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सोनिया गांधी की किताब को अब हार्परकॉलिन्स करेगी पब्लिश, पेंगुइन इंडिया से विवाद के बीच ऐलान

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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' अब हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित की जाएगी। हार्पर कॉलिन्स ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। इस किताब को पहले पेंगुइन रैंडम हाउस की ओर से प्रकाशित किया जाना था। पेंगुइन रैंडम हाउस ने कुछ बदलाव और सामग्री पर मतभेद को लेकर किताब प्रकाशित करने से पीछे हटने का फैसला किया। जिसके बाद हार्पर कॉलिन्स ने किताब को छापने का ऐलान कर दिया है।

10 नवंबर को होगा प्रकाशित

हार्पर कॉलिन्स ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। अपने पोस्ट में हार्पर कॉलिन्स ने लिखा, 'हार्पर कॉलिन्स इंडिया सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण किताब 'बिलॉन्गिंग-ए जर्नी ऑफ लव' को प्रकाशित करेगी। लंबे समय से प्रतीक्षित यह संस्मरण भारत में 10 नवंबर, 2026 को प्रकाशित होगा। हमारे समय के सबसे बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरणों में से एक ‘बिलॉन्गिंग’ प्रेम, पहचान, कर्तव्य और अपनत्व की एक नाटकीय एवं बेहद निजी कहानी है। यह पुस्तक भारत की यात्रा और उसके विकास को एक दुर्लभ अंदरूनी नजरिए से प्रस्तुत करती है।'

पेंगुइन रैंडम हाउस क्यों हटा पीछे?

बता दें कि कि सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर देश में खूब सियासत हुई। मामला तब शुरू हुआ जब न्यूयॉर्क स्थित अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का हिस्सा है, ने 18 अगस्त को सोनिया गांधी की किताब प्रकाशित करने की घोषणा की थी। उस समय 10 नवंबर की तारीख तय की गई थी और किताब की पहली प्रिंटिंग करीब एक लाख प्रतियों की बताई गई थी। लेकिन इसके बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब प्रकाशित करने से पीछे हटने का फैसला किया। इसे लेकर संपादकीय बदलाव और सामग्री पर मतभेद की बातें सामने आईं।

मेलोनी बनीं इटली की सबसे लंबे समय तक रहने वाली पीएम, पीएम मोदी ने दी बधाई

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इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने राजनीतिक में एक खास मुकाम हासिल किया है।मेलोनी ने देश के द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के इतिहास में लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को बधाई दी। पीएम मोदी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगे की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

पीएम मोदी ने दी सफलता के लिए शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्ट में लिखा, ‘मेरी मित्र प्रधानमंत्री मेलोनी को इटली के युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाली प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई। यह उपलब्धि उनके नेतृत्व में इटली की जनता के विश्वास और भरोसे को दर्शाती है।’ उन्होंने कहा, ‘उनकी दोस्ती ने भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं दोनों देशों के लोगों के लिए समृद्ध भविष्य बनाने हेतु हमारे करीबी सहयोग को आगे बढ़ाने का इंतजार कर रहा हूं। आने वाले वर्षों में उनकी निरंतर सफलता के लिए मेरी शुभकामनाएं।’

जुलाई में पीएम मोदी ने रचा था इतिहास

इससे पहले जुलाई में मेलोनी ने भी प्रधानमंत्री मोदी को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के लिए नए अवसर बनाने के लिए साथ काम करने की इच्छा भी जताई थी। उस समय सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्‍स’ पर मेलोनी ने लिखा था, ‘पीएम मोदी को बधाई, जो आज भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। हाल के हफ्तों में रोम में उनसे फिर मुलाकात करना खुशी की बात रही। हमने मिलकर एक ऐसी विशेष रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है, जो भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारे देशों और हमारे लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।’

मेलोनी की सरकार ने लगातार 1,413 दिन पूरे किए

जॉर्जिया मेलोनी ने 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। उनकी सरकार ने आज लगातार 1,413 दिन पूरे कर लिए हैं और बेनिटो मुसोलिनी की तानाशाही के बाद इटली गणराज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई है। जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' इस मौके पर दक्षिणी इटली के बारी शहर में एक रैली कर रही है जिसमें हजारों समर्थकों के जुटे हैं। जॉर्जिया मेलोनी एड्रियाटिक सागर के नजारे वाले मंच से रैली को संबोधित करेंगी। इस रैली का नारा है 'सबसे स्थिर सरकार, एक मजबूत इटली'।

कौन है निशु आजाद जिसके पिता को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी सीजेपी, संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन

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कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर सड़क पर उतरी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जून को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए निशु आजाद के पिता को न्याय दिलाने के लिए सीजेपी संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए गाजियाबाद के संजय कुमार (38) की बेटी निशु ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर निशु का एक वीडियो आया है, जिसमें वह कह रही हैं कि अब दिल्ली पुलिस से उनकी आशा और उम्मीद टूटने लगी है।

वीडियो आने के बाद बवाल बढ़ा

निशु का वीडियो आने के बाद इसे लेकर बवाल बढ़ गया है। निशु वीडियो में कह रही हैं कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह साफ कह रहा कि उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होना चाहिए था। निशु ने कहा कि जब मेरे पापा का सिर फोड़ा था। तब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है। निशु ने अपना वीडियो राहुल गांधी को भी टैग किया है। उनका कहना है कि अब पुलिस से उम्मीद नहीं है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कानून का डर नहीं है। अब मुझे बस राहुल गांधी से उम्मीद है।

सौरव दास का थाने के सामने धरना-प्रदर्शन

निशु दिल्ली पुलिस से एक्शन की मांग कर रही हैं। साथ ही वह स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही हैं। इसे लेकर आज संसद थाने के बाहर काफी गहमागहमी है। निशु मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और कुछ लोग पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे हैं। थाने के सामने सड़क पर बैठ गए हैं।

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थक के पिता पर हुए हमले में कार्रवाई न करने की बात कही। रांका के अनुसार, सौरभ और उनके पूरे दल ने दिल्ली पुलिस से हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। उन्होंने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की भी मांग की थी। हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। आज, घटना में शामिल लोग खुले तौर पर संजय पर हमला करने की बात स्वीकार कर रहे हैं। वे यह भी मान रहे हैं कि उन्होंने संजय को जान से मारने का प्रयास किया था। इसके बावजूद, दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर कोई कदम नहीं उठाया है। यह आरोप कपिल मिश्रा और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रभाव में कार्रवाई न करने का है।

स्वतंत्र भारद्वाज के वीडियो में क्या?

इस बीच कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि उसने सीजेपी के एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, उसे 60 टांके लगे थे और उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह मौत के करीब पहुंच गया था। वह यह भी कहता है कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। वीडियो में उसने आगे कहा 'मैं अगले दिन ही पुलिस हिरासत से बाहर आ गया। मुझे जेल भी नहीं जाना पड़ा। मैंने पुलिस को यह कहते सुना कि कपिल मिश्रा का फोन आया था। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।

नेपाल में चमत्कार, तबाही के 9 दिन बाद सुरंग से 2 लोग जिंदा निकाले गए

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नेपाल में 9 दिन पहले आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिसने राहत और बचाव टीमों के साथ-साथ पूरे देश की उम्मीद बढ़ा दी। बाढ़ के नौ दिन बाद त्रिशूली-3ए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया।

अंधेरी टनल और मौत के साये के बीच बची जिंदगी

अंधेरी टनल में बीते 9 दिनों से मौत के साये में फंसा युवक संजय शाह आज सुबह सुरक्षित जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। उफनती नदी और मलबे से घिरी टनल के भीतर 240 घंटे तक बिना रोशनी, भोजन और मदद के संजय की सांसें चलती रहीं। इसे रेस्क्यू टीम भी ईश्वर का करिश्मा मान रही है। संजय शाह के रेस्क्यू के बाद एक और युवक को जिंदा बाहर निकाल लिया गया है।

सुरंग से आई आवाज ने जगाई उम्मीद

दोनों मजदूर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग में फंसे हुए थे। नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की टीम लगातार सुरंग में दोनों की तलाश कर रही थी। अभियान के दौरान जब बचावकर्मियों को सुरंग के भीतर से आवाजें सुनाई दीं, तो उनकी उम्मीद जगी। टीम ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित किया और इसके बाद उन्हें बाहर निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए।

टनल के अंदग जिंदगी की उम्मीद

बचाए गए मजदूरों की पहचान 30 वर्षीय संजय शाह और 45 वर्षीय कबीर महारजन के रूप में हुई है। महारजन परियोजना में मैकेनिकल सुपरवाइजर और शाह फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे।संजय से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस खतरनाक टनल के भीतर अभी भी कई अन्य जिंदगियां जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं।

अब तक 1,282 लोगों की मौत

26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। तिब्बत सीमा के पास कई गांव इसकी चपेट में आए। नेपाल पुलिस के मुताबिक, इस भीषण हादसे में अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भी कई कर्मचारी फंस गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां कम से कम 40 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। देश के कई हाइड्रो पावर प्लांट से 900 से ज्यादा कर्मचारियों के लापता होने की बात सामने आई है। ऐसे में दो लोगों का जिंदा मिलना बचाव अभियान के लिए बेहद अहम संकेत है।

दिल्ली में 12-13 सितंबर को जुटेगा BRICS का शीर्ष नेतृत्व
- भारत की मेजबानी में 18वां शिखर सम्मेलन, गुटेरेस होंगे शामिल; पुतिन, जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति के आने की भी संभावना

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। सम्मेलन में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इन नेताओं की संभावित मौजूदगी से शिखर सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
BRICS सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, वैश्विक विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की मेजबानी में होने वाली यह बैठक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन पर दुनियाभर की नजरें रहेंगी। भारत BRICS के मंच के जरिए विकासशील देशों के हितों और वैश्विक सहयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रखने की तैयारी में है।
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर, अब सीजेपी दिल्ली में नहीं करेगी प्रोटेस्ट

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दिल्ली में 5 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की तरफ से प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी सामने आई। सीजेपी ने अदालत को बताया कि वह 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपने नए विरोध मार्च का आह्वान वापस ले रही है। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर दिए गए आश्वासन के बाद लिया गया।

छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर रद्द

कॉकरोच मूवमेंट के दौरान राजधानी दिल्ली और 4 राज्यों में प्रदर्शन को लेकर छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर रद्द कर दी गई हैं। सरकार का कहना है प्रदर्शन खत्म होने के दौरान उसने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा कर लिया है। मंगलवार (1 सितंबर) को सरकार ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की अपील की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

सीजेपी ने किया प्रदर्शन न करने का ऐलान

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेपी के सौरव दास ने कहा, मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों और आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए, और इस कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए, कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को होने वाले मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझता है। उम्मीद है कि सरकार अपने वचन का पालन करेगी।

एफआईआर वापस क्यों ली गई?

केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी से वादा किया था कि अगर आंदोलन वापस ले लिए जाते हैं, तो मामले वापस ले लिए जाएंगे। मैंने दिल्ली के लिए लिस्ट दे दी है। इसके बाद बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल ने भी केस वापिस की याचिका दाखिल की। इन राज्यों ने भी कहा कि हम केस वापस ले रहे हैं। इन सभी राज्यों में कुल 129 एफआईआर दर्ज थे। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर किसी अन्य राज्यों में भी कोई मुकदमा दर्ज है तो हम चाहते हैं कि वे जांच को आगे न बढ़ाएं।

20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था आंदोलन

बता दें कि नीट अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी के नेतृत्व में आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। यह आंदोलन 25 जुलाई को उस समय समाप्त किया गया, जब तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार ने संगठन की अन्य मांगों को भी स्वीकार किया।

SCO समिट में पीएम मोदी ने पुतिन-जिनपिंग से की मुलाकात, ग्रुप फोटो में शहबाज को किया नजरअंदाज

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किर्गिस्तान के बिश्केक के 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की बैठक हो रही है। यहां पर चीन-रूस और भारत एक साथ एक मंच पर इकट्ठा हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत समूह के दूसरे नेताओं से गर्मजोशी से मुलाकात की और बात की। लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तरफ देखा तक नहीं।

बिश्केक में SCO नेताओं की ग्रुप फोटो के दौरान क्या हुआ?

ग्रुप फोटो के दौरान जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं उनमें प्रधानमंत्री मोदी को सबसे ज्यादा गर्मजोशी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिलते देखा गया है। ग्रुप फोटो से पहले का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जब सभी राष्ट्र प्रमुख मंच पर इकट्ठा हो रहे थे, तो प्रधानमंत्री मोदी को देखकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रुक गए। दोनों ने प्रधानमंत्री मोदी से हाथ मिलाया। इस दौरान पुतिन और पीएम मोदी के बीच गर्मजोशी दिखाई दी। ग्रुप फोटो के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शहबाज शरीफ की तरफ देखा तक नहीं। यहां एक बार फिर उनकी किरकिरी हुई। प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति जिनिपिंग के साथ बातचीत करते हुए वहां से बाहर की ओर चले गए।

पाकिस्तान ने अपनी पोस्ट से पीएम मोदी की फोटो हटाई

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में चल रहे एससीओ शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की खूब किरकिरी हुई। इसके बाद पाकिस्तान प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एससीओ ग्रुप फोटो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई वैश्विक नेताओं की तस्वीरों को हटा दिया गया।

किर्गिस्तान के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी की बैठक

इससे पहले PM मोदी ने SCO समिट के दौरान किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ बैठक की। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-किर्गिस्तान के आपसी संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

मदद का हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा, कनाडा में बोले मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु–एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया। भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है-भागवत

भागवत ने कहा कि दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया की सेवा से भारत को पहचान मिली। जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

भागवत ने बताई हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी

संघ संचालक ने कहा, हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की लेकिन उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यता के मूल्य सिखाए और दुनिया का दिल जीता। भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी विविधता को अपनाने और छिपी हुई एकता को पहचानने पर आधारित है। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और सभी को दिल से अपनाते हैं।

भारत ने सबको शरण दिया

मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों और पारसियों को ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना किसी उत्पीड़न के डर के पनाह मिली है। दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर जुल्म हुआ तो उसे भारत में ही जगह मिली।

नेपाल बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत, 4000 से ज्यादा लोग लापता

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नेपाल में बाढ़ से आई त्रासदी में जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। अब भी 3000 से ज्यादा लोग लापता हैं। नेपाल में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को अभियान में लगाया गया है।

903 पहुंचा बाढ़ में जान गंवाने वालों का आंकड़ा

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की ओर से जारी किए गए ताजा जानकारी के मुताबिक बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 4247 लोग लापता बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाया गया है। वहीं, घायलों की संख्या 267 है। वहीं, चीन ने अब तक 16 लोगों की मौत की ही पुष्टि की है। साथ ही 500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी भी दी है।

275 भारतीय लापता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद कम से कम 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 128 भारतीय मूल के लोग भी अब तक नहीं मिल पाए हैं। मंत्रालय ने बताया कि 403 भारतीय नागरिक चीन से नेपाल पहुंचे थे, जबकि करीब 500 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं। अब तक 149 लोगों को बचाया जा चुका है। भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए मदद बढ़ा दी है। काठमांडू में भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम काम कर रही है। टीम डीएनए नमूनों की जांच कर पीड़ितों की पहचान करने में मदद कर रही है।

त्रिशूली नदी के उफान में झूला पुल बहा

नेपाल के मध्य हिस्से में रविवार सुबह त्रिशूली नदी में फिर बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ में एक सस्पेंशन ब्रिज यानी झूला पुल बह गया। यह पुल गंडकी प्रांत के गोरखा जिले की गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी से जोड़ता था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ करीब तीन घंटे तक रही। इस दौरान सुबह करीब साढ़े 11 बजे पुल बह गया। बाढ़ में पुल बह जाने के बाद गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-7 और 8 के लोगों का पृथ्वी राजमार्ग से संपर्क टूट गया है।

भोटेकोशी नदी में अब भी बाढ़ का खतरा बना

नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही के बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। अधिकारियों ने प्रभावित जिलों के लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। रविवार सुबह ही लोगों के मोबाइल फोन पर बाढ़ की चेतावनी भेजी गई। इस बीच बचाव दल काठमांडू को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों से जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग को साफ करने में जुटे हैं।