किमी, जिला मुख्यालय गढ़वा की दूरी 40 किमी है। झारखंड राज्य की राजधानी रांची की दूरी 245 किमी है। यूपी का सोनभद्र जिला सबसे करीब और सटा हुआ है। सोनभद्र जिलान्तर्गत विंढमगंज की दूरी मात्र 12 किमी है। जबकि सोनभद्र जिला मुख्यालय रॉबर्टसगंज की दूरी 100 किमी है। तीर्थ और धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण वाराणसी एवं मिर्जापुर से 180 किमी है। बिहार की राजधानी पटना से 275 किमी है। दूसरे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला भी सटा हुआ है। सरगुजा जिले का सनावल की दूरी लगभग 30 किमी है। सरगुजा का जिला मुख्यालय अंबिकापुर की दूरी 200 किमी है। तीसरे पड़ोसी राज्य बिहार का रोहतास जिला भी सटा हुआ है। रोहतास जिले का नौहट्टा की दूरी लगभग 50 किमी है। जहां से नाव से सोन नदी पार कर 8 महीने तक आवागमन होता है। श्री बंशीधर नगर शहर एनएच 75 एवं गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर स्थित है। रांची, वाराणसी, अंबिकापुर से श्री बंशीधर नगर तक अंतर्राज्यीय बस सेवा उपलब्ध है। प्रतिदिन कई बसें उपरोक्त स्थानों से आया जाया करती हैं। गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर चलने वाली सभी एक्सप्रेस और पैंसेंजर ट्रेनें श्री बंशीधर जी की नगरी में स्थित नगर ऊंटारी रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं। सड़क और रेल मार्ग से वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना जाना होता रहता है।।।

तीन राज्य तो बंशीधर नगर धाम से सटा हुआ रहने के कारण लोग आसानी से इनके दरबार में हाजिरी लगाने तो आते ही है ।लेकिन देश के कई कोने से भी भक्त यहां पहुंचते है ।और दर्शन कर अपनी मनोकामना बंशीधर नगर धाम में कहते है ।और उसे पूर्ण होने पर लोगों का आना जाना बराबर लगा रहता है।

गोरखपुर क्षेत्रीय कार्य समिति सदस्य बनने पर श्री कृष्ण किशन भैया का भव्य स्वागत, कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न

उपेन्द्र कुमार पांडेय

आजमगढ़। युवाओं में बेहद लोकप्रिय और युवाओं की बुलंद आवाज बनने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री कृष्ण किशन सिंह (किशन भैया) को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भाजपा गोरखपुर क्षेत्र का क्षेत्रीय कार्य समिति सदस्य मनोनीत किया गया है। कई राज्यों में चुनाव प्रभारी के रूप में अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवा चुके किशन भैया के इस मनोनयन की खबर मिलते ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला।

घोषणा के तुरंत बाद बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और युवा उनके कालीचौरा स्थित निजी आवास पर एकत्रित हुए। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर आतिशबाजी की और फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

कार्यकर्ताओं के इस अपार स्नेह और भव्य स्वागत से अभिभूत होकर किशन भैया ने पत्रकारों से बातचीत में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि संगठन ने उनकी सामान्य सी राजनीतिक यात्रा को सम्मान देकर एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। बिहार और पश्चिम बंगाल चुनाव के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जब भी अन्य प्रदेशों में जिम्मेदारी दी, कार्यकर्ताओं की निष्ठा और संगठन की मेहनत के दम पर वहां कमल खिला। शीर्ष नेतृत्व ने जो विश्वास उन पर जताया है, उस पर वे पूरी निष्ठा से खरे उतरेंगे।

आगामी विधानसभा चुनावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक बार फिर प्रचंड बहुमत से पार्टी का परचम लहराने के लिए वे पूरी ताकत झोंक देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में देश सशक्त होकर अखंड भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के पार्टी के संकल्प को पूरा करने के लिए वे समर्पित भाव से काम करते रहेंगे।

इस दौरान डॉ. पवन मिश्र, सिंटू राय, राजा सर्वेश तिवारी, समर सिंह, निखिल मोनू जायसवाल, उदय प्रताप सिंह रिशु, सौरभ सिंह, पवन सिंह नीलकंठ, प्रशांत राय रिंकू, राहुल भूषण, रंजीत सिंह, आयुष मिश्रा, इंद्रपाल सिंह, अश्वनी मिश्रा, सत्या बरनवाल, आलोक श्रीवास्तव, सूर्य प्रकाश एसपी, मनीष सिंह, बृजेश चौरसिया, चंद्रशेखर सिंह, कृष्ण कांत सिंह बब्बन, अमित जायसवाल, मृगांक शेखर, नीरज सिंह, अविनाश गोंड, विवेकानंद सिंह, विवेक सिंह एवं शौर्य कौशिक सहित दर्जनों समर्थक मौजूद रहे।
नेपाल में चमत्कार, तबाही के 9 दिन बाद सुरंग से 2 लोग जिंदा निकाले गए

#nepalfloodtwoworkersrescuedalivefrom_tunnel

नेपाल में 9 दिन पहले आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिसने राहत और बचाव टीमों के साथ-साथ पूरे देश की उम्मीद बढ़ा दी। बाढ़ के नौ दिन बाद त्रिशूली-3ए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया।

अंधेरी टनल और मौत के साये के बीच बची जिंदगी

अंधेरी टनल में बीते 9 दिनों से मौत के साये में फंसा युवक संजय शाह आज सुबह सुरक्षित जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। उफनती नदी और मलबे से घिरी टनल के भीतर 240 घंटे तक बिना रोशनी, भोजन और मदद के संजय की सांसें चलती रहीं। इसे रेस्क्यू टीम भी ईश्वर का करिश्मा मान रही है। संजय शाह के रेस्क्यू के बाद एक और युवक को जिंदा बाहर निकाल लिया गया है।

सुरंग से आई आवाज ने जगाई उम्मीद

दोनों मजदूर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग में फंसे हुए थे। नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की टीम लगातार सुरंग में दोनों की तलाश कर रही थी। अभियान के दौरान जब बचावकर्मियों को सुरंग के भीतर से आवाजें सुनाई दीं, तो उनकी उम्मीद जगी। टीम ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित किया और इसके बाद उन्हें बाहर निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए।

टनल के अंदग जिंदगी की उम्मीद

बचाए गए मजदूरों की पहचान 30 वर्षीय संजय शाह और 45 वर्षीय कबीर महारजन के रूप में हुई है। महारजन परियोजना में मैकेनिकल सुपरवाइजर और शाह फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे।संजय से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस खतरनाक टनल के भीतर अभी भी कई अन्य जिंदगियां जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं।

अब तक 1,282 लोगों की मौत

26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। तिब्बत सीमा के पास कई गांव इसकी चपेट में आए। नेपाल पुलिस के मुताबिक, इस भीषण हादसे में अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भी कई कर्मचारी फंस गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां कम से कम 40 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। देश के कई हाइड्रो पावर प्लांट से 900 से ज्यादा कर्मचारियों के लापता होने की बात सामने आई है। ऐसे में दो लोगों का जिंदा मिलना बचाव अभियान के लिए बेहद अहम संकेत है।

कृष्ण : जब अंधकार के बीच एक चेतना जन्म लेती है*
कृष्ण का जन्म उस रात हुआ था, जब बाहर भी अंधकार था और भीतर भी। मथुरा की कारागार में जन्मा वह बालक केवल देवकी और वसुदेव का पुत्र नहीं था; वह उस व्यवस्था के विरुद्ध जन्मी एक चेतना था, जो भय, अत्याचार और सत्ता के अहंकार पर खड़ी थी।

शायद इसीलिए कृष्ण का जन्मोत्सव केवल धार्मिक उत्सव नहीं है। यह मनुष्य के भीतर प्रकाश के जन्म का उत्सव भी है।

कृष्ण की कथा जितनी पुरानी है, उतनी ही आज की भी। समय बदला, राजसत्ताएँ बदलीं, शासन के तरीके बदले, समाज की संरचना बदली, लेकिन कंस का चरित्र समाप्त नहीं हुआ। हर युग में कोई न कोई सत्ता अपने अहंकार में मनुष्य की स्वतंत्रता को कुचलने लगती है। हर युग में भय को व्यवस्था का नाम दिया जाता है और मौन को विवेक समझ लिया जाता है।

ऐसे समय में कृष्ण हमें याद दिलाते हैं कि अन्याय के सामने निष्पक्ष रहना हमेशा न्याय के पक्ष में खड़ा होना नहीं होता।

कृष्ण का जीवन विरोधाभासों का अद्भुत दर्शन है। उनके हाथ में बांसुरी है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर वही कृष्ण रणभूमि में सारथी बन जाते हैं। वे प्रेम के प्रतीक हैं, लेकिन अन्याय के सामने कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते। वे राजमहल में भी सहज हैं और ग्वाल-बालों के बीच भी उतने ही अपने।

उनकी यही व्यापकता उन्हें केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत रूप बनाती है।

कृष्ण का दर्शन मनुष्य को भाग्य के भरोसे बैठने की शिक्षा नहीं देता। गीता में वे कर्म की ओर लौटाते हैं। उनका संदेश है कि मनुष्य अपने अधिकार और कर्तव्य से विमुख होकर जीवन की कठिनाइयों से मुक्त नहीं हो सकता। कर्म से पलायन शांति नहीं देता; वह केवल भीतर एक और युद्ध पैदा करता है।

आज जब हम सफलता को परिणाम से और मनुष्य को उसकी उपयोगिता से मापने लगे हैं, तब कृष्ण का कर्मयोग हमें याद दिलाता है कि कर्म का मूल्य केवल उसके परिणाम में नहीं, उसकी निष्ठा में भी है।

राजनीति के क्षेत्र में कृष्ण को समझना और भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सत्ता को कभी अंतिम लक्ष्य नहीं माना। वे जानते थे कि सत्ता यदि लोककल्याण से कट जाए तो वह केवल शक्ति का प्रदर्शन बन जाती है। कंस का अंत इसलिए महत्वपूर्ण नहीं था कि एक राजा मारा गया; महत्वपूर्ण यह था कि भय के शासन के विरुद्ध न्याय की संभावना पैदा हुई।

महाभारत में कृष्ण की राजनीति हमें एक और कठिन सत्य सिखाती है—अच्छे समाज के निर्माण के लिए केवल अच्छे इरादे पर्याप्त नहीं होते; विवेक, रणनीति और समय की पहचान भी आवश्यक होती है।

उन्होंने युद्ध को उत्सव नहीं बनाया। उन्होंने शांति का प्रयास किया। लेकिन जब संवाद की सारी संभावनाएँ समाप्त हो गईं और अन्याय अपनी सीमा पार कर गया, तब उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य से भागने नहीं दिया।

आज लोकतंत्र में हमारी सबसे बड़ी चुनौती भी शायद यही है कि हम राजनीति को केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन न बनने दें। राजनीति का अर्थ यदि जनता के जीवन को बेहतर बनाना है, तो उसमें कृष्ण का विवेक चाहिए— जहाँ नीति हो, लेकिन नीति के केंद्र में मनुष्य हो; जहाँ शक्ति हो, लेकिन शक्ति के ऊपर न्याय हो; जहाँ असहमति हो, लेकिन शत्रुता न हो।

सामाजिक जीवन में भी कृष्ण की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है।

कृष्ण का लोकजीवन हमें बताता है कि संस्कृति केवल ऊँचे महलों और राजदरबारों में नहीं रहती। वह गाँव की गलियों में, लोकगीतों में, रिश्तों में, उत्सवों में और सामान्य मनुष्य की स्मृतियों में भी सांस लेती है। कृष्ण जितने राजाओं के हैं, उतने ही उस सामान्य जन के भी हैं जिसकी जिंदगी में उत्सव अक्सर कठिन परिस्थितियों के बीच आशा का एक छोटा-सा दीप होता है।

इसीलिए जन्माष्टमी के अवसर पर हमें केवल कृष्ण की मूर्ति के सामने दीप नहीं जलाना चाहिए; हमें अपने भीतर भी यह देखना चाहिए कि कहीं कोई अंधकार तो नहीं पल रहा।

क्या हम किसी कमजोर के साथ खड़े हैं?

क्या हम अन्याय देखकर चुप तो नहीं हैं?

क्या हमारी राजनीति समाज को जोड़ रही है या मनुष्यों के बीच दीवारें खड़ी कर रही है?

क्या हमारा धर्म हमें अधिक संवेदनशील बना रहा है या केवल दूसरों को गलत साबित करने का हथियार बन गया है?

कृष्ण की सबसे बड़ी चुनौती शायद यही है कि वे हमें पूजा से आगे बढ़कर आत्मपरीक्षण के लिए मजबूर करते हैं।

कृष्ण को जानना आसान है, कृष्ण को मानना भी आसान है; लेकिन कृष्ण को अपने आचरण में उतारना कठिन है।

क्योंकि कृष्ण केवल बांसुरी की मधुरता नहीं हैं, वे अन्याय के विरुद्ध उठी हुई चेतना भी हैं।

वे केवल राधा के प्रेम की स्मृति नहीं हैं, वे अर्जुन के संशय के बीच खड़ा हुआ विवेक भी हैं।

वे केवल मंदिरों के देवता नहीं हैं, वे उस मनुष्य के भीतर की आवाज हैं जो अंधकार में भी प्रकाश की संभावना को बचाए रखना चाहता है।

इस जन्माष्टमी पर यदि कृष्ण का जन्म सचमुच मनाना है, तो शायद हमें अपने भीतर तीन चीजों को जन्म देना होगा—विवेक, साहस और करुणा।

विवेक ताकि हम सही और गलत में अंतर कर सकें।

साहस ताकि सही के साथ खड़े हो सकें।

और करुणा ताकि हमारी विजय किसी दूसरे मनुष्य की पराजय का उत्सव न बन जाए।

कृष्ण की कथा हमें यह नहीं सिखाती कि जीवन में कभी अंधकार नहीं आएगा। वह तो यह सिखाती है कि अंधकार कितना भी गहरा हो, मनुष्य के भीतर प्रकाश को जन्म लेने से रोका नहीं जा सकता।

और शायद इसीलिए—कृष्ण का जन्म मथुरा की उस कारागार में एक बार नहीं हुआ था।

वे हर उस क्षण जन्म लेते हैं, जब भय के विरुद्ध साहस खड़ा होता है,

अन्याय के विरुद्ध न्याय आवाज उठाता है,और मनुष्य अपने भीतर के अंधकार पर प्रकाश को चुनता है।

यही कृष्ण हैं। यही जन्माष्टमी का वास्तविक अर्थ है।

अधिवक्ता संदीप पाण्डेय
यूपी में फिर सक्रिय मानसून, 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

- पूर्वांचल और मध्य यूपी में तेज बारिश के आसार, कई जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की चेतावनी


लखनऊ। सितंबर की शुरुआत के साथ उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश का जोर अधिक रहने की संभावना है, जबकि पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।

- 5 सितंबर तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में पांच सितंबर तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने के आसार हैं। दक्षिणी और पूर्वी यूपी में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का जोर बना रह सकता है। वहीं, पश्चिमी और मध्य यूपी में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।

- इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, रायबरेली, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

- कई जिलों में वज्रपात की भी चेतावनी
सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की आशंका जताई गई है।

- अगस्त में सामान्य से 24 फीसदी अधिक बारिश
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने सात निम्न दबाव क्षेत्रों के कारण अगस्त में मानसून लगातार सक्रिय रहा। प्रदेश में अगस्त के दौरान सामान्य 235.5 मिमी के मुकाबले 291.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से करीब 24 फीसदी अधिक है। इससे पहले वर्ष 2018 में अगस्त में 293.1 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
पुण्यतिथि पर श्रद्धा से याद की गईं स्व. शान्ती सिंह
ब्यूरो रितेश मिश्रा
हरदोइ । मंगलवार को शहर के डीएम चौराहा स्थित सिकरवार हाउस में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व महामंत्री अनिल सिंह वीरू की मां व नरेंद्र सिंह अटिया की धर्मपत्नी स्व. शांति सिंह सिकरवार की 16वीं पुण्यतिथि पर जिले भर से आए सम्भ्रांतजनों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित भंडारे में लंच पैकेट एवं बूंदी वितरण भाजपा नेता राजाबक्श सिंह व लंच पैकेट पूर्व सांसद श्रीमती उषा वर्मा एवं राजेश्वरी देवी द्वारा किया गया।
श्री सिंह ने सर्वप्रथम अपने परिवारीजनों में पिता नरेंद्र सिंह, भाई सुनील सिंह,संजीव सिंह सोनू,रेनू सिंह राठौर, देवशी सिकरवार,यशवर्धन, आदि वर्धन,अवि,विहा सिकरवार समेत सम्भ्रांतजनों ने पुष्पांजलि अर्पित की। श्री सिंह ने कहा कि वर्ष में आने वाला यह दिन मां के गोलोकवासी होने की याद दिलाता है। हालांकि उनकी याद हमेशा आती है, लेकिन यह दिन उनका विशेष दिन है। मां की कृपा उनके परिवार पर सूक्ष्म रूप से बरस रही है, इसका सभी को अनुभव भी होता है। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में पूर्व विधायक श्रीगंगा सिंह चौहान,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मुकेश अग्रवाल,नगर पालिका अध्यक्ष श्री सुखसागर मिश्रा, पूर्व पालिकाध्यक्ष उमेश अग्रवाल,पूर्व अध्यक्ष बार रामप्रताप सिंह यादव,पूर्व महामंत्री बार अजीत प्रताप सिंह,कर्मवीर सिंह चौहान, डॉ सुरेश अग्निहोत्री,अवनिकांत बाजपेई, राजपाल गुप्ता,डीसीबी अध्यक्ष अशोक सिंह,पूर्व अध्यक्ष डीसीवी श्री महेंद्र पाल सिंह,श्री विद्याराम वर्मा, अध्यक्ष क्रय विक्रय श्री सुशील अवस्थी"छोटे महाराज" प्राचार्य सीएसएन डॉ कौशलेंद्र सिंह,पूर्व प्राचार्य डॉ बीडी शुक्ला,डा.रामाधार दीक्षित, पूर्व उप मंत्री मिल्खे राम,पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष श्री रविंद्र पांडे,शौर्यवर्धन सिंह चौहान, राजीव मिश्रा,संजीव सिंह कुशवाहा,अवधेश गुप्ता,पूर्व महामंत्री छात्रसंघ मानवेंद्र सिंह,उत्तम श्रीवास्तव,पवन जैन,रविंद्र मिश्रा गुड्डन, उपाध्यक्ष श्री गोविंद सिंह सोमवंशी,सर्वेश पांडे, हर्षवर्धन सिंह सोमवंशी,आप और हम मंच के संयोजक श्री कमलेश पाठक,जिलाध्यक्ष अनिल सिंह राठौर,अध्यक्ष क्षत्रिय महासभा श्री राजपालसिंह सोमवंशी,सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पदमरागसिंह यादव पम्मू,चन्द्रशेखर पाल, अखिलेश पाठक, डॉ अनुराग शुक्ला,कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विक्रम पांडेय, पूर्व अध्यक्ष भाजपा श्रीकृष्ण शास्त्री,श्री राजीव रंजन मिश्रा,पूर्व अध्यक्ष अजय सिंह व आशीष सिंह सोमवंशी,सुभाष पाल, पूर्व ब्लाक प्रमुख वावन श्री समीर सिंह,पूर्व प्रमुख, नरेंद्र पाल सिंह"नीरू",उदयवीर सिंह,समाजसेवी राजवर्धन सिंह राजू,व्यापारी नेता विमलेश दीक्षित,प्रबंधक सेंट जेवियर श्री राकेश पाल,पूर्व अध्यक्ष पंचायत उद्योग शिशुपाल सिंह,अध्यक्ष गन्ना समिति श्री रंजीत कुमार सिंह, पूर्व प्रत्याशी सुरसा श्री उमेंद्र वर्मा पप्पू,पूर्व सभासद वादशाह सिंह, हरी प्रताप सिंह,राजीव सिंह,डॉक्टर संजय सिंह,प्रधान संजय सिंह सोमवंशी,केपी सिंह, अशोक सिंह उतरा,मनोज सिंह बबलू,विश्वराज सिंह चौहान, सुभाष पांडे,अजय पाल,अमित बाजपेई, रहमत अली मोनू ,डॉ धनपाल यादव, फूलचंद वर्मा, सूरज वर्मा, राष्ट्रीय सचिव जितेंद्र कुमार पचानू,अध्यक्ष यूथ प्रवेश श्रीवास्तव कुक्कू,सुधीर गुप्ता मिन्ना, सईद अहमद,सूरज वर्मा,पूर्व अध्यक्ष हरिनाम यादव, डॉ जैनुल खान, पुनीत मिश्रा,श्रवण मिश्रा राही,अवध बिहारी मिश्रा, डॉ पंकज मिश्रा,इंद्र भूषण सिंह, अनमोल बाजपेई,आदर्श दीपक मिश्रा,महामंत्री मंडी श्री संजय गुप्ता,उत्तम गुप्ता, राजकुमार गुप्ता,श्री कृष्ण गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार श्री आलोक सिंह,आमिर किरमानी,देवेंद्र सिंह बबलू, महेश मिश्रा, प्रशांत पाठक,शिव प्रकाश त्रिवेदी,शिवेंद्र प्रताप सिंह सोमवंशी,प्रशांत सिंह ज्ञानू,हंसराज सिंह राहुल, गोपाल द्विवेदी,प्रवीण सिंह राजन,अजय मिश्रा"लाली", रवि पांडे ,नितेश शुक्ला,हरिवंश तिवारी,कैप्टन अशोक अग्निहोत्री, अनिल सिंह पारसोला,अरुण चौहान, देवेंद्र विक्रम सिंह"राम"शोभित सिंह तोमर,अर्जुन चंदेल,विवेक मिश्रा, आनंद अवस्थी,मोतीलाल यादव, नीरज बाजपाई, कमलेश सिंह बघेल,एडवोकेट आशुतोष गुप्ता,सुनील सक्सैना,प्रधान आशुतोष आजाद, राकेश गुप्ता, मोहम्मद समद, बबलू निजामपुर, अंजनी सिंह वैभव,अरविंद सिंह विक्कू, आलोक सिंह चंदेल, अश्वनी सिंह बबलू,राज बहादुर यादव, राजेश यादव, मानसिंह यादव, इंजीनियर नपेंद्र विक्रम सिंह सोमवंशी, नीरज सिंह सोमवंशी, एड. हर्ष कुमार सिंह, अमित सिंह सुरसा, एडवोकेट शैलेंद्र सिंह राठौड़, क सिंह राठौड़ रमेश सिंह राठौड़, चमन अली, देश दीपकदीक्षित अपूर्व महेश्वरी, संग्राम सिंह, रामकिंकर बाजपेई, धीरेंद्र मिश्रा धीरू, अविनाश सिंह जहांनीखेड़ा, अध्यक्ष मदन मोहन सिंह, राम सिंह राठौड़,, अनुज मिश्रा अध्यक्ष व्यापार मंडल अब्बाद हुसैन, प्रदीप सिंह पिंटू पुरवाबाजीराव, विनीत सिंह नगवा आदि उपस्थित रहे।
2027 में सुलतानपुर की पांचों सीटों पर जीत का परचम फहराना है : मीना चौबे

*‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र को साकार करें कार्यकर्ता : मीना चौबे*

*मिशन-2027 को लेकर भाजपा चुनावी मोड में, 2156 बूथों का होगा सत्यापन*

सुलतानपुर। मिशन-2027 को लेकर भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। संगठन ने बूथों को मजबूत और फुलप्रूफ बनाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। जिले के सभी 2156 बूथों एवं समितियों का 4 सितम्बर तक भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही जिले के 26 मंडलों की कार्यसमिति का भी भौतिक सत्यापन होगा।

भाजपा जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित जिला योजना बैठक में मुख्य अतिथि एवं जिला प्रभारी मीना चौबे ने कहा कि 2027 में सुलतानपुर की पांचों विधानसभा सीटों पर जीत का परचम फहराना है। ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र को साकार करते हुए प्रत्येक बूथ को मजबूत कर पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा।उन्होंने कहा कि 2 सितम्बर को सभी 26 मंडलों में कार्यसमिति की बैठक कर मंडल पदाधिकारियों, सदस्यों  का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। बूथवार प्रमुख जातियों का अनुमानित डेटा तैयार करने के साथ मंडल स्तर पर पक्ष एवं विपक्ष के प्रमुख नेताओं की सूची भी तैयार की जाएगी, जिससे चुनावी रणनीति को और प्रभावी बनाया जा सके।

जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी ने कहा कि मिशन-2027 की जीत के लिए संगठन को बूथ स्तर तक पूरी ताकत के साथ जुटना होगा और प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से निर्वहन करे।जिला मीडिया प्रमुख विजय सिंह रघुवंशी ने बताया कि जिले के सभी 2156 बूथों के भौतिक सत्यापन की तैयारी पूरी कर ली गई है। बैठक का संचालन जिला महामंत्री संदीप सिंह ने किया।इस मौके पर डॉ. सीताशरण त्रिपाठी, घनश्याम चौहान, विजय त्रिपाठी, डॉ. प्रीति प्रकाश, आनंद द्विवेदी, रामेंद्र सिंह राणा, आशीष सिंह, आलोक आर्य, राजेश सिंह, अखिलेश जायसवाल, चंदन नारायण सिंह, कुसुमलता मौर्य, रेखा निषाद, प्रदीप शुक्ल, शिवाकांत मिश्रा,  रचना अग्रवाल, रीना जायसवाल, संतोष सिंह, सूर्य नारायण पांडेय, प्रदीप शर्मा, सोहनलाल निषाद समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
चित्रकूट में बाढ़ के बाद योगी का एक्शन प्लान: क्षति का तत्काल सर्वे, मुआवजा और मंदाकिनी से अतिक्रमण हटाने के निर्देश
लखनऊ। अतिवृष्टि से प्रभावित चित्रकूट धाम का दौरा कर लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और फसल व मकान की क्षति का तत्काल सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा। प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सर्वे भी शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।

- व्यापारियों और मठ-मंदिरों को भी मिलेगी सहायता
योगी ने चित्रकूट धाम के बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को हुए नुकसान का आकलन कराने और उन्हें सहायता व मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा। मठ-मंदिरों को हुई क्षति का भी सर्वे कराने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण में शासन आवश्यक सहयोग करेगा।
राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने शेष राहत किट का वितरण 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत सामग्री पहुंचाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को प्रभावित परिवारों के बीच लगातार मौजूद रहकर उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

- बाढ़ के बाद बीमारियों से निपटने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और जरूरतमंदों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमारी के लक्षणों पर नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करें।

- मंदाकिनी के कैचमेंट से हटेगा अतिक्रमण
मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण का चिन्हांकन कर नियमानुसार उसे हटाने के निर्देश दिए। इसके लिए जनपदीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद करने को कहा गया। साथ ही घाटों के विस्तारीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी में किसी भी दशा में सीवर और नालों का पानी नहीं जाना चाहिए। पर्यटन, सिंचाई और नगर विकास विभाग आपसी समन्वय से इसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी चित्रकूट की आस्था से जुड़ी नदी है और इसकी स्वच्छता व निर्मलता बनाए रखना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

- फुट ओवरब्रिज की सुरक्षा जांच के निर्देश
मंदाकिनी नदी पर बने फुट ओवरब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े सभी निर्माण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरत के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई हो।चित्रकूट धाम से एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग की भी मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि सड़क का निर्माण कार्य विजयादशमी से पहले हर हाल में पूरा कराया जाए। विलंब के कारणों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने को भी कहा।
- गोशालाओं में चारे और पशु स्वास्थ्य की जांच
मुख्यमंत्री ने पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाओं की जांच कराने और वहां पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंपी डिजीज से बचाव के लिए भी आवश्यक प्रबंध करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत और पुनर्वास के साथ चित्रकूट के लिए दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि भविष्य में अतिवृष्टि और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसमें मंदाकिनी के प्राकृतिक प्रवाह, कैचमेंट एरिया, अतिक्रमण और जल निकासी व्यवस्था को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
भदोही पुलिस लाइन और थानों में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: डीएम-एसपी ने की पूजा

पुलिसकर्मियों और परिजनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लिया हिस्सा

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। बीती रात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भदोही जिले की पुलिस लाइन और सभी थानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर पुलिस लाइन और थानों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और लीलाओं से जुड़ी सुंदर झांकियां सजाई गईं। साथ ही, कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।

भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार और पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने पुलिस लाइन स्थित मंदिर में हवन-पूजन किया। उन्होंने भगवान कृष्ण से जिले में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों ने श्रद्धा से पूजा की।

पुलिस लाइन में हुए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल, क्षेत्राधिकारी ज्ञानपुर चमन सिंह चावड़ा, क्षेत्राधिकारी लाइन धीरेंद्र सिंह, क्षेत्राधिकारी राजीव कुमार और प्रतिसार निरीक्षक, पुलिस लाइन ज्ञानपुर समेत कई पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिजन मौजूद रहे। सभी ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों में उत्साह से हिस्सा लिया।

पुलिस अधीक्षक भदोही ने जिले के लोगों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपील की कि इस पर्व को आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया जाए।
छात्रों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर रही भाजपा : विनोद पांडेय

झामुमो महासचिव ने कहा कि 48 घंटे का अल्टीमेटम देना भाजपा की हताशा और राजनीतिक अहंकार का परिचायक

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा के 48 घंटे के अल्टीमेटम और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा पर

कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा छात्रों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर रही है और युवाओं के आक्रोश को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। केंद्र और झारखंड में वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद युवाओं के लिए रोजगार के कितने अवसर पैदा किए, इसका जवाब भाजपा दे। झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने से भाजपा की असलियत नहीं छिपेगी।

उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज मुकदमों को भाजपा नेता फर्जी बता रहे हैं। यदि मुकदमे फर्जी हैं तो भाजपा तथ्य और प्रमाण सामने रखे। कानून तोड़ने वालों को राजनीतिक संरक्षण देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा आंदोलन के नाम पर सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने की राजनीति कर रही है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि 48 घंटे का अल्टीमेटम देना भाजपा की हताशा और राजनीतिक अहंकार का परिचायक है। झारखंड सरकार भाजपा के अल्टीमेटम से नहीं चलती। भाजपा को लगता है कि धमकी और दबाव की राजनीति से सरकार को झुकाया जा सकता है, तो यह उसकी बड़ी भूल है।

‘नौकरी बेचने’ के भाजपा के आरोप पर उन्होंने कहा कि भाजपा के पास यदि कोई प्रमाण है तो सामने लाए, अन्यथा झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना बंद करे। बिना प्रमाण आरोप लगाना भाजपा की पुरानी राजनीतिक आदत रही है।

मुख्य सचिव से इंडिया गठबंधन के नेताओं की मुलाकात पर भाजपा की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव से मिलने पर भाजपा को तकलीफ इसलिए हो रही है, क्योंकि उसे हर राजनीतिक गतिविधि में अपना राजनीतिक संकट दिखाई देता है। मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं होने की भाजपा की बात पूरी तरह हास्यास्पद है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है। झारखंड के युवा भाजपा की इस राजनीति को समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितने अल्टीमेटम दे और जितने प्रदर्शन कर ले, सरकार को धमकी देकर राजनीतिक दबाव में लेने का उसका मंसूबा पूरा नहीं होगा।

32 मन विशुद्ध सोने के अलौकिक विग्रह : श्री वंशीधर नगर धाम - पंचम धाम की महिमा

अभय तिवारी ।

गढ़वा :- विंध्य क्षेत्र अंतर्गत झारखंड के पश्चिम छोर पर गढ़वा जिला के बंशीधर नगर धाम, छत्तीसगढ़, यूपी और बिहार यानी तीन राज्यों के त्रिकोण पर वनों एवं पर्वतों से आच्छादित खूबसूरत वादियों के बीच और पतित पावनी कल कल निनादिनी मां बांकी नदी के किनारे बसा श्री बंशीधर नगर इस भूमंडल पर पांचवां धाम है।

विद्वानों के मुताबिक ऐसा भगवान श्रीकृष्ण जी द्वारा विग्रह रुप में यहां स्वयं आकर विराजमान होना है। विग्रह रुप में श्री वंशीधर जी का प्राकट्य विग्रहावतार माना जाता है। विद्वानों के मुताबिक श्री वंशीधर जी के रुप में उनका विग्रहावतार, अर्चावतार भी है। इसलिए इसे श्री बंशीधर नगर धाम के नाम से जाना जाता है।

विद्वानों की राय है कि आमतौर पर पहले किसी मंदिर का निर्माण होता है, उसके बाद मंदिर में भगवान का विग्रह स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। लेकिन श्री वंशीधर मंदिर में ठीक इसके विपरीत रानी शिवमानी देवी को स्वप्न देकर पधारे भगवान श्री वंशीधर जी के विग्रह की स्थापना हुई और उसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ है। श्री वंशीधर जी का प्रतिमा 32 मन विशुद्ध सोने का विग्रह मनमोहक, अदभुत, अलौकिक और अकल्पनीय है। भगवान श्रीकृष्ण जी का ऐसा विग्रह दुनियां के किसी कोने में नहीं है।

भगवान के विग्रह का वर्णन शब्दों में करना कठिन है, लेकिन एक वाक्य कहना और लिखना हो तो बस यही कहा और लिखा जायेगा कि जिनके दर्शन मात्र से सारे पीड़ा और संताप दूर हो जाते हैं। तन और मन हर्षित हो जाता है। विग्रह ऐसा कि नजर नहीं हटती। हमेशा देखते रहने का जी करता है।

श्री बंशीधर नगर में श्री वंशीधर जी के कण कण में विद्यमान रहने का अहसास होता है। इसके कारण यह स्थान श्रीकृष्ण की उपासना करने वाले व वैष्णवों के प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां सुविख्यात वैष्णव संत जगदाचार्य श्री श्री 1008 त्रिदंडी स्वामी जी महाराज, उनके शिष्य श्री श्री 1008 लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज व श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज समेत वैष्णव संप्रदाय के कई चोटी के संत यहां भगवान का दर्शन पूजन कर श्री वंशीधर धाम व श्री वंशीधर जी की महिमा का वर्णन कर चुके हैं।

पंडित राहुल सांकृत्यायन और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय कई जानी मानी हस्तियां भी भगवान का दर्शन अर्चन कर चुके हैं। श्री वंशीधर मंदिर में श्रीकृष्ण जी की वंशीवादन करती आदमकद प्रतिमा के दर्शन के बाद लोगों को अदभुत सुख शांति की अनुभूति होती है। इस नगरी में कभी शोक और उदासी का भाव किसी के मन में उत्पन्न नहीं होता है। बाहर से श्री वंशीधर जी की नगरी में जो भी श्रद्धालु आते हैं, बस भगवान के दर्शन मात्र से उनके चित्त को परम शांति मिलती है। श्री वंशीधर जी के द्वार पर कभी किसी को मांगने की जरुरत नहीं पड़ी है। श्री वंशीधर के द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। जो भी श्रद्धालु श्री वंशीधरजी के दरबार में गया, उसकी अभिष्ट कामना की पूर्ति अवश्य हुई है। ऐसी मान्यता है कि भगवान अपने द्वार पर आने वाले भक्तों की मनोकामना को अवश्य पूरी करते हैं।

श्री बंशीधर नगरी की परिधि के भीतर अब तक कभी किसी प्रकार के प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नहीं पड़ा है। लगभग एक दशक तक घोर उग्रवाद क्षेत्र से ग्रसित होने के बाद भी श्री बंशीधर नगर के लोगों में भय के वातावरण का कभी अहसास नहीं हुआ। श्री वंशीधर क्षेत्र में कभी महामारी को आसपास भटकने का भी अवसर नहीं मिला है। मतलब इस नगरी में सब कुछ श्री वंशीधर जी की इच्छा के अनुकूल होता है। प्राकृतिक आपदा और महामारी जैसे असामयिक घटना जिससे श्री वंशीधर जी के भक्त को परेशानी और शोक हो, इन सब चीजों को श्री वंशीधरजी अपने क्षेत्र में कभी फटकने नहीं देते। श्री वंशीधर जी की प्रेरणा से यहां वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठान, संत्सग आदि का क्रम जारी रहता है। लोग एक दूसरे के हर सुख दुख में सहभागी बनकर जीवन यापन करते हैं। श्री वंशीधर की कृपा ही है कि लोग बिना किसी भय अथवा चिंता किये यहां सुखपूर्वक निवास करते हैं।

श्री बंशीधर नगर को योगेश्वर कृष्ण की भूमि और इस धरती को द्वितीय मथुरा और वृंदावन माना जाता है। श्री बंशीधर जी की स्थापना के बारे में पलामू के प्रसिद्ध इतिहासकारों स्व. रामदीन पाण्डेय, स्व. हवलधारी राम गुप्त हलधर एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक सह इतिहासकार डॉ रमेश चंचल ने अपनी रचनाओं में बड़ी विस्तार से की है। इतिहासकारों के अनुसार संवत 1885 में राजा स्व भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर राजकाज का संचालन कर रही थी। रानी शिवमानी कुंवर धर्मपरायण एवं भगवत भक्ति में पूर्ण निष्ठावान थी। 14 अगस्त 1827 को रानी साहिबा जन्माष्टमी व्रत किया था उसी दिन मध्य रात्रि में उन्हें स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हुआ।

स्वप्न में श्री कृष्ण ने रानी से वर मांगने को कहा। रानी ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि प्रभु आपकी सदैव कृपा हम पर रहे। तब भगवान कृष्ण ने रानी से कनहर नदी के किनारे यूपी के महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी अपनी प्रतिमा के गड़े होने की जानकारी दी और उन्हें अपने राज्य में लाने को कहा। भगवत कृपा जान रानी ने शिवपहाड़ी जाकर विधिवत पूजा अर्चना के बाद खुदाई करायी तो श्री बंशीधर जी की अद्वितीय असाधारण प्रतिमा मिली। जिसे हाथियों पर बैठाकर श्री बंशीधर नगर लाया गया। गढ़ के मुख्य द्वार पर अंतिम हाथी बैठ गया। लाख प्रयत्न के बावजूद हाथी नहीं उठने पर रानी ने राजपुरोहितों से राय मशविरा कर वहीं पर मंदिर का निर्माण कराया तथा वाराणसी से राधा रानी की अष्टधातु की प्रतिमा मंगाकर दिनांक 21 जनवरी 1828 स्थापित करायी।।।

संवत 1885 तदनुसार 21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन श्री राधा वंशीधर जी की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराई। जिसके बाद मंदिर में शुरू हुआ पूजन दर्शन अनवरत जारी है। प्रतिवर्ष असंख्य लोग भगवान का दर्शन पूजन कर मनवांछित फल प्राप्त करते हैं। श्री बंशीधर जी की प्रतिमा कला के दृष्टिकोण से अति सुंदर एवं अद्वितीय है। बिना किसी रसायन के प्रयोग या अन्य पॉलिस के प्रतिमा की चमक पूर्ववत है। भगवान श्री कृष्ण शेषनाग के उपर कमल पीड़िका पर बंशीवादन नृत्य करते विराजमान हैं। भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग दृष्टिगोचर नहीं होते हैं।।।

श्री बंशीधर मंदिर के बारे में विद्वानों का मत है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरूप में हैं। विद्वानों का तर्क है कि यहां स्थित श्री बंशीधरजी जटाधारी के रूप में दिखाई देते है जबकि शास्त्रों में श्रीकृष्ण के खुले लट और घुंघराले बाल का वर्णन है इस लिहाज से मान्यता है कि श्रीकृष्ण जटाधारी अर्थात देवाधिदेव महादेव के रूप में विराजमान हैं। श्रीकृष्ण के शेषशैय्या पर होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है लेकिन यहां श्री बंशीधर जी शेषनाग के उपर कमलपुष्प पर विराजमान हैं, जबकि कमलपुष्प ब्रह्मा का आसन है। इस लिहाज से मान्यता है कि कमल पुष्पासीन श्री कृष्ण कमलासन ब्रह्मा के रूप में विराजमान हैं। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं लक्ष्मीनाथ विष्णु के अवतार है इसलिये विष्णु के स्वरूप में विराजमान हैं। त्रिदेव के रूप में विराजमान भगवान सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।।।

मंदिर में होने वाले कार्यक्रम व श्रद्धालुओं का आगमन

श्री बंशीधर मंदिर में वर्ष भर प्रतिमाह धार्मिक कार्यक्रम जारी रहता है। प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण की जयंती जन्माष्टमी मथुरा एवं वृंदावन की तरह मनाई जाती है। इस मौके पर एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा और रात्रि काल में वृंदावन की मंडली द्वारा रासलीला का आयोजन किया जाता है ।जिससे श्री बंशीधर नगर सहित आस पास के गांवों का माहौल भक्तिमय हो जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर आठ दिनों तक आयोजित जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में हजारों श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर एक महीने तक मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है।

कार्तिक छठ पूजा पर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु छठ व्रत करने मंदिर में दर्शन करने आते हैं। शारदीय और वासंतिक नवरात्रि दीपावली, गोवर्धन पूजा, चौबीसों एकादशी, वसंत पंचमी पर मंदिर स्थापना दिवस, अन्नकूट एवं हर माह पूर्णिमा आदि त्योहार पर मंदिर में विशेष कार्यक्रम व अनुष्ठान, भंडारा आयोजित होता है। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय एवं बाहरी श्रद्धालु शामिल होते हैं। उपरोक्त विशेष आयोजन और अवसरों पर स्थानीय एवं पड़ोसी राज्यों के हजारों श्रद्धालु आते हैं।वही हर वर्ष में एक बार बंशीधर महोत्सव मनाया जाता है। साथ ही पहले से नगर उंटारी का नाम था उसे बदल कर श्री बंशीधर नगर कर दिया गया है। सांसद श्री विष्णुदयाल राम ने लोकसभा में श्री बंशीधर जी का महात्म्य बताते हुए भारत सरकार से श्री बंशीधर नगर को तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने और श्री कृष्ण सर्किट से जोड़ने का अनुरोध किया है।।।

मंदिर से विभिन्न स्थानों की दूरी

मंदिर से रेलवे स्टेशन की दूरी 2.5 किमी, बस स्टैंड की दूरी 1.5 और थाना की दूरी 1.8 किमी, अनुमंडल की दूरी 2.8 और प्रखंड कार्यालय की दूरी 2.5 किमी, जिला मुख्यालय गढ़वा की दूरी 40 किमी है। झारखंड राज्य की राजधानी रांची की दूरी 245 किमी है। यूपी का सोनभद्र जिला सबसे करीब और सटा हुआ है। सोनभद्र जिलान्तर्गत विंढमगंज की दूरी मात्र 12 किमी है। जबकि सोनभद्र जिला मुख्यालय रॉबर्टसगंज की दूरी 100 किमी है। तीर्थ और धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण वाराणसी एवं मिर्जापुर से 180 किमी है। बिहार की राजधानी पटना से 275 किमी है। दूसरे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला भी सटा हुआ है। सरगुजा जिले का सनावल की दूरी लगभग 30 किमी है। सरगुजा का जिला मुख्यालय अंबिकापुर की दूरी 200 किमी है। तीसरे पड़ोसी राज्य बिहार का रोहतास जिला भी सटा हुआ है। रोहतास जिले का नौहट्टा की दूरी लगभग 50 किमी है। जहां से नाव से सोन नदी पार कर 8 महीने तक आवागमन होता है। श्री बंशीधर नगर शहर एनएच 75 एवं गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर स्थित है। रांची, वाराणसी, अंबिकापुर से श्री बंशीधर नगर तक अंतर्राज्यीय बस सेवा उपलब्ध है। प्रतिदिन कई बसें उपरोक्त स्थानों से आया जाया करती हैं। गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर चलने वाली सभी एक्सप्रेस और पैंसेंजर ट्रेनें श्री बंशीधर जी की नगरी में स्थित नगर ऊंटारी रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं। सड़क और रेल मार्ग से वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना जाना होता रहता है।।।

तीन राज्य तो बंशीधर नगर धाम से सटा हुआ रहने के कारण लोग आसानी से इनके दरबार में हाजिरी लगाने तो आते ही है ।लेकिन देश के कई कोने से भी भक्त यहां पहुंचते है ।और दर्शन कर अपनी मनोकामना बंशीधर नगर धाम में कहते है ।और उसे पूर्ण होने पर लोगों का आना जाना बराबर लगा रहता है।

गोरखपुर क्षेत्रीय कार्य समिति सदस्य बनने पर श्री कृष्ण किशन भैया का भव्य स्वागत, कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न

उपेन्द्र कुमार पांडेय

आजमगढ़। युवाओं में बेहद लोकप्रिय और युवाओं की बुलंद आवाज बनने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री कृष्ण किशन सिंह (किशन भैया) को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भाजपा गोरखपुर क्षेत्र का क्षेत्रीय कार्य समिति सदस्य मनोनीत किया गया है। कई राज्यों में चुनाव प्रभारी के रूप में अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवा चुके किशन भैया के इस मनोनयन की खबर मिलते ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला।

घोषणा के तुरंत बाद बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और युवा उनके कालीचौरा स्थित निजी आवास पर एकत्रित हुए। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर आतिशबाजी की और फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

कार्यकर्ताओं के इस अपार स्नेह और भव्य स्वागत से अभिभूत होकर किशन भैया ने पत्रकारों से बातचीत में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि संगठन ने उनकी सामान्य सी राजनीतिक यात्रा को सम्मान देकर एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। बिहार और पश्चिम बंगाल चुनाव के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जब भी अन्य प्रदेशों में जिम्मेदारी दी, कार्यकर्ताओं की निष्ठा और संगठन की मेहनत के दम पर वहां कमल खिला। शीर्ष नेतृत्व ने जो विश्वास उन पर जताया है, उस पर वे पूरी निष्ठा से खरे उतरेंगे।

आगामी विधानसभा चुनावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक बार फिर प्रचंड बहुमत से पार्टी का परचम लहराने के लिए वे पूरी ताकत झोंक देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में देश सशक्त होकर अखंड भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के पार्टी के संकल्प को पूरा करने के लिए वे समर्पित भाव से काम करते रहेंगे।

इस दौरान डॉ. पवन मिश्र, सिंटू राय, राजा सर्वेश तिवारी, समर सिंह, निखिल मोनू जायसवाल, उदय प्रताप सिंह रिशु, सौरभ सिंह, पवन सिंह नीलकंठ, प्रशांत राय रिंकू, राहुल भूषण, रंजीत सिंह, आयुष मिश्रा, इंद्रपाल सिंह, अश्वनी मिश्रा, सत्या बरनवाल, आलोक श्रीवास्तव, सूर्य प्रकाश एसपी, मनीष सिंह, बृजेश चौरसिया, चंद्रशेखर सिंह, कृष्ण कांत सिंह बब्बन, अमित जायसवाल, मृगांक शेखर, नीरज सिंह, अविनाश गोंड, विवेकानंद सिंह, विवेक सिंह एवं शौर्य कौशिक सहित दर्जनों समर्थक मौजूद रहे।
नेपाल में चमत्कार, तबाही के 9 दिन बाद सुरंग से 2 लोग जिंदा निकाले गए

#nepalfloodtwoworkersrescuedalivefrom_tunnel

नेपाल में 9 दिन पहले आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिसने राहत और बचाव टीमों के साथ-साथ पूरे देश की उम्मीद बढ़ा दी। बाढ़ के नौ दिन बाद त्रिशूली-3ए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया।

अंधेरी टनल और मौत के साये के बीच बची जिंदगी

अंधेरी टनल में बीते 9 दिनों से मौत के साये में फंसा युवक संजय शाह आज सुबह सुरक्षित जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। उफनती नदी और मलबे से घिरी टनल के भीतर 240 घंटे तक बिना रोशनी, भोजन और मदद के संजय की सांसें चलती रहीं। इसे रेस्क्यू टीम भी ईश्वर का करिश्मा मान रही है। संजय शाह के रेस्क्यू के बाद एक और युवक को जिंदा बाहर निकाल लिया गया है।

सुरंग से आई आवाज ने जगाई उम्मीद

दोनों मजदूर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग में फंसे हुए थे। नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की टीम लगातार सुरंग में दोनों की तलाश कर रही थी। अभियान के दौरान जब बचावकर्मियों को सुरंग के भीतर से आवाजें सुनाई दीं, तो उनकी उम्मीद जगी। टीम ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित किया और इसके बाद उन्हें बाहर निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए।

टनल के अंदग जिंदगी की उम्मीद

बचाए गए मजदूरों की पहचान 30 वर्षीय संजय शाह और 45 वर्षीय कबीर महारजन के रूप में हुई है। महारजन परियोजना में मैकेनिकल सुपरवाइजर और शाह फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे।संजय से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस खतरनाक टनल के भीतर अभी भी कई अन्य जिंदगियां जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं।

अब तक 1,282 लोगों की मौत

26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। तिब्बत सीमा के पास कई गांव इसकी चपेट में आए। नेपाल पुलिस के मुताबिक, इस भीषण हादसे में अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भी कई कर्मचारी फंस गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां कम से कम 40 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। देश के कई हाइड्रो पावर प्लांट से 900 से ज्यादा कर्मचारियों के लापता होने की बात सामने आई है। ऐसे में दो लोगों का जिंदा मिलना बचाव अभियान के लिए बेहद अहम संकेत है।

कृष्ण : जब अंधकार के बीच एक चेतना जन्म लेती है*
कृष्ण का जन्म उस रात हुआ था, जब बाहर भी अंधकार था और भीतर भी। मथुरा की कारागार में जन्मा वह बालक केवल देवकी और वसुदेव का पुत्र नहीं था; वह उस व्यवस्था के विरुद्ध जन्मी एक चेतना था, जो भय, अत्याचार और सत्ता के अहंकार पर खड़ी थी।

शायद इसीलिए कृष्ण का जन्मोत्सव केवल धार्मिक उत्सव नहीं है। यह मनुष्य के भीतर प्रकाश के जन्म का उत्सव भी है।

कृष्ण की कथा जितनी पुरानी है, उतनी ही आज की भी। समय बदला, राजसत्ताएँ बदलीं, शासन के तरीके बदले, समाज की संरचना बदली, लेकिन कंस का चरित्र समाप्त नहीं हुआ। हर युग में कोई न कोई सत्ता अपने अहंकार में मनुष्य की स्वतंत्रता को कुचलने लगती है। हर युग में भय को व्यवस्था का नाम दिया जाता है और मौन को विवेक समझ लिया जाता है।

ऐसे समय में कृष्ण हमें याद दिलाते हैं कि अन्याय के सामने निष्पक्ष रहना हमेशा न्याय के पक्ष में खड़ा होना नहीं होता।

कृष्ण का जीवन विरोधाभासों का अद्भुत दर्शन है। उनके हाथ में बांसुरी है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर वही कृष्ण रणभूमि में सारथी बन जाते हैं। वे प्रेम के प्रतीक हैं, लेकिन अन्याय के सामने कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते। वे राजमहल में भी सहज हैं और ग्वाल-बालों के बीच भी उतने ही अपने।

उनकी यही व्यापकता उन्हें केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत रूप बनाती है।

कृष्ण का दर्शन मनुष्य को भाग्य के भरोसे बैठने की शिक्षा नहीं देता। गीता में वे कर्म की ओर लौटाते हैं। उनका संदेश है कि मनुष्य अपने अधिकार और कर्तव्य से विमुख होकर जीवन की कठिनाइयों से मुक्त नहीं हो सकता। कर्म से पलायन शांति नहीं देता; वह केवल भीतर एक और युद्ध पैदा करता है।

आज जब हम सफलता को परिणाम से और मनुष्य को उसकी उपयोगिता से मापने लगे हैं, तब कृष्ण का कर्मयोग हमें याद दिलाता है कि कर्म का मूल्य केवल उसके परिणाम में नहीं, उसकी निष्ठा में भी है।

राजनीति के क्षेत्र में कृष्ण को समझना और भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सत्ता को कभी अंतिम लक्ष्य नहीं माना। वे जानते थे कि सत्ता यदि लोककल्याण से कट जाए तो वह केवल शक्ति का प्रदर्शन बन जाती है। कंस का अंत इसलिए महत्वपूर्ण नहीं था कि एक राजा मारा गया; महत्वपूर्ण यह था कि भय के शासन के विरुद्ध न्याय की संभावना पैदा हुई।

महाभारत में कृष्ण की राजनीति हमें एक और कठिन सत्य सिखाती है—अच्छे समाज के निर्माण के लिए केवल अच्छे इरादे पर्याप्त नहीं होते; विवेक, रणनीति और समय की पहचान भी आवश्यक होती है।

उन्होंने युद्ध को उत्सव नहीं बनाया। उन्होंने शांति का प्रयास किया। लेकिन जब संवाद की सारी संभावनाएँ समाप्त हो गईं और अन्याय अपनी सीमा पार कर गया, तब उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य से भागने नहीं दिया।

आज लोकतंत्र में हमारी सबसे बड़ी चुनौती भी शायद यही है कि हम राजनीति को केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन न बनने दें। राजनीति का अर्थ यदि जनता के जीवन को बेहतर बनाना है, तो उसमें कृष्ण का विवेक चाहिए— जहाँ नीति हो, लेकिन नीति के केंद्र में मनुष्य हो; जहाँ शक्ति हो, लेकिन शक्ति के ऊपर न्याय हो; जहाँ असहमति हो, लेकिन शत्रुता न हो।

सामाजिक जीवन में भी कृष्ण की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है।

कृष्ण का लोकजीवन हमें बताता है कि संस्कृति केवल ऊँचे महलों और राजदरबारों में नहीं रहती। वह गाँव की गलियों में, लोकगीतों में, रिश्तों में, उत्सवों में और सामान्य मनुष्य की स्मृतियों में भी सांस लेती है। कृष्ण जितने राजाओं के हैं, उतने ही उस सामान्य जन के भी हैं जिसकी जिंदगी में उत्सव अक्सर कठिन परिस्थितियों के बीच आशा का एक छोटा-सा दीप होता है।

इसीलिए जन्माष्टमी के अवसर पर हमें केवल कृष्ण की मूर्ति के सामने दीप नहीं जलाना चाहिए; हमें अपने भीतर भी यह देखना चाहिए कि कहीं कोई अंधकार तो नहीं पल रहा।

क्या हम किसी कमजोर के साथ खड़े हैं?

क्या हम अन्याय देखकर चुप तो नहीं हैं?

क्या हमारी राजनीति समाज को जोड़ रही है या मनुष्यों के बीच दीवारें खड़ी कर रही है?

क्या हमारा धर्म हमें अधिक संवेदनशील बना रहा है या केवल दूसरों को गलत साबित करने का हथियार बन गया है?

कृष्ण की सबसे बड़ी चुनौती शायद यही है कि वे हमें पूजा से आगे बढ़कर आत्मपरीक्षण के लिए मजबूर करते हैं।

कृष्ण को जानना आसान है, कृष्ण को मानना भी आसान है; लेकिन कृष्ण को अपने आचरण में उतारना कठिन है।

क्योंकि कृष्ण केवल बांसुरी की मधुरता नहीं हैं, वे अन्याय के विरुद्ध उठी हुई चेतना भी हैं।

वे केवल राधा के प्रेम की स्मृति नहीं हैं, वे अर्जुन के संशय के बीच खड़ा हुआ विवेक भी हैं।

वे केवल मंदिरों के देवता नहीं हैं, वे उस मनुष्य के भीतर की आवाज हैं जो अंधकार में भी प्रकाश की संभावना को बचाए रखना चाहता है।

इस जन्माष्टमी पर यदि कृष्ण का जन्म सचमुच मनाना है, तो शायद हमें अपने भीतर तीन चीजों को जन्म देना होगा—विवेक, साहस और करुणा।

विवेक ताकि हम सही और गलत में अंतर कर सकें।

साहस ताकि सही के साथ खड़े हो सकें।

और करुणा ताकि हमारी विजय किसी दूसरे मनुष्य की पराजय का उत्सव न बन जाए।

कृष्ण की कथा हमें यह नहीं सिखाती कि जीवन में कभी अंधकार नहीं आएगा। वह तो यह सिखाती है कि अंधकार कितना भी गहरा हो, मनुष्य के भीतर प्रकाश को जन्म लेने से रोका नहीं जा सकता।

और शायद इसीलिए—कृष्ण का जन्म मथुरा की उस कारागार में एक बार नहीं हुआ था।

वे हर उस क्षण जन्म लेते हैं, जब भय के विरुद्ध साहस खड़ा होता है,

अन्याय के विरुद्ध न्याय आवाज उठाता है,और मनुष्य अपने भीतर के अंधकार पर प्रकाश को चुनता है।

यही कृष्ण हैं। यही जन्माष्टमी का वास्तविक अर्थ है।

अधिवक्ता संदीप पाण्डेय
यूपी में फिर सक्रिय मानसून, 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

- पूर्वांचल और मध्य यूपी में तेज बारिश के आसार, कई जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की चेतावनी


लखनऊ। सितंबर की शुरुआत के साथ उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश का जोर अधिक रहने की संभावना है, जबकि पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।

- 5 सितंबर तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में पांच सितंबर तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने के आसार हैं। दक्षिणी और पूर्वी यूपी में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का जोर बना रह सकता है। वहीं, पश्चिमी और मध्य यूपी में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।

- इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, रायबरेली, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

- कई जिलों में वज्रपात की भी चेतावनी
सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की आशंका जताई गई है।

- अगस्त में सामान्य से 24 फीसदी अधिक बारिश
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने सात निम्न दबाव क्षेत्रों के कारण अगस्त में मानसून लगातार सक्रिय रहा। प्रदेश में अगस्त के दौरान सामान्य 235.5 मिमी के मुकाबले 291.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से करीब 24 फीसदी अधिक है। इससे पहले वर्ष 2018 में अगस्त में 293.1 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
पुण्यतिथि पर श्रद्धा से याद की गईं स्व. शान्ती सिंह
ब्यूरो रितेश मिश्रा
हरदोइ । मंगलवार को शहर के डीएम चौराहा स्थित सिकरवार हाउस में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व महामंत्री अनिल सिंह वीरू की मां व नरेंद्र सिंह अटिया की धर्मपत्नी स्व. शांति सिंह सिकरवार की 16वीं पुण्यतिथि पर जिले भर से आए सम्भ्रांतजनों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित भंडारे में लंच पैकेट एवं बूंदी वितरण भाजपा नेता राजाबक्श सिंह व लंच पैकेट पूर्व सांसद श्रीमती उषा वर्मा एवं राजेश्वरी देवी द्वारा किया गया।
श्री सिंह ने सर्वप्रथम अपने परिवारीजनों में पिता नरेंद्र सिंह, भाई सुनील सिंह,संजीव सिंह सोनू,रेनू सिंह राठौर, देवशी सिकरवार,यशवर्धन, आदि वर्धन,अवि,विहा सिकरवार समेत सम्भ्रांतजनों ने पुष्पांजलि अर्पित की। श्री सिंह ने कहा कि वर्ष में आने वाला यह दिन मां के गोलोकवासी होने की याद दिलाता है। हालांकि उनकी याद हमेशा आती है, लेकिन यह दिन उनका विशेष दिन है। मां की कृपा उनके परिवार पर सूक्ष्म रूप से बरस रही है, इसका सभी को अनुभव भी होता है। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में पूर्व विधायक श्रीगंगा सिंह चौहान,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मुकेश अग्रवाल,नगर पालिका अध्यक्ष श्री सुखसागर मिश्रा, पूर्व पालिकाध्यक्ष उमेश अग्रवाल,पूर्व अध्यक्ष बार रामप्रताप सिंह यादव,पूर्व महामंत्री बार अजीत प्रताप सिंह,कर्मवीर सिंह चौहान, डॉ सुरेश अग्निहोत्री,अवनिकांत बाजपेई, राजपाल गुप्ता,डीसीबी अध्यक्ष अशोक सिंह,पूर्व अध्यक्ष डीसीवी श्री महेंद्र पाल सिंह,श्री विद्याराम वर्मा, अध्यक्ष क्रय विक्रय श्री सुशील अवस्थी"छोटे महाराज" प्राचार्य सीएसएन डॉ कौशलेंद्र सिंह,पूर्व प्राचार्य डॉ बीडी शुक्ला,डा.रामाधार दीक्षित, पूर्व उप मंत्री मिल्खे राम,पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष श्री रविंद्र पांडे,शौर्यवर्धन सिंह चौहान, राजीव मिश्रा,संजीव सिंह कुशवाहा,अवधेश गुप्ता,पूर्व महामंत्री छात्रसंघ मानवेंद्र सिंह,उत्तम श्रीवास्तव,पवन जैन,रविंद्र मिश्रा गुड्डन, उपाध्यक्ष श्री गोविंद सिंह सोमवंशी,सर्वेश पांडे, हर्षवर्धन सिंह सोमवंशी,आप और हम मंच के संयोजक श्री कमलेश पाठक,जिलाध्यक्ष अनिल सिंह राठौर,अध्यक्ष क्षत्रिय महासभा श्री राजपालसिंह सोमवंशी,सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पदमरागसिंह यादव पम्मू,चन्द्रशेखर पाल, अखिलेश पाठक, डॉ अनुराग शुक्ला,कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विक्रम पांडेय, पूर्व अध्यक्ष भाजपा श्रीकृष्ण शास्त्री,श्री राजीव रंजन मिश्रा,पूर्व अध्यक्ष अजय सिंह व आशीष सिंह सोमवंशी,सुभाष पाल, पूर्व ब्लाक प्रमुख वावन श्री समीर सिंह,पूर्व प्रमुख, नरेंद्र पाल सिंह"नीरू",उदयवीर सिंह,समाजसेवी राजवर्धन सिंह राजू,व्यापारी नेता विमलेश दीक्षित,प्रबंधक सेंट जेवियर श्री राकेश पाल,पूर्व अध्यक्ष पंचायत उद्योग शिशुपाल सिंह,अध्यक्ष गन्ना समिति श्री रंजीत कुमार सिंह, पूर्व प्रत्याशी सुरसा श्री उमेंद्र वर्मा पप्पू,पूर्व सभासद वादशाह सिंह, हरी प्रताप सिंह,राजीव सिंह,डॉक्टर संजय सिंह,प्रधान संजय सिंह सोमवंशी,केपी सिंह, अशोक सिंह उतरा,मनोज सिंह बबलू,विश्वराज सिंह चौहान, सुभाष पांडे,अजय पाल,अमित बाजपेई, रहमत अली मोनू ,डॉ धनपाल यादव, फूलचंद वर्मा, सूरज वर्मा, राष्ट्रीय सचिव जितेंद्र कुमार पचानू,अध्यक्ष यूथ प्रवेश श्रीवास्तव कुक्कू,सुधीर गुप्ता मिन्ना, सईद अहमद,सूरज वर्मा,पूर्व अध्यक्ष हरिनाम यादव, डॉ जैनुल खान, पुनीत मिश्रा,श्रवण मिश्रा राही,अवध बिहारी मिश्रा, डॉ पंकज मिश्रा,इंद्र भूषण सिंह, अनमोल बाजपेई,आदर्श दीपक मिश्रा,महामंत्री मंडी श्री संजय गुप्ता,उत्तम गुप्ता, राजकुमार गुप्ता,श्री कृष्ण गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार श्री आलोक सिंह,आमिर किरमानी,देवेंद्र सिंह बबलू, महेश मिश्रा, प्रशांत पाठक,शिव प्रकाश त्रिवेदी,शिवेंद्र प्रताप सिंह सोमवंशी,प्रशांत सिंह ज्ञानू,हंसराज सिंह राहुल, गोपाल द्विवेदी,प्रवीण सिंह राजन,अजय मिश्रा"लाली", रवि पांडे ,नितेश शुक्ला,हरिवंश तिवारी,कैप्टन अशोक अग्निहोत्री, अनिल सिंह पारसोला,अरुण चौहान, देवेंद्र विक्रम सिंह"राम"शोभित सिंह तोमर,अर्जुन चंदेल,विवेक मिश्रा, आनंद अवस्थी,मोतीलाल यादव, नीरज बाजपाई, कमलेश सिंह बघेल,एडवोकेट आशुतोष गुप्ता,सुनील सक्सैना,प्रधान आशुतोष आजाद, राकेश गुप्ता, मोहम्मद समद, बबलू निजामपुर, अंजनी सिंह वैभव,अरविंद सिंह विक्कू, आलोक सिंह चंदेल, अश्वनी सिंह बबलू,राज बहादुर यादव, राजेश यादव, मानसिंह यादव, इंजीनियर नपेंद्र विक्रम सिंह सोमवंशी, नीरज सिंह सोमवंशी, एड. हर्ष कुमार सिंह, अमित सिंह सुरसा, एडवोकेट शैलेंद्र सिंह राठौड़, क सिंह राठौड़ रमेश सिंह राठौड़, चमन अली, देश दीपकदीक्षित अपूर्व महेश्वरी, संग्राम सिंह, रामकिंकर बाजपेई, धीरेंद्र मिश्रा धीरू, अविनाश सिंह जहांनीखेड़ा, अध्यक्ष मदन मोहन सिंह, राम सिंह राठौड़,, अनुज मिश्रा अध्यक्ष व्यापार मंडल अब्बाद हुसैन, प्रदीप सिंह पिंटू पुरवाबाजीराव, विनीत सिंह नगवा आदि उपस्थित रहे।
2027 में सुलतानपुर की पांचों सीटों पर जीत का परचम फहराना है : मीना चौबे

*‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र को साकार करें कार्यकर्ता : मीना चौबे*

*मिशन-2027 को लेकर भाजपा चुनावी मोड में, 2156 बूथों का होगा सत्यापन*

सुलतानपुर। मिशन-2027 को लेकर भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। संगठन ने बूथों को मजबूत और फुलप्रूफ बनाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। जिले के सभी 2156 बूथों एवं समितियों का 4 सितम्बर तक भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही जिले के 26 मंडलों की कार्यसमिति का भी भौतिक सत्यापन होगा।

भाजपा जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित जिला योजना बैठक में मुख्य अतिथि एवं जिला प्रभारी मीना चौबे ने कहा कि 2027 में सुलतानपुर की पांचों विधानसभा सीटों पर जीत का परचम फहराना है। ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र को साकार करते हुए प्रत्येक बूथ को मजबूत कर पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा।उन्होंने कहा कि 2 सितम्बर को सभी 26 मंडलों में कार्यसमिति की बैठक कर मंडल पदाधिकारियों, सदस्यों  का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। बूथवार प्रमुख जातियों का अनुमानित डेटा तैयार करने के साथ मंडल स्तर पर पक्ष एवं विपक्ष के प्रमुख नेताओं की सूची भी तैयार की जाएगी, जिससे चुनावी रणनीति को और प्रभावी बनाया जा सके।

जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी ने कहा कि मिशन-2027 की जीत के लिए संगठन को बूथ स्तर तक पूरी ताकत के साथ जुटना होगा और प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से निर्वहन करे।जिला मीडिया प्रमुख विजय सिंह रघुवंशी ने बताया कि जिले के सभी 2156 बूथों के भौतिक सत्यापन की तैयारी पूरी कर ली गई है। बैठक का संचालन जिला महामंत्री संदीप सिंह ने किया।इस मौके पर डॉ. सीताशरण त्रिपाठी, घनश्याम चौहान, विजय त्रिपाठी, डॉ. प्रीति प्रकाश, आनंद द्विवेदी, रामेंद्र सिंह राणा, आशीष सिंह, आलोक आर्य, राजेश सिंह, अखिलेश जायसवाल, चंदन नारायण सिंह, कुसुमलता मौर्य, रेखा निषाद, प्रदीप शुक्ल, शिवाकांत मिश्रा,  रचना अग्रवाल, रीना जायसवाल, संतोष सिंह, सूर्य नारायण पांडेय, प्रदीप शर्मा, सोहनलाल निषाद समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।