बदल गया दुनिया का नक्शा, नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-यूएस छोटे; जानें भारत पर क्या असर
#unvotestoadoptsnewworldmapequalearthmapvsmercatormap
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के एक नए नक्शे को पास को किया है। इसमें पुराने मर्केटर वर्ल्ड मैप की जगह ऐसे नक्शे के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देता है। नए नक्शे में अफ्रीका पहले से काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी तुलनात्मक रूप से छोटा दिखेगा।
![]()
वर्ल्ड मैप में बदलाव को लेकर अफ्रीकी देश टोगो की तरफ से प्रस्ताव पेश किया गया। टोगो और अफ्रीकी यूनियन (AU) के सदस्यों के समर्थन वाले 'नक्शे को सही करें' नाम के प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला है जिनमें फ्रांस और यूके भी शामिल थे। अमेरिका एकमात्र ऐसा देश था जिसने इसके खिलाफ वोट किया था और छह देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस नक्शे में अफ्रीका को उसके मूल रूप में दिखाया गया है।
![]()
‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को अपनाने की अपील
इस नक्शे को इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन के जरिए मापा गया है। इससे पहले मर्केटर मैप माना जाता था दरअसल, टोगो एक कैंपेन को लीड कर रहा था। टोगो इस कैंपेन के तहत दुनिया भर की सरकारों और संस्थाओं से पारंपरिक ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’ को छोड़कर ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को अपनाने का आग्रह किया।
![]()
क्या है ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’?
मर्केटर प्रोजेक्शन के आधार पर नक्शे का इस्तेमाल 16वीं सदी से हो रहा है। समर्थकों और भूगोल-विशेषज्ञों का कहना है कि ‘इक्वल अर्थ’ नक्शा महाद्वीपों के सापेक्ष आकार और अनुपात को ज़्यादा सही ढंग से दिखाता है। ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’ में ग्रीनलैंड का आकार अफ्रीका के लगभग बराबर दिखता है, जबकि असल में वह बहुत छोटा है। इसके उलट, ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ महाद्वीपों को ज़्यादा सही अनुपात में दिखाता है, जिसमें अफ्रीका को ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा दिखाया गया है। हालांकि, यह प्रस्ताव ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’ के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाता और न ही इसे बदलने के लिए मजबूर करता है।
![]()
अमेरिका ने प्रस्ताव का किया विरोध
टोगो द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का अफ्रीकी संघ के बाकी 54 सदस्य देशों समेत कई देशों ने समर्थन किया था। वोटिंग के बाद इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। वहीं, अमेरिका ने इस पहल की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने जैसी बहस पर। उन्होंने इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया और कहा कि ऐसी बहसों की वजह से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।
क्या है भारत की राय?
वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, जिसका उद्देश्य दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने कहा कि भारत इस प्रस्ताव को समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रोजेक्शन के व्यापक इस्तेमाल और विचार को बढ़ावा देने के रूप में देखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का समर्थन किसी एक विशेष प्रोजेक्शन, जिसमें ‘इक्वल अर्थ’ भी शामिल है, को आधिकारिक तौर पर अपनाने का समर्थन नहीं है। पुरी ने कहा कि अलग-अलग मानचित्र प्रोजेक्शन में किसी क्षेत्र के आकार को लेकर धारणा में अंतर पैदा हो सकता है। खासतौर पर ऐसे प्रोजेक्शन में, जिनका उद्देश्य आकार के बजाय भूगोल की दूसरी विशेषताओं जैसे आकृति, दिशा या दूरी को बनाए रखना होता है।
भारत के आकार का क्या?
भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है। भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा। नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं। भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है।








- भारत की मेजबानी में 18वां शिखर सम्मेलन, गुटेरेस होंगे शामिल; पुतिन, जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति के आने की भी संभावना
1 hour and 35 min ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
4.2k